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तेज रफ्तार कंटेनर ने 15 यात्रियों को बेरहमी से कुचला, छह की मौत; सीएम योगी ने दिए तत्काल निर्देश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में यमुना एक्सप्रेसवे पर शनिवार तड़के एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। लघुशंका के लिए बस से उतरे यात्रियों को पीछे से आ रहे तेज रफ्तार कंटेनर ने टक्कर मार दी। हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति घायल हुआ है। यह घटना सुबह करीब 2:45 बजे की बताई जा रही है। हादसे की जानकारी होने पर सीएम योगी ने दुख जताया और हादसे का संज्ञान लिया है।  सीएम योगी ने लिया संज्ञान, दिए ये निर्देश  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क हादसे का संज्ञान लिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंच कर राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। कहां और कैसे हुआ हादसा पुलिस के अनुसार, बस दिल्ली के नांगलोई से कानपुर के रसूलाबाद जा रही थी। सुरीर थाना क्षेत्र में माइल स्टोन 88 के पास कुछ यात्रियों ने लघुशंका के लिए बस रोकने को कहा। चालक ने निर्धारित सुरक्षित स्थान (ग्रीन जोन) पर बस न रोककर रास्ते में ही बस खड़ी कर दी। यात्री बस से नीचे उतरे ही थे कि पीछे से आ रहा एक तेज रफ्तार कंटेनर बस से टकरा गया। टक्कर के बाद वाहन नियंत्रण से बाहर हुआ और नीचे खड़े यात्रियों को अपनी चपेट में ले लिया। इन लोगों की हुई मौत हादसे में जिन लोगों की मौत हुई, उनकी पहचान इस प्रकार हुई है: सोनू — निवासी सरवा कटरा, औरैया देवेश — निवासी अलेवल, बस्ती असलम — निवासी गणेश का पुरवा, कन्नौज संतोष — निवासी प्रेम नगर, दिल्ली दो अन्य यात्रियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है घटना में अमर दुबे (निवासी बेला, औरैया) घायल हुए हैं। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। पुलिस कार्रवाई सूचना मिलने पर पुलिस और एक्सप्रेसवे की इमरजेंसी टीम मौके पर पहुंची। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी में बस को असुरक्षित स्थान पर रोकना हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है।

