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स्वास्थ्य सेवाओं पर चर्चा के लिए प्रियंका गांधी ने की जेपी नड्डा से मुलाकात

नई दिल्ली  कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं पर चर्चा की। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की और उनसे वायनाड में कुछ स्वास्थ्य परियोजनाओं में तेजी लाने का अनुरोध किया और उन्हें मनंतवडी में मेडिकल कॉलेज के अभाव में स्थानीय लोगों को हो रही गंभीर कठिनाइयों से अवगत कराया, जो अभी तक चालू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि हमने वायनाड की आदिवासी आबादी के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवा की आवश्यकता, उनकी विशिष्ट स्वास्थ्य समस्याओं, लंबित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) निधियों और क्षेत्र में जानवरों के हमलों के मामलों में एक विशेष ट्रॉमा सेंटर की आवश्यकता पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही, हम सभी ने केरल के लिए एक एम्स की लंबे समय से चली आ रही मांग को भी दोहराया। उन्होंने हमारी सभी मांगों को सुना और हमारे साथ खुलकर चर्चा की। मुझे पूरी उम्मीद है कि इन ज्वलंत मुद्दों पर उचित ध्यान दिया जाएगा। इससे पहले कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा था कि राहुल गांधी ने 'वोट चोरी' पर बड़ा खुलासा किया है। 'वोट चोरी' की जांच होनी चाहिए। चुनाव आयोग वोटर लिस्ट नहीं दे रहा है। इस मामले में जांच करने के बजाए, वह हलफनामा मांग रहा है। हम लगातार डेटा दिखा रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग मानने को तैयार ही नहीं है। उन्होंने आगे कहा था कि इंडिया गठबंधन के नेता आपस में चर्चा करेंगे और आगे का रास्ता तय करेंगे, लेकिन यह स्पष्ट है कि इस पूरे मामले में अनियमितताएं हैं, जिसे सभी ने देखा होगा। जिस तरह से भाजपा और अन्य नेता प्रतिक्रिया दे रहे हैं, उससे भी एक बात साफ है कि गड़बड़ी हुई है।

जयशंकर बोले, भारत और रूस का साझा मकसद है आपसी सहयोग बढ़ाना

मॉस्को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को रूस की राजधानी मॉस्को में अपने समकक्ष सर्गेई लावरोव से मुलाकात के दौरान कहा कि भारत और रूस का साझा लक्ष्य आपसी रिश्तों में 'अधिकतम पूरकता' हासिल करना है। उन्होंने भरोसा जताया कि उनकी चर्चाएं सार्थक रहीं और इस वर्ष के अंत में होने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शिखर सम्मेलन को अधिकतम परिणामोन्मुख बनाएंगी। जयशंकर ने कहा, "आज की बैठक हमें राजनीतिक रिश्तों पर चर्चा करने का अवसर देती है, साथ ही व्यापार, आर्थिक निवेश, रक्षा, विज्ञान-तकनीक और जन-से-जन संपर्क जैसे द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा का भी। पिछले वर्ष हमारे नेताओं की 22वीं वार्षिक शिखर सम्मेलन और फिर कजान में मुलाकात हुई थी। अब हम इस साल के अंत में होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन की तैयारी कर रहे हैं।" उन्होंने बताया कि बुधवार को रूस के उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ अंतर-सरकारी आयोग की बैठक बहुत उपयोगी रही और कई मुद्दों पर समाधान निकाले गए। उन्होंने कहा, "अब मैं चाहता हूं कि उन चर्चाओं को आगे बढ़ाया जाए ताकि वार्षिक शिखर सम्मेलन में अधिकतम परिणाम हासिल किए जा सकें।" विदेश मंत्री ने हाल ही में हुई अन्य उच्चस्तरीय बैठकों का भी उल्लेख किया, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, रेल और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा नीति आयोग प्रमुख सुमन बेरी की मॉस्को यात्राएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बदलते भू-राजनीतिक हालात और वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य के बीच भारत-रूस रिश्तों की निकटता और गहराई स्पष्ट झलकती है। जयशंकर ने लावरोव का गर्मजोशी से स्वागत किया और मेहमाननवाजी के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक सहित विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर उनकी नियमित मुलाकातों ने दोनों देशों के बीच सतत संपर्क बनाए रखने में मदद की है। बुधवार को जयशंकर ने मॉस्को में 26वें भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (आईआरआईजीसी-टीईसी) की सह-अध्यक्षता भी की। इसके बाद उन्होंने एक्स पर लिखा, "भारत-रूस बिजनेस फोरम में शामिल होकर खुशी हुई। हमारे आर्थिक संबंधों की गहराई पर विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं की राय और आकलन उपयोगी रहे।" उन्होंने कहा, "किसी भी स्थायी रणनीतिक साझेदारी में मजबूत और टिकाऊ आर्थिक आधार जरूरी है। इस संदर्भ में मैंने हमारे कारोबारियों से अधिक व्यापार करने, नए निवेश और संयुक्त उपक्रमों पर विचार करने तथा आर्थिक सहयोग के नए क्षेत्र तलाशने का आह्वान किया।"

