samacharsecretary.com

आज का राशिफल 10 सितंबर: इन राशियों की चमकेगी किस्मत, मां लक्ष्मी की कृपा से मिलेगा धन लाभ

मेष आज के दिन धन-वृद्धि के योग बन रहे हैं। जिन लोगों को जॉब की तलाश थी, उनका सपना पूरा होता नजर आएगा। लव के मामले में कुछ लोगों को पेरेंट्स का सपोर्ट मिलेगा। कुछ व्यापारियों को नई पार्टनरशिप भी मिल सकती है। वृषभ आज के दिन ऑफिस की पॉलिटिक्स आपके लिए नेगेटिव साबित हो सकती है। पॉजिटिव सोच बनाकर रखें। अपने काम पर फोकस करें। गॉसिप से दूर रहें। जरूरत पड़ने पर फैमिली या पार्टनर से सलह लें। मिथुन आज के दिन ऑफिस में अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। बहुत ज्यादा प्रेशर न लें। वर्क लाइफ बैलेंस मेंटेन करके आगे बढ़ें। समय- समय पर ब्रेक जरूर लेते रहें। आज का दिन उतार-चढ़ाव से भरपूर रहने वाला है। कर्क आज के दिन काम के सिलसिले में विदेश की यात्रा के योग बन रहे हैं। व्यापार, सेहत, पैसों का मामला या हो लव लाइफ बड़े चेंज के लिए तैयार हो जाएं। आज का दिन आपके लिए काफी बिजी साबित हो सकता है। सिंह आज का दिन थोड़ा सा स्ट्रेस भरा साबित हो सकता है। खर्च बढ़ने की संभावना भी ज्यादा है। बाहर के खाने से परहेज करें। आज का दिन बदलावों से भरपूर रहने वाला है। तनाव दूर करने के लिए मेडिटेशन करें। कन्या आज लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशन वालों को आज ही प्रेम जीवन में आ रही दिक्कतों पर फोकस करना चाहिए। फिट रहने पर फोकस रखें। आज का दिन आलस भरा साबित हो सकता है। तुला आज घर में खुशियों का माहौल रहेगा। विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं। समय पर काम ना पूरा होने से सीनियर्स या मैनेजमेंट की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। धन का आगमन होगा। वृश्चिक आज सेहत के मामले में लापरवाही न बरतें। दिन रोमांटिक रहेगा। आज का आपका दिन पॉजिटिव एनर्जी से भरपूर रहने वाला है। इन्वेस्टमेंट को लेकर स्ट्रेटजी बनाने पर ध्यान दें। धनु आज के दिन अपनी बॉडी को फिट रखने के लिए योग ट्राई करें। एक शानदार दिन के लिए तैयार हो जाएं। हाल ही में हुई किसी डील से भारी मात्रा में धन-लाभ हो सकता है। प्रेम जीवन में चल रही दिक्कतें सॉल्व हो जाएंगी। मकर आज के दिन आपको सेल्फ लव पर फोकस करना चाहिए। करियर में अपनी जगह बनाने के लिए मेहनत ज्यादा करनी पड़ेगी। किसी पुराने इन्वेस्टमेंट से मनचाहा रिटर्न नहीं मिलेगा। कुंभ काम को समय पर पूरा करने पर फोकस रखें। सेहत के मामले में भाग्य साथ देगा। अपने पार्टनर के साथ रोमांटिक डेट प्लान करें। खर्च को इस वक्त कंट्रोल करने की जरूरत है। मीन आज का आपका दिन काफी बेहतरीन साबित हो सकता है। करियर के मामले में महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी आपको दी जा सकती है। आर्थिक स्थिति भी मजबूत रहने वाली है।

आज का राशिफल: 9 सितंबर बुधवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, मां लक्ष्मी की कृपा से बढ़ेगा धन

