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योगी सरकार ने 9 साल में श्रमिकों के विकास की दिशा बदली, करोड़ों श्रमिकों को मिली ताकत

योगी सरकार ने 9 वर्षों में श्रमिकों के उत्थान की लिखी नई इबारत, प्रदेश के करोड़ों श्रमिकों को मिला संबल योगी सरकार ने “श्रमेव जयते” की भावना को किया साकार, पिछले 9 वर्षों में प्रदेश के श्रमिक हुए सामाजिक-आर्थिक रूप से सशक्त ई-श्रम पोर्टल पर 8.42 करोड़ पंजीकरण कर यूपी बना देश में प्रथम, योगी सरकार के 9 वर्षों में श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के हुए बहुआयामी प्रयास योगी सरकार के 9 वर्षों में 13,148 रोजगार मेलों का आयोजन, 15.96 लाख से अधिक युवाओं को मिले नौकरी के अवसर  पीएम श्रमयोगी मानधन योजना के तहत 7,04,865 श्रमिकों का हुआ पंजीकरण, अटल पेंशन योजना के माध्यम से 93 लाख से अधिक लोग लाभान्वित लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने बीते 9 वर्षों में श्रमिकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सृजन के क्षेत्र में व्यापक एवं बहुआयामी प्रयास किए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “श्रमेव जयते” की भावना को केंद्र में रखते हुए संगठित व असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, निर्माण श्रमिकों, स्वरोजगार से जुड़े लोगों एवं उनके परिवार के सदस्यों के लिए अनेक योजनाएं लागू की हैं, जिनके सफल क्रियान्वयन से प्रदेश के श्रमिकों को आर्थिक और सामाजिक संबल प्राप्त हुआ। यही नहीं, वर्तमान में प्रदेश के नव निर्माण के आधार श्रमिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश के विजन को साकार करने की दिशा में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व के 9 वर्षों में प्रदेश में श्रमिकों के सशक्तीकरण की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण के मामले में यूपी का देश में प्रथम स्थान पर पहुंचना रहा। इसके तहत यूपी में ई-श्रम पोर्टल पर अब तक 8.42 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिकों का पंजीकरण किया जा चुका है। ई-श्रम पोर्टल न केवल श्रमिकों की पहचान सुनिश्चित करता है, बल्कि उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने का भी आधार बनता है। इसके साथ ही प्रदेश में 9.52 करोड़ से अधिक श्रमिकों के जनधन खाते खोले गए हैं, जिससे उन्हें सीधे आर्थिक सहायता प्रदान करना संभव हुआ है। प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से योगी सरकार ने “उ.प्र. रोजगार मिशन” का गठन किया, जिसके तहत युवाओं को देश और विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि रोजगार मिशन के तहत प्रदेश के 5,978 से अधिक निर्माण श्रमिकों को विदेश (इज़राइल) में रोजगार दिलाया गया है। वहीं, सेवामित्र पोर्टल पर 59,602 कुशल श्रमिकों का पंजीकरण कर उन्हें सेवाओं से जोड़ने का कार्य भी किया गया है। इसी क्रम में निजी क्षेत्र में रोजगार सृजन के लिए आयोजित 13,148 रोजगार मेलों के माध्यम से 15.96 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी के अवसर मिले हैं। इसके अतिरिक्त 28,621 करियर काउंसलिंग कार्यक्रमों के जरिए 32 लाख से अधिक युवाओं को मार्गदर्शन प्रदान किया गया है। सरकार का उद्देश्य न केवल रोजगार देना है, बल्कि युवाओं को कौशल प्रशिक्षण व अन्य सहयोग प्रदान कर स्वरोजगार के लिए भी सक्षम बनाना है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में श्रमिकों को सामाजिक एवं जीवन सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रहीं हैं। इस क्रम में पंजीकृत श्रमिक की दुर्घटना में मृत्यु हो जाने की स्थिति में ₹5 लाख, सामान्य मृत्यु की स्थिति में ₹2 लाख की सहायता दी जा रही है। यही नहीं, अपंजीकृत असंगठित श्रमिकों के लिए भी सरकार ने सुरक्षा का दायरा बढ़ाया है। दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण विकलांगता की स्थिति में ₹2 लाख, जबकि आंशिक विकलांगता की स्थिति में ₹1 लाख की सहायता दी जा रही है। इसके अलावा विकलांगता की स्थिति में ₹2 लाख से ₹4 लाख तक की सहायता का प्रावधान किया गया है। वहीं कार्यस्थल पर मृत्यु हो जाने की स्थिति में ₹5 लाख की सहायता और अंतिम संस्कार हेतु ₹25,000 रुपये देने का प्रावधान किया गया है। योगी सरकार की ओर से श्रमिक परिवार के सदस्यों के सामाजिक कल्याण की दिशा में भी कई योजनाएं लागू की गई हैं। इनके तहत पंजीकृत श्रमिकों की पुत्रियों के विवाह हेतु ₹55,000 तक की सहायता, अंतरजातीय विवाह पर ₹61,000 की सहायता देने का प्रावधान है। वहीं मातृत्व, शिशु एवं बालिका सहायता योजना के अंतर्गत 6 लाख से अधिक लाभार्थियों को सहायता प्रदान की जा चुकी है। वहीं, बाल श्रमिक विद्या योजना के तहत निराश्रित और गंभीर रूप से बीमार कामकाजी बच्चों को प्रति माह ₹1,000 (बालक) और ₹1,200 (बालिका) की सहायता दी जा रही है। साथ ही श्रमिकों के बच्चों को निःशुल्क, गुणवत्तापूर्ण और उद्देश्यपरक शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी 18 मंडलों में अटल आवासीय विद्यालय स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम श्रमिक तकनीकी शिक्षा सहायता योजना के माध्यम से उन्हें तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश के श्रमिकों को आवासीय सुविधा और जीवन स्तर में सुधार के लिए भी पिछले 9 वर्षों में कई ठोस कदम उठाए गए हैं। इसके तहत सफाई कर्मियों को निःशुल्क आवास देने की प्रक्रिया जारी है, जबकि निर्माण श्रमिकों के लिए आवास सहायता योजना के तहत बैंकों और सहकारी संस्थाओं के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही श्रमिकों के लिए श्रम अड्डों के निर्माण का कार्य भी प्रगति पर है। वहीं पीएम श्रमयोगी मानधन योजना के तहत उत्तर प्रदेश में 7,04,865  श्रमिकों का पंजीकरण किया जा चुका है, जबकि प्रधानमंत्री लघु व्यापारी मानधन योजना के तहत 16,457 छोटे व्यापारियों को जोड़ा गया है। अटल पेंशन योजना के माध्यम से प्रदेश में अब तक 93 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त 7 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिकों को राशन कार्ड और फैमिली आईडी प्रदान कर उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया गया है। यही नहीं, योगी सरकार के 9 वर्षों में श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने, उन्हें आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने तथा रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए व्यापक और प्रभावी कदम उठाए गए हैं। इन प्रयासों ने न केवल श्रमिकों को सशक्त बनाया है, बल्कि प्रदेश के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

