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भाजपा नेता पर हमले के बाद रज्जाक पर चला बुलडोजर, कोरबा में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

कोरबा. भाजपा नेता पर हुए जानलेवा हमले के बाद प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने जिला पंचायत सदस्य एवं पूर्व जनपद उपाध्यक्ष रज्जाक अली के कथित अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में निर्माण को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। पिछले दिनों पर भाजपा नेता शिव बालक तोमर पर जिला पंचायत सदस्य राजकली एवं उसके साथियों ने हमला कर दिया था घटना में शिव बालक एवं रूप से घायल हो गया था। मामले में पुलिस ने पहले ही रज्जाक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और अब पुलिस एवं प्रशासन ने उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि मामले की जांच के दौरान रज्जाक अली के नाम से दर्ज निर्माण के दस्तावेजों और वैधानिक अनुमतियों की भी पड़ताल की गई। जांच में निर्माण में कथित तौर पर कई अनियमितताएं और नियमों का उल्लंघन सामने आया। इसके बाद जिला प्रशासन ने अवैध निर्माण हटाने का निर्णय लिया। एसडीएम, तहसीलदार, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम जेसीबी लेकर सीतामणी पहुंची और तोड़ने की कार्रवाई शुरू की। भारी पुलिस बल तैनात, भीड़ जुटी कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरे क्षेत्र मैं बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर पूरी कार्रवाई की निगरानी करते रहे। बुलडोजर कार्रवाई देखने के लिए आसपास के लोगों की भीड़ भी जमा हो गई। प्रशासन ने अवैध रूप से बने हिस्से को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध निर्माण, अतिक्रमण और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि सभी मामलों में नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही कदम उठाए जा रहे हैं। तरह-तरह की हो रही चर्चाएं इस कार्रवाई के बाद शहर का सियासी पारा चढ़ गया है। राजनीतिक गलियारों में मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विपक्ष ने कार्रवाई के समय पर सवाल उठाए हैं, वहीं प्रशासन ने निष्पक्ष कार्रवाई की बात कही है। कई मामले दर्ज है रज्जाक के विरुद्ध जिला पंचायत सदस्य राजा के विरुद्ध मारपीट सुमित के मामले दर्ज हैं । पुलिस ने पिछले दिनों रासुका के तहत कार्यवाही करने की प्रक्रिया शुरू की थी , हालांकि मामला अभी प्रक्रिया में है।

