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महाष्टमी के दिन यहां दीप जलाने से मिलता है मां दुर्गा का आशीर्वाद

2026 में महाष्टमी का पावन पर्व 26 मार्च को मनाया जाएगा। यह दिन मां महागौरी को समर्पित है और आध्यात्मिक रूप से अपनी ऊर्जा को जागृत करने और घर में सुख-समृद्धि के आह्वान के लिए सबसे शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में दीपक को ज्ञान और सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। महाष्टमी के दिन विशेष स्थानों पर दीपक प्रज्वलित करने से न केवल घर की नकारात्मकता दूर होती है बल्कि मां दुर्गा का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि महाष्टमी पर आपको कहां-कहां दीपक जलाने चाहिए ताकि आपका घर खुशियों के भंडार से भर जाए। अष्टमी तिथि को महाष्टमी कहा जाता है क्योंकि इसी दिन मां दुर्गा ने असुरों का संहार करने के लिए अपनी दिव्य शक्तियों का पूर्ण प्रकटीकरण किया था। इस दिन दीपदान करने का अर्थ है अपने जीवन के अंधकार को मिटाकर प्रकाश का स्वागत करना। इन 9 स्थानों पर जरूर जलाएं दीपक घर का मुख्य द्वार घर का मुख्य द्वार वह स्थान है जहां से देवी लक्ष्मी और मां दुर्गा का आगमन होता है। अष्टमी की शाम को द्वार के दोनों ओर घी के दीपक जलाएं। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती और सुख-शांति बनी रहती है।  मां दुर्गा के समक्ष आपके पूजा कक्ष में मां दुर्गा की मूर्ति या कलश के सामने एक बड़ा दीपक जलाएं। यदि संभव हो तो इसमें कपूर की एक टिक्की डाल दें। यह आपकी भक्ति को सिद्ध करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।  तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में तुलसी को साक्षात लक्ष्मी का रूप माना गया है। अष्टमी की शाम को तुलसी के क्यारे में दीपक जलाने से घर की दरिद्रता दूर होती है। ध्यान रहे कि दीपक की लौ उत्तर या पूर्व दिशा की ओर हो। रसोई घर रसोई वह स्थान है जहां मां अन्नपूर्णा का वास होता है। अष्टमी पर रसोई में पीने के पानी के स्थान के पास दीपक जलाएं। इससे घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती।  पीपल के वृक्ष के नीचे शास्त्रों के अनुसार, पीपल के पेड़ में त्रिदेवों और देवी-देवताओं का वास होता है। अष्टमी की रात पीपल के नीचे दीपक जलाने से ग्रह दोष शांत होते हैं। पीपल के पास दीपक जलाकर पीछे मुड़कर न देखें। घर का ब्रह्म स्थान अगर आपके घर में खुला आंगन है, तो उसके बीचों-बीच एक दीपक रखें। फ्लैट में रहने वाले लोग अपने हॉल के मध्य में एक सुरक्षित स्थान पर दीपक रख सकते हैं। यह पूरे घर के वास्तु दोषों को मिटाने की क्षमता रखता है। पास के किसी मंदिर में अष्टमी की रात अपने घर के नजदीकी देवी मंदिर में जाकर दीपदान करना अत्यंत फलदायी होता है। सामूहिक ऊर्जा वाले स्थान पर दीप जलाने से आपकी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। तिजोरी या धन रखने के स्थान के पास जहां आप अपना धन या गहने रखते हैं, वहां दूर से एक दीपक की रोशनी पड़नी चाहिए।  यह आपके खर्चों पर नियंत्रण रखता है और आय के नए स्रोत खोलता है। बेलपत्र के पेड़ के नीचे अष्टमी के दिन बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से मां पार्वती और भगवान शिव दोनों प्रसन्न होते हैं।  इससे संतान सुख और पारिवारिक एकजुटता बढ़ती है।