योगी सरकार के सहयोग से ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ का संकल्प साकार कर रहे युवा उद्यमी

सरकारी योजना से गांव की बेटी बनी सफल उद्यमी, सोमा ने गुड़ उद्योग से बदली तकदीर योगी सरकार के सहयोग से ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ का संकल्प साकार कर रहे युवा उद्यमी   25 लाख के ऋण से सोमा ने खड़ा किया उद्यम, हर महीने हो रही 80 से 90 हजार रुपए की कमाई यूपी के अलावा बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से मिल रहे मिल रहे ऑर्डर लखनऊ  योगी सरकार में महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश और नारी स्वावलंबन का सपना अब सिर्फ नारा नहीं, बल्कि हकीकत बनता जा रहा है। योगी सरकार की नीतियों का उद्देश्य युवाओं और महिलाओं को ‘रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला’ बनाना है। सोमा गुप्ता की कहानी सरकार के इसी विजन को साकार करती है। सरकारी योजना का लाभ लेकर लखीमपुर-खीरी जिले के ग्राम सिंगहाखुर्द की रहने वाली सोमा आज दूसरों को रोजगार दे रहीं हैं। सोमा गुप्ता ने उत्‍तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना’ के तहत वर्ष 2022 में 25 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर गुड़ कोल्हू उद्योग की शुरुआत की। आज उनका यह उद्योग न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहा है, बल्कि क्षेत्र के कई लोगों को रोजगार भी दे रहा है। सीजन के दौरान एक दिन में इसमें लगभग 18 क्विंटल गुड़ का उत्पादन किया जाता है। इसके लिए 6 एकड़ में स्वयं गन्ने की खेती करतीं हैं और अन्य किसानों से भी गन्ना खरीदतीं हैं। उनका उत्पाद उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार,  झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी सप्लाई हो रहा है। यह न केवल उनके व्यवसाय की सफलता को दर्शाता है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर बने उत्पादों की बढ़ती मांग को भी साबित करता है। हर महीने 80 से 90 हजार रुपये की आय अर्जित कर सोमा आज आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं। ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना’ महत्वपूर्ण स्वरोजगार की योजना है। उत्तर प्रदेश में इसका संचालन तीन एजेन्सियों क्रमशः जिला उद्योग केन्द्र, खादी और ग्रामोद्योग आयोग एवं उ0प्र0 खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा किया जाता है। यह योजना ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करके रोजगार पैदा करती है। इस योजना के तहत विनिर्माण क्षेत्र के लिए 50 लाख रुपये और सेवा क्षेत्र के लिए 20 लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर सरकार सब्सिडी भी प्रदान करती है।

