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खेलो एमपी यूथ गेम्स में इस बार लोकल खेलों का रंग, पिट्ठू से मलखंब तक के मुकाबले 12 जनवरी से छिंदवाड़ा में

छिन्दवाड़ा   खेलो एमपी यूथ गेम्स में पहली बार बचपन में खेले जाने वाले खेलों के मुकाबले देखने मिलेंगे. छिंदवाड़ा जिले में 12 जनवरी से शुरू हो रहे यूथ गेम्स में पहली बार पिट्ठू और रस्साकसी जैसे पारंपरिक खेलों को शामिल किया गया है. आयोजन की तैयारियों की जिम्मेदारी देने के लिए गुरुवार को कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने कलेक्टर कार्यालय सभा कक्ष में अधिकारी कर्मचारियों की बैठक ली, जिसमें यूथ गेम्स से जुड़े आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए. 21 खेलों को किया गया शामिल,पिट्ठू-रस्साकसी भी शामिल कलेक्टर हरेन्द्र नारायण ने बैठक में बताया गया कि म.प्र.शासन खेल और युवा कल्याण विभाग के निर्देशानुसार छिंदवाड़ा में "खेलो एमपी यूथ गेम्स" का आयोजन किया जा रहा है. इसके तहत ब्लॉक स्तरीय चयन प्रक्रिया व जिला स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा. खेलो एमपी यूथ गेम्स के अंतर्गत 21 खेल – एथलेटिक्स, बास्केटबॉल, बैडमिन्टन, बॉक्सिग, पिट्ठू, क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, जूडो, कबड्डी, खो-खो, मलखम्ब, तैराकी, वेटलिफ्टिंग, कुश्ती, टेबिल टेनिस, योगासन, वॉलीबॉल, लॉन टेनिस, रस्साकसी व शतंरज के मुकाबलों का आयोजन किया जाएगा. इसके साथ 7 खेल – ताईक्वांडो, फेंसिंग, रोइंग, क्याकिंग-कैनोइंग, शूटिंग, आर्चरी, थ्रो बॉल के लिए खिलाड़ी सीधे राज्य स्तर के लिए चयनित होंगे. 12 जनवरी से होगी यूथ गेम्स की शुरुआत खेलो एम.पी. यूथ गेम्स के तहत जिले में ब्लॉक स्तरीय चयन प्रतियोगिता का आयोजन 12 से 15 जनवरी तक और जिला स्तरीय आयोजन 16 से 20 जनवरी तक किया जाएगा. जिला खेल अधिकारी केके चौरसिया ने बताया, '' सभी विकासखंडो में खेलो एमपी यूथ गेम्स के तहत 21 खेलों में चयन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी और जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिता में सभी ब्लाकों से चयनित गाइड लाइन के अनुसार जिला खेल संघों से रजिस्टर्ड खिलाड़ी भाग लेंगे. खिलाड़ी ऑनलाइन,ऑफलाइन रजिट्रेशन कर संबंधित ब्लॉक युवा समन्वयक से सम्पर्क कर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. कलेक्टर ने दी जिम्मेदारी डेट की गई फिक्स बैठक में सभी खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए स्थान और तारीखों का चयन किया गया और आयोजन के लिए सभी पीटीआई व खेल शिक्षकों की ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए गए. कलेक्टर ने कहा, '' प्रतियोगिताओं के आयोजन के दौरान खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए. आयोजन स्थल पर साफ पीने के पानी एवं समुचित स्वच्छता सुनिश्चित की जाए. एम्बुलेंस व फर्स्ट ऐड किट भी तैयार रहे.'' वहीं, पुलिस अधीक्षक अजय पांडे ने कहा, '' विभिन्न स्तर पर खिलाड़ियों के चयन में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता बरती जाएगी.''

