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Ducati ने भारत में पेश की नई Multistrada V4 Pikes Peak, जानें फीचर्स और कीमत

मुंबई  प्रीमियम मोटरसाइकिल निर्माता कंपनी Ducati ने भारतीय भारतीय बाजार में अपनी नई Ducati Multistrada V4 Pikes Peak को लॉन्च कर दिया है. Pikes Peak, Multi V4 का ज़्यादा परफॉर्मेंस-ओरिएंटेड वेरिएंट है. इसे पहले से ही सक्षम स्पोर्ट टूरिंग मशीन में बेहतर स्पेसिफिकेशन और स्पोर्टी एर्गोनॉमिक्स जोड़े गए हैं. Ducati Multistrada V4 Pikes Peak का इंजन Multistrada V4 Pikes Peak में मिलने वाले इंजन की बात करें तो इसमें बाकी Multistrada बाइक्स की तरह ही 1,158cc V4 ग्रांटुरिस्मो इंजन इस्तेमाल किया गया है, जो 10,750rpm पर 168 bhp की पावर और 9,000rpm पर 123.8Nm का टॉर्क उत्पन्न करता है. इस इंजन के बारे में Ducati India का दावा है कि यह E20 मानकों के अनुरूप है. इस इंजन में एडवांस सिलेंडर डिएक्टिवेशन सिस्टम भी मिलता है, जो धीमी गति पर रियर बैंक को निष्क्रिय कर देता है, जिसे अपडेटेड स्टैंडर्ड Multistrada V4 के साथ पेश किया गया है. इसके अलावा, Multistrada V4 Pikes Peak में एक रेस मोड भी दिया गया है, जो थ्रॉटल रिस्पॉन्स को अधिकतम करता है और ट्रैक्शन कंट्रोल और व्हीली कंट्रोल सिस्टम जैसे राइडर एड्स के हस्तक्षेप को कम करता है. टाइटेनियम अक्रापोविक एग्जॉस्ट स्टैंडर्ड तौर पर दिया गया है. Pikes Peak की मुख्य विशेषता इसका उच्च-स्तरीय हार्डवेयर है. इस मोटरसाइकिल में ओहलिन्स स्मार्ट EC 2.0 इलेक्ट्रॉनिक सस्पेंशन दिया गया है, जो Panigale V4 S और Streetfighter V4 S में भी इस्तेमाल किया गया है. यह राइडर की राइडिंग स्टाइल के अनुसार अपने आप एडजस्ट हो जाता है और हर सस्पेंशन मोड के लिए अलग-अलग डैम्पिंग सेटिंग्स प्रदान करता है. स्टैंडर्ड Multistrada V4 के विपरीत, इसमें 19-इंच का फ्रंट व्हील मिलता है, वहीं Pikes Peak में आगे की तरफ 17-इंच के व्हील्स का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसकी हैंडलिंग बेहतर हो जाती है. इस मोटरसाइकिल में हल्के फोर्ज्ड व्हील्स लगाए गए हैं, जिनमें आगे की तरफ 120/70-ZR17 और पीछे की तरफ 190/55-ZR17 साइज़ के पिरेली डियाब्लो रोसो IV टायर लगे हैं. इसके अलावा, Ducati Multistrada V4 Pikes Peak में V4 और V4 S के विपरीत सिंगल-साइडेड स्विंगआर्म है, जो इसे एक स्पोर्टी और विशिष्ट लुक देता है. ब्रेकिंग हार्डवेयर के लिए इसमें ब्रेम्बो स्टाइलमा कैलिपर्स के साथ 330 मिमी फ्रंट डिस्क और 280 मिमी रियर डिस्क ब्रेक दिए गए हैं. Ducati ने ज़्यादा स्पोर्टी राइडिंग के लिए चेसिस ज्योमेट्री में भी उल्लेखनीय बदलाव किए हैं. स्टीयरिंग हेड एंगल 25.75 डिग्री है, जबकि स्टैंडर्ड V4 में यह 24.5 डिग्री था. राइडिंग पोज़िशन को और भी एग्रेसिव बनाया गया है, जिसमें फ़ुट पेग्स को ऊपर और पीछे की ओर रखा गया है, जबकि हैंडलबार को संकरा और नीचे रखा गया है. कंपनी ने Multistrada V4 S के व्यापक इलेक्ट्रॉनिक्स सूट को बरकरार रखा है, जिसमें Ducati व्हीकल ऑब्ज़र्वर (DVO) सिस्टम भी शामिल है. यह सिस्टम ABS, व्हीली कंट्रोल और ट्रैक्शन कंट्रोल की सटीकता को बेहतर बनाने के लिए 70 सेंसर से इनपुट का अनुकरण करता है. इसमें फॉरवर्ड कोलिजन वार्निंग (FCW), अडेप्टिव क्रूज़ कंट्रोल (ACC) और ब्लाइंड स्पॉट डिटेक्शन (BSD) फीचर वाला रडार सिस्टम दिया गया है. Ducati Multistrada V4 Pikes Peak की कीमत कंपनी ने इस मोटरसाइकिल को 36.17 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर उतारा है. इस कीमत के साथ नई Ducati Multistrada V4 Pikes Peak, Multi V4 S से लगभग 5.5 लाख रुपये ज़्यादा महंगी है, लेकिन यह ज़्यादा स्पोर्टी और ज़्यादा परफॉर्मेंस-केंद्रित पैकेज प्रदान करती है. इसकी कीमत इसे Ducati Panigale V4 S के करीब भी रखती है, जिसकी रीटेल कीमत 39 लाख रुपये है.