यूपी में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का ब्लॉक स्तर तक होगा व्यापक कायाकल्प

योगी सरकार 142 बीपीएचयू के जरिए उपलब्ध कराएगी आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं यूपी में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का ब्लॉक स्तर तक होगा व्यापक कायाकल्प हर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट को करीब 50 लाख रुपए से बनाया जाएगा हाईटेक-योगी  इंचार्ज, रजिस्ट्रेशन रूम से लेकर वेटिंग रूम और सेंट्रल इंटीग्रेटेड लैब बनाई जाएंगी पीएचसी और सीएचसी के अंदर कराया जाएगा निर्माण लखनऊ  प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को ब्लॉक स्तर तक मजबूत और आधुनिक बनाने की तैयारी तेज हो गई है। योगी सरकार राज्य के विभिन्न ब्लॉकों में 142 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (बीपीएचयू) स्थापित करने जा रही है। इन यूनिटों के जरिये ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जांच, पंजीकरण और प्राथमिक उपचार की बेहतर सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी। हर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट को करीब 50 लाख रुपये की लागत से हाईटेक बनाया जाएगा। इनमें इंचार्ज कक्ष, रजिस्ट्रेशन रूम, वेटिंग रूम, सेंट्रल इंटीग्रेटेड लैब समेत कई आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। इनका निर्माण मौजूदा पीएचसी और सीएचसी के भीतर ही कराया जाएगा, ताकि पहले से उपलब्ध स्वास्थ्य ढांचे को और अधिक सक्षम बनाया जा सके। ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान होगी पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि योगी सरकार की योजना केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इन इकाइयों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इससे ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान होगी और मरीजों को जिला अस्पतालों पर निर्भरता कम रहेगी। सुविधाएं बढ़ने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मरीजों को अब छोटी-बड़ी जांच और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। ब्लॉक स्तर पर सुविधाएं बढ़ने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में भी सुधार आएगा। गांव के करीब मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि बीपीएचयू मॉडल के लागू होने के बाद ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य ढांचा मजबूत होगा। इससे मरीजों को पंजीकरण से जांच तक की कई सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध हो सकेंगी। जिलाधिकारी की समग्र देख-रेख में होगा काम जनपद स्तर पर जिला पंचायतों द्वारा स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय कर निर्माण के लिए समस्त कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप जिलाधिकारी की समग्र देख-रेख में किए जाएंगे। ब्लॉक और ग्राम पंचायतों को उनके क्षेत्राधिकार में आने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की इन घटकों की योजना बनाने एवं निगरानी में शामिल किया जाएगा।

