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फटाफट परिणाम! बुरी नजर हटाने के लिए 3 वास्तु शास्त्र के टिप्स

घर परिवार की सबसे बड़ी संपत्ति होता है। जब घर में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है, तभी जीवन में सफलता और संतोष मिलता है। लेकिन क्या होगा अगर बार-बार घर पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव हो, और बुरी नजर का साया आपके परिवार और संपत्ति पर पड़ता रहे ? ऐसे समय में वास्तु शास्त्र के सरल लेकिन प्रभावी उपाय आपके लिए वरदान साबित हो सकते हैं। वास्तु शास्त्र हमारे घर की ऊर्जा और वातावरण को संतुलित करने की एक प्राचीन विद्या है। जब घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, तो बुरी नजर का असर कम हो जाता है। वास्तु के अनुसार, घर के कुछ खास स्थान और चीजें ऐसी होती हैं जो बुरी नजर को रोकने और नकारात्मक ऊर्जा को बाहर भगाने में मदद करती हैं। मुख्य द्वार पर तुलसी का पौधा लगाएं तुलसी का पौधा हमारे घर के लिए सबसे शुभ माना जाता है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार भी घर की नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करता है। तुलसी के पौधे में एक सकारात्मक ऊर्जा होती है जो बुरी नजर को रोकती है और घर में खुशहाली लाती है। मुख्य द्वार के समीप तुलसी का पौधा लगाएं। रोज सुबह तुलसी की पूजा करें और उसकी नियमित देखभाल करें। तुलसी की पत्तियां घर के मंदिर में भी रख सकते हैं। इससे घर में शांति, सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। घर के कोनों में नींबू-मिर्च का टोटका यह एक बेहद लोकप्रिय और प्राचीन वास्तु उपाय है। नींबू और मिर्ची का टोटका नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाने और बुरी नजर को टालने में कारगर होता है। यह टोटका घर में दरवाजे या खिड़कियों के पास लगाया जाता है ताकि किसी भी नकारात्मक नजर का प्रवेश रोका जा सके। नींबू के साथ हरी मिर्च को लटकाएं। इसे मुख्य द्वार के बाहर या घर के ऐसे स्थान पर लगाएं जहां से बाहर की नजर आती हो। कुछ लोगों का मानना है कि नींबू मिर्च का टोटका हर 15-20 दिन में बदलना चाहिए ताकि उसकी ऊर्जा बनी रहे। घर में गणेश जी और नारियल का पूजन गणेश जी को विघ्नहर्ता और शुभता का देवता माना जाता है। वास्तु में गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर घर के मुख्य द्वार के पास स्थापित करने से बुरी नजर से बचाव होता है। साथ ही, घर में नियमित नारियल का पूजन भी नकारात्मक ऊर्जा को कम करता है। घर के पूजा स्थल पर गणेश जी की मूर्ति रखें। व्रत या शुभ कार्य के दिन नारियल का पूजन करें और गणेश मंत्र का जप करें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और बुरी नजर का प्रभाव समाप्त होता है।

महाअष्टमी पर कन्या पूजन का वक्त और विधि – जानिए शुभ मुहूर्त

 वैसे तो शारदीय नवरात्र के पूरे 9 दिन बहुत ही खास और विशेष माने जाते हैं, लेकिन महाअष्टमी और महानवमी नवरात्र के दो सबसे महत्वपूर्ण दिन होते हैं. इस बार महाअष्टमी 30 सितंबर, आज मंगलवार को मनाई जाएगी और महानवमी 1 अक्टूबर, बुधवार को मनाई जाएगी. ज्योतिषियों के मुताबिक, इन दोनों दिनों पर शारदीय नवरात्र के पारण के लिए कन्या पूजन किया जाता है. कन्या पूजन पर 9 कन्याओं को मां दुर्गा के रूप में पूजकर, उनको हलवा-पूरी का भोग लगाया जाता है. तो चलिए जानते हैं कि इन दोनों शुभ दिनों पर मां दुर्गा के किन स्वरूपों की पूजा होती है और क्या रहेगा कन्या पूजन का मुहूर्त. महाअष्टमी 2025 कन्या पूजन मुहूर्त महाअष्टमी के पूर्वी भारत में महा दुर्गाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. महाअष्टमी दुर्गा पूजा का सबसे खास माना जाता है. शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि की शुरुआत इस बार 29 सितंबर को शाम 4 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी और तिथि का समापन 30 सितंबर की शाम 6 बजकर 06 मिनट पर होगा.  वहीं, महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन का पहला मुहूर्त सुबह 5 बजकर 01 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 13 मिनट तक रहेगा. दूसरा मुहूर्त सुबह 10 बजकर 41 मिनट दोपहर 12 बजकर 11 मिनट रहेगा. साथ ही, अभिजीत मुहूर्त भी कन्या पूजन जैसे कार्यों के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है, जो कि सुबह 11 बजकर 47 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. इन तीनों मुहूर्तों में आप कन्या पूजन कर सकते हैं.  महाअष्टमी के दिन किसकी होती है पूजा? शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप माता महागौरी की उपासना की जाती है. माता महागौरी को उज्ज्वलता और पवित्रता की देवी माना गया है. मान्यता है कि मां महागौरी की उपासना से भक्त के जीवन से सभी दुख और कठिनाइयां दूर होती हैं और उसे नई ऊर्जा और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है.  महानवमी 2025 कन्या पूजन मुहूर्त  इस बार शारदीय नवरात्र की महानवमी 1 अक्टूबर को मनाई जाएगी. इस दिन का पारण भी कन्या पूजन से किया जाता है. पंचांग के मुताबिक, महानवमी के दिन कन्या पूजन का मुहूर्त 1 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 01 मिनट से सुबह 6 बजकर 14 मिनट तक रहेगा. दूसरा मुहूर्त, दोपहर 2 बजकर 09 मिनट से लेकर 2 बजकर 57 मिनट तक रहेगा. महानवमी के दिन किसकी होती है पूजा? महानवमी के दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. ये मां दुर्गा का अंतिम स्वरूप है. जैसा की इनके नाम से ही स्पष्ट हो रहा है कि मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियां और मनचाही इच्छाएं प्रदान करती हैं. ऐसे करें कन्या पूजन नवरात्र की अष्टमी तिथि पर कन्याओं को आमंत्रित करें और उनका पूरे विधि-विधान के साथ स्वागत करें. कन्याओं को बिठाकर उनके पैरों को दूध से धोएं और उनके माथे पर कुमकुम लगाएं. मां भगवती का ध्यान करके कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा और उपहार दें. अंत में कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लें.

