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16 मार्च को कलात्मक राजयोग से इन 4 राशियों को मिलेगा बड़ा फायदा

16 मार्च से एक खास ज्योतिषीय योग बनने जा रहा है, जिसे कलात्मक राजयोग कहा जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस दिन चंद्रमा मीन राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से ही शुक्र ग्रह मौजूद हैं. ज्योतिष में शुक्र को धन, सुंदरता और कला का कारक माना जाता है, जबकि चंद्रमा मन और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है. जब ये दोनों ग्रह अनुकूल स्थिति में एक साथ आते हैं, तो यह योग बनता है. इसका असर खासतौर पर कला, मीडिया, डिजाइन, फैशन, लेखन और संगीत से जुड़े लोगों पर सकारात्मक माना जाता है, लेकिन इसका प्रभाव सभी राशियों पर भी देखने को मिलता है. क्या होता है कलात्मक राजयोग? वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब कुंडली या गोचर में शुक्र और चंद्रमा एक साथ हों या एक-दूसरे पर शुभ दृष्टि डालें, तब यह योग बनता है. अगर ये दोनों ग्रह केंद्र या त्रिकोण भाव में मजबूत स्थिति में हों और इन पर किसी नकारात्मक ग्रह का असर कम हो, तो इसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है. इस योग से व्यक्ति की रचनात्मक सोच मजबूत होती है, समाज में पहचान मिलती है और करियर में नए मौके मिल सकते हैं. वृष राशि वृष राशि वालों के लिए यह योग आय के स्थान पर बन रहा है, जिससे इनकम बढ़ने की संभावना है. व्यापार में बढ़ोतरी व विस्तार हो सकता है. नई साझेदारी फायदेमंद साबित हो सकती है. फैशन और लग्जरी से जुड़े काम करने वालों को खास लाभ मिल सकता है. मिथुन राशि मिथुन राशि के जातकों के लिए यह योग करियर से जुड़े क्षेत्र में बन रहा है. ऐसे में काम में तरक्की हो सकती है. अटके हुए काम पूरे होने के योग हैं. खासकर मीडिया, मार्केटिंग, शिक्षा या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े लोगों को अच्छा लाभ मिल सकता है. धनु राशि धनु राशि के लोगों के लिए यह योग सुख और स्थिरता से जुड़े स्थान पर बन रहा है. इस दौरान करियर में मजबूती आएगी. उच्च अधिकारियों से सराहना मिल सकती है. विदेश या ऑनलाइन काम करने वालों के लिए भी यह समय अच्छा रह सकता है. मीन राशि मीन राशि वालों के लिए यह योग काफी फायदेमंद रह सकता है, क्योंकि यह उनके लग्न भाव में बन रहा है. इस दौरान करियर में नए अवसर मिल सकते हैं. नौकरी करने वालों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है. कला और क्रिएटिव फील्ड से जुड़े लोगों को पहचान मिलने के संकेत हैं.  

होलिका दहन की अनोखी परंपरा: क्यों महाकाल के आंगन से होती है शुरुआत?

हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन पूरे देश में होली का त्योहार मनाया जाता है. इससे एक दिन पहले फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि के दिन होलिका दहन किया जाता है. होलिका दहन का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. इस साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा 03 मार्च को है. ऐसे में इस साल 03 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा. इसके अगले दिन 04 मार्च को रंगों से होली खेली जाएगी. होलिका दहन को छोटी होली भी कहा जाता है. मान्यता है कि होलिका की पवित्र अग्नि में सभी तरह की नकरात्मक शक्तियों और कष्टों को समाप्त करने की शक्ति है, इसलिए होलिका दहन की पूजा अवश्य करें, लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में सबसे पहले महाकाल के दरबार में होलिका दहन किया जाता है. आइए जानते हैं कि सबसे पहले यहां होलिका दहन क्यों होता है? महाकाल के दरबार होलिका क्यों जलती है सबसे पहले? महाकाल उज्जैन के राजा माने जाते हैं. पुरानी परंपरा के अनुसार प्रजा पहले अपने राजा के घर ही उत्सव मनाती है. उसके बाद वो अपने घरों में उत्सव मनाती है. यही कारण है कि मदिर में सबसे पहले होलिका दहन के दिन पूजा और संध्या आरती की जाती है. इसके बाद पुजारियों के मंत्रोच्चार के साथ मंदिर प्रांगण में होलिका दहन किया जाता है. मान्यता है कि महाकाल दरबार में होलिका दहन करने से नगर की नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं. भस्म आरती में राख की जाती है उपयोग दूर-दूर से श्रद्धालु इस पावन अग्नि के दर्शन करने के लिए महाकाल के दरबार में आते हैं. महाकाल मंदिर का होलिका दहन सिर्फ लकड़ियों और उपलों का जलना भर नहीं है, बल्कि यह शिव और शक्ति के प्रति अटूट विश्वास का त्योहार माना जाता है. मंदिर में होने वाले इस आयोजन से पहले महाकाल बाबा को गुलाल अर्पित किया जाता है. फाल्गुन पूर्णिमा की संध्या को मंदिर परिसर में होलिका दहन के बाद, उस पवित्र अग्नि की राख यानी विभूति को अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली विशेष भस्म आरती में उपयोग किया जाता है. इसी ताजी राख से भगवान महाकाल का दिव्य शृंगार किया जाता है.

