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आहार-विचार और व्यवहार में संतुलन है स्वस्थ जीवन का आधार

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय योग और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति पुन: विश्व में प्रतिष्ठित हुई है। भारतीय संस्कृति और जीवनशैली में आयुर्वेद सदियों से समाहित है। हमारी रसोई की वस्तुएं और भोजन में मसाले भी आयुर्वेद पर आधारित हैं। भारतीय संस्कृति और वेदों के ज्ञान में सर्वे भवन्तु सुखिन: और वसुधैब कुटुम्बकम की भावना छिपी है। हम दुनिया के सुखी और स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं और पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखते हैं। आयुर्वेद एकमात्र पैथी है, जो इस सिद्धांत में विश्वास करती है कि स्वास्थ्य केवल रोग का उपचार नहीं, रोग से बचाव भी है। आयुर्वेद, आहार-विचार और व्यवहार में संतुलन रखना सिखाता है। इसमें बीमारी से पहले ही व्यक्ति को स्वस्थ रखना महत्वपूर्ण है। कोरोना काल में मानव जीवन की रक्षा में योग, प्राणायाम और आयुर्वेद ने अपनी सामर्थ्य सिद्ध की है। भारत का गौरवशाली अतीत पश्चिमी देशों में पुन: प्रतिष्ठित हो रहा है। इस साल स्कॉटलैंड के एडिनबरा में दुनिया के सबसे पुराने सर्जिकल संस्थान रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स में शल्य क्रिया के जनक महर्षि सुश्रुत की प्रतिमा स्थापित की गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 तक आयुष का बाजार लगभग 3 बिलियन डॉलर था, जो अब बढ़कर 43 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। राज्य सरकार आयुर्वेद को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयुष इंटर्न चिकित्सकों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर कहा कि इस विषय पर आयुष मंत्री  इंदर सिंह परमार से चर्चा उपरांत समुचित निर्देश दिए जा चुके हैं। शीघ्र ही इंटर्न चिकित्सकों को शुभ समाचार प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। आयुर्वेद प्रदर्शनी का हुआ शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाविद्यालय के रजत जयंती ऑडिटोरियम में भगवान धन्वंतरि जी की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इससे पहले परिसर में रक्त चंदन का पौधा रोपा तथा पारम्परिक चिकित्सा पद्धति से जनसामान्य को जोड़ने के लिए लगाई गई आयुर्वेद प्रदर्शनी का शुभारंभ कर विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन भी किया। स्टेट कंपोजिट हर्बल गार्डन का हुआ लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयुर्वेद दिवस पर प्रदेशवासियों को कई सौगातें प्रदान की। इसके अंतर्गत 184 करोड़ रुपए की लागत से बने 25 आयुष भवनों, अस्पतालों और महाविद्यालयों की सौगात प्रदेशवासियों को सौंपी। उन्होंने 4 करोड़ 70 लाख रुपए की लागत से बने 12 आयुष भवनो का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 179 करोड रुपए की लागत से 13 आयुष भवन चिकित्सालयों और आयुर्वेद महाविद्यालयों की आधारशिला रखी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयुर्वेद महाविद्यालय परिसर में 6 एकड़ क्षेत्र में बने स्टेट कंपोजिट हर्बल गार्डन का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय बहुल डिंडौरी जिले में आयुर्वेद को प्रोत्साहन देने के लिए स्थापित 102 करोड़ रुपए लागत के महाविद्यालय का शुभारंभ भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयुष वेलनेस पर्यटन केंद्र के नामों का अनावरण किया, अब ये केंद्र आयुष आरोग्यम धाम के रूप में जाने जाएंगे। साथ ही उन्होंने प. खुशीलाल महाविद्यालय में स्थापित हर्बल गार्डन ऑफ स्टेट इंपोर्टेंस के जन प्रवेश का शुभारंभ भी किया। खगोलीय गणना पर निर्धारित हुआ है आयुर्वेद दिवस मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत ने दुनिया को अष्ट सिद्धियों के माध्यम से अपना महत्व बताया है। इन सिद्धियों में शून्य, दशमलव, योग, आयुर्वेद, खगोल विद्या, ज्योतिष विद्या, वास्तुकला और आध्यात्म भी शामिल है। खगोल शास्त्र की गणना अनुसार 23 सितंबर को दिन और रात का समय बराबर है। इसीलिए इस दिन को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने की पहल की गई है। इसी प्रकार 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। दुनिया के 200 से अधिक देशों में योग दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 21 जून को सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायण में प्रवेश करता है। भारतीय संस्कृति सूर्य आधारित रही है। शरीर मंदिर जैसा पवित्र है, इसे आयुर्वेद से रखें निरोगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आयुर्वेद के विशेषज्ञ मानते हैं कि जब किसी इलाके में कोई बीमारी फैलती है तो उसकी औषधि आसपास 25 से 30 किलोमीटर के दायरे में मौजूद होती है। हम बीमार होने पर ही इलाज क्यों ढूंढें। इसीलिए वेलनेस की संकल्पना रखी गई है। हमें अपनी दिनचर्या और खानपान के बल पर स्वयं को स्वस्थ रखने का प्रयास करना चाहिए। योग और आयुर्वेद आधारित जीवनशैली अपनाकर हम बिना किसी कठिनाई के निरोग रह सकते हैं। ईश्वर ने हमें शरीर रूपी मंदिर दिया है, जिसे हमें स्वस्थ रखने का प्रयास करना चाहिए। कोविड के दौर में आयुर्वेद की महिमा सबने देखी है। आयुर्वेद ऐसी चिकित्सा पद्धति है, जो जीवनभर हमें निरोग रखती है। पर्यटन से भी आयुष चिकित्सा पद्धति को प्रदेश में प्रोत्साहित किया जा रहा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में पहला आयुर्वेदिक महाविद्यालय भवन 1916 में ग्वालियर में बना। उसके बाद 1972 में तीन भवन जबलपुर, इंदौर और उज्जैन में बने। इसके बाद बुरहानपुर और फिर भोपाल में पंडित खुशीलाल महाविद्यालय की स्थापना की गई। हमारी सरकार ने प्रदेश में 9 नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय स्थापित करने की शुरुआत की है। आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2002-03 के मुकाबले आयुष विभाग के बजट में 16 गुना वृद्धि की है। प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 12 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोले जा रहे हैं। राज्य सरकार पर्यटन के माध्यम से आयुष चिकित्सा पद्धति को प्रोत्साहित कर रही है। प्रदेश में 1,773 आयुर्वेदिक औषधालय, 800 आयुष्मान आरोग्य मंदिर और 58 आुयष विंग संचालित उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इंदर सिंह परमार ने कहा कि भारतीय चिकित्सा पद्धति के भविष्य में आयुर्वेद का अपना अलग स्थान होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में लगातार मेडिकल और आयुर्वेदिक महाविद्यालयों की संख्या बढ़ रही है। प्रदेश में 2023 तक 7 आयुर्वेदिक और 2 होम्योपैथी व यूनानी पद्धति के महाविद्यालय थे। प्रदेश में 9 आयुष महाविद्यालयों का संचालन किया जा रहा है और अभी 8 नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय निर्माणाधीन हैं। प्रदेश में 1,773 आयुर्वेदिक औषधालय, 800 आयुष्मान आरोग्य मंदिर और … Read more

राज्य महिला आयोग अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने किया कन्या छात्रावास का औचक निरीक्षण

रायपुर : राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने किया कन्या छात्रावास का औचक निरीक्षण छात्राओं से संवाद कर जानी समस्याएं, शीघ्र निराकरण के दिए निर्देश     रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने राज्य महिला आयोग की टीम के साथ शंकर नगर, रायपुर स्थित राज्य स्तरीय पोस्ट मैट्रिक पिछड़ा वर्ग कन्या छात्रावास का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने छात्रावास में रह रही छात्राओं से संवाद कर उनकी समस्याएं, आवश्यकताएं और सुझाव सुने तथा छात्रावास की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।     डॉ. ममता साहू ने छात्राओं से उनकी पढ़ाई, आवासीय सुविधाओं सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली। छात्राओं द्वारा बताई गई समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के शीघ्र निराकरण तथा आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छात्राओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना प्राथमिकता है, ताकि वे निर्बाध रूप से अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए आगे बढ़ सकें।     निरीक्षण के दौरान राज्य महिला आयोग की ओर से श्रीमती मंजू थदानी एवं श्रीमती रश्मी तिवारी, सखी वन स्टॉप सेंटर रायपुर की संरक्षण अधिकारी श्रीमती प्रीति पांडेय सहित महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल से मिला ट्रेवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल

छत्तीसगढ़ ट्रेवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल से की सौजन्य भेंट, विश्व पर्यटन दिवस समारोह के लिए किया आमंत्रित रायपुर  छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटन गतिविधियों के विस्तार और प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को देश-दुनिया के मानचित्र पर और अधिक प्रभावी ढंग से स्थापित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ ट्रेवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन (CTTA) के प्रतिनिधिमंडल ने आज पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने अग्रवाल को 27 सितंबर को आयोजित होने वाले विश्व पर्यटन दिवस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया और कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने राजेश अग्रवाल के साथ छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटकों के लिए सुविधाओं के विस्तार, पर्यटन स्थलों के प्रभावी प्रचार-प्रसार तथा पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों की सहभागिता बढ़ाने से संबंधित विभिन्न सुझाव भी साझा किए गए। राजेश अग्रवाल ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से पर्यटन क्षेत्र के विकास को लेकर विचार-विमर्श करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक और जनजातीय पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश के पर्यटन स्थलों को बेहतर सुविधाओं, प्रभावी प्रचार-प्रसार और निजी क्षेत्र की सक्रिय सहभागिता के माध्यम से देश-विदेश के पर्यटकों के बीच और अधिक लोकप्रिय बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पर्यटन केवल भ्रमण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। पर्यटन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं, महिलाओं, कारीगरों, कलाकारों, होम-स्टे संचालकों और छोटे व्यवसायियों को आर्थिक अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि सरकार और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े संगठनों के बीच निरंतर संवाद एवं समन्वय से छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास को नई गति दी जा सकती है। उन्होंने पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के सुझावों और अनुभवों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से प्रदेश की पर्यटन क्षमता को और अधिक प्रभावी रूप से सामने लाया जा सकता है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ट्रेवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में राजेश अग्रवाल की सहभागिता का आग्रह किया। अग्रवाल ने आमंत्रण सहर्ष स्वीकार करते हुए कार्यक्रम में उपस्थित रहने का आश्वासन दिया। विश्व पर्यटन दिवस के आयोजन को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि यह अवसर छत्तीसगढ़ की पर्यटन संभावनाओं, विविध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने के साथ-साथ पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच होगा। प्रतिनिधिमंडल ने पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल द्वारा प्रदेश में पर्यटन के विकास के लिए दिए जा रहे मार्गदर्शन एवं सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पर्यटन विभाग, पर्यटन व्यवसाय से जुड़े संगठनों और स्थानीय हितधारकों के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। राजेश अग्रवाल ने प्रतिनिधिमंडल को विश्व पर्यटन दिवस कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की पर्यटन क्षमता को नई पहचान दिलाने के लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि सामूहिक सहभागिता, बेहतर सुविधाएं और प्रभावी प्रचार-प्रसार के माध्यम से प्रदेश के पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

हरियाणा की नई BJP प्रभारी बनीं स्मृति ईरानी, पार्टी ने दी अहम जिम्मेदारी

पंचकूला. भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को और मजबूती देने के उद्देश्य से देश के 28 राज्यों और 9 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अपने नए प्रभारी और सह-प्रभारी की लिस्ट जारी कर दी है। इस नई जिम्मेदारी में पार्टी की फायरब्रांड नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को हरियाणा का नया बीजेपी प्रभारी नियुक्त किया है। उनके साथ डॉ. भोला सिंह को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मॉडलिंग और टीवी इंडस्ट्री से राजनीति का सफर स्मृति ईरानी दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय मल्होत्रा परिवार में जन्मीं। ईरानी ने अपनी पहचान बनाने के लिए एक लंबा और संघर्षपूर्ण सफर तय किया है। राजनीति में आने से पहले उन्होंने एक सफल मॉडल और मशहूर टीवी एक्ट्रेस के रूप में अपार लोकप्रियता हासिल की। दूरदर्शन और स्टार प्लस के लोकप्रिय धारावाहिकों से घर-घर में पहचान बनाने वाली स्मृति बाद में भारतीय राजनीति का एक सशक्त चेहरा बनकर उभरीं। 'सास भी कभी बहू' से मिली पहचान स्मृति ईरानी ने 2000 से 2008 के बीच स्मृति ईरानी ने धारावाहिक शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में तुलसी विरानी की भूमिका अदा की। ईरानी ने एक बार बताया भी था कि उन्हें इस शो में फिट न होने की वजह से रिजेक्ट कर दिया गया था। जिसके बाद उन्होंने सपोर्ट रोल अदा किया। इस रोल से उन्हें काफी प्रसिद्धि मिली।

संघर्ष से कक्षाओं तक: कैसे आस्था गुरुकुल दंतेवाड़ा में जीवन का पुनर्निर्माण कर रहा है

दंतेवाड़ा  एक ऐसा क्षेत्र जो दशकों की हिंसा और विघटन से गुज़रा है, जवांगा का एजुकेशन सिटी में एक आवासीय स्कूल बच्चों को वयस्क बनने की राह पर एक अलग मार्ग प्रदान कर रहा है – शिक्षा, स्थिरता और एक ऐसे जीवन की संभावना के माध्यम से, जो उनके बचपन को आकार देने वाली परिस्थितियों से बहुत दूर है । आस्था विद्या मंदिर, जिसे आस्था गुरुकुल के नाम से भी जाना जाता है, वर्तमान में कक्षा 1 से 12 तक के लगभग 1,300 छात्रों का घर है । दंतेवाड़ा जिले के जवांगा में एजुकेशन सिटी में स्थित यह आवासीय स्कूल उन समुदायों केबच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान बन गया है, जिन्होंने लंबे समय से चल रहे संघर्ष का खामियाजा भुगता है । अनुमान है कि इसके आधे से अधिकछात्र प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से जुड़ी हिंसा से प्रभावित हुए हैं । यह स्कूल ऐसी हिंसा के कारण अनाथ हुए बच्चों, उन बच्चों को जिनके माता-पिता विद्रोह में शामिल थे और प्रभावित क्षेत्रों, विशेष रूप से दंतेवाड़ा और व्यापक बस्तर क्षेत्र के छात्रों को प्राथमिकता देता है । कुछ छात्रों पर संघर्ष का प्रभाव कक्षा में प्रवेश करने से पहले ही पड़ जाता है । प्राचार्य रवींद्र पाणिग्राही ने कहा कि स्कूल विशेष प्राथमिकता मानदंडों के तहत बच्चों को दाखिला देते समय आधिकारिक दस्तावेज़ों पर निर्भर करता है । पुलिस-प्रमाण, जो यह पुष्टि करता है कि छात्र का इलाका एलडब्ल्यूई गतिविधि से प्रभावित हुआ है और किसी परिवार के सदस्य की मृत्यु से संबंधित एफआईआर रिकॉर्ड उन दस्तावेजों में शामिल हैं, जिन पर विचार किया जाता है । यद्यपि, इसका उद्देश्य आवास और स्कूली-शिक्षा तक पहुँच प्रदान करने से परे है । स्कूल ने एक ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास किया है, जहां हिंसा के बीच पले-बढ़े बच्चे उबर सकें, सीख सकें और उन परिस्थितियों से परे एक भविष्य की कल्पना कर सकें जो उन्हें विरासत में मिली हैं । श्री पाणिग्राही ने कहा, "जो बच्चे हिंसा से प्रभावित हुए हैं, उन्हें विशेषज्ञों द्वारा परामर्श दिया जाता है । आईएएस अधिकारियों जैसे कुशल व्यक्ति भी विशेष व्याख्यान देते हैं और छात्रों को प्रेरित करने के लिए उनसे बातचीत करते हैं ।” स्कूल सीबीएसई पाठ्यक्रम का अनुसरण करता है, जबकि शिक्षण में प्रौद्योगिकी को शामिल करने के लिए क्लासरूम स्मार्ट-स्क्रीन सिस्टम से सुसज्जित हैं । दूर दराज के गांवों से आने वाले छात्रों के लिए, जिनमें से कुछ ने लंबे समय तक संघर्ष का अनुभव किया है और जिनकी पहुँच सीमित शैक्षिक बुनियादी ढांचे तक थी, ये सुविधाएं उनके सीखने के माहौल में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करती हैं । “एजुकेशन सिटी में स्कूल का परिचालन एनएमडीसी सीएसआर द्वारा वित्त-पोषित है और प्रशासन राज्य सरकार के पास है । अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके छात्रों को पढ़ाने के लिए कक्षाएँ स्मार्ट-स्क्रीन सिस्टम से सुसज्जित हैं ।” श्री पाणिग्राही ने बताया । आस्था गुरुकुल 2013 में शुरू किया गया था, जिसमें एनएमडीसी ने इसके बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सीएसआर सहायता प्रदान की थी । परिसर में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग आवासीय भवन और 1,000 से अधिक छात्रों की क्षमता वाला एक सभागार शामिल है । वित्तीय प्रतिबद्धता निर्माण के बाद भी जारी है । एनएमडीसी का सीएसआर वित्त-पोषण स्कूल संचालन में सहायता करता है, जिसमें वार्षिक परिचालन व्यय अकेले लगभग 3.5 करोड़ रुपये है । इस व्यवस्था ने एक पब्लिक-कारपोरेट मॉडल बनाया है, जिसमें स्कूल राज्य सरकार द्वारा संचालित संस्थान है, जबकि एनएमडीसी का सीएसआर वित्त-पोषण इसके बुनियादी ढांचे और निरंतर संचालन में सहायता करता है । एक बच्चे के लिए, जिसने हिंसा के कारण अपने माता-पिता को खो दिया है, संघर्ष में फँसे गाँव में पला-बढ़ा है अथवा उग्रवाद से प्रभावित परिवार में पैदा हुआ है, आवासीय विद्यालय का महत्व शिक्षा से कहीं अधिक है । परिसर एक संरचित वातावरण, औपचारिक स्कूली-शिक्षा, परामर्श और लोगों व अवसरों से परिचिति कराता है, जो अन्यथा बस्तर के दूर-दराज के बच्चों के लिए पहुँच से दूर होते हैं । अपनी शुरुआत के एक दशक से अधिक समय बाद, आस्था गुरुकुल शिक्षा के माध्यम से संघर्ष के परिणामों को निपटने के एक व्यापक प्रयास का हिस्सा बन गया है । इसके क्लासरूम अब सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत अध्ययन करने वाले बच्चों से भरे हुए हैं, इसके आवासीय भवनों में पूरे क्षेत्र के छात्र रहते हैं, और इसका परिसर दैनिक दिनचर्या प्रदान करता है, जो उनके कई परिवारों को प्रभावित करने वाली हिंसा से बहुत दूर है । दंतेवाड़ा में, जहां संघर्ष के परिणामों को अक्सर जीवन-हानि और समुदायों के उजड़ने से मापा जाता है, स्कूल का दीर्घकालिक प्रभाव अंततः तब दिखता है जब इसके छात्र जावंगा छोड़ने के बाद कुछ करने में सक्षम होते हैं – और यह शिक्षा उन्हें ऐसा भविष्य चुनने की स्वतंत्रता देती है, जो यह परिभाषित नहीं करती है कि वे कहां से आए हैं, बल्कि इस बात से तय होता है कि वे कहाँ जाना चाहते हैं ।

CM मान का बड़ा कदम, पंजाब में 7वें वित्त आयोग का गठन

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए मजबूत वित्तीय ढांचे की वकालत की। उन्होंने वित्तीय स्थिरता और जमीनी स्तर पर प्रभावी शासन सुनिश्चित करने के लिए राज्यों के लिए अनुशासित वित्तीय मार्ग और टिकाऊ वित्तीय संस्थाओं की आवश्यकता पर जोर दिया। नवगठित सातवें पंजाब वित्त आयोग के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "आयोग का गठन पंचायतों/नगरपालिकाओं और राज्य के बीच करों, शुल्कों, रोड टैक्स और अन्य की हिस्सेदारी के लिए विशेष सिफारिशें करने के अलावा इन नागरिक संस्थाओं की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए अन्य सिफारिशें करने हेतु किया गया है।" मुख्यमंत्री ने कहा, "आयोग पंचायती राज संस्थाओं और नगरपालिकाओं को वित्तीय विकेंद्रीकरण सुनिश्चित करने का संवैधानिक माध्यम है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 73वें संविधान संशोधन के तहत बनाई गईं जमीनी स्तर की संस्थाओं के पास अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए वित्तीय क्षमता हो।" आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा, "राज्य वित्त आयोग के पास पंचायती राज संस्थाओं और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की जांच करने और स्थानीय सरकारों की वित्तीय देनदारियों तथा वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने के लिए एक ढांचे की सिफारिश करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।" उन्होंने कहा, "आवश्यक नागरिक सेवाएं प्रदान करने और स्थानीय बुनियादी ढांचे के निर्माण में पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों की बढ़ती जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए संसाधनों के आवंटन की एक पारदर्शी, न्यायसंगत और टिकाऊ प्रणाली की आवश्यकता है।" आयोग वित्तीय आवश्यकतों को मूल्यांकन करेगा: मान मुख्यमंत्री ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि आयोग स्थानीय निकायों की आय क्षमता, व्यय संबंधी जिम्मेदारियों और वित्तीय आवश्यकताओं का व्यापक मूल्यांकन करेगा और उनकी वित्तीय क्षमता को मजबूत करने तथा उन्हें अपने कार्यों को प्रभावी ढंग से निभाने में सक्षम बनाने के लिए व्यावहारिक और भविष्य को ध्यान में रखकर सिफारिशें करेगा।" मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "आयोग के पास यह अधिकार है कि वह राज्य द्वारा लगाए जाने वाले करों, शुल्कों, टोल और फीस की कुल प्राप्ति को राज्य और पंचायतों/नगरपालिकाओं के बीच बांट सकता है।" उन्होंने कहा, "आयोग के महत्व का अंदाजा इस बात से आसानी से लगाया जा सकता है कि यह सभी स्तरों पर पंचायतों/नगरपालिकाओं के बीच ऐसी प्राप्तियों में हिस्सेदारी के वितरण की सिफारिश भी करता है।" मुख्यमंत्री ने आगे कहा, "पंचायतों/नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति सुधारने आवश्यक कदमों की सिफारिश करने के लिए भी आयोग बहुत जरूरी है।" सातवें पंजाब वित्त आयोग का गठन किया जाएगा इसी तरह मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "आयोग गैर-उत्पादक राजस्व व्यय को कम करने के उपायों और पूंजीगत संसाधनों के कुशल एवं प्रभावी उपयोग के लिए प्रशासन की गुणवत्ता तथा तकनीकी सहायता में सुधार करने के कदमों की सिफारिश भी करता है। इस महत्वपूर्ण कार्य को पूरा करने के लिए राज्य सरकार द्वारा पंजाब के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव के. शिव प्रसाद की अध्यक्षता में 'पंचायतों और नगरपालिकाओं के लिए पंजाब वित्त आयोग अधिनियम, 1994' की धारा 3(1) के तहत सातवें पंजाब वित्त आयोग का गठन किया गया है।" उन्होंने बताया, "आयोग में शौकत राय को विशेषज्ञ सदस्य, प्रशासनिक सचिव (ग्रामीण विकास एवं पंचायतें, पंजाब सरकार) और प्रशासनिक सचिव (स्थानीय निकाय, पंजाब सरकार) पदेन सदस्यों के रूप में तथा विशेष सचिव (वित्त, पंजाब सरकार) को एक्स ऑफिसिओ सदस्य सचिव के रूप में शामिल किया गया है।" राज्य सरकार दे रही सहयोग और सहायता आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष और सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "राज्य सरकार इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए आयोग को पूरा सहयोग और सहायता देगी।" मुख्यमंत्री ने कहा, "आयोग का पांच वर्ष का कार्यकाल 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होगा और यह 30 सितंबर, 2027 तक अपनी रिपोर्ट उपलब्ध करवाएगा। व्यापक जनहित में आयोग उस आधार का भी संकेत देगा, जिस पर वह अपने निष्कर्षों पर पहुंचा है।" इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक शेखर, सचिव ग्रामीण विकास, सचिव स्थानीय निकाय और अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

पुलिस से जुड़ेंगे रिटायर्ड कर्मी, कानून एवं शांति व्यवस्था पर रहेगा फोकस

जांजगीर-चांपा. ग्राम कोसा में पुलिस एवं आमजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा क्षेत्र में कानून व्यवस्था एवं शांति व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एसपी विजय कुमार पाण्डेय ने पुलिस बीट पोस्ट प्रारंभ किया गया. पुलिस बीट पोस्ट, पुलिस मितान पोस्ट क्षेत्र में शाम को सघन पेट्रोलिंग कर लोगों से विशेष संवाद किया जाएगा. पुलिस बीट पोस्ट के माध्यम से क्षेत्र में प्रतिदिन शाम को सघन पेट्रोलिंग की जाएगी. साथ ही क्षेत्र के रिटायर्ड पुलिसकर्मियों और स्थानीय नागरिकों की सहभागिता से गांव की शिक्षा, रोजगार, साफ-सफाई, सुरक्षा और शांति व्यवस्था से जुड़े विषयों पर नियमित चर्चा की जाएगी. इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक द्वारा ग्राम कोसा की सक्रिय और जागरूक महिलाओं को जोड़कर महिला कमांडो टीम का गठन किया गया. महिला कमांडो टीम के माध्यम से गांव में महिला सुरक्षा, सामाजिक जागरूकता एवं सकारात्मक वातावरण निर्माण में सहयोग लिया जाएगा. कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक ने नशामुक्ति अभियान के तहत ग्रामीणों से संवाद करते हुए नशापान से होने वाले सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों की जानकारी दी और नशे से दूर रहने के लिए जागरूक किया. सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से पुलिस और जनता के बीच विश्वास और सहभागिता बढ़ाना, अपराधों की रोकथाम तथा क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था को मजबूत करना है.

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने पर ‘राम-नामी’ की टीम को मंत्री राजेश अग्रवाल ने दी बधाई

‘राम-नामी’ फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने जताया हर्ष, निर्देशक भारतबाला गणपति सहित पूरी टीम को दी शुभकामनाएं रामनामी की अनूठी सांस्कृतिक परंपरा को राष्ट्रीय पहचान मिलना हम सभी के लिए गौरव का विषय – राजेश अग्रवाल रायपुर रामनामी समुदाय की अनूठी परंपरा और सांस्कृतिक पहचान पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री’ का प्रतिष्ठित सम्मान मिलने पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने फिल्म के निर्देशक भरतबाला गणपति सहित निर्माता एवं पूरी फिल्म टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि ‘राम-नामी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गौरव और हर्ष का विषय है। यह सम्मान केवल एक उत्कृष्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म को मिला पुरस्कार नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना और पीढ़ियों से चली आ रही विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान भी है। उन्होंने कहा कि रामनामी समुदाय की परंपरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता का विशिष्ट उदाहरण है। अपनी अनूठी आस्था, परंपराओं और जीवन मूल्यों के माध्यम से रामनामी समाज ने प्रदेश की लोक संस्कृति को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ‘राम-नामी’ डॉक्यूमेंट्री ने इस विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा को प्रभावी ढंग से देश के व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का कार्य किया है। अग्रवाल ने फिल्म के निर्देशक भारतबाला गणपति और पूरी टीम के रचनात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि किसी लोक परंपरा को संवेदनशीलता और प्रभावशाली सिनेमाई प्रस्तुति के माध्यम से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। फिल्म से जुड़े प्रत्येक कलाकार, तकनीकी विशेषज्ञ, निर्माता और सहयोगी इस सम्मान के सहभागी हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत व्यापक और विविधतापूर्ण है। यहां की लोककलाएं, लोकगीत, लोकनृत्य, जनजातीय परंपराएं, धार्मिक आस्थाएं और सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपराएं प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। ‘राम-नामी’ को मिला राष्ट्रीय सम्मान इन समृद्ध परंपराओं को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। संस्कृति मंत्री अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की लोक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘राम-नामी’ को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदेश के अन्य लोक कलाकारों, रचनाकारों, फिल्मकारों और सांस्कृतिक कर्मियों को भी अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक विरासत को रचनात्मक माध्यमों से सामने लाने के लिए प्रेरित करेगा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 की फिल्मों के लिए घोषित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘राम-नामी’ को हिंदी भाषा की सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री के रूप में चुना गया है। फिल्म के निर्माता बीबीपी स्टूडियो वर्चुअल भारत प्राइवेट लिमिटेड और निर्देशक भरतबाला गणपति हैं। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने भारतबाला गणपति एवं ‘राम-नामी’ फिल्म की पूरी टीम को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को देश के राष्ट्रीय पटल पर और अधिक सशक्त रूप से स्थापित करने वाला महत्वपूर्ण अवसर है।

UP में निर्बाध बिजली आपूर्ति पर जोर, फीडरवार निगरानी और वैकल्पिक व्यवस्था पर फोकस

योगी सरकार का निर्बाध बिजली आपूर्ति पर जोर, युद्धस्तर पर प्रयास के निर्देश त्योहारों पर नहीं होगी बिजली की किल्लत, वैकल्पिक व्यवस्था और फीडरवार निगरानी पर फोकस कोयले की कमी से न प्रभावित हो विद्युत आपूर्ति, बेहतर वैकल्पिक योजना बनाने के निर्देश डिस्कॉम के एमडी प्रतिदिन करेंगे समीक्षा, हर दो घंटे में फीडरवार रिपोर्ट भेजने का निर्देश लखनऊ  योगी सरकार प्रदेश में निर्धारित शेड्यूल के अनुरूप बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद ने प्रदेश की विद्युत आपूर्ति की समीक्षा की। उन्होंने सभी क्षेत्रों में निर्धारित शेड्यूल के अनुसार बिजली उपलब्ध कराने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास करने के निर्देश दिए। रणवीर प्रसाद ने कहा कि बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जहां से भी विद्युत की व्यवस्था संभव हो, वहां से आवश्यक इंतजाम किए जाएं। उन्होंने भविष्य में कोयले की कमी के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की बेहतर योजना तैयार करने पर जोर दिया। प्रमुख सचिव ने निर्देशित किया कि आपूर्ति की फीडर वाइज मॉनिटरिंग की जाए। साथ ही विद्युत वितरण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों को स्पष्ट कार्ययोजना के साथ परिणाम देने के निर्देश दिए। उन्होंने नगरीय, तहसील एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की स्थिति, फीडर मीटरों के आंकड़ों तथा वितरण व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मानकों की जानकारी ली। अध्यक्ष ने कहा कि फीडर स्तर के आंकड़ों का नियमित विश्लेषण करते हुए जहां भी कमियां सामने आएं, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करें। अधिक लाइन हानि वाले फीडरों एवं क्षेत्रों में फीडरवार कार्य योजना बनाकर नियमित कार्रवाई की जाए। अध्यक्ष ने प्रदेश के वितरण निगम के कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देशित किया कि आगामी त्योहारों को देखते हुए अभी से प्रभावी योजना बना ली जाए, जिसे उस दौरान सभी को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। अध्यक्ष ने निर्देशित किया कि डिस्कॉम स्तर पर सभी प्रबन्ध निदेशक विद्युत आपूर्ति की समीक्षा प्रतिदिन करें। उसकी एक विस्तृत रिपोर्ट लखनऊ भेजें। जिसमें जिलेवार फीडर की जानकारी होगी। ब्रेकडाउन के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी। इसी तरह रोस्टिंग की जानकारी भी फीडर वाइज रहेगी। उन्होंने कहा कि डिस्कॉम स्तर पर कंट्रोल रूम में हर दो घंटे की फीडरवाइज रिपोर्ट मंगाई जाए। जिसमें कभी भी किसी फीडर की जानकारी मांगी जाए। शक्ति भवन में सम्पन्न इस बैठक में उन्होंने विद्युत आपूर्ति, व्यवस्थागत ढ़ाचे का सुदृढ़ीकरण, बिल वितरण, बिल वसूली, बिजली चोरी रोकने, विद्युत दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियन्त्रण तथा विद्युत कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने आदि मुद्दों पर समीक्षा की तथा आवश्यक निर्देश दिए। अध्यक्ष ने निर्देशित किया कि इंडीपेन्डेन्ट फीडर के उपभोक्ताओं से विद्युत निगमों के वरिष्ठ अधिकारी सम्पर्क कर विद्युत आपूर्ति का फीड बैक लेते रहें और बेहतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करें। अध्यक्ष ने बिजनेस प्लान के कार्यों को समय से पूर्ण कराने हेतु सख्त निर्देश दिये। अध्यक्ष ने कहाकि बिजनेस प्लान में लखनऊ सहित प्रदेश के ऐसे स्थानों के लिए विशेष कार्य योजना बनाई जाय, जहां विद्युत आपूर्ति को लेकर बार-बार समस्या आ रही है। शक्ति भवन में हुई आपूर्ति संबंधी इस समीक्षा बैठक में प्रबन्ध निदेशक नितीश कुमार सहित उत्पादन निगम एवं एस.एल.डी.सी. के अधिकारी तथा कारपोरेशन के निदेशक आदि वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

होटलों में पुलिस की छापेमारी, हिसार में 22 युवतियां और 19 युवक हिरासत में

हिसार. जिला पुलिस की तरफ से अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में महिला डीएसपी महिला प्रिया शर्मा के नेतृत्व में अर्बन एस्टेट पुलिस थाना की टीम ने माडल टाउन एक्टेंशन वाले क्षेत्र की एक गली में होटल राज और होटल 999 पर छापेमार कार्रवाई की गई। इस दौरान पुलिस टीम को होटल राज से नौ युवतियां, आठ युवक और होटल 999 से 13 युवतियां और 11 युवक संदिग्ध परिस्थितियों में मिले। पुलिस टीम की तरफ से सभी को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर आवश्यक पूछताछ एवं नियमानुसार कार्रवाई के बाद छोड़ दिया गया। पुलिस ने देह व्यापार के मामले में होटल 999 के मैनेजर कौथकलां निवासी कुलदीप और होटल राज के मैनेजर कैथल निवासी अंकुश को गिरफ्तार किया।