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सिर्फ 12 महीनों में भारत बना डिफेंस पॉवरहाउस, चीन-पाकिस्तान के लिए बनी सिरदर्द कहानी

नई दिल्ली भारत अब सिर्फ सीमाओं की रक्षा करने वाला देश नहीं, बल्कि रक्षा उत्पादन की दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। 2024-25 में देश का डिफेंस प्रोडक्शन ₹1.50 लाख करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है – जो न सिर्फ आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग है, बल्कि चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अब रणनीति, तकनीक और ताकत में किसी से पीछे नहीं। तेज़ी से बढ़ती सैन्य क्षमता और अत्याधुनिक तकनीकों से लैस भारत अब ‘निर्माण से निर्यात’ की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। बीते 5 वर्षों में लगभग दोगुनी हुई डिफेंस उत्पादन क्षमता राजनाथ सिंह ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर इस प्रगति को साझा करते हुए बताया कि 2019-20 में रक्षा उत्पादन जहां ₹79,071 करोड़ पर था, वहीं अब इसमें 90% की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने इस सफलता के लिए डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन, सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनियों और निजी रक्षा उद्योग के समन्वित प्रयासों को श्रेय दिया। उन्होंने लिखा, “इस शानदार उपलब्धि में भारत की आत्मनिर्भरता की झलक है। सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र और निजी कंपनियों ने मिलकर जिस तरह डिफेंस इकोसिस्टम को खड़ा किया है, वह प्रशंसनीय है।” ‘ऑपरेशन सिंदूर’ – आधुनिक रक्षा टेक्नोलॉजी की झलक जहां एक ओर भारत का रक्षा उत्पादन ग्राफ ऊंचाई छू रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत की सैन्य क्षमताओं का दम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में साफ झलका। 7 मई 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने इस जवाबी ऑपरेशन की शुरुआत की थी, जिसमें पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी ठिकानों को सटीकता से निशाना बनाया गया।    DRDO ने दिखाई तकनीकी बढ़त DRDO प्रमुख समीर कामत ने इस ऑपरेशन में इस्तेमाल हुई भारत की रक्षा तकनीकों को विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि इस सैन्य कार्रवाई में जिन अत्याधुनिक प्रणालियों का उपयोग किया गया, उनमें शामिल थीं: -ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, जो उच्च गति और सटीकता के साथ लक्ष्य को ध्वस्त करती है। -AI-आधारित डिसीजन सपोर्ट सिस्टम, जिसने रीयल टाइम में रणनीतिक निर्णय लेने में सेना की मदद की। -एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली, जिसने हवाई क्षेत्रों में दुश्मन की हरकतों पर सटीक प्रहार किया। समीर कामत ने इसे भारत की रक्षा टेक्नोलॉजी में हुई प्रगति का स्पष्ट संकेत बताया और कहा कि “अब भारत किसी पर निर्भर नहीं, बल्कि दूसरों को तकनीक मुहैया कराने वाला देश बनता जा रहा है।” आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी छलांग भारत का डिफेंस सेक्टर अब सिर्फ हथियार निर्माण तक सीमित नहीं है। यह रिसर्च, इनोवेशन, एक्सपोर्ट और तकनीकी आत्मनिर्भरता के रास्ते पर तीव्र गति से अग्रसर है। 2024-25 में इस सेक्टर में न केवल रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया गया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की क्षमताओं को मान्यता मिली है।    