इंडक्शन चूल्हा कहां रखें? किचन के लिए ये वास्तु टिप्स हैं जरूरी

अगर आप भी गैस स्टोव के विकल्प के तौर पर इंडक्शन इस्तेमाल करने जा रहे हैं, तो वास्तु के अनुसार इंडक्शन रखने के लिए कुछ नियमों का विशेष पालन करना चाहिए। वास्तु के अनुसार, सही नियम अपनाएं तो घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी और मां अन्नपूर्णा प्रसन्न रहेंगी। इंडक्शन रखने के लिए सबसे शुभ दिशा वास्तु में अग्नि तत्व का स्वामी दक्षिण-पूर्व दिशा है। इंडक्शन चूल्हा इसी दिशा में रखने से अग्नि तत्व संतुलित रहता है, खाना जल्दी और अच्छे से पकता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिशा में इंडक्शन रखने से परिवार के स्वास्थ्य में सुधार होता है और अनावश्यक खर्च कम होता है। यदि जगह ना हो, तो अग्नि कोण के सबसे नजदीक रखें। उत्तर-पश्चिम दिशा भी है शुभ अगर दक्षिण-पूर्व में जगह ना हो, तो उत्तर-पश्चिम (वायु कोण) में इंडक्शन रख सकते हैं। यह दिशा वायु तत्व की है, जो खाना बनाने में सहायक होती है। इस दिशा में इंडक्शन रखने से खाना हल्का और पचने में आसान रहता है। लेकिन ध्यान रखें कि दक्षिण-पूर्व हमेशा प्राथमिकता रहे। उत्तर-पश्चिम में रखने से घर में हल्की हवा का प्रवाह बना रहता है। सबसे अशुभ दिशाएं ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) देवताओं का स्थान है। यहां इंडक्शन रखने से कुल देवता रुष्ट होते हैं, संतान कष्ट और मानसिक अशांति होती है। दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) में रखने से राहु-केतु सक्रिय होते हैं, जिससे रिश्तों में कलह और धन हानि होती है। ये दोनों दिशाएं अग्नि तत्व के लिए सबसे घातक हैं। गलती से भी इनमें इंडक्शन ना रखें। खाना बनाते समय पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करें इंडक्शन पर खाना बनाते समय व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। पूर्व से सूर्य की ऊर्जा और उत्तर से कुबेर की ऊर्जा मिलती है, जिससे खाना पौष्टिक और पचने में आसान होता है। दक्षिण या पश्चिम की ओर मुंह करके खाना बनाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना गया है। हमेशा दिशा का ध्यान रखें। सिंक और जल तत्व से दूरी वास्तु में अग्नि और जल तत्व का टकराव बहुत अशुभ होता है। इंडक्शन चूल्हा सिंक या जल स्रोत से कम से कम 3–4 फीट दूर होना चाहिए। अगर बहुत पास है, तो बीच में लकड़ी का बोर्ड या वास्तु यंत्र रखें। जल और अग्नि का संघर्ष होने से स्वास्थ्य और धन दोनों पर बुरा असर पड़ता है। इंडक्शन के आसपास हमेशा साफ-सफाई इंडक्शन चूल्हे के आसपास गंदगी, जूठे बर्तन या कचरा ना रखें। रोज सफाई करें। इंडक्शन के ऊपर या पास में कोई नकारात्मक चित्र न लगाएं। हर बार इस्तेमाल के बाद साफ करें और 'ॐ श्रीं ह्रीं अन्नपूर्णायै नमः' बोलकर धन्यवाद कहें। इससे रसोई में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और खाना अमृत समान हो जाता है। सही वास्तु से रसोई बनेगी धन और स्वास्थ्य का स्रोत दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम में इंडक्शन रखें, सिंक से दूर रखें, पूर्व-उत्तर मुंह करके खाना बनाएं, साफ-सफाई रखें और मंत्र बोलें। ये छोटे-छोटे नियम अपनाने से मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं और घर में धन की कमी नहीं रहती है। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

