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बिहार के खिलाडियों ने दो साल में देश-विदेश में बढ़ाया ‘वैभव’

पटना. बिहार में खेल अब सिर्फ मैदान तक सीमित गतिविधि नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव, युवा सशक्तिकरण और राज्य की नई पहचान का मजबूत आधार बन चुका है। 9 जनवरी 2024 को गठित बिहार खेल विभाग ने महज दो वर्षों में यह साबित कर दिया है कि यदि नीति स्पष्ट हो और इच्छाशक्ति मजबूत, तो खेल किसी भी राज्य की तस्वीर बदल सकते हैं। इन दो वर्षों का सफर बिहार को उस निर्णायक मोड़ पर ले आया है, जहां से वर्ष 2026 को खेलों के नए युग की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है। कैसे शुरू हुई खेल क्रांति बिहार में खेल क्रांति की नींव योजनाबद्ध तरीके से रखी गई। अगस्त 2024 में राजगीर खेल अकादमी की स्थापना ने वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाओं और संरचित कोचिंग का रास्ता खोला। इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उद्घाटित बिहार खेल विश्वविद्यालय, राजगीर ने खेल को शिक्षा, शोध और करियर से जोड़ते हुए एक स्थायी ढांचा खड़ा किया। इन संस्थानों ने यह संदेश दिया कि बिहार में खेल अब शौक या विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य का सशक्त माध्यम है। गांव-गांव से निकल रहे चैंपियन बीते दो वर्षों में खेल विभाग ने अवसंरचना को केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे अवसर सृजन का माध्यम बनाया। जिला मुख्यालयों से लेकर पंचायत स्तर तक विकसित खेल सुविधाओं ने बच्चों, युवाओं और महिलाओं के लिए खेल को सुलभ बनाया है। प्रखंड स्तरीय आउटडोर स्टेडियम, जिला खेल भवन सह जिमनैजियम और गांवों में विकसित खेल मैदानों ने खेल को शहरों की सीमाओं से बाहर निकालकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया है। वर्ष 2025 में ही 257 प्रखंड स्तरीय स्टेडियमों का पूर्ण होना इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल है। आज बिहार के गांवों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी उभर रहे हैं। विश्व स्तर पर बिहार की पहचान बिहार अब केवल खिलाड़ियों को तैयार करने वाला राज्य नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का भरोसेमंद मेजबान भी बन चुका है। एशियन चैंपियंस ट्रॉफी, सेपकटाकरा वर्ल्ड कप, एशियन रग्बी सेवन्स, खेलो इंडिया यूथ गेम्स, हीरो एशिया कप हॉकी और ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज एथलेटिक्स चैंपियनशिप जैसे आयोजनों ने यह साबित कर दिया कि बिहार वैश्विक खेल मानकों पर खरा उतरने की पूरी क्षमता रखता है। इन आयोजनों से न केवल राज्य की छवि बदली, बल्कि पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और युवाओं के आत्मविश्वास को भी नई ऊर्जा मिली। बच्चों में जगी खेल की नई रुचि खिलाड़ी विकास की सोच में भी बुनियादी बदलाव देखने को मिला है। ‘मशाल’ जैसी व्यापक प्रतिभा खोज पहल ने लाखों बच्चों को खेल से जोड़ा। एकलव्य स्पोर्ट्स स्कूलों और प्रशिक्षण केंद्रों के विस्तार से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को निरंतर मार्गदर्शन और बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। खेलो इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, राजगीर सहित अन्य प्रशिक्षण केंद्रों के कारण अब बिहार के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय तैयारी के लिए बाहर जाने की मजबूरी नहीं रही। खिलाड़ी-केंद्रित शासन की शुरुआत खेल विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा बदलाव किया है। पंचायत स्तर तक गठित खेल क्लबों ने स्थानीय नेतृत्व को मजबूत किया है। वहीं छात्रवृत्ति, सरकारी नियुक्ति, प्रोत्साहन राशि और कल्याणकारी योजनाओं ने यह भरोसा दिलाया है कि बिहार में खेल प्रतिभा का भविष्य सुरक्षित है। पदक जीतने वाले खिलाड़ी अब सिर्फ सम्मान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें स्थायी अवसर और सामाजिक प्रतिष्ठा भी मिल रही है। बिहार बनेगा खेल हब वर्ष 2026 बिहार खेल विभाग के लिए आत्मविश्वास और विस्तार का वर्ष होगा। सात निश्चय योजना (03) के तहत पटना में प्रस्तावित स्पोर्ट्स सिटी, जिला-विशेष खेल उत्कृष्टता केंद्र, एकलव्य खेल केंद्रों का सुदृढ़ संचालन, नई छात्रवृत्ति प्रणाली और खेल प्रशासन में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां, ये सभी पहल बिहार को खेल आधारित विकास मॉडल की ओर ले जाएंगी। खेल युग की औपचारिक शुरुआत दो वर्षों में बिहार खेल विभाग ने यह सिद्ध कर दिया है कि खेल राज्य की पहचान और दिशा दोनों बदल सकते हैं। विकसित भारत 2047 और गौरवशाली बिहार 2047 के लक्ष्य के साथ बिहार अब खेलों के जरिए वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की ओर अग्रसर है। वर्ष 2026 को बिहार में इसी नए खेल युग की औपचारिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