स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक प्रगति: गांव-ढाणी तक मिल रहा बेहतर इलाज, दो वर्षों में मजबूत हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर — भजनलाल शर्मा

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और संवेदना से जुड़ा क्षेत्र है। विगत दो वर्षों में राज्य सरकार ने अपने बजट में स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आगे भी स्वास्थ्य के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ बनाया है। इससे गांव-ढाणी तक प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क उपचार मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बजट पूर्व संवाद का उद्देश्य यही है कि इस क्षेत्र के विशेषज्ञों के सुझावों से एक ऐसा बजट बने, जिससे प्रदेश की 8 करोड़ से अधिक जनता को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं मिलें और राजस्थान स्वास्थ्य में सिरमौर बने। शर्मा शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार ‘पहला सुख निरोगी काया’ अर्थात् स्वस्थ शरीर ही सबसे बड़ा सुख होता है। इसी अवधारणा के साथ प्रदेश में लागू की गई मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना अब पूरे देश के लिए मिसाल बन गई है। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत अब तक 37 लाख मरीजों को 7 हजार 300 करोड़ रुपये का कैशलेस इलाज उपलब्ध करवाया गया है। इसी तरह, मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के तहत औषधियां, सर्जिकल एवं सूचर्स उपलब्ध करवाने में राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है। जिला चिकित्सालयों में बुजुर्गों के लिए रामाश्रय वार्ड खोले हैं, जहां उन्हें सम्मान के साथ स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। चिकित्सा सेवा का क्षेत्र, दायित्वों को निष्ठा और ईमानदारी से निभाए स्वास्थ्यकर्मी मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा सेवा का क्षेत्र है। हर रोगी को संवेदनशीलता के साथ अच्छा उपचार मिले और जीवन रक्षा का उद्देश्य फलीभूत हो। यही इस क्षेत्र की महानता है। चिकित्सकों एवं इस क्षेत्र से जुड़े प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी को चाहिए कि वे अपने दायित्वों को निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाए। राज्य सरकार ऐसे सेवाभावी कार्मिकों के सम्मान में कोई कमी नहीं रखेगी। लेकिन जनता के पैसे का दुरूपयोग करने वाले एवं स्वास्थ्य योजनाओं में अनियमितता करने वाले कार्मिकों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रही है ताकि प्रदेश को प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 7 नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं और 15 नवीन मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन हैं। साथ ही, भीलवाड़ा, धौलपुर, प्रतापगढ़, नाथद्वारा एवं बूंदी में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना की गई है। हमारा प्रयास है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में शोध एवं अनुसंधान को बढ़ावा मिले। इस दिशा में जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। 8 हजार 700 चिकित्सा संस्थान आयुष्मान आरोग्य मंदिर में परिवर्तित मुख्यमंत्री ने कहा कि निचले स्तर तक चिकित्सा सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। विगत दो वर्षों में 7 उप जिला अस्पताल, 2 सैटेलाइट अस्पताल, 5 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित कुल 14 संस्थानों का जिला चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन तथा 7 नवीन सैटेलाइट अस्पतालों की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि 129 उप स्वास्थ्य केंद्रों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में क्रमोन्नयन किया है। करीब 8 हजार 700 चिकित्सा संस्थानों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में परिवर्तित किया गया एवं 412 शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित किए गए। उन्होंने कहा कि बालोतरा में नवीन जिला आयुर्वेद चिकित्सालय और ब्यावर, दूदू, डीग, डीडवाना-कुचामन और अनूपगढ़ में जिला आयुष चिकित्सालय शुरू किए गए हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बैठक में उपस्थित प्रतिभागियों के सुझावों को गंभीरता के साथ सुना। उन्होंने कहा कि प्राप्त सुझावों को आगामी बजट में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय अखिल अरोरा, प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड, प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया सहित वरिष्ठ विभागीय अधिकारी एवं आईएलबीएस हॉस्पिटल, नारायणा हृदयालय ग्रुप, महावीर विकलांग सेवा समिति, इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन, यूनीसेफ, महात्मा गांधी हॉस्पिटल, आईएमए राजस्थान, एसएमएस मेडिकल कॉलेज एवं आरयूएचएस के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: टॉर्च जलाकर कराया गया प्रसव, सरकारी अस्पताल में महिला ने तोड़ा दम

