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छत्तीसगढ़ के अमिताभ जैन बने मुख्य सूचना आयुक्त

नवा रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य में सूचना के अधिकार (RTI) के सुचारू और प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 15(3) के अंतर्गत राज्यपाल के निर्देशानुसार राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त के पदों पर नियुक्ति की गई। अमिताभ जैन (से.नि. भा.प्र.से.) को छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्त किया गया है। उनका कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से ही यह नियुक्ति प्रभावी होगी। राज्य के उच्चतम सूचना अधिकारी के रूप में अमिताभ जैन की जिम्मेदारी होगी कि वे सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सभी मामलों और अपीलों का निष्पक्ष और समयबद्ध निपटान सुनिश्चित करें। इसलिए अटका था मामला दरअसल राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर लंबे समय से नियुक्ति की चर्चा चल रही थी. लेकिन कोर्ट में मामला होने की वजह से नियुक्ति में देर होना बताया जा रहा है. अब रिटायर्ड  CS अमिताभ जैन की नियुक्ति इस पद पर कर दी गई है. साथ ही राज्य सूचना आयुक्त के पद पर रिटायर्ड IAS उमेश अग्रवाल और पत्रकार शिरीष चंद्र मिश्रा की नियुक्ति की गई है. बता दें कि 3 साल के लिए ये नियुक्तियां की गई हैं. आदेश में ये लिखा  सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इन सभी नियुक्तियों की सेवा शर्तें, वेतन एवं अन्य भत्ते भारत सरकार की अधिसूचना दिनांक 24 अक्टूबर 2019 के तहत “सूचना का अधिकार (केंद्रीय सूचना आयोग एवं राज्य सूचना आयोगों में पदावधि, वेतन, भत्ते एवं सेवा की अन्य शर्तें) नियम, 2019” के अंतर्गत निर्धारित होंगे.आदेश छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा उनके आदेशानुसार जारी किया गया है. रिटायर्ड IAS उमेश अग्रवाल और पत्रकार शिरीष मिश्रा बने आयुक्त राज्यपाल के नाम और आदेश से जारी नियुक्ति आदेश में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्त के पद पर भी दो नियुक्ति की गई है. रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर उमेश अग्रवाल और पत्रकार शिरीष मिश्रा को आयुक्त बनाया गया है.  आदेश में ये भी लिखा सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से अधिसूचना जारी की गई है. जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त की पदावधि, वेतन, भत्ते और सेवा की शर्ते भारत सरकार की अधिसूचना 24-10-2019 सूचना का अधिकार (केंद्रीय सूचना आयोग में केंद्रीय सूचना आयुक्त, सूचना आयुक्तों, राज्य सूचना आयोग में राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की पदावधि, वेतन, भत्ते और सेवा की शर्ते ) नियम 2019 के अधीन होंगे. 

यूपी में नकाब-हिजाब, घूंघट पहने ग्राहकों से व्यापार पर रोक, लखनऊ के ज्वेलर्स ने लिया अहम निर्णय

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में नकाब-हिजाब, घूंघट, हेलमेट या मास्क लगाकर आने वालों से व्यापार नहीं करने की मुहिम तेज हो रही है। झांसी में इसे लेकर ज्वेलर्स ने तो अपनी दुकानों के बाहर पोस्टर तक लगा दिए थे। अब राजधानी लखनऊ में इसी तरह का फैसला लिया गया है। इसे सराफा व्यापारियों ने अपनी सुरक्षा को लेकर जरूरी कदम बताया है। पूरे प्रदेश के व्यापारियों से इस फैसले के पक्ष में एकजुट होने की अपील की गई है। कहा गया है कि चेहरा ढंककर आने वालों से कोई सराफा दुकानदार किसी भी तरह का लेनदेन या व्यापार नहीं करें। लखनऊ महानगर सराफा एसोसिएशन की बैठक में सर्वसम्मति से इसे लागू करने का फैसला हुआ। इसका उद्देश्य दुकानों में होने वाली लूट, टप्पेबाजी और चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाना है। सुरक्षा के मद्देनजर लिया गया कड़ा फैसला ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष और लखनऊ महानगर सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में व्यापारियों ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। व्यापारियों का तर्क है कि हाल के दिनों में सोने-चांदी की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसके कारण सराफा की दुकानें अपराधियों के निशाने पर हैं। पिछले कुछ समय में प्रदेश के विभिन्न जिलों में लूटमार और टप्पेबाजी की ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिनमें अपराधी चेहरा ढंककर आए थे। इससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया। हेलमेट और मास्क पर भी पाबंदी एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यह नियम केवल नकाब-हिजाब तक सीमित नहीं है। किसी भी तरीके से चेहरा ढंककर आने वाले पुरुष या महिला ग्राहक, चाहे उन्होंने हेलमेट लगाया हो या मास्क, उन्हें दुकान में प्रवेश देने या व्यापार करने से पहले चेहरा दिखाने का अनुरोध किया जाएगा। मनीष कुमार वर्मा ने व्यापारियों का आह्वान किया कि वे अपने प्रतिष्ठानों पर इस नियम को सख्ती से लागू करें ताकि सीसीटीवी कैमरों में हर आने वाले व्यक्ति की पहचान स्पष्ट हो सके। एसोसिएशन का मानना है कि इस मुहिम से न केवल चोरी की घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि संदिग्ध लोगों की पहचान भी आसान होगी। लखनऊ से शुरू हुई यह मुहिम अब धीरे-धीरे पूरे उत्तर प्रदेश में तेज होने लगी है, जिससे ज्वेलरी मार्केट में सुरक्षा का एक नया प्रोटोकॉल तैयार हो रहा है। अपराधियों को पकड़ने वाले पुलिसकर्मी सम्मानित बैठक के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के साथ-साथ उन पुलिस अधिकारियों का उत्साहवर्धन भी किया गया जो व्यापारियों की मदद कर रहे हैं। जानकीपुरम के 60 फिटा रोड स्थित ज्वैलर्स की दुकान से अंगूठी चोरी करने वाले युवक को तत्परता से पकड़ने के लिए जानकीपुरम थाना प्रभारी विनोद तिवारी को सम्मानित किया गया। व्यापारियों ने कहा कि पुलिस और व्यापारियों के बीच बेहतर समन्वय ही अपराधों को रोक सकता है।  