अमेरिका-भारत में तनाव बढ़ाने की कोशिश! असीम मुनीर के गुप्त नेटवर्क का खुलासा

वाशिंगटन  पाकिस्तान एक बार फिर अपनी चालबाज़ी से न सिर्फ भारत के खिलाफ, बल्कि अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक समीकरण बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है। ताज़ा खुलासे में सामने आया है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी अरबपति परिवार से रिश्ते मजबूत कर, डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को भारत-विरोधी मोड़ देने की साजिश रची। इस नेटवर्क के केंद्र में है एक शख्स  जैकरी विटकॉफ जो ट्रंप के बेहद करीबी और उनके कारोबारी सर्कल का अहम चेहरा है।   सूत्रों के मुताबिक, जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था, तभी जैकरी विटकॉफ इस्लामाबाद पहुंचे। वहां उनका स्वागत सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़े आर्थिक-पॉलिटिकल डील का हिस्सा था। दरअसल, पाकिस्तान ने हाल ही में  वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल (WLF) नामक क्रिप्टोकरेंसी वेंचर के साथ करार किया, जिसमें ट्रंप परिवार की 60% हिस्सेदारी बताई जा रही है। यही नहीं, इस सौदे से पहले WLF के शीर्ष प्रतिनिधि के तौर पर जैकरी विटकॉफ ने इस्लामाबाद में असीम मुनीर और शहबाज शरीफ से मुलाकात की। यह डील पाकिस्तानी "क्रिप्टो काउंसिल" के जरिए हुई, जिसे अप्रैल में जल्दबाजी में लॉन्च किया गया और जिसमें Binance के फाउंडर चांगपेंग झाओ (CZ) को सलाहकार बनाया गया। दावा है कि पाकिस्तान इस सौदे के जरिए खुद को "साउथ एशिया की क्रिप्टो कैपिटल" के रूप में स्थापित करना चाहता है, जबकि असली मकसद है अमेरिकी सत्ता के गलियारों में अपनी पकड़ मजबूत करना। खास बात यह है कि WLF में डोनाल्ड ट्रंप के दोनों बेटे  एरिक ट्रंप और डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ उनके दामाद जैरेड कुश्नर भी हिस्सेदार हैं। यानी पाकिस्तान ने जैकरी विटकॉफ को मोहरा बनाकर सीधे ट्रंप परिवार तक पहुंच बनाई और अब इसी नेटवर्क के जरिए अमेरिकी विदेश नीति में भारत-विरोधी झुकाव पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

बेंगलुरु से शुरू हुई तीन वंदे भारत एक्सप्रेस, PM मोदी ने किया शुभारंभ

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बेंगलुरु से तीन और वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने बहुप्रतीक्षित बेंगलुरु-बेलगावी को स्वयं हरी झंडी दिखाई, जबकि श्री माता वैष्णो देवी कटरा-अमृतसर और अजनी (नागपुर) से पुणे के लिए जाने वाली वंदे भारत सेवाओं की शुरुआत डिजिटल माध्यम से की। इस खास मौके पर पीएम के साथ कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित अन्य लोग उपस्थित थे। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी जब अपने काफिले के साथ रेलवे स्टेशन की ओर बढ़े, तो सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में एकत्र लोगों ने ‘‘मोदी, मोदी’’ के नारे लगाकर उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपनी कार के अंदर ने उनका हाथ हिलाकर अभिवादन किया। इसके बाद पीएम मोदी स्टेशन पहुंचे और ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने बेंगलुरू मेट्रो की येलो लाइन का भी उद्घाटन किया। इसमें उन्होंने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री समेत तमाम नेताओं के साथ सफर भी किया। इन तीन वंदे भारत सेवाओं के बारे में बात करते हुए रेलवे अधिकारियों ने कहा कि यह नई वंदे भारत ट्रेनें लोगों के बीच कनेक्टिविटी को और भी ज्यादा मजबूत करेंगी और यात्रियों को विश्वस्तरीय यात्रा का अनुभव प्रदान करेंगी। गौरतलब है कि बेंगलुरु से बेलगावी तक चलने वाली यह वंदे भारत एक्सप्रेस कर्नाटक में संचालित होने वाली 11वी वंदे भारत ट्रेन है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक इसके शुरू होने के बाद 611 किलोमीटर की दूरी मात्र 8.5 घंटे में तय की जा सकेगी। यह इन दोनों शहरों के बीच सबसे तेज गति की ट्रेन है, जिससे मौजूदा ट्रेन सेवाओं की तुलना में केएसआर (क्रांतिवीर संगोल्लि रायाण्ण) बेंगलुरु से बेलगावी तक लगभग एक घंटे 20 मिनट और बेलगावी-केएसआर बेंगलुरु तक एक घंटे 40 मिनट की बचत होगी। उन्होंने कहा कि यह ट्रेन भारत के ‘सिलिकॉन सिटी’ बेंगलुरु को प्रमुख मेडीकल और इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट के केंद्र बेलगावी से जोड़ती है, जिससे क्षेत्र में आर्थिक और शैक्षिक अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। यह मार्ग कर्नाटक के समृद्ध गन्ना क्षेत्र और धारवाड़, हुबली, हावेरी, दावणगेरे एवं तुमकुरु जैसे प्रमुख शहरों से होकर गुजरता है। धारवाड़ अपने प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के लिए प्रसिद्ध है, वहीं हुबली एक बेहतर इंडस्ट्रीयल क्षेत्र है, जबकि हावेरी एक उभरता हुआ कृषि केंद्र है और दावणगेरे कपड़ा एवं कृषि के लिए प्रसिद्ध है तथा तुमकुरु एक बढ़ता हुआ औद्योगिक एवं शैक्षिक केंद्र है।  