उपराष्ट्रपति बोले- ‘सिर्फ अपने लिए जीना गलत, समाज को कुछ वापस देना चाहिए’

चंडीगढ़. एलपीयू में 12वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया। इस समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सीपी. राधाकृष्णन, राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। इस दौरान यूनाइटेड किंगडम की पूर्व प्रधानमंत्री मैरी एलिजाबेथ ट्रस को डॉक्टरेट मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। इस मौके उपराष्ट्रपति ने ग्रेजुएट छात्रों को बधाई देते हुए दीक्षांत समारोह को एक संतुष्टि का क्षण बताया। जो एक साथ जिम्मेदारी को भी बढ़ाता है – न केवल ग्रेजुएट्स के लिए, बल्कि माता-पिता, स्टाफ सदस्यों और संस्थानों के लिए भी जो युवा दिमागों को आकार देते हैं। इसी के साथ उन्होंने मेड-इन-इंडिया उत्पादों को अपनाने के माध्यम से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाली एलपीयू की पहलों की सराहना की। उन्होंने स्नातकों से ईमानदारी, विविधता, करुणा और सेवा के मूल्यों को आगे बढ़ाने का आग्रह किया, इस बात पर जोर देते हुए कि “अपने लिए जीना गलत नहीं है, लेकिन सिर्फ़ अपने लिए जीना गलत है। हमें समाज को कुछ वापस देना चाहिए”। इसी के साथ छात्रों से न केवल खुद नशीली दवाओं को अस्वीकार करने, बल्कि अपने साथियों को भी इस जाल में फंसने से रोकने का आग्रह किया। वहीं पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने ग्रेजुएट होने वाले छात्रों को बधाई दी और उन्हें याद दिलाया कि शिक्षा सिर्फ़ अकादमिक उपलब्धि तक ही सीमित नहीं, बल्कि इसमें चरित्र निर्माण, मूल्यों और नागरिक ज़िम्मेदारी का भी महत्व है। संसद मेंबर व एलपीयू के फाउंडर चांसलर डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति के साथ-साथ प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यक्तियों की मेजबानी करने पर खुशी ज़ाहिर की। डॉ. मित्तल ने इस बात पर जोर दिया कि एलपीयू में शिक्षा सिर्फ डिग्रियों तक ही सीमित नहीं है। इसी के साथ यूनाइटेड किंगडम की पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा भारत उभरती हुई वैश्विक व्यवस्था को आकार देने वाली एक केंद्रीय शक्ति है। इसी के साथ जोखिम लेने और इनोवेशन के महत्व पर ज़ोर देते हुए, ग्रेजुएट छात्रों को स्थापित प्रणालियों को चुनौती देने, असफलताओं से सीखने और दृढ़ विश्वास के साथ नेतृत्व करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस समारोह में 2023- 2024 और 2024-2025 के रेगुलर, ऑनलाइन और डिस्टेंस एजुकेशन कार्यक्रमों के 50,000 से ज़्यादा छात्रों को डिग्रियां दी गई। इसी के साथ यूनिवर्सिटी ने 320 छात्रों को अकादमिक पदक प्रदान किए, 37 स्वर्ण पदक विजेता शामिल हैं, जबकि 861 पीएचडी रिसर्चर को उनके शोध योगदान, दृढ़ता और अकादमिक कठोरता के लिए सम्मानित किया गया। इस दीक्षांत समारोह में लवली ग्रुप के चेयरमैन रमेश मित्तल, वाइस-चेयरमैन नरेश मित्तल, प्रो-चांसलर डॉ. कर्नल रश्मि मित्तल, पंजाब के बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत और एलपीयू के डायरेक्टर जनरल एच.आर. सिंगला भी शामिल हुए।

कलेक्टर की पहल पर उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की फ्री हुई सोनोग्राफी

राजनांदगांव. जिले में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का नि:शुल्क जांच एवं उपचार किया जा रहा है। अब तक 1667 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी की जा चुकी है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान अंतर्गत जिले में गर्भवती महिलाओं को प्रसवपूर्व देखभाल उपलब्ध कराने प्रत्येक माह की 9 एवं 24 तारीख को विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का नि:शुल्क जांच, उपचार एवं परामर्श प्रदान किया जाता है। अभियान अंतर्गत पहला प्रसव ऑपरेशन से हुआ हो, पहले गर्भपात या मृत शिशु का जन्म हुआ हो, जिनका वजन या ऊंचाई कम हो, कम उम्र में गर्भधारण किया हो, गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह या किसी अन्य बीमारी से ग्रसित महिलाओं की जांच की जाती है। कलेक्टर जितेन्द्र यादव के निर्देशानुसार प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान अंतर्गत उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को प्रत्येक सप्ताह दूरभाष के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी एवं सलाह दी जा रही है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान अंतर्गत जिले में 1775 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाएं है। जिसमें 1667 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का सोनोग्राफी किया गया है एवं शेष 108 गर्भवती महिलाओं का शनिवार तक सोनोग्राफी कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की मदद से आज कुल 16 गर्भवती महिलाओं का नि:शुल्क सोनोग्राफी किया गया है। जिसमें सुन्दरा अस्पताल में घुमका के 11 एवं भारत डायग्नोस्टिक में 5 गर्भवती महिलाओं का नि:शुल्क सोनोग्राफी किया गया है।