आज का राशिफल (28 फरवरी 2026): मेष से मीन तक, जानें किसकी किस्मत पर होगी रोशनी

मेष राशि- मन थोड़ा बेचैन रह सकता है। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आ सकता है, इसलिए रिएक्शन देने से पहले एक बार सोच लेना बेहतर रहेगा। काम में ध्यान भटकेगा, लेकिन अगर एक काम पकड़ लिया तो पूरा करके ही छोड़ोगे। पैसों में ठीक-ठाक बैलेंस बना रहेगा, फालतू खर्च से बचो। घर में किसी की बात बुरी लग सकती है, बात को दिल पर मत लो। सेहत में सिर दर्द या आंखों में जलन हो सकती है, पानी ज्यादा पिएं। वृषभ राशि- माहौल आपके फेवर में रहेगा। काम में पॉजिटिव फील आएगी और लोगों से सपोर्ट मिलेगा। बिजनेस या नौकरी में कोई पुराना अटका काम आगे बढ़ सकता है। घर-परिवार में बातचीत से गलतफहमी दूर हो सकती है। पैसों को लेकर थोड़ी टेंशन रहेगी, लेकिन दिन के आखिर तक बात संभल जाएगी। खाने-पीने में लापरवाही मत करो, पेट से जुड़ी दिक्कत हो सकती है। मिथुन राशि- दिमाग तेज चलेगा। नए आइडिया आएंगे और लोगों से बात करके चीजें क्लियर होंगी। ऑफिस या काम की जगह पर किसी से हेल्प मिल सकती है। अधूरे काम निपटाने का अच्छा दिन है। फोन, मैसेज या कॉल से कोई अच्छी खबर मिल सकती है। खर्च सोच-समझकर करना ठीक रहेगा। थोड़ी थकान या नींद की कमी महसूस हो सकती है, आराम के लिए टाइम निकालें। कर्क राशि- भावनाएं थोड़ी ज्यादा हावी रहेंगी। किसी अपने की बात दिल को लग सकती है। बेवजह सोचने से बचो और जो जरूरी है उसी पर ध्यान दो। काम में मन कम लगेगा, लेकिन जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी। पैसों को लेकर कोई छोटा फैसला लेना पड़ सकता है। घर का माहौल ठीक रहेगा अगर आप शांत रहोगे। सेहत में गैस या पेट भारी लग सकता है। सिंह राशि- कॉन्फिडेंस अच्छा रहेगा। लोग आपकी बात सुनेंगे और आपकी इमेज मजबूत होगी। काम में लीड लेने का मौका मिल सकता है। अगर किसी से नाराजगी चल रही है तो बात करके सुलझ सकती है। पैसों के मामले में थोड़ा संभलकर चलो, उधार या बेकार की खरीदारी से बचो। शरीर में एनर्जी रहेगी, लेकिन थकान भी जल्दी हो सकती है। कन्या राशि- कामकाज में फोकस बना रहेगा। जो ठान लोगे, उसे पूरा करने का मन रहेगा। सीनियर या बड़े लोगों से फायदा मिल सकता है। घर में किसी जरूरी काम की जिम्मेदारी मिल सकती है। पैसों में स्थिरता रहेगी, लेकिन किसी को उधार देने से पहले सोच लो। सेहत में घुटनों या पैरों में दर्द हो सकता है, ज्यादा भागदौड़ से बचें। तुला राशि– काम का प्रेशर ज्यादा रह सकता है। छोटी-छोटी बातों में उलझने से दिन खराब हो सकता है, इसलिए प्रैक्टिकल रहो। ऑफिस या बिजनेस में कोई पुराना काम फिर से सामने आ सकता है। घर में किसी बड़े की बात मान लेना ही सही रहेगा। पैसों को लेकर प्लान बनाना फायदेमंद रहेगा। सेहत में कमर या पैरों में हल्का दर्द हो सकता है। वृश्चिक राशि- दिमाग में कई बातें चलेंगी। नए प्लान बनेंगे, लेकिन सब एक साथ करने की कोशिश मत करना। काम में थोड़ा कन्फ्यूजन रहेगा, किसी भरोसे वाले से सलाह ले लो। पैसों में ठीक-ठाक स्थिति रहेगी। दोस्तों से बातचीत से मन हल्का होगा। सेहत में नींद पूरी न होने से सिर भारी लग सकता है। धनु राशि- रिश्तों में बैलेंस बनाकर चलना जरूरी है। किसी से बहस हो सकती है, लेकिन समझदारी से बात संभल जाएगी। काम में टीमवर्क से फायदा होगा। पैसों में स्थिरता रहेगी, लेकिन फालतू खर्च मन को ललचाएगा। किसी दोस्त से मिलना या बात करना अच्छा फील देगा। सेहत ठीक रहेगी, बस ज्यादा देर तक मोबाइल देखने से आंखों में दर्द हो सकता है। मकर राशि- मन थोड़ा भारी रह सकता है। पुरानी बातें याद आ सकती हैं या किसी की कमी महसूस हो सकती है। काम में मन कम लगेगा, लेकिन जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी। पैसों में अचानक खर्च सामने आ सकता है। घर में किसी से खुलकर बात करोगे तो मन हल्का होगा। सेहत में थकान या बॉडी पेन हो सकता है, आराम जरूरी है। कुंभ राशि- मूड बेहतर रहेगा। बाहर निकलने या कुछ नया करने का मन बनेगा। काम में नई जिम्मेदारी मिल सकती है या कोई नया मौका दिख सकता है। दोस्तों से बातचीत से मन खुश होगा। पैसों में सुधार दिखेगा, लेकिन सेविंग पर भी ध्यान देना जरूरी है। सेहत में हल्की थकान के अलावा कुछ खास दिक्कत नहीं दिखती। मीन राशि- मन शांत रहेगा। अपने काम में लगे रहोगे और बेवजह की बातों से दूरी बनाकर रखोगे। काम में धीरे-धीरे सही दिशा बनेगी। घर-परिवार का साथ मिलेगा। पैसों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं रहेगा। सेहत ठीक रहेगी, बस पानी कम पीने से कमजोरी महसूस हो सकती है।