मोदी सरकार का नया बिल, पीएम और सीएम को हटाने की योजना और केजरीवाल का असर

नई दिल्ली मोदी सरकार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को गंभीर आरोप के मद्देनजर 30 दिनों से ज्यादा की जेल के बाद पद से हटाने वाला बिल लेकर आई है, जिसपर हंगामा मच गया है। अमित शाह के बुधवार को बिल लोकसभा में पेश करते हुए कांग्रेस, सपा, एआईएमआईएम समेत पूरे विपक्ष ने इसका जमकर विरोध किया। विपक्ष का आरोप है कि इस बिल के कानून बनने के बाद केंद्र सरकार उन राज्यों को टारगेट करेगी, जहां विपक्षी दलों की सरकार है, जबकि कानून के हिसाब से जब तक कोई आरोपी दोषी न साबित हो जाए, तब तक उसे निर्दोष ही माना जाता है। फिलहाल, इस बिल को ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (जेपीसी) को भेज दिया गया है, जहां पक्ष-विपक्ष, दोनों के सांसद बिल के प्रावधानों पर विचार करेंगे, और फिर इसे अगले संसद सत्र में पास करवाने की कोशिश की जा सकती है। इस बिल के लाए जाने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सरकार ने इसे लाने का फैसला क्यों किया। इसके पीछे वजह दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और तमिलनाडु के पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी बताए जा रहे हैं। केजरीवाल और बालाजी से कैसा कनेक्शन? जहां अरविंद केजरीवाल दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री हैं तो वहीं, सेंथिल बालाजी तमिलनाडु सरकार के पूर्व मंत्री हैं। हालांकि, दोनों में एक खास कनेक्शन यह है कि दोनों पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और फिर जेल हुई, लेकिन काफी समय तक पद से इस्तीफा नहीं दिया। पिछले साल लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली के कथित शराब घोटाले में केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई और लंबे समय तक उन्होंने जेल से ही सरकार चलाई। एनडीटीवी ने सरकार के सूत्रों के हवाले से बताया, ''केजरीवाल के गिरफ्तारी के बाद भी इस्तीफा न देने की वहज से केंद्र सरकार ने एक महीने से ज्यादा जेल में बंद सीएम, मंत्रियों को हटाने के लिए कानून बनाने का फैसला किया।'' दिल्ली के कथित शराब घोटाले में आम आदमी पार्टी के कई मंत्रियों की गिरफ्तारी हुई थी। इसमें मार्च में केजरीवाल को अरेस्ट किया गया। माना जा रहा था कि वह गिरफ्तारी होने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने जेल से ही सरकार चलाई और जब वे जेल से बाहर आ गए, तब सितंबर में उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा देते हुए आतिशी को मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी। सरकार के सूत्रों ने बताया कि जब केजरीवाल ने जेल से ही सरकार चलाने का फैसला किया था और इस्तीफा देने से मना कर दिया था, तभी सरकार यह कानून लेकर आना चाहती थी, लेकिन उस समय इसे प्रतिशोध की राजनीति की तरह विपक्ष इसे पेश करता। इसी वजह से सरकार ने इंतजार किया और अब मॉनसून सत्र में यह बिल लेकर आई। बालाजी के मामले से भी ऐक्शन में आई सरकार वहीं, तमिलनाडु के पू्र्व मंत्री सेंथिल बालाजी को भी 2023 में भ्रष्टाचार के एक मामले में अरेस्ट किया गया था, लेकिन उसके बाद भी वह बिना विभाग के मंत्री बने रहै। इस पर मद्रास हाई कोर्ट तक को आपत्ति जतानी पड़ी, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। हालांकि, जमानत मिलते ही उन्हें फिर से मंत्री पद दे दिया गया। लेकिन एक सुनवाई के दौरान जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इस्तीफा देने या जमानत रद्द करने की धमकी दी, तब उन्होंने अपना पद छोड़ा। सरकारी सूत्र ने बताया कि इस मजाक को खत्म करने की जरूरत है। इसी के चलते सरकार अब पीएम-सीएम और मंत्रियों को हटाने वाला बिल लेकर आई है। हालांकि, चूंकि संविधान संशोधन के तहत दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है, जिसकी वजह से बिल के संसद में पारित होना मुश्किल लगता है। अगर सरकार को बिल पास करवाना है तो उसे विपक्ष को भी साथ लेना पड़ेगा। हालांकि, विपक्षी सांसदों के विरोध के स्तर को देखते हुए यह कहना कठिन है कि वे बिल के वर्तमान प्रावधानों पर सहमत होंगे।  