झज्जर के ‘लाल’ ने आखिरी विकेट लेकर दिलाया अंडर-19 वर्ल्ड कप

झज्जर.  जिम्बाब्वे की धरती पर खेले गए अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप के रोमांचक फाइनल मुकाबले में भारत ने विश्व विजेता बनने का गौरव हासिल कर लिया है। इस ऐतिहासिक जीत के एक बड़े नायक झज्जर के गांव कुलाना निवासी ऑलराउंडर कनिष्क चौहान रहे, जिन्होंने मैच की आखिरी विकेट चटकाकर भारत की झोली में विश्व कप डाल दिया। शुक्रवार को खेले गए इस हाई-वोल्टेज फाइनल मुकाबले में कनिष्क चौहान ने गेंद और बल्ले दोनों से अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। जब टीम को रनों की सख्त जरूरत थी, तब कनिष्क ने मात्र 20 गेंदों पर 37 रनों की तूफानी पारी खेलकर भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। गेंदबाजी में कनिष्क ने 8 ओवर के स्पेल में 63 रन देकर 2 महत्वपूर्ण विकेट झटके। सबसे खास पल वह रहा जब उन्होंने मैच की अंतिम विकेट लेकर भारतीय तिरंगा लहरा दिया। इससे पहले 4 फरवरी को हुए सेमीफाइनल मुकाबले में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 55 रन देकर 2 विकेट हासिल किए थे। चैंपियन का होगा शाही स्वागतकनिष्क की इस वैश्विक सफलता के बाद उनके पैतृक गांव कुलाना में दीपावली जैसा माहौल है। कनिष्क की मां सरिता चौहान ने खुशी जाहिर करते हुए हरियाणवी अंदाज में कहा कि हमें तो पहले ही पता था कि वो मैदान में धुम्मा ठा देगा।" उन्होंने बताया कि चैंपियन बेटे के घर लौटने पर उसका स्वागत उसकी पसंदीदा डिश देशी घी के चूरमे और गाजर के हलवे से किया जाएगा। गांव में जीत की खुशी में मिठाइयां बांटी जा रही हैं। 9 फरवरी को भव्य समारोह और जागरण गांव कुलाना ने अपने लाडले के स्वागत के लिए पलक-पावड़े बिछा दिए हैं। कनिष्क के सम्मान में 9 फरवरी को गांव में एक विशाल सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। इसी दिन रात को परिवार की ओर से जीत की खुशी और कनिष्क के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक भव्य जागरण का भी आयोजन किया जाएगा। 4 साल की उम्र में थामी थी बैट – 26 सितंबर 2006 को जन्मे कनिष्क ने मात्र 4 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। उनकी प्रतिभा को देखते हुए परिवार साल 2014 में सिरसा शिफ्ट हो गया ताकि वे शाह सतनाम जी स्टेडियम में बेहतर ट्रेनिंग ले सकें। कनिष्क की सफलता को देखते हुए रायल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने उन्हें 30 लाख रुपये के बेस प्राइस पर अपनी टीम में शामिल किया है। साल 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू करने वाले कनिष्क 'बेस्ट आलराउंडर आफ द सीरीज' भी रह चुके हैं। पाकिस्तान के खिलाफ उनका रिकॉर्ड बेमिसाल रहा है, जहां वे लगातार दो बार 'मैन आफ द मैच' बने।

शिक्षा विभाग का फैसला- मास्टर कैडर के लिए PSTET-2 पास करना जरूरी

पटियाला. पंजाब में मास्टर कैडर के पदों पर प्रमोशन को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। डायरेक्टर ऑफ स्कूल एजुकेशन (सेकेंडरी) पंजाब की ओर से जारी आदेश के अनुसार अब मास्टर कैडर में नियुक्ति और प्रमोशन के लिए पंजाब स्टेट टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (PSTET-2) पास करना अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि पहले मेमो नंबर 19/23-16 A-4 (5) दिनांक 14.09.2017 के तहत कुछ कर्मचारियों को PSTET से छूट दी गई थी। यह छूट उन अध्यापकों को मिली थी जो NCTE की अधिसूचना 23.08.2010 और RTE एक्ट 2009 के तहत PSTET की पहली घोषणा 30.07.2011 के बाद सेवा में आए थे। हालांकि, अब माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 01 सितंबर 2025 को दिए गए फैसले (भरुनेग मुथविभा वेवत तैले अंजुमन-ए-इशात बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य) के बाद स्थिति बदल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में मास्टर कैडर में नियुक्ति और प्रमोशन के लिए PSTET-2 पास करना अनिवार्य घोषित किया है। इस फैसले के आधार पर शिक्षा विभाग ने पुराने नोटिस को रद्द करते हुए नया आदेश जारी किया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि जो कर्मचारी प्रमोशन के बाद मास्टर कैडर में कार्यरत हैं और जिनकी शेष सेवा अवधि 5 वर्ष से अधिक है, यदि उन्होंने अब तक PSTET-2 पास नहीं किया है तो उन्हें दो वर्षों के भीतर PSTET-2 पास करना होगा। ऐसा न करने पर विभाग की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