आज का राशिफल: कुछ राशियों पर बरसेगी किस्मत, तो कुछ को करना होगा संभलकर काम

मेष राशि- आज आपका दिन जोश और उत्साह से भरा रहेगा। आपने जिन नये प्रोजेक्ट्स पर सोचा था, उनमें कुछ शुरुआत दिख सकती है। कामकाज के मोर्चे पर चुनौतियाँ तो होंगी, पर आपकी ऊर्जा और दृढ़ निश्चय उन्हें पार कर लेगी। वित्तीय दृष्टि से छोटी-छोटी आय के स्रोत सक्रिय रहेंगे, लेकिन बड़े निवेश में सतर्कता रखें। प्रेम जीवन में संवाद की भूमिका बढ़ेगी। खुली बातों से रिश्ते में सामंजस्य बनेगा। स्वास्थ्य की ओर ध्यान देना जरूरी है। थकान या हल्की परेशानी हो सकती है। आज सावधानी और संतुलन दोनों साथ रखें। वृषभ राशि- आज आपके पारिवारिक और घरेलू मामले आपको चिंतित कर सकते हैं। घर के सदस्यों से मेलजोल बढ़ाना आवश्यक होगा। कामकाज में निरंतरता बनाए रखें। नौकरी या व्यापार में जो बाधाएँ आई हों, उन्हें धैर्य और बुद्धि से सुलझाएँ। आर्थिक पक्ष थोड़ा स्थिर रहेगा। कुछ अनपेक्षित खर्च हो सकते हैं, इसलिए बजट पर ध्यान दें। जो लोग निवेश की योजना बना रहे थे, उन्हें आज थोड़ा रुकना चाहिए। प्रेम में हल्के मनमुटाव हो सकते हैं, लेकिन समझौता संभव है। स्वास्थ्य के लिए नियमित दिनचर्या फायदेमंद रहेगी। मिथुन राशि- आज आपकी संचार शक्ति और बुद्धि दोनों साथ देंगे। नए विचार मन में आएंगे और आप उन्हें आगे बढ़ा सकते हैं। व्यापार या कामकाज में नई पहल सफल हो सकती है। सुनने और समझने की क्षमता आपको लोगों से जोड़ने में मदद करेगी। धन लाभ के मौके भी सामने आएंगे, लेकिन जांच पड़ताल अवश्य करें। प्रेम जीवन में रोमांच रहेगा। नए झगड़े नहीं, बल्कि मीठी बहसें होंगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, हल्की थकावट हो सकती है। आज अपने विचारों को साझा करने में पीछे न हटें। कर्क राशि- आज आपके अंदर शांत रहने की प्रवृत्ति बढ़ेगी। घर और मन दोनों जगह आपको शांति चाहिए। कार्यक्षेत्र में कुछ बाधाएं आ सकती हैं। इनका सामना धैर्य से करें। आर्थिक दृष्टि से, कुछ योजनाएँ अटक सकती हैं; अनियोजनित खर्चों से बचें। प्रेम संबंधों में भावनात्मक असमंजस हो सकता है। एक-दूसरे को समझने की कोशिश करें। स्वास्थ्य की दृष्टि से मानसिक तनाव से सावधान रहना है। ध्यान, योग या मेडिटेशन लाभ देगा। आज अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानें और उसे शांतिपूर्वक प्रयोग करें। सिंह राशि- आज आपका आत्मविश्वास ऊंचा रहेगा। कामकाज में आपकी नेतृत्व क्षमता सामने आएगी। आपको सम्मान और मान-सम्मान मिलने की संभावना है। आर्थिक मोर्चे पर कुछ लाभदायक अवसर हाथ आ सकते हैं — उन्हें समय रहते पहचानें और उपयोग करें। प्रेम जीवन में आकर्षण बना रहेगा, लेकिन अहंकार से दूरी रखें। स्वास्थ्य की दृष्टि से ऊर्जा बनी रहेगी, पर अधिक थकावट से बचें। आज असावधानी से चोट लग सकती है, तो सावधानी बरतें। कन्या राशि– आज आप अपने काम में अधिक सावधानी और तप देना चाहेंगे। छोटी-छोटी गलतियाँ बड़ा असर डाल सकती हैं। इस लिए काम को दुबारा चेक करें। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी, लेकिन अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखें। व्यापार या नौकरी में आपके अनुरूप अवसर दिख सकते हैं। प्रेम संबंधों में कम-उच्च संवाद रहेगा। जरूरत हो तो क्षमा भाव रखें। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, लेकिन पेट या पाचन से संबंधित समस्या हो सकती है। हल्का और पौष्टिक आहार लें। तुला राशि– आपका आज का दिन संतुलन और सौम्यता वाला रहेगा। सामाजिक संबंधों में आपको लाभ होगा। लोग आपकी राय सुनना चाहेंगे। कामकाज में सहयोगी मिलेंगे और बारीकियों पर ध्यान देने से सफलता संभव है। आर्थिक मोर्चे पर अच्छी गति बनी हुई है, लेकिन निवेशों में जल्दबाजी से बचें। प्रेम जीवन में रोमांच और मृदु भाव दोनों मिलेंगे। अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त करें। स्वास्थ्य ठीक रहेगा, हल्की-फुलकी सैर लाभदायक है। वृश्चिक राशि- आज आप गहरे विचारों में डूब सकते हैं। काम में एकाग्रता ज़रूरी होगी। चुनौतियाँ आएंगी, लेकिन अंत में आप वहाँ सफल होंगे। आर्थिक मामले में कुछ अनिश्चितता हो सकती है। जोखिम लेने से पहले सोच लें। प्रेम जीवन में भावनाएं तीव्र हों सकती हैं। नकारात्मकता से बचें और शांतिपूर्वक बात करें। स्वास्थ्य की दृष्टि से मन और मस्तिष्क को शांत रखने की जरूरत है। तनाव न लें। आज अपने आत्मविश्वास और सूझ-बूझ पर भरोसा रखें। धनु राशि- आज आपका दायरा विस्तृत हो सकता है। यात्रा, अध्ययन या किसी नई योजना की शुरुआत हो सकती है। आपके अंदर उत्साह होगा और जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ेगी। आर्थिक मोर्चे पर अतिरिक्त स्रोत मिल सकते हैं, पर उन्हें अच्छी तरह जांच लें। प्रेम जीवन में हल्की मतभेद हो सकते हैं, लेकिन आप समझौता करने में सक्षम रहेंगे। स्वास्थ्य की दृष्टि से सक्रियता बनी रहेगी, पर नियंत्रण न रखने पर थकान हो सकती है। आज की चुनौतियां आपकी वृद्धि का साधन बनेंगी। मकर राशि- आपका आज का दिन व्यवस्थित रहेगा। कामकाज में आप योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ेंगे। आपके प्रयासों का परिणाम दिखाई देने लगेगा। आर्थिक दृष्टि से स्थिरता बनी रहेगी, और यदि आपने कोई निवेश या कोई बड़ा निर्णय स्थगित किया था, अब उस पर विचार कर सकते हैं। प्रेम जीवन में स्थिरता रहेगी। बढ़ती समझ आपके रिश्तों को मजबूती देगी। स्वास्थ्य की दृष्टि से हड्डियों, जोड़ या पीठ संबंधी दर्द हो सकता है। व्यायाम और स्ट्रेचिंग करें। कुंभ राशि- आज आपकी सोच क्रिएटिव और इनोवेटिव होगी। आप सामान्य से हटकर काम करना चाहेंगे। कामकाज में नए विचार सफल हो सकते हैं, यदि उन्हें सही समय पर प्रस्तुत करें। आर्थिक रूप से अवसर मिलेंगे, पर उनका चयन सोच-समझकर करें। प्रेम जीवन में दोस्ती की झलक मिलेगी। पहले दोस्त बनें, फिर आगे बढ़ें। स्वास्थ्य की दृष्टि से मानसिक थकान हो सकती है। विश्राम और नींद ठीक रखें। आज आपका प्रयोग और अन्वेषण लाभदायक रहेगा। मीन राशि- आज आपका संवेदनशील पक्ष सक्रिय रहेगा। आपकी अंतःदृष्टि आपको सही दिशा दिखाएगी। कामकाज में आपकी संवेदनशीलता और समझदारी लाभदायक होगी। आर्थिक रूप से आपको नए स्रोतों की जानकारी मिल सकती है, पर जल्दबाजी न करें। प्रेम जीवन में रोमांटिक भावनाएँ उभरेंगी। साथी को समय दें। स्वास्थ्य की दृष्टि से मानसिक शांति जरूरी है। आज आपका मन शांत और रचनात्मक बने रहने की संभावना है।

