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चीन ने TRF को आतंकी माना, PAK को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगा झटका, पहलगाम पर जताई चिंता

बीजिंग पहलगाम आतंकी हमला करने वाले लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को अमेरिका ने विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया है। इस पर चीन ने प्रतिक्रिया देते हुए अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान को झटका दिया है। चीन ने शुक्रवार को क्षेत्रीय देशों से क्षेत्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए आतंकवाद-रोधी सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने शुक्रवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा टीआरएफ को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित करने के बयान के बारे में पूछे जाने पर कहा, "चीन सभी प्रकार के आतंकवाद का दृढ़ता से विरोध करता है और 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करता है।" उन्होंने कहा, "चीन क्षेत्रीय देशों से आतंकवाद-रोधी सहयोग बढ़ाने और क्षेत्रीय सुरक्षा एवं स्थिरता को संयुक्त रूप से बनाए रखने का आह्वान करता है।" चीन का यह बयान उसके दोस्त पाकिस्तान के नजरिए से झटका माना जा रहा है, क्योंकि पहलगाम हमले के बाद यूएनएससी में टीआरएफ और लश्कर जैसे शब्दों को चीन की आपत्ति के बाद हटा दिया गया था। ऐसे में पाकिस्तान को उम्मीद रही होगी कि इस बार भी चीन टीआरएफ के सवाल पर या तो पल्ला झाड़ लेगा या फिर पहलगाम हमले में किसी पाकिस्तानी आतंकी संगठन की संलिप्तता से इनकार कर देगा, लेकिन उसने आतंकवाद के खिलाफ बयान देकर पाकिस्तान के मन-मुताबिक बात नहीं की। वहीं, बार-बार पहलगाम हमले की निंदा करना भी पाकिस्तान को रास नहीं आया होगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पहले एक बयान में कहा था कि विदेश विभाग टीआरएफ को एक विदेशी आतंकवादी संगठन और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (एसडीजीटी) घोषित कर रहा है। टीआरएफ को अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित किए जाने की बात संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, खासकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 समिति, जो आतंकवादियों और उनके संगठनों को प्रतिबंधित करने वाली एक महत्वपूर्ण आतंकवाद-रोधी व्यवस्था है, में गूंजने की उम्मीद थी। कई पाकिस्तानी आतंकवादी समूह और व्यक्ति संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध व्यवस्था के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं, जिसके अंतर्गत संपत्ति जब्त, यात्रा प्रतिबंध और हथियार प्रतिबंध लगाए जाते हैं। इनमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) और जमात-उद-दावा (जेयूडी) के साथ-साथ हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे प्रमुख आतंकवादी शामिल हैं। पहलगाम हमले के बाद, सयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 25 अप्रैल को हमले की निंदा करते हुए एक कड़ा बयान जारी किया, लेकिन पाकिस्तान और चीन की आपत्तियों के बाद कथित तौर पर बयान से टीआरएफ और लश्कर-ए-तैयबा का उल्लेख हटा दिया गया। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले में 26 लोग मारे गए थे। टीआरएफ ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। भारत ने पहलगाम हमले के जवाब में सात मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। US से TRF को कैसे घोषित कराया आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को 26 लोगों की नृशंस हत्या के एक महीने के भीतर भारत ने द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) के खिलाफ तैयार डोजियर अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र (UN) को सौंप दिया था। इसी का परिणाम है कि अमेरिकी विदेश विभाग ने TRF को वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, भारत को यह जानकारी चार दिन पहले ही दे दी गई थी कि TRF को अमेरिका द्वारा वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किया जा रहा है। यह घोषणा पाकिस्तान के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि 'आतंकवाद पर जोरो टॉलरेंस' की नीति में भारत और अमेरिका कोई रियायत नहीं देगा। आपको बता दें कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद यह फैसला हुआ है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 27-29 मई के वॉशिंगटन दौरे के दौरान यह डोजियर अमेरिकी विदेश विभाग को सौंपा। इसी प्रकार की जानकारी संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति को भी न्यूयॉर्क में दी गई। लश्कर का मुखौटा है टीआरएफ टीआरएफ की कमान शेख सज्जाद गुल उर्फ सज्जाद अहमद शेख के हाथ में है, जो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI द्वारा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का 'कश्मीरी चेहरा' बनाकर तैयार किया गया है। TRF ने 2020 से 2024 तक कश्मीर घाटी में कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया। इसने पहलगाम नरसंहार के अलावा, मध्य कश्मीर (2023) में ग्रेनेड हमले, 2023 में अनंतनाग के बिजबेहरा इलाके में जम्मू-कश्मीर पुलिस पर घात लगाकर हमला, गगनगीर, जेड-मोड़ सुरंग हमला और 2024 में गंदेरबल हमला किया है। कौन है सज्जाद गुल? सज्जाद गुल वर्तमान में रावलपिंडी में रहता है और जम्मू-कश्मीर में कट्टरपंथीकरण, भर्ती, आतंकवादी हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में शामिल है। उसका भाई परवेज अहमद शेख 1990 के दशक में कश्मीर घाटी में एक आतंकवादी था। परवेज अपने परिवार के साथ सऊदी अरब गया और फिर पाकिस्तान चला गया। वह खाड़ी देशों में स्थित भारतीय भगोड़ों के साथ आतंकी फंडिंग और हवाला गतिविधियों में शामिल है। दिल्ली में हुआ था गिरफ्तार सज्जाद गुल को 2022 में यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया गया था। वह श्रीनगर के एचएमटी इलाके का रहने वाला है। उसने अपनी बुनियादी शिक्षा श्रीनगर में पूरी की और फिर बेंगलुरु से एमबीए किया। इसके बाद उसने केरल में लैब टेक्नीशियन का कोर्स किया और श्रीनगर लौटकर एक डायग्नोस्टिक लैब स्थापित की और साथ ही लश्कर-ए-तैयबा को सहायता प्रदान करना शुरू कर दिया। उसे दिल्ली पुलिस ने निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया और उसके पास से पांच किलोग्राम आरडीएक्स बरामद किया गया। वह दिल्ली में बम विस्फोटों की साजिश रचने और ठिकानों की टोह लेने में शामिल था। गुल और उसके दो साथियों को 7 अगस्त, 2003 को 10 साल कैद की सजा सुनाई गई थी। अपनी सजा पूरी होने और जेल से रिहा होने के बाद, सज्जाद 2017 में अपने परिवार के साथ पाकिस्तान भाग गया। आईएसआई ने ही 2019 में सज्जाद को लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख बनाने और यह दिखाने के लिए टीआरएफ का प्रमुख चुना था कि आतंकवाद जम्मू-कश्मीर में ही पनप रहा है। आईएसआई ने फरवरी 2019 में पुलवामा बम विस्फोट के बाद इस कदम की रणनीति बनाई थी। इसी समय पाकिस्तान आतंकवादियों और आतंकी समूहों को प्रायोजित करने और पनाह देने के लिए दुनिया की नजरों में आया था। … Read more

