samacharsecretary.com

रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा, कानपुर में टेक्नीशियन ने निकाली किडनी, पुलिस की रडार पर कई बड़े डॉक्टर

 कानपुर  कानपुर पुलिस को किडनी खरीद-फरोख्त मामले में कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। किडनी ट्रांसप्लांट गैंग का नेटवर्क लगातार बढ़ता जा रहा था। इस गैंग के सदस्य एक विदेशी महिला का किडनी ट्रांसप्लांट कर चुके हैं। इसके साथ ही इस दौरान एक महिला की मौत भी हो चुकी है। कानपुर कमिश्नरेट पुलिस की जांच में यह बातें खुलकर सामने आई हैं। पुलिस किडनी कांड में आठ लोगों की गिरफ्तारी कर चुकी है। जांच टीम को डॉ. रोहित, अली, अखिलेश समेत कई लोगों की तलाश है। किडनी कांड की जांच डीसीपी वेस्ट एमएम कासिम आबिदी कर रहे हैं। पुलिस ने गाजियाबाद से पकड़े गए दो ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश को शुक्रवार को जेल भेजा था। पुलिस की पूछताछ में दोनों ने कई अहम राज उगले थे। पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी ओटी टेक्नीशियन मुदस्सर अली सिद्दीकी दिल्ली के उत्तम नगर का रहने वाला है। उसके घर पर दबिश दी गई, लेकिन वह पहले से फरार हो गया था। ओटी टेक्नीशियन ने किया ट्रांसप्लांट अली जिस मेडीलाइफ हॉस्पिटल में काम करता था। उस हॉस्पिटल के तीनों मालिक भी फरार हैं। वहीं, इस मामले में मेरठ के तीन डॉक्टरों के नाम भी प्रकाश में आए हैं। यह सभी किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े डोनर और मरीजों को ढूंढने का काम करते थे। जेल भेजे गए कुलदीप और राजेश ने पुलिस को बताया कि दिल्ली निवासी मुदस्सर अली सिद्दकी ने आयुष की किडनी निकाली और फिर पारुल तोमर को ट्रांसप्लांट कर दी। यदि पुलिस अली सिद्दकी को अरेस्ट करती है तो कई और बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं। परिवार ने दी सफाई पुलिस ने जब मुदस्सर अली सिद्दकी के घर पर दबिश दी तो अली वहां नहीं मिला। लेकिन उसकी पत्नी, बेटी और परिवार के अन्य सदस्य मिले। पत्नी ने बताया कि मेरे पति अस्पताल में ओटी स्टॉफ हैं। वह कोई न्यूरोलोजिष्ट या डॉक्टर नहीं हैं। ओटी टेक्नीशियन किडनी ट्रांसप्लांट कैसे कर सकता है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि अली दिसंबर 2025 में मेडीलाइफ हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका है। मेडीलाइफ हॉस्पिटल औरैया के डॉ. नरेंद्र, कन्नौज के डॉ. रोहन, डॉ. संदीप के पार्टनरशिप में है।  

मरुधरा में फिर बिगड़ेगा मौसम, अगले 48 घंटे में आंधी-तूफान की चेतावनी, तापमान में भारी गिरावट दर्ज