पुराना फर्नीचर और वास्तु दोष: घर में परेशानियों का कारण

घर में एक अच्छा वातावरण और सकारात्मक ऊर्जा का होना हर व्यक्ति की इच्छा होती है। घर का वातावरण न केवल शांति और सुख-शांति को प्रभावित करता है, बल्कि यह हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के सभी तत्वों का संतुलन और सामंजस्य होना बहुत जरूरी है। फर्नीचर भी घर के महत्वपूर्ण भागों में से एक होता है और इसे चुनते समय वास्तु के सिद्धांतों को ध्यान में रखना चाहिए। क्या आप भी घर के लिए पुराना फर्नीचर खरीदते हैं ? अगर हां, तो यह आपके घर और परिवार के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। हालांकि पुराने फर्नीचर का इस्तेमाल करना एक किफायती विकल्प हो सकता है लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार यह घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश करवा सकता है। आइए, जानते हैं कि क्यों पुराने फर्नीचर का उपयोग करना आपके लिए हानिकारक हो सकता है और इसके बदले आपको क्या उपाय करने चाहिए। नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश वास्तु शास्त्र के अनुसार, पुराने फर्नीचर में नकारात्मक ऊर्जा का संचय हो सकता है। यह नकारात्मक ऊर्जा उस फर्नीचर के पहले मालिक या उपयोगकर्ता के अनुभवों और घटनाओं से जुड़ी हो सकती है। अगर पुराने फर्नीचर का उपयोग करते हैं, तो यह आपके घर में भी वही नकारात्मक ऊर्जा ला सकता है, जिससे तनाव, अनहोनी और दुर्भाग्य की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। विशेष रूप से, पुराने फर्नीचर को घर के अहम स्थानों पर रखने से घर में असंतुलन और मानसिक तनाव उत्पन्न हो सकता है। घर के वास्तु दोष में वृद्धि वास्तु शास्त्र में फर्नीचर का सही स्थान और आकार बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आप पुराना फर्नीचर घर में रखते हैं, तो यह न केवल नकारात्मक ऊर्जा को उत्पन्न कर सकता है, बल्कि यह आपके घर के वास्तु दोष को भी बढ़ा सकता है। पुराने और घिसे-पीटे फर्नीचर को घर में रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रुक सकता है, जिससे घर में आने वाली समस्याएं जैसे स्वास्थ्य समस्याएं, पारिवारिक विवाद, और वित्तीय परेशानियां बढ़ सकती हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, पुराना और घिसा-फटा फर्नीचर घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकता है। यह न केवल घर के माहौल को प्रभावित करता है, बल्कि परिवार के सदस्यों की मानसिक स्थिति, स्वास्थ्य और आर्थ‍िक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। पुराने फर्नीचर में उपयोगकर्ता की यादें, उनके अनुभव और घटनाएं जुड़ी होती हैं, जो घर में नकारात्मक ऊर्जा का निर्माण करती हैं। यह ऊर्जा घर में दरिद्रता और संकट को आमंत्रित करती है, जिसके कारण आर्थिक तंगी हो सकती है।

पैसा और कामयाबी चाहते हैं? इन आदतों से तुरंत करें तौबा

  उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम, आध्यात्मिक गुरु, नीम करोली बाबा, का आश्रम है। नीम करोली बाबा आज भले ही भौतिक रूप से लोगों के बीच मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी दी हुई शिक्षाएं आज भी उनके अनुयायियों के माध्यम से लोगों को प्रेरित करते हुए सुखी सफल जीवन जीने का रास्ता बताती रहती हैं। नीम करोली बाबा के ज्ञान को अपनाते हुए अपनी कुछ नकारात्मक आदतों को त्यागकर, कोई भी व्यक्ति अपना जीवन बदलकर पैसा कमा सकता है। आइए जानते हैं पैसा और कामयाबी हासिल करने के लिए नीम करोली बाबा ने कौन सी 5 आदतों से दूरी बनाने के लिए प्रेरित किया है। अहंकार का त्याग नीम करोली बाबा के अनुसार, अहंकार व्यक्ति को हमेशा गलत राह पर ले जाता है। अगर आप अपने रिश्तों को मजबूत बनाए रखते हुए जीवन को सफल बनाना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने अहंकार का त्याग करें। याद रखें, विनम्रता न केवल व्यक्ति को सम्मान अर्जित करवाती है, बल्कि उसके लिए नए अवसरों के दरवाजे भी खोलती है। क्रोध पर नियंत्रण नीम करोली बाबा के अनुसार क्रोध में लिए गए ज्यादातर निर्णय अक्सर बाद में पछतावे का कारण बनते हैं। क्रोध व्यक्ति की आंतरिक शांति को नष्ट करके उसके निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर बना देता है।जो लोग अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख पाते, उन्हें अकसर जीवन में सफलता पाने में कठिनाई होती है। लालच से बचें नीम करोली बाबा के अनुसार व्यक्ति का जरूरत से ज्यादा लालच उसे जीवन में कभी भी आगे नहीं बढ़ने देता है। लालच में डूबा व्यक्ति धन संचय करने या उसे बनाए रखने के लिए संघर्ष करता रहता है। ईर्ष्या से करें परहेज नीम करोली बाबा व्यक्ति को कभी भी दूसरों की सफलता से ईर्ष्या न करने की सलाह देते थे। उनका मानना था कि दूसरों की उपलब्धियों से जलन रखने की जगह व्यक्ति को हमेशा अपनी प्रगति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। कड़ी मेहनत और लगन सच्ची सफलता दिलाते हैं, जबकि ईर्ष्या केवल नकारात्मकता और भटकाव की ओर ले जाती है। नकारात्मकता से रहें दूर नीम करोली बाबा की शिक्षाओं के अनुसार आत्म-अनुशासन, आंतरिक शांति और सकारात्मक सोच ही स्थायी सफलता की कुंजी हैं। ऐसे में व्यक्ति को हमेशा अहंकार, क्रोध, लोभ और ईर्ष्या जैसी नकारात्मक आदतों को त्याग करना चाहिए।  

