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बिल्डिंग मटेरियल हुआ सस्ता: अब घर बनाना पड़ेगा सस्ता, जानें कितना घटे रेट

नई दिल्ली जीएसटी काउंसिल ने बड़ा फैसला लेते हुए GST के दरों में बड़ा बदलाव किया है. अभी जीएसटी के तहत 4 स्‍लैब- 5%, 12%, 18% और 28% है, लेकिन बदलाव के बाद सिर्फ दो स्‍लैब 5 फीसदी और 18 फीसदी हो जाएगा. इस कारण तमाम जरूरत की चीजें सस्‍ती हो जाएगी, यहां तक कि घर बनवाने के लिए सीमेंट, ईंट और स्‍टील के दाम भी घटने वाले हैं. इन चीजों पर भी GST रेट में कटौती हुई है. 22 सितंबर से जीएसटी कटौती लागू होगी.  सीमेंट पर जीएसटी के रेट को 28 फीसदी की कैटेगरी से हटाकर 18% स्‍लैब में शामिल किया गया है. इसी तरह, ईंट और टाइल्‍स को 12% स्‍लैब से हटाकर 5 फीसदी स्‍लैब में रख दिया गया है. वहीं स्‍टील यानी सरिया पर भी GST को कम किया गया है, जो अब 28 फीसदी से घटकर 18 फीसदी हो जाएगा. आइए जीएसटी कैलकुलेशन से समझते हैं कि अब घर बनवाना कितना सस्‍ता हो सकता है.  सीमेंट के कितने कम होंगे दाम?  सीमेंट पर अभी जीएसटी 28% है, जो नई जीएसटी के बाद घटकर 18 फीसदी होगी यानी 10 फीसदी की कटौती होगी. अब मान लीजिए 50 किलो सीमेंट की बोरी ₹400 है. ऐसे में 10% GST कटौती के बाद 40 रुपये प्रति बोरी की कमी आएगी. वहीं 450 रुपये वाली बोरी पर 45 रुपये की कमी आएगी.  ईंट के दाम कितने घटेंगे?  ईंट पर जीएसटी रेट को 12 से कम करके 5 फीसदी किया गया है. ऐसे में इसपर जीएसटी रेट में 7 फीसदी की कमी आई है. अब मान लीजिए आप 1 लाख ईंट घर बनवाने के लिए मंगाते हैं और हर एक ईंट की कीमत 10 रुपये है तो कुल आपको 10 लाख रुपये का खर्च आएगा. ईंट पर जीएसटी 7% कम होने के बाद इसका कुल रेट घटकर 9 लाख 30 रुपये हो जाएंगे. यानी 1 लाख ईंट मंगाने पर आपको अब 70 हजार रुपये कम देने पड़ेंगे.  सरिया का रेट कितना कम होगा?  स्‍टील प्रोडक्‍ट्स पर जीएसटी रेट 28 फीसदी से कम करके 18 फीसदी किया गया है. ऐसे में 10 फीसदी रेट में कटौती हो सकता है. अब मान लीजिए 1 कुंतल सरिया का दाम 5000 रुपये है. ऐसे में प्रति कुंतल सरिया के दाम में 500 रुपये की कमी आएगी.  टाइल्‍स के रेट कितने घटेंगे?  टाइल्‍स जैसी चीजों पर जीएसटी को 12% से घटाकर 5% किया गया है. ऐसे में इसके दाम में भी 7 फीसदी की कटौती होने की उम्‍मीद है. अब 100 रुपये वर्ग फुट की एक टाइल्‍स पर 7 रुपये की कटौती होगी.  2500 वर्गफुट या 4BHK घर बनवाने में कितना खर्च आएगा?  एक अनुमान के मुताबिक, 2500 वर्गफुट घर बनवाने में करीब 1000 बोरी सीमेंट का यूज होता है. इसके अलावा, 25 हजार ईंट और सरिया 10 टन सरिया का इस्‍तेमाल हो सकता है. साथ ही लगभग 2200 वर्ग फुट टाइल्‍स का यूज भी मान लेते हैं. अब इसी अनुमान पर कैलकुलेशन करें तो…  पुरानी जीएसटी रेट पर      400 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से 1000 सीमेंट के दाम- 4 लाख रुपये      10 रुपये प्रति ईंट के हिसाब से 25000 ईंट के दाम- 2 लाख 50 हजार रुपये      50 हजार रुपये प्रति टन सरिया के हिसाब से 10 टन सरिया का दाम- 5 लाख रुपये      100 रुपये वर्गफुट टाइल्‍स के हिसाब से 2200 वर्ग फुट टाइल्‍स के दाम- 2 लाख 20 हजार रुपये      कुल खर्च- 13.70 लाख रुपये  नई जीएसटी रेट पर     360 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से 1000 सीमेंट के दाम- 3 लाख 60 हजार रुपये      9.3 रुपये प्रति ईंट के हिसाब से 25000 ईंट के दाम- 2 लाख 32.5 हजार रुपये      45 हजार रुपये प्रति टन सरिया के हिसाब से 10 टन सरिया का दाम- 4.50 लाख रुपये      93 रुपये वर्गफुट टाइल्‍स के हिसाब से 2200 वर्ग फुट टाइल्‍स के दाम- 2 लाख 4.6 हजार रुपये      कुल खर्च- 12.47 लाख रुपये  नई जीएसटी रेट लागू होने के बाद 2500 वर्ग फुट का घर बनवाने में 1.23 लाख रुपये की बचत हो सकती है. 