राशिफल 26 मार्च 2026: मेष से मीन तक, जानें आज का दिन किसके लिए होगा शुभ

मेष 26 मार्च के दिन अपने साथी के साथ समय बिताते हुए अपनी भावनाओं को साझा करें। दफ्तर में उत्पादक बनें और सभी सौंपे गए काम पूरे करें। लंबी दूरी की यात्रा करते समय, मेडिकल किट तैयार रखें। खर्च पर कंट्रोल रखना महत्वपूर्ण है। वृषभ 26 मार्च के दिन पार्टनर से बहस करने से दूर रहें। काम पर ध्यान केंद्रित करें। ध्यान रखें कि आप अपनी बेस्ट परफॉर्मेंस दें। पैसे को फालतू न उड़ाएं। छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्या भी हो सकती है। मिथुन 26 मार्च के दिन धन विभिन्न स्रोतों से आएगा। हर बदलाव को आत्मविश्वास के साथ संभालें। आज के दिन आपको सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। अपने खान-पान के प्रति सचेत रहना चाहिए। कर्क 26 मार्च के दिन प्रोफेशनल स्किल्स साबित करने के लिए कई अवसर सामने आएंगे। रोमांटिक डिनर या सरप्राइज गिफ्ट रिश्ते को मजबूत बनाने का एक आसान तरीका है। आज नई साझेदारी पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, जिससे धन प्राप्त होगा। सिंह 26 मार्च के दिन रोमांटिक रूप से, आज आप भाग्यशाली रहेंगे। व्यावसायिकता कार्यालय में सफलता सुनिश्चित करती है। आज धन और स्वास्थ्य दोनों अच्छी स्थिति में हैं। कोई बड़ी समस्या आपको परेशान नहीं करेगी। कन्या 26 मार्च के दिन लव लाइफ में शांति बनाए रखें। अपने पार्टनर को बहस से दूर रखें। ऑफिस के मामलों में भावनाओं को हावी न होने दें। आज आपका स्वास्थ्य भी उत्तम रहने वाला है। प्रेम संबंधों को बनाए रखने के लिए रिश्तों से जुड़ी समस्याओं को सुलझाएं। तुला 26 मार्च के दिन ऑयली या जंक फूड्स से ज्यादा सेहतमंद खाना खाएं। रिश्ते में अपनी ईमानदारी जारी रखें। कोई बड़ी पेशेवर बाधा आपके प्रदर्शन को प्रभावित नहीं करेगी। वित्तीय रूप से आप शेयर में निवेश करने के लिए समृद्ध हैं लेकिन एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। वृश्चिक 26 मार्च के दिन आप अपने रोमांटिक जीवन में प्रॉब्लम्स का पता लगाएं। लाइफ में बैलेंस बनाए रखें। प्रोफेशनल जीवन में चुनौतियां मौजूद रहेंगी, लेकिन आज धन और सेहत दोनों सकारात्मक रहेंगे। धनु 26 मार्च के दिन बात करते समय आपको सावधान रहना चाहिए। आपको पिछले इन्वेस्टमेंट से धन प्राप्त हो सकता है। सावधानी से वाहन चलाएं, खासतौर पर शाम के समय। सट्टेबाजी के कारोबार में निवेश न करें। मकर 26 मार्च के दिन आप डेडलाइन वाले महत्वपूर्ण टास्क भी पूरा कर सकते हैं। छोटी-मोटी फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। कुछ महिला जातक पुराने रिश्ते की ओर लौट सकती हैं, जिससे उन्हें खुशी मिल सकती है। कुंभ 26 मार्च के दिन ऑफिस में नई जिम्मेदारियां आपको बिजी रखेंगी। स्वास्थ्य और धन दोनों ही पॉजिटिव रहेंगे। कुछ छोटे-मोटे प्रोफेशनल मुद्दे हो सकते हैं, जो आपकी प्रोडक्टिविटी को गंभीर रूप से प्रभावित करेंगे। मीन 26 मार्च के दिन प्रेम जीवन को नॉर्मल बनाए रखें। कोई बड़ी प्रोफेशनल चुनौती आज के दिन को प्रभावित नहीं करेगी। डिटेल्स पर ध्यान दें। आर्थिक रूप से आज आपको सावधान रहने की जरूरत है।

कामदा एकादशी 2026: क्या है इसका मतलब और इस बार क्यों बढ़ गया इसका महत्व?

