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एक दिन के निलंबन के बाद अमरनाथ यात्रा फिर से शुरू, 7908 श्रद्धालु हुए रवाना

पहलगाम एक दिन के लिए स्थगित होने के बाद अमरनाथ यात्रा शुक्रवार को पहलगाम और गंदेरबल बालटाल दोनों मार्गों पर फिर से शुरू हो गई. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 7908 श्रद्धालुओं का 16वां जत्था आज सुबह जम्मू से रवाना हुआ. ये जत्था उधमपुर जिले से गुजरा. अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़ी सतर्कता बरतते हुए निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की. 7908 श्रद्धालुओं में से 5029 तीर्थयात्री पहलगाम और 2879 तीर्थयात्री बालटाल के लिए 261 वाहनों के काफिले में रवाना हुए, जिनमें हल्के मोटर वाहन और भारी मोटर वाहन शामिल थे. जम्मू- कश्मीर में समुद्र तल से 3888 मीटर की ऊँचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ तीर्थस्थल हर साल हजारों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है. तीर्थयात्री लंबी दूरी या तो दक्षिण कश्मीर में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे पहलगाम मार्ग से या उत्तरी कश्मीर में अधिक सीधे लेकिन ज्यादा खड़ी चढ़ाई वाले 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से यात्रा करते हैं. गुरुवार को भारी बारिश सहित खराब मौसम के कारण यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई थी. लेकिन स्थिति में सुधार होने पर तीर्थयात्रा जारी रखने की अनुमति दे दी गई. जम्मू-कश्मीर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की रिपोर्ट के अनुसार इस बार पंद्रह दिनों की इस यात्रा में अब तक कुल 2.51 लाख तीर्थयात्रियों ने भगवान शंकर के दर्शन किए. यात्रा शुरू होने के बाद से ही देश-विदेश के सभी हिस्सों से श्रद्धालु इस तीर्थस्थल पर आ रहे हैं और आस्था की इस यात्रा के लिए भारी उत्साह व्यक्त कर रहे हैं. साथ ही वे यात्रा की सेवाओं और कुशल प्रबंधन की भी सराहना कर रहे हैं. हालांकि, पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण एहतियात के तौर पर गुरुवार को पहलगाम और बालटाल आधार शिविरों से तीर्थयात्रा अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई थी. बुधवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अमरनाथ यात्रा में रिकॉर्ड भीड़ आने की उम्मीद जताई. उन्होंने अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर चिंता जताई, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. मुख्यमंत्री ने कहा कि ये पवित्र यात्रा निर्धारित समय 9 अगस्त तक जारी रहेगी. उन्होंने इस दौरान भक्तों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई. अमरनाथ यात्रा अमरनाथ गुफा की वार्षिक तीर्थयात्रा है, जहां भक्त भगवान शिव की पूजा करते हैं. दक्षिण कश्मीर में 3880 मीटर ऊंचे पवित्र गुफा मंदिर के लिए 38 दिवसीय वार्षिक अमरनाथ तीर्थयात्रा 3 जुलाई को शुरू हुई और 9 अगस्त को समाप्त होगी.

