राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से राजनीति में आने वालों से लोकतांत्रिक मूल्य और व्यवस्थाएं होती हैं प्रभावित जनप्रतिनिधि का संवेदनशील, अध्ययनशील, तनाव प्रबंधन में दक्ष और जनहित के लिए समर्पित होना आवश्यक लोकतंत्र, भारतीय राजनैतिक व्यवस्था का नैसर्गिक गुण लोकतंत्र को सशक्त बनाने में युवा विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण : विधानसभा अध्यक्ष तोमर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवा विधायकों के दो दिवसीय सम्मेलन का किया शुभारंभ मध्यप्रदेश सहित राजस्थान और छत्तीसगढ़ के युवा विधायक हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक है। वे ही इस क्षेत्र में सक्रिय और सफल हो सकते हैं, जिनमें जनसेवा और जनकल्याण की भावना हो। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से राजनीति में आने वाले लोगों के कारण लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। जनप्रतिनिधियों के लिए जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील होना, अध्ययनशील होना, तनाव प्रबंधन में दक्ष होना और जनहित के लिए पूर्ण समर्पण से कार्य करना आवश्यक है। कोई समस्या आने पर जनप्रतिनिधि का व्यवहार और समस्या निराकरण के लिए उनका प्रबंधन कौशल, उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है। सकारात्मक और समाज हित की गतिविधियों और विकास कार्यों के लिए हमें दलगत मतभेदों से ऊपर उठकर सोचना और कार्य करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मध्यप्रदेश विधानसभा में आयोजित युवा विधायकों के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। विधानसभा के विधान परिषद हाल में हुआ कार्यक्रम वंदे मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार विशेष रूप से उपस्थित थे। सम्मेलन में राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र 6) के तीन राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान के 45 वर्ष आयु तक के विधायक सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह मानना कि लोकतंत्र के विचार की उत्पत्ति पश्चिम से हुई थी, पूर्णत: सत्य नहीं है। लोकतंत्र, भारतीय राजनैतिक व्यवस्था का नैसर्गिक गुण है। भारतीय व्यवस्थाओं में सदैव से ही मत भिन्नता को सम्मान दिया गया है, राजनैतिक और धार्मिक व्यवस्थाओं में शास्त्रार्थ की परम्परा प्राचीन समय से रही है। भारत में विचारों की अभिव्यक्ति को सभी क्षेत्रों में सम्मान और महत्व प्रदान किया गया। भारत में ऐतिहासिक रूप से जुड़े लोकतंत्र के संस्कारों और मूल्यों का ही परिणाम है कि अंग्रेजों के जाने के बाद भी देश में लोकतंत्र पर आधारित व्यवस्थाएं सुगमता से संचालित होती रहीं। जबकि अन्य पड़ोसी देशों का हाल सबके सामने है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवा विधायकों को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें हर स्थिति में सम भाव से रहने की प्रेरणा मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम से लेना चाहिए। जब उन्हें राजपाट सौंपा जाना था, तब उन्हें वनवास दे दिया गया। परंतु उन्होंने दोनों स्थितियों को समभाव से लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य सहित कई भारतीय शासकों के इतिहास से ज्ञात होता है कि उन्होंने कभी अपनी अगली पीढ़ी को राज सत्ता सौंपने का उपक्रम नहीं किया। राज्य के प्रबंधन में लगे लोगों ने ही उनके बाद व्यवस्थाएं संभाली। ऐसे महान शासकों का मानना था कि यदि अगली पीढ़ी में नेतृत्व क्षमता और राज सत्ता के प्रबंधन की दक्षता होगी, तो वे स्वयं इस दिशा में सक्रिय होंगे। इन भारतीय मूल्यों और परम्पराओं का वर्तमान में भी पालन होना आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों और सत्ता से जुड़े लोगों का अपने परिवार को समय देना और उन्हें अच्छे संस्कार देना भी आवश्यक है। अच्छे संस्कारों के अभाव में अगली पीढ़ी द्वारा यश प्रभावित करने की संभावना बनी रहती है। जनप्रतिनिधियों को इस ओर से विशेष रूप से संवेदनशील और सतर्क रहना चाहिए। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में युवा जनप्रतिनिधियों की अहम जिम्मेदारी मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने में युवाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति, समुदाय या क्षेत्र की व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिकों की स्वतंत्रता, न्याय, समानता और बंधुता पर आधारित एक व्यापक व्यवस्था है। भारत का लोकतंत्र नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही मजबूत होता है। उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के 25 नवंबर 1949 के संविधान सभा के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसे लागू करने वाले लोग कितने प्रतिबद्ध और नैतिक हैं। तोमर ने कहा कि युवा विधायक लोकतंत्र में नागरिकों और शासन के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं। उनकी नई ऊर्जा, आधुनिक सोच और नवाचार की क्षमता शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि युवा जनप्रतिनिधि सामाजिक कुरीतियों जैसे जातिवाद, नशाखोरी और लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध समाज को जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस सोच का उल्लेख किया जिसमें राजनीति में नई ऊर्जा और पारदर्शिता लाने के लिए बड़ी संख्या में युवाओं को राजनीति में आने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने के लिए चुनाव कानून (संशोधन) अधिनियम 2021 के माध्यम से मतदाता पंजीयन की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया गया है। तोमर ने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा ने भी लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। पहली बार निर्वाचित विधायकों की शून्यकाल सूचनाओं को प्राथमिकता देने तथा प्रश्नकाल से जुड़े उत्तरों की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने जैसे कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाए गए हैं। उन्होंने युवा विधायकों से आह्वान किया कि वे संसदीय परंपराओं, नियमों और प्रक्रियाओं का गंभीर अध्ययन करें, सदन की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी निभाएं तथा वरिष्ठ सदस्यों से मार्गदर्शन लेकर अपने ज्ञान और अनुभव को समृद्ध बनाएं। उन्होंने कहा कि अतीत के अनुभव और भविष्य की योजनाओं के बीच वर्तमान का सशक्त पुल युवा नेतृत्व ही बन सकता है। विधानसभा अध्यक्ष ने विश्वास व्यक्त किया कि युवा विधायक सम्मेलन में होने वाले विचार-विमर्श और संवाद लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करेंगे तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में नई ऊर्जा प्रदान करेंगे। जनता और … Read more