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रेलवे ने लगाई नई मिसाल, पटरियों के बीच सोलर पैनल से होगी बिजली की बचत

नई दिल्ली भारतीय रेलवे (Indian Railway) न केवल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए लगातार कदम उठा रही है, वहीं दूसरी ओर बिजली की बचत और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी नए तरीके अपना रही है. इसी क्रम में रेलवे को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है. रेलवे मिनिस्ट्री (Ministry Of Railway) की ओर से एक सोशल मीडिया (Social Media) पोस्ट में जानकारी देते हुए बताया गया है कि बनारस लोकोमोटिव वर्क्स ने रेल की पटरियों के बीच भारत का पहला 70 मीटर लंबा रिमूवेबल सोलर पैनल सिस्टम (Solar Panal System On Track) स्थापित किया है.  70 मीटर ट्रैक पर 28 सोलर पैनल  मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले Twitter) पर एक पोस्ट के जरिए भारतीय रेलवे ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बारे में बताया गया है. पोस्ट में जानकारी दी गई है कि वाराणसी के बनारस लोकोमोटिव वर्क्स ने रेलवे ट्रैक पर पटरियों के बीच भारत का पहला 70 मीटर लंबा रिमूवेबल सोलर पैनल सिस्टम स्थापित कर लिया है. इसमें 28 Sola Panal लगाए गए हैं, जिनकी क्षमता 15 किलोवाट पीक है.  बिजली की बचत और पर्यावरण संरक्षण रेल मंत्रालय की ओर से Indian Railway के इस कदम को हरित और टिकाऊ रेल परिवहन की दिशा में एक मील का पत्थर करार दिया गया है. इस संबंध में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे की यह पहल न केवल बिजली की बचत करेगी और एनर्जी लागत में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार साबित होगी.  सबसे खास बात ये है कि रेल की पटरियों के बीच में लागए गए इन सोलर पैनल्स को आसानी से हटाया और फिर से दोबारा लगाया भी जा सकता है. दरअसल, रेलवे ट्रैक पर अक्सर मेंटिनेंस काम चलता रहता है, ऐसे में इन रिमूवेबल Solar Panal को वहां काम करने वाले कर्मचारी आसानी से बाहर निकाल सकते हैं और काम खत्म होने के बाद ट्रैक पर वापस लगा सकते हैं.  रेल मंत्रालय ने शेयर कीं तस्वीरें रेलवे मिनिस्ट्री की ओर से ट्रैक पर सोलर पैनल सिस्टम स्थापित करने की जानकारी शेयर किए जाने के साथ ही इसकी तमाम तस्वीरें भी शेयर की गई हैं, जिनमें देखने को मिल रहा है कि बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW) ने किस तक रेल की पटरियों की बीच पत्थरों के ऊपर सोलर पैनल लगाए हैं. एक अन्य तस्वीर में इनके ऊपर से ट्रेन का इंजन गुजरता हुआ भी नजर आ रहा है. निश्चित तौर पर रेलवे का ये कदम अन्य सेक्टर्स को भी ग्रीन और क्लीन एनर्जी की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरणादायक है. 