पहलगाम अटैक पर भारत की कूटनीति ने दिखाया असर, थरूर आगे, मुनीर पीछे

नई दिल्ली पाकिस्तान ने पहलगाम अटैक कराया. आतंकियों को कश्मीर भेजकर हिंदू टूरिस्टों की हत्या करवाई. सोचा कि वो बच जाएगा. मगर ऐसा हुआ नहीं. पहलगाम अटैक के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर उससे बदला लिया. इसके बाद पाकिस्तान को इंटरनेशनल लेवल पर बेइज्जत करने की ठानी. इसके लिए विदेशों में डेलिगेशन भेजा. अब उस ऑपरेशन सिंदूर वाले डेलिगेशन की कोशिशों का परिणाम सामने आया है. अमेरिका ने पाकिस्तानी आतंकी संगठन टीआरएफ यानी द रेजिस्टेंस फ्रंट पर चाबुक चलाया है. अमेरिका ने टीआरएफ को आतंकी संगठन घोषित किया है. अमेरिका के इस कदम से भारत की कूटनीतिक जीत हुई है. यह कदम पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में एक अहम जीत माना जा रहा है. इसमें सबसे बड़ा रोल शशि थरूर का है. जी हां, शशि थरूर ही पीएम मोदी के वो दूत थे, जो ऑपरेशन सिंदूर के डेलिगेशन को लीड कर रहे थे. शशि थरूर ने अमेरिका जाकर सबूत के साथ पाकिस्तान की बैंड बजाई. भारत का पक्ष मजबूती से रखा. इसका असर अब सबके सामने है कि अमेरिका को भी भारत की बात मानने पर मजबूर होना पड़ा. और आखिरकार उसने टीआरएफ को आतंकी संगठन घोषित कर दिया. थरूर ने मुनीर का गेम बिगाड़ा वैसे भारत की कोशिशों पर मिट्टी डालने की पाकिस्तान ने कम कोशिश नहीं की. पहलगाम अटैक के बाद आसिम मुनीर ट्रंप के दरबार पहुंचे थे. वह हलाल वाला मांस खाते ही रह गए. उधर कांग्रेस सांसद शशि थरूर भारत की झोली में बड़ी जीत डाल गए. पाकिस्तान ने आसिम मुनीर को भेजकर चतुराई दिखाई थी. उसने सोचा कि अमेरिका उसका साथ देगा, मगर भारत ने जिस मजबूती से अपना पक्ष रखा, उसके सामने पाकिस्तान की सारी चाल फेल हो गई. यहां बताना जरूरी है कि एलटीएफ लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रॉक्सी संगठन है. उसने 2019 में जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया है. अमेरिका ने अपने एक्शन में क्या कहा अमेरिका ने बयान जारी कर कहा, ‘आज विदेश विभाग ने द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को विदेशी आतंकवादी संगठन (फॉरेन टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन ) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (स्पेशल डेजिग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट) के रूप में नामित किया है. टीआरएफ, लश्कर-ए-तैयबा का एक फ्रंट और मुखौटा संगठन है. उसने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम हमले की जिम्मेदारी ली थी. उसमें 26 नागरिक मारे गए थे. यह 2008 के मुंबई हमलों के बाद भारत में नागरिकों पर सबसे घातक हमला था, जिसे लश्कर ने अंजाम दिया था. टीआरएफ ने भारतीय सुरक्षा बलों पर कई हमलों की भी जिम्मेदारी ली है.’ कैसे भारत ने पाकिस्तान को दी एक और चोट अमेरिका के इस फैसले से भारत की उस बात पर मुहर लगी है कि पहलगाम अटैक के पीछे पाकिस्तान का हाथ है. पाकिस्तान टीआरएफ को संरक्षण देता है. इससे पहले खुफिया रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई थी कि पाकिस्तानी नेता और सैन्य अफसरों ने ही पहलगाम अटैक का आदेश दिया है. बहरहाल, अमेरिका का टीआरएफ को आतंकी संगठन घोषित करना भारत की कूटनीति की जीत है. शशि थरूर की अगुवाई में भारत ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थन को बेनकाब किया, जबकि आसिम मुनीर की मुलाकात केवल औपचारिकता बनकर रह गई. यह भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक ऐतिहासिक कदम है. पहलगाम अटैक क्या है 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था. पहलगाम अटैक में 26 टूरिस्टों की हत्या हुई थी. टीआरएफ ने ही पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी. पाकिस्तान से आए इन आतंकियों ने बैसरन घाटी में गोलियों की बौछार की थी. मारने से पहले आतंकियों ने टूरिस्टों से धर्म पूछा था. इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर से पहलगाम अटैक का बदला लिया था.

