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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा – ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य सुशासन का अहम संदेश देता है

सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन का संदेश देता है महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी राज्यों में परस्पर सहयोग को बढ़ाने का कर रहे हैं महत्वपूर्ण कार्य सुशासन से गढ़ा जा रहा है नया इतिहास सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य प्रतिभाओं का मंच, युवा पीढ़ी को सार्थक संदेश बाबा विश्वनाथ और बाबा महाकाल की धरा को जोड़ा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने : उ.प्र. मुख्यमंत्री योगी वाराणसी में मध्यप्रदेश सरकार का तीन दिवसीय अनूठा आयोजन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुशासन की उत्कृष्ट परंपरा के नायक सम्राट विक्रमादित्य के जीवन काल से हम सब परिचित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कर्मस्थली काशी में इस महानाट्य के मंचन के अवसर पर यह कहना प्रासंगिक होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के सुशासन से राष्ट्र को दिए जा रहे योगदान के लिए अभिनंदन के पात्र हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी (काशी) में शुक्रवार को तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के मंचन पर संबोधित कर रहे थे। समारोह का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज बदलते दौर में 2 राज्यों के मध्य सांस्कृतिक संबंध को प्रगाढ़ करने के लिए यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण है। दोनों राज्य विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के आशीर्वाद से दोनों राज्यों को अंतर्राज्यीय केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की सौगात मिली है। यह दोनों राज्यों में सिंचाई, कृषि उत्पादन और पेयजल प्रदाय में सहयोग करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। यह प्रधानमंत्री मोदी का सुशासन भी है, जिसके अंतर्गत राज्यों के बीच परस्पर सहयोग को बढ़ाने की दिशा में कार्य हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सुशासन के इस काल में सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल में स्थापित सुशासन का स्मरण आना स्वभाविक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्र के स्वाभिमान के सम्राट विक्रमादित्य के राष्ट्र प्रेम, पराक्रम, न्यायप्रियता, प्रजा वात्सल्य और ज्ञान विज्ञान परम्परा की पुनर्स्थापना के गुणों की जानकारी युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए महानाट्य माध्यम बन रहा है। सम्राट विक्रमादित्य के युग का पुनर्स्मरण करने के लिए महानाट्य का मंचन किया जा रहा है। सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का पहले नई दिल्ली में भी मंचन हुआ है। इस नाटक में अनेक इंजीनियर, डॉक्टर, वकील और अन्य व्यवसायों से जुड़े प्रतिभाशाली व्यक्ति विभिन्न पात्रों के रूप में मंच पर भूमिका निभाते हैं। इससे प्रतिभाओं को तो मंच मिल ही रहा है, एक कुशल शासक के योगदान से देश के नागरिक भी परिचित हो रहे हैं। इस तरह यह महानाट्य लोकरंजन के साथ भारत के गौरवशाली इतिहास को भी आज जीवंत करने में माध्यम बना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में भाइयों की तीन जोड़ियां प्रसिद्ध हुई हैं। इनमें भगवान श्रीराम और लक्ष्मण, भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के साथ सम्राट विक्रमादित्य और राजा भतृहरि की जोडी शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने एक करोड़ एक लाख रुपए का सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्रारंभ किया है। एक राष्ट्रीय सम्मान 21 लाख रुपए राशि का और तीन राज्य स्तरीय सम्मान 5-5 लाख रुपए राशि के स्थापित किए गए हैं। वर्ष 2024 में हुए विक्रमोत्सव को सर्वाधिक अवधि वाली धार्मिक- आध्यात्मिक फैस्टिवल का महाद्वीप स्तरीय वॉव अवार्ड भी मिला है। यही नहीं प्रतिष्ठित ईमैक्स ग्लोबल अवार्ड भी विक्रमोत्सव को प्राप्त हुआ है। विक्रमादित्य महानाट्य मंचन यादगार क्षण : उ.प्र. मुख्यमंत्री योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विक्रमादित्य महानाट्य मंचन को यादगार क्षण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के "एक भारत-श्रेष्ठ भारत'' के भाव को साकार करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा विश्वनाथ की इस धरा को बाबा महाकाल की धरा से नाट्य मंचन के माध्यम से जोड़ने का विशिष्ट कार्य किया है। योगी ने भाइयों की जोड़ी का जिक्र करते हुए कहा कि सम्राट विक्रमादित्य और राजा भरथरी की जोड़ी का उल्लेख है। महाराजा ने नाथ संप्रदाय में दीक्षा लेकर काशी की भूमि और चुनार के किले में साधना की थी। सम्राट विक्रमादित्य ने ही आज से दो हजार साल पहले अयोध्या नगरी की खोज की थी और महाराज लव के बाद सबसे पहले भगवान राम के मंदिर का निर्माण करवाया था। सम्राट विक्रमादित्य नीति शास्त्र और न्याय के पर्याय थे। उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उज्जैन महाकाल की नगरी है और काशी पंचांग की नगरी है दोनों मिलकर नया इतिहास बनाते हुए प्रेम और सहयोग किया परंपरा मजबूती से आगे बढ़ायेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ज्ञान परंपरा को उचित स्थान देकर पूरे विश्व में प्रतिष्ठित किया है। आज योग और आयुर्वेद की पूरी दुनिया में स्वीकार्यता बढ़ी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2024 में प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन किया गया। इसमें 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने मां गंगा में स्नान किया। भेंट की गई वैदिक घड़ी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ को वैदिक घड़ी भेंट की। यह घड़ी बाबा विश्वनाथ के मंदिर में वैदिक काल को वर्तमान में जनता के बीच पुनर्स्थापित करने में सहायक होगी। इस घड़ी में प्राचीन वैदिक परंपरा तथा आधुनिक ज्ञान विज्ञान का मिश्रण करके कल की अचूक गणना का समावेश किया गया है। समारोह में उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल, एमएसएमई मंत्री राजेश सचान, पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल ,महापौर अशोक तिवारी जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, राज्यसभा सदस्य बाल योगी उमेश नाथ जी, विधायक, स्थानीय जन-प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे। वाराणसी की पावन धरा पर महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का हुआ ऐतिहासिक मंचन महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ के भव्य मंचन और ओजस्वी प्रस्तुति से दर्शकों को हजारों वर्ष पुराने स्वर्णिम युग की यात्रा कराई। महानाट्य का आरंभ सम्राट विक्रमादित्य के उस संकल्प से हुआ, जब वे विदेशी आक्रांताओं के चंगुल से मातृ भूमि को मुक्त कराने का प्रण लेते हैं। रंगमंच पर कलाकारों के सजीव अभिनय ने उस कालखंड को जीवंत कर दिया, जब शकों के आतंक से त्रस्त प्रजा की रक्षा के लिए एक महानायक का उदय हुआ था। विशाल और भव्य सेट, ऊंचे दुर्ग … Read more

