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राजस्थान में अब 4 तरह से होगा कचरे का पृथक्करण, डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी जवाबदेही

जयपुर शहरों की स्वच्छता अब केवल कचरे के निस्तारण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कचरे को संसाधन में परिवर्तित करने और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ेगी। इसी उद्देश्य से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रावधानों एवं उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शुक्रवार को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के सहयोग से संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के निदेशक अनुभव बैरवा ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों की जानकारी को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बेहतर कचरा प्रबंधन स्वच्छ एवं टिकाऊ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वहीं राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के मुख्य पर्यावरण अभियंता प्रेमालाल ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रमुख प्रावधानों, उनके क्रियान्वयन तथा आमजन, स्थानीय निकायों एवं थोक अपशिष्ट उत्पादकों की भूमिका के संबंध में जानकारी देते हुए मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला । चार-धारा पृथक्करण बनेगा प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन की आधारशिला इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता भुवनेश माथुर ने बताया कि 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी नए नियमों में स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण को विशेष महत्व दिया गया है। इसके तहत गीले कचरे, सूखे कचरे, स्वच्छता संबंधी कचरे तथा विशेष/घरेलू खतरनाक कचरे को अलग-अलग एकत्रित एवं संग्रहित करने पर जोर दिया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल कचरा एकत्र करना नहीं, बल्कि स्रोत पर ही पृथक्करण सुनिश्चित करते हुए पुनर्चक्रण एवं अपशिष्ट प्रसंस्करण की पूरी श्रृंखला को अधिक प्रभावी बनाना है। थोक अपशिष्ट उत्पादकों की जिम्मेदारी होगी और स्पष्ट स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग के मुख्य अभियंता अरुण व्यास ने बताया कि नए नियमों में थोक अपशिष्ट उत्पादकों के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। निर्धारित सीमा के अंतर्गत आने वाले बड़े अपशिष्ट उत्पादकों—जैसे बड़े आवासीय परिसर, होटल, संस्थान एवं अन्य प्रतिष्ठानों—को अपने परिसर में ही जैविक कचरे के प्रसंस्करण के लिए कम्पोस्टिंग, जैव-मीथेनीकरण अथवा अन्य अनुमोदित तकनीकों का उपयोग करना होगा। साथ ही पुनर्चक्रण योग्य एवं खतरनाक अपशिष्ट का अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना होगा। डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही अरुण व्यास ने बताया कि नए नियमों के तहत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन निगरानी एवं अनुश्रवण व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके माध्यम से कचरे के संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण एवं अंतिम निस्तारण की निगरानी को बढ़ावा मिलेगा तथा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। कचरे से संसाधन और भराव स्थलों पर निर्भरता में कमी नए नियमों में सामग्री पुनर्प्राप्ति केंद्रों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इनके माध्यम से सूखे कचरे से पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की अधिकतम पुनर्प्राप्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। वहीं कचरा भराव स्थलों पर निर्भरता कम करने के लिए उद्योगों में अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया है। पुराने विरासत अपशिष्ट स्थलों के वैज्ञानिक उपचार एवं सुधार पर भी विशेष बल दिया गया है। इसके साथ ही अपशिष्ट प्रसंस्करण, कम्पोस्टिंग एवं जैव-मीथेनीकरण जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से कार्बन क्रेडिट अर्जित करने की संभावनाओं का लाभ उठाने की दिशा में भी प्रोत्साहन दिया गया है। ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ से मजबूत होगी जवाबदेही नियमों में ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ को भी शामिल किया गया है। इसके तहत अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाए जाने का प्रावधान है। इससे नियमों के अनुपालन को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। स्थानीय निकायों की भूमिका अहम नए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन में शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। अपशिष्ट प्रसंस्करण, कम्पोस्टिंग, जैव-मीथेनीकरण तथा मीथेन उत्सर्जन में कमी के माध्यम से स्वच्छ, स्वस्थ एवं टिकाऊ शहरों की दिशा में कार्य करने पर जोर दिया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। स्थानीय निकायों, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, राज्य सरकार, उद्योगों तथा आम नागरिकों के बीच समन्वय एवं सक्रिय सहभागिता इसके सफल क्रियान्वयन की आधारशिला होगी। राजस्थान में क्रियान्वयन की दिशा में उठाए गए कदम राजस्थान में नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अब तक की गई कार्यवाही के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि • राज्य स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया गया है। • 29 मई, 2026 को क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें शहरी स्थानीय निकायों, जिला प्रशासन एवं अन्य संबंधित विभागों के लगभग 600 प्रतिभागियों ने भाग लिया। • सभी शहरी स्थानीय निकायों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के केंद्रीकृत पोर्टल पर थोक अपशिष्ट उत्पादकों का अंतरिम पंजीकरण प्रारंभ किया गया है। • थोक उपभोक्ताओं एवं अपशिष्ट उत्पादकों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रावधानों के अनुरूप शर्तों के अनुपालन हेतु रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण के साथ भी समन्वय किया जा रहा है। अपशिष्ट से संसाधन’ की ओर बढ़ता राजस्थान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 का प्रभावी क्रियान्वयन शहरी स्वच्छता को नई दिशा देने के साथ-साथ प्रदूषण में कमी, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में सहायक होगा। नए नियमों का मूल संदेश यही है कि कचरा केवल निस्तारण की वस्तु नहीं, बल्कि पुनर्चक्रण, पुनःउपयोग और संसाधन पुनर्प्राप्ति के माध्यम से आर्थिक एवं पर्यावरणीय मूल्य रखने वाला संसाधन है। राजस्थान में इन प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग, प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो, स्थानीय निकायों, उद्योगों और नागरिकों के समन्वित प्रयासों से स्वच्छ, स्वस्थ और अधिक टिकाऊ शहरी व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।  