चंडीगढ़ पंजाब में बेहतरीन स्वस्थ्य सेवाओं का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी सरकार के इन दावों की पोल खुल गई है। गुरदासपुर जिले के काला कालावाली गांव की एक महिला की सिविल अस्पताल में प्रसव के दौरान मौत हो गई। रुपिंदर कौर नाम की महिला को प्रसव के लिए एक जनवरी को कस्बा कादियां के सरकारी सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के दौरान ऑपरेशन थिएटर की लाइट चली गई। अस्पताल में जेनरेटर का कोई प्रबंध नहीं था, जिसके बाद डॉक्टरों ने मोबाइल फोन की टॉर्च जला कर प्रसव कराया। इसके बाद से रुपिंदर कौर अस्पताल में ही भर्ती रही और आज उसकी मौत हो गई। परिजनों ने बटाला के गांधी चौक में शव रखकर अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।   संक्रमण से लगातार बिगड़ती गई हालत परिजनों ने बताया कि रुपिंदर कौर को प्रसव के लिए एक जनवरी को हॉस्पिटल में भर्ती किया था। अस्पताल में जेनरेटर का कोई प्रबंध नहीं था, जिसके बाद डॉक्टरों ने मोबाइल फोन की रोशनी में प्रसव कराया। इससे महिला को संक्रमण हो गया और उसकी हालत बिगड़ती चली गई। अस्पताल प्रशासन ने परिवार को महिला की बिगड़ती हालत के बारे में गलत जानकारी दी और केवल ग्लूकोज लगाकर रखा। आज महिला की हालत देर रात ज्यादा खराब हो गई, तो उसे हायर सेंट रेफर कर दिया गया। परिजन उसे अमृतसर लेकर जा रहे थे लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। कैंसर मरीज के ऑपरेशन दौरान गुल हुई थी बिजली, भड़का हाईकोर्ट पिछले साल जनवरी में पटियाला स्थित राजिंदरा अस्पताल की अचानक बिजली चली गई जब डॉक्टर एक कैंसर मरीज का ऑपरेशन कर रहे थे। इसी दौरान वेंटिलेटर मशीन बंद हो गई। गुस्साए डॉक्टरों ने इसका वीडियो बना लिया। डॉक्टरों का कहना है कि ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इस तरह लाइट गई है। अस्पताल को इमरजेंसी हॉट लाइन से जुड़ा होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। इस घटना पर काफी बवाल मचा और पंजाब के सेहत मंत्री डॉ. बलबीर सिंह को सफाई देनी पड़ी। यह मामला हाई कोर्ट तक पहुँच गया था। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पंजाब सरकार के मुख्य सचिव और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को कड़ी फटकार लगाई और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

कड़ाके की ठंड से जनजीवन बेहाल, बर्फीली हवाओं व कोहरे ने बढ़ाई परेशानी

मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर जिले में ठंड के ट्रिपल अटैक से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। पछुआ हवाओं के साथ बढ़ी कनकनी ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पारा लुढ़कते ही हालात और गंभीर हो गए हैं। जिले में न्यूनतम तापमान 7.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जिसके बाद आम लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। जिले में हाड़ कंपाने वाली ठंड से फिलहाल कोई राहत नहीं मिलती दिख रही है। इसे देखते हुए राज्य मौसम विभाग ने शीतलहर को लेकर अलर्ट जारी किया है। लगातार बढ़ती ठंड के कारण जिला प्रशासन ने भी लोगों से सतर्क रहने और ठंड से बचाव के उपाय अपनाने की अपील की है, ताकि इसका असर बच्चों और बुजुर्गों पर न पड़े। ठंडी पछुआ हवाओं के कारण लोग मॉर्निंग वॉक से भी परहेज कर रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। सुबह के समय हल्का कोहरा छाया रहता है, इसके बाद दिनभर पछुआ और बर्फीली हवाएं चलने से पूरे जिले में शीतलहर जैसी स्थिति बनी हुई है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर तक ठंड का असर साफ तौर पर देखा जा रहा है। इस भीषण ठंड का सबसे ज्यादा असर आम लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों पर पड़ रहा है, खासकर शहर में फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले लोग इससे सबसे अधिक प्रभावित हैं। मौसम विभाग के अनुसार मुजफ्फरपुर में लगातार तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। फिलहाल जिले का न्यूनतम तापमान 7.8 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। ठंड के कारण सुबह से करीब 10 बजे तक और शाम 4 बजे के बाद से सुबह तक बर्फीली हवाओं के चलते लोगों की परेशानी बनी हुई है। अधिकांश लोग घरों में दुबके हुए हैं और अलाव का सहारा ले रहे हैं। ठंड से बचाव के लिए जिला प्रशासन की ओर से शहर के विभिन्न स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है, ताकि कोई भी ठंड का शिकार न हो। मौसम विभाग ने बताया है कि शीतलहर, बर्फीली हवाओं और कोहरे के कारण जिले में लोगों को एक साथ तीन तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले दो से तीन दिनों तक ठंड से राहत मिलने की संभावना नहीं है।    