योगी सरकार का बड़ा कदम: 2026 के लिए खाद आपूर्ति रणनीति तैयार

खाद आपूर्ति को लेकर योगी सरकार का बड़ा प्लान, 2026 के लिए विस्तृत आपूर्ति रणनीति तैयार यूरिया, डीएपी और एनपीके की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सप्लाई प्लान पर किया जा रहा काम सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर, निजी क्षेत्र का 35% कोटा प्रस्तावित किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए सरकार की सख्त मॉनीटरिंग व्यवस्था लखनऊ  योगी सरकार ने किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए अप्रैल 2026 के लिए एक व्यापक और सुव्यवस्थित सप्लाई प्लान तैयार किया है। इस योजना का उद्देश्य राज्य में किसी भी प्रकार की खाद कमी की स्थिति को रोकना और कृषि कार्यों को सुचारु बनाए रखना है। राज्य सरकार द्वारा जारी इस रणनीति के तहत यूरिया, डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और एनपीके (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश) जैसे प्रमुख उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है। कृषि विभाग के आला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक जिले में मांग के अनुसार खाद की आपूर्ति समय से पहले सुनिश्चित की जाए, ताकि बुवाई और फसल की बढ़वार के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।        इसके साथ ही प्रदेश के समस्त उर्वरक बिक्री केन्द्रों पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर कृषि विभाग, राजस्व विभाग एवं आवश्यकतानुसार अन्य विभागों के कार्मिकों की ड्यूटी लगाकर पारदर्शिता के साथ वितरण किया जाए। उर्वरकों की जमाखोरी कर कृत्रिम अभाव करने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए। गैर कृषि क्षेत्रों में उर्वरकों के डायवर्जन यथा-प्लाईवुड इण्डस्ट्रियल, पशु आहार निर्मित इकाइयों पर सघन निगरानी रखी जाए। फसल में संस्तुति / संतुलित मात्रा में (अधिकतम यूरिया 07 बोरी एवं डी०ए०पी०-05 बोरी प्रति हेक्टेयर) उर्वरकों का प्रयोग करने के साथ-साथ उर्वरकों का अग्रिम भण्डारण न करने के सम्बन्ध में ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए जाए। अन्तर्राष्ट्रीय / अन्तर्राज्यीय सीमावर्ती जनपदों में उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण की सघन निगरानी रखी जाए।  इस योजना में सहकारी समितियों की भूमिका को और मजबूत करने की बात कही गई है। सरकार ने सहकारी संस्थाओं के माध्यम से खाद वितरण की हिस्सेदारी बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे पारदर्शिता और सुगमता दोनों में सुधार होगा। वहीं, निजी क्षेत्र की भागीदारी को संतुलित रखते हुए उन्हें लगभग 35 प्रतिशत कोटा देने का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि सप्लाई चेन प्रभावी बनी रहे।     खाद वितरण की निगरानी के लिए सरकार ने सख्त मॉनीटरिंग व्यवस्था लागू की है। जिला स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या जमाखोरी पर तत्काल कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से खाद की उपलब्धता और वितरण पर नजर रखी जाएगी। इस सुनियोजित रणनीति से किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध होगी, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि होगी और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। यह पहल राज्य के किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सीएम हेल्पलाइन 1076 के कर्मचारियों की शिकायत पर सख्त हुए मुख्यमंत्री, वेतन वृद्धि पर कंपनी ने दी सहमति

