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योगी सरकार ने चालक-परिचालकों को 14 पैसे प्रति किमी अतिरिक्त भुगतान का लिया निर्णय

योगी सरकार का ग्रामीण परिवहन को संबल, मुख्यमंत्री जनता सेवा बसों के चालकों-परिचालकों के मानदेय में बढ़ोतरी योगी सरकार ने चालक-परिचालकों को 14 पैसे प्रति किमी अतिरिक्त भुगतान का लिया निर्णय ग्रामीण यात्रियों को साधारण बसों से 20% कम किराये का मिलेगा लाभ प्रदेश भर के 20 क्षेत्रों में 395 मार्गों पर 299 बसों का किया जा रहा संचालन ग्रामीण परिवहन को मजबूत और टिकाऊ बनाना है योगी सरकार का लक्ष्य लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अंचलों में सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम द्वारा संचालित मुख्यमंत्री जनता सेवा योजना के अंतर्गत चल रही बसों के संचालन हेतु चालकों व परिचालकों को दिए जाने वाले मानदेय में 14 पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धि की गई है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इस फैसले से एक ओर जहां ग्रामीण क्षेत्रों में बस संचालन से जुड़े कर्मियों को आर्थिक संबल मिलेगा, वहीं दूसरी ओर आम ग्रामीण यात्रियों को कम किराये में सुरक्षित और सुगम परिवहन सुविधा निरंतर उपलब्ध होती रहेगी। मानदेय बढ़ोतरी से मिलेगा संचालन को बल परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि अब तक मुख्यमंत्री जनता सेवा के अंतर्गत संविदा चालकों और परिचालकों को 2.18 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान किया जा रहा था। ताजा निर्णय के तहत अब यह दर बढ़ाकर 2.32 रुपये प्रति किलोमीटर कर दी गई है। मानदेय में की गई यह वृद्धि बस संचालकों और सेवा प्रदाताओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगी, जिससे ग्रामीण मार्गों पर बसों का नियमित, सुरक्षित और सुचारु संचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। ग्रामीण यात्रियों को 20 प्रतिशत कम किराया परिवहन मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री जनता सेवा योजना के अंतर्गत संचालित बसों का किराया साधारण बसों की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत कम रखा गया है। इसका सीधा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले यात्रियों को मिल रहा है, जिन्हें कम किराये में अपने गंतव्य तक पहुंचने की सुविधा उपलब्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार की प्राथमिकता है कि ग्रामीण अंचलों में रहने वाले नागरिकों को भी शहरी क्षेत्रों के समान किफायती और सुलभ परिवहन सुविधाएं मिलें। प्रदेशभर में 299 बसें कर रही हैं सेवा परिवहन विभाग के अनुसार, मुख्यमंत्री जनता सेवा योजना के अंतर्गत प्रदेश के सभी 20 क्षेत्रों में कुल 395 अनुमन्य मार्गों पर 299 बसों का संचालन किया जा रहा है। यह योजना ग्रामीण परिवहन को सशक्त बनाने की दिशा में योगी सरकार का एक बड़ा और प्रभावी कदम मानी जा रही है। इस योजना से ग्रामीण इलाकों में न केवल आवागमन आसान हुआ है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार तक पहुंच भी बेहतर हुई है।

तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वामी विवेकानंद विमानतल पर किया आत्मीय स्वागत

रायपुर. तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह आज तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर रायपुर पहुंचे। स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद  संतोष पांडेय, सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर महापौर मती मीनल चौबे, विधायक  मोतीलाल साहू,  राजेश मूणत, मुख्य सचिव  विकास शील, पुलिस महानिदेशक  अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव (गृह)  मनोज पिंगुआ तथा रायपुर  पुलिस कमिश्नर  संजीव शुक्ला उपस्थित थे।

जनजातीय परंपराओं की समृद्ध विरासत से रूबरू हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