राशिफल 27 फरवरी 2026: किन राशियों की चमकेगी किस्मत, किसे बरतनी होगी सावधानी

मेष राशि- 27 फरवरी के दिन अपने रिलेशन में ईमानदार रहें, और आपको पॉजिटिव नतीजे दिखाई देंगे। आज के दिन चुनौतियों के बावजूद, आप ऑफिस में अच्छा परफॉर्म करने की हालत में रहेंगे। वृषभ राशि- 27 फरवरी के दिन समय-समय पर ब्रेक जरूर लेते रहें। आपका दिन बदलावों से भरपूर रहने वाला है। काम के सिलसिले में विदेश की यात्रा के योग बन रहे हैं। व्यापार, सेहत, पैसों का मामला या हो लव लाइफ बड़े चेंज के लिए तैयार हो जाएं। मिथुन राशि- 27 फरवरी का दिन आप लोगों के लिए काफी बिजी साबित हो सकता है। कार्यालय में अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। बहुत ज्यादा प्रेशर न लें। वर्क लाइफ बैलेंस मेंटेन करके आगे बढ़ें। कर्क राशि- 27 फरवरी के दिन पॉजिटिव सोच बनाकर रखें। अपने काम पर फोकस करें। गॉसिप से दूर रहें। जरूरत पड़ने पर फैमिली या पार्टनर से सलह लें। आज का दिन थोड़ा सा स्ट्रेस भरा साबित हो सकता है। सिंह राशि- 27 फरवरी के दिन सेहत के मामले में लापरवाही न बरतें। दिन रोमांटिक रहेगा। आपका दिन उतार-चढ़ाव से भरपूर रहने वाला है। ऑफिस की पॉलिटिक्स आपके लिए नेगेटिव साबित हो सकती है। कन्या राशि- 27 फरवरी के दिन आपको सेल्फ लव पर फोकस करना चाहिए। करियर में अपनी जगह बनाने के लिए मेहनत ज्यादा करनी पड़ेगी। किसी पुराने इन्वेस्टमेंट से मनचाहा रिटर्न नहीं मिलेगा। तुला राशि- 27 फरवरी के दिन आपका समय काफी बेहतरीन साबित हो सकता है। करियर के मामले में महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी आपको दी जा सकती है। आर्थिक स्थिति भी मजबूत रहने वाली है। वृश्चिक राशि- 27 फरवरी के दिन हाल ही में हुई किसी डील से भारी मात्रा में धन-लाभ हो सकता है। प्रेम जीवन में चल रही दिक्कतें सॉल्व हो जाएंगी। घर में खुशियों का माहौल रहेगा। विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं। धनु राशि- 27 फरवरी के दिन लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशन वालों को अपने प्रेम जीवन में आ रही दिक्कतों पर फोकस करना चाहिए। इन्वेस्टमेंट को लेकर स्ट्रेटजी बनाने पर ध्यान दें। फिट रहने पर फोकस रखें। मकर राशि- 27 फरवरी के दिन अपने पार्टनर के साथ रोमांटिक डेट प्लान करें। खर्च को इस वक्त कंट्रोल करने की जरूरत है। आज का आपका दिन पॉजिटिव एनर्जी से भरपूर रहने वाला है। कुंभ राशि- 27 फरवरी के दिन अपनी बॉडी को फिट रखने के लिए योग ट्राई करें। आज का दिन आलस भरा साबित हो सकता है। काम को समय पर पूरा करने पर फोकस रखें। सेहत के मामले में भाग्य साथ देगा। मीन राशि- 27 फरवरी के दिन आपकी फाइनेंशियल स्थिति अच्छी है, लेकिन लग्जरी पर ज्यादा खर्च करने से बचें। आज आपकी सेहत अच्छी है। एक शानदार दिन के लिए तैयार हो जाएं। तनाव दूर करने के लिए मेडिटेशन करें।