सीएम हेल्पलाइन 1076 के कर्मचारियों की शिकायत पर मुख्यमंत्री सख्त, वेतन वृद्धि पर कंपनी की सहमति कंपनी ने कार्यस्थल की सुविधाओं में सुधार करने पर भी सहमति जताई है कर्मचारियों में प्रसन्नता की लहर, मुख्यमंत्री का जताया आभार लखनऊ   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीएम हेल्पलाइन 1076 से जुड़े कर्मचारियों द्वारा वी-विन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खिलाफ की गई शिकायतों का गंभीरता से संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के वेतन संबंधी मुद्दों एवं कार्यस्थल की समस्याओं का तत्काल और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने यूपीडेस्को की प्रबंध निदेशक को निर्देश दिया कि पूरे प्रकरण की गहन समीक्षा कर कंपनी स्तर पर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई कराई जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। निर्देश मिलते ही प्रबंध निदेशक यूपीडेस्को ने संबंधित कंपनी के शीर्ष प्रबंधन को स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा गया और उच्चस्तरीय वार्ता शुरू की गई। मुख्यमंत्री स्तर से हुए सख्त हस्तक्षेप के बाद कंपनी प्रबंधन को कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाना पड़ा। कंपनी ने कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए वेतन वृद्धि पर सहमति दे दी है। साथ ही साथ कंपनी ने कार्यस्थल की सुविधाओं में सुधार करने पर भी सहमति जताई है। यूपीडेस्को की प्रबंध निदेशक नेहा जैन ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में पूरे प्रकरण की गंभीरता से समीक्षा कराई गई है। कंपनी प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों के वेतन संबंधी मुद्दों का समाधान प्राथमिकता पर किया जाए और कार्यस्थल पर आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि कार्मिकों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में इस प्रकार की स्थिति न उत्पन्न हो, इसके लिए भी सतत निगरानी की जाएगी। बताया जा रहा है कि त्वरित कार्रवाई के चलते स्थिति जल्द ही सामान्य हो गई और कर्मचारी पुनः अपने कार्य पर लौट आए हैं। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के इस निर्णायक हस्तक्षेप की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया है और कहा है कि समय पर लिए गए निर्णय से उनकी समस्याओं का समाधान संभव हुआ। कर्मचारियों में खुशी की लहर सीएम हेल्पलाइन 1076 से जुड़े कर्मचारी हिमांशु विक्रम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, “हम सभी कर्मचारियों की समस्याओं को जिस गंभीरता से माननीय मुख्यमंत्री जी ने सुना और तत्काल प्रभाव से समाधान के निर्देश दिए, वह हमारे लिए बहुत राहत देने वाला है। लंबे समय से चले आ रहे वेतन संबंधी मुद्दों पर अब सकारात्मक निर्णय हुआ है और वेतन वृद्धि के लिए कंपनी मान गई है, इससे हम सभी कर्मचारियों में खुशी की लहर है। सीएम हेल्पलाइन 1076 से जुड़े कर्मचारी विकास यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “माननीय मुख्यमंत्री जी के त्वरित हस्तक्षेप से हमारी समस्याओं का समाधान हुआ है। वेतन संबंधी मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय के बाद स्थिति सामान्य हो गई है और हम सभी कर्मचारी अपने काम पर वापस आ गए हैं। इसके लिए हम उनका हृदय से धन्यवाद करते हैं।” सीएम हेल्पलाइन 1076 से जुड़े कर्मचारी अंकित शुक्ला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “माननीय मुख्यमंत्री जी ने हमारी बात को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई कराई, जिससे हमारी समस्याओं का समाधान संभव हुआ। कंपनी द्वारा वेतन संबंधी मांगों पर सहमति बनने के बाद अब कार्यस्थल का माहौल भी बेहतर हुआ है। हम सभी कर्मचारी उनके इस निर्णय के लिए धन्यवाद देते हैं और पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने कार्य में लगे हैं।