महंत अवैद्यनाथ के संकल्प से बदला शहजादपुर मंदिर, आज बना भव्य सिद्धपीठ

अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जिले में स्थित शहजादपुर मोहल्ले में श्रीराम जानकी सिद्धपीठ एक ऐसा मंदिर है जो 120 साल की आस्था,संघर्ष और पुनर्जागरण की जीवंत कहानी कहता है। आज यह मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है। वर्ष 1904 में देश में अंग्रेजों का राज था। लेकिन, यहां के जमींदारों के मन में राम भक्ति की लौ जल रही थी। शहजादपुर के जमींदारों ने लगभग पांच बिस्वा जमीन भगवान राम को समर्पित की। उस जमीन पर एक मंदिर बनाया गया। वह मंदिर मिट्टी और गारे से बना था। उसकी दीवारें मोटी और मजबूत थीं। मंदिर सादा था लेकिन भक्ति से भरा हुआ था। श्रीराम-जानकी मंदिर का किया था निर्माण मंदिर में भगवान श्रीराम माता जानकी, लक्ष्मण जी और बजरंगबली के विग्रह स्थापित किए गए। हर रोज पूजा, भोग और आरती होती थी। यह सिलसिला पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहा। जमींदार परिवार के वंशज अवधेश कुमार मेहरोत्रा ने इस जिम्मेदारी को पूरी लगन से निभाया। मंदिर की इमारत जर्जर हो गई समय बीतता गया, मंदिर में पूजा तो होती रही लेकिन इमारत कमजोर होने लगी। मिट्टी और गारे की दीवारों में दरारें आ गईं। छत से पानी टपकने लगा। जो मंदिर कभी मोहल्ले की शान था वह अब जर्जर हो चला था। भक्तों के मन में दुख था। पैसे नहीं थे और कोई रास्ता नहीं दिख रहा था। तभी एक बड़ा बदलाव आया जिसने इस मंदिर की किस्मत पलट दी। महंत अवैद्यनाथ का आना और एक बड़ा संकल्प वर्ष 1992 में पूरे देश में राम जन्मभूमि का आंदोलन चल रहा था। अयोध्या में राम मंदिर का सपना करोड़ों लोगों के दिल में था इस आंदोलन के सबसे बड़े नेताओं में से एक थे गोरक्षा पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ जी महाराज। वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरु भी थे। अपनी धर्म यात्रा के दौरान वे शहजादपुर के इस मंदिर में आए। मंदिर को जर्जर हालत देखकर उनका मन दुखी हो गया। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी राम भक्ति में लगाई थी। उनसे यह हालत देखी नहीं गई। उन्होंने उसी समय संकल्प लिया कि यह मंदिर भव्य बनेगा। उनका यह संकल्प एक दिव्य आशीर्वाद बन गया। मंदिर का नया अध्याय हुआ शुरू महंत अवैद्यनाथ के आशीर्वाद से 23 फरवरी 2015 को मंदिर के पुनर्निर्माण का काम शुरू हुआ। यह दिन इस मंदिर के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। स्थानीय भक्तों, दानदाताओं और ट्रस्ट के लोगों ने मिलकर यह काम शुरू किया। करीब तीन साल तक निर्माण चलता रहा। हर ईंट में भक्ति और मेहनत की छाप थी। धीरे धीरे एक टूटा हुआ मंदिर एक भव्य सिद्धपीठ में बदल गया। आज का भव्य मंदिर आज यह मंदिर लगभग 7000 वर्ग फुट में फैला हुआ है। यह दो मंजिला बन चुका है। मंदिर में कदम रखते ही एक अलग शांति और ऊर्जा का अहसास होता है। यहां कुल पांच दरबार हैं। पहला है श्रीराम दरबार जहां भगवान राम, माता जानकी और लक्ष्मण जी के विग्रह हैं। यह मंदिर का मुख्य दरबार है। दूसरा है माता जगदंबा दरबार जहां माँ की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। तीसरा है संकटमोचन बजरंगबली दरबार जहां हनुमान जी भक्तों को शक्ति और साहस देते हैं। चौथा है भगवान शिव दरबार जहां शिव भक्त अपनी पूजा करते हैं। पांचवां है श्री राधा-कृष्ण दरबार जो प्रेम और भक्ति का प्रतीक है। धार्मिक यात्रियों के लिए खास जगह श्रीराम जानकी मंदिर ट्रस्ट हर रोज सभी पांचों दरबारों में पूजा, भोग और आरती कराता है। सुबह मंगला आरती से लेकर रात की शयन आरती तक मंदिर में भक्ति का माहौल रहता है। पूरे साल यहां कई धार्मिक आयोजन होते हैं। रामनवमी पर शोभायात्रा और अखंड रामायण पाठ होता है। हनुमान जयंती पर सुंदरकांड पाठ और भंडारा होता है। जन्माष्टमी पर राधा-कृष्ण दरबार में सुंदर झांकियां सजती हैं। नवरात्रि में माता दरबार में नौ दिन का महोत्सव मनाया जाता है। सावन में शिव दरबार में खास अभिषेक होता है। अगर आप उत्तर प्रदेश की धार्मिक यात्रा पर हैं तो इस मंदिर जरूर आएं। अयोध्या, वाराणसी या प्रयागराज के दर्शन के साथ यहां भी दर्शन करें। यह मंदिर आपकी यात्रा को और पवित्र बना देगा। यहां आकर आप पांचों दरबारों में पूजा कर सकते हैं। एक महान संत के संकल्प की शक्ति को महसूस कर सकते हैं। 120 साल की यह यात्रा आज एक नए मोड़ पर है। शहजादपुर का यह सिद्धपीठ अब सिर्फ एक मंदिर नहीं है। यह सनातन धर्म की ताकत का, एक महान गुरु के संकल्प का और लाखों भक्तों की आस्था का जीवंत प्रमाण है।