झारखंड में माइनस 2 डिग्री तक गिरा तापमान, 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी

रांची रांची समेत राज्यभर में न्यूनतम तापमान गिरने का सिलसिला थम नहीं रहा है। पिछले एक हफ्ते के पारा पर गौर करें तो अकेले मैकलुस्कीगंज का न्यूनतम तापमान आठ डिग्री नीचे गिरकर शुक्रवार को माइनस दो डिग्री पर पहुंच गया। वहां ओस की बूंदें लगातार जम रही हैं। जनजीवन प्रभावित है। मैकलुस्कीगंज स्थिति स्थानीय माप केंद्र के अनुसार तीन जनवरी को वहां पारा 6.4, चार और पांच जनवरी को 5, छह को 1.5, सात को गिरकर माइनस 0.5, आठ को माइनस 1.5 और नौ जनवरी माइनस 2 डिग्री पर आ गया। वहीं रांची का न्यूनतम पारा जहां तीन जनवरी को 10.7 डिग्री था। वह नौ जनवरी को गिरकर 7.3 डिग्री पर पहुंच गया। पारा में लगातार गिरावट से पूरा झारखंड भीषण ठंड की चपेट में है। मौसम केंद्र के मुताबिक झारखंड को फिलहाल ठंड से राहत की उम्मीद कम है। राज्य में अगले 24 घंटों के दौरान सात जिलों में शीतलहर का ऑरेंज अलर्ट और रांची समेत छह जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है। गढ़वा, पलामू, चतरा, हजारीबाग, लातेहार, लोहरदगा और गुमला में ऑरेंज अलर्ट जबकि रांची, बोकारो, रामगढ़, खूंटी, सिमडेगा एवं पश्चिमी सिंहभूम के लिए यलो अलर्ट है। जिलों में कहीं कहीं शीतलहर चलने की संभावना व्यक्त की गई है। मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को राज्य के अधिकांश जिलों के तापमान में और कमी आयी। रांची का न्यूनतम तापमान 7.0 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं राज्य में खूंटी का न्यूनतम राज्य में सबसे कम 1.5 डिग्री रहा। जबकि मेदिननगर 3.2, बोकारो 3.3, सिमडेगा 3.8 रहा। , हजारीबाग 4.3,सरायकेला 5.5 डिग्री दर्ज किया गया। राज्य के छह जिलों का तापमान 6.0 डिग्री से नीचे और पूरे राज्य का तापमान नौ डिग्री से नीचे रहा। वहीं राज्य में लातेहार में शीत दिवस की स्थिति रही। यहां अधिकतम तापमान 15.4 डिग्री और न्यूनतम तापमान 7.3 डिग्री दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनसार राज्य में पिछले 24 घंटे के दौरान न्यूनतम तापमान में एक से दो डिग्री की कमी आयी। अधिकतम और न्यूनतम तापमान दोनों करीब छह डिग्री तक नीचे आ गए हैं। इससे राज्य में कहीं शीत लहर और कहीं शीतदिवस की स्थिति महसूस की जा रही है। न्यूनतम तापमान स्थान न्यूनतम खूंटी 1.5 मेदिननगर 3.2 बोकारो 3.3 सिमडेगा 3.8 हजारीबाग 4.3 सरायकेला 5.5 चाईबासा 6.8 रांची 7.3 लातेहार 7.3 देवघर 8.5 जमशेदपुर 8.4 पू सिंहभूम 7.7 कोडरमा 7.0 पाकुड़ 7.0 लोहरदगा 6.0 झारखंड के मौसम की जानकारी देते हुए मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि राज्य में अगले पांच दिनों के दौरान ठंड में कोई बदलाव होने की संभावना नही है। अगले दो दिन के दौरान तापमान में मामुली वृद्धि होने के बाद फिर इसमें तेजी से कमी आएगी। रांची समेत अन्य जिलों इस दौरान कड़ाके की सर्दी रह सकती है।

गुरुग्राम में 3 प्रमुख सड़कों के चौड़ीकरण से जाम और गड्ढों की समस्या में होगी कमी