राज्यपाल डेका और CM साय ने काफिला रोककर देखी NH-30 के कार्य की प्रगति

कोंडागांव. रायपुर से जगदलपुर जाते समय शुक्रवार को केशकाल में अचानक राज्यपाल डेका और मुख्यमंत्री साय का काफिला रुक गया. वजह थी राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर चल रहा सड़क उन्नयन कार्य. मुख्यमंत्री ने मौके पर उतरकर निर्माण कार्य की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया और अधिकारियों को साफ शब्दों में चेताया कि काम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एनएच-30 बस्तर संभाग की सबसे अहम सड़क है, जो राजधानी रायपुर को बस्तर और अन्य राज्यों से जोड़ती है. ऐसे में सड़क निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए. उन्होंने अधिकारियों को तय मापदंडों के अनुसार काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए. केशकाल बायपास पर भी नजर निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री साय ने केशकाल नगर के साथ-साथ केशकाल बायपास निर्माण कार्य की जानकारी ली. कलेक्टर को निर्देश दिए गए कि निर्माण कार्य समय-सीमा के भीतर पूरा कराया जाए और नियमित निगरानी रखी जाए, ताकि आम लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके. कोंडागांव में दीदी की रसोई पहुंचे, फरा-अंगाकर रोटी चखी इसके बाद राज्यपाल डेका और मुख्यमंत्री साय कोंडागांव पहुंचे. यहां उन्होंने बिहान योजना के तहत स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित “मोर सुआद–दीदी की रसोई” का निरीक्षण किया. महिलाओं ने पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया. मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने बस्तर के पारंपरिक व्यंजन फरा और अंगाकर रोटी का स्वाद लिया. मुख्यमंत्री साय ने समूह की महिलाओं से आय और कामकाज की जानकारी ली और कहा कि स्व-सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का मजबूत माध्यम हैं. उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि महिलाओं को आजीविका के लिए हर संभव सहयोग दिया जाए. लोक कलाकारों की पेंटिंग्स देखी इस दौरान जिले के लोक कलाकारों की पेंटिंग्स का भी अवलोकन किया गया. मुख्यमंत्री साय ने कलाकारों से बातचीत कर उनके रचनात्मक प्रयासों की सराहना की. कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री, बस्तर सांसद, कोंडागांव विधायक सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे.

मध्यप्रदेश में सर्दी का असर: उमरिया में 7° तापमान, 10 जिलों में हल्का कोहरा, भोपाल सहित पारा लुढ़केगा

भोपाल  मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रदेश के कई जिलों में गुरुवार रात तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई। इससे सर्दी का असर और गहरा हो गया है। उमरिया सबसे ठंडा शहर रहा। यहां न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। रीवा, खजुराहो, मंडला और सतना जैसे शहरों में भी पारा 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल, इंदौर और ग्वालियर समेत बड़े शहरों में भी सर्दी के इस नए दौर काअसर साफ नजर आ रहा है। करीब एक हफ्ते राहत नहीं मौसम विभाग के अनुसार- आने वाले दिनों में ठंड से फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। 8 फरवरी से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो रहा है। इसका असर मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ेगा। हालांकि, 10 फरवरी से पहले बारिश या ओलावृष्टि की संभावना कम है, लेकिन कोहरा और सर्द हवाओं के चलते ठिठुरन और बढ़ सकती है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने और ठंड से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। कटनी के करौंदी में सबसे कम तापमान प्रदेश का न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री दर्ज किया गया। शहडोल के कल्याणपुर-खजुराहो में 6.6 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री, राजगढ़-उमरिया में 8 डिग्री, शाजापुर में 8.1 डिग्री, नौगांव-पचमढ़ी में 8.6 डिग्री, सतना में 9.2 डिग्री, दमोह में 9.5 डिग्री, मंडला-सीधी में 9.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया है। उमरिया सबसे ठंडा शहर रहा, जहां पारा गिरकर 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 11 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि जबलपुर में 10.8 डिग्री और उज्जैन में 13 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के अनुसार, उमरिया के बाद रीवा दूसरा सबसे ठंडा शहर रहा। यहां न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री दर्ज किया गया। खजुराहो में भी 7.4 डिग्री, मंडला में 7.9 डिग्री, नौगांव में 8.8 डिग्री, सतना में 8.9 डिग्री, राजगढ़ और शिवपुरी में 9 डिग्री, पचमढ़ी में 9.4 डिग्री तथा दमोह और मलाजखंड में 9.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। इधर, प्रदेश में घने कोहरे का खास असर नहीं देखा गया। शनिवार सुबह भोपाल, उज्जैन, इंदौर, राजगढ़, रतलाम, मंडला, सतना समेत करीब 10 जिलों में मध्यम कोहरा दर्ज किया गया, जिससे सुबह के समय हल्की ठंड और दृश्यता में कमी महसूस की गई। कटनी के करौंदी में सबसे कम तापमान प्रदेश का न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री दर्ज किया गया। शहडोल के कल्याणपुर-खजुराहो में 6.6 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री, राजगढ़-उमरिया में 8 डिग्री, शाजापुर में 8.1 डिग्री, नौगांव-पचमढ़ी में 8.6 डिग्री, सतना में 9.2 डिग्री, दमोह में 9.5 डिग्री, मंडला-सीधी में 9.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया है। एक नजर प्रदेश में तापमान पर MP में 4 दिन कड़ाके की ठंड  ग्वालियर-चंबल में असर ज्यादा भोपाल-उज्जैन में भी पारा गिरेगा ग्वालियर, खजुराहो समेत 11 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे  कटनी, शहडोल और छतरपुर सबसे ठंडे  वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सकुर्लेशन की वजह से प्रदेश में ओले-बारिश शहडोल के कल्याणपुर-खजुराहो में 6.6 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री राजगढ़-उमरिया में 8 डिग्री, शाजापुर में 8.1 डिग्री, नौगांव-पचमढ़ी में 8.6 डिग्री सतना में 9.2 डिग्री, दमोह में 9.5 डिग्री, मंडला-सीधी में 9.8 डिग्री रहा