आचार्य चाणक्य का रहस्य: जो माता-पिता अपनाते हैं ये 5 काम, उनकी संतान बनती है महान

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनकी संतान जीवन में सफल बने, सम्मान पाए और एक मजबूत इंसान के रूप में अपनी पहचान बनाए। इसके लिए केवल अच्छी पढ़ाई या पैसा ही काफी नहीं होता, बल्कि सही परवरिश, मजबूत संस्कार और सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है। आचार्य चाणक्य ने सदियों पहले संतान के पालन-पोषण को ले कर ऐसे स्पष्ट और व्यवहारिक सूत्र बताए, जो आज भी उतने ही उपयोगी हैं। यदि आप इन बातों को अपने जीवन में अपनाते हैं तो आप अपने बच्चे को केवल सफल ही नहीं बल्कि एक बेहतर इंसान भी बना सकते हैं। चलिए जानते है आचार्य चाणक्य द्वारा बताए गए ये सूत्र क्या है। शुरुआत से ही संस्कार और अनुशासन सिखाएं आचार्य चाणक्य के अनुसार बच्चे के जीवन के पहले पांच वर्ष बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इस समय आपको उसे भरपूर प्रेम देना चाहिए। प्यार से बच्चा भावनात्मक रूप से मजबूत बनता है और उसके अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है। इसके बाद अगले दस वर्षों में उसे अनुशासन सिखाएं। उसे सही और गलत का अंतर समझाएं। नियमों का महत्व बताएं और जिम्मेदारी लेना सिखाएं। जब बच्चा सोलह वर्ष का हो जाए, तो उसके साथ मित्र जैसा व्यवहार करें। उस पर हुक्म चलाने के बजाय उसे समझें, उसकी बात सुनें और मार्गदर्शन दें। इससे वह आपसे खुलकर बात करेगा और गलत रास्ते पर जाने की संभावना कम होगी। शिक्षा को सबसे बड़ा धन मानें चाणक्य कहते हैं कि ज्ञान सबसे बड़ा धन है, जिसे कोई चुरा नहीं सकता। इसलिए केवल स्कूल की पढ़ाई पर ध्यान देना काफी नहीं है। अपने बच्चे को जीवन से जुड़ी बातें भी सिखाएं। उसे समझाएं कि कैसे सही निर्णय लेना है, कैसे लोगों से व्यवहार करना है और कठिन परिस्थिति में कैसे शांत रहना है। उसे सवाल पूछने दें और उसकी सोचने की क्षमता बढ़ाएं। जब बच्चा समझदारी से फैसले लेना सीख जाता है, तब वह जीवन में आगे बढ़ता है और गलतियों से भी सीखता है। बच्चे के चरित्र निर्माण पर ध्यान दें धन, पद और शोहरत समय के साथ बदल सकते हैं लेकिन चरित्र जीवनभर साथ रहता है। इसलिए बचपन से ही बच्चे में सच्चाई, ईमानदारी और मेहनत की आदत डालें। उसे बताएं कि गलत रास्ते से मिली सफलता टिकाऊ नहीं होती। जब बच्चा सच बोलने और सही काम करने की आदत डाल लेता है, तो वह हर परिस्थिति में मजबूत बना रहता है। आप खुद भी अपने व्यवहार से उदाहरण पेश करें क्योंकि बच्चे वही सीखते हैं जो वे घर में देखते हैं। संगति पर नजर रखें बच्चा किन लोगों के साथ समय बिताता है, इसका उसके स्वभाव और सोच पर गहरा असर पड़ता है। इसलिए उसकी संगति पर ध्यान देना जरूरी है। उसे अच्छे दोस्तों का महत्व समझाएं। यदि आप देखें कि वह गलत संगति में जा रहा है, तो डांटने के बजाय प्यार से समझाएं। उसके मित्रों को जानने की कोशिश करें और ऐसा माहौल बनाएं कि वह आपसे हर बात साझा कर सके। अच्छी संगति बच्चे को आगे बढ़ाती है और उसे सही दिशा देती है। आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है अत्यधिक लाड़-प्यार बच्चे को कमजोर बना सकता है। आप अपने बच्चे को हर छोटी समस्या से बचाने के बजाय उसे समस्याओं का सामना करना सिखाएं। उसे छोटे-छोटे निर्णय खुद लेने दें। जब वह गलती करे तो उसे समझाएं, लेकिन हर बार उसकी जगह खुद फैसला ना लें। इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार होगा। आत्मनिर्भर बच्चा ही आगे चलकर मजबूत और सफल इंसान बनता है।