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ईडी की नजर: ऑनलाइन सट्टेबाज़ी में गूगल-मेटा को नोटिस

नई दिल्ली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स के प्रमोशन मामले में गूगल और मेटा को नोटिस जारी किया है. ईडी का आरोप है कि दोनों कंपनियों ने इन ऐप्स के विज्ञापनों को प्रमुखता से दिखाया है. 21 जुलाई को दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है. यह जांच ऑनलाइन सट्टेबाजी के बढ़ते प्रभाव को रोकने के प्रयासों का हिस्सा है. ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप्स का प्रमोशन अब गूगल और मेटा को भारी पड़ने वाला है. ऐसा इसलिए क्योंकि ईडी का आरोप है कि इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सट्टेबाजी के ऐड हर किसी को प्रमुखता से दिखाए गए हैं. इसके कारण लोगों तक उनकी पहुंच आसानी से हुई है. यही कारण है कि ईडी ने अब दोनों ही कंपनियों के प्रतिनिधियों को पूछताछ के लिए बुलाया है. 21 जुलाई को होगी पूछताछ ईडी ने जो नोटिस जारी किया है. उसके मुताबिक दोनों ही कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ पूछताछ की जाएगी. इसमें ऑनलाइन सट्टेबाजी के ऐड इस तरह से दिखाए जाने को लेकर सवाल जवाब होंगे. माना जा रहा है कि इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए करोड़ों रुपये की काली कमाई की गई है. ईडी की कार्रवाई देशभर में जारी ईडी देशभर में ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ कार्रवाई कर रही है. पिछले दिनों प्रवर्तन निदेशालय ने तेलंगाना के कई बड़े फिल्मी सितारों के खिलाफ केस दर्ज किया था. इसमें विजय देवरकोंडा से लेकर राणा दग्गुबाती और प्रकाश राज जैसे नाम शामिल हैं. कुल मिलाकर 29 एक्टर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. इसके अलावा देशभर में कई ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ छापेमारी की जा रही है. ईडी द्वारा आने वाले दिनों में उनके बयान दर्ज किए जाने की उम्मीद है, इसके साथ ही ईडी उन शिकायतकर्ताओं की तलाश कर रहा है, जिन्हें इन सट्टेबाजी प्लेटफार्मों द्वारा ठगा गया था. देशभर में ईडी की कार्रवाई जारी है. 15 जुलाई को ईडी ने मुंबई में कई जगहों पर छापेमारी की थी. यह छापेमारी अवैध डब्बा ट्रेडिंग और ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ की गई थी. इस छापेमारी के दौरान टीम ने 3 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी और कई लग्जरी घड़ियों के साथ ही कई गाड़ियां जब्त की थी.  