सीएम रेखा का बड़ा बयान: दिल्ली के कूड़े के पहाड़ कब तक होंगे समाप्त?

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली के भलस्वा, गाजीपुर और ओखला में तीन लैंडफिल साइट पर कचरा के पहाड़ बन चुके हैं। इन्हें खत्म करने को लेकर दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने बड़ा बयान दिया है। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में मुख्यमंत्री ने बताया- 2 कूड़े के पहाड़ ओखला और भलस्वा पर बहुत ही शिद्दत से काम कर रहे हैं। पूरी उम्मीद है कि इस साल के अंत में दोनों पहाड़ों पर मौजूद लीगेसी वेस्ट को खत्म कर पाएंगे। ओखला और भलस्वा लैंडफिल साइट पर क्या कहा लीगेसी वेस्ट का मतलब, सालों से डंपिंग ग्राउंड में जमा कचरा। इसे लंबे समय से प्रोसेस नहीं किया गया होता है। इसमें मिट्टी, प्लास्टिक, पॉलीथिन, कांच, धातू अन्य चीजें भी मिली होती हैं। इसी कचरे को लेकर सीएम रेखा ने कहा है कि हमें पूरी उम्मीद है कि ओखला और भलस्वा लैंडफिल साइट का लीगेसी वेस्ट 2026 के अंत तक खत्म कर पाएंगे। गाजीपुर लैंडफिल साइट पर क्या कहा तीसरे कचरा के पहाड़ पर बात करते हुए कहा- गाजीपुर लैंडफिल साइट को हो सकता है कि दो साल और लगे। लेकिन दिल्ली में जितना भी कूड़ा पैदा होता है, उसके 100% प्रोसेस के लिए जो प्लांट बन रहे हैं उसको बढ़ा रहे हैं। लेगेसी वेस्ट को निपटाने के लिए अलग-अलग सेगरीगेट कर रहे हैं। इसके बाद सीएम रेखा ने आप और कांग्रेस के दौर की सरकारों पर सवाल खड़े किए। पहला बायोगैस प्लांट हमने शुरू किया लगभग 15 साल कांग्रेस और 11 साल आम आदमी पार्टी की सरकार रहीं, क्या कभी इन लोगों ने बायोगैस प्लांट लगाने की सोची। क्या उन लोगों ने कभी इस पर काम किया? क्यों पहला बायोगैस प्लांट हमारे समय में हमने आकर शुरू किया। सीएम रेखा ने बायोट्रीटमेंट प्लांट का जिक्र करते हुए बताया- 200 टन गोबर प्रोसेस करने वाला वेस्ट मेनेजमेंट प्लांट चालू हो गया है। 400 टन क्षमता वाले अन्य प्लांट इस साल के अंत तक चालू हो जाएंगे।

