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भारतीय वायुसेना में 97 Tejas MK-1A, जानें कितना बड़ा होगा जेट बेड़ा और भविष्य की रणनीति

नई दिल्ली भारत ने हाल ही में 97 LCA (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) तेजस मार्क 1A फाइटर जेट्स की खरीद को मंजूरी दी है, जिसकी कीमत करीब 62,000 करोड़ रुपये है. यह डील मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. इससे भारतीय वायुसेना (IAF) का फाइटर जेट बेड़ा न केवल बड़ा होगा, बल्कि आधुनिक और स्वदेशी तकनीक से लैस भी होगा.  वर्तमान में भारतीय वायुसेना का बेड़ा भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में 31 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है. प्रत्येक स्क्वाड्रन में औसतन 18 जेट्स होते हैं, यानी कुल मिलाकर IAF के पास करीब 558 फाइटर जेट्स हैं. इनमें शामिल हैं…     सुखोई Su-30 MKI: 265 जेट्स (भारत में निर्मित, रूस से लाइसेंस प्राप्त)     मिग-21: 36 जेट्स (2025 में रिटायर होने वाले)     मिग-29: 65 जेट्स     मिराज 2000: 44 जेट्स     राफेल: 36 जेट्स     जगुआर: 130 जेट्स     तेजस मार्क 1: 31 जेट्स (2 स्क्वाड्रन) हालांकि, पुराने मिग-21, मिग-23 और मिग-27 के रिटायर होने से स्क्वाड्रन की संख्या घटी है. सितंबर 2025 में आखिरी दो मिग-21 स्क्वाड्रन (नंबर 3 और 23) रिटायर हो जाएंगे, जिससे स्क्वाड्रन की संख्या 29 तक कम हो जाएगी. 97 LCA मार्क 1A का प्रभाव 97 LCA मार्क 1A जेट्स की खरीद के साथ, IAF का तेजस बेड़ा काफी मजबूत होगा. वर्तमान में IAF के पास…     40 तेजस मार्क 1 जेट्स हैं (2 स्क्वाड्रन: नंबर 45 ‘फ्लाइंग डैगर्स’ और नंबर 18 ‘फ्लाइंग बुलेट्स’)     83 LCA मार्क 1A का ऑर्डर पहले से दिया जा चुका है (2021 में, 48000 करोड़ रुपये की डील). नई डील के साथ, 97 और LCA मार्क 1A जेट्स जुड़ने से कुल 180 LCA मार्क 1A और 40 मार्क 1 जेट्स होंगे, यानी 220 तेजस जेट्स. यह IAF के बेड़े का एक बड़ा हिस्सा होगा. ये जेट्स पुराने मिग-21 की जगह लेंगे और स्क्वाड्रन की कमी को पूरा करने में मदद करेंगे. LCA मार्क 1A में 65% से अधिक स्वदेशी सामग्री है. यह उन्नत AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सुइट और अस्त्र मिसाइल जैसी तकनीकों से लैस है. यह 4.5 पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जो हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमले करने में सक्षम है.  IAF का बेड़ा कितना बड़ा होगा? 97 LCA मार्क 1A के शामिल होने के बाद, IAF का बेड़ा 220 तेजस (मार्क 1 और मार्क 1A) के साथ-साथ अन्य जेट्स (Su-30 MKI, राफेल, मिग-29, मिराज, और जगुआर) को मिलाकर करीब 600-620 फाइटर जेट्स का होगा. यह 33-34 स्क्वाड्रन के बराबर होगा. हालांकि, यह अभी भी 42 स्क्वाड्रन के लक्ष्य से कम है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने 2025 के अंत तक 12 LCA मार्क 1A जेट्स और 2029 तक 83 जेट्स की पूरी डिलीवरी का वादा किया है. 97 नए जेट्स की डिलीवरी 10 साल में पूरी होगी, यानी 2035 तक. भविष्य की योजनाएं: 60 स्क्वाड्रन का लक्ष्य IAF ने 2047 तक अपने बेड़े को 60 स्क्वाड्रन (लगभग 1,080-1,200 जेट्स) तक बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. यह लक्ष्य भारत के दो मोर्चों—पाकिस्तान और चीन—से बढ़ते खतरों को देखते हुए जरूरी है. चीन के पास 1,900 से अधिक फाइटर जेट्स हैं, जिनमें पांचवीं पीढ़ी के J-20 शामिल हैं, जबकि पाकिस्तान अपने JF-17 बेड़े को अपग्रेड कर रहा है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए IAF की योजनाएं हैं… LCA मार्क 2: यह तेजस का उन्नत संस्करण है, जो GE F414 इंजन से लैस होगा और 6,500 किलो पेलोड ले जा सकता है. IAF ने 120-200 LCA मार्क 2 जेट्स का ऑर्डर देने की योजना बनाई है. इसका पहला प्रोटोटाइप 2025 के अंत या 2026 की शुरुआत में उड़ेगा. 2029 से बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होगा. यह मिग-29, मिराज 2000 और जगुआर की जगह लेगा. एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA): यह भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर होगा, जिसे 2035 तक शामिल करने की योजना है. IAF 200 AMCA जेट्स (मार्क 1 और मार्क 2) खरीदना चाहता है, जो हवा में श्रेष्ठता और गहरे हमलों के लिए होंगे. इसमें स्टील्थ, सुपरक्रूज और उन्नत सेंसर होंगे. मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA): IAF 114 नए फाइटर जेट्स खरीदने की योजना बना रहा है, जिसमें राफेल, F-15EX, F/A-18 सुपर हॉर्नेट, टाइफून और Su-35 जैसे विकल्प हैं. यह डील स्क्वाड्रन की कमी को जल्दी पूरा करने के लिए है. Su-30 MKI अपग्रेड: IAF अपने 260 Su-30 MKI जेट्स को अपग्रेड करेगा, जिसमें स्वदेशी उत्तम AESA रडार, डिजिटल कॉकपिट और नया मिशन कंप्यूटर शामिल होगा. इसमें 78% स्वदेशी सामग्री होगी. मानवरहित विमान (UAV): IAF 2030 तक 30-50 ड्रोन (छोटे, मध्यम, और बड़े) खरीदेगा, जैसे DRDO घातक और ALFA-S स्वार्म ड्रोन, जो नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध के लिए होंगे. चुनौतियां और समाधान उत्पादन में देरी: तेजस मार्क 1A की डिलीवरी में देरी हुई, क्योंकि GE F404 इंजन की आपूर्ति में रुकावट आई. मार्च 2025 तक पहला जेट मिलने की उम्मीद है. HAL 2025 में 12 जेट्स देगा. स्वदेशी इंजन: तेजस अभी अमेरिकी GE F404 इंजन पर निर्भर है. भारत का कावेरी इंजन प्रोजेक्ट चल रहा है, लेकिन अभी परिपक्व नहीं है. HAL और GE अब F414 इंजन का भारत में सह-उत्पादन करेंगे. निजी क्षेत्र की भागीदारी: सरकार ने एक समिति बनाई है, जो निजी क्षेत्र को तेजस और AMCA के उत्पादन में शामिल करने की योजना बना रही है. इससे उत्पादन तेज होगा और लागत कम होगी. मेक इन इंडिया का प्रभाव 97 LCA मार्क 1A की डील मेक इन इंडिया को बढ़ावा देगी. इन जेट्स में 65% स्वदेशी सामग्री है. मार्क 2 में यह 70% तक होगी. यह छोटे और मध्यम उद्यमों को रोजगार देगा और भारत को एयरोस्पेस में आत्मनिर्भर बनाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेजस के ट्रेनर वेरिएंट में उड़ान भरी और इसकी तारीफ की, जिससे स्वदेशी तकनीक में भरोसा बढ़ा.  