ग्रहण समाप्त होते ही क्या करें? घर, मंदिर और रसोई के शुद्धिकरण के आसान उपाय

पंचांग के अनुसार, साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा यानी 3 मार्च 2026 को लगने जा रहा है. हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील समय माना जाता है. इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और भोजन आदि से परहेज किया जाता है. ऐसे में ग्रहण समाप्त होने के बाद घर, मंदिर और रसोई का शुद्धिकरण करना जरूरी माना गया है.आइए जानते हैं कि ग्रहण के बाद शुद्धिकरण कैसे किया जाता है और इसके क्या नियम हैं. क्या है चंद्र ग्रहण का धार्मिक महत्व? हिंदू मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण का संबंध राहु और केतु से जोड़ा जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के समय राहु-केतु ने छल से अमृत पान किया था, जिसके बाद उनका सिर और धड़ अलग कर दिया गया. मान्यता है कि वही राहु-केतु समय-समय पर सूर्य और चंद्रमा को ग्रसित करते हैं, जिससे ग्रहण लगता है. इसी कारण ग्रहण काल को नकारात्मक ऊर्जा का समय माना जाता है और इसके बाद शुद्धिकरण की परंपरा निभाई जाती है. मंदिर का शुद्धिकरण कैसे करें?     ग्रहण समाप्त होते ही सबसे पहले घर के सभी सदस्य स्नान करें. गंगाजल मिले पानी से स्नान करना शुभ माना जाता है.     मंदिर की सफाई करें यानी घर के मंदिर को साफ कपड़े से पोंछें.     पूरे मंदिर और घर में गंगाजल छिड़कें.     यदि संभव हो तो मूर्तियों को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराकर फिर से स्थापित करें.     भगवान को ताजे फूल, नए वस्त्र और ताजा भोग अर्पित करें.     शुद्धिकरण के बाद आरती और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है. किचन का शुद्धिकरण कैसे करें?     ग्रहण के दौरान बना हुआ या रखा हुआ भोजन नहीं खाना चाहिए.     चूल्हा, गैस स्टोव, बर्तन आदि अच्छी तरह धो लें.     ग्रहण के बाद ताजा और सात्विक भोजन बनाना चाहिए.     मान्यता है कि ग्रहण से पहले भोजन में तुलसी पत्र डालने से उसका प्रभाव कम होता है. पूरे घर का शुद्धिकरण     घर में गंगाजल या गौमूत्र का छिड़काव करें.     नमक मिले पानी से फर्श पोंछना भी शुभ माना जाता है.     हवन या धूप-दीप जलाकर वातावरण को शुद्ध करें. ग्रहण के बाद क्या करें?     दान-पुण्य करें, विशेषकर अन्न, वस्त्र या धन का दान और गरीबों को भोजन कराना शुभ माना जाता है.     भगवान का ध्यान और मंत्र जाप करें.     ग्रहण के बाद स्नान किए बिना पूजा न करें.  

