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आस्था की अद्भुत परंपरा: रायपुर में भगवान को चिट्ठी चढ़ाकर मांगते हैं वरदान

रायपुर. राजधानी रायपुर में हनुमान जी का एक अद्भुत और अनोखा मंदिर है, जहां भक्त अपनी मनोकामनाएं कागज पर लिखकर हनुमान जी के चरणों में अर्पित करते हैं। इसी कारण यह स्थान “चिट्ठी वाले हनुमान जी” के नाम से प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि यहां लिखकर दी गई प्रार्थनाओं को हनुमान जी विशेष रूप से स्वीकार करते हैं और भक्तों की समस्याएं दूर करते हैं। बताया जाता है कि यहां चिट्ठी लिखने के एक साल के भीतर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। “चिट्ठी वाले हनुमान जी” मंदिर बूढ़ातालाब के पास कैलाशपुरी और टिकरापारा जाने वाले मोड़ पर स्थित है। मंदिर के पुजारी नरेंद्र चौबे के अनुसार, पिछले चार-पांच वर्षों से बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंच रहे हैं और प्रसाद, फल-फूल के साथ अपनी चिट्ठियां भी अर्पित कर रहे हैं। मंदिर में आने वाले भक्त नौकरी, धन-समृद्धि, कर्ज से मुक्ति, परिवार में शांति और अन्य मनोकामनाएं एक कागज पर लिखकर हनुमानजी के चरणों में समर्पित करते हैं, जो सालभर के भीतर पूरी हो जाती है। कई श्रद्धालुओं ने यह अनुभव साझा किया है कि उनकी मनोकामनाएं सालभर में पूरी हुई है। रोज सुबह भक्तों की लगती है भीड़ मंदिर में रोजाना सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगी रहती है, खासकर मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष भीड़ देखने को मिलती है। स्थानीय लोगों के बीच यह मंदिर अब गहरी आस्था का केंद्र बन चुका है, जहां हर दिन सैकड़ों लोग अपनी उम्मीदों और विश्वास के साथ “चिट्ठी वाले हनुमान जी” के दरबार में हाजिरी लगाते हैं।

योगी सरकार ने कौशल विकास मिशन की शुरुआत की, पहले दिन 99,075 प्रशिक्षण लक्ष्य तय किए गए

योगी सरकार में कौशल विकास मिशन का बड़ा कदम, पहले दिन 99,075 प्रशिक्षण लक्ष्य आवंटित पहली बार ग्रेडिंग नीति को सार्वजनिक कर प्रशिक्षण केंद्रों का मूल्यांकन किया गया प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना की समय सीमा 90 दिन से घटाकर 30 दिन कर दी गई डिजिटल इम्पैनलमेंट और ‘स्मार्ट टॉप-अप’ से बढ़ेगी गुणवत्ता व जवाबदेही एआई आधारित प्रशिक्षण और समावेशी प्राथमिकता से युवाओं को मिलेगा बेहतर रोजगार अवसर लखनऊ  योगी सरकार प्रदेश में कौशल विकास को नई गति देते हुए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने वित्तीय वर्ष के पहले ही दिन 99,075 प्रशिक्षण लक्ष्यों का आवंटन 957 ट्रेनिंग पार्टनर्स को जारी कर दिया। इस वर्ष पहली बार ग्रेडिंग नीति को सार्वजनिक कर प्रशिक्षण केंद्रों का मूल्यांकन किया गया। इसी आधार पर प्राइवेट, इंडस्ट्रियल और सरकारी पार्टनर्स को लक्ष्य आवंटित किए गए, जिससे जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित हुई है। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के निर्देशन में मिशन निदेशक पुलकित खरे की पहल पर इस प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाया गया है। प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना की समय सीमा 90 दिन से घटाकर 30 दिन कर दी गई है। साथ ही ‘स्मार्ट टॉप-अप’ व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले संस्थान बैच समाप्ति से पहले अतिरिक्त लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे। पूरी प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया गया है। अब इम्पैनलमेंट, लक्ष्य आवंटन और भुगतान पूरी तरह ऑनलाइन होंगे। 23 फरवरी 2026 के नए नियमों के तहत संस्थाओं को उनकी ग्रेडिंग और प्रशिक्षण गुणवत्ता के आधार पर भुगतान किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि होगी। मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि एआई सहित आधुनिक कौशल प्रशिक्षण, हर वर्ग को प्राथमिकता प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ‘एआई फॉर ऑल’, सॉफ्ट स्किल्स, लाइव क्लास और इंडस्ट्रियल विजिट को अनिवार्य किया गया है। साथ ही 33% महिलाओं, 5% दिव्यांगजनों और वंचित वर्ग के युवाओं को प्राथमिकता देना सुनिश्चित किया गया है, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा। मिशन अब ‘क्वांटिटी’ से ‘क्वालिटी’ की ओर बढ़ रहा है। डिजिटल पारदर्शिता और समयबद्ध रणनीति से युवाओं को विश्वस्तरीय कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।  विगत वर्ष जहां ट्रेनिंग पार्टनर्स को पूरे वर्ष के लिए 1.10 लाख प्रशिक्षणार्थियों का एकमुश्त लक्ष्य आवंटित किया गया था, वहीं इस वर्ष रणनीति में सुधार करते क्वार्टरली यानी कि तीन महीने में लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। प्रथम तीन माह के लिए 99,075 प्रशिक्षणार्थियों का लक्ष्य जारी किया गया है। इसके अंतर्गत अच्छा प्रदर्शन करने वाले ट्रेनिंग पार्टनर्स को उनकी क्षमता के अनुसार 'टॉप-अप' (अतिरिक्त लक्ष्य) की विशेष सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