JNU हड़ताल: पदाधिकारियों को एक साल के लिए बाहर किया गया, छात्र-नेताओं ने वापसी की की मांग

 नई दिल्ली जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्र राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. विश्वविद्यालय प्रशासन के उस फैसले की कड़ी निंदा की है जिसमें जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के सभी मौजूदा पदाधिकारियों और इसके पूर्व अध्यक्ष को दो सेमेस्टर यानी 1 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है. इसके बाद से विश्वविद्यालय में हड़ताल का आयोजन किया गया.   निष्कासित किए गए लोगों में जेएनयूएसयू अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका के बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष नीतीश कुमार शामिल हैं. विश्वविद्यालय ने छात्रों के परिसर में प्रवेश पर भी रोक लगा दी है.  जारी हुआ बयान संकाय संघ ने कहा है कि यह कदम कुलपति प्रोफेसर शांतिश्री धुलिपुडी पंडित के नेतृत्व में विरोध को दबाने के लिए किया गया है. निष्कासित छात्रों को कैंपस में आने पर रोक लगा दी गई है और उन पर भारी जुर्माना लगाया गया है. क्या है विवाद?  यह विवाद विश्वविद्यालय के लाइब्रेरी में फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी की स्थापना को लेकर था. इस दौरान कुलपति पर भी कई तरह के आरोप लगाए गए हैं. 2 फरवरी को जारी कार्यालय आदेश में मुख्य प्रॉक्टर ने बताया कि राजनीति अध्ययन केंद्र के पीएचडी छात्र नीतीश कुमार को दो सेमेस्टर के लिए निष्कासित किया गया है. उन पर विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है और 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. आदेश के अनुसार, जांच समिति ने छात्रों को विश्वविद्यालय लाइब्रेरी के अंदर लगाए गए फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी उपकरणों को तोड़ने के लिए जिम्मेदार माना है. वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई अनुशासनात्मक नियमों के तहत की गई है और पूरी प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही फैसला लिया गया है.  छात्रों ने की आलोचना  जेएनयू छात्र संघ और वामपंथी छात्रों के ग्रुप ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है. उनका कहना है कि यह कदम छात्रों की असहमति दबाने के लिए किया गया है. बयान में जेएनयूएसयू ने प्रशासन और कुलपति पर आरोप लगाया कि वे आरएसएस और सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं.  समय को लेकर भी हुए सवाल  जेएनयूएसयू की ओर से निष्कासन के समय पर भी सवाल उठाए हैं. यह कदम उस समय लिया गया जब छात्र यूजीसी के नए नियम 2026 के खिलाफ जुलूस और छात्र संसद जैसे विरोध प्रदर्शन करने वाले थे. छात्र संघ का कहना है कि इस कार्रवाई का मकसद छात्र आंदोलन को कमजोर करना और आने वाले प्रदर्शन की तैयारी को रोकना है. 