रायपुर.  द्रौपदी मुर्मु ने किया अवलोकन बस्तर पंडुम के शुभारंभ समारोह में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने आज बस्तर की माटी की सुगंध और आदिम जनजातीय परंपराओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान राष्ट्रपति ने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर वहां मौजूद स्थानीय निवासियों और कारीगरों से प्रदर्शित कलाओं एवं उत्पादों की विस्तृत जानकारी ली। राष्ट्रपति  मुर्मु ने बस्तर पंडुम को आदिवासी विरासत को संजोने और उसे पूरी दुनिया तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने एक-एक कर ढोकरा हस्तशिल्प कला, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस कला, लौह शिल्प, जनजातीय वेश-भूषा एवं आभूषण, तुम्बा कला, बस्तर की जनजातीय चित्रकला, स्थानीय व्यंजन तथा लोक चित्रों पर आधारित आकर्षक प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इसकी सराहना की। बस्तर पंडुम आयोजन स्थल पर जनजातीय हस्तशिल्प आधारित प्रदर्शनी में ढोकरा कला से निर्मित सामग्रियों का विशेष प्रदर्शन किया गया। इस हस्तशिल्प में लॉस्ट वैक्स कास्टिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है। यह भारत की प्राचीन जनजातीय धातु कला है, जिसमें प्रकृति, देवी-देवताओं और ग्रामीण जीवन की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। ढोकरा की प्रत्येक कृति पूर्णतः हस्तनिर्मित होती है। इसके निर्माण में समाड़ी मिट्टी, मोम वैक्स, तार, पीतल, गरम भट्टी एवं सफाई मशीन का उपयोग किया जाता है। स्थानीय टेराकोटा कला को दर्शाती मिट्टी से बनी आकृतियों का भी प्रदर्शन किया गया, जो लोक आस्था, ग्रामीण जीवन और पारंपरिक विश्वासों को सजीव रूप में प्रस्तुत करती हैं। प्रदर्शनी में लकड़ी की नक्काशी (Wood Carving) कला के माध्यम से सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति देखने को मिली। लकड़ी की मूर्तियां बनाने के लिए सागौन, बीजा, सिवनर एवं साल लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जिसमें कारीगर पारंपरिक औजारों से बारीक आकृतियां उकेरते हैं। इसी तरह सीसल कला से बने जूट के कपड़े एवं अन्य हस्तशिल्पों का भी राष्ट्रपति ने अवलोकन किया। एक अन्य स्टॉल में बांस से बनी पारंपरिक उपयोगी एवं सजावटी वस्तुओं का प्रदर्शन किया गया। वहीं गढ़ा हुआ लोहे की कला (Wrought Iron Art) से निर्मित कलाकृतियों ने भी राष्ट्रपति को विशेष रूप से आकर्षित किया। जनजातीय आभूषणों को प्रदर्शित करने वाले स्टॉल ने राष्ट्रपति का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस स्टॉल में चांदी, मोती, शंख एवं विभिन्न धातुओं से हाथ से बनाए गए जनजातीय आभूषण (Tribal Jewellery) प्रदर्शित किए गए। ये आभूषण आदिवासी समुदायों की पहचान, सामाजिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। तुम्बा कला (Tumba Art) के अंतर्गत सूखी लौकी जैसी फली से बनाए गए पारंपरिक वाद्य यंत्र एवं सजावटी वस्तुएं भी प्रदर्शनी में रखी गई थीं। जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण स्टॉल में बस्तर क्षेत्र की प्रमुख जनजातियां — दंडामी माढ़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा — की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषण संबंधित जनजातियों के युवक-युवतियों द्वारा प्रदर्शित किए गए। बस्तर पंडुम स्थल पर जनजातीय चित्रकला से जुड़ी जीवंत प्रदर्शनी का भी राष्ट्रपति  मुर्मु ने अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में बस्तर की चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और परंपराओं की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। बस्तर की कला में जंगल, लोक देवता, पर्व-त्योहार और दैनिक जीवन को सहज रंगों और प्रतीकों के माध्यम से उकेरा जाता है। यह चित्रकला पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है। स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जनजातीय दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली खाद्य सामग्री एवं पेय पदार्थों का प्रदर्शन किया गया। इसमें जोंधरी लाई के लड्डू, जोंधरा, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, भेंडा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजनों के साथ पेय पदार्थ लांदा और सल्फी को प्रदर्शित किया गया। लोक जीवन से संबंधित लोकचित्रों की प्रदर्शनी में बस्तर की संस्कृति और इतिहास, प्राकृतिक सौंदर्य, लोकजीवन एवं लोक परंपराओं से जुड़ी तस्वीरों के साथ-साथ बस्तर के जनजातीय समाज और लोक संस्कृति से संबंधित साहित्य भी प्रदर्शित किया गया।  