टियर-2 और 3 शहर भारत के इंजीनियरिंग वर्कफोर्स को आकार देने में निभाएंगे बड़ी भूमिका : रिपोर्ट

नई दिल्ली एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, भारत के टियर-2 और टियर-3 शहर अगले कुछ वर्षों में देश के इंजीनियरिंग वर्कफोर्स को आकार देने में बड़ी भूमिका निभाते नजर आएंगे। एनएलबी सर्विसेज द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, पारंपरिक महानगरों के बाहर नए संस्थान, टेक्नोलॉजी पार्क और स्किलिंग हब तेजी से उभर रहे हैं। इसलिए अनुमान है कि 2028 तक भारत के एडवांस्ड इंजीनियरों में टियर-2 और टियर-3 शहरों का योगदान लगभग 35 प्रतिशत हो जाएगा। जयपुर, वडोदरा, कोयंबटूर, कोच्चि, पुणे और इंदौर जैसे शहर कम लागत और उच्च प्रभाव वाली प्रतिभाओं की तलाश करने वाले उद्यमों को लुभाते हुए तेजी से उनके लिए आकर्षक गंतव्य बन रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत पहले से ही हर वर्ष लगभग 15 लाख इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स तैयार करता है, जिनमें मैकेनिकल, सिविल, आईटी, सॉफ्टवेयर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं। हालांकि, वर्तमान में इनमें से केवल 45 प्रतिशत ही उद्योग मानकों को पूरा करते हैं, जबकि 60-72 प्रतिशत को व्यापक रूप से रोजगार योग्य माना जाता है। एआई, डेटा साइंस, इलेक्ट्रिक व्हीकल और सेमीकंडक्टर जैसे न्यू एज फिल्ड्स में स्किल्स गैप एक चुनौती साबित हो रहा है। रिपोर्ट इस बात पर भी जोर देती है कि भारत की अर्थव्यवस्था का भविष्य एसटीईएम-लेड इनोवेशन से संचालित होगा। आने वाली 70 प्रतिशत नौकरियों में एसटीईएम स्किल की आवश्यकता होने की उम्मीद है, ऐसे में एआई, मशीन लर्निंग, डेटा इंजीनियरिंग, एम्बेडेड सिस्टम और नैतिक एआई शासन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को 2026 तक 10 लाख एआई-ट्रेन्ड इंजीनियरों की आवश्यकता होने का अनुमान है, लेकिन वर्तमान आपूर्ति इस मांग का केवल 20 प्रतिशत ही पूरा कर पाती है। इसी प्रकार, ईवी इंडस्ट्री 30-40 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रही है। इस इंडस्ट्री को 2030 तक बैटरी टेक्नोलॉजी, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स और सस्टेनेबल डिजाइन जैसे क्षेत्रों में 10-20 लाख इंजीनियरों की आवश्यकता होने की उम्मीद है। भारत के पहले स्वदेशी 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर, विक्रम 3201 के आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम के बाद सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री भी नए अवसर पेश कर रही है। देश को चिप डिजाइन, प्रोसेस इंजीनियरिंग और टेस्टिंग के लिए हर वर्ष 25,000-30,000 स्किल्ड इंजीनियरों की आवश्यकता होने की उम्मीद है।  

Mutual Fund निवेशकों के लिए राहत, SEBI ने कम किया एग्जिट लोड, जानें क्या बदलेगा

मुंबई  बाजार नियामक सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने  म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टर प्रोटेक्शन और फाइनेंशियल इन्क्लूजन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड ने मैक्सिमम परमीसिबल एग्जिट लोड को 5 फीसदी से घटाकर 3 फीसदी कर दिया है। इससे म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को फायदा मिलेगा, क्योंकि यह लोड फंड से निकासी के समय लगता है। सेबी ने इस बैठक में आइपीओ, कमोडिटी और बीमा सेक्टर से जुड़े नियमों को सरल किया है, जिससे निवेशक आकर्षित हो सके। क्या है एग्जिट लोड और किसे मिलेगा फायदा? जब आप किसी म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं और कुछ समय बाद अपने यूनिट्स बेचकर बाहर निकलते हैं, तो फंड हाउस आपसे एक शुल्क ले सकता है। इसे एग्जीट लोड कहा जाता है। एग्जीट लोड कम होने से सीधे तौर म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को फायदा मिलेगा, क्योंकि अब उन्हें कम निकासी शुल्क देना होगा। बड़ी कंपनियों के लिए हुआ यह फैसला सेबी ने कहा कि 50,000 करोड़ रुपए से एक लाख करोड़ रुपए के बीच मार्केट कैप वाली कंपनियों के लिए 25 प्रतिशत का कम से कम पब्लिक शेयर रखने के मानदंड को अब मौजूदा तीन सालों की जगह पांच सालों में हासिल किया जा सकता है। जिन कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 1 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ के बीच है, उनके लिए सेबी ने न्यूनतम 6,250 करोड़ या आइपीओ के बाद मार्केट कैप का 2.75 प्रतिशत तक का रखने की बात कही है। वहीं, 5 लाख करोड़ से अधिक मार्केट कैप वाली कंपनियों के लिए, सेबी ने न्यूनतम सार्वजनिक पेशकश का आकार 15,000 करोड़ रुपए या 1 प्रतिशत रखने की बात कही है। एंकर कोटे में मिलेगी प्राथमिकता एंकर कोटे में बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों के लिए 7 फीसदी अतिरिक्त कोटा होगा। यानी बीमा, पेंशन फंड और म्यूचुअल फंडों के लिए 40 प्रतिशत कोटा होगा। इसके अलावा 250 करोड़ रुपए से अधिक के स्वीकार्य एंकर आवंटियों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी गई है। बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों को आईपीओ एंकर बुक के लिए रिजर्व कैटेगरी में शामिल किया जाएगा। एमपीएस नियम हो जाएंगे सरल इससे जियो जैसे मेगा इश्यू के लिए पब्लिक ऑफर और एमपीएस नियम अब ज्यादा सरल हो जाएंगे। कॉर्पोरेट्स पर दबाव घटेगा कंपनियों को कम समय में बड़े पैमाने पर इक्विटी डायल्यूशन से बचने का मौका मिलेगा। ऑफर्स से रिटेल और संस्थागत निवेशकों को ज्यादा अवसर मिलेंगे।