इंटरनेशनल कोर्ट के जजों पर अमेरिका का प्रतिबंध, नेतन्याहू से जुड़ा मामला

वॉशिंगटन/यरुशेलम  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के वैसे जजों पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने को मंजूरी दी थी और अरेस्ट वारंट जारी किया था। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा बुधवार को घोषणा किए गए इस कदम की इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि यरूशलेम को झूठे तरीके से बदनाम करने के ICC के अभियान पर अमेरिकी सरकार का यह दंडात्मक कदम सराहनीय है। नेतन्याहू ने इस कदम को इजरायल की रक्षा में एक निर्णायक कदम कहा है। नेतन्याहू के ऑफिस से जारी एत बयान में उन्होंने कहा, "मैं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीशों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के लिए बधाई देता हूँ।" उन्होंने आगे कहा, "यह इजरायल और इजरायली डेमोक्रेटिक फ्रंट को निशाना बनाकर किए जा रहे झूठे प्रचार अभियान के खिलाफ और सच्चाई व न्याय के पक्ष में एक कड़ा कदम है।" किन-किन पर लगे प्रतिबंध? ट्रंप प्रशासन ने जिन जजों पर ये प्रतिबंध लगाए हैं उनमें फ्रांस के न्यायाधीश निकोलस यान गुइलौ, फिजी के उप अभियोजक नजहत शमीम खान और सेनेगल के उप अभियोजक मामे मांडियाये नियांग के भी नाम शामिल हैं। इन लोगों ने गाजा में कथित युद्ध अपराधों के लिए इजरायली पीएम नेतन्याहू और उनके पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ पिछले साल गिरफ्तारी वारंट पर हस्ताक्षर किए थे। इनके अलावा कनाडा की न्यायाधीश किम्बर्ली प्रोस्ट को भी उस फैसले के लिए प्रतिबंधित किया गया है जिन्होंने आईसीसी को अफगानिस्तान में अमेरिकी कर्मियों की जाँच करने की अनुमति दी थी। नवंबर 2024 में नेतन्याहू के खिलाफ जारी हुए थे वारंट बता दें कि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के न्यायाधीशों के एक पैनल ने नवंबर 2024 में नेतन्याहू और योआव गैलेंट के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। न्यायाधीशों का मानना था कि उक्त दोनों ने गाजा में हमास के खिलाफ इजरायल के अभियान के दौरान मानवीय सहायता रोककर और जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाकर युद्ध अपराध किए हैं। हालांकि, इजरायल के अधिकारी इस तरह के आरोपों को खारिज करते हैं। ICC ने प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की इसके जवाब में आईसीसी ने बुधवार को अमेरिकी प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की और इसे सभी 125 सदस्य देशों के अधिदेश के तहत संचालित एक निष्पक्ष न्यायिक संस्था की स्वतंत्रता पर एक ज़बरदस्त हमला बताया है। एक बयान में, ICC ने कहा कि ये प्रतिबंध "अदालत के सदस्य देशों, नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और सबसे बढ़कर, दुनिया भर के लाखों निर्दोष पीड़ितों का अपमान हैं।" अदालत ने आगे कहा, "आईसीसी किसी भी दबाव या धमकी की परवाह किए बिना, अपने कानूनी ढाँचे के अनुसार अपने आदेशों का सख्ती से पालन करना जारी रखेगा।" फरवरी और जून में भी लगाए थे प्रतिबंध इससे पहले जून में भी ट्रंप प्रशासन ने आईसीसी के दो अन्य जजों को प्रतिबंधित कर दिया था। उससे पहले फरवरी में ICC के मुख्य अभियोजक करीम खान पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। इन प्रतिबंधों के बाद आईसीसी के कर्मचारियों के सामने कई तरह की अड़चनें आ रही हैं। प्रतिबंधों के कारण उनकी अमेरिका में एंट्री बैन हो गई है। इसके अलावा वे अमेरिकी संपत्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। बैंकों से भी लेनदेन रुक जाएगा।