सरकार के वकील से CJI ने पूछा- क्या न्यायपालिका सिर्फ कमजोर दर्शक बनी रहे?

नई दिल्ली राज्यपाल और राष्ट्रपति को विधानसभा से पारित बिलों को मंजूरी देने या फिर लौटाने के लिए 90 दिनों की टाइमलाइन तय करने पर सुप्रीम कोर्ट में दिलचस्प बहस जारी है। राष्ट्रपति की ओर से इस केस में रेफरेंस दाखिल किया गया है और अब अदालत में इस पर बहस चल रही है। गुरुवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए आर्टिकल 200 का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संविधान के इस प्रावधान के अनुसार राज्यपाल की शक्ति व्यापक है और उसके दायरे में यह आता है कि वह अपने विवेक से किसी बिल पर फैसला लें। संवैधानिक और राजनीतिक शिष्टता का पालन करते हुए राज्यपाल फैसला लेते हैं और उसके लिए कोई समयसीमा तय करना गलत है। सरकार का पक्ष रखते हुए तुषार मेहता ने कहा कि राज्यपाल और राष्ट्रपति एक संवैधानिक संस्था हैं। इसी तरह अदालत भी संवैधानिक संस्था है। सवाल है कि आखिर एक संवैधानिक संस्था अपने बराबर की दूसरी संस्था के लिए टाइमलाइन कैसे तय कर सकती है। इस पर जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि ऐसी स्थिति हो गई है कि दोनों अपनी-अपनी तरफ से अतिवादी रुख अपना रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि एक ने अपना निर्णय ले लिया है। लेकिन ऐसा नहीं कहा जा सकता कि किसी का ही पक्ष सही है। इस दौरान चीफ जस्टिस बीआर गवई ने भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि यदि कोई संवैधानिक संस्था गलती करती है तो समाधान की जरूरत है। यह अदालत संविधान का ही एक अंग है। यदि एक संवैधानिक संस्था बिना किसी वैध कारण के अपना काम नहीं कर रही है तो फिर क्या अदालत को यह कहना चाहिए कि हम शक्तिहीन हैं और हमारे हाथ बंधे हैं। हमें कुछ तो निर्णय करना होगा। वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के अधिकार क्षेत्र पर ही सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले को कोर्ट में ले जाना और उसका फैसला करना ठीक नहीं है। तुषार मेहता ने कहा कि मान लीजिए कि गवर्नर किसी बिल पर फैसला नहीं ले रहे हैं तो उसके राजनीतिक समाधान हैं। एक प्रतिनिधिमंडल ऐसे मामलों में पीएम या राष्ट्रपति के पास जा सकता है। इस तरह मसला हल हो सकता है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि अदालत की ओर से टाइमलाइन तय की जाए। ऐसे मामले कई राज्यों में सामने आए हैं। राजनीतिक परिपक्वता से ही ऐसे मसले हल हुए हैं। इस पर जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि ठीक है, हम टाइमलाइन तय नहीं करेंगे। लेकिन एक प्रॉसेस तो होना चाहिए।  