आज का राशिफल 29 सितंबर 2025: किसे मिलेगी सफलता और किन्हें रखें सावधान

मेष राशि- आज आप नई ऊर्जा महसूस करेंगे। पुराने अधूरे कामों को पूरा करने की प्रेरणा मिलेगी। कार्यक्षेत्र में मन लगा रहेगा, पर किसी निर्णय को जल्दी न लें। थोड़ा समय लेकर सोचें। धन की स्थिति ठीक रहेगी, लेकिन अनावश्यक खर्चों से बचें। रिश्तों में स्पष्ट बोलचाल जरूरी है। अपनी भावनाएं खुलकर रखें। स्वास्थ्य आज सामान्य रहेगा, पर थोड़ी थकान हो सकती है। आराम और नींद पर ध्यान दें। वृषभ राशि- आज स्थिरता आपके साथ होगी। आप सोच-समझ कर कदम उठाएंगे। कार्यक्षेत्र में सहयोग मिलेगा, और टीम वर्क से काम आगे बढ़ेगा। आर्थिक स्थिति मध्यम रहेगी। छोटे निवेश में सावधानी रखें। परिवार और मित्रों से मेलजोल बढ़ेगा, आप सामाजिक रूप से सक्रिय रहेंगे। स्वास्थ्य ठीक रहेगा, हल्की सैर या योग आपको ऊर्जा देगा। मिथुन राशि- आज आपको नई दिशा मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में बातचीत, प्रस्तुति या मेल-जोल लाभदायक रहेगा। धन संबंधी मामलों में सोच-समझ कर कदम उठाएं, अनावश्यक खर्च न करें। रिश्तों में संवाद की कमी से भ्रम हो सकता है। अपनी सोच स्पष्ट रखें।तनाव हो सकता है। विश्राम और ध्यान जरूरी है। कर्क राशि- आज आपका मन कुछ भावुक हो सकता है। कार्य में चुनौतियां आएंगी, लेकिन संयम से आप उनसे पार पाएंगे। धन की स्थिति मिश्रित रहेगी। अनपेक्षित खर्चें हो सकते हैं। रिश्तों में संवेदनशीलता ज्यादा रहेगी। स्नेह और समझदारी से काम लें। स्वास्थ्य के लिए हल्का व्यायाम और शांत मनोवृति उपयोगी रहेगी। सिंह राशि- आज आप आत्मविश्वास से भरे रहेंगे। नेतृत्व और आयोजन की जिम्मेदारियां अच्छी तरह निभा पाएंगे। धन की स्थिति मजबूत रहेगी। यदि पहले की योजनाएं हों, तो उनका लाभ मिल सकता है। रिश्तों में आपकी चमक दिखेगी, लोग आपकी बात सुनेंगे। स्वास्थ्य सब ठीक रहेगा, पर अधिक मेहनत से थकान हो सकती है। बीच-बीच में आराम लें। कन्या राशि- आज आपकी व्यवस्था और अनुशासन ज्यादा काम आएंगे। कार्य में विवरणों पर ध्यान दें। छोटी गलतियों से बड़ा फर्क पड़ सकता है। धन संबंधी फैसलों में सावधानी रखें। प्रत्येक शर्त पढ़ लेना बेहतर है। रिश्तों में थोड़ी दूरी या गलतफहमी हो सकती है। संवाद करें। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन आंख, पेट आदि की हल्की परेशानी हो सकती है। सतर्क रहें। तुला राशि- आज संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। कार्य में साझेदारी और सौहार्द उपयोगी होंगे। धन संबंधी मामलें कुछ जटिल हो सकते हैं। समझौता या विचार-विमर्श लाभदायक रहेगा। रिश्तों में अपेक्षाओं को कम रखें, संवाद और समझ ज्यादा जरूरी है। स्वास्थ्य में तनाव या गर्दन-कंधे की समस्या हो सकती है। स्ट्रेचिंग करें। वृश्चिक राशि- आज आपके अंदर गहराई और अंतर्मुखी भाव रहेंगे। कार्यक्षेत्र में गुप्त या जटिल विषयों में सफलता मिलने की संभावना है। धन मामलों में सावधानी आवश्यक है। बड़े निर्णय आज न लें। रिश्तों में भावनाएं तीव्र होंगी लेकिन खुलकर बात करना जरूरी है। स्वास्थ्य में हल्की कमजोरी या मानसिक दबाव हो सकता है। विश्राम करें। धनु राशि- आज आपका उत्साह बढ़ा रहेगा। कार्य में बड़े दृष्टिकोण से सोचने का अवसर मिलेगा। धन की स्थिति सामान्य रहेगी लेकिन अनावश्यक खर्चों से बचें। रिश्तों में मिलन और सामाजिक संपर्कों से सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, लेकिन अधिक गतिविधि से थकान हो सकती है। संतुलन बनाए रखें। मकर राशि- आज मेहनत और अनुशासन से काम बनेंगे। कार्यक्षेत्र में आपकी लगन और समर्पण पहचान दिलाएंगे। धन संबंधित मामलों में स्थिरता रहेगी, पर बड़े खर्चों में संयम जरूरी है। रिश्तों में समय निकालकर बात करें। इसका असर गहरा हो सकता है। स्वास्थ्य ठीक रहेगा, लेकिन पीठ या जोड़ की समस्या हो सकती है। सावधानी रखें। कुंभ राशि- आज आपके विचार और संपर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। कार्यक्षेत्र में नई योजनाएं और नेटवर्किंग सफल हो सकती है। धन मामलों में छोटी शुरुआत बेहतर होगी। बड़े निवेश आज जोखिम हो सकते हैं। रिश्तों में खुलापन और भरोसा जरूरी है। संवाद से दूरी मिटेगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। आंखों या सिरदर्द से बचने के लिए आराम करें। मीन राशि- आज आपकी संवेदनशीलता और कल्पनाशीलता ज्यादा बढ़ेगी। रचनात्मक या सेवा-प्रधान कार्यों में सफलता मिल सकती है। धन के मामलों में सोच-समझ कर कदम उठाएं। अनावश्यक व्यय न करें। रिश्तों में आपने जो महसूस किया है, वो साझा करें। इससे दूरी कम होगी। स्वास्थ्य की दृष्टि से मानसिक शांति और अच्छी दिनचर्या जरूरी है।