SC सर्टिफिकेट की नई गाइडलाइन, अन्य धर्मों के प्रमाण पत्र होंगे रद्द

मुंबई  महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को कहा कि अगर हिंदू, बौद्ध और सिख धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म के व्यक्ति ने अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र हासिल किया है, तो उसे रद्द कर दिया जाएगा। फडणवीस ने विधान परिषद में कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने सरकारी नौकरियों जैसे आरक्षण का लाभ हासिल किया है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करके चुनाव जीता है, तो उसका चुनाव रद्द कर दिया जाएगा। फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार बलपूर्वक या धोखे से किए जा रहे धर्मांतरण से संबंधित मामलों से निपटने के लिए कड़े प्रावधान लाने पर विचार कर रही है और इस संबंध में जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। फडणवीस ने विधान परिषद में एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने ऐसे मामलों से निपटने के संबंध में सिफारिशें देने के लिए पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था और उसने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। उन्होंने कहा कि सरकार अध्ययन करेगी और आवश्यक बदलाव कर ऐसे प्रावधान लाएगी, जिससे बलपूर्वक या धोखे से धर्मांतरण पर लगाम लगे। मुख्यमंत्री ने कहा, 'ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन कड़े प्रावधानों का सुझाव देने के लिए एक पैनल का गठन किया गया है। राज्य सरकार ऐसे मामलों से निपटने के लिए कड़े प्रावधान लाने की मंशा रखती है और हम जल्द ही इस पर फैसला लेंगे।' गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने सोमवार को कहा था कि राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र में धर्मांतरण विरोधी कानून लाया जाएगा और यह अन्य राज्यों के समान कानूनों से ज्यादा सख्त होगा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता अमित गोरखे ने दावा किया कि ‘पहचान छिपाने वाले ईसाई’ धार्मिक स्वतंत्रता का दुरुपयोग कर रहे हैं और लोग अनुसूचित जाति श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ उठाते हैं लेकिन दूसरे धर्मों को मानते हैं। उन्होंने कहा कि ऊपरी तौर पर ये लोग अनुसूचित जाति से होते हैं और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ उठाते हैं, चुनावों के दौरान इसका इस्तेमाल करते हैं लेकिन गुप्त रूप से अलग धर्म का पालन करते हैं। भाजपा नेता और विधान परिषद की निर्दलीय सदस्य चित्रा वाघ ने कहा कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां पति ने अपना धर्म छिपाकर धोखे से शादी की। उन्होंने सांगली का एक मामला बताया जहां एक महिला की शादी ऐसे परिवार में कर दी गई, जो गुप्त रूप से ईसाई धर्म का पालन करता था। चित्रा ने यह भी दावा किया कि महिला को प्रताड़ित किया गया और उसे अपना धर्म बदलने के लिए मजबूर किया गया, जिस वजह से सात महीने की गर्भवती महिला ने आत्महत्या कर ली। फडणवीस ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपने धर्म का पालन कर सकता है और अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन कर सकता है लेकिन अगर उन्हें मजबूर किया जाता है, धोखा दिया जाता है या किसी भी तरह का प्रलोभन दिया जाता है तो कानून इसकी अनुमति नहीं देता।

बेंगलुरु के 40 प्राइवेट स्कूलों को बम की धमकी, जांच में जुटी पुलिस और बम निरोधक दस्ता