लोगों के दिलों पर राज करने वाले जज फ्रैंक कैप्रियो अब नहीं रहे

न्यूयॉर्क  अमेरिका के प्रसिद्ध जज फ्रैंक कैप्रियो का 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह अग्नाशय के कैंसर से जूझ रहे थे। कैप्रियो को उनके दयालु स्वभाव और करुणामय फैसलों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। वे 'कैच इन प्रोविडेंस' रियलिटी शो के माध्यम से विश्व भर में लोकप्रिय हुए, जिसमें उनके ट्रैफिक और छोटे-मोटे मामलों की सुनवाई के अनोखे अंदाज को दिखाया गया। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर बेहद वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने एक बुजुर्ग व्यक्ति का ओवरस्पीडिंग का चालान माफ कर दिया था, क्योंकि यह पहली बार था जब उस व्यक्ति ने तय सीमा से अधिक गति से गाड़ी चलाई थी। दुखद खबर की घोषणा बुधवार देर दोपहर उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक बयान जारी किया गया, जिसमें प्रशंसकों को बताया गया कि प्रिय न्यायाधीश कैप्रियो का अग्नाशय के कैंसर से लंबी और साहसी लड़ाई के बाद 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बयान में कहा गया कि अपनी करुणा, विनम्रता और लोगों की भलाई में अटूट विश्वास के कारण जज कैप्रियो ने अदालत के अंदर और बाहर अपने काम से लाखों लोगों के जीवन को छुआ। उनकी गर्मजोशी, हास्य और दयालुता ने उन्हें जानने वाले सभी लोगों पर एक अमिट छाप छोड़ी। कैंसर के खिलाफ लड़ाई पर खुलकर बात कैप्रियो ने अपनी कैंसर की लड़ाई के बारे में खुलकर बात की थी। 1 जून को उन्होंने टिकटॉक पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय कैंसर सर्वाइवर्स डे पर इस बीमारी को मात देने वालों का जश्न मनाया। उन्होंने कहा था कि मैं हर उस व्यक्ति का सम्मान करना चाहता हूं जिसने इस लड़ाई का सामना किया और जीत हासिल की। मैं खुद इस समय इसी लड़ाई में हूं। मैं डेढ़ साल से अग्नाशय के कैंसर से जूझ रहा हूं, और मुझे उम्मीद है कि ईश्वर की कृपा से एक दिन मैं भी इस बीमारी से उबर जाऊंगा। निधन से पहले इंस्टाग्राम पर अंतिम पोस्ट कैप्रियो के निधन की घोषणा से कुछ घंटे पहले, उनके इंस्टाग्राम पर अस्पताल के बिस्तर से उनकी एक तस्वीर पोस्ट की गई थी। तस्वीर के साथ प्रशंसकों के लिए एक संदेश भी था, जिसमें उन्होंने उनकी प्रार्थनाओं, प्यार और समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। बता दें कि कैप्रियो के इंस्टाग्राम पर 3.3 मिलियन और टिकटॉक पर 1.6 मिलियन फॉलोअर्स थे। अपने सोशल मीडिया बायो में उन्होंने लिखा था कि उन्हें 'दुनिया के सबसे अच्छे जज' के रूप में जाना जाता है।  

