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GMADA की स्कीम, बनेंगी चंडीगढ़ जैसी लग्जरी कोठियां, ₹60 हजार प्रति गज तक पहुंचेगी जमीन की कीमत

चंडीगढ़   सिटी ब्यूटीफुल के नाम से देश- दुनिया में विख्यात चंडीगढ़ जैसा एक और नया शहर बसाने की तैयारियां शुरू हो गई है. पंजाब सरकार ने न्यू चंडीगढ़ (मुल्लांपुर) में 309.30 एकड़ जमीन पर लो डेंसिटी आवासीय टाउनशिप विकसित की जाएगी जहां पुराने चंडीगढ़ के VIP सेक्टरों की तर्ज पर बड़ी- बड़ी लग्जरी कोठियां और बंगले बनाए जाएंगे. किसानों को जमीन के बदले प्रति एकड़ 6.24 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।  उन्हें 29 जून तक अपना सहमति पत्र ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट ऑथोरिटी (GMADA) को देना होगा. इसके बाद, आगामी प्रकिया शुरू की जाएगी. मुल्लांपुर में गरीबदास गांव के पास विकसित होने वाला यह इलाका भीड़- भाड़ से दूर और हरियाली व पर्यावरण के अनुकूल रहेगा।  यह रहेगी प्लॉट की कीमत इस योजना में 500 गज (1 कनाल) और 1,000 गज (2 कनाल) के बड़े प्लॉट मिलेंगे. इनकी कीमत करीब 60 हजार रुपए प्रति गज हो सकती है. आवेदन करते समय कुल कीमत के 10% पैसे का भुगतान करना होगा।  न्यू चंडीगढ़ की खासियतें     हरियाली और पर्यावरण अनुकूल बसाएं जा रहे न्यू चंडीगढ़ शहर को ग्रिड पैटर्न में बसाया जाएगा जिससे ट्रैफिक और प्लानिंग बेहतर रहेगी।      60, 45 और 30 मीटर चौड़ी सड़कों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है।      GMADA एक्सप्रेस-वे से बद्दी और आनंदपुर साहिब तक आसान कनेक्टिविटी मिलेगी।      करीब 33% एरिया को हरियाली क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा जिसमें पार्क और ओपन स्पेस शामिल हैं।      900 हेक्टेयर में स्पोर्ट्स और मनोरंजन सुविधाएं जैसे स्टेडियम और गोल्फ कोर्स विकसित होंगे।      रिहायशी, मेडिसिटी, एजुकेशन सिटी, ट्रांसपोर्ट टर्मिनल और प्रस्तावित मेट्रो के साथ रोजगार और आवागमन की बेहतर व्यवस्था होगी।  किसानों को मिलेगी सुविधा इस योजना के लिए जमीन देने वालों को लैंड पूलिंग की सुविधा का लाभ मिलेगा. इस पॉलिसी के तहत प्रति एकड़ जमीन के बदले मालिक को 1,600 वर्ग गज आवासीय प्लॉट या 1,000 वर्ग गज आवासीय प्लॉट के साथ 200 वर्ग गज का कमर्शियल प्लॉट मिल सकता है. इस प्लॉट में बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं मिलेगी. यदि सरकार जमीन बेचती है या विकसित परियोजना से मुनाफा अर्जित करती है तो जमीन देने वाले किसानों को भी इसका फायदा पहुंचेगा।  मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ।  इको सिटी के पास बसेगी सोसाइटी यह स्कीम न्यू चंडीगढ़ (मुल्लांपुर) में मुल्लांपुर गरीबदास गांव के पास बनाई जा रही है। यहां बड़े-बड़े प्लॉट और फार्महाउस जैसे घर बनाए जाएंगे। यानी कम भीड़-भाड़ वाला इलाका होगा। इसका मकसद है कि हरियाली और पर्यावरण का संतुलन बना रहे। GMADA के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि इसे लोग काफी पसंद करेंगे, क्योंकि पहले ही इस इलाके में GMADA की ओर से ईको सिटी-1, ईको सिटी-2 और मेडिसिटी बसाई गई हैं। एक से दो कनाल के होंगे प्लॉट इस स्कीम में 500 गज (1 कनाल) और 1000 गज (2 कनाल) के बड़े प्लॉट मिलेंगे। इनकी कीमत करीब 60 हजार रुपए प्रति गज हो सकती है। यानी 500 गज का प्लॉट लगभग 3 करोड़ तक पड़ सकता है। आवेदन करते समय कुल कीमत का 10% पैसा (EMD) जमा करना होगा। स्कीम में कुल प्लॉटों की संख्या अभी तक क्लियर नहीं है, लेकिन योजना में लगभग 185 से 200 के बीच रहने की उम्मीद है। 6 शहरों की स्टडी की गई लो-डेंसिटी योजना दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, गुरुग्राम, गांधीनगर और लखनऊ में भी है। इन इलाकों की स्टडी भी GMADA की टीम ने की है, ताकि योजना को अच्छे तरीके से पूरा किया जा सके। इसके अलावा GMADA पहले ही न्यू चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित कर रहा है। यहां भी चंडीगढ़ की तरह 17 सेक्टर काटे गए हैं। किसानों को लैंड पूलिंग जमीन मालिकों के पास नकद मुआवजे के अलावा लैंड पूलिंग पॉलिसी का विकल्प भी है। इस पॉलिसी के तहत प्रति एकड़ जमीन के बदले मालिक को 1,600 वर्ग गज आवासीय प्लॉट या 1,000 वर्ग गज के आवासीय प्लॉट के साथ 200 वर्ग गज का कमर्शियल प्लॉट (SCO) मिल सकता है। इसके अलावा पूरा एरिया पहले ही बस चुका है, जिससे इलाके के लोगों का फायदा होगा।  

