samacharsecretary.com

MP में किसानों को मिलेगा सूरज से खेती करने का मौका, हर किसान के लिए होगा सोलर पंप; मोहन सरकार का नया कदम

 भोपाल कृषक कल्याण वर्ष किसानों के लिए कई सौगातें लेकर आएगा. सौर ऊर्जा से संचालित सिंचाई पंपों से न केवल किसान दिन में ही खेतों में सिंचाई कर पाएंगे अपितु इससे बचने वाली बिजली से प्रदेश ऊर्जा में सरप्लस हो जाएगा. हर किसान के पास सोलर पंप होगा.किसान सौर ऊर्जा से खेती करेंगे प्रदेश में 52 हजार किसानों के खेत में सोलर पंप स्थापित करने की योजना प्रारंभ की गई है। सोलर पंप स्थापित हो जाने से अब प्रदेश का किसान अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता भी बनेगा। अब प्रदेश के किसान सूरज से खेती करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस अभिनव पहल के तहत 34 हजार 600 इकाइयों को लेटर ऑफ अवार्ड जारी कर 33 हजार कार्यदेश जारी किए जा चुके हैं। किसान के खेत में सोलर पम्प स्थापित होने से अब उन्हें विद्युत प्रदाय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। सोलर पम्प से उत्पादित अतिरिक्त ऊर्जा को किसान सरकार को बेच कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा लगातार किसानों को सोलर प्रोजेक्ट लगाने के लिए विभिन्न योजनाओं में लाभ प्रदान कर सक्षम बनाया जा रहा है। प्रदेश की सिंचाई क्षमता 100 लाख हैक्टयर तक बढ़ाएंगे किसान कल्याण वर्ष में प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा. विभिन्न सिंचाई परियोजना और सिंचाई की आधुनिकतम तकनीकी के प्रयोग से सिंचाई का रकबा अधिक से अधिक बढ़ाने का प्रयास रहेगा. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संकल्प है प्रदेश में सिंचाई क्षमता को आगामी वर्षों में 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाना. प्रदेश में गत दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित हुई है। प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वर्ष 2026 तक 8.44 लाख हैक्टयर की वृद्धि होगी। प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल का प्रयोग कर की जाएगी। पार्वती-काली-सिंध और चम्बल अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना, केन-बेतवा अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना की स्वीकृति केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि है. महाराष्ट्र राज्य के साथ क्रियान्वित होने वाली मेगा तापी भूजल भरण परियोजना विश्व की अनूठी परियोजना है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में भी विभिन्न नदियों को जोड़ने के लिए नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। राज्य में नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत उज्जैन जिले में कान्ह-गंभीर, मंदसौर, नीमच और उज्जैन में कालीसिंध-चंबल, सतना जिले में केन और मंदाकिनी, सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिले में शक्कर पेंच और दूधी तामिया, रायसेन जिले में जामनेर नेवन और नेवन-बीना नदियों का सर्वेक्षण किया गया है। इस सभी के क्रियान्वयन से कुल 5 लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी। इनकी अनुमानित लागत 9870 करोड़ रुपए होगी। सात जिलों के हजारों किसान इन योजनाओं से लाभान्वित होंगे। राज्य की नदियों में बाढ़, जल प्रबंधन, जल के समुचित उपयोग नदी कछारों में पर्याप्त जल की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के उद्देश्य से राज्य की नदियों को आपस में जोड़ने के लिए तकनीकी दल का गठन भी गया। भोपाल की झील की प्राचीन तकनीक का अध्ययन कर इस तर्ज पर कम लागत में सुरक्षित जलाशय एवं बांध निर्माण की अवधारणा पर भी कार्य किया जा रहा है. राज्य में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का कार्य निरंतर किया जा रहा है। सिंहस्थ- 2028 में दुनिया भर से उज्जैन में आने वाले श्रद्धालुओं को शिप्रा के शुद्ध जल में स्नान कराने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं. सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना उज्जैन निर्माणाधीन है, जिसकी लागत 614.53 करोड़ रुपए है। इसी तरह कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना उज्जैन की लागत 919.94 करोड़ है। सिंहस्थ: 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट निर्माण एवं संबद्ध कार्य भी किए जा रहे हैं, जिनकी लागत 778.91 करोड़ है।