जयपुर  राजस्थान में मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ है। इसके चलते बारिश की लुका-छिपी बरकरार है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि 6 अप्रैल से एक नया और शक्तिशाली वेदर सिस्टम सक्रिय हो रहा है। इसके चलते प्रदेश के 13 जिलों में देखने को मिलेगा, यहां तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि की प्रबल संभावना है। ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में बारिश होगी। राजस्थान में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। इसके चलते मौसम विज्ञान केंद्र ने आगामी बदलाव को देखते हुए जिलों को दो श्रेणियों में बांटा है। 4 जिलों में भारी बारिश और ओलों के लिए ऑरेंज अलर्ट और 9 जिलों में मध्यम बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी के चलते यलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस नए सिस्टम का प्रभाव 8 अप्रैल तक बना रह सकता है, जिससे जनजीवन और कृषि पर सीधा असर पड़ेगा। जानिए कैसा रहा बीते 24 घंटों का हाल शनिवार को भी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम बदला रहा। शाम होते ही जयपुर, अलवर, धौलपुर, कोटा और गंगानगर समेत कई जिलों में आसमान में घने बादल छा गए। सबसे अधिक बारिश उदयपुर के कोटड़ा क्षेत्र में सर्वाधिक 32 मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं दौसा, बारां, बूंदी और टोंक में जमकर ओले गिरे। दौसा के नांगल में तो ओलों की वजह से जमीन पर सफेद चादर सी बिछ गई, जिससे फसलों को भारी नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि आने वाले दिनों में भी जारी रहेगी। तापमान में भारी गिरावट लगातार हो रही बारिश और ठंडी हवाओं के कारण राजस्थान में समय से पहले गर्मी की लहर गायब हो गई है। अधिकतम तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया है। चित्तौड़गढ़ में पारा 35.2 डिग्री रहा, जबकि जयपुर, जोधपुर और बीकानेर जैसे शहरों में भी मौसम ठंडा बना हुआ है। क्यों बदल रहा है मौसम? मौसम विशेषज्ञों के लिए मार्च-अप्रैल में इतने सक्रिय सिस्टम का बनना चर्चा का विषय है। सामान्यतः इस समय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस इतने प्रभावी नहीं होते, लेकिन इस बार उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में इनकी मजबूत स्थिति बनी हुई है। साथ ही, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी ने इस सिस्टम को और अधिक सक्रिय बना दिया है। हालांकि 5 अप्रैल को मामूली राहत मिल सकती है, लेकिन 6 अप्रैल से शुरू होने वाला नया दौर किसानों और आम जनता के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। खुशेंद्र तिवारी

बारिश के बाद डेंगू फैलाव, लुधियाना में अब तक 100 से ज्यादा संक्रमित

लुधियाना. महानगर में समय से पहले डेंगू का खतरा बना हुआ है जो बारिश से और बढ़ गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार मौसम में बदलाव के साथ-साथ ही मच्छरों का प्रकोप साफ देखने में नजर आ रहा था। शहर के हर हिस्से में मच्छरों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही थी अब इसमें और वृद्धि हो सकती है क्योंकि हर बारिश के बाद मच्छरों की संख्या बढ़ती है। अस्पतालों की रिपोर्ट की मानें तो डेंगू के मरीजों की संख्या 100 से पर हो चुकी है जबकि स्वास्थ्य विभाग 83 मरीजों को क्रॉस चैकिंग के नाम पर नैगेटिव करार दे चुका है और एक मरीज को अब तक पॉजिटिव बताया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार हर अस्पताल अपने मानकों के हिसाब से डेंगू का टैस्ट करता है और फिर उसका उपचार जिससे मरीज ठीक होकर घर चला जाता है परंतु विलंब से भेजी गई सैंपल की रिपोर्ट्स जो स्वास्थ्य विभाग को क्रॉस चैकिंग के लिए भेजी जाती है। समय बीतने के साथ और लैब स्पैसिफिक सैंपल न होने के कारण बहुत बार मरीजों की रिपोर्ट फॉल्स नैगेटिव आ जाती है। उन्होंने बताया कि मरीज के ब्लड सैंपल्स को निर्धारित तापमान पर रखना आवश्यक है अगर ऐसा न किया जाए तो टैस्ट के नतीजे बदल सकते हैं । अब देखने वाली बात यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग सैंपल के रखरखाव में निर्धारित मापदंडों को पूरा करता है या नहीं। डेंगू की रोकथाम के लिए तैयारी पूरी नहीं स्वास्थ्य विभाग ने अब तक 83 मरीजों की क्रॉस चैकिंग के नाम पर रिपोर्ट तैयार की है, परंतु हर अस्पताल से स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट्स नहीं भेजी जा रही जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों को कोई पत्र जारी नहीं किया गया है और न ही अस्पतालों के प्रतिनिधियों से कोई मीटिंग की गई है कि व हर संदिग्ध और पॉजिटिव डेंगू के मरीजों की रिपोर्ट उसी दिन स्वास्थ्य विभाग को भेज दें। अभी तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्प्रे करने के लिए दवाइयां का स्टॉक मंगवाया गया है या नहीं फोकल सप्रे और डेंगू के लारवा की जांच के लिए टीमे गठित की गई है या नहीं यहां तक की डेंगू के मच्छर का लारवा खाने वाली गैंबुजिया मछली के लिए बनाए गए छोटे से तालाब में मछलियां रखी जा रही है या नहीं क्योंकि वहां पर मछलियों की जगह कबाड़ पड़ा हुआ दिखाई देता है। नगर निगम से तालमेल नहीं मच्छरों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस वर्ष नगर निगम से कोई तालमेल नहीं किया गया है ताकि होगी का शैड्यूल बनाने के लिए कोई परस्पर सहमति बनाई जा सके। विशेषज्ञों का कहना की भले ही अभी मरीज की संख्या इतनी नहीं है परंतु लापरवाही के कारण मरीजों की संख्या एकाएक बढ़ सकती है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बेमौसमी बारिश से डेंगू का प्रकोप समय से पहले शुरू हो सकता है।