पप्पू यादव की तबीयत हुई बिगड़ी, गिरफ्तारी के बाद IGIMS से PMCH भेजा गया

पूर्णिया  बिहार की राजधानी पटना में पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को पुलिस ने एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया. पुलिस टीम ने उन्हें मंदिरी स्थित आवास से कई घंटे की मशक्कत के बाद हिरासत में लिया और पहले मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले गई. गिरफ्तारी के बाद उन्हें IGIMS अस्पताल लाया गया, जहां बताया गया कि उन्हें लंबे समय तक स्ट्रेचर लेटाया गया और बेड उपलब्ध नहीं कराया गया. बाद में उन्हें आगे की जांच के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल भेजा गया. पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी करीब तीन दशक पुराने मामले से जुड़ी है. यह केस गर्दनीबाग थाने में वर्ष 1995 में दर्ज हुआ था. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनका मकान धोखे से किराए पर लेकर सांसद कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया गया और यह तथ्य किराए के समय छुपाया गया. अदालत में लगातार पेश नहीं होने के कारण पहले गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ, फिर इश्तेहार चस्पा करने का आदेश दिया गया. इसके बाद भी पेशी नहीं होने पर कोर्ट ने संपत्ति कुर्क करने का अंतिम आदेश दिया और कार्रवाई तेज हो गई. पप्पू यादव का पुलिस पर आरोप गिरफ्तारी के दौरान पप्पू यादव ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि उन्हें आशंका थी कि पुलिस उन्हें नुकसान पहुंचा सकती है. उनका कहना था कि वे सीधे कोर्ट जाएंगे और पुलिस स्टेशन नहीं जाएंगे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस सिविल ड्रेस में आई और उन्हें लगा जैसे अपराधियों की तरह व्यवहार किया जा रहा हो. तीन दशक पुराने मामले पर पप्पू यादव हुए अरेस्ट फिलहाल पुलिस उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई के लिए ले गई है. करीब तीन दशक पुराने इस विवाद में हुई ताजा कार्रवाई को राज्य की राजनीति में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है और मामले पर सभी की नजर बनी हुई है.

IAS पुलकित गर्ग का अनोखा कदम: बेटी को आंगनबाड़ी में कराया एडमिशन, फैसले पर हो रही चर्चा

चित्रकूट  चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग इन दिनों एक खास फैसले को लेकर चर्चा में हैं. जहां आमतौर पर सक्षम परिवार अपने बच्चों को महंगे प्राइवेट प्ले स्कूलों में दाखिला दिलाना पसंद करते हैं, वहीं IAS अधिकारी पुलकित गर्ग ने अपनी साढ़े तीन साल की बेटी सिया का एडमिशन सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र में कराकर मिसाल पेश की है. उनके इस कदम को सरकारी शिक्षा और आंगनबाड़ी व्यवस्था पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है. पुलकित गर्ग की बतौर जिलाधिकारी पहली तैनाती चित्रकूट में हुई है. पद संभालने के कुछ समय बाद जब उनकी बेटी के प्ले स्कूल में एडमिशन की बारी आई, तो उन्होंने इसे औपचारिकता की तरह नहीं लिया, बल्कि एक जागरूक अभिभावक की तरह विकल्पों की गंभीरता से पड़ताल की. उन्होंने और उनकी पत्नी ने जिले के कई निजी प्ले स्कूलों के साथ-साथ कई आंगनबाड़ी केंद्रों का भी दौरा किया. सुविधाएं, वातावरण, बच्चों की गतिविधियां और शिक्षण व्यवस्था देखने के बाद उन्होंने जिला मुख्यालय में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र को सबसे उपयुक्त पाया. जिस आंगनबाड़ी केंद्र में बेटी सिया का दाखिला कराया गया है, वहां करीब 35 बच्चे पंजीकृत हैं. सिया भी अन्य बच्चों की तरह उनके साथ बैठकर एक्टिविटीज में भाग लेती है, पढ़ाई करती है और मध्याह्न भोजन के समय सबके साथ जमीन पर बैठकर खाना खाती है. केंद्र में बच्चों के लिए खेल-खेल में सीखने का माहौल तैयार किया गया है. रंगीन दीवारें, तस्वीरें, खिलौने, एजुकेशन किट, एबीसी और नंबर चार्ट जैसे साधन हैं, जो प्राइमरी एजुकेशन को रोचक बनाते हैं. जिलाधिकारी पुलकित गर्ग का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा की मजबूती बड़ी बिल्डिंग्स या हाई फीस से नहीं, बल्कि सही माहौल, देखभाल और एक्टिविटी से आती है. उन्होंने कहा कि प्ले स्कूल या प्री-स्कूल स्तर की शिक्षा बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.  आंगनबाड़ी केंद्रों में सरकार की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षण और शिक्षण सामग्री पर लगातार काम किया जा रहा है. कार्यकर्ताओं को यह तय शेड्यूल दिया जाता है कि बच्चों को रोज क्या और कैसे सिखाना है- जैसे कहानियां, भावगीत, खेल गतिविधियां और बुनियादी सीख. आईएएस पुलकित गर्ग ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियमित ट्रेनिंग भी कराई जा रही है, ताकि बच्चों को बेहतर प्रारंभिक शिक्षा और पोषण मिल सके. छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और मानसिक विकास पर यहां विशेष ध्यान दिया जाता है. उनका कहना है कि अभिभावकों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर भरोसा करना चाहिए और छोटे बच्चों को वहां जरूर भेजना चाहिए. आईएएस अधिकारी के इस फैसले का एक प्रशासनिक संदेश भी माना जा रहा है. यदि व्यवस्थाएं मजबूत हों तो अधिकारी खुद भी उन पर भरोसा दिखा सकते हैं. पुलकित गर्ग ने कहा कि उनका लक्ष्य जिले की सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड करना है. जहां जरूरत होगी वहां मरम्मत, नवीनीकरण और संसाधन बढ़ाने का काम किया जाएगा. स्थानीय लोगों और शिक्षा से जुड़े लोगों ने इस कदम की सराहना की है. उनका कहना है कि जब जिले के शीर्ष अधिकारी खुद अपने बच्चे को आंगनबाड़ी भेजते हैं तो इससे व्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है और समाज में सकारात्मक संदेश जाता है.