इंदौर के ट्रिपल लेयर ब्रिज से तीन एनएच मार्गों को मिलेगा रास्ता, पचास हजार वाहन होंगे प्रभावित

इंदौर इंदौर के बायपास पर एमआर-10 जंक्शन पर थ्री लेयर फ्लायओवर का काम 80 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। हालांकि, दो साल में फ्लायओवर का निर्माण पूरा होना था, लेकिन इसमें देरी हुई। अब यह ब्रिज अक्तूबर तक बनकर तैयार होगा। ब्रिज पर देश का सबसे बड़ा पियर कैप बनाया जा रहा है, जिसकी चौड़ाई 27 मीटर रहेगी। इसी पियर कैप के ऊपर गर्डर रखे गए हैं।  इंदौर के एमआर-10 जंक्शन पर ब्रिज बनाने की जरूरत इसलिए पड़ी, क्योंकि यहां तीन राष्ट्रीय राजमार्ग आकर मिलते हैं। एबी रोड के अलावा इंदौर-अहमदाबाद और इंदौर-नागपुर हाईवे इस जंक्शन से जुड़ते हैं। नागपुर को जोड़ने के लिए इंदौर-हरदा के लिए 25 किलोमीटर लंबा बायपास बनाया गया है। इसका ट्रैफिक अंडरपास से होकर गुजरेगा। वाहनों की एंट्री आसान हो जाएगी इस ब्रिज के निर्माण से हर दिन 50 हजार से ज्यादा वाहन चालकों को फायदा होगा। इसके अलावा इंदौर आने वाले वाहनों की एंट्री आसान हो जाएगी। अभी तक बोगदों के भीतर से वाहनों को आना पड़ता है और इस कारण कई बार ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है, लेकिन अब इससे भी राहत मिलेगी। बेस्ट प्राइस की तरफ के मार्ग से वाहन इंदौर की ओर ब्रिज के नीचे से आ सकेंगे। फ्लायओवर का एक हिस्सा जंक्शन पर बंगाली चौराहे की तरफ बना है, जबकि दूसरे सिरे का निर्माण बेस्ट प्राइस के पास हुआ है। डेढ़ किलोमीटर लंबे इस ब्रिज के नीचे एक और ब्रिज बन चुका है, जिस पर एबी रोड का ट्रैफिक गुजर रहा है। महाराष्ट्र की ओर जाने वाले वाहन इस ब्रिज का उपयोग कर रहे हैं, जबकि अंडरपास को इंदौर-हरदा मार्ग से जोड़ा गया है। अंडरपास बनकर तैयार हो चुका है। अब सड़क निर्माण स्टार चौराहा तक किया जाएगा। इंदौर-हरदा मार्ग का निर्माण भी अंतिम दौर में है। एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार, मुंबई के सी लिंक की तर्ज पर ब्रिज पर एस्थेटिक केबल से लाइटिंग की जाएगी, ताकि यह आकर्षक दिखे। यह फ्लायओवर इंदौर की एंट्री का मुख्य मार्ग भी बनेगा। यहां से ज्यादातर वाहन शहर में आ-जा सकेंगे। सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि यह प्रदेश का पहला तीन स्तरीय ब्रिज है, जो राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ इंदौर की एंट्री को भी आसान बनाएगा।   