माल परिवहन की सुविधा बढ़ेगी, राजनांदगांव से नागपुर तक बनाई जा रही चौथी रेल लाइन

राजनांदगांव. रेल्वे ने तीसरी लाइन का विस्तार पूरा किए जाने के बाद अब चौथी लाइन का कार्य युध्द स्तर पर शुरू कर दिया गया है. चौथी रेल लाइन के कार्य का शुरूआत टैक बनने के जगह को समतलीकरण से शुरू कर दिया है. मोतीपुर के पास समतलीकरण और पोल घेराव का कार्य किया जा रहा है. रेल्वे की माने तो आगामी 2028 तक चौथे लाइन का कार्य पूरा कर लिया जाएगा. जिसके बाद जहां माल ढुलाई के लिए रास्ता साफ होगा, वही ट्रैफिक क्लीयर होने से पैसेंजर ट्रेनो में इजाफा होगा. तीसरी और चौथी लाइन के आलावा दुर्ग से गोंदिया व काचेवानी तक आठ ओव्हरब्रिज और अंडरब्रिज का निर्माण पूरा हो गया है. जानकारी अनुसार राजनांदगांव से नागपुर के कलमना तक 35-44 करोड़ की लागत से कुल 228 किमी तीसरी रेल लाइन का काम लगभग पूरा होने को है . दर्रेकसा की पहाड़ी, सुरंग और जंगल के पास कुछ काम बाकी है. वहीं अब चौथी रेल लाइन का काम तेजी से किया जा रहा है. रामनगर से मोतीपुर के पास जमीन को समतल भी शुरू कर दिया गया है. ओएचई केबल मिलाने पोल खड़े किए जा रहे है, वहीं स्लीपर्स पहुंच चुके है. इधर रेल्वे स्टेशन में रिनोवेशन का काम 90 फीसदी पूरा हो चुका है. चौथे प्लेटफार्म में चबूतरा बन्द, टीन शेड बन रहा. जल्द चौथे रेलवे ट्रैक का काम शुरू होगा. चार सौ करोड़ का काम होगा रेल्वे के कंट्रक्शन विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार, चौथी रेल्वे लाइन का काम बिलासपुर से नागपुर तक करीब चार सौ करोड़ की लागत से हो रहा है. बहरहाल राजनांदगांव से डोंगरगढ़ के बीच काम शुरू कर दिया गया है. मुसरा व बांकल में ट्रैक पर गिट्टी और रेत डालने का काम किया जा रहा हैं, वहीं इस कार्य को आगामी तीन अप्रैल से जून तक करने का टारगेट रखा गया है. इधर नागपुर रेल मंडल में आठ ओवरब्रिज और अंडरब्रिज से आवाजाही जल्द शुरू होगी. नागपुर मंडल में दुर्ग से गोंदिया और काचेवानी तक 8 ओवरब्रिज और अंडरब्रिज का निर्माण पूरा कर लिया गया है. अफसरों ने बताया कि जल्द ही यहां से आवाजाही शुरू की जाएगी.

