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बिहार में सियासी हलचल तेज: Nitish Kumar 30 मार्च को MLC पद छोड़ेंगे, 13 अप्रैल के बाद CM कुर्सी पर संकट

पटना बिहार में राजनीतिक हलचल तेज होने लगी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 अप्रैल को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं, जबकि 13 अप्रैल के बाद वे कभी भी मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं। मुख्यमंत्री आवास से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी। नीतीश कुमार, जो अभी बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं, ने 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में पहले ही जीत हासिल की। नियमों के अनुसार, नीतीश कुमार को संसद के लिए चुने जाने के 14 दिनों के भीतर राज्य विधानमंडल से इस्तीफा देना होता है। इस स्थिति में राज्य विधानसभा या विधान परिषद सदस्य न होने की स्थिति में नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा देना होगा। राज्यसभा की सदस्यता को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री ने अपनी 'समृद्धि यात्रा' के 5 चरणों के दौरान इस मामले पर एक भी शब्द नहीं कहा। यह यात्रा 26 मार्च को पटना में समाप्त हुई थी। समृद्धि यात्रा के दौरान, बिहार के मुख्यमंत्री ने 32 जिलों में 32 जनसभाओं को संबोधित किया, लेकिन कहीं भी राज्यसभा जाने या मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का जिक्र नहीं किया था। हालांकि, हाल में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव में उन्होंने नामांकन दाखिल किया और पहली बार उच्च सदन के सदस्य के रूप में चुने गए। बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 30 अप्रैल को इस्तीफा देने की सूचना है। इसके बाद वे अपनी राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे।" नीतीश कुमार के एमएलसी पद से इस्तीफे की चर्चाओं पर बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने कहा, "उनका सदन से जाना पूरे बिहार के लिए अखरेगा। समय और परिस्थितियों के साथ यह उनका (नीतीश कुमार) का निर्णय है। हम लोग नहीं चाहते हैं कि वे दिल्ली जाएं, लेकिन राजनीति में परिस्थितियों के अनुसार उन्होंने अपना फैसला लिया है। सदन का सदस्य रहना या नहीं रहना यह कोई बात नहीं, बल्कि वह व्यक्ति राज्य के लिए कितना इफेक्टिव है, यह मायने रखता है।"

सरकारी नौकरी में 24 साल बाद नया नियम लागू, कर्मचारियों के लिए क्या बदलेगा?

भोपाल मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए लागू दो बच्चों की शर्त को खत्म करने की तैयारी अंतिम चरण में है। राज्य सरकार इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट के सामने रख सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से इस संबंध में तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं और माना जा रहा है कि आगामी कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी मिल सकती है। प्रदेश में फिलहाल दो से अधिक बच्चों वाले अभ्यर्थियों के लिए कुछ सरकारी सेवाओं में नियुक्ति पर प्रतिबंध लागू है। यह प्रावधान वर्ष 1961 के नियमों और बाद में 2001 में किए गए संशोधनों के तहत लागू किया गया था। अब सरकार इस शर्त को समाप्त करने पर विचार कर रही है। सभी विभागों में लागू होगा नियम यदि कैबिनेट से मंजूरी मिलती है तो सरकारी नौकरी के इच्छुक ऐसे अभ्यर्थियों को भी अवसर मिल सकेगा जिनके दो से अधिक बच्चे हैं। सूत्रों के अनुसार यह प्रस्ताव काफी समय से विचाराधीन था, लेकिन कुछ बिंदुओं पर स्पष्टता नहीं होने के कारण निर्णय टलता रहा। अब विभागीय स्तर पर सहमति बनने के बाद इसे कैबिनेट के सामने रखने की तैयारी की जा रही है। प्रस्ताव मंजूर होने के बाद इसे सभी विभागों में लागू किया जाएगा। हालांकि इस बदलाव का असर पहले से सेवा में कार्यरत कर्मचारियों पर किस तरह पड़ेगा, इस बारे में अभी पूरी तरह स्पष्टता नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियम हटने के बाद भविष्य में होने वाली भर्तियों में इसका सीधा फायदा मिलेगा। साथ ही जिन अभ्यर्थियों को पहले इस नियम के कारण आवेदन से वंचित रहना पड़ता था, उन्हें भी मौका मिल सकेगा। परिवारों को कैशलेस इलाज राज्य सरकार के स्तर पर यह भी चर्चा है कि कुछ अन्य सेवा नियमों में भी समय के अनुसार बदलाव किए जाएं। इसी क्रम में दो बच्चों की शर्त हटाने को प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। इसी के साथ सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी कैबिनेट में लाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के परिवारों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने की योजना बनाई जा रही है। प्रस्ताव के अनुसार ऐसे कर्मचारियों और उनके आश्रितों को करीब 20 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।

सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका! SSB में 1060 पदों पर भर्ती, Constable और Head Constable के लिए ऐसे करें अप्लाई

भोपाल सशस्त्र सीमा बल में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। एसएसबी में कांस्टेबल एवं हेड कांस्टेबल भर्ती 2026 के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया है। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर 20 अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती उन युवाओं के लिए शानदार अवसर है जो पैरामिलिट्री बल में शामिल होकर देश सेवा करना चाहते हैं। वैकेंसी डिटेल्स पद का नाम – पदों की संख्या कांस्टेबल – 827 हेड कांस्टेबल – 233 कुल पद – 1060 योग्यता उम्मीदवारों ने मान्यता प्राप्त बोर्ड से पदानुसार 10वीं उत्तीर्ण होने के साथ ड्राइविंग लाइसेंस या संबंधित ट्रेड में आईटीआई या उसमें दक्षता होनी चाहिए। हेड कांस्टेबल पदों के लिए 10वीं के साथ आईटीआई या 12वीं के साथ संबंधित क्षेत्र में डिप्लोमा होना आवश्यक है। आयु सीमा न्यूनतम आयु – 18 वर्ष अधिकतम आयु – 25 से 27 वर्ष (पद अनुसार) आरक्षित वर्ग को नियमानुसार छूट दी जाएगी। चयन प्रक्रिया शारीरिक दक्षता परीक्षा शारीरिक मापदंड परीक्षा लिखित परीक्षा कौशल या टाइपिंग परीक्षा दस्तावेज सत्यापन विस्तृत चिकित्सीय परीक्षण वेतन चयनित उम्मीदवारों को 21,700 से 69,100 रुपये तक वेतन दिया जाएगा। इसके साथ महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और यात्रा भत्ता जैसे अन्य लाभ भी मिलेंगे। महत्वपूर्ण तिथियां आवेदन प्रारंभ – 21 मार्च 2026 अंतिम तिथि – 20 अप्रैल 2026 ऐसे करें आवेदन आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं आवेदन लिंक पर क्लिक करें नया पंजीकरण करें लागिन कर फार्म भरें दस्तावेज, फोटो और हस्ताक्षर अपलोड करें शुल्क जमा करें और फार्म जमा करें प्रिंट निकालकर सुरक्षित रखें जरूरी सलाह फार्म भरते समय सही जानकारी दें। शारीरिक परीक्षा की तैयारी अभी से शुरू करें। नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट देखते रहें। तैयारी के टिप्स प्रतियोगी परीक्षाओं के शिक्षक एवं करियर काउंसलर मोहित शर्मा के अनुसार एसएसबी केवल नौकरी नहीं, बल्कि अनुशासन और समर्पण का प्रतीक है। पद के अनुसार अपनी क्षमता का आकलन करें। लिखित और शारीरिक तैयारी साथ-साथ करें। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र और कटऑफ का अध्ययन करें। मेडिकल फिटनेस की जांच पहले ही करा लें। हर विषय के लिए समय निर्धारित करें। नियमित मॉक टेस्ट दें और गलतियों का विश्लेषण करें। रोजाना दौड़ और व्यायाम करें। संतुलित आहार और पर्याप्त नींद लें। कमजोर विषयों पर अधिक ध्यान दें और अंतिम समय में केवल पुनरावृत्ति करें।