नए भारत की रफ्तार का प्रतीक ‘प्रगति’, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में यूपी सबसे आगे: योगी आदित्यनाथ

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मंच नहीं, बल्कि नए भारत की नई कार्यसंस्कृति और परिणामोन्मुख शासन का सशक्त उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी के समन्वय से शासन में ठोस और समयबद्ध परिणाम सुनिश्चित हो रहे हैं। मंगलवार को आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रगति उस प्रशासनिक मॉडल का विस्तार है, जिसकी नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए रखी थी और वर्ष 2014 के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती दी गई। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को सशक्त बनाते हुए प्रगति ने जटिल परियोजनाओं और प्रशासनिक अड़चनों के समाधान को सरल और तेज बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति केवल एक रिव्यू मैकेनिज्म नहीं, बल्कि एक व्यापक गवर्नेंस रिफॉर्म है, जिसने शासन को फाइल-केंद्रित संस्कृति से निकालकर फील्ड-आधारित परिणामों की दिशा में अग्रसर किया है। इसके माध्यम से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आई है, समय और लागत की बर्बादी रुकी है और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय के साथ स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित हुई है। उन्होंने बताया कि प्रगति मॉडल की अवधारणा वर्ष 2003 में गुजरात में ‘स्वागत’ (स्टेट वाइड अटेंशन ऑन गवर्नेंस बाई एप्लिकेशन) के रूप में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य नागरिक शिकायतों के त्वरित निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। यही मॉडल आगे चलकर प्रगति के राष्ट्रीय स्वरूप के रूप में विकसित हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति के प्रभाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके माध्यम से अब तक 86 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को गति मिली है। इनमें 377 प्रमुख परियोजनाओं की प्रत्यक्ष समीक्षा प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, जबकि 3162 में से 2958 मुद्दों का समाधान किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति मॉडल राज्य के लिए एक गेम-चेंजर साबित हुआ है। आज उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहा है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, सर्वाधिक शहरों में मेट्रो सेवाएं, एयर कनेक्टिविटी, देश की पहली रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने में प्रगति की अहम भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के पास 10.48 लाख करोड़ रुपये की लागत की 330 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का पोर्टफोलियो है, जो देश में सबसे बड़ा है। इनमें से 2.37 लाख करोड़ रुपये की 128 परियोजनाएं (करीब 39 प्रतिशत) पूरी होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि 8.11 लाख करोड़ रुपये की 202 परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रगति पर हैं। सरकार की प्राथमिकता गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करते हुए सभी प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों का समाधान करना है, ताकि परियोजनाएं तय समय में धरातल पर उतर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रदेश में इंटर-एजेंसी बाधाओं का प्रभावी समाधान हुआ है। राजस्व, वन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर विकास, पंचायती राज सहित सभी संबंधित विभाग एक ही मंच पर समन्वय के साथ निर्णय ले रहे हैं, जिससे हाईवे, रेलवे, पावर और टेलीकॉम जैसी परियोजनाओं में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्रगति के तहत 515 मुद्दों में से 494 का समाधान किया जा चुका है, जो लगभग 96 प्रतिशत है। वहीं, 287 परियोजनाओं में से 278 परियोजनाओं का समाधान सुनिश्चित किया गया है, जिसकी समाधान दर 97 प्रतिशत है। प्रगति जैसे तकनीक-आधारित प्लेटफॉर्म के कारण उत्तर प्रदेश आज बॉटलनेक स्टेट से निकलकर ब्रेकथ्रू स्टेट में परिवर्तित हो चुका है। अब राज्य सरकार केवल फैसिलिटेटर नहीं, बल्कि एक्सेलेरेटर की भूमिका में विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है। समयबद्ध परियोजनाएं रोजगार सृजन के साथ-साथ राज्य की आर्थिक गति को भी तेज करती हैं और इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया।