5वीं-8वीं के परीक्षा केंद्रों को 5 किमी दूर भेजने से बच्चों और अभिभावकों को बढ़ी मुश्किलें

भोपाल  प्रदेश में 5वीं और 8वीं की बोर्ड पैटर्न परीक्षाएं 20 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं। इस परीक्षा में करीब 25 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे, जिनके लिए प्रदेश भर में लगभग 12 हजार से अधिक परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। ये परीक्षा केंद्र मूल विद्यालय से पांच किलोमीटर दूर के विद्यालयों में बनाए जाने से परीक्षार्थी और अभिभावकों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। परीक्षा 20 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित की जाएगी और इसके लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। राज्य शिक्षा केंद्र के नियमों के अनुसार छोटे विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र स्कूल से कम दूरी पर बनाए जाने चाहिए, ताकि उन्हें आने-जाने में परेशानी न हो। राज्य शिक्षा केंद्र ने एक से तीन किमी के अंदर तक केंद्र बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन कई जगहों पर केंद्र चार से पांच किलोमीटर दूरी पर बनाए जाने की शिकायत सामने आ रही हैं। 5वीं व 8वीं की यह परीक्षा माध्यमिक शिक्षा मंडल के पैटर्न पर आयोजित की जा रही है। इसमें सरकारी, निजी स्कूलों तथा मदरसों के विद्यार्थी शामिल होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या और ज्यादा गंभीर हो सकती है, क्योंकि वहां परिवहन की सुविधा सीमित रहती है। छोटे बच्चों को समय पर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए अधिक समय और संसाधनों की जरूरत पड़ेगी। अभिभावकों का कहना है कि अधिक दूरी होने से बच्चों की सुरक्षा और समय पर पहुंचने की चिंता बढ़ जाती है। निजी स्कूलों को अधिक बनाए गए केंद्र भोपाल जिले में 201 केंद्रों पर करीब 78 हजार बच्चे शामिल होंगे। इसमें पुराने शहर में जनशिक्षा केंद्र प्रभारी एवं जनशिक्षक के प्रस्ताव को नजरअंदाज कर विकासखंड स्रोत समन्वयकों ने सरकारी के बदले निजी स्कूलों को केंद्र बना दिया गया है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि केंद्र विद्यार्थियों की संख्या और उपलब्ध सुविधाओं को ध्यान में रखकर तय किए जाते हैं।  