बिजली का झटका: मध्यप्रदेश में बढ़े दाम, जानिए अब कितना आएगा आपका मासिक बिल

भोपाल  मध्य प्रदेश में बिजली 4.80 फीसदी महंगी हो गई। मप्र विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नया बिजली टैरिफ जारी कर दिया। यह 3 अप्रेल से प्रभावी होगा। इसका असर 10 अप्रैल के बाद आने वाले बिलों में दिखाई देगा। नए टैरिफ से अब हर माह 200 यूनिट बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को 80 रुपए और 600 यूनिट बिजली जलाने वाले उपभोक्ताओं को 236 रुपए अधिक चुकाने होंगे। इससे प्रदेश के 1.90 करोड़ उपभोक्ता प्रभावित होंगे। इनमें 1.50 करोड़ घरेलू उपभोक्ता भी हैं। हालांकि प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं के लिए छूट व प्रोत्साहन जारी रहेंगे। सरकार का दावा आयोग ने नहीं मानी कंपनियों की बात सौर ऊर्जा उपयोग करने वालों को ऊर्जा प्रभार में 20 फीसदी छूट मिलती रहेगी। हरित ऊर्जा टैरिफ में पहले जैसी कमी रहेगी। सरकार का दावा है, आयोग ने बिजली कंपनियों के उस दावे को नहीं माना, जिसमें घाटे का हवाला दे टैरिफ में 10.19 फीसदी वृद्धि की मांग की थी। रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल ने बताया, महाराष्ट्र, यूपी, आंध्रप्रदेश समेत 8 राज्यों ने भी नए टैरिफ लागू किए हैं। इनमें कई ने तो दाम कम कर दिए हैं। मेट्रो व उच्च दाब वाले उपभोक्ताओं को राहत नए टैरिफ में मेट्रो और उच्च दाब वाले मौसम उपभोक्ताओं को राहत मिली है। इनमें कोई वृद्धि नहीं की गई है। उच्च दाब वाले उपभोक्ताओं में गुड़ व शकर बनाने वाले उपभोक्ताओं को लाभ होगा। कंपनियों को हजारों करोड़ का फायदा टैरिफ में 4.80 फीसद की बढ़ोतरी से मध्य, पूर्व व पश्चिम क्षेत्र बिजली कंपनियों को फायदा होगा। आयोग के सामने इन्होंने घाटा दर्शाया था, टैरिफ बढ़ने से इन्हें हर महीने हजारों करोड़ रुपए मिलेंगे। बता दें कि महाराष्ट्र, पश्चिमी बंगाल, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश समेत करीब 8 राज्यों ने हाल में टैरिफ रिव्यू के दौरान उपभोक्ताओं को राहत दी है। कहीं दरें स्थित तो कहीं कम कुछ राज्यों में बिजली की दरों को यथावत रखा है, तो कुछ राज्यों में बिजली की दरें कम की गई हैं। कुछ राज्यों ने स्लैब के अनुसार कटौती भी की है। वहीं इंडस्ट्रियल और घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने पर फोकस रहा है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 257 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को 169 करोड़ से अधिक राशि का करेंगे अंतरण