हाईकोर्ट सख्त: जग्गी केस में अमित जोगी को तीन सप्ताह में आत्मसमर्पण करना होगा

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी करार दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने उन्हें तीन हफ्ते के अंदर सरेंडर करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की स्पेशल डिवीजन बेंच ने यह अहम फैसला सुनाया है। इससे पहले कोर्ट ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस पूरे मामले को हाईकोर्ट में रीओपन किया गया। मामले की जांच करने वाली एजेंसी सीबीआई ने कोर्ट में 11 हजार पन्नों की रिपोर्ट पेश की थी। इसी विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर अमित जोगी पर भी चार्ज लगाए गए थे और आज अंतिम सुनवाई के बाद उन्हें दोषी माना गया है। अब उन्हें तीन हफ्ते के अंदर सरेंडर करना होगा, जिसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मामले की सुनवाई के दौरान स्व. रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने कोर्ट को बताया कि उनके पिता की हत्या एक राजनीतिक साजिश थी। सीबीआई ने 11 हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की थी, जिसमें हत्या से जुड़े पर्याप्त सबूत शामिल हैं। इधर हाईकोर्ट के फैसले पर अमित जोगी ने कहा कि कोर्ट ने बिना पूरी सुनवाई का मौका दिए दोषी करार दिया, जो उनके लिए अप्रत्याशित है। उन्होंने कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है। 2003 में हुई थी एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की हत्या 4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी। हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया। जानिए कौन थे रामावतार जग्गी कारोबारी बैकग्राउंड वाले रामावतार जग्गी देश के बड़े नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे। जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ गए। विद्याचरण ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बना दिया था। ये पाए गए थे दोषी जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत, विश्वनाथ राजभर दोषी पाए गए थे। मेरे साथ गंभीर अन्याय हुआ है वहीं इस मामले में अमित जोगी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि आज उच्च न्यायालय ने बिना सुनवाई का अवसर दिए मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया। मुझे खेद है कि जिस व्यक्ति को अदालत ने दोषमुक्त किया था, उसे बिना सुनवाई का एक भी अवसर दिए दोषी करार दिया गया। यह अप्रत्याशित है। अमित जोगी ने कहा, अदालत ने मुझे 3 सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का समय दिया है। मुझे लगता है कि मेरे साथ गंभीर अन्याय हुआ है। मुझे पूरा विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय से मुझे न्याय अवश्य मिलेगा। मैं न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास रखता हूं। मैं पूर्ण शांति, आस्था और धैर्य के साथ आगे बढ़ रहा हूं। सत्य की जीत अवश्य होगी। प्रिय मित्रों और शुभचिंतकों 🙏 आज माननीय उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया- बिना सुनवाई का अवसर दिए। मुझे खेद है कि जिस व्यक्ति को अदालत ने दोषमुक्त किया था, उसे बिना सुनवाई का एक भी अवसर दिए दोषी करार दिया गया। यह अप्रत्याशित है।… – 𝐀𝐦𝐢𝐭 𝐀𝐣𝐢𝐭 𝐉𝐨𝐠𝐢 (@AmitJogi) April 2, 202