UAE के बाद अब कुवैत भी करेगा बड़ा बदलाव, विदेशी जजों की छुट्टी 2030 तक

नई दिल्ली मध्य-पूर्व का इस्लामिक देश कुवैत संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राह पर चल पड़ा है. जिस तरीके से यूएई हर क्षेत्र में अमीरातीकरण (नौकरियों में अपने नागरिकों की संख्या बढ़ाना) को बढ़ावा दे रहा है, कुवैत ने भी ऐसी ही पहल शुरू की है. कुवैत के न्याय मंत्री, काउंसलर नासिर अल-सुमैत ने कहा है कि देश की न्यापालिका 2030 तक पूरी तरह से 'Kuwaitized' हो जाएगी. इसका मतलब है कि 2030 तक सभी न्यायिक पदों पर कुवैती लोग होंगे, विदेशियों को जज और सभी न्यायिक पदों से हटा दिया जाएगा.कुवैत की सरकार ने यह फैसला स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देने, देश के पेशेवरों को मजबूती देने और कानूनी क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए किया है.  कुवैत अपने न्याय विभागों में बदलाव कर रहा है जिसके तहत ये फैसला लिया गया है. इसके साथ ही स्वतंत्रता और दक्षता को बढ़ावा देने के लिए विधायी सुधार भी किए जा रहे हैं. मध्य-पूर्वी देश के प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर, विशेष रूप से तेल और तकनीकी क्षेत्र से कहा जा रहा है कि वो देश के नागरिकों को अधिक से अधिक संख्या में नौकरी दें. पीपुल्स मैटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री अल-सुमैत ने कहा कि सभी न्यायिक विभागों के कुवैतीकरण की प्रक्रिया चल रही है जहां विदेशियों की जगह योग्य और कुशल कुवैती प्रोफेशनल्स की भर्ती की जा रही है. उन्होंने कहा, 'हम इस मामले में फैसला ले चुके हैं और 2030 तक 100% कुवैतीकरण का हमारा टार्गेट है.' कुवैत का न्याय मंत्रालय यह सुनिश्चित करने की भी पूरी कोशिश में है कि विदेशियों की जगह होने वाली सभी नियुक्तियां और प्रमोशन कुवैती उम्मीदवारों के बीच गुणवत्ता, प्रशिक्षण और काम को लेकर उनकी तत्परता को प्राथमिकता दें. कुवैत के इन सेक्टरों का पहले ही हो चुका है कुवैतीकरण कुवैत के कई सेक्टर्स में कुवैतीकरण बहुत पहले से होता आ रहा है. कुवैत के ऑयल सेक्टर के सभी प्रमुख इंजिनियरिंग और टेक्निकल भूमिकाओं में नागरिकों को जगह दी गई है. 2002 में शुरू हुए Manpower Contractors Kuwaitization Initiative के तहत तेल क्षेत्र में कुवैती नागरिकों को उचित वेतन, लाभ और स्थिर रोजगार दिया जाता है. 2024 तक, कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (केपीसी) और उसकी सहायक कंपनियों ने कथित तौर पर शीर्ष पदों पर 100% राष्ट्रीय स्टाफिंग हासिल कर ली है यानी सभी शीर्ष पदों पर कुवैत के योग्य नागरिकों को रखा गया है. इन कंपनियों ने कुवैतियों के लिए मुश्किलों को दूर करने, स्थायी नौकरी सुनिश्चित करने और विदेशी स्टाफ पर निर्भरता को धीरे-धीरे खत्म करने के लिए अपने 100% टार्गेट को हासिल कर लिया है. कुवैत में विदेशियों को नौकरियां मिलनी हुई मुश्किल कुवैत में विदेशियों को नौकरियां मिलनी अब मुश्किल होती जा रही हैं. जनशक्ति के लिए सार्वजनिक प्राधिकरण ने चिकित्सा, इंजीनियरिंग, कानून, शिक्षा, अकाउंट्स और फाइनेंस जैसे तकनीकी पदों पर विदेशियों की भर्ती काफी सख्त कर दी है. ऐसा इसलिए क्योंकि इन नौकरियों में कुवैत के नागरिकों को प्राथमिकता दी जा रही है. पहले जहां इन क्षेत्रों में विदेशियों के लिए नौकरी हासिल करना आसान था, वहीं, अब विदेशी उम्मीदवारों को इन नौकरियों के लिए एक ऑनलाइन पेशेवर दक्षता परीक्षा पास करनी पड़ती है. इसके बाद भी आधिकारिक निकायों और विदेश स्थित कुवैती दूतावासों के जरिए, आमतौर पर तीन से पांच सालों के लिए गहन शैक्षणिक और वर्क एक्सपीरिएंस वेरिफिकेशन से गुजरना होता है. भारतीयों पर क्या होगा कुवैतीकरण का असर? गल्फ न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 31 दिसंबर 2024 तक कुवैत में लगभग 10 लाख 7 हजार भारतीय नागरिक रह रहे थे, जो कुल जनसंख्या का लगभग 20% है. 2025 के हालिया आंकड़े बताते हैं कि कुवैत की 5,098,000 की आबादी में 70% लोग प्रवासी हैं, जिनमें से लगभग 29% प्रवासी भारतीय हैं. साल 2025 की पहली तिमाही की लेबर रिपोर्ट में बताया गया है कि कुवैत में लगभग 884,000 भारतीय कार्यरत हैं. बाकी के भारतीय कुवैत में काम करने वालों के परिवार, आश्रित लोग या फिर छात्र हैं. कुवैत में इतनी बड़ी भारतीय आबादी को देखते हुए कुवैतीकरण का सबसे बड़ा असर भारत पर ही होने वाला है. इससे कुवैत में कुशल और गैर-कुशल भारतीयों को नौकनी मिलने में कठिनाई बढ़ेगी. 