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है, और साल 2026 में 29 मार्च को पड़ने वाली कामदा एकादशी बेहद फलदायी मानी जा रही है. पंचांग के अनुसार यह व्रत चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत और भगवान की पूजा करने से जीवन के बड़े से बड़े पाप भी समाप्त हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. क्या है कामदा एकादशी का अर्थ? कामदा शब्द का अर्थ है , कामनाओं को पूर्ण करने वाली. यानी यह व्रत ऐसा माना जाता है जो श्रद्धा और नियम से करने पर व्यक्ति की हर इच्छा को पूरा करता है. धर्मग्रंथों के अनुसार, यह एकादशी विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी मानी गई है जो जीवन में किसी प्रकार के कष्ट, दोष या पाप से मुक्ति चाहते हैं. क्यों खास है 2026 की कामदा एकादशी? इस साल की कामदा एकादशी कई कारणों से खास मानी जा रही है. यह चैत्र मास में पड़ रही है, जो हिंदू नववर्ष की शुरुआत का समय होता है. नवरात्रि के आसपास आने के कारण इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा और भी बढ़ जाती है. इस दिन किए गए व्रत, दान और पूजा का फल कई गुना अधिक माना जाता है. ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत के लिए शुभ संकेत देता है. पौराणिक कथा और मान्यता पौराणिक कथा के अनुसार, एक गंधर्व ललित और उसकी पत्नी ललिता से जुड़ी यह कथा काफी प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि ललित को एक गलती के कारण राक्षस योनि में जन्म लेना पड़ा. तब उसकी पत्नी ने ऋषियों के कहने पर कामदा एकादशी का व्रत रखा. इस व्रत के प्रभाव से ललित को राक्षस योनि से मुक्ति मिली और वह पुनः अपने दिव्य स्वरूप में लौट आया. इस कथा से यह पता चलता है कि यह व्रत न केवल पापों से मुक्ति देता है, बल्कि जीवन के बड़े संकटों को भी दूर करता है. कामदा एकादशी व्रत का महत्व मान्यता है कि इस व्रत को रखने से अनजाने में हुए पाप भी नष्ट हो जाते हैं. यहां तक कि ब्रह्महत्या जैसे महापाप से भी मुक्ति मिलती है. यह व्रत पिशाच दोष, राक्षस योनि या नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है. धर्मग्रंथों में कहा गया है कि इस व्रत से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है. जो भी व्यक्ति सच्चे मन से यह व्रत करता है, उसकी सभी सभी मनोकामना पूरी होती हैं.

गौर गोपाल दास के 5 मॉर्निंग टिप्स, जो बनाएंगे आपका दिन बेहतर

हर व्यक्ति चाहता है कि उसका दिन अच्छा और शांतिपूर्ण बीते। लेकिन कई बार छोटी-छोटी परेशानियां, तनाव और नेगेटिव सोच हमारे पूरे दिन को प्रभावित कर देती हैं। मोटिवेशनल स्पीकर और लाइफ कोच गौर गोपाल दास के अनुसार, अगर हम सुबह की शुरुआत कुछ अच्छी आदतों के साथ करें, तो पूरा दिन पॉजिटिव और एकदम बैलेंस्ड बन सकता है। दिन की शुरुआत आभार से करें सुबह उठते ही सबसे पहले अपने जीवन के लिए आभार महसूस करें। बिस्तर से उठने से पहले कुछ सेकंड रुककर सोचें कि जीवन ने आपको कितना कुछ दिया है- परिवार, दोस्त, स्वास्थ्य और नए अवसर। आभार की भावना हमारे ध्यान को उन चीजों से हटाती है जो हमारे पास नहीं हैं और उन चीजों पर ले जाती है जो पहले से हमारे जीवन में मौजूद हैं। इससे मन शांत और सकारात्मक बनता है। जीवन की बड़ी योजना पर भरोसा रखें जीवन में हर चीज तुरंत समझ नहीं आती। कई बार हमें मुश्किलों और देरी का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में जरूरी है कि हम जीवन की बड़ी योजना पर भरोसा रखें। हो सकता है कि आज जो चुनौती आपको परेशान कर रही है, वही भविष्य में आपको मजबूत बनाने का कारण बने। इसलिए हर परिस्थिति को सीख के रूप में स्वीकार करें। सकारात्मक सोच चुनें सुबह उठते ही यह तय करें कि चाहे दिन में कैसी भी स्थिति आए, आप सकारात्मक सोच और स्पष्टता के साथ प्रतिक्रिया देंगे। हम हर स्थिति को कंट्रोल नहीं कर सकते, लेकिन हम अपने रिएक्शन पर जरूर ध्यान दे सकते हैं। अगर आप सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ दिन की शुरुआत करेंगे, तो मुश्किल परिस्थितियां भी आपको कम प्रभावित करेंगी। छोटी जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभाएं अक्सर हम बड़ी सफलता के बारे में सोचते हैं, लेकिन उसके पीछे छोटी-छोटी आदतें और अनुशासन छिपे होते हैं। सुबह की छोटी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाना, जैसे समय पर उठना, अपने काम को व्यवस्थित करना और दिन की योजना बनाना, भविष्य की बड़ी सफलता की नींव बन सकते हैं। जब हम छोटे काम सही तरीके से करते हैं, तो धीरे-धीरे बड़े परिणाम भी मिलने लगते हैं। किसी एक व्यक्ति की मदद करने का संकल्प लें सुबह उठते ही यह सोचें कि आज आप कम से कम एक व्यक्ति की मदद जरूर करेंगे। यह मदद बहुत बड़ी होने की जरूरत नहीं है। किसी की बात ध्यान से सुनना, किसी को प्रेरित करना या छोटी-सी सहायता करना भी काफी है। दयालुता का एक छोटा सा काम भी समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाता है। कई बार इसका असर बहुत दूर तक जाता है। जीवन मंत्र : सुबह का समय पूरे दिन की दिशा तय करता है। अगर दिन की शुरुआत सकारात्मक सोच, आभार और अच्छे इरादों के साथ की जाए, तो जीवन में शांति और संतुलन बना रहता है। इन 5 आसान आदतों को अपनी सुबह की दिनचर्या में शामिल करके आप अपने दिन को शांत, सकारात्मक और शक्तिशाली बना सकते हैं।