भोपाल .  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समर्थ एमएसएमई विकसित मध्यप्रदेश की थीम पर मुख्यमंत्री निवास पर आज सुबह 10 बजे आयोजित कार्यक्रम में 257 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को उनके खाते में 169.57 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि का सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरण करेंगे। साथ ही स्टार्टअप को भी लगभग 28 लाख से अधिक की अनुदान राशि की प्रथम किश्त भी प्रदान करेंगे। एमएसएमई मंत्री श्री चेतन्य कुमार काश्यप भी कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कार्यक्रम में लघु उद्योग निगम की ओर से मंत्री श्री काश्यप 8 करोड़ रुपए के अंतरिम लाभांश राशि का चैक भी सौंपेंगे। मध्यप्रदेश स्टार्टअप नीति एवं कार्यान्वयन ईआईआर योजना अंतर्गत सहायता के रूप में प्रदेश के 43 ज़िलों के 286 स्टार्टअप्स को ₹3.43 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गये हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रथम क़िस्त की राशि 28.6 लाख का वितरण सिंगल क्लिक से करेंगे।। कार्यक्रम में आगर मालवा एवं बैतूल जिले के 3 उद्यमियों को औद्योगिक भूमि के लिए आवंटन आदेश एवं एक उद्यमी को आशय पत्र का वितरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के अंतर्गत 3 हितग्राहियों को 50.5 लाख रूपये की ऋण राशि का वितरण चेक के माध्यम से करेंगे और आनलाइन माध्यम से उद्यमियों को विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आवंटन प्रमाण पत्र तथा आशय-पत्र भी प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से अनेक उद्यमी संवाद भी करेंगी। उद्यमी युवा अपने अनुभव भी साझा करेंगे।  

शराब प्रेमियों के लिए खुशखबरी, सस्ते रेट पर बिक रही शराब, ठेकों के बाहर मेला सा माहौल

जालंधर  नई एक्साइज पॉलिसी 1 अप्रैल से लागू होने जा रही है, इससे पहले शहर में शराब के ठेकों पर सस्ती दरों पर बिक्री ने लोगों को आकर्षित किया, जिसके चलते दिनभर और देर रात तक ठेकों पर भारी भीड़ देखने को मिली। पुराने ठेकों की समयावधि समाप्त होने के कारण ठेकेदारों द्वारा स्टॉक निकालने के लिए शराब कम कीमतों पर बेची गई, जिसका लोगों ने जमकर फायदा उठाया। शहर के विभिन्न इलाकों में ठेकों पर ऐसा माहौल देखने को मिला मानो मेला लगा हो। सुबह से ही ठेकों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं और शाम होते-होते यह भीड़ और बढ़ गई। कई स्थानों पर लोगों ने बिना किसी रोक-टोक के पेटियों के हिसाब से शराब खरीदी। दोपहिया वाहनों पर भी लोग शराब की पेटियां ले जाते नजर आए। जानकारी के अनुसार, अलग-अलग ग्रुपों के ठेके समाप्त होने के कारण शराब बेहद सस्ते दामों पर उपलब्ध थी। हालांकि, एक्साइज नियमों के तहत एक व्यक्ति को सीमित मात्रा में ही शराब बेचने का प्रावधान है, लेकिन कई स्थानों पर इन नियमों की पालना होती नजर नहीं आई। इससे यह साफ हुआ कि सस्ती शराब के कारण मांग अचानक बढ़ गई। एक्साइज विभाग द्वारा ढोल या अन्य प्रचार माध्यमों पर पहले ही पाबंदी लगाई जा चुकी थी, जिसके चलते ठेकों पर किसी प्रकार का औपचारिक प्रचार नहीं किया गया। इसके बावजूद भारी भीड़ इस बात का संकेत दे रही थी कि सस्ती शराब की जानकारी लोगों तक अपने आप पहुंच गई थी। विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया, लेकिन हालात को देखते हुए व्यवस्था बनाए रखने और नियमों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने की जरूरत महसूस की जा रही थी।