‘आपके मुंह से निवाला छीन लिया’… आखिर नेवी चीफ से ऐसा क्यों बोले प्रधानमंत्री मोदी?

नई दिल्ली  7 से 10 मई के बीच चले ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने पाकिस्तान को कई मोर्चों पर करारा जवाब दिया। सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी को राजनीतिक नेतृत्व से पूरी तरह “फ्री हैंड” मिला था, जिसके बल पर तीनों सेनाओं ने समन्वित और निर्णायक कार्रवाई की। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान तीनों सेनाप्रमुखों के अंदाज तो अलग-अलग थे, लेकिन एक ही लक्ष्य था। एयर चीफ मार्शल सिंह के बारे में कहा जाता है कि वह एक बेबाक टेस्ट फाइटर पायलट हैं, जो जोखिम लेने से नहीं कतराते हैं। आर्मी चीफ जनरल द्विवेदी सैनिकों के बीच सबसे सहज, लेकिन जरूरत पड़ने पर बेहद सख्ती से पेश आते हैं। वहीं, एडमिरल त्रिपाठी 10 मई की सुबह कराची पोर्ट पर हमला करने के लिए तैयार थे, लेकिन पाकिस्तानी DGMO की शांति अपील के बाद वह रुक गए। हमने आपके मुंह से निवाला छीन लिया: PM मोदी 10 मई को राष्ट्रीय सुरक्षा बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, NSA अजीत डोभाल और CDS जनरल अनिल चौहान मौजूद थे। इस बैठक में तीनों सेनाओं के चीफ भी शामिल हुए थे। कराची पर नौसेना हमले के रुकने पर पीएम मोदी ने एडमिरल त्रिपाठी से मुस्कराते हुए कहा, ''हमने आपके मुंह से निवाला छीन लिया, आपको मौका फिर मिलेगा।” PM मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर पाकिस्तान कराची हमले के जवाब में गुजरात पर मिसाइल दागता तो भी वे तैयार थे। ऑपरेशन में वायुसेना का करारा जवाब भारतीय वायुसेना चीफ ने बेंगलुरु में बताया कि 7–10 मई के बीच पाकिस्तान के 5 लड़ाकू विमान, एक बड़ा AEW&C या ELINT विमान को मार गिराया। 10 मई को रावलपिंडी के चकला एयरबेस पर C-130 हरक्यूलिस VVIP ट्रांसपोर्ट विमान वाला हैंगर तबाह हुआ, जैकबाबाद में जमीन पर खड़े 2 F-16 नष्ट हुए और नूर खान (चकला) एयरबेस पर हमले के बाद पाकिस्तानी उत्तरी वायु कमान अंधी हो गई।  315 किमी दूर से S-400 मिसाइल से एक AEW&C विमान को मार गिराया गया, जो आधुनिक युद्ध में अत्यंत दुर्लभ है। भारतीय सेना की M777 एक्सकैलिबर तोपों और युद्धक लूटेरिंग एम्युनिशन से पाकिस्तानी सैनिक LoC पर पोस्ट छोड़कर भाग गए। भारतीय नौसेना के भय से पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज और पनडुब्बियां समुद्र में निकलने की बजाय ग्वादर बंदरगाह की ओर सिमट गईं। 10 मई को दोपहर भोलारी एयरबेस पर आखिरी ब्रह्मोस स्ट्राइक हुई, जिसके बाद सभी मिशन उद्देश्यों की पूर्ति हो गई। आलोचकों का मानना है कि अमेरिकी दबाव के कारण कार्रवाई रोकी गई, लेकिन सेना सूत्र इस मिशन को पूर्ण मानते हैं। सेना विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के कार्यकाल में निकट भविष्य में फिर एक आतंकी हमला संभव है। इस बार संकेत साफ है। अगली बारी भारतीय नौसेना कार्रवाई करेगी।  