कोविड-19 प्रभावित TET का हवाला देकर अनुकंपा नियुक्ति पर रोक नहीं, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

बिलासपुर. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एन के चन्द्रवंशी की एकलपीठ ने कहा है, कि कोरोना महामारी के कारण शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) समय पर आयोजित नहीं होने का नुकसान अनुकंपा नियुक्ति के आवेदक को नहीं भुगतना पड़ेगा. कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण पर विधि अनुसार पुनर्विचार कर 45 दिनों के भीतर निर्णय लेने कहा है. दरअसल, धमतरी निवासी वासुदेव साहू के पिता, जो सहायक शिक्षक थे, का वर्ष 2017 में सेवा के दौरान निधन हो गया था. इसके बाद वासुदेव ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया. आवश्यक शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करने के लिए उन्हें तीन वर्ष का समय दिया गया था. उन्होंने डी.एल.एड. की परीक्षा समय पर उत्तीर्ण कर ली, लेकिन मार्च 2020 में होने वाली टेट परीक्षा कोविड-19 के कारण निरस्त हो गई. बाद में जनवरी 2022 में आयोजित परीक्षा में उन्होंने सफलता प्राप्त की. इसके बावजूद पंचायत विभाग ने निर्धारित समय में योग्यता प्राप्त न करने का हवाला देकर उनकी अनुकंपा नियुक्ति का दावा अस्वीकार कर दिया. जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि, टेट परीक्षा समय पर आयोजित न होना अभ्यर्थी के नियंत्रण से बाहर की परिस्थिति थी. इसलिए उसे अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता. कोर्ट ने यह भी कहा, कि कोविड अवधि में समय-सीमा संबंधी राहत के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश इस मामले में भी लागू होंगे. हाईकोर्ट ने 6 दिसंबर 2022 का अयोग्यता आदेश निरस्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को वासुदेव साहू के अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण पर विधि अनुसार पुनर्विचार कर 45 दिनों के भीतर निर्णय लेने कहा है.

अयोध्या प्रकरण में नया मोड़: इस्तीफों की पुष्टि के बाद ट्रस्ट की पारदर्शिता पर विवाद गहराया

अयोध्या अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे सवाल यही है कि सबूत सुरक्षित हैं या नहीं? शनिवार को तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के त्यागपत्र की पुष्टि के बाद घटनाक्रम की समयरेखा को देखें तो कई ऐसे बिंदु सामने आते हैं, जिन पर जवाब अब भी बाकी हैं। एफआईआर होने तक सभी आठ आरोपी भी मंदिर में पहले जैसे ही आते-जाते रहे। अंदर उनसे काम लिया जा रहा था या नहीं, इसकी भी पारदर्शिता नहीं बरती गई। सवाल उठता है कि मंदिर के अंदर किसी की निगरानी थी या नहीं या जो कठघरे में हैं उन्हीं के हवाले छोड़कर सभी मौन हैं। चंपत राय ने क्यों कहा- कुछ उल्लेखनीय नहीं सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों, विशेषकर महामंत्री चंपत राय और न्यासी डॉ. अनिल मिश्रा को कथित अनियमितताओं की जानकारी पहले से थी, तो सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने या जांच की पहल करने में देरी क्यों हुई। अखिलेश यादव के बयान के बाद चंपत राय ने वीडियो जारी कर यहां तक कहा था कि ट्रस्ट में नियमित ऑडिट होता है। कोई उल्लेखनीय गड़बड़ी सामने नहीं आई है। मगर अब रुपयों की बरामदगी और गिरफ्तारी ने साफ कर दिया कि गड़बड़ी तो थी। जांच के दौरान भी आरोपी कार्य करते रहे ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्रारंभिक स्तर पर सब कुछ सामान्य था तो एसआईटी जांच की आवश्यकता क्यों महसूस हुई। जांच की निष्पक्षता को लेकर भी विपक्ष और कई सामाजिक कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि एसआईटी गठन से लेकर एफआईआर दर्ज होने तक जिन आठ कर्मचारियों पर आरोप लगे, वे अपने पदों पर कार्यरत रहे। साथ ही ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी भी अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहे। 23 जून को आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम में भी संबंधित पदाधिकारी व्यवस्थाओं की कमान संभालते दिखाई दिए। राम भक्तों का विश्वास बनाए रखने की चुनौती यहीं से एक और महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा होता है-क्या जांच शुरू होने और एफआईआर दर्ज होने के बीच संबंधित लोगों की संस्थान तक निरंतर पहुंच से संभावित साक्ष्यों के प्रभावित होने की आशंका थी। फिलहाल इसका कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है और न ही एसआईटी या सरकार ने ऐसा कोई निष्कर्ष जारी किया है। अब इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ी चुनौती केवल दोषियों को सजा दिलाने की नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों के विश्वास को बनाए रखने की है। आने वाले दिनों में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट, पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया ही तय करेगी कि कथित हेराफेरी की वास्तविक जिम्मेदारी किस पर है और क्या जांच के दौरान साक्ष्यों की सुरक्षा तथा ट्रस्ट की भूमिका पर उठे सवालों के संतोषजनक उत्तर मिल पाते हैं। 24 घंटे में बदली तस्वीर, पहले इनकार, फिर इकरार राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में आठ आरोपियों को जेल भेजे जाने के बाद अगले 24 घंटे में घटनाक्रम इतनी तेजी से बदला कि अयोध्या से लेकर देशभर में इसकी चर्चा होने लगी। शुक्रवार दोपहर अचानक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं, लेकिन शुरुआत में ट्रस्ट से जुड़े लगभग हर व्यक्ति ने इससे इनकार किया। गोपाल राव का प्रचार माध्यम पर निशाना कारसेवकपुरम से लेकर कार्यशाला तक मौजूद सेवादारों का कहना था कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है। यह भी बताया गया कि चंपत राय पूरे दिन कारसेवकपुरम स्थित अपने आवास 'भरत कुटी' से बाहर नहीं निकले। ट्रस्ट के व्यवस्था प्रभारी गोपाल राव ने भी मुस्कुराते हुए कहा, ‘प्रचार माध्यमों को देखकर लगता है कि ये लोग चंपत राय जी का इस्तीफा लेकर ही मानेंगे।’ उनके इस बयान के बाद भी अटकलों का दौर थमा नहीं। उधर सोशल मीडिया पर इस्तीफे की चर्चा लगातार तेज होती गई। अयोध्या में लोग एक-दूसरे को फोन कर इसकी पुष्टि करने की कोशिश करते रहे। विपक्षी दलों ने भी इसे मुद्दा बनाते हुए सोशल मीडिया पर सरकार और ट्रस्ट को घेरना शुरू कर दिया। नासिक से सबसे पहले इस्तीफे की पुष्टि सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों ने इसे बड़े स्तर की कार्रवाई की शुरुआत बताते हुए दावा किया कि अब ‘बड़ी मछलियों’ पर भी कार्रवाई तय है। इसके बावजूद न तो ट्रस्ट और न ही विश्व हिंदू परिषद की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई। करीब 24 घंटे बाद शनिवार को घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। नासिक में मौजूद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरी ने कुछ पत्रकारों के व्हाट्सएप संदेशों का जवाब देते हुए चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के त्यागपत्र की पुष्टि कर दी। इस्तीफे के बाद सोना-चांदी के सुरक्षित होने का दावा इसके तुरंत बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। प्रेस विज्ञप्ति में केवल इस्तीफों की पुष्टि ही नहीं की गई, बल्कि पहली बार यह भी स्पष्ट किया गया कि रामलला को समर्पित चांदी की ईंटें, सोना-चांदी, आभूषण और अन्य मूल्यवान समर्पण सुरक्षित हैं तथा उनका पूरा लेखा-जोखा उपलब्ध है। इस तरह महज 24 घंटे में इनकार से आधिकारिक पुष्टि तक का घटनाक्रम पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा मोड़ बन गया।

NEET UG Re-Exam में 8 बोनस मार्क्स का ऐलान, आज ही दर्ज करें आपत्ति, फिर नहीं मिलेगा मौका

लुधियाना. नेशनल टेस्टिंग एजैंसी (एन.टी.ए.) द्वारा आयोजित की गई नीट यूजी 2026 री-एग्जाम का रिजल्ट आने से पहले ही विद्यार्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है और परीक्षा देने वाले सभी उम्मीदवारों के 4 नंबर एडवांस में पक्के हो गए हैं। 21 जून को हुए री-एग्जाम की प्रोविजनल आंसर-की जारी कर दी गई है जिसमें फिजिक्स के एक सवाल को 'ड्रॉप' यानी हटा दिया गया है। इस हटाए गए सवाल के बदले परीक्षा में बैठने वाले सभी विद्यार्थियों को पूरे 4 बोनस नंबर दिए जाएंगे, भले ही किसी विद्यार्थी ने उस सवाल को हल करने की कोशिश की हो या नहीं। चूंकि यह परीक्षा एक ही शिफ्ट में हुई थी इसलिए देशभर के सभी 20 लाख विद्यार्थियों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा फिजिक्स के ही एक अन्य सवाल के 2 जवाब सही पाए गए हैं। जिन विद्यार्थियों ने उन दोनों विकल्पों में से किसी एक को भी चुना होगा, उन्हें भी पूरे 4 नंबर मिलेंगे। इलैक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स और वर्नियर कैलिपर्स से जुड़े सवालों को लेकर आपत्ति दर्ज करवाई गई थी। विशेषज्ञ अब इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि उच्च स्तरीय तैयारियों के बावजूद री-एग्जाम के प्रश्नपत्र में भी ऐसी नौबत क्यों आई और क्या प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में कोई बड़ी कमी रह गई थी। आपत्तियां दर्ज कराने का मौका एन.टी.ए. द्वारा जारी प्रोविजनल आंसर-की में यदि किसी विद्यार्थी को किसी सवाल के जवाब को लेकर कोई आपत्ति है, तो वह उसे 28 जून तक चैलेंज कर सकता है। एक सवाल को चैलेंज करने की फीस 200 रुपए तय की गई है। अगर आपत्ति सही पाई जाती है, तो यह फीस वापस कर दी जाएगी। फाइनल आंसर-की आने के बाद ही साफ होगा कि क्या कोई और सवाल भी हटाया गया है। फिजिक्स के साथ-साथ कैमिस्ट्री, बायोलॉजी और जूलॉजी में भी कुछ सवालों के गलत होने की आशंका जताई जा रही है।

CG में कच्ची दीवार बनी काल, दो मासूमों की मौत, महिला की हालत नाजुक

बेमेतरा. छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां दीवार ढहने से दो बच्चियों की मौत हो गई और एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। इस घटना से गांव में कोहराम मच गया है। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरु कर दी है। यह पूरा मामला नवागढ़ विधानसभा के ग्राम राउरपुर का है। बच्चियों की पहचान वंशिका (11) और राधिका (7) पिता ओमप्रकाश कोशले के रूप में हुई है और घायल महिला की पहचान शशिकला के रूप में की गई है। बताया जा रहा है कि आज दोनों बच्चे घर के आंगन में बर्तन धो रहे थे। इसी दौरान दीवार भरभरा कर गिर गई, जिसकी चपेट में दोनों बच्चे और महिला आ गई। दोनों बच्चों की मौत, महिला घायल चीख पुकार मचते ही पड़ोसी मौके पर पहुंचे और आनन फानन में 108 के जरिए सभी को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक दोनों बच्चियों की मौत हो चुकी थी। वहीं महिला की गंभीर हालत को देखते हुए उसे रायपुर रेफर किया गया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंच गई और मामले की जांच में जुट गई।

रेलवे में अनुकंपा नियुक्ति पर खुशखबरी, पात्र कर्मचारियों को मिलेगा पुरानी पेंशन का लाभ

भोपाल. रेलवे बोर्ड ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने वाले रेल कर्मचारियों और उनके परिवारों के हित में बड़ा फैसला लिया है। नए आदेश के अनुसार अब मृतक रेल कर्मचारी के आश्रित द्वारा अनुकंपा नियुक्ति के लिए पहली बार आवेदन जमा करने की तारीख को ही भर्ती की मुख्य तिथि यानी क्रूशियल डेट माना जाएगा। इस फैसले से उन कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जिनका आवेदन 31 दिसंबर 2003 या उससे पहले जमा किया गया था, लेकिन उनकी वास्तविक नियुक्ति एक जनवरी 2004 के बाद हुई। ऐसे कर्मचारियों को भी अब पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिल सकेगा। आवेदन की तारीख होगी भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में पहले कोई सीधा विज्ञापन या अधिसूचना जारी नहीं होती थी। इसी वजह से इन नियुक्तियों की कट-ऑफ तारीख तय करने में परेशानी आती थी। प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत किस तारीख से मानी जाए। रेलवे बोर्ड के नए आदेश के बाद अब यह तय कर दिया गया है कि जिस दिन अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन जमा किया गया था, वही तारीख भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की तारीख मानी जाएगी। रेलवे बोर्ड ने सभी जोन को दिए निर्देश रेलवे बोर्ड के उप निदेशक वित्त रमेश चंद्र पांडेय ने 24 जून को इस संबंध में नया आदेश जारी किया है। आदेश में उत्तर मध्य रेलवे समेत सभी जोन, उत्पादन इकाइयों के महाप्रबंधकों और मुख्य वित्तीय सलाहकारों को इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। अब उन सभी लंबित मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा, जिनमें तकनीकी तारीखों के कारण आश्रित कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा था। पहले क्या था नियम? अब तक पुरानी पेंशन का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलता था, जिनकी भर्ती प्रक्रिया एक जनवरी 2004 से पहले शुरू हो गई थी या जिन्हें उस तारीख से पहले नियुक्ति मिल गई थी। अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में प्रक्रिया शुरू होने की तारीख को लेकर असमंजस बना रहता था। नए आदेश से इस समस्या का समाधान होने की उम्मीद है और कई कर्मचारियों को पेंशन संबंधी लाभ मिल सकेगा। यूनियनों ने फैसले का किया स्वागत मेंस यूनियन के महामंत्री आरडी यादव और इंप्लाइज संघ के महामंत्री आरपी सिंह ने रेलवे बोर्ड के इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने इसे रेलकर्मियों के परिवारों के हित में ऐतिहासिक और न्यायसंगत कदम बताया। CPRO शशिकांत त्रिपाठी ने जानकारी दी कि इन सभी कर्मचारियों को रेलवे सेवा पेंशन नियम 2026 के तहत कवर किया जाएगा।

अकाली दल को बड़ा झटका, पूर्व विधायक दर्शन सिंह ने थामा वारिस पंजाब दे का दामन

लुधियाना. पंजाब की राजनीति में रविवार को एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। शिरोमणि अकाली दल को उस समय बड़ा झटका लगा, जब गिल विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक दर्शन सिंह शिवालिक ने पार्टी छोड़कर वारिस पंजाब दे का दामन थाम लिया। एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। इस अवसर पर संगठन के प्रमुख नेता और खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह तथा वरिष्ठ नेता मनप्रीत सिंह अयाली भी मौजूद रहे।पार्टी में शामिल होने के बाद दर्शन सिंह शिवालिक ने अपने फैसले के पीछे दो प्रमुख कारण बताए। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं को नशे की दलदल से बाहर निकालना उनकी पहली प्राथमिकता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पंथ की रक्षा और उससे जुड़े मुद्दों पर मजबूती से आवाज उठाना भी उनके इस निर्णय का प्रमुख आधार है। कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान नहीं शिवालिक ने शिरोमणि अकाली दल के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में लंबे समय से काम कर रहे समर्पित कार्यकर्ताओं और नेताओं को उचित सम्मान नहीं मिल रहा है। उनके अनुसार संगठन के भीतर कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है, जिससे कई नेता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं परिस्थितियों के चलते उन्होंने अकाली दल छोड़ने का फैसला लिया। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ नेता मनप्रीत सिंह अयाली ने भी अकाली दल के वर्तमान नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल निजी हितों और स्वार्थों से ऊपर उठकर निर्णय लें तो अकाली दल के अलग-अलग धड़ों को दोबारा एकजुट किया जा सकता है। अयाली ने संकेत दिया कि पार्टी के भीतर मतभेदों का प्रमुख कारण नेतृत्व शैली और निर्णय लेने का तरीका रहा है। चुनौतियों को सामना कर रही अकाली दल अयाली के इस बयान को पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अकाली दल पहले ही कई नेताओं के अलग होने और संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में गिल क्षेत्र से लंबे समय तक सक्रिय रहे पूर्व विधायक दर्शन सिंह शिवालिक का पार्टी छोड़ना संगठन के लिए एक और झटका माना जा रहा है। दर्शन सिंह शिवालिक का गिल विधानसभा क्षेत्र में अपना राजनीतिक आधार रहा है। ऐसे में उनके वारिस पंजाब दे में शामिल होने से स्थानीय स्तर पर पार्टी की सक्रियता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, आने वाले समय में इसका चुनावी और संगठनात्मक असर कितना होगा, यह राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। वारिस पंजाब दे कर रही संगठन विस्तार वारिस पंजाब दे लगातार अपने संगठन के विस्तार में जुटी हुई है और विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है। वहीं, शिरोमणि अकाली दल के सामने संगठन को मजबूत बनाए रखने और कार्यकर्ताओं के विश्वास को कायम रखने की चुनौती बनी हुई है। दर्शन सिंह शिवालिक के इस फैसले के बाद पंजाब की राजनीतिक हलचल और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अन्य नेता भी इसी तरह दल बदलते हैं, तो इसका असर प्रदेश की सियासी तस्वीर पर पड़ सकता है। फिलहाल, शिवालिक के वारिस पंजाब दे में शामिल होने और मनप्रीत सिंह अयाली के बयान ने पंजाब की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।

इंदौर-उज्जैन हाईवे पर बड़ा हादसा, बस पलटने से 20 लोग घायल, नशे में था चालक

उज्जैन. इंदौर-उज्जैन रोड पर शनिवार देर रात एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। इंदौर से उज्जैन आ रही सपना ट्रैवल्स की यात्रियों से भरी बस मेघदूत होटल के समीप अनियंत्रित होकर पलट गई। दुर्घटना में करीब 20 यात्री घायल हो गए, जिनमें कुछ को गंभीर चोटें आई हैं। घायलों को तत्काल उपचार के लिए चरक अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। जानकारी के अनुसार हादसा रात करीब एक से डेढ़ बजे के बीच हुआ। सपना ट्रैवल्स की बस इंदौर बस स्टैंड से सवारियां लेकर उज्जैन के नानाखेड़ा बस स्टैंड के लिए रवाना हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस में क्षमता से अधिक यात्री सवार थे और कई लोग खड़े होकर सफर कर रहे थे। इसी दौरान मेघदूत होटल के पास चालक ने नियंत्रण खो दिया और बस डिवाइडर पर चढ़ने के बाद पलट गई। बताया जा रहा है कि हादसे के समय तेज बारिश हो रही थी। यात्रियों का आरोप है कि चालक शराब के नशे में बस चला रहा था, जिससे दुर्घटना हुई। बस पलटते ही यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोगों ने राहत कार्य शुरू किया।सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को एंबुलेंस की मदद से अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त बस को जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। चालक के मेडिकल परीक्षण सहित दुर्घटना के कारणों की पड़ताल की जा रही है। ये यात्री हुए घायल दुर्घटना में वर्षा पत्नी गोविंद अग्रवाल (54) एवं पुत्र सुधीर अग्रवाल (25) निवासी ग्वालियर, खुशी पुत्री नीरज तिवारी (15) निवासी विजयनगर इंदौर, वंश पुत्र मोहन खत्री (10), वंदना पत्नी मोहन खत्री (32) निवासी साइन धाम कॉलोनी उज्जैन, हरविंदर सिंह पुत्र अर्जुन सिंह (32) निवासी जीवनखेड़ी सहित करीब 20 यात्री घायल हुए हैं। सभी को उपचार के लिए चरक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

CM विष्णु देव साय बोले- ‘मन की बात’ ने जनभागीदारी को दी नई ताकत, बना जनप्रेरणा का मंच

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' की 135वीं कड़ी जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों के साथ सुनी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 'मन की बात' आज जनता और नेतृत्व के बीच संवाद का सशक्त माध्यम बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचार देशवासियों को प्रेरित करने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी प्रत्येक कड़ी में देशभर से नवाचार, जनभागीदारी और प्रेरणादायी प्रयासों को सामने लाते हैं, जिससे समाज में सकारात्मक कार्यों को नई ऊर्जा मिलती है। उन्होंने कहा कि 'मन की बात' की अनेक कड़ियों में छत्तीसगढ़ के नवाचारों और उपलब्धियों का उल्लेख होना पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार प्रधानमंत्री मोदी ने आगामी गणेशोत्सव के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए मिट्टी से निर्मित भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा के महत्व पर भी प्रकाश डाला तथा वर्षा जल के प्रत्येक बूंद के संरक्षण का संदेश देते हुए जल संचय को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने मेघालय के जीवित रूट ब्रिज का उल्लेख करते हुए प्रकृति और मानव के अद्भुत समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विज्ञान, तर्क और जागरूकता के माध्यम से समाज में व्याप्त अंधविश्वासों को दूर करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। असम की महिलाओं द्वारा 'हरगिला आर्मी' के माध्यम से दुर्लभ पक्षी हरगिला के संरक्षण और उससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास जनजागरूकता का प्रेरक उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नागालैंड में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए संचालित नागालैंड बेबी लीग और नागालैंड वुमन फुटसाल लीग जैसी पहलों का उल्लेख किया। साथ ही नालंदा विश्वविद्यालय एवं सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ाने के प्रयासों की भी सराहना की। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि डोमिनिकन रिपब्लिक में 'ब्रह्मकमल डोमिनिकाना' के सदस्य वैदिक साहित्य का अध्ययन कर भारतीय संस्कृति से जुड़ रहे हैं। वहीं मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा की महिलाओं द्वारा प्लास्टिक अपशिष्ट से सार्वजनिक स्थलों को आकर्षक बनाने की पहल स्वच्छता और नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार, स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, विधायक गोमती साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, सच्चिदानंद उपासने, अखिलेश सोनी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।