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नगर परिषद नागौद की मतदाता सूची का प्रकाशन 7 मई को होगा

भोपाल.  मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगर परिषद नागौद जिला सतना के रिक्त पार्षद पद के उप निर्वाचन के लिये एक जनवरी 2026 की संदर्भ तारीख के आधार पर फोटोयुक्त मतदाता सूची के वार्षिक पुनरीक्षण 2026 के लिए कार्यक्रम निर्धारित कर दिया गया है। मतदाता सूची का सार्वजनिक प्रकाशन 7 मई को होगा। आयुक्त राज्य निर्वाचन आयोग श्री मनोज श्रीवास्तव ने बताया है कि रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और मास्टर ट्रेनर्स की नियुक्ति और जिला स्तरीय प्रशिक्षण 13 अप्रैल को होगा। फोटोयुक्त प्रारूप मतदाता सूची का नगरपालिका वार्ड एवं अन्य विहित स्थानों पर सार्वजनिक प्रकाशन 17 अप्रैल को किया जायेगा। दावा आपत्ति केन्द्र पर दावे आपत्ति प्राप्त करने की अवधि 17 से 25 अप्रैल तक रहेगी। दावा आपत्ति आवेदन पत्रों के निराकरण की अंतिम तिथि 2 मई 2026 है। फोटोयुक्त अंतिम मतदाता सूची का नगरपालिका वार्ड तथा अन्य विहित स्थानों पर सार्वजनिक प्रकाशन 7 मई को किया जायेगा।  

रायपुर में पक्का घर बनने के बाद, अब बरसात की चिंता से मुक्त हुआ जीवन

रायपुर : पक्का घर बना तो बरसात की चिंता से मुक्त हुआ जीवन रायपुर   ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री आवास योजना प्रभावी साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से न केवल लोगों को सुरक्षित आवास मिल रहा है, बल्कि उनके जीवन में स्थायित्व और सम्मान भी बढ़ रहा है। इसी परिवर्तन की एक मिसाल है ग्राम पंचायत गिरारी के निवासी श्री मदन।     गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गिरारी गांव में रहने वाले मदन पूर्व में अपने परिवार सहित कच्चे मकान में निवास करते थे। बरसात के मौसम में उनके घर की छत से पानी टपकता था, जिससे परिवार को गंभीर असुविधाओं का सामना करना पड़ता था। हर वर्ष वर्षा ऋतु उनके लिए चिंता और असुरक्षा का कारण बन जाती थी।     वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत मदन को पक्का आवास स्वीकृत हुआ। शासन से प्राप्त आर्थिक सहायता तथा स्वयं के श्रम के समन्वय से उन्होंने अपने सपनों के घर का निर्माण पूर्ण किया। आज उनका परिवार एक मजबूत, सुरक्षित और व्यवस्थित पक्के घर में निवास कर रहा है।     मदन बताते हैं कि पहले बरसात के समय घर में पानी भर जाता था और परिवार को भय बना रहता था, लेकिन अब इस समस्या से पूरी तरह राहत मिल गई है। उनका कहना है कि इस योजना ने उनके जीवन में नया आत्मविश्वास और सुख-शांति का संचार किया है।     प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) इस प्रकार ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के साथ ही उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

खीरा की खेती ने बदली सुभद्रा की जिंदगी, बिहान योजना से बनीं लखपति दीदी

खीरा की खेती ने बदली सुभद्रा की जिंदगी, बिहान योजना से बनी लखपति दीदी रायपुर सुभद्रा पहले गरीबी से जूझ रही थीं, लेकिन स्वयं सहायता समूह जुड़कर एवं ऋण लेकर उन्होंने खीरा की खेती शुरू की l खीरा की खेती से प्राप्त आय से आज वह 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं l          बिलासपुर जिला के कोटा के ग्राम करका की सुभद्रा ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन, समूह की शक्ति और मेहनत साथ हो, तो आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता का सपना आसानी से साकार किया जा सकता है। सुभद्रा समूह से जुड़कर खीरा की खेती कर आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ अब लखपति दीदी बन चुकी हैl सुभद्रा मुख्यमन्त्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि सरकारी योजना ने उनका जीवन बदल दिया है।     आदिवासी बहुल गांव करका की सुभद्रा आर्मी ने आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत मां सरस्वती समूह से जुड़कर खीरा की खेती को अपनी आजीविका का माध्यम बनाया। शुरुआत में समूह को 15 हजार रुपये रिवाल्विंग फण्ड, 60 हजार रुपये सी आई एफ तथा 3 लाख रुपये बैंक ऋण प्राप्त हुआ। इस आर्थिक सहयोग ने महिलाओं को खेती के लिए जरूरी संसाधन जुटाने में बड़ी मदद दी। समूह की महिलाओं ने मेहनत, लगन और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाते हुए खीरा की खेती शुरू की। उनकी मेहनत का परिणाम यह है कि आज वे 2 एकड़ में खेती कर लगभग 10 क्विंटल खीरा की बिक्री हर दूसरे दिन कर रही हैं। इससे उन्हें लगभग 7 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।       इस अतिरिक्त आय से समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है। अब वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं l बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दे रही हैं और भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं। सुभद्रा बताती हैं कि इस सफलता के पीछे समूह की बीमा सखी हबीबुन निशा का विशेष सहयोग और मार्गदर्शन रहा, जिन्होंने समय-समय पर महिलाओं को बैंकिंग और वित्तीय साक्षरता प्रदान कर ऋण सबंधी प्रक्रिया को पूरा करने में  सहायता की साथ ही खेती की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।     सुभद्रा आर्मी की मेहनत लगन और सरकारी योजनाओं की मदद से अब वह लखपति दीदी” बनने का गौरव हासिल कर चुकी है।

मातृ-शिशु स्वास्थ्य में बेहतर परिणामों हेतु दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें – श्याम बिहारी जायसवाल

रायपुर.  प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति, गुणवत्ता और प्रभावशीलता का समग्र आकलन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में शुक्रवार को सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियो की एक दिवसीय राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक माननीय स्वास्थ्य मंत्री के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन एवं सेवा प्रदायगी की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए जोखिम की समय पर पहचान को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि चिन्हित मामलों को आवश्यकता अनुसार उच्च स्तरीय शासकीय अथवा निजी स्वास्थ्य संस्थानों में समय रहते रेफर किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि रेफरल प्रक्रिया के दौरान संबंधित चिकित्सक एवं अस्पताल प्रबंधन प्रसूता एवं शिशु के डिस्चार्ज तक सतत संपर्क में रहें तथा सभी आवश्यक उपचार एवं सुविधाएं सुनिश्चित करें। साथ ही, मौसमी बीमारियों की रोकथाम एवं प्रबंधन के लिए अग्रिम तैयारियों को सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए। समीक्षा के दौरान सभी मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया। चिकित्सकों को प्रभावी औषधियां लिखने तथा आवश्यक जांच सुविधाएं संस्थागत स्तर पर ही उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि मरीजों को अनावश्यक असुविधा का सामना न करना पड़े। बैठक का संचालन करते हुए सचिव अमित कटारिया ने मातृ एवं शिशु मृत्यु के प्रत्येक प्रकरण की अनिवार्य रिपोर्टिंग एवं पंजीकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित डेटा विश्लेषण के माध्यम से मृत्यु के कारणों की पहचान कर भविष्य में प्रभावी सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।  विभागीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी विशेष बल दिया गया, ताकि हितग्राहियों तक समयबद्ध एवं सरल जानकारी पहुँच सके और योजनाओं का अधिकतम लाभ सुनिश्चित हो। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के संचालक संजीव कुमार झा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन संचालक रणबीर शर्मा, महामारी नियंत्रण के संचालक डॉ. एस.के. पामभोई सहित सभी संभागों के संयुक्त संचालक एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, कुष्ठ एवं टीबी उन्मूलन सहित प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की गई। समापन संबोधन में सचिव कटारिया ने कहा कि प्रदेश को टीबी एवं मलेरिया मुक्त बनाना, मातृ-शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में निरंतर सुधार लाना तथा प्रत्येक नागरिक को सुलभ, किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से सेवा भावना, प्रतिबद्धता एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि जन-अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही सुशासन की वास्तविक कसौटी है।

एमपी ट्रांसको के इंजीनियरों की केस स्टडी को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

भोपाल.  मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के इंजीनियरों द्वारा तैयार एक तकनीकी केस स्टडी प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय जर्नल, वॉटर एंड एनर्जी इंटरनेशनल में प्रकाशित हुई है। इसकी व्यापक सराहना इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग क्षेत्र मे देश -विदेश के नामी विशेषज्ञों ने भी की है। एमपी ट्रांसको के इंजीनियर जितेंद्र तिवारी एवं इंजीनियर आशुतोष राय द्वारा तैयार की गई यह स्टडी केस 35 वर्ष से अधिक पुराने ट्रांसमिशन लाइनों में बिजली गिरने से होने वाली समस्याओं के समाधान पर आधारित है। इसमें स्पेशल पिट आधारित अर्थिंग तकनीक के माध्यम से टॉवर फुटिंग इम्पीडेंस कम करने और फॉल्ट क्लियरिंग समय सुधारने का सफल प्रयोग प्रस्तुत किया गया है। इससे ट्रांसमिशन सिस्टम की स्थिरता और विश्वसनीयता में सुधार होता है। 

एक वक्त था जब ईसीजी भी नहीं था, आज वही प्रदेश जीवन की रक्षा कर रहा है

एक रात, जब ईसीजी भी नसीब नहीं था… आज वही प्रदेश जीवन बचा रहा डॉ. शरत चंद्रा ने सुनाया 2005 का अनुभव, बताया-कैसे बदली उत्तर प्रदेश में हृदय के उपचार की तस्वीर लखनऊ सीएसआई के एनआईसी-2026 सम्मेलन के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के भीड़ भरे सभागार में जब डॉ. शरत चंद्रा ने बोलना शुरू किया, तो उनका स्वर सिर्फ एक डॉक्टर का नहीं, बल्कि एक बेटे का भी था जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की सीमाओं को बहुत करीब से महसूस किया था। उन्होंने वर्ष 2005 की एक घटना साझा की।  उन्होंने बताया कि दिसंबर की एक रात करीब 10 बजे चंदौसी स्थित उनके घर से पिता का फोन आया कि बेटा सीने में दर्द हो रहा है, क्या करूं? एक डॉक्टर बेटे के रूप में उन्होंने सहज ही कहा- पापा, कहीं पास में जाकर ईसीजी करा लीजिए। पिता ने कहा कि इस समय रात में ईसीजी कहां हो पाएगा, सुबह ही कराएंगे। डॉ. चंद्रा ने कहा कि उस रात सिर्फ मेरे पिता ही नहीं, मैं भी जागता रहा। अगले दिन ईसीजी सामान्य आया, लेकिन वह रात उनके मन में एक सवाल छोड़ गई कि क्या हमारे पास समय पर इलाज की व्यवस्था है?  उन्होंने कहा कि आज, दो दशक बाद, उसी उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल चुकी है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अब दिल का दौरा पड़ने पर मरीज को सुबह का इंतजार नहीं करना पड़ता। ‘हृदय सेतु’ जैसे प्रयासों ने बड़े संस्थानों जैसे एसजीपीजीआई, केजीएमयू और डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस को जिला अस्पतालों से जोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि पहले जहां एंजियोप्लास्टी जैसे उपचार केवल बड़े शहरों तक सीमित थे, वहीं अब सुल्तानपुर, जौनपुर, बहराइच, गोंडा और बस्ती जैसे जिलों में भी यह सुविधा उपलब्ध है। अब मरीज को केवल दूरी नहीं, बल्कि समय से भी लड़ना नहीं पड़ता।  अपने संबोधन के अंत में डॉ. चंद्रा ने कहा कि यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों का नहीं है, यह भरोसे का बदलाव है। एक समय था जब रात में ईसीजी भी संभव नहीं था, और आज वही प्रदेश जीवन बचाने के लिए हर पल तैयार खड़ा है। यही बदला हुआ उत्तर प्रदेश है, यही उत्तम प्रदेश है।

आंगनबाड़ी केवल पोषण नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की पाठशाला बने : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

रायपुर.  महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल पोषण और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा तक सीमित न रखते हुए उन्हें ‘संस्कार निर्माण की पाठशाला’ के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के सर्वांगीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है, जिसमें दिए गए संस्कार जीवनभर उनकी सोच और व्यवहार को दिशा देते हैं। मंत्री राजवाड़े अपने निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में राज्य शैक्षणिक अनुसंधान केंद्र के ईसीसीई के राज्य स्तरीय रिसोर्स पर्सन एवं विभागीय अधिकारियों से चर्चा कर रही थीं। बैठक में प्रदेश के 52,518 आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को संस्कारपरक शिक्षा से जोड़ने के लिए ठोस पहल करने पर विचार किया गया। उन्होंने कहा कि बच्चे का पहला विद्यालय उसका घर और आंगनबाड़ी होता है, इसलिए यहां दी जाने वाली शिक्षा में भारतीय जीवन मूल्यों का समावेश अत्यंत आवश्यक है। संस्कारपरक शिक्षा का उद्देश्य बच्चों में प्रारंभिक अवस्था से ही बड़ों का सम्मान, सत्य बोलना, स्वच्छता, अनुशासन, प्रकृति प्रेम तथा ‘धन्यवाद’ और ‘क्षमा’ जैसे व्यवहारिक गुणों का विकास करना है। मंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों में इस प्रकार की शिक्षा को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए कई व्यवहारिक सुझाव दिए। उन्होंने दिन की शुरुआत प्रार्थना, योग और प्राणायाम से करने, पंचतंत्र एवं लोककथाओं के माध्यम से नैतिक शिक्षा देने, त्योहारों और महापुरुषों की जयंती के जरिए सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ाने, तथा दैनिक व्यवहार में ‘नमस्ते’, स्वच्छता और अनुशासन को शामिल करने पर बल दिया। साथ ही बच्चों में श्रम के प्रति सम्मान और प्रकृति प्रेम विकसित करने के लिए पौधारोपण एवं स्वच्छता जैसे छोटे-छोटे कार्यों को दिनचर्या का हिस्सा बनाने की बात कही। उन्होंने अभिभावकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि महीने में ‘संस्कार सभा’ आयोजित कर माता-पिता को भी इस प्रक्रिया से जोड़ा जाए, ताकि घर और आंगनबाड़ी दोनों स्थानों पर बच्चों को समान वातावरण मिल सके। मंत्री राजवाड़े ने कहा कि इस पहल से बच्चों में आत्मविश्वास, भाषा कौशल और सामाजिक व्यवहार का विकास होगा, साथ ही कुपोषण के साथ ‘चरित्र पोषण’ भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि संस्कारित बच्चे आगे चलकर अनुशासित विद्यार्थी और जिम्मेदार नागरिक बनते हैं, जिससे समाज और राष्ट्र की मजबूत नींव तैयार होती है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को ‘दूसरी माँ’ की भूमिका निभाते हुए बच्चों को प्रेमपूर्वक संस्कार देने का आह्वान किया। वर्तमान सामाजिक परिवेश में बढ़ती सामाजिक बुराइयों और मानवीय मूल्यों में गिरावट को देखते हुए उन्होंने प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को ‘संस्कार-केन्द्र’ के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

ऊर्जा मंत्री तोमर बोले – मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने रचा स्वर्णिम ऊर्जा वर्ष 2025-26

भोपाल.  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का समापन अभूतपूर्व उपलब्धियों और उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ करते हुए विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कंपनी के चारों ताप विद्युत गृहों अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई, सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी, संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर व सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया ने सामूहिक रूप से वित्तीय वर्ष 2025-26 में 26,582.7 मिलियन यूनिट ताप विद्युत उत्पादन कर प्रदेश को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की। इस दौरान चारों ताप विद्युत गृह ने 81.45 % प्लांट उपलब्धता फैक्टर (PAF) बनाए रखते हुए परिचालन दक्षता के उच्चतम मानक स्थापित किए। विद्युत गृहों की सभी इकाइयों ने निर्धारित मानकों के अनुरूप हीट रेट, विशिष्ट तेल खपत (Specific Oil Consumption) व ऑक्जलरी पावर कंजम्पशन हासिल करते हुए उत्कृष्ट तकनीकी प्रदर्शन किया। एमपीईआरसी के मानकों से बेहतर रहा प्रदर्शन परिचालन मानकों के संदर्भ में इस वर्ष अमरकंटक ताप विद्युत गृह फेज-III, सतपुड़ा ताप विद्युत गृह फेज-IV, सिंगाजी ताप विद्युत गृह फेज-II व फेज-I ने मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC) द्वारा निर्धारित PAF मानकों से अधिक प्रदर्शन किया। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह यूनिट-10 ने 98.29%, सिंगाजी सुपर ताप विद्युत परियोजना यूनिट-1 ने 94.55%, यूनिट-3 ने 88.77% और संजय गांधी ताप विद्युत गृह यूनिट-3 ने 85.92% PAF हासिल करते हुए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। विशिष्ट तेल खपत में भी कंपनी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए MPERC मानकों से कम खपत दर्ज की। वहीं अमरकंटक ताप विद्युत गृह फेज-III एवं सतपुड़ा ताप विद्युत गृह फेज-IV का हीट रेट निर्धारित मानकों से बेहतर रहा जबकि सिंगाजी ताप विद्युत गृह फेज-III का हीट रेट MPERC मानकों के लगभग समतुल्य रहा। कंपनी कार्मिकों की कर्मठता को दिया श्रेय प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में पॉवर जनरेटिंग कंपनी द्वारा किए गए उत्कृष्ट प्रदर्शन का श्रेय अभियंताओं, तकनीकी कार्मिकों व ठेका श्रमिकों को देते हुए कहा कि हमारा उद्देश्य न केवल प्रदेश की विद्युत आवश्यकताओं की सतत् आपूर्ति सुनिश्चित करना है बल्कि तकनीकी दक्षता, पर्यावरणीय जिम्मेदारी व परिचालन उत्कृष्टता के क्षेत्र में राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत पहचान भी स्थापित करना है। पॉवर जनरेटिंग कंपनी अपनी विभिन्न परियोजनाओं और नीतियों के विस्तार के साथ भविष्य में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए सतत् प्रयासरत रहेगी।  

बायोमेट्रिक अपडेट नहीं कराया तो कट जाएगा राशन

 पटना सरकारी राशन का लाभ लेने वाले करोड़ों लाभार्थियों के लिए जरूरी खबर है। सरकार ने राशन वितरण प्रणाली (PDS) को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए ई-केवाईसी लागू कर दी है। अब तक ढिलाई बरत रहे कार्डधारकों के लिए राहत की बात यह है कि अंतिम तिथि को बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दिया गया है, लेकिन इसके बाद कोई मौका नहीं मिलेगा। अगर इस डेडलाइन तक बायोमेट्रिक अपडेट नहीं हुआ, तो राशन कार्ड को 'अवैध' मानकर सूची से हटा दिया जाएगा। सरकार के इस कड़े कदम का सीधा उद्देश्य उन लोगों को सिस्टम से बाहर करना है जो गलत तरीके से योजना का लाभ उठा रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, हजारों ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ मृत व्यक्तियों के नाम पर राशन उठाया जा रहा है या एक ही आधार कार्ड कई राशन कार्डों से लिंक है। ई-केवाईसी प्रक्रिया के जरिए सरकार 'एक व्यक्ति, एक पहचान' के नियम को सख्ती से लागू कर रही है। इससे फर्जी लाभार्थियों का पत्ता साफ होगा और सही मायने में जरूरतमंदों को अनाज मिल सकेगा। नाम कटा तो रुक जाएंगी ये सुविधाएं अगर आपका नाम राशन कार्ड से कट गया, तो डीलर की मशीन पर आपका नाम शो नहीं करेगा, जिससे आपका कोटा बंद हो जाएगा। इसके साथ ही, उज्ज्वला योजना (गैस सब्सिडी) और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का डेटा अक्सर राशन कार्ड से जुड़ा होता है, वहां भी तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं। यहां तक राशन कार्ड को पते और पहचान के प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाएगा। क्या करना होगा? इसकी प्रक्रिया बहुत आसान है। कार्ड में जितने भी सदस्यों के नाम दर्ज हैं, उन सभी को अपने आधार कार्ड के साथ राशन डीलर की दुकान पर जाना होगा। वहां पॉश मशीन पर अंगूठा लगाकर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण करना होगा। याद रहे, घर के किसी एक सदस्य के जाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन सभी का वहां पहुंचना जरूरी है जिनका नाम कार्ड में है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अंतिम तिथि के बाद सर्वर डाउन होने या तकनीकी खराबी का बहाना नहीं चलेगा, इसलिए समय रहते इस जिम्मेदारी को पूरा कर लें। 30 तारीख तक सभी सदस्यों का बायोमेट्रिक अपडेट न होने पर राशन कार्ड से नाम काट दिया जाएगा।

श्रमिक सम्मेलन में विकास की नींव रखने वाले हाथों का सम्मान

रायपुर जगदलपुर के स्थानीय वीर सावरकर भवन में शुक्रवार को निर्माण श्रमिकों के सशक्तिकरण और उन्हें शासन की योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से एक श्रमिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। श्रम विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के मार्गदर्शन में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में विकास की रीढ़ कहे जाने वाले श्रमिकों का न केवल सम्मान किया गया, बल्कि उन्हें विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित भी किया गया। इस सम्मेलन में समूचे जिले के सुदूर अंचलों से आए बड़ी संख्या में श्रमिकों ने हिस्सा लिया, जिससे पूरा परिसर उनकी उत्साहजनक उपस्थिति से सराबोर नजर आया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सांसद बस्तर महेश कश्यप और नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने दीप प्रज्वलित कर आयोजन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जन प्रतिनिधियों ने अपने संबोधन में श्रमिकों को राष्ट्र का असली निर्माता बताते हुए कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के जीवन स्तर में सुधार लाना है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद महेश कश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्रमिक केवल मजदूरी करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण का आधार है। उन्होंने श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान करते हुए विश्वास दिलाया कि सरकार सदैव उनके साथ खड़ी है। कश्यप ने शासन द्वारा श्रमिकों के लिए चलाए जा रहे विभिन्न 31 योजनाओं की जानकारी और अन्य सुरक्षा योजनाओं के लाभ पर जोर देते हुए कहा कि हर श्रमिक का पंजीकरण होना अनिवार्य है ताकि शासन की मदद उन तक बिना किसी बाधा के पहुँच सके। इस अवसर पर नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। मंच से जनप्रतिनिधियों के कर-कमलों द्वारा पात्र हितग्राहियों को विभिन्न विभागीय योजनाओं के तहत सहायता राशि के चेक वितरित किए गए, जिसे पाकर श्रमिकों के चेहरों पर संतोष और खुशी के भाव स्पष्ट नजर आए। इस सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता मौके पर ही समाधान की रही, जहाँ श्रम विभाग द्वारा लगाए गए विशेष पंजीकरण शिविरों के माध्यम से नए श्रमिकों का तत्काल पंजीयन किया गया। श्रम पदाधिकारी भूपेंद्र नायक ने बताया कि इस मुहिम का उद्देश्य बस्तर के उन मेहनतकश लोगों को विभागीय योजनाओं के दायरे में लाना है जो अब तक जागरूकता के अभाव में लाभ से वंचित थे। इस सार्थक प्रयास से बस्तर के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले श्रमिक भी अब सरकार की कल्याणकारी नीतियों से सीधे जुड़ सकेंगे। इस अवसर पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक और श्रम विभाग के अधिकारी कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित थे।