पंजाब में अग्निवीर भर्ती रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख बढ़ाई, 10वीं पास के लिए 45% अंक की शर्त

जालंधर जालंधर में रोजगार अफसर ने अग्निनवीर भर्ती को लेकर मीटिंग की। इस दौरान उन्होंने बताया कि पंजाब में अग्निनवीर भर्ती के रजिस्ट्रेशन लिए डेट बढ़ाकर 10 अप्रैल 2026 कर दी गई है। जुलाई 2005-2009 के बीच जन्में बच्चे इसमें अप्लाई कर सकते हैं। थेह कांजला सी पाइट सेंटर में अभ्यर्थी फ्री तैयारी कर सकते है। इसके अलावा उनके खाने-पीने की व्यवस्था भी पंजाब सरकार की तरफ से होगी। अगर आप भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहते हैं, तो आपके लिए ये अच्छा मौका साबित हो सकता है। जिला रोजगार एवं कारोबार ब्यूरो की डिप्टी डायरेक्टर नीलम महे ने बताया कि सेना में अग्निवीर भर्ती के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की समय सीमा बढ़ा दी गई है। पहले आवेदन करने की आखिरी तारीख 1 अप्रैल थी, जिसे अब बढ़ा दिया गया है। जो युवा इस भर्ती में शामिल होना चाहते हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट www.joinindianarmy.nic.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। शेड्यूल के मुताबिक, इन पदों के लिए ऑनलाइन परीक्षा 1 जून 2026 को आयोजित की जाएगी। भर्ती के लिए वही उम्मीदवार पात्र होंगे जिनका जन्म 1 जुलाई 2005 से 1 जुलाई 2009 के बीच हुआ है। 45 फीसदी अंकों के साथ 10वीं पास होना जरूरी भर्ती की शर्तों के अनुसार, अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता तय की गई है। अग्निवीर जनरल ड्यूटी (GD) के लिए 45 फीसदी अंकों के साथ 10वीं पास होना जरूरी है। वहीं, तकनीकी पदों (Technical) के लिए 12वीं में साइंस (PCM) अनिवार्य है। क्लर्क या स्टोर कीपर (SKT) के पदों के लिए 10वीं में 60 फीसदी अंक होने चाहिए, जबकि ट्रेड्समैन के पदों के लिए 8वीं या 10वीं पास युवा भी आवेदन कर सकते हैं। लिखित और फिजिकल टेस्ट की तैयारी मुफ्त पंजाब के युवाओं के लिए एक और अच्छी खबर यह है कि वे इस भर्ती की लिखित और शारीरिक परीक्षा की तैयारी पूरी तरह मुफ्त में कर सकते हैं। कपूरथला के थेह कांजला स्थित सी-पाईट (C-PYTE) कैंप में ट्रेनिंग ऑफिसर कैप्टन अजीत सिंह ने बताया कि यहां छात्रों के लिए हॉस्टल, खाना, जिम और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं बिल्कुल फ्री हैं। इच्छुक उम्मीदवार अपने शैक्षणिक सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, 2 फोटो और ऑनलाइन भरे गए फॉर्म की कॉपी लेकर सीधे कैंप में संपर्क कर सकते हैं। ज्यादा जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबरों 83601-63527 और 69002-00733 पर भी फोन किया जा सकता है।  

काम नहीं तो वेतन नहीं, आईएएस छोड़ वापस पीसीएस सेवा में लौटना चाहते हैं रिंकू सिंह राही

