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शनि देव की कृपा से चमकेगी किस्मत, उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में 4 राशियों को बड़ा लाभ

वैदिक ज्योतिष में शनि देव को कर्मफलदाता, न्यायप्रिय और मंद गति से चलने वाला अत्यंत प्रभावशाली ग्रह माना गया है. शनि देव जब भी अपनी चाल बदलते हैं या नक्षत्र परिवर्तन करते हैं, तो उसका सीधा असर हर व्यक्ति के जीवन और आजीविका पर पड़ता है. इस बार शनि देव अपने स्वयं के स्वामित्व वाले और गुरु (बृहस्पति) के प्रभाव से युक्त उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में संचार कर रहे हैं. उत्तर भाद्रपद नक्षत्र को ज्ञान, धैर्य, आध्यात्मिक उन्नति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है. जब कर्म के कारक शनि अपने ही नक्षत्र में विराजमान होते हैं, तो वे जातकों को उनकी कड़ी मेहनत का भरपूर और स्थायी परिणाम प्रदान करते हैं. शनि के इस शुभ नक्षत्र गोचर से विशेष रूप से 4 राशियों की सोई हुई किस्मत जागने वाली है. वृषभ राशि: करियर में ऊंचाइयां और अप्रत्याशित धन लाभ प्रभाव: वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि का यह गोचर अत्यंत शुभ परिणाम लेकर आया है. शनि देव आपके आय और लाभ भाव को मजबूती प्रदान कर रहे हैं. फायदा: कार्यक्षेत्र में आपकी स्थिति मजबूत होगी. यदि आप लंबे समय से वेतन वृद्धि या प्रमोशन का इंतजार कर रहे थे, तो अब आपकी बात बन सकती है. व्यापार से जुड़े लोगों को नए सौदों से भारी आर्थिक मुनाफा होगा. शेयर बाजार या पुराने निवेश से भी लाभ मिलने के योग हैं. तुला राशि: नौकरी में तरक्की और भौतिक सुख-सुविधाएं प्रभाव: तुला राशि शनि देव की उच्च राशि मानी जाती है, इसलिए शनि का अपने ही नक्षत्र में होना आपके जीवन में स्थिरता और सकारात्मकता लाएगा. फायदा: जो लोग नई नौकरी की तलाश में हैं, उन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनियों से अच्छे अवसर मिल सकते हैं. प्रॉपर्टी, मकान या नया वाहन खरीदने का सपना पूरा हो सकता है. परिवार में चल रहे लंबे विवाद खत्म होंगे और संतान पक्ष से कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है. मकर राशि: आर्थिक संकट दूर और पराक्रम में वृद्धि प्रभाव: मकर राशि के स्वामी स्वयं शनि देव हैं. उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में उनका गोचर आपके संचित धन और वाणी के भाव को बल देगा. फायदा: आपकी आर्थिक स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगी. अटका हुआ या फंसा हुआ पैसा अचानक वापस मिल सकता है. बैंक बैलेंस में बढ़ोतरी होगी और आपकी वाणी के प्रभाव से आपके अटके काम पूरे होने लगेंगे. बिजनेस में नए साझेदार जुड़ सकते हैं. कुंभ राशि: मान-सम्मान में वृद्धि और 'सोने पर सुहागा' समय प्रभाव: कुंभ राशि भी शनि देव के स्वामित्व वाली राशि है. आपके लिए शनि का यह नक्षत्र गोचर सर्वांगीण विकास का समय लेकर आया है. फायदा: आपके आत्मविश्वास और व्यक्तित्व में अद्भुत निखार आएगा. समाज और कार्यक्षेत्र में आपकी साख और प्रतिष्ठा बढ़ेगी. विदेश यात्रा या विदेश से जुड़े व्यापार में लगे लोगों को बड़ा आर्थिक फायदा होगा. स्वास्थ्य से जुड़ी पुरानी परेशानियां दूर होंगी. शनि देव के शुभ प्रभाव बढ़ाने के अचूक उपाय – शनिवार के दिन लोहे के बर्तन में सरसों का तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखें और फिर तेल का दान कर दें. – शनि देव के अशुभ प्रभाव से बचने और शुभ फल प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन या शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें. – शनिवार की शाम पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं.

गणेश चतुर्थी पर 200 साल बाद दुर्लभ संयोग, भद्र-मालव्य राजयोग से चमकेंगी 5 राशियां