उत्तराखंड फिर कांपा! चमोली में महसूस किए गए भूकंप के हल्के झटके

चमोली सुबह की शांति को तोड़ते हुए उत्तराखंड के चमोली जिले में आज तड़के सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता 3.3 थी। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, यह भूकंप रात 12:02:44 बजे महसूस किया गया। भूकंप का केंद्र चमोली से 22 किलोमीटर दूर जोशीमठ के पास बताया जा रहा है। भूकंप का केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई पर था। हाल के दिनों में भूकंप की लगातार सक्रियता यह पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड में प्रकृति ने अपनी ताकत दिखाई हो। हाल ही में, 8 जुलाई को उत्तरकाशी जिले में 3.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। यह कंपन दोपहर 1:07 बजे 5 किलोमीटर की गहराई पर महसूस हुआ था। चमोली में आए इस नवीनतम भूकंप ने लोगों को एक बार फिर सतर्क कर दिया है। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में ऐसी घटनाओं पर नजर रखना जरूरी है। अफगानिस्तान में फिर कांपी धरती, 4.6 तीव्रता का भूकंप अफगानिस्तान में शनिवार को भूकंप दो जबरदस्त झटके महसूस किए गए। इाके अलावा म्यांमार में भी भूकंप के झटकों से लोग दहशत में आ गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के एक बयान में कहा गया है कि शनिवार को अफगानिस्तान में दो भूकंप के झटके महसूस किए गए। ताजा भूकंप रिक्टर पैमाने पर 4.0 तीव्रता का था। देर रात 2.11 बजे आए भूकंप का केंद्र जमीन से 125 किमी गहराई में था। इससे पहले अफगानिस्तान में रिक्टर पैमाने पर 4.2 तीव्रता का भूकंप आया था। राम 01.26 बजे आए भूकंप का केंद्र जमीन से 190 किमी गहराई में था। इससे पहले राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के एक बयान में कहा गया था कि शुक्रवार देर रात अफगानिस्तान में 4.6 तीव्रता का भूकंप आया। 17 जुलाई को भी रिक्टर पैमाने पर 4.7 तीव्रता का भूकंप आया था। अफगानिस्तान में शक्तिशाली भूकंपों का इतिहास रहा है। रेड क्रॉस के अनुसार, हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला एक भूगर्भीय रूप से सक्रिय क्षेत्र है, जहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। म्यांमार में 3.7 तीव्रता का भूकंप एनसीएस के मुताबिक, शनिवार को म्यांमार में भी 3.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप 105 किलोमीटर की गहराई में आया। सुबह 03.26 बजे भूकंप के बाद लोग दहशत में आ गए और घरों से बाहर निकल आए। इससे पहले शुक्रवार को म्यांमार में 4.8 तीव्रता का भूकंप आया था। 17 जुलाई को भी 80 किमी की गहराई में भूकंप आया था। यूरेशियन और इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेटों के बीच टकराव की वजह से म्यांमार एक उच्च भूकंपीय खतरे वाला क्षेत्र है। अंतरराष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की ओर से संक्षेपित भूकंप मापदंडों के अनुसार, 1990 से 2019 तक म्यांमार और उसके आसपास के क्षेत्रों में हर साल 3.0 से अधिक या उसके बराबर तीव्रता वाली लगभग 140 घटनाएं घटी हैं।