भारत में छिपी FBI की मोस्ट वॉन्टेड सिंडी सिंह, हुई गिरफ्तारी

नई दिल्ली FBI यानी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन को बड़ी सफलता मिली है। ब्यूरो ने टॉप 10 भगोड़ों की सूची में शामिल सिंडी रॉड्रिगेज सिंह को भारत से गिरफ्तार कर लिया गया है। इस सफलता पर FBI प्रमुख काश पटेल ने भारतीय अधिकारियों की भी तारीफ की है। सिंह पर अपने 6 साल के बेटे की हत्या के आरोप हैं। मामला 2023 का है। खबर है कि सिंह अमेरिका में कानूनी मामले से बचने के लिए भागकर अमेरिका आ गई थी। सिंह के नाम पर मुकदमे से बचने के लिए भागने को लेकर एक FBI वॉरंट और 10 साल से कम उम्र के बच्चे की हत्या के मामले में टेक्सास राज्य का एक वॉरंट है। यह मामला 20 मार्च 2023 में सामने आया था। उस दौरान टेक्सास डिपार्टमेंट ऑफ फैमिली एंड प्रोटेक्टिव सर्विसेज की तरफ से एक टीम सिंह के बेटे की जानकारी लेने गई थी। खास बात है कि बच्चा अक्तूबर 2022 से नहीं देखा गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिकारियों ने बताया था कि बच्चे को कई स्वास्थ्य संबंधी और शारीरिक परेशानियां हैं। इनमें डेवलपमेंटल डिसऑर्डर, सोशल डिसऑर्डर, पल्मोनरी इडेमा, बोन डेंसिटी और एस्टोपिया जैसी कई परेशानियां शामिल हैं। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि सिंह गुमराह कर रही है और कह रही है कि उनका बेटा नवंबर 2022 से ही पिता के साथ मैक्सिको में है। इसके दो दिनों के बाद 22 मार्च 2023 में सिंह, उसका पति और 6 बच्चों ने भारत के लिए उड़ान भरी। जांचकर्ताओं को पता चला कि गुमशुदा बच्चा फ्लाइट में नहीं हैं। इसके बाद जुलाई में सिंह को भगोड़ों की सूची में डाला गया। ऐसे चढ़ी हत्थे 2 अक्टूबर 2024 को सिंह के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी हुआ था और सभी सदस्य देशों को भेजा गया था। उस दौरान भारत को प्रत्यर्पण से जुड़े दस्तावेज भी दिए गए थे, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी संभव हो सकी। पटेल ने कहा, '…टेक्सास, जहां से इस केस की शुरुआत हुई, वहां के स्थानीय साझेदारों, न्याय विभाग के साथ भारत में हमारे साझेदारों का धन्यवाद।'

PM-CM अयोग्यता बिल: दो बाधाओं पर NDA की जीत, अब तीसरी चुनौती करेगी मुश्किल

नई दिल्ली लोकसभा ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी भी मंत्री की गंभीर अपराध में गिरफ्तारी और 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रखे जाने पर उन्हें पद से हटाने के प्रावधान वाले 130वें संविधान संशोधन विधेयक तथा दो अन्य विधेयकों को विपक्ष के भारी विरोध और हंगामे के बीच बुधवार को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया है। ऐसी चर्चा है कि संसद के शीतकालीन सत्र से पहले JPC इस बिल पर अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंप देगी। उसके बाद इस बिल को पारित कराने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। चूंकि यह संविधान संशोधन बिल है, इसलिए इसे पारित कराने की प्रक्रिया में तीन बड़ी अचड़नें हैं। नियमानुसार इसे संसद के दोनों सदनों से विशेष बहुमत के साथ पारित कराया जाना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन बिल को संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में दो स्तरों पर बहुमत चाहिए। पहला, कुल सदस्यों का बहुमत और दूसरा, उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत। तीसरी अड़चन आधे से अधिक राज्यों की विधानसभाओं से भी इस बिल को पारित कराना होगा। संसद में दोनों सदनों में NDA की ताकत क्या? अब बात संसद में एनडीए के संख्या बल की और इस संशोधन विधेयक को पारित कराने में आने वाली अड़चन की। चूंकि, संसद में दो स्तर पर बहुमत चाहिए जिसमें पहला सदन की कुल सदस्य संख्या का 50% से अधिक मत जरूरी है, तो इस अड़चन को सरकार आसानी से पार कर लेगी क्योंकि लोकसभा में 542 सदस्य हैं। ऐसे में 50 फीसदी मत यानी बिल के पक्ष में 272 सांसदों का वोट चाहिए, जबकि मौजूदा समय में उसके पास लोकसभा में 293 सांसद हैं। इसी तरह राज्यसभा में अभी कुल सदस्यों की संख्या 239 है। साधारण बहुमत के लिए 120 सांसदों के मत की जरूरत होगी, जो आसानी से पूरी हो जाएगी क्योंकि राज्यसभा में NDA के अभी 132 सांसद हैं। दो तिहाई बहुमत में बड़ी अड़चन अब बात दो तिहाई बहुमत की, जो दूसरी और सबसे अहम अड़चन है। लोकसभा में दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा 362 है, जबकि राज्यसभा में यह आंकड़ा 160 है। चूंकि लोकसभा में NDA के सांसदों की संख्या सिर्फ 293 है और राज्यसभा में सिर्फ 132 है तो इस मामले में दोनों ही सदनों में यह बिल अटक सकता है। यानी लोकसभा में कुल 69 सांसद और राज्यसभा में कुल 28 सांसदों के समर्थन की दरकार सरकार को होगी। बिना विपक्षी समर्थन के ⅔ बहुमत मिलना मुश्किल इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सरकार के पास संसद के दोनों ही सदनों में दो तिहाई बहुमत हासिल नहीं है। दूसरी तरफ विपक्षी इंडिया गठबंधन इस बिल का काला कानून बताकर इसका जबर्दस्त विरोध कर रहे हैं। अगर सरकार दोनों ही सदनों में नवीन पटनायक की बीजू जनता दल, जगनमोहन रेड्डी की YRCPC और निर्दलियों का भी समर्थन हासिल कर लेती है, तब भी दो तिहाई बहुमत का जुगाड़ नहीं कर पाएगी। ऐसे में इस बिल का संसद से पारित होना नामुमकिन लगता है। विधानसभाओं से भी पारित होना चाहिए बिल इस बिल को पारित कराने की तीसरी बड़ी जरूरत आधे से अधिक राज्य विधानसभाओं से पारित कराना है। चूंकि भारत राज्यों का संघ है, इसलिए ऐसे संविधान संशोधन बिल का 50 परसेंट राज्यों की असेंबली से पास होना जरूरी है। इस मामले में एनडीए को कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि आधे से ज्यादा राज्यों में एनडीए की सरकार है। ऐसे में और क्या संभावना? एक संभावना यह भी बन रही है कि अगर विपक्ष संयुक्त संसदीय समिति में शामिल होता है और उसके सुझावों को सरकार मान लेती है, जिसमें यह कहा जा सकता है कि न्यायिक हिरासत की बजाय सजा होने पर ही इस्तीफे को अनिवार्य बनाया जाए, तब संभावना बन सकती है कि विपक्षी दल उसका समर्थन करें। अन्यथा इस संशोधन बिल के पारित होने की संभावना कम ही है। बता दें कि अभी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर किसी भी संसद या विधानसभा सदस्य की सदस्यता स्वत: ही समाप्त हो जाती है और उसे पद से इस्तीफा देना पड़ता है।  