लखनऊ: केजीएमयू परिसर से हटेंगी 6 मजारें, रमजान के बाद प्रशासन ने तेज की कार्रवाई

लखनऊ किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) परिसर में स्थित छह मजारों को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। केजीएमयू प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी नोटिसों की मियाद समाप्त हो चुकी है और अब संबंधित पक्षों को अंतिम रूप से 15 दिन का समय दिया जाएगा। इसके बाद प्रशासन अपने स्तर पर मजारों को हटाने की कार्रवाई करेगा। नोटिस के बाद भी नहीं मिले दस्तावेज केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के अनुसार, प्रशासन की ओर से मजारों को हटाने के लिए पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके थे। इन नोटिसों में एक निश्चित समय-सीमा निर्धारित की गई थी। दो बार नोटिस देने के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत संबंधित पक्षकारों को एक दिन का अतिरिक्त समय भी दिया गया।हालांकि इस दौरान केवल एक मजार के प्रबंधक की ओर से जवाब मिला, लेकिन वह भी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। प्रशासन का कहना है कि ये सभी संरचनाएं परिसर के नियमों का उल्लंघन करती हैं। 15 दिन में हटेंगी मजारें, विरोध से निपटने की तैयारी प्रशासन ने साफ किया है कि अगले 15 दिनों के भीतर सभी छह मजारों को परिसर से हटा दिया जाएगा। इसके लिए संबंधित पक्षों को अंतिम मौका दिया जा रहा है। तय समयसीमा के बाद केजीएमयू प्रशासन स्वयं कार्रवाई करेगा। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य परिसर में व्यवस्था बनाए रखना और भविष्य में अनधिकृत निर्माणों पर रोक लगाना है। साथ ही किसी भी संभावित विरोध से निपटने के लिए भी तैयारी की जा रही है। मजार हटने के बाद परिसर में खाली जगह उपलब्ध होगी, जिससे व्यवस्थाएं बेहतर होंगी। रमजान के कारण टली थी कार्रवाई प्रो. केके सिंह ने बताया कि मजारों को हटाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी, लेकिन रमजान के चलते इस कार्रवाई में कुछ समय के लिए ढील दी गई थी। अब रमजान समाप्त होने के बाद प्रक्रिया को दोबारा तेज कर दिया गया है। पहले भी हो चुका है विवाद यह मामला पिछले काफी समय से विवादों में बना हुआ है। मजार हटाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन ने केजीएमयू कुलपति और भूमि मामलों के नोडल अधिकारी प्रो. केके सिंह के खिलाफ तहरीर दी थी। इसके जवाब में केजीएमयू प्रशासन ने भी संस्था पर छवि खराब करने और धमकाने का आरोप लगाते हुए लीगल नोटिस भेजा था। 2025 से शुरू हुआ विवाद केजीएमयू परिसर में मजारों को लेकर विवाद की शुरुआत वर्ष 2025 में हुई थी। उस समय न्यायालय के आदेश के बाद 26 अप्रैल 2025 को हाजी हरमैन शाह की मजार के आसपास का निर्माण ध्वस्त किया गया था। इसके बाद 23 जनवरी 2026 को प्रशासन ने परिसर में मौजूद मजारों पर नोटिस चस्पा कर 15 दिन के भीतर उन्हें हटाने का निर्देश दिया। पहली समयसीमा समाप्त होने के बाद 9 फरवरी को दूसरा नोटिस जारी कर अतिरिक्त 15 दिन का समय दिया गया था। अब सभी अवसर और समयसीमाएं समाप्त होने के बाद प्रशासन अंतिम कार्रवाई के लिए तैयार है।

भूमाफियाओं के दुस्साहस पर प्रहार, जयपुर में तीसरी बार जमींदोज की गई अवैध कॉलोनी, 8 बीघा जमीन मुक्त