वास्तु टिप्स: रसोई में इस जगह रखें हल्दी की गांठ, घर रहेगा पॉजिटिव

वास्तु शास्त्र में रसोई घर को घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है क्योंकि यह हमारे स्वास्थ्य और समृद्धि का केंद्र है। रसोई में रखी जाने वाली मसालों की रानी हल्दी केवल खाने का स्वाद और रंग ही नहीं बढ़ाती बल्कि इसमें अद्भुत औषधीय और आध्यात्मिक गुण भी होते हैं। 2026 के ग्रहों के बदलते प्रभाव और वास्तु गणनाओं के अनुसार, यदि हल्दी का सही इस्तेमाल किया जाए, तो यह घर से दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा को जड़ से खत्म कर सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि किचन में हल्दी की गांठ रखने का सही तरीका और इसके चमत्कारी फायदे क्या हैं। हल्दी का ज्योतिषीय और वास्तु महत्व ज्योतिष शास्त्र में हल्दी का संबंध देवगुरु बृहस्पति से माना गया है। बृहस्पति सुख, सौभाग्य, बुद्धि और धन के कारक हैं। वास्तु के अनुसार, किचन में हल्दी का होना सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है लेकिन हल्दी की गांठ का एक विशेष स्थान पर होना आपके जीवन की दिशा बदल सकता है। किचन में कहां रखें हल्दी की गांठ ? अग्नि कोण: किचन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अग्नि कोण होता है। यदि आपके किचन में वास्तु दोष है, तो एक पीले कपड़े में हल्दी की 5 गांठें बांधकर किचन के इस कोने में लटका दें। यह अग्नि और जल के बीच के संतुलन को बनाए रखता है। चावल के डिब्बे में: किचन में जहां आप चावल रखते हैं, वहां हल्दी की एक साबुत गांठ डाल देना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे 'अन्नपूर्णा दोष' दूर होता है और घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती। उत्तर-पूर्व कोना : यदि किचन उत्तर-पूर्व दिशा में बनी है, तो यहां कांच के एक छोटे बर्तन में हल्दी की गांठें भरकर रखें। यह गुरु ग्रह को मजबूत करता है और घर के सदस्यों की तरक्की के रास्ते खोलता है। मुख्य द्वार पर हल्दी का टीका किचन के प्रवेश द्वार या घर के मुख्य द्वार पर हल्दी और गंगाजल का लेप लगाकर 'ॐ' या 'स्वास्तिक' का चिन्ह बनाएं। यह किसी भी प्रकार की बुरी नजर या नकारात्मक शक्ति को घर के भीतर आने से रोकता है। हल्दी के पानी का छिड़काव प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद एक तांबे के लोटे में पानी भरकर उसमें चुटकी भर हल्दी मिलाएं और पूरे किचन में उसका छिड़काव करें। यह सूक्ष्म कीटाणुओं के साथ-साथ मानसिक नकारात्मकता को भी समाप्त करता है। नजर दोष से मुक्ति यदि परिवार के किसी सदस्य को बार-बार नजर लगती है या किचन में काम करते समय मन अशांत रहता है, तो एक हल्दी की गांठ को काले धागे में बांधकर किचन की खिड़की पर लटका दें। यह सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।

रंगभरी एकादशी का धार्मिक रहस्य — इस दिन आंवला पूजन से मिलता है कई गुना पुण्य

रंगभरी एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। फाल्गुन मास की शुक्ल एकादशी को आमलकी एकादशी या रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है। इस साल पुण्य नक्षत्र में व्रत रखा जाएगा। इस बार 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी है। मान्यता है कि इस एकादशी पर जो व्रत करते हैं, उन्हें साल में पड़ने वाले 24 एकादशी के बराबर लाभ मिलता है। आमलकी एकादशी का महत्व अक्षय नवमी के समान है। इस एकादशी व्रत पर अमला के पेड़ की पूजा के साथ ही अन्नपूर्णा के दर्शन से विशेष लाभ मिलता है। आमलकी एकादशी या रंगभरी एकादशी पर बनेंगे कई शुभ योग इस साल की रंगभरी एकादशी पर चार शुभ योगों का संयोग बन रहा है। आमलकी एकादशी के दिन रवि योग, आयुष्मान योग, सौभाग्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। इन योग में किए गए पूजन, दान और जप-तप का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। इस शुभ संयोग में विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा और आंवला वृक्ष की आराधना अत्यंत शुभ मानी जाती है। कब है रंगभरी या आमलकी एकादशी? हिन्दू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी का आरंभ 26 फरवरी की रात 08:03 बजे से होगा और 27 फरवरी की शाम 06:02 बजे पर समापन होगा। रंगभरी एकादशी का महत्व: पुराणों के अनुसार, भगवान विष्णु ने कहा है कि जो प्राणी स्वर्ग और मोक्ष प्राप्ति की कामना रखते हैं, उनके लिए आमलकी एकादशी का व्रत अत्यंत श्रेष्ठ है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव, माता पार्वती से विवाह के बाद पहली बार अपनी प्रिय काशी नगरी आए थे। वहां आकर शिव ने देवी पार्वती के साथ होली खेली थी। जानें क्यों होती है इस दिन आंवले की पूजा आमलकी एकादशी का महत्व अक्षय नवमी के समान है। पुरोहित अरुण त्रिपाठी के अनुसार, इस दिन आंवला वृक्ष की पूजा का खास विधान है, क्योंकि इसी दिन सृष्टि के आरंभ में सबसे पहले आंवला वृक्ष की उत्पति हुई थी। आंवला वृक्ष भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इसके स्मरण मात्र से गौ दान का फल मिलता है, स्पर्श करने से दोगुना और फल भक्षण करने से तिगुना फल प्राप्त होता है। इसके मूल में विष्णु, उसके ऊपर ब्रह्मा, तने में रुद्र, शाखाओं में मुनिगण, टहनियों में देवता, पत्तों में वसु, फूलों में मरुदगण और फलों में समस्त प्रजापति वास करते हैं।

