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Tata Sons की शेयर बाजार में एंट्री पर बढ़ा विवाद, RBI ने हाई कोर्ट का खटखटाया दरवाजा

 मुंबई टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर लंबे समय से चल रही खींचतान के बीच अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी कानूनी तैयारी तेज कर दी है. इसका असर मंगलवार को टाटा ग्रुप की कुछ कंपनियों के शेयरों में भी देखने को मिला, जहां कुछ स्टॉक्स 20% तक चढ़ गए।  आबीआई ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कैविएट याचिका दायर की है. आसान भाषा में समझें तो कैविएट का मतलब है कि अगर इस मामले में कोई याचिकाकर्ता अदालत का दरवाजा खटखटाता है, तो RBI की बात सुने बिना उसके खिलाफ या उसके पक्ष में कोई आदेश जारी न किया जाए। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने इस कैविएट की जानकारी टाटा संस को भी दे दी है. इससे संकेत मिलता है कि RBI इस मामले में संभावित कानूनी चुनौती को लेकर पहले से अपनी स्थिति तैयार रखना चाहता है।  11 सितंबर के फैसले से बढ़ी हलचल RBI का यह कदम 11 सितंबर के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें केंद्रीय बैंक ने टाटा संस की सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन (CoR) सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी थी. टाटा संस ने अनरजिस्टर्ड कोर इनवेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर क्लासिफाइड होने के लिए यह आवेदन दिया था. लेकिन अर्जी खारिज होने का मतलब है कि कंपनी पर अपर-लेयर एनबीएफसी से जुड़ा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लागू रहने का रास्ता साफ है. यही वजह है कि टाटा संस की लिस्टिंग का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है।  टाटा संस की लिस्टिंग क्यों है जरूरी इसकी जड़ RBI के अपर-लेयर एनबीएफसी नियमों में है. टाटा संस को RBI की अपर-लेयर नॉन-बैंक फाइनेंस कंपनियों की लिस्ट में रखा गया है. इस लिस्ट में शामिल कंपनियों पर अपेक्षाकृत कड़े रेगुलेटरी नियम लागू होते हैं, जिनमें लिस्टिंग से जुड़ी शर्त भी अहम है. यही वजह है कि टाटा संस के लिए निजी कंपनी बने रहना और RBI के नियमों के तहत उसकी लिस्टिंग की अनिवार्यता, दोनों के बीच टकराव का सवाल बना हुआ है।  यह मामला 2022 से चला आ रहा है RBI ने 2022 में अपर-लेयर नॉन-बैंक फाइनेंस कंपनियों की सूची जारी की थी. इसमें टाटा संस को कोर इनवेस्टमेंट कंपनी के तौर पर शामिल किया गया था. इसके बाद जून 2026 में नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के क्लासिफिकेशन के लिए नया प्रिंसिपल-बेस्ड फ्रेमवर्क लाया गया. इसने पहले लागू पैरामेट्रिक मेथडोलॉजी की जगह ली. फिर 6 अगस्त को संशोधित अपर-लेयर NBFC सूची जारी हुई. इसमें भी टाटा संस को बरकरार रखा गया. उस समय RBI ने साफ किया था कि टाटा संस को लिस्ट में बनाए रखना उसकी डी-रजिस्ट्रेशन अर्जी के नतीजे पर कोई असर नहीं डालता. उस समय कंपनी की अर्जी RBI के पास जांच के तहत थी।  रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और ज्यादातर ट्रस्टी टाटा संस को निजी कंपनी बनाए रखने के पक्ष में रहे हैं. उनका फोकस शापूरजी पालनजी ग्रुप के साथ हिस्सेदारी के मोनेटाइजेशन को लेकर ऐसा रास्ता निकालने पर रहा है, जिस पर दोनों पक्ष सहमत हों. यानी टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने के बजाय हिस्सेदारी से जुड़े दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जाता रहा है।  टाटा ग्रुप के शेयरों में क्यों आया उछाल इस पूरे घटनाक्रम का असर शेयर बाजार में भी दिखाई दिया. टाटा केमिकल्स और टाटा इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन जैसे कुछ टाटा ग्रुप शेयरों में मंगलवार को 20% तक की तेजी देखने को मिली. रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार के कुछ हिस्से में इन शेयरों की तेजी को टाटा संस की संभावित लिस्टिंग से मिलने वाले संभावित फायदे की उम्मीद से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, इसे टाटा संस की लिस्टिंग तय होने का संकेत नहीं माना जा सकता. अभी कानूनी और नियामकीय स्तर पर मामला आगे बढ़ना बाकी है। 

तूफानी तेजी के बाद शेयर बाजार में अचानक क्रैश, दिन के हाई से 1300 अंक फिसला सेंसेक्स