उत्तराखंड फिर कांपा! चमोली में महसूस किए गए भूकंप के हल्के झटके

चमोली सुबह की शांति को तोड़ते हुए उत्तराखंड के चमोली जिले में आज तड़के सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता 3.3 थी। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, यह भूकंप रात 12:02:44 बजे महसूस किया गया। भूकंप का केंद्र चमोली से 22 किलोमीटर दूर जोशीमठ के पास बताया जा रहा है। भूकंप का केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई पर था। हाल के दिनों में भूकंप की लगातार सक्रियता यह पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड में प्रकृति ने अपनी ताकत दिखाई हो। हाल ही में, 8 जुलाई को उत्तरकाशी जिले में 3.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। यह कंपन दोपहर 1:07 बजे 5 किलोमीटर की गहराई पर महसूस हुआ था। चमोली में आए इस नवीनतम भूकंप ने लोगों को एक बार फिर सतर्क कर दिया है। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में ऐसी घटनाओं पर नजर रखना जरूरी है। अफगानिस्तान में फिर कांपी धरती, 4.6 तीव्रता का भूकंप अफगानिस्तान में शनिवार को भूकंप दो जबरदस्त झटके महसूस किए गए। इाके अलावा म्यांमार में भी भूकंप के झटकों से लोग दहशत में आ गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के एक बयान में कहा गया है कि शनिवार को अफगानिस्तान में दो भूकंप के झटके महसूस किए गए। ताजा भूकंप रिक्टर पैमाने पर 4.0 तीव्रता का था। देर रात 2.11 बजे आए भूकंप का केंद्र जमीन से 125 किमी गहराई में था। इससे पहले अफगानिस्तान में रिक्टर पैमाने पर 4.2 तीव्रता का भूकंप आया था। राम 01.26 बजे आए भूकंप का केंद्र जमीन से 190 किमी गहराई में था। इससे पहले राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के एक बयान में कहा गया था कि शुक्रवार देर रात अफगानिस्तान में 4.6 तीव्रता का भूकंप आया। 17 जुलाई को भी रिक्टर पैमाने पर 4.7 तीव्रता का भूकंप आया था। अफगानिस्तान में शक्तिशाली भूकंपों का इतिहास रहा है। रेड क्रॉस के अनुसार, हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला एक भूगर्भीय रूप से सक्रिय क्षेत्र है, जहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। म्यांमार में 3.7 तीव्रता का भूकंप एनसीएस के मुताबिक, शनिवार को म्यांमार में भी 3.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप 105 किलोमीटर की गहराई में आया। सुबह 03.26 बजे भूकंप के बाद लोग दहशत में आ गए और घरों से बाहर निकल आए। इससे पहले शुक्रवार को म्यांमार में 4.8 तीव्रता का भूकंप आया था। 17 जुलाई को भी 80 किमी की गहराई में भूकंप आया था। यूरेशियन और इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेटों के बीच टकराव की वजह से म्यांमार एक उच्च भूकंपीय खतरे वाला क्षेत्र है। अंतरराष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की ओर से संक्षेपित भूकंप मापदंडों के अनुसार, 1990 से 2019 तक म्यांमार और उसके आसपास के क्षेत्रों में हर साल 3.0 से अधिक या उसके बराबर तीव्रता वाली लगभग 140 घटनाएं घटी हैं।