यात्रियों से ठगी: स्टेशन पर महंगे दामों में पानी बेचकर वेंडर भर रहे जेब

सागर   बीना. रेलवे स्टेशन पर स्टॉल संचालकों व वेंडरों की दबंगई से यात्री परेशान हैं। स्टॉल पर बिकने वाली वस्तुओं के दाम उनकी मर्जी से तय होते हैं। स्टेशन पर 14 रुपए वाली पानी की बोतल बीस रुपए की कीमत पर बिकती है। ठंडा करने के नाम पर यात्रियों से छ: रुपए अधिक लेना उनकी आदत में शुमार है। यात्रा की तकलीफों से जूझते यात्री उनसे उलझने के बजाय खामोश रहना ही बेहतर समझते हैं। यही स्थिति अन्य वस्तुओं के लेनदेन में भी चलती है। यह सारा खेल अधिकारियों की शह पर स्टॉल संचालक व वेंडर करते हैं। पंजीयन के समय एग्रीमेंट में रेलवे की सभी शर्तों को मानना जरूरी होता है। उसमें स्टॉल पर रेट लिस्ट लगाना प्रमुख शर्त होती है। स्टॉल संचालक उसे पूरा करने का वादा भी करते हैं लेकिन मनमानी कीमत वसूलने के लिए उसे अमल में नहीं लाते। हद तो यह है कि निरीक्षण के दौरान आला अधिकारी भी डांट फटकार कर दिखावे की कार्रवाई पूरी कर लेते हैं। रेलवे स्टेशन पर चार व पांच नंबर प्लेटफॉर्म के बीच में स्थित स्टॉल पर यात्री से ठंडे पानी की बोतल के 14 की बजाय बीस रुपए व कोल्ड ड्रिंक की बोतल के चालीस की बजाय 45 रुपए लिए गए। भोपाल से गोरखपुर की यात्रा कर रहे यात्री इंद्रेश नागले ने बताया कि उसकी बहिन की शादी के बाद उसे लेने के लिए जा रहा था, जिसने स्टेशन वेंडर से पानी की बोतल खरीदी जो उसे 14 की बजाए बीस रुपए में दी व कोल्ड ड्रिंक की बोतल के चालीस की जगह 45 रुपए लिए। इसी प्रकार विदिशा से ललितपुर जा रहे विवेक रघुवंशी से भी वेंडर ने पानी की बोतल के बीस रुपए लिए। ऑनलाइन में भी ज्यादा रुपए लेने से नहीं डरते वेंडर बीना से भोपाल की दो दिन की यात्रा के दौरान यात्री वरुण मुदगल ने एक नंबर प्लेटफॉर्म पर बुकिंग ऑफिस के सामने स्थित स्टॉल से खरीदी। जिसमें वेंडर ने दोनों ही दिन यात्री से 14 की जगह 15 रुपए ऑनलाइन लिए। इसकी शिकायत यात्री ने रेलवे अधिकारियों से की है।

एमपी में इलाज के खर्चे के मुकाबले केरल से 4 गुना सस्ते, बावजूद इसके 43% लोग खुद कर रहे हैं ट्रीटमेंट का खर्च