खतरे में मिडिल क्लास! अर्थव्यवस्था में गहराते संकट की बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली क्या मिडिल क्साल (Middle Class) कम खर्च कर रहा है? क्या उनके पास पैसा खत्म हो रहा है? ये हम नहीं कह रहे, बल्कि एक्सपर्ट कुछ ऐसी ही चेतावनी दे रहे हैं. मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के सौरभ मुखर्जी ने एक लंबे चौड़े ब्लॉग में बताया कि भारतीय कॉर्पोरेट मुनाफा लड़खड़ा रहा है और इस संकट में अहम रोल मध्यम वर्ग निभा रहा है. उन्होंने कहा कि दिवाली (Diwali) 2023 के बाद से ही भारतीय कंपनियों की इनकम ग्रोथ में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसका बड़ा कारण खपत में आई कमी है और इसकी वजह यह है कि मध्यम वर्ग के भारतीयों के पास पैसे खत्म हो रहे हैं.  भारत का कॉर्पोरेट मुनाफ़ा लड़खड़ा रहा है और इस संकट की जड़ में मध्यम वर्ग हो सकता है।मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के ने एक ब्लॉग में चेतावनी दी है कि सफेदपोश रोज़गार सृजन में गिरावट, वास्तविक मज़दूरी में कमी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उदय, उस मध्यम वर्ग के इंजन को कमज़ोर कर रहे हैं जिसने लंबे समय से भारत की विकास गाथा को गति दी है।  दिवाली 2023 के बाद से, भारतीय कंपनियों की आय वृद्धि में भारी गिरावट आई है, जिसकी वजह खपत में गिरावट है। इसकी वजह यह है कि मध्यम वर्ग के भारतीयों के पास पैसे खत्म हो रहे हैं। आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2024 में जीडीपी के हिस्से के रूप में घरेलू बचत 50 साल के निचले स्तर पर आ गई है, जो आखिरी बार 1977 में देखा गया था। वे लिखते हैं, "होली 2024 तक, मध्यम वर्ग की ऊर्जा खत्म हो चुकी होगी।" मंदी हर जगह दिखाई दे रही है। खपत, जो सकल घरेलू उत्पाद का 60% हिस्सा है, 2021-23 के "बदला लेने वाले खर्च" के दौर के खत्म होने के बाद से कम हो गई है। एसयूवी, आवास और यात्रा में कभी उछाल आया था; अब मांग कम हो रही है। कॉर्पोरेट आय भी इसी राह पर चल रही है — निफ्टी कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025 में सबसे तेज़ गिरावट दर्ज की है। नौकरियाँ एक और भी भयावह कहानी बयां करती हैं। 2020 से पहले एक दशक तक, सफेदपोश नौकरियाँ हर छह साल में दोगुनी होती थीं। वित्त वर्ष 2020 से, यह वृद्धि दर घटकर केवल 3% वार्षिक रह गई है – यानी अब नौकरियों को दोगुना होने में 24 साल लगेंगे। मध्यम वर्ग के रोज़गार की रीढ़, आईटी, सॉफ्टवेयर और रिटेल, स्थिर हो गए हैं। स्वचालन इस गिरावट को और तेज़ कर रहा है। मुखर्जी बताते हैं कि कैसे भारतीय आईटी दिग्गज खुलेआम कर्मचारियों की संख्या में कटौती कर रहे हैं। टीसीएस के सीईओ के. कृतिवासन ने कहा कि जुलाई 2025 में एआई के विस्तार के साथ कंपनी अपने कर्मचारियों की संख्या में 2% (लगभग 12,000 नौकरियाँ) की कटौती करेगी। एचसीएल टेक के सी. विजयकुमार ने आगे कहा कि लक्ष्य "आधे कार्यबल के साथ राजस्व को दोगुना करना" है। आय में कमी भी उतनी ही चिंताजनक है। निफ्टी 50 कंपनियों पर मार्सेलस के विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले आठ सालों में, कर्मचारियों का औसत वेतन मुद्रास्फीति के साथ तालमेल बिठाने में विफल रहा है। 2016 से पहले के दौर के विपरीत, जब वेतन कम से कम बढ़ती लागत के बराबर होता था, आज के सफेदपोश कर्मचारी वास्तविक रूप से गरीब हैं। भारत के 4 करोड़ सफेदपोश कमाई करने वालों के लिए — जो अपने खर्च से लगभग 20 करोड़ नौकरियों का सृजन करते हैं — यह एक ख़तरे की घंटी है। मुखर्जी चेतावनी देते हैं कि जब तक वेतन और रोज़गार सृजन में सुधार नहीं होता, भारत में मध्यम वर्ग की लंबे समय तक तंगी बनी रहेगी, जिससे उसकी आर्थिक गति पर असर पड़ सकता है। मिडिल क्लास के इंजन को रोक रहे 3 कारण सौरभ मुखर्जी के मुताबिक, इस संकट के पीछे तीन बड़े कारणों को बताया है और कहा है कि सफेदपोश रोजगार के अवसरों में गिरावट, वास्तविक मजदूरी में कमी और एआई का बढ़ता दायरा, मध्यम वर्ग के इंजन को कमजोर करने में अहम रोल निभा रहे हैं, जिससे लॉन्गटर्म से भारत के डेवलपमेंट को तेजी मिली है. उन्होंने अपने ब्लॉग में कहा कि कंपनियों की खपत घट रही है, क्योंकि मिडिल क्लास भारतीयों के पास पैसे खत्म हो रहे हैं.  घरेलू बचत 5 दशक में सबसे कम मुखर्जी ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2024 में जीडीपी (GDP) के हिस्से के रूप में घरेलू बचत 50 साल के निचले स्तर पर आ गई है, जो आखिरी बार 1977 में देखने को मिली थी. उन्होंने आगे कहा कि मंदी (Recession) हर जगह दिखाई दे रही है. खपत, जो जीडीपी का 60% हिस्सा है, 2021-23 के के बाद से कम हो गई है. बात SUV की हो या फिर घर या ट्रैवल की, जिनमें कभी तेज उछाल दिख रहा था, इनकी डिमांड अब कम हो रही है. कॉर्पोरेट इनकम भी इसी ट्रैक पर चल रही है और निफ्टी पर लिस्टेड कंपनियों ने FY25 में सबसे तेज गिरावट दर्ज की है. नौकरियों में कमी से बढ़ी मुसीबत अगला कारण विस्तार से बताते हुए सौरभ मुखर्जी ने कहा कि नौकरियां एक और भी भयावह कहानी बयां करती हैं. आंकड़े देखें, तो साल 2020 से पहले एक दशक तक, सफेदपोश नौकरियां हर छह साल में दोगुनी होती थीं, लेकिन FY20 से ही यह ग्रोथ रेट कम होकर सालाना सिर्फ तीन फीसदी रह गया. इसका मतलब है कि अब नौकरियों को दोगुना होने में 24 साल लगेंगे. मिडिल क्लास की रीढ़ माने जाने रोजगार आईटी, सॉफ्टवेयर और रिटेल स्थिर से नजर आ रहे हैं. उन्होंने ऑटोमेशन को इस गिरावट में तेजी का बड़ा कारण बताया है. AI के विस्तार के साइड इफेक्ट को बताने के लिए उन्होंने टाटा ग्रुप की कंपनी टीसीएस का उदाहरण दिया और बताया कि TCS CEO के. कृतिवासन ने जुलाई 2025 में एआई ग्रोथ के साथ कंपनी अपने कर्मचारियों की संख्या में 2% (लगभग 12,000 नौकरियों) की कटौती की बात कही है.  कंपनियों की कमाई घटना चिंताजनक कंपनियों की इनकम में कमी को भी मुखर्जी उतना ही चिंताजनक करार दे रहे हैं, जितना कि बाकी कारण हैं. उन्होंने कहा कि Nifty-50 कंपनियों … Read more