नौसेना को मिली नई ताकत: पहला स्वदेशी डीएसवी ‘आईएनएस निस्तार’ शामिल

नई दिल्ली भारतीय नौसेना की ताकत अब और बढ़ गई है। दरअसल आज नौसेना के बेडे़ में देश का पहला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल (डीएसवी) आईएनएस निस्तार शामिल हो गया है। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ की मौजूदगी में विशाखापत्तनम स्थित नेवल डॉकयार्ड में आईएनएस निस्तार को नौसैनिक बेड़े में शामिल किया गया। आईएनएस निस्तार को देश में ही डिजाइन और इसका निर्माण किया गया है। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने 8 जुलाई 2025 को ही भारतीय नौसेना को सौंपा दिया था। इस युद्धक जहाज का निर्माण भारतीय शिपिंग रजिस्टर के नियमों के तहत किया गया है। 'हथियार आयातक से निर्यातक बन रहा भारत' केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि 'भारतीय नौसेना का इतिहास गौरवशाली है और आईएनएस निस्तार भारत की ताकत को और बढ़ाएगा।' उन्होंने कहा कि 'भारत आज सैन्य मामले में आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ रहा है और अब आयातक से निर्यातक बन रहा है। भारत ने 23,622 करोड़ रुपये हथियार निर्यात किए हैं और अब लक्ष्य 50 हजार करोड़ रुपये के हथियार निर्यात करने का है।' इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने कहा कि 'नए आईएनएस निस्तार से नौसेना की डाइविंग क्षमता और गहरे पानी में भी काम करने की क्षमता बेहतर होगी।' उन्होंने कहा कि 'पुराने जहाज कभी नहीं मरते, वे सिर्फ नए रूप में हमारे पास वापस आते हैं।' रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में यह अहम कदम है। सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, कुल 120 एमएसएमई कंपनियों ने मिलकर इस युद्धक जहाज को बनाने का काम किया। आईएनएस निस्तार के 80 फीसदी उपकरण स्वदेशी हैं। यह युद्धक जहाज आधुनिक तकनीक से लैस है और इसकी मदद से समुद्र में गहरे तक उतरा जा सकता है। इस डाइविंग सपोर्ट वेसल की मदद से राहत और बचाव कार्य चलाने, मरम्मत के काम आदि में काफी मदद मिलेगी। दुनिया के चुनिंदा देशों के पास ही अभी आईएनएस निस्तार जैसी ताकत है। नौसेना की बढ़ेगी ताकत निस्तार नाम संस्कृत भाषा से लिया गया है, जिसका मतलब होता है आजादी या बचाव। आईएनएस निस्तार की खासियत की बात करें तो यह 118 मीटर लंबा और 10 हजार टन वजनी जहाज है, जो समुद्र में गहराई तक जाने में मदद करने वाले उपकरणों से लैस है। इसकी मदद से 300 मीटर तक समुद्र की गहराई में जाया जा सकता है। यह जहाज डीएसआरवी के लिए मदर शिप का काम करता है। अगर किसी पनडुब्बी में कोई आपात स्थिति आती है तो मरम्मत कार्य या बचाव कार्य के लिए जवानों को एक हजार मीटर की गहराई तक उतारा जा सकता है। भारतीय नौसेना को पहली बार साल 1969 में सोवियत संघ से पहला डाइविंग सपोर्ट वेसल मिला था। करीब दो दशकों की सेवा के बाद उसे रिटायर किया गया था। अब आईएनएस निस्तार स्वदेशी और भारत में ही डिजाइन किया गया है। 

बिना लाइन लगाए बच्चों का ब्लू आधार कार्ड पाएं, जानें ऑनलाइन प्रक्रिया

नई दिल्ली आधार कार्ड एक बेहद जरूरी डॉक्यूमेंट है। इसकी जरूरत सिर्फ बड़ों को ही नहीं बल्कि बच्चों को भी पड़ती है। स्कूल एडमिशन हों या सरकारी योजना से जुड़ा कोई काम हर जगह इसकी जरूरत पड़ती ही है। ऐसे में अगर आपके घर में कोई 5 साल से छोटा बच्चा है, तो आप ऑनलाइन बहुत आसानी से आधार कार्ड बनवा सकते हैं। इसमें खास बात यह है कि बच्चों का आधार कार्ड बनवाते समय आंखों के रेटिना को स्कैन करने की जरूरत नहीं पड़ती और न ही फिंगरप्रिंट स्कैन करना पड़ता है। इस वजह से आप बिना आधार सेंटर पर जाए बेहद आसानी से बच्चों का आधार कार्ड बनवा सकते हैं। चलिए इसके बारे में डिटेल में जानते हैं। ऐसे बनेगा ब्लू आधार कार्ड बता दे कि बच्चों के आधार कार्ड को ब्लू आधार कार्ड भी कहा जाता है। इस आधार कार्ड की खासियत यह होती है कि यह बच्चे के माता-पिता के आधार कार्ड से लिंक्ड होता है। ऐसे में इसके लिए आपको आधार सेंटर पर जाना जरूरी नहीं है और आप घर बैठे ऑनलाइन ही ब्लू आधार कार्ड के लिए अपलाई कर सकते हैं। ध्यान देने वाली बात ऊपर बताए सभी स्टेप्स को फॉलो करने के बाद आपके घर पर पोस्ट ऑफिस से कुछ लोग जरूरी मशीन लेकर बच्चे का आधार कार्ड बनाने के लिए पहुंच जाएंगे। इसमें करीब 10 दिन का समय लग सकता है। अगर कोई 10 दिनों में आपके घर नहीं आता, तो आप एक बार जाकर नजदीकी पोस्ट ऑफिस पर अपनी ऑनलाइन रिक्वेस्ट के बारे में बता सकते हैं। इसके बाद हो सकता है कि पोस्ट ऑफिस से उसी दिन कोई आपके घर आ जाए। याद रहे कि जब आपका बच्चा 5 साल की उम्र पार कर जाएगा, तो आपको उसके फिंगरप्रिंट और रेटिना स्कैन को अपडेट कराना होगा। इसके लिए आपको किसी तरह की कोई फीस नहीं देनी होगी।

दुर्गापुर से ममता सरकार पर हमला: पीएम मोदी ने कोलकाता की घटना को बताया कानून व्यवस्था पर सवाल