मुंबई  मंगलवार का दिन शेयर बाजार में पैसे लगाने वालों के लिए अमंगलकारी साबित हो रहा है. सबसे बड़ी बात ये है कि सेंसेक्स-निफ्टी ने तूफानी शुरुआत की थी, लेकिन देखते ही देखते बाजार में ऐसा भूचाल आया कि दोनों इंडेक्स क्रैश हो गए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स दिन के हाई लेवल से एक झटके में 1400 अंक से ज्यादा टूटकर बंद हुआ. वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी इंडेक्स ने भी डे-हाई से 474 अंकों का गोता लगा गया. शेयर मार्केट में अचानक आई इस बड़ी गिरावट के पीछे एक नहीं, बल्कि कई बड़े कारण हैं।    तूफानी तेजी, फिर तगड़ी गिरावट शेयर मार्केट में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत धुआंधार तेजी के साथ हुई और निवेशकों को लगा कि बीते सप्ताह की गिरावट पर ब्रेक लग गया, लेकिन उनकी खुशी महज घंटेभर बाद ही टेंशन में तब्दील हो गई. सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट का जो सिलसिला शुरू हुआ वो कारोबार आगे बढ़ने के साथ तेज होता चला गया. शेयर बाजार में कारोबार खत्म होने पर BSE Sensex 777 अंक की गिरावट लेकर 74,003 के लेवल पर क्लोज हुआ, जो दिन के हाई लेवल से 1433 अंक की गिरावट है।  सिर्फ सेंसेक्स ही नहीं, बल्कि NSE Nifty ने भी निवेशकों को बुरी तरह चौंकाया है. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले बंद 23,398 की तुलना में तेज रफ्तार के साथ 23,576 पर कारोबार की शुरुआत की थी और 23,592 तक उछला था, लेकिन फिर सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए ये भी टूटता चला गया और खबर लिखे जाने तक अपने दिन के हाई लेवल से 474 अंक फिसलकर 23,118 पर आकर बंद हुआ।  शेयर मार्केट क्रैश के कारण Share Market Crash के पीछे के कारणों की बात करें, तो एक नहीं बल्कि कई हैं. इनमें कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से लेकर US बॉन्ड यील्ड तक का रोल है।  पहला कारण: वेस्ट एशिया में अमेरिका-ईरान टेंशन और मध्य पूर्व में फैलते संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को खतरे में डाल दिया है. इसके असर तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत तेज उछाल के साथ 107 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रही है. इसने महंगाई के जोखिम को बढ़ाते हुए शेयर बाजारों का सेंटीमेंट खराब किया है।  दूसरा कारण: शेयर मार्केट में बड़ी गिरावट के पीछे दूसरा कारण अमेरिका से जुड़ा हुआ है. दरअसल, सोमवार को बेंचमार्क 10-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5 फीसदी पर जा पहुंची, जो अक्टूबर 2023 के बाद पहली बार है. गौरतलब है कि 10 साल की बॉन्ड यील्ड को ग्लोबल बेंचमार्क माना जाता है और ये सीधे अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति को दर्शाता है. वहीं बीते कारोबारी दिन अमेरिकी शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई थी, जिसका असर मंगलवार को भारतीय बाजार पर भी नजर आया है।  तीसरा कारण: शेयर बाजार में मंगलवार को IT इंडेक्स के अलावा ज्यादातर कैटेगरी में तेज गिरावट दर्ज की गई. मार्केट टूटने का तीसरा बड़ा कारण तमाम ग्लोबल टेंशन और तेल की कीमतों में इजाफे के बीच शेयर बाजार के लिए डर का पैमाना माने जाने वाले India VIX में अचानक उछाल भी है. ये 6 फीसदी के आसपास बढ़कर 13 के पार निकल गया, जो आने वाले दिनों में शेयर मार्केट में बिकवाली का इंडिकेशन देता है।  ये शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखरे Stock Market Crash के बीच सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयरों की लिस्ट देखें, तो बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल BEL Share (5%), IndiGo Share (3.56%), Bajaj Finserv Share (2.96%), Adani Ports Share (2.50%), SBI Share (2.42%), Titan Share (2.35%), Bajaj Finance Share (2.34%), Asian Paints Share (2.31%), M&M Share (2.19%), Trent Share (2%) फिसलकर ट्रेड कर रहे थे. 