दिल्ली / बेंगलुरु दिल्ली में आज फिर 20 से ज्यादा स्कूलों में बम की धमकी सामने आई है. इनमें पश्चिम विहार इलाके का एक स्कूल, रोहिणी सेक्टर तीन के अभिनव पब्लिक स्कूल समेत शहर के कुल 20 से अधिक स्कूलों को धमकी भरा मेल आया है. इधर बेंगलुरु के स्कूलों में भी 40 स्कूलों को थ्रेट मेल आए हैं. धमकी मिलने के बाद से हड़कंप मच गया. जानकारी मिलते ही फायर विभाग और दिल्ली पुलिस मौके पर पहुंच गए और परिसरों की जांच शुरू कर दी. अब तक दस से ज्यादा स्कूलों में जांच पूरी हो चुकी है. साथ ही अब दिल्ली पुलिस मेल के ओरिजिन की जांच में भी जुटी है. इस बीच कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के 40 प्राइवेट स्कूलों में भी बम की धमकी मिली है. इनमें आरआर नगर और केंगेरी के स्कूलों में थ्रेट ईमेल मिले. पुलिस इसकी जांच कर रही है. इन स्कूलों को मिली बम से उड़ाने की धमकी दिल्ली पुलिस ने बताया कि आज सुबह दिल्ली के तीन स्कूलों पश्चिम विहार स्थित रिचमंड ग्लोबल स्कूल, रोहिणी के अभिनव पब्लिक स्कूल और रोहिणी के द सॉवरेन स्कूल को ईमेल के जरिए बम धमकी मिली है। पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, धमकी भरे ईमेल में स्कूल परिसरों में विस्फोटक होने का दावा किया गया है। हालांकि, अभी तक किसी भी स्कूल में संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की पुष्टि नहीं हुई है। दिल्ली पुलिस की टीमें, बम निरोधक दस्ते और फायर ब्रिगेड के साथ मिलकर प्रभावित स्कूलों में तलाशी अभियान चला रही हैं। फायर विभाग ने नौ स्कूलों में बम की कॉल की पुष्टि की है। इनमें दिलशाद गार्डन स्थित क्वीन ग्लोबल, द्वारका सेक्टर 19 स्थित सेंट थॉमस, पश्चिम विहार स्थित रिचमंड पब्लिक स्कूल, पुष्पांजलि स्थित गुरुनानक स्कूल, रोहिणी सेक्टर 3 स्थित अभिनव पब्लिक स्कूल, सावरेन पब्लिक स्कूल, द्वारका सेक्टर 17 स्थित जीडी गोयंका स्कूल, रोहिनी सेक्टर नौ स्थित दिल्ली इंटरनेशनल स्कूल शामिल हैं। साइबर टीम कर रही जांच एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि सभी स्कूलों को खाली करवा लिया है और अभिभावकों को सूचित कर दिया गया है। स्थिति नियंत्रण में है। पुलिस ने यह भी कहा कि धमकी भरे ईमेल की जांच साइबर क्राइम यूनिट द्वारा की जा रही है ताकि प्रेषक की पहचान की जा सके। इधर, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना ने ट्वीट कर राजधानी में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने लिखा- आज 20 से ज्यादा स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकियां मिली हैं! जरा सोचिए, बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों को कितना सदमा झेलना पड़ रहा होगा. दिल्ली में भाजपा के हाथ में शासन के चारों इंजन हैं, फिर भी वह हमारे बच्चों को कोई सुरक्षा नहीं दे पा रही है. ये स्तब्ध करने वाला है. गौरतलब है कि बीते कुछ समय से दिल्ली में लगातार स्कूलों और कॉलेजों को बम से उड़ाने की धमकियां मिल रही हैं. इन धमकियों से छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों में दहशत है. हैरानी की बात यह है कि ये धमकियां ईमेल के जरिए भेजी जा रही हैं, जिन्हें लेकर दिल्ली पुलिस और बम निरोधक दस्ते सतर्क हो गए हैं.  इसी हफ्ते के पहले तीन दिन में 11 स्कूल और एक कॉलेज में ऐसा ही मेल आया था. इसके बाद आज शुक्रवार को फिर से 20 से अधिक स्कूलों को मेल आया है.  रिचमंड ग्लोबल स्कूल को धमकी पश्चिम विहार इलाके के प्रसिद्ध रिचमंड ग्लोबल स्कूल को भी बम की धमकी वाला मेल मिला है. इसके बाद स्कूल प्रशासन ने तुरंत पुलिस और अग्निशमन विभाग को इसकी सूचना दी. दिल्ली फायर सर्विस के अनुसार, फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचकर जांच में जुटी हैं. सुरक्षा के मद्देनजर स्कूल परिसर को खाली करवाया गया है और पूरे इलाके को सील कर दिया गया है. अभिनव पब्लिक स्कूल को भी धमकी रोहिणी सेक्टर 3 स्थित अभिनव पब्लिक स्कूल को भी इसी तरह का धमकी भरा मेल मिला है. पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और बम निरोधक दस्ते को मौके पर तैनात किया गया है. संबंधित अधिकारियों के अनुसार, अभी तक किसी भी स्थान से कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है, लेकिन एहतियात के तौर पर स्कूल परिसर की पूरी तरह तलाशी ली जा रही है. पुलिस का बयान दिल्ली पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है. प्रशासन ने कहा है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. साथ ही, भेजे गए मेल की पड़ताल के लिए साइबर सेल को भी जांच में लगाया गया है.  