जापान से कोरिया तक बाजार में भूचाल, भारतीय बाजार भी लुढ़के — शुरुआती कारोबार में धड़ाम हुए ये स्टॉक्स

मुंबई      एशियाई शेयर बाजारों में मचे कोहराम के बीच भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन की शुरुआत बेहद खराब रही. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स खुलने के साथ ही 600 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 150 अंक टूट गया. इस बीच कई दिग्गज कंपनियों के शेयर ओपनिंग के साथ ही बिखर गए, इनमें भारतीय एयरटेल से लेकर एचसीएल टेक तक शामिल हैं. बता दें कि जापान का निक्केई 1100 अंक से ज्यादा टूटकर क्रैश हो गया, तो हांगकांग का हैंगसेंग 300 अंक से ज्यादा फिसलकर कारोबार कर रहा था. सेंसेक्स-निफ्टी में तेज गिरावट  Share Market में कारोबार शुरू होने पर बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 83,311 की तुलना में फिसलकर 83,150 के लेवल पर ओपन हुआ. लेकिन ये गिरावट कुछ ही मिनटों और इतनी तेज हो गई, कि Sensex 620 अंक की गिरावट लेकर 82,690 पर कारोबार करता दिखाई दिया.  सेंसेक्स की तरह ही निफ्टी भी खुलते ही धराशायी हो गया. एनएसई का ये इंडेक्स अपने पिछले बंद 25,509 के लेवल से गिरकर 25,433 पर ओपन हुआ और फिर अचानक बुरी तक टूटते हुए 175 अंक 25,334 पर ट्रेड करता नजर आया.  ये 10 शेयर खुलते ही धड़ाम शेयर बाजार में आई तेज गिरावट के बीच सबसे ज्यादा बिखरने वाले शेयरों की बात करें, तो BSE लार्जकैप कैटेगरी में शामिल 30 में से 27 स्टॉक रेड जोन में कारोबार कर रहे थे. टेलीकॉम दिग्गज कंपनी भारतीय एयरटेल के शेयर (Bharti Airtel Share) में ब्लॉक डील की खबर के बाद सबसे ज्यादा गिरावट आई और ये करीब 4% फिसलकर 2012 रुपये पर आ गया.  इसके अलावा HCL Tech (2%), TCS (1.50%) और Tech Mahindra Share (1.40%) की गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे. मिडकैप कैटेगरी में देखें, तो Hext Share (4%), Escorts Share (3%), Bharti Hexacomm Share (2.90%) और Kaynes Share (2.77%) फिसलकर ट्रेड कर रहे थे. स्मॉलकैप कंपनियों में Bliss GVS Share (16%), तो Amber Share (14%) तक फिसल गया. 1586 शेयर गिरावट के साथ ओपन  खराब ग्लोबल संकेतों के बीच गिरावट के साथ खुले शेयर बाजार के दोनों इंडेक्स में भगदड़ मची नजर आई. जब Stock Market में सुबह 9.15 बजे पर ट्रेडिंग शुरू हुई, तो उस समय बाजार में मौजूद 1586 कंपनियों के शेयरों ने अपने पिछले बंद के मुकाबले फिसलकर ट्रेड शुरू किया. तो वहीं 830 शेयरों ने बिखरे बाजार के बावजूद भी तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत की, जबकि 131 शेयरों की फ्लैट ओपनिंग हुई.  एशियाई बाजारों में मचा कोहराम शेयर बाजार में खराब शुरुआत के संकेत विदेशी बाजारों से मिल रहे थे. दरअसल, ज्यादातर Asian Market लाल निशान पर कारोबार कर रहे थे. Gift Nifty 117 अंक की गिरावट में नजर आ रहा था, तो वहीं जापान का निक्केई तो 1134 अंक फिसलकर 49,749 पर आ गया. हांगकांग का Hanseng 310 अंक की गिरावट लेकर 26,176 पर, जबकि साउथ कोरिया का KOSPI Index 121 अंक गिरकर 3,906 पर कारोबार कर रहा था. 

भारतीय पेट्रोलियम निर्यात में बूम! स्पेन बना नया केंद्र, 46,000% की जबरदस्त छलांग