लखनऊ आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही का त्यागपत्र इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. उन्होंने काम न मिलने और जनता के हित में सक्रिय भूमिका न निभा पाने को इसकी वजह बताया है. आजतक से बातचीत में रिंकू सिंह ने अपने भविष्य को लेकर साफ किया कि उनका उद्देश्य केवल जनता की सेवा करना है और फिलहाल राजनीति में जाने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि वे ऐसे पद पर रहना चाहते हैं जहां काम करने का अवसर मिले और उसका सीधा असर आम लोगों तक पहुंचे. रिंकू सिंह राही ने अपनी सबसे बड़ी आपत्ति रखी. उनका कहना है कि प्रशासनिक सेवा का मूल उद्देश्य जनता के लिए काम करना होता है, लेकिन जब काम करने का अवसर ही न मिले तो उस पद पर बने रहने का कोई अर्थ नहीं रह जाता. उन्होंने कहा, हमें जो सैलरी मिलती है वह जनता के पैसे से आती है. जब जनता के लिए काम ही नहीं कर पा रहे हैं तो उस सैलरी को लेना सही नहीं है. इसी वजह से मैंने ‘नो वर्क, नो पे’ की बात उठाई थी. उनके मुताबिक, यह सिर्फ व्यक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि एक सिद्धांत का सवाल है, जिस पर वे लगातार कायम रहे हैं. तकनीकी त्यागपत्र क्यों दिया रिंकू सिंह ने स्पष्ट किया कि उनका त्यागपत्र सामान्य इस्तीफा नहीं है, बल्कि तकनीकी त्यागपत्र है. इसका मतलब यह है कि वे पूरी तरह सेवा छोड़ने के बजाय अपनी पूर्ववर्ती सेवा में वापस जाना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि प्रशासनिक नियमों के तहत लीन पीरियड में अधिकारी तीन साल तक अपनी पुरानी सेवा में लौट सकते हैं. इसी प्रावधान का उपयोग करते हुए उन्होंने यह कदम उठाया है. उन्होंने कहा, मैं सेवा से बाहर नहीं जा रहा हूं. मैं सिर्फ उस जगह जाना चाहता हूं जहां मुझे काम करने का अवसर मिले. जहां काम मिलेगा, वहीं रहूंगा भविष्य की योजना पर बात करते हुए रिंकू सिंह ने कहा कि उनका फोकस सिर्फ काम पर है, न कि पद या सुविधा पर. उन्होंने कहा, मुझे कहीं भी पोस्ट कर दें, लेकिन काम दिया जाए. बिना काम के बैठना मेरे लिए संभव नहीं है. अगर आईएएस में रहते हुए काम नहीं मिल रहा, तो पीसीएस में जाकर जमीनी स्तर पर काम करना बेहतर रहेगा. उनका कहना है कि प्रशासनिक सेवा में सबसे महत्वपूर्ण चीज सक्रिय भूमिका निभाना है और वही वे करना चाहते हैं. राजनीति में जाने से साफ इनकार रिंकू सिंह राही ने उन अटकलों को भी खारिज किया जो उनके फैसले को राजनीति से जोड़कर देख रही थीं. उन्होंने कहा, मैं राजनीति में नहीं जा रहा हूं. मेरा ऐसा कोई प्लान नहीं है. मैं सिर्फ जनता की सेवा करना चाहता हूं और वह भी प्रशासनिक व्यवस्था के भीतर रहकर. उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक मंच पर जाना नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी निभाना है. रिंकू सिंह ने कहा कि उनकी प्राथमिकता हमेशा से जमीनी स्तर पर काम करने की रही है. उन्होंने