टूटी सड़क की शिकायत का मिलेगा फौरन हल, सरकार ने लॉन्च किया खास ऐप

नई दिल्ली ऐसा कितनी बार होता है कि हमें टूटी सड़क या खुला गड्ढा दिख जाता है लेकिन हम लोग चाह कर भी उसके लिए कुछ नहीं कर पाते। अक्सर इस तरह के मामलों की शिकायत करने का प्रोसेस इतना मश्क्कत भरा होता है कि कोई भी उसमें अपना समय खराब नहीं करना चाहता। हालांकि अब ऐसा और नहीं होगा। अब अगर आपको भी कहीं कोई टूटी सड़क या गड्ढा दिख जाए, तो आप अपने फोन से भी उसकी शिकायत संबंधित विभाग को कर पाएंगे। इसके लिए आपके फोन में सिर्फ एक सरकारी ऐप होनी चाहिए। चलिए डिटेल में इसके बारे में डिटेल में जानते हैं कि आखिर इस ऐप का इस्तेमाल करना कैसे है? इंस्टॉल कर लें समीर ऐप टूटी हुई सड़क या गड्ढों की रिपोर्ट करने के लिए आपको अपने फोन में भारत सरकार के सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा बनाई गई Sameer ऐप को इंस्टॉल करना होगा। यह ऐप मुख्य रूप से नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी कि AQI की हर घंटे की रिपोर्ट देने के लिए बनाई गई थी। इस ऐप में इसमें एयर पॉल्यूशन समेत टूटी हुई सड़क या गड्ढे की शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी है। इसमें यूजर अपनी समस्या फोटो के साथ CPCB को सीधे भेज सकता है। बता दे कि यह ऐप Android और iOS दोनों प्लेटफार्म पर मौजूद है और यह इस ऐप की मदद से लोगों को स्वच्छ हवा के प्रति जागरूक किया जाता है। ऐसे कर पाएंगे शिकायत अगर आप भी अपने एरिया की टूटी सड़क या गड्ढे की शिकायत करना चाहते हैं, तो आप समीर ऐप पर नीचे बताए स्टेप्स को फॉलो करके आसानी से शिकायत कर सकते हैं। बता दें कि टूटी हुई सड़के और खुले गड्ढे भी प्रदूषण की मुख्य वजहों में से एक हैं, इस वजह समीर ऐप पर आपको इनकी शिकायत करने का ऑप्शन मिल जाता है। इसके लिए आप:     प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से Sameer ऐप को डाउनलोड कर लें।     इस ऐप में शिकायत दर्ज करने के लिए या शिकायत को ट्रैक करने के लिए पहले लॉग इन करना होगा।     अगर आपका इस ऐप पर अकाउंट नहीं है, तब भी आप Log in पर क्लिक करके अपना नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दर्ज करके ऐप पर खुद को रजिस्टर कर पाएंगे।     इसके बाद आपको ऐप में नीचे दूसरे नंबर पर Complaint का ऑप्शन मिल जाएगा।     इसके बाद आपको Add New Complaint पर टैप करना होगा और जरूरी डिटेल्स को भरना होगा।     बता दें कि Add New Complaint पर टैप करने पर आपसे फोन का कैमरा इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी जा सकती है। उसे Allow जरूर कर दें।     इसके बाद टूटी सड़का या गड्डों के लिए Unpaved Road/Pit को शिकायत की कैटेगरी में चुनना होगा। इसके बाद आपको सड़क या गड्ढे की फोटो को अटैच करना होगा और लोकेशन, राज्य, शहर, इलाके का पता और पिनकोड जैसी जानकारी भरनी होगी।     इसके बाद आप अपनी शिकायत दर्ज कर पाएंगे और शिकायत करने पर मिलने वाले नंबर के जरिए उसे ट्रैक भी कर पाएंगे।

एक दशक पहले भारत ने कह दिया था क‍ि M1 Abrams टैंक किसी काम का नहीं, अब US नेवी भी बोली