गुरुग्राम  गुरुग्राम में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से लोगों को सड़कों पर गड्ढे और जाम से राहत दिलाने के लिए शहर की तीन सड़कों की मरम्मत करने के साथ ही इनकी चौड़ाई बढ़ाई जाएगी। साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से 12 किलोमीटर लंबी तीन सड़कों की मरम्मत की जाएगी। इसका ठेका जारी कर काम शुरू कर दिया गया है, जो एक साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सड़कों के गड्ढे भरने के साथ इन्हें चौड़ा किया जाएगा, जिससे कि लोगों को जाम से राहत मिल सके। इन सड़कों पर होगा काम पीडब्ल्यूडी के अनुसार 4.70 किलोमीटर गुरुग्राम-अलवर मार्ग से सोहना होते हुए दौला तक सड़क, 2.79 किलोमीटर सोहना से संपकी-नांगली तक नए सिरे सड़क सुधार होगा। इसके अलावा चार किलोमीटर तक गढ़ी बाजिदपुर से स्कूल तक जाने वाली सड़क निर्माण होगा। इस पर साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा। मॉनसून से खराब हुई सड़कों की मरम्मत करना और गड्ढे भरना, यातायात की भीड़ को कम करना। सड़कों का चौड़ीकरण कर आवागमन को सुगम बनाना है। सड़कों पर गड्ढ़ों से वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा इन सड़कों का मरम्मत और निर्माण कार्य तेजी से शुरू होगा। इन सड़कों पर गड्ढे होने के साथ लोग परेशानी झेल रहे हैं। स्थानीय निवासियो ने कहा कि विभाग की ओर से अनदेखी के कारण सड़कों पर गड्ढे होने से हादसे हो रहे हैं। इस कारण वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है। प्रदूषण होने से भी लोगों को परेशानी रहती है। चरनदीप सिंह, कार्यकारी अभियंता, पीडब्ल्यूडी, ''तीन सड़कों की मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर काम अलॉट कर दिया गया है। इस साल के अंत तक सड़कों की मरम्मत का काम पूरा कर लिया जाएगा। सड़क के चौड़ीकरण होने से लोगों को राहत मिलेगी। इन सड़कों पर जाम से भी राहत मिलेगी।'' दौलताबाद रोड चौड़ा करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी वहीं, द्वारका एक्सप्रेसवे को गुरुग्राम रेलवे स्टेशन से जोड़ रही दौलताबाद रोड (सेक्टर-104 और सेक्टर-105 की विभाजित सड़क) को चौड़ा करने या एलिवेटिड बनाने की संभावनाओं को तलाशा जाएगा। शुक्रवार को शहरी विकास के प्रधान सलाहकार डीएस ढेसी की अध्यक्षता में बैठक हुई। ढेसी ने अधिकारियों को गुरुग्राम रेलवे स्टेशन को जोड़ रही सड़कों में सुधार लाने के दिशा-निर्देश जारी किए। मौजूदा समय में दौलताबाद रोड की चौड़ाई 30 मीटर है। इसे पीडब्ल्यूडी बीएंडआर ने तैयार किया है। नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की तरफ से तैयार गुरुग्राम-मानेसर विकास योजना के तहत इस रोड की चौड़ाई 84 मीटर प्रस्तावित है। मौजूदा रोड के दोनों तरफ घनी आबादी है। सूरत नगर, राजेंद्रा पार्क और लक्ष्मण विहार कॉलोनियां इसके दोनों तरफ विकसित हैं। सड़कों पर खामियां दूर करने के आदेश गुरुग्राम में सड़क सुरक्षा माह जनवरी-2026 के अंतर्गत शुक्रवार को डीसीपी ट्रैफिक डॉ. राजेश मोहन ने शहर के व्यस्त आर्टिमिस सिग्नल (रेड लाइट टी-पॉइंट) और आर्टिमिस आंबेडकर चौक का निरीक्षण किया। उन्होंने यातायात बाधाओं को समझा और सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए अधिकारियों को आदेश दिए। निरीक्षण के दौरान डीसीपी ट्रैफिक ने स्पष्ट किया कि शहर के प्रमुख चौराहों और ब्लाइंड स्पॉट्स पर नियमित निगरानी रखी जाएगी। उन्होंने तकनीकी संसाधनों जैसे सीसीटीवी और अन्य निगरानी प्रणालियों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। डॉ. राजेश मोहन ने कहा कि यातायात निरीक्षक और जोनल अधिकारी सिविल अथॉरिटीज के साथ बेहतर तालमेल बिठाएं ताकि सड़कों की बनावट या संकेतों से जुड़ी खामियों को तुरंत दूर किया जा सके। डीसीपी ने मौके पर संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि केवल चालान काटना ही उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि चालान प्रक्रिया के साथ-साथ वाहन चालकों के साथ जागरुकता गतिविधियों को भी प्रभावी रूप से चलाया जाए।

कॉपरेटिव पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप में जैविक खेती को बढ़ावा देने का कार्य किया जाए