मोदी-पुतिन टेलीफोन वार्ता: दोनों नेताओं ने उठाए महत्वपूर्ण विषय

नई दिल्ली भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक विस्तृत टेलीफोनिक बातचीत हुई। इस वार्ता में दोनों नेताओं ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान यूक्रेन संघर्ष, भारत-रूस द्विपक्षीय एजेंडा, और दोनों देशों के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया। राष्ट्रपति पुतिन ने हाल ही में अलास्का में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ अपनी बैठक के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने इस मुलाकात के प्रमुख बिंदुओं और अपने आकलन को प्रधानमंत्री मोदी के साथ विस्तार से चर्चा की। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के सुसंगत रुख को दोहराते हुए यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए कूटनीति और संवाद के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस दिशा में सभी प्रयासों के लिए भारत के समर्थन को फिर व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया, ताकि आपसी रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ किया जा सके। दोनों ने भविष्य में निकट संपर्क बनाए रखने और नियमित संवाद जारी रखने पर भी सहमति जताई। राष्ट्रपति पुतिन से बातचीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा है कि मेरे मित्र राष्ट्रपति पुतिन को फोन कॉल और अलास्का में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी हालिया बैठक की जानकारी साझा करने के लिए धन्यवाद। भारत ने यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए लगातार आह्वान किया है और इस दिशा में सभी प्रयासों का समर्थन करता है। मैं आने वाले दिनों में हमारे निरंतर संवाद की आशा करता हूं। गौरतलब है कि 15 अगस्त को अलास्का में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच यूक्रेन युद्ध सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, इस वार्ता में युद्ध के संबंध में कोई ठोस या निर्णायक फैसला नहीं हो सका। दूसरी ओर आज (सोमवार ) रात डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच भी बातचीत होने वाली है, और सबकी नजर व्हाइट हाउस पर है।  

ममता सरकार का बड़ा कदम: रोजगार न मिलने तक प्रवासियों को मिलेगी मासिक सहायता

कोलकाता प्रवासी श्रमिकों को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा तोहफा दिया है। सीएम ने प्रवासी मजदूरों के पुनर्वास के लिए योजना शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि नई योजना के तहत प्रवासी श्रमिकों को एक वर्ष तक या जब तक उन्हें रोजगार नहीं मिल जाता, तब तक हर महीने पांच हजार रुपये दिए जाएंगे। कई राज्यों में बांग्ला भाषी प्रवासियों को निशाना बनाए जाने सीएम ममता बनर्जी केंद्र सरकार के खिलाफ मुखर हैं। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि खासकर भाजपा शासित राज्यों में बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों पर हमला पूर्व नियोजित है। भाजपा शासित राज्यों में लगभग 22 लाख प्रवासी श्रमिक और उनके परिवार परेशान हैं। मंत्रिमंडल ने वापस लौटने और अपना जीवन नए सिरे से शुरू करने के इच्छुक प्रवासी श्रमिकों के पुनर्वास में मदद के लिए इस योजना को मंजूरी दे दी है। बंगाली को भाषा के चलते किया जाता है परेशान: सीएम इससे पहले सीएम ममता बनर्जी ने दावा किया था कि बंगाली बोलने वाले भारतीयों को बांग्लादेशी कहकर जबरन बाहर भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि बंगाल के प्रवासी मजदूरों को दूसरी जगहों पर सिर्फ उनकी भाषा की वजह से परेशान किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि जब वह इसका विरोध करती हैं, तो कुछ लोग उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाने की मांग करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार चुनाव आयोग का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने दावा किया कि बंगाल में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) लाने की कोशिश की जा रही है, जिसे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के नाम पर लागू किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ बंगाली भाषी मजदूरों को यह कहकर बांग्लादेश भेजा जा रहा है कि वे भारत के नागरिक नहीं हैं। मैं अपनी आखिरी सांस तक लोगों के बोलने, चलने और उनके मूल अधिकारों को छीने जाने के खिलाफ लड़ती रहूंगी। उन्होंने भाजपा पर देशभर में विभाजन फैलाने का भी आरोप लगाया। 

ट्रंप का ऐलान: वोटिंग मशीन पर रोक, जल्द जारी हो सकता आदेश

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने देश में वोटिंग मशीन से मतदान खत्म करने जा रहे हैं। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर यह बात लिखी है। इसके अलावा उन्होंने ई-मेल से होने वाले मतदान पर भी रोक लगाने की बात कही है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि वह एक एग्जीक्यूटिव आदेश देने वाले हैं। इसके बाद 2026 के मध्यावधि चुनाव में वोटिंग मशीन और ई-मेल से मतदान पर रोक लग जाएगी। ट्रंप काफी अरसे से मशीन और मेल मतपत्रों का विरोध करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि वोटिंग मशीन से चुनावी धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा सकता है। गड़बड़ी की जताई है आशंका डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार सुबह अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर यह पोस्ट लिखी। उन्होंने मशीन से वोटिंग पर चुनाव में गड़बड़ी की आशंका जताई है। हालांकि अभी तक अमेरिकी चुनाव में ऐसी गड़बड़ी कभी देखने को नहीं मिली है। बता दें कि डेमोक्रेट्स मेल मतपत्रों से वोटिंग का समर्थन करते हैं। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया से उन लोगों को मतदान में भाग लेने का मौका मिल जाता है, जो सामान्य तौर पर वोट डालने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे लोगों में बुजुर्ग, दिव्यांग आदि शामिल हैं।  