कर्ज से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं नारियल के ये असरदार उपाय

कर्ज का बोझ एक ऐसा मानसिक तनाव है जो इंसान की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लेता है। कई बार कड़ी मेहनत और बेहतर कमाई के बावजूद, परिस्थितियां कुछ ऐसी बनती हैं कि इंसान कर्ज के दलदल में फंसता चला जाता है। वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र में नारियल को श्रीफल कहा गया है, जिसका अर्थ है लक्ष्मी का फल। नारियल न केवल सेहत के लिए फायदेमंद है, बल्कि इसमें सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने और नकारात्मकता को सोखने की अद्भुत क्षमता होती है। यदि आप भी आर्थिक तंगी या भारी कर्ज से परेशान हैं तो नारियल के ये अचूक उपाय आपकी किस्मत बदल सकते हैं। ऋणमुक्ति के लिए नारियल का विशेष उपाय यदि आप लंबे समय से कर्ज नहीं चुका पा रहे हैं तो मंगलवार के दिन यह उपाय करना अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। एक जटा वाला नारियल लें और उस पर चमेली के तेल में लाल सिंदूर मिलाकर स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं। इसके साथ कुछ लाल फूल और थोड़ी सी बूंदी या लड्डू लेकर हनुमान मंदिर जाएं। हनुमान जी के चरणों में इसे अर्पित करें और ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें। वास्तु के अनुसार, हनुमान जी संकटमोचन हैं। यह उपाय लगातार 5 या 11 मंगलवार करने से कर्ज चुकाने के नए मार्ग प्रशस्त होते हैं। व्यापार में घाटे और आर्थिक तंगी के लिए अगर आपका पैसा कहीं फंस गया है या व्यापार में लगातार नुकसान हो रहा है, तो शुक्रवार का दिन नारियल के उपाय के लिए सर्वश्रेष्ठ है। शुक्रवार के दिन सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें। एक नारियल को चमकीले लाल कपड़े में लपेटें। इसे अपने घर के पूजा स्थान या तिजोरी में रख दें। मां लक्ष्मी की कपूर से आरती करें और उनसे घर में स्थिरता का आशीर्वाद मांगें। अगले दिन इस नारियल को किसी बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। इससे धन आगमन की बाधाएं दूर होती हैं। नारियल और काला धागा वास्तु शास्त्र के अनुसार, कई बार घर या व्यवसाय को लगी बुरी नजर भी कर्ज का कारण बनती है। धन आता तो है, लेकिन बेवजह के खर्चों में निकल जाता है। एक नारियल लें और उस पर अपनी लंबाई के बराबर काला धागा लपेट लें।  अब इस नारियल को अपने सिर से पैर तक 7 बार वार (घुमा) लें। इसके बाद इसे किसी सुनसान स्थान पर जला दें या बहते पानी में डाल दें। यह नजर दोष और नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है जिससे संचित धन में वृद्धि होने लगती है। शनिवार का विशेष शनि दोष निवारण शनि की ढैया या साढ़ेसाती के कारण भी कई बार व्यक्ति कर्ज के बोझ तले दब जाता है। इसे दूर करने के लिए शनिवार को यह टोटका अपनाएं। एक जटा वाला नारियल लें और उसमें एक छोटा सा छेद करें। उसमें चीनी और थोड़ा सा घी भर दें। इस नारियल को किसी पीपल के पेड़ के नीचे मिट्टी में थोड़ा दबा दें जहां चींटियां आती हों। जैसे-जैसे चींटियां उस चीनी को खाएंगी, आपके ऊपर से मानसिक और आर्थिक दबाव कम होने लगेगा। घर की सुख-शांति के लिए कामधेनु उपाय यदि परिवार में कलह रहती है, जिससे बरकत नहीं होती, तो एक नारियल को आधे हिस्से में काटें। उसमें शक्कर भरें और शाम के समय इसे घर के मुख्य द्वार के पास रख दें। अगले दिन सुबह इसे पक्षियों को डाल दें। इससे घर का वास्तु दोष शांत होता है।