UPPL या BPF? बोडोलैंड में BJP की रणनीति पर सवाल

असम  असम के बोडोलैंड छठी अनुसूची क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी ऊहापोह की स्थिति में नजर आ रही है। इस दुविधा की वजह सितंबर में होने वाला संभावित परिषद चुनाव है। इन चुनावों के लिए पार्टी पहले ही घोषणा कर चुकी है कि वह आगामी चुनाव अकेले दम लड़ेगी। भाजपा के साथ दिक्कत यह है कि वह वर्तमान में क्षेत्रीय पार्टी यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) के साथ परिषद में गठबंधन में है और इस समय पर परिषद में यूपीपीएल ही बढ़त में है। इसके अलावा परिषद में विपक्ष में बैठी बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट(BPF) असम विधानसभा में एनडीए सरकार की सहयोगी है। अब सत्ता का समीकरण इस कदर बदला है कि भाजपा के अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा करने के बाद UPPL और BPF आपस में गठबंधन करने के लिए बातचीत कर रही है। गौरतलब है कि असम में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उन चुनावों से पहले बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (BTR) की 40 सीटों पर होने वाला यह चुनाव आखिरी है। ऐसे में सभी पार्टियां इसमें अपना दबदबा कायम रखना चाहेंगी। भले ही अभी परिषद चुनावों की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पिछले कुछ हफ्तों से लगातार बोडोलैंड में सभाएं कर रहे हैं। मीडिया से बात करते हुए सरमा ने कहा कि वह इस क्षेत्र की जनता की नब्ज को टटोल रहे हैं। बीटीआर में शांति स्थापित करना भारतीय जनता पार्टी की एनडीए सरकार की सबसे बड़ी कामयाबी है। उन्होंने कहा, "जब से दिल्ली और दिसपुर में भाजपा की सरकार बनी है, तब से गोलियों से एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है।" गौरतलब है कि इससे पहले 2020 में हुए परिषद चुनावों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। तब बीपीएफ 17 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। लेकिन भाजपा और यूपीपीएल ने गण सुरक्षा पार्टी के साथ गठबंधन बनाकर परिषद में सरकार बनाई थी। यहाँ पर कांग्रेस का भी एक सदस्य जीतकर आया था लेकिन बाद में वह पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गया।  