भीषण गर्मी और लू को देखते हुए शिक्षा विभाग का फैसला, अब सुबह 6:30 बजे से शुरू होंगी कक्षाएं

पटना  बिहार में बढ़ती गर्मी और लू को देखते हुए शिक्षा विभाग ने छात्रों को बड़ी राहत दी है. माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने आदेश जारी किया है कि राज्य के सभी सरकारी स्कूल अब मॉर्निंग शिफ्ट में चलेंगे. यह नया नियम 6 अप्रैल से लागू होकर 31 मई तक लागू रहेगा. क्या है नया टाइम-टेबल? नए शेड्यूल के मुताबिक, अब स्कूल सुबह 6:30 बजे शुरू हो जाएंगे. आधे घंटे की प्रार्थना के बाद सुबह 7:00 बजे से पढ़ाई शुरू होगी. बच्चों को दोपहर 12:20 बजे छुट्टी दे दी जाएगी. मिड-डे मील के लिए सुबह 9:00 से 9:40 बजे तक का समय तय किया गया है. विभाग ने यह भी कहा है कि जिन स्कूलों में बच्चों की संख्या ज्यादा है, वहां हेडमास्टर दो शिफ्टों में खाना खिला सकते हैं ताकि भीड़ न हो. डीएम को स्पेशल पावर गर्मी की स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने डीएम को भी स्पेशल अधिकार दिए हैं. अगर किसी जिले में गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है या लू का प्रकोप बढ़ता है, तो डीएम अपने स्तर से स्कूल के समय में और भी बदलाव कर सकते हैं. छुट्टियों के बाद फिर बदलेगा समय फिलहाल यह मॉर्निंग शिफ्ट केवल गर्मी की छुट्टियों शुरू होने तक ही लागू रहेगी. जैसे ही गर्मी की छुट्टियां खत्म होंगी और स्कूल दोबारा खुलेंगे, समय वापस पुराना वाला हो जाएगा. यानी तब स्कूल सुबह 9:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक चलेंगे. इस संबंध में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को जरूरी निर्देश भेज दिए गए हैं.

ऑनलाइन हाजिरी में ‘ऑन ड्यूटी’ का खेल पड़ा भारी, शिक्षा विभाग ने दी वेतन कटौती और सख्त कार्रवाई की चेतावनी