अब 23 सितंबर तक भारतीय विमान नहीं कर सकेंगे पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल

लाहौर  पाकिस्तान के अधिकारियों ने बुधवार को भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध 23 सितंबर तक बढ़ा दिया। पाकिस्तान हवाई अड्डा प्राधिकरण ने एक नया नोटम (नोटिस टू एयरमैन) जारी किया है, जिसमें पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में भारतीय विमानों पर प्रतिबंध को एक महीने के लिए बढ़ाने की घोषणा की गई है। हवाई अड्डा प्राधिकरण ने कहा कि भारतीय एयरलाइनों द्वारा संचालित सभी विमानों को पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। यह प्रतिबंध भारत के स्वामित्व वाले या पट्टे पर लिए गए सैन्य और नागरिक विमानों पर भी लागू रहेगा। पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव के मद्देनजर यह प्रतिबंध सबसे पहले 23 अप्रैल को एक महीने के लिए लगाया गया था। इस कदम से भारतीय विमानों के पाकिस्तानी क्षेत्र में उड़ान भरने पर रोक लग गई। पाकिस्‍तान को हो रहा मोटा नुकसान पाकिस्तान के एयरपोर्ट प्राधिकरण को भारतीय एयरलाइंस के लिए हवाई क्षेत्र बंद करने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. दो महीने में ही पाकिस्‍तान को 4.1 अरब रुपये (127 करोड़ भारतीय रुपये) का नुकसान झेलना पड़ा है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने संसद में पिछले दिनों यह जानकारी दी थी.  पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि भारतीय पंजीकृत विमानों के लिए हवाई क्षेत्र बंद करने से पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी (PAA) को 4.1 अरब रुपये का ओवरफ्लाइंग राजस्व नुकसान हुआ है. 2019 में भी हुआ था नुकसान पाकिस्तान को 2019 में भी भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करने का खामियाजा भुगतना पड़ा था. तब प्रतिबंध लगाने से लगभग 451 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ था. पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद होने से भारतीय एयरलाइन कंपनियों को भी नुकसान हो रहा है. 30 अप्रैल को एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारतीय एयरलाइनों को हर महीने करीब 306 करोड़ रुपए से ज्यादा एक्स्ट्रा खर्च करने पड़ सकता है. एअर इंडिया ने अनुमान लगाया था कि अगर एक साल तक एयर स्पेस बंद रहता है तो उसे करीब 5081 करोड़ रुपए का वित्‍तीय नुकसान होगा. कुछ दिनों बाद 30 अप्रैल को भारत ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी विमानों और एयरलाइनों के लिए हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। इस प्रतिबंध को पहली बार 23 मई को बढ़ाया गया था। ऑपरेशन सिंदूर के समय लगाई थी पाबंदी पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष के मद्देनजर यह प्रतिबंध सबसे पहले 23 अप्रैल को एक महीने के लिए लगाया गया था. 7 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जो पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में आतंकी ढांचों को निशाना बनाकर एक विशाल सैन्य अभियान था. जिसके बाद पाकिस्तान की ओर से भी भारत पर हमले किए गए, जिनका भारत ने मुंह तोड़ जवाब दिया था. दोनों देशों के बीच 4 दिन संघर्ष चलने के बाद सीजफायर हो गया, लेकिन पाकिस्तान ने अभी तक हवाई क्षेत्र से पाबंदी नहीं हटाई है. एक तरफ संबंध सुधारने की बात वहीं पाकिस्तान के मुख्य सहयोगी चीन ने इच्छा जताई है कि भारत पाकिस्तान रिश्तों में सुधार करें, साथ ही दोनों के बीच चीन ने मध्यस्थता कराने की भी पेशकश की है. लेकिन पाकिस्तान का कदम भविष्य में होने वाली ऐसी किसी भी वार्ता पर असर डाल सकता है.  