कृषि आधारित रोजगारपरक उद्योगों पर होगी कृषि कैबिनेट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसान कल्याण एवं स्वाभिमान पर्व मनाएगी सरकार कृषि ग्राम सभा सहित कृषि से जुड़े उपकरणों के क्रेता-विक्रेताओं का कराएं सम्मेलन ग्रामीणों और युवाओं को भावनात्मक रूप से जोड़ें खेती-किसानी से 26 से 30 जनवरी तक मनाया जाएगा कृषि लोकरंग – 2026 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि लोकरंग की तैयारियों को लेकर ली बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खेती-किसानी और हमारी संस्कृति आपस में जुड़े हुए हैं। हमारा पारम्परिक जीवन, कलाएं और बहुरूपी मौखिक परंपराएं कृषि के मूल से ही उत्पन्न होते हैं और यही कृषि लोकरंग मनाने का आधार है। उन्होंने कहा कि भोपाल सहित प्रदेश के अन्य संभागों और अंचलों में कृषि लोकरंग – 2026 पूरी गरिमा और भव्यता के साथ मनाया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब प्रदेश में कृषि आधारित रोजगारपरक उद्योगों के समावेशी विकास लक्ष्य को लेकर कृषि कैबिनेट आयोजित की जाएगी। किसान कल्याण,स्वाभिमान एवं पर्व कृषि ग्राम सभा जैसे आयोजन सहित कृ‍षि से जुड़े उन्नत उपकरणों के क्रेता-विक्रेताओं का सम्मेलन, कृ‍षि उत्सव और किसान मेले भी आयोजित किए जाएंगे। किसानों को सरकार की हर योजना का लाभ दिलाया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि सभ्यता हमारी परम्पराओं से भीतर तकजुड़ी हुई है, इसलिए ग्रामीणों, युवाओं और विद्यार्थियों को भी भावनात्मक रूप से खेती-किसानी से जोड़ा जाए। सफल किसानों के एग्री बिजनेस मॉडल भी बताए जाएं, ताकि दूसरे किसान भी इनसे प्रेरणा लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में कृषि लोकरंग – 2026 के आयोजन की तैयारियों के संबंध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। कृषि लोकरंग आगामी 26 से 30 जनवरी 2026 तक मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि लोकरंग वास्तव में ग्राम पंचायतों एवं विकास खंड स्तर पर नागरिकों और युवाओं को खेती से जोड़ने और इसके व्यापक लोकव्यापीकरण का प्रयास है। लोकरंग के दौरान प्रदेश के बड़े कस्बों और बड़े शहरों में सरकार द्वारा कृषि और किसानों के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी सांस्कृतिक एवं नाट्य प्रस्तुतियों और विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि हमारी सहज परम्पराओं और धार्मिक अनुष्ठानों को भी कृषि से जुड़े विषयों से जोड़ा जाए। कार्यक्रम ऐसे हों, जिसमें जनता का सहज जुड़ाव हो। लोकरंजन के कार्यक्रमों को नीचे से क्रियान्वित कर ऊपर तक लाया जाए, इससे नागरिकों में कृषि के प्रति एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि लोकरंग को जन-जन का उत्सव बनाने के लिए आकर्षक देशी वेशभूषा जैसे पगड़ी, धोती, साफा आदि सहित पुराने देशज बीज संग्रहण/संचयन के प्रोत्साहन से जुड़ी प्रतियोगिता, लखपति किसानों की प्रतियोगिता, अच्छी नर्सरी और बगीचे वालों की प्रतियोगिता और सायकिल प्रतियोगिता जैसे आयोजन भी किए जाएं। किसान कल्याण वर्ष का बनाएं आकर्षक लोगो मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2026 को 'कृषक कल्याण वर्ष' घोषित किया है। इस आयोजन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए इस वर्ष का एक आकर्षक लोगो तैयार करें। सोयाबीन, मूंग, उड़द, मक्का एवं अन्य फसलों का उत्पादन करने वाले किसानों को बुलाकर दूसरे किसानों के समक्ष उनकी सफलता बताने को कहा जाए। बैठक में सचिव, किसान कल्याण एवं कृषि विकास श्री निशांत वरवड़े ने बताया कि कृषि लोकरंग – 2026 के दौरान पारम्परिक ग्रामीण खेलों एवं खेत-खलिहान पर केन्द्रित विभिन्नन गतिविधियां जैसे फसल, मौसम, ऋतुओं, संस्कारों पर गीत-गायन आदि, कृषि के देशज ज्ञान पर आधारित प्रतियोगिताएं, बड़े एवं नवप्रयोगधर्मी किसानों का प्रदेशभर से चयन एवं उनका मुख्यमंत्रीजी से सीधा संवाद, ओपन माइक सत्र सहित मेरा किसान, मेरा अभिमान सत्र आयोजित किए जाएंगे। इस सत्र में किसानों के बच्चे मंच पर जाकर बतायेंगे कि हमारे किसान देश की शान क्यों हैं ? ऐसी अन्य गतिविधियां भी इस दौरान संचालित की जाएंगी। कृषि लोकरंग के आयोजन में संस्कृति विभाग अंतर्गत वीर भारत न्यास भी सहभागिता करेगा। लोकरंग के दौरान कृषि को सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाने का लोक संयोजन किया जाएगा। बैठक में संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, मुख्यमंत्री के सचिव श्री आलोक कुमार सिंह, आयुक्त जनसम्पर्क श्री दीपक कुमार सक्सेना, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्री श्रीराम तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभ्युदय म.प्र. के विजयी प्रतियोगियों को किया पुरस्कृत