नई दिल्ली एक तरफ यूरोपीय देशों ने रूस के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है, वहीं दूसरी तरफ रूसी तेल के बिना उनकी ईंधन की जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं. इसलिए वे दूसरे देशों से रिफाइन किया हुआ तेल मंगाना पड़ रहा है. इसका बड़ा फायदा भारत को हुआ है. भारत से स्पेन को होने वाले पेट्रोलियम निर्यात में इस साल जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. सितंबर 2025 में भारत ने स्पेन को जितना रिफाइंड पेट्रोलियम भेजा, वह पिछले साल की तुलना में लगभग 46,000 प्रतिशत ज्यादा रहा. और गौर करने वाली बात ये है कि भारत के पास कच्चा तेल रूस से ही आ रहा है. बता दें कि पिछले साल सितंबर में भारत ने स्पेन को सिर्फ 1.1 मिलियन डॉलर का पेट्रोलियम निर्यात किया था, जबकि इस साल सितंबर में यह आंकड़ा 513.7 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया. महीने-दर-महीने की तुलना करें तो बढ़ोतरी 61,000 प्रतिशत से भी ज्यादा है. मनीकंट्रोल की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, इस तेजी का सीधा असर यह हुआ कि भारत का स्पेन को कुल निर्यात भी सितंबर में 151 प्रतिशत बढ़ गया. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बढ़ोतरी इसलिए हुई क्योंकि भारत के रिफाइनर अब दक्षिण यूरोप और इबेरिया क्षेत्र में ईंधन की बढ़ती मांग का फायदा उठा रहे हैं, खासकर एविएशन फ्यूल और मिड-डिस्टिलेट्स (जैसे डीजल और केरोसिन) की मांग के कारण. यूरोप की योजना- 2027 तक LNG के आयात पर भी बैन यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब यूरोपीय संघ (EU) ने ऐलान किया है कि जनवरी से वे ऐसे रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का आयात पूरी तरह रोक देंगे, जो रूसी कच्चे तेल से बने हैं. भले ही उन्हें किसी तीसरे देश (जैसे भारत) में प्रोसेस किया गया हो. रूस पर युद्ध के चलते अमेरिका और यूरोपीय संघ लगातार नए प्रतिबंध लगा रहे हैं. हाल ही में अमेरिका ने रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों, Rosneft और Lukoil, पर अंतरराष्ट्रीय लेन-देन रोक दिया था, जबकि यूरोपीय संघ ने रूसी LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) के आयात पर भी 2027 से पूरी तरह रोक लगाने की योजना बनाई है. भारत अभी भी अपनी रिफाइनिंग जरूरतों के लिए काफी हद तक रूसी कच्चे तेल पर निर्भर है. रूस भारत को कुल तेल जरूरतों का लगभग 34 प्रतिशत तेल सप्लाई करता है, जबकि 2022 में यूक्रेन युद्ध से पहले यह हिस्सा केवल 0.2 प्रतिशत था. सवाल है कि आखिर स्पेन ही क्यों? दरअसल, पहले भारत से अधिकतम रिफाइंड तेल नीदरलैंड्स को जाता था, जो यूरोप का मुख्य वितरण केंद्र माना जाता है. लेकिन अब वहां पर नियम सख्त हो गए हैं और रूसी तेल से बने ईंधन पर प्रतिबंधों की वजह से भारतीय कंपनियां जोखिम से बचते हुए अपना माल सीधे उन देशों को भेज रही हैं जहां उसकी असल में जरूरत है, जैसे कि स्पेन और नीदरलैंड्स, दोनों मिलकर भारत के यूरोपीय ईंधन निर्यात का लगभग पूरा हिस्सा लेते हैं. सितंबर 2025 में स्पेन ने भारत से सबसे ज्यादा जो चीज आयात की, वह पेट्रोलियम उत्पाद थे. उसके बाद लोहा-इस्पात और मोटर वाहन रहे. पिछले साल सितंबर या इस साल अगस्त तक पेट्रोलियम उत्पाद स्पेन के शीर्ष 50 आयातों में भी नहीं थे, लेकिन अब वे पहले स्थान पर पहुंच गए हैं. यह बदलाव साफ दिखाता है कि भारत की यूरोपीय ईंधन व्यापार नीति अब उत्तरी यूरोप के वितरण केंद्रों से हटकर सीधे दक्षिण यूरोप के बाजारों की ओर मुड़ रही है. हालांकि, भारत के पेट्रोलियम उत्पादों का कुल निर्यात यूरोपीय संघ में इस साल सितंबर में 3.6 प्रतिशत घट गया, लेकिन पूरे विश्व में भारत का पेट्रोलियम निर्यात 14.8 प्रतिशत बढ़ा है.

पतंजलि को HC की सख्त टिप्पणी: डाबर की याचिका पर कोर्ट में गर्म बहस

नई दिल्ली बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की है। पतंजलि आयुर्वेद ने अपने च्यवनप्राश के विज्ञापन में दूसरी कंपनियों के उत्पादों के लिए धोखा शब्द का इस्तेमाल किया था। इसे लेकर डाबर ने आपत्ति जताई है और हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल हुई। इसी पर सुनवाई करते हुए बेंच ने पतंजलि आयुर्वेद से सवाल किया कि आखिर आप कैसे दूसरी कंपनियों के उत्पाद को धोखा कह सकते हैं। जस्टिस तेजस करिया ने कहा, 'आखिर आप कैसे सभी दूसरी कंपनियों की ओर से बनाए गए च्यवनप्राश को धोखा कह सकते हैं।'   जज ने कहा कि पतंजलि की ओर से यह दावा किया जा सकता है कि उसका उत्पाद सर्वोत्तम है, लेकिन वह किसी अन्य के सामान को फ्रॉड नहीं कह सकते। बेंच ने कहा, 'आप गुणवत्ता की बात कहिए। इसमें क्या समस्या है। लेकिन इस तरह की बात नहीं कहनी चाहिए। आप कह रहे हैं कि बाकी सब धोखा है और मैं सही हूं। आखिर आप कैसे अपने अलावा अन्य सभी च्यवनप्राश को धोखा कह सकते हैं। आप कह सकते हैं कि आपकी क्वॉलिटी बेहतर है, लेकिन किसी को फ्रॉड कहना सही नहीं है। क्या धोखा के अलावा शब्दकोश में कोई और शब्द नहीं है, जिसका इस्तेमाल किया जा सके।' अदालत ने कहा कि धोखा तो एक नकारात्मक शब्द है, जिसका आप प्रयोग कर रहे हैं। बेंच ने कहा, 'धोखा एक नकारात्मक और अपमानजनक शब्द है। आप कह रहे हैं कि वे लोग धोखेबाज हैं और लोगों के साथ धोखा हुआ है।' दरअसल इस विज्ञापन को लेकर डाबर ने पतंजलि आयुर्वेद पर मुकदमा किया है। डाबर का कहना है कि आपका विज्ञापन मानहानि वाला है। आपने इसके माध्यम से प्रतिस्पर्धा के नियमों को तोड़ा है और अपमानजनक बातें कही हैं। शिकायत में कहा गया है कि पतंजलि के विज्ञापन में च्यवनप्राश का बाबा रामदेव प्रचार करते हैं। वह कहते हैं कि च्यवनप्राश के नाम पर ज्यादातर लोगों के साथ धोखा हो रहा है। इसके आगे विज्ञापन में कहा गया है कि पतंजलि के च्यवनप्राश में ही आयुर्वेद की असली ताकत है और यही असली है। डाबर का कहना है कि यह विज्ञापन हमारे लिए मानहानि जैसा है। कंपनी का कहना है कि हमारा उत्पाद तो 1949 से ही बाजार में है और इसकी काफी प्रतिष्ठा है। डाबर ने अपनी अर्जी में कहा कि च्यवनप्राश के बाजार में हमारी हिस्सेदारी 61 फीसदी है। पतंजलि का यह विज्ञापन हमारी प्रतिष्ठा को धूमिल करता है और यह मानहानि वाला है। डाबर ने कहा कि यह विज्ञापन तो च्यवनप्राश तैयार करने वाली सभी कंपनियों के प्रति आपत्तिजनक बात करता है। यही नहीं डाबर ने पतंजलि के दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें उसने कहा कि उसके उत्पाद में 51 जड़ी-बूटियों का मिश्रण है।  