नवादा  जिले में ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति में बड़ी लापरवाही सामने आई है। इस मामले में जिला शिक्षा विभाग ने 386 शिक्षक-शिक्षिकाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिससे शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। डीपीओ स्थापना शिव कुमार वर्मा द्वारा जारी पत्र के अनुसार, 30 मार्च को कई शिक्षकों ने अटेंडेंस स्टेटस कॉलम में 'प्रेजेंट' और अटेंडेंस टाइप में 'मार्क ऑन ड्यूटी' दिखाया। हालांकि, 'मार्क ऑन ड्यूटी रीजन' कॉलम में या तो खाली छोड़ा गया था या 'डेपुटेशन' और 'ऑफिस वर्क' दर्ज किया गया था। कटेगा शिक्षकों का वेतन विभाग ने इसे विभागीय निर्देशों का उल्लंघन और मनमानी माना है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर सही उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होता है, तो 'काम नहीं तो वेतन नहीं' के सिद्धांत पर वेतन कटौती की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद शिक्षकों में काफी खलबली मच गई है। कारण बताओ नोटिस जारी शिक्षा विभाग को जैसे ही या जानकारी मिली उनके द्वारा तुरंत ही सभी लोगों को कारण बताओं नोटिस थमा दिया गया है। गुरुवार को नोटिस भेज कर लोगों को या कहा गया है कि तीन दिन के अंदर सभी लोग नोटिस का जवाब भी दे। इससे पूर्व भी शिक्षा विभाग में 500 से अधिक शिक्षकों पर कार्रवाई कर चुके थे और एक बार फिर से नवादा में शिक्षकों की गजब की कारनामा देखने को मिला है। शिक्षा विभाग अलर्ट ध्यान रहे कि हाल के दिनों में शिक्षकों की ओर से हाजिरी बनाने को लेकर कुछ छेड़छाड़ का मामला बांका में अंजाम दिया गया था। ऐसी ही एक घटना पूर्व में जमुई में हुई थी। उसके बाद शिक्षा विभाग ने इस पर त्वरित एक्शन लेते हुए शिक्षकों पर कार्रवाई की है। हालांकि, बिहार के अन्य स्कूलों में शिक्षक ऑनलाइन अपनी हाजिरी बना रहे हैं। उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हो रही है। हालांकि, इंटरनेट कनेक्शन कई स्कूलों में ठीक नहीं रहने की वजह से शिक्षक कभी छत पर जाकर और कभी पेड़ का सहारा लेकर हाजिरी बनाते हैं। वैसी स्थिति को भी शिक्षा विभाग को समझना होगा। ई- शिक्षाकोष से छेड़छाड़ के मामले को गंभीरता से लिया गया है। आशुतोष कुमार पांडेय

धानापुर के किसानों की मेहनत स्वाहा, अब प्रशासन से उचित मुआवजे की मांग

चंदौली. जिले के धानापुर थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक बड़ा अग्निकांड सामने आया, जिसमें 10 बीघा से अधिक गेहूं की खड़ी फसल जलकर पूरी तरह नष्ट हो गई. यह घटना पगही, विझवल और कुसुम्ही गांव के सिवान में स्थित हरदेव पीजी कॉलेज के पीछे हुई, जिससे क्षेत्र के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा. बता दें कि शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे अचानक आग लग गई और देखते ही देखते उसने विकराल रूप धारण कर लिया. तेज हवा के कारण आग तेजी से खेतों में फैलती चली गई. स्थानीय ग्रामीण और किसान तुरंत मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर आग बुझाने में जुट गए. सूचना मिलते ही धानापुर थाना प्रभारी त्रिवेणी लाल सेन पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. दमकल विभाग को भी सूचना दी गई, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया. इस हादसे में विझवल और पगही गांव के किसान रामलाल यादव, लालमन यादव, प्यारेलाल यादव, मुकेश सिंह यादव, नंदलाल राम और डॉ. कुमार राम सहित कई किसानों की फसल जलकर खाक हो गई. बताया जा रहा है कि कुल मिलाकर 10 बीघा से अधिक गेहूं की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है. घटना के बाद प्रभावित किसानों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. समाजसेवी केवट बाबूलाल बिंद ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल नुकसान का सर्वे कराकर किसानों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि वे इस संकट से उबर सकें.