अमेरिकी चेतावनी: भारत का चीन-रूस के करीब जाना हथियार देने में जोखिम

वाशिंगटन  रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका ने एक बार फिर भारत पर निशाना साधा है। अब वाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा है कि भारत ने रूस और चीन से करीबी बढ़ा ली है, जिसके कारण उसे हथियार बेचना जोखिम भरा हो गया है। वहीं, भारत ने साफ किया है कि तेल खरीदने को लेकर उसे अनुचित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने बताया था कि अमेरिका और यूरोपीय संघ भी रूसी सामान के खरीदार हैं। लेख में वाइट हाउस के व्यापारिक मामलों के सलाहकार पीटर नवारो ने लिखा है नई दिल्ली अब 'रूस और चीन दोनों के करीब जा रहा है।' उन्होंने लिखा, 'अगर भारत एक रणनीतिक साझेदार की तरह हमसे व्यवहार चाहता हैं, तो उसे वैसे काम भी करने चाहिए।' इससे पहले कई मौकों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी रूसी तेल की खरीदी को लेकर भारत पर निशाना साध चुके हैं। नवारो ने लिखा, 'भारत रूसी तेल के सबसे बड़े उपयोगकर्ता के रूप में काम कर रहा है। वह कच्चे तेल को महंगे निर्यात में बदल रहा है और मॉस्को को डॉलर थमा रहा है, जिसे उसकी जरूरत है।' उन्होंने कहा कि रूस और चीन के साथ भारत के करीबी रिश्तों के चलते अमेरिकी सैन्य क्षमताओं को भारत को सौंपना जोखिम भरा है। ट्रंप पहले ही भारत के खिलाफ 25+25 फीसदी टैरिफ लगा चुके हैं। शुरुआती ऐलान में उन्होंने भारत पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था और इसकी वजह BRICS देश और अमेरिका को होने वाला घाटा बताया था। साथ ही उस दौरान रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर जुर्माना भी लगाया गया था। इसके बाद उन्होंने 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क का ऐलान किया और भारत को रूसी तेल खरीदने पर घेरा था। भारत की तरफ से साफ किया जा चुका है कि उसे देश के आर्थिक हित में जो भी जरूरी होगा, वह फैसला लिया जाएगा। साथ ही अमेरिका को दिए एक जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया था कि यूरोपीय संघ के सदस्य कई देश रूस से सामान खरीद रहे हैं। वहीं, ट्रंप से भी जब एक पत्रकार ने रूसी तेल की खरीद के संबंध में सवाल किया, तो वह जवाब देने से बचते नजर आए थे।  