प्राचीन विरासत की झलक: गढ़पहाड़ की गुफाएं बयां करती हैं इतिहास के अनछुए पन्ने

रायपुर गढ़पहाड़ की गुफाओं में झलकती प्रागैतिहासिक सभ्यता की अनूठी विरासत प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध जशपुर जिला अब अपनी समृद्ध पुरातात्विक धरोहर के कारण भी विशेष पहचान बना रहा है। जिले से लगभग 30 किलोमीटर दूर मनोरा विकासखंड के ग्राम जयमरगा स्थित गढ़पहाड़ की गुफा में मिले आदिमकालीन शैलचित्र प्रागैतिहासिक मानव जीवन की महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करते हैं। यह स्थल न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत आकर्षक बनता जा रहा है। ग्राम पंचायत डड़गांव के आश्रित ग्राम जयमरगा की आबादी लगभग 1400 है और यहां तक सड़क मार्ग से सहज पहुंचा जा सकता है। गांव से लगभग 300 मीटर ऊँची पहाड़ी पर चढ़ाई करने के बाद गढ़पहाड़ की इस प्राकृतिक गुफा तक पहुंचा जाता है। घने जंगलों के बीच स्थित यह गुफा आज भी स्थानीय ग्रामीणों के लिए आस्था का केंद्र है, जहां वे पूजा-अर्चना करते हैं। पुरातत्त्ववेत्ता डॉ. अंशुमाला तिर्की एवं  बालेश्वर कुमार बेसरा के अनुसार, जयमरगा क्षेत्र प्रागैतिहासिक स्थलों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। यहां पहाड़, जंगल और नदी की उपलब्धता के कारण प्राचीन मानव के लिए भोजन, पानी और आश्रय की समुचित व्यवस्था रही होगी। इसी कारण यह क्षेत्र आदिमानवों के निवास का प्रमुख केंद्र रहा प्रतीत होता है। गुफा में प्राप्त शैलचित्र मध्य पाषाण काल से संबंधित माने जा रहे हैं। इन चित्रों में मानव आकृतियों के साथ-साथ पशु आकृतियाँ, ज्यामितीय आकृतियाँ तथा कुछ रहस्यमयी आकृतियाँ भी अंकित हैं। लाल एवं सफेद रंगों से बनाए गए ये चित्र उस समय की कलात्मक अभिव्यक्ति और जीवन शैली को दर्शाते हैं। विशेष रूप से बैल, तेंदुआ, हिरण और मानव  आकृतियों का चित्रण उस काल के शिकार एवं सामाजिक जीवन की कहानी कहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह गुफा संभवतः प्राचीन काल में पहरेदारी स्थल के रूप में प्रयुक्त होती रही होगी, जहां से शिकारी वन्यजीवों पर नजर रखते थे। यहां हेमाटाइट पत्थर की उपलब्धता भी पाई गई है, जिसका उपयोग रंग बनाने में किया जाता था। इसके अतिरिक्त, स्थल से माइक्रोलिथिक उपकरण जैसे लुनैट, स्क्रैपर, पॉइंट, ट्रैपेज, साइड स्क्रैपर और ब्लेड भी प्राप्त हुए हैं, जो उस समय के मानव द्वारा शिकार एवं दैनिक कार्यों में उपयोग किए जाते थे। गढ़पहाड़ की यह गुफा जशपुर जिले की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को सहेजने का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इस अमूल्य धरोहर को संरक्षित किए जाने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी प्रागैतिहासिक मानव सभ्यता के इस अद्भुत साक्ष्य से परिचित हो सकें।वाल लेखन कर MSW छात्रा द्वारा जल संरक्षण के लिए किया जा रहा जागरूक- जन अभियान परिषद मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार जल गंगा संवर्धन अभियान पुरे मध्यप्रदेश मे चालया जा रहा है  अभियान अंतर्गत जिला समन्वयक  रविन्द्र शुक्ला के निर्देश पर विकासखंड करकेली के सेक्टर 2 निगहरी के परामर्शदाता संतोष त्रिपाठी के मार्गदर्शन मे MSW छात्रा साक्षी जैन    द्वारा दीवार लेखन कर जल स्त्रोतो व जल संरक्षण के प्रति  समाज को जागरूक किया जा रहा है । साक्षी जैन द्वारा समस्त समाज से आग्रह किया गया कि आप सभी भी इस अभियान का हिस्सा बनें और जल संरक्षण हेतु प्रेरित करें , जब सर्व समाज एक जुट होकर आगे बढ़ेगा तो हम सभी के प्रयास से यह अभियान सफलतम रास्ते पर अग्रसर रहेगा ।

सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित महानाट्य में शामिल हुए CM योगी और सीएम यादव

सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित महानाट्य कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व एमपी के सीएम मोहन यादव सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का काशी की धरा पर मंचन ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की उत्कृष्ट अवधारणा का उदाहरण – सीएम योगी आदित्यनाथ यह आयोजन भारतीय कालगणना की नगरी उज्जैन और पंचांग निर्माण की नगरी काशी का सम्मिलन है – सीएम योगी सीएम योगी आदित्यनाथ ने आयोजन को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और ज्ञान को पुनर्जीवित करने का माध्यम बताया वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित महानाट्य कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा के महानायक सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित महानाट्य का आज काशी की धरा पर मंचन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस आयोजन ने मां गंगा के तट पर बाबा विश्वनाथ की पावन धरा को महाकाल की धरा उज्जैन के साथ एक सांस्कृतिक एकता के बंधन से जोड़ने का काम किया है। इसके लिए मैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, सांस्कृतिक विभाग के पदाधिकारियों और इस आयोजन से जुड़े सभी कलाकारों का उत्तर प्रदेश में काशी की धरा पर स्वागत करता हूं। मुख्यमंत्री ने काशी और उज्जैन नगरी के संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि जिस तरह से भारतीय परंपरा में भाई-भाई के संबंध के आदर्श रूप में भगवान राम-लक्ष्मण और कृष्ण-बलराम की जोड़ियां प्रसिद्ध हैं, वैसे ही नाथ संप्रदाय में दीक्षित संत भर्तृहरि और सम्राट विक्रमादित्य की जोड़ी भी प्रसिद्ध है। सम्राट विक्रमादित्य की कर्मस्थली जहां उज्जैन थी, तो वहीं संत भर्तृहरि की साधनास्थली काशी के गंगा तट पार स्थित है। काशी के ठीक उस पार चुनार का किला उनके ही तप और आशीर्वाद से संभव हुआ था। यूपी सरकार चुनार के किले के सौंदर्यीकरण और संरक्षण का कार्य कर रही है। सीएम योगी ने कहा कि यह आयोजन भारतीय कालगणना की नगरी उज्जैन और पंचांग निर्माण की नगरी काशी का सम्मिलन है, जो भारत की कालगणना की परंपरा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करेगा। वर्ष 2014 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह से देश के पारंपरिक ज्ञान और कौशल का विकास किया जा रहा है, उसे आज पूरा विश्व स्वीकार कर रहा है। भारतीय परंपरा का योग हो या आयुष, आज पूरा विश्व उसे स्वीकार कर रहा है। कुंभ की परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है, लेकिन वर्ष 2019 में जब प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में इसका भव्य आयोजन किया गया तो पूरा विश्व इसमें सहभागी बना। पूरी दुनिया से 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु प्रयागराज की धरा पर महाकुंभ में आए। मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और अयोध्या धाम में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण के बाद से देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालु हर वर्ष काशी और अयोध्या आ रहे हैं। अयोध्या नगरी के पुनरुत्थान में भी महाराज विक्रमादित्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 2000 वर्ष पहले अयोध्या नगरी को खोजने का कार्य सम्राट विक्रमादित्य ने ही किया था। प्रभु श्रीराम के पुत्र लव के बाद सबसे पहले श्रीराम मंदिर भी सम्राट विक्रमादित्य ने बनवाया था। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सम्राट विक्रमादित्य के प्रयासों को ही आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित इस नाट्य प्रस्तुति को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि नाटक, कला और सिनेमा समाज को दिशा देने का माध्यम होते हैं और कलाकारों द्वारा निभाए गए पात्र युवाओं के लिए प्रेरणा बनते हैं। मैं सिनेमा निर्माताओं को भी सुझाव देता हूं कि सकारात्मक चरित्रों को ही नायक के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए। एक कालखंड था, जब सिनेमा नकारात्मक चरित्रों को नायक के रूप में स्थापित करता था। इसका परिणाम यह हुआ कि देश की एक पीढ़ी इससे प्रभावित होकर बर्बाद हो गई। मुख्यमंत्री ने इस नाट्य रूपांतरण को भारतीय संस्कृति, पराक्रम, दानवीरता, न्याय व्यवस्था और सुशासन जैसे मूल्यों को पुनर्जीवित करने का माध्यम बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि यह प्रयास आज की नई पीढ़ी को अपने प्राचीन सांस्कृतिक मूल्य और आदर्शों से जोड़ने के वृहद अभियान का एक हिस्सा है। इस सराहनीय प्रयास के लिए उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, संस्कृत विभाग और सभी कलाकारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