बदलते दौर में बदलती शादियां: दिखावे से हटकर अब प्रैक्टिकल अप्रोच, परिवार अपनाएंगे ये रास्ता?

इंदौर  बिटिया की शादी, सोना खरीदना है… ये हर माता-पिता की चाहत होती है, और यही भारतीय परंपरा भी है. लेकिन अब कुछ ऐसे माता-पिता भी हैं, जो कह रहे हैं कि बिना गहनों के कैसे बिटिया को विदा करेंगे? भारतीय शादी में श्रृंगार का अहम स्थान है, और उसमें सोने की ज्वेलरी सबसे ऊपर है. दुल्हन के श्रृंगार से लेकर वर-वधू के परिवारों की शान तक, हर जगह सोना ही मुख्य आकर्षण होता है. यही कारण है कि सोने के बिना भारतीय शादी की कल्पना अधूरी-सी लगती है.  हालांकि शादी में मिले सोने-चांदी को संजोकर रखना भी हमारी परंपरा रही है, जो एक तरह से सुरक्षित निवेश भी है. परंपरा के अनुसार, दुल्हन को विवाह के समय सोने के गहने देना न सिर्फ उसकी सुंदरता को बढ़ाने के लिए होता है, बल्कि यह उसके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का भी संकेत है.  दरअसल, मौजूदा समय में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं, लेकिन इस साल शादी का सीजन कई परिवारों के लिए मुश्किल भरा हो सकता है, क्योंकि इस वक्त सोना न सिर्फ महंगा हुआ है, बल्कि लगातार बढ़ती कीमतों ने उन परिवारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है, जिनके यहां इस साल शादी है.  एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए शादी का बजट सीमित होता है. इस बदले हुए दौर में लोग ज्वेलरी के अलावा डेकोरेशन, फोटोग्राफी और हनीमून पैकेज जैसी चीजों पर खर्च कर रहे हैं. खासकर शहरों में युवाओं की सोच बदल रही है. ऐसे में शादी का बजट बिगड़ता जा रहा है और सोने का भाव भी बढ़ता जा रहा है.  सबसे ज्यादा चिंता उन परिवारों को है, जिनके यहां इस साल शादी है, क्योंकि पिछले एक साल में सोना करीब 46-47% महंगा हो चुका है. जबकि इसी साल यानी 2025 में ही सोने की कीमत करीब 40 फीसदी बढ़ चुकी है. एक साल पहले 24K कैरेट 10 ग्राम गोल्ड की कीमत करीब 75 हजार रुपये थी, जो बढ़कर 1,10,000 रुपये को पार कर चुकी है.  एक साल में सोने की  कितनी बढ़ी है (24 कैरेट)  सितंबर-2024         सितंबर- 2025 ₹75,930         ₹1,11,280 यानी एक साल में 10 ग्राम सोने की कीमत में 35000 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है.  आमतौर पर एक मध्यवर्गीय परिवार शादी में 5 से 10 लाख रुपये खर्च करता है, एक अनुमान 5 लाख रुपये खर्च करने वाला परिवार कम से कम 20 ग्राम सोना खरीदता था, जो करीब 1.50 लाख रुपये में आ जाता था. लेकिन इस साल शादी में 5 लाख खर्च करने वाला परिवार परेशान है, वो सोच रहे हैं कि अब कितने का सोना खरीदें, क्योंकि सोना हर रोज महंगा हो रहा है, और बजट से भी बाहर हो रहा है. भारत में शादी को लेकर परंपरा और दिखावे का दबाव हमेशा रहा है. ऐसी स्थिति बिना गहनों की शादी भी नहीं हो सकती. 10 लाख रुपये तक शादी में खर्च करने वाले पहले 40 ग्राम सोना खरीदते थे, जो कि करीब 3 लाख रुपये में आज जाता था, अब इस साल 10 लाख रुपये शादी में खर्च करने वाले केवल 20 ग्राम ही सोना खरीद सकता है, क्योंकि 40 ग्राम खरीदने पर बजट बिगड़ जाएगा.  सोना महंगा होने पर अब क्या विकल्प?    सोने की कीमतों में उछाल का सीधा असर ज्वेलरी बाजार पर भी दिख रहा है. ज्वेलर्स की बिक्री में गिरावट आई है और कई दुकानदार किस्तों पर गहने देने की योजना ला रहे हैं. जानकार भी कह रहे हैं कि कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले महीनों में ज्वेलरी इंडस्ट्री को बड़ा झटका लग सकता है.  हालांकि सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद अब लोग परंपरा निभाने के लिए नए विकल्प तलाश रहे हैं. शादी-ब्याह और त्योहारों में गहनों का महत्व बना रहता है, लेकिन बढ़ते दामों ने लोगों की पसंद और रणनीति दोनों बदल दी है.  1. हल्की और मिनिमल ज्वेलरी भारी नेकलेस और कंगन की जगह अब लोग हल्के डिजाइन चुन रहे हैं. छोटे चेन, स्लीक रिंग्स और मिनिमल ब्रेसलेट्स की डिमांड बढ़ी है. इससे सोना भी खरीदा जाता है और बजट पर बोझ भी कम पड़ता है. 2. 18 कैरेट और 14 कैरेट गोल्ड पहले लोग ज्यादातर 22 कैरेट और 24 कैरेट गोल्ड खरीदते थे, लेकिन अब 18K और 14K के गहने बनवा रहे हैं. इससे सोना सस्ता भी पड़ रहा है और फैशनेबल डिजाइनों की भी बड़ी रेंज मिलती है. 3. गोल्ड प्लेटेड और इमीटेशन ज्वेलरी खासकर शादी या फंक्शन के लिए, कई परिवार अब गोल्ड प्लेटेड ज्वेलरी या फिर हाई क्वालिटी वाली इमीटेशन ज्वेलरी ले रहे हैं. दिखने में ये लगभग असली सोने जैसी लगती हैं और खर्च काफी कम आता है. यानी बजट में होता है.  4. सिल्वर और प्लैटिनम सोने के विकल्प के तौर पर लोग अब सिल्वर और प्लैटिनम ज्वेलरी की तरफ रुख कर रहे हैं.. खासकर शहरी युवाओं में यह चलन बढ़ा है, क्योंकि यह आधुनिक लुक देता है और वैल्यू भी बनाए रखता है.