दुर्ग बना जल संरक्षण का मॉडल

रायपुर दुर्ग बना जल संरक्षण का मॉडल दुर्ग जिले ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए प्रदेश ही नहीं, देश के लिए भी एक मिसाल पेश की है। कलेक्टर  अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में संचालित “मोर गांव मोर पानी महाभियान” अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत निर्मित आवासों में मात्र 15 दिनों के भीतर 32,058 रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का निर्माण कर जिले ने एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के नेतृत्व में यह अभियान सुनियोजित ढंग से आगे बढ़ाया गया। “एकेच गोठ, एकेच बानी, बूंद-बूंद बचाबो पानी 2.0” थीम के साथ 13 मार्च 2025 को इसकी शुरुआत हुई। अभियान के प्रथम चरण में प्रधानमंत्री आवास हितग्राहियों के घरों में मात्र दो घंटे के भीतर 1,764 सोक पिट का निर्माण कर गोल्डन बुक में नाम दर्ज कराया गया। यह उपलब्धि अपने आप में प्रशासनिक समन्वय और जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बनी। द्वितीय चरण में 08 दिसंबर को 12,418 सोक पिट का निर्माण किया गया, जिससे कुल 14,182 सोक पिट स्वप्रेरणा से तैयार हुए। इसके साथ ही “मोर गांव मोर पानी” अभियान के अंतर्गत 23,889 कंटूर ट्रेंच एवं वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच का निर्माण भी पूर्ण किया गया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से इन कार्यों में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की गई, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 32,058 जल संरक्षण संरचनाओं की एंट्री पोर्टल पर दर्ज की जा चुकी है। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने स्वयं आगे बढ़कर श्रमदान किया। यही कारण है कि यह पहल केवल एक सरकारी योजना तक सीमित न रहकर जन आंदोलन के रूप में स्थापित हो गई है। प्रत्येक प्रधानमंत्री आवास में निर्मित रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं न केवल वर्तमान जल आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही हैं, बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा भी सुनिश्चित कर रही हैं। अभियान के तहत विभिन्न प्रकार की जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इनमें कम लागत के 24 कार्य, 15 बोरवेल रिचार्ज, 03 चेकडैम, 5,875 कंटूर ट्रेंच, 07 गली प्लग, 03 नाला बंड, 18 ओपन वेल रिचार्ज (डगवेल), 07 परक्यूलेशन तालाब, 537 रिचार्ज पिट, 05 रिचार्ज शाफ्ट, 817 रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, 6,676 सोक पिट, 09 टैंक, 48 ग्राम तालाब तथा 18,014 वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच शामिल हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का संरक्षण कर भूजल स्तर में सुधार लाने के साथ-साथ स्थायी जल प्रबंधन को बढ़ावा मिल रहा है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों और गांवों में अधिक से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाकर इस महाभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं, ताकि “हर घर जल संचय” का लक्ष्य साकार हो सके।

जब हेल्पलाइन की दूसरी तरफ से गूंजी मुख्यमंत्री की आवाज, सीएम के निर्देश पर मिनटों में हुआ जनसमस्याओं का समाधान

जयपुर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को शासन सचिवालय में राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन 181 का अचानक दौरा कर सबको चौंका दिया। वह न सिर्फ व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे, बल्कि खुद हेल्पलाइन पर आए नागरिकों से सीधी बातचीत भी की और उनकी परेशानियां सुनीं। जब कॉल करने वालों को एहसास हुआ कि दूसरी तरफ खुद मुख्यमंत्री हैं, तो कई लोगों को आश्चर्य हुआ और उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। सीएम के निर्देश पर तुरंत हुआ काम इस मौके पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि हर शिकायत का निपटारा संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होना चाहिए। निरीक्षण के दौरान दो मामले सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। पहला मामला चूरू के एक नागरिक का था, जिन्हें 10 साल पुरानी मतदाता सूची उपलब्ध न होने के कारण मूल निवास प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहा था। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद विभाग ने तत्काल ई-मित्र के जरिए आवेदन को फिर से प्रक्रिया में लिया और तहसील कार्यालय ने प्रमाण पत्र जारी कर दिया। दूसरा मामला जयपुर की एक महिला का था, जिन्होंने एलपीजी सिलेंडर की देरी से डिलीवरी की शिकायत की थी। सिलिंडर की आपूर्ति सुनिश्तित मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रशासन ने तुरंत सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की, जिस पर महिला ने संतोष जताया। मुख्यमंत्री ने हेल्पलाइन के विभिन्न अनुभागों का बारीकी से अवलोकन किया और शिकायत निपटाने की प्रक्रिया, नागरिक संतुष्टि दर तथा अधिकारियों के निरीक्षण से जुड़ी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन पर तैनात कर्मियों की प्रदर्शन रिपोर्ट तैयार की जाए और नियमित रूप से उसकी निगरानी की जाए। समय पर दें शिकायतों का समाधान सीएम भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का मकसद महज शिकायत दर्ज करना नहीं, बल्कि उसका समयबद्ध और संतोषजनक समाधान देना है। उन्होंने हर विभाग को निर्देश दिए कि शिकायत निपटाने की गुणवत्ता में सुधार लाया जाए और नागरिकों की संतुष्टि दर लगातार बढ़ाई जाए।  