PM मोदी ने ट्रंप से मुलाकात के बाद मैक्रों से की फोन चर्चा, रूस-यूक्रेन मुद्दे पर फोकस

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से फोन पर बातचीत की। बातचीत की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स हैंडल पर लिखा,"मेरे मित्र राष्ट्रपति मैक्रों के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई। यूक्रेन और पश्चिम एशिया में संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रयासों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता दोहराई।" बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने व्लादिमीर पुतिन, वोलोदिमीर जेलेंस्की और यूरोपीय यूनियन के नेताओं से बातचीत की। अलास्का में पुतिन से मुलाकात के बाद ट्रंप ने जेलेंस्की से बात की। ट्रंप ने उम्मीद जताया है कि जल्द ही तीनों नेता एक साथ बैठकर युद्ध की समाप्ति पर फैसला लेंगे।  

अमेरिका की नीति में अंतर, भारत को टारगेट, चीन और रूस को बड़ा लाभ

चीन  चीन की पांचों उंगलियां इस वक्त घी में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने जहां दुनिया भर में उथल-पुथल मचाई है, वहीं दूसरी तरफ चीन को अब भी छूट मिली हुई है। बीते अप्रैल महीने में चीन के साथ शुरू हुए मिनी ट्रेड वॉर के बाद अमेरिका पीछे हटता हुआ दिखा और फिलहाल उसने चीन पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने के डेडलाइन को और बढ़ा दिया है। इस बीच ट्रंप का फोकस फिलहाल भारत पर है। बीते कुछ सप्ताह में ट्रंप ने रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत को लगातार टारगेट किया है और कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान भी किया है। ऐसे में फोकस शिफ्ट होता देख चीन रूसी तेलों का आयात बढ़ाने में जुट गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन इन दिनों पारंपरिक रूप से भारत आने वाले अतिरिक्त शिपमेंट को सुरक्षित करने के लिए तेजी से काम कर रहा है। गौरतलब है कि यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंध के बीच भारत और चीन रूसी तेल के सबसे बड़े खरीददार के रूप में उभरे थे, जिन्हें रूस डिस्काउंट पर तेल बेच रहा है। अब भारत को अमेरिका से मिल रहे झटकों के बाद चीन इसे अपने लिए एक बड़े अवसर के रूप में देख रहा है। चीन ने बढ़ाया आयात बीते दिनों कुछ रिपोर्ट्स में यह खबरें सामने आईं हैं कि भारत अमेरिकी प्रतिबंधों को देखते हुए रूसी कच्चे तेल के आयात में कमी कर रहा है। रॉयटर्स ने बीते दिनों विश्लेषकों के हवाले से बताया था कि भारत ने रूस से अपने कच्चे तेल के आयात में प्रतिदिन 600,000 से 700,000 बैरल तक की कमी की है। इस बीच चीन के रिफाइनर एक्स्ट्रा रूसी तेल खरीदने के लिए आगे आए हैं। फर्स्टपोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन की सरकारी तेल कंपनियों और प्रमुख निजी रिफाइनरों ने अगस्त में ही अक्टूबर और नवंबर में डिलीवरी के लिए रूसी कच्चे तेल के कम से कम 15 कार्गो सुरक्षित कर लिए हैं। हर शिपमेंट में 700,000 से 10 लाख बैरल होंगे जिसे चीन की आपूर्ति में एक बड़ी बढ़ोतरी बताया जा रहा है। मौके का फायदा इस बीच तेल की कीमतें कम होने से भी चीन को बेहद फायदा हो रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक रूसी ग्रेड के तेल अन्य देशों की तुलना में कम से कम 3 डॉलर प्रति बैरल सस्ते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ट्रंप से मिले इस डेडलाइन का फायदा उठाकर चीनी रिफाइनर जल्द से जल्द ज्यादा से ज्यादा शिपमेंट सुरक्षित कर रहे हैं। भारत पर टैरिफ बढ़ाने का ऐलान बीते कुछ सप्ताह में अमेरिका ने लगातार इस बात को दोहराया है कि भारत रूस से बहुत अधिक व्यापार खरीदता है और यूक्रेन जंग में रूस की आर्थिक मदद कर रहा है। ट्रंप ने इस तरह के आरोप लगाते हुए भारत पर पहले 25 फीसदी और फिर बाद में अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। हालांकि भारत ने यह स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। भारत ने अमेरिकी टैरिफ को बेतुका और अनुचित भी बताया है। भारत नहीं करेगा हितों से समझौता बता दें कि भारत अपनी जरूरतों का 75 से 80 फीसदी क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है। बीते सालों में रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति कई गुना बढ़ गई है और फिलहाल भारत लगभग 38 फीसदी तेल रूस से खरीदता है। भारत ने अमेरिका को स्पष्ट रूप से कहा है कि अपनी अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा और वह वहां से तेल खरीदेगा जहां उसे अच्छा सौदा मिलेगा। रूसी तेल से कच्चे तेल का आयात कम होने की खबरों के बीच शीर्ष अधिकारियों ने कहा है कि खरीददारी का फैसला पूरी तरह आर्थिक और वाणिज्यिक आधार पर ही किया जाएगा।  