सरकारी कर्मचारियों की खुशखबरी: नई वेतन संरचना से 3 गुना तक बढ़ सकता है पे-स्केल!

नई दिल्ली  केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए खुशखबरी आई है। लंबे इंतज़ार के बाद आखिरकार आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का गठन औपचारिक रूप से कर दिया गया है। यह आयोग सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, भत्ते और अन्य वित्तीय लाभों की समीक्षा करेगा और ज़रूरी सुधारों की सिफारिश केंद्र को सौंपेगा। इस फैसले से करीब 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधा फायदा पहुंचने की संभावना है। आयोग का काम क्या होगा? सरकार ने आयोग के साथ उसका टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) भी जारी किया है। इसके तहत आयोग को कई अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं — मौजूदा वेतन ढांचे, सेवा शर्तों और रिटायरमेंट लाभों की गहन समीक्षा करना। देश की आर्थिक स्थिति, मुद्रास्फीति (महंगाई) और विकास दर को ध्यान में रखते हुए वेतन और पेंशन में संशोधन के सुझाव देना। सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ और कर्मचारियों की आय — दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना। हर 10 साल में सरकार नया वेतन आयोग गठित करती है ताकि कर्मचारियों की आय को महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप समायोजित किया जा सके। कब लागू होंगे नए वेतन नियम? पिछला, यानी सातवां वेतन आयोग, 1 जनवरी 2016 से प्रभावी हुआ था। उसी क्रम में माना जा रहा है कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकती हैं। सरकार ने आयोग को 18 महीने का समय दिया है ताकि वह सभी मंत्रालयों, विभागों और कर्मचारी संगठनों से विचार-विमर्श कर रिपोर्ट सौंप सके। अगर रिपोर्ट में देरी होती है, तो कर्मचारियों को एरियर (arrears) के रूप में बढ़ा हुआ वेतन मिल सकता है। कितना बढ़ेगा वेतन और पेंशन? कर्मचारियों के लिए सबसे अहम रहेगा फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) — यानी पुराने वेतन से नए वेतन में कितनी गुना बढ़ोतरी होगी। सातवें वेतन आयोग में यह 2.57 था। जानकारों का अनुमान है कि इस बार यह 2.8 से 3.0 के बीच रह सकता है। अगर ऐसा होता है तो कर्मचारियों के बेसिक पे (Basic Pay) में उल्लेखनीय इज़ाफा देखा जा सकता है। इसके साथ ही, महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और अन्य Allowances में भी बदलाव संभव है, जिससे पेंशनर्स को भी सीधा लाभ मिलेगा।    क्यों अहम है यह फैसला? सरकार का उद्देश्य है कि वेतन वृद्धि आर्थिक रूप से टिकाऊ (Fiscally Sustainable) हो — यानी न तो सरकारी बजट पर असंतुलित दबाव पड़े और न ही कर्मचारियों की वास्तविक आय घटे। 8वां वेतन आयोग इसलिए खास है क्योंकि यह एक ऐसे दौर में आ रहा है जब महंगाई दर बढ़ रही है, और सरकारी कर्मचारियों के लिए यह राहत भरी खबर साबित हो सकती है।  