एमपी सरकार ने 71210 किलोमीटर सड़कों का डिजिटल सर्वेक्षण पूरा किया, बड़ी पहल

भोपाल   मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग ने अधोसंरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहल करते हुए “लोक निर्माण सर्वेक्षण एप” और GIS आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान के माध्यम से कार्य प्रणाली में नवाचार का नया अध्याय जोड़ा है। विभाग ने यह महसूस किया कि सड़कों, पुलों और भवनों से संबंधित पूर्ण एवं प्रमाणिक डेटा के अभाव में योजनाओं का निर्माण अक्सर अनुमान के आधार पर करना पड़ता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विभाग ने यह संकल्प लिया कि सुधार की शुरुआत प्रमाणिक डेटा से की जाएगी। “आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है” इस कहावत को चरितार्थ करते हुए “लोक निर्माण सर्वेक्षण एप” का विकास किया गया, जिससे विभाग की परिसंपत्तियों का वैज्ञानिक और डिजिटल सर्वे संभव हो सका। इसके अंतर्गत अब तक राज्य की 71210 किलोमीटर सड़कों का डिजिटल सर्वेक्षण कराया जा चुका है। ऐप के माध्यम से प्रदेश में तीन दिवसीय विशेष सड़क सर्वेक्षण अभियान संचालित किया गया, जिसमें विभाग के अभियंता स्वयं मैदान में उतरकर अपने-अपने क्षेत्रों की सड़कों का विस्तृत सर्वेक्षण करने में जुटे। सर्वेक्षण के दौरान सड़क की चौड़ाई, पेवमेंट का प्रकार, राइट ऑफ वे (ROW), शोल्डर तथा सड़क की वर्तमान स्थिति सहित विभिन्न तकनीकी मापदंडों का डिजिटल रूप से डेटा संकलित किया गया। 2975 शासकीय भवनों तथा 1426 पुलों का सर्वे भी किया व्यापक सर्वेक्षण में अब तक 71,210 किलोमीटर से अधिक सड़कों का डिजिटल सर्वेक्षण किया जा चुका है। इसके साथ ही 2975 शासकीय भवनों तथा 1426 पुलों का सर्वे भी किया गया है। इस प्रक्रिया के दौरान नगरीय निकाय, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना तथा अन्य एजेंसियों की सड़कों के साथ लोक निर्माण विभाग की सड़कों की सीमाएं भी स्पष्ट रूप से चिन्हित की गई हैं। इससे विभाग के पास अपनी प्रत्येक परिसंपत्ति का अद्यतन, डिजिटल और प्रमाणिक डेटा उपलब्ध हो गया है, जिसके आधार पर अब निर्णय अनुमान के बजाय तथ्यात्मक आधार पर लिए जा सकेंगे। प्रमाणिक GIS आधारित डेटा उपलब्ध होने के बाद विभाग ने समग्र रोड नेटवर्क प्लानिंग की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। पहले योजनाएं पारंपरिक पद्धति से कागजों पर तैयार की जाती थीं, किंतु अब पहली बार भास्कराचार्य संस्थान के तकनीकी सहयोग से विभाग के इंजीनियरों द्वारा प्रधानमंत्री गति शक्ति पोर्टल पर GIS आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इसके लिए एक विशेष “मास्टर प्लान मॉड्यूल” विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की कनेक्टिविटी का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सकता है। इस मॉड्यूल के जरिए यह स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है कि किन पर्यटन स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों और खनन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की आवश्यकता है। लोक निर्माण विभाग की यह पहल केवल एक योजना नहीं बल्कि प्रदेश के अधोसंरचना विकास के लिए तकनीक आधारित दीर्घकालिक दृष्टि का परिचायक है। GIS, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से भविष्य में सड़क निर्माण और उन्नयन की योजनाएं अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और प्रभावी बनेंगी। यह पहल प्रदेश में तकनीक आधारित सुशासन और सुदृढ़ अधोसंरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रही है।

चालान जमा करने का तरीका बदला, 1 अप्रैल से खत्म होगा मैनुअल सिस्टम

रायपुर  राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार राज्य में 1 अप्रैल से मैनुअल सिस्टम से चालान जमा करने का काम पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा. जिला कोषालयों में केवल ऑनलाइन ही चालान जमा होंगे. नई व्यवस्था की अफसरों और कर्मचारियों को जानकारी देने के लिए सोमवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. इसमें जिला कोषालय अधिकारी गजानन पटेल ने आहरण संवितरण अधिकारियों, स्टांप वेंडर एवं बैंक प्रतिनिधियों को ओटीसी (ओवर द काउंटर ) ऑनलाइन चालान जमा करने की विस्तार से जानकारी दी. शासकीय कन्या पॉलीटेक्निक बैरनबाजार में आयोजित जिला स्तरीय कार्यशाला में पटेल ने बताया कि मैनुअल सिस्टम से चालान जमा करने में जो गलती होने की संभावना होती थी, वह ओटीसी ऑनलाइन चालान से नहीं होगी. इसमें सही मद का चयन करना सुविधाजनक होगा, जिससे बैंक एवं कोषालय में पारदर्शिता बढ़ेगी. कार्यशाला में बताया गया कि संचालनालय कोष एवं लेखा द्वारा नए वित्तीय साल में 1 अप्रैल से मैनुअल चालान सिस्टम को खत्म कर ऑनलाइन चालान जमा करने की सुविधा शुरू की जा रही है. ऑनलाइन चालान ई-कोष ऑनलाइन पोर्टल के अंतर्गत ई-चालान मॉड्यूल से जमा किया जा सकता है. इस प्रक्रिया में चालान का डाटा सीधे बैंक को ऑनलाइन ट्रांसफर हो जाएगा.