कहा, मैदान में रहकर काम करने से ही असली समस्याओं की जानकारी मिलती है. वहीं पर योजनाओं का सही असर भी दिखता है. मैं ऐसी जगह काम करना चाहता हूं जहां सीधे लोगों से जुड़ सकूं. उनके मुताबिक, जमीनी स्तर पर काम करने से ही प्रशासनिक योजनाओं की वास्तविक स्थिति समझ में आती है. पारदर्शिता पर रहेगा फोकस रिंकू सिंह ने बातचीत में यह भी कहा कि वे आगे भी पारदर्शिता और जवाबदेही पर काम करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि लोगों को यह जानने का अधिकार है कि सरकार की योजनाओं का लाभ किसे मिल रहा है और किस मद में कितना पैसा खर्च हो रहा है. पारदर्शिता से ही व्यवस्था में सुधार आता है. उन्होंने बताया कि पहले भी वे इस दिशा में काम कर चुके हैं और आगे भी इसी तरह की पहल जारी रखना चाहते हैं. लीन पीरियड बढ़ाने के बाद लिया फैसला रिंकू सिंह ने बताया कि उन्होंने अक्टूबर 2025 में लीन पीरियड बढ़ाने के लिए पत्र लिखा था. इसका उद्देश्य यह था कि जरूरत पड़ने पर वे अपनी पुरानी सेवा में लौट सकें. अब उसी प्रक्रिया के तहत उन्होंने तकनीकी त्यागपत्र दिया है. उन्होंने कहा, यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है. मैंने पहले ही इस दिशा में प्रक्रिया शुरू कर दी थी. रिंकू सिंह ने कहा कि बिना किसी जिम्मेदारी के लंबे समय तक किसी पद पर बने रहना उनके लिए संभव नहीं है. उन्होंने कहा, अगर मुझे कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाती है, तो वहां रहकर क्या करूंगा. मैं ऐसी जगह रहना चाहता हूं जहां काम करने का मौका मिले और उसका सीधा असर जनता पर दिखे. उनके मुताबिक, निष्क्रिय रहना उनके काम करने के तरीके के खिलाफ है. जनता से सीधे जुड़ाव की बात रिंकू सिंह ने यह भी कहा कि वे आगे ऐसी भूमिका में काम करना चाहते हैं जहां जनता से सीधा जुड़ाव बना रहे. उन्होंने कहा, जब आप सीधे लोगों के बीच रहते हैं, तो उनकी समस्याएं समझ में आती हैं और समाधान भी जल्दी निकलता है. मैं उसी तरह की भूमिका चाहता हूं. उनका मानना है कि प्रशासनिक सेवा का सबसे अहम हिस्सा लोगों से संवाद है. वेतन और जवाबदेही पर स्पष्ट रुख बातचीत में उन्होंने एक बार फिर वेतन और जवाबदेही के मुद्दे को दोहराया. उन्होंने कहा, जनता के पैसे से वेतन मिलता है, इसलिए उसकी जवाबदेही भी जनता के प्रति ही होती है. अगर काम नहीं हो रहा, तो उस पैसे को लेना उचित नहीं है. उनका कहना है कि इसी सोच के कारण उन्होंने ‘नो वर्क, नो पे’ की बात कही और अब यह कदम उठाया है. सरकार के फैसले का इंतजार फिलहाल रिंकू सिंह राही का तकनीकी त्यागपत्र सरकार के पास विचाराधीन है. इस पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है. अगर उनका आवेदन स्वीकार होता है तो वे फिर से पीसीएस सेवा में लौट सकते हैं. वहीं, अगर आवेदन पर कोई अन्य निर्णय होता है तो आगे की स्थिति उसी के अनुसार तय होगी. उन्होंने कहा, अब फैसला सरकार को करना है. मैंने अपनी बात रख दी है.