खेजड़ी के उत्पादों से संरक्षण तक, MDSU में बनेगा खास रिसर्च सेंटर

अजमेर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में जल्द ही खेजड़ी के उत्पाद और उपयोगिता पर जानकारी और शोध की शुरुआत होगी। कैंपस में पर्यावरण विज्ञान विभाग लघु शोध केंद्र तैयार करने में जुटा है। इसमें शोधार्थी, शिक्षक और विद्यार्थी काम कर सकेंगे। खेजड़ी या शमी एक वृक्ष है, जो अजमेर सहित जोधपुर, बीकानेर, पाली, बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर, सीकर, झुंझुनूं और अन्य क्षेत्रों में पाया जाता है। इस वृक्ष की फलियों और पत्तियों में भरपूर मात्रा में विटामिन और प्रोटीन पाया जाता है। इसकी पत्तियां पशुओं के चारे और औषधीय उपयोग के लिए उपयोगी हैं। इसकी फलियों से सांगरी तैयार की जाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस वृक्ष की आयु 5000 वर्ष मानी जाती है। रेगिस्तान में जब जानवरों के लिए धूप से बचने का कोई सहारा नहीं होता, तब यह पेड़ उन्हें छाया देता है। विश्वविद्यालय ने समझी उपयोगिता विश्वविद्यालय में महर्षि चरक भवन के पीछे खेजड़ी वाटिका विकसित की गई है। इसमें खेजड़ी के 100 पौधे लगाए गए हैं। ये पौधे काफी बड़े हो चुके हैं। जल्द ही विभाग खाली पड़ी अन्य जमीन पर खेजड़ी के पौधे लगाएगा। तैयार हो रहा लघु शोध केंद्र पर्यावरण विज्ञान विभाग में लघु शोध केंद्र तैयार हो रहा है। इसमें खेजड़ी से निर्मित गोंद, केर-सांगरी की सब्जी-आचार, खोखा (सूखा फल), मींझर (फूल) और अन्य उत्पाद रखे जाएंगे। खेजड़ी को बचाने के लिए अमृता देवी के योगदान और इसकी उपयोगिता से जुड़ी जानकारी भी यहां मिलेगी। प्रोजेक्टर लगाया जाएगा। भूगोल, बॉटनी, पर्यावरण विज्ञान, माइक्रोबायोलॉजी और अन्य विषयों के विद्यार्थी, शोधार्थी और शिक्षक यहां शोध कर सकेंगे। मियावाकी पद्धति का इस्तेमाल खेजड़ी को लगाने के लिए मियावाकी पद्धति का इस्तेमाल किया गया है। पौधरोपण की यह विधि छोटे क्षेत्रों में घने, देशी और आत्मनिर्भर जंगल विकसित करने में मदद करती है। इस विधि में पारंपरिक वनीकरण की तुलना में पौधे 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं। ये 30 गुना अधिक घने होते हैं। फैक्ट फाइल     1983 में घोषित किया गया राज्य वृक्ष     15 से ज्यादा जिलों में पाया जाता है खेजड़ी     5 हजार वर्ष मानी जाती है खेजड़ी की आयु     45 प्रतिशत से ज्यादा खेजड़ी वृक्ष खतरे में     1 लाख रुपए जुर्माना है खेजड़ी को काटने पर इनका कहना है… लघु शोध केंद्र तैयार हो रहा है। भविष्य में शोधार्थी, शिक्षक और विद्यार्थी रिसर्च कर सकेंगे। इससे खेजड़ी के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। -प्रो. प्रवीण माथुर, पूर्व पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष, एमडीएस विश्वविद्यालय

बिहान से प्रमिला ने लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी, खेती के साथ सिलाई और मुर्गी पालन बना आय का मजबूत आधार