मुख्यमंत्री साय का बयान: विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में उद्यमियों का योगदान रहेगा महत्वपूर्ण

रायपुर : विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में उद्यमियों की होगी महत्वपूर्ण भूमिका- मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री कॉस्मो ट्रेड एंड बिल्ड फेयर एक्सपो 2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में हुए शामिल रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विगत दिवस राजधानी रायपुर में रोटरी क्लब ऑफ कॉस्मोपॉलिटन रायपुर द्वारा आयोजित कॉस्मो ट्रेड एंड बिल्ड फेयर एक्सपो 2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में उद्यमियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।   मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार हर वर्ग के उत्थान के लिए कार्य कर रही है। व्यापार जगत की बेहतरी और ग्राहकों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जीएसटी दरों में कटौती की गई, जिसका सीधा लाभ जनता को मिल रहा है। जीएसटी रिफॉर्म्स से कई वस्तुओं की कीमत में कमी आई है। जीएसटी की प्रक्रिया को काफी सुगम बनाया गया है।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई उद्योग नीति को देश-विदेश में सराहा जा रहा है। लगभग आठ लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव हमें प्राप्त हो चुके हैं। हर सेक्टर में हमें ये निवेश प्रस्ताव मिले हैं जिनपर धरातल पर कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। प्रदेश में रोजगार सृजन पर हमारा विशेष फोकस है। नई उद्योग नीति में एक हजार से अधिक रोजगार प्रदान करने वाले उद्यमियों को विशेष इंसेंटिव प्रदान करने के प्रावधान किए गए हैं।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ बनाने में रोटरी क्लब और उद्यमियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। रोटरी क्लब उद्यम के साथ ही परोपकार का भी कार्य करता है। क्लब द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्य बहुत प्रशंसनीय हैं। ये बहुत खुशी की बात है कि यह एक्सपो मध्य भारत का सबसे बड़ा एक्सपो है, जिसमें 300 से अधिक स्टॉल हैं। इस विशाल आयोजन का लाभ निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ को मिलेगा।  रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ को लगभग 8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। ये बहुत खुशी की बात है कि रोटरी क्लब द्वारा आयोजित इस एक्सपो का यह 16वां वर्ष है। रोटरी क्लब सेवा से जुड़ी एक संस्था है। रोटरी क्लब द्वारा पोलियो निर्मूलन के कार्य में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है। मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में मोबाइल आई क्लीनिक की एम्बुलेंस का लोकार्पण किया। उन्होंने विभिन्न सेक्टर्स में विशिष्ट योगदान दे रही 25 महिला उद्यमियों को सम्मानित किया और इन महिला उद्यमियों पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन भी किया। इस अवसर पर पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, राम गर्ग सहित रोटरी क्लब ऑफ कॉस्मोपॉलिटन रायपुर के सदस्यगण व बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में मुख्यमंत्री साय ने की घोषणा

रायपुर : चावल निर्यातकों को दी बड़ी सौगात, मंडी शुल्क में छूट की अवधि एक साल बढ़ाई गई इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में मुख्यमंत्री साय ने की घोषणा ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है – मुख्यमंत्री साय रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के नीजि  रिसॉर्ट में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने  चावल निर्यातकों को बड़ी सौगात दी है। मंडी शुल्क में छूट की अवधि एक साल बढ़ाई है। इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दौरान सीएम साय ने की घोषणा से चावल निर्यातकों और किसान दोनों के लिए बड़ी सौगात है। साथ ही कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के क्षेत्रीय कार्यालय का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और दंतेवाड़ा में ऑर्गेनिक चावल की खेती हो रही है, जिसे और प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। छतीसगढ़ से चावल के एक्सपोर्ट को मिलेगा बढ़ावा      मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट का यह दूसरा संस्करण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस आयोजन में 12 देशों के बायर्स तथा 6 देशों के एम्बेसी प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति से छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने में मदद मिलेगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर सभी विदेशी मेहमानों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।  मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने छत्तीसगढ़ को सोच-समझकर “धान का कटोरा” कहा था और आज प्रदेश इस नाम की सार्थकता सिद्ध कर रहा है। चावल छत्तीसगढ़ के खानपान का अभिन्न हिस्सा रहा है और यहां हजारों किस्मों की धान की प्रजातियां उगाई जाती हैं। सरगुजा अंचल के सुगंधित जीराफूल और दुबराज जैसे चावलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनकी खुशबू दूर से ही पहचान में आ जाती है।  छतीसगढ़ से चावल के एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा। चावल निर्यातक लंबे समय से मंडी शुल्क में छूट की मांग कर रहे थे। पिछले साल भी सरकार ने दी थी, छूट दिसंबर 2025 में मंडी शुल्क में छूट की अवधि खत्म हो रही थी। छत्तीसगढ़ से 90 देशों को करीब एक लाख टन चावल का किया जा रहा है निर्यात           मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे चावल के प्रसंस्करण और निर्यात को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से वर्तमान में लगभग 90 देशों को करीब एक लाख टन चावल का निर्यात किया जा रहा है। सरकार निर्यातकों के सहयोग के लिए सदैव तत्पर है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। पिछले वर्ष 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी और इस वर्ष भी खरीदी में वृद्धि की संभावना है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र व राज्य शासन द्वारा किसानों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी भी साझा की।  मुख्यमंत्री ने चावल पर केन्द्रित प्रदर्शनी का किया अवलोकन     इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दौरान मुख्यमंत्री साय ने चावल पर केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न किस्मों के चावल, क्षेत्र विशेष में उत्पादित प्रजातियों, चावल उत्पादन में हो रहे नवाचारों तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने शासकीय स्टालों का भी निरीक्षण कर चावल के उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देने से जुड़े कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे नवाचारों से चावल की पैदावार में वृद्धि होगी, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।     इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, एपिडा के चेयरमेन अभिषेक देव, छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कांति लाल, राम गर्ग, देश भर से आये मिलर्स, चावल व्यवसायी एवं स्टेक होल्डर्स उपस्थित रहे।