राष्ट्रपति ने आदिवासी बालिका को पढ़ाने का किया आह्वान

रायपुर. बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में बस्तर पहुंची राष्ट्रपति राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु आज सुबह बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुँचीं, जहाँ उन्होंने संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति  मुर्मु ने इस अवसर पर कहा कि आदिवासियों की संस्कृति में छत्तीसगढ़ की आत्मा बसती है। उन्होंने बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के जयघोष के साथ अपने उद्बोधन की शुरूआत की। राष्ट्रपति ने कहा कि देश में छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जहाँ सरकार अपनी संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और प्राचीन विरासतों को संरक्षित करने के लिए बस्तर पंडुम जैसे आयोजन कर रही है। यह आयोजन आदिवासियों की गौरवशाली संस्कृति का जीवंत प्रतिबिंब है।  जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान में आयोजित इस शुभारंभ समारोह में बड़ी संख्या में आदिवासी कलाकार और विशाल जनसमूह मौजूद रहा । सभी को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि प्रदेश की विष्णुदेव सरकार छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय उत्थान के लिए निरंतर बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम जनमन, प्रधानमंत्री जनजातीय गौरव उत्कर्ष अभियान तथा नियद नेल्ला नार जैसी योजनाओं के जरिए जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रपति ने बस्तर क्षेत्र में आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जनजातीय बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए शासन के साथ-साथ समाज और उनके माता-पिता को भी आगे आना होगा। उन्होंने बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राचीन परंपराओं की जड़ें आज भी मजबूत हैं। बस्तर पंडुम जनजातीय समुदाय की पहचान, गौरव और समृद्ध परंपराओं को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। राष्ट्रपति ने बताया कि बस्तर पंडुम में 54 हजार से अधिक आदिवासी कलाकारों ने पंजीयन कराया है, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में बस्तर पहुंची राष्ट्रपति उन्होंने कहा कि हिंसा का मार्ग छोड़कर माओवादी मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं, लोकतंत्र के प्रति उनकी आस्था बढ़ रही है। वर्षों से बंद विद्यालय पुनः खुल रहे हैं, दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में सड़कें और पुल-पुलियों का निर्माण हो रहा है तथा ग्रामीणजन विकास से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की सुंदरता और संस्कृति सदैव लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है, किंतु दुर्भाग्यवश चार दशकों तक यह क्षेत्र माओवाद से ग्रस्त रहा, जिससे यहां के निवासियों को अनेक कष्ट झेलने पड़े। राष्ट्रपति  मुर्मु ने कहा कि भारत सरकार की माओवादी आतंक के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई के परिणामस्वरूप वर्षों से व्याप्त भय, असुरक्षा और अविश्वास का वातावरण अब समाप्त हो रहा है। माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं और नागरिकों के जीवन में शांति लौट रही है। प्रदेश सरकार के प्रयासों और स्थानीय लोगों के सहयोग से आज बस्तर में विकास का नया सूर्याेदय हो रहा है। गाँव-गाँव में बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँच रही हैं। वर्षों से बंद विद्यालयों में अब बच्चों की कक्षाएँ फिर से संचालित हो रही हैं। राष्ट्रपति ने उपस्थित जनसमूह से अपनी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को सहेजने का आह्वान करते हुए बस्तर की जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल  रमेन डेका शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर पंडुम कोई साधारण मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव है। यहाँ के लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक पहनावा, आभूषण, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक व्यंजन मिलकर बस्तर की सुंदर तस्वीर दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि गौर नृत्य, परघौनी नृत्य तथा धुरवा, मुरिया, लेजा जैसे नृत्य बस्तर की सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। इस प्रकार के आयोजन हमारी आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। राज्यपाल ने कहा कि बस्तर की पहचान उसकी जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से है। गोंड, मुरिया, माड़िया, हल्बा, भतरा एवं परजा समाज के लोग पीढ़ियों से अपनी मूल परंपराओं को सहेजते आए हैं। जल, जंगल और जमीन के साथ सामंजस्य बस्तर की सबसे बड़ी ताकत है। बस्तर पंडुम के माध्यम से कलाकारों को पहचान, सम्मान और आजीविका के अवसर मिलेंगे। लोककला तभी जीवित रहेगी जब कलाकार खुशहाल होंगे। राज्यपाल  डेका ने कहा कि ढोकरा कला छत्तीसगढ़ की शान है। बस्तर में निर्मित ढोकरा शिल्प की मूर्तियाँ देश-विदेश में लोकप्रिय हैं। यह कला जनजातीय शिल्पकारों की संस्कृति, मेहनत और कौशल का प्रमाण है। बस्तर की संस्कृति केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की लोक परंपराओं और विविधताओं का प्रतीक है। बस्तर समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती – मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु का बस्तर पंडुम में आना केवल औपचारिक उपस्थिति नहीं, बल्कि बस्तर के लिए आशीर्वाद, जनजातीय समाज के लिए सम्मान और माताओं-बहनों के लिए अपनत्व है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के जीवन, आस्था, बोली-भाषा, नृत्य-गीत, वेशभूषा, खान-पान और जीवन-दर्शन का जीवंत प्रतिबिंब है। बस्तर केवल जंगलों की धरती नहीं, बल्कि समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम के लिए इस वर्ष 12 विधाओं में 54 हजार से अधिक कलाकारों ने पंजीयन कराया, जिनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वेशभूषा-आभूषण, शिल्प, चित्रकला, व्यंजन, पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य और वन-औषधियाँ शामिल हैं, जो बस्तर की संस्कृति की जीवंतता और समृद्धि को दर्शाती हैं।        