सेवा की कहानी बिहान से प्रमिला ने लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी, खेती के साथ सिलाई और मुर्गी पालन बना आय का मजबूत आधार स्व-सहायता समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर बढ़ाए आजीविका के साधन गन्ना, मक्का और सब्जी उत्पादन से सालाना करीब 2 लाख रुपये की आय, सिलाई और मुर्गी पालन से 50 हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त आमदनी रायपुर  ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर गांव की महिलाएं अब आजीविका के एक नहीं, बल्कि अनेक साधन अपनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही हैं। सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड की ग्राम पंचायत सिलमा निवासी प्रमिला सिंह ने भी स्व-सहायता समूह से मिले ऋण, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन का लाभ उठाकर खेती के साथ सिलाई और मुर्गी पालन को अपनी आजीविका का आधार बनाया है। अलग-अलग गतिविधियों से हो रही आमदनी ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ाया है। फूल स्व-सहायता समूह से जुड़कर शुरू हुआ बदलाव का सफर प्रमिला सिंह वर्ष 2012 में फूल स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अन्य सदस्यों के माध्यम से शासकीय योजनाओं और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली। आजीविका बढ़ाने के लिए उन्होंने समूह के माध्यम से 50 हजार रुपये का ऋण लिया और खेती के काम को आगे बढ़ाया। दो एकड़ में विविध फसलों की खेती से बढ़ी आमदनी प्रमिला ने एक एकड़ भूमि में गन्ने की खेती तथा एक एकड़ में सब्जी, मक्का और सूरजमुखी की खेती शुरू की। मेहनत और बेहतर कृषि प्रबंधन का परिणाम उन्हें अच्छी आमदनी के रूप में मिला। प्रमिला के अनुसार गन्ने के उत्पादन से उन्हें लगभग एक लाख रुपये तथा मक्का एवं सब्जी उत्पादन से करीब एक लाख रुपये की वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। सिलाई और मुर्गी पालन ने दिया अतिरिक्त आय का सहारा प्रमिला ने अपनी आजीविका को केवल खेती तक सीमित नहीं रखा। स्व-सहायता समूह के माध्यम से सिलाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने सिलाई कार्य भी शुरू किया। इसके साथ ही मुर्गी पालन को भी अतिरिक्त आय के साधन के रूप में अपनाया। सिलाई और मुर्गी पालन से उन्हें प्रतिवर्ष 50 हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त आमदनी हो रही है। आमदनी बढ़ी तो मजबूत हुआ आत्मविश्वास खेती, सिलाई और मुर्गी पालन जैसी विभिन्न आजीविका गतिविधियों से होने वाली आय ने प्रमिला के परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती दी है। प्रमिला बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण, ऋण और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली। इससे वे अपनी आजीविका के साधनों को बढ़ा सकीं और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर करने में सफल हुईं। दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा सेवा संकल्प अभियान के तहत प्रमिला सिंह की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि स्व-सहायता समूह से मिलने वाला आर्थिक सहयोग, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन महिलाओं के जीवन में किस तरह बदलाव ला सकता है। बिहान से जुड़कर खेती के साथ आय के दूसरे साधन विकसित करने वाली प्रमिला आज अपने परिवार को आर्थिक संबल देने के साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की राह दिखा रही हैं।

मुख्यमंत्री साय ने मदकूद्वीप में समाजसेवी स्वर्गीय शांताराम को अर्पित किए श्रद्धासुमन

रायपुर   मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड स्थित ऐतिहासिक, पुरातात्विक एवं आध्यात्मिक महत्व के हरिहर क्षेत्र केदार मदकूद्वीप पहुंचे। मुख्यमंत्री  साय मदकूद्वीप की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले समाजसेवी स्वर्गीय  शांताराम के वार्षिक श्राद्ध कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने स्वर्गीय  शांताराम की स्मृति को चिरस्थायी बनाए रखने के उद्देश्य से निर्मित उद्यान का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि यह उद्यान केवल उनकी स्मृतियों को संजोने का स्थान नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उनके सेवाभाव, सामाजिक सरोकारों और अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति समर्पण से परिचित कराने का माध्यम भी बनेगा। मुख्यमंत्री  साय ने स्वर्गीय  शांताराम के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि मदकूद्वीप हमारी समृद्ध पुरातात्विक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। इस धरोहर के संरक्षण और इसके महत्व को पुनः प्रतिष्ठित करने में स्वर्गीय  शांताराम ने अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने निःस्वार्थ भाव से इस क्षेत्र की सेवा की और मदकूद्वीप के ऐतिहासिक तथा आध्यात्मिक महत्व को व्यापक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी क्षेत्र की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति, परंपराओं, इतिहास और उन लोगों से बनती है, जो इन धरोहरों को सहेजने के लिए अपना जीवन लगा देते हैं। स्वर्गीय  शांताराम ऐसे ही व्यक्तित्व थे। उनके प्रयासों के कारण मदकूद्वीप आज श्रद्धालुओं के साथ-साथ इतिहास, पुरातत्व और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों तथा शोधकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण स्थल के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। सामाजिक और धार्मिक कार्यों में भी रहा उल्लेखनीय योगदान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि स्वर्गीय  शांताराम की सेवा यात्रा केवल मदकूद्वीप तक सीमित नहीं रही। उन्होंने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। बैतलपुर में शिव मंदिर के निर्माण, चिकित्सा सेवाओं के विस्तार तथा विभिन्न सामाजिक कार्यों में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। नवागढ़ स्थित शमी गणेश मंदिर के पुनर्निर्माण में भी उन्होंने उल्लेखनीय भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के लिए किए गए निःस्वार्थ कार्य ही किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी विरासत होते हैं। स्वर्गीय  शांताराम ने अपने जीवन से सेवा, सामाजिक दायित्व और सांस्कृतिक चेतना का उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी समाज के बीच जीवंत हैं और आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों, संस्कृति और विरासत के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराते रहेंगे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी प्राचीन धरोहरें केवल अतीत की स्मृतियां नहीं हैं, बल्कि हमारी पहचान और आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि हैं। इनके संरक्षण में समाज की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वर्गीय  शांताराम जैसे समाजसेवियों ने यह दिखाया कि दृढ़ संकल्प और सेवाभाव से कोई व्यक्ति अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में कितना महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। स्वर्गीय  शांताराम की स्मृतियों और सेवाभाव को संजोए रखेगा उद्यान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि स्वर्गीय  शांताराम की स्मृति में समर्पित यह उद्यान उनके जीवन और कार्यों के प्रति समाज की कृतज्ञता का प्रतीक है। यह स्थान लोगों को प्रकृति के निकट लाने के साथ उनके द्वारा किए गए सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यों की स्मृतियों को भी जीवंत रखेगा। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय  शांताराम का जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि अपनी संस्कृति और विरासत को सहेजना केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। जब समाज स्वयं अपनी धरोहरों के संरक्षण के लिए आगे आता है, तब संस्कृति और परंपराओं का यह प्रवाह पीढ़ी-दर-पीढ़ी और मजबूत होता जाता है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत लगाया कल्पवृक्ष इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत कल्पवृक्ष का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्ष हमारी प्रकृति और जीवन का आधार हैं। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान मां के प्रति हमारे प्रेम और कृतज्ञता के भाव को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ने की सुंदर पहल है। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि पौधरोपण तभी सार्थक है, जब लगाए गए पौधों की देखभाल कर उन्हें वृक्ष बनने तक सहेजा जाए। पर्यावरण संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि मदकूद्वीप जैसे प्राकृतिक, पुरातात्विक और आध्यात्मिक महत्व के स्थलों का संरक्षण हमारी साझा जिम्मेदारी है। प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण के प्रयास साथ-साथ आगे बढ़ेंगे, तभी हम अपनी समृद्ध विरासत को उसके मूल स्वरूप में भावी पीढ़ियों तक पहुंचा सकेंगे। इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री  तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री  अरुण साव, पूर्व राज्यपाल  रमेश बैस, मंत्री  दयाल दास बघेल एवं  लखन लाल देवांगन, विधायक  धरमलाल कौशिक,  अमर अग्रवाल,  सुशांत शुक्ला एवं  पुन्नू लाल मोहले सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