आबकारी नीति 2026-27 पर मंथन: अवैध शराब पर सख्ती, 18 हजार करोड़ राजस्व लक्ष्य प्राप्ति के निर्देश

आबकारी अधिनियम प्रावधान में होगा संशोधन संभागीय एवं जिला आबकारी अधिकारियों ने भी अपने सुझाव दिये भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा शुक्रवार को नई आबकारी नीति वर्ष 2026-27 पर चर्चा के लिए इफको भवन में आयोजित बैठक में शामिल हुए। बैठक में आबकारी राजस्व बढ़ाने, अवैध शराब पर प्रभावी नियंत्रण तथा विभागीय कार्य प्रणाली को और सुदृढ़ बनाने पर विस्तृत विचार- विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि नई नीति‍के लिए सभी जिला अधिकारी अपने सुझाव लिखित में भी दे सकते हैं। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने बताया कि वर्ष 1915 में बना आबकारी अधिनियम की कंडिका अगर अव्यावहारिक है तो उसमें संशोधन किया जाएगा जो कि समय के अनुकूल हो। इस वित्तीय वर्ष में आबकारी राजस्व का लक्ष्य 18 हजार करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जिसे मार्च 2026 तक पूरा किया जाना है। उन्होंने एक हजार करोड़ रुपये की आबकारी बकाया राशि की वसूली के निर्देश दिए। जिन मामलों में प्रकरण न्यायालय में लंबित हैं, वहां विशेष प्रयास कर संपूर्ण राशि की वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध रूप से शराब के विक्रय पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। संबंधित जिलों के अधिकारियों से कहा कि किसी भी परिस्थिति में अवैध शराब का कारोबार नहीं होना चाहिए, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। हाल ही में भोपाल, धार, ग्वालियर एवं रायसेन में की गई शराब जब्ती की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए बिना परमिट शराब के परिवहन पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कहा कि सभी अधिकारी तय लक्ष्य को पूरा करें। उन्होंने कहा कि विभाग की छवि राजस्व की दृष्टि में बहुत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने विजन 2047 को पूरा करने के लिए निर्धारित राजस्व वसूली को 100 प्रतिशत पूरा करना है। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं द्वारा शराब की दुकानों से संबंधित जो शिकायत प्राप्त होती है उसे गंभीरता से लेते हुए यथाशीघ्र निराकरण करें। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी जिम्मेदारी, इच्छाशक्ति एवं मजबूती से कार्य करें। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने जहरीली शराब की घटनाओं पर विशेष चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी जिले में इस प्रकार की घटना दोबारा न हो। यदि ऐसी कोई घटना सामने आती है तो संबंधि‍त जिला आबकारी अधिकारी पूर्णत: जिम्मेदार होंगे, क्योंकि ऐसी घटनाओं से सरकार की छवि धूमिल होती है। विभाग में लंबित विभागीय जांचों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निराकरण करने, राज्य स्तरीय उड़नदस्ता एवं संभागीय उड़नदस्तों को और अधिक सक्रिय करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि अवैध शराब के निर्माण और विक्रय पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। इसके साथ ही विभागीय अधिकारियों को उच्चतर पदनाम देकर उनका मनोबल बढ़ाने के प्रयास जारी रखने की बात कही गई, जिससे आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली और अधिक प्रभावी हो सके। बैठक में वाणिज्यिक कर के प्रमुख सचिव श्री अमित राठौर, आबकारी आयुक्त श्री अभिजीत अग्रवाल सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