रायपुर: खनिज राजस्व में 14% की बढ़ोतरी, 25-26 में ₹16,625 करोड़ की आय

रायपुर :खनिज राजस्व में 14 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि , 25–26 में ₹16,625 करोड़ की प्राप्ति  पारदर्शी प्रबंधन और तकनीकी नवाचार से हासिल हुई सफलता  रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और सुदृढ़ प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की गई है।  खनिज विभाग के सचिव पी दयानंद ने बताया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में ₹16,625 करोड़ का खनिज राजस्व अर्जित कर लक्ष्य का 98 प्रतिशत प्राप्त किया है, जो सुशासन, प्रभावी नीति क्रियान्वयन और मजबूत निगरानी व्यवस्था का प्रत्यक्ष परिणाम है।यह उपलब्धि न केवल प्रभावी प्रशासनिक रणनीति का परिणाम है, बल्कि राज्य की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूती को भी दर्शाती है। इस वर्ष खनिज राजस्व में 14 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले पांच वर्षों की औसत वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 6 प्रतिशत से दोगुनी से अधिक है। यह वृद्धि राज्य शासन द्वारा अपनाए गए सुधारात्मक और तकनीकी उपायों की सफलता को रेखांकित करती है। खनिज राजस्व में इस वृद्धि के प्रमुख कारकों में एनएमडीसी (NMDC) तथा अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के लिए डिस्पैच रूट्स का प्रभावी अनुकूलन शामिल है। इसके साथ ही, ‘खनिज 2.0’ (Khanij 2.0) जैसे आईटी-आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से पारदर्शिता, निगरानी और संचालन दक्षता में उल्लेखनीय  सुधार हुआ है। आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार का विशेष ध्यान गौण खनिजों को भी ‘खनिज 2.0’ प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर रहेगा, जिससे संपूर्ण खनन प्रणाली को डिजिटल और एकीकृत बनाया जा सके। इसके अतिरिक्त, खनिज परिवहन की निगरानी को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए वीटीएस (VTS), आई-चेक गेट्स (iCheck Gates) तथा ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली को और व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार का उद्देश्य खनिज संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए राजस्व में सतत वृद्धि करना है। इन प्रयासों से न केवल राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि विकास कार्यों के लिए संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी – विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़

उत्तर प्रदेश बनेगा विश्व की आध्यात्मिक राजधानी, पर्यटन विभाग ने पेश किया यूपी@2047 का रोडमैप

विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित होगा उत्तर प्रदेश, पर्यटन विभाग ने पेश किया विकसित यूपी@2047 का रोडमैप पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में यूपी का योगदान 9.2 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 16 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य “विकसित उत्तर प्रदेश@2047” का विजन पर्यटन में वृद्धि के साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाना लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “विकसित उत्तर प्रदेश@2047” के विजन के तहत वर्ष 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर इकॉनामी का लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में पर्यटन विभाग ने अपना रोडमैप जारी किया है। जिसके तहत विभाग ने वर्ष 2047 तक राज्य को विश्व की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में देश के पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में यूपी का योगदान वर्तमान के लगभग 9.2 प्रतिशत में क्रमिक रूप से बढ़ोतरी करते हुए वर्ष 2029-30 तक 11 प्रतिशत, वर्ष 2035-36 तक 14 प्रतिशत और वर्ष 2046-47 तक 16 प्रतिशत तक प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पर्यटकों के लिए कमरों की उपलब्धता को 150 तक पहुंचाने का लक्ष्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकसित उत्तर प्रदेश@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में पर्यटन विभाग सबसे जरूरी कार्य राज्य में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने के प्रयासों को और गति प्रदान करेगा। हालांकि इस दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में प्रदेश के पर्यटन एवं सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का वृहद पैमाने पर सौंदर्यीकरण व जीर्णोद्धार किया गया है। साथ ही यूपी पर्यटन नीति-2022 के तहत राज्य में पर्यटन आधारित अवसंरचना होटल, रेस्टोरेंट, होमस्टे का भी तेज गति से विकास किया गया है। इसी क्रम में राज्य के पर्यटकों के लिए उपलब्ध कमरों की संख्या को वर्तमान में प्रति लाख जनसंख्या पर 30 से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 150 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही राज्य में विदेशी पर्यटकों के ठहरने की औसत अवधि को वर्तमान की 3 रात्रि से बढ़ाकर वर्ष 2046-47 तक 6 रात्रि तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी करने के किए जाएंगे सभी संभव प्रयास पर्यटकों की संख्या के मामले में भी उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर अपनी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। हालांकि घरेलू पर्यटकों के मामले में उत्तर प्रदेश सभी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल कर चुका है, जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी राज्य का चौथा स्थान है, जिसमें बढ़ोतरी करने के सभी संभव प्रयास किए जाएंगे। पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था के मानक के अनुसार राज्य में आने वाला 1 पर्यटक 6 लोगों के लिए आय का सृजन करता है। इस दिशा में वर्ष 2025 में महाकुंभ के भव्य आयोजन में आए रिकॉर्ड 66 करोड़ पर्यटकों के अतिरिक्त राज्य के अन्य पर्यटन स्थलों में 64.9 करोड़ पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। पर्यटन विभाग पर्यटकों की इस संख्या को वर्ष 2029-30 तक बढ़ाकर 75 करोड़ और वर्ष 2047 तक 100 करोड़ पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। यूनेस्को से मान्यता प्राप्त विरासतों की संख्या 20 तक पहुंचाने का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में यूनेस्को से मान्यता प्राप्त भौतिक एवं अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों की संख्या बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। जिसके तहत वर्तमान में प्रदेश के पास  यूनेस्को से मान्यता प्राप्त 07 विरासतें हैं, जिनकी संख्या वर्ष 2029-30 तक 08,  2035-36 तक 14 और वर्ष 2047 तक 20 पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, साथ ही विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का “विकसित उत्तर प्रदेश@2047” का विजन राज्य में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को एक नई गति देने के साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर और अधिक प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सनातन संस्कृति और भारत की प्राचीन सभ्यता के केंद्र काशी, अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन के विकास से उत्तर प्रदेश में न केवल पर्यटन गतिविधियों का विकास हो रहा है, बल्कि उत्तर प्रदेश वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में भी स्थापित हो रहा है। इसके साथ ही राज्य में रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था की बढ़ोतरी भी सुनिश्चित हो रही है।

नीतीश का इस्तीफा कब आएगा? नई सरकार के गठन की तारीख तय, बीजेपी का सीएम उम्मीदवार कौन होगा?