शाम ढलते ही न करें ये 5 गलतियां, धन की देवी हो सकती हैं अप्रसन्न

दिनभर की भागदौड़ के बाद जब सूरज ढलता है, तो वह समय प्रकृति के शांत होने और घर में सकारात्मक ऊर्जा के आगमन का होता है। हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में शाम के समय को 'संध्या काल' कहा जाता है, जो देवताओं की आराधना का समय है। अक्सर हमारे घर के बड़े-बूढ़े हमें शाम के समय सोने या झाड़ू लगाने से टोकते हैं। क्या यह सिर्फ अंधविश्वास है? या फिर इसके पीछे गहरे वास्तु और वैज्ञानिक कारण छिपे हुए हैं। 1. घर में झाड़ू-पोछा करना वास्तु के अनुसार, शाम के समय घर की सफाई करना यानी मां लक्ष्मी को घर से बाहर निकालना है। माना जाता है कि सूर्यास्त के समय मां लक्ष्मी घर में प्रवेश करती हैं। अगर आप उस समय झाड़ू लगाते हैं, तो आप घर की सकारात्मक ऊर्जा और बरकत को बाहर धकेल देते हैं। 2. पैसों का लेन-देन शाम के समय किसी को उधार देना या कर्ज लेना, दोनों ही शुभ नहीं माने जाते। ऐसा कहा जाता है कि सूर्यास्त के बाद धन का आदान-प्रदान करने से लक्ष्मी दूसरे के पास चली जाती है और आपके घर में आर्थिक तंगी आने लगती है। 3. पेड़-पौधों को छूना या पानी देना पौधों में भी जीवन होता है और सूर्यास्त के बाद वे सो जाते हैं। शाम को उन्हें छूना, उनके पत्ते तोड़ना या उन्हें पानी देना उन्हें कष्ट पहुंचाने जैसा है, जिससे घर में वास्तु दोष पैदा होता है। 4. दही या सफेद चीजों का दान वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्यास्त के बाद दही, दूध या नमक जैसी सफेद चीजों का दान नहीं करना चाहिए। सफेद चीजों का संबंध शुक्र और चंद्रमा से होता है। शाम को इनका दान करने से घर की सुख-समृद्धि कम होने लगती है। 5. शाम के समय सोना बीमार या बुजुर्गों को छोड़कर, स्वस्थ व्यक्ति का शाम के समय सोना आलस्य और दरिद्रता को आमंत्रण देता है। यह समय ध्यान और पूजा-पाठ का होता है, सोने का नहीं।

Durga Ashtami 2026: कन्या पूजन मुहूर्त की टाइमिंग, चैत्र नवरात्र की महाअष्टमी पर होगा आयोजन