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित अभ्युदय मध्यप्रदेश क्विज के विजयी प्रतियोगियों को एक समारोह में पुरस्कार प्रदान किए। विजयी प्रतियोगियों को ई-स्कूटी, ई-बाइक, लैपटॉप और विक्रमादित्य घड़ी के साथ नासा किट पुरस्कार के रूप में प्रदान की गई। कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, संचालक संस्कृति श्री एमपी नामदेव उपस्थित थे। वीर भारत न्यास के संचालक और संस्कृति सलाहकार श्री राम तिवारी ने बताया कि ऑनलाइन क्विज में डेढ़ लाख प्रतियोगियों ने विजिट किया। करीब 30 हजार प्रतियोगी रजिस्टर्ड हुए। क्विज में 24 प्रतियोगी विजयी हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए उनका अभिनंदन किया। इसके साथ ही खगोल विज्ञान केंद्र उज्जैन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बच्चों के सवालों के जवाब भी दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन की साइंस सिटी में तारामंडल का सभी बच्चों को अवलोकन करना चाहिए, जहां अंतरिक्ष विज्ञान के संबंध में रोचक ढंग से महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त होती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्विज के सभी प्रतिभागियों को उनकी जागरूकता के लिए भी बधाई दी। क्विज प्रतियोगिता के विजेता अभ्युदय मध्यप्रदेश क्विज विजेताओं में बीना से कीन्स अहिरवार, मंडला से आशीष मरकाम, राजगढ़ से संदीप बादल, शाजापुर से सचिन मीणा, बैतूल से प्रमोद देशमुख, इंदौर से अमन उपाध्याय, शाजापुर सुभाष पाटीदार, मंदसौर से जलज वर्मा, जबलपुर से नवीन केवट, ग्वालियर से देवेन्द्र सिंह, उज्जैन से राहुल शर्मा, नर्मदापुरम से दीपशिखा जाटव, भोपाल से अंजली जैन, विदिशा से सलोनी व्यास, देवास से दीपिका यादव, भोपाल से पारूल खरे, छतरपुर से रोमिका चौरसिया, सागर से पलक पासी, शुजालपुर से ज्योति जायसवाल, अनूपपुर से आंचल तिवारी, सतना से तनुजा सिंह, बालाघाट से पीहू स्वामी, नर्मदापुरम से रजनी परिहार और इंदौर से नरेन्द्र कुमार हैं।  