MP-MLA कोर्ट का अहम फैसला: कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा

दतिया   मध्य प्रदेश में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को विधानसभा चुनाव में शिकस्त देकर दतिया सीट से विधायक चुने गए राजेंद्र भारती को एमपी-एमएलए कोर्ट की विशेष बेंच ने आज 3 साल की सजा सुना दी है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने 25 साल पुराने भूमि विकास सहकारी बैंक घोटाले मामले में राजेंद्र भारती को दोषी करार दिया है। साथ ही, इसपर फैसला देते हुए 3सालर्ष की जेल की सजा और जुर्माना लगाया है। आपको बता दें कि, एक दिन पहले बुधवार को कोर्ट ने उन्हें धोखाधड़ी केस में दोषी करार दे दिया था, जिसके बाद फैसला आज के लिए सुरक्षित रखा गया था और आज इसपर विधायक को सजा सुनाई है। कोर्ट ने राजेंद्र भारती को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120 बी के तहत आपराधिक साजिश, 420 धोखाधड़ी, 467, 468 जालसाजी और 471 जाली दस्तावेज का इस्तेमाल करने के तहत दोषी ठहराया है। इसी मामले में सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी दोषी माना गया है। क्या है मामला ? आपको बता दें कि, विधायक को हुई सजा से जुड़ा ये मामला दतिया जिले में स्थित भूमि विकास सहकारी बैंक से जुड़ा है। मामला उस समय का है, जब राजेंद्र भारती जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष थे। आरोप है कि, उन्होंने बैंक लिपिक के साथ मिलकर 10 लाख रुपए की एफडी में हेरफेर किया था। एफडी की अवधि और दस्तावेजों में बदलाव कर वो तय समय से अधिक समय तक ऊंची ब्याज दर पर पैसा निकालते रहे थे। सजा के बाद भी राहत खास बात ये है कि, इस मामले में एमपी एमएलए कोर्ट ने जहां दोषी करार देते हुए उन्हें 3 साल की सजा सुनाई तो वहीं दूसरी तरफ साथ में जमानत भी दे दी है। कोर्ट की इस राहत से उन्हें तुरंत ही जेल नहीं जाना पड़ेगा। हालांकि, कानूनी तौर पर 2 साल या उससे अधिक की सजा होने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता रद्द करने का नियम है। ऐसे में अब कोर्ट से सजा का फैसला आने के बाद उनकी विधायकी पर खतरा मंडराने लगा है। हालांकिस अब भी राजेंद्र भारती के पास कुछ विकल्प मौजूद हैं, जिसके आदार पर वो अपनी सजा को चुनौती दे सकते हैं। कांग्रेस का हमला एमपी एमएलए कोर्ट के फैसला आने के बाद कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने राजेन्द्र भारती केस को भाजपा का षणयंत्र बताया है। साथ ही, उम्मीद जताते हुए कहा कि, जल्द ही उन्हें हाईकोर्ट से राहत मिल जाएगी। खास बातें -कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा और जुर्माना भी लगाया। -25 साल पुराने केस में एमपी एमएलए कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला। -सजा सुनाने के साथ ही कोर्ट ने राजेन्द्र भारती को जमानत भी दी। -60 दिन के भीतर अपर कोर्ट में अपील करने का मौका भी मिला। -पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को विधानसभा चुनाव में शिकस्त देकर चुने गए विधायक।

आरा जंक्शन पर नई व्यवस्था: ‘क्यू-मित्र’ से पारदर्शी होगी Tatkal टिकट बुकिंग

आरा/भोजपुर. दानापुर रेल मंडल के अंतर्गत आरा जंक्शन पर यात्रियों को जल्द ही अत्याधुनिक 'क्यू-मित्र' सुविधा मिलने जा रही है। हाजीपुर रेलवे जोन के मुख्य जनसंपर्क पदाधिकारी सरस्वती चंद्र ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय रेल के मूल सिद्धांत, यात्री सुविधा, निष्पक्षता और पारदर्शिता को मजबूत करने के उद्देश्य से यह डिजिटल पहल शुरू की जा रही है। सोनपुर मंडल में इसके सफल क्रियान्वयन के बाद अब इसे आरा जंक्शन पर लागू करने की तैयारी है। इससे यात्रियों को टिकट लेने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। तत्काल टिकट में अव्यवस्था से मिलेगी राहत अब तक तत्काल टिकट लेने के दौरान यात्रियों को लंबी कतारों, अव्यवस्था और धांधली जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। 'पहले आओ-पहले पाओ' का नियम कई बार टूट जाता था। इसके कारण यात्रियों में असंतोष और विवाद की स्थिति बनती थी। 'क्यू-मित्र' प्रणाली इन समस्याओं को दूर करने का प्रभावी समाधान बनकर सामने आई है। इसके लागू होने से टिकट प्रक्रिया पूरी तरह व्यवस्थित और पारदर्शी होगी। क्या है ‘क्यू-मित्र’ प्रणाली 'क्यू-मित्र' एक स्व-सेवा, कियोस्क आधारित डिजिटल कतार प्रबंधन प्रणाली है। इसमें यात्री स्वयं जाकर टोकन प्राप्त करते हैं। इस प्रक्रिया में किसी कर्मचारी की सीधी भूमिका नहीं होती, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है। आधार आधारित सत्यापन और चेहरे की पहचान के जरिए हर यात्री की पहचान सुनिश्चित की जाती है। टोकन पर यात्री का फोटो, आधार के अंतिम चार अंक, टोकन संख्या और समय दर्ज रहता है। कैसे काम करेगा यह सिस्टम कियोस्क पर पहुंचते ही कैमरा यात्री का चेहरा कैप्चर करता है और आधार कार्ड स्कैन किया जाता है। इसके बाद एआई आधारित प्रणाली तुरंत टोकन जारी कर देती है। तत्काल टिकट काउंटर खुलने से करीब 30 मिनट पहले कर्मचारियों द्वारा फोटो और आधार का मिलान कर सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित क्रम के अनुसार ही टिकट जारी किए जाएंगे, जिससे किसी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहेगी। सुरक्षा और पारदर्शिता की पुख्ता व्यवस्था इस प्रणाली में एक आधार कार्ड से प्रतिदिन केवल एक ही टोकन जारी किया जा सकेगा। चेहरे की पहचान तकनीक से दुरुपयोग की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। एसी तत्काल टिकट सुबह 10 बजे और नॉन-एसी टिकट सुबह 11 बजे जारी किए जाएंगे। क्यू-मित्र में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं का विकल्प रहेगा। नेटवर्क बाधित होने पर भी यह सिस्टम ऑफलाइन मोड में काम करेगा और बाद में डेटा स्वतः सिंक हो जाएगा। यात्रियों और कर्मचारियों को होगा लाभ जहां-जहां यह प्रणाली लागू की गई है, वहां तत्काल टिकट प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और विवाद-मुक्त हो गई है। कतार में धांधली की शिकायतें लगभग खत्म हो गई हैं। स्टेशन परिसर में भीड़भाड़ कम हुई है और यात्रियों का रेलवे पर भरोसा बढ़ा है। साथ ही कर्मचारियों को भी अनावश्यक आरोपों और दबाव से राहत मिली है, जिससे कार्यप्रणाली अधिक सुचारू हुई है।