जयशंकर से मुलाकात के बाद चीन का संदेश, सहयोग से बढ़ सकती दोनों देशों की प्रगति

नई दिल्ली  अमेरिका के साथ टैरिफ को लेकर चल रहे विवाद के बीच चीन और भारत के बीच की नजदीकियां बढ़ रही हैं। दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर करने की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इस कड़ी में चीन के विदेश मंत्री वांग यी सोमवार को अपने दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे हैं। वांग यी और भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर के बीच अहम बैठक शुरू हो गई है, जहां जयशंकर ने चीनी अधिकारियों का स्वागत किया है। जयशंकर के साथ बैठक में वांग यी ने कहा, "हमने बॉर्डर पर शांति बनाए रखने की कोशिश की है। …हमने सहयोग बढ़ाने और चीन-भारत संबंधों में सुधार और विकास की गति को और मजबूत करने का विश्वास साझा किया है ताकि हम दोनों देशों के विकास के साथ-साथ एक-दूसरे की सफलता में भी योगदान दे सकें। साथ ही एशिया और विश्व में वह स्थिरता लाई जा सके, जिसकी जरूरत है।” मतभेद विवाद का रूप ना ले- एस जयशंकर इससे पहले एस जयशंकर ने कहा है कि चीन और भारत के संबंध कठिन दौर से गुजरे हैं और अब दोनों देशों की साझेदारी से इसे बेहतर बनाने का प्रयास जारी है। जयशंकर ने कहा, “संबंधों में एक कठिन दौर देखने के बाद, दोनों देश अब आगे बढ़ना चाहते हैं। इसके लिए दोनों पक्षों की ओर से एक स्पष्ट और रचनात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इस प्रयास में, हमें तीन मूल्यों, एक दूसरे का सम्मान, संवेदनशीलता और पारस्परिक हितों को ध्यान में रखना चाहिए।” जयशंकर ने कहा है कि यह ध्यान रखने की जरूरत है कि मतभेद विवाद का रूप ना ले, ना ही प्रतिस्पर्धा संघर्ष में बदले। सीमा पर शांति पर जोर वहीं जयशंकर ने इस दौरान यह भी कहा है कि दोनों देशों के बीच संबंधों में सकारात्मक गति तभी आ सकती है जब सीमा पर शांति स्थापित हो। जयशंकर ने अपनी ओपनिंग स्पीच में कहा, “आप कल हमारे विशेष प्रतिनिधि एनएसए अजीत डोभाल के साथ सीमा संबंधी मुद्दों पर चर्चा करेंगे। यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारे संबंधों में किसी भी सकारात्मक गति का आधार बॉर्डर पर संयुक्त रूप से शांति और सौहार्द बनाए रखने की क्षमता है। यह भी जरूरी है कि तनाव कम करने की प्रक्रिया आगे बढ़े।" टैरिफ पर बातचीत की उम्मीद जयशंकर ने इस दौरान टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के भी संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि जब दुनिया के दो सबसे बड़े देश मिलते हैं, तो कि अंतर्राष्ट्रीय स्थिति पर चर्चा स्वाभाविक है। जयशंकर ने कहा, “हम एक मल्टीपोलर एशिया सहित एक निष्पक्ष, संतुलित और मल्टीपोलर वैश्विक व्यवस्था चाहते हैं। वर्तमान परिवेश में, वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना और उसे बनाए रखना स्पष्ट रूप से जरूरी है।” उन्होंने चीनी विदेश मंत्री संग और भी कई अहम मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद जताई है। PM मोदी जा सकते हैं चीन गौरतलब है कि चीनी विदेश मंत्री दो दिवसीय यात्रा के दौरान मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात करेंगे। इस बीच इस महीने के अंत में पीएम मोदी भी चीन की यात्रा कर सकते हैं। वह 31 अगस्त और 1 सितंबर मे चीन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले सकते हैं। 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसा के बाद यह पीएम मोदी का पहला चीन दौरा होगा।  

टोल वसूली पर सुप्रीम कोर्ट का फटकारा, खराब रोड पर पैसे लेने पर आपत्ति