अनिल अंबानी पर ED का दबाव, पहले 7500Cr की संपत्ति कुर्क की गई

मुंबई  अनिल अंबानी की मुश्किलें थमती नजर नहीं आ रही हैं. बीते कुछ दिनों से उनके नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप पर ED की कार्रवाई जारी है और 7500 करोड़ रुपये की संपत्तियों की कुर्की की जा चुकी है. अब प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल अंबानी को 14 नवंबर को ईडी कार्यालय में बुलाया है. ये दूसरी बार है जबकि ईडी ने उन्हें तलब किया है.  लगातार जारी है ED का एक्शन  गौरतलब है कि 31 अक्टूबर 2025 को PMLA की धारा 5(1) के तहत कुर्की के आदेश जारी किए गए थे. इसके तहत रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) द्वारा जुटाए गए सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 40 से ज्यादा संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की गई हैं. ईडी ने जिन 7,500 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया है, उनमें मुंबई के बांद्रा वेस्ट, पाली हिल में स्थित उनका एक आवास भी शामिल है. ईडी की कार्रवाई के बाद हालांकि, Anil Ambani Reliance Group की ओर से स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया गया कि इससे उनके बिजनेस पर कोई असर नहीं पड़ा है. कंपनी की ओर से कहा गया कि ईडी द्वारा कुर्क की गईं ज्यादातर संपत्तियां रिलायंस कम्युनिकेशन की हैं, जो छह साल से कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) से गुजर रही है. रिलांयस पावर और रिलायंस इंफ्रा की परफॉर्मेंस पर भविष्य में भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. अगस्त में भी हुई थी अनिल अंबानी की पेशी अनिल अंबानी के रिलायंस समूह पर ईडी की जांच लंबे समय से चल रही है. इससे पहले 5 अगस्‍त को ED ने रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और एमडी अनिल अंबानी को कथित लोन फ्रॉड केस की चल रही जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया था. वहीं उनकी कंपनियों पर तलाशी अभियान भी कई चरण में चलाया जा चुका है.  अनिल अंबानी की मुश्किलों को बढ़ाने वाला मनी लॉन्ड्रिंग क यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें कहा गया कि आरएचएफएल और आरसीएफएल के जरिए जुटाए गए सार्वजनिक धन को अनिल अंबानी समूह से जुड़ी संस्थाओं से जुड़े लेन-देन के दौरान डायवर्ट और लॉन्ड्रिंग किया गया था.  दिल्ली, मुंबई से हैदराबाद तक एक्शन बता दें हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई कुर्की की कार्रवाई जिन संपत्तियों पर की गई है. उनमें मुंबई के पाली हिल स्थित आवास, नई दिल्ली स्थित रिलायंस सेंटर की संपत्ति और दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मुंबई, पुणे, ठाणे, हैदराबाद, चेन्नई (कांचीपुरम समेत) और पूर्वी गोदावरी में स्थित कई अन्य इन संपत्तियों में कार्यालय परिसर, आवासीय इकाइयां और प्लॉट शामिल हैं. 

टाटा मोटर्स का सम्मान: वर्ल्ड चैंपियन बेटियों को गिफ्ट में दी जाएगी Sierra एसयूवी

मुंबई  भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाने के लिए टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल ने एक अनोखा कदम उठाया है. कंपनी टीम की हर सदस्य को जल्द लॉन्च होने वाली नई Tata Sierra की एक-एक यूनिट भेंट करेगी. यह सिर्फ एक तोहफ़ा नहीं, बल्कि उनके अदम्य साहस, समर्पण और देश को गौरवान्वित करने की भावना के प्रति एक सच्चा सम्मान होगा. बीते 2 नवंबर को हुए वूमेंस वर्ल्ड कप फाइनल में भारतीय टीम ने साउथ अफ्रीका को 52 रनों से करारी शिकस्त दी थी. यह पहला मौका था जब भारतीय महिला टीम ने वर्ल्ड कप जीता था. इस प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों ने गेंद और बल्ले से वो करिश्मा कर दिखाया था, जिसका इंतजार सालों से था. अब मौका है इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाने का और इन खिलाड़ियों को सम्मानित करने का.  टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल लिमिटेड के एमडी और सीईओ शैलेश चंद्र ने कहा, “भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने अपने असाधारण प्रदर्शन और शानदार जीत से पूरे देश को गर्व का एहसास कराया है. उनका सफर दृढ़ निश्चय और विश्वास की ताकत का प्रतीक है, जो हर भारतीय को प्रेरित करता है. टाटा मोटर्स के लिए यह गर्व की बात है कि हम इन लीजेंड्स को एक और लीजेंड – Tata Sierra – भेंट कर रहे हैं. यह दो दिग्गजों की साझी भावना और अनंत प्रेरणा का प्रतीक है.” टीम के हर मेंबर को मिलेगा टॉप मॉडल टाटा मोटर्स ने ऐलान किया है कि, भारत को विश्वविजयी बनाने वाली महिला क्रिकेट टीम के हर सदस्य को एक-एक टाटा सिएरा एसयूवी भेंट की जाएगी. टाटा सिएरा को आगामी 25 नवंबर 2025 को लॉन्च किया जाना है. कंपनी टाटा सिएरा के फर्स्ट बैच को तोहफे में देगी और इसमें एसयूवी का टॉप मॉडल शामिल होगा.   कैसी है नई Tata Sierra  भारत में 90 के दशक का ऑटोमोबाइल इतिहास जब लिखा जाएगा, तो Tata Sierra का नाम उसमें सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेगा. यह वही एसयूवी थी जिसने देश को पहली बार 'लाइफस्टाइल व्हीकल' की झलक दिखाई थी. अब तीन दशक बाद, टाटा मोटर्स इस दिग्गज ब्रांड को फिर से जीवंत करने रही है और टाटा सिएरा को बिल्कुल नए अंदाज में पेश करने की तैयारी है.   एक्सटीरियर डिज़ाइन नई Sierra अपने डिज़ाइन में अतीत की झलक और मॉर्डन टेक्नोलॉजी का अद्भुत मिश्रण लेकर आएगी. इसमें स्कल्प्टेड बोनट, शार्प एंगल लाइन्स, और ब्लैक्ड-आउट ग्रिल पर उकेरा गया ‘SIERRA’ नेमप्लेट है. इसके साथ फ्रंट में कनेक्टेड LED लाइट बार, डुअल-टोन अलॉय व्हील्स और पिलर्स पर दिया गया कलर डिटेलिंग, पुराने Sierra के मशहूर 'रैप-अराउंड ग्लास' लुक को आधुनिक अंदाज़ में पेश करती है. कैसा होगा केबिन इंटीरियर की बात करें तो नई Sierra में ट्रिपल-स्क्रीन सेटअप होगा, जिसमें डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, इंफोटेनमेंट यूनिट और को-पैसेंजर डिस्प्ले शामिल है. SUV में Level-2 ADAS, पैनोरमिक सनरूफ, वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, डुअल-जोन क्लाइमेट कंट्रोल और एडवांस्ड कनेक्टिविटी जैसे फीचर्स मिलेंगे. इंजन ऑप्शन टाटा की मल्टी-पावरट्रेन स्ट्रैटेजी के तहत, Sierra को पहले अलग-अलग इंजन विकल्पों के साथ पेश किया जाएगा. और अगले साल इसके ऑल-इलेक्ट्रिक वेरिएंट के रूप को भी बाजार में उतारा जाएगा. इसमें 1.5-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन और 2.0-लीटर टर्बो डीज़ल इंजन मिलने की उम्मीद है, जो मैनुअल और ऑटोमैटिक दोनों ट्रांसमिशन के साथ आएंगे. क्या होगी कीमत हालांकि लॉन्च से पहले Tata Sierra की कीमत के बारे में कुछ भी कहना थोड़ी जल्दबाजी होगी. लेकिन इसकी कीमतें 13.50 लाख से 24 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच होने की उम्मीद है. बाजार में इसका मुकाबला Mahindra Thar Roxx और MG Hector जैसी एसयूवी से होगा.