जयपुर  प्रदेश की राजधानी जयपुर में जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की ओर से बड़ा एक्शन लिया गया है। यहां जयपुर शहर के बाहरी इलाकों में सरकारी जमीनों पर कब्जा कर अवैध कॉलोनियां बसाने वाले भूमाफियाओं के खिलाफ अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। 4 अप्रैल को जेडीए की प्रवर्तन शाखा ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए तीन अवैध कॉलोनियों के निर्माण को जमींदोज कर दिया। जानिए कहां- कहां हुई कार्रवाई जेडीए दस्ते ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में कार्रवाई की। प्रशासन ने सुमेल और जयसिंहपुरा खोर इलाकों में बनी अवैध कॉलोनियों में बुलडोजर एक्शन लिया। इसमें सुमेल इलाके की कार्रवाई सबसे महत्वपूर्ण रही। यहां सुमेल क्षेत्र के राधा वल्लभनगर में अवैध कॉलोनी बसाई जा रही थी। चौंकाने वाली बात यह है कि जेडीए यहां पहले भी दो बार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर चुका था। भूमाफियाओं के दुस्साहस देखिये कि तीसरी बार जेडीए की सख्ती को दरकिनार कर फिर से निर्माण शुरू कर दिया गया, जिसे शनिवार को फिर मलबे में तब्दील कर दिया गया। इसके अलावा जयसिंहपुरा खोर के सांवरिया धाम और पूजा विहार में भी बुलडोजर गरजा। यहां जेडीए के स्वामित्व वाली करीब 8 बीघा बेशकीमती जमीन पर भूमाफियाओं ने कब्जा कर रखा था। जेडीए की चेतावनी, दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश जेडीए प्रवर्तन शाखा के आला अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी और कृषि भूमि पर अवैध कब्जे की हर सूचना पर त्वरित एक्शन लिया जाएगा। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अवैध निर्माण को केवल ध्वस्त नहीं किया जाएगा, बल्कि बार-बार कानून का उल्लंघन करने वाले भूमाफियाओं के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा। सरकारी जमीनों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने लोगों को सस्ते प्लॉट या लुभावने विज्ञापनों के झांसे में ना आने की भी सलाह दी है।  

स्वदेशी तकनीक का कमाल, एनएमएल के वैज्ञानिकों ने तैयार किया सोने का विशेष गोलाकार पाउडर

 जमशेदपुर झारखंड के लौहनगरी जमशेदपुर के नाम एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है. सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल ) ने देश में पहली बार 22 कैरेट सोने का गोलाकार पाउडर तैयार करने में सफलता पाई है. यह पाउडर विशेष रूप से एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग ( थ्री डी प्रिंटिंग) के लिए विकसित किया गया है. उक्त बातें सीएसआईआर-एनएमएल के वैज्ञानिक डॉ. के. गोपाला ने शनिवार को साझा की. वे बिष्टुपुर स्थित एसएनटीआई ऑडिटोरियम में इंजीनियर्स संस्था (भारत) जमशेदपुर लोकल सेंटर द्वारा आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. के. गोपाला ने कहा कि एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की सफलता पूरी तरह से कच्चे माल यानी मेटल पाउडर की गुणवत्ता पर टिकी होती है. एनएमएल की ‘विशेष गैस एटोमाइजर सुविधा’ का उपयोग कर तैयार किया गया 22 कैरेट सोने का यह पाउडर स्वदेशी तकनीक का बेहतरीन उदाहरण है. इससे भविष्य में आभूषण निर्माण और अन्य जटिल तकनीकी क्षेत्रों में थ्री डी प्रिंटिंग के प्रयोग को एक नयी दिशा मिलेगी. इससे पूर्व कच्चे माल के संश्लेषण से उन्नत उत्पाद विकास एवं विशेषता निर्धारण विषय पर आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि मनोस डे (ऑफिस हेड, टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स) और विशिष्ट अतिथि विनीत कुमार साह (चीफ लॉन्ग प्रोडक्ट्स, टाटा स्टील एवं चेयरमैन, आईईआई) ने दीप प्रज्ज्वलित कर संयुक्त रूप से किया. कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे प्रयोगशाला के नवाचारों को सीधे उद्योगों से जोड़कर भारत को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है. लैब के रिसर्च का उपयोग फैक्ट्रियों में हो: मनोस डे मुख्य अतिथि मनोस डे ने अपने संबोधन में कच्चे माल के विकास और उन्नत उत्पाद निर्माण के बीच समन्वय को जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि लैब में होने वाले शोध तभी सार्थक हैं. जब वे कारखानों तक पहुंचे. उन्होंने इंजीनियरिंग क्षेत्र में लागत और ऊर्जा की बचत पर विशेष जोर देते हुए युवाओं को नयी तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया. जटिल डिजाइनों के लिए थ्री डी प्रिंटिंग अनिवार्य: विनीत कुमार साह संस्थान के चेयरमैन विनीत कुमार साह ने स्वागत भाषण में कहा कि वर्तमान समय में सटीक फिनिशिंग और जटिल ढांचों के निर्माण के लिए एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की मांग बढ़ी है. इस तकनीक के माध्यम से ऐसी ग्रेडेड सामग्री तैयार की जा सकती है. जो पारंपरिक निर्माण विधियों से संभव नहीं थी. स्टील की आंतरिक संरचना पर शोध: डॉ. मोनालिसा मंडल एनआईटी जमशेदपुर की डॉ. मोनालिसा मंडल ने एसएस 420 मार्टेंसिटिक स्टील पर अपना शोध प्रस्तुत किया. उन्होंने बताया कि डीएमएलएस तकनीक से उत्पाद बनाते समय यदि मानकों को सही ढंग से नियंत्रित किया जाए, तो उत्पादों की मजबूती और उनकी सूक्ष्म संरचना को काफी बेहतर बनाया जा सकता है. बढ़ेगा जंग के प्रति प्रतिरोध: कौशल किशोर टाटा स्टील आरएंडडी के प्रिंसिपल रिसर्चर कौशल किशोर ने वायर आर्क एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग पर व्याख्यान दिया. उन्होंने 316 एल स्टेनलेस स्टील की सूक्ष्म संरचना में होने वाले बदलावों और उसके जंग प्रतिरोध पर पड़ने वाले प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी. उच्च तापमान तकनीक और सिरेमिक उत्पाद: डॉ. राम कृष्ण एनआईटी जमशेदपुर के डॉ. राम कृष्ण ने उच्च तापमान वाले वातावरण के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर चर्चा की. उन्होंने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सिरेमिक उत्पादों के विकास और उनके विशेषता निर्धारण की प्रक्रिया को समझाया. कार्यक्रम का संचालन जुस्को की सुकन्या दास ने किया. जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एस डी. भट्टाचार्जी ने किया. पूरे कार्यक्रम के सफल समन्वय में कृष्णेंदु शॉ की अहम भूमिका रही. संगोष्ठी के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए. विशेषज्ञों ने माना कि इस तरह के आयोजनों से इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के बीच एक प्रभावी साझा मंच तैयार होता है.