मेष राशि: भौतिक सुख-संपदा में वृद्धि होगी। घर में शुभ संस्कार होने के संकेत हैं। माँ का साथ मिलेगा और स्वयं के स्वास्थ्य व माँ के स्वास्थ्य में सुधार होगा। प्रेम में थोड़ी दूरी बनी रहेगी। संतान दूर रहकर के आगे बढ़ेगी। व्यापारिक स्थिति अच्छी है, एक शुभता वाला समय है, कोई प्रॉब्लम की बात नहीं है। हरी वस्तु का दान करना शुभ होगा। वृषभ राशि: भाई-बहन का साथ मिलेगा। मित्र और अपने लोग कंधा से कंधा मिलाकर के व्यवसायिक सफलता की तरफ लेके जाएंगे। प्रेम-संतान की स्थिति काफी अच्छी हो चुकी है, व्यापारिक स्थिति आपकी बहुत अच्छी है। जुबान पे थोड़ा कड़वाहट ना लाएं। लाल वस्तु का दान करना शुभ होगा। मिथुन राशि: स्वास्थ्य ऊपर-नीचे बना रहेगा। प्रेम-संतान की स्थिति बहुत ही अच्छी है, व्यापारिक स्थिति आपकी बहुत अच्छी चल रही है। निवेश करने के लिए उपयुक्त समय है। अपनों का साथ होगा, शब्द साधक की तरह आप सारे मामले को सॉल्व कर लेंगे। पीली वस्तु का दान करना शुभ होगा। कर्क राशि: सौम्यता बढ़ेगी, आकर्षण के केंद्र बनेंगे लेकिन पवित्रता वाली आकर्षण होगी आप में। प्रेम, संतान, व्यापार बहुत ही अच्छा है, हर मामले में एक अच्छी स्थिति आपकी दिखाई पड़ रही है। पीली वस्तु पास रखना शुभ होगा। सिंह राशि: यद्यपि कि स्वास्थ्य की स्थिति अच्छी है, फिर भी सर दर्द, नेत्र पीड़ा संभव है। मन बेचैन रहेगा, खर्च की अधिकता रहेगी। प्रेम से थोड़ी दूरी रहेगी, संतान भी दूर दिखेगा। व्यापारिक स्थिति आपकी अच्छी रहेगी, आय में निरंतरता बना रहेगा और निवेश के लिए उपयुक्त समय रहेगा। गणेश जी को प्रणाम करना शुभ होगा। कन्या राशि: आय में आशातीत बढ़ोतरी होगी, शुभ समाचार की प्राप्ति होगी। यात्रा से लाभान्वित होंगे। प्रेम-संतान की स्थिति बहुत अच्छी रहेगी, व्यापार भी बहुत अच्छा चल रहा है। लाल वस्तु का दान करना शुभ होगा। तुला राशि: व्यावसायिक सफलता मिलेगी, कोर्ट-कचहरी में विजय मिलेगा, राजनीतिक लाभ होगा, बड़ों का आशीर्वाद मिलेगा, पिता का साथ होगा। स्वास्थ्य बहुत अच्छा है, प्रेम-संतान की स्थिति थोड़ी मध्यम, व्यापारिक स्थिति बहुत अच्छी है। शनि देव को प्रणाम करना शुभ होगा। वृश्चिक राशि: भाग्य साथ देगा, अचानक यात्रा करने का संयोग बनेगा। प्रेम-संतान की स्थिति बहुत ही अच्छी है, व्यापारिक स्थिति बहुत अच्छी है। एक शुभ समय है आपके लिए और भाग्यवश बहुत सारे काम बनेंगे। पीली वस्तु पास रखना शुभ होगा। धनु राशि: सायंकाल तक थोड़ा मध्यम समय रहेगा, फिर जीवन की एक अच्छी शुरुआत हो जाएगी। प्रेम व संतान की स्थिति बहुत अच्छी और अद्भुत है तथा व्यापारिक स्थिति अच्छी चल रही है; लाल वस्तु पास रखना शुभ होगा। मकर राशि: जीवनसाथी का भरपूर सहयोग मिलेगा और नौकरी-चाकरी की स्थिति बहुत अच्छी रहेगी। प्रेम, संतान और व्यापार अच्छा दिख रहा है; आप रंगीन बने रहेंगे, छुट्टी सा महसूस करेंगे, प्रेमी-प्रेमिका की मुलाकात होगी तथा बहुत आनंददायक जीवन गुजारेंगे, पीली वस्तु का दान करना शुभ होगा। कुंभ राशि: शत्रुओं की सामने पड़ने की हिमाकत नहीं होगी और वे मित्रवत व्यवहार करने की सोचेंगे। प्रेम-संतान की स्थिति थोड़ी मध्यम चल रही है पर कोई समस्या नहीं है, बस किसी कारणवश थोड़ी दूरी या मिलना-जुलना कम रहेगा; व्यापारिक स्थिति बहुत अच्छी है, गणेश जी को प्रणाम करना शुभ होगा। मीन राशि: कोई बड़ा निर्णय लेने, बड़ी पढ़ाई-लिखाई या ट्रेनिंग की शुरुआत करने तथा लिखने-पढ़ने, कवियों और लेखकों के लिए अद्भुत समय है; प्रेम, संतान और व्यापार बहुत अच्छा रहेगा, पीली वस्तु पास रखना शुभ होगा।

तुला में शुक्र का गोचर, 59 दिनों तक रहेगा मालव्य राजयोग; इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत

 द्रिक पंचांग के अनुसार, 2 सितंबर 2026 को भौतिक सुख, वैभव, सौंदर्य और प्रेम के कारक ग्रह शुक्र अपनी स्वयं की राशि तुला में प्रवेश कर चुके हैं और वे 6 नवंबर 2026 तक इसी राशि में विराजमान रहेंगे. ज्योतिष शास्त्र में जब शुक्र अपनी स्वराशि तुला में गोचर करते हैं, तो अत्यंत शुभ 'मालव्य राजयोग' का निर्माण होता है. लगभग 59 दिनों की इस लंबी अवधि में शुक्र देव कई राशियों के जीवन में सुख-समृद्धि, धन-दौलत, व्यापारिक सफलता और आकर्षण लेकर आएंगे. शुक्र के इस गोचर से मुख्य रूप से इन राशियों को सबसे अधिक लाभ और भाग्य का साथ मिलेगा: मिथुन राशि प्रभाव: आपकी राशि के पांचवें (शिक्षा, प्रेम व संतान) भाव में शुक्र का गोचर हो रहा है. फायदा: कला, मीडिया, फैशन या रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को बड़ी सफलता मिलेगी. अचानक धन लाभ के योग हैं. प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी और संतान पक्ष से कोई खुशखबरी मिल सकती है. तुला राशि प्रभाव: शुक्र आपकी ही राशि (प्रथम भाव) में विराजमान हैं, जिससे मालव्य राजयोग का सीधा लाभ आपको मिलेगा. फायदा: आपके व्यक्तित्व और आकर्षण में वृद्धि होगी. समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. बिजनेस में बड़ी डील क्रैक हो सकती है और पार्टनरशिप के कामों में जबरदस्त मुनाफा होगा. धनु राशि प्रभाव: आपकी राशि के ग्यारहवें (लाभ) भाव में शुक्र का गोचर आर्थिक मजबूती लाएगा. फायदा: आय के नए-नए स्रोत बनेंगे और जमा पूंजी में बढ़ोतरी होगी. लंबे समय से अटकी हुई भौतिक इच्छाएं पूरी होंगी. दोस्तों और नेटवर्किंग के जरिए बड़ा व्यावसायिक फायदा होगा. मकर राशि प्रभाव: आपके दशम (कर्म व करियर) भाव में शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ माना जाता है. फायदा: कार्यक्षेत्र में तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे. पदोन्नति, वेतन वृद्धि या मनचाही नौकरी का अवसर मिल सकता है. वरिष्ठ अधिकारियों और महिला सहकर्मियों का पूरा सहयोग मिलेगा. कुंभ राशि प्रभाव: आपके नवम (भाग्य) भाव में शुक्र देव विराजमान रहकर सोए हुए भाग्य को जगाएंगे. फायदा: हर काम में किस्मत का पूरा साथ मिलेगा. लंबी दूरी की सुखद और लाभकारी यात्राएं होंगी. धार्मिक या मांगलिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी और नया वाहन या प्रॉपर्टी खरीदने के मजबूत योग हैं. शुक्र देव के शुभ प्रभाव बढ़ाने के सरल उपाय – शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करें और उन्हें सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाएं. – अपनी दिनचर्या में स्वच्छता बनाए रखें और हल्के सुगंधित इत्र (Perfume) का प्रयोग करें. – ऊं शुं शुक्राय नमः मंत्र का यथासंभव जाप करें.

18 सितंबर को बन रहा गुरु-मंगल योग, इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत; धन-करियर में होगा लाभ

18 सितंबर 2026 को मंगल ग्रह अपनी नीच राशि कर्क में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से ही देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि में विराजमान हैं. इस प्रकार कर्क राशि में गुरु और मंगल का दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है. ज्योतिष शास्त्र में गुरु और मंगल की युति से गुरु-मंगल योग का निर्माण होता है. गुरु ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि के कारक हैं, वहीं मंगल साहस, ऊर्जा और पराक्रम के कारक हैं. यद्यपि मंगल नीच राशि में रहेंगे, लेकिन उच्च के गुरु के साथ होने से उनका नीचभंग भी होगा. इस शुभ संयोग से कई राशियों को करियर, धन और मान-सम्मान में जबरदस्त लाभ मिलेगा. मिथुन राशि शुभ प्रभाव: आपकी राशि के दूसरे (धन व वाणी) भाव में यह युति बनने जा रही है. लाभ: अचानक धन लाभ के मजबूत योग बनेंगे. आपकी वाणी में सौम्यता और आकर्षण रहेगा, जिससे बड़े व्यावसायिक सौदे फाइनल हो सकते हैं. अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है. कर्क राशि शुभ प्रभाव: यह संयोग आपकी ही राशि में बन रहा है, जिससे आपका आत्मविश्वास और प्रभाव तेजी से बढ़ेगा. लाभ: रुके हुए काम पूरे होंगे. समाज और कार्यक्षेत्र में आपकी नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी. नया व्यापार शुरू करने या करियर में बदलाव के लिए यह समय अनुकूल रहेगा. कन्या राशि शुभ प्रभाव: आपकी राशि के ग्यारहवें (लाभ) भाव में गुरु और मंगल का मिलन होगा. लाभ: आय के नए और स्थायी स्रोत बनेंगे. यदि आप लंबे समय से किसी प्रोजेक्ट या निवेश पर काम कर रहे हैं, तो उससे बड़ा वित्तीय फायदा मिलेगा. मित्रों और वरिष्ठ अधिकारियों का पूरा सहयोग प्राप्त होगा. तुला राशि शुभ प्रभाव: आपके दशम (कर्म) भाव में यह शुभ संयोग बनने से कार्यक्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा. लाभ: नौकरीपेशा जातकों को पदोन्नति, वेतन वृद्धि या मनचाहा ट्रांसफर मिल सकता है. सरकारी क्षेत्र से जुड़े कामों में सफलता मिलेगी और नए व्यापारिक अवसर प्राप्त होंगे. वृश्चिक राशि शुभ प्रभाव: नवम (भाग्य) भाव में गुरु-मंगल की युति से आपका भाग्य पक्ष मजबूत होगा. लाभ: धर्म-कर्म के कार्यों में रुचि बढ़ेगी. लंबी दूरी की लाभदायक यात्राएं होंगी. प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों और विदेश जाने के इच्छुक लोगों के लिए यह समय वरदान समान है. शुभ फल बढ़ाने के सरल उपाय – मंगलवार और गुरुवार के दिन हनुमान जी और भगवान विष्णु की पूजा करें. – माथे पर केसर या पीले चंदन का तिलक लगाएं. – जरूरतमंदों को गुड़, चने की दाल या केसर युक्त दूध का दान करें.