US मार्केट की गिरावट और महंगे कच्चे तेल का नहीं दिखा असर, शुरुआती कारोबार में चमके 4 IT स्टॉक

मुंबई  कच्चे तेल पर महंगाई छाई है, वेस्ट एशिया में तनाव जारी है, अमेरिकी शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली है, लेकिन इन सब निगेटिव खबरों के बीच भी भारतीय शेयर बाजार ओपनिंग के साथ गदर मचाए हुए नजर आया. एक दिन की छुट्टी के बाद मंगलवार को सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत हुई. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला BSE Sensex खुलते ही 655 अंक की छलांग लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला NSE Nifty भी जोरदार तेजी के साथ ओपन हुआ।  हालांकि, आधे घंटे तक तेजी के साथ कारोबार करने के बाद शेयर बाजार में बाजी पलटी हुई नजर आई और दोनों इंडेक्स अचानक रेड जोन में आ गए. लेकिन इन बीच भी भारतीय आईटी कंपनियों के शेयर धमाल मचाते हुए नजर आए, तो वहीं HDFC Bank Share भी निवेशकों को तगड़ी कमाई कराता हुआ नजर आया है।  सेंसेक्स-निफ्टी की धुआंधार ओपनिंग  सोमवार को गणेश चतुर्थी पर शेयर बाजार बंद था, लेकिन एक दिन की छुट्टी के बाद जब सेंसेक्स-निफ्टी ने ओपनिंग की तो ये जोरदार रही. तेल लगातार महंगा होने, देश में रिटेल से लेकर थोक महंगाई तक बढ़ने के बावजूद बीएसई की सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,781 की तुलना में तेजी लेकर 75,369 पर खुला और फिर अचानक छलांग लगाकर 655 अंक चढ़कर 75,436 पर जा पहुंचा. हालांकि, कुछ देर के कारोबार के बाद इसकी रफ्तार धीमी नजर आई।  सेंसेक्स की तरह ही एनएसई निफ्टी की भी चाल देखने को मिली है. मंगलवार को ये इंडेक्स अपने पिछले बंद 23,398 की तुलना में बढ़त लेकर खुला और फिर एक झटके में उछलकर 23,592 के लेवल पर जा पहुंचा. बीते सप्ताह दोनों इंडेक्स में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी।  HDFC बैंक से IT शेयरों तक का गदर शेयर बाजार में इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा रोल आईटी कंपनियों के शेयरों का रहा, जिनमें तूफानी तेजी देखने को मिली है. सबसे ज्यादा तेज रफ्तार से HCL Tech Share भागा, जो खबर लिखे जाने तक करीब 7 फीसदी की उछाल में कारोबार कर रहा था. इसके अलावा Tech Mahindra Share (5%), TCS Share (4.96%), Infosys Share (4.60%), MPhasis Share (4.56%), Persistent Share (2.50%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे।  बात प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक यानी HDFC Bank Share की करें, तो ये भी शेयर मार्केट ओपन होने के साथ ही गदर मचाए हुए नजर आया. इस बैंकिंग स्टॉक में 2.50% की जोरदार तेजी देखने को मिली है और इसका भाव 725 रुपये के करीब पहुंच गया. अन्य तेजी वाले शेयरों में एचयूएल, आईटीसी, टाटा स्टील शामिल रहे।  तेल से लेकर रिटेल महंगाई तक फेल शेयर मार्केट में ये जोरदार शुरुआती तेजी ऐसे समय में देखने को मिली है, जबकि अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते होर्मुज, बाब अल मंदेब, सउदी अरब तेल पाइपलाइन को लेकर ग्लोबल टेंशन चरम पर है. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल जारी है. अमेरिकी शेयर बाजार बीते कारोबारी दिन निगेटिव जोन में बंद हुए हैं और सबसे खास भारत में रिटेल से लेकर थोक महंगाई तक में उछाल आया है. लेकिन इन सबके बावजूद बाजार ने तेज रफ्तार पकड़ी है। 

बैंकों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच Indian Bank का बड़ा फैसला, 3 देशों में खोलेगा ऑफिस; जानें पूरा प्लान