किसानों को उपार्जन एवं खाद की उपलब्धता में दिक्कत न आए कॉपरेटिव पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप में जैविक खेती को बढ़ावा देने का कार्य किया जाए प्रत्येक विभाग का पब्लिक फेशियो उत्तम श्रेणी का हो : मंत्री सारंग हरदा में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक आयोजित भोपाल सहकारिता व खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सांरग ने हरदा में शुक्रवार को आयोजित जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक में कहा कि जिले में अनाज उपार्जन एवं खाद की उपलब्धता में किसानों को कोई अड़चन न आये। खनिज के अवैध उत्खनन व परिवहन को रोकने के लिये संयुक्त दल गठित कर अभियान चलाया जाए। सारंग ने कहा कि जिले में निर्मित हो रही सड़कों के निर्माण में अतिक्रमण आड़े न आये ऐसे अतिक्रमण को सख्ती से हटाया जाए। उन्होने जिले में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश देते हुए कहा कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, सहकारिता एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वाधान में जैविक खेती के विकास के लिये कार्य किया जाए। साथ ही सहकारिता एवं पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप के तहत भी जिले में जैविक खेती के विकास का कार्य हो। मंत्री ने कहा कि जिला विकास सलाहकार समिति के गठन के पीछे शासन की मंशा विकास एवं कल्याण की योजनाओं में सेचुरेशन लाना, प्रशासकीय व्यवस्था का सुचारू संचालन के साथ-साथ विकास कार्यों में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। समिति का उद्देश्य है कि सरकार की योजनाओं का सभी पात्र व्यक्तियों को लाभ मिले। साथ ही समिति के निर्णयों का अक्षरशः पालन हो। प्रत्येक विभाग का आमजन से जुड़े कार्य करने का प्रयास अच्छा होना चाहिए। बैठक में लोक निर्माण विभाग की समीक्षा के दौरान मंत्री द्वारा कहा गया कि जिले में स्वीकृत सड़कों के शेष निर्माण कार्यों को शीघ्रता से पूर्ण किया जाए। वनक्षेत्रों में निर्माणाधीन सड़कें भी समय सीमा में पूर्ण हो। उन्होने कहा कि जिला अस्पताल के नवीन भवन प्रारम्भ होने के पूर्व वहां आवश्यक उपकरणों एवं संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की पेयजल योजनाएं सुचारू रूप से संचालित हों। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की सड़कों के निर्माण एवं मरम्मत में देरी न हो। खाद्य विभाग अंतर्गत राशन प्राप्त करने वाले हितग्राहियों को राशन प्राप्त करने में असुविधा न हो। 80 वर्ष से उपर के हितग्राहियों को ई-केवायसी से मुक्त रखा जाए। इस दौरान जिले में जैविक खेती एवं जैविक हाट की समीक्षा करते हुए उन्होने कहा कि जैविक खेती को सहकारिता एवं कार्पोरेट के साथ जोड़कर जिले में जैविक खेती के विकास के क्षेत्र में नवाचार किया जाए। मंत्री ने कहा कि जिले के ज्यादा से ज्यादा किसानों को जैविक खेती से जोड़ने के लिये जनजागरण अभियान चलाया जाए। मंत्री सारंग ने यह भी कहा कि सरकार की योजनाओं को आमजन तक पहुँचाने में जनप्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाए एवं उनके आमजन के बीच सम्पर्कों का लाभ लिया जाए। मंत्री द्वारा शिक्षा, परिवहन एवं वेयरहाउसिंग विभाग की भी समीक्षा की गई। जल संसाधन विभाग की समीक्षा के दौरान टेल क्षेत्र के ग्रामों में सिंचाई जल की उपलब्धता की भी जानकारी ली गई। सारंग ने कहा कि संबल योजना में पात्र हितग्राहियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के मामले लंबित न रहें। इस दौरान पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल ने हरदा जिले को शतप्रतिशत सिंचित बनाने के लिये किये गये कार्यों की प्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होने हरदा लिफ्ट इरिगेशन परियोजना का नाम शहीद दीप सिंह चौहान रखने का बैठक में प्रस्ताव भी रखा, जिसको अनुमोदित किया गया। उद्योग विभाग की समीक्षा के दौरान प्रभारी मंत्री द्वारा ऐसे उद्यमियों को ही जमीन आवंटित कराने के निर्देश दिये गये जो वास्तव में उद्योग चलायेंगे। उन्होने कहा कि स्थानीय उत्पादकता पर आधारित उद्यमों की स्थापना को प्राथमिकता दी जाए। आदिम जाति कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान सभी पात्र हितग्राहियों को छात्रवृत्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये। साथ ही कहा गया कि छात्रावासों में रह रहे विद्यार्थियों को कोई असुविधा न हो, यह ध्यान रखा जाए। वन विभाग की समीक्षा के दौरान वन क्षेत्रों में हुए पौधरोपण का भौतिक सत्यापन करने के लिये निर्देशित किया गया। पशुपालन विभाग के अधिकारी को निर्देश दिये गये कि दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान में जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। नये मिल्क रूट विकसित किये जायें एवं अधिक से अधिक दुग्ध समितियों का गठन हो। किसानों को ज्यादा से ज्यादा गौवंश के पालन के लिये प्रोत्साहित किया जाए। विद्युत विभाग के अधिकारी को विद्युत की सुचारू आपूर्ति के लिये निर्देशित किया गया। यातायात व्यवस्था सुव्यवस्थित करने, रोड़ एक्सिडेन्ट रोकने तथा दुपहिया वाहन चालकों हेल्मेट लगाने के लिये जागरूक करने के भी प्रभारी मंत्री द्वारा निर्देश दिये गये। कलेक्टर सिद्धार्थ जैन द्वारा जिले में जैविक खेती के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों की बिन्दुवार जानकारी दी गई। इसके अलावा विभाग प्रमुखों द्वारा दो वर्ष में जिले में हुए विकास एवं उपलब्धियों से मंत्री को अवगत कराया गया। कमल खेल महोत्सव में शामिल हुए प्रभारी मंत्री जिले के नेहरू स्टेडियम में आयोजित हो रहे कमल खेल महोत्सव में भी प्रभारी मंत्री ने भाग लिया। उन्होने कहा कि खेल जीवन का महत्वपूर्ण आयाम है। इससे जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। युवा खेल महोत्सव का आयोजन खेल प्रतिभाओं को तराशने का सराहनीय कार्य है। खेलों से युवाओं का शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है एवं उन्हें अनुशासित एवं संयमित जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। इस दौरान उन्होने खेल प्रतिभाओं को पुरूस्कृत भी किया। स्वदेशी मेले में पहुँचे प्रभारी मंत्री सारंग हरदा जिले के प्रभारी मंत्री विश्वास सारंग हरदा के मिडिल स्कूल ग्राउण्ड में आयोजित स्वदेशी मेले में पहुँचे। मंत्री सारंग ने कहा कि स्वदेशी को बढ़ावा देने के उद्देश्य स्वेदशी मेले का आयोजन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आहवान किया है कि हमें लोकल व स्वेदशी पर जोर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम स्वदेशी उत्पादों और डिजिटल लेनदेन के प्रचार-प्रसार पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने पूर्व में भी व्यापारियों और नागरिकों से आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए स्वदेशी अपनाने की अपील की है।  