कदमघर खरीदारों के हित में छत्तीसगढ़ रेरा का अहम निर्णय छत्तीसगढ़ में

रायपुर. रेरा प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में छत्तीसगढ़ रेरा का महत्वपूर्ण कदम छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण ने राज्य में रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन तथा रियल एस्टेट अधिनियम, 2016 के प्रभावी अनुपालन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 14 बैंकों को अंतिम पैनल (फाइनल एम्पैनलमेंट) में शामिल किया है। रेरा अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ रेरा द्वारा 03 अप्रैल 2025 को 17 बैंकों को अस्थायी पैनल (प्रोविजनल एम्पैनलमेंट) में शामिल किया गया था। निर्धारित प्रक्रियाओं, आवश्यक शर्तों एवं मापदंडों की पूर्ति के उपरांत अब इनमें से 14 बैंकों को अंतिम पैनल में सम्मिलित किया गया है। अंतिम पैनल में शामिल बैंकों में एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक, केनरा बैंक, डीसीबी बैंक, फेडरल बैंक, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, कर्नाटक बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, पंजाब एवं सिंध बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया तथा यूको बैंक शामिल हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रेरा अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत रियल एस्टेट परियोजनाओं से संबंधित पृथक रेरा खाते केवल उन्हीं बैंकों में संचालित किए जाएं, जो रेरा नियमों एवं दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन करते हों। इससे परियोजनाओं के वित्तीय प्रबंधन में अनुशासन स्थापित होगा, निधियों के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा घर खरीदारों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। इस संबंध में छत्तीसगढ़ रेरा के अध्यक्ष  संजय शुक्ला ने कहा कि रेरा के अंतर्गत पंजीकृत परियोजनाओं में वित्तीय अनुशासन एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्राधिकरण की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। बैंकों के अंतिम पैनल में शामिल होने से परियोजना खातों की निगरानी एवं नियंत्रण व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी, जिससे घर खरीदारों का विश्वास बढ़ेगा और राज्य में रियल एस्टेट क्षेत्र अधिक व्यवस्थित एवं विश्वसनीय बनेगा। छत्तीसगढ़ रेरा ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य में रियल एस्टेट क्षेत्र को पारदर्शी, व्यवस्थित एवं भरोसेमंद बनाने के लिए इस प्रकार की पहलें भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगी।

नन्हे वीरों की बड़ी उड़ान: अबूझमाड़ के मल्लखंब खिलाड़ियों ने राष्ट्रपति के समक्ष रचा इतिहास

रायपुर. राष्ट्रपति  मुर्मु ने की प्रशंसा, ताली बजाकर हौसला बढ़ाया छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल और लंबे समय तक संघर्षों के लिए पहचाने जाने वाले अबूझमाड़ ने शनिवार को अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम के शुभारंभ समारोह में अबूझमाड़ मल्लखंब एंड स्पोर्ट्स एकेडमी के नन्हे खिलाड़ियों ने देश की सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारी राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु के समक्ष मल्लखंब की अद्भुत प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह पहला अवसर था जब अबूझमाड़ क्षेत्र के बच्चों ने एक साथ राष्ट्रपति के समक्ष मल्लखंब का जीवंत और साहसिक प्रदर्शन किया। लकड़ी के खंभे पर जब इन नन्हे कलाकारों ने असाधारण संतुलन, फुर्ती और कठिन करतबों का प्रदर्शन किया, तो मैदान में मौजूद दर्शक विस्मय से भर उठे। जोश, अनुशासन और उत्कृष्ट तकनीक से सजी इस प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भावविभोर कर दिया। राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु स्वयं बच्चों की प्रतिभा से अत्यंत प्रभावित हुईं । उन्होंने न केवल उनके साहस, कला और अनुशासन की मुक्तकंठ से प्रशंसा की, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी प्रदान कीं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की नींव नारायणपुर जिले के उन दुर्गम और बीहड़ इलाकों में पड़ी है, जहां आज भी बुनियादी सुविधाएं सीमित हैं। कुटूर, करपा और परपा जैसे सुदूर वनांचलों से निकलकर इन बच्चों ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा न तो संसाधनों की मोहताज होती है और न ही भौगोलिक सीमाओं की। इस संघर्षपूर्ण यात्रा के प्रेरणास्रोत मनोज प्रसाद हैं, जो एकेडमी के संस्थापक होने के साथ-साथ 16वीं बटालियन में आरक्षक के रूप में अपनी सेवाएं भी दे रहे हैं। उनके कुशल नेतृत्व, अनुशासन और सतत मार्गदर्शन में इन बच्चों ने अभावों को पीछे छोड़ते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इन नन्हे मल्लखंब खिलाड़ियों ने ‘इंडियाज गॉट टैलेंट’ का खिताब जीतकर और ‘रोमानियाज गॉट टैलेंट’ में उपविजेता बनकर पहले ही वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों में 40 से 50 से अधिक टेलीविजन शो, देशभर में सैकड़ों मंचीय प्रस्तुतियों, तथा अनेक प्रतियोगिताओं में स्वर्ण और रजत पदक जीतकर यह टोली निरंतर सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही है। अब यह दल अपनी मिट्टी की खुशबू, लोक-संस्कृति और अद्वितीय कौशल को और अधिक सशक्त रूप में सात समंदर पार ले जाने के लिए तैयार है। एकेडमी का अगला लक्ष्य भविष्य में ‘अमेरिकाज गॉट टैलेंट’ और ‘ब्रिटेन्स गॉट टैलेंट’ जैसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंचों पर भारत और अबूझमाड़ की लोक-कला का प्रदर्शन करना है। जगदलपुर में हुआ यह ऐतिहासिक प्रदर्शन न केवल अबूझमाड़ मल्लखंब एंड स्पोर्ट्स एकेडमी, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र और छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। यह आयोजन ‘बदलते बस्तर’ की उस सशक्त तस्वीर को प्रस्तुत करता है, जहां संघर्ष की जमीन से प्रतिभा के नए सितारे उभर रहे हैं।