ChatGPT की टिप बनी मुसीबत, अस्पताल पहुंचा यूजर, जानें पूरा मामला

नई दिल्ली  अगर आप भी ChatGPT पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करते हैं और AI चैटबॉट से फिटनेस टिप्स या डाइट प्लान लेते हैं, तो सावधान हो जाइए। AI से ली गई स्वास्थ्य संबंधी सलाह जान को खतरे में भी डाल सकती है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि चैटजीपीटी की सलाह ने एक शख्स को अस्पताल पहुंचा दिया है। एक रिपोर्ट की अनुसार, न्यूयॉर्क में एक 60 वर्षीय व्यक्ति को उस समय अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, जब उसने ChatGPT द्वारा बताए गए भोजन से नमक कम करने के सख्त नियम का पालन किया। डॉक्टरों के अनुसार, उस व्यक्ति ने कई हफ्तों तक अपने आहार से सोडियम की मात्रा अचानक लगभग शून्य कर दिया, जिससे सोडियम का स्तर खतरनाक रूप से कम हो गया, जिसे हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है। उसके परिवार ने कहा कि उसने चिकित्सक से परामर्श किए बिना ही एआई जनरेटेड हेल्थ प्लान पर भरोसा किया। हाल ही में अमेरिकन कॉलेज ऑफ फिजिशियन जर्नल में पब्लिश यह मामला, प्रोफेशनल निगरानी के बिना एआई जनरेटेड हेल्थ एडवाइज को फॉलो करने के जोखिमों को उजागर करता है, खासकर जब इसमें सोडियम जैसे जरूरी पोषक तत्व शामिल हों। राहत की बात यह है कि अस्पताल में करीब तीन हफ्ते बिताने के बाद वह व्यक्ति ठीक हो गया। लेकिन इस मामले में चैटजीपीटी की विश्वसनीयता पर सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। चैटजीपीटी की सलाह खतरनाक साबित हुई टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, उस व्यक्ति ने चैटजीपीट से पूछा कि अपने आहार से सोडियम क्लोराइड (जिसे आमतौर पर टेबल सॉल्ट कहा जाता है) को कैसे हटाया जाए। AI टूल ने एक विकल्प के रूप में सोडियम ब्रोमाइड का सुझाव दिया, जो 20वीं सदी की शुरुआत में दवाओं में इस्तेमाल होने वाला एक कंपाउंड था, लेकिन अब इसे ज्यादा मात्रा में टॉक्सिक माना जाता है। इस सलाह पर अमल करते हुए, उस व्यक्ति ने ऑनलाइन सोडियम ब्रोमाइड खरीदा और तीन महीने तक अपने खाना पकाने में इसका इस्तेमाल किया। मानसिक या शारीरिक बीमारी की कोई प्रीवियस हिस्ट्री न होने के कारण, उस व्यक्ति को मतिभ्रम, पैरानॉया (Paranoia) और अत्यधिक प्यास लगने लगी। अस्पताल में भर्ती होने पर, वह भ्रमित दिखाई दिया और दूषित होने के डर से पानी भी लेने से मना कर दिया। डॉक्टरों ने उसे ब्रोमाइड टॉक्सिसिटी से पीड़ित पाया, एक ऐसी स्थिति जो अब लगभग अनसुनी है, लेकिन कभी चिंता, अनिद्रा और अन्य बीमारियों के लिए ब्रोमाइड निर्धारित करते समय आम थी। उसमें तंत्रिका संबंधी लक्षण, त्वचा पर मुंहासे जैसे दाने और लाल धब्बे भी दिखाई दिए, जो ब्रोमिज्म के लक्षण हैं। अस्पताल में उपचार का मुख्य उद्देश्य रीहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बहाल करना था। तीन हफ्तों के दौरान, उस व्यक्ति की हालत में धीरे-धीरे सुधार हुआ, और सोडियम और क्लोराइड का स्तर नॉर्मल होने पर उसे छुट्टी दे दी गई। कंपनी ने अपनी शर्तों में यह साफ लिखा है केस स्टडी के लेखकों ने एआई टूल्स से स्वास्थ्य संबंधी गलत सूचनाओं के बढ़ते जोखिम पर जोर दिया। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है, "यह ध्यान रखना जरूरी है कि चैटजीपीटी और अन्य एआई सिस्टम वैज्ञानिक अशुद्धियां उत्पन्न कर सकते हैं, परिणामों पर गंभीरता से चर्चा नहीं कर सकते, और अंततः गलत सूचनाओं के प्रसार को बढ़ावा दे सकते हैं।" चैटजीपीटी के डेवलपर, ओपनएआई ने इसे इस्तेमाल करने की शर्तों में स्पष्ट रूप से कहा है: "आपको हमारी सर्विसेस से प्राप्त आउटपुट को सत्य या तथ्यात्मक जानकारी के एकमात्र स्रोत के रूप में, या पेशेवर सलाह के विकल्प के रूप में नहीं मानना चाहिए।" शर्तों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह सर्विस चिकित्सा स्थितियों के निदान या उपचार के लिए नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई टूल सामान्य जानकारी के लिए फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन इन्हें कभी भी पेशेवर परामर्श का स्थान नहीं लेना चाहिए। जैसे-जैसे एआई का उपयोग बढ़ रहा है, वैसे-वैसे यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी बढ़ रही है कि इसके परिणाम सटीक, सुरक्षित और लोगों द्वारा स्पष्ट रूप से समझे जाएं।  