नईदिल्ली  एक दशक पहले भारत ने साफ कह दिया था क‍ि M1 Abrams टैंक हमारे किसी काम का नहीं है. वजह भी बहुत सीधी थी. इस टैंक का भारी-भरकम होना. रखरखाव में झंझट, ईंधन की ज्‍यादा खपत, और भारत के पहाड़ी इलाके में ऑपरेशन के लिहाज से बिल्कुल भी फिट नहीं. भारत ने तब T-90 टैंक और स्वदेशी अर्जुन टैंक को ज्यादा बेहतर विकल्प माना था. अब वही बात अमेरिका की मरीन कॉर्प्स ने भी मान ली है. साफ कह द‍िया क‍ि M1 Abrams टैंक क‍िसी काम के नहीं हैं. नेशनल इंट्रेस्‍ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी मरीन कॉर्प्स ने बड़ा ऐलान किया क‍ि अब वे M1 Abrams टैंक नहीं चलाएंगे. इस बदलाव के पीछे था उनका 10 साल का ट्रांसफॉर्मेशन प्लान. मरीन कॉर्प्स ने तय किया कि उन्हें फिर से समुद्री युद्ध की ओर लौटना है, ना कि दूसरी थल सेना बनना है. और इसके लिए सबसे पहले उन्होंने अपने 1300 टैंक हटा दिए. भारत ने पहले ही क्यों मना किया था? M1 Abrams बहुत भारी था, जो कि भारत के पहाड़ी और रेतीले इलाकों में चलाना मुश्किल था. इसका मेंटेनेंस भी बहुत महंगा और जटिल था, खासतौर पर जब भारत जैसे देश में लॉजिस्टिक्स की चुनौती बड़ी हो. तेल बहुत पीता था, जिससे लंबी दूरी तक ऑपरेशन करना भारी पड़ता. इसके मुकाबले T-90 हल्का, तेज और सस्ता था, और भारतीय सेना की ज़रूरतों के ज्यादा करीब था. साथ ही भारत ने अपने अर्जुन टैंक को विकसित करना भी जारी रखा, जो अब काफी हद तक उन्नत हो चुका है. अब अमेरिका क्या सोच रहा है? अब जब M1 Abrams टैंक हट चुके हैं, तो अमेरिका के कुछ अफसर M10 Booker टैंक को अपनाने की बात कर रहे हैं. यह टैंक हल्का है और मौजूदा जरूरतों के मुताबिक ज्यादा फुर्तीला भी.

क्या मोदी राजनीति से हटेंगे? मोहन भागवत के बयान से गरमाई सियासत

कर्नाटक  कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 75 वर्ष पूरे होने पर उनके राजनीतिक संन्यास का संकेत दे दिया है। इसके साथ ही सिद्धरमैया ने कहा कि यह किसी दलित को अगला प्रधानमंत्री बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास ‘सुनहरा मौका' है। वह कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र के बयान का जवाब दे रहे थे, जिन्होंने कांग्रेस को चुनौती दी थी कि वह पिछड़े वर्गों और अनुसूचित जाति/जनजाति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित करने के लिए अपने अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करे। सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘मल्लिकार्जुन खरगे न सिर्फ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के अध्यक्ष हैं बल्कि एक सम्मानित राजनेता भी हैं। उनका उत्थान 'दलित कार्ड' खेलने का नहीं, बल्कि दशकों के समर्पण, ईमानदारी और जनसेवा का नतीजा है। उन्हें कभी राजनीतिक संरक्षण की ज़रूरत नहीं पड़ी। और मैं साफ कर दूं: कांग्रेस में, यह हमारी पार्टी तय करती है कि प्रधानमंत्री पद के लिए हमारा उम्मीदवार कौन होगा, भाजपा नहीं।'' उन्होंने विजयेंद्र से कांग्रेस पर समय गंवाने के बदले अपनी पार्टी पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह करते हुए एक बयान में कहा, ‘‘मोहन भागवत ने पहले ही मोदी के संन्यास का संकेत दे दिया है, अब वह 75 साल के हो चुके हैं। यह भाजपा के लिए किसी दलित को अगला प्रधानमंत्री बनाने का सुनहरा अवसर है। इसकी शुरुआत आप से होनी चाहिए।'' उन्होंने कहा, ‘‘दूसरों को उपदेश देने के बदले, आप प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में भाजपा को किसी दलित नेता का नाम क्यों नहीं सुझाते? चाहे वह गोविंद करजोल हों या चलवाडी नारायणस्वामी (राज्य भाजपा नेता), अगर आप उनके नाम सुझाएंगे, तो मैं आपको सबसे पहले बधाई दूंगा।'' सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘लेकिन मुझे कोई भ्रम नहीं है। दलितों और पिछड़े वर्गों के साथ भाजपा का व्यवहार हमेशा दिखावटी रहा है। आपका इतिहास और पाखंड खुद ही सब कुछ बता देता है।''   