गिरफ्तारी के बाद सांसद पप्पू यादव की बिगड़ी तबीयत

पटना. पटना में पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। 32 साल पुराने एक मामले में पुलिसिया कार्रवाई के बाद न सिर्फ विपक्ष ने सवाल उठाए हैं, बल्कि सांसद की बिगड़ती सेहत भी पूरे घटनाक्रम को संवेदनशील बना रही है। गिरफ्तारी के बाद रात भर चले हाई-वोल्टेज घटनाक्रम ने इस मामले को कानून से आगे सियासत के केंद्र में ला दिया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस सबसे पहले सांसद को IGIMS लेकर गई, जहां से आज सुबह उन्हें PMCH शिफ्ट किया गया। वहीं से अभी अभी IGIC में रेफर किया गया है बताया जा रहा है कि पुलिस ने बीती रात पटना स्थित आवास से सांसद पप्पू यादव को हिरासत में लिया। सांसद ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के समय कई पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में थे, जिससे प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। पप्पू यादव ने अपनी खराब तबीयत का हवाला देते हुए गिरफ्तारी का विरोध भी किया। IGIMS से PMCH तक: इलाज को लेकर विवाद गिरफ्तारी के बाद पुलिस सबसे पहले सांसद को IGIMS लेकर गई, जहां से आज सुबह उन्हें PMCH शिफ्ट किया गया। पप्पू यादव के आधिकारिक फेसबुक पेज और उनके निजी सचिव ने दावा किया कि IGIMS में उन्हें पूरी रात बेड नहीं मिला और स्ट्रेचर पर रखा गया। इलाज में लापरवाही के आरोपों ने मामले को और तूल दे दिया है। ‘साजिश’ का आरोप, प्रशासन कटघरे में सांसद के समर्थकों और उनके सचिव ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया कि नीट छात्रा के समर्थन में आवाज उठाने की वजह से पप्पू यादव को निशाना बनाया जा रहा है। यहां तक कहा गया कि उनके साथ साजिशन व्यवहार किया जा रहा है, जिससे उनकी जान को खतरा हो सकता है। कानूनी प्रक्रिया पर वकील ने उठाए सवाल पप्पू यादव के अधिवक्ता शिवनंदन भारती ने पुलिस की कार्रवाई को कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि 1995 के मामले में सांसद पहले ही जमानत पर थे। बेल टूटने के बाद पुलिस ने नोटिसों को जानबूझकर दबाया और बिना धारा 82 की प्रक्रिया पूरी किए सीधे धारा 83 के तहत कुर्की और गिरफ्तारी की गई, जो कानून के खिलाफ है। कोर्ट में आज पेशी, जमानत या जेल पर फैसला अब सभी की नजरें आज होने वाली कोर्ट पेशी पर टिकी हैं। पप्पू यादव की कानूनी टीम जमानत के लिए अर्जी दाखिल करने की तैयारी में है। अगर अदालत राहत देती है तो सांसद को रिहाई मिल सकती है, अन्यथा उन्हें जेल जाना पड़ सकता है। हालांकि, उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए अस्पताल के कैदी वार्ड में रखने का विकल्प भी खुला माना जा रहा है। स्वास्थ्य बनाम कानून: सियासत के बीच फंसा मामला एक ओर कानून अपना रास्ता तय कर रहा है, तो दूसरी ओर सांसद की तबीयत और राजनीतिक आरोप इस मामले को और जटिल बना रहे हैं। आने वाले घंटों में कोर्ट का फैसला न सिर्फ पप्पू यादव के भविष्य को तय करेगा, बल्कि बिहार की सियासत में भी इसका असर साफ दिखेगा।