मार्केट में फिर लौटी रफ्तार: तूफानी तेजी से इन 10 शेयरों ने बनाया निवेशकों को मालामाल

मुंबई  शेयर बाजार (Stock Market) में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत हुई, तो बीते दिनों की तेज गिरावट पर ब्रेक लगा नजर आया. सेंसेक्स-निफ्टी खुलने के साथ ही तूफानी तेजी के साथ भागने लगे. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला Sensex मिनटों में 400 अंक से ज्यादा उछल गया तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का Nifty भी 25600 के पार निकल गया. इस बीच शुरुआती कारोबार में एशियन पेंट्स, रिलायंस और एसबीआई जैसे स्टॉक्स गदर मचाते हुए नजर आए.  सेंसेक्स-निफ्टी की गिरावट पर ब्रेक शेयर मार्केट में सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गिरावट पर ब्रेक लगा, तो सेंसेक्स-निफ्टी ने जोरदार शुरुआत की. बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 83,459 की तुलना में उछलकर 83,516 पर कारोबार की शुरुआत की और कुछ ही मिनटों में ये 400 अंक के आस-पास की तेजी लेकर 83,846 पर कारोबार करता हुआ नजर आया. एनएसई के निफ्टी इंडेक्स की चाल पर नजर डालें, तो इसने अपने पिछले बंद 25,593 पर कारोबार शुरू किया और फिर अचानक 25,679 तक उछल गया.     इससे पिछले कारोबारी दिन मंगलवार को शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई थी. सेंसेक्स इंडेक्स 519 अंक टूटकर बंद हुआ था, तो वहीं एमएसई के इंडेक्स ने 167 अंक फिसलकर क्लोजिंग की थी. 1296 शेयर ग्रीन जोन में खुले शुरुआती कारोबार में बाजार की तेजी के बीच 1296 कंपनियों के स्टॉक्स ने अपने पिछले बंद के मुकाबले उछाल भरते हुए ग्रीन जोन में ओपनिंग की, तो हीं 1219 कंपनियों के शेयर ऐसे रहे, जो गिरावट के साथ रेड जोन में खुले. इसके अलावा 251 कंपनियों के शेयरों की स्थिति में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला और इनकी फ्लैट ओपनिंग रही.  विदेशी बाजारों में तेजी का असर  भारतीय शेयर मार्केट के लिए विदेशी बाजारों से पॉजिटिव संकेत पहले से ही मिल रहे हैं. ज्यादातर एशियाई बाजारों में गुरुवार को तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत हुई थी. जापान का निक्केई बीते कारोबारी दिन क्रैश होने के बाद आज 500 अंक से ज्यादा की उछाल के साथ कारोबार करता दिखा, तो साउथ कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंगसेंग भी ग्रीन जोन में था.  रिलायंस से एसबीआई तक भागे शेयर बाजार में तेजी के बीच सबसे ज्यादा भागने वाले शेयरों पर नजर डालें, तो लार्जकैप कैटेगरी में Asian Paints Share (5%), M&M Share (2.60%), Reliance Share (1.60%), Adani Ports Share (1.25%) और SBI Share (1.15%) की तेजी लेकर ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा मिडकैप में ASTRAL Share (5.30%), Paytm Share (2.80%) चढ़ा था. स्मॉलकैप में Redington Share (12%), CCL Share (11.34%) और RE Ltd Share (10%) की उछाल के साथ कारोबार कर रहा था. 