हर खेत तक पहुंचाएंगे पानी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मंत्रि-परिषद् ने राजगढ़ एवं रायसेन जिले की तीन सिचांई परियोजनाओं को दी मंजूरी सारंगपुर, भोजपुर और उदयपुरा विधानसभा क्षेत्र के किसानों ने मुख्यमंत्री का आभार जताकर किया अभिनंदन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान हमारा अभिमान हैं। किसानों का मान बढ़ाने हमने कोई कमी नहीं की। प्यासे खेतों तक पानी पहुंचाना हमारा लक्ष्य है और हर खेत तक पानी पहुंचाकर हम यह लक्ष्य जल्द ही पाकर रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास में किसानों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार किसान कल्याण के लिए संकल्पित है। प्रदेश के किसान समृद्ध और सशक्त बनें, इसी मंशा से हमने वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना, केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और ताप्ती ग्राउंड वॉटर रिचार्ज मेगा परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। इन तीनों नदी परियोजनाओं के पूरा होने पर प्रदेश का लगभग सम्पूर्ण कृषि रकबा सिंचित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी मध्यप्रदेश में कृषि का सिंचित रकबा 56 लाख हेक्टेयर है। हमारी सरकार ने इसे जल्द से जल्द 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के एक-एक गांव और हर एक खेत तक बिजली और पानी की सतत् आपूर्ति बरकरार रहे, यही हमारा संकल्प है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का राजगढ़ जिले की सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र और रायसेन जिले की भोजपुर एवं उदयपुरा विधानसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं किसानों ने आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन कर आभार जताया। उल्लेखनीय है कि 13 जनवरी, 2026 को हुई मंत्रि-परिषद् की बैठक में राज्य सरकार द्वारा इन तीन विधानसभा क्षेत्रों के किसानों के हित में करीब 900 करोड़ रुपए लागत वाली तीन अलग-अलग सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। किसान इसी सौगात के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त करने मुख्यमंत्री निवास आए थे। बड़ी संख्या में आए किसानों ने इस सौगात के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आल्हादित होकर अभिनंदन किया। किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को भगवान शिव की प्रतिमा, बीजासन माता का चित्र, जैविक अनाज एवं स्टील और लकड़ी के हल की प्रतिकृति भेंटकर अपना हर्ष और आभार जताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं एक किसान परिवार से आते हैं और खेती के लिए सिंचाई का महत्व उन्हें अच्छी तरह ज्ञात है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नर्मदा, चंबल, बेतवा, ताप्ती, क्षिप्रा जैसे अनेक नदियों का मायका है और इन्हीं के कारण हमारा प्रदेश जल संपदा से संपन्न है। प्रदेश में बहती नदियां किसानों को सिंचाई के जल उपलब्ध कराती हैं, ये नदियां हमारे लिए जीवन रेखा के समान हैं। कृषि के लिए पर्याप्त सिंचाई सुविधाओं के विकास में हम कोई कसर रख रहे हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री स्व. श्री सुंदरलाल पटवा, पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का प्रदेश में किसानों के कल्याण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए स्मरण किया। उन्होंने कहा कि स्व. श्री पटवा प्रदेश के एक आदर्श राजनेता थे। इन तीन विधानसभा क्षेत्रों के किसान होंगे लाभान्वित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मंत्रि-परिषद द्वारा राजगढ़ एवं रायसेन जिले की कुल 898.42 करोड़ रूपये लागत वाली तीन सिंचाई परियोजनाओं के लिए की स्वीकृति दी गई है। राजगढ़ जिले की सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र में 396 करोड़ 21 लाख रूपये लागत वाली मोहनपुरा विस्तारीकरण (सारंगपुर) सिंचाई परियोजना से सारंगपुर तहसील के 26 ग्रामों की 11,040 हैक्टेयर भूमि में सिंचाई उपलब्ध होगी। इस परियोजना से 10 हजार 400 किसान परिवार लाभांवित होंगे। रायसेन जिले की भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में 115 करोड़ 99 लाख रूपये लागत वाली सुल्तानपुरा उद्वहन सिंचाई परियोजना से सुल्तानपुर तहसील के 20 गांवों की 5,700 हैक्टेयर भूमि में सिंचाई उपलब्ध होगी। इससे 3,100 किसान परिवारों को लाभ होगा। साथ ही रायसेन जिले की ही उदयपुरा विधानसभा क्षेत्र की 386 करोड़ 22 लाख रुपये लागत वाली बारना उद्वहन सिंचाई परियोजना से बरेली तहसील के 36 गांवों की 15 हजार हैक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। इस परियोजना से 6,800 किसान परिवार सीधे तौर पर लाभांवित होंगे। जनप्रतिनिधियों एवं किसानों ने माना मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार अभिनंदन समारोह में कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भागीरथ के समान प्रदेश में खेत-खेत तक सिंचाई की गंगा बहाने का संकल्प लिया है। राजगढ़ को पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना का भी लाभ मिलेगा। इससे जिले के लगभग 200 से अधिक गांवों के हजारों लोगों को पीने के स्वच्छ पेयजल एवं सिंचाई के लिए जल उपलब्ध होगा। जिले में सिंचाई सुविधाओं के विकास से श्रमिकों और किसानों का दूर क्षेत्रों में रोजगार की तलाश में आवागमन धीरे-धीरे कम हो रहा है। उदयपुरा विधानसभा के किसानों की ओर से आभार व्यक्त करते हुए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव अपना वादा निभाने में कभी पीछे नहीं हटते हैं। उन्होंने बरेली की जनसभा में बारना सिंचाई परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए घोषणा की थी। प्रधानमंत्री श्री मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकसित भारत @2047 की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पूर्व मंत्री एवं भोजपुर विधायक श्री सुरेन्द्र पटवा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुल्तानपुर के किसानों को 115 करोड़ रुपए लागत से सिंचाई परियोजना की सौगात दी है।