ट्रेन सफर में बोरियत खत्म! रेलवे ऐप पर फ्री मिलेगा मूवी और वेब सीरीज का मजा

मुंबई   सोचिए, आप ट्रेन में सफर कर रहे हैं, लंबी यात्रा है और आप बोर हो रहे हैं. काश! कोई नई फिल्म या वेब सीरीज देखने को मिल जाती. या फिर आपको अचानक जनरल टिकट लेना है, लेकिन लंबी लाइन देखकर पसीने छूट रहे हैं. या फिर आपको अपनी सीट पर गरमागरम खाना मंगवाना है. अब इन सभी कामों के लिए आपको 10 अलग-अलग ऐप रखने की कोई जरूरत नहीं है! भारतीय रेलवे ने अपने करोड़ों यात्रियों के लिए एक ऐसा 'सुपर ऐप' लॉन्च किया है, जो आपकी यात्रा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी समस्या का 'वन-स्टॉप सॉल्यूशन' है. इस क्रांतिकारी ऐप का नाम है- RailOne. और सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि अब इस ऐप में आपको मनोरंजन का भी पूरा खजाना मिलेगा! रेलवे ने इस ऐप में फ्री OTT (ओवर-द-टॉप) की सुविधा जोड़ दी है, जिससे आपका सफर अब कभी बोरिंग नहीं होगा. क्या है ये RailOne ऐप और क्यों है यह इतना खास? 1 जुलाई, 2025 को लॉन्च हुआ RailOne ऐप रेलवे की तरफ से एक बहुत बड़ा कदम है. इसे सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) ने बनाया है. इसका मकसद रेलवे की सभी अलग-अलग सेवाओं को एक ही छत के नीचे लाना है, ताकि यात्रियों को एक सहज और आसान अनुभव मिल सके. अब आपको UTS (जनरल टिकट के लिए), NTES (ट्रेन ट्रैकिंग के लिए) और IRCTC (रिजर्वेशन के लिए) जैसे कई ऐप अपने फोन में रखने की जरूरत नहीं है. ट्रेन में देखें फ्री फिल्में और वेब सीरीज रेलवे ने इसके लिए WAVES OTT प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी की है. यह प्लेटफॉर्म प्रसार भारती द्वारा नवंबर 2024 में लॉन्च किया गया था. आप अपनी यात्रा के दौरान फिल्में, वेब सीरीज, डॉक्यूमेंट्री, ऑडियो प्रोग्राम और यहां तक कि गेम्स का भी मजा ले सकते हैं, वह भी बिल्कुल मुफ्त. सबसे अच्छी बात यह है कि यह कंटेंट 10 से ज्यादा भारतीय भाषाओं और बोलियों में उपलब्ध है. WAVES OTT ने देशभर के कंटेंट क्रिएटर्स, रीजनल ब्रॉडकास्टर्स और सांस्कृतिक संस्थानों के साथ मिलकर यह भाषाई विविधता सुनिश्चित की है. कैसे देखें फ्री OTT कंटेंट? सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से RailOne App डाउनलोड करें और लॉग इन करें. (आप अपने पुराने RailConnect या UTS क्रेडेंशियल्स का भी उपयोग कर सकते हैं). लॉग इन करने के बाद, ऐप के 'More Offerings' सेक्शन में जाएं. वहां 'Go To Waves' मेनू पर क्लिक करें. बस! आपकी स्क्रीन पर मनोरंजन का खजाना खुल जाएगा, जहां आप अपनी पसंदीदा फिल्म या शो चुनकर देख सकते हैं. सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, ये हैं RailOne के 5 और दमदार फीचर 1. हर तरह की टिकट बुकिंग एक जगह: यह इस सुपर ऐप की सबसे बड़ी ताकत है. अब आप एक ही जगह से रिजर्व्ड टिकट (जैसे स्लीपर, AC) और अनारक्षित यानी जनरल टिकट (UTS) दोनों बुक कर सकते हैं. अब जनरल टिकट के लिए स्टेशन पर लंबी लाइनों में लगने का झंझट खत्म. 2. ट्रेन की पल-पल की खबर (Live Tracking): आपकी ट्रेन कहां पहुंची? कितनी लेट है? अगले स्टेशन पर कब आएगी? इन सभी सवालों का जवाब अब आपको एक ही ऐप में मिलेगा. आप किसी भी ट्रेन का लाइव रनिंग स्टेटस, उसका रूट, स्टॉपेज और पूरा शेड्यूल आसानी से चेक कर सकते हैं. PNR स्टेटस जानना और सीट की उपलब्धता जांचना भी अब बस एक क्लिक की दूरी पर है. 3. सीट पर आएगा गरमागरम खाना (E-Catering): लंबे सफर में खाने की चिंता अब पुरानी बात हो गई. आप इस ऐप के जरिए अपनी यात्रा के दौरान आने वाले स्टेशनों के मेनू में से अपना पसंदीदा खाना ऑर्डर कर सकते हैं, जो सीधे आपकी सीट पर पहुंचाया जाएगा. 4. कुली और टैक्सी की बुकिंग भी: ऐप में आपको कुली (Porter) बुक करने और स्टेशन से अपने घर या होटल तक के लिए 'लास्ट-माइल' टैक्सी बुक करने की भी सुविधा मिलती है. 5. सीधी शिकायत, तुरंत सुनवाई: अगर आपको यात्रा के दौरान कोई भी समस्या होती है – चाहे वह सीट को लेकर हो, सफाई को लेकर हो या सुरक्षा को लेकर – तो अब आप इस ऐप के जरिए सीधे रेलवे कस्टमर सर्विस में अपनी शिकायत, सुझाव या फीडबैक दर्ज करा सकते हैं. निष्कर्ष (Conclusion) RailOne ऐप भारतीय रेलवे के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है. यह सिर्फ एक ऐप नहीं, बल्कि एक सच्चा 'ट्रैवल कंपेनियन' है, जो आपकी यात्रा के हर पहलू का ध्यान रखता है. टिकट बुकिंग की आसानी से लेकर, लाइव ट्रैकिंग की सुविधा और अब मुफ्त मनोरंजन का तड़का, रेलवे ने वाकई यात्रियों के अनुभव को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है. यह पहल साबित करती है कि भारतीय रेलवे न केवल यात्रियों की जरूरतों को समझ रहा है, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी का बेहतरीन इस्तेमाल भी कर रहा है. तो अगली बार जब आप ट्रेन का सफर प्लान करें, तो इस 'ब्रह्मास्त्र' को अपने फोन में रखना न भूलें!