यमुनानगर जेल में कैदी बना रहे फर्नीचर, फ्लिपकार्ट पर बिक्री से बढ़ेगी आमदनी

 यमुनानगर जिला जेल की फैक्ट्री में बने उत्पाद अब ऑनलाइन बिक सकेंगे। जेल प्रशासन इसके लिए ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट से एमओयू साइन करेगा। इसके लिए तैयारियां चल रही हैं। ऑनलाइन पोर्टल पर आने से आमदनी भी बढेगी। हर किसी की पहुंच में यह उत्पाद होंगे। जेल में फर्नीचर के अलावा एलोवेरा जूस, आंवला कैंडी, आंवला जूस, गुलाब जल और एलोवेरा जूस तैयार किया जा रहा है। कपालमोचन मेला, गीता जयंती समारोह व सूरजकुंड में क्राफ्ट मेले में इन उत्पादों की काफी मांग रहती है। वहां पर लगे स्टाल से लोग खरीददारी करते हैं। जेल में तैयार किए जाने वाले फर्नीचरों में सिंगल बेड, सोफा, डबल बेड, टेबल, कुर्सियां और महाराजा कुर्सियां तैयार की जाती है। इसके लिए लकड़ी वन विभाग से खरीदी जाती है। शुद्ध शीशम की लकड़ी से यह फर्नीचर तैयार किया जाता है। जिसकी मजबूती भी बाहर बिकने वाले उत्पाद से अधिक रहती है। यही कारण है कि कोर्ट परिसर, सरकारी कार्यालयों, विश्वविद्यालयों व स्कूलों के लिए जेल में तैयार फर्नीचर खरीदा जाता है। इन उत्पादों का दाम जेल प्रबंधन की ओर से निर्धारित किया जाता है। इसके लिए न तो किसी कोटेशन की जरूरत पड़ती है और न ही कोई अन्य प्रक्रिया होती है। अब जेल प्रबंधन के पेट्रोल पंप पर ही शोरूम भी बनाया गया है। जहां पर यह उत्पाद रखे हैं। ऐसे में लोग जेल के बाहर ही इन उत्पादों को देख सकते हैं और खरीद सकते हैं। शोरूम में फर्नीचर के अलावा अन्य उत्पाद भी रखे हुए हैं। एक वर्ष में बेचे 56 लाख रुपये के उत्पाद जेल प्रशासन ने वर्ष 2025 में 56 लाख रुपये के उत्पाद बेचे। इनमें फर्नीचर से लेकर जूस, कैंडी, गुलाब जल सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं। पिछले दिनों सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में लगभग 15 लाख रुपये के उत्पाद बेचे गए। जेल की फैक्ट्री में फिलहाल 110 कैदी उत्पाद तैयार करने में लगे हुए हैं। फैक्ट्री में अधिकतर कैदी ही कार्य करते हैं लेकिन उन बंदियों को भी लगा दिया जाता है जो पहले से फर्नीचर का कार्य जानते हैं और अपनी मर्जी से काम करना चाहते हैं। जिला जेल में बंद हैं 1150 कैदी जिला जेल में इस समय लगभग साढ़े 1100 कैदी हैं। इनमें लगभग 50 महिला कैदी व बंदी हैं। जेल में हार्डकोर अपराधियों के साथ-साथ जम्मू कश्मीर के आतंकियों को भी रखा गया है। इसके लिए सीआरपीएफ का अलग से पहरा लगाया गया है। हालांकि इनकी संख्या घटती बढ़ती रहती है। पिछले दिनों जेल से कुछ बंदियों की अदला बदली भी हुई है। कुछ को दूसरी जेलों में ट्रांसफर किया गया है। वहीं दूसरी जेलों से कुछ बंदियों को यहां पर भेजा गया है।     फ्लिपकार्ट के साथ जेल प्रबंधन की बातचीत चल रही है। जेल में बने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए एमओयू साइन किया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। – सतेंद्र सिंह, एसपी जेल।  

भोपाल के आदमपुर खंती में कचरे के पहाड़ को हटाकर बनेगा हाईवे, आयोध्या बायपास पर होगा उपयोग