मंत्री टेटवाल ने मुख्यमंत्री का माना आभार

सारंगपुर को मिली नई सौगात, मोहनपुरा डेम से जुड़े 26 गांव भोपाल राजगढ़ जिले की सारंगपुर विधानसभा में लगातार विकास कार्यों को गति मिल रही है। किसानों के हित को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने मोहनपुरा सिंचाई परियोजना के विस्तारीकरण के तहत सारंगपुर क्षेत्र के 26 गांवों को योजना से जोड़ने का निर्णय लिया है। इस निर्णय से क्षेत्र के किसानों को सिंचाई परियोजना का प्रत्यक्ष और स्थायी लाभ मिलेगा। 11,040 हेक्टेयर कृषि भूमि को मिलेगी सिंचाई सुविधा मंत्री श्री गौतम टेटवाल ने बताया कि सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत मोहनपुरा विस्तारीकरण सिंचाई परियोजना को राज्य सरकार द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना पर 396.21 करोड़ रुपए की लागत आएगी। परियोजना के माध्यम से सारंगपुर तहसील के 26 ग्रामों की 11,040 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। परियोजना से किसानों की आय में वृद्धि होगी मंत्री श्री टेटवाल ने बताया कि इस परियोजना के तहत आधुनिक दाबयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली को अपनाया जाएगा, जिससे जल की बचत के साथ सिंचाई की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा। परियोजना से क्षेत्र के भू-जल स्तर में सुधार होगा, कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। इस योजना से लगभग 10,400 किसान परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। मंत्री श्री टेटवाल ने मुख्यमंत्री का जताया आभार मंत्री श्री गौतम टेटवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार लगातार जनहित के कार्य कर रही है। किसान कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। मोहनपुरा सिंचाई परियोजना एक वृहद और दूरगामी लाभ देने वाली योजना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सारंगपुर को नई सौगात देते हुए मोहनपुरा डेम की सिंचाई परियोजना से 26 गांवों को जोड़ने की स्वीकृति प्रदान की है। इसके लिए उन्होंने सारंगपुर की जनता की ओर से मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। मोहनपुरा सिंचाई परियोजना से जुड़े 26 ग्राम मोहनपुरा सिंचाई परियोजना के विस्तारीकरण के तहत सारंगपुर तहसील के लीमा चौहान, पान्दा, टूट्याहेड़ी, दराना, देवीपुर, भेंसवा माता, भवानीपुर, कलाली, अरण्या, लोटटया, घटटटया, रोजड़कलां, धमन्दा, गायन, पट्टी, इचीवाड़ा, शंकरनगर, अमलावता, पीपल्या पाल, पाडल्या माता, शेरपुरा, कमलसरा, किशनखेड़ी, सुल्तानिया, जोगीपुरा और छापरा ग्रामों को योजना से जोड़ा गया है।  