झाबुआ के ग्रामों में विकास कार्यों को मिली नई गति

 मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने आंगनवाड़ी भवन का लोकार्पण एवं विभिन्न निर्माण कार्यों का भूमि पूजन किया भोपाल महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि विकास की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और ग्रामीण अंचलों में सशक्त अधोसंरचना का निर्माण हो। सुश्री भूरिया शुक्रवार को झाबुआ जिले के विभिन्न ग्रामों में विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। इसके तहत ग्राम झुमका में 11.22 लाख रुपये की लागत से निर्मित नवीन आंगनवाड़ी भवन का विधिवत लोकार्पण किया गया। साथ ही ग्राम पंचायत अंतर्गत 37.50 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित नवीन भवन निर्माण कार्य का भूमि-पूजन, ग्राम लखपुरा में 38 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित पुलिया सह स्टॉप डैम निर्माण कार्य का भी विधिवत भूमि पूजन किया गया। मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत आधारभूत संरचना का निर्माण ही समग्र विकास की कुंजी है। आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास की पहली पाठशाला होते हैं। नवीन आंगनवाड़ी भवन के निर्माण से बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ एवं सुविधायुक्त वातावरण मिलेगा, जिससे पोषण स्तर में सुधार होगा और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं अधिक प्रभावी बनेंगी। मंत्री सुश्री भूरिया ने लखपुरा में पुलिया सह स्टॉप डैम निर्माण कार्य को क्षेत्र के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे वर्षा जल का संरक्षण होगा, भूजल स्तर में वृद्धि होगी और किसानों को सिंचाई हेतु पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा। साथ ही पुलिया निर्माण से आवागमन व्यवस्था सुदृढ़ होगी, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

राज्य सरकार सैनिक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सैनिक केवल भारत की सीमाओं की रक्षा नहीं करते बल्कि देश के स्वाभिमान की भी रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि जो वर्दी पहन कर देश के लिए खड़ा होता है, उसके सामने पूरा राष्ट्र नतमस्तक होता है। मातृभूमि के प्रति सैनिकों के प्रेम और समर्पण के कारण ही भारत का तिरंगा शान से लहरा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत माता की सेवा में सर्वस्व न्यौछावर करने वाले वीर शहीदों के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन में राज्य सैनिक रैली को भोपाल के राजकीय विमानतल से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी हम सबके लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं, सैनिकों के प्रति उनकी संवेदनाएं सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि हमारे उन वीर सैनिकों जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर किए, उनकी कमी तो पूरी नहीं की जी सकती, लेकिन ऐसे वीरों के परिवारों के साथ सरकार हर कदम पर खड़ी है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि शहीद आश्रितों को पेंशन, वित्तीय सहायता, रोजगार और सभी मूलभूत सुविधाएँ समय पर और सम्मानपूर्वक प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि जहाँ भी आवश्यकता होगी, इन योजनाओं को और अधिक सशक्त किया जाएगा। राज्य सरकार ने शहीदों के माता-पिता को दी जाने वाली मासिक सहायता राशि अब 10 हजार रूपए प्रतिमाह कर दी है। शहीदों की पुत्रियों और बहनों के विवाह पर 51 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। युद्ध एवं सैन्य कार्रवाई में शहीद हुए सेना एवं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के आश्रितों को दी जाने वाली सहायता राशि बढ़ाकर 1 करोड़ रूपए की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में निवासरत द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिकों और उनकी पत्नियों की मासिक पेंशन राशि 8 हजार से बढ़ाकर 15 हजार प्रतिमाह की गई है, जो देश मे सर्वाधिक है। विभिन्न शौर्य एवं विशिष्ट सेवा अलंकरणों से नवाजे गए सैनिकों एवं उनके आश्रितों को राज्य शासन द्वारा सर्वाधिक सम्मान राशि दी जाती है। मध्यप्रदेश निवासी ऐसे माता-पिता, जिनकी पुत्री सेना में है, उनकी सम्मान निधि 10 हजार रुपए से बढ़ाकर 20 हजार रुपए प्रतिवर्ष की गई। इन्हीं प्रयासों के परिणाम स्वरूप वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश सैनिक कल्याण निदेशालय को रक्षा मंत्री द्वारा "प्रोगेसिव स्टेट ट्रॉफी" से सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि जिला सैनिक कल्याण कार्यालयों को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है, साथ ही सैनिक विश्राम गृहों के उन्नयन का कार्य भी जारी है। प्रदेश में रोजगार एवं स्व-रोजगार के अवसरों को विस्तारित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सैनिक रैली राष्ट्र गौरव और एकता की भावना को और सुदृढ़ करे, यही कामना है। उन्होंने सभी को गणतंत्र दिवस की अग्रिम शुभकामनाएँ भी दीं।  