RailOne App पर अनारक्षित टिकट पर मिलेगी 3% की छूट, 14 जनवरी से शुरू होगा नया नियम

 भोपाल  रेलवे द्वारा डिजिटल टिकट बुकिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यात्रियों को एक बड़ी राहत दी जा रही है। अब कोटा मंडल के यात्री रेलवन मोबाइल ऐप के माध्यम से अनारक्षित टिकट बुक करने पर तीन प्रतिशत की सीधी छूट का लाभ उठा सकेंगे। यह सुविधा 14 जनवरी से प्रायोगिक रूप से आगामी छह माह की अवधि के लिए लागू की जा रही है। यह छूट आर-वालेट को छोड़कर अन्य सभी डिजिटल भुगतान विकल्पों जैसे यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और नेट बैंकिंग पर लागू होगी। वहीं, आर-वालेट से टिकट बुक करने वाले यात्रियों को पहले की तरह तीन प्रतिशत बोनस कैशबैक मिलता रहेगा। यह प्रायोगिक योजना 14 जनवरी से 14 जुलाई तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद सेंटर फार रेलवे इंफार्मेशन सिस्टम द्वारा योजना की समीक्षा कर आगे का निर्णय लिया जाएगा। रेलवे का उद्देश्य इस पहल के माध्यम से यात्रियों को डिजिटल भुगतान के प्रति प्रोत्साहित करना, टिकट बुकिंग प्रक्रिया को आसान बनाना और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।     वर्तमान में रेलवन ऐप पर केवल आर-वालेट के माध्यम से अनारक्षित टिकट बुक करने पर तीन प्रतिशत की राशि बोनस कैशबैक के रूप में दी जाती है। लेकिन नई व्यवस्था के तहत 14 जनवरी से सभी डिजिटल भुगतान माध्यमों से अनारक्षित टिकट बुक करने पर यात्रियों को तीन प्रतिशत की सीधी छूट प्रदान की जाएगी।     -सौरभ कटारिया, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक मकर संक्रांति से पहले रेलवे की ओर से अपील मकर संक्रांति का पर्व करीब आते ही भोपाल रेल मंडल ने आमजन से रेलवे लाइनों के आसपास पतंगबाजी न करने की अपील की है। रेलवे प्रशासन ने चेतावनी दी है कि हाई वोल्टेज बिजली लाइनों के कारण यह शौक जानलेवा साबित हो सकता है। भोपाल रेल मंडल में शत प्रतिशत ट्रेनों का संचालन 25,000 वोल्ट की हाई टेंशन विद्युत लाइनों के माध्यम से होता है, जिनमें 24 घंटे लगातार करंट प्रवाहित रहता है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यदि पतंग का मांझा इन विद्युत तारों में उलझ जाता है, तो गीला, धातुयुक्त या सिंथेटिक मांझा करंट को सीधे पतंग उड़ाने वाले व्यक्ति तक पहुंचा सकता है, जिससे गंभीर हादसा या मौत तक हो सकती है। पूर्व में देश के विभिन्न हिस्सों में इस तरह की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें लोगों की जान गई है। वहीं पतंग और मांझे के बिजली की लाइनों में फंसने से न केवल जनहानि का खतरा रहता है, बल्कि रेल संचालन भी बाधित हो सकता है। इससे ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित होती है और यात्रियों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है। मकर संक्रांति के अवसर पर भोपाल रेल प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे रेलवे ट्रैक, ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइनों और स्टेशन परिसरों के पास पतंगबाजी से बचें। सुरक्षित स्थानों पर ही पतंग उड़ाएं और दूसरों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें।