मिडिल ईस्ट से आई अच्छी खबर, भारत-ओमान के बीच जल्द हो सकती है व्यापारिक डील

नई दिल्ली. जहां एक तरफ भारत और अमेरिका की ट्रेड डील पर सस्पेंस बना हुआ है, तो वहीं मिडिल ईस्ट से भारत के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। भारत और ओमान के बीच जल्द ही ट्रेड डील साइन हो सकती है। दोनों देशों के बीच इसे लेकर बातचीत पूरी हो चुकी है। भारत के वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में बताया कि भारत-ओमान के बीच ट्रेड डील पर बातचीत 2023 में शुरू हुई थी, जो अब पूरी हो चुकी है। कांग्रेस नेता के सवाल पर दिया जवाब दरअसल कांग्रेस नेता हेबी माथेर हिशाम ने भारत की ट्रेड डील पर संसद में सवाल पूछा था, जिसके जवाब में केंद्रीय मंत्री जितिन ने बताया कि भारत और ओमान के बीच ट्रेड डील जल्द ही साइन हो सकती है। भारत और ओमान की दोस्ती काफी पुरानी है। दोनों देश एक-दूसरे के रणनीतिक साझेदार हैं। हमारे बीच 1955 से कूटनीतिक रिश्ते हैं। हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने अपने जवाब में ट्रेड डील साइन करने की तारीख का जिक्र नहीं किया। 5 साल में 5 बड़ी ट्रेड डील केंद्रीय मंत्री जितिन ने सदन में बताया कि पिछले पांच सालों में भारत ने अपने व्यापारिक गठबंधन मजबूत किए हैं। हमने 5 बड़े देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) साइन किया है। वहीं, कई देशों के साथ नई डील पर बातचीत चल रही है।  पिछले 5 साल के 5 बड़े व्यापार समझौते 2021 – भारत-मॉरीशस व्यापक आर्थिक सहयोग और साझेदारी समझौता (CECPA) 2022 – भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) 2022 – भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता (ECTA) 2024 – भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) 2025 – भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) कई देशों से बातचीत जारी भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुई ट्रेड डील इस साल के आखिर तक लागू होने की संभावना है। इसके अलावा भारत श्रीलंका, पेरू, न्यूजीलैंड और अमेरिका के साथ कई ट्रेड डील पर बातचीत कर रहा है।  

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में एनकाउंटर, इलाके में भारी फोर्स तैनात

जम्मू. जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। किश्तवाड के दुल इलाके खुफिया जानकारी के आधार पर चल रहे एक अभियान के दौरान जवानों का इन आतंकियों से सामना हुआ। व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा है कि गोलीबारी हुई है, फिलहाल अभियान जारी है। घाटी में चल रहा यह अभियान कुलगाम में जारी ऑपरेशन के बाद शुरू हुआ है। कुलगाम में आतंकियों से जारी मुठभेड़ लांस नायक प्रितपाल सिंह और सिपाही हरमिंदर सिंह को वीरगति प्राप्त हुई है। ऑपरेशन ओखल पिछले नौ दिनों से जारी है। चिनार कोर ने इस अभियान में शहीद हुए सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखा। पोस्ट में लिखा, "चिनार कोर राष्ट्र के लिए अपने कर्तव्य का पालन करते हुए वीरों, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रितपाल सिंह और सिपाही हरमिंदर सिंह के सर्वोच्च बलिदान का सम्मान करता है। उनका साहस और समर्पण हमें सदैव प्रेरित करता रहेगा। भारतीय सेना गहरी संवेदना व्यक्त करती है और शोक संतप्त परिवारों के साथ एकजुटता से खड़ी है। अभियान जारी है।"