इमरान खान को मिली सुप्रीम कोर्ट से जमानत, क्या जल्द होंगे जेल से रिहा?

इस्लामाबाद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए अच्छी खबर है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। 2023 में सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों से जुड़े कई मामलों में उन्हें राहत मिली है। अदालत के रिकॉर्ड और उनके वकील ने यह जानकारी साझा की। मुख्य न्यायाधीश याह्या अफरीदी की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने लाहौर हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें खान की 8 मामलों में जमानत याचिका खारिज की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की रिहाई की शर्त सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की रिहाई का आदेश दिया, लेकिन शर्त रखी कि उन्हें किसी अन्य मामले में वांछित नहीं होना चाहिए। यही कारण है कि इमरान खान अभी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे, क्योंकि वे भ्रष्टाचार के एक मामले में पहले ही दोषी ठहराए जा चुके हैं। क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान पर भ्रष्टाचार से लेकर आतंकवाद तक के कई मुकदमे दर्ज हैं। हालांकि, वे इन सभी मामलों को झूठा और राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बताते हैं। किस मामले में मिली जमानत? मई 2023 में इमरान खान को एक भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिनमें रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय भी शामिल था। इस हिंसा के बाद इमरान खान और उनकी पार्टी ( पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ) के कई नेताओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए। उनकी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों को भी हाल ही में ऐसे ही मामलों में दोषी ठहराया गया है। क्या जेल से बाहर आ पाएंगे इमरान खान? सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत के बावजूद इमरान खान की कानूनी मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। उन्हें अन्य मामलों में अभी जेल में रहना होगा। इमरान खान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। पार्टी ने एक्स पर एक पोस्ट में इसे 'इमरान खान की जीत' करार दिया।  