पैन कार्ड बंद होने की बड़ी चेतावनी: समय पर नहीं किया यह काम, तो ठप हो जाएंगे वित्तीय लेनदेन

नई दिल्ली  PAN-Aadhaar linking: भारत सरकार ने स्थायी खाता संख्या (PAN) और आधार कार्ड (Aadhaar Card) को लिंक करना अनिवार्य कर दिया है। टैक्स सलाहकार मंच TaxBuddy ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि आपने 31 दिसंबर 2025 तक PAN को आधार से नहीं जोड़ा, तो आपका PAN कार्ड 1 जनवरी 2026 से निष्क्रिय हो जाएगा।   TaxBuddy के मुताबिक, 'आपका PAN कार्ड 1 जनवरी 2026 से डीएक्टिवेट हो जाएगा। न ITR फाइल कर पाएंगे, न रिफंड मिलेगा। यहां तक कि आपकी सैलरी क्रेडिट या SIP भी फेल हो सकती है।' इस चेतावनी के साथ ही टैक्स विशेषज्ञों ने लोगों को जल्द से जल्द PAN-आधार लिंकिंग पूरी करने की सलाह दी है, ताकि वित्तीय लेन-देन या टैक्स से जुड़े किसी भी काम में रुकावट न आए। कई बार बढ़ी समय-सीमा बता दें कि सरकार ने PAN–आधार लिंकिंग की समय-सीमा कई बार बढ़ाई है, लेकिन अब तक नई डेडलाइन 31 दिसंबर 2025 ही तय है। इसके बाद कोई और विस्तार मिलने की संभावना कम है। कौन-कौन से लोगों को PAN–आधार लिंक करना अनिवार्य है? वित्त मंत्रालय की 3 अप्रैल 2025 की अधिसूचना के अनुसार, 'हर वह व्यक्ति जिसे 1 अक्टूबर 2024 से पहले आधार आवेदन फॉर्म के एनरोलमेंट आईडी के आधार पर PAN आवंटित किया गया है, उसे अपना आधार नंबर 31 दिसंबर 2025 तक आयकर विभाग को सूचित करना होगा।' इसका मतलब यह है कि अगर आपने आधार एनरोलमेंट आईडी के जरिए PAN बनवाया था, तो आधार नंबर मिलने के बाद PAN को आधार से लिंक करना अनिवार्य है, भले ही PAN पहले से बना हो। आयकर विभाग के e-filing पोर्टल पर यह प्रक्रिया ऑनलाइन बहुत आसानी से की जा सकती है। अगर PAN–आधार लिंक नहीं किया तो क्या होगा? यदि आप 31 दिसंबर 2025 तक PAN–आधार लिंकिंग पूरी नहीं करते हैं, तो 1 जनवरी 2026 से आपका PAN निष्क्रिय हो जाएगा। इस स्थिति में आपको कई तरह की दिक्कतें होंगी: – आप आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल या सत्यापित नहीं कर पाएंगे। – टैक्स रिफंड नहीं मिलेगा। – लंबित ITR प्रोसेस नहीं होंगे। – TDS/TCS की जानकारी Form 26AS में नहीं दिखेगी। – TDS/TCS की कटौती उच्च दरों पर की जाएगी। – पैन दोबारा लिंक करने के बाद यह फिर सक्रिय हो जाएगा, आमतौर पर 30 दिनों के भीतर। निष्क्रिय PAN के वित्तीय असर बता दें कि अगर PAN निष्क्रिय हो जाता है तो आपके मौजूदा बैंक खाते और निवेश सुरक्षित रहेंगे, लेकिन आप नए निवेश, शेयर ट्रेडिंग या KYC अपडेट जैसे वित्तीय लेन-देन नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा आपकी सैलरी ट्रांसफर या SIP ऑटो-डेबिट भी असफल हो सकती है। नए बैंक खाते खोलने, निवेश खरीदने या रिडीम करने में रुकावट आ सकती है। ITR फाइलिंग या टैक्स कंप्लायंस रुक जाएगी। यानि, भले ही आपका पैसा सुरक्षित रहे, लेकिन वित्तीय लेन-देन और टैक्स से जुड़े सभी कार्य ठप हो जाएंगे, जब तक आपका PAN पुनः सक्रिय नहीं हो जाता। PAN–आधार लिंक करने की प्रक्रिया (स्टेप बाय स्टेप) 1. आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं- https://www.incometax.gov.in 2. “Link Aadhaar” विकल्प चुनें। 3. PAN नंबर, आधार नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज करें। 4. OTP वेरिफिकेशन करें। 5. यदि PAN पहले से निष्क्रिय है, तो पहले ₹1,000 शुल्क का भुगतान करें। 6. प्रक्रिया पूरी होने के बाद ‘Quick Links → Link Aadhaar Status’ में जाकर स्टेटस जांचें।  

IFFCO का सफर: किसानों के लिए वरदान और भारत की सबसे बड़ी सहकारी समिति बनने की कहानी

नई दिल्ली अमूल और आईएफएफसीओ को वर्ल्ड कोऑपरेटिव मॉनिटर की ग्लोबल लिस्ट में पहला और दूसरा स्थान मिला है. ये पल भारत के लिए बेहद खास है. आपको बता दें कि आईएफएफसीओ (Indian Farmers Fertilizer Cooperative Limited) भारत में स्थित दुनिया का सबसे बड़ा फर्टिलाइजर कॉपरेटिव फेडरेशन है. ये भारत की सबसे बड़ी मल्टी-स्टेट सहकारी समिति है, जो देशभर के किसानों को फर्टिलाइजर और कृषि सेवाएं उपलब्ध कराती है. 1967 में स्थापित IFFCO के साथ आज 35,000 से अधिक सहकारी समितियां जुड़ी हुई हैं. यह संस्था सिर्फ खाद बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के जीवन के कई पहलुओं को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा रही है. कब हुई आईएफएफको की शुरुआत? आईएफएफको का ऑपरेटिंग स्ट्रचर काफी खास है. साल 1960 के दशक में भारत के सहकारी क्षेत्र की भूमिका बहुत बड़ी थी. उस समय देश में इस्तेमाल होने वाले लगभग 70 प्रतिशत खाद का वितरण सहकारी संस्थाओं के जरिए होता था. इन संस्थाओं के पास खाद बांटने की अच्छी व्यवस्था तो थी, लेकिन खुद उत्पादन की कोई सुविधा नहीं थी. इसलिए उन्हें खाद की आपूर्ति के लिए सरकारी या निजी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था. इस समस्या को दूर करने और देश में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर एक नई सहकारी संस्था बनाने का विचार आया. यह एक अनोखी पहल थी, जिसमें देश के किसानों ने अपनी सहकारी समितियों के माध्यम से एक ऐसी संस्था बनाई जो उनके हितों की रक्षा कर सके. भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (IFFCO) इसी सोच का नतीजा है. जब 1967 में इसकी शुरुआत हुई थी, तब सिर्फ 57 सहकारी समितियां इससे जुड़ी थीं. आज यह संख्या बढ़कर 39,800 से भी ज्यादा हो गई है. आईएफएफको को 3 नवंबर 1967 को एक मल्टी-यूनिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के रूप में रजिस्टर किया गया था. आईएफएफको का मुख्य काम बाद में 1984 और 2002 में आए मल्टीस्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट के तहत इसे एक बहुराज्यीय सहकारी संस्था के रूप में मान्यता मिली. आईएफएफको का मुख्य काम किसानों के लिए उर्वरक (खाद) का उत्पादन और वितरण करना है. इसके उपविधानों में संस्था की गतिविधियों का एक सही स्ट्रचर तय किया गया है, जिससे यह अपने सहकारी सिद्धांतों के साथ काम करती है. किसानों की भलाई को दी प्राथमिकता आईएफएफको को एक खाद कंपनी के बजाय एक ऐसी संस्था के रूप में देखा जाता है जो ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था और समाज दोनों को गहराई से प्रभावित करती है. इसकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह किसानों की भलाई को अपनी प्राथमिकता में रखती है. आईएफएफको ने कई ऐसे काम किए जो उस समय नए और जोखिम भरे माने जाते थे, लेकिन बाद में उन्होंने किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया. उदाहरण के तौर पर, आईएफएफको देश की पहली ऐसी संस्था थी जिसे ग्रामीण इलाकों में सामान्य बीमा का लाइसेंस मिला. इस बीमा योजना के तहत किसानों को खाद की खरीद के साथ बीमा कवरेज भी दिया गया, जिससे उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा मिली. मोबाइल कनेक्टिविटी से लेकर बीमा का दिया फायदा बीमा के अलावा, आईएफएफको ने ग्रामीण विकास के कई दूसरे क्षेत्रों में भी कदम बढ़ाए. इसने गांव-स्तर पर कृषि केंद्र बनाए, जहां से किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक और खेती के उपकरण आसानी से मिल सकें. इससे किसानों को दूर शहरों में जाकर सामान लेने की जरूरत नहीं रही और उनकी लागत भी कम हुई. आईएफएफको ने समय के साथ तकनीक को भी अपनाया. उसने एयरटेल के साथ मिलकर किसानों के लिए मोबाइल कनेक्टिविटी बढ़ाने की पहल की, ताकि वे बाजार की जानकारी, मौसम की रिपोर्ट और कृषि सलाह सीधे अपने फोन पर पा सकें. पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी आईएफएफको ने बड़ा काम किया है. इसके सामाजिक वनीकरण कार्यक्रम के तहत करीब 36,000 हेक्टेयर जमीन पर जंगल तैयार किए गए, जिससे पर्यावरण संतुलन बना और ग्रामीण इलाकों में हरियाली बढ़ी. आईएफएफको ने किसानों कीो आर्थिक और सामाजिक जरूरतों को भी नजरअंदाज नहीं किया. इसने पाकिस्तान फाइनेंस जैसी संस्थाओं से सीख लेकर किसानों को वित्तीय सहयोग देने की शुरुआत की. प्राकृतिक आपदाओं के समय, जैसे गुजरात भूकंप में, आईएफएफको ने राहत सामग्री, मेडिकल सहायता और जरूरतमंद परिवारों को छात्रवृत्तियां देकर मदद की. किसानों की भलाई के लिए इसने एनसीडीएक्स जैसे कमोडिटी एक्सचेंज से भी जुड़कर उनके लिए नए अवसर तैयार किए. आईएफएफको सिर्फ एक सहकारी संस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की रीढ़ है. इसकी सोच किसानों की भलाई, आत्मनिर्भरता और सतत विकास पर टिकी है. किसानों के हित में की गई लगातार मेहनत ने आईएफएफको को आज भारत की सहकारी आंदोलन की मिसाल बना दिया है.