पाकिस्तान को 300 KM दूर से दी मात, भारतीय वायुसेना ने रचा अनोखा रिकॉर्ड

नई दिल्ली. ऑपरेशन सिंदूर के तीन महीने बाद भारतीय वायुसेना (IAF) ने पहली बार सार्वजनिक रूप से उस बड़े हमले का खुलासा किया है, जिसे सैन्य अधिकारी आधुनिक हवाई युद्ध के इतिहास में अभूतपूर्व मानते हैं। शनिवार को बेंगलुरु में एक व्याख्यान के दौरान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने बताया कि 7 मई को पाकिस्तान का एक बड़ा हवाई प्लेटफार्म लगभग 300 किलोमीटर की दूरी से मार गिराया गया। यह संभवतः इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस (ELINT) या एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) विमान हो सकता है। उन्होंने इसे अब तक का सबसे लंबी दूरी से दर्ज सतह-से-आकाश में मारने वाली घटना बताया है। वायुसेना चीफ ने स्पष्ट किया कि “300 किमी की दूरी पर यह रिकॉर्ड किसी विमान के आकार को लेकर नहीं, बल्कि दूरी के लिहाज से है।” ऐसे हमलों की पुष्टि अक्सर कठिन होती है क्योंकि मलबा दुश्मन देश की सीमा में गिरता है और स्वतंत्र रूप से सत्यापन संभव नहीं होता। इस मामले में, वायुसेना प्रमुख का बयान संभवतः इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग के जरिए पुष्टि के बाद ही दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, “हमारे पास इलेक्ट्रॉनिक तरीके हैं जिससे हम किसी लक्ष्य को गिराने की पुष्टि कर सकते हैं। रडार पर एक ब्लिप दिखाई देता है और फिर गायब हो जाता है।” 300 किमी दूरी क्यों है खास? इतनी लंबी दूरी से किसी हवाई लक्ष्य को गिराने के लिए सिर्फ़ लंबी दूरी के इंटरसेप्टर मिसाइल (Surface-to-Air Missile – SAM) ही नहीं, बल्कि सटीक ट्रैकिंग, स्थिर टार्गेट लॉक और लक्ष्य तक हथियार की निरंतर मार्गदर्शन क्षमता की जरूरत होती है। भारतीय वायुसेना ने यह क्षमता हाल ही में रूसी S-400 प्रणाली के आगमन के साथ हासिल की। अधिकारियों के मुताबिक, S-400 प्रणाली की 400 किमी तक की मारक क्षमता ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को इतनी दूरी पर रोक दिया कि वे लंबी दूरी के ग्लाइड बम का भी इस्तेमाल नहीं कर सके। दुनिया में दुर्लभ उदाहरण हाल के संघर्षों में इतनी लंबी दूरी से सतह-से-आकाश मार के मामले बहुत कम सामने आए हैं। फरवरी 2024 में यूक्रेन ने दावा किया कि उसने रूस के A-50 जासूसी विमान को 200 किमी से अधिक दूरी पर गिराया। फरवरी 2022 में यूक्रेन का एक Su-27 लड़ाकू विमान रूसी S-400 से लगभग 150 किमी की दूरी पर गिरा। 300 किमी की दूरी से इस तरह का हमला सार्वजनिक रूप से दर्ज होना अत्यंत दुर्लभ है। भारत को रूस से अब तक 5 में से 3 S-400 यूनिट मिल चुकी हैं, जिन्हें पाकिस्तान और चीन की सीमा पर तैनात किया गया है। बाकी 2 यूनिट 2025–26 तक मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों ने इसकी तुलना ऐसी टॉर्च से की जो सीमा से कई किलोमीटर भीतर तक देख सकती है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में S-400 के साथ-साथ बराक-8 मीडियम रेंज SAM और स्वदेशी आकाश मिसाइल प्रणाली ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हाल ही में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने S-400 के लिए व्यापक वार्षिक रखरखाव अनुबंध को मंजूरी दी है। CAATSA और S-400 डील भारत ने S-400 सौदा 2018 में रूस के साथ किया था, ठीक एक साल बाद जब अमेरिका ने काउंटरिंग अमेरिका’स एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट (CAATSA) लागू किया था। यह कानून रूस, ईरान या उत्तर कोरिया से बड़े रक्षा सौदे करने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है।  