भाजपा की राह तय करेगा CP राधाकृष्णन, RSS को भेजे गए दो महत्वपूर्ण संदेश

नई दिल्ली  सीपी राधाकृष्णन को भाजपा ने उपराष्ट्रपति पद का कैंडिडेट बनाया है, जिस पर एनडीए के सभी दलों ने सहमति जताई है। विपक्षी अलायंस ने भी पूर्व जस्टिस सुदर्शन रेड्डी को चुनाव में उतार दिया है। अब 9 सितंबर का इंतजार है, लेकिन नतीजा पहले से ही तय माना जा रहा है कि सीपी राधाकृष्णन को चुनाव जीतने में ज्यादा कठिनाई नहीं होगी। भाजपा के सूत्र मानते हैं कि यह मसला सिर्फ उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत का नहीं है बल्कि समीकरण साधने का भी है। इसीलिए सीपी राधाकृष्णन को भाजपा ने कैंडिडेट बनाया है। उनके आने से एक साथ तीन समीकरण सधेंगे, जो हैं- आरएसएस, दक्षिण और विवादों से मुक्ति। दरअसल भाजपा ने पहले सत्यपाल मलिक और फिर जगदीप धनखड़ को मौके दिए। समाजवादी बैकग्राउंड से आने वाले दोनों नेता कई मसलों पर मुखर रहे और शुरुआती दिनों में भाजपा के कोर मुद्दों पर आक्रामक होकर बात की। उनके ये तेवर भाजपा समर्थकों को खूब जमे भी, लेकिन यही रवैया बाद के दिनों में उनका सरकार के खिलाफ दिखने लगा। यहीं से परेशानी शुरू होने लगी। सत्यपाल मलिक ने तो सीधे पीएम मोदी को ही टारगेट करना शुरू कर दिया था। इसके अलावा जगदीप धनखड़ ने भी किसान आंदोलन और फिर अदालत को लेकर जैसा रुख अपनाया, उससे सरकार असहज होने लगी। उपराष्ट्रपति पद की गरिमा के भी इसे विपरीत माना गया। ऐसे में भाजपा ने बेहद लो-प्रोफाइल रहने वाले सीपी राधाकृष्णन पर दांव लगाया है। उनकी इसी खासियत का इशारों और मजेदार तरीके से पीएम मोदी ने जिक्र किया और कहा कि वह खेल प्रेमी हैं, लेकिन राजनीति में खेल नहीं करते। साफ है कि अब भाजपा हाईकमान ऐसा उपराष्ट्रपति या राज्यपाल नहीं चाहता, जो चर्चाओं में रहे और सरकार को असहज करे। इस लाइन में सीपी फिट बैठते हैं। इसके अलावा वह पुराने संघी हैं। 16 साल की उम्र में आरएसएस के स्वयंसवेक बने थे। उन्हें मौका देकर भाजपा ने अपने मातृ संगठन आरएसएस को भी संकेत दिया है कि उनके विचार और लोगों का स्वागत है और उन्हें तवज्जो दी जा रही है। सत्यपाल मलिक और जगदीप धनखड़ के रुख पर संघ समर्थकों का यही कहना था कि यह बाहर से लाए गए लोग थे और उसके चलते ही नुकसान हो रहा है। इस तरह संघ को महत्व देते हुए सीपीआर को चुना गया है। बता दें कि यह लगातार दूसरा संकेत आरएसएस को दिया गया है। इससे पहले 15 अगस्त को लाल किले से पहली बार पीएम मोदी ने आरएसएस की तारीफ की थी और उसके 100 साल के सफर को देश और समाज को समर्पित बताया था। अब तीसरे समीकरण की बात करते हैं। अगले साल तमिलनाडु में चुनाव है और सीपीआर को मौका दिया गया है, जो वहीं से आते हैं। वह कोयंबटूर से दो बार सांसद रहे हैं, जो तमिलनाडु में भाजपा का एकमात्र गढ़ कहा जाता है।  