गणेश झांकी चल समारोह की बदली तारीख, रायपुर में भी बदल सकती है तिथि

रायपुर. अनंत चतुर्दशी के साथ आज गणेश उत्सव का समापन हो जाएगा. राजधानी रायपुर में गणेश प्रतिमाओं की विदाई को लेकर भव्य तैयारियां की गई है. प्रतिवर्ष की इस बार भी बड़ी संख्या में प्रदेश के कोने-कोने से लोगों के रायपुर आने की उम्मीद है. इस बीच गणेश विसर्जन झांकी निकलने की तारीख में बदलाव कर दिया गया है. यानी अब रायपुर में रविवार (27 सितंबर) को निकलने वाली झांकी सोमवार को निकल सकती है. दरअसल, प्रदेश में लगातार मौसम का मिजाज बदलने से बारिश का दौर जारी है, जिसने गणेश समितियों की चिंता बढ़ा दी है. अब तक प्रशासन ने रविवार यानी 27 सितंबर की तारीख को गणेश विसर्जन झांकियों के लिए तय किया था. वहीं राजनांदगांव में 25 सितंबर को झांकियां निकलनी थी. हालांकि बारिश को देखते हुए राजनांदगांव के 35 झांकियां समिति ने सर्वसम्मति से बारिश के कारण 26 सितंबर को झांकी निकलाने का फैसला किया. इस दौरान झांकी समिति अध्यक्ष और एएसपी समेत अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहे. रायपुर में कब निकलेगी झांकी? राजधानी रायपुर में झांकी निकलने की तारीख में बदलाव हो सकता है. रविवार की जगह अब सोमवार को गणेश प्रतिमाएं जुलूस के रूप में विसर्जन घाटों तक पहुंच सकती है. इसके लिए प्रशासन और गणेश समिति के बीच बैठक जल्द होगी. इसमें सभी समितियों को विस्तृत जानकारी दी जाएगी. राजनांदगांव में 26 सितंबर को निकलेगी झांकियां राजनांदगाँव जिला पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने बताया की आज शुक्रवार को राजनांदगांव में गणेश विसर्जन झाँकियाँ निकाला जाना था. लेकिन लगातार हो रही तेज बारिश को देखते हुए झांकियां समितियों के साथ बैठक कर सर्वसम्मति से कल शनिवार को झाँकी निकालने का निर्णय लिया गया है.   रायपुर गणेश समितियों के साथ पुलिस की बैठक रायपुर कमिश्नरेट मध्य जोन डीसीपी तारकेश्वर पटेल ने बताया कि राजनांदगांव जिले में गणेश झाँकी विसर्जन की तिथि परिवर्तन की सूचना प्राप्त हुई है. रायपुर में वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया जा रहा है. रायपुर में प्रशासन को तिथि परिवर्तन की सूचना अभी नहीं है. गणेश झांकी समितियों के साथ बैठक कर चर्चा की जाएगी.

दर्रीपारा कवर्धा के आंगनबाड़ी केंद्र में ‘आंगन मिलन सेवा’ में बच्चों से घुले-मिले उप मुख्यमंत्री