दुर्गापुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और ममता बनर्जी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह सावन का पवित्र महीना है, और ऐसे पावन समय में मुझे पश्चिम बंगाल के विकास पर्व का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है। पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा ने पश्चिम बंगाल के लिए बड़े सपने देखे हैं। भाजपा एक समृद्ध पश्चिम बंगाल बनाना चाहती है। भाजपा एक विकसित पश्चिम बंगाल का निर्माण करना चाहती है। हमें बंगाल को इस बुरे दौर से बाहर निकालना है, और आज यहां जिन परियोजनाओं की शुरुआत हुई है, वो इसी का प्रतीक हैं। बंगाल बदलाव चाहता है। उन्होंने कहा कि लोग यहां देशभर से रोजगार के लिए आते थे, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह उलट गई। आज पश्चिम बंगाल का नौजवान पलायन के लिए मजबूर है। छोटे-छोटे काम के लिए भी उसे दूसरे राज्यों की तरफ जाना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं आज आपको ये यकीन दिलाने आया हूं कि बंगाल की बदहाल स्थिति को बदला जा सकता है। भाजपा की सरकार आने के बाद सिर्फ कुछ ही वर्षों में बंगाल देश के शीर्ष औद्योगिक राज्यों में से एक बन सकता है। यह मेरा दृढ़ विश्वास है। उन्होंने कहा कि टीएमसी सरकार बंगाल के विकास के आगे दीवार बनकर खड़ी है। जिस दिन टीएमसी सरकार की ये दीवार गिरेगी, उसी दिन से बंगाल विकास की नई तेजी पकड़ लेगा। टीएमसी की सरकार जाएगी, तभी असली परिवर्तन आएगा। पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा की ओर से मैं आपसे आग्रह करता हूं, एक बार भाजपा को अवसर दीजिए। एक ऐसी सरकार चुनिए जो कामदार हो, ईमानदार हो और दमदार हो। पीएम मोदी ने आगे कहा कि पिछले दशकों में इस क्षेत्र में निवेश और रोजगार के लिए स्थिति लगातार प्रतिकूल होती गई है। हिंसा की लगातार घटनाएं, पक्षपातपूर्ण पुलिस व्यवस्था और न्याय व्यवस्था में अविश्वास ने एक ऐसा माहौल बना दिया है, जहां कोई भी निवेश करने को लेकर आश्वस्त महसूस नहीं करता। राज्य सरकार की जीवन और व्यवसायों की सुरक्षा में असमर्थता संभावित निवेशकों की चिंताओं को और गहरा करती है। उन्होंने कहा कि प्राइमरी एजुकेशन हो या हायर एजुकेशन, हर स्तर पर शिक्षा को बर्बाद किया जा रहा है। टीएमसी की सरकार ने बंगाल की एजुकेशन व्यवस्था को अपराध और भ्रष्टाचार के हवाले कर दिया है। हजारों योग्य शिक्षक आज बेरोजगार हैं, इसकी सबसे बड़ी वजह है टीएमसी का भ्रष्टाचार। इससे हजारों परिवारों पर संकट आया है और लाखों बच्चों का भविष्य टीचर की कमी के कारण अंधेरे में है। टीएमसी ने बंगाल के वर्तमान और भविष्य दोनों को संकट में डाल दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि टीएमसी का 'गुंडा टैक्स' बंगाल में निवेश को रोक रहा है। राज्य के संसाधन माफिया के हाथों में चले गए हैं और सरकारी नीतियां जानबूझकर मंत्रियों को खुलेआम भ्रष्टाचार करने के लिए प्रेरित करने के लिए बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि 'मां, माटी, मानुष' की बात करने वाली पार्टी की सरकार में बेटियों के साथ जो अन्याय हो रहा है, वो पीड़ा भी देता है और आक्रोश से भी भर देता है। आज पश्चिम बंगाल में अस्पताल भी बेटियों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। जब यहां एक डॉक्टर बेटी के साथ अत्याचार हुआ तो टीएमसी सरकार आरोपियों को बचाने में जुट गई। इस घटना से देश अभी उबरा भी नहीं था कि एक और कॉलेज में एक और बेटी के साथ भयंकर अत्याचार किया गया। इस घटना के आरोपियों का कनेक्शन भी टीएमसी से निकला है। हमें मिलकर बंगाल को इस निर्ममता से मुक्ति दिलानी है। बता दें कि हाल ही में कोलकाता के साउथ लॉ कॉलेज की एक छात्रा के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया था। पीएम मोदी ने इसी घटना का जिक्र कर ममता सरकार को घेरा। पीएम मोदी ने कहा कि टीएमसी और लेफ्ट ने सालों तक दिल्ली में कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चलाई। इस दौरान इनको बांग्ला भाषा की याद तक नहीं आई। ये भाजपा सरकार है, जिसने बांग्ला को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया। 