रेलवे का ग्रीन कदम: फल-सब्जियों के छिलकों से बनी थाली में मिलेगा खाना, मार्च से लागू बदलाव

इंदौर रेल यात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल सुविधा देने की दिशा में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आइआरसीटीसी) ने एक अहम पहल करने का निर्णय लिया है। मार्च से वंदे भारत एक्सप्रेस सहित कुछ प्रीमियम ट्रेनों में यात्रियों को भोजन पारंपरिक प्लास्टिक की थालियों की बजाए बायोडिग्रेडेबल थालियों में परोसा जाएगा। थाली फल-सब्जियों के छिलकों, कागज और अन्य प्राकृतिक तत्वों से तैयार की जाती है। पहले चरण की सफलता के बाद इसे अन्य प्रीमियम और लंबी दूरी की ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा। आइआरसीटीसी पश्चिम क्षेत्र के जनसंपर्क अधिकारी ए.के. सिंह के अनुसार यह व्यवस्था उन ट्रेनों में भी लागू होगी, जो इंदौर से चलती हैं। रेलवे और आइआरसीटीसी लंबे समय से रेल परिसरों को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह कदम उसी अभियान को और मजबूती देगा।   रेलवे में हर दिन हजारों यात्रियों को भोजन परोसा जाता है। इससे हर महीने बड़ी मात्रा में डिस्पोजेबल प्लास्टिक थालियों का कचरा निकलता है। इसके निपटान में समय, पैसा और संसाधन खर्च होते हैं। बायोडिग्रेडेबल थालियों के उपयोग से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। इससे न केवल कचरे का बोझ घटेगा, बल्कि कार्बन डाइआक्साइड के उत्सर्जन में भी कमी आएगी। तीन से छह महीने में मिट्टी में मिल जाती है थाली बायोडिग्रेडेबल थाली की खास बात यह है कि उपयोग के बाद यह तीन से छह महीने में गल-सड़कर मिट्टी में मिल जाती है। इसके विपरीत प्लास्टिक की थाली को खत्म होने में कई वर्षों लग जाते हैं। प्लास्टिक टूटकर माइक्रोप्लास्टिक बनाता है, जो मिट्टी, पानी और भोजन श्रृंखला में प्रवेश कर मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। बायोडिग्रेडेबल थाली से न तो माइक्रोप्लास्टिक निकलता है और न ही जहरीले रसायन। प्लास्टिक की थालियों में गर्म भोजन परोसने से हानिकारक रसायन निकलने का खतरा रहता है। बायोडिग्रेडेबल थालियों के उपयोग से यह जोखिम पूरी तरह खत्म हो जाएगा। यात्रियों को अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर भोजन मिलेगा। पहले से प्लास्टिक कप-थैलियों पर रोक पहले रेलवे ने प्लास्टिक कप और थैलियों पर रोक लगाकर कागज के विकल्प अपनाए थे। अब बायोडिग्रेडेबल थालियों के उपयोग से यह प्रयास और मजबूत होगा। आईआरसीटीसी ने जन आहार और फूड प्लाजा संचालकों को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे केवल पर्यावरण-अनुकूल सामग्री का ही इस्तेमाल करें। टेंडर प्रक्रिया जारीआइआरसीटीसी अधिकारियों के मुताबिक इस योजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही टेंडर पूरे होने के बाद मार्च से चुनिंदा ट्रेनों में इसकी शुरुआत होगी। फिर इसे सभी लंबी दूरी की ट्रेनों में लागू किया जाएगा। एक ओर प्लास्टिक कचरे की समस्या खत्म होगी, तो दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

यूपी में दो मदरसों की मान्यता रद्द, शमशुल हुदा का लंदन से वेतन-पेंशन लेने का मामला सामने

 लखनऊ लंदन में रह रहे मौलाना शमशुल हुदा से जुड़े उत्तर प्रदेश के दो मदरसों की मान्यता रद्द कर दी गई है. मदरसा शिक्षा परिषद ने संत कबीर नगर स्थित मदरसा कुलियातुल बनातिर रजबिया और आजमगढ़ के मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत की मान्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश जारी किया है. परिषद का कहना है कि जांच में इन मदरसों के संचालन और फंडिंग से जुड़े गंभीर अनियमित तथ्य सामने आए हैं. जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि इन दोनों मदरसों से मौलाना शमशुल हुदा का सीधा संबंध रहा है. संत कबीर नगर का मदरसा स्वयं शमशुल हुदा द्वारा संचालित किया जा रहा था. वहीं आजमगढ़ के मदरसे में वह ब्रिटिश नागरिकता लेने के बावजूद लंबे समय तक वेतन और अन्य लाभ लेता रहा. इस पूरे प्रकरण ने प्रदेश में मदरसों की मान्यता, फंडिंग और निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मौलाना शमशुल हुदा वर्ष 2007 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चला गया था और 2013 में उसने ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली थी. इसके बावजूद वर्ष 2017 तक वह आजमगढ़ के मदरसे में कागजी तौर पर सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत दिखाया गया और उसे नियमित वेतन का भुगतान किया गया. इतना ही नहीं, बाद में पेंशन का भुगतान भी किए जाने के तथ्य सामने आए हैं. शमशुल हुदा के खिलाफ जांच यूपी एटीएस की रिपोर्ट के बाद शुरू हुई थी. एटीएस ने अपनी जांच में विदेशी फंडिंग की आशंका जताई थी और संदिग्ध तथा संभावित देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े संपर्कों की ओर इशारा किया था.  इस मामले में धोखाधड़ी, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघन और अन्य गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. इसी के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी शमशुल हुदा से जुड़ी फंडिंग की जांच शुरू कर दी है. सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि मदरसों को मिलने वाले फंड का स्रोत क्या था और क्या इसका इस्तेमाल किसी संदिग्ध गतिविधि में किया गया. मदरसा शिक्षा परिषद ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन, गलत दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति और विदेशी नागरिक द्वारा वेतन व पेंशन लेने जैसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी.   

आयुष्मान आरोग्य मंदिर में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ निःशुल्क दवाइयां और जांच: मंत्री परमार

आयुष्मान आरोग्य मंदिर में हो आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ निःशुल्क दवाइयां एवं जांच की व्यवस्था : मंत्री परमार मंत्री परमार ने मंगलाज में किया आयुष्मान आरोग्य मंदिर का लोकार्पण एवं गौलाना व कैथलाय के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का भूमिपूजन भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार के मुख्य आतिथ्य एवं सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी की अध्यक्षता में आज शाजापुर जिले के अंतर्गत ग्राम पंचायत मंगलाज में लगभग 30 लाख रुपये की लागत से निर्मित आयुष्मान आरोग्य मंदिर का लोकार्पण फीता काटकर किया गया। वही गौलाना एवं कैथलाय में 30-30 लाख रूपये लागत से निर्मित होने वाले आयुष्मान आरोग्य मंदिर का भूमिपूजन भी किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कन्या पूजन एवं भगवान धनवंतरी के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। मंत्री परमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर शासन की एक महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सुलभ, सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के प्रारंभ होने से ग्रामीणजनों को प्राथमिक उपचार, आवश्यक जांच एवं परामर्श की सुविधा उनके घर के पास ही प्राप्त होगी, जिससे उन्हें दूर शहरों में इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा। साथ ही आयुर्वेदिक पद्धति से ईलाज भी करा सकेंगे। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे प्राचीन पद्धति आयुर्वेद पद्धति हैं। मंत्री परमार ने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ निःशुल्क दवाइयां एवं जांच की व्यवस्था की गई है। मंत्री परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से हर वर्ग के कल्याण एवं निरंतर विकास के कार्य किये जा रहे हैं। जिससे गांवों की तस्‍वीर एवं लोगों की तकदीर बदल रही हैं। उन्होंने बताया कि 08 आयुर्वेदिक महाविद्यालय खोले जायेंगे, जिसमें एक आयुर्वेदिक महाविद्यालय शाजापुर जिले के शुजालपुर में बनाया जायेगा। इसमें 50 बिस्तरीय सर्वसुविधायुक्त वेलनेस सेंटर एवं 50 बिस्तरीय अस्पताल भी बनाया जायेगा। मंत्री परमार ने बताया कि पूरे मध्यप्रदेश में लगभग 358 सांदीपनि विद्यालय बनाये जा रहे हैं। इसमें शाजापुर जिले में 19 सांदीपनि विद्यालय स्वीकृत हैं, जिनमें से 06 सांदीपनि विद्यालयों का निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चुका हैं। साथ ही प्रदेश का सर्वप्रथम सांदीपनि विद्यालय शाजापुर जिले के गौलाना तहसील में स्थापित हुआ है। इन सभी विद्यालयों में भी शीघ्र ही कक्षाएं प्रारंभ की जायेगी। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशालाएं, कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय, कला और संगीत कक्ष जैसी विश्व-स्तरीय सुविधाएं दी जा रही हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति से शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि शाजापुर जिले के शतप्रतिशत गांवों में पेयजल एवं खेतों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी दिया जायेगा। सांसद सोलंकी ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि देवास-शाजापुर संसदीय क्षेत्र में लगभग 50 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वीकृत किये गये हैं, जिनका निर्माण किया जा रहा हैं। इन आयुष्मान आरोग्य मंदिर से ग्रामीणों को मुफ्त ईलाज की सुविधा एवं समय पर उपचार मिलेगा। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों से आरोग्य मंदिरों में ईलाज कराने के लिए भी कहा। इस दौरान उन्होंने उपस्थित जनों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर लोकार्पण के लिए शुभकामनाएं भी दी। जिला पंचायत अध्यक्ष हेमराज सिंह सिसोदिया ने संबोधित करते हुए कहा कि भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अनेकों जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा इन योजनाओं के माध्यम से लोगों के जीवन स्तर में परिवर्तन हो रहा है। सरकार की मंशा है कि प्रत्येक पात्र हितग्राही को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले। इसके लिए उन्होंने सभी पात्र हितग्राहियों से जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए कहा।  

रायपुर में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू होने से पहले, इन तीन IPS अफसरों के नाम पर चर्चा तेज

