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सूखे से राहत की बड़ी पहल: सिकासार जल से जुड़ेगा महासमुंद, 3400 करोड़ की परियोजना मंजूर

गारियाबंद. सिकासार जलाशय के अतिरिक्त जल से आने वाले दिनों में महासमुंद जिले का सूखा दूर होगा। सीकासार-कोडार जलाशय नहर लिंक परियोजना के लिए 3400 करोड़ की मंजूरी मिली है। डेम से डेम को जोड़ने वाली इस पहली परियोजना से अतिरिक्त 25 हजार हेक्टेयर रकबे को सिंचाई सुविधा मिलेगी। भाजपा सरकार ने सीकासार कोडार जलाशय नहर लिंक परियोजना के लिए 3400 करोड़ की मंजूरी दे दिया है। परियोजना को वर्ष 2029 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। मंजूरी के बाद सिंचाई विभाग ने टेंडर की प्रकिया शुरू कर दी है। कई मायने में यह परियोजना भाजपा सरकार की सबसे अलग-थलग और अहम योजना मानी जा रही है। विभाग के ईई एसके बर्मन ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में टेंडर कॉल की तैयारी की जा रही है।कार्य किसी अनुभवी और पारंगत ठेका कम्पनी को ही दी जाए इसकी तैयारी विभाग कर रही है। 79,650 परिवार होंगे लाभान्वित सिकासार जलाशय के प्रमुख नहरों से अब तक गरियाबंद और मगररोड क्षेत्र के 101 गांव में रवि और खरीफ़ मिलकर 58 हजार हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा दी जाती थी। लेकिन नई परियोजना से अतिरिक्त 178 गांव में सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक क्षेत्र के लिए पानी की सप्लाई होगी। 41780 एसटी और 6145 एससी परिवार समेत कुल 79650 परिवार इससे लाभान्वित होंगे। परियोजना में बागबाहरा और झलप क्षेत्र के कई असिंचित रकबा तक न केवल सिंचाई सुविधा मिलेगी, बल्कि वाटर लेबल रिचार्ज कर पेयजल संकट को भी दूर किया जाना योजना का मकसद होगा। भूमिगत स्टील पाइप से जुड़ेंगे जलाशय यह पहली परियोजना है, जिसमें इंजीनियरिंग के नए तकनीकी मापदंडों का भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा। 88 किमी लंबे भूमिगत स्टील पाइप से सीकासार बैराज का अनुपयुक्त जल सीधे कोडार पहुंचेगा, सोखने और वाष्पीकरण का प्रभाव से 25 फीसदी तक नष्ट होने वाला जल सुरक्षित हो जाएगा।विभाग का दावा है कि इस पद्धति से 30 से 35 मिलियन घन मीटर पानी की बचत होगी जिससे अतिरिक्त सिंचाई या जल संचय किया जाएगा। यही वजह है कोडार के अलावा प्रोजेक्ट में केशवा जलाशय के सूखे को दूर किया जाएगा। स्काडा तकनीकी से गांवों में पहुंचेगा पानी डेम टू डेम जोड़ने की पहली परियोजना में सेंसर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है।जिन गांव से पाइप लाइन गुजरेगी वहां प्रत्येक गांव के लिए एक आउट लेट भी होगा।जरूरत के मुताबिक इस आउटलेट में पानी ओटोमेटिक होगा।इसे इंजीनियरों ने स्काडा तकनीकी से कंट्रोल करेंगे।कमांड रूम में सेंसर टेक्नोलॉजी इसकी मॉनिटरिंग करेगा। नवाचार की जिद से मिली सफलता संभाग में कार्यपालन अभियंता एसके बर्मन महासमुंद में सेवा देने के बाद गरियाबंद में 4 साल से सेवा से रहे हैं। इन्होंने बांध को बांध से जोड़ने पर विचार किया, और 2022 में इसे बड़े अफसरों के सामने प्रस्तुत किया. सिंचाई विभाग के सचिव राजेश टोप्पो को भी योजना रास आ गई। तकनीकी में नवाचार था, ऐसे में इसकी सर्वे की मंजूरी 2023 में मिल गई। बर्मन ने बताया कि वर्तमान में 58 हजार हेक्टेयर को पर्याय सिंचाई सुविधा देने के अलावा सिकासार का प्रवाह व्यर्थ जा रहा था। द्वितीय चरण की भी शुरू हो गई है तैयारी नदी को नदी से, नहर को नहर से जोड़ने की परियोजना चल रहे थे, इसी कॉन्सेप्ट पर हमने बांध को बांध से जोड़ने की योजना का प्रारूप सरकार के समक्ष रखी, ड्रोन और आधुनिक लिडार सर्वे के अलावा, जिसकी कई चरणों के परीक्षण और दूरदर्शिता को देखते हुए सरकार ने मंजूरी दे दी है. उन्होंने कहा कि द्वितीय चरण में सिकासार को अमानाला और सोन नदी से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।