रेलवे ट्रैक बना जानलेवा: पश्चिम बंगाल में ट्रेन ने छीनी तीन हाथियों की जान, वन विभाग घिरा सवालों में

कोलकाता  पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम और बांसतोला रेलवे स्टेशन के बीच एक दर्दनाक हादसे में तीन हाथियों की मौत हो गई। झारखंड सीमा से सटे इस इलाके में देर रात करीब 12:50 बजे, जब जनशताब्दी एक्सप्रेस झारग्राम से खड़गपुर जा रही थी, तो एक वयस्क और दो बच्चे हाथी रेलवे ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट में आ गए। तीनों हाथियों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। यह घटना दक्षिण पूर्व रेलवे के खड़गपुर डिवीजन के सरडीहा-झाड़ग्राम सेक्शन में 143 किलोमीटर11/13 पोल संख्या के बीच हुई। जानकारी के मुताबिक, वन विभाग और "हुला दल" (हाथियों को भगाने वाली टीम) के सदस्य उस समय बांसतोला क्षेत्र में हाथियों को भगाने का प्रयास कर रहे थे, तभी यह दुर्घटना हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही वन विभाग के उच्च अधिकारी और रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंचे। ट्रेनों की आवाजाही को तुरंत रोक दिया गया और हाथियों के शवों को हटाने का काम शुरू किया गया। अप लाइन को सुबह 6:15 बजे और डाउन लाइन को 7:30 बजे फिर से चालू किया जा सका। स्थानीय लोगों में गुस्सा और वन विभाग पर सवाल इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है। उनका आरोप है कि वन विभाग द्वारा उचित रूप से प्रशिक्षित "हुला दलों" की नियुक्ति न करने के कारण लगातार हाथियों की मौतें हो रही हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वन विभाग इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है और उसने इस घटना पर भी चुप्पी साध रखी है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर अभी तक रेलवे के खड़गपुर डिवीजन से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। झारग्राम जिले में जगह-जगह शिकायतें दर्ज की जा रही हैं और लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर वन विभाग कब नींद से जागेगा और इन बेजुबान जानवरों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाएगा। यह घटना एक बार फिर मानव-हाथी संघर्ष की बढ़ती समस्या और इसके समाधान के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

23 जुलाई तक बंद रहेंगे स्कूल, जानिए कहाँ खुले रहेंगे क्लासरूम

नई दिल्ली  सावन महीने में शुरू हुई कावड़ यात्रा के कारण कई राज्यों के जिलों में छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। इस दौरान शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश घोषित किया जा रहा है। कुछ जगहों पर यह अवकाश 23 जुलाई तक रहेगा, तो कहीं सोमवार और शनिवार को स्कूल बंद रखने का फैसला किया गया है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में जिला प्रशासन ने 26 जुलाई तक सभी सरकारी और सहायता प्राप्त बेसिक एवं माध्यमिक स्कूलों को बंद रखने के आदेश जारी किए हैं। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। इसके अलावा, बदायूं, मेरठ, हापुड़ और मुजफ्फरनगर जिलों में भी 16 से 23 जुलाई तक सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे। इनमें यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई से जुड़े सभी स्कूल शामिल हैं। निजी संस्थान, डिग्री कॉलेज और तकनीकी कॉलेज भी अवकाश में शामिल हैं। बरेली जिले में हर सोमवार को स्कूल और कॉलेज बंद रखने का निर्णय लिया गया है ताकि भीड़भाड़ से बचा जा सके और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। बदायूं में 1 से 8वीं कक्षा तक के सभी परिषदीय सहायता प्राप्त स्कूलों में शनिवार और सोमवार को छुट्टी रखी जाएगी। यह व्यवस्था 19 से 21 जुलाई, 26 से 28 जुलाई और 2 से 4 अगस्त तक लागू रहेगी। वाराणसी में भी सोमवार को स्कूल बंद रहेंगे और रविवार को खोले जाएंगे। उत्तराखंड के कई जिलों जैसे हरिद्वार, यमकेश्वर और पौड़ी के यमकेश्वर ब्लॉक में भी स्कूल 23 जुलाई तक बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। हरिद्वार में सभी सरकारी, निजी स्कूल और डिग्री कॉलेजों को भी इसी अवधि तक अवकाश रहेगा। प्रशासन ने बताया कि कावड़ यात्रा के दौरान ट्रैफिक नियंत्रण, सुरक्षा प्रबंधन और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए यह अवकाश आवश्यक है। इस कारण से स्कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है ताकि बच्चों और अभिभावकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।  