 नई दिल्ली बैंकिंग की दुनिया में अब मुकाबला सिर्फ कस्टमर्स को लोन देने और डिपॉजिट जुटाने तक सीमित नहीं है. बड़े बैंक अपनी कमाई बढ़ाने के लिए नए-नए कारोबार में उतर रहे हैं और विदेशों में भी अपना दायरा बढ़ा रहे हैं. इसी कड़ी में सरकारी क्षेत्र के इंडियन बैंक (Indian Bank) ने भी अपनी आगे की रणनीति तैयार कर ली है. बैंक कुछ नए क्षेत्रों में कदम रखने की तैयारी में है, वहीं विदेशी बाजारों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. इस पूरी योजना में आने वाला करीब एक साल अहम हो सकता है।  दो नए कारोबार में उतरने की तैयारी इंडियन बैंक अब लाइफ इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंड बिजनेस में एंट्री की दिशा में आगे बढ़ रहा है. बैंक इन दोनों सेक्टर्स के लिए बोर्ड की मंजूरी लेने की प्रक्रिया में है. बैंक के एमडी और सीईओ बिनोद कुमार ने बताया कि यह योजना ट्रैक पर है. प्रस्तावित सब्सिडियरी या जॉइंट वेंचर के जरिए इन कारोबारों में उतरने की तैयारी है. बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद जरूरी रेगुलेटरी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं शुरू की जाएंगी. कुमार के मुताबिक, इस तरह के कारोबार किसी संगठन के लिए कमाई बढ़ाने के साथ-साथ ब्रांड को मजबूत करने में भी मदद करते हैं।  अच्छे पार्टनर की तलाश सबसे अहम बिनोद कुमार ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में करीब एक साल का समय लग सकता है. उनके मुताबिक, सही और अच्छा पार्टनर चुनना इस योजना का सबसे अहम हिस्सा होगा. उन्होंने कहा कि अगर पार्टनर अच्छा हो तो वेल्थ क्रिएशन यानी कमाई बढ़ाने की क्षमता भी तेज होती है. यही वजह है कि बैंक इस मामले में जल्दबाजी के बजाय सही साझेदार की तलाश पर जोर दे रहा है।  इंश्योरेंस कारोबार में पहले से मौजूदगी इंडियन बैंक के लिए इंश्योरेंस कारोबार पूरी तरह नया नहीं है. बैंक पहले से जनरल इंश्योरेंस के क्षेत्र में मौजूद है. इंडियन बैंक की यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी में 28.52 फीसदी हिस्सेदारी है. यह हिस्सेदारी साल 2020 में पुराने इलाहाबाद बैंक के इंडियन बैंक में विलय के बाद बैंक को मिली थी. यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस की स्थापना 2007 में हुई थी. यह एक जॉइंट वेंचर है. इसमें इंडियन बैंक की 28.52 फीसदी, इंडियन ओवरसीज बैंक की 18.06 फीसदी और कर्नाटक बैंक की 6 फीसदी हिस्सेदारी है. डाबर इन्वेस्टमेंट कॉर्प की हिस्सेदारी 12.81 फीसदी है, जबकि जापान की सोम्पो जापान इंश्योरेंस की 34.61 फीसदी बहुलांश हिस्सेदारी है।  विदेशों में भी मौजूदगी बढ़ाने पर काम इंडियन बैंक की रणनीति सिर्फ नए कारोबार तक सीमित नहीं है. बैंक विदेशों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर काम कर रहा है. फिलहाल बैंक के पास सिंगापुर में फुल-सर्विस इंटरनेशनल ब्रांच है. श्रीलंका में कोलंबो और जाफना में उसकी शाखाएं हैं. इसके अलावा गुजरात के गांधीनगर स्थित GIFT City में बैंक की IFSC Banking Unit भी काम कर रही है।  बैंक का दुबई में खुलेगा नया ऑफिस विदेशी विस्तार में बैंक का अगला बड़ा फोकस दुबई है. बैंक वहां रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस खोलना चाहता है. इसका मकसद वेस्ट एशिया में मौजूद बड़े भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़े कारोबारी अवसरों का फायदा उठाना है. बिनोद कुमार ने बताया कि GIFT City की शाखा से बैंक को अच्छा कारोबार मिल रहा है. इसमें कई सिंडिकेटेड लोन में बैंक की भागीदारी भी शामिल है. उन्होंने कहा कि दुबई में बड़ी संख्या में अप्रवासी भारतीय (NRI) रहते हैं और वहां कामकाजी आबादी में भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 33 फीसदी है. दुबई में रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस खोलने के लिए बैंक के बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी है. अब इसके लिए जरूरी रेगुलेटरी मंजूरियों का इंतजार है।  मलेशिया और इंडोनेशिया पर भी नजर दुबई के अलावा इंडियन बैंक मलेशिया और इंडोनेशिया में भी संभावनाएं तलाश रहा है. बैंक इन दोनों बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रहा है. इससे साफ है कि बैंक की विदेश विस्तार रणनीति अब मौजूदा शाखाओं और इकाइयों तक सीमित नहीं रहने वाली है. बैंक नए बाजारों में कारोबार के अवसर तलाश रहा है। 

हरितालिका तीज-गणेश चतुर्थी पर सस्ता हुआ सोना-चांदी, दिल्ली से मुंबई तक चेक करें आज के रेट