कलेक्टर का CEO पर अधिकार रद्द, हाईकोर्ट ने बहाली के आदेश दिए

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कलेक्टर की शक्तियों पर स्पष्ट सीमा तय करते हुए कहा है कि जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) का प्रभार बदलने का अधिकार कलेक्टर को नहीं है। अदालत ने इस मामले में कलेक्टर के आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता शुभा दामोदर मिश्रा को पुनः उनके पद पर बहाल करने के निर्देश दिए। इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश पार्थ प्रतिम साहू ने की। मामला बिलासपुर के निवासी शुभा दामोदर मिश्रा से जुड़ा है। उन्हें 18 जून 2025 को सचिव, आदिम जाति विकास विभाग, रायपुर द्वारा जनपद पंचायत गौरेला (जिला जीपीएम) में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के पद पर पदस्थ किया गया था। वे जून 2025 से इस पद पर कार्यरत थीं। इसी दौरान 11 मार्च 2026 को कलेक्टर, जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) ने आदेश जारी कर उन्हें CEO के प्रभार से हटाते हुए सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, गौरेला के कार्यालय में पदस्थ कर दिया। इस आदेश के खिलाफ शुभा मिश्रा ने अधिवक्ता अभिषेक पांडेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर में रिट याचिका दायर की। याचिका में तर्क दिया गया कि 11 अप्रैल 2025 को प्रमुख सचिव, आदिम जाति विकास विभाग द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, शासन द्वारा नियुक्त किसी भी जनपद पंचायत CEO को हटाने का अधिकार कलेक्टर को नहीं है। ऐसे मामलों में राज्य शासन की अनुमति आवश्यक होती है। मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए कलेक्टर द्वारा जारी आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही अदालत ने शुभा दामोदर मिश्रा को पुनः मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत गौरेला के पद पर पदस्थ करने के निर्देश दिए हैं।

स्कूली बच्चों को लू से बचाने के लिए बड़ा फैसला, सुबह 6:30 बजे से खुलेंगे बिहार के स्कूल, मिड-डे मील के नियमों में भी बदलाव