साल की सबसे बड़ी Amazon सेल: सस्ते में खरीदें स्मार्टफोन, TV और ढेरों गैजेट्स, 23 सितंबर से शुरुआत

मुंबई  Amazon पर नई सेल 'ग्रेट इंडियन फेस्टिव' शुरू होने वाली है. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर साल की सबसे बड़ी सेल 23 सितंबर से शुरू होगी. अगर आप प्राइम मेंबर हैं, तो आपको इस सेल का एक्सेस एक दिन पहले मिल जाएगा. इस सेल का फायदा उठाकर आप इलेक्ट्रॉनिक्स, होम अप्लायंस और दूसरे प्रोडक्ट्स सस्ते में खरीद सकते हैं.  ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर Amazon Great Indian Festival Sale की माइक्रोसाइट भी लाइव हो गई है. सेल में कई ऑफर्स मिलेंगे, जिन्हें कंपनी ने टीज करना शुरू कर दिया है. हालांकि, ऑफर्स को कंपनी ने अभी रिवील नहीं किया है. सेल में फ्लैट डिस्काउंट, बैंक ऑफर, एक्सचेंज बोनस और EMI का विकल्प मिलेगा. आइए जानते हैं इसकी डिटेल्स.   मोबाइल फोन्स पर मिलेंगी खास डील्स?  Amazon ने अभी सिर्फ ऑफर्स को टीज किया है, इन्हें कन्फर्म नहीं किया है. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 17 सितंबर को स्मार्टफोन्स पर मिलने वाले ऑफर्स को रिवील करेगा. यहां से आप Samsung Galaxy S24 Ultra को अब तक की सबसे कम कीमत पर खरीद पाएंगे. संभव है कि ये फोन आधे से भी कम दाम पर मिले.  इसके अलावा आपको iPhone 15 पर अच्छी डील मिलेगी. ये स्मार्टफोन अब तक के बेस्ट ऑफर पर मिलेगा. कंपनी इसे 50 हजार रुपये से कम में बेच सकती है. iPhone और Samsung के अलावा आपको OnePlus 13R, iQOO Neo 10R, Redmi A4, Realme Narzo 80 Lite 5G और दूसरे फोन्स पर डिस्काउंट मिलेगा.  फ्लैगशिप फोन्स पर डिस्काउंट  सेल में Samsung Galaxy S25 Ultra 5G, S24 Ultra 5G, Xiaomi 15 Ultra, iQOO 13, iPhone 15, OnePlus 13s, OnePlus 13R जैसे हाई-एंड फोन्स को आप सस्ते में खरीद सकते हैं.  फोन्स ही नहीं आप स्मार्ट टीवी, वॉशिंग मशीन, लैपटॉप, रेफ्रिजेरट को भी सस्ते में खरीद सकते हैं. इन सभी प्रोडक्ट्स पर फ्लैट डिस्काउंट के साथ ही आपको बैंक ऑफर और एक्सचेंज बोनस भी मिलेगा. ऐमेजॉन की इस सेल में आपको कई प्रोडक्ट्स पर साल की बेस्ट डील्स मिल सकती हैं.  कंपनी ने साफ किया है कि इस सेल में 40 परसेंट के डिस्काउंट पर स्मार्टफोन मिलेंगे. वहीं इलेट्रॉनिक्स और फैशन प्रोडक्ट्स पर 80 परसेंट तक की छूट मिलेगी. टीवी और दूसरे बड़े होम अप्लायंस को आप 65 फीसदी के डिस्काउंट पर खरीद सकते हैं. सेल से आप Amazon प्रोडक्ट्स को आधी कीमत पर खरीद पाएंगे.