 इंदौर  चैत्र नवरात्र का पावन पर्व अब अपने समापन की ओर है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 26 मार्च यानी कल चैत्र नवरात्र की महाअष्टमी यानी दुर्गाष्टमी मनाई जाएगी. महाअष्टमी का दिन नवरात्र के सबसे खास दिनों में से एक है. यह हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को ही मनाई जाती है. इस विशेष दिन पर भक्त मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की उपासना करते हैं. पूरे देश में यह दिन बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है. इसके अलावा, इस दिन कई लोग अपने घरों में कन्या पूजन करके नवरात्र का पारण भी करते हैं. तो आइए जानते हैं कि चैत्र नवरात्र की महाअष्टमी पर कल कितने बजे से कन्या पूजन शुरू होगा और किन नियमों के साथ होगा कन्या पूजन।  दुर्गाष्टमी 2026 तिथि  द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 25 मार्च यानी आज दोपहर 1 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 26 मार्च यानी कल सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर होगा।  दुर्गा अष्टमी 2026 कन्या पूजन का ये रहेगा मुहूर्त  पहला मुहूर्त- सुबह 6 बजकर 16 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।  दूसरा मुहूर्त- सुबह 10 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 01 मिनट तक रहेगा।  अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 2 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।  इन तीनों मुहूर्त में कन्या पूजन किया जा सकता है.  दुर्गा अष्टमी 2026 शुभ योग  दुर्गा अष्टमी पर कल सर्वार्थसिद्धि योग और रवि योग का संयोग भी बन रहा है. सर्वार्थसिद्धि योग शाम 4 बजकर 19 मिनट से लेकर 27 मार्च की सुबह 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा. रवि योग का मुहूर्त भी यही रहेगा।  दुर्गा अष्टमी के दिन ऐसे करें कन्या पूजन चैत्र नवरात्र की दुर्गा अष्टमी के इस पावन दिन पर लोग नौ छोटी-छोटी कन्याओं को घर बुलाते हैं, जिन्हें मां दुर्गा के नौ रूपों का स्वरूप माना जाता है. उनकी पूजा की जाती है, माथे पर तिलक लगाया जाता है, उनके पैर धोए जाते हैं और उन्हें सात्विक भोजन जैसे हलवा, पूरी और चने खिलाए जाते हैं. उन्हें इच्छानुसार उपहार और दक्षिणा भी दी जाती है।  भोजन के बाद लोग उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं. कई लोग इस दिन जरूरतमंद और गरीब कन्याओं को भोजन, फल और कपड़े भी दान करते हैं. चैत्र दुर्गा अष्टमी बुराई पर अच्छाई की जीत और नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक है. यह दिन श्रद्धा, भक्ति और खुशी के साथ मनाया जाता है। 

चार धाम यात्रा की तारीख तय, अक्षय तृतीया से यमुनोत्री धाम के दर्शन शुरू

देहरादून हिंदू धर्म में उत्तराखंड स्थित चार धाम यात्रा (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ) बेहद ही महत्वपूर्ण व पवित्र तीर्थयात्रा मानी गयी है। ये तीर्थयात्रा अमूमन अप्रैल या मई के महीने से शुरू होकर अक्टूबर और नवंबर के महीने तक चलती है। इस साल विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर खोल दिए जाएंगे। यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का शुभारंभ होगा। रविवार, 19 अप्रैल को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजा अर्चना की जाएगी, जिसके बाद श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। कपाट खुलने के साथ ही ग्रीष्मकालीन चारधाम यात्रा का शुभारंभ भी हो जाएगा। इसके बाद अगले छह माह तक देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु यमुनोत्री धाम में मां यमुना के दर्शन कर सकेंगे। अक्षय तृतीया पर खुलेंगे यमुनोत्री धाम के कपाट, 19 अप्रैल से शुरू होगी चार धाम यात्रा तीर्थ पुरोहितों ने बताया कि इस साल 6 गते बैसाख, अक्षय तृतीया शुक्ल पक्ष, कृतिका नक्षत्र, कर्क लग्न और आयुष्मान योग में 19 अप्रैल रविवार को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर मां यमुना जी के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। मंगलवार को यमुना जयंती के शुभ अवसर पर मां यमुना के शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली मंदिर में यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने का शुभ मुहूर्त विधि विधान से निकाला गया। इस दौरान श्री यमुनोत्री मंदिर समिति, समस्त तीर्थ पुरोहित समाज और पंच पंडा समिति की उपस्थिति में पंचांग गणना के बाद कपाट खुलने की तिथि और समय की औपचारिक घोषणा की गई। बता दें कि इस बार 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे, जबकि 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुल सकते हैं। इस अवसर पर मंदिर समिति के सचिव सुनील उनियाल, पंच पंडा समिति के सचिव गिरीश उनियाल, मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल, कृतेश्वर उनियाल, मनमोहन उनियाल, ज्योति प्रसाद उनियाल, प्रदीप उनियाल, गिरीश उनियाल, गौरब उनियाल, संजीव उनियाल, विपिन उनियाल सहित अन्य तीर्थ पुरोहित मौजूद रहे। चारधाम यात्रा के लिए बन रहे ग्रीन कार्ड एआरटी प्रशासन ऋषिकेश रावत सिंह के अनुसार, 23 मार्च से कार्यालय में पूजा-अर्चना, यज्ञ-हवन एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ ग्रीन कार्ड बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। उन्होंने चारधाम यात्रा-2026 के सुगम, सफल, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित संचालन के दृष्टिगत समस्त व्यावसायिक सवारी वाहनों के संचालकों और चालकों से अपील की है कि वे अपने वाहनों का समय परीक्षण कराकर, आवश्यक वैध दस्तावेजों के साथ कार्यालय में उपस्थित होकर ग्रीनकार्ड प्राप्त करें। बिना ग्रीनकार्ड के किसी भी सवारी वाहन को यात्रा मार्ग पर संचालित होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