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को NHAI यानी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से पूछा कि अगर केरल के त्रिशूर में 65 किलोमीटर लंबे राजमार्ग को तय करने में 12 घंटे लगते हैं, तो किसी यात्री को 150 रुपये के टोल (शुल्क) का भुगतान करने के लिए क्यों कहा जाए। प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने यह टिप्पणी एनएचएआई और टोल वसूलने का अधिकार रखने वाली कंपनी ‘गुरुवायूर इंफ्रास्ट्रक्चर’ द्वारा दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए की। याचिका में त्रिशूर के पलियेक्कारा टोल प्लाजा पर टोल संग्रह पर रोक लगाने के केरल उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई है। सीजेआई ने कहा, 'अगर किसी व्यक्ति को सड़क के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में 12 घंटे लगते हैं, तो उसे 150 रुपये क्यों देने चाहिए? जिस सड़क पर एक घंटे का समय लगने की उम्मीद है, उसमें 11 घंटे और लगते हैं और उन्हें टोल भी देना पड़ता है।' सुनवाई के दौरान पीठ को सप्ताहांत में इस मार्ग पर लगभग 12 घंटे तक यातायात जाम रहने की जानकारी दी गई। उच्च न्यायालय ने छह अगस्त को राष्ट्रीय राजमार्ग 544 के एडापल्ली-मन्नुथी खंड की खराब स्थिति और निर्माण कार्यों के कारण उत्पन्न गंभीर यातायात जाम के आधार पर टोल निलंबन का आदेश दिया था। एनएचएआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और टोल वसूल करने का अधिकार रखने वाली कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने कहा, 'हम हर पहलू पर विचार करेंगे, आदेश सुरक्षित रखेंगे।' न्यायमूर्ति चंद्रन ने कहा कि जिस दुर्घटना के कारण यह सड़क अवरुद्ध हुई, वह महज 'दैवीय कृत्य' नहीं था, जैसा कि मेहता ने तर्क दिया, बल्कि एक ट्रक के गड्ढे में गिर जाने के कारण हुई थी। मेहता ने कहा कि जहां अंडरपास का निर्माण कार्य चल रहा था, वहां एनएचएआई ने सर्विस रोड उपलब्ध कराई थी, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि मॉनसून की बारिश ने निर्माण कार्य की गति धीमी कर दी है। उन्होंने एक उदाहरण भी दिया जिसमें टोल को निलंबित करने के बजाय आनुपातिक रूप से कम करने का सुझाव दिया गया था। वहीं, गुरुवायूर इंफ्रास्ट्रक्चर ने कहा कि उसने 60 किलोमीटर का क्षेत्र अपने नियंत्रण में रखा है और उसने सर्विस रोड की रुकावटों के लिए ‘पीएसजी इंजीनियरिंग’ सहित तीसरे पक्ष के ठेकेदारों को दोषी ठहराया। दीवान ने उच्च न्यायालय के फैसले को 'बेहद अनुचित' बताते हुए कहा, 'जब मैं दूसरों को सौंपे गए काम के लिए जिम्मेदार नहीं हूं, तो मेरी आय का स्रोत नहीं रोका जा सकता। मुझे सिर्फ 10 दिनों में ही 5-6 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।' पीठ ने कहा कि टोल वसूली का अधिकार रखने वाली कंपनी को उच्च न्यायालय ने एनएचएआई के खिलाफ नुकसान का दावा करने की अनुमति दे दी है। दीवान ने कहा कि यह अपर्याप्त है, क्योंकि दैनिक रखरखाव लागत जारी है और राजस्व वसूली रुक गई है। शीर्ष अदालत ने 14 अगस्त को टोल वसूली पर रोक लगाने संबंधी उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने के प्रति अनिच्छा जताई थी। उच्च न्यायालय ने छह अगस्त को टोल वसूली को चार सप्ताह के लिए स्थगित करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि जब राजमार्ग का रखरखाव ठीक से नहीं हो रहा है और यातायात जाम बहुत अधिक है, तो वाहन चालकों से टोल नहीं वसूला जा सकता। उच्च न्यायालय ने फैसले में कहा था कि जनता और एनएचएआई के बीच संबंध 'जन विश्वास' का है और सुचारू यातायात प्रवाह बनाए रखने में विफलता ने उस विश्वास को भंग किया है।  