मुस्लिम से हिंदू बने आरिफ का बाबा बागेश्वर से तीखा सवाल, वायरल हुआ मजेदार जवाब

लदन  बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री  जिन्हें लोग बाबा बागेश्व के नाम से जानते हैं, एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो कथित तौर पर बाबा बागेश्वर के ब्रिटेन दौरे का है, जहां पाकिस्तान में जन्मे  मोहम्मद आरिफ अजाकिया  ने उनसे सार्वजनिक मंच पर एक अहम सवाल पूछ लिया। वीडियो में मोहम्मद आरिफ अजाकिया कहते हैं कि उनका जन्म पाकिस्तान में हुआ, जबकि उनके माता-पिता भारत में पैदा हुए थे और 1947 के बंटवारे के बाद पाकिस्तान चले गए थे। उन्होंने बताया कि वह मुस्लिम परिवार में पैदा हुए, लेकिन  भागवत गीता पढ़ने के बाद उन्होंने हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया। आरिफ अजाकिया ने बाबा बागेश्वर से पूछा “आप सब खुशनसीब हैं कि सनातन में पैदा हुए, लेकिन मैं मुस्लिम परिवार में जन्मा हूं। गीता पढ़कर हिंदू बना हूं, पर लोग मुझसे कहते हैं कि मुझे अपना नाम बदल लेना चाहिए। क्या हिंदू होने के लिए नाम बदलना जरूरी है? नाम बदलने में बड़ी दिक्कत आती है बच्चों के दस्तावेज़, जन्म प्रमाण पत्र, सब जगह नाम बदलवाना होता है। क्या नाम बदले बिना मैं हिंदू नहीं रह सकता?” इतना ही नहीं, आरिफ ने यह भी पूछा कि,  “आपने कहा कि भारतीय बनकर रहो। तो क्या पाकिस्तान में जन्मा शख्स भारतीय नहीं हो सकता, अगर वह दिल से हिंदुस्तानी हो?”    इस पर बाबा बागेश्वर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हिंदुत्व कोई धर्म नहीं है, यह मानवता की विचारधारा है। इसमें नाम, रंग, रूप या देश से फर्क नहीं पड़ता। आप गीता का पालन कर रहे हैं तो आप हमारे हैं। रहीम-रसखान के गीत हम गाते हैं, और अब्दुल कलाम को सलाम करते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि, “अगर आपने खुद को हिंदू मान लिया तो हमारे लिए इतना काफी है। नाम बदलें या न बदलें, अगर विचार बदल गए तो आप हमारे हैं। और जो आपने पूछा कि पाकिस्तान में जन्मा भारतीय नहीं हो सकता? तो सच ये है कि पाकिस्तान भी कभी हमारा ही था। 1947 के पहले आप हमारे थे, बंटवारे ने एक दीवार खड़ी कर दी। आज भी अगर पाकिस्तानियों का दिल काटेंगे तो भारतीय ही निकलेगा।” बाबा बागेश्वर के इस जवाब पर वहां मौजूद लोगों ने खूब तालियां बजाईं। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को खूब शेयर कर रहे हैं और बाबा बागेश्वर के बेबाक अंदाज की तारीफ कर रहे हैं। हालांकि, इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।  