Golden City सिर्फ अमृतसर नहीं, राजस्थान के इस शहर की भी है सोने जैसी खूबसूरती

नई दिल्ली भारत को व‍िव‍ि‍धताओं का शहर कहा जाता है। यहां खानपान से लेकर घूमने फि‍रने के ल‍िए कई जगहें मौजूद हैं। भारत में जब भी सबसे खूबसूरत राज्‍यों की बात हाेती है तो राजस्‍थान का नाम सबसे पहले ल‍िया जाता है। भारत में ऐसे कई शहर मौजूद हैं जो अपने खास नामों और उपनामों (Nickname) से फेमस हैं। ये नाम न सिर्फ उनकी पहचान बन जाते हैं, बल्कि वहां की संस्कृति, इतिहास और खूबसूरती को भी द‍िखाते हैं। ऐसा ही एक नाम है Golden City। आमतौर पर लोग जब इस नाम को सुनते तो उन्‍हें पंजाब के अमृतसर की ही याद आती है, लेकिन दिलचस्प बात तो ये है कि राजस्थान का एक शहर भी इसी नाम से जाना जाता है। ये शहर अपनी अनोखी पहचान के लिए दुनियाभर में मशहूर है। देश-विदेश से लोग यहां की रौनक और खूबसूरती को देखने के ल‍िए हर साल आते हैं। यहां का माहौल, वास्तुकला और लोक संस्कृति हर किसी को अपना दीवाना बना देती है। ये जगह न सिर्फ घूमने के ल‍िहाज से खास है, बल्कि इसके पीछे एक पुरानी कहानी और विरासत भी जुड़ी हुई है। अगर आपको भी घूमने-फ‍िरने का शौक है और भारत के अलग-अलग शहरों की खासियत को जानना चाहते हैं, तो इस Golden City के बारे में भी आपको जरूर जानना चाह‍िए। आज का हमारा लेख भी इसी व‍िषय पर है। हम आपको इससे जुड़ी द‍िलचस्‍प बातें बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं व‍िस्‍तार से – बलुआ पत्थर के ए‍क टीले पर बसा है शहर आपको बता दें क‍ि जेसलमेर पीले रंग के बलुआ पत्थर के ए‍क टीले पर बसा है। इस पर एक किला है, जिसमें एक महल और कई खूबसूरत जैन मंदिर हैं। यहां के बहुत से घर और मंदिर बहुत ही सुंदर ढंग से तराशे गए हैं। ये शहर Thar Desert के बीचों-बीच बसा हुआ है। अब आप सोच रहे होंगे क‍ि जैसलमेर में ऐसा क्‍या है जो इसे Golden City के नाम से जाना जाता है। तो हम आपको बता दें क‍ि जैसलमेर थार रेगिस्तान में बसा एक शहर है और यहां का रेतिला रेगिस्तान पूरे देश में जाना जाता है। सुनहरे रंग में रंग जाता है पूरा जैसलमेर बताया जाता है क‍ि जब रेग‍िस्‍तानी म‍िट्टी पर सूरज की रोशनी पड़ती है तो पूरा शहर सुनहरे रंग में चमक उठता है। दूर-दूर तक रेग‍िस्‍तान का सुनहरा नजारा देखने को म‍िलता है। कहते हैं क‍ि पीली रेत और सभी इमारतों में इस्तेमाल हुए पीले बलुआ पत्थर पूरे शहर और उसके आस-पास के इलाके को सुनहरे रंग में रंग देते हैं। यही कारण है क‍ि जैसलमेर (Jaisalmer) को गोल्‍डन सि‍टी के नाम से जाना जाता है। जैसलमेर नाम कैसे पड़ा? जैसलमेर शहर का नाम राजपूत राजा राव जैसल के नाम पर रखा गया है। इन्होंने इस शहर को 1156 ईस्वी में बसाया था। जैसलमेर का मतलब है- जैसल का पहाड़ी किला। ये राजस्थान का सबसे बड़ा और देश के सबसे बड़े जिलों में से एक है। जैसलमेर किले को त्रिकूट गढ़ भी कहते हैं। इसे 1156 में भाटी राजपूत शासक राव जैसल ने मेरु पहाड़ी पर बनवाया था। ये किला कई लड़ाइयों का गवाह रहा है। जैसलमेर के हैं कई नाम दिन के समय इसकी बड़ी सी बलुआ पत्थर की दीवारें शेर जैसी भूरी दिखती हैं, और जब सूरज डूबने लगता है, तो वो सुनहरी यानी कि‍ गोल्‍डन हो जाती हैं। आपको बता दें क‍ि इसे गोल्‍डन स‍िटी के अलावा और भी कई नामों से जाना जाता है। इसमें हवेलियों का शहर, म्यूजियम सिटी, पीले पत्थरों का शहर, झरोखों की नगरी जैसे कई नाम शाम‍िल हैं।