इस बार गणेश चतुर्थी सिर्फ गणपति बप्पा की पूजा के लिए ही खास नहीं है, बल्कि ज्योतिषीय नजरिए से भी इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी के दिन ग्रहों की स्थिति से भद्र पंचमहापुरुष राजयोग और मालव्य पंचमहापुरुष राजयोग बनने की बात कही जा रही है. ज्योतिषीय मान्यताओं में इन दोनों योगों को बेहद शुभ माना जाता है. खास बात यह है कि दोनों योग एक साथ बनने का यह संयोग करीब 200 साल बाद बनने का दावा किया जा रहा है. कैसे बन रहा है भद्र योग? भद्र योग पंचमहापुरुष राजयोगों में से एक है. ज्योतिष के अनुसार जब बुध अपनी स्वराशि मिथुन या कन्या अथवा अपनी उच्च राशि कन्या में केंद्र भाव में स्थित होता है, तब भद्र योग बनता है. इस समय बुध कन्या राशि में गोचर कर रहा है. कन्या राशि बुध की अपनी राशि होने के साथ-साथ मूलत्रिकोण राशि भी मानी जाती है. इसलिए बुध की इस स्थिति को मजबूत माना जाता है. ज्योतिष में बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क, लेखन, गणना, व्यापार, शिक्षा और संचार का कारक माना गया है. ऐसे में भद्र योग बनने से इन क्षेत्रों से जुड़े कामों में शुभ परिणाम मिलने की मान्यता है. कैसे बन रहा है मालव्य योग? दूसरी ओर शुक्र अपनी स्वराशि तुला में गोचर कर रहा है. ज्योतिष में जब शुक्र अपनी राशि या उच्च राशि में केंद्र भाव में स्थित होता है तो मालव्य पंचमहापुरुष राजयोग बनने की स्थिति मानी जाती है. शुक्र को धन, वैभव, प्रेम, सौंदर्य, कला, भौतिक सुख-सुविधा, वाहन और ऐश्वर्य का कारक माना जाता है. इसलिए मालव्य योग को आर्थिक और भौतिक सुखों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है. 200 साल बाद क्यों खास है यह संयोग? गणेश चतुर्थी के आसपास बुध का कन्या राशि में और शुक्र का तुला राशि में होना ज्योतिषीय रूप से खास संयोग माना जा रहा है. इसी वजह से इस बार गणपति उत्सव के दौरान भद्र और मालव्य योग की चर्चा हो रही है. इन दोनों योगों को पंचमहापुरुष राजयोगों में शामिल किया जाता है. हालांकि किसी व्यक्ति की कुंडली में इनका प्रभाव उसकी जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति, लग्न और दशा पर निर्भर करता है. इन 5 राशियों को मिल सकता है फायदा मिथुन राशि मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और आर्थिक मामलों में अच्छा माना जा सकता है. नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है . व्यापार करने वालों को नई डील या नए संपर्कों से लाभ मिलने के योग बन सकते हैं. रुके हुए काम भी धीरे-धीरे आगे बढ़ सकते हैं. वृषभ राशि वृषभ राशि वालों के लिए आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है. आय बढ़ाने के नए रास्ते खुल सकते हैं. कारोबार में लाभ मिलने की संभावना है. कन्या राशि कन्या राशि के जातकों के लिए भद्र योग विशेष महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि बुध इसी राशि में स्थित है. इस दौरान बुद्धि, निर्णय क्षमता और कम्युनिकेशन स्किल मजबूत हो सकती है. नौकरी, बिजनेस, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा से जुड़े लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं. तुला राशि तुला राशि वालों के लिए मालव्य योग विशेष लाभकारी माना जा रहा है. शुक्र अपनी राशि तुला में होने के कारण धन, करियर और सुख-सुविधाओं से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं. मकर राशि मकर राशि के जातकों के लिए भी यह समय करियर के लिहाज से अच्छा माना जा रहा है. कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है. नई जिम्मेदारी या पद में बदलाव के अवसर मिल सकते हैं. कब तक मिलेगा इन योगों का फायदा? ज्योतिषीय गणना के अनुसार बुध 26 सितंबर 2026 तक कन्या राशि में रहेगा. इसके बाद वह तुला राशि में प्रवेश करेगा. इसलिए भद्र योग का यह चरण सितंबर के अंत तक माना जा रहा है. वहीं शुक्र तुला राशि में 6 नवंबर 2026 तक रहने वाला है. इस वजह से मालव्य योग का प्रभाव नवंबर की शुरुआत तक रहने की बात कही जा रही है. यानी 14 सितंबर से 26 सितंबर 2026 के बीच भद्र और मालव्य योग का एक साथ प्रभाव विशेष रूप से चर्चा में रहेगा. इसके बाद मालव्य योग का प्रभाव आगे भी जारी रहने की ज्योतिषीय मान्यता है.

हरतालिका तीज आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और सुहाग की चीजों का महत्व

हरतालिका तीज को सुहाग और दांपत्य सुख से जुड़े प्रमुख व्रतों में गिना जाता है. मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. उसी तप और संकल्प की स्मृति में हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है. विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहा वर पाने की इच्छा से यह व्रत करती हैं. आज ही मनाई जा रही है हरतालिका तीज इस साल हरतालिका तीज 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जा रही है. यह व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है. इस बार तृतीया तिथि 13 सितंबर सुबह शुरू होकर 14 सितंबर सुबह समाप्त हो रही है, इसलिए उदया तिथि के आधार पर 14 सितंबर को व्रत रखा जा रहा है. पूजा का शुभ मुहूर्त नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार हरतालिका तीज पर प्रातःकालीन पूजा का मुहूर्त सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक रहेगा. क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर हो सकता है. इस दिन शाम के प्रदोष काल में भी शिव-पार्वती की पूजा करने की परंपरा कई स्थानों पर है. इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार स्थानीय समय जरूर देख लें. त्रेता युग से कैसे जुड़ी है तीज? पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. उनके पिता हिमालय भगवान विष्णु से उनका विवाह करना चाहते थे, लेकिन पार्वती की इच्छा भगवान शिव को पति के रूप में पाने की थी. कहा जाता है कि माता पार्वती की सखी उन्हें वन में ले गईं, जहां उन्होंने शिव की आराधना करते हुए कठोर व्रत किया. उन्होंने मिट्टी से शिवलिंग बनाकर पूजा की और भगवान शिव को पति रूप में पाने का संकल्प लिया. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया.  इसी कथा को हरतालिका तीज के व्रत से जोड़ा जाता है. पूजा में शिव-पार्वती के साथ गणेश जी की करें आराधना हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा मुख्य रूप से की जाती है. इसके साथ गणेश जी की पूजा करने की भी परंपरा है. पूजा के लिए मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमा या शिवलिंग बनाकर स्थापित किया जा सकता है. इसके बाद जल, पंचामृत, अक्षत, रोली, चंदन, फूल, बेलपत्र, धूप और दीप अर्पित करें. माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित कर तीज व्रत की कथा सुनें. इसके बाद शिव-पार्वती की आरती करें, परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करें. हरतालिका तीज पर क्या दान करें? इस दिन दान-पुण्य को भी शुभ माना जाता है. अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को वस्त्र, अन्न, फल, मिठाई और सुहाग सामग्री का दान किया जा सकता है. विवाहित महिलाएं किसी जरूरतमंद महिला को साड़ी, चूड़ी, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी या अन्य श्रृंगार सामग्री दे सकती हैं. वहीं अन्न या फल का दान भी किया जा सकता है. दान करते समय दिखावे के बजाय श्रद्धा और सामर्थ्य को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है. सुहाग की इन चीजों का भी है महत्व हरतालिका तीज पर महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं.  इसमें सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी, मंगलसूत्र, पायल आदि को सुहाग के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. पूजा के दौरान माता पार्वती को भी सुहाग की सामग्री अर्पित करने की परंपरा है. मान्यता है कि इससे अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना की जाती है. निर्जला व्रत में रखें अपनी सेहत का ध्यान हरतालिका तीज पर कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं यानी पूरे दिन अन्न और जल का सेवन नहीं करतीं. हालांकि यह कठिन व्रत है और हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग होती है. अगर किसी को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है, गर्भावस्था है, दवा चल रही है या डॉक्टर ने लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से मना किया है, तो निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है.  धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है. रात में जागरण और अगले दिन पारण कई परंपराओं में हरतालिका तीज की रात जागरण कर शिव-पार्वती की पूजा, भजन और व्रत कथा का पाठ किया जाता है. अगले दिन स्नान और पूजा के बाद व्रत का पारण किया जाता है. अलग-अलग क्षेत्रों में पारण और पूजा की विधि में थोड़ा अंतर हो सकता है. हरतालिका तीज का संदेश हरतालिका तीज की कथा में संकल्प, तपस्या और आस्था को विशेष महत्व दिया गया है. इसलिए इस पर्व का उद्देश्य केवल व्रत रखना नहीं, बल्कि शिव-पार्वती के प्रति श्रद्धा और उनके दांपत्य जीवन से जुड़े आदर्शों को याद करना भी माना जाता है.

गणपति स्थापना का सुबह का मुहूर्त छूटा? दोपहर बाद इन 3 शुभ समय में घर लाएं बप्पा

गणेश चतुर्थी के दिन गणपति बप्पा को घर लाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन सुबह के मुख्य मुहूर्त में स्थापना नहीं कर पाए तो परेशान होने की जरूरत नहीं है.14 सितंबर 2026 को गणपति स्थापना के लिए मध्याह्न काल के अलावा तीन शुभ चौघड़िया मुहूर्त भी बन रहे हैं. ऐसे में दोपहर 1 बजे के बाद भी शुभ समय में गणपति की स्थापना की जा सकती है. 11 बजे के बाद कब-कब कर सकते हैं गणपति स्थापना? 14 सितंबर को सुबह के मुख्य गणेश स्थापना मुहूर्त के बाद चर, लाभ और अमृत चौघड़िया में भी बप्पा की स्थापना का शुभ समय रहेगा. चर मुहूर्त दोपहर 1:49 बजे से 3:22 बजे तक अगर सुबह के समय गणपति घर नहीं ला पाए हैं तो दोपहर में इस मुहूर्त के दौरान बप्पा को घर लाकर स्थापना कर सकते हैं. लाभ मुहूर्त दोपहर 3:22 बजे से शाम 4:55 बजे तक इसके बाद लाभ चौघड़िया शुरू होगा.  इस दौरान भी गणपति स्थापना की जा सकती है. पूजा के लिए पहले से चौकी और बाकी सामग्री तैयार रखना अच्छा रहेगा. अमृत मुहूर्त शाम 4:55 बजे से 6:28 बजे तक तीसरा शुभ समय अमृत चौघड़िया है.  यह समय शाम तक चलता है, इसलिए अगर दिन में किसी वजह से समय नहीं मिल पाया तो इस अवधि में भी गणपति की स्थापना की जा सकती है. सुबह का मुख्य मुहूर्त निकल जाए तो क्या करें? गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि भगवान गणेश का प्राकट्य भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के मध्याह्न काल में हुआ था. इसलिए इस दौरान पूजा और स्थापना को विशेष शुभ माना जाता है. लेकिन अगर किसी वजह से इस समय स्थापना नहीं हो पाती है तो चर, लाभ और अमृत चौघड़िया के इन तीन विकल्पों में से सुविधानुसार समय चुना जा सकता है. गणपति की स्थापना से पहले क्या करें? जिस जगह गणपति को स्थापित करना है, उसे पहले अच्छी तरह साफ कर लें.  चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं, पूजा की सभी सामग्री पहले से तैयार रखें.  गणपति की प्रतिमा स्थापित करने के बाद दीप जलाएं और भगवान गणेश को रोली, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित करें. इसके बाद गणपति को मोदक या मिठाई का भोग लगाकर आरती करें.  परिवार की सुख-समृद्धि और विघ्नों के नाश की कामना के साथ पूजा पूरी करें.  

सोमवार का राशिफल: 14 सितंबर को इन राशियों पर रहेगी भगवान शिव की विशेष कृपा

मेष आज अपनी मेंटल हेल्थ का ध्यान रखें। घर के सदस्यों और अपने पार्टनर के साथ टाइम स्पेंड करें। करियर में फोकस बनाए रखने की जरूरत है। यात्रा के दौरान कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। वृषभ जीवनसाथी के साथ अच्छा वक्त बिताएंगे। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने के आसार हैं। किसी करीबी से गिफ्ट मिलने की संभावना है। आपका स्वास्थ्य भी आपका साथ देगा। आर्थिक स्थिति सही रहेगी लेकिन फालतू के खर्चों से बचें। मिथुन आज व्यवसायिक मुद्दों पर संयम बरतने की जरूरत है। प्रेम-संबंधों में मधुरता आएगी। अपनी फैमिली और दोस्तों के साथ वक्त बिताएं और ट्रिप पर जाएं। दिन रोमांचक भरा रहने वाला है। कर्क आज के दिन प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट करने से बचें। यात्रा पर जाने के प्लान बन सकते हैं। आपको पॉजिटिव बदलाव देखने को मिल सकते हैं। करियर में सफलता मिलेगी। घर के सदस्यों के साथ संबंध मजबूत होंगे। सिंह आपके लिए आत्मविश्वास से भरपूर दिन रहने वाला है। रोमांटिक लाइफ में उथल- पुथल हो सकती है। परिवार के सदस्यों के साथ मधुरता बनाए रखें। अपने स्वास्थ्य को अनदेखा न करें। कन्या आज के दिन आपकी सेहत और आर्थिक स्थिति दोनों दमदार रहने वाली है। लव लाइफ में चल रही उथल पुथल को सुलझाना बेहतर रहेगा। आज कार्यक्षेत्र में आप अपनी प्रतिभा चमकाएंगे। तुला परिवार के कुछ सदस्यों से मतभेद होने की भी संभावना है। अपनी आर्थिक व्यवस्था को सुधारने के लिए आप प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट कर सकते हैं। कुछ लोग ट्रिप पर भी जा सकते हैं। अच्छी खबर मिल सकती है। वृश्चिक वृश्चिक राशि के लोगों को रिश्तों में छोटी-मोटी समस्याएं आ सकती हैं लेकिन बात-चीत कर इन दिक्कतों को सुलझाना बेहतर रहेगा। प्रोफेशनल लाइफ में अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए चुनौतियों का बखूबी सामना करें। धनु आज कुछ लोगों के लिए घूमने जाने के योग बनते भी दिख रहे हैं। थोड़ी बहुत चुनौतियां आ सकती हैं, जिन्हें आप आसानी से पार कर लेंगे। आपके लिए रोमांस से भरपूर रहने वाला है। आपको आपके पार्टनर का पूरा साथ मिलेगा। मकर आज आर्थिक मामलों में किस्मत साथ देगी। खासकर शेयर बाजार में निवेश करना लाभदायक हो सकता है। प्रेम संबंध मजबूत होंगे साथ ही पार्टनर से स्पेशल मैसेज भी सप्ताह के अंत तक मिल सकता है। कुंभ आज के दिन छोटी-मोटी आर्थिक समस्याएं आ सकती हैं। इन दिक्कतों का आप आसानी से हल निकाल लेंगे। वहीं, आज सेहत दुरुस्त रहने वाली है। आप आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प से भरपूर रहेंगे। मीन जीवन को खुशहाल बनाने के लिए लव लाइफ में आ रही दिक्कतों को सुलझाएं। जहां, रोमांस में कुछ लोग डूबे रहेंगे। व्यावसायिक सफलता का आभास भी करेंगे। आपके जीवन में छोटी-मोटी आर्थिक परेशानियां भी रहेंगी।

नीम करोली बाबा के 5 चमत्कार, भक्त आज भी मानते हैं दिव्य शक्तियों का प्रमाण

 उत्तराखंड की पावन वादियों में स्थित कैंची धाम के गुरु, परम सिद्ध संत नीम करोली बाबा का जीवन अलौकिक सिद्धियों और असीम करुणा का सजीव उदाहरण है. करोड़ों श्रद्धालु उन्हें कलयुग में भगवान हनुमान जी का साक्षात अवतार मानते हैं. बाबा जी का जीवन किसी आडंबर से दूर, अत्यंत सरल और सहज था कि वे बस एक कंबल ओढ़कर बैठते थे, लेकिन उनके दर पर आने वाला कोई भी भक्त कभी खाली हाथ वापस नहीं गया. उनके जीवनकाल में ऐसे अनगिनत प्रसंग घटे, जहां प्रकृति के नियम भी उनके तपोबल के आगे नतमस्तक हो गए. आइए जानते हैं नीम करोली बाबा के जीवन से जुड़े 5 ऐसे अलौकिक चमत्कार, जो आज भी श्रद्धालुओं के मन में उनके प्रति अगाध श्रद्धा और विश्वास जगाते हैं. नदी के पानी का शुद्ध देसी घी में बदलना कैंची धाम आश्रम के निर्माण के शुरुआती दिनों में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया था. श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण अचानक पूरियाँ तलने के लिए देसी घी खत्म हो गया. सेवक घबरा गए और उन्होंने तुरंत बाबा जी को जाकर यह बात बताई. बाबा जी ने शांत भाव से कहा, "घबराओ मत, पास बहती नदी से दो बाल्टी पानी भरकर ले आओ." सेवक दौड़े-दौड़े गए और नदी से पानी भरकर ले आए. जब बाबा जी के आदेश पर उस पानी को पूरियां तलने वाली गर्म कड़ाही में डाला गया, तो कड़ाही में गिरते ही वह पानी दिव्य सुगंध वाले शुद्ध देसी घी में परिवर्तित हो गया. उस घी से पूरे भंडारे की पूरियाँ तली गईं और अगले दिन बाबा जी के कहने पर बाजार से उतना ही देसी घी खरीदकर वापस नदी में प्रवाहित कर दिया गया. खारे पानी को गंगाजल की तरह मीठा बनाना एक बार बाबा जी के आश्रम के समीप स्थित पानी का एकमात्र प्राकृतिक स्रोत पूरी तरह खारा हो गया. उसका पानी इतना कसैला था कि पीने या भोजन बनाने योग्य नहीं बचा था. स्थानीय लोग और आश्रम के भक्त इस समस्या से काफी चिंतित थे. जब यह बात बाबा जी के संज्ञान में आई, तो वे स्वयं उस जल स्रोत के पास गए. उन्होंने अत्यंत भाव से उसमें थोड़ा सा चरणामृत मिलाया और भगवान का ध्यान करते हुए मंत्रोच्चार किया. इसके बाद जैसे ही लोगों ने उस पानी को पिया, तो वे आश्चर्यचकित रह गए—वह खारा पानी न केवल पूरी तरह मीठा और सुपाच्य हो चुका था, बल्कि उसमें गंगाजल जैसी दिव्यता और ताजगी आ गई थी. भक्त की जानलेवा बीमारी को अपने शरीर पर लेना नीम करोली बाबा अपने भक्तों से मां की तरह प्रेम करते थे. जब भी उनका कोई प्रिय भक्त किसी असाध्य, जानलेवा बीमारी या असहनीय पीड़ा से ग्रस्त होता था, तो बाबा जी की करुणा उमड़ पड़ती थी. वे अपने तपोबल से भक्त के प्रारब्ध और बीमारी के कष्ट को स्वयं अपने शरीर पर धारण कर लेते थे. ऐसे कई अवसर आए जब भक्त तो रातों-रात पूरी तरह स्वस्थ होकर उठ खड़ा होता था, लेकिन दूसरी ओर बाबा जी स्वयं अपने कंबल के भीतर दर्द से कराहते नजर आते थे. वे भक्त के कष्टों को मुस्कुराते हुए अपने शरीर पर झेल लेते थे ताकि उनके बच्चों को कोई आंच न आए. कड़ाके की बर्फीली ठंड में नदी में समाधि उत्तराखंड की हाड़-कांपने वाली सर्दियों में, जहां आम इंसान कई परतों वाले गर्म कपड़ों में भी ठिठुरने लगता है, बाबा जी केवल एक सूती धोती और कंबल में रहते थे. कई बार भीषण बर्फ़ीली रात में बाबा जी ठंडे बर्फीले पानी की नदी में उतर जाते थे और घंटों जल-समाधि में लीन रहते थे. जब वे जल-समाधि पूरी करके बाहर निकलते, तो उनके शरीर पर ठंड का नामोनिशान तक नहीं होता था. उनका शरीर ऐसे दमकता था मानो वे किसी सामान्य तापमान में बैठकर आए हों. उनकी यह योग-साधना उनके उच्चकोटि के सिद्ध योगी होने का प्रत्यक्ष प्रमाण थी. भक्त को नया जीवनदान देना बाबा जी के दरबार में भक्ति की कोई सीमा नहीं थी और न ही उनके आशीर्वाद की. उनके कई भक्तों के जीवन में ऐसे क्षण आए जब गंभीर बीमारियों या दुर्घटनाओं के कारण डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे और डॉक्टरों के अनुसार मृत्यु निश्चित थी. ऐसे समय में भक्तों के परिजनों ने केवल बाबा जी का ध्यान किया या उनका छुआ हुआ 'आरोग्य प्रसाद' (या चरणामृत) मरीज को दिया. बाबा जी के एक अभयदान और संकल्प से काल को भी पीछे हटना पड़ा. यमराज के द्वार तक पहुंच चुके मरीज चमत्कारिक रूप से पूरी तरह ठीक हो गए और डॉक्टरों के लिए यह बात हमेशा एक अनसुलझा रहस्य बनी रही.

हरतालिका तीज पर भूलकर भी न करें ये 5 काम, वरना अधूरा रह सकता है व्रत

हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे कठिन और महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला उपवास रखती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था, तभी से इस व्रत की परंपरा चली आ रही है. इस व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने और किसी भी तरह के दोष से बचने के लिए शास्त्र सम्मत नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है. इस बार हरतालिका तीज 14 सितंबर को मनाई जाएगी.  आइए जानते हैं कि हरतालिका तीज के दिन कौन से काम भूलकर भी नहीं करने चाहिए: 1. अन्न और जल का सेवन न करें (निर्जला नियम) हरतालिका तीज का व्रत मुख्य रूप से निर्जला (बिना पानी के) रखा जाता है. एक बार व्रत का संकल्प लेने के बाद दिनभर जल या अन्न ग्रहण करना वर्जित माना जाता है. हालांकि, यदि स्वास्थ्य अधिक खराब हो या गर्भवती महिलाएं हों, तो वे डॉक्टर या किसी योग्य आचार्य की सलाह से फलाहार का विकल्प चुन सकती हैं, लेकिन सामान्य स्थिति में अन्न-जल का त्याग ही नियम है.   2. दिन में सोना वर्जित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज के दिन दिन में सोने से बचना चाहिए.  इस पूरे दिन और रात के समय भगवान शिव और माता पार्वती के भजन-कीर्तन व जागरण का विधान है. मान्यता है कि इस दिन व्रत के दौरान सोने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता है.   3. काले या सफेद वस्त्र पहनने से बचें पूजा के दौरान और पूरे दिन वस्त्रों के चयन में सावधानी रखनी चाहिए.  इस दिन काले, नीले या सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचना शुभ माना जाता है. तीज के पावन पर्व पर हरे या लाल रंग के वस्त्र पहनना सबसे उत्तम और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना गया है. इसके साथ ही सुहाग की सभी वस्तुएं पूरी निष्ठा के साथ मां पार्वती को अर्पित करें.   4. क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूरी व्रत के दिन मन, वाणी और कर्म से पवित्रता बनाए रखना अनिवार्य है.  किसी पर भी गुस्सा न करें, अपशब्द न बोलें. घर में वाद-विवाद की स्थिति से दूर रहें.  इस दिन पूरी तरह से सात्विक आचरण करते हुए भगवान का ध्यान करना चाहिए.   5. कथा सुनना न भूलें हरतालिका तीज की पूजा बिना कथा सुने अधूरी मानी जाती है.  इसलिए पूजा के दौरान हरतालिका तीज की व्रत कथा का पाठ अवश्य करें या सुनें, जिससे व्रत का पूरा पुण्य प्राप्त हो सके. 

26 सितंबर को बनेगा लक्ष्मी नारायण राजयोग, इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत

 सितंबर के आखिरी सप्ताह में ग्रहों की स्थिति में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. 26 सितंबर 2026 को बुध कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेंगे. यहां शुक्र पहले से मौजूद होंगे. ऐसे में तुला राशि में बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण होगा. ज्योतिष में बुध को बुद्धि, वाणी, व्यापार और तर्क का कारक माना जाता है, जबकि शुक्र धन, सुख-सुविधा, प्रेम और भौतिक समृद्धि से जुड़े हैं.  इसलिए इन दोनों ग्रहों का संयोग आर्थिक और करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है. क्या है लक्ष्मी नारायण राजयोग? ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार कुंडली में बुध और शुक्र की शुभ स्थिति से लक्ष्मी नारायण योग बनता है. इसे धन, वैभव, बुद्धिमत्ता, रचनात्मकता और सुख-सुविधाओं से जोड़कर देखा जाता है. गोचर के दौरान जब दोनों ग्रह एक राशि में आते हैं, तो उसका प्रभाव अलग-अलग राशियों पर उनके भाव और ग्रह स्थिति के अनुसार पड़ सकता है. इस बार यह योग तुला राशि में बनने जा रहा है. कुछ ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इसका प्रभाव कई राशियों के लिए करियर, कारोबार और आर्थिक मामलों में सकारात्मक रह सकता है. मिथुन राशि मिथुन राशि के जातकों के लिए यह योग शिक्षा, करियर और आर्थिक मामलों में लाभकारी रह सकता है. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे लोगों को अच्छे परिणाम मिल सकते हैं. नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी या अवसर मिल सकता है. कारोबार में भी लाभ के नए रास्ते खुल सकते हैं. आय के अतिरिक्त स्रोत बनने की संभावना है. तुला राशि यह योग तुला राशि में ही बनने जा रहा है, इसलिए इस राशि के जातकों के लिए इसका महत्व बढ़ जाता है. आत्मविश्वास और व्यक्तित्व में निखार आ सकता है. कार्यक्षेत्र में आपकी पहचान मजबूत हो सकती है. व्यापार करने वालों को नए अवसर और लाभ मिल सकते हैं. पार्टनरशिप से जुड़े कामों में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है. धनु राशि धनु राशि वालों के लिए लक्ष्मी नारायण राजयोग आय के लिहाज से अच्छा रह सकता है. कमाई के नए साधन बनने की संभावना है. प्रभावशाली लोगों से संपर्क बढ़ सकता है, जिसका फायदा भविष्य में मिल सकता है. लंबे समय से अटकी आर्थिक योजनाओं को गति मिल सकती है. मकर राशि मकर राशि वालों के करियर के लिए यह समय महत्वपूर्ण हो सकता है.  नौकरी में प्रमोशन, वेतन वृद्धि या नई नौकरी का प्रस्ताव मिलने के योग बन सकते हैं.  कारोबारियों को रुकी हुई योजनाओं में गति मिल सकती है.