पटना  बिहार में सत्ता परिवर्तन की तस्वीर साफ होती दिख रही है. नीतीश कुमार के विधान परिषद से इस्तीफा देने के बाद अब उनका दिल्ली जाना पक्का हो गया. सीएम पद से इस्तीफा देने के साथ ही नीतीश को Z प्लस कैटेगरी की सुरक्षा भी मिल जाएगी, जिसकी अधिसूचना भी जारी हो गई है.बिहार में अब नई सरकार के गठन का फाइनल शेड्यूल भी तय हो गया है, लेकिन सवाल यही है कि बीजेपी किसे मुख्यमंत्री बनाएगी?  नीतीश कुमार मीडिया के साथ बातचीत का सिलसिला बंद कर चुके हैं. ऐसे में लोगों के मन सवाल है कि नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्यता की कब शपथ लेंगे और सीएम पद कब छोड़ेंगे. इसके अलावा नई सरकार का गठन कब तब हो जाएगा, इन सभी सवाल से अब तस्वीर साफ होने जा रही है।  सीएम पद से नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के साथ ही सरकार गठन की औपचारिकता अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक पूरी हो जाएगी. ऐसे में नई सरकार के गठन का शेड्यूल फाइनल हो गया है. कौन मुख्यमंत्री बनेगा और कौन कुर्सी पर होगा विराजमान, ये बीजेपी को तय करना?  नीतीश कुमार सीएम पद से कब देंगे इस्तीफा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला हुआ है. इसी बीच नीतीश कुमार के दिल्ली जान का शेड्यूल सामने आ गया है. सीएम नीतीश के आवास पर 6 अप्रैल को जेडीयू के कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है. माना जा रहा है कि 6 अप्रैल को नीतीश कुमार के साथ होने वाली बैठक में जेडीयू के दिग्गज नेता कोई अहम फैसला लेंगे।  पटना में जेडीयू नेताओं के साथ बैठक के बाद नीतीश कुमार दिल्ली आएंगे. नीतीश 9 अप्रैल को दिल्ली में जेडीयू राष्ट्रीय परिषद और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेंगे. इस दौरान कई अहम फैसले ले सकते हैं. इसके अलावा बीजेपी नेताओं के साथ भी उनकी मुलाकात का कार्यक्रम में है।  मोदी-शाह के मुलाकात के बाद क्या छोड़ेंगे पद नीतीश कुमार दिल्ली प्रवास के दौरान पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात कर सकते हैं. 10 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के सदस्य के रूप में सदस्यता ग्रहण करेंगे. माना जा रहा है कि 10 अप्रैल की ही नीतीश कुमार दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे. पीएम से नीतीश कुमार बिहार की नई सरकार के गठन पर चर्चा कर सकते हैं।  राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना फाइनल हो जाएगा. हालांकि, राज्यसभा सदस्य रहते हुए भी नीतीश छह माह तक मुख्यमंत्री रह सकते हैं, लेकिन माना जा रहा है कि दिल्ली से लौटने के बाद नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने का ऐलान कर सकते हैं. खरमास खत्म होने के साथ ही राज्यपाल को नीतीश कुमार अपना मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा सौंप सकते हैं।  बिहार में नई सरकार गठन का शेड्यूल फाइनल नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के साथ ही नई सरकार के गठन की प्रक्रिया बीजेपी शुरू कर देगी. माना जा रहा है कि राजधानी पटना में 12 और 13 अप्रैल में से किसी दिन एनडीए विधायक दल की बैठक बुलाई जा सकती है. इस बैठक में एनडीए विधायक दल का नेता चुना जाएगा, क्योंकि नए मुख्यमंत्री के चुनने में नीतीश कुमार के पसंद का भी ख्याल रखा जाना है. यह बात बीजेपी और जेडीयू दोनों ही तरफ से कही जा चुकी है. नीतीश के इस्तीफा देने के साथ ही बीजेपी नई सरकार के लिए अपनी एक्सरसाइज शुरू कर देगी।  मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ते ही बीजेपी नई सरकार के गठन के लिए सबसे पहले मुख्यमंत्री के चेहरे को चुनाव करना होगा. नए मुख्यमंत्री को चुनने में बीजेपी के साथ नीतीश कुमार का भी रोल होगा. ऐसे में मान जा रहा है कि खरमास के बाद नई सरकार के गठन की कवायद होगी, जिसके लिए एक्सरसाइज शुरू हो चुकी है. अब गेंद बीजेपी के पाले में है।  बीजेपी किसे बनाएगी बिहार का नया सीएम बिहार में यह तय है कि मुख्यमंत्री बीजेपी का ही बनेगा. लेकिन, कौन बनेगा, इसे लेकर पार्टी अभी अपने पत्ते नहीं खोल रही है जेडीयू के बड़े नेता लगातार कहते रहे हैं कि सीएम बीजेपी से ही बनेगा, लेकिन वह नीतीश के मन मुताबिक होगा. बीजेपी किसे मुख्यमंत्री बनाती है, ये बात सभी के लिए एक पहेली बनी हुई है. ऐसे में कई नामों पर चर्चा है, लेकिन किसी पर अभी तक फाइनल मुहर नहीं लगी है।  हालांकि, बिहार के नए सीएम के लिए नीतीश कुमार की पसंद की बात करें तो उन्होंने अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान इशारों-इशारों में अपने संकेत दे चुके हैं. समृद्धि यात्रा में जनसंवाद के दौरान नीतीश कुमार ने मंच पर सम्राट चौधरी के के कंधे पर हाथ रखकर सियासी संदेश देते रहे हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने कई जगह कहा भी कि अब ये ही सब काम देखेंगे. अब इससे बड़ा संकेत क्या हो सकता है।  बीजेपी क्या बिहार में भी चौंकाएगी यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी नीतीश के चयन पर मुहर लगाती है या पुरानी परिपाटी निभाते हुए कोई चौंकाने वाला नाम घोषित करती है.बीजेपी ने 2014 से अपने फैसले से चौंकाती रही है. देखा गया है कि जिसके नाम की चर्चा रहती है, उसे पार्टी सीएम नहीं बनती।  हरियाणा में मनोहर खट्टर और झारखंड में रघुवर दास के नाम चौंकाने वाले थे.मध्य प्रदेश में मोहन यादव, राजस्थान में भजन लाल शर्मा और दिल्ली में रेखा गुप्ता को बीजेपी ने सीएम बनाकर चौंका दिया था. ऐसे में अब देखना है कि बिहार में किसे सत्ता की कमान सौंपती है। 