माइक्रोसॉफ्ट विवाद: कर्मचारियों ने मचाया बवाल, इज़राइली सेना के साथ प्रोजेक्ट पर कंपनी कर रही समीक्षा

 वॉशिंगटन माइक्रोसॉफ्ट मुख्यालय में बुधवार को कर्मचारियों ने जमकर बवाल किया। इस दौरान हुए विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस अधिकारियों ने 18 लोगों को गिरफ्तार किया। इस बीच तकनीकी कंपनी ने गाजा में चल रहे युद्ध के दौरान इस्राइली सेना की ओर से अपनी तकनीक के इस्तेमाल की तत्काल समीक्षा का वादा किया। वाशिंगटन के रेडमंड स्थित माइक्रोसॉफ्ट परिसर में लगातार दो दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान इस तकनीकी दिग्गज कंपनी से इस्राइल के साथ अपने व्यापारिक संबंध तुरंत समाप्त करने की मांग की गई। कंपनी के लोगो और नाम पर खून के रंग जैसा लाल रंग फेंका रेडमंड पुलिस विभाग के मुताबिक, मंगलवार के उलट जब कार्यालय भवनों के बीच एक प्लाजा पर कब्जा किए करीब 35 प्रदर्शनकारियों को माइक्रोसॉफ्ट की ओर से जाने के लिए कहने पर वे वहां से चले गए। इसके बाद जब बुधवार को कंपनी ने पुलिस को प्रदर्शनकारियों के और उग्र होने की जानकारी दी, तब प्रदर्शनकारियों और आक्रामक हो गए। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी के लोगो और नाम पर खून के रंग जैसा लाल रंग फेंका। चेतावनी के बाद हिरासत में ले लिया गया पुलिस प्रवक्ता जिल ग्रीन ने कहा, 'हमने प्रदर्शनकारियों से वापस जाने को कहा। हमने अपील की कि कृपया वापस चले जाइए वरना आपको गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसके बाद भी उन्होंने वहां से न जाने का फैसला किया। इसलिए उन्हें हिरासत में ले लिया गया।' पूरा मामला समझिए माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले हफ्ते के अंत में कहा था कि वह ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' की ओर से लगाए गए उन आरोपों की जांच के लिए एक कानूनी फर्म से संपर्क कर रहा है, जिनमें कहा गया था कि इस्राइली रक्षा बलों ने गाजा और पश्चिमी तट पर फलस्तीनियों की व्यापक निगरानी के जरिए प्राप्त फोन कॉल डेटा को संग्रहीत करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट के एज्योर क्लाउड कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया था। कंपनी ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा, 'माइक्रोसॉफ्ट की मानक सेवा शर्तें इस प्रकार के उपयोग को प्रतिबंधित करती हैं।' साथ ही यह भी कहा गया कि रिपोर्ट में जो आरोप लगाए गए हैं, जिनकी पूरी और तत्काल समीक्षा की जानी चाहिए।

एफबीआई और भारतीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई: सिंडी रोड्रिगेज गिरफ्तार, 6 वर्षीय बेटे की हत्या का आरोप

वॉशिंगटन अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी एफबीआई ने भारतीय पुलिस के साथ समन्वय में एक ऑपरेशन चलाकर सिंडी रोड्रिगेज सिंह नामक महिला को गिरफ्तार किया है। सिंडी रोड्रिगेज अमेरिका में वांछित थी और उस पर अपने ही 6 साल के बेटे की हत्या का गंभीर आरोप है। एफबीआई ने भारतीय पुलिस, इंटरपोल के साथ समन्वय कर भारत से रोड्रिगेज को गिरफ्तार किया। रोड्रिगेज को अब वापस अमेरिका ले जाया जा रहा है। जहां एफबीआई सिंडी रोड्रिगेज को टेक्सास पुलिस को सौंपेगी। टेक्सास में ही सिंडी के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। एफबीआई निदेशक काश पटेल ने दी जानकारी एफबीआई के निदेशक काश पटेल ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में बताया कि एफबीआई ने अमेरिका के शीर्ष 10 भगोड़े अपराधियों में से एक सिंडी रोड्रिगेज सिंह को गिरफ्तार किया है। सिंडी अपने बेटे की हत्या के आरोप में वांछित थी। काश पटेल ने बताया कि मार्च 2023 में टेक्सास के एवरमैन में पुलिस ने सिंडी के बेटे की तलाश शुरू की, क्योंकि वह कई दिनों से दिखाई नहीं दिया था। सिंडी ने पुलिस से बेटे के बारे झूठ बोला और पुलिस को गुमराह किया। पुलिस पूछताछ के बाद सिंडी अमेरिका से फरार होकर भारत पहुंच गई। अक्तूबर 2023 में सिंडी के खिलाफ बेटे की हत्या का मामला दर्ज किया गया। उसी साल नवंबर में पुलिस ने सिंडी की गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया। काश पटेल ने बताया कि बीते सात महीनों में एफबीआई ने शीर्ष 10 भगोड़ों में से चार को गिरफ्तार किया गया है। काश पटेल ने सहयोग के लिए भारतीय पुलिस और प्रशासन को धन्यवाद भी दिया है। सिंडी रोड्रिगेज पर 25 हजार डॉलर का इनाम घोषित था। सिंडी रोड्रिगेज मेक्सिको और भारतीय मूल की है। 