भोपाल  मध्यप्रदेश में इलाज का खर्च भारत के अन्य राज्यों की तुलना में बेहद कम है, खासकर केरल के मुकाबले। आम धारणा के विपरीत कि बेहतर स्वास्थ्य प्रणाली का मतलब महंगा इलाज है, आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश के लोग औसतन अपनी जेब से केवल ₹1,739 सालाना खर्च कर रहे हैं, जबकि केरल में यह आंकड़ा ₹7,889 है। इस कमी के बावजूद, मध्यप्रदेश की जनता को स्वास्थ्य सेवाओं के कुल खर्च का लगभग 43% अपनी जमा-पूंजी या उधारी से निकालना पड़ता है। 10 साल में स्वास्थ्य खर्च में उल्लेखनीय कमी लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च का स्वरूप काफी बदल गया है। 2014-15 में हर व्यक्ति को अपने इलाज के लिए कुल स्वास्थ्य खर्च का 72% खुद वहन करना पड़ता था। सरकारी योजनाओं और मुफ्त इलाज के दायरे के विस्तार ने इस भार को 43% तक घटा दिया है। केरल और मध्यप्रदेश की तुलना केरल को अक्सर देश का सबसे मजबूत स्वास्थ्य मॉडल माना जाता है, लेकिन वहां के लोग अभी भी अपने इलाज के लिए ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं। केरल में आम व्यक्ति को सालाना ₹7,889 खर्च करना पड़ता है, जबकि मध्यप्रदेश में यह खर्च केवल ₹1,739 है। यह आंकड़ा यह स्पष्ट करता है कि कम संसाधनों के बावजूद मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य योजनाएं आम आदमी के लिए अधिक सुलभ साबित हो रही हैं। आम आदमी की जेब पर कितना भार?     मध्यप्रदेश: यहां कुल स्वास्थ्य खर्च का केवल 43.3% ही जनता को अपनी जेब से देना पड़ रहा है ।     केरल: केरल की जनता को आज भी इलाज पर कुल खर्च का 59.1% हिस्सा खुद वहन करना पड़ता है ।     उत्तर प्रदेश: यूपी में स्थिति और भी गंभीर है, वहां लोग अपने इलाज का 63.7% पैसा खुद भर रहे हैं। दस साल पहले 72% पैसा खुद खर्च करना पड़ता था लोकसभा में सामने आए आंकड़ों को देखें तो मध्यप्रदेश में 2014-15 के दौरान हालात चिंताजनक थे। तब हर व्यक्ति को इलाज के लिए 72% पैसा खुद के बैंक खाते या उधारी से चुकाना पड़ता था । लेकिन पिछले 7-8 वर्षों में सरकारी दखल ने इस आंकड़े को 43.3% पर लाकर खड़ा कर दिया है । आम आदमी की जेब पर असर मध्यप्रदेश में कुल स्वास्थ्य खर्च का 43.3% जनता अपनी जेब से देती है। उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 63.7% है, जबकि केरल में यह 59.1% है। इस तुलना से यह स्पष्ट होता है कि मध्यप्रदेश के लोग देश के कई राज्यों की तुलना में कम आर्थिक बोझ उठाते हैं। सरकारी पहल और भविष्य की संभावनाएं मध्यप्रदेश में सरकारी योजनाओं के प्रभाव ने आम जनता पर खर्च का बोझ कम किया है। स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर और मुफ्त इलाज के दायरे में विस्तार ने इसे संभव बनाया है। यदि इसी तरह योजनाओं को आगे बढ़ाया गया, तो आने वाले वर्षों में जनता पर खर्च और भी घट सकता है। जेब से खर्च की स्थिति ताजा आंकड़ों (2021-22) के मुताबिक, मध्यप्रदेश में एक व्यक्ति को साल भर में अपने स्वास्थ्य पर औसतन ₹1,739 अपनी जेब से खर्च करने पड़ रहे हैं। 2014-15 में प्रति व्यक्ति यह खर्च ₹1,808 था, जो कुल हेल्थ बजट का 72% होता था। आज की स्थिति मेंअब यह हिस्सा घटकर 43.3% रह गया है। अफसरों का तर्क है कि सरकारी योजनाओं और मुफ्त इलाज का दायरा बढ़ा है। केरल के मुकाबले एमपी के लोग 'किस्मत वाले' अगर तुलना करें, तो हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेडिकल स्टाफ के मामले में समृद्ध केरल जैसे राज्य में भी लोगों को अपनी जेब से बहुत ज्यादा पैसा देना पड़ रहा है। केरल में प्रति व्यक्ति अपनी जेब से ₹7,889 खर्च करने पड़ते हैं। मध्यप्रदेश में यह खर्च महज ₹1,739 है । राष्ट्रीय औसत: देश का औसत खर्च ₹2,600 है, यानी मध्यप्रदेश के लोग राष्ट्रीय औसत से भी कम पैसा अपनी जेब से खर्च कर रहे हैं।

इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत: MP में पूरी टैक्स छूट योजना बढ़ सकती है 2 साल