फॉरेक्स मार्केट में मजबूत भारत: विदेशी मुद्रा भंडार 698.26 अरब डॉलर, सोना भंडार भी चढ़ा

नई दिल्ली भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 5 सितंबर को समाप्त हुए हफ्ते में सालाना आधार पर 4.03 अरब डॉलर बढ़कर 698.26 अरब डॉलर हो गया है। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा शुक्रवार को दी गई। देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार बढ़त देखी जा रही है। पिछले महीने विदेशी मुद्रा भंडार 3.51 अरब डॉलर बढ़कर 694.2 अरब डॉलर हो गया है। आरबीआई के डेटा के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक विदेशी मुद्रा आस्तियां (एफसीए) का मूल्य 54 करोड़ डॉलर बढ़कर 584.47 अरब डॉलर हो गया है। विदेशी मुद्रा आस्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी इकाइयों के मूल्यवृद्धि या मूल्यह्रास का प्रभाव डॉलर के रूप में शामिल होता है। समीक्षा अवधि में विदेशी मुद्रा भंडार के अहम घटकों में से एक गोल्ड रिजर्व 3.53 अरब डॉलर बढ़कर 90.29 अरब डॉलर हो गया। भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न अनिश्चितता के बीच, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सुरक्षित निवेश के रूप में गोल्ड के रिजर्व को तेजी से बढ़ा रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने के शेयर को 2021 से लगभग दोगुना कर लिया है। केंद्रीय बैंक के डेटा के मुताबिक, समीक्षा अवधि में विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) की वैल्यू 18.74 अरब डॉलर रह गई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत की रिजर्व पोजीशन भी 20 लाख डॉलर बढ़कर 4.75 अरब डॉलर हो गई है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार आरबीआई को रुपए को तेजी से गिरने से रोकने और उसकी अस्थिरता को कम करने के लिए ज्यादा डॉलर जारी करके हाजिर और अग्रिम मुद्रा बाजारों में हस्तक्षेप करने में सक्षम बनाता है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने अगस्त में कहा था कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11 महीने से ज्यादा के माल आयात और लगभग 96 प्रतिशत बकाया विदेशी ऋण के लिए पर्याप्त है। वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने कहा, "अनिश्चित वैश्विक नीतिगत माहौल के बावजूद, जुलाई और वित्त वर्ष 2026 में भारत के सेवा और व्यापारिक निर्यात में अब तक मजबूत वृद्धि हुई है और यह वैश्विक निर्यात वृद्धि से कहीं अधिक है।"

महंगाई पर नया डेटा: अगस्त में खुदरा दर 2.07%, खाने-पीने की चीज़ों के दाम गिरे

नई दिल्ली  भारत की खुदरा महंगाई दर अगस्त में सालाना आधार पर 2.07 प्रतिशत रही है। इसमें जुलाई के मुकाबले 46 आधार अंक की वृद्धि देखने को मिली है। यह जानकारी सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को दी गई। इससे पहले जुलाई में खुदरा महंगाई दर 1.61 प्रतिशत थी। मंत्रालय की ओर से बताया गया कि महंगाई दर का निचले स्तरों पर बने रहने की वजह खाद्य महंगाई दर का नकारात्मक रहना है, जो कि अगस्त 2025 में सालाना आधार पर -0.69 प्रतिशत रही है। अगस्त में खाद्य महंगाई दर ग्रामीण क्षेत्र में -0.70 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र में -0.58 प्रतिशत रही है। इससे पहले जुलाई में खाद्य महंगाई दर -1.76 प्रतिशत थी। सरकार की ओर से जारी किए गए डेटा में बताया गया कि अगस्त 2025 में ग्रामीण सेक्टर में हेडलाइन और खाद्य महंगाई दर में बढ़त देखने को मिली है। अगस्त 2025 में ग्रामीण इलाकों में हेडलाइन महंगाई दर 1.69 प्रतिशत रही है, जो कि जुलाई 2025 में 1.18 प्रतिशत थी। अगस्त 2025 में ग्रामीण क्षेत्र में खाद्य महंगाई दर में -0.70 प्रतिशत रही है, जो कि अगस्त में -1.74 प्रतिशत थी। आंकड़ों के मुताबिक, शहरी इलाकों में हेडलाइन महंगाई दर अगस्त 2025 में 2.47 प्रतिशत रही है, जो कि जुलाई 2025 में 2.10 प्रतिशत थी। शहरी इलाकों में अगस्त में खाद्य महंगाई -0.58 प्रतिशत रही है, जो कि जुलाई -1.90 प्रतिशत थी। अगस्त में स्वास्थ्य महंगाई दर सालाना आधार पर 4.40 प्रतिशत रही है, जो कि जुलाई में 4.57 प्रतिशत थी। परिवहन और संचार में महंगाई दर अगस्त में 1.94 प्रतिशत रही है, जो जुलाई में 2.12 प्रतिशत थी। ईंधन और प्रकाश में महंगाई दर अगस्त 2025 में 2.43 प्रतिशत थी, जोकि जुलाई में 2.67 प्रतिशत थी। अगस्त में सबसे अधिक 9.04 प्रतिशत की महंगाई दर केरल में थी। इसके बाद कर्नाटक (3.81 प्रतिशत), जम्मू और कश्मीर (3.75 प्रतिशत), पंजाब (3.51 प्रतिशत) और तमिलनाडु (2.93 प्रतिशत) का स्थान था।