रामायण-महाभारत की 5 दिव्य तलवारें, जिनकी शक्ति के आगे बड़े-बड़े योद्धा भी थे बेबस

हमारे हिंदू धर्म में ऐसी कई दिव्य शक्तियों और अस्त्र-शस्त्रों का वर्णन मिलता है, जिनका सामना करना बड़े-बड़े योद्धाओं और यहां तक कि देवताओं के लिए भी आसान नहीं था. कहा जाता है कि इनमें से कुछ तलवारें इतनी शक्तिशाली थीं कि उनके सामने सामान्य अस्त्र-शस्त्र टिक ही नहीं सकते थे. हिंदू महाकाव्यों में कई ऐसे दिव्यास्त्र और शस्त्रों का जिक्र मिलता है, जिन्हें संभाल पाना या उनका इस्तेमाल करना आम योद्धाओं के बस की बात नहीं थी. इन्हीं दिव्य शस्त्रों में तलवार और खड़ग का भी विशेष स्थान था. रामायण और महाभारत में हमें कई ऐसे योद्धाओं का वर्णन मिलता है, जिन्होंने वरदान, तपस्या या अपनी युद्ध-कला के बल पर इन दिव्य शस्त्रों को प्राप्त किया था. वैसे शस्त्रों की श्रेणी में एक होती है तलवार, जिसकी एक या दोनों धारें हो सकती हैं, जबकि खड़ग आमतौर पर चौड़ी और बेहद धारदार तलवार के रूप में वर्णित किया जाता है. लेकिन आज हम बात करेंगे उन दिव्य तलवारों और खड़ग की, जिन्हें पौराणिक कथाओं में असाधारण शक्तियों से युक्त बताया गया है. तो चलिए जानते हैं रामायण और महाभारत से जुड़ी पांच शक्तिशाली तलवारों के बारे में, जिनके स्वामी महान योद्धा माने जाते हैं. कौशल्य तलवार सबसे पहली तलवार आती है कौशल्य तलवार. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस तलवार का निर्माण स्वयं विश्वकर्मा जी ने किया था और इसे देवताओं के गुरु बृहस्पति से जोड़ा जाता है. कहा जाता है कि बृहस्पति जी ने राक्षसों और असुरों से अपनी रक्षा के लिए इस दिव्य तलवार का इस्तेमाल किया. बाद में जब गंगापुत्र भीष्म ने उनसे शिक्षा प्राप्त की, तो यह तलवार भीष्म को प्राप्त हुई. आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले भीष्म अपने तपोबल और युद्ध कौशल के लिए प्रसिद्ध थे. कहा जाता है कि उन्होंने इस तलवार की शक्ति को अपनी साधना और पराक्रम से और अधिक प्रभावशाली बना दिया था. परशुराम जी के साथ हुए युद्ध के प्रसंग में भी भीष्म के अद्भुत युद्ध कौशल का वर्णन मिलता है. वहीं महाभारत के युद्ध में भी उनकी तलवारबाजी का भयंकर रूप देखने को मिला. कहा जाता है कि जब नकुल की तलवार और भीष्म की तलवार आपस में टकराई, तो उनके टकराने से इतनी तेज चमक पैदा हुई कि आसपास मौजूद सैनिक कुछ समय के लिए ठीक से देख नहीं पाए. भीष्म पितामह ने अभिमन्यु के कई दिव्य बाणों को भी अपनी तलवार से काट दिया था. इस तलवार की धार और बनावट को लेकर पौराणिक कथाओं में विश्वकर्मा जी की अद्भुत शिल्पकला का वर्णन किया जाता है. एक कथा के अनुसार, राजा पांडु ने भी युद्ध में जाने से पहले भीष्म से यह तलवार मांगी थी, लेकिन भीष्म ने इसे देने से इनकार कर दिया. उनका कहना था कि इस तलवार का इस्तेमाल हर कोई नहीं कर सकता था. असी तलवार दूसरी है असी तलवार. महाभारत के शांतिपर्व में असी के प्रकट होने से जुड़ी एक अद्भुत कथा मिलती है. कहा जाता है कि जब पृथ्वी पर अधर्म और असुरों का प्रभाव बढ़ने लगा, तब ऋषियों ने यज्ञ किया था. यज्ञ के दौरान एक भयंकर आकृति प्रकट