 नई दिल्ली  आज गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) का पावन त्योहार है और इस मौके पर लोग जमकर सोने-चांदी की खरीदारी कर रहे हैं। त्योहारों के इस सीजन में अगर आप भी गहने खरीदने या निवेश का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए आज के ताजा रेट जानना बेहद जरूरी है। बता दें कि 14 सितंबर सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार यानी कमोडिटी मार्केट Comex पर सोने (Gold) और चांदी (Silver) दोनों की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। वहीं आज गणेश चतुर्थी होने के कारण MCX पर कारोबार नहीं होगा, लेकिन देश भर के सर्राफा बाजार जरूर खुले रहेंगे। चलिए दिल्ली से लेकर मुंबई और आपके शहर तक के भाव पर एक नजर डालते हैं। इंटरनेशनल मार्केट धड़ाम हुए दाम इंटरनेशनल मार्केट यानी Comex पर सोने और चांदी दोनों धातुओं के दाम में गिरावट आई है। Comex पर आंकड़ों की मानें तो खबर लिखे जाने तक सोना 0.79% तक गिरा (Gold Price on Comex) और कीमत 4374.00 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई हैं। वहीं चांदी (Silver Price on Comex) के दाम 0.98% तक गिर गए और ऐसे में कीमत 64.550 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती दिखी। दिल्ली में कितना है सोने का भाव? दिल्ली में आज 24 कैरेट सोने का भाव (Gold Price In delhi) करीब ₹15,277 प्रति ग्राम यानी लगभग ₹1,52,770 प्रति 10 ग्राम है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत करीब ₹140,039 प्रति 10 ग्राम के आसपास है। हालांकि ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST जुड़ने के बाद आपकी वास्तविक कीमत इससे ज्यादा हो सकती है। वहीं चांदी (Silver Price In delhi) ₹2,33,860 प्रति किलो पर है। मुंबई में कितना है रेट? मुंबई में 22 कैरेट सोने का भाव करीब (Gold Price Today) ₹14,287 प्रति ग्राम यानी लगभग ₹1,40,287 प्रति 10 ग्राम है। इस हिसाब से दिल्ली की तुलना में मुंबई में 22 कैरेट सोना करीब ₹150 प्रति 10 ग्राम सस्ता पड़ रहा है। 24 कैरेट सोने का राष्ट्रीय संकेतात्मक भाव करीब ₹1,52,040 प्रति 10 ग्राम है। वहीं मुंबई में चांदी (silver price today) का भाव ₹2,34,260 प्रति किलो है। चेन्नई और कोलकाता में क्या भाव? चेन्नई में 22 कैरेट सोने का रेट करीब ₹15,195 प्रति ग्राम यानी ₹1,51,950 प्रति 10 ग्राम के आसपास है। वहीं कोलकाता में यह करीब ₹15,199 प्रति ग्राम, यानी लगभग ₹1,51,990 प्रति 10 ग्राम है। इंदौर में सोने चांदी का रेट इंदौर में 24 कैरेट सोने की कीमत 15,462 रुपये प्रति ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत 14,174 रुपये प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोने की कीमत 11,598 रुपये प्रति ग्राम पर है। जबकि 1 किलो चांदी चेन्नई में 2,44,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है। लखनऊ में सोने चांदी का रेट लखनऊ में आज 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 15,457 रुपये प्रति ग्राम 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 14,169 रुपये प्रति ग्राम और 18 कैरेट गोल्ड 11,457 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है। तो वही 1 किलो चांदी लखनऊ में आज 2,44,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है। चांदी भी हुई इतनी सस्ती सोने के साथ चांदी के भाव में भी गिरावट देखने को मिली है. 14 सितंबर की सुबह चांदी घटकर करीब ₹2,44,900 प्रति किलोग्राम पर आ गई. पिछले हफ्ते चांदी की कीमत में करीब ₹5,000 की गिरावट दर्ज हुई थी. इंटरनेशनल मार्केट में भी चांदी की कीमत फिसली है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, स्पॉट सिल्वर करीब $64.54 प्रति औंस पर है. इसका असर घरेलू बाजार की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है।  सोने की कीमतों पर एनालिस्ट की राय बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, आगे सोने की कीमत पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, कच्चे तेल के भाव, डॉलर की चाल, महंगाई की उम्मीदों और ग्लोबल तनाव का असर रहेगा. LKP Securities के VP रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, अगर कच्चा तेल सस्ता होता है या अमेरिकी फेड का रुख नरम रहता है, तो सोने की कीमत में फिर तेजी आ सकती है. वहीं, तेल के दाम बढ़ने या फेड के सख्त रुख से सोने में एक बार फिर बिकवाली बढ़ सकती है।  शहर सोना/10 ग्राम (24K) सोना/10 ग्राम (22K) सोना/10 ग्राम (18K) चांदी प्रति किलो नई दिल्ली ₹152,360 ₹139,663 ₹114,270 233,740 मुंबई 152,620 ₹139,902 ₹114,465 ₹234,140 पटना 152,540 ₹139,828 ₹114,468 ₹233,190 जयपुर ₹153,340 ₹139,395 ₹114,505 ₹234,310 कानपुर ₹152,517 ₹140,181 ₹114,110 ₹233,920 लखनऊ ₹152,470 ₹139,181 ₹114,603 ₹233,150      