AMU कुलपति नियुक्ति मामले में जज ने लिया अलग रुख, सुनवाई से हटे

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने सोमवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की कुलपति के रूप में प्रोफेसर नईमा खातून की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। चीफ जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ मुजफ्फर उरुज रब्बानी द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें नईमा की नियुक्ति को बरकरार रखा गया था। वह संस्थान के इतिहास में इस पद पर आसीन होने वाली पहली महिला हैं। कोर्ट को बताया गया कि नईमा अपने पति का महत्वपूर्ण वोट पाकर कुलपति (वीसी) बनीं। उस समय उनके पति एएमयू के कुलपति थे। याचिकाकर्ता ने पति द्वारा अपनी पत्नी के पक्ष में दिए गए वोट को ''हितों का टकराव'' बताया। चीफ जस्टिस ने कहा कि आदर्श रूप से कुलपति को नियुक्ति प्रक्रिया में भाग नहीं लेना चाहिए था, बल्कि संस्थान के सबसे वरिष्ठ सदस्य को इसमें भाग लेने देना चाहिए था। जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने सुनवाई से खुद को किया अलग बहरहाल, जस्टिस चंद्रन ने इसी तरह की चयन प्रक्रिया में एक विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में अपनी पिछली भूमिका का हवाला देते हुए मामले से खुद को अलग करने की पेशकश की। उन्होंने कहा, ''जब मैंने फैजान मुस्तफा का चयन किया था, तब मैं सीएनएलयू (कंसोर्टियम आफ नेशनल ला यूनिवर्सिटी) का कुलाधिपति था..इसलिए मैं खुद को सुनवाई से अलग कर सकता हूं।'' जस्टिस चंद्रन को फैसला करने दें- चीफ जस्टिस इस पर सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ''हमें (जस्टिस चंद्रन पर) पूरा भरोसा है। सुनवाई से अलग होने की कोई जरूरत नहीं है। आप पूरी तरह से फैसला कर सकते हैं।'' बहरहाल, चीफ जस्टिस ने कहा, ''मेरे भाई (जस्टिस चंद्रन) को फैसला करने दें। इस मामले को उस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें जिसका हिस्सा जस्टिस चंद्रन नहीं हैं।'' यह याचिका अब एक अलग पीठ के समक्ष जाएगी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने चयन प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाया।