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क्या बढ़ने वाले हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? LPG के बाद सरकार का नया बयान

नई दिल्ली हाल ही में LPG गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। गैस की इन कीमतों में वृद्धि के बाद अब ऐसा कहा जा रहा था कि पेट्रोल और डीज़ल के दाम भी बढ़ सकते हैं। आपको बता दें कि सरकारी गलियारों से ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी अभी नहीं होगी।   पेट्रोल-डीजल के दाम पर सरकार का रुख पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहेंगी। सूत्रों का कहना है कि Strait of Hormuz से कार्गो जहाजों की आवाजाही जल्द ही सुचारू रूप से शुरू होने की उम्मीद है, जिससे आपूर्ति बाधित नहीं होगी। ऐसे में कीमतों में इजाफे की संभावना न के बराबर है। LPG की कीमतों में क्यों हुआ इजाफा? लगभग 11 महीने के अंतराल के बाद सरकार ने रसोई गैस के दामों में बदलाव किया है। घरेलू उपयोग वाले 14.2 किलो के सिलेंडर पर 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, वहीं 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये का इजाफा हुआ है। आंकड़ों की मानें तो पिछले 12 वर्षों में एलपीजी के दाम कुल 110 रुपये बढ़े हैं। सरकार ने अब तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपना पूरा ध्यान एलपीजी के उत्पादन को अधिकतम करने पर लगाएं ताकि भविष्य में कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके। भारत के पास सुरक्षित भंडार: हरदीप सिंह पुरी केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश को विश्वास किया है कि ईंधन की कमी को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ (हवाई ईंधन) का भरपूर भंडार है। देश के पास अगले 50 से 60 दिनों के लिए पर्याप्त बैकअप मौजूद है। सप्लाई चेन और रसद के मोर्चे पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की स्थिति पश्चिम एशिया के संघर्ष ने वैश्विक बाजार को हिलाकर रख दिया है। पिछले एक सप्ताह में ही कच्चे तेल की कीमतों में 39% का जबरदस्त उछाल आया है। शुक्रवार को कीमतें अपने एक साल के उच्चतम स्तर (52-week high) पर पहुंच गईं, जिसमें एक ही दिन में 3.50% की तेजी देखी गई। इसके बावजूद, भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता के बल पर घरेलू कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रहा है।

बढ़ती दौलत की रफ्तार: भारत में 308 अरबपति, वैश्विक रैंकिंग में तीसरा स्थान

नई दिल्ली भारत में अरबपतियों की संख्या बढ़कर 308 हो गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 24 ज्यादा है। यह जानकारी हुरुन रिसर्च इंस्टीट्यूट की 'हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट 2026' में सामने आई है। इस बढ़ोतरी के साथ भारत अरबपतियों की संख्या के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। इस लिस्ट में अमेरिका और चीन क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अरबपतियों की कुल संपत्ति में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह बढ़कर 112.6 लाख करोड़ रुपए हो गई है। इनमें से 199 अरबपतियों की संपत्ति में वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि 109 अरबपतियों की संपत्ति में गिरावट आई या उनकी संपत्ति स्थिर रही। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अरबपतियों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 7 प्रतिशत है। हुरुन रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अरबपतियों की संख्या अब पारंपरिक उद्योगों से आगे बढ़कर कई नए क्षेत्रों में भी बढ़ रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि देश में आर्थिक विकास कई अलग-अलग सेक्टरों में हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, हेल्थकेयर सेक्टर से सबसे ज्यादा 53 नए अरबपति सामने आए। इसके बाद इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स सेक्टर से 36 और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर से 31 नए अरबपति जुड़े। हालांकि नए अरबपतियों की संख्या कम होने के बावजूद ऊर्जा सेक्टर के पास सबसे ज्यादा संपत्ति है। इस सेक्टर के सिर्फ 8 अरबपतियों के पास कुल 18.3 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति है, जो भारत के कुल अरबपतियों की संपत्ति का लगभग 16 प्रतिशत है। भारत में मुंबई अब भी अरबपतियों का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है, जहां 95 अरबपति रहते हैं। हालांकि एशिया में अरबपतियों की राजधानी का दर्जा अब चीन के शेन्जेन को मिल गया है, जहां 133 अरबपति हैं। मुंबई में इस साल 15 नए अरबपति जुड़े, जो न्यूयॉर्क (14) और लंदन (9) से भी ज्यादा हैं। वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क अरबपतियों के शहरों की सूची में पहले स्थान पर है, जहां 146 अरबपति रहते हैं। इसके बाद शंघाई (120), बीजिंग (107) और लंदन (102) का स्थान है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारतीय अरबपतियों की औसत उम्र 67 वर्ष है, जो वैश्विक औसत 65 वर्ष से थोड़ी ज्यादा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 23 महिला अरबपतियों के पास कुल मिलाकर 9.8 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति है।

तेल सप्लाई बहाल: होर्मुज से पहली खेप निकली, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका टली

नई दिल्ली शनिवार को सरकारी सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। सूत्रों ने बताया कि भारत की ऊर्जा भंडार स्थिति लगातार बेहतर हो रही है और हालात पहले की तुलना में ज्यादा स्थिर हो रहे हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, ऊर्जा भंडार की स्थिति में सुधार होने से सरकार को ईंधन आपूर्ति को संभालने में ज्यादा भरोसा मिला है। उन्होंने बताया कि भारत ने कच्चे तेल के आयात को विविध बनाने के लिए कदम उठाए हैं ताकि संवेदनशील समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो सके। सूत्रों ने कहा कि पहले भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर के स्रोतों से आता था, लेकिन अब यह हिस्सा बढ़कर करीब 70 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से पहली तेल खेप रवाना हो चुकी है, जिससे संकेत मिलता है कि तेल की आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। सरकार की यह सफाई उस समय आई जब विपक्षी राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया था कि ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकारी सूत्रों ने कहा कि यह पूरी तरह बेबुनियाद आरोप हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले दिया गया आश्वासन सिर्फ पेट्रोल और डीजल की कीमतों से संबंधित था, यह एलपीजी के बारे में नहीं था। सूत्रों ने फिर से दोहराया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। उन्होंने कहा, "यह बात सिर्फ पेट्रोल और डीजल के लिए कही गई थी। इसका संबंध एलपीजी से नहीं था। आज हम फिर से भरोसा दिलाते हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी।" रसोई गैस के मुद्दे पर सूत्रों ने कहा कि सरकार फिलहाल एलपीजी उत्पादन को प्राथमिकता देने की दिशा में काम कर रही है, ताकि इसकी पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 12 वर्षों में एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगभग 110 रुपए बढ़ी है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ऊर्जा क्षेत्र की स्थिति पर करीबी नजर रख रही है और ईंधन की आपूर्ति और कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा रही है।

मिडिल ईस्ट तनाव का असर: युद्ध लंबा खिंचा तो महंगाई बढ़ने के संकेत, भारत पर सीमित प्रभाव— SBI

नई दिल्ली. खाड़ी क्षेत्र में चल रहा संघर्ष, जिसमें इजरायल, ईरान और अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकाने शामिल हैं, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है। शनिवार को जारी एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह संघर्ष लंबा चलता है तो इससे वैश्विक मंदी का दबाव, महंगाई में वृद्धि और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के घरेलू वित्तीय बाजारों को फिलहाल भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कदमों से सपोर्ट मिला है। आरबीआई ने सरकारी बॉन्ड (जी-सेक) यील्ड को संतुलित रखने और रुपए की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो इससे भारत के मैक्रो-इकोनॉमिक संकेतकों पर भी दबाव पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई ने स्पॉट मार्केट में हस्तक्षेप करके रुपए की अधिक अस्थिरता को कम किया है और इसे 92 के स्तर से नीचे रखने में सफलता हासिल की है। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा अनिश्चितता के बीच यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ा है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का व्यापार इसी मार्ग से होता है, इसलिए यहां बाधा आने से तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमत 91.84 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई 89.62 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल 10 डॉलर की बढ़ोतरी होती है, तो वित्त वर्ष 2027 में चालू खाते का घाटा (सीएडी) करीब 36 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती है, तो भारत की जीडीपी वृद्धि दर घटकर लगभग 6 प्रतिशत तक आ सकती है। एसबीआई रिसर्च ने ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी इस संघर्ष का विश्लेषण किया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह युद्ध कोंड्राटिएफ वेव के अंतिम चरण के दौरान हो रहा है, जो लंबे समय तक चलने वाले आर्थिक चक्र का सिद्धांत है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संरचनात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस संघर्ष में कुछ देशों को फायदा भी हो सकता है। उदाहरण के लिए, अमेरिका को तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से लाभ मिल सकता है। साथ ही, यूरोप की रूसी ऊर्जा पर निर्भरता कम होने से अमेरिका के लिए नए अवसर बन सकते हैं। वहीं, दुनिया के अधिकांश अन्य क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच कई केंद्रीय बैंक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में फिलहाल लगभग 17.6 प्रतिशत हिस्सा सोने का है। रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष का असर भारत पर कई तरीकों से पड़ सकता है। इसमें खाड़ी देशों से आने वाली रेमिटेंस, कच्चे तेल का आयात और पश्चिम एशियाई देशों के साथ व्यापार शामिल हैं। हालांकि रूसी कच्चे तेल की खरीद और फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स जैसे कदमों के कारण आपूर्ति से जुड़े जोखिम कुछ हद तक कम हो सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय बैंक और निजी कंपनियां भी उन क्षेत्रों से जुड़ी हैं जो इस संघर्ष से प्रभावित हो सकते हैं। रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता तेल की कीमतों, महंगाई की उम्मीदों और निवेशकों के भरोसे को आने वाले समय में प्रभावित करती रहेगी। इसलिए नीति निर्माताओं और निवेशकों को इस स्थिति पर करीबी नजर बनाए रखने की जरूरत है।

दुबई में सड़ रहे 1000 कंटेनर, केले, अंगूर, अनार और सब्जियों का भारी नुकसान भारत को

 नई दिल्‍ली मिडिल ईस्‍ट में संघर्ष के कारण महाराष्‍ट्र के किसानों और निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. एग्री प्रोडक्‍ट्स से जुड़े 800 से 1000 कंटेनर दुबई के जेबल अली बंदरगाह पर फंसे हुए हैं. 28 फरवरी से ही इनका कामकाज ठप है. कंटेनर अलग-अलग देशों या क्षेत्रों में एक्‍सपोर्ट नहीं हो पा रहे हैं, जिस कारण लाखों-करोड़ों के सामान खराब हो रहे हैं। दुबई का जेबेल अली पोर्ट मिडिल ईस्‍ट का एक प्रमुख बंदरगाह, जो खाड़ी क्षेत्र में कृषि उत्पादों के वितरण का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. हालांकि, संघर्ष के कारण कामकाज पूरी तरह से ठप हो चुका है. इस कारण दुबई पहुंच चुके या भारत से आ रहे कई शिपमेंट बंदरगाह पर ही फंसे हुए हैं। निर्यातकों को भारी नुकसान फंसे हुए कंटेनरों में मुख्य रूप से केले, अंगूर, अनार, तरबूज, पत्तेदार सब्जियां और प्याज जैसे कम समय तक टिकने वाले कृषि उत्‍पाद हैं. यह महाराष्ट्र से निर्यात होने वाले प्रमुख उत्पाद भी हैं. कंटेनर फंस जाने के कारण ये खराब हो सकते हैं, जिसका मतलब है कि निर्यातकों को भारी नुकसान होगा. कंटेनर ऐसे समय में भी फंसे हैं जब खाड़ी देशों में रमजान के दौरान इन फलों, विशेष रूप से अंगूर और अनार की मांग चरम पर होती है. इसलिए कारोबार कम होने की भी आशंका है। घाटे में बेचना पड़ सकता है अंगूर वॉर के कारण कंटेनर तो फंसे ही हैं, जिससे मांग पूरी नहीं हो पा रही है. दूसरी ओर, खाड़ी देशों में फलों की मांग में परंपरागत रूप से वृद्धि देखी जाती है. वहीं किसान इस मौसमी बदलाव के अनुसार अपनी फसल की कटाई की योजना बनाते हैं. हालांकि, इस वर्ष संघर्ष के कारण निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है. बंदरगाहों पर मौजूद लगभग 5,000 से 6,000 टन अंगूर प्रभावित होने की आशंका है और खेतों में मौजूद निर्यात योग्य गुणवत्ता वाले 10,000 टन अंगूरों को अब स्थानीय स्तर पर घाटे में बेचना पड़ सकता है। बंदरगाह पर भीड़भाड़ के कारण और देरी  मुंबई के जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (JNPT) पर दुबई जाने वाले अंगूर के लगभग 80 कंटेनर अभी तक अनलोड नहीं किए गए हैं. नासिक से निर्यात के लिए आ रहे 200 से अधिक कंटेनर बंदरगाह के बाहर फंसे हुए हैं, जिससे भारी जाम लग गया है. स्थिति गंभीर है और निर्यातकों का कहना है कि जब तक जहाजरानी सर्विस फिर से शुरू नहीं हो जातीं, तब तक यह समस्या बनी रहेगी. इंडियन ग्रेप एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के निदेशक मधुकर क्षीरसागर के अनुसार, फंसे हुए हर कंटेनर से भारी नुकसान होता है, जिससे लाखों रुपये का वित्तीय नुकसान होता है। किसानों ने सरकार से अपील की किसान संगठन तत्काल सरकारी सहायता की मांग कर रहे हैं. महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने सरकार से प्रति क्विंटल 1,500 रुपये की सब्सिडी देने के साथ-साथ फंसे हुए कंटेनरों के लिए बंदरगाह शुल्क और विलंब शुल्क माफ करने का अनुरोध किया है. इसके अलावा, निर्यातकों की सहायता के लिए एक अस्थायी खरीद योजना शुरू करने की भी मांग की गई है, ताकि माल की निकासी होने तक उन्हें सहायता मिल सके। निर्यातकों ने खेप वापस मंगाई कुछ निर्यातकों ने पहले ही अपने माल को वापस मंगाना शुरू कर दिया है. प्रमुख निर्यातक प्रकाश गायकवाड़ ने बताया कि लंबे समय तक देरी के कारण उन्हें जेएनपीटी से केले और प्याज के कंटेनर वापस मंगाने पड़े, क्योंकि देरी से फसल खराब हो रही थी. नासिक सीमा शुल्क को भेजे गए प्याज के एक शिपमेंट को मंजूरी मिलने में चार दिन लग गए, तब तक पूरा माल खराब हो चुका था। कृषि आयात और निर्यात पर व्यापक प्रभाव इस रुकावट का असर खाड़ी देशों और ईरान से आयात पर भी पड़ा है. सेब, कीवी और खजूर जैसे उत्पादों से भरे लगभग 600-700 कंटेनर ईरानी बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं. फल व्यापारी सुयोग ज़ेदे के अनुसार, इन कंटेनरों का मूल्य काफी अधिक है, जिनमें कीवी के कंटेनरों का मूल्य 30-32 लाख रुपये और खजूर के कंटेनरों का मूल्य 45 लाख रुपये है। इसके अलावा, भारत के चीनी निर्यात अनिश्चितताओं का सामना कर रहे हैं. केंद्र ने इस सीजन में 20 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी थी, लेकिन निर्यातकों का अनुमान है कि मौजूदा व्यवधानों के कारण केवल लगभग 5 लाख टन चीनी ही बाजार तक पहुंच पाएगी।

रॉयल एनफील्ड गुरिल्ला 450 का जल्द होगा लॉन्च, 450cc सेगमेंट में कंपनी की बड़ी रणनीति

मुंबई  भारतीय बाइक बाजार में अपनी मजबूत पहचान रखने वाली रॉयल एनफील्ड जल्द ही अपने पोर्टफोलियो को और मजबूत करने जा रही है। खबर है कि कंपनी अपनी नई और दमदार बाइक गुरिल्ला 450 को मार्च 2026 के अंत तक लॉन्च कर सकती है। यह बाइक कंपनी की 450cc लाइनअप का सबसे किफायती मॉडल मानी जा रही है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि यह मॉडल कंपनी की बिक्री को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। नई बाइक को लेकर बाइक प्रेमियों में पहले से ही काफी उत्सुकता देखी जा रही है। 450cc सेगमेंट में पकड़ मजबूत करने की तैयारी रॉयल एनफील्ड लंबे समय से 350cc सेगमेंट में मजबूत पकड़ बनाए हुए है। हालांकि 450cc श्रेणी में कंपनी को अभी उतनी सफलता नहीं मिली, जितनी उम्मीद की जा रही थी। यहां तक कि कंपनी की 650cc सीरीज की कुछ बाइक्स भी बिक्री के मामले में बेहतर प्रदर्शन करती नजर आई हैं। ऐसे में कंपनी अब गुरिल्ला 450 को अपडेटेड फीचर्स और बेहतर राइडिंग अनुभव के साथ पेश करने की तैयारी में है, ताकि इस सेगमेंट में अपनी स्थिति मजबूत की जा सके। सस्पेंशन और राइड क्वालिटी में सुधार की संभावना हालांकि कंपनी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर नए अपडेट्स का खुलासा नहीं किया है, लेकिन ऑटो इंडस्ट्री में चर्चा है कि नए मॉडल में सस्पेंशन सेटअप को बेहतर बनाया जा सकता है। मौजूदा मॉडल में खराब सड़कों पर राइड थोड़ी सख्त महसूस होने की शिकायत कुछ राइडर्स ने की थी। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि नए वर्जन में बेहतर रियर सस्पेंशन दिया जा सकता है, जिससे राइडिंग अनुभव और आरामदायक हो सके। फ्रेश डिजाइन और नए कलर ऑप्शन नई गुरिल्ला 450 के साथ कुछ नए कलर ऑप्शन भी देखने को मिल सकते हैं। इसके अलावा अगर कंपनी इसमें अपसाइड डाउन (USD) फ्रंट फोर्क्स जैसे फीचर्स देती है, तो बाइक की हैंडलिंग और लुक दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे बाइक का रोडस्टर कैरेक्टर और ज्यादा मजबूत हो सकता है, खासकर लंबी दूरी की राइड के दौरान। दमदार इंजन और परफॉर्मेंस इंजन की बात करें तो 2026 गुरिल्ला 450 में कंपनी का भरोसेमंद Sherpa 450 इंजन ही मिलने की उम्मीद है। यह 452cc का सिंगल सिलेंडर, DOHC, 4-वॉल्व लिक्विड कूल्ड इंजन होगा, जो करीब 40 bhp की पावर और लगभग 40 Nm का टॉर्क जनरेट कर सकता है। इसके साथ 6-स्पीड गियरबॉक्स, स्लिपर क्लच और इलेक्ट्रॉनिक थ्रॉटल जैसे फीचर्स भी दिए जा सकते हैं। यह इंजन पहले से ही स्मूद परफॉर्मेंस और दमदार राइड के लिए जाना जाता है। क्या खरीदने से पहले इंतजार करना चाहिए? अगर आप रॉयल एनफील्ड गुरिल्ला 450 खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मार्च के अंत तक इंतजार करना समझदारी भरा फैसला हो सकता है। संभावना है कि नया मॉडल बेहतर फीचर्स और अपडेटेड सेटअप के साथ आए, जिससे राइडिंग अनुभव और भी बेहतर हो जाए। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नया मॉडल 450cc सेगमेंट में कंपनी के लिए कितना बड़ा बदलाव साबित होता है।

युद्ध की आग से हिल रहा दुबई का रियल एस्टेट मार्केट, निवेशकों को चिंता

 दुबई सपनों की नगरी दुबई, जहां आसमान छूती कांच की इमारतें और समंदर की लहरों पर बसते आलीशान विला हर किसी को अपनी ओर खींचते हैं. आम इंसान के लिए यह एक ख्वाब है, तो रईसों और बॉलीवुड सितारों के लिए दूसरा घर, लेकिन युद्ध के साए में इसकी चमक फीकी पड़ती दिख रही है।   भीषण संघर्ष और मिसाइल हमलों ने यहां की रौनक को फीका करना शुरू कर दिया है. सवाल सिर्फ पर्यटन का नहीं, बल्कि उन अरबों रुपयों का है जो इस शहर की रियल एस्टेट में लगे हैं. क्या युद्ध की ये चिंगारी दुबई के चमकते भविष्य को झुलसा देगी. दुबई की उस 'सेफ हेवन' वाली छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस शहर को निवेश का सबसे सुरक्षित माना जाता था, क्या अब वहां के करोड़ों के निवेश पर युद्ध का साया मंडरा रहा है।  दुबई का रियल एस्टेट मार्केट पिछले कुछ समय से अपने सबसे बेहतरीन दौर से गुजर रहा था. साल 2025 इसके लिए ऐतिहासिक रहा, जहां 187 मिलियन डॉलर की रिकॉर्ड तोड़ प्रॉपर्टी सेल्स दर्ज की गई. यही नहीं दुनिया भर के हजारों नए करोड़पति अपनी संपत्ति और परिवार के साथ यूएई में शिफ्ट हुए. इसका मुख्य कारण यहां का वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा थी. दुबई की पूरी अर्थव्यवस्था उसकी सुरक्षा और स्थिरता पर टिकी है. लेकिन हाल ही में हुए ईरानी मिसाइल हमलों और क्षेत्र में बढ़ते युद्ध के माहौल ने इस 'सुरक्षित ठिकाने' वाली छवि को हिलाकर रख दिया है. निवेशकों के मन में अब यह डर बैठने लगा है कि क्या युद्ध की स्थिति में उनकी की संपत्ति सुरक्षित रहेगी।  दुबई का रियल एस्टेट मार्केट खतरे में भारतीय निवेशकों का बड़ा दांव दुबई के रियल एस्टेट की चमक में भारतीयों का बहुत बड़ा योगदान है. कुल ट्रांजैक्शंस का लगभग 25% से 30% हिस्सा भारतीय नागरिकों या एनआरआई (NRIs) का होता है. भारत के कई दिग्गज डेवलपर्स भी वहां बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट्स लॉन्च कर रहे हैं. युद्ध के इस माहौल ने न केवल व्यक्तिगत निवेशकों, बल्कि इन बड़े भारतीय कॉर्पोरेट्स की चिंता भी बढ़ा दी है।  मार्केट में एक और बड़ी चिंता 'सप्लाई और डिमांड' के संतुलन को लेकर है. साल 2026 तक दुबई में लगभग 1.2 लाख नई रेजिडेंशियल यूनिट्स बाजार में आने वाली हैं. यह संख्या सामान्य वार्षिक आपूर्ति से दोगुनी है।  क्या पीछे हट रहे हैं विदेश खरीदार? अगर युद्ध के तनाव के कारण विदेशी खरीदार पीछे हटते हैं, तो मार्केट में घरों की बाढ़ आ जाएगी. विशेषज्ञों का अनुमान है कि मांग में कमी आने पर प्रॉपर्टी की कीमतें 3% से 7% तक गिर सकती हैं. तनाव का असर जमीन पर दिखने लगा है. इजराइल की स्ट्राइक के बाद से दुबई में प्रॉपर्टी देखने आने वालों की संख्या में भारी कमी आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुर्ज खलीफा जैसे प्रीमियम इलाकों में भी कुछ बड़े निवेशकों ने ऐन वक्त पर डील कैंसिल कर दी है और अपने हाथ खींच लिए हैं।  अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या डरा हुआ एचएनआई (HNI) निवेशक अपना पैसा दुबई से निकालकर भारत के उभरते लग्जरी रियल एस्टेट मार्केट की ओर ले जाएगा? या फिर यह पूंजी सिंगापुर और लंदन जैसे पारंपरिक सुरक्षित बाजारों की ओर रुख करेगी. आने वाले कुछ महीने दुबई के भविष्य की दिशा तय करेंगे।  रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि जिन खरीदारों ने पहले ही दुबई में अपने घर बुक कर लिए हैं, वे अब सौदे की शर्तों पर फिर से बातचीत कर सकते हैं या भारी डिस्काउंट की मांग कर सकते हैं. वहीं, नए खरीदार फिलहाल 'देखो और इंतजार करो' (wait-and-watch) की नीति अपना रहे हैं, ताकि स्थिति पूरी तरह स्थिर होने के बाद ही कोई कदम उठा सकें. जानकारों का यह भी कहना है कि कुछ निवेशक अपना पैसा अब दुबई से हटाकर भारत के प्रीमियम रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स की ओर मोड़ सकते हैं।  विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह संघर्ष लंबा खींचता है, तो मार्केट में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम, नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग और निवेशकों के भरोसे में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है. आने वाले महीनों में मध्यम वर्ग के खरीदार ज्यादा आक्रामक तरीके से मोलभाव कर सकते हैं, जबकि डेवलपर्स नए प्रोजेक्ट्स को लॉन्च करने के फैसले को फिलहाल टाल सकते हैं. बड़े निवेशक (HNIs) भी अब बड़े निवेश करने से पहले समय और हालात का दोबारा आंकलन कर रहे हैं और नई प्रतिबद्धताओं को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं. अगर अनिश्चितता का यह दौर जारी रहा, तो कम से कम शॉर्ट-टर्म के लिए दुबई से भारत की ओर पूंजी का एक बड़ा पलायन देखने को मिल सकता है।   

बजट सत्र में राज्यपाल का संबोधन: गुलाब चंद कटारिया ने सरकार की उपलब्धियां बताईं, स्पीकर को भी दी नसीहत

चंडीगढ़ गवर्नर के अभिभाषण के दाैरान कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल के बजट अभिभाषण के दौरान नारेबाजी की और सदन से वाकआउट कर दिया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पंजाब में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब है। वहीं गवर्नर के अभिभाषण के दाैरान कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल के बजट अभिभाषण के दौरान नारेबाजी की और सदन से वाकआउट कर दिया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पंजाब में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब है। आये दिन हाल बिगड़ते जा रहे हैं और उस पर चर्चा करवाई जानी चाहिए। सभी कांग्रेस विधायकों ने जमकर नारेबाजी की। हालांकि राज्यपाल ने कहा कि आपको  अपनी बात रखने का उचित समय मिलेगा, लेकिन बावजूद इसके कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी जारी रखी। राज्यपाल ने बजट अभिभाषण खत्म होने के बाद विधानसभा स्पीकर को सलाह दी कि सत्र की शुरुआत या अंत में राष्ट्रगीत वंदे मातरम का उच्चारण भी किया जाना चाहिए। स्पीकर ने इस पर भरोसा दिलाया। सत्र से पहले सीएम भगवंत मान ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-2027 के बजट अनुमान को पंजाब मंत्रिमंडल ने पारित कर दिया है। यह बजट रविवार को पेश किया जाएगा। इस दिन को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह बजट प्रत्येक पंजाबी की प्रगति और समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देगा और पंजाब को एक बार फिर रंगला पंजाब बनाने में सहायक होगा। विधानसभा में 7 मार्च को शनिवार के दिन अवकाश रहेगा। 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आप सरकार अपना पांचवां बजट पेश करेगी। माना जा रहा है कि इस बजट में महिलाओं के लिए विशेष घोषणाएं की जा सकती हैं। 9 मार्च को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी, जबकि 10 और 11 मार्च को विधायकों द्वारा बजट पर चर्चा की जाएगी। 12 मार्च को वैधानिक कार्य निपटाए जाएंगे। 13 से 15 मार्च तक प्रगतिशील पंजाब निवेशक सम्मेलन के चलते सदन की कार्यवाही स्थगित रहेगी। 16 मार्च को सत्र के अंतिम दिन विभिन्न विधेयक विधानसभा में पेश किए जाएंगे। अधूरे वादों और कानून-व्यवस्था पर कांग्रेस का प्रदर्शन विधानसभा सत्र के दौरान पंजाब प्रदेश कांग्रेस ने भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक और नेता पंजाब भवन से विधानसभा तक रोष मार्च निकालेंगे। कांग्रेस का कहना है कि वह सरकार को अधूरे चुनावी वादों, बढ़ते गैंगस्टरवाद और बिगड़ती कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर घेरने जा रही है। खासतौर पर महिलाओं को प्रति माह 1000 रुपये देने के वादे को लेकर कांग्रेस सरकार से जवाब मांगेगी। कांग्रेस का दावा है कि 2022 में किए गए इस वादे के आधार पर सरकार को प्रत्येक महिला को चार साल के 48 हजार रुपये देने चाहिए। विपक्ष कथित फर्जी मुठभेड़ों और कानून-व्यवस्था के मुद्दे को भी सत्र के दौरान जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी में है। प्रताप बाजवा की टिप्पणी के विरोध में मंत्री ईटीओ ने बजवाया बैंड कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने शुक्रवार को विधानसभा परिसर में बैंड बाजा बजवाकर प्रदर्शन किया। कुछ दिन पहले नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने मंत्री पर बैंड बाजे से संबंधित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। मंत्री ने एसएसपी अमृतसर को प्रताप बाजवा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत भी दी है। फरवरी में अजनाला रैली के दौरान बाजवा ने कहा था कि मंत्री हरभजन ईटीओ बैंड बजाते थे लेकिन अब वह पंजाब का बैंड बजा रहा हैं। इस पर पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर राजा वड़िंग ने मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस पर अब मंत्री ईटीओ कहा कि यदि वे मेहनत के बूते जमीन से उठकर मंत्री पद तक पहुंचे हैं तो कांग्रेस को क्या दिक्कत है। दरअसल, ये बयान कांग्रेसियों की मानसिकता को दर्शाते हैं।

मध्य पूर्व संकट का असर: शेयर बाजार धड़ाम, सेंसेक्स 1,097 अंक लुढ़का; बैंकिंग स्टॉक्स दबाव में