हुई. उसका स्वरूप असाधारण था. इसके बाद वह आकृति एक तेजस्वी और धारदार तलवार में बदल गई. इसी तलवार को असी नाम दिया गया. ब्रह्मा जी ने इस तलवार को जगत की रक्षा और देवद्रोही असुरों के विनाश के लिए प्रकट किया था. इसके बाद यह भगवान शिव को प्राप्त हुई थी. कहा जाता है कि भगवान शिव ने इस दिव्य तलवार की सहायता से कई शक्तिशाली राक्षसों का अंत किया था. इसके बाद यह तलवार भगवान विष्णु और फिर अन्य देवताओं तक पहुंची. आगे चलकर यह कई महान योद्धाओं के पास रही. अंततः इस तलवार का संबंध द्रोणाचार्य से भी जोड़ा जाता है. असी तलवार की सबसे बड़ी विशेषता इसकी धार और शक्ति बताई जाती है. पौराणिक वर्णनों के अनुसार, यह इतनी शक्तिशाली थी कि बड़े से बड़े कवच को भेद सकती थी. सामान्य तलवारें इसके सामने बेहद कमजोर मानी जाती थीं. कहा जाता है कि द्रोणाचार्य ने जब अपने पुराने मित्र द्रुपद से राज्य का हिस्सा मांगा और इसके बदले उन्हें युद्ध का सामना करना पड़ा, तब उन्होंने द्रुपद को पराजित करने के लिए अपनी युद्ध-कला का प्रदर्शन किया. हालांकि, महाभारत के युद्ध में असी तलवार का इस्तेमाल बहुत अधिक होने का वर्णन नहीं मिलता. इसके बावजूद पौराणिक कथाओं में इसकी शक्ति का वर्णन बेहद प्रभावशाली तरीके से किया गया है. लेकिन असी तलवार का मुकाबला करने वाली एक और तलवार थी, जिसे हमारी सूची में तीसरे नंबर पर रखा गया है. नरसिंह तलवार तीसरे नंबर पर है नरसिंह तलवार. महाभारत के पांच पांडवों में नकुल का नाम सबसे ज्यादा उनकी सुंदरता, अश्व विद्या और तलवारबाजी के लिए लिया जाता है. नकुल युद्ध-कला में बेहद कुशल थे और तलवार चलाने में उन्हें विशेष महारत हासिल थी. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नकुल के पास एक अद्भुत तलवार थी, जिसे नरसिंह तलवार के नाम से जाना जाता था. कहा जाता है कि इंद्रप्रस्थ के निर्माण के समय भगवान कृष्ण की प्रेरणा से विश्वकर्मा जी ने पांडवों के लिए कई दिव्य वस्तुओं और अस्त्र-शस्त्रों की व्यवस्था की थी. इसी दौरान नकुल को यह विशेष तलवार प्राप्त हुई थी. जब पांडवों को वनवास मिला, तब नकुल ने इस तलवार का इस्तेमाल अपनी और अपने भाइयों की सुरक्षा के लिए किया. वनवास के दौरान उन्हें कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ा और ऐसे समय में उनकी तलवारबाजी बेहद उपयोगी साबित हुई थी. कुरुक्षेत्र युद्ध के अंतिम चरण में भी नकुल ने अपने युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया. युद्ध के 18वें दिन उन्होंने कर्ण के पुत्रों सुषेण, सत्यसेन और प्रसन्न के साथ युद्ध किया और उन्हें पराजित किया था. नरसिंह तलवार की शक्तियों की बात करें तो पौराणिक कथाओं में इसे बेहद खास बताया गया है. कहा जाता है कि इसका निर्माण ऐसी विशेष धातु से हुआ था, जिस पर समय का प्रभाव आसानी से नहीं पड़ता था. मान्यता है कि यह तलवार भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की शक्ति से अभिमंत्रित थी. यही कारण था कि इसकी मारक क्षमता सामान्य तलवारों की तुलना में कहीं अधिक मानी जाती थी. नंदक तलवार नंदक तलवार भगवान विष्णु की तलवार थी. पौराणिक कथाओं … Read more