फूल लेकर आए नन्हे कदम, उप मुख्यमंत्री ने बच्चों को गोद में उठाया, बच्चों की मासूमियत ने जीता दिल दर्रीपारा कवर्धा के आंगनबाड़ी केंद्र में ‘आंगन मिलन सेवा’ में बच्चों से घुले-मिले उप मुख्यमंत्री उप मुख्यमंत्री ने दर्रीपारा के आंगनबाड़ी केंद्र में ‘आंगन मिलन सेवा’ कार्यक्रम का किया शुभारंभ उत्कृष्ट कार्य करने वाली माताओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का किया सम्मान रायपुर  आंगनबाड़ी केंद्र में जब दो-तीन साल के नन्हे बच्चे फूल लेकर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के स्वागत के लिए आगे बढ़े, तो माहौल में सहज अपनापन दिखाई दिया। किसी बच्चे के हाथ में फूल था तो किसी के हाथ में अपनी बनाई हुई चित्रकारी। बच्चों ने मासूमियत से उप मुख्यमंत्री को फूल भेंट किए। शर्मा भी बच्चों के बीच पहुंचे और उनके साथ ऐसे घुल-मिल गए, जैसे परिवार के किसी बड़े के साथ बच्चे सहज होकर बातें करते हैं। उन्होंने बच्चों को गोद में उठाया, उनसे बातचीत की, तस्वीरें खिंचवाईं और उन्हें खिलौने व चॉकलेट भेंट किए।        सेवा संकल्प अभियान के तहत कबीरधाम जिले के जिला मुख्यालय कवर्धा के आंगनबाड़ी केंद्र दर्रीपारा में आयोजित ‘आंगन मिलन सेवा’ कार्यक्रम का शुभारंभ उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों और महिलाओं के बीच पहुंचे उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां आकर बिल्कुल घर जैसा माहौल महसूस हो रहा है। बच्चों की मासूमियत और उनका उत्साह देखकर मन प्रसन्न हो गया। नन्हे हाथों की चित्रकारी में दिखी बड़ी सोच        बच्चों द्वारा बनाई गई चित्रकारी ने उप मुख्यमंत्री का विशेष ध्यान खींचा। नन्हे हाथों से बनाए गए चित्रों को देखकर उन्होंने बच्चों की रचनात्मकता की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे छोटी उम्र में ही कितनी अच्छी तरह सोचकर चित्र बना रहे हैं। एक बच्चे द्वारा सैनिक, भगवान शंकर और तिरंगे से जुड़ा चित्र बनाए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चे ने जिस तरह अपने विचार को चित्र के माध्यम से व्यक्त किया, वह बहुत बड़ी बात है। बच्चों की चित्रकारी को देखते हुए उप मुख्यमंत्री ने अपने बचपन को भी याद किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को इस उम्र में इस तरह अपनी सोच को चित्रों के माध्यम से व्यक्त करते देखकर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने बच्चों, माताओं-बहनों, अभिभावकों और महिला एवं बाल विकास विभाग को शुभकामनाएं दीं। माताओं के हाथों में आई राशि से बेटियों का भविष्य संवर रहा        उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कार्यक्रम में ‘महतारी वंदन योजना’ की राशि के उपयोग की जानकारी ली। महिलाओं ने बताया कि वे योजना से मिलने वाली राशि को अपनी बेटियों के भविष्य के लिए ‘सुकन्या समृद्धि योजना’, ‘नोनी सुरक्षा योजना’ सहित अन्य जरूरतों में उपयोग कर रही हैं। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि माताओं के हाथ में राशि पहुंचती है तो उसका सदुपयोग ही होता है। कई माताएं इस राशि को अपनी बेटियों के भविष्य के लिए जमा कर रही हैं, तो कुछ परिवार की जरूरतों में इसका उपयोग कर रही हैं। यह इस बात का उदाहरण है कि महिलाओं के हाथ में पहुंची आर्थिक सहायता परिवार के भविष्य को मजबूत करने में उपयोगी साबित हो रही है। बच्चों की मुस्कान और महिलाओं की प्रतिभा बनी कार्यक्रम की पहचान      कार्यक्रम में बच्चों के लिए चित्रकला तथा महिलाओं के लिए रंगोली, मेहंदी और पारंपरिक व्यंजन प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। महिलाओं ने उत्साह के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उप मुख्यमंत्री ने रंगोली, मेहंदी और पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी का अवलोकन कर महिलाओं का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा ‘महतारी वंदन योजना’ की राशि का उपयोग उपयोगी कार्यों और भविष्य की योजनाओं में करने वाली माताओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। लाभार्थी लक्ष्मी साहू और नंद रानी साहू ने योजना से मिले सहयोग के अपने अनुभव साझा किए।

मुख्यमंत्री साय ने स्कूली बच्चों के साथ किया ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन, राष्ट्रभक्ति से गूंज उठा विद्यालय परिसर