राशिफल 26 फरवरी 2026: मेष से मीन तक, जानें किसे मिलेगी खुशियों की सौगात और किसे बरतनी होगी सावधानी

मेष 26 फरवरी के दिन विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं, जो लाभदायक रहेगी। व्यापार अच्छा चलेगा और आप अच्छे मुनाफे की भी उम्मीद कर सकते हैं। आपकी कड़ी मेहनत आपको प्रमोशन दिला सकती है। नया कार्यभार मिलने की भी बड़ी संभावना है। वृषभ 26 फरवरी के दिन करियर के नए अवसर आपके सामने आएंगे। आज आपको प्रशंसा मिल सकती है। इंकम बढ़ाने और प्रमोशन पाने के लिए आपको पूरे लगन के साथ ऑफिस के टास्क कंप्लीट करने चाहिए। मिथुन 26 फरवरी का दिन आर्थिक रूप से यह एक अच्छा दिन है। केवल वही जिम्मेदारियां लें, जिनके बारे में आप आश्वस्त महसूस करते हैं। व्यवसायियों को दिन की शुरुआत में कुछ असफलताओं का सामना करना पड़ेगा लेकिन जैसे-जैसे दिन गुजरेगा चीजें बेहतर होंगी। कर्क 26 फरवरी के दिन अपने करियर में कुछ असफलताओं का अनुभव हो सकता है। कुछ योजनाएं गलत साबित हो सकती हैं और इसका भार आप पर भी आ सकता है। एडवाइस यह रहेगी कि सावधान रहें। सिंह 26 फरवरी के दिन दफ्तर में टिके रहने के लिए बहुत कड़ी मेहनत करनी होगी। धैर्य रखने की कोशिश करें और कठोर शब्दों का प्रयोग न करें। व्यवसायियों को स्टाफ संकट का सामना करना पड़ सकता है। कन्या 26 फरवरी के दिन कारोबार से जुड़े लोगों को आज सावधान रहने की जरूरत है। हेल्थ आज अच्छी रहेगी। कॉन्फिडेंस में आपके कमी आ सकती है। लाइफ पार्टनर के साथ बॉन्ड को स्ट्रांग बनाने के लिए आप डेट प्लान कर सकते हैं। तुला 26 फरवरी के दिन वित्त औसत रहेगा और उम्मीद से कम रहेगा। हो सकता है कि आपके सहकर्मी सहयोगात्मक न हों और आपको अपने सहकर्मियों से कही गई बातों में सावधानी बरतने की जरूरत है। वृश्चिक 26 फरवरी का दिन धन और वित्त के मामले में अच्छा रहेगा। अपनी एक्सपर्टीज बढ़ाने और कुछ नई स्किल्स सीखने में निवेश करने के लिए यह अच्छा दिन होगा। नौकरीपेशा लोगों को तरक्की और लाभ देखने को मिल सकता है। धनु 26 फरवरी के दिन की शुरुआत में अपने करियर को लेकर आप स्ट्रगल करेंगे। काम का प्रेशर ज्यादा महसूस होगा। नौकरी में बदलाव की भी बड़ी संभावना है। व्यवसायी लोग अपना कार्यक्षेत्र बदलना चाह रहे होंगे। मकर 26 फरवरी के दिन आज आपको अपनी मेंटल हेल्थ का खास ख्याल रखना चाहिए। लाइफ में प्रॉब्लम आना नॉर्मल है। इसलिए हिम्मत न हारें और पॉजिटिव रहने की कोशिश करें। कुंभ 26 फरवरी के दिन प्रोडक्टिविटी आज रोज के मुकाबले नॉर्मल से स्लो रहेगी और यह आपको बेचैन कर देगी। कुछ अप्रत्याशित समस्याएं सामने आ सकती हैं, जिससे आपकी प्लानिंग पूरी होने में देरी हो सकती है। मीन 26 फरवरी के दिन व्यवसायियों को अपने खर्चों के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए। जीवनसाथी के साथ बहस करने से बचें क्योंकि मनमुटाव की स्थिति पैदा हो सकती है। घूमने-फिरने का प्लान भी बन सकता है।