नवरात्रि व्रत का पारण कब करें – 1 अक्टूबर या 2 अक्टूबर? पूरी जानकारी यहाँ

शक्ति का महापर्व शारदीय नवरात्रि मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा और शक्ति के सम्मान में मनाया जाता है. यह 9 दिन का उत्सव न सिर्फ भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि भक्तों के लिए शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का अवसर भी है. नवरात्रि का उत्सव अब अपने समापन की ओर बढ़ रहा है. इस दौरान अपनी इच्छानुसार 1, 2, 5, 7 या 9 दिनों का व्रत रखते हैं. व्रत करने के बाद उसका पारण करना बहुत अहम होता है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि शारदीय नवरात्रि व्रत का पारण कब किया जाएगा. शारदीय नवरात्रि व्रत का पारण कब है 9 दिन के नवरात्रि व्रत का पारण नवमी तिथि समाप्त होने के बाद और दशमी तिथि के शुरू होने पर किया जाता है. यह विजयदशमी का दिन होता है. जो लोग 9 दिनों तक व्रत रखते हैं, उनके लिए नवमी तिथि के समाप्त होने और दशमी तिथि के प्रबल होने पर ही व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है, इसलिए वे विजयादशमी के दिन व्रत खोलते हैं. ऐसे में आप विजयदशमी पर नवरात्रि व्रत खोल सकते हैं. इस बार विजयदशमी 2 अक्टूबर को है और इसी दिन नवरात्रि व्रत खोला जाएगा. नवरात्रि के पारण में क्या खाना चाहिए? नवरात्रि व्रत के पारण सात्विक, हल्के भोजन से करना चाहिए जैसे फलों का रस या साबूदाना. इसके बाद हलवा, पूरी, चने और खीर का प्रसाद ग्रहण किया जाता है, जो देवी को अर्पित किया गया हो. नवरात्रि व्रत खोलने से पहले कन्या पूजन और हवन करना भी जरूरी है, जिसके बाद ही व्रत का पुण्य फल प्राप्त होता है. लंबे उपवास के बाद अचानक भारी या मसालेदार भोजन करने से बचना चाहिए. नवरात्रि व्रत पारण में क्या नहीं खाना चाहिए? नवरात्रि व्रत के पारण के समय लहसुन, प्याज, मांसाहार और तामसिक चीजें बिल्कुल नहीं खानी चाहिए. व्रत खोलते समय सीधे नमक का सेवन न करें, पहले थोड़ा मीठा खाकर व्रत खोलना बेहतर होता है. नवरात्रि व्रत पारण के नियम नवरात्रि व्रत पारण करने से पहले मां दुर्गा की पूजा करें और फिर हलवा-पूरी का भोग लगाकर प्रसाद के रूप में खाएं. पारण करते समय सात्विक और हल्का भोजन करें और सीधे नमक से परहेज करें. नवमी तिथि को कन्या पूजन और हवन जरूर कराएं. इसके बाद ही प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें. नवरात्रि का व्रत तभी पूरा माना जाता है जब आप हवन (अगर किया हो) और कन्या पूजन करते हैं.  

तनाव से मुक्ति पाने के लिए इस रंग का करें इस्तेमाल

वास्तु शास्त्री रंगों को वास्तु के तत्वों का प्रतीक मानते हैं। अत: उन्हें जल, अग्नि, धातु, पृथ्वी और काष्ठ से जोड़ते हैं। रंग और ध्वनि जैसी ऊर्जाओं ने प्रकृति और वातावरण के माध्यम से जनमानस को घेर रखा है। वास्तु शास्त्र के अनुसार रंग तनाव को घटा और बढ़ा सकते हैं। अगर आप भी रंगों की मदद से तनाव कम करना चाहते हैं तो ये टिप्स अपना सकते हैं : हल्के ग्रे रंग को कोमल माना जाता है जो सीधे व्यक्ति के मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है। इस रंग का सुखदायक प्रभाव होता है और साथ ही यह आकर्षक भी होता है। यदि आप तनाव में हैं तो आप लाइट ग्रे रंग के कपड़े पहन सकते हैं जो आपके तनाव को दूर करने में मदद करेगा। वास्तु के अनुसार इस तरह के रंगीन कपड़े मानसिक तनाव को कम करने में काफी मदद करते हैं। हल्का गुलाबी रंग बहुत ही शांत और सौम्य रंग माना जाता है। यह रंग दिमाग को शांत रखने में सबसे कारगर रहता है। तनाव के बीच यह रंग आपको प्यार का एहसास कराता है। यह रंग आपके जीवन में संतुलन बनाने में मदद करता है। वास्तु के अनुसार आपको हल्के गुलाबी रंग के कपड़े पहनने चाहिए और इस रंग को अपने बेडरूम में इस्तेमाल करने पर विचार करना चाहिए। लैवेंडर रंग अपने नाम की तरह ही शांत है। अगर तनाव कम करने की बात आती है, तो वास्तु इस रंग का इस्तेमाल करने की सबसे ज्यादा सलाह देता है।

कन्या पूजन 2025: अष्टमी और नवमी का सही समय और पूजा विधि

शारदीय नवरात्रि 2025 का पर्व 22 सितंबर से 2 अक्टूबर तक मनाया जाएगा. इस साल अष्टमी और नवमी तिथियों का विशेष संयोग बन रहा है, जो कन्या पूजन के लिए बेहद शुभ माना जाता है. इस पवित्र दिन का महत्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए भी है. जानिए इस साल कब और किस समय करें कन्याओं का पूजन, साथ ही पूजा की पूरी विधि और जरूरी टिप्स. अष्टमी और नवमी का शुभ मुहूर्त अष्टमी तिथि: 29 सितंबर शाम 4:31 बजे से 30 सितंबर शाम 6:06 बजे तक. नवमी तिथि: 30 सितंबर शाम 6:06 बजे से 1 अक्टूबर रात 7:01 बजे तक. कन्या पूजन का ब्रह्म मुहूर्त अष्टमी: सुबह 4:37 बजे से 5:25 बजे तक नवमी: सुबह 4:37 बजे से 5:26 बजे तक विशेषज्ञों के अनुसार, अष्टमी और नवमी के शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन करने से माता दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है. अष्टमी के दिन शक्ति का विशेष संचार होता है और नवमी के दिन विजयदशमी के साथ इसका फल और भी अधिक प्रभावशाली माना जाता है. कन्या पूजन की विधि और महत्व कन्या पूजन देवी दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक है. घर में इस दिन कन्याओं का सम्मान करना केवल परंपरा नहीं बल्कि माता के प्रति श्रद्धा और भक्ति का वास्तविक रूप है. कन्याओं का स्वागत: घर में 9 कन्याओं को आमंत्रित करें और उनका हृदय से स्वागत करें. पैर धोकर सम्मान: कन्याओं के पैरों को धोकर साफ करें और चरणामृत ग्रहण करें. इसे करने से घर में पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा आती है. भोजन और प्रसाद: हलवा, चना, पूरी, मिठाइयां आदि परोसें. भोजन भले ही साधारण हो, लेकिन सच्चे मनोभाव से किया गया पूजन अत्यंत फलदायी होता है. दान करते समय शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें. आरती और प्रार्थना: कन्याओं की आरती करें और माता दुर्गा से आशीर्वाद प्राप्त करें. यह घर में सुख, शांति और समृद्धि लाने का सबसे सरल उपाय है. क्यों है यह खास कन्या पूजन में नौ कन्याओं का पूजन, देवी के नौ रूपों की पूजा के समान माना जाता है. अष्टमीनवमी का पूजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि घर और परिवार के लिए सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का स्रोत भी है. विशेषज्ञों का कहना है कि अष्टमीनवमी के शुभ समय में किया गया पूजन बच्चों और कन्याओं के लिए भी आशीर्वाद लेकर आता है. पूजन का आध्यात्मिक महत्व अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन करने से माता दुर्गा के शक्ति-संपन्न रूप का आशीर्वाद मिलता है. यह विशेष दिन देवी की कृपा से घर में समृद्धि, शांति और खुशहाली लाता है. साथ ही यह परिवार में सद्भाव और आपसी प्रेम को भी बढ़ाता है. इस वर्ष 2930 सितंबर और 1 अक्टूबर को अष्टमीनवमी के शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन करना अत्यंत फलदायी माना गया है, इस दिन कन्याओं का सम्मान, दान और आरती करने से माता दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुखशांति और समृद्धि आती है. इस अवसर को अवश्य अपनाएं और माता की असीम कृपा का अनुभव करें.

भावनाएं हैं स्वास्थ्य की बैरोमीटर

स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है, वाली कहावत काफी पुरानी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इस पर काफी बल देते हैं। यह एक जानी-मानी बात है कि यदि दिमाग में कोई परेशानी हो तो थोड़े समय बाद इसका प्रभाव हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है और हम जल्दी जल्दी बीमार होने लगते हैं। शरीर में होने वाली पीड़ा, मांसपेशियों का दर्द आदि बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि हम जैसा सोचते हैं हमारा शरीर उसी के अनुकूल बनता है। हम जैसा महसूस करते हैं, जैसे काम करते हैं हमारा शरीर भी उसी ढांचे के अनुरूप बन जाता है। इसे ही प्रायः माइंड और बॉडी कनेक्शन कहा जाता है। जब हम तनाव में होते हैं, परेशानियों से घिरते हैं या बेचैन होते हैं तो हमारा शरीर इसका संकेत हमें देना शुरू कर देता है कि शरीर के साथ असामान्य स्थिति है। हममें से कई लोग अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने में सफल हो जाते हैं। इसके विपरीत कुछ लोग तनाव के क्षणों में, विपरीत स्थितियों मे ओवर रिएक्ट करने लगते हैं। वह किसी भी बात को दिल से लगा लेते हैं। उन्हें जब लगता है कि वह कुछ भी कर पाने में सक्षम नहीं हैं तो वह तुरंत रोने लगते हैं, गुस्सा हो जाते हैं, उदासी उन्हें घेर लेती है और चिड़चिड़े हो जाते हैं। इस तरह के लोग परेशान होने के लिए बहाना ढूंढ़ते हैं। उनका यह चिढ़चिढ़ापन, अवसाद में रहने की प्रवृत्ति उनके शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालती है। इसका असर उनके दिल-दिमाग पर ही नहीं शरीर पर भी दिखने लगता है। दरअसल, होता यह है कि जब आप तनाव में होते हैं या परेशान होते हैं उस समय अपने स्वास्थ्य के प्रति हम लापरवाह हो जाते हैं। तनाव के समय घूमने जाना, एक्सरसाइज करना, संतुलित भोजन लेना और डॉक्टर के निर्देेश के अनुसार दवाइयां खाना इन सब चीजों का रुटीन बिगड़ जाता है। सवाल है इन स्थितियों से बचाव के लिए क्या करें? इसके लिए चिकित्सक एबीसी का फार्मूला अपनाने की सलाह देते हैं। ए का अभिप्राय है, अवेयरनेस यानी कोई भी समस्या जब पैदा होती है तो उसके प्रति हमें पूरी तरह से सजग-सचेत होना चाहिए। इसमें किसी की प्रेरणा हमारे लिए सहायक सिद्ध हो सकती है या हम अपना स्वयं का नजरिया सकारात्मक बनाएं जिससे हम समस्या को अपने पास फटकने से पहले ही उसे दूर भगा दें। बी यानी बैलेंसिंग यानी सही और गलत के बीच संतुलन कायम रखने की क्षमता का अपने भीतर पैदा करना। सी का अभिप्राय है कंट्रोल यानी विपरीत स्थितियों पर प्रतिक्रिया को नियंत्रण में रखना। इन तमाम चीजों के अलावा हम पर हमारी भावनाएं हावी होकर हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर न डालें, इसके लिए जरूरी है कि हम संतुलित भोजन लें, समय पर भोजन करें और पर्याप्त नींद लें। किसी भी तरह का नशा न करें। अपनी समस्या को लेकर अपने आपको परेशानी में न रखें। नियमित शारीरिक व्यायाम करें। योगासन करें, मेडिटेशन करें। कुल मिलाकर शरीर को आराम पहुंचाने वाली गतिविधियां करें। जब कभी भावनात्मक दबाव में आएं और भावनाएं दिल-दिमाग पर इस कदर हावी होने लगें कि उनका आपके काम और रिश्तों पर नकारात्मक असर पडने लगे तो ऐसी स्थिति में किसी प्रोफेशनल की मदद लें। ज्यादा संवेदनशील होना किसी तरह की बीमारी नहीं है। यह अकसर कई लोगों के साथ होता है। एक खास अवसर पर ऐसा होना स्वाभाविक है। काउंसलर किसी भी स्थिति से निपटने में हमारी मदद करते हैं। इसलिए उनसे मदद लेने में हमें कोई संकोच नहीं करना चाहिए। वह अति संवेदनशील लोगों को अपनी समस्याओं को लेकर ज्यादा परेशान न होने और उनसे निपटने के बेहतर उपाय सुझा सकते हैं। इन तमाम बातों के अलावा आप हर चीज के विषय में एक डायरी बनाएं, जिसमें कहां पर आप किस स्थिति में ओवररिएक्ट करते हैं उसमें नोट करें। इससे आपको अपनी समस्याओं के प्रति जागरूक होने में सहायता मिलेगी। याद रखें मानसिक समस्याएं धीरे-धीरे हमारे शरीर पर गलत असर डालती हैं और इसकी वजह से हमें कब्ज, डायरिया, कमर दर्द, भूख न लगना, मुंह सूखना, ज्यादा थकान लगना, हाई ब्लडप्रेशर से दर्द, अनिद्रा, गहरी सांस आना, गर्दन में दर्द, पसीना आना, पेट खराब होना, वजन बढना या कम होना जैसी तमाम समस्याएं आ सकती हैं इसलिए समय है सचेत हो जाइए। अपनी समस्याओं का असर अपने शरीर पर न पडने दें।