‘गुंडा टैक्स’ और गैंगरेप का मुद्दा उठाकर पीएम मोदी ने दीदी पर बोला हमला, बोले- बंगाल की हालत चिंताजनक

दुर्गापुर पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में 6 साल बाद पीएम मोदी ने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इससे पहले उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार की शुरुआत दुर्गा में विशाल जनसभा को संबोधित कर किया था। शुक्रवार को अपने संबोधन में पीएम मोदी ने टीएमसी सरकार की तीखे शब्दों में आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह सावन का पवित्र महीना है, ऐसे पावन समय में मुझे पश्चिम बंगाल के विकास पर्व का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा ने पश्चिम बंगाल के लिए बड़े सपने देखे हैं। भाजपा एक समृद्ध पश्चिम बंगाल बनाना चाहती है। भाजपा एक विकसित पश्चिम बंगाल का निर्माण करना चाहती है। हमें बंगाल को इस बुरे दौर से बाहर निकालना है, और आज यहां जिन परियोजनाओं की शुरुआत हुई है, वो इसी का प्रतीक हैं। बंगाल बदलाव चाहता है। बंगाल में पालायन शुरू हो गयाः पीएम पीए मोदी ने कहा कि देशभर से रोजगार के लिए आते थे, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह उलट गई। आज पश्चिम बंगाल का नौजवान पलायन के लिए मजबूर है। छोटे-छोटे काम के लिए भी उसे दूसरे राज्यों की तरफ जाना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं आज आपको ये यकीन दिलाने आया हूं कि बंगाल की बदहाल स्थिति को बदला जा सकता है। भाजपा की सरकार आने के बाद सिर्फ कुछ ही वर्षों में बंगाल देश के शीर्ष औद्योगिक राज्यों में से एक बन सकता है। यह मेरा दृढ़ विश्वास है। बंगाल के विकास में दिवार बनकर खड़ी टीएमसीः पीएम टीएमसी सरकार बंगाल के पर निशाना साधते हुए पीएम ने कहा कि टीमएमसी विकास के आगे दीवार बनकर खड़ी है। जिस दिन टीएमसी सरकार की ये दीवार गिरेगी, उसी दिन से बंगाल विकास की नई तेजी पकड़ लेगा। टीएमसी की सरकार जाएगी, तभी असली परिवर्तन आएगा। पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा की ओर से मैं आपसे आग्रह करता हूं, एक बार भाजपा को अवसर दीजिए। एक ऐसी सरकार चुनिए जो कामदार हो, ईमानदार हो और दमदार हो। ‘गुंडा टैक्स बंगाल में निवेश को रोक रहा’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि टीएमसी का ‘गुंडा टैक्स’ बंगाल में निवेश को रोक रहा है। राज्य के संसाधन माफिया के हाथों में चले गए हैं और सरकारी नीतियां जानबूझकर मंत्रियों को खुलेआम भ्रष्टाचार करने के लिए प्रेरित करने के लिए बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि ‘मां, माटी, मानुष’ की बात करने वाली पार्टी की सरकार में बेटियों के साथ जो अन्याय हो रहा है, वो पीड़ा भी देता है और आक्रोश से भी भर देता है। आज पश्चिम बंगाल में अस्पताल भी बेटियों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। जब यहां एक डॉक्टर बेटी के साथ अत्याचार हुआ तो टीएमसी सरकार आरोपियों को बचाने में जुट गई। इस घटना से देश अभी उबरा भी नहीं था कि एक और कॉलेज में एक और बेटी के साथ भयंकर अत्याचार किया गया। इस घटना के आरोपियों का कनेक्शन भी टीएमसी से निकला है। हमें मिलकर बंगाल को इस निर्ममता से मुक्ति दिलानी है। साउथ लॉ कॉलेज में छात्रा से गैंगरेप का पीएम ने किया जिक्र बता दें कि हाल ही में कोलकाता के साउथ लॉ कॉलेज की एक छात्रा के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया था। पीएम मोदी ने इसी घटना का जिक्र कर ममता सरकार को घेरा। पीएम मोदी ने कहा कि टीएमसी और लेफ्ट ने सालों तक दिल्ली में कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चलाई। इस दौरान इनको बांग्ला भाषा की याद तक नहीं आई। ये भाजपा सरकार है, जिसने बांग्ला को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया।