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उपमुख्यमंत्री सिन्हा ने भूमि सर्वे पर ‘लास्ट चांस’ का प्लान किया लॉक

पटना. बिहार में जमीन से जुड़े विवादों और उलझनों को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है. उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ शब्दों में एलान किया है कि राज्य में चल रहा विशेष भूमि सर्वेक्षण किसी भी हाल में वर्ष 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा. इस लक्ष्य में अब कोई ढिलाई, बहाना या लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी. 2011 में रखी गई नींव, अब दिखेगा जमीन पर असर विजय कुमार सिन्हा ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2011 में बिहार विशेष भूमि सर्वेक्षण की नींव रखी थी. उद्देश्य स्पष्ट था—भूमि अभिलेखों को दुरुस्त करना, मालिकाना हक को साफ करना और दशकों से चले आ रहे जमीन विवादों का समाधान निकालना. अब सरकार चाहती है कि यह लंबित काम तय समय सीमा में अपने अंजाम तक पहुंचे. उपमुख्यमंत्री ने आम नागरिकों को भरोसा दिलाया कि सर्वेक्षण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी. यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी, त्रुटि या मनमानी सामने आती है तो लोग विभाग में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं. ऐसी शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लिया जाएगा और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी. उनका कहना साफ था—सर्वे सुधार का माध्यम बने, विवाद का नहीं. पहले चरण में लगभग पूरा, दूसरे चरण में रिकॉर्ड स्वघोषणाएं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पहले चरण में 20 जिलों के 89 अंचलों में किस्तवार का काम 99.92 प्रतिशत और खानापुरी 94.4 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है. करीब 31 प्रतिशत गांवों में अंतिम अधिकार अभिलेख प्रकाशित किए जा चुके हैं. वहीं दूसरे चरण में 36 जिलों के 444 अंचलों में हवाई सर्वेक्षण और ग्राम सभा की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और रैयतों से 2.70 करोड़ से अधिक स्वघोषणाएं प्राप्त हुई हैं. जमीन से जुड़ी अनिश्चितता खत्म करने की कोशिश भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के अनुसार शुरुआती दौर में तकनीकी मार्गदर्शिका में देरी से काम प्रभावित हुआ, लेकिन अब प्रक्रिया रफ्तार पकड़ चुकी है. सरकार का दावा है कि सर्वे पूरा होते ही जमीन से जुड़े मुकदमे, धोखाधड़ी और भ्रम की बड़ी समस्या का समाधान संभव हो सकेगा.

हरियाणा में अब 58 साल में रिटायर होंगे सरकारी कर्मचारी

पंचकूला. हरियाणा के सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों और सरकारी कंपनियों में अब केवल दिव्यांग, नेत्रहीन, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और न्यायिक अधिकारी ही 60 साल की आयु तक सरकारी नौकरी कर सकेंगे। अन्य सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को 58 साल का होते ही सेवानिवृत्त होना होगा। मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बिना किसी भी कर्मचारी और अधिकारी को 58 साल की उम्र पूरी होने के बाद सेवा विस्तार नहीं दिया जा सकेगा। वित्त विभाग की ओर से इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल, सभी मंडलायुक्तों, उपायुक्तों और एसडीएम को आदेश जारी कर दिया गया है। हरियाणा सिविल सेवा (सामान्य) नियम में संशोधन किया गया है, जिसके अनुसार प्रत्येक सरकारी कर्मचारी उस महीने के अंतिम दिन की दोपहर को सेवानिवृत्त होगा, जिस दिन वह सेवानिवृत्ति आयु प्राप्त कर लेता है। सेवानिवृत्ति की आयु 58 वर्ष जिस सरकारी कर्मचारी की जन्मतिथि महीने के अंतिम दिन पड़ती है तो उसे दिन की दोपहर को सेवा से सेवानिवृत्त कर दिया जाएगा। 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग, नेत्रहीन, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों और न्यायिक अधिकारियों के लिए सेवानिवृत्ति आयु 60 साल रहेगी, जबकि अन्य सभी कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति की आयु 58 वर्ष है। केवल सार्वजनिक हित और असाधारण परिस्थितियों में ही किसी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति आयु के बाद भी सेवा में रखा जा सकेगा, लेकिन इसके लिए भी सरकार की मंजूरी लेनी होगी। एक आंख वाले कर्मचारी को अंधा या दिव्यांग व्यक्ति नहीं माना जाएगा। जब कोई सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्ति के लिए पात्र हो तो सेवानिवृत्ति वाले महीने की सात तारीख को एक कार्यालय आदेश जारी किया जाएगा, जिसकी प्रति हरियाणा के प्रधान महालेखाकार को भी भेजनी होगी। ऐसी स्थिति में निलंबित सरकारी कर्मचारी को पुनः सेवा में बहाल करने की आवश्यकता नहीं है। तीन महीने पहले करना होगा विभागाध्यक्ष को सूचित इसी तरह सेवा में रहते हुए विकलांग हो जाने वाले सरकारी कर्मचारी को 58 वर्ष की आयु प्राप्त करने से कम से कम तीन महीने पहले अपने विभागाध्यक्ष को सूचित करना होगा। उन्हें रोहतक स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक की अध्यक्षता में गठित चिकित्सा बोर्ड या चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआइएमईआर) के निदेशक द्वारा गठित चिकित्सा बोर्ड से चिकित्सा जांच करानी होगी। बोर्ड से चिकित्सा रिपोर्ट प्राप्त होने पर नियुक्ति प्राधिकारी या विभागाध्यक्ष, जो भी उच्च पद पर हो, ऐसे शारीरिक रूप से विकलांग कर्मचारी को सेवा विस्तार देने या न देने का अंतिम निर्णय लेगा।

550 किसानों को फिर मिला धान बेचने का मौका

बिलासपुर. सरकार द्वारा धान खरीदी के लिए दो दिन और बढ़ाने का निर्णय लेने के बाद जिले के 550 किसानों को भी इसका लाभ मिल सकेगा। इनमें से ज्यादातर किसान ऐसे थे, जिनका टोकन कटने के बाद भौतिक सत्यापन भी किया जा चुका था, लेकिन धान खरीदी का नंबर ही नहीं लग सका। जिले में बढ़ाई गई दो तिथियों में करीब 20 हजार क्विंटल धान की खरीदी और होने का अनुमान है। सहकारी समितियों में समर्थन मूल्य पर धान नहीं बेच पाने का मलाल अब जिले के 550 किसानों को नहीं रहेगा। सरकार के द्वारा धान विक्रय के लिए दी जाने वाली दो अतिरिक्त तिथियों 6 एवं 7 फरवरी को वे अपना धान उपार्जन केंद्रों में बेच सकेंगे। धान खरीदी के लिए तय अंतिम तीन दिनों 27, 28 एवं 29 जनवरी के लिए जिले के विभिन्न उपार्जन केंद्रों के 414 किसानों ने न केवल टोकन प्राप्त कर लिया था, बल्कि उनके भौतिक सत्यापन भी किए जा चुके थे, लेकिन इनके द्वारा धान नहीं बेचा जा सका। इसी तरह करीब 136 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने व्धान बेचने के लिए टोकन कटवाने का रिक्वेस्ट डाला था। कुल मिलाकर धान बेचने से रह गए जिले के 550 किसानों से ही अब अगली दो तिथियों में धान खरीदा जाना है। इन किसानों से अनुमानित तौर पर 20 हजार क्विंटल धान की खरीदी होने की बात कही जा रही है। निर्धारित अवधि तक ही चली धान की खरीदी : धान खरीदी को लेकर दो दिन की बढ़ोतरी की बात भले ही कही जा रही है, लेकिन किसानों के अनुसार समयसीमा में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। किसानों द्वारा यह बात कही जा रही है कि धान खरीदी प्रारंभ करने के लिए तय की गई तिथि दिनांक 15 नवंबर को शनिवार था, जिससे उस दिन खरीदी नहीं की गई थी। इसी तरह धान खरीदी के लिए तय अंतिम तिथि 31 जनवरी को भी शनिवार का अवकाश था। प्रारंभ और अंत के जिन दो दिनों में अवकाश के कारण खरीदी नहीं हो सकी थी, वही दो दिन अब और किसानों को धान विक्रय के लिए दिए गए हैं, जिसमें तिथि में बढ़ोतरी जैसी कोई बात ही नहीं है।

भोपाल से विदिशा, रायसेन और सीहोर तक मेट्रो सेवा शुरू, राजधानी को मिलेगा सैटेलाइट शहरों से कनेक्शन

भोपाल  मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत अब भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन यानी बीएमआर में भी रूट तय होगा। भोपाल से सीहोर, विदिशा, रायसेन, राजगढ़ की ओर मेट्रो की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। बीएमआर के लिए बन रही डीपीआर में इसके प्रावधान किए जा रहे हैं। भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन की योजना में मेट्रो को शामिल करने शासन ने बीडीए को निर्देशित किया है। रोड नेटवर्क के साथ मेट्रो नेटवर्क से पास के शहरों में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप को भोपाल से सीधे जोड़ा जाएगा। भोपाल शहर में 6 लाइनें तय अभी मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट में भोपाल शहर में ही छह लाइनें तय की हुई है। 103 किमी लंबी लाइन में से फिलहाल 6.22 किमी की लाइन पर मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू किया जा चुका है। पहले चरण की दो लाइनों के 32 किमी में मेट्रो को आमजन यात्रियों के साथ चलाने 2028 से 2030 तक की समय सीमा तय की है। मेट्रो रेल कारपोरेशन धीरेधीरे मेट्रो को चरणबद्ध तरीके से तैयार करने की योजना बना रहा है। अब वहभोपाल के भीतर के साथ मेट्रोपॉलिटन रीजन वाले क्षेत्रों तक भी रूट तय करेगा। उपनगरीय परिवहन में बदलेगी मेट्रो बीएमआर की डीपीआर तैयार करने वाले अफसरों के अनुसार भोपाल के लिए लोकल ट्रांसपोर्ट का हिस्सा बनने जा रही मेट्रो बीएमआर में उपनगरीय रेल की भूमिका में रहेगी। इससे मौजूदा व बीएमआर में प्रस्तावित उपनगरों को जोड़ा जाएगा। बीएमआर में भोपाल की बसाहट को सैटेलाइट टाउनशिप से पास के शहरों में शिफ्ट किया जाएगा। यहां आबादी का दबाव बढऩे से रोकने के लिए नई टाउनशिप विकसित होगी। इन्हीं को आवाजाही में मदद के लिए मेट्रो उपनगरीय सेवा विकसित होगी। सवाल: छह किमी में दस साल, बीएमआर कब बनेगी? बीएमआर में मेट्रो की प्लानिंग तो ठीक है, लेकिन मौजूदा 103 किमी के प्रस्तावित नेटवर्क में से महज सात फीसदी ही बन पाया है। शहरी नेटवर्क का 93 फीसदी बनना बाकी है। सात फीसदी निर्माण में यूरोपियन बैंक से लोन लिया हुआ है। बचे हुए हिस्से को बनाने और बीएमआर से जुड़े शहरों तक मेट्रो पहुंचाने कई गुना ज्यादा बजट और समय लगेगा। मेट्रो, रोड सबका विकल्प है बीएमआर के लिए शासन की मंशा के अनुसार योजना तय की जा रही है। संबंधित क्षेत्रों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट सभी माध्यमों से जोड़ा जाएगा। मेट्रो, रोड सबका विकल्प है। -संजीव सिंह, अध्यक्ष बीडीए- संभागायुक्त

चंबल में रेत माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 2 दिन में 4 करोड़ से अधिक की अवैध रेत नष्ट, मुरैना में पकड़े गए माफिया

मुरैना  चंबल की रेत पर वर्षों से चल रहा माफिया का खेल अब प्रशासन के सीधे निशाने पर आ गया है. जिले के कलेक्टर ने रेत माफिया की कमर तोड़ने के लिए अधिकारियों को पूरी तरह फ्री हैंड दे दिया है. टास्क फोर्स की बैठक के बाद वन विभाग, पुलिस, राजस्व, परिवहन और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू की. चंबल में करोड़ों की रेत नष्ट की गई महज दो दिनों में 4 करोड़ रुपये से अधिक की चंबल में रेत नष्ट की जा चुकी है. बुधवार की सुबह से शाम तक 20 जेसीबी और 5 लोडरों की मदद से चंबल राजघाट स्थित पिपरई और भानपुर क्षेत्र में रेत को नष्ट किया गया. इस सख्त कार्रवाई से रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है, वहीं हाईवे पर लगने वाली रेत मंडी भी दो दिनों से बंद पड़ी है. प्रशासन का यह अभियान अगले 15 दिनों तक लगातार जारी रहेगा. बीते रोज जिला कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने टास्क फोर्स की बैठक में स्पष्ट निर्देश देते हुए अधिकारियों को रेत माफियाओं पर सख्ती से कार्रवाई करने के लिए फ्री हैंड दे दिया था. इसके बाद प्रशासनिक मशीनरी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर आई. कलेक्टर के निर्देश पर वन मंडलाधिकारी हरिश्चंद्र बघेल के नेतृत्व में वन विभाग, पुलिस, परिवहन, राजस्व और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने चंबल राजघाट पुल क्षेत्र के पिपरई और भानपुर में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की. चंबल नदी किनारे डंप कर रखी गई हजारों ट्राली रेत नष्ट मंगलवार और बुधवार को लगातार चली इस कार्रवाई में करीब 20 जेसीबी मशीनों और 5 लोडरों की मदद से 16,500 से अधिक ट्रॉली अवैध रेत को नष्ट किया गया. अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में चंबल नदी किनारे डंप कर रखी गई लगभग 1000 से अधिक ट्रॉली से अधिक रेत को नष्ट किया गया, जबकि बुधवार सुबह से शाम तक दोबारा अभियान चलाकर करीब 15,000 ट्रॉली अवैध रेत को मिट्टी में मिला दिया गया. यह रेत, माफियाओं द्वारा अवैध रूप से खनन कर नदी किनारे जमा की गई थी.  कार्रवाई के दौरान 150 पुलिस के जवान और 50 वन रक्षक तैनात दो दिनों में नष्ट की गई रेत का बाजार मूल्य करीब 4 करोड़ 10 लाख रुपये आंका गया है. प्रशासन इसे चंबल क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बता रहा है. कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. मौके पर करीब 150 पुलिस जवान और 50 वन रक्षक तैनात रहे, जिससे किसी भी तरह की अव्यवस्था या विरोध की स्थिति न बन सके. इस बड़ी कार्रवाई से रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है. हाईवे पर लगने वाली रेत मंडियां भी बीते दो दिनों से बंद पड़ी हैं. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि आने वाले दिनों में भी लगातार कार्रवाई जारी रहेगी. चंबल में अवैध रेत कारोबार पर अब आर-पार की लड़ाई के संकेत साफ नजर आ रहे हैं. ट्रैक्टर-ट्रॉली का रास्ता पूरी तरह बंद किया गया कलेक्टर के निर्देश पर चंबल नदी से आने-जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर जेसीबी मशीनों से गहरे गड्ढे खुदवाए गए हैं, जिससे ट्रैक्टर-ट्रॉली का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है. रेत विनिष्टीकरण की इस बड़ी कार्रवाई में मंगलवार को 6 जेसीबी मशीनों का उपयोग किया गया, जबकि बुधवार को अभियान और तेज करते हुए 20 जेसीबी और 5 लोडरों की मदद ली गई. कार्रवाई के दौरान वनमंडलाधिकारी हरिशचंद्र बघेल के नेतृत्व में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र पाल सिंह डाबर, एसडीएम मुरैना बीएस कुशवाह, जिला खनिज अधिकारी सुखदेव निर्मल, पुलिस लाइन आरआई रविकांत शुक्ला, सूबेदार गजेंद्र सिंह परिहार, राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य के एसडीओ सहित संबंधित राजस्व अमला मौके पर मौजूद रहा. 

फर्जी बिल और दोहरे भुगतान के मामले में जिला प्रबंधक की सेवा समाप्त, 2.80 लाख के गबन पर कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई

उमरिया जिले में ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े बहुचर्चित गबन मामले में आखिरकार प्रशासन ने सख्त कदम उठा लिया है। फर्जी भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सामने आई खबरों के बाद कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन ने बड़ा फैसला लेते हुए जिला प्रबंधक (कृषि) महेन्द्र कुमार बारसकर की संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है। यह आदेश मध्य प्रदेश शासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा मध्य प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिला स्तर पर प्रदत्त प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों के आधार पर जारी किया गया है।  कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि महेन्द्र कुमार बारसकर पर प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के साथ-साथ कर्तव्य निर्वहन में घोर लापरवाही के गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं। इन्हीं कारणों से उनकी संविदा नियुक्ति को तत्काल समाप्त किया गया है। आदेश जारी होते ही प्रभावशील हो गया है, जिससे यह साफ संदेश गया है कि शासकीय योजनाओं में गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। दरअसल, यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब अमर उजाला ने ग्रामीण आजीविका मिशन में हुए फर्जी भुगतान और गबन की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर में बताया गया था कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं के अंतर्गत प्रशिक्षण व्यय और मानदेय की स्वीकृत राशि का एक बार भुगतान होने के बावजूद उसी दावे का दोबारा भुगतान किया गया। इस दोहरे भुगतान से 1,43,440 रुपये का गबन सामने आया। इसके अलावा बिना सक्षम स्वीकृति के 1,36,683 रुपये का भुगतान कर दिया गया। कुल मिलाकर 2,80,123 रुपये की शासकीय राशि के दुरुपयोग का मामला उजागर हुआ। मामले की शिकायत जिला परियोजना प्रबंधक चंद्रभान सिंह द्वारा की गई थी। इसके बाद जिला मिशन प्रबंधन इकाई में वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के अंतरिक निरीक्षण के दौरान बिल-वाउचर, कैश बुक, लेजर, व्यय पंजी और बैंक स्टेटमेंट का मिलान किया गया। जांच में पाया गया कि कुछ भुगतान एक ही स्वीकृति आदेश के आधार पर दो बार किए गए, जबकि कुछ भुगतान बिना किसी वैध स्वीकृति के कर दिए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत उमरिया के निर्देश पर कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। थाना प्रभारी मदनलाल मरावी के अनुसार फर्जी बिल और वाउचर के आधार पर राशि निकाले जाने की पुष्टि हुई है। धारा 316(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच जारी है, हालांकि अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है।  प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हुई और आखिरकार कलेक्टर ने कड़ा निर्णय लेते हुए सेवा समाप्ति की कार्रवाई की। यह फैसला न केवल इस मामले में अहम माना जा रहा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि मीडिया की सक्रियता और पारदर्शिता कैसे सरकारी तंत्र को जवाबदेह बनाने में भूमिका निभाती है। अब सबकी निगाहें आगे की पुलिस जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।  

लक्ष्मण तिवारी ने मऊगंज से पूर्व विधायक रहते हुए कांग्रेस से इस्तीफा दिया

रीवा  रीवा में कांग्रेस पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। मऊगंज से पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने आज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र में लक्ष्मण तिवारी ने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि कांग्रेस में गुटबाज़ी हावी हो चुकी है, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है। 

बिहार विधानसभा में चर्चा के केंद्र में NEET मामला और बजट

पटना. बिहार विधानसभा के बजट सत्र का आज तीसरा दिन है और सदन का माहौल गरम रहने के आसार हैं। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के साथ ही नीतीश सरकार द्वारा पेश बजट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने होंगे। वहीं NEET छात्रा की मौत के मामले में विपक्ष सरकार को कठघरे में खड़ा करने की तैयारी में है, जिससे सदन में हंगामे की संभावना जताई जा रही है। सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे प्रश्नोत्तर काल से शुरू होगी। इस दौरान विधायकों द्वारा पूछे गए सवालों का संबंधित मंत्री जवाब देंगे। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत विधायक श्याम रजक ने उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े सवाल उठाए हैं, जिन पर विभागीय प्रभारी मंत्री को जवाब देना होगा। इसके अलावा जल संसाधन विभाग से जुड़े मुद्दों पर विधायक राणा रंधीर, अनिल सिंह समेत पांच विधायकों ने सरकार का ध्यान खींचा है। NEET छात्रा मौत पर विपक्ष का आक्रामक रुख NEET परीक्षा से जुड़ी छात्रा की मौत का मामला आज सदन में बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्ष का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में खामियों के कारण छात्र मानसिक दबाव में हैं। सरकार से इस मामले पर स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की मांग को लेकर विपक्ष हंगामा कर सकता है। बजट पर होगी तीखी बहस बजट सत्र के दूसरे दिन नीतीश सरकार ने 2026-27 के लिए 3 लाख 47 हजार 589 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। यह पिछले बजट से करीब 30,694 करोड़ रुपये अधिक है। सरकार ने बजट को विकासोन्मुख बताते हुए पांच नए एक्सप्रेस-वे, सिंगल लेन सड़कों को डबल लेन करने और पटना मेट्रो के विस्तार जैसी घोषणाएं की हैं। शिक्षा और किसानों पर खास फोकस इस बजट में शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग को सबसे अधिक 68,216.95 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं किसानों के लिए जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की गई है। इसके तहत केंद्र की पीएम किसान सम्मान निधि के साथ मिलाकर अब किसानों को सालाना 3,000 रुपये मिलेंगे। इससे 75 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलने का दावा किया गया है। कल्याण, स्वास्थ्य और उद्योग की बड़ी योजनाएं स्वास्थ्य विभाग के लिए 21,270 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। PMCH में पहले चरण में 1100 बेड तैयार हो चुके हैं और 10 नए जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा हुई है। इसके साथ ही बंद चीनी मिलों को चालू करने, डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर पार्क और मेगा टेक सिटी जैसे औद्योगिक प्रोजेक्ट्स का भी ऐलान किया गया है। सदन में सियासी तल्खी भी दिखी बजट पर चर्चा के दौरान सियासी तल्खी भी सामने आई। बीजेपी विधायक भगवान कुशवाहा ने राजद विधायकों पर तीखा हमला बोलते हुए पुराने दौर के नरसंहार और कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाया। इस बयान से सदन का माहौल और तनावपूर्ण हो गया। आज के सत्र पर सबकी नजर राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा, बजट की समीक्षा और NEET मामले पर संभावित हंगामे के चलते आज का सत्र काफी अहम माना जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार विपक्ष के सवालों का कैसे जवाब देती है और सदन की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है।

देवघर की शिव बरात में साइबर ठगी के खिलाफ ‘हैकर दैत्य’ झांकी करेगी जागरूक

देवघर. महाशिवरात्रि 15 फरवरी को है। इस माैके पर देवघर में शाम में निकलने वाली शिव बरात में समाज से भटक गयी पीढ़ी को संदेश देने वाली झांकी आपको अपनी ओर खींच लेगी। साइबर अपराध में देवघर पहचान बना रहा है। द्वादश ज्योतिर्लिंग में एक बाबा बैद्यनाथ की नगरी में महाशिवरात्रि के दिन 32 साल से अदभुत शिव बारात निकलता है। बारात में हर साल आकर्षक झांकी निकलती है। वह किसी ना किसी थीम पर आधारित होती है। साल 2026 के शिव बरात का मुख्य आकर्षण में एक समाज को जागरूक करता हैकर दैत्य होगा। कलाकार ने साइबर क्राइम करने वाले को दानव के तुल्य माना है। जिसकी झांकी तैयार हो रही है। हैकर दैत्य को लैपटाप पर क्राइम करते दर्शाया जाएगा। कलाकार लक्ष्मण राउत बताते हैं कि युवा पीढ़ी में आए भटकाव को रोकने के लिए यह जागरूक करती झांकी होगी। साइबर क्राइम करने वाले समाज में दैत्य की तरह हैं जो किसी की खून-पसीने की कमाई को चट कर जाते हैं। आज बदलते जमाने में साइबर ठगी की घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो गयी है। एक से एक तकनीक का इजात कर वह भोले भाले लोगों को मिनटों में ठग लेते हैं। उनकी जीवन भर की गाढ़ी कमाई को उनके बैंक एकाउंट से उड़ा देते हैं। इधर सरकारी रिपोर्ट को देखें तो साइबर ठगी में देवघर तेजी से आगे बढ़ता जा रहा है। नेशनल क्राइम इंडेक्स की मानें तो साइबर ठगी के मामले में देवघर देश में पांचवें स्थान पर पहुंच चुका है। सुलगता मुंड के माथा से आग और मुंह से निकलेगा धुंआ शिव बरात में निकलने वाली झांकी व साज-सज्जा के अध्यक्ष मार्कण्डेय जजवाड़े बताते हैं कि बरात की हर एक झांकी समाज को संदेश देने वाली होगी। सबसे भयावह और डरावना सुलगता मुंड होगा। जो 12 फीट लंबा और पांच फीट चौड़ा होगा। सुलगता मुंड चारों ओर घूमता रहेगा। जिसके माथा और कान से आग निकलेगा। जबकि वह मुंह खोलेगा तो धुंआ निकलेगा। एक झांकी में यह दिखाया जाएगा कि पिंजरा में एक झूला लगा है और उस पर कंकाल झूल रहा है। यह उन युवाओं को सचेत करेगा जो नशा का सेवन कर रहे हैं। एक समय ऐसा आएगा कि वह इसी तरह एक पिंजरे में बंद होकर बैठे रहेंगे। अंतरिक्ष में शिव की पूजा का एक दृश्य होगा। यह बाबा मंदिर में स्थापित शिवलिंग को केंद्रित कर होगी।  पहली बार महाकाल का विकराल आकार शिव बरात में पहली बार महाकाल का विकराल आकार दिखेगा। यह लाइव होगा। जिसकी तैयारी चल रही है। शिव बारात को 1999 से आकार देने वाले और झांकी को नयी दिशा देने वाले ख्याति प्राप्त कलाकार मार्कण्डेय जजवाड़े बताते हैं कि नारी शक्ति को केंद्रत करती एक झांकी होगी। भारत ने अभी विश्व कप जीता है। समिति के अध्यक्ष अभिषेक आनंद के सुझाव पर नारी शक्ति को खेल में आगे बढ़ाने वाली झांकी होगी। झांकी में नरभक्षिणी को गुड्डा राउत आकार दे रहे हैं। जिसमें नरभक्षिणी बारात में खड़े लोगों पर झपट्टा मारती दिखेगी।

पाकिस्तान से भेजी 12 किलो हेरोइन के साथ आठ आरोपी भी गिरफ्तार

अमृतसर. पुलिस और सीमा सुरक्षा बल ने अमृतसर, तरनतारन व लुधियाना के जगराओं में 12 किलो हेरोइन बरामद कर आठ लोगों को गिरफ्तार किया है अमृतसर में काउंटर इंटेलिजेंस (सीआइ) की टीम ने हेरोइन तस्करी गिरोह के चार सदस्यों को बुधवार की दोपहर गिरफ्तार किया है। आरोपितों से पांच किलो हेरोइन बरामद करके स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल में केस दर्ज किया गया है। इसी तरह तरनतारन में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ ने मंगलवार रात को पाकिस्तान से आए ड्रोन को फायरिंग कर गिरा दिया। बुधवार सुबह सर्च अभियान के दौरान ड्रोन के अलावा चार किलो 375 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। थाना वल्टोहा में अज्ञात तस्करों के खिलाफ केस दर्ज करके पड़ताल की जा रही है। वहीं, जगराओं में पाकिस्तान से हेरोइन मंगवा कर क्षेत्र में बेचने वाले गिरोह के चार सदस्यों को सीआइए टीम ने गिरफ्तार किया है।