सीमा हैदर ने बेटे का रखा अनोखा नाम, पाकिस्तान को होगा बड़ा झटका

नोएडा पाकिस्तान से भारत आईं सीमा हैदर फरवरी 2026 में छठी बार मां बनी थीं।  सीमा और उनके पति सचिन ने बेटे का नामकरण किया। कपल ने बेटे का नाम 'भारत' रखा है जिसे जानने के बाद हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान को मिर्च जरूर लगेगी। नामकरण समारोह नोएडा के रबुपुरा स्थित उनके निवास पर आयोजित किया गया। इस दौरान सीमा ने कहा कि हिंदू धर्म बहुत सुंदर है और उन्हें हिंदू होने पर गर्व महसूस होता है। बेटे के नामकरण को लेकर सीमा हैदर ने कहा कि ‘हिंदू धर्म में जब घर में बेटा होता है तो नामकरण किया जाता है। यह दूसरा कुआं पूजन है, इससे पहले जब मीरा हुई थी, तब कराया था। बहुतअच्छा महसूस करती हूं और खुशी महसूस होती है। हमारा हिंदू धर्म बहुत खूबसूरत है और बहुत सारी खूबसूरत दिखाता है। छोटे-छोटे त्योहार प्यार बढ़ाते हैं। मैं बहुत खुश हूं और कभी पछतावा नहीं होता। मुझे गर्व होता है कि मैं हिंदू हूं।’ भारत नाम रखने के पीछे की वजह भी बताई बेटे का नाम भारत रखने के पीछे क्या वजह थी इसपर सीमा बताती हैं कि 'पंडित ने जब नाम निकाला तो वह 'भ' अक्षर से आया तो हमने सोचा कि भारत से सुंदर नाम कोई हो ही नहीं सकता तो हमने रख लिया।' 'वापस पाकिस्तान नहीं जाना चाहती' उन्होंने आगे कहा कि ‘भारत को सपोर्ट करना उन्हें अच्छा लगता है। हर मैच में वह भगवान से भारत की जीत की प्रार्थना करती हैं। जब भारत जीतता है, तो उन्हें गर्व और खुशी महसूस होती है। उनके अनुसार, जीत के बाद पूरा परिवार मिलकर जश्न मनाता है। वापस पाकिस्तान नहीं जाना चाहती। हर कास्ट के लोग रबूपुरा में रहते हैं। मुझे प्यार करते हैं, सम्मान देते हैं। मुझे अपनी बहू मानते हैं।’ साल 2023 में अपने चार बच्चों के साथ भारत आई थीं आपको बता दें कि सीमा के पहले पति से चार बच्चे हैं। जबकि, सचिन से मिलने के बाद वह दो और बच्चों की मां बनी हैं। पाकिस्तानी नागरिक सीमा साल 2023 में अपने चार बच्चों के साथ नेपाल के रास्ते भारत आई थीं। सचिन से सीमा की मुलाकात ऑनलाइन गेम PUBG खेलने के दौरान हुई थी। इसके बाद सीमा जब यूपी आई तो सचिन ने उन्हें किराए के मकान में अपने साथ रखा। कपल यह भी दावा करता है कि दोनों ने 2023 में काठमांडू के एक मंदिर में शादी की थी। सीमा कई मौकों पर कह चुकी हैं कि अब हिंदुस्तान ही उनके लिए सबकुछ है और वह यहां पर ही रहना चाहती हैं।

खेतों में खड़े बिजली के खंभे हटाए जाएंगे, अंडरग्राउंड तार और स्मार्ट ट्रांसफार्मर लगेंगे; सीएम मान करेंगे प्रोजेक्ट का शुभारंभ

जालंधर  पंजाब के खेतों में लगे बिजली के खंभों को अब हटा दिया जाएगा। उनकी जगह अंडरग्राउंड तारें बिछाई जाएंगी। यहां लगे बड़े ट्रांसफार्मर भी हटेंगे और इनके बदले में छोटे आकार के स्मार्ट ट्रांसफार्मर इंस्टॉल किए जाएंगे। किसानों को राहत देने, कृषि कार्यों के लिए बिजली आपूर्ति को सुचारू व निर्बाध बनाने और खेतों में लगे खंभों व तारों की वजह से होने वाले विवादों को निपटाने के मकसद से पंजाब सरकार ने यह फैसला लिया है। इस परियोजना की शुरुआत मुख्यमंत्री भगवंत मान के गांव सतोज से बतौर पायलट प्रोजेक्ट की जाएगी।  पंजाब में 13236 ग्राम पंचायतें मौजूद हैं और यहां खेतिहर जमीनों पर तीन लाख से अधिक खंभे मौजूद हैं। दरअसल, सिंचाई के लिए किसानों द्वारा लगाई गई मोटरों तक बिजली पहुंचाने के लिए खंभों की मदद से ही तारों का जाल खेतों में फैला हुआ है। इसी बिजली आपूर्ति को सुचारू रखने के लिए खेतों में काफी संख्या में ट्रांसफार्मर भी मौजूद हैं। इस योजना के तहत पंजाब स्टेट पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अफसरों ने गांव सतोज का दौरा कर लिया है। गांव में करीब दो हजार एकड़ खेतीहर जमीन हैं, जहां सिंचाई के लिए लगभग 400 मोटरें और 800 से अधिक खंभे लगे हैं। इस वजह से बनाई योजना इन तारों के ढीले होने के चलते स्पार्किंग की वजह से अक्सर खेतों में कई दुर्घटनाएं हो जाती हैं। कभी तारों की चिंगारियां पकी हुई फसलों को जलाकर रखा कर देती हैं, तो कहीं खेतों में काम कर रही कंबाइन मशीनें इन तारों से टकरा जाती हैं। इसके अतिरिक्त खेतों से गुजरती तारें और खंभों को खड़ा करने के लिए लगाई गई सपोर्ट (खिच) भी किसानों के बीच आपसी विवाद का बड़ा कारण बन जाती हैं। ऐसे भी कई विवाद सामने आए हैं। दूसरा, बड़े आकार के ट्रांसफार्मरों से खेतों में काफी जगह भी घिर जाती है, जहां किसान फसल नहीं लगा पाते। ढीली तारों की वजह से ट्रांसमिशन लॉस भी काफी रहता है। बिना खंभों के सुंदर लगेंगे खेत : मान पंजाब के सीएम भगवंत मान ने कहा कि यह बहुत महत्वाकांक्षी योजना है। सभी गांवों से खंभे और तारें हटा दी जाएंगी। तारें अंडरग्राउंड होंगे और छोटे आकार वाले ट्रांसफार्मर लगेंगे। बिना खंभों के गांव सुंदर दिखेंगे। सीएम ने कहा, इसके अलावा इन खंभों, ट्रांसफार्मरों और तारों की वजह से होने वाले नुकसान व विवाद भी खत्म हो जाएंगे जबकि बिजली आपूर्ति और बेहतर होगी। इसी माह उनके गांव सतोज से इस योजना की शुरुआत होगी। इस बारे में जल्द बिजली अफसरों संग बैठक करेंगे।