जुलाई के मुकाबले अगस्त में बढ़ी महंगाई, रिटेल इनफ्लेशन 1.61% से बढ़कर 2.07% पर पहुंची

नई दिल्ली अगस्त में रिटेल महंगाई दर जुलाई के 1.6% से थोड़ा बढ़कर 2.7% पर पहुंच गई है। इसकी वजह कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी है।रिटेल महंगाई के आधिकारिक आंकड़े आज सरकार ने जारी किए हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी, RBI का लक्ष्य महंगाई को 4% ±2% की सीमा में रखने का है। जुलाई में खाने-पीने के सामानों की कीमत घटी थीं महंगाई के बास्केट में लगभग 50% योगदान खाने-पीने की चीजों का होता है। इसकी महीने-दर-महीने की महंगाई माइनस 1.06% से घटकर माइनस 1.76% हो गई है। जून महीने में ग्रामीण महंगाई दर 1.72% से घटकर 1.18% हो गई है। वहीं शहरी महंगाई 2.56% से घटकर 2.05% पर आ गई है। RBI ने महंगाई का अनुमान घटाया 4 से 6 अगस्त तक हुई RBI मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग में भी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई का अनुमान 3.7% से घटाकर 3.1% कर दिया था। महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है? महंगाई का बढ़ना और घटना प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। ज्यादा चीजें खरीदने से चीजों की डिमांड बढ़ेगी और डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं होने पर इन चीजों की कीमत बढ़ेगी। इस तरह बाजार महंगाई की चपेट में आ जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो बाजार में पैसों का अत्यधिक बहाव या चीजों की शॉर्टेज महंगाई का कारण बनता है। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी। सब्जियों और दालों की अच्छी पैदावार का असर रिपोर्ट के अनुसार, लगातार अच्छी पैदावार और सप्लाई में सुधार की वजह से सब्जियों और दालों के दाम कम हुए हैं. सितंबर में भी टमाटर, प्याज और आलू की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है. यही वजह है कि जरूरी सामानों का दाम नियंत्रण में है. प्याज और आलू में सबसे तेज गिरावट बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा कि प्याज की खुदरा कीमतों में सालाना आधार पर 37.5% की गिरावट दर्ज की गई है, जो जनवरी 2021 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है. आलू की कीमतें भी 44 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं. दालों की कीमतें भी घटीं दालों में भी लगातार गिरावट जारी है. अगस्त में तुअर/अरहर की कीमतों में 29% तक की कमी आई है. इसके अलावा उड़द में 8.9%, मूंग में 5.2% और मसूर में 1.4% की गिरावट देखी गई है. ग्लोबल मार्केट और सरकार के कदम से मदद वैश्विक स्तर पर भी खाद्य और ऊर्जा की कीमतें नियंत्रण में हैं. साथ ही, सरकार ने FMCG और टिकाऊ वस्तुओं पर GST दरें कम की हैं, जिससे महंगाई को और राहत मिली है. बैंक ऑफ बड़ौदा का अनुमान है कि इसका असर CPI पर 55-75 बेसिस प्वाइंट तक दिखेगा. खरीफ सीजन का समर्थन रिपोर्ट में कहा गया है कि इस खरीफ सीजन में दालों की बुवाई का क्षेत्र बढ़ा है. इसी वजह से उत्पादन अच्छा हुआ है और कीमतों पर दबाव कम हुआ है. अनाजों में भी चावल की कीमतें धीरे-धीरे नीचे आ रही हैं. CPI से तय होती है महंगाई एक ग्राहक के तौर पर आप और हम रिटेल मार्केट से सामान खरीदते हैं। इससे जुड़ी कीमतों में हुए बदलाव को दिखाने का काम कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI करता है। हम सामान और सर्विसेज के लिए जो औसत मूल्य चुकाते हैं, CPI उसी को मापता है। अमेरिका में बढ़ी महंगाई! गैस, ग्रॉसरी, होटल और हवाई टिकट सब कुछ हुआ महंगा अमेरिका में खुदरा महंगाई दर अगस्त 2025 में बढ़कर 2.9 प्रतिशत हो गई, जो इस साल जनवरी के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गैस, किराने का सामान, होटल के कमरे, हवाई किराया, कपड़े और पुरानी कारों की कीमतों में बढ़ोतरी इसके पीछे प्रमुख कारण रही। जुलाई में खुदरा महंगाई दर 2.7 प्रतिशत थी, यानी अगस्त में इसमें 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह वृद्धि उस समय हुई है जब उपभोक्ता पहले से ही बढ़ती लागतों के दबाव में हैं, जिससे घरेलू बजट पर असर पड़ रहा है। कोर महंगाई भी बनी हुई है ऊंची न्यूज एजेंसी भाषा ने रिपोर्ट के अनुसार बताया कि अगर खाद्य और ईंधन की अस्थिर कीमतों को हटा दिया जाए, तो कोर महंगाई दर अगस्त में 3.1 प्रतिशत रही, जो जुलाई के समान है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि महंगाई का दबाव केवल अस्थायी कारकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक रूप से अर्थव्यवस्था में फैला हुआ है। फेड की अगली बैठक पर टिकी नजरें यह डेटा ऐसे समय आया है जब फेडरल रिजर्व अगले सप्ताह अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक करने वाला है। अनुमान लगाया जा रहा है कि नीति निर्धारक प्रमुख ब्याज दर को मौजूदा 4.3 प्रतिशत से घटाकर लगभग 4.1 प्रतिशत कर सकते हैं। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दरों में कटौती का दबाव और बढ़ती महंगाई मिलकर फेड के सामने एक कठिन स्थिति उत्पन्न कर रहे हैं। उन्हें एक संतुलन साधना होगा। जहां आर्थिक विकास को समर्थन मिले, लेकिन महंगाई भी काबू में रहे।