9 अक्टूबर को बदलेगी शनि की चाल, इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में न्याय के देवता और कर्मफलदाता शनि देव को सबसे महत्वपूर्ण और धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है. जब भी शनि अपनी चाल या नक्षत्र में बदलाव करते हैं, तो इसका सीधा असर देश-दुनिया के साथ-साथ सभी 12 राशियों के जीवन पर लंबे समय तक बना रहता है. पंचांग गणना के अनुसार, कर्मफलदाता शनि देव 9 अक्टूबर 2026 को शाम 7:28 बजे अपनी चाल बदलते हुए अपने ही नक्षत्र उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र में इसे बेहद खास गोचर माना जा रहा है, क्योंकि जब ग्रह अपने ही नक्षत्र में संचरण करता है, तो उसके शुभ प्रभाव कई गुना बढ़ जाते हैं. इस समय शनि वक्री अवस्था में रहेंगे.  यह स्थिति 8 फरवरी 2027 तक बनी रहेगी. शनि के इस नक्षत्र परिवर्तन से कुछ चुनिंदा राशियों के भाग्य के द्वार खुलने वाले हैं. इन्हें करियर-कारोबार में बंपर लाभ मिलने के योग हैं. आइए जानते हैं वे कौन सी भाग्यशाली राशियां हैं जिन्हें इस गोचर से जबरदस्त फायदा होगा. 1. वृषभ राशि (Taurus) वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि का यह नक्षत्र परिवर्तन किसी वरदान से कम साबित नहीं होगा. नक्षत्र प्रभाव और तिथि: 9 अक्टूबर से शुरू हो रहे इस गोचर के प्रभाव से आपके लंबे समय से अटके हुए काम गति पकड़ेंगे. आर्थिक लाभ: अटके हुए धन की वापसी होगी. आय के नए स्रोत खुलेंगे. व्यापार और नौकरी: बिजनेस में कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या मनचाहा ट्रांसफर मिलने के मजबूत योग हैं. मान-सम्मान: समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी. प्रभावशाली लोगों से संपर्क बनेंगे. 2. तुला राशि (Libra) तुला राशि में शनि देव को बहुत मजबूत स्थिति (उच्च) का माना गया है, ऐसे में यह गोचर इस राशि के लिए बेहद मंगलकारी रहेगा. नक्षत्र प्रभाव और तिथि: 9 अक्टूबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच का यह कालखंड तुला राशि वालों के लिए आर्थिक मोर्चे पर राहत लेकर आएगा. प्रॉपर्टी और वाहन सुख: भूमि, भवन या नया वाहन खरीदने की इच्छा पूरी हो सकती है. पैतृक संपत्ति से भी लाभ मिलने के योग हैं. करियर में प्रगति: कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी. सीनियर्स आपके काम की सराहना करेंगे. पुराने कर्जों से मुक्ति मिलने के रास्ते खुलेंगे. पारिवारिक जीवन: जीवनसाथी के साथ रिश्ते मधुर होंगे.  घर-परिवार में कोई मांगलिक कार्य संपन्न हो सकता है. 3. मकर राशि (Capricorn) मकर राशि के स्वामी स्वयं शनि देव हैं, इसलिए इस राशि के जातकों पर इस गोचर का विशेष प्रभाव देखने को मिलेगा. नक्षत्र प्रभाव और तिथि: 9 अक्टूबर से उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में शनि का संचरण मकर राशि वालों के जीवन में स्थायित्व और सफलता लेकर आएगा. करियर में स्थिरता: नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में स्थिरता मिलेगी.  पदोन्नति या वेतन वृद्धि के प्रबल अवसर बनेंगे. आर्थिक उन्नति: व्यापार में नए रास्ते खुलेंगे. वित्तीय स्थिति सुधरेगी. मेहनत के दम पर आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल रहेंगे. 4. कुंभ राशि (Aquarius) कुंभ राशि के जातकों के लिए भी शनि का यह नक्षत्र गोचर बेहद महत्वपूर्ण और लाभकारी साबित होने वाला है. नक्षत्र प्रभाव और तिथि: 9 अक्टूबर को होने वाले इस गोचर से लेकर फरवरी 2027 तक कुंभ राशि वालों के अटके हुए कार्य तेजी से आगे बढ़ेंगे. धन संचय और बचत: आप अपने धन की बचत करने में सफल रहेंगे. बैंक बैलेंस में वृद्धि होगी. करियर में उछाल: नौकरी में चल रही अनबन समाप्त होगी. ऑफिस में आपकी निर्णय क्षमता और कार्यशैली की प्रशंसा होगी, जिससे बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है. आर्थिक निवेश: यदि आप शेयर मार्केट, प्रॉपर्टी या किसी नए वेंचर में निवेश करना चाहते हैं, तो यह अवधि बेहद लाभदायक साबित हो सकती है.