पंजाब में अब रिटायर्ड SI की पत्नी को गोली मारी

होशियारपुर. पंजाब के होशियारपुर जिले के एक गांव में एक रिटायर्ड पुलिसकर्मी की पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना को लेकर पुलिस ने बताया कि शनिवार सुबह पंजाब के होशियारपुर जिले के एक गांव में मोटरसाइकिल सवार एक व्यक्ति ने 62 साल की एक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी। उन्होंने बताया कि महिला, जो पंजाब पुलिस के एक रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर की पत्नी थी, मेहंदवानी गुजरां गांव में पास के धार्मिक स्थल भूरी वालेयां दी कुटिया में माथा टेककर घर लौट रही थी। तभी एक अज्ञात हमलावर ने उस पर कई गोलियां चलाईं, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। पुलिस ने बताया कि सिविल अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। घटना के बाद हमलावर अपनी बाइक पर फरार हो गया। मृतका के पति, शाम लाल, पंजाब पुलिस से असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के पद से रिटायर हुए थे। DSP दलजीत सिंह खाख ने कहा कि हमलावर का पता लगाने और उसे गिरफ्तार करने के लिए इलाके के CCTV कैमरे की फुटेज खंगाली जा रही है। अधिकारी ने बताया कि अब तक कोई गैंगस्टरों का एंगल सामने नहीं आया है, और हत्या के पीछे के मकसद का पता लगाया जा रहा है।  आप नेता की हत्या इससे पहले जालंधर में शुक्रवार तड़के आम आदमी पार्टी के नेता और प्रॉपर्टी डीलर लक्की ओबेरॉय की गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें काले रंग की हुडी पहने एक शख्स ने लक्की को उस दौरान बिल्कुल पास से गोली मारी, जब वह गुरुद्वारा साहिब के पास अपनी कार में बैठे थे। उन्हें कई गोलियां लगी थी, जिसके बाद अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज अब भी अधूरा

जगदलपुर. जगदलपुर का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बस्तरवासियों के लिए राहत का केंद्र बनना था, लेकिन अब सवालों में है. दिल, किडनी और न्यूरो इलाज के लिए बाहर जाने की मजबूरी खत्म करने का दावा अब खोखला दिख रहा है. 240 बिस्तरों वाला अस्पताल शुरू तो हो गया, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है. कई विभागों में आधुनिक मशीनें मौजूद हैं, पर उन्हें संचालित करने वाले विशेषज्ञ नहीं. ओपीडी को आनन-फानन में शुरू कर दिया गया, लेकिन परामर्श की व्यवस्था कमजोर बनी हुई है. आईसीयू और आपात सेवाओं के 24 घंटे संचालन के दावे जमीन पर पूरे नहीं उतर रहे. गंभीर मरीजों को आज भी बड़े शहरों में रेफर किया जा रहा है. सरकारी दरों पर इलाज का वादा, निजी मॉडल की कार्यप्रणाली में उलझता दिख रहा है. मरीजों से शुल्क लिया जा रहा है, लेकिन सुविधाएं अधूरी हैं. अब सवाल यह है कि करोड़ों की लागत से बनी यह व्यवस्था आम जनता को कब राहत देगी. स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर प्रशासनिक निगरानी की जरूरत महसूस की जा रही है.