कांग्रेस के कई युवा नेता प्रतिभाशाली, पीएम मोदी ने एनडीए नेताओं पर भी किया कमेंट

नई दिल्ली  पीएम मोदी ने चाय मीटिंग में एनडीए नेताओं के सामने कांग्रेस के कई युवा नेताओं की तारीफ की और कहा कि विपक्ष खासकर कांग्रेस में कई युवा नेता काफी टैलेंटेड हैं, लेकिन ‘परिवार की असुरक्षा’ की वजह से उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता। इंडिया टुडे के सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी ने यह भी कहा कि इस तरह के युवा नेताओं की मौजूदगी राहुल गांधी गांधी को असुरक्षित और घबराहट महसूस करवा रही होगी। इस बैठक में विपक्ष का कोई भी सांसद शामिल नहीं हुआ और सिर्फ एनडीए के ही सदस्य मौजूद थे। पीएम मोदी ने आज खत्म हुए संसद के मॉनसून सत्र को भी अच्छा बताया और कहा कि इसमें कई महत्वपूर्ण बिल पास हुए। खासतौर पर उन्होंने ऑनलाइन गेम्स बिल के पास होने की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इसके पास होने से दूरगामी असर पड़ेगा और यह सीधे जनता को प्रभावित करेगा। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पीएम मोदी ने प्रमुख बिलों पर चर्चा से दूर रहने के लिए विपक्ष की आलोचना भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष सिर्फ व्यवधान पैदा करने में ही लगा रहा। बता दें कि 20 अगस्त को संसद में प्रमोशन एंड रेग्युलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 पास हो गया, जिसमें ऑनलाइन मनी गेमिंग कंपनियों और उनके प्रमोटर्स के खिलाफ कड़े प्रावधान किए गए हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि मॉनसून सत्र में 14 विधेयक पुर:स्थापित किए गए तथा कुल 12 विधेयक पारित किए गए। बिरला ने लोकसभा की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले गुरुवार को अपने वक्तव्य में कहा कि इस सत्र में 14 सरकारी विधेयक पुर:स्थापित किए गए तथा कुल 12 विधेयक पारित हुए। गत 28 और 29 जुलाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विशेष चर्चा हुई, जिसका समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तर के साथ हुआ। 18 अगस्त को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों पर विशेष चर्चा आरंभ की गई। उन्होंने कहा कि इस सत्र में कार्यसूची में 419 तारांकित प्रश्न शामिल किए गए थे, किंतु लगातार नियोजित व्यवधान के कारण केवल 55 प्रश्न ही मौखिक उत्तर हेतु लिए जा सके। उन्होंने कहा, ''हम सभी ने सत्र के प्रारंभ में तय किया था कि हम इस सत्र में 120 घंटे चर्चा और संवाद करेंगे। कार्य मंत्रणा समिति में भी इस पर सहमति थी लेकिन लगातार गतिरोध और नियोजित व्यवधान के कारण हम मुश्किल से 37 घंटे ही इस सत्र में काम कर पाए।''  

NIA की बड़ी कार्रवाई, रामलिंगम हत्याकांड में PFI से संबंध रखने वाला आरोपी गिरफ्तार

तमिलनाडु राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 2019 में हुए रामलिंगम हत्या कांड मामले में तमिलनाडु में नौ जगहों पर छापेमारी की है। डिंडीगुल और तेनकासी जिलों की इन जगहों पर एनआईए की छापेमारी का मकसद फरार अपराधियों का पता लगाना था। इसी सिलसिले में एनआईए ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया आतंकी संगठन के एक सदस्य को भी गिरफ्तार किया है। बुधवार सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में सबसे पहले एसडीपीआई पदाधिकारी शेख अब्दुल्ला के बेगमपुर स्थित आवास, एक और सदस्य यूसुफ के ओड्डंचत्रम स्थित घर और अमर के बटलागुंडु के ठिकाने पर छापे मारे गए इसी तरह तेनकासी में भी छापेमारी की गई। एजेंसी ने कोडईकनाल स्थित अंबुर बिरयानी होटल्स के मालिक इम्थातुल्लाह को 2021 में फरार अपराधियों को शरण देने के आरोप में गिरफ्तार किया है। डिंडीगुल और तेनकासी में हुई छापेमारी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं।रिपोर्ट्स के मुताबिक बिरयानी होटल्स के मालिक इम्थातुल्लाह ने तीन आरोपियों को पनाह दी थी। इनमें से दो आरोपी अब्दुल मजीद और शाहुल हमीद को एजेंसी ने जनवरी 2025 में ही गिरफ्तार कर लिया था, जबकि एक अन्य अपराधी मोहम्मद अली जिन्ना अभी भी फरार है। एजेंसी ने जिन्ना और दो अन्य फरार पीओ बुरहानुद्दीन और नफील हसन के बारे में जानकारी देने पर 5-5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। ये सभी तंजावुर जिले के हैं और पूर्व में पीएफआई के पदाधिकारी थे। आपको बता दें कुंभकोणम निवासी पीएमके के पूर्व पदाधिकारी रामलिंगम (48) की हत्या 2019 में तंजावुर इलाके में कर दी गई थी। कथित तौर रामलिंगम ने मुस्लिम संगठनों के धार्मिक प्रचार का विरोध किया था। इसी के चलते एक गिरोह ने इनकी हत्या कर दी थी। अगस्त 2019 में एनआईए ने यह मामला तमिलनाडु पुलिस से अपने पास ले लिया। एजेंसी ने 2019 में चेन्नई की पूनमल्ली स्थित अपनी विशेष अदालत में कुल 18 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। इनमें से कुल 6 फरार बताए गए थे। इस मामले में अभी तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।