‘वंदे मातरम्’  मां भारती की वंदना और राष्ट्रीय चेतना का स्वर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री साय ने स्कूली बच्चों के साथ किया ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन, राष्ट्रभक्ति से गूंज उठा विद्यालय परिसर सरस्वती शिशु मंदिर के विकास के लिए मुख्यमंत्री ने की 50 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा विद्यार्थियों से मुख्यमंत्री का आह्वान – बड़ा सपना देखें, लक्ष्य तय करें और पूरी लगन से उसे हासिल करने के लिए आगे बढ़ें मुख्यमंत्री ने कहा – शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति से होता है जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण दूरस्थ अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर सुविधाएं पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता रायपुर,   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के रोहिणीपुरम स्थित सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सामूहिक गायन कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने विद्यालय के छात्र-छात्राओं, आचार्यों और उपस्थित नागरिकों के साथ ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया। एक स्वर और एक लय में गूंजे ‘वंदे मातरम्’ से पूरा विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना से सराबोर हो उठा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने सरस्वती शिशु मंदिर के विकास के लिए 50 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल राष्ट्रगीत नहीं, बल्कि मां भारती की वंदना, राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना का सशक्त स्वर है। स्वतंत्रता संग्राम के कठिन दौर में इस गीत ने देशवासियों के भीतर स्वाधीनता की चेतना जगाई और असंख्य क्रांतिकारियों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने की प्रेरणा दी। ‘वंदे मातरम्’ का उद्घोष स्वतंत्रता सेनानियों के लिए राष्ट्रप्रेम, साहस और संकल्प की अभिव्यक्ति बन गया था। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने का यह अवसर हमें अपने गौरवशाली इतिहास, स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और उनके त्याग एवं बलिदान को स्मरण करने का अवसर देता है। इसके साथ ही यह नई पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का बोध कराने का भी महत्वपूर्ण अवसर है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज विद्या भारती के आह्वान पर देशभर में 25 हजार से अधिक स्थानों पर एक करोड़ से अधिक विद्यार्थियों और नागरिकों द्वारा सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में एक साथ मां भारती की वंदना राष्ट्रीय एकता और चेतना का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को ‘वंदे मातरम्’ के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका से परिचित कराने के साथ उनके भीतर राष्ट्रप्रेम एवं कर्तव्यबोध की भावना को और मजबूत करते हैं। दूरस्थ अंचलों के बच्चों को भी मिल रहे आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखा है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के हर बच्चे को, चाहे वह शहर में रहता हो या बस्तर-सरगुजा के किसी सुदूर अंचल में, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अपनी प्रतिभा को निखारने के समान अवसर मिलें। इसके लिए प्रदेशभर में शैक्षणिक सुविधाओं और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध संसाधनों का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि संसाधनों के अभाव में प्रदेश के किसी भी प्रतिभाशाली बच्चे की आगे बढ़ने की राह न रुके। मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली स्थित ट्रायबल यूथ हॉस्टल में विद्यार्थियों के लिए सीटों की संख्या बढ़ाकर 200 कर दी गई है। उन्होंने कहा कि वहां अध्ययनरत छत्तीसगढ़ के 13 विद्यार्थियों ने यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। यह उपलब्धि प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा, मेहनत और आगे बढ़ने की क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सही अवसर, मार्गदर्शन और संसाधन मिलने पर छत्तीसगढ़ के हमारे बच्चे देश के किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, चरित्र और जिम्मेदार नागरिक के निर्माण का माध्यम मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान या डिग्री प्राप्त करना नहीं है। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो ज्ञान के साथ संस्कार दे, अनुशासन सिखाए, चरित्र का निर्माण करे और बच्चों में समाज तथा राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करे। संस्कारवान और राष्ट्रभक्त युवा ही सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र की मजबूत नींव बनते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्या भारती के विद्यालय लंबे समय से शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन, सामाजिक दायित्व और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और भविष्य निर्माण में समर्पित सभी आचार्यों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षक केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि बच्चों के जीवन को सही दिशा देने का महत्वपूर्ण दायित्व भी निभाते हैं। “बड़ा सपना देखिए और आज से ही उसके लिए मेहनत शुरू कीजिए” मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि आप सभी देश और छत्तीसगढ़ का भविष्य हैं। आने वाले वर्षों में देश और समाज की जिम्मेदारी आपके कंधों पर होगी। इसलिए जीवन में बड़ा सपना देखिए, अपना लक्ष्य तय कीजिए और उसे प्राप्त करने के लिए पूरी लगन, अनुशासन और ईमानदारी से मेहनत कीजिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि कोई कलेक्टर, एसपी, डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक अथवा किसी अन्य क्षेत्र में जाकर देश और समाज की सेवा करना चाहता है तो अपने लक्ष्य को अभी से स्पष्ट करे और उसकी तैयारी शुरू कर दे। जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर परिश्रम से कठिन से कठिन लक्ष्य को भी हासिल किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी शिक्षा और व्यक्तिगत सफलता को राष्ट्र एवं समाज की प्रगति से जोड़कर देखें। अपने जीवन में जो भी दायित्व मिले, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएं तथा अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज और देश की सेवा में करें। छत्तीसगढ़ में 1500 स्थानों पर पांच लाख लोगों ने किया सामूहिक गायन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माणिक लाल साहू ने कहा कि विद्या भारती के … Read more