बिहार में 36.3 लाख लीटर शराब जब्त कर 1.25 लाख लोग गिरफ्तार

पटना. बिहार में पिछले 9 साल से शराबबंदी लागू है। जिसके चलते यहां शराब तस्करों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। साल 2025 में पुलिस ने 36.3 लाख लीटर से ज़्यादा शराब जब्त की है। वहीं, शराबबंदी कानून तोड़ने के आरोप में 1.25 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने बताया कि ज़ब्त की गई शराब में 18.99 लाख लीटर इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) और 17.39 लाख लीटर देसी शराब शामिल थी। अधिकारियों ने पिछले साल शराबबंदी कानून तोड़ने के आरोप में 1,25,456 लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 1,21,671 था। यानी 2024 की तुलना में 2025 में 3 प्रतिशत अधिक गिरफ्तारी की गई है। 2016 में लागू किया गया था शराबबंदी कानून बिहार सरकार ने अप्रैल 2016 में एक कानून बनाया था, जिसके तहत राज्य में शराब के निर्माण, व्यापार, स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट, बिक्री और सेवन पर रोक लगा दी गई थी। हालांकि, इस कानून के कड़े प्रावधानों के बावजूद, तब से कई बार शराब की तस्करी और जहरीली शराब से होने वाली मौतों की खबरें सामने आई हैं। इस पर डीजीपी ने कहा कि जहरीली शराब की घटनाओं को रोकने के लिए, स्पिरिट बेचने वालों पर खास नजर रखी जा रही है।उन्होंने कहा कि 2025 के दौरान शराब से जुड़ी कोई बड़ी घटना नहीं हुई, लेकिन शराबबंदी से जुड़े मामलों में जब्ती और गिरफ्तारियों में 25 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। पुलिस लगातार चला रही है अभियान उन्होंने कहा, "हम अवैध शराब के धंधे में शामिल लोगों की संपत्ति को भी टारगेट कर रहे हैं, ताकि उन्हें आर्थिक रूप से रोका जा सके।" कुमार ने बताया कि पिछले साल शराब के धंधे के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने कुल 38 ऑपरेशन किए। इसमें 15 ऑपरेशन झारखंड, 17 उत्तर प्रदेश, चार छत्तीसगढ़ और 2 मध्य प्रदेश में हुए। इन अभियानों के दौरान कुल 29 बड़े वाहन, 26 छोटे वाहन और 2,27,182 लीटर शराब ज़ब्त की गई। यह 2024 में प्रोहिबिशन यूनिट द्वारा किए गए चार ऑपरेशन्स की तुलना में एक बड़ी बढ़ोतरी है, जब 28,210 लीटर स्पिरिट जब्त की गई थी। विनय कुमार ने बताया कि 2025 में, शराब के अवैध व्यापार से जमा की गई संपत्ति के लिए कुल 289 लोगों की पहचान की गई और उन व्यक्तियों के खिलाफ BNSS की धारा 107 के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह धारा आपराधिक गतिविधि से जुड़ी संपत्ति की कुर्की, जब्ती या बहाली से संबंधित है।