मुंबई मध्य पूर्व में संघर्ष के चलते भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,097 अंक या 1.37 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 78,918.90 और निफ्टी 315.45 अंक या 1.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,450.45 पर था। बाजार में गिरावट बैंकिंग शेयरों की तरफ से आई। निफ्टी बैंक 2.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,783.25 पर बंद हुआ। इसके अलावा, निफ्टी रियल्टी 2.09 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 2.01 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 1.81 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 1.06 प्रतिशत, निफ्टी कंजप्शन 1.02 प्रतिशत, निफ्टी इन्फ्रा 0.89 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 0.58 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। दूसरी तरफ निफ्टी इंडिया डिफेंस 2.77 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी 0.13 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 0.12 प्रतिशत और निफ्टी आईटी 0.04 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ। लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में कम बिकवाली देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.69 प्रतिशत या 399.20 अंक की कमजोरी के साथ 57,393.35 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 39.90 अंक की गिरावट के साथ 16,498.90 पर था। सेंसेक्स पैक में बीईएल, सनफार्मा, एनटीपीसी, इन्फोसिस और एचसीएल टेक गेनर्स थे। आईसीआईसीआई बैंक, इटरनल, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट,एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, बजाज फिनसर्व, एलएंडटी, इंडिगो, मारुति सुजुकी, भारती एयरटेल, ट्रेंट, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फाइनेंस और एचयूएल लूजर्स थे। बाजार में बड़ी गिरावट के पीछे बड़ा कारण अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का जारी रहना है। युद्ध के लंबा चलने से अब एनर्जी की आपूर्ति को भी जोखिम पैदा हो गया है, जिससे निवेशकों के सेंटीमेंट पर नकारात्मक प्रभाव हुआ है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बनाने का काम कर रही है। एफआईआई ने गुरुवार को 3,752.52 करोड़ रुपए के इक्विटी की बिकवाली की थी। युद्ध के चलते कच्चे तेल में भी तेजी जारी है। डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 80 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड का दाम 84 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।

Mini Duster का डिफेंडर जैसा लुक, Thar और Jimny को मिलेगी कड़ी टक्कर

नई दिल्ली रेनो ने अपनी अपकमिंग SUV का नाम टीज कर दिया है. 10 मार्च को रेनो Bridger Concept को पेश किया जाएगा. इसे Mini Duster भी बताया जा रहा है. हालांकि, कंपनी ने अभी इसका डिजाइन पेश नहीं किया है, लेकिन कुछ रेंडर जरूर सामने आ रहे हैं. रेंडर्स को देखकर ऐसा लग रहा है कि कंपनी Mini Duster नहीं बल्कि डिफेंडर का छोटा वर्जन लेकर आ रही है। 17 मार्च को नई Duster को कंपनी लॉन्च करेगी, उससे पहले 10 मार्च को रेनो Bridger Concept को पेश करके ज्यादा बड़ा धमाका कर सकती है. ऑटो मोटो ने इसका एक रेंडर तैयार किया है, जो काफी हद तक रियल लाइफ जैसा है। रेनो ने जो तस्वीरें शेयर की थीं, उसमें कार के ऊपरी हिस्से की झलक दिख रही थी. भले ही रेनो ने सीमित डिटेल्स शेयर की हैं, लेकिन उससे कार के डिजाइन का एक अंदाजा लगाया जा सकता है। कैसा होगा कार का डिजाइन?  कार बॉक्सी डिजाइन के साथ आएगी और इसमें ऑफ-रोड फीचर्स दिए जा सकते हैं. इसमें फ्लैट रूफ मिलेगी, जिसके साथ हैवी ड्यूटी रूफ रेल्स होंगी. इसमें फ्लेयर्ड व्हील आर्च के साथ कन्वेंशनल डोर हैंडल्स दिए जा सकते हैं. रियर साइड में फ्लैट विंडस्क्रीन और टेलगेट मिलेगा. स्पेयर टायर को पीछे वाले गेट पर फिट किया जा सकता है, जिससे कार का लुक और भी बोल्ड होगा।  Renault Bridger का रेंडर ऑटो मोटो ने तैयार किया है. कौन-सा इंजन मिलेगा? Bridger को रेनो मिनी डस्टर की तरह प्रमोट कर रही है. संभव है कि कंपनी CMF-A+ प्लेटफॉर्म में कुछ बदलाव करके इसे तैयार कर सकती है. इसे ज्यादा रग्ड, लाइफस्टाइल फोकस्ड और Kiger के अल्टरनेटिव के तौर पर पेश किया जा सकता है. इसमें 1 लीटर का 3 सिलेंडर टर्बो पेट्रोल इंजन दिया जा सकता है, जो रेनो काइगर में मिलता है। Renault Bridger को भारत में डिजाइन किया जाएगा. Thar और Jimny से होगा मुकाबला रिपोर्ट्स की मानें तो कंपनी इस कार को फ्रंट व्हील ड्राइव के साथ 4 व्हील ड्राइव में भी लॉन्च कर सकती है. इसके अलावा ADAS और दूसरे सेफ्टी फीचर्स भी दिए जा सकते हैं. रेनो इस कार को महिंद्रा की थार और मारुति की जिम्नी के मुकाबले में उतार सकती है। ये कार अगले साल के अंत तक लॉन्च हो सकती है. इसे भारत में डिजाइन किया जाएगा. भारत के अलावा Bridger को मुख्य रूप से अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और लैटिन अमेरिका में बेचा जाएगा।