भोपाल आदमपुर खंती में वर्षों से ठोस कचरा का ढेर जमा है। यह भोपाल शहर के लिए मुसीबत है। अब कचरे का यह ढेर विकास का एक मजबूत आधार बनता जा रहा है। इसे लेकर एनएचआई ने एक प्रभावशाली पहल की है। साथ ही इस कचरे से मुक्ति के लिए स्थायी समाधान ढूंढा है। इस कचरे का इस्तेमाल अयोध्या बायपास के लगभग 16 किमी लंबे चौड़ीकरण कार्य में उपयोग किया जारहा है। साथ ही भोपाल–रायसेन से सागर तक NH-146 के निर्माण कार्यों में भी ऐसे पुनर्चक्रित मटेरियल के उपयोग को शामिल किया जा रहा है। इससे हरित और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा। ऐसे हो रहा है इस्तेमाल इस पहल के अंतर्गत आदमपुर खंती से प्राप्त ठोस कचरे का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जा रहा है, जिसमें लगभग 10 लाख मीट्रिक टन सालिड वेस्ट के उपयोग का प्रावधान है। इसके साथ ही, कचरे के उपयोग से पूर्व उसके सैंपल लेकर लैब परीक्षण भी कराए गए हैं, ताकि निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता, सुरक्षा और तकनीकी मानकों का पूर्णतः पालन सुनिश्चित किया जा सके। बदबू और प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति आदमपुर खंती के आसपास रहने वाले लोगों को वर्षों से बदबू, प्रदूषण, धुएं और आग लगने जैसी समस्याओं से परेशान हैं। कचरे के निस्तारण से लोगों को राहत मिलेगी। साथ ही कचरे से उत्पन्न स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी कम होंगे और आसपास का वातावरण अधिक स्वच्छ और सुरक्षित बन सकेगा। इस पहल के जरिए न केवल सालों से जमा कचरे के बड़े हिस्से को खत्म करने में मदद मिलेगी, बल्कि एक मिसाल भी पेश होगी। सड़क निर्माण में कचरे का उपयोग कैसे होता है? ऐसे खत्म होगा कचरे का ढेर कचरे की छंटाई- आदमपुर खंती से निकाले गए कचरे को अलग-अलग श्रेणियों-प्लास्टिक, धातु, कांच, जैविक और इनर्ट (मिट्टी/मलबा) में विभाजित किया जाता है, ताकि केवल उपयोगी सामग्री को आगे प्रोसेसिंग के लिए चुना जा सके। प्रोसेसिंग और ट्रीटमेंट- छांटे गए कचरे को प्रोसेस किया जाता है। प्लास्टिक वेस्ट को साफ कर छोटे-छोटे टुकड़ों में बदला जाता है, जबकि इनर्ट कचरे को छानकर निर्माण के लिए उपयुक्त बनाया जाता है। अनुपयोगी और हानिकारक तत्वों को अलग कर सुरक्षित रूप से निस्तारित किया जाता है। बिटुमिनस मिक्स तैयार करना- प्रोसेस्ड प्लास्टिक को गर्म बिटुमेन में मिलाकर मजबूत बिटुमिनस मिक्स तैयार किया जाता है। इससे सड़क की बाइंडिंग क्षमता बढ़ती है, दरारें कम होती हैं और पानी का असर कम होता है, जिससे सड़क अधिक टिकाऊ बनती है। सड़क की परतों में उपयोग- इनर्ट कचरा सड़क की निचली परत में उपयोग किया जाता है, जबकि बिटुमेन-प्लास्टिक मिश्रण को ऊपरी परत में बिछाया जाता है। इससे सड़क की लोड-बेयरिंग क्षमता और स्थायित्व दोनों बढ़ते हैं। गुणवत्ता जांच और निगरानी- निर्माण के प्रत्येक चरण में मटेरियल और कार्य की गुणवत्ता की जांच की जाती है, ताकि सड़क सुरक्षा और दीर्घकालिक उपयोग के सभी मानकों को सुनिश्चित किया जा सके। 3R सिद्धांत पर आधारित सस्टेनेबल पहल इस पूरी पहल के तहत ‘3R – रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल’ की अवधारणा को अपनाकर कचरे का निरंतर और वैज्ञानिक निस्तारण किया जा रहा है, साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि नया कचरा न्यूनतम उत्पन्न हो। हर दिन निकलने वाले विभिन्न प्रकार के कचरे के प्रभावी प्रबंधन के लिए कई अभिनव प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें ‘प्लास्टिक वेस्ट टू रोड कंस्ट्रक्शन’ एक सफल और प्रभावी मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। पर्यावरण और विकास का संतुलन इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक सहित सभी शहरी ठोस कचरे का 100% वैज्ञानिक प्रसंस्करण सुनिश्चित करना है, ताकि लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा को शून्य के करीब लाया जा सके। स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के अंतर्गत ‘प्लास्टिक वेस्ट से सड़क निर्माण’ की तकनीक स्वच्छता को टिकाऊ बुनियादी ढांचे से जोड़ते हुए सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