सिर्फ 20 रुपये में बनती है दवा, बिकती है 100 में – मेडिकल स्टोर्स कितनी कमाई कर रहे?

नई दिल्ली दवा की असली कीमत और उस पर मिलने वाला मुनाफा शायद ही आम लोगों को पता हो. हम और आप जिस दवा की स्ट्रिप 100 रुपये में खरीदते हैं, वही दवा मेडिकल स्टोर वाले को कितने में पड़ती है और उस पर कितना मार्जिन जुड़ता है, यह सुनकर आप चौंक सकते हैं. इसका जवाब जानने के लिए हमने दवाइयों के डिस्ट्रीब्यूटर  से बात की. डिस्ट्रीब्यूटर ने विस्तार से बताया कि दवाइयां बेचने पर कितना मार्जिन मिलता है. आइए, आपको भी बताते हैं. जब हमने डिस्ट्रीब्यूटर से पूछा कि मेडिकल वाले दवाइयों पर कितना प्रॉफिट कमा लेते हैं, तब उन्होंने बताया कि दवाइयों में प्रॉफिट मार्जिन, कंपनियों, दवा के प्रकार और कई जगहों पर निर्भर करता है. मुख्य तौर पर देखें तो दवाइयों का प्रॉफिट मार्जिन 4-5 तरह का होता है.  फार्मा दवाइयों पर मार्जिन सबसे पहले, फार्मा कैटेगरी की दवाइयों में 20 से 30% का मार्जिन होता है. इसमें न्यूनतम बीस प्रतिशत तो होता ही है. इस कैटेगरी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव डॉक्टर को दवाई के लिए परामर्श देता है और उसके अनुसार जो दवाइयां बेची जाती हैं, उनमें बीस से पैंतीस प्रतिशत का मार्जिन मिल जाता है.  जेनरिक दवाइयों पर ज्यादा फायदा दूसरी तरह की दवाइयां होती हैं जेनरिक. जेनरिक दवाइयों में प्रॉफिट मार्जिन ज्यादा होता है. जेनरिक दवाइयां रिटेलर खुद अपने पास से बेचने की कोशिश करता है या ग्राहक को बेचता है. रिटेलर्स को इस तरह की दवाइयां बेचने में 50 से 75 प्रतिशत का प्रॉफिट होता है.  डॉक्टर्स के जरिए भी होती है कमाई इसके अलावा, तीसरी कैटेगरी है पर्सनल मोनोपोलाइज़्ड कंपनियां. इसमें डॉक्टरों को उन दवाइयों को रिकमेंड करने के लिए कहा जाता है, जिसमें डॉक्टर का कमीशन भी शामिल हो सकता है. इस तरह की दवाइयों में 30 से 35 फीसदी तक का प्रॉफिट मार्जिन होता है. इनमें मैटेरियल का प्रतिशत थोड़ा कम होता है. क्या क्वालिटी का मसला? इसके अलावा, कुछ दवाइयां ऐसी होती हैं, जो अलग-अलग कंपनियां बनाती हैं. उनमें मैटेरियल का इस्तेमाल 90 फीसदी तक ही होता है और ऐसी दवाइयों में 90 फीसदी तक बचत होती है.  दरअसल, दवाइयों में मैटेरियल उपयोग का क्राइटेरिया 90 से 110 फीसदी तक होता है. कई कंपनियां दवाइयों में 90 फीसदी तक के मैटेरियल का इस्तेमाल करती हैं, जो रिटेलर को काफी कम कीमत में मिलती है. जेनरिक में मैटेरियल 100 फीसदी तक होता है. सरकार के नियम हैं कि दवा 90% से कम या 110% से ज्यादा नहीं हो सकती. मतलब, 90% में भी अगर सामग्री पूरी तरह से है, तो दवा शुद्ध मानी जाएगी.   यही कारण है कि कई दवा कंपनियां ज्यादा मुनाफा कमाती हैं, क्योंकि वे दवा में मिनिमम मात्रा तक ही मैटेरियल मिलाती हैं. वहीं, बड़ी कंपनियां दवाइयों में अच्छी मात्रा में सामग्री मिलाती हैं. ऐसे में कुछ कंपनियों की दवाइयों में 90 फीसदी तक प्रॉफिट होता है. मान लीजिए अगर दवा 100 रुपये की है तो फार्मा की बड़ी कंपनी उसे 65 रुपये में बनाएगी. वहीं, जेनरिक दवा 25 रुपये में बनकर तैयार हो जाएगी.  खांसी की दवाई पर कितना मार्जिन? अनीष बताते हैं कि जो खांसी की जेनरिक दवाई होती है, वह 8 रुपये में बनकर आती है और दुकानदारों को 20 से 30 रुपये तक मिल जाती है. अब इसकी MRP 80-100 रुपये या ज्यादा होती है और ऐसे में इसमें अच्छा खासा मुनाफा हो जाता है.