यूपी में मौसम बदला, गर्मी के साथ धूल भरी हवाओं का दौर

लखनऊ यूपी में आंधी, बारिश, ओलों का दौर खत्म हुआ। अब धूल भरी सतही हवाओं का जोर है। यह हवाएं आंखों की किरकिरी बन रही हैं। सावधानी नहीं बरती गई तो आंखों की पुतलियों को नुकसान हो सकता है। शहरों में फिलहाल चल रहीं सतही हवाओं की तासीर दरअसल ठंडी है। इसलिए यह तापमान को अधिक बढ़ने से रोक रही है। लेकिन निर्माण कार्यों के चलते शहरों में खुदी सड़कें, निर्माण से उड़ रही धूल, वाहनों के जाम से बढ़ा उत्सर्जन हवा में अति सूक्ष्म धूल और रसायनों के कणों को बढ़ा रहा है। यही हवाएं आंखों में चुभ रही हैं। विशेषकर खुले में पैदल निकलने वाले और दोपहिया वाहन चलाने वालों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। हाल यह कि वाहन चालकों की आंखों में कीचड़ बन रहा है। 33.2 डिग्री रहा दिन का तापमान शुक्रवार को अधिकतम तापमान 33.2 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.1 डिग्री कम होकर 17.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। आर्द्रता का अधिकतम प्रतिशत 62 दर्ज किया गया। रात का तापमान कम होने के कारण अभी शाम और रात को मौसम नम है। आने वाले दिनों में ऐसा नहीं रहेगा। 12 तक चलेगा हवाओं का सितम मौसम विभाग के मुताबिक 12 अप्रैल तक सतही हवाओं का दौर रहेगा। इसके बाद आसमान साफ होगा और तेज गर्मी की शुरूआत होगी। 16 अप्रैल तक दिन का तापमान 39 से 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। जबकि रात का पारा 20 से लेकर 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। बरतें सावधानी आखों को पूरी तरह से ढंकने वाला चश्मा लगाना चाहिए खुले में निकलने, दोपहिया चलाने पर लगाना बहुत जरूरी  दोपहिया चालक हेलमेट के ग्लास को बंद करके ड्राइव करें  आखों में कुछ भी गिरने, जलन होने पर मलना नहीं चाहिए  तत्काल साफ या चलते पानी से आखों को धोना चाहिए  लाल होने, खुजली पर डाक्टर से पूछकर ही आईड्राप डालें पांच दिनों में पांच डिग्री तक बढ़ेगा पारा लगातार चार दिनों से दिन में धूप और फिर शाम को हो रही बारिश के बाद शुक्रवार को मौसम पूरी तरह बदल गया। दिन में तेज धूप रही। अन्य दिनों की तरह बादल नहीं होने के कारण धूप का असर भी ज्यादा रहा। जानकारी के अनुसार, मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 5 दिनों में अधिकतम तापमान में 5-6 डिग्री की वृद्धि हो सकती है। यानी एक बार फिर 40 के आसपास पहुंच जाएगा। फिलहाल अगले 5 दिनों में किसी तरह के बारिश होने की उम्मीद नहीं है।