देशभर में बढ़ रही मांग, बेंगलुरु से कारगिल तक पहुंच रहा सुगंधित चावल

रायपुर लैलूंगा की पहचान बना ‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र का ‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल आज अपनी विशिष्ट सुगंध, स्वाद और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण एक अलग पहचान स्थापित कर चुका है। पारंपरिक रूप से उगाई जाने वाली यह धान की किस्म अब किसानों के लिए आय का मजबूत माध्यम बन रही है। प्रशासन और कृषि विभाग के सहयोग से इस उत्पाद को व्यवस्थित रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे यह स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। किसानों द्वारा अपनाई जा रही जैविक पद्धति और बेहतर विपणन व्यवस्था के कारण इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व और कृषि मंत्री  राम विचार नेताम के मार्गदर्शन में प्रदेश के किसानों का आय दुगुनी करने निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार किसानों को सशक्त बनाने में जनहितकारी नीति बनाने के साथ ही किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं इनमें कृषि उन्नति योजना, भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना जैसे योजना शामिल है। इससे प्रदेश के किसान आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं।  कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जंवाफूल धान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राकृतिक सुगंध और स्वाद है, जो लैलूंगा क्षेत्र की विशिष्ट जलवायु में ही पूर्ण रूप से विकसित हो पाती है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां-दिन में पर्याप्त गर्मी और रात में हल्की ठंडक, इस धान की गुणवत्ता को विशेष बनाती हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र में उत्पादित चावल का स्वाद और खुशबू अलग पहचान रखता है और उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है।  ‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल की मांग अब छत्तीसगढ़ से बाहर भी तेजी से बढ़ रही है। बेंगलुरु, चेन्नई, तेलंगाना, लद्दाख और कारगिल जैसे क्षेत्रों में इसकी अच्छी मांग है। वर्तमान में इसका बाजार मूल्य लगभग 150 रुपये प्रति किलो है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है। वहीं बीज भी किसानों को 70 रुपए प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे अधिक किसान इस फसल की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।    लैलूंगा के किसान चंद्रशेखर पटेल बताते हैं कि उनके परिवार में लंबे समय से जंवाफूल चावल की खेती की जा रही है, लेकिन अब इसकी मांग और पहचान में काफी वृद्धि हुई है। इस वर्ष उन्होंने 4 एकड़ में इसकी खेती की, जिसमें प्रति एकड़ लगभग 30,000 रुपए की लागत आई। वे बताते हैं कि उन्हें प्रति एकड़ 1 लाख रूपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है। उनका कहना है कि इस फसल से उन्हें स्थिर और संतोषजनक आय मिल रही है, जिससे वे भविष्य में इसकी खेती का रकबा और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। उनके उत्पाद की मांग राज्य के बाहर भी बढ़ रही है, जिससे उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध हो रहा है।  ग्राम खैरबहार के किसान भवानी पंडा बताते हैं कि वे वर्ष 2015 से खेती कर रहे हैं और धीरे-धीरे जंवाफूल चावल की खेती की ओर बढ़े हैं। वे पूरी तरह जैविक पद्धति से खेती करते हैं, जिसमें रासायनिक खाद या कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता। हरी खाद का उपयोग कर वे खेत की उर्वरता बनाए रखते हैं। भवानी पंडा बताते हैं कि जंवाफूल चावल की खेती से उन्हें पारंपरिक धान की तुलना में अधिक लाभ मिल रहा है। वर्तमान में वे 2 एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं और आने वाले समय में इसे 20 एकड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य रखे हुए हैं। जंवाफूल चावल की खेती पूरी तरह जैविक पद्धति से की जा रही है, जिससे इसकी गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनी रहती है। रासायनिक मुक्त उत्पादन के कारण यह चावल स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। यही वजह है कि उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों को इसका बेहतर मूल्य मिल रहा है।     प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा इस फसल को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही किसान समूहों और एफपीओ के माध्यम से उत्पादन और विपणन को संगठित किया जा रहा है। पिछले वर्ष लगभग 700 एकड़ में इसकी खेती की गई थी, वहीं इस वर्ष इसे बढ़ाकर 2000 एकड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे अधिक से अधिक किसान इस लाभकारी फसल से जुड़ सकें। 