कृष्ण जन्मभूमि विवाद, राम मंदिर के बाद अब मथुरा की बारी, स्वामी गोविंद देव गिरी का बड़ा बयान

मथुरा मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद को लेकर स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने हिंदू पक्ष की जीत की उम्मीद जताई है. उनका कहना है कि मथुरा में भी अयोध्या की तरह भव्य मंदिर का निर्माण होगा. इस दौरान उन्होंने देश की एकता में RSS की भूमिका की सराहना की और देश को बांटने की साजिशों पर चिंता जताई. अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद अब मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद का मामला भी चर्चा में आ गया है.स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने उम्मीद जताई कि अदालत में चल रहे मामले में हिंदू पक्ष की जीत होगी. उन्होंने दावा किया कि मथुरा में भी अयोध्या की तरह ही भव्य मंदिर का निर्माण होगा. स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष और श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के उपाध्यक्ष हैं. इंदौर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह राम मंदिर का सपना साकार हुआ है, उसी तरह कृष्ण मंदिर भी बनेगा. महाराज इंदौर की सामाजिक संस्था 'सार्थक' और आयोजित 'समर्पण के प्रतीक' थीम पर आधारित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे. इस दौरान उन्होंने देश के हालात पर भी अपनी राय दी. मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद पर अदालती कार्यवाही पर टिप्पणी करते हुए स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा, 'राम मंदिर बन गया है. कृष्ण मंदिर भी बनेगा. इसका निर्माण वैसा ही होगा जैसा पूरा देश चाहता है. मामला अदालत में चल रहा है और इसमें कुछ भी बहुत मुश्किल नहीं है.' देश को बांटने की साजिश का जिक्र स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि पिछले 150-200 सालों से भारत को खान-पान, जाति, भाषा, क्षेत्र और संप्रदायों के आधार पर बांटने की साजिश रची जा रही है. उनके मुताबिक, देश की जनता आज भी इन साजिशों का नतीजा झेल रही है. RSS की भूमिका की तारीफ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के योगदान पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि देश की एकता को बनाए रखने में संघ की बड़ी भूमिका रही है. महाराज ने कहा, 'मैं कभी-कभी सोचता हूं कि अगर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ न होता तो इस देश का क्या होता. इस देश का भूगोल बदल गया होता और देश टुकड़ों में बंट गया होता.' स्वामी जी ने विश्वास दिलाया कि भगवान जल्द ही लोगों की मनोकामनाएं पूरी करेंगेय उन्होंने अयोध्या का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां प्रभु राम के जन्मस्थान पर मंदिर का निर्माण एक मिसाल है और मथुरा में भी वैसा ही होगा.