आयुष्मान भारत के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय सम्मान

“स्वास्थ्य सुरक्षा से जनकल्याण” की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आयुष्मान भारत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर मिला प्रतिष्ठित सम्मान पोर्टेबिलिटी क्लेम्स के निराकरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने किया सम्मानित मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को दी बधाई, कहा – प्रदेश के प्रत्येक परिवार तक गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमारा लक्ष्य इलाज के अभाव में किसी जरूरतमंद परिवार की उम्मीद न टूटे, यही हमारी प्राथमिकता : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल दूसरे राज्यों में उपचार लेने वाले छत्तीसगढ़ के हितग्राहियों के लिए पोर्टेबिलिटी सुविधा बन रही बड़ा संबल रायपुर   आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के प्रभावी क्रियान्वयन और हितग्राहियों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पोर्टेबिलिटी क्लेम्स के समयबद्ध एवं प्रभावी निराकरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया है। भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के आठ वर्ष तथा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित “आरोग्य मंथन 2026” में छत्तीसगढ़ को यह सम्मान प्रदान किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने छत्तीसगढ़ को पोर्टेबिलिटी क्लेम्स के निराकरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। छत्तीसगढ़ की ओर से आयुष्मान भारत योजना के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र गहवई ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि प्रदेश के किसी भी पात्र नागरिक को आर्थिक कठिनाई के कारण उपचार से वंचित न होना पड़े। बीमारी के समय परिवार को उपचार के साथ आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिले, इसी उद्देश्य से प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आयुष्मान भारत योजना ने देश के करोड़ों जरूरतमंद परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत भरोसा दिया है। छत्तीसगढ़ में भी इस योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा१ है। प्रदेश से बाहर भी उपचार की चिंता नहीं, पोर्टेबिलिटी बनी स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत आधार मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना की पोर्टेबिलिटी सुविधा विशेष रूप से उन नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें रोजगार, कामकाज अथवा अन्य कारणों से अपने गृह राज्य से बाहर रहना पड़ता है या बेहतर उपचार के लिए दूसरे राज्य जाना पड़ता है। इस व्यवस्था के माध्यम से पात्र हितग्राही देश के अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में योजना से संबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जो हितग्राही दूसरे राज्यों में उपचार लेते हैं, उन्हें भी योजना का लाभ सहजता से मिले और उनके क्लेम का निराकरण समय पर हो, इसके लिए राज्य सरकार लगातार व्यवस्था को मजबूत कर रही है। पोर्टेबिलिटी क्लेम्स के निराकरण में मिला राष्ट्रीय सम्मान इसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों, चिकित्सकों, अस्पतालों और योजना के क्रियान्वयन से जुड़े सभी लोगों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। यह सम्मान हमें स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ, प्रभावी और हितग्राही-केंद्रित बनाने की प्रेरणा देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि “स्वास्थ्य सुरक्षा से जनकल्याण” के संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ आगे बढ़ रहा है। हमारा प्रयास है कि गंभीर बीमारी किसी परिवार के लिए आर्थिक संकट का कारण न बने और जरूरत के समय प्रत्येक पात्र नागरिक को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो। क्लेम प्रोसेसिंग और तकनीकी निगरानी पर विशेष ध्यान प्रदेश में पोर्टेबिलिटी क्लेम्स के समयबद्ध निराकरण के लिए क्लेम प्रोसेसिंग व्यवस्था, तकनीकी निगरानी, संबद्ध अस्पतालों के साथ समन्वय और लंबित प्रकरणों के निराकरण पर लगातार विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासनिक एवं तकनीकी प्रक्रियाओं को इस प्रकार सुदृढ़ किया जा रहा है कि उपचार प्राप्त करने वाले हितग्राहियों को योजना का लाभ लेने में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त यह सम्मान इस बात को भी रेखांकित करता है कि छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के संचालन के लिए विकसित की गई व्यवस्थाएं लाभार्थी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत करने में प्रभावी भूमिका निभा रही हैं। हर पात्र परिवार तक पहुंचे आयुष्मान भारत का लाभ : स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में छत्तीसगढ़ को मिला राष्ट्रीय सम्मान पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। यह उपलब्धि प्रदेश में योजना के प्रभावी, पारदर्शी और लाभार्थी-केंद्रित क्रियान्वयन के लिए किए जा रहे सामूहिक प्रयासों को रेखांकित करती है। जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग का निरंतर प्रयास है कि आयुष्मान भारत योजना का लाभ प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के साथ उनकी गुणवत्ता को भी लगातार बेहतर कर रही है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि अधिकारियों, कर्मचारियों, चिकित्सकों, अस्पतालों और योजना के क्रियान्वयन से जुड़े सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। आने वाले समय में क्लेम प्रोसेसिंग की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता को और मजबूत किया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य प्रत्येक पात्र परिवार को गुणवत्तापूर्ण, निःशुल्क, समयबद्ध और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। देशभर में पोर्टेबिलिटी से लाखों हितग्राहियों को मिला उपचार राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुसार आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना देश के सभी 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। योजना की पोर्टेबिलिटी सुविधा ने लाभार्थियों के लिए राज्य की सीमाओं से परे भी स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 30 जून 2026 तक पोर्टेबिलिटी सुविधा के अंतर्गत देशभर में 29.05 लाख अंतर-राज्यीय अस्पताल प्रवेश अधिकृत किए गए हैं, जिनसे संबंधित अधिकृत राशि 8,383.97 करोड़ रुपये से अधिक है। यह व्यवस्था विशेष … Read more

मदकूद्वीप में CM साय ने किया कन्या पूजन, प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मदकूद्वीप के प्राचीन मंदिरों में की पूजा-अर्चना कन्या पूजन कर कन्या भोज में हुए शामिल, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की मंदिर संग्रहालय का किया अवलोकन, मदकूद्वीप की समृद्ध ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत से हुए रूबरू रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड स्थित ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक स्थल हरिहर क्षेत्र केदार मदकूद्वीप पहुंचकर प्राचीन रामाश्रय एवं गणेश मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने भगवान से छत्तीसगढ़ की निरंतर प्रगति तथा प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने मंदिर परिसर में आयोजित कन्या पूजन में श्रद्धापूर्वक कन्याओं का पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया। इसके पश्चात वे कन्या भोज में शामिल हुए और प्रसाद ग्रहण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में कन्याओं को शक्ति का स्वरूप माना गया है। कन्या पूजन हमारी समृद्ध परंपरा में मातृशक्ति के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती प्राचीन धार्मिक परंपराओं, पुरातात्विक धरोहरों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण है। मदकूद्वीप भी प्रदेश की ऐसी ही महत्वपूर्ण धरोहरों में शामिल है, जहां इतिहास, आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। ऐसे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल हमारी गौरवशाली विरासत से नई पीढ़ी को परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने पुरातत्व विभाग द्वारा स्थापित मंदिर संग्रहालय का भी अवलोकन किया। उन्होंने संग्रहालय में संरक्षित पुरातात्विक धरोहरों एवं ऐतिहासिक अवशेषों के संबंध में जानकारी ली और मदकूद्वीप के ऐतिहासिक, पुरातात्विक एवं आध्यात्मिक महत्व से रूबरू हुए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत और सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण एवं संवर्धन अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारी ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरें केवल अतीत की स्मृतियां नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने वाली अमूल्य निधि हैं। इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, विधायक धरमलाल कौशिक, विधायक अमर अग्रवाल, विधायक सुशांत शुक्ला एवं विधायक पुन्नू लाल मोहले, क्रेडा के अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