क्या बच पाएंगी निमिषा प्रिया? भारत ने यमन में चलाए कूटनीतिक प्रयास तेज़ किए

केरल  केरल की रहने वाली निमिषा प्रिया की यमन में फांसी की सजा भले ही कुछ समय के लिए टल गई हो, लेकिन खतरा अभी बरकरार है। भारत सरकार के हस्तक्षेप के बाद 16 जुलाई को दी जाने वाली फांसी को स्थगित कर दिया गया और अब दोनों परिवारों के बीच आपसी सहमति से समाधान निकालने पर बातचीत हो रही है। भारत सरकार ने गुरुवार को निमिषा प्रिया के मामले को संवेदनशील बताते हुए कहा है कि उसने वकील समेत कई तरह की व्यवस्था की है। विदेश मंत्रालय ने बताया है कि इस मामले में भारत कुछ मित्र देशों की सरकारों से भी संपर्क में है। विदेश मंत्रालय ने नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में निमिषा मामले पर कहा, ''यह एक संवेदनशील मामला है और भारत सरकार इस मामले में हर संभव मदद की पेशकश कर रही है। हमने कानूनी सहायता प्रदान की है और परिवार की सहायता के लिए एक वकील नियुक्त किया है। हमने नियमित रूप से कांसुलर यात्राओं की भी व्यवस्था की है और इस मुद्दे को सुलझाने के लिए स्थानीय अधिकारियों और परिवार के सदस्यों के साथ लगातार संपर्क में हैं।" सरकार ने आगे कहा कि हाल के दिनों में निमिषा प्रिया के परिवार को दूसरे पक्ष के साथ आपसी सहमति से समाधान निकालने के लिए और समय देने के लिए ठोस प्रयास किए गए। इसकी वजह से यमनी अधिकारियों ने सजा की तामील को स्थगित कर दिया, जो 16 जुलाई, 2025 को दी जानी थी। विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, "हम मामले पर लगातार नजर रख रहे हैं और हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं। हम कुछ मित्र देशों की सरकारों के संपर्क में भी हैं।" बता दें कि निमिषा प्रिया केरल की रहने वाली थी। वह कई साल पहले यमन गई थी, जहां पर बिजनेस पार्टनर तलाल अब्दो महदी के साथ उसने एक क्लीनिक खोली थी। बाद में तलाल ने निमिषा को परेशान करना शुरू कर दिया और उसे अपनी पत्नी बताने लगा। कई दिनों तक उत्पीड़न झेलने के बाद निमिषा ने जब वापस अपना पासपोर्ट मांगा तो उसने देने से इनकार कर दिया। इसके बाद निमिषा ने तलाल से पासपोर्ट लेने के लिए उसे सिर्फ बेहोश करने की कोशिश की, लेकिन नशीली दवा ज्यादा हो गई और इससे उसकी मौत हो गई। बाद में निमिषा को हत्या का दोषी माना गया और उसे फांसी की सजा सुनाई गई।  

आतंकी हमले पर ओवैसी का तीखा बयान, बोले: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा लें नैतिक जिम्मेदारी

संभाजीनगर पहलगाम आतंकी हमले को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से इस्तीफा मांगा है। उन्होंने कहा कि अब जिम्मेदारी तो इस हमले की मनोज सिन्हा ने ले ली है, उन्हें अब इस्तीफा भी दे देना चाहिए। AIMIM के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को कहा कि चूंकि जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पहलगाम आतंकी हमले में सुरक्षा विफलता की जिम्मेदारी ली है। इसलिए उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र के नांदेड़ में पत्रकारों से कहा कि वह संसद के आगामी मॉनसून सत्र में मोदी सरकार से 22 अप्रैल को पहलगाम के पास बैसरन में हुए आतंकी हमले पर जवाब मांगेंगे, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी उस बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, जिसने पहलगाम हमले के बाद भारत के आतंकवाद-विरोधी रुख और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को दुनिया के सामने प्रमुखता से रखने के लिए बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब और अल्जीरिया की यात्रा की थी। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हाल में एक अखबार को दिए साक्षात्कार में स्वीकार किया कि पहलगाम हमला खुफिया विफलता के कारण हुआ और वह इसकी जिम्मेदारी लेते हैं। इसी को लेकर ओवैसी ने कहा कि अब उन्हें इस्तीफा भी दे देना चाहिए। इस बारे में पूछे जाने पर ओवैसी ने कहा,‘अगर उन्होंने (जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने) जिम्मेदारी ली है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। पहलगाम में 26 भारतीयों को उनका धर्म पूछकर बेरहमी से मार डाला गया क्योंकि वे हिंदू थे। अगर उपराज्यपाल को इतनी पीड़ा हो रही है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘26 लोगों की हत्या उनका धर्म पूछकर कर दी गई और आप (जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल) यह बात तब कह रहे हैं जब आपका कार्यकाल समाप्त होने वाला है।’ संसद में उठाएंगे मसला, पूछेंगे आतंकी कैसे पहुंचे? ओवैसी ने कहा, ‘हम मोदी सरकार से पूछेंगे कि पहलगाम हमले के लिए कौन जिम्मेदार है। इस हमले के लिए कौन जवाबदेह है? आतंकवादी वहां कैसे पहुंचे और मौके पर पुलिस सुरक्षा क्यों नहीं थी? हम आगामी संसद सत्र में सरकार से ये सवाल पूछेंगे।’ उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा में चूक के कारण हुआ और सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।