भभुआ, सासाराम और रांची के लिए अब दिल्ली का सफर हुआ आसान, रेलवे ने शुरू की नई ट्रेन और जानें पूरा टाइम-टेबल

रांची भारतीय रेलवे ने बिहार और झारखंड के लोगों के लिए एक नई साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन चलाने का फैसला किया है. यह ट्रेन आनंद विहार से पुरुलिया तक जाएगी. यह ट्रेन दिल्ली और झारखंड के बीच सीधी कनेक्टिविटी देगी. इससे यात्रियों को काफी राहत मिलेगी. इस इलाके के लोगों को होगा फायदा इस ट्रेन का खास फायदा बिहार के शाहाबाद और मगध इलाके के लोगों को मिलेगा. भभुआ रोड, सासाराम और डेहरी-ऑन-सोन जैसे स्टेशनों से अब दिल्ली जाना आसान हो जाएगा. खासकर छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों के लिए यह ट्रेन एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आई है. टाइम और रूट के बारे में जानिये आनंद विहार से सुबह 5 बजे चलने वाली ट्रेन रात 10:40 बजे पुरुलिया पहुंचेगी. रास्ते में यह मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी कैंट, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, भभुआ रोड, सासाराम, डेहरी-ऑन-सोन, गढ़वा रोड, डालटोनगंज, रांची और मुरी स्टेशन पर रुकेगी. वापसी में यह ट्रेन पुरुलिया से शाम 5 बजे रवाना होगी और अगले दिन रात 11:10 बजे आनंद विहार पहुंचेगी. यानी यात्रियों को दोनों तरफ से सफर का अच्छा टाइमिंग मिल जाएगा. रेलवे ने इस ट्रेन को फिलहाल साप्ताहिक रखा है. ट्रेन संख्या 14022 हर गुरुवार को दिल्ली से चलेगी, जबकि 14021 हर शुक्रवार को पुरुलिया से वापसी करेगी. ट्रेन में क्या-क्या सुविधा इस ट्रेन में एसी, स्लीपर और जनरल कोच लगाए गए हैं. इससे हर वर्ग के लोग अपनी सुविधा और बजट के हिसाब से यात्रा कर पाएंगे. यह नई ट्रेन बिहार और झारखंड के यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है. इससे सफर आसान होगा, समय बचेगा और कंफर्म टिकट मिलने की संभावना भी बढ़ेगी.

युवाओं को सशक्त बना रहा सोशल मीडिया, सीएम डॉ. यादव का बयान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वाराणसी में शुक्रवार को सोशल मीडिया की मध्यप्रदेश टूरिज्म़ इनफ्लुएंसर मीट का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सोशल मीडिया वर्तमान समय में युवाओं की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई शिक्षा नीति से सनातन परंपरा के वैचारिक आधार को शिक्षा नीति में समाहित किया है। ऐसा करके युवाओं को सच्चे संस्कार के साथ विकास का अवसर दिया गया है। हमें विकास के साथ-साथ प्राचीन काल के गौरव और परंपराओं पर भी गर्व होना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के माध्यम से हम बाबा विश्वनाथ के धाम में उज्जैन और मध्यप्रदेश के प्राचीन गौरव की झलक दिखा रहे हैं। सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, वीरता और धर्म परायणता हम सबको प्रेरित और गौरवान्वित करती है। प्रधानमंत्री मोदी ने प्राचीन गौरव के साथ विकास को नया आयाम दिया है। वाराणसी में बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर और उज्जैन में महाकाल लोक के निर्माण ने धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयां दी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राज्यों के बीच में सद्भाव और विकास के साथ सहयोग बढ़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर से संवाद किया और उनके प्रश्नों के उत्तर भी दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश दो भाइयों की जोड़ी है। दोनों मिलकर विकास के नए प्रतिमान बनाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राज्यों के बीच सद्भाव और विकास के लिए सहयोग बढ़ा है। सिंहस्थ: 2028 में बनेंगे कीर्तिमान उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाला सिंहस्थ महाकुंभ अद्भुत होगा। इसमें श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किया जा रहा है। देश-विदेश से आने वाले सभी नागरिकों,पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या अप्रत्याशित रहेगी। इस दृष्टि से नए कीर्तिमान भी बनेंगे।