NSE IPO में निवेश का मौका, ₹1,785 प्राइस बैंड और ₹207 GMP ने बढ़ाई उम्मीद

नई दिल्ली नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO को लेकर निवेशकों के बीच लगातार उत्सुकता बनी हुई है। प्राइस बैंड सामने आने के बाद अब NSE IPO के ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) पर भी बाजार की नजर है। उपलब्ध ग्रे मार्केट आंकड़ों के मुताबिक NSE के शेयर करीब ₹207 के प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं। अगर ₹1,785 के अपर प्राइस बैंड में मौजूदा GMP को जोड़ा जाए, तो अनुमानित कीमत करीब ₹1,992 बैठती है। यानी ग्रे मार्केट संकेतों के आधार पर शेयर करीब 11.60 फीसदी प्रीमियम के साथ लिस्ट हो सकता है। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि GMP अनौपचारिक बाजार का संकेत है और यह NSE की वास्तविक लिस्टिंग कीमत की गारंटी नहीं देता। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। पिछले 10 सेशन के दौरान NSE IPO के GMP में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इस अवधि में प्रीमियम करीब ₹192 के निचले स्तर से बढ़कर ₹310 तक पहुंचा था। मौजूदा ₹207 का GMP इस ऊपरी स्तर से काफी नीचे है। इससे संकेत मिलता है कि ग्रे मार्केट में शुरुआती उत्साह कुछ कम हुआ है। ऐसे में निवेशकों के लिए सिर्फ GMP के आधार पर IPO में पैसा लगाना उचित नहीं होगा। कंपनी की वैल्यूएशन, कारोबार, बाजार की स्थिति और IPO की कीमत को भी ध्यान में रखना जरूरी है। NSE ने IPO के लिए ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। पात्र निवेशकों के लिए इश्यू 16 सितंबर 2026 से खुलेगा, जबकि अन्य निवेशकों के लिए बोली 17 सितंबर से शुरू होगी। IPO 21 सितंबर को बंद होगा। अपर प्राइस बैंड पर इश्यू का टोटल साइज करीब ₹22,561.57 करोड़ तक हो सकता है। यह IPO पूरी तरह OFS (Offer for Sale) है। इसका मतलब है कि NSE को इस इश्यू से नई पूंजी नहीं मिलेगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। निवेशक न्यूनतम 8 शेयरों के लिए आवेदन कर सकते हैं और इसके बाद 8 शेयरों के गुणक में बोली लगाई जा सकेगी। इस OFS में SBI (State Bank of India) सबसे बड़ा शेयर बेचने वाला निवेशक है, जो करीब 1.60 करोड़ शेयर ऑफर करेगा। कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (Canada Pension Plan Investment Board) और अरंडा इन्वेस्टमेंट्स (Aranda Investments) भी बड़ी हिस्सेदारी बेचने वालों में शामिल हैं। दूसरी ओर NSE में 10.72 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाली LIC इस OFS में अपने शेयर नहीं बेच रही है। RHP के मुताबिक NSE का कोई पहचान योग्य प्रमोटर नहीं है। कर्मचारियों के लिए आरक्षित हिस्से में आवेदन करने वाले पात्र कर्मचारियों को ₹170 प्रति शेयर की छूट दी जाएगी। NSE के शेयर BSE के मेन बोर्ड पर लिस्ट होंगे। ऐसे में IPO की कीमत और GMP दोनों ही निवेशकों के लिए अहम संकेत हैं, लेकिन अंतिम फैसला कंपनी की वित्तीय स्थिति और अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही लेना चाहिए।  

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! 8वें वेतन आयोग के सामने CGEGIS में 10 गुना बीमा कवर बढ़ाने का प्रस्ताव

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वां वेतन आयोग सिर्फ वेतन और भत्तों तक सीमित नहीं है। कर्मचारी संगठनों ने इसके सामने कई दूसरे मुद्दे भी रखे हैं, जिनमें CGEGIS (Central Government Employees Group Insurance Scheme) में बदलाव की मांग प्रमुख है। कर्मचारियों का कहना है कि CGEGIS के तहत मिलने वाला बीमा कवर मौजूदा समय की महंगाई और परिवार की बढ़ती जरूरतों के मुकाबले बेहद कम है। खास बात यह है कि इस योजना की बीमा राशि में लंबे समय से कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। कर्मचारी संगठनों के अनुसार, ग्रुप C कर्मचारियों के लिए करीब ₹1.50 लाख का बीमा कवर आज भी बना हुआ है, जिसे पुराने वेतन आयोग की सिफारिशों से जोड़ा जाता है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। CGEGIS को नए सिरे से तैयार करने की मांग 8वें वेतन आयोग के सामने दिए गए ज्ञापनों में कर्मचारी संगठनों ने CGEGIS को नए सिरे से तैयार करने की मांग की है। MSA (Ministerial Staff Association) ने बीमा कवर को मौजूदा दरों से कम से कम 10 गुना बढ़ाने का सुझाव दिया है। संगठन का तर्क है कि आज के समय में किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर परिवार को मिलने वाली यह राशि पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा नहीं देती। ग्रुप A के लिए ₹3 करोड़ तक का बीमा FNPO (Federation of National Postal Organisations) ने भी योजना में बड़े बदलाव की मांग करते हुए ग्रुप C के लिए ₹1 करोड़, ग्रुप B के लिए ₹1.50 करोड़ और ग्रुप A के लिए ₹3 करोड़ तक का बीमा कवर सुझाया है। इसके लिए अलग-अलग मासिक योगदान का प्रस्ताव भी रखा गया है। पहले के वेतन आयोगों में चर्चा पर खत्म हुई बात कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पहले के वेतन आयोगों में भी CGEGIS के योगदान और बीमा राशि को बढ़ाने की जरूरत पर चर्चा हुई थी, लेकिन योजना में अपेक्षित बदलाव नहीं हो सका। FNPO ने सुझाव दिया है कि पहले 7वें वेतन आयोग से जुड़े प्रस्तावित बीमा स्तरों को लागू किया जाए और उसके बाद महंगाई तथा वेतन में बदलाव के आधार पर इसे समय-समय पर बढ़ाया जाए। संगठन ने महंगाई भत्ते के एक निश्चित स्तर तक पहुंचने पर बीमा कवर में स्वतः बढ़ोतरी का सुझाव भी दिया है असमय मृत्यु की स्थिति में आर्थिक सहायता CGEGIS में बीमा के साथ बचत का हिस्सा भी शामिल होता है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में बीमा सुरक्षा को ज्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि कर्मचारी की असमय मृत्यु की स्थिति में उसके परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता मिल सके। इसी वजह से बीमा और बचत के अनुपात में बदलाव की मांग भी उठी है। हालांकि, इन सभी मांगों पर अंतिम फैसला 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और उसके बाद केंद्र सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा। फिलहाल, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर इस बात पर है कि 8वां वेतन आयोग CGEGIS को लेकर क्या सिफारिश करता है और क्या दशकों से चली आ रही इस व्यवस्था में अब बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।