कानपुर हादसा: मुंडन संस्कार से लौट रहे परिवार की कार नहर में समाई, तीन की मौत, एक गंभीर

 कानपुर देहात कानपुर देहात में बड़ा हादसा हो गया. जहां मुंडन संस्कार से लौट रहे कार सवार युवकों की कार अनियंत्रित होकर नहर में गिर गई. जिससे तीन लोगों की मौत हो गई. जबकि एक घायल हो गया. हादसा रसूलाबाद क्षेत्र के हरि निवादा गांव के पास हुआ. जहां कार देखते ही देखते नहर में समा गई और वाहन के अंदर पानी भर गया. घटना के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने अद्भुत साहस का परिचय दिया. लोगों ने तुरंत कार का शीशा तोड़कर अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कार सवार चारों युवकों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रसूलाबाद पहुंचाया गया. ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर शैलेन्द्र ने जांच के बाद राजेश श्रीवास्तव, मुम्मू श्रीवास्तव और चालक करिया को मृत घोषित कर दिया. जबकि घायल अभिषेक की हालत गंभीर देखते हुए उसे कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर कर दिया गया है. घायल अभिषेक ने बताया कि सभी लोग गोंडा जिले के निवासी हैं और अकौड़िया गांव में मुंडन संस्कार में शामिल होने आए थे. कार्यक्रम से लौटते समय अचानक कार अनियंत्रित हुई और नहर में गिर गई. ग्रामीणों की मदद से उन्हें बाहर निकाला गया. लेकिन उनके पिता, चाचा और चालक की जान नहीं बच सकी. सूचना मिलते ही परिजन भी मौके पर पहुंच गए. फिलहाल पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है.    पुलिस ने बताया कि कानपुर देहात में एक कार अनियंत्रित होकर नहर में गिर गई. जिससे तीन लोगों की मौत हो गई. जबकि एक व्यक्ति घायल हो गया. मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है.