अशोक लीलैंड के नए प्लांट से बढ़ा भरोसा, धरातल पर दिख रहा योगी सरकार के प्रयासों का असर

केंद्र सरकार के “डी-रेगुलेशन 1.0” कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश नंबर-1, सिंगल विंडो सिस्टम से हो रहा तेज अनुमोदन अनुमतियों की प्रक्रिया सरल, समय सीमा तय होने और ऑनलाइन सिस्टम से निवेशकों को मिली राहत लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में किए गए बड़े व्यापारिक और नीतिगत सुधार अब जमीन पर दिखाई देने लगे हैं। सरकार ने कारोबार शुरू करने की प्रक्रियाओं को आसान बनाया, अनुमतियों के लिए तय समय सीमा लागू की और ऑनलाइन सिस्टम शुरू किया। इन कदमों का नतीजा है कि अब बड़े उद्योग उत्तर प्रदेश में निवेश करने के लिए आगे आ रहे हैं। इसी बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है अशोक लीलैंड का नया प्लांट, जिसका शुभारंभ शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में हुआ। लखनऊ में इस प्लांट के शुभारंभ से न सिर्फ प्रदेश की औद्योगिक पहचान मजबूत हुई है, बल्कि यह स्पष्ट संदेश भी गया है कि उत्तर प्रदेश अब देश के सबसे भरोसेमंद निवेश स्थलों में शामिल हो चुका है। केंद्र सरकार के “डी-रेगुलेशन 1.0” कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान मिला है। उत्तर प्रदेश में भूमि, भवन, निर्माण, श्रम, पर्यावरण अनुमति और बिजली–पानी जैसे 23 महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार किए गए। फ्लेक्सिबल ज़ोनिंग, डिजिटल लैंड यूसेज बदलाव, जीआईएस लैंड बैंक और ऑनलाइन अनुमोदन ने पुरानी जटिलताएं खत्म कर दीं। इसी कारण अब उद्योग अपनी इकाइयां लगाने के लिए उत्तर प्रदेश को तरजीह दे रहे हैं। अशोक लीलैंड का प्लांट इस भरोसे का बड़ा उदाहरण है। इस प्लांट से प्रदेश में उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और हजारों युवाओं के लिए सीधे और परोक्ष रोजगार के अवसर बनेंगे। साथ ही आसपास के एमएसएमई, छोटे उद्योग और सप्लाई चेन को भी बड़ा लाभ मिलेगा। श्रम सुधार भी इस बदलाव के महत्वपूर्ण कारण हैं। महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति, कार्य घंटे में लचीलापन और तृतीय पक्ष प्रमाणीकरण जैसी सुविधाओं ने उद्योगों के संचालन को आसान बनाया है। पर्यावरण और अन्य लाइसेंसों की ऑनलाइन प्रक्रिया से अनावश्यक देरी खत्म हुई है। बिजली और पानी के कनेक्शन भी अब जल्दी मिल रहे हैं। इन सभी सुधारों का परिणाम यह है कि निवेश अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर नए कारखानों, उत्पादन और रोजगार के रूप में दिखाई दे रहा है। अशोक लीलैंड का नया प्लांट इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश एक नीति आधारित निवेश गंतव्य बन चुका है, जहां स्थिरता, भरोसा और साफ प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं। “उत्तर प्रदेश सुगम्य व्यापार अधिनियम, 2025” और राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम ने इस व्यवस्था को और मजबूत किया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुरातत्व, दस्तावेज प्रबंधन और संग्रहालयों पर केन्द्रित प्रदर्शनी का किया शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद् डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर का भारतीय पुरातत्व के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान रहा है। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने पुरातत्व को जन आंदोलन बना दिया था। यह उनके व्यक्तित्व और संप्रेषण का ही प्रभाव था कि उज्जैन का जन-जन अपने परिवेश को पुरातत्व की दृष्टि से देखने लगा था। पुरातत्व को लोक रुचि का विषय बनाने का डॉ. वाकणकर का प्रयास अद्भुत और अनुकरणीय था। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर अनेक प्रतिभाओं के धनी थे। उन्होंने सितार वादन, मूर्ति कला, चित्रकला, काव्य लेखन एवं संगीत के माध्यम से भारतीय संस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाया। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर के परिश्रम और प्रयासों से काल गणना के केंद्र डोंगला की खोज हुई। उन्होंने बताया कि पृथ्वी की दीर्घकालीन घूर्णन धुरी में परिवर्तन के कारण उज्जैन में होने वाला शून्य देशांतर-रेखा और कर्क रेखा का मिलन उत्तर की ओर खिसक कर डोंगला में हुआ। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने उज्जैन क्षेत्र में गहन सर्वेक्षण किया था। शंकु की सहायता से उन्होंने कर्क रेखा की नई स्थिति का पता लगाया। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने शिलाओं और गुफाओं में छिपे प्रमाणों के माध्यम से भारतीय सभ्यता की उस कहानी को दुनिया के सामने रखा, जो लिखित इतिहास से भी पहले की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में 19वें डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान समारोह और राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ अवसर पर यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पद्मश्री से सम्मानित डॉ. प्रो. यशोधर मठपाल को शॉल-श्रीफल और भू वराह की प्रतिकृति तथा 2 लाख रुपये का चैक भेंट कर 19वें डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान वर्ष 2022-2023 से सम्मानित किया। समारोह में अंतरराष्ट्रीय सितार वादक सुश्री स्मिता नागदेव एवं कवि लेखक श्री राहुल शर्मा ने सितार और कविता की जुगलबंदी से डॉ. वाकणकर द्वारा रचित कविता "इतिहास के पटल पर" का राग बैरागी भैरव में गायन प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तथा डॉ. वाकणकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "20वीं सदी में मध्यप्रदेश में स्वाधीनता आंदोलन 1920-1947, दुर्लभ अभिलेख और छाया चित्रों की प्रदर्शनी" पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन किया तथा एक स्टॉल पर कुम्हार के चाक पर स्वयं शिवलिंग की प्रतिकृति का निर्माण कर भारतीय संस्कृति, कला एवं शिल्प परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त किया। संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय का तीन दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन 11 जनवरी तक चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भीमबेटका के शैलचित्र 30 हजार वर्ष पुराने माने जाते हैं। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने वर्ष 1957 में भीमबेटका के शैलचित्रों का उत्खनन और गहन अध्ययन कर न केवल इन प्राचीन स्थलों पर प्रकाश डाला, बल्कि भारत को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई। आज भीमबेटका केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन चुका है। इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संचालित किया जा रहा है। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने महेश्वर, मंदसौर, नावड़ाटौडी, इंद्रगढ़, मनोटी, आवरा, कायथा, आजादनगर, इंदौर, दंगवाड़ा और रूनिजा जैसे विभिन्न पुरातात्विक स्थलों के उत्खनन और अध्ययन का नेतृत्व किया। डॉ. वाकणकर का मानना था कि ऋग्वेद में वर्णित सरस्वती नदी कोई मिथक नहीं, बल्कि एक वास्तविक, विशाल प्राचीन नदी थी। उन्होंने राजस्थान, हरियाणा और गुजरात के क्षेत्रों में सर्वेक्षण कर यह दिखाने का प्रयास किया कि आज की घग्गर-हकरा नदी प्रणाली ही प्राचीन सरस्वती का अवशेष है। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर भारत तक ही सीमित नहीं रहे। उन्होंने भारत, यूरोप और अमेरिका में 4 हजार से अधिक शैलचित्रों की खोज और अध्ययन किया। उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें पद्मश्री से अलंकृत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. वाकणकर के इस अद्वितीय योगदान के लिए पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा 1975 में पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विचारों से ओत-प्रोत थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. वाकणकर द्वारा पद्मश्री सम्मान ग्रहण करने के समय का संस्मरण साझा करते हुए बताया कि डॉ. वाकणकर ने राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के गणवेश का प्रमुख अंग 'ब्लैक कैप' धारण करके ही पद्मश्री सम्मान ग्रहण किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस विरासत को संजोते हुए हम विकास की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। उनके सम्मान में रातापानी अभ्यारण्य का नाम डॉ. विष्णु वाकणकर के नाम पर रखकर राज्य सरकार ने महान इतिहासदृष्टा को श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में देश में पुरातत्व संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। आज से 1000 साल पहले गुजरात के सोमनाथ महादेव मंदिर पर हुए आक्रमण के बाद आज हमारी आस्था का यह केंद्र भव्य और गौरवशाली रूप में स्थापित हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार उज्जैन में 14 जनवरी से महाकाल महोत्सव की शुरुआत करने जा रही है। राज्य सरकार उज्जैन में पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर की स्मृतियों और उनके द्वारा एकत्रित पुरातत्व ऐतिहासिक महत्व की वस्तुओं का संरक्षण करते हुए संग्रहालय को भी वर्तमान तकनीकी व्यवस्थाओं से लैस कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पुरातत्वविद डॉ. मठपाल को राष्ट्रीय सम्मान, पुरातत्व एवं शैल चित्र अध्ययन के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। डॉ. मठपाल एक वरिष्ठ पुरातत्वविद, चित्रकार, क्यूरेटर और शैल चित्र संग्रहण विशेषज्ञ हैं। डॉ. मठपाल ने पश्चिमी घाट, हिमालय, विंध्य और कैमूर पर्वत श्रृंखलाओं में 400 से अधिक प्राचीन गुफाओं की खोज की है। मध्यप्रदेश के पुरातत्व कला और संस्कृति में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। शैल चित्र संरक्षण की वैज्ञानिक पद्धतियों के विकास में उनके योगदान ने भारत की प्रागैतिहासिक विरासत के अध्ययन और संरक्षण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा प्रदान की है। कार्यक्रम में सचिव पर्यटन श्री टी. इलैयाराजा तथा आयुक्त पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय श्रीमती उर्मिला शुक्ला तथा राष्ट्रीय स्तर के प्रख्यात विचारक तथा विशेषज्ञ उपस्थित थे।