भारत में धमाका करने की तैयारी में VinFast, 10 लाख से कम कीमत में आएंगी दो नई कारें

 नई दिल्ली विनफास्ट (VinFast) भारतीय बाजार में अपनी स्ट्रैटजी को बदलती दिख रही है. रिपोर्ट्स की मानें, तो वियतनाम की इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी दो नई कारों को तैयार कर रही है. इन दोनों कारों को भारतीय बाजार के लिए खास तौर पर तैयार किया जा रहा है, जिसकी कीमत काफी कंपटीटिव होने वाली है।  ब्रांड इन दोनों में से एक कार को 12000 डॉलर (लगभग 10 लाख रुपये) से कम कीमत पर लॉन्च कर सकता है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की दो अपकमिंग ईवी का कोडनेम वीएफ एक्स और वीएफ वाई है. इनकी प्लानिंग अभी शुरुआती चरण में है।  क्या है कंपनी का प्लान?  विनफास्ट ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. इन मॉडल्स को लेकर कंपनी अपना प्लान प्रोडक्शन तक पहुंचने पर बदल सकती है. ये कदम कंपनी की पहले की प्लानिंग से अलग है. पहले कंपनी भारत में वीएफ 3, वीएफ 6 और वीएफ 7 मॉडल का लोकली प्रोडक्शन करने वाली थी।   अब कंपनी ने इंटरनेशन मॉडल्स के भारत में प्रोडक्शन प्लान्स को कैंसिल कर दिया है. भारत में ये कंपनी फिलहाल वीएफ 6 और वीएफ 7 को बेचती है. ये दोनों ही कारें सीकेडी (CKF) रूट के जरिए भारत में आती है. इनकी असेंबली तमिलनाडु प्लांट में होती है।  नए मॉडल्स को कंपनी लोकली भारत की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार करेगी. इन्हें तैयार करते हुए कीतमों का भी ध्यान रखा जाएगा. कंपनी ने इसके लिए भारतीय कंपोनेंट सप्लायर्स से बातचीत भी शुरू कर दी है. इसका टार्गेट भारत में इस कार को आसानी से बनाना है. इसकी मदद से कंपनी हायर लोकलाइजेशन को बढ़ा पाएगी और मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट को कंट्रोल में भी रख पाएगी।    कितनी हो सकती है कीमत? अपकमिंग मॉडल्स में से वीएफ एक्स काफी महत्वपूर्ण है. रिपोर्ट्स की मानें, तो विनफास्ट (VinFast) इस कार की कीमत को 12 हजार डॉलर से कम रखना चाहती है. यानी ये भारतीय बाजार में 10 हजार रुपये से कम बजट में आएगी. साइज के मामले में ये कार वीएफ 3 और वीएफ 6 के बीच आएगी।  ये एक कॉम्पैक्ट कार होगी जिसमें वीएफ 3 के मुकाबले ज्यादा इंटीरियर स्पेस मिलेगा. अगर कंपनी ने 10 लाख रुपये से कम के बजट में इस कार को लॉन्च किया, तो इसका सीधा मुकाबला टाटा मोटर्स से होगा. टाटा मोटर्स इस वक्त भारतीय बाजार में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक कारें बेच रही है. खासकर 10 लाख रुपये के बजट में टाटा का दबदबा है। 