राजस्थान में मौसम बदला, सूरज दिखा रहा तल्ख तेवर

जयपुर  राजस्थान में बारिश का दौर थमने के साथ ही अब सूरज ने तल्ख तेवर दिखना शुरू हो गए हैं। पश्चिमी राजस्थान के साथ-साथ अब पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी जिलों में भी गर्मी का असर साफ देखा जा रहा है। बीते दिन 10 अप्रैल को राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में दिनभर तेज धूप खिली रही, जिससे अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। राजधानी जयपुर समेत कई इलाकों में पारा 33 डिग्री के स्तर को छू गया, जिससे दोपहर के समय लोगों को हल्की गर्मी और उमस का अहसास हुआ। पश्चिमी विक्षोभ से इन शहरों में छा सकते हैं बादल मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर के पूर्वानुमान के अनुसार, शनिवार यानी 11 अप्रैल को एक हल्के प्रभाव वाला पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। हालांकि, इस सिस्टम का असर काफी सीमित रहने वाला है।इन शहरों पर पड़ सकता है प्रभाव: बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, फलोदी और चूरू के आसपास के जिलों में आसमान में बादलों की आवाजाही देखी जा सकती है। तापमान में बदलाव: बादलों की वजह से इन क्षेत्रों में अधिकतम तापमान में मामूली गिरावट आ सकती है। बारिश की संभावना: मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस विक्षोभ से बारिश होने की संभावना बहुत कम है। यह केवल आंशिक रूप से बादल छाने तक ही सीमित रहेगा। आगामी दिनों का हाल: 4 डिग्री तक बढ़ेगा पारा IMD जयपुर केंद्र के अनुसार, आगामी एक सप्ताह तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना रहेगा। वर्तमान में रेगिस्तानी इलाकों में तापमान पहले ही 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। विशेष चेतावनी: अगले कुछ दिनों में अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की और बढ़ोतरी होने की संभावना है। साथ ही न्यूनतम तापमान में भी वृद्धि होगी, जिससे रातें भी अपेक्षाकृत गर्म होने लगेंगी।

देवरिया सड़क विवाद मामला: एसडीएम विपिन द्विवेदी पर बड़ी कार्रवाई

 देवरिया यूपी में राज्य सरकार ने बरहज देवरिया के उप जिलाधिकारी विपिन कुमार द्विवेदी को निलंबित कर दिया है। तहसील बरहज के ग्राम लक्ष्मीपुर में राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नाली व नलकूप की जमीन पर पक्की सड़क का निर्माण कराने और धक्का-मुक्की के कारण मृत्यु की घटना की प्रारंभिक जांच कराई गई थी। यह जांच अपर आयुक्त प्रशासन गोरखपुर पुलिस अधीक्षक नगर गोरखपुर और अपर जिलाधिकारी नगर गोरखपुर की तीन सदस्यीय कमेटी ने की थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रकरण में लापरवाही के लिए प्रथमदृष्टया विपिन कुमार द्विवेदी को जिम्मेदार ठहराया गया है। उनके खिलाफ नियम-7 के तहत जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं। प्रयागराज के कमिश्नर को जांच अधिकारी नामित किया गया है। विपिन कुमार द्विवेदी को राजस्व परिषद से संबंध कर दिया गया है। तहसील बार के पूर्व अध्यक्ष को धमकाने का आरोप देवरिया जिले के बरहज थाना क्षेत्र के ग्राम लक्ष्मीपुर में रविवार को चकनाली पर सड़क निर्माण के विवाद के दौरान दिल का दौरा पड़ने से अधिवक्ता संघ बरहज के पूर्व अध्यक्ष बृजेंद्र कुमार सिंह की मौत हो गई थी। परिजनों के आरोप थे कि एसडीएम बरहज ने विवाद के दौरान अधिवक्ता को धमकाया, जिसके चलते उनकी मौत हो गई। घटना के बाद बरहज तहसील में दर्जनों अधिवक्ता एकत्र हो गए और शव रख कर हंगामा किया था। कुछ लोगों ने एसडीएम को बंधक बनाकर नारेबाजी भी की थी। इस संबंध में एसडीएम विपिन द्विवेदी का कहना है कि वह विवाद सुलझा कर लौट आए थे उसके बाद अधिवक्ता का निधन हुआ। धमकाने का आरोप गलत है। जानकारी के अनुसार बरहज क्षेत्र की ग्राम पंचायत लक्ष्मीपुर में पंचायत द्वारा चकनाली पर सीसी रोड का निर्माण कराया जा रहा है। रोड व चकनाली अधिवक्ता बृजेन्द्र सिंह के दरवाजे से होकर जाती है। चकनाली पर सड़क निर्माण का वह विरोध कर रहे थे। यह विवाद तीन माह से चल रहा है। उसी विवाद के समाधान के लिए उपजिलाधिकारी विपिन द्विवेदी राजस्व टीम के साथ मौके पर गए थे। वहां पर विवाद होने लगा। उसी दौरान बृजेन्द्र कुमार सिंह को दौरा पड़ गया और उनकी मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक एसडीएम ने अधिवक्ता और उनके बेटों पर गम्भीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर 20 साल के लिए जेल भेजने की धमकी दी थी। एसडीएम की बात सुनते ही बृजेन्द्र सिंह नीचे गिर गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। बता दें कि उनके परिवार और अधिवक्ताओं ने जमकर हंगामा किया था। अधिवक्ता मुख्यमंत्री को मौके पर बुलाने के साथ ही एसडीएम, लेखपाल और ग्राम प्रधान पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहे थे। उसी दौरान हिंदूवादी नेता प्रमोद सिंह के नेतृत्व में भीड़ ने एसडीएम रुद्रपुर को बंधक बनाया था। 15 मिनट की मशक्कत के बाद सीओ रुद्रपुर ने भीड़ से एसडीएम को छुड़ाया था।

हरियाणा में पावर कट पर जीरो टॉलरेंस, 4 घंटे से अधिक कटौती पर अफसरों पर गिरेगी गाज

चंडीगढ़. हरियाणा के बिजली मंत्री अनिल विज ने गत छह माह के दौरान बिजली आपूर्ति में आए व्यवधान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को बिजली आपूर्ति की समय सीमा में बांध दिया है। उन्होंने निर्देश दिए कि शहरी क्षेत्रों में अधिकतम दो घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में चार घंटे से अधिक बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने की स्थिति में संबंधित बिजली अधिकारियों विशेष रूप से अधीक्षण अभियंता (एसई) जिम्मेदार होंगे, जिनके विरुद्ध निलंबन तक की कार्रवाई संभव होगी। लैंड रिकवरी एक्ट के तहत डिफॉल्टर बिजली उपभोक्ताओं से वसूली में ढिलाई बरतने पर विज ने कैथल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला और यमुनानगर के बिजली अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। चंडीगढ़ में बिजली अधिकारियों की बैठक लेते हुए अनिल विज ने कहा कि राज्य में बिजली की कोई कमी नहीं है, इसलिए प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने घोषणा की कि सरकारी भवनों में सोलर सिस्टम तथा पीएम सूर्य घर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान पर आने वाले सर्कल को अवॉर्ड दिया जाएगा। बैठक में ऊर्जा विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़ तथा उत्तर और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के प्रबंध निदेशक बिक्रम सिंह की मौजूदगी में अनिल विज ने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव का पद लंबे समय से रिक्त रहने के बावजूद विभागीय कार्यों में कोई बड़ी बाधा नहीं आई है, इसके लिए अधिकारी सराहना के पात्र हैं। बिजली मंत्री ने ट्रांसफार्मरों के त्वरित प्रतिस्थापन पर बल देते हुए निर्देश दिया कि मरम्मत कार्यों के दौरान मेंटीनेंस स्टाफ के पास आवश्यक उपकरण, सुरक्षा साधन एवं ट्रांसफार्मर ट्राली उपलब्ध होनी चाहिए। आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड ने आश्वासन दिया कि दो दिनों के भीतर सभी कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करा दिए जाएंगे। विज ने यह भी निर्देश दिए कि भविष्य में स्थापित होने वाले सभी बिजली सबस्टेशन जलभराव वाले क्षेत्रों में न बनाए जाएं अथवा उन्हें संभावित जलस्तर से कम से कम दो फुट ऊंचाई पर स्थापित किया जाए। इसके लिए संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य होगा। सबस्टेशनों के रखरखाव एवं अपग्रेडेशन के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। वर्षा ऋतु से पूर्व बिजली लाइनों के समीप स्थित पेड़ों की छंटाई सुनिश्चित करने के आदेश देते हुए विज ने कहा कि आंधी-तूफान के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित न हो, इसकी सभी अधिकारियों को चिंता करनी होगी। बिजली उपकरणों की खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और समन्वय बढ़ाने के लिए विज ने एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए। इस पोर्टल पर पूरे राज्य में उपयोग होने वाले उपकरणों का विवरण उपलब्ध रहेगा। बिजली चोरी के सभी मामले तीन माह में न्यायालय में होंगे पेश बिजली चोरी के मामलों की समीक्षा करते हुए अनिल विज ने निर्देश दिए कि अगले तीन माह में सभी लंबित मामलों को न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए। चालू वर्ष में 179 लोगों को बिजली चोरी के मामलों में गिरफ्तार किया गया है। वर्ष 2024-25 में 39 हजार 529 तथा 2025-26 में 56 हजार 953 एफआईआर दर्ज की गई हैं। विजिलेंस विंग ने आश्वासन दिया कि सभी मामलों को शीघ्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

80% तक मिलावट का दावा, चन्नी बोले—मिलावटखोरों पर लगे हत्या के प्रयास का मुकदमा

जालंधर. लोकसभा सदस्य एवं पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने देश में नकली डेयरी उत्पादों की बिक्री पर चिंता जताई है। चन्नी ने नकली डेयरी उत्पादों से होने वाले जान-माल के नुकसान, इसकी जांच प्रक्रिया को आसान बनाने और दोषियों के खिलाफ सख्त सजा की भी मांग की है। उन्होंने कहा, दूध माफिया यूरिया, डिटर्जेंट पाउडर और अन्य जहरीले पदार्थों के इस्तेमाल से नकली दूध बना रहे हैं। इससे देशवासी भयानक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। चन्नी ने नकली दूध के कारण डेयरी फार्मिंग के लिए भी चिंता का समय है। उन्होंने कहा कि नकली दूध सस्ता होने के कारण असली दूध की कीमतों को भी नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि मौजूदा कानून नरम और कम जुर्माने वाला होने के कारण डेयरी माफिया का इस पर असर नहीं होता। नकली डेयरी उत्पादों से किसी की जान तक जा सकती है, जिस कारण यह एक तरह से इरादा-ए-कत्ल (हत्या के प्रयास) जैसा संगीन अपराध है। इसलिए सजा और सख्त तथा जुर्माना और बड़ा होना चाहिए। सांसद चन्नी ने कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्य पालन और सहकारिता के लिए संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में सुझाव देते हुए कहा कि सरकार को डेयरियों और दूध के बूथों पर तुरंत चेकिंग करने वाली मशीनें लगानी चाहिए।

बिलासपुर में खाद वितरण में गड़बड़ी, दो दुकानों की 21 दिन की बिक्री पर रोक, लाइसेंस निलंबित

बिलासपुर : खाद वितरण में गड़बड़ी : दो दुकानों पर 21 दिन की बिक्री पर रोक, लाइसेंस निलंबित उर्वरक जांच में अनियमितता उजागर, दो केंद्रों के लाइसेंस निलंबित किसानों के हित में कार्रवाई : स्टॉक में गड़बड़ी पर दो खाद दुकानें सील बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखंड में खाद वितरण में गंभीर अनियमितता सामने आने पर कृषि विभाग की उड़नदस्ता टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में स्टॉक और मशीन रिकॉर्ड में अंतर पाए जाने पर दो खाद दुकानों की बिक्री पर 21 दिनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है।          कृषि विभाग की उड़नदस्ता टीम द्वारा तखतपुर विकासखंड में संचालित दो खाद दुकानों पर छापामार कार्रवाई करते हुए खाद वितरण में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है। जांच के दौरान दुकानों के पास मशीन और भौतिक स्टॉक में भारी अंतर पाया गया, जिसके चलते दोनों केंद्रों को 21 दिनों के लिए खाद बिक्री से प्रतिबंधित कर दिया गया है। उप संचालक कृषि पीडी हथेश्वर ने बताया कि आगामी खरीफ सीजन में किसानों को खाद, बीज और कीटनाशक की सुचारु उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने के उद्देश्य से जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल का गठन किया गया है। इसी कड़ी में तखतपुर क्षेत्र के मेसर्स किसान सेवा केंद्र और मेसर्स अमन कृषि केंद्र का औचक निरीक्षण किया गया।          निरीक्षण के दौरान किसान सेवा केंद्र में मशीन स्टॉक में यूरिया 750 बोरी दर्ज थी, जबकि भौतिक रूप से 550 बोरी ही पाई गई। वहीं 200 बोरी स्टॉक बिना मशीन में दर्ज किए रखी गई थी। इसी तरह अमन कृषि केंद्र में मशीन रिकॉर्ड में 1679 बोरी यूरिया दर्शाई गई, जबकि मौके पर स्टॉक नहीं मिला। दोनों प्रतिष्ठानों में उर्वरक भंडारण और वितरण का निर्धारित रजिस्टर भी संधारित नहीं पाया गया। इसे उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 का उल्लंघन मानते हुए संबंधित दुकानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर आगामी 21 दिनों के लिए विक्रय पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। कार्रवाई के दौरान कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं संबंधित अमला उपस्थित रहा। हाथेश्वर ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

पर्यटन के नक्शे पर उभरेगा लोरमी, मास्टरप्लान तैयार—जमीन विवाद निपटाने पर जोर

लोरमी. मुंगेली जिले के लोरमी की सूरत बदलने वाली है। कलेक्टर कुंंदन कुमार ने लोरमी को पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर लाने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। साथ ही विकास कार्यों में बाधा बन रहे भूमि विवादों और प्रशासनिक सुस्ती को दूर करने के लिए कलेक्टर ने स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने लोरमी में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए प्रभावी योजनाओं के क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। बैठक में आर्किटेक्ट और अर्बन प्लानर्स के साथ चर्चा के बाद अब लोरमी में आधुनिक रिसॉर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स और ग्रीन कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी है। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना और जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है। सिर्फ कागजों पर ही नहीं, बल्कि धरातल पर भी काम दिखे, इसके लिए कलेक्टर ने लोरमी नगर पालिका क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया। नगर उद्यान के निर्माण में बाधा बन रहे वन विभाग और नगर पालिका के वर्षों पुराने भूमि विवाद को कलेक्टर ने मौके पर ही सुलझाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास के काम में किसी भी विभाग की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जर्जर भवनों को ढहाने और प्रस्तावित उद्यान का काम तत्काल शुरू करने का अल्टीमेटम दे दिया गया है। शहर की खूबसूरती के साथ-साथ आम नागरिकों की सहूलियत पर भी जोर दिया गया है। कलेक्टर ने सीएमओ लोरमी को शहर की बदहाल यातायात और पार्किंग व्यवस्था सुधारने के कड़े निर्देश भी दिए हैं।

रायसेन में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कृषि महोत्सव, रक्षामंत्री राजनाथ, सीएम यादव और शिवराज सिंह करेंगे उद्घाटन, ड्रोन तकनीक का लाइव प्रदर्शन

रायसेन  केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी एक मंच पर होंगे। वे 11 से 13 अप्रैल तक रायसेन में होने जा रहे राष्ट्रीय उन्नत कृषि महोत्सव में शामिल होंगे। महोत्सव का उद्घाटन राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव करेंगे, जबकि समापन 13 अप्रैल को नितिन गडकरी द्वारा किया जाएगा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को भोपाल स्थित अपने आवास में रायसेन में होने वाले उन्नत कृषि महोत्सव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महोत्सव को हमने कर्मकांड नहीं, गंभीर प्रयास की तरह आयोजित किया है। उन्होंने कहा भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश होते हुए भी अभी पूर्ण आत्मनिर्भर नहीं है, इसलिए अब नीति का फोकस दलहन-तिलहन के क्षेत्र और उत्पादकता बढ़ाने पर है, ताकि देश इन फसलों में भी आत्मनिर्भर बन सके। महोत्सव से एक दिन पहले शुक्रवार शाम को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों और प्रदर्शन क्षेत्रों का निरीक्षण किया और कहा कि यह आयोजन किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बनेगा। 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए इस विशाल प्रदर्शनी में 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जो कृषि, बागवानी, सिंचाई, उर्वरक, बीज, कीटनाशक, कृषि यंत्रीकरण, डिजिटल खेती और फसल बीमा से जुड़ी नवीनतम तकनीकों का प्रदर्शन कर रहे हैं। आयोजन स्थल को तीन बड़े हैंगरों में बांटा गया है। पहले हैंगर में कृषि यंत्र, सिंचाई और नवाचार से संबंधित स्टॉल हैं। दूसरे हैंगर में पशुपालन, डेयरी, सहकारी संस्थाएं और ग्रामीण विकास विभाग शामिल हैं, जबकि तीसरे हैंगर में उद्घाटन समारोह, तकनीकी सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। कृषि यंत्रों का प्रदर्शन होगा महोत्सव में आधुनिक कृषि यंत्रों के साथ-साथ ड्रोन तकनीक और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों का सीधा प्रदर्शन किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों से परिचित कराना और उन्हें अपनी खेती में अपनाने के लिए प्रेरित करना है। विभिन्न कृषि स्टार्टअप, कंपनियां और संस्थान भी अपने नवाचारों के माध्यम से किसानों को आय के नए स्रोतों की जानकारी देंगे। इस आयोजन में कृषि विज्ञान केंद्र, राज्य कृषि विश्वविद्यालय, नाबार्ड, नेफेड, पशुपालन और मत्स्य पालन विभाग जैसे कई प्रमुख संस्थान भाग ले रहे हैं। इसके अतिरिक्त, किसान उत्पादक संगठन (FPO) और MSME से जुड़े उद्यम भी अपने सफल मॉडल प्रस्तुत करेंगे, जिससे किसानों को व्यावहारिक अनुभव मिल सकेगा। महोत्सव में पशुपालन को विशेष प्राथमिकता महोत्सव में पशुपालन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यहां गिर, साहीवाल और थारपारकर नस्ल की गायों के साथ जमुनापारी, सिरोही और बारबरी नस्ल की बकरियों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा कड़कनाथ मुर्गी पालन के मॉडल भी किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगे। पशु स्वास्थ्य शिविर, टीकाकरण और पोषण प्रबंधन पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन भी उपलब्ध रहेगा। मत्स्य पालन के क्षेत्र में बायोफ्लॉक, आरएएस और एक्वापोनिक्स जैसे आधुनिक मॉडल भी प्रस्तुत किए जाएंगे। साथ ही तीनों दिनों में किसानों के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण, स्टार्टअप प्रेजेंटेशन और वैज्ञानिकों से सीधा संवाद आयोजित होगा।

प्रकृति में जनजातीयों की अटूट आस्था से जल जंगल का संरक्षण – मंत्री रामविचार नेताम

रायपुर : प्रकृति में जनजातीयों की अटूट आस्था, देवी-देवताओं के वास से जल जंगल का हो रहा संरक्षण व संवर्धन: मंत्री रामविचार नेताम कॉमन्स संवाद सम्मेलन में विशेषज्ञों ने सामुदायिक शासन पर दिया जोर छत्तीसगढ़ कॉमन्स क्विनिंग’ के समापन समारोह में शामिल हुए मंत्री नेताम रायपुर आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि देश के लगभग सभी राज्यों में जनजातीय समुदाय के लोग निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 10 करोड़ से अधिक जनजातीय समुदाय हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीयों का जल, जंगल, जमीन, नदी-नालों और पहाड़ों में अटूट आस्था है। जनजातीय समुदाय पेड़ पौधों, नदी-नालों में देवी-देवताओं का वास मानते हैं और इन्ही संस्कृति और परंपराओं के कारण वनवासी समुदाय प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन में पहले पायदान पर है।  छत्तीसगढ़ कॉमन्स क्विनिंग’ के समापन समारोह में शामिल हुए मंत्री नेताम मंत्री नेताम ने आज नवा रायपुर स्थित जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित दो दिवसीय राज्य-स्तरीय संवाद सम्मेलन ’छत्तीसगढ़ कॉमन्स क्विनिंग’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए गहन मंथन हुआ है। इस मंथन में जो भी तथ्य निकलकर आएंगे उसकी उपयोगिता नीति निर्माण और जनहित में कैसी होगी इसके लिए हमारी सरकार तत्परता के साथ काम करेगी।  मंत्री नेताम कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समुदायों के विभिन्न समस्याओं और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन करने जा रही है। इस टास्क फोर्स की संवेदनशीलता और महत्व को देखते हुए इसकी कमान स्वयं मुख्यमंत्री संभालेंगे, जो इसके अध्यक्ष होंगे। नीतिगत निर्णयों के धरातल पर प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को मिलाकर एक विशेष कार्यान्वयन समिति भी बनाई जाएगी, जो बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगी । नेताम ने कहा कि पेसा (पंचायत उपबंध अधिनियम) और एफआरए (वनाधिकार अधिनियम) के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों, विशेष रूप से सीमाओं के निर्धारण (डिमार्केशन ऑफ बॉउंड्रिस) जैसी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की बात कही। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के प्रति उत्तरदायित्व का भाव जागृत करते हुए कहा, “हम केवल इन साझा संसाधनों के उपयोगकर्ता ही नहीं, बल्कि इनके संरक्षक भी हैं, और हमारा उपभोग केवल अपनी वास्तविक आवश्यकताओं की पूर्ति तक ही सीमित होना चाहिए”। इस टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य राज्य भर में जनजातीय कल्याण से जुड़ी नीतियों के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करना और समुदायों को उनके अधिकार दिलाना है । आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि यह टास्क फोर्स विशेष रूप से पेसा और वनाधिकार अधिनियम के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि हमारी विरासत में जनजातीय बोली, भाषा, समुदायिक नेतृत्व समृद्ध है। जल, जंगल, जमीन के संरक्षण व संवर्धन में इन जनजातीयों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति उनके ज्ञान, उनका उद्देश्य, जल जंगल से जुड़े हुए हैं। उनका रिश्ता प्रकृति से है। वे प्रकृति को मां के रूप में, देवता के रूप में पूजते हैं। उनके दैनिक क्रियाकलापों से लेकर मृत्यु तक के उत्सव प्रकृति के संरक्षण में सहायक सिद्ध होती है। प्रमुख सचिव बोरा ने कहा कि इन दो दिनों तक चले अधिवेशन में छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के 300 से अधिक प्रतिभागियों, नीति विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और ग्राम प्रमुखों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र राज्य की 70 लाख एकड़ ’कॉमन्स’ भूमि (जंगल, चारागाह और जल निकाय) रही, जो ग्रामीण और जनजातीय आबादी की जीवन रेखा है। उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना, धरतीआबा ग्राम उत्कर्ष अभियान, नियद नेल्ला नार जैसे विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों एवं जनजातीय समुदाय के सम्पूर्ण विकास के साथ ही प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में काम कर रहे हैं। आगे भी सामुदायिक सहयोग से बेहतर दिशा में काम किया जाएगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वी. श्रीनिवास राव ने जोर दिया कि सामुदायिक सहयोग के बिना विशाल वनों और जैव विविधता की रक्षा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य की वन नीतियां प्रतिबंधात्मक नहीं, बल्कि विनियामक हैं। मनरेगा आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा ने कहा कि जल संरक्षण जनजातीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने मनरेगा के माध्यम से वंचित समुदायों को जल प्रबंधन में जोड़ने पर बल दिया। रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह ने रेखांकित किया कि जल संरक्षण कोई ’रॉकेट साइंस’ नहीं है, बल्कि यह सदियों के अनुभव से उपजा सामुदायिक ज्ञान है। संवाद सम्मेलन में यह बात उभर कर आई कि कॉमन्स केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आधार हैं। इस अवसर पर सोनमणि बोरा ने जनजातीय लोक गीतों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के दस्तावेजीकरण और कॉपीराइट संरक्षण के लिए एक विशेष स्टूडियो स्थापित करने की योजना साझा की। सम्मेलन में नेल्सन मंडेला पुरस्कार विजेता शेर सिंह आंचला, पद्म पांडी राम मंडावी, पद्मजगेेश्वर यादव और गौर मारिया कलाकार सुलक्ष्मी सोरी, इंदु नेताम ने भी अपने अनुभव साझा किए और संसाधनों के संरक्षण की अपील की।  कार्यक्रम को सफल बनाने में अपर संचालक संजय गौड़, टीआरटीआई की संयुक्त संचालक श्रीमती गायत्री नेताम की विशेष योगदान रही। यह कार्यक्रम आदिम जाति विकास विभाग, टीआरटीआई और फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी द्वारा प्रॉमिस ऑफ कॉमन्स पहल के तहत संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इसमें यूएनडीपीए आईआईटी-भिलाई, बीआरएलएफ, एक्सिस बैंक फाउंडेशन और अन्य प्रमुख संस्थान सहयोगी रहे।