मौसम ने ली करवट: बारिश से सुहावना हुआ माहौल, आंधी का अलर्ट जारी

लुधियाना. पंजाब के कई जिलों में मंगलवार मध्यरात्रि से लेकर बुधवार सुबह छह बजे के दौरान तेज हवाओं के बीच हल्की से तेज वर्षा हुई, जिससे सुबह मौसम में ठंडक घुली रही। सुबह हल्की ठंड महसूस हो रह थी, जिसके चलते बहुत से लोगों को हलके गर्म कपड़े पहनने पड़े। मौसम केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार, लुधियाना में 4.6 मिलीमीटर, पटियाला में 9.2 मिलीमीटर, बठिंडा में 21.2 मिलीमीटर, फरीदकोट में 8.4 मिलीमीटर, फिरोजपुर में 16.5 मिलीमीटर, रूपनगर में 9.5 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। वर्षा के चलते इन जिलों में दिन का तापमान कम रहा। हालांकि, सुबह छह बजे के बाद से लगभग सभी जिलों में तेज धूप निकल आई थी। लुधियाना में भी सुबह नौ बजे के बाद दिनभर बादलों का आना जाना लगा रहा। दूसरी तरफ मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, गुरुवार को मौसम साफ रहेगा, लेकिन शुक्रवार व शनिवार को पंजाब के कई जिलों में गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं। कुछ जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी हवाएं चलने की संभावना है।इसे लेकर मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पांच अप्रैल से मौसम दोबारा से साफ हो जाएगा। दिन का तापमान बढ़ेगा।

होमगार्ड के प्लाटून कमांडर चयन की प्रक्रिया निरस्त, अब नए विज्ञापन के साथ शुरू होगा चयन

जबलपुर  मप्र हाईकोर्ट ने होमगार्ड में प्लाटून कमांडर की चयन प्रक्रिया को दूषित पाते हुए उसे निरस्त कर दिया। जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने नए सिरे से चयन प्रक्रिया के लिए दोबारा विज्ञापन जारी करने के निर्देश दिए। आरोप था कि लिखित व शारीरिक परीक्षा के पहले ही नियमविरुद्ध तरीके से स्क्रीनिंग कमेटी ने अभ्यर्थियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था।  जबलपुर निवासी सविनय कुमार गर्ग की ओर से अधिवक्ता विकास महावर ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि मप्र नगर सेना वर्ग-3 भर्ती नियम 2000 के तहत प्लाटून कमांडर के कुल 199 स्वीकृत पद हैं। इनमें से 6 प्रतिशत पद इन-सर्विस उम्मीदवारों से भरे जाते हैं। होमगार्ड डीजी ने 27 जनवरी 2026 को 4 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। इस पद के लिए कुल 24 लोगों ने आवेदन किया था। इनको अपात्र बताकर परीक्षा से वंचित कर दिया नियमानुसार शारीरिक व लिखित परीक्षा के बाद स्क्रीनिंग कमेटी उम्मीदवारों का एसीआर देखने के बाद चयन सूची जारी करती है। दलील दी गई कि नियम विरुद्ध तरीके से परीक्षा के पहले ही स्क्रीनिंग कमेटी ने याचिकाकर्ता सहित 6 उम्मीदवारों को अपात्र बताकर परीक्षा से वंचित कर दिया। इस वजह से हुई निरस्त जबलपुर हाई कोर्ट को बताया गया कि भोपाल में 16 मार्च शारीरिक परीक्षण और 17 को लिखित परीक्षा आयोजित थी, लेकिन विभाग ने 13 मार्च को ही 18 पात्र उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी। दलील दी गई कि पूरी प्रक्रिया विधि सम्मत नहीं है। हाई कोर्ट ने याचिका की सुनवाई के बाद नियुक्ति प्रक्रिया को दूषित पाते हुए उसे निरस्त कर दिया।