Thar लवर्स के लिए बड़ी खबर! Mahindra ला रही है अपडेटेड SUV, लॉन्च टाइमलाइन आई सामने

 नई दिल्ली महिंद्रा थार (Mahindra Thar) को कंपनी ने अक्टूबर 2025 में पहला अपडेट दिया था. पहले अपडेट के लगभग एक साल बाद कंपनी इसे दोबारा अपडेट कर सकती है. रिपोर्ट्स की मानें, तो महिंद्रा अपनी ऑफ-रोडर को इस महीने यानी सितंबर में ही अपडेट कर सकती है. हालांकि, महिंद्रा ने आधिकारिक रूप से इसकी जानकारी नहीं दी है।  इस एसयूवी का अपडेट सितंबर के अंत तक लॉन्च हो सकता है. महिंद्रा इस कार के अपडेट में डिजाइन में कुछ बदलाव कर सकती है, जिससे इसे मौजूदा मॉडल से थोड़ा अलग किया जा सके. फिलहाल कार का लुक वही है जो 2020 में लॉन्च के वक्त था।  क्या होगा नई महिंद्रा थार में खास?  अपडेटेड थार को कंपनी ज्यादा अपस्केल और ट्रेंडी लुक दे सकती है, जिससे ये रिफ्रेश लगेगी. एसयूवी में रिवाइज्ड ग्रिल, रिडिजाइन बंपर्स, बदले हुए हेडलैम्प्स और फ्रेश एलॉय व्हील डिजाइन मिलेगा. हाल में ही एसयूवी को टेस्ट करते हुए देखा गया है, जिसमें पांच स्लॉट वाली ग्रिल थी। . इसके अलावा अपडेटेड थार में एलईडी हेडलैम्प्स और नया पांच डबल स्पोक एलॉय व्हील मिलेगा. कंपनी इस कार के इंटीरियर को भी अपडेट कर सकती है, जिसमें मल्टीपल स्टाइलिंग और फंक्शनल बदलाव किए जा सकते हैं. महिंद्रा इस कार में नई अपहोल्स्ट्री दे सकती है।  कार में नए टेक फीचर्स, कम्फर्ट और कन्वीनियंस फीचर्स मिलेंगे. इसमें 10.25 इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, वेंटिलेटेड सीट्स और वायरलेस स्मार्टफोन चार्जर मिलेगा. इसके अलावा कार में पैसिव कीलेस एंट्री भी दी जा सकती है, जिससे कार में घुसना और निकलना आसान होगा।  इंजन में नहीं होगा कोई बदलाव नई थार के इंजन में बदलाव की उम्मीद नहीं है. इसमें वहीं तीन इंजन ऑप्शन मिलेंगे, जो मौजूदा थार में आते हैं. एसयूवी में 1.5 लीटर का डीजल, 2.2 लीटर का डीजल और 2.0 लीटर का पेट्रोल इंजन मिलेगा. कंज्यूमर्स को 6 स्पीड मैन्युअल और 6 स्पीड ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन का विकल्प मिलेगा।  कार ऑल व्हील ड्राइव के साथ आएगी. थार का 1.5 लीटर डीजल इंजन 117 एचपी की पावर और 300 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है. वहीं 2.2 लीटर के डीजल इंजन के साथ 130 एचपी की पावर और 300 एनएम का टॉर्क मिलता है. जबकि 2.0 लीटर के पेट्रोल इंजन के साथ 150 एचपी की पावर और 300 एनएम का टॉर्क मिलता है। 

शेयर बाजार में भारी गिरावट, Sensex 552 अंक फिसला; Nifty 23,300 के नीचे पहुंचा

मुंबई  शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई। वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और ऊर्जा कीमतों में तेजी का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा। सेंसेक्स 552.02 अंक टूटकर 74,350.57 पर और निफ्टी 192.15 अंक गिरकर 23,285.65 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। एशियाई बाजारों में भारी गिरावट एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख शेयर बाजार शुक्रवार को तेज गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। इसका असर अमेरिकी बाजारों में गुरुवार को आई कमजोरी के बाद देखने को मिला। निवेशक महंगे कच्चे तेल और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के बीच महंगाई और ब्याज दरों के आउटलुक को लेकर सतर्क हैं। जापान का Nikkei 225 करीब 3 फीसदी और दक्षिण कोरिया का Kospi लगभग 2.6 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा था। अमेरिकी बाजार भी दबाव में गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में भी गिरावट रही। Dow Jones Industrial Average 0.6 फीसदी, S&P 500 करीब 0.58 फीसदी और Nasdaq Composite 0.65 फीसदी गिरकर बंद हुआ। इस बीच, अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड एशियाई कारोबार के दौरान करीब 5 फीसदी के ऊंचे स्तर पर बनी रही। गुरुवार को यह 4.95 फीसदी पर बंद हुई थी।