 पटना बिहार में बढ़ती गर्मी और लू को देखते हुए शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य के सभी सरकारी स्कूलों का समय बदल दिया गया है ताकि बच्चों को तेज धूप और गर्मी से बचाया जा सके. यह नई व्यवस्था 6 अप्रैल से लागू होकर 31 मई तक चलेगी. गर्मी की छुट्टियों से पहले तक स्कूल मॉर्निंग शिफ्ट में ही चलेंगे. नए टाइम टेबल के बारे में जानिए नए टाइम टेबल के अनुसार अब स्कूल सुबह 6:30 बजे खुलेंगे और दोपहर 12:30 बजे तक पढ़ाई होगी. दिन की शुरुआत प्रार्थना और अन्य गतिविधियों से होगी, जिसके बाद रेगुलर क्लासेज चलेंगी. सातवीं घंटी के बाद 12:20 बजे छात्रों की छुट्टी कर दी जाएगी. इसके बाद 10 मिनट तक शिक्षकों की बैठक होगी. इसमें दिनभर की समीक्षा और आगे की योजना बनाई जाएगी. क्या- क्या बदलाव हुआ गर्मी को ध्यान में रखते हुए मध्याह्न भोजन यानी मिड-डे मील की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है. जिन स्कूलों में बच्चों की संख्या ज्यादा है और सभी को एक साथ खाना खिलाना मुश्किल है, वहां दो हिस्सों में भोजन कराने की छूट दी गई है. कुछ बच्चे ब्रेक में खाना खाएंगे, जबकि बाकी बच्चे तीसरी या चौथी क्लास के दौरान भोजन कर सकेंगे. इस दौरान पढ़ाई का काम भी जारी रहेगा. जहां स्कूल दो शिफ्ट में चलते हैं, वहां स्थानीय हालात के हिसाब से समय तय करने का अधिकार जिला शिक्षा पदाधिकारी को दिया गया है. डीएम को भी जरूरत पड़ने पर स्कूल के समय में बदलाव करने की छूट दी गई है.

शराब की बोतलों ने मुरैना के नाले को घेर लिया, लोगों में मचा हड़कंप

मुरैना. मुरैना जिले के कैलारस थाने इलाके में आने वाले सेमई गांव के नाले में बड़ी संख्या में शराब की बोतलें देख गांव में खलबली मच गई। सूचना के बाद पुलिस ने नाले से सैकड़ों बोतलों को जब्त किया। पुलिस शराब की बोतलों की गणना कर रही है, अनुमान है कि 15 पेटी से ज्यादा शराब है। रविवार की सुबह खेतों की ओर जा रहे कुछ ग्रामीणों ने सेमई के नाले में देसी शराब की बोतले पानी में ऊपर देखीं। शराब की बोतल इतनी संख्या में थीं कि नाले का पूरा पानी बोतलों से पट गया था। सूचना के बाद कैलारस थाना प्रभारी सतेंद्र सिंह कुशवाह मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से पुलिस टीम ने पानी में उतराते हुए शराब की बातलों को जब्त किया। शराब की बोतलों पर आबकारी विभाग दर्ज ग्रामीणों में चर्चा थी कि यह नकली या जहरीली शराब हो सकती है, जिसे रात के अंधेरे में नाले में फेंका गया हो। कैलारस टीआई ने नकली या जहरीली शराब की संभावनाओं से इंकार करते हुए कहा, कि शराब की बोतलों पर आबकारी विभाग दर्ज है और शराब निर्माण 2025 मध्य में हुआ है। पुलिस का अनुमान है कि मार्च महीने में शराब ठेकेदार दुकानों पर बचे हुए स्टॉक को भी नाले में फेंक गए हों। यह भी आशंका है कल रात पूरे जिले में पुलिस का कांबिंग गश्त चली थी, तब शराब तस्कर पकड़े जाने के डर से शराब की पेटियों को नाले में फेंक गए होंगे। कैलारस टीआई कुशवाह के अनुसार बोतलों की गणना के बाद ही मात्रा का सटीक पता चलेगा। इसके अलावा जांच-पड़ताल कर रहे हैं कि शराब नाले में किसने इन्हें फेंका।