पंजाब में कैंसर से महिलाएं प्रभावित, 4 साल में 13,299 मौतें, कारण क्या है?

 अमृतसर पंजाब में महिलाओं के बीच कैंसर रोग गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच राज्य में कुल 13,299 महिलाओं की मौत विभिन्न प्रकार के कैंसर के कारण हुई है। इनमें सबसे अधिक 7,186 महिलाओं की मृत्यु स्तन कैंसर से हुई हैं। आंकड़े बताते हैं कि स्तन कैंसर के बाद सर्विकल कैंसर से सर्वाधिक मौतें हुई हैं, जिनकी संख्या 3,502 है। इसके अतिरिक्त ओवरी यानी अंडाश्य और गर्भाशय कैंसर से 2611 महिलाओं की जान गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि महिलाओं से जुड़े कैंसर के प्रकार पंजाब में तेजी से फैल रहे हैं और समय रहते प्रभावी कदम न उठाए गए तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में प्रतिदिन औसतन आठ महिलाओं की मौत कैंसर के कारण हो रही है। वहीं, कैंसर के मामलों में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में जहां कैंसर के 39,251 मामले सामने आए थे, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 43,196 हो गई है। कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. सुमित शर्मा एवं अमृतसर के वरिष्ठ सर्जन डॉ. मनदीप सिंह के अनुसार इस बढ़ती समस्या का एक बड़ा कारण समय पर जांच न करवाना और महिलाओं में जागरूकता की कमी है। 65 प्रतिशत मामलों में कैंसर का पता तब चलता है जब बीमारी काफी बढ़ जाती है। देरी होने से उपचार और जटिल हो जाता है और मरीज के बचने की संभावना कम होती है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाएं अक्सर सामाजिक झिझक, डर या जानकारी के अभाव के कारण जांच करवाने से बचती हैं। कई बार शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे बीमारी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेती है। कैंसर का बड़ा कारण पर्यावरण को भी माना जा रहा है। वैसे पर्यावरण प्रदूषित करने का कसूरवार भी इंसान ही हैं। प्रदूषित पानी, औद्योगिक कचरा, और खेतों में रासायनों व कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। लंबे समय तक इन तत्वों के संपर्क में रहने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। डा. मनदीप के अनुसार बदलती जीवनशैली भी एक बड़ा कारण बनकर उभरी है। शारीरिक गतिविधियों की कमी, फास्ट फूड का बढ़ता चलन, मोटापा और तनाव जैसी समस्याएं महिलाओं के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। पहले जहां कैंसर अधिकतर बुजुर्ग महिलाओं में देखा जाता था, वहीं अब 50 से 56 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यदि समय रहते जांच कर ली जाए, तो स्तन और सर्विकल कैंसर जैसे रोगों का सफलतापूर्वक इलाज संभव है।

अंबिकापुर से दिल्ली के लिए 30 मार्च से डायरेक्ट फ्लाइट, एलायंस एयर चलाएगी 72 सीटर विमान