स्वास्थ्य उपकरणों की उपलब्धता के साथ उपयोग की सतत मॉनिटरिंग करें : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, मानव संसाधन की उपलब्धता और अधोसंरचना विकास कार्यों की समीक्षा की भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, मानव संसाधन की उपलब्धता और अधोसंरचना विकास कार्यों में आवश्यक निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने ब्यौहारी, बुढ़ार एवं उमरिया क्षेत्र में स्त्री रोग विशेषज्ञ के रिक्त पदों की शीघ्र पूर्ति के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने नर्सिंग शिक्षा को सशक्त बनाने हेतु नर्सिंग टीचर्स के 59 राजपत्रित पदों की मांग शीघ्र लोक सेवा आयोग को अग्रेषित करने के निर्देश दिए। सिंगरौली नर्सिंग कॉलेज के लिए भूमि चिन्हांकन एवं टेंडर प्रक्रिया समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने स्वास्थ्य उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनके उपयोग की सतत मॉनिटरिंग करने पर बल दिया। चिकित्सकों की पदोन्नति हेतु ‘लोक सेवा पदोन्नति नियम’ से छूट प्राप्त करने संबंधी कार्यवाही सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने प्रदेश के सुपर स्पेशिलिटी अस्पतालों में कार्यरत मेडिकल टीचर्स के वेतन एवं भत्तों की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों में रिक्त ट्यूटर/डिमॉन्स्ट्रेटर पदों पर सीधी भर्ती की कार्यवाही करने के निर्देश दिए।उन्होंने रक्ताधान सेवाओं को और बेहतर बनाने हेतु प्रदेश में एन.ए.टी. सुविधा का विस्तार करने के निर्देश दिए। बॉण्ड चिकित्सकों के लिए एकीकृत ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू करने एवं ऑनलाइन एन.ओ.सी. जारी करने की प्रक्रिया का क्रियान्वयन करने के निर्देश भी दिए गए। स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत पूर्व की निवेश नीति से संबंधित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। चिकित्सा महाविद्यालयों में आउटसोर्स पदों की स्वीकृति के मानकों में सुधार कर स्किल्ड/सेमी-स्किल्ड कार्मिकों का प्रावधान करने हेतु प्रस्ताव मंत्रि-परिषद् के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने ग्वालियर चिकित्सा महाविद्यालय में सी.टी.वी.एस. विभाग (हार्ट बायपास) की स्थापना के लिए कार्यवाही करने के निर्देश दिए। साथ ही जिला अस्पतालों में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की नियुक्ति की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ करने को कहा गया। बैठक में आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री तरुण राठी, एम.डी. एम.पी.पी.एच.एस.सी.एल. श्री मयंक अग्रवाल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