बिहार में अब फोन से करें ठगी की शिकायत

पटना. बीमा कराया, समय पर प्रीमियम भरा, लेकिन बीमारी के वक्त अस्पताल में कैशलेस सुविधा देने से या जीवनबीमा का भुगतान करने से इंकार कर दिया गया। बड़े अरमनों से कोई मनचाहा ऑनलाइन सामान मंगवाया, डिलीवरी तो समय पर हुई मगर डिब्बा खुलते ही घटिया या खराब उत्पाद निकला। शिकायत की तो न रिटर्न मिला न रिफंड। मोबाइल, इंटरनेट, ट्रैवल या होम सर्विस का वादा बड़े-बड़े दावों के साथ किया गया, लेकिन पैसे लेने के बाद कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए। डिजिटल दौर में जितनी तेजी से सुविधाएं बढ़ी हैं, उससे कहीं ज्यादा गति से उपभोक्ताओं के साथ ठगी, धोखाधड़ी या सेवा में लापरवाही की शिकायतें बढ़ी हैं। ऐसे मामले उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। ज्यादातार ग्राहक अक्सर यह सोचकर चुप रह जाते हैं कि कहां शिकायत करें, कौन कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाएगा, सालों तक अधिवक्ताओं की फीस देगा। ई-कामर्स प्लेटफार्म, कंपनियां व कई बार बड़े दुकानदार तक ग्राहकों की इसी मजबूरी का फायदा उठाकर उनका अधिकार नहीं देतीं। ऑनलाइन खरीदारी में खराब गुणवत्ता के सामान वापसी, रिफंड नहीं मिलने या सेवा देने में कोताही की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अधीन संचालित उपभोक्ता संरक्षण निदेशालय ने नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (एनसीएच) शुरू किया है। अब ठगे गए ग्राहकों को बिना कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाए उनका पैसा वापस चंद घंटों या अधिकतम दो-तीन दिन में वापस मिल रहा है। यह सुविधा सिर्फ एक फोन कॉल , वाट्सएप या मैसेज पर मिल रही है। यह जानकारी पटना जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के सदस्य रजनीश कुमार ने दी। तेजी से हो रहा समस्याओं का समाधान रजनीश कुमार ने बताया कि जिन उपभोक्ताओं को हेल्पलाइन 1915 से समाधान नहीं मिला या वे उससे संतुष्ट नहीं थे, ऐसे 440 मामले 2025 में जिला आयोग के समक्ष आए थे। इसी समयावधि में आयोग ने 1033 मामलों का निष्पादन किया। इनमें नए के साथ लंबित मामले भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पहले जहां जीवनबीमा, हेल्थ इंश्योरेंस या इससे संबंधित मामले सर्वाधिक रहते थे। आजकल ई-कामर्स खासकर इलेक्ट्रानिक उत्पादों से संबंधित व 10 मिनट डिलिवरी वाले मामले ज्यादा आ रहे हैं। इसके अलावा रेलवे, फ्लाइट, अपार्टमेंट-फ्लैट, विभिन्न प्रवेश परीक्षा व नौकरियों की तैयारी कराने वाली कोचिंग, स्कूल-कॉलेजों की शिकायतें ज्यादा आ रही हैं। अस्पताल की सेवा में कमी या चिकित्सा में उपेक्षा, ऑनलाइन शापिंग, इंश्योरेंस, भवन, स्कूल-कॉलेज, कोचिंग, रेलवे, फ्लाइट समेत सभी तरह की शिकायतों का समाधान किया जाता है। हेल्पलाइन त्वरित समाधान घर बैठे उपलब्ध करा रहा है। सुबह 8:00 से शाम 8:00 बजे तक करें ऑनलाइन शिकायत – उपभोक्ता सुबह 8:00 बजे से शाम आठ बजे तक टोल फ्री नंबर 1915 पर फोन कर, 8800001915 पर वाट्सएप या एसएमएस या उमंग एप से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यहां से समाधान नहीं होने या संतुष्ट नहीं होने पर जिला या राज्य आयोग में शिकायत की जाती है। शिकायत के लिए निम्न बातों का रखें ध्यान – आर्डर आइडी, बिल, भुगतान प्रमाण, समस्या की फोटो-वीडियो व एप-कंपनी से की शिकायत की फोटो जरूर संलग्न करें। कंपनी-एप को चैट-ईमेल से लिखित शिकायत कर उसका टिकट नंबर जरूर लें। तीन से सात दिनों में समस्या का समाधान नहीं होने या जवाब नहीं मिलने पर राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन में फोन-वाट्सएप या ईमल करें। इसमे अपना नाम, मोबाइल नंबर, कंपनी का नाम, ऑर्डर विवरण, समस्या, प्रमाण व शिकायत अपलोड करें। हेल्पलाइन से सहायता नहीं मिलने पर उपभोक्ता आयोग में आफलाइन या ऑनलाइन मामला दर्ज कराएं। शिकायत की भाषा सरल व तथ्यात्मक रखें। इसमें तारीख, समय, राशि स्पष्ट लिखें। किस आयोग में कितने तक की शिकायत जिला आयोग में 50 लाख तक के मामले। राज्य आयोग में 50 लाख से दो करोड़ रुपये तक के मामले। राष्ट्रीय आयोग में दो करोड़ रुपये से अधिक के मामले। क्या मांग सकते हैं – रिफंड मुआवजा सेवा में सुधार मानसिक उत्पीड़न का हर्जाना   ऐसे मामलों में मिला त्वरित न्याय – बोरिंग रोड निवासी दिलीप कुमार को फ्लाइट टिकट रद करने के बाद रिफंड नहीं मिला, उन्होंने शिकायत की तो कंपनी ने तुरंत पूरी राशि वापस कराई। पाटलिपुत्र निवासी राजेश कुमार ने एक ई-कामर्स प्लेटफार्म से प्रीपेड किराना आर्डर किया। कंपनी ने डिलिवरी तो नहीं ही की, रिफंड के बारे में गलत सूचना दी। शिकायत पर पूरी राशि दो दिन में वापस कराई गई। पाटलिपुत्र निवासी कमलेश के पुत्र ने वाशिंग मशीन ऑनलाइन आर्डर कर भिजवाई। मशीन में खराबी के कारण वापस करने के आवेदन के बावजूद न तो मशीन उठवाई गई और न ही नई मशीन भेजी गई। उन्होंने आयोग की हेल्पलाइन में शिकायत की जिसके तीन दिन बाद उन्हें पूरी कीमत वापस कर दी गई। गोलारोड निवासी अखिलेश कुमार ने ई-कामर्स के प्लेटफार्म से पांच सितारा रेफ्रिजरेटर का आर्डर किया। जब उन्हें आर्डर मिला तो वह थ्री स्टार था। भारी छूट का लालच दे सस्ता व कम गुणवत्ता का उत्पाद भेजने की उन्होंने हेल्पलाइन में शिकायत की। इसके बाद कंपनी ने पूरी राशि वापस की। इन मामलों में प्राप्त कर सकते हैं सहायता खाद्य सामग्री की खराब गुणवत्ता व मिलावट, एक्सपायर्ड, नकली या घटिया गुणवत्ता का सामान, गलत लेबलिंग (तारीख, वजन, सामग्री छिपाना) के मामले में। गलत वजन या माप यानी कम तौलना-नापना, पैकेट पर लिखे वजन से कम सामग्री देना। अधिक मूल्य वसूली, अधिकतम से अधिक मूल्य लेना, बिल न देना या गलत बिल देना, सरकारी दर से अधिक कीमत लेना आदि। सेवाओं में कमी जैसे मोबाइल, इंटरनेट, डीटीएच, बिजली, पानी की खराब सेवा, बैंक, बीमा, अस्पताल, स्कूल, ट्रैवल आदि में लापरवाही, मरम्मत या डिलीवरी में अनावश्यक देरी। भ्रामक विज्ञापन, झूठे दावे करने वाले विज्ञापन, आफर-छूट के नाम पर धोखाधड़ी, गारंटी-वारंटी का गलत प्रचार आदि। ऑनलाइन खरीदारी से जुड़े मामलों में गलत या खराब सामान की डिलीवरी, रिफंड-रिटर्न नहीं देना, ई-कामर्स प्लेटफार्म की शिकायत आदि। उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन जैसे शिकायत के बाद भी समाधान नहीं करना, जबरदस्ती कोई वस्तु-सेवा थोपना, अनुचित व्यापार व्यवहार करना।