रवि योग का संयोग: 27 फरवरी को आमलकी एकादशी का विशेष पर्व

27 फरवरी को फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसे आमलकी यानी आंवला एकादशी कहते हैं। फाल्गुन महीने में आने के कारण ये हिंदी कैलेंडर की आखिरी एकादशी होती है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा के साथ ही आंवले का दान करने का भी विधान है। जिससे कई यज्ञों का फल मिलता है। श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि इस साल फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का प्रारंभ 27 फरवरी 2026 को तड़के 12:33 से होगा। तिथि का समापन 27 फरवरी 2026 की रात 10:32 पर होगा। इसलिए आमलकी एकादशी 27 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु के साथ आंवले के पेड़ को भी खासतौर पूजा जाएगा। तभी ये एकादशी व्रत पूरा माना जाता है, क्योंकि आंवले के पेड़ को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और पूजनीय माना जाता है। इस दिन आंवला खाने से बीमारियां खत्म होती हैं। एकादशी पर किए गए व्रत-उपवास और पूजन से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और सफलता मिलती है। ये व्रत भगवान विष्णु के लिए किया जाता है। आमलकी एकादशी पर विष्णु जी के साथ आंवले की और माता अन्नपूर्णा की पूजा करने की परंपरा है। आमलकी एकादशी की शाम तुलसी के पास दीपक अनिवार्य रूप से जलाना चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा के साथ ही विष्णु जी के मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करते रहें। श्रीकृष्ण का अभिषेक करें और कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें। श्रीकृष्ण के साथ गौ माता की भी पूजा जरूर करें। किसी गौशाला में गायों की देखभाल के लिए दान-पुण्य करें। किसी मंदिर में पूजन सामग्री का सामान जैसे कुमकुम, चंदन, मिठाई, तेल-घी, हार-फूल, भगवान के वस्त्र आदि का दान करें। आमलकी एकादशी पर खाने में आंवले का सेवन जरूर करें। आंवले का रस भी पी सकते हैं। आंवले का दान भी करें। माता अन्नपूर्णा अन्न की देवी है। इस तिथि पर देवी की पूजा करें और जरूरतमंद लोगों अन्न का दान करें। शुभ योग आमलकी एकादशी पर काफी शुभ योग बन रहे हैं। आमलकी एकादशी के दिन सर्वार्थ सिद्धि, रवि, आयुष्मान और सौभाग्य योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा के लिए शुभ समय सुबह 6:48 से 11:08 तक रहेगा। रंगभरी और आमलकी एकादशी होली से चार दिन पहले आने से इसे रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन से बनारस में बाबा विश्वनाथ को होली खेलकर इस पर्व की शुरुआत की जाती है। ब्रह्मांड पुराण के मुताबिक इस दिन आंवले के पेड़ और भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है। इस दिन शुभ ग्रह योगों के प्रभाव से व्रत और पूजा का पुण्य और बढ़ जाएगा। मिलता है यज्ञों का पुण्य पद्म और विष्णु धर्मोत्तर पुराण का कहना है कि आंवले का वृक्ष भगवान विष्णु को बहुत प्रिय होता है। इस पेड़ में भगवान विष्णु के साथ ही देवी लक्ष्मी का भी निवास होता है। इस वजह से आमलकी एकादशी के दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन आंवले के पेड़ को पूजन और आंवले का दान करने से समस्त यज्ञों और 1 हजार गायों के दान के बराबर फल मिलता है। आमलकी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को मोक्ष मिल जाता है।  तिल, गंगाजल और आंवले से नहाने की परंपरा इस एकादशी पर सूर्योदय से पहले उठकर पानी में गंगाजल की सात बूंद, एक चुटकी तिल और एक आंवला डालकर उस जल से नहाना चाहिए। इसे पवित्र या तीर्थ स्नान कहा जाता है। ऐसा करने से जाने-अनजाने में हुए हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। इसके बाद दिनभर व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करना चाहिए। इससे एकादशी व्रत का पूरा पुण्य फल मिलता है। सूर्यास्त के बाद जलाएं दीपक विष्णु जी की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल खासतौर पर किया जाता है। मान्यता है कि तुलसी के पत्तों के बिना विष्णु जी भोग स्वीकार नहीं करते हैं, इसलिए भोग के साथ ही तुलसी जरूर रखी जाती है। एकादशी विष्णु जी की तिथि है, लेकिन इस दिन विष्णु प्रिया तुलसी की भी विशेष पूजा करनी चाहिए। सुबह तुलसी को जल चढ़ाएं और शाम को सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं। ध्यान रखें शाम को तुलसी को स्पर्श न करें। दीपक जलाकर दूर से ही परिक्रमा करें।  पूजा विधि सुबह उठकर भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प करें। संकल्प लेने के बाद स्नान से निवृत्त होकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। दीपक जलाकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। पूजा के बाद आंवले के पेड़ के नीचे नवरत्न युक्त कलश स्थापित करें। आंवले के वृक्ष का धूप, दीप, चंदन, रोली, फूल और अक्षत से पूजन कर किसी गरीब या ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए। अगले दिन स्नान कर स्नान कर पूजन के बाद कलश, वस्त्र और आंवला का दान करना चाहिए। इसके बाद भोजन ग्रहण कर व्रत खोलना चाहिए।