उपराष्ट्रपति चुनाव: सुदर्शन रेड्डी का नामांकन, विपक्ष के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी

 नई दिल्ली INDIA ब्लॉक के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार  सुदर्शन रेड्डी ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है. इस मौके पर सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष-राज्यसभा नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, सपा नेता रामगोपाल यादव, एनसपी (SP) प्रमुख शरद पवार, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत समेत विपक्ष के तमाम बड़े नेता मौजूद रहे. इससे पहले एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन ने कल नामांकन दाखिल किया था. सूत्रों के अनुसार, सुदर्शन रेड्डी चार सेट में नामांकन दाखिल किया. सेट में 20 प्रस्तावक और 20 समर्थक शामिल रहे. बी. सुदर्शन रेड्डी ने नामांकन दाखिल करने से पहले स्वतंत्रता सेनानियों और महान नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की. नंबर गेम में भले ही विपक्ष पीछे हो, लेकिन उसने भी मुकाबले को दिलचस्प बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. खास बात यह है कि विपक्ष ने भी दक्षिण भारत से ही उम्मीदवार उतारा है. ऐसे में इस बार का चुनाव “दक्षिण बनाम दक्षिण” की तस्वीर पेश कर रहा है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स (X) पर नामांकन का कार्यक्रम साझा किया. विपक्षी INDIA गठबंधन के तमाम नेता सुबह 11 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कक्ष में एकत्र होंगे. इसके बाद वे सामूहिक रूप से राज्यसभा महासचिव और इस चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर पी.सी. मोदी के कार्यालय जाएंगे और नामांकन दाखिल करेंगे. विपक्ष के 'सुदर्शन चक्र' में कौन-कौन से दल उलझेंगे, कौन एनडीए का देगा साथ?  उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया तो कांग्रेस नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को संयुक्त उम्मीदवार बनाया है. इसके चलते उपराष्ट्रपति पद के चुनाव का मुकाबला अब काफी रोचक हो गया है, क्योंकि इंडिया ब्लॉक ने सुदर्शन के नाम का ऐलान करते हुए साफ कर दिया है कि यह वैचारिक लड़ाई है. सीपी राधाकृष्णन के ज़रिए बीजेपी के 'तमिल' दांव में फंसे इंडिया ब्लॉक ने मंगलवार को उपराष्ट्रपति पद के लिए गैर-राजनीतिक चेहरे पर भरोसा जताकर जबरदस्त 'सुदर्शन चक्र' चलाया है. बी. सुदर्शन को उम्मीदवार बनाकर विपक्ष को एकजुट रखने के साथ-साथ सत्तापक्ष के सहयोगी और समर्थक दलों को भी उलझा दिया है. एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन तमिलनाडु से आते हैं, जबकि इंडिया ब्लॉक के प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले से हैं, जो एक समय आंध्र प्रदेश में हुआ करता था. उपराष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी का सियासी पलड़ा भले ही भारी हो, लेकिन कांग्रेस ने बी. सुदर्शन को उतारकर विपक्षी एकता का संदेश देने के साथ-साथ एनडीए के सहयोगी दलों को असमंजस में डाल दिया है. विपक्ष ने गैर-राजनीतिक चेहरे को उतारा इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार बी. सुदर्शन गैर-राजनीतिक चेहरे हैं, उनका किसी भी सियासी दल से जुड़ाव नहीं रहा है. यही वजह है कि विपक्ष पूरी तरह एक साथ खड़ा नजर आ रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार, सपा के सांसद धर्मेंद्र यादव, डीएमके सांसद कनिमोझी और टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय सहित इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने उपराष्ट्रपति के लिए बी. सुदर्शन को विपक्ष का संयुक्त उम्मीदवार घोषित किया. 2022 के उपराष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग से दूर रहने वाली ममता बनर्जी की पार्टी पूरी मुस्तैदी के साथ खड़ी है. रेड्डी पर आम सहमति बनने के बाद, आम आदमी पार्टी से लेकर ममता तक साथ हैं. टीएमसी नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने अरविंद केजरीवाल से मुलाकात करके सुदर्शन रेड्डी के नाम पर समर्थन ले लिया है. बी. सुदर्शन के नाम पर इंडिया ब्लॉक पूरी तरह से एकजुट खड़ा नजर आ रहा है. इसके अलावा इंडिया ब्लॉक से अलग हो चुकी आम आदमी पार्टी ने बी. सुदर्शन को समर्थन दिया है. आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि यह लड़ाई केवल उपराष्ट्रपति चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और संविधान के बीच की लड़ाई है. उनका कहना था कि बीजेपी के उम्मीदवार आरएसएस से जुड़े हुए हैं, जबकि विपक्षी दलों के साझा उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी कभी किसी राजनीतिक दल या किसी विशेष विचारधारा से नहीं जुड़े. वे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रह चुके हैं और हमेशा निष्पक्षता और ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं. विपक्ष के 'सुदर्शन चक्र' में उलझे दल बीजेपी ने सीपी राधाकृष्णन के नाम का ऐलान कर डीएमके को जिस तरह से कशमकश में फंसा दिया था, उसी तरह अब इंडिया ब्लॉक की तरफ से बी. सुदर्शन के उम्मीदवार बनने के बाद चंद्रबाबू नायडू, जगन मोहन रेड्डी और केसीआर जैसे नेताओं के लिए धर्मसंकट पैदा हो गया है. बी. सुदर्शन रेड्डी का जन्म आंध्र प्रदेश के रंगारेड्डी जिले में हुआ है, जो फिलहाल अब तेलंगाना का हिस्सा है. इस तरह से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के सियासी क्षत्रपों को भी साधने का दांव माना जा रहा है. आंध्र प्रदेश में टीडीपी सत्ता में है तो वाईएसआर कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है. तेलंगाना में बीआरएस विपक्ष में है. बीआरएस और वाईएसआर न ही एनडीए के साथ हैं और न ही इंडिया ब्लॉक के साथ हैं. इस तरह से उपराष्ट्रपति के चुनाव में टीडीपी से लेकर वाईएसआर और केसीआर की भूमिका काफी अहम है. इसके अलावा बीजेडी भी किसी भी गठबंधन के साथ नहीं है. एनडीए के बड़े सहयोगी टीडीपी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के सीएम हैं. टीडीपी ने सुदर्शन रेड्डी के नाम से पहले एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के साथ होने का दावा किया था, लेकिन अब उसके सामने कशमकश की स्थिति खड़ी हो गई है. यही धर्मसंकट वाईएसआर कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी के साथ भी खड़ी हो गई है. विपक्ष ने तेलुगू प्रत्याशी उतारकर जगन रेड्डी को सियासी तौर पर उलझा दिया है. तेलंगाना से ताल्लुक रखने वाले बी. सुदर्शन को प्रत्याशी बनाकर राज्य में मुख्य विपक्षी दल बीआरएस के सामने भी टेंशन बढ़ा दी है. केसीआर की बीआरएस के पास राज्यसभा में तीन सदस्य हैं और एक लोकसभा सांसद हैं. बीआरएस सांसद केआर सुरेश ने कहा कि वे राष्ट्रहित के मुद्दों पर सरकार का समर्थन करते रहे हैं, लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में अब किसे समर्थन देना है, इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है. बीजेडी ने भी अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन 2024 में ओडिशा की सियासत में आए परिवर्तन के बाद नवीन पटनायक ने बीजेपी से दूरी बनाई है. विपक्ष ने जिस तरह गैर-राजनीतिक चेहरे … Read more