छत पर पानी की टंकी किस दिशा में रखें? वास्तु के अनुसार जानें सही और गलत दिशा

 छत पर पानी की टंकी रखना घर की जरूरत है, लेकिन इसे कहीं भी रख देना सही नहीं माना जाता. वास्तु शास्त्र में ओवरहेड वाटर टैंक की दिशा और जगह को लेकर कुछ खास नियम बताए गए हैं. मान्यता है कि सही दिशा में रखी गई टंकी से घर में सकारात्मकता और संतुलन बना रहता है, जबकि गलत दिशा में रखी टंकी घर में परेशानी और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ा सकती है. अगर आप भी घर की छत पर पानी की टंकी रखने जा रहे हैं या पहले से लगी टंकी की दिशा बदलने के बारे में सोच रहे हैं, ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा से जान लें कि वास्तु के अनुसार इसे किस दिशा में रखना सही माना जाता है. पानी की टंकी की दिशा छत पर पानी की टंकी की सही दिशा दक्षिण-पश्चिम दिशा: वास्तु में दक्षिण-पश्चिम दिशा को भारी और स्थिर माना जाता है. पानी से भरी टंकी भी काफी भारी होती है, इसलिए इसे इस दिशा में रखने की सलाह दी जाती है. वास्तु के अनुसार, इससे घर का संतुलन और स्थिरता बनी रहती है. पश्चिम दिशा: पश्चिम दिशा को भी ओवरहेड पानी की टंकी के लिए अच्छा विकल्प माना जाता है. पश्चिम दिशा को जल के देवता वरुण की दिशा माना जाता है. इसलिए दक्षिण-पश्चिम दिशा उपलब्ध न होने पर पश्चिम में टंकी रखने की सलाह दी जाती है. किस दिशा में पानी की टंकी नहीं रखनी चाहिए? उत्तर-पूर्व दिशा: वास्तु में ईशान कोण को शुभ और जल तत्व से जुड़ा माना जाता है. जमीन के नीचे पानी का स्रोत इस दिशा में रखना अच्छा माना जाता है. लेकिन छत पर पानी की भारी टंकी रखने से बचने की सलाह दी जाती है. दक्षिण-पूर्व दिशा: आग्नेय कोण को अग्नि तत्व की दिशा माना जाता है, जबकि पानी को जल तत्व से जोड़ा जाता है. वास्तु मान्यता के अनुसार, इस दिशा में पानी की टंकी रखने से जल और अग्नि तत्व का संतुलन बिगड़ सकता है. इसलिए पानी की टंकी इस दिशा में रखने से बचना चाहिए.

जैन साधु क्यों उखाड़ते हैं सिर के बाल? जानें केशलोचन की कठिन साधना का रहस्य

 आज से जैन धर्म का पर्युषण पर्व शुरू हो चुका है. इस महापर्व के दौरान जैन धर्म के लोग पूरी तरह से कठिन तप पर ध्यान केंद्रित करते हैं. वहीं, जैन धर्म में साधु जीवन को त्याग, तपस्या और संयम का मार्ग माना जाता है. इस राह पर चलने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे सांसारिक सुख-सुविधाओं से दूरी बनाता है. जैन साधु-साध्वियों की जीवनशैली से जुड़ी कई बातें आम लोगों को हैरान कर देती हैं. उन्हीं में से एक है केशलोचन, जिसमें साधु अपने सिर और चेहरे के बाल खुद हाथों से उखाड़ते हैं. यह सुनने में जितना कठिन लगता है, वास्तव में यह साधना का बेहद अहम हिस्सा माना जाता है. आखिर साधु ऐसा क्यों करते हैं और इसमें कैंची या ब्लेड का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता? आइए जानते हैं. क्या होता है केशलोचन? केशलोचन का सीधा अर्थ है बालों को उखाड़ना. जैन परंपरा में जब कोई व्यक्ति सांसारिक जीवन छोड़कर साधु या साध्वी के रूप में दीक्षा लेता है, तब इस प्रक्रिया का विशेष महत्व होता है. साधु अपने सिर और चेहरे के बालों को हाथों से हटाते हैं. यह सिर्फ बाल हटाने की प्रक्रिया नहीं मानी जाती, बल्कि इसे मोह और भौतिक आकर्षण से दूरी बनाने के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. बालों को कैंची या ब्लेड से क्यों नहीं काटते? केशलोचन की सबसे खास बात यही है कि इसमें बाल काटने के लिए कैंची, ब्लेड या किसी दूसरे औजार का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. जैन मान्यताओं के अनुसार, इसके पीछे अहिंसा और त्याग से जुड़ी सोच है. एक मान्यता यह भी है कि किसी औजार के इस्तेमाल से त्वचा पर मौजूद सूक्ष्म यानी छोटे जीवों को नुकसान पहुंच सकता है. इसके अलावा बालों को शरीर की सुंदरता से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए उन्हें खुद से हटाना अपने रूप और शरीर के प्रति मोह को कम करने का एक तरीका माना जाता है. इतनी पीड़ा सहकर क्यों करते हैं यह साधना? केशलोचन आसान प्रक्रिया नहीं है. बालों को जड़ से निकालने की वजह से दर्द होना स्वाभाविक है. लेकिन जैन साधु इसे सहन करते हुए अपनी साधना पूरी करते हैं. जैन परंपरा में इसे धैर्य और सहनशीलता की परीक्षा के रूप में भी देखा जाता है. इसका उद्देश्य यह समझना है कि साधु सुख-दुख, आराम और असुविधा जैसी शारीरिक स्थितियों से ऊपर उठकर अपने मन को संयमित रख सके. दीक्षा के समय इसका क्या महत्व है? जब कोई व्यक्ति जैन साधु बनने का फैसला करता है, तो वह अपने पुराने सांसारिक जीवन से दूरी बनाने का संकल्प लेता है. दीक्षा के दौरान होने वाला केशलोचन इसी बदलाव का एक प्रतीक माना जाता है. इसमें व्यक्ति अपने रूप, शरीर और सुविधाओं के प्रति लगाव छोड़ने का संदेश देता है. यानी बाहरी सुंदरता से ज्यादा महत्व आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना को दिया जाता है. कैसे किया जाता है केशलोचन? केशलोचन के दौरान साधु या साध्वी धार्मिक वातावरण में बैठकर अपने बालों को हाथों से उखाड़ते हैं. कुछ परंपराओं में वरिष्ठ साधु भी इसमें सहायता करते हैं. इस दौरान मंत्र और धार्मिक वचनों का पाठ किया जाता है. प्रक्रिया पूरी होने के बाद साधु आगे की साधना और संयम के मार्ग पर बढ़ते हैं. साल में कितनी बार होता है केशलोचन? जैन परंपरा में केशलोचन साल में एक या दो बार किए जाने की परंपरा बताई गई है. बाहर से देखने पर केशलोचन एक कठिन और दर्दनाक प्रक्रिया लग सकती है, लेकिन जैन साधना में इसका अर्थ इससे कहीं ज्यादा गहरा है. यह व्यक्ति को याद दिलाता है कि साधु जीवन का उद्देश्य आराम और सुंदरता नहीं, बल्कि त्याग, संयम, अहिंसा और आत्मअनुशासन है. यही वजह है कि केशलोचन को जैन साधु-साध्वियों की तपस्या और वैराग्य से जुड़ी महत्वपूर्ण परंपराओं में गिना जाता है.