13 सितंबर राशिफल: रविवार का दिन इन राशियों के लिए रहेगा खास, मां लक्ष्मी की कृपा से मिलेगा धन लाभ

मेष आज किसी शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है। परिवार में अपनों का साथ मिलेगा। आज आपको अपना पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि घर का कोई बुजुर्ग आपकी आर्थिक मदद कर सकता है। किसी खास व्यक्ति से मुलाकात होने की संभावना है। वृषभ आज आपका पराक्रम रंग लाएगा और आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। नौकरी के लिए परीक्षा, इंटरव्यू आदि कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। शासन- सत्ता का सहयोग मिलेगा। आय में वृद्धि होगी। बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलेगा। मिथुन आज आपको अपनी सेहत पर नजर रखनी चाहिए। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को करने के लिए दिन अच्छा रहने वाला है। माता-पिता की सेहत के प्रति सचेत रहें। नौकरी में विदेश जाने के अवसर मिल सकते हैं। आय में वृद्धि होगी। परिश्रम अधिक रहेगा। कर्क आज आपका आत्मविश्वास भरपूर रहेगा, लेकिन धैर्य से काम लेना आपके लिए अच्छा रहेगा। व्यर्थ के क्रोध से बचें। बातचीत में संतुलित रहें। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। खर्चों की अधिकता रहेगी। परिवार के साथ यात्रा पर जाने का मौका मिलेगा। सिंह आज आपका दिन तनाव से भरा हो सकता है। किसी दोस्त की सलाह आपके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। रुपए-पैसे को उधार देने से बचना चाहिए। परिवार के सदस्यों का साथ मिलेगा। जीवनसाथी की सेहत पर नजर रखना आपके लिए जरूरी है। व्यापार में उन्नति मिल सकती है। संतान का पूरा साथ मिलेगा। कन्या आज बड़े-बुजुर्गों को अपनी सेहत पर नजर रखने की जरूरत है। आज आपको निवेश करने से बचना चाहिए। परिवार के सदस्यों का साथ मिलेगा। लव लाइफ अच्छी रहेगी। अधूरे कार्यों को पूरा करने का प्रयास करेंगे। आज आपके वैवाहिक जीवन का सबसे अच्छा दिन बन सकता है। तुला आज आपको पार्टनर का नजरिया समझकर व्यक्तिगत समस्याएं सुलझानी चाहिए। दिन शुरू से अंत तक काम को लेकर एनर्जेटिक महसूस करेंगे। दिन खुशियों से भरा रहेगा। आज सोच-समझकर पैसा खर्च करें, क्योंकि आपको धन हानि होने की संभावना है। कोई भी नया प्रोजेक्ट लेने से पहले दो बार सोचें। वृश्चिक आज आपको प्यार का साथ मिलेगा। कुछ जातकों को आज जमीन से जुड़े किसी मामले पर पैसा खर्च करना पड़ सकता है। दोस्तों के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। प्रेम संबंधों में जबरदस्ती करने से बचें। आज आप कार्यस्थल पर खास महसूस करेंगे। व्यापारिक स्थिति अच्छी रहने वाली है। धनु आज आपका दिन आनंददायक रहने वाला है। शादीशुदा लोगों को अपने बच्चे का खास ख्याल रखने की जरूरत है। सेहत पर नजर रखें। व्यक्तिगत परेशानियां सुलझाने के लिए आज का दिन अच्छा रहने वाला है। पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। व्यापारिक स्थिति पहले से अच्छी होगी। मकर आपका जीवनसाथी आज आपको खुश करने की भरपूर कोशिश करेगा।आपका व्यवहार लोगों का ध्यान आकर्षित करेगा। वर्कप्लेस पर आपको अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। आर्थिक रूप से सतर्क रहने की जरूरत है। यात्रा लाभकारी रहने वाली है। कारोबार में वृद्धि के संकेत हैं। कुंभ आज आपको अपनी सेहत पर नजर रखने की जरूरत है। वर्कप्लेस पर ऑफिस की पॉलिटिक्स पर नजर रखें।। सभी कमिटमेंट और वित्तीय लेनदेन को सावधानी से संभालने की आवश्यकता है। आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य चिंता का कारण बन सकता है। आपको अचानक किसी अनचाही यात्रा पर जाना पड़ सकता है, जिससे परिवार के साथ समय बिताने का आपका प्लान खराब हो सकता है। मीन आज आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। अपनों का साथ मिलेगा। कर्ज से छुटकारा मिल सकता है। सेहत से जुड़ी परेशानियां चिंता का कारण बन सकती है। सिंगल जातकों की लाइफ में प्यार की एंट्री हो सकती है। विवाहित जातक पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताएंगे।