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क्यूआर कोड स्कैन करते ही ‘कलेक्टर ट्री’ सुनाएगा अपनी कहानी, पचपहाड़ के सरकारी स्कूल का डिजिटल नवाचार

झालावाड़ झालावाड़ जिले के भवानीमंडी क्षेत्र के पचपहाड़ स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में पर्यावरण शिक्षा को रोचक बनाने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की गई है। हर पेड़ कुछ कहता है- नाम की अभिनव पहल चलाई जा रही है। इस पहल के तहत विद्यालय परिसर में लगे लगभग 500 पेड़-पौधों पर क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं, जिन्हें मोबाइल से स्कैन करते ही अब पौधे स्वयं अपनी विशेषताएं, उपयोग और पर्यावरणीय महत्व के बारे में ऑडियो संदेश के माध्यम से जानकारी दे रहे हैं। क्यूआर स्कैन करने पर सुनाई देगा ऑडियो प्रधानाचार्य कृष्ण गोपाल वर्मा ने बताया कि इस परियोजना की शुरुआत लगभग दो वर्ष पूर्व की गई थी। प्रारंभ में QR कोड स्कैन करने पर पौधों की जानकारी पीडीएफ के रूप में खुलती थी, लेकिन अब इस परियोजना को अपडेट करते हुए इसे ऑडियो आधारित बना दिया है। प्रोजेक्ट के संयोजक एवं राज्य स्तरीय पुरुस्कृत , डॉ दिव्येंदु सेन व्याख्याता, जीव विज्ञान ने बताया कि अब QR कोड स्कैन करते ही संबंधित पौधे के बारे में ऑडियो संदेश सुनाई देता है- मानो पौधा स्वयं अपनी कहानी सुना रहा हो। इस पहल की विशेष बात यह है कि इन ऑडियो संदेशों में स्टूडेंट्स, विद्यालय स्टाफ तथा जिला अधिकारियों, जिला कलक्टर, उपखण्ड अधिकारी, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, एबीईओ, डीईओ एवं विद्यालय प्रिंसिपल ने अपनी आवाज़ दी है, इससे यह पहल और भी प्रेरणादायक बन गई है। मुख्य आकर्षण कलक्टर ट्री मुख्य आकर्षण जीव विज्ञान के व्याख्याता डॉ. दिव्येंदु सेन ने बताया कि जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ से भी एक पेड़ को आवाज देने के लिए अनुरोध किया था। इसे उन्होंने स्वीकार किया और जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ ने भी एक वृक्ष को अपनी आवाज दी गई थी। जिसे हमने “कलक्टर ट्री” नाम दिया है, जिला कलक्टर ने कुपोषण से लड़ने में सहायक मोरिंगा (सहजन) वृक्ष के लिए अपनी आवाज में संदेश रिकॉर्ड किया है। इस वृक्ष पर लगाए गए QR कोड को स्कैन करने पर कलक्टर की आवाज़ में पेड़ का संदेश सुनाई देता है, जो स्टूडेंट्स और आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मनोविज्ञान के समन्वय पर आधारित डॉ. दिव्येंदु सेन ने बताया कि यह पहल तकनीक और शैक्षिक मनोविज्ञान के समन्वय पर आधारित है। इस परियोजना में स्टूडेंट्स की सक्रिय भागीदारी निर्धारित की गई है। स्टूडेंट्स ने स्वयं पौधों की जानकारी एकत्र की, स्क्रिप्ट तैयार की और ऑडियो रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया में भाग लिया। इससे स्टूडेंट्स की जिज्ञासा, स्मरण शक्ति और प्रकृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है। स्थानीय भाषा में उपलब्ध है रिकॉर्डिंग डॉ सेन ने आगे बताया कि इस पहल में कुछ पौधों के ऑडियो संदेश स्थानीय मालवी भाषा में भी रिकॉर्ड किए हैं, ताकि स्थानीय समुदाय भी पौधों के महत्व को समझ सकें और इस पहल से जुड़ सकें। पलाश और देशी बबूल जैसे पौधे स्थानीय भाषा में स्वयं अपनी कहानी सुनाते हैं, इससे यह परियोजना केवल स्कूल तक सीमित न रहकर समाज से भी जुड़ रही है। स्कूल परिसर में पीपल, बरगद, नीम, खेजड़ी, सागवान, अर्जुन, महुआ, जामुन, आम, अमरूद, पारिजात, पलाश, कचनार, बबूल, काजूरिना, यूकेलिप्टस, मोरिंगा सहित अनेक पौधों को इस परियोजना में शामिल किया गया है। कुछ पौधे अपनी विशेषताओं के साथ-साथ अपनी सीमाओं के बारे में भी बताते हैं, इससे स्टूडेंट्स को सही पौधा सही स्थान पर लगाने की जानकारी भी मिलती है। जिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने वाला अभिनव प्रयास बताया।          

डमी कैंडिडेट और नकल माफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, एसओजी ने शिक्षा विभाग से मांगी संदिग्धों की कुंडली

जालोर जालोर जिले में प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल, डमी उम्मीदवार और फर्जीवाड़े के मामले लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। हाल ही में स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) ने जिले को विशेष निगरानी में लेकर जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। अभ्यर्थियों की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही एसओजी मुख्यालय ने शिक्षा विभाग से संदिग्ध अभ्यर्थियों के दस्तावेज, हस्ताक्षर, आवेदन पत्र, फोटो सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी गई हैं। इसके बाद जिला स्तर पर भी जांच शुरू कर दी गई और संबंधित अभ्यर्थियों की जानकारी मुख्यालय के माध्यम से एसओजी भेजी जा रही है। विभागीय सूत्रों की मानें तो अभी तक कुल 30 अभ्यर्थियों के खिलाफ रिपोर्ट एसओजी को भेजी जा चुकी है। वहीं, 250 के लगभग अभ्यर्थी संदेह के घेरे में हैं। शुरुआती जांच में सामने आया कि कई मामलों में डमी उम्मीदवारों का चयन परीक्षा में बैठकर हुआ था। पिछले कई वर्षों की परीक्षाओं की जांच हुई शिक्षा विभाग पिछले पांच वर्षों में हुई विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की भी गहन जांच कर रहा है। विशेष रूप से शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों में गड़बड़ी पाई गई है, जिसके कारण दस्तावेजों का सत्यापन और सख्ती से किया जा रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक भंवरलाल परमार ने बताया कि एसओजी द्वारा मांगी गई सभी जानकारियों का मिलान किया जा रहा है। दस्तावेजों, आवेदन प्रक्रिया और अन्य विवरणों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने पर दोषी पाए गए अभ्यर्थियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और फर्जीवाड़े पर रोक लगाना है।  

एक्शन के बाद नई व्यवस्था: धनबाद में होमगार्ड भर्ती टेस्ट में गैजेट्स ले जाना मना

धनबाद. होमगार्ड बहाली को लेकर शहर के मेमको मोड़ स्थित मेगा स्पोर्ट्स कंप्लेक्स में शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित की जा रही है। परीक्षा के दौरान प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों के नहीं होने पर उपायुक्त आदित्य रंजन के स्तर से कार्रवाई हाने के बाद बुधवार यानी तीसरे दिन स्थितियां बदली हुई नजर आयीं। सुबह से ही सभी प्रतिनियुक्त पदाधिकारी अपने काम पर तैनात दिखे। यहां तक की परीक्षा के दौरान हर जगह सख्त निगरानी रखी जा रही थी। निगरानी के लिए डिजिटल व्यवस्था है। इस दौरान उपायुक्त आदित्य रंजन मौजूद थे और हर कार्य की निगरानी खुद की। इलेक्ट्रानिक गैजेट लेकर जाने पोर रोक बिरसा मुंडा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हर एक गतिविधि पर कड़ी निगरानी बनाए हुए हैं। उपायुक्त ने सभी पदाधिकारियों तथा कर्मियों को आदेश दिया है कि कोई भी अभ्यर्थी किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रानिक गैजेट लेकर अंदर प्रवेश न करें। परीक्षा केंद्र के हर कोने पर सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी जा रही है। साथ ही, दौड़ और अन्य शारीरिक स्पर्धाओं की निरंतर वीडियोग्राफी कराई जा रही है। दौड़ के लिए आरएफआइडी का उपयोग दौड़ के सटीक समय के मापन के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआइडी) चिप तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा अभ्यर्थियों के प्रवेश के समय बायोमेट्रिक हाजिरी और आधार सत्यापन अनिवार्य किया गया है। इससे फर्जी अभ्यर्थियों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। शांतिपूर्ण चल रही परीक्षा परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से चल रही है और सफल अभ्यर्थियों की सूची प्रक्रिया पूरी होने के बाद आधिकारिक वेबसाइट एनआइसी पर प्रदर्शित की जाएगी। – आदित्य रंजन, उपायुक्त धनबाद

पंजाब में बड़ा बदलाव: 102 नगर परिषदों के प्रधान और 9 नगर निगमों के मेयर हटाए गए

चंडीगढ़   चुनाव में देरी के चलते पंजाब सरकार ने 102 नगर परिषदों के प्रधान और नौ नगर निगमों के मेयर को हटा दिया है। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त कर दिए गए हैं। यह अधिकारी चुनाव होने तक कामकाज देखेंगे। आज से ही प्रशासनिक अधिकारी नगर परिषद और नगर निगम के कार्य संभालना शुरू कर देंगे। पंजाब सरकार ने राज्य के नगर परिषद और नगर निगमों के कार्यकाल संबंधी आदेश जारी किए हैं। जिसमें लिखा गया है कि पंजाब नगर पालिका अधिनियम, 1911 और पंजाब नगर निगम अधिनियम, 1976 के तहत राज्यपाल ने उपयुक्त अधिकारियों को अस्थायी रूप से नगर पालिकाओं और नगर निगमों की सभी शक्तियों और कर्तव्यों का पालन करने के लिए नियुक्त किया है। जारी आदेश के अनुसार, नगर पालिकाओं के कार्यकाल 5 अप्रैल से लेकर 17 जून तक के बीच में खत्म हो रहे हैं।  हालांकि, राज्यपाल की राय है कि इन नगर पालिकाओं और निगमों के चुनाव कार्यकाल की समाप्ति से पहले आयोजित नहीं किए जा सकते हैं। इसलिए पंजाब के राज्यपाल ने अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अधिकारियों को उनके पांच वर्ष के कार्यकाल की समाप्ति के अगले दिन से लेकर पुनर्गठित होने तक सभी प्रशासनिक शक्तियों और कर्तव्यों का प्रयोग करने का अधिकार दिया है। अबोहर निगम का कार्यकाल 8 अप्रैल, एसएएस नगर, होशियारपुर, बठिंडा का कार्यकाल 11 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। वहीं, बटाला नगर निगम का 18 अप्रैल, बरनाला 14 अप्रैल, पठानकोट 28 अप्रैल, मोगा 12 मई 2026, कपूरथला 6 जून को कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इन सभी नगर निगम के लिए कमिश्नर नियुक्त किए गए हैं। अधिकारियों की यह नियुक्ति नगर पालिकाओं और नगर निगमों की सुचारू व प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है, ताकि स्थानीय प्रशासनिक कार्य बाधित न हों। इस कदम से स्थानीय निकायों में संचालन की स्थिरता बनी रहेगी और नागरिकों को नियमित सेवाएं उपलब्ध होती रहेंगी।

प्रॉपर्टी रजिस्ट्री से पहले KYC अनिवार्य: नए आदेश लागू

अमृतसर. रजिस्ट्री दफ्तरों में सरगर्म लैंड माफिया के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एफ.सी.आर. (फाइनांस कमिश्नर रैवेन्यू) अनुराग वर्मा के आदेशानुसार जहां डी.सी. दलविन्दरजीत सिंह की तरफ से 8 जाली रजिस्ट्रियां करवाने वाले आरोपियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की तैयारी की जा रही है। वहीं रजिस्ट्री दफ्तरों में हाल ही में तैनात किए गए सब-रजिस्ट्रारों ने जिसमें सब-रजिस्ट्रार वन जसबीर सिंह संधू, सब-रजिस्ट्रार टू अभिषेक वर्मा और सब-रजिस्ट्रार विकास गुप्ता सहित, सब-रजिस्ट्रार करनबीर ढिल्लों की तरफ से सभी वसीका नवीसों को निर्देश दिए गए हैं कि रजिस्ट्री करवाने से पहले खरीदार और बेचने वालों के दस्तावेजों की ‘के.वाई.सी.’ जरूर करवाई जाए। अधिकारियों ने कहा कि ईजी रजिस्ट्री के तहत माल विभाग की तरफ से ‘के.वाई.सी.’ को जल्द ही सबके लिए जरुरी कर दिया जाएगा, लेकिन फिर सभी वसीका नवीसों और रैवेन्यू से संबंधित वकीलों को दस्तावेजों की ‘के.वाई.सी.’ जरुर करवानी चाहिए, ताकि बार-बार सामने आने वाली जाली रजिस्ट्रियों पर लगाम लगाई जा सके। दूसरी तरफ वसीका नवीस यूनियन की तरफ से जिला प्रधान नरेश शर्मा ने भी आश्वासन दिया है कि यूनियन के सभी पदाधिकारियों व सदस्यों की तरफ से ‘के.वाई.सी.’ को पहल के आधार पर किया जा रहा है, क्योंकि जब भी कोई जाली रजिस्ट्री का मामला पकड़ा जाता है तो इससे इमानदारी के साथ काम करने वाले वसीका नवीसों की भी बदनामी होती है। ‘के.वाई.सी.’ के पहले ही दिन पकड़ा गया था नकली अरमान जमीन जायदाद की रजिस्ट्री करवाते समय ‘के.वाई.सी.’ कितनी अहम बन जाती है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस समय सरकार की तरफ से रजिस्ट्रियों के दस्तावेजों में ‘के.वाई.सी.’ को शुरू करवाया गया तो पहले ही दिन एक नाबालिग लड़के की जमीन की जाली रजिस्ट्री होने से बच गई, जिसका नाम अरमान था संबंधित वसीका नवीस ने जब तथाकथित अरमान के दस्तावेजों की के.वाई.सी. करवाई तो अरमान नकली निकला। मामला थाने तक भी पहुंच गया, लेकिन लैंडमाफिया ने अपना दबाव बनाकर मामले को रफा- दफा कर दिया, जबकि प्रशासन की तरफ से इस मामले की गहराई के साथ जांच की जानी चाहिए थी और नकली दस्तावेज बनाने वाले आरोपियों पर सख्त एक्शन लेना चाहिए था। नकली दस्तावेज पेश करने वाले के खिलाफ 7 वर्ष की सजा का प्रावधान रजिस्ट्री दफ्तरों पर लागू रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत यदि रजिस्ट्री दफ्तरों में तैनात तहसीलदार या सब-रजिस्ट्रार आदि को कोई व्यक्ति नकली दस्तावेज पेश करता है या फिर जाली रजिस्ट्री करवाता है तो पांच लाख रुपये तक जुर्माना और 7 वर्ष की सजा का प्रावधान है रजिस्ट्री लिखते समय भी यह लिखा जाता है, लेकिन बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से इस बाबत कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं, जिससे लैंड माफिया का हौंसला बढ़ता जाता है।

मदिरा से भरा सरकारी खजाना: राजनांदगांव में 360 करोड़ की आमद, बढ़ेंगी दुकानें

राजनांदगांव. जिले में आबकारी विभाग के खजाने में शराब प्रेमियों में भरपूर राजस्व जमा कर दिया है। वर्ष 2025-26 में राजनांदगांव जिले में आबकारी विभाग ने छह सौ करोड़ का शराब बेच दिया। जिससे विभाग के खजाने में 360 करोड़ रुपए का राजस्व जमा हो गया है। पिछले साल प्राप्त राजस्व 345 करोड़ का रिकार्ड टूटने के बाद आबकारी विभाग ने इस बार चार सौ करोड़ रुपए अधिक के राजस्व का अनुमान लगाया है। यही नहीं इस को देखते हुए आबकारी विभाग ने सात और दुकान खोलने की तैयारी कर ली है। जानकारी के अनुसार, पिछले साल आबकारी विभाग को 585 करोड़ का शराब बेचने पर 345 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। लेकिन इस बार यह आंकड़ा पिछले साल से बढ़कर 360 करोड़ रुपए तक पहुंच गया हैं। वर्ष 2025-26 में अप्रैल से मार्च तक वित्तीय वर्ष में छह सौ करोड़ रुपए की शराब बिक्री हुई। यह आंकड़ा पिछले वित्तीय वर्ष से लगभग 24 फीसदी तक अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, जिले में सालभर में कुल 327 करोड़ रुपए की देशी शराब बेची गई है, यहां कुल बिक्री का लगभग 54 फीसदी है। वहीं शेष 225 करोड़ की विदेशी और 48 करोड़ विदेशी माल्ट शराब बेची गई। जिले में कुल 19 दुकानें स्थापित किए गए है। साढ़े छह सौ करोड़ शराब बिक्री का अनुमान जिले में हाल के वित्तिय वर्ष में छह सौ करोड़ का शराब बिकने के बाद आबकारी विभाग के अफसर इस वर्ष 2026-27 में बिक्री का अनुमसान साढ़े छह सौ करोड़ रुपए तक आंक रहे है। इस बिक्री से अबकारी को चार सौ करोड़ का राजस्व प्राप्त हो सकता हैं।

मध्य प्रदेश में 3 चक्रवात सक्रिय, 7 जिलों में बारिश, 11 जिलों में अलर्ट; ओले पड़ने की आशंका

भोपाल मध्य प्रदेश के आसमान पर इस समय तीन साइक्लोनिक सर्कुलेशन मंडरा रहे हैं, जिसके प्रभाव से अप्रैल के महीने में मानसून जैसा नजारा दिख रहा है. बुधवार को भोपाल, उज्जैन और रायसेन समेत 7 जिलों में झमाझम बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है. मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में ओले गिर सकते हैं।  ओलावृष्टि और आंधी का 'डबल अटैक' मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर और टीकमगढ़ में ओले गिरने का प्रबल अनुमान है. इसके अलावा, ग्वालियर-चंबल संभाग और विंध्य क्षेत्र के 18 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।  IMD (मौसम केंद्र), भोपाल ने ग्वालियर, भिंड, मुरैना, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर समेत 18 जिलों में बारिश होने का अलर्ट है, वहीं दतिया, निवाड़ी, छतरपुर और टीकमगढ़ में ओले गिरने का अनुमान जताया है। इससे पहले मंगलवार को भिंड, श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, श्योपुर, ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, गुना, अशोक नगर, टीकमगढ़, सतना के चित्रकूट और रीवा में मौसम का मिजाज बदला हुआ रहा। कहीं, तेज आंधी चली तो कहीं बारिश का दौर जारी रहा। शिवपुरी, दतिया, धार, पीथमपुर और झाबुआ में तेज बारिश हुई। वहीं रतलाम में धूल भरी हवाएं चलीं। हवा की रफ्तार: प्रदेश के कुछ हिस्सों में आंधी की रफ्तार 40 से 60 किमी प्रतिघंटा तक रह सकती है।  नया सिस्टम: 11 अप्रैल को एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हो रहा है, जिससे अप्रैल के दूसरे सप्ताह में भी गर्मी से राहत मिलने के आसार हैं।  11 अप्रैल को नया सिस्टम मौसम विभाग की मानें तो 11 अप्रैल को उत्तर-पश्चिमी हिस्से में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव होगा, जिसका असर प्रदेश में भी देखने को मिल सकता है। तेज आंधी भी चलेगी मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में तेज आंधी भी चलेगी। कुछ जिलों में इसकी अधिकतम रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रहेगी। बाकी में 30 से 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चलेगी। मौसम का मिजाज दोपहर बाद ही बदलेगा। भोपाल में 1996 में पड़ी थी सबसे ज्यादा गर्मी अप्रैल में गर्मी के ट्रेंड की बात करें तो भोपाल में 29 अप्रैल 1996 को अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस पहुंचा था। इस महीने भोपाल में बारिश-आंधी के आसार भी बनते हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ साल से अप्रैल में बारिश का दौर चल रहा है। 20 अप्रैल 2013 को भोपाल में 24 घंटे के भीतर 30.8 मिमी यानी एक इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। वहीं, 2023 में 22.6 मिमी पानी गिरा था। 17-18 अप्रैल को तापमान 40.9 डिग्री सेल्सियस रहा था। भीषण गर्मी का इतिहास और वर्तमान मध्य प्रदेश में अप्रैल का दूसरा पखवाड़ा आमतौर पर झुलसाने वाली गर्मी के लिए जाना जाता है।  ग्वालियर में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है. भोपाल का रिकॉर्ड 29 अप्रैल 1996 को 44.4 डिग्री रहा था. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से 'क्लाइमेट चेंज' के कारण अप्रैल में बारिश का ट्रेंड बढ़ा है. साल 2013 और 2023 में भी अप्रैल के दौरान भारी बारिश दर्ज की गई थी।  इन जिलों में बारिश का अलर्ट: ग्वालियर, भिंड, मुरैना, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, इटारसी और शिवपुरी। 

पश्चिमी राजस्थान के औद्योगिक विकास को लगेंगे पंख, प्रधानमंत्री करेंगे 79 हजार करोड़ की रिफाइनरी का लोकार्पण

जयपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को राजस्थान के बालोतरा जिले में पचपदरा रिफाइनरी के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। यह दौरा पिछले दो महीनों में उनका दूसरा राजस्थान दौरा होगा। इससे पहले वे 28 फरवरी 2026 को अजमेर आए थे, जहां उन्होंने हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया था। मारवाड़ सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान के लिए पचपदरा रिफाइनरी का खास महत्व है। इस परियोजना से बाड़मेर और जैसलमेर क्षेत्र में इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित होने की संभावना है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और सहायक उद्योगों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। जनवरी से ही पहले चरण के ट्रायल रन की तैयारी शुरू कर दी गई थी और अब जल्द ही कमर्शियल उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। रिफाइनरी परियोजना का इतिहास भी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इसका पहला शिलान्यास 22 सितंबर 2013 को सोनिया गांधी ने किया था, उस समय प्रदेश में अशोक गहलोत की सरकार थी और लागत करीब 37,230 करोड़ रुपए आंकी गई थी। बाद में शर्तों में बदलाव के बाद 16 जनवरी 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने इसका पुनः शुभारंभ किया, तब लागत बढ़कर 43,129 करोड़ रुपए हो गई। समय के साथ परियोजना की लागत लगातार बढ़ती गई और अब यह करीब 79,459 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है।   मुझे यह जानकारी देते हुए अत्यंत हर्ष और गर्व की अनुभूति हो रही है कि विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता, हम सभी के मार्गदर्शक, यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री @narendramodi जी आगामी 21 अप्रैल 2026 को पचपदरा रिफाइनरी के लोकार्पण हेतु वीरधरा राजस्थान पधार रहे हैं। रिफाइनरी के बारे में रिफाइनरी की सालाना क्षमता 9 मिलियन टन कच्चे तेल के प्रसंस्करण की है, जबकि 2 मिलियन टन का पेट्रोकेमिकल उत्पादन भी होगा। इसमें करीब 7.5 मिलियन टन क्रूड ऑयल अरब देशों से आयात किया जाएगा और शेष 1.5 मिलियन टन तेल राजस्थान में उत्पादित होगा। कई मोड़ों, समझौतों और विवादों से होकर गुजरी रिफाइनरी रिफाइनरी परियोजना राजस्थान और देश के लिए एक महत्वाकांक्षी औद्योगिक सपना रही है, जिसकी यात्रा दो दशकों में कई मोड़ों, समझौतों और विवादों से होकर गुजरी है। शुरुआत (2005-2013) वर्ष 2005 में इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 12,000 करोड़ रुपए रखी गई थी। इसके बाद 2013 में अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में पचपदरा में एचपीसीएल के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर हुए और शिलान्यास किया गया। उस समय परियोजना की लागत बढ़कर 37,320 करोड़ रुपए हो गई और इसकी वार्षिक क्षमता 90 लाख टन तय की गई। राजे सरकार में नए एमओयू (2013-2017) वसुंधरा राजे सरकार के सत्ता में आने के बाद पिछली सरकार के समझौते की शर्तों पर सवाल उठाए गए। इसके बाद 2017 में एचपीसीएल के साथ नया समझौता हुआ, जिसमें राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले ब्याज-मुक्त ऋण की राशि में बड़ा बदलाव किया गया और इसे 3,736 करोड़ रुपए से घटाकर 1,123 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष कर दिया गया।2018 में पीएम मोदी ने किया शिलान्यास (2018-2025) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में परियोजना स्थल का उद्घाटन किया।    

जंगल माफिया और अफसरों की मिलीभगत पर सरकार सख्त, पंचकूला के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन पर गिरेगी गाज

पंचकूला पंचकूला के संरक्षित वन क्षेत्र (आसरेवाली जंगल) में खैर के 1148 पेड़ कटने व उनकी तस्करी के मामले में राज्य सरकार ने कड़ा संज्ञान लिया है। विभाग की प्राथमिक जांच में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन आईएफएस अधिकारी बी निवेदिता, पंचकूला के रेंज अधिकारी इंस्पेक्टर सुरजीत सिंह और जिला वन्य जीव अधिकारी आरपी दांगी की लापरवाही व मिलीभगत सामने आई है। पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव विभाग के एसीएस ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को इन तीनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। निर्देश मिलने के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने पंचकूला के पुलिस कमिश्नर से तीनों पर प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की है। उन्होंने प्राथमिकी में भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा लगाने व वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत कार्रवाई किए जाने की मांग की है। इस मामले में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भी विभागीय रिपोर्ट सौंपी गई है। इसमें कहा गया है कि तीनों अधिकारियों की लापरवाही से कुल ⁠1148 पेड़ काटे गए हैं जिनमें 99 फीसदी खैर के है। कटे पेड़ों के ठूंठ को जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश भी की गई है। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि इतने बड़े स्तर पर अवैध कटाई बिना अंदरखाने मिलीभगत के नहीं हो सकती है। पत्र में तीनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात भी है। इस मामले की जांच के लिए बनाई गई छह सदस्यीय एसआईटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच शुरू हो गई है। आरोप सही साबित होने पर पहले से दर्ज एफआईआर में तीनों का नाम जोड़ा जा सकता है। तीनों की भूमिका बी. निवेदिता अंबाला कमिश्नरी और रोहतक कमिश्नरी की चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन हैं। रोहतक सर्कल में सात और अंबाला सर्कल के पांच जिलों में स्थित वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, चिड़ियाघर और कलेसर नेशनल पार्क की निगरानी की जिम्मेदारी इनके पास ही है। रिपोर्ट में लिखा कि इनकी सुपरविजन में लापरवाही हुई है जिसकी वजह से जंगल माफिया को जमकर पेड़ काटने से रोका नहीं जा सका। सुरजीत सिंह वाइल्डलाइफ रेंज अधिकारी होने के नाते पंचकूला के सभी संरक्षित जंगल क्षेत्र की सुरक्षा व वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी है। वह अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल साबित हुए। आरपी दांगी बतौर जिला वन्य जीव अधिकारी के अधीन पंचकूला, यमुनानगर, अंबाला, कुरुक्षेत्र और कैथल के जंगल व चिड़ियाघर आते हैं। उनको हर माह में अपने कार्यक्षेत्र के अधीन आने वाले एक वन क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजनी होती है। रिपोर्ट के अनुसार, इन्होंने भी ड्यूटी ठीक से नहीं निभाई।  

नीति में बदलाव: बिहार के मॉडल स्कूलों में अब उर्दू पढ़ाई भी होगी शुरू

पटना. बिहार के मॉडल स्कूलों में अब उर्दू की भी होगी पढ़ाई, सरकार ने बदला अपना फैसला; BSUTA ने जताई खुशी सीतामढ़ी. बिहार के 534 मॉडल स्कूलों में विभिन्न विषयों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में उर्दू विषय को शामिल कर लिया गया है। इससे उर्दू के शिक्षकों में जहां खुशी देखी जा रही है। वहीं, मॉडल स्कूलों में उर्दू की पढ़ाई भी सुनिश्चित हो सकेगी। इसको लेकर लेकर कुछ उर्दू शिक्षक संघों ने भी आवाज उठाई थी। इसके बाद यह मामला सरकार के संज्ञान में आया और इस दिशा में पहल की गई। भाषा को मिला न्याय: कमर बिस्बाही  बिहार स्टेट उर्दू टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष क़मर मिस्बाही ने इसके लिए मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को धन्यवाद दिया है। उन्होंने राज्य भर के मॉडल स्कूलों में ट्रांसफर होने के इच्छुक उर्दू शिक्षकों से जल्द से जल्द ई-शिक्षा पोर्टल पर ऑनलाइन फार्म भरने का आग्रह किया है, ताकि उनकी उम्मीदवारी पक्की हो सके। उन्होंने कहा कि इससे राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा को मिला न्याय मिल सकेगा। मॉडल स्कूलों के लिए शिक्षकों के रूप में उच्च शिक्षित और ट्रेंड शिक्षकों के चयन के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे, लेकिन इसमें उर्दू विषय के लिए कोई पद आवंटित नहीं किया गया था।