अंबिकापुर  छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से दिल्ली के लिए हवाई सेवा 30 मार्च से शुरू होगी। एलायंस एयर मां महामाया एयरपोर्ट से हफ्ते में 2 दिन सोमवार और बुधवार को फ्लाइट चलाएगी। यह उड़ान बिलासपुर होते हुए दिल्ली पहुंचेगी। एलाएंस एयर ने अपने वेबसाइट पर इसकी बुकिंग भी शुरू कर दी है। एलायंस एयर ने शुरू की जा रही फ्लाइट का शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है। 30 मार्च को अंबिकापुर के मां महामाया एयरपोर्ट से फ्लाइट दोपहर 12 बजे रवाना होगी, जो 2:30 बजे दिल्ली पहुंचेगी। एलायंस एयर 72 सीटर ATR विमान का संचालन करेगी। सप्ताह में दो दिन सोमवार और बुधवार को चलेगी। वहीं बिलासपुर के लिए शुक्रवार को भी फ्लाइट सेवा मिलेगी। एलायंस एयर की ओर से 30 मार्च से ही बिलासपुर-दिल्ली फ्लाइट के शेड्यूल में बदलाव किया गया है। पहले यह सेवा मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को चलती थी। 8 महीने बाद से बंद है हवाई सेवा अंबिकापुर के मां महामाया एयरपोर्ट से दिसंबर 2024 में हवाई सेवा की शुरुआत हुई थी। उड़ान 4.2 योजना के तहत फ्लाई बिग कंपनी ने मां महामाया एयरपोर्ट दरिमा से रायपुर और बिलासपुर के लिए 19 सीटर विमान सेवा शुरू की थी। शुरुआती दिनों में अनियमित उड़ान के कारण यह सेवा केवल छह महीने तक ही चल सकी। पिछले 6 महीने से अधिक समय से इसका संचालन पूरी तरह बंद है। 6000 तक हो सकता है किराया 2 साल पहले एलायंस एयर ने अंबिकापुर और बिलासपुर एयरपोर्ट का निरीक्षण किया था। एलायंस एयर ने अपनी वेबसाइट में अंबिकापुर एयरपोर्ट का नाम जोड़ दिया है और फ्लाइट सर्च भी हो रही है। हालांकि अभी किराया घोषित नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि बेस फेयर 6000 रुपए से शुरू हो सकता है। बिलासपुर-दिल्ली मार्ग पर सामान्यतः बेस फेयर 4000 रुपए से अधिक रहता है, जिसमें बुकिंग नियमों के अनुसार किराया कम-ज्यादा होता रहता है। एलायंस एयर ने सोमवार एवं बुधवार को बिलासपुर से चलने वाली नान स्टाप फ्लाइट को भी री-शेड्यूल किया है। जानिए एलायंस एयर के बारे में एलायंस एयर देश की प्रमुख घरेलू विमानन कंपनियों में से एक है। पहले यह एयर इंडिया के स्वामित्व में थी। एयर इंडिया के विनिवेश के बाद यह भारत सरकार की स्वतंत्र व्यावसायिक इकाई के रूप में कार्य कर रही है। वर्तमान में एलायंस एयर प्रतिदिन 137 घरेलू उड़ानें संचालित करती है और 57 शहरों को जोड़ती है। कंपनी रायपुर से हैदराबाद और जगदलपुर के लिए भी हवाई सेवा दे रही है।

चीतों के पुनर्वास के लिये सॉफ्ट रिलीज बोमा का करेंगे भूमि-पूजन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने जन्म-दिन पर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में आज बामनेर नदी में एक दर्जन कछुओं को रिलीज करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव टाइगर रिजर्व में चीतों के पुनर्वास के लिये सॉफ्ट रिलीज बोमा का भूमि-पूजन भी करेंगे। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, जो मध्यप्रदेश के 3 जिलों सागर, दमोह और नरसिंहपुर के 72 ग्रामों को जोड़ते हुए कुल क्षेत्रफल 2339 वर्ग किलोमीटर का आकार लिये हुए है। मध्यप्रदेश का यह 7वाँ और भारत का 54वाँ टाइगर रिजर्व है। वर्ष 2023 में इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। टाइगर रिजर्व में वर्तमान में 32 टाइगर मौजूद हैं। इस अभयारण्य को मुख्य रूप से भेड़ियों की भूमि माना जाता है। यहाँ पर सर्वाधिक भेड़िये पाये जाते हैं। टाइगर रिजर्व में चीतों के अनुकूल भूमि उपलब्ध है। इस प्रकार की भूमि दक्षिण अफ्रीका में पायी जाती है। शीघ्र ही कूनो अभयारण्य से चीतों को लाकर यहाँ बसाया जायेगा। अभयारण्य में चिड़ियाँ की 240 प्रजातियाँ पायी जाती हैं, जो आकर्षण का केन्द्र बनी हुई हैं। टाइगर रिजर्व में विभिन्न प्रजाति के पशु-पक्षी पाये जाते हैं, जिसमें टाइगर, पैंथर, भेड़िया, भालू, सियार, लकड़बग्घा, लोमड़ी, सुअर, नीलगाय, जंगली सुअर, चौसिंगा, काला हिरण, चिंकारा, कछुआ और मगरमच्छ सहित पशु-पक्षी मौजूद हैं। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में पर्यटन के के साथ रोजगार की अपार संभावनाएँ हैं।