Ram Navami 2026: ग्रहों का शुभ संयोग, रामनवमी पर इन राशियों को मिलेगा विशेष लाभ

पंचांग के अनुसार, चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है. इस बार तिथि दो दिन पड़ने के कारण लोगों में कन्फ्यूजन है कि रामनवमी कब मनाई जाए. धार्मिक मान्यता है कि भगवान राम का जन्म दोपहर में हुआ था, इसलिए 26 मार्च 2026 को रामनवमी मनाना अधिक शुभ माना जा रहा है. हालांकि, उदयातिथि के अनुसार, कुछ लोग 27 मार्च को भी रामनवमी मनाने की बात कर रहे हैं. इस दिन कई खास ज्योतिषीय योग भी बन रहे हैं, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है।  रामनवमी पर ये रहेगी ग्रहों की स्थिति इस दिन ग्रहों की स्थिति भी खास रहने वाली है. शुक्र ग्रह मेष राशि में प्रवेश करेंगे, वहीं गुरु और चंद्रमा की युति से गजकेसरी योग बनेगा. इसके अलावा गुरु और मंगल के साथ आने से नवपंचम राजयोग का निर्माण होगा. साथ ही कुछ राशियों में त्रिग्रही योग भी बन रहा है. इन सभी योगों का असर अलग-अलग राशियों पर देखने को मिलेगा. तो आइए जानते हैं कि रामनवमी किन राशियों के लिए शुभ रहेगा।  इन राशियों के लिए शुभ रहेगा रामनवमी इस बार रामनवमी का दिन खासतौर पर मेष, वृषभ और कन्या राशि वालों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है. इन लोगों को लंबे समय से चल रही परेशानियों से राहत मिल सकती है और जीवन में खुशियां बढ़ सकती हैं. परिवार में चल रहे मतभेद दूर हो सकते हैं. रिश्तों में मिठास आएगी. कार्यक्षेत्र में आपके काम की तारीफ होगी, जिससे प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने के योग बन सकते हैं. व्यापार में भी अच्छा लाभ मिलने की संभावना है. आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और पुराने कर्ज से छुटकारा मिल सकता है।  इसके अलावा मिथुन, कुंभ, तुला, मकर और सिंह राशि के लोगों को भी इस दिन कुछ सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं. वहीं वृश्चिक और मीन राशि वालों को थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है, खासकर सेहत के मामले में. हालांकि कामकाज पर इसका ज्यादा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।  रामनवमी पर करें ये उपाय अगर आप इस दिन भगवान राम की कृपा पाना चाहते हैं, तो कुछ सरल उपाय कर सकते हैं. रामचरितमानस के बालकांड का पाठ करना शुभ माना जाता है. तुलसी के पत्तों की माला भगवान राम को अर्पित करें. हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी सकारात्मक फल मिल सकते हैं।