Ganesh Chaturthi 2026: 14 सितंबर से इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, बप्पा बरसाएंगे कृपा

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी यानी 14 सितंबर 2026 (सोमवार) को देशभर में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश बुद्धि, ऋद्धि-सिद्धि और शुभता के दाता हैं. गणेश चतुर्थी पर बप्पा के आगमन के साथ ही ग्रहों की विशेष स्थितियों और शुभ योगों के प्रभाव से कई राशियों के लिए यह समय अत्यंत भाग्यशाली रहने वाला है. गणेश चतुर्थी से इन मुख्य राशियों को सबसे अधिक लाभ और भाग्य का साथ मिलने की संभावना है. मेष राशि करियर व व्यापार: भगवान गणेश की कृपा से अटके हुए काम गति पकड़ेंगे. कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां और पदोन्नति के योग बन रहे हैं. धन लाभ: अचानक धन लाभ हो सकता है और नए बिजनेस प्रोजेक्ट में सफलता मिलेगी. मिथुन राशि बुद्धि और वाणी का लाभ: मिथुन राशि के स्वामी स्वयं बुध देव हैं, जो गणेश जी से विशेष रूप से संबंधित हैं. आपकी निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होगा. आर्थिक पक्ष: आय के नए स्रोत बनेंगे. निवेश या पैतृक संपत्ति से बड़ा मुनाफा हो सकता है. कन्या राशि शुभ योगों का प्रभाव: गणेश चतुर्थी के दौरान बुध की अपनी उच्च राशि में मौजूदगी से आपको जबरदस्त लाभ मिलेगा. मान-सम्मान: समाज और कार्यस्थल पर आपकी प्रतिभा की सराहना होगी. प्रतियोगिता परीक्षा या नौकरी की तैयारी कर रहे जातकों को खुशखबरी मिल सकती है. तुला राशि सुख-साधनों में वृद्धि: घर-परिवार में मांगलिक कार्यों का आयोजन हो सकता है. नया वाहन या प्रॉपर्टी खरीदने के योग बन रहे हैं. व्यापारिक डील: बिजनेस में कोई बड़ी पार्टनरशिप फाइनल हो सकती है, जिससे भविष्य में बड़ा फायदा होगा. मकर राशि बाधाओं से मुक्ति: लंबे समय से चली आ रही आर्थिक या मानसिक परेशानियां गणेश जी की कृपा से समाप्त होंगी. भाग्य का सहयोग: नौकरीपेशा लोगों के लिए यह समय वेतन वृद्धि और नए अवसरों से भरा रहेगा. गणेश चतुर्थी पर बप्पा की कृपा पाने के विशेष उपाय – गणेश चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश को 21 दूर्वा (दूब घास) और मोदक या बेसन के लड्डू का भोग अवश्य लगाएं. – पूजन के समय ऊं गं गणपतये नमः मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें.  

30 साल बाद मीन राशि में मार्गी होंगे शनि, इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत

11 दिसंबर को शनि देव मार्गी होने वाले हैं. यानी इस दिन शनि की सीधी चाल शुरू हो जाएगी. शनि देव पूरे 30 साल बाद मीन राशि में मार्गी चाल चलेंगे इसके बाद शनि 3 जून 2027 तक सीधी चाल ही चलेंगे. इस बदलाव का असर कई राशियों के करियर, कारोबार, आय और आर्थिक मामलों में देखने को मिल सकता है. खासतौर पर वृषभ, मिथुन, तुला और मकर राशि के लिए इसे शुभ बताया जा रहा है. आइए जानते हैं कि मार्गी शनि कीन राशियों को लाभ देंगे. वृषभ राशि वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि का मार्गी होना लाभकारी बताया जा रहा है. मीन राशि में शनि आपकी राशि से 11वें भाव में मार्गी होंगे. यह भाव आय, लाभ और इच्छाओं की पूर्ति से जुड़ा माना जाता है. शनि की सीधी चाल के बाद कमाई के नए स्रोत बनने के संकेत हैं. कारोबार करने वालों को विस्तार का मौका मिल सकता है. नौकरीपेशा लोगों की जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं. आर्थिक स्थिति में भी पहले की तुलना में सुधार होने की संभावना है. मिथुन राशि मिथुन राशि वालों के लिए भी शनि का मार्गी होना सकारात्मक रह सकता है. मीन राशि में शनि आपके 10वें भाव में मार्गी होंगे. यह भाव करियर और कारोबार से संबंधित माना जाता है. 11 दिसंबर के बाद नौकरी या व्यवसाय में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है. जो लोग करियर बदलने की योजना बना रहे हैं, उन्हें सफलता मिलने के संकेत हैं. आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो सकता है. तुला राशि तुला राशि के जातकों के लिए शनि की सीधी चाल आर्थिक और करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है. मीन राशि में शनि आपके छठे भाव को प्रभावित करेंगे. ज्योतिष में छठे भाव का संबंध नौकरी, कर्ज, शत्रु और प्रतियोगिता से माना जाता है. इस अवधि में आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं. परिस्थितियों के अनुसार आगे बढ़ने के मौके भी मिल सकते हैं. मकर राशि मकर राशि के स्वामी स्वयं शनिदेव माने जाते हैं. इसलिए शनि की चाल में बदलाव को इस राशि के लिए खास माना जाता है. मीन राशि में शनि आपके तीसरे भाव में मार्गी होंगे. इससे साहस, पराक्रम, संचार और कार्यक्षेत्र में मजबूती आने के संकेत हैं. नौकरीपेशा लोगों को महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है. कारोबार और व्यवसाय से जुड़े लोगों को नई और अच्छी डील मिलने की संभावना भी जताई गई है.

Vidur Niti: ये 5 आदतें इंसान को बर्बादी की ओर ले जाती हैं, आज ही बना लें दूरी

महाभारत काल में महात्मा विदुर को उनकी नीतियों और दूरदर्शिता के लिए जाना जाता है . धृतराष्ट्र को दिए गए उनके उपदेश, जिन्हें विदुर नीति के नाम से जाना जाता है, आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने तब थे. विदुर नीति में जीवन जीने के कई गूढ़ रहस्यों, सफलता के सूत्रों और उन गलतियों के बारे में बताया गया है जो व्यक्ति को सफलता से कोसों दूर कर देती हैं . महात्मा विदुर के अनुसार, इंसान की अपनी ही कुछ आदतें और व्यवहार उसकी बर्बादी और असफलता का सबसे बड़ा कारण बनते हैं . अगर समय रहते इन आदतों में सुधार न किया जाए, तो व्यक्ति का जीवन संकटों से घिर जाता है. आइए जानते हैं विदुर नीति के अनुसार वे कौन सी आदतें हैं जो असफलता की तरफ ले जाती हैं: 1. अत्यधिक अहंकार (Arrogance) विदुर नीति के अनुसार, अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है . जिस व्यक्ति के मन में अपनी विद्या, धन या पद का घमंड आ जाता है, उसका पतन निश्चित होता है. अहंकारी व्यक्ति न तो किसी की सलाह सुनता है और न ही अपनी गलतियों से सीखता है . यह आदत उसे समाज में अकेला कर देती है. ऐसा व्यक्ति धीरे-धीरे असफलता के गर्त में चला जाता है . 2. आलस्य और काम टालने की आदत (Procrastination) आलस्य सफलता के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है . जो व्यक्ति आज के काम को कल पर टालता है (दीर्घकालिक आलस्य), वह जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ सकता . महात्मा विदुर मानते हैं कि समय का सदुपयोग न करने वाले, हर बात में बहाने बनाने वाले व्यक्ति के पास कभी भी मां लक्ष्मी और सफलता का वास नहीं होता . 3. अनुचित और बुरी संगति (Bad Company) कहा जाता है कि इंसान की पहचान उसकी संगति से होती है . विदुर नीति के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति गलत राह पर चलने वाले, नकारात्मक या दुर्गुणों से घिरे लोगों के साथ रहता है, तो उसका पतन तय है . बुरी संगति अच्छे-भले इंसान के संस्कारों और भविष्य को बर्बाद कर देती है . इसलिए हमेशा ऐसे लोगों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए जो आपको गलत रास्ते पर ले जाएं . 4. अति लोभ और लालच (Greed) लोभ इंसान की बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है . जो व्यक्ति अपनी मेहनत के बजाय शॉर्टकट अपनाकर या दूसरों का हक मारकर धन कमाने की सोचता है, वह कुछ समय की सफलता के बाद बहुत बड़ी बर्बादी का सामना करता है . लालच व्यक्ति के नैतिक मूल्यों को खत्म कर देता है, जिससे उसका सामाजिक और मानसिक पतन होने लगता है . 5. कड़वा और अनियंत्रित बोलना (Harsh Speech) वाणी में बहुत बड़ी ताकत होती है . विदुर नीति के अनुसार, जो व्यक्ति बिना सोचे-समझे कड़वे शब्दों का प्रयोग करता है, वह अपने जीवन में खुद ही शत्रुओं की संख्या बढ़ा लेता है . ऐसी आदत वाले व्यक्ति से लोग दूरी बना लेते हैं और संकट के समय उसका साथ देने वाला कोई नहीं बचता .