भोपाल प्रदेश सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों पर वाहन कर और पंजीयन शुल्क में दो वर्ष के लिए 100 प्रतिशत छूट बढ़ा सकती है। इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने परिवहन विभाग को अभिमत के लिए पत्र लिखा है। यहां से अभिमत मिलने के बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। पहले दी गई थी एक साल की छूट पिछले वर्ष मार्च 2025 में राज्य सरकार ने ईवी नीति लागू करते हुए इलेक्ट्रिक दो पहिया, तीन पहिया और चार पहिया वाहनों पर वाहन कर और पंजीयन शुल्क में एक वर्ष की छूट दी थी। यह छूट 27 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है। अब इसे दो वर्ष तक बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। रेट्रोफिटिंग पर भी मिल सकती है राहत ईवी नीति में 15 साल पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने पर दी गई छूट भी समाप्त हो गई है। इसके तहत दो पहिया पर 5 हजार, तीन पहिया पर 10 हजार और कार पर 25 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान था। इस छूट को बढ़ाने का प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है। पांच शहरों को बनाया जाएगा मॉडल शहर नीति के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को मॉडल इलेक्ट्रिक व्हीकल शहर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही नीति अवधि के अंत तक 80 प्रतिशत सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। कमर्शियल वाहनों को 2027 तक छूट कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे ई-बस, ट्रक, ट्रैक्टर और एंबुलेंस को वाहन कर और पंजीयन शुल्क में दी गई छूट 2027 तक जारी रहेगी। अधिकारियों का क्या कहना आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास संकेत भोंडवे का कहना है कि ईवी पर वाहन कर और पंजीयन शुल्क में दो वर्ष के लिए 100 प्रतिशत छूट बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। इससे पहले परिवहन विभाग से अभिमत लिया जा रहा है।

सुरक्षा में हाईटेक कदम: टेकनपुर अकादमी के साथ 20 ड्रोन खरीद का बड़ा सौदा

ग्वालियर  पुनीत श्रीवास्तव, ग्वालियर. मप्र पुलिस अब अपनी एक्शन पावर को डिजिटल और आसमानी ऊंचाई देने जा रही है। दंगों और उपद्रव की स्थिति में अब पुलिसकर्मियों को भीड़ के करीब जाकर जोखिम लेने की जरूरत नहीं होगी। सेना और बीएसएफ की तर्ज पर प्रदेश पुलिस टीयर गैस लॉन्चर ड्रोन से लैस होने जा रही है। ग्वालियर के पास स्थित बीएसएफ अकादमी टेकनपुर की टीयर गैस यूनिट ने इन ड्रोन्स को खास तौर पर तैयार किया है। पुलिस मुख्यालय ने पहली खेप में 20 ड्रोन्स का सौदा किया है, जिनकी डिलीवरी का इंतजार अब अंतिम चरण में है। एडीजी प्लानिंग योगेश चौधरी ने बताया कि ड्रोन्स से प्रदेश में पुलिस की ताकत और तकनीक में इजाफा होगा। ड्रोन की डिलीवरी मिलने के बाद उन्हें संवेदनशीलता के आधार पर जिलों में वितरित करने के साथ ऑपरेटिंग का प्रशिक्षण भी दिलाएंगे। दंगाइयों पर काबू पाने का रामबाण इलाज साबित होगा पुलिस को दंगे या अन्य आपराधिक घटनाओं पर अंकुश के लिए परंपरागत उपायों के साथ ही अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लेना जरूरी हो चुका है। इसके लिए ड्रोन बेहद कारगर साबित हो सकते हैं। इसकी मदद से भीड़ में छिपे बदमाशों की पहचान बहुत आसान हो जाएगी। इतना ही नहीं रात में भी उनके चेहरे पहचाने जा सकेंगे। ड्रोन की सहायता से 300 मीटर तक आंसू गैस छोड़ी जा सकेगी खास बात यह है कि ड्रोन की सहायता से 300 मीटर तक आंसू गैस छोड़ी जा सकेगी। इसमें पूरी घटना रिकॉर्ड होंगी और कई मीटर दूर से इसे संचालित किया जा सकेगा।