राजस्थान पंचायत चुनाव में बड़ा आरक्षण अपडेट, 1.30 लाख वार्ड पंच सीटों की तस्वीर साफ

जयपुर आरक्षण लॉटरी के बाद अब ग्राम पंचायतों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की नजर अपने-अपने गांव की सीट पर है। सरपंच के कुल 14,403 पदों में से 3,058 पद अनुसूचित जनजाति (ST), 2,493 पद अनुसूचित जाति (SC) और 1,961 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित किए गए हैं। राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर गुरुवार को बड़ा अपडेट सामने आया। प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली गई। इसके साथ ही प्रदेशभर में हजारों गांवों की चुनावी तस्वीर साफ हो गई है। उपखंड मुख्यालयों पर हुई लॉटरी में सरपंच के 14,403 और वार्ड पंच के 1,30,584 पदों के लिए आरक्षण तय किया गया। खास बात यह है कि प्रदेश में करीब 7,200 महिला सरपंच और करीब 65 हजार महिला वार्ड पंच चुनी जाएंगी। सरपंच के 14 हजार से ज्यादा पदों का आरक्षण तय आरक्षण लॉटरी के बाद अब ग्राम पंचायतों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की नजर अपने-अपने गांव की सीट पर है। सरपंच के कुल 14,403 पदों में से 3,058 पद अनुसूचित जनजाति (ST), 2,493 पद अनुसूचित जाति (SC) और 1,961 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित किए गए हैं। महिला आरक्षण के चलते बड़ी संख्या में गांवों की कमान इस बार महिलाओं के हाथ में जाएगी। करीब 7,200 पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। ऐसे में कई गांवों में लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे पुरुष दावेदारों की उम्मीदों पर भी आरक्षण लॉटरी ने असर डाला है। वार्ड पंचों में भी हजारों सीटें महिलाओं के लिए सरपंचों के साथ-साथ 1,30,584 वार्ड पंच पदों के लिए भी आरक्षण तय कर दिया गया है। इनमें 21,962 वार्ड SC, 19,117 वार्ड ST और करीब 15 हजार वार्ड OBC के लिए आरक्षित किए गए हैं। वहीं, कुल आरक्षण व्यवस्था के तहत करीब 65 हजार महिला वार्ड पंच भी चुनी जाएंगी। यानी पंचायत चुनाव में इस बार महिलाओं की भागीदारी बड़े स्तर पर दिखाई देगी। 4 जिलों में बड़ा उलटफेर, सभी सरपंच सीट ST के लिए आरक्षण लॉटरी में सबसे ज्यादा चर्चा बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिलों की हो रही है। इन चार जिलों में सरपंच के सभी 1,253 पद ST वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक बांसवाड़ा में 327, डूंगरपुर में 442, प्रतापगढ़ में 277 और सलूंबर में 207 सरपंच पद हैं। इन सभी पदों पर ST वर्ग के उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेंगे। इन जिलों में आरक्षण का सीधा असर उन दावेदारों पर पड़ेगा जो लंबे समय से सरपंच चुनाव की तैयारी कर रहे थे। अब टिकट और चुनावी रणनीति भी आरक्षण के हिसाब से तय होगी। बाड़मेर में दोबारा निकली लॉटरी, क्यों मचा विवाद? इधर बाड़मेर पंचायत समिति में सरपंच पदों की आरक्षण लॉटरी के दौरान विवाद खड़ा हो गया। लॉटरी में कपूरड़ी ग्राम पंचायत को SC वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया था। इस पर जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति दर्ज कराई। आपत्ति करने वालों का कहना था कि ग्राम पंचायत में SC वर्ग की आबादी नहीं है। मामला सामने आने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने पूरी पंचायत समिति की आरक्षण लॉटरी दोबारा निकालने के आदेश दिए। इससे बाड़मेर की पंचायत समिति में कई सीटों का आरक्षण बदलने की संभावना बन गई है। अब चुनाव की तारीखों का इंतजार सरपंच और पंच के साथ-साथ प्रधान, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्यों के आरक्षण का पूरा ब्योरा राज्य निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा। आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का इंतजार है। संभावना जताई जा रही है कि शनिवार या सोमवार तक राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव की घोषणा कर सकता है। इसके बाद अक्टूबर के पहले सप्ताह से चुनाव की अधिसूचना जारी होने और नामांकन प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी करनी है। ऐसे में आरक्षण लॉटरी के बाद अब राजस्थान के गांवों में चुनावी सरगर्मी तेज होना तय माना जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि किस गांव की कमान महिला के हाथ जाएगी और किस सीट पर कौन सा वर्ग मैदान में उतरेगा?