राजधानी पटना होगी तारों से मुक्त, अंडरग्राउंड पावर सप्लाई को मिली हरी झंडी

पटना बिहार की राजधानी पटना के लोगों को बिजली के खंभों एवं तारों के जाल से मुक्ति मिलने वाली है। शहर में अब बिजली की सप्लाई अंडरग्राउंड होगी। इसके लिए जमीन के अंदर केबल बिछाई जाएगी। नीतीश कैबिनेट से इस परियोजना को हरी झंडी मिल गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। बैठक में कुल 41 एजेंडे पारित हुए।   जानकारी के अनुसार, पटना शहर में अंडरग्राउंड केबलिंग के जरिए घरों में बिजली आपूर्ति की परियोजना का प्रस्ताव मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृत किया गया। इस परियोजना पर कुल 653 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। परियोजना के तहत पटना इलेक्ट्रिक सप्लाई अंडरटेकिंग (पेसू) के अंतर्गत 13 प्रमंडलों में भूमिगत केबलिंग के जरिए बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इस परियोजना पर 60 फीसदी राशि केंद्र सरकार द्वारा खर्च की जाएगी। जबकि शेष 40 फीसदी बजट बिहार सरकार खर्च करेगी। क्या होती है अंडरग्राउंड केबलिंग? अभी पटना में बिजली की सप्लाई खंभों पर लटके तारों से होती है। नई परियोजना में जमीन के अंदर भूमिगत केबल बिछाई जाएगी, जिससे विद्युत आपूर्ति की जाएगी। इससे आंधी-तूफान के समय बिजली की कटौती से छुटकारा मिलेगा। साथ ही तंग गलियों और चौक-चौराहों पर तार हवा में लटके रहने से हादसों का जोखिम भी कम होगा। इससे शहर की सौंदर्यता बढ़ेगी और बिजली चोरी से विद्युत विभाग को होने वाले नुकसान में भी कमी आएगी।

प्राइवेट स्कूलों की मान्यता व नवीनीकरण के लिए आवेदन की अंतिम तिथि अब 20 जनवरी 2026

भोपाल राज्य शिक्षा केन्द्र, ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत संचालित प्राइवेट स्कूलों की मान्यता एवं मान्यता नवीनीकरण के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए सभी अशासकीय विद्यालयों को अनिवार्य रूप से ऑनलाइन माध्यम से मान्यता नवीनीकरण अथवा नवीन मान्यता के लिए आवेदन करना होगा। राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा जारी आदेश के अनुसार पूर्व में आवेदन की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर 2025 निर्धारित की गई थी, किन्तु तकनीकी एवं व्यावहारिक समस्याओं को दृष्टिगत रखते हुए इसे बढ़ाकर अब 20 जनवरी 2026 कर दिया गया है। राज्य शिक्षा केन्द्र ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा का अधिकार नियम 11 के उपनियम 4(ग) के तहत यदि कोई स्कूल निर्धारित समय-सीमा में ऑनलाइन आवेदन नहीं करता है, तो उस स्कूल को मान्यता विहीन माना जाएगा और विद्यालय का संचालन शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 18 के अंतर्गत दंडनीय अपराध होगा।  

समाधान योजना के क्रियान्वयन में कोताही पर होगी सख्त कार्यवाई, ऊर्जा मंत्री तोमर ने की समीक्षा

भोपाल समाधान योजना के क्रियान्वयन में कोताही पर सख्त कार्यवाई की जाएगी। अभी तक योजना में अपेक्षित प्रगति परिलक्षित नहीं हो रही है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह बात मंगलवार को विभागीय योजना की समीक्षा के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि इस योजना की सफलता में कम्पनी का भविष्य भी निहित है। मंत्री श्री तोमर ने कहा कि कितना बिजली बिल बकाया है, कितना वसूली योग्य है और कितना वसूली योग्य नहीं है, इसकी पूरी जानकारी दें। उन्होंने कहा कि बड़े डिफॉल्टरों के विरूद्ध पहले कार्यवाई करें। समाधान योजना में अभी तक जमा हुए 613 करोड़ 26 लाख रूपये समाधान योजना में अभी तक 613 करोड़ 26 लाख रूपये उपभोक्तओं द्वारा जमा कराएं जा चुके है। इन उपभोक्ताओं के 271 करोड़ रूपये के सरचार्ज माफ किये गए है। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के अंतर्गत 115 करोड़ 58 लाख, मध्य क्षेत्र में 395 करोड़ 96 लाख और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी में 101 करोड़ 72 लाख रूपये जमा हुए हैं। मंत्री श्री तोमर ने आरडीएसएस के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें। बिजली अवरूद्ध होने की जानकारी उपभोक्ताओं को कारण सहित दें। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को उनके घरों में विद्युत उपयोग की क्षमता के अनुसार लोड स्वीकृत कराने के लिये समझाइश दें। बैठक में सचिव ऊर्जा श्री विशेष गढ़पाले एवं तीनों विद्युत वितरण कम्पनियों के चीफ इंजीनियर उपस्थित थे।