महाराष्ट्र में रेल निर्माण स्थल पर त्रासदी, 4 बच्चों की झुलसती मौत

यवतमाल  महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के दारव्हा में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां रेलवे निर्माण के लिए खोदे गए एक गहरे गड्ढे में डूबकर चार मासूम बच्चों की जान चली गई. यह हादसा बुधवार शाम को दारव्हा-नेर मार्ग के पास रेलवे स्टेशन परिसर में हुआ. इस घटना में मारे गए बच्चों की पहचान रिहान असलम खान (13), गोलू पांडुरंग नारनवरे (10), सोम्या सतीश खडसन (10) और वैभव आशीष बोधले (14) के रूप में हुई है, ये सभी दारव्हा के रहने वाले थे. दरअसल, वर्धा-यवतमाल-नांदेड रेलवे परियोजना का काम तेजी से चल रहा है. इस दौरान पुलों के खंभे बनाने के लिए कई गहरे गड्ढे खोदे गए हैं. गड्ढों में उतर गए थे बच्चे हाल की भारी बारिश के कारण ये गड्ढे पानी से भर गए थे, लेकिन इनके चारों ओर कोई भी सुरक्षा घेरा नहीं बनाया गया था. बुधवार दोपहर ये बच्चे नहाने के लिए इन गड्ढों में उतर गए. पानी की गहराई का अंदाजा न होने के कारण वे डूबने लगे. आसपास के लोगों ने उन्हें बाहर निकाला और तुरंत दारव्हा के उप जिला अस्पताल ले गए. बाद में, गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें यवतमाल के संजीवनी अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने चारों को मृत घोषित कर दिया.