लालू परिवार को कोर्ट से बड़ा झटका, लैंड फॉर जॉब मामले में फ्रॉड और साजिश के आरोप फ्रेम

पटना लैंड फॉर जॉब केस में लालू परिवार को बहुत बड़ा झटका लगा है। दरअसल, दिल्ली की कोर्ट ने आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए हैं। अब इस आदेश के बाद लालू परिवार पर मुकदमा चलेगा। दिल्ली राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती, हेमा यादव सहित कई अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय कर दिए हैं। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर के रूप में इस्तेमाल किया ताकि वह एक आपराधिक गतिविधि को अंजाम दे सकें, जिसमें सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करके यादव परिवार ने रेलवे अधिकारियों और अपने करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से जमीन हासिल की। रेलवे अधिकारियों समेत 52 लोग बरी अदालत ने इस मामले में 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किये और रेलवे अधिकारियों समेत 52 लोगों को बरी कर दिया। इससे पहले, सीबीआई ने मामले में आरोपी व्यक्तियों की स्थिति के बारे में एक सत्यापन रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें कहा गया था कि उसके आरोप-पत्र में नामजद 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो गई है। अदालत ने मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए 23 जनवरी की तारीख तय की है। जांच एजेंसी ने कथित घोटाले के सिलसिले में लालू यादव, उनकी पत्नी एवं बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया था। क्या हैं पूरा मामला? आरोप है कि मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में ग्रुप-डी श्रेणी में भर्तियां लालू यादव के रेल मंत्री रहते 2004 से 2009 के बीच की गईं। इसके बदले में भर्ती होने वाले लोगों ने राजद प्रमुख के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर जमीन के टुकड़े तोहफ़े में दिए या हस्तांतरित किए। सीबीआई ने यह भी दावा किया कि ये नियुक्तियां नियमों का उल्लंघन करके की गईं और इन लेन-देन में बेनामी संपत्तियां शामिल थीं, जो आपराधिक कदाचार और साजिश के समकक्ष है। आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया और दावा किया है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।