पानी के 955 नमूनों में से 20 में मिला खतरनाक बैक्टीरिया

पटना. लोक स्वास्थ्य संस्थान (पीएचआइ) के बैक्टीरियोलाजी विभाग में स्थित जल जांच प्रयोगशाला में गत वर्ष रेलवे के 743 व आमजन के 212 नमूनों की जांच की गई। इनमें से 20 में हैजा, टायफायड, हेपेटाइटिस ए या ई, अमीबायसिस, जियार्डियासिस, डायरिया और फ्लोरोसिस जैसे रोगों के कारक बैक्टीरिया पाए गए। यह जानकारी पीएचआइ के निदेशक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने दी। ऐसे में यदि आप अपने पीने के पानी की गुणवत्ता जानना चाहते हैं तो सरकारी प्रयोगशालाओं में निशुल्क जांच करवा सकते हैं। सरकार ने इसकी पुख्ता व्यवस्था की है। जिले में पीएचईडी विभाग हर अनुमंडल, जिला के साथ राज्यस्तरीय जल जांच प्रयोगशाला संचालित कर रहा है। वहीं PHI के निदेशक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सिंह के अनुसार आमजन यदि पानी जांच का आवेदन देते हैं तो उनकी टीम एक दिन में चार जगह से नमूने लेकर उनकी निशुल्क जांच करती है। इसकी रिपोर्ट संबंधित व्यक्ति व संस्थान को देने के साथ उनके विशेषज्ञ जल उपचार के उपाय भी सुझाते हैं। वहीं, पीएचईडी विभाग के अधीन एक राज्यस्तरीय, 38 जिला स्तरीय व 75 अनुमंडलीय स्तर जल जांच प्रयोगशाला कार्यरत हैं। कमोवेश हर जिले में दो से तीन जल जांच प्रयोगशाला हैं। जिलास्तरीय जांच प्रयोगशाला में हर माह 300 तो अनुमंडलस्तरीय प्रयोगशाला में 125 नमूनों की जांच की जानी है। 15 जिलास्तरीय प्रयोगशालाओं को एनएबीएल सर्टिफिकेट प्राप्त हैं। इनमें 16 मानकों पर पानी की गुणवत्ता जांच होती है। सरकार हर वर्ष सिर्फ पानी की जांच पर 62 लाख 32 हजार 500 रुपये खर्च कर रही है। सप्लाई का पानी साफ होने का दावा पीएचईडी (लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग) पूर्वी के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर कुमार अभिषेक के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के हर वार्ड में हर घर नल का जल योजना के तहत जिस जल की आपूर्ति की जा रही है, उसकी भौतिक, रासायनिक, बैक्टीरियल-वायरल जांच हर तीन माह में कराई जाती है। आपूर्ति जल अबतक सभी मानकों पर खरा उतरा है। जिले के लोग रेडियो स्टेशन के पीछे स्थित राज्यस्तरीय जल जांच प्रयोगशाला या राजवंशी नगर में ऊर्जा आडिटोरियम के पास स्थित जिला जल जांच प्रयोगशाला के अलावा अपने अनुमंडल स्थित प्रयोगशाला में चापाकल, कुआं, बोरिंग, नल आदि के पानी की जांच निशुल्क करा सकते हैं। पीएचईडी के विपरीत नगर निगम के पास अपनी कोई जल जांच प्रयोगशाला नहीं है। हाल में पेयजल की शुद्धता का मामला गरमाने के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने पीएचईडी की प्रयोगशालाओं में नमूने भेज कर गुणवत्ता की जांच कराई है। उपलब्ध जांच की सुविधा प्रयोगशाला में उपलब्ध जांच की सुविधा : पानी के रंग-गंध, पीएच, क्लोरीन, क्षारीयता, खारापन, क्लोराइड, फ्लोराइड, आयरन, सल्फेट, नाइट्रेट, आर्सेनिक, ई-कोली या कोलिफार्म बैक्टीरिया, थर्मो टालरेंट कोलिफार्म बैक्टीरिया की जांच होती है। एनएबीएल प्रमाणित प्रयोगशाला कम पेयजल की जांच बीआइएस मानक आइएस-10500 के अनुसार की जाती है। नेशनल एक्रिडिएशन लैबोरेटरी बोर्ड प्रमाणित प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट को ही मानक माना जाता है। प्रदेश में पटना, भागलपुर, गया, मुज़फ्फरपुर, बेगूसराय, सहरसा, पूर्णिया, अररिया, शेखपुरा, सासाराम, बांका जैसे 15 जिलों की ही प्रयोगशाला एनएबीएल प्रमाणित हैं।आरओ के चयन में इन बातों का रखें ध्यान राज्य जल जांच प्रयोगशाला के वरिष्ठ विश्लेषक प्रवीण कुमार ने बताया कि शुद्ध पेयजल के लिए सिर्फ कोई भी आरओ लगवाना उचित नहीं है। आरओ लगवाने के पहले पानी की जांच करवाएं और उसके अनुसार फिल्टर का चयन जरूरी है। पेयजल में आर्सेनिक, पानी लाल-पीला हो तो आयरन, हड्डी-दांत की समस्या ज्यादा हो, तो फ्लोराइड, नाइट्रेट, टीडीएस व ई-कोली या कोलीफार्म की जांच हर व्यक्ति को जरूर करानी चाहिए। आयरन ज्यादा हो तो आयरन रिमूवर फिल्टर लगवाएं आरओ नहीं। आर्सेनिक-फ्लोराइड ज्यादा है तो आरओ-यूएफ के साथ मिनरल कार्टिरेज लगवाएं, टीडीएस 300 से कम हो लेकिन बैक्टीरिया है तो यूवी प्लस यूएफ फिल्टर लगवाएं सामान्य आरओ नहीं। यदि सब कुछ मानक से ज्यादा हो तो संपूर्ण आरओ सिस्टम लगवाना चाहिए जो आर्सेनिक-फ्लोराइड सर्टिफाइड हो। पेयजल के मानक पेयजल रंगहीन, गंधहीन व प्राकृतिक स्वाद वाला होना चाहिए। पीएच मानक 6.5 – 8.5 के बीच l टीडीएस (कुल घुलनशील ठोस) 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम कठोरता या क्षारीयता 250 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम सल्फेट 200 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम क्लोराइड 250 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम नाइट्रेट 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम फ्लोराइड 1 से 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर आयरन (लोहा)0.3 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम आर्सेनिक 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम लेड (सीसा)0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होना चाहिए। ई-कोली, टोटल कोलीफार्म जैसे बैक्टीरिया प्रति 100 मिलीग्राम में शून्य होना चाहिए। कीटनाशक, मरकरी, कैडमियम, फिनाल, साइनाइड जैसे विषैले तत्वों की भी जांच अब जरूरी होती जा रही है।

छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के लिए डॉ. रमन सिंह की बड़ी योजना, 6,000 से अधिक परिवारों को मिली मदद

मजदूर हितों की बड़ी पहल: छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने 6,000 से अधिक श्रमिक परिवारों को दी योजनाओं की सौगात विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के हाथों श्रमिक कल्याण को नई ताकत, ढाई करोड़ से बदली हजारों मजदूर परिवारों की तक़दीर रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज रायपुर स्थित अपने निवास के सभागृह में छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के संगठित क्षेत्र में कार्यरत हजारों मजदूर परिवारों को ढाई करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की। यह सहायता छात्रवृत्ति योजना, साइकिल सहायता योजना एवं खेलकूद प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत वितरित की गई। कार्यक्रम के प्रारंभ में मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा ने श्रम कल्याण मंडल द्वारा प्रदेशभर में संचालित 14 कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को हर परिस्थिति में सहयोग और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए श्रम कल्याण मंडल कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रहा है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बताया कि प्रदेश के 6,000 से अधिक मजदूर परिवारों को छात्रवृत्ति, साइकिल सहायता एवं खेलकूद प्रोत्साहन योजनाओं के अंतर्गत करोड़ों रुपये की सौगात दी गई है। उन्होंने कहा कि श्रम कल्याण मंडल और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को अमली जामा पहनाने का कार्य उनके मुख्यमंत्रीत्व काल में प्रारंभ हुआ, जो निरंतर आगे बढ़ा है। अब तक इन योजनाओं से लाखों मजदूर लाभान्वित हो चुके हैं और आने वाले समय में इनका और विस्तार किया जाएगा। डॉ. रमन ने मंडल द्वारा संचालित सस्ती दर पर भोजन उपलब्ध कराने की योजना का स्वागत करते हुए कहा कि श्रम कल्याण मंडल ने जन्म से लेकर मृत्यु तक श्रमिकों के लिए योजनाएं बनाकर मजदूर कल्याण के क्षेत्र में क्रांतिकारी कार्य किया है। इसके बावजूद, मजदूर वर्ग के लिए कल्याणकारी योजनाओं की व्यापक प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। इस कार्यक्रम में मंडल के कल्याण आयुक्त अजितेश पांडे, सदस्यगण मोहन एंटी, रामकृष्ण धीवर, रवि शंकर सिंह, राधेश्याम गुप्ता, कमल बॉस सहित विभिन्न उद्योगों से आए मजदूरों ने आत्मीय स्वागत किया।