रायपुर रायपुर का पहला कमिश्नर कौन होगा इस पर सस्पेंस बना हुआ है। 15 अगस्त 2025 को रायपुर में कमिश्नरी सिस्टल लागू होने की घोषणा के बाद संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही नाम तय हो जाएगा। बता दें कि 31 दिसंबर को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 23 जनवरी से कमिश्नरी सिस्टम लागू करने की घोषणा की है। Raipur Commissioner: चल रही कमिश्नर की तलाश सरकार का प्रयास है कि इससे पहले ही कमिश्नर के नाम पर मुहर लग जाए। इसके लिए 7 आईजी स्तर के अधिकारियों को प्रस्तावित सूची में रखा गया है। एक्ट में संशोधन करने 31 दिसंबर को कैबिनेट की बैठक के बाद कमिश्नर की तलाश चल रही है। साथ ही कमिश्नर को मजिस्ट्रियल पॉवर के साथ ही पुलिङ्क्षसग को लेकर महत्वपूर्ण अधिकार देने एक्ट में संशोधन किया गया है। ताकि शस्त्र लाइसेंस, धारा 144 लागू करने और जरूरत के अनुसार कफ्र्यू, आपात स्थिति में तुरंत आदेश जारी करने और सिस्टम में फेरबदल किया जा सके।  रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर के लिए बिलासपुर के आइजी संजीव शुक्ला के साथ दो और नाम सबसे प्रबल दावेदार के रूप में उभरकर सामने आए हैं। इनमें वरिष्ठ आइपीएस बद्री नारायण मीणा और दीपक कुमार झा शामिल हैं। बद्री नारायण मीणा पूर्व में रायपुर एसएसपी रह चुके हैं और प्रशासनिक अनुभव के साथ सख्त कानून-व्यवस्था नियंत्रण के लिए जाने जाते हैं। वहीं दीपक कुमार झा भी फील्ड पोस्टिंग और अनुशासनात्मक कार्यशैली के लिए पहचाने जाते हैं। इससे पहले आइपीएस अजय यादव, सुंदरराज पी, अमरेश मिश्रा समेत अन्य नाम भी कमिश्नर की दौड़ में शामिल रहे हैं। सरकार क्या चाहती है पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के मुताबिक सरकार ऐसे अधिकारी को कमिश्नर बनाना चाहती है, जो नई व्यवस्था के शुरुआती दौर में इसे मजबूती से स्थापित कर सके। हालांकि यह भी चर्चा है कि कुछ वरिष्ठ आइपीएस अधिकारियों ने रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर बनने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। इसके पीछे मुख्य कारण पुलिस कमिश्नर के सीमित अधिकार क्षेत्र बताए जा रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत कमिश्नर का अधिकार केवल शहरी क्षेत्र तक सीमित रहेगा, जिसमें करीब 22 पुलिस थाने शामिल होंगे, जबकि शेष ग्रामीण क्षेत्र के 11 थानों के लिए एसएसपी तैनात करने की अलग व्यवस्था होगी। एडिशनल कमिश्नर के लिए लाल उम्मेद बने पहली पसंद एडिशनल पुलिस कमिश्नर के पद के लिए रायपुर एसएसपी डा. लाल उम्मेद सिंह शासन की पहली पसंद माने जा रहे हैं। उन्हें पदोन्नत कर इस जिम्मेदारी पर बैठाया जा सकता है। माना जा रहा है कि कमिश्नरेट को सुचारु रूप से चलाने के लिए अनुभवी और मजबूत टीम बनाई जा रही है, जिसमें डा. सिंह की भूमिका अहम होगी। इनके नाम पर विचार कमिश्नर के लिए रायपुर आईजी अमरेश मिश्रा, बिलासपुर के संजीव शुक्ला, दुर्ग के रामगोपाल गर्ग, सरगुजा के दीपक झा और आईजी पीएचक्यू अजय यादव का नाम प्रमुखता के साथ चल रहा है। वहीं, ओपी पाल और आनंद छाबड़ा के नाम भी प्रस्तावित किए गए हैं। उक्त अधिकारियों में किसी एक को कमिश्नर बनाया जाएगा। इसके लिए उच्चस्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। 900 अतिरिक्त बल की तैनाती Raipur Commissioner: नए सिस्टम में आईजी को कमिश्नरी की कमान देने के साथ ही दो एसएसपी, 5 एएसपी, 18 डीएससी के साथ ही फील्ड में 800 से ज्यादा अतिरिक्त जवानों की पोस्टिंग होगी। वहीं, पुलिस थानों की संख्या में इजाफा कर 5 अतिरिक्त थाना और 3 पुलिस चौकी का गठन होगा। बता दें कि इस समय रायपुर शहर और ग्रामीण को मिलाकर 38 पुलिस थाने हैं। इसमें साइबर, ट्रैफिक और अजाक थाना भी शामिल है। दफ्तर और वाहन की व्यवस्था पुराने पीएचक्यू में दफ्तर और कमिश्नर के लिए कार की व्यवस्था राज्य पुलिस मुख्यालय द्वारा की गई है। वहीं, दफ्तर के लिए पुलिस महकमे के तमाम विभागों को कनेक्ट किया गया है। कमिश्नर के ज्वाइन करते ही ऑटो मोड में सिस्टम काम करने लगेगा। 23 जनवरी से लागू होगी व्यवस्था रायपुर में पुलिस कमिश्नरी की घोषणा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने करीब छह महीने पहले की थी। इसके लिए आइपीएस प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता में गठित टीम ने ओडिशा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित छह राज्यों की व्यवस्था का अध्ययन किया था। तैयार ड्राफ्ट को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है और 23 जनवरी से रायपुर में नई व्यवस्था लागू होगी। इसी दिन कमिश्नर कार्यालय के उद्घाटन की भी संभावना है। कई जिलों में बदल सकते हैं एसपी-एसएसपी पुलिस कमिश्नर व्यवस्था लागू होने से पहले आइपीएस अफसरों के तबादलों को लेकर भी पीएचक्यू में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार कवर्धा में पदस्थ एसपी धर्मेंद्र सिंह चवाई को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर भेजे जाने की संभावना है। वहीं तमनार हिंसा के बाद सख्त कार्रवाई के लिए पहचाने जाने वाले शशि मोहन सिंह को रायगढ़ का नया एसएसपी बनाया जा सकता है। वहीं दुर्ग से कोरबा में विजय अग्रवाल, दुर्ग में डा. संतोष सिंह, मुंगेली में हरीश राठौर, बेमेतरा में भावना पांडेय, रामकृष्ण साहू को सूरजपुर, भोजराम पटेल को सारंगढ़-बिलागढ़ में तैनाती के संकेत हैं। प्रशांत ठाकुर और सिद्धार्थ तिवारी को पुलिस मुख्यालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।  

रायगढ़ में उद्योगों में तीन सालों में 55 मजदूरों की मौत, 63 घायल – सुरक्षा मानकों की कमी बनी बड़ी वजह

रायगढ़  छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में उद्योगों में लगातार हादसे हो रहे हैं। औद्योगिक सुरक्षा विभाग ने एक आंकड़ा जारी किया है जिसके मुताबिक, पिछले 3 साल में अलग-अलग उद्योगों में हुए हादसे में काम करने वाले 55 लोगों की जान जा चुकी है, वहीं 63 लोग घायल हुए हैं। जहां घटनाएं हुई उनमें एनआर इस्पात, रायगढ़ इस्पात, एमएसपी स्टील एंड पवार लिमिटेड, एनआरवीएश स्पंज प्लांट, जिंदल स्टील एंड पावर प्लांट, सिंघल स्पंज प्लांट, बीएस स्पंज प्राइवेट लिमिटेड, नवदुर्गा फ्युल प्राइवेट लिमिटेड, शारदा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड समेत कई प्लांट शामिल हैं। ज्यादातर मामलों में सुरक्षा मानकों में कमी के कारण हादसा उजागर हुआ है। 3 साल में 55 मजदूरों की मौत औद्योगिक सुरक्षा विभाग के मुताबिक, साल 2023 में 9 प्लांटों में हादसों के मामले सामने आए। जिसमें 9 मजदूरों की मौत हो गई और 6 गंभीर व 6 सामान्य रूप से घायल हुए। इसके बाद आकड़ों का ग्राफ भी बढ़ते गया। साल 2024 में उद्योगों में 22 हादसे हुए और इसमें 23 मजदूरों की मौत हो गई। जबकि 14 गंभीर और 18 सामान्य रूप से घायल हुए। इसके अलावा साल 2025 में भी 22 हादसों में 23 लोगों की जान चले गई और 9 गंभीर व 10 सामान्य रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंचे। सुरक्षा मानकों की कमी के कारण घटनाएं विभागीय जानकारों ने बताया कि उद्योगों में हादसे अक्सर सुरक्षा मानकों की कमी के कारण हो रहे हैं। जिसमें मजदूरों को बिना सुरक्षा व मनमाने तरीके से काम कराया जाता है। पिछले कुछ सालों में देखा गया कि अधिक हादसे बॉयलर फटने या कन्वेयर बेल्ट और मशीन की चपेट में आने से हुई है। उत्पादन बढ़ाने के दबाव में सुरक्षा नियमों की अनदेखी और पुराने पड़ चुके उपकरणों का रखरखाव न होना भी मौतों की मुख्य वजह बतायी जा रही है। 3 महीने में 25 आपराधिक प्रकरण दर्ज औद्योगिक स्वास्थ्य व सुरक्षा विभाग के उप संचालक राहुल पटेल ने बताया कि कारखानों में लगातार हादसों को देखते हुए नियमित रूप से जांच की जा रही है। पूर्व में हुए हादसों में निरीक्षण में कई कमियां पाई गई। ऐसे में पिछले 3 माह में उद्योगों के खिलाफ 25 आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया है। इसके अलावा जांच के दौरान जिन-जिन प्लांटों में सुरक्षा को लेकर कमियां मिलती हैं, उन्हें नोटिस जारी कर सुधार के निर्देश दिए जाते हैं। औद्योगिक सुरक्षा विभाग के मुताबिक, साल 2023 में 9 प्लांटों में हादसों के मामले सामने आए। जिसमें 9 मजदूरों की मौत हो गई और 6 गंभीर व 6 सामान्य रूप से घायल हुए। इसके बाद आकड़ों का ग्राफ भी बढ़ते गया। साल 2024 में उद्योगों में 22 हादसे हुए और इसमें 23 मजदूरों की मौत हो गई। जबकि 14 गंभीर और 18 सामान्य रूप से घायल हुए। इसके अलावा साल 2025 में भी 22 हादसों में 23 लोगों की जान चले गई और 9 गंभीर व 10 सामान्य रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंचे। सुरक्षा मानकों की कमी के कारण घटनाएं विभागीय जानकारों ने बताया कि उद्योगों में हादसे अक्सर सुरक्षा मानकों की कमी के कारण हो रहे हैं। जिसमें मजदूरों को बिना सुरक्षा व मनमाने तरीके से काम कराया जाता है। पिछले कुछ सालों में देखा गया कि अधिक हादसे बॉयलर फटने या कन्वेयर बेल्ट और मशीन की चपेट में आने से हुई है। उत्पादन बढ़ाने के दबाव में सुरक्षा नियमों की अनदेखी और पुराने पड़ चुके उपकरणों का रखरखाव न होना भी मौतों की मुख्य वजह बतायी जा रही है। 3 महीने में 25 आपराधिक प्रकरण दर्ज औद्योगिक स्वास्थ्य व सुरक्षा विभाग के उप संचालक राहुल पटेल ने बताया कि कारखानों में लगातार हादसों को देखते हुए नियमित रूप से जांच की जा रही है। पूर्व में हुए हादसों में निरीक्षण में कई कमियां पाई गई। ऐसे में पिछले 3 माह में उद्योगों के खिलाफ 25 आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया है। इसके अलावा जांच के दौरान जिन-जिन प्लांटों में सुरक्षा को लेकर कमियां मिलती हैं, उन्हें नोटिस जारी कर सुधार के निर्देश दिए जाते हैं।