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गणतंत्र दिवस परेड 2026 में विदिशा की दो बेटियां कर्तव्य पथ पर कदम रखेंगी

विदिशा   नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाले गणतंत्र दिवस परेड में इस वर्ष विदिशा की बेटियां भी कदमताल करती नजर आएंगी. राजमाता विजया राजे सिंधिया शासकीय कन्या (अग्रणी) स्नातकोत्तर महाविद्यालय विदिशा की एनसीसी कैडेट्स सार्जेंट दामिनी विश्वकर्मा और लांस कॉरपोरल सिमरन अहिरवार का चयन गणतंत्र दिवस परेड 2026 के लिए हुआ है. बेहद कठिन प्रक्रिया के बाद चयन इन दो बेटियों के चयन से महाविद्यालय के साथ ही पूरे विदिशा जिले में खुशी की लहर है. विदिशा की 14 एमपी बटालियन एनसीसी से कुल 5 कैडेट्स का चयन हुआ है, जिनमें से दो कैडेट्स कन्या महाविद्यालय से होना जिले में बालिका सशक्तिकरण और अनुशासनात्मक प्रशिक्षण की मजबूती को दर्शाता है. कैडेट्स का चयन बेहद कठोर प्रक्रिया के बाद किया गया, जिसमें शारीरिक दक्षता, ड्रिल, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और मानसिक मजबूती की कड़ी परीक्षा ली गई. कम संसाधन के बाद भी छुआ शिखर कैडेट्स सार्जेंट दामिनी विश्वकर्मा बीसीएसी तृतीय वर्ष की छात्रा हैं. वह दीवानगंज क्षेत्र के ग्राम अंबाड़ी की निवासी हैं और कृषक परिवार से आती हैं. वहीं लांस कॉरपोरल सिमरन अहिरवार बीए तृतीय वर्ष की छात्रा हैं, जो विदिशा जिले के दूरस्थ ग्राम नरखेड़ा ताल से संबंध रखती हैं. सिमरन वर्तमान में पोस्ट मैट्रिक छात्रावास विदिशा में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रही हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय मंच तक पहुंचना उनकी मेहनत और आत्मविश्वास का प्रमाण है. लेफ्टिनेंट कर्नल सनी वैद्य का मार्गदर्शन एनसीसी के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल विकास गुप्ता (शौर्य चक्र) एवं प्रशासनिक अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल सनी वैद्य के मार्गदर्शन में दोनों कैडेट्स ने लगातार दो माह तक आरडीसी चयन प्रक्रिया में भाग लिया. विभिन्न प्रशिक्षण शिविरों और कैंपों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद उनका अंतिम चयन हुआ. महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बी.डी. अहिरवार एवं एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट डॉ. विनीता प्रजापति ने इस उपलब्धि को छात्राओं की अनुशासनप्रियता, समर्पण और निरंतर परिश्रम का परिणाम बताया. 

IIT कानपुर के पूर्व छात्रों ने सिल्वर जुबली पर दी ₹100 करोड़ की मदद, संस्थान को मिली ऐतिहासिक सौगात

 कानपुर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के वर्ष 2000 बैच के पूर्व छात्रों ने सिल्वर जुबली पुनर्मिलन समारोह के दौरान संस्थान को 100 करोड़ रुपये की अभूतपूर्व 'महा गुरुदक्षिणा' देने की घोषणा की. यह पहली बार हुआ है कि किसी एक बैच ने एक ही वर्ष में इतना बड़ा योगदान दिया है.  इस राशि का उपयोग संस्थान में 'मिलेनियम स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड सोसाइटी' (MSTAS) की स्थापना के लिए किया जाएगा. इनमोबी और ग्लांस के संस्थापक नवीन तिवारी जैसे प्रमुख दानदाताओं के सहयोग से यह पहल भविष्य की पीढ़ी को उन्नत तकनीकी शिक्षा और शोध के अवसर प्रदान करने हेतु शुरू की गई है. संस्थान के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने इस दान को पूर्व छात्रों और संस्थान के अटूट संबंध का प्रमाण बताया है. यह सहयोग शैक्षणिक और शोध परितंत्र को मजबूत करते हुए तकनीकी विकास के नए रास्ते खोलेगा. पिछले वर्ष भी IIT कानपुर को दाताओं से 265.24 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी स्कूल को अब तक लगभग 500 करोड़ रुपये का दान मिल चुका है. इसमें इंडिगो के संस्थापक राकेश गंगवाल का 108.7 करोड़ रुपये का व्यक्तिगत योगदान भी शामिल है. अन्य संस्थानों में भी दान की परंपरा मजबूत पूर्व छात्रों द्वारा सहयोग की यह लहर सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं है. इसी साल 21 दिसंबर को IIT कानपुर के 1986 बैच ने मानसिक स्वास्थ्य और सामुदायिक सुविधाओं के लिए 11 करोड़ रुपये दिए. इसके अलावा, IIT BHU को पिछले पांच वर्षों में 100 करोड़ रुपये से अधिक का दान मिला है, जिससे लाइब्रेरी और शोध केंद्र जैसे प्रोजेक्ट्स बन रहे हैं. वहीं, MNNIT प्रयागराज में 1998 बैच के सहयोग से अत्याधुनिक स्टूडेंट एक्टिविटी सेंटर का निर्माण हो रहा है.

रायपुर: राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 का उद्घाटन 01 जनवरी को

रायपुर : राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 का 01 जनवरी को होगा शुभारंभ जन-जागरूकता के लिए होंगे विविध कार्यक्रमों का होगा आयोजन 1 जनवरी को रायपुर में बाइक रैली का होगा आयोजन रायपुर लोगों को सड़क सुरक्षा की गंभीरता, चुनौतियों और नियमों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सहित सम्पूर्ण देश में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 का आयोजन 1 से 31 जनवरी 2026 तक किया जा रहा है। इस दौरान राज्य के सभी जिलों में सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत जिलों में सड़क सुरक्षा पर प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्वास्थ्य परीक्षण एवं नेत्र जांच शिविर, स्कूल डे आयोजन, स्कूली बच्चों के लिए स्लोगन, निबंध, चित्रकला एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं, ई-रिक्शा, ऑटो व बस चालकों का प्रशिक्षण, एम्बुलेंस ड्राइविंग ट्रेनिंग, वाहनों की फिटनेस एवं रेडियम स्ट्रिप्स की जांच/संधारण, शराब सेवन कर वाहन चलाने से होने वाले नुकसान पर रैली, ग्राम चौपालों में जन-जागरूकता कार्यक्रम, गंभीर सड़क दुर्घटना स्थलों का चिन्हांकन एवं सड़क सुरक्षा मितानों का प्रशिक्षण जैसे अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त युवाओं के लिए एरोबिक्स-जुंबा के माध्यम से 'स्वस्थ शरीर – स्वस्थ मन, सुरक्षित जन' थीम पर कार्यक्रम, हेलमेट धारी वाहन चालकों को प्रोत्साहन स्वरूप टॉफी वितरण तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विविध गतिविधियां भी आयोजित होंगी। 1 जनवरी 2026 को सर्किट हाउस रायपुर के समीप शाम 5:00 बजे सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष श्री अभय मनोहर सप्रे की उपस्थिति में जनजागरूकता के लिए हेलमेट एवं बाइक रैली का आयोजन किया जाएगा। यह रैली सड़क सुरक्षा नियमों के पालन, हेलमेट उपयोग और सुरक्षित वाहन संचालन का संदेश देगी।  जनजागरूकता के लिए भिलाई में मैराथन का हुआ आयोजन इसी क्रम में रविवार को भिलाई में आयोजित मैराथन को सड़क सुरक्षा छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री संजय शर्मा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मैराथन के उपरांत सड़क सुरक्षा पर आधारित नुक्कड़ नाटक का मंचन भी किया गया, जिसकी लोगों ने सराहना की।

ओंकारेश्वर में नए साल पर भारी भीड़ की संभावना, VIP सुविधाएं अस्थायी रूप से बंद

खंडवा  ओंकारेश्वर नर्मदा पावन क्षेत्र में नर्मदा नदी का प्रत्येक पत्थर-कंकड़ भगवान शिव का ही स्वरूप माना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अटूट विश्वास है कि ओंकारेश्वर नर्मदा में जल के स्पर्श मात्र से पुण्य प्राप्ति होती है। यहां का कण-कण शिवम हैं। यही कारण है कि 12 ज्योतिर्लिंगों में चौथा स्थान पाने वाले ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को केवल एक पल ही निहारने के लिए देश-विदेश से यहां आने वाले श्रद्धालु बेताब रहते हैं। अंग्रेजी नव वर्ष का सैलाब उमड़ने की उम्मीद है। भक्तों का मानना है कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन से कष्ट और सभी संकट नष्ट होते हैं मोक्ष की प्राप्ति होती है। डिप्टी कलेक्टर और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर प्रशासक मुकेश काशिव ने विशेष चर्चा में बताया कि नये साल के पहले दिन करीब एक लाख श्रद्धालुओं के ओंकारेश्वर आने की संभावना है। इस दिन सामान्य द्वार से ही दर्शन कर सकेंगे। प्रोटोकॉल दर्शन की सुविधा बंद रहेगी।  दर्शन के साथ ही आम नागरिकों को दर्शन होंगे। सीढ़ियों की बजाय भक्त ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के रैंप से गुजरकर दर्शन कर सकेंगे। मंदिर प्रशासक मुकेश काशिव ने बताया कि कतार में लगने वाले भक्तों को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन में दो से ढाई घंटे का समय लगेगा। एक समय में चार लोग ही ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर पाते हैं। काशिव के अनुसार बड़ी संख्या में भक्तों के आगमन को देखते हुए व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। दिसंबर अंतिम पखवाड़े से ही भक्तों की भारी भीड़ प्रत्येक दिन आ रही है। प्रशासन का लक्ष्य की देश-विदेश से आने वाले भक्तों को दर्शन और स्नान में किसी तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े। मंदिर ट्रस्ट के सभी कर्मचारी समय-समय पर अपनी सेवाएं देने में लगे हैं। ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पुनासा एसडीएम पंकज वर्मा ने कहा कि वर्तमान में प्रतिदिन 50 हजार से लेकर 60 श्रद्धालु ओंकारेश्वर ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव के दर्शन करने पहुंचे रहे हैं। नये वर्ष 2026 में यह आंकड़ा लाखों को पार कर जाएगा। स्थान की कमी के कारण मंदिर दर्शन करने में समय लगता है, क्योंकि यहां की भौगोलिक स्थिति अन्य तीर्थ स्थान की तरह नहीं है। ओंकार पर्वत पर  पहाड़ी पर भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव का मंदिर सदियों पुराना बना है। इसलिए प्रशासन भी मंदिर में ज्यादा कुछ बदलाव नहीं कर सकता है। कोरोना कल के बाद से लगातार श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंचने की संख्या बहुत ही बड़ी है। ओंकारेश्वर थाना प्रभारी अनोख सिंधिया ने बताया कि पुलिस प्रशासन ने छोटे वाहनों को रोकने के लिए कार पार्किंग सुविधा है। वैसे एक दर्जन स्थानों पर पार्किंग की सुविधा की गई है। प्रतिदिन श्रद्धालु ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के लिए आते हैं। नव वर्ष में भी यह नर्मदा नदी में स्नान के ओंकार पर्वत की परिक्रमा भी लगते हैं। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शनों का अपना महत्व है। हर भक्त यहां आकर दर्शन करने को आतुर रहता है। पुलिस विभाग की कई कंपनियां होमगार्ड के जवान स्थानीय पुलिस बल भी लगाया गया है। ओंकारेश्वर पंडा संघ के अध्यक्ष पंडित नवलकिशोर शर्मा ने बताया कि मान्यता है कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग स्वयंभू यानी खुद प्रगट होने वाला स्वरूप है। इसकी स्थापना से पुरानी कथाएं जुड़ी हैं। एक कथा के अनुसार अयोध्या के इच्छाव्कु वंश के राजा मांधाता में नर्मदा तट पर स्थित पर्वत पर भगवान शिव की कठिन तपस्या की थी। इससे प्रसन्न होकर भगवान शिव इस स्थान पर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। बड़ी संख्या में भक्ति मांधाता दीप ओंकार पर्वत की साथ किलोमीटर लंबी परिक्रमा करने आते हैं। ओंकारेश्वर मंदिर के पंडित निलेश पुरोहित ने बताया कि एक कथा यह भी है कि विंध्याचल पर्वत ने नारद मुनि से शेमारू पर्वत की प्रशंसा सुनी तो खुद की श्रेष्ठता के लिए शिव की आराधना की। उसके बाद शिव ने प्रगट होकर उसे ओंकारेश्वर और ममलेश्वर में विभाजित किया। एक अन्य कथा के अनुसार असुरों से हार जाने के बाद देवताओं ने भगवान शिव की प्रार्थना की। तब भगवान शिवा ओंकारेश्वर स्वरूप में प्रकट होकर असुरों का संहार किया। ओम के आकार के दीप पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थिति है। ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और नर्मदा नदी के स्थान से भी तीर्थ स्नान का पूर्ण मिलता है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मुख्य दीप पर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के दक्षिण तक ब्रह्मपुरी में स्थित है। शास्त्रों में उल्लेख है कि अन्य तीर्थ की यात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक वहां का जल ओंकारेश्वर में अर्पित नहीं किया जाए। मान्यता यह भी है कि भगवान शिव और माता पार्वती हर दिन इस मंदिर में रात्रि विश्राम के लिए आते हैं। इस कारण प्रतिदिन मंदिर में चौपड़ पासे से की बिछात बिछाई जाती है। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में आदि गुरु शंकराचार्य जी की 108 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। इसे देखने भी लोग आते हैं। यह आध्यात्मिक और संस्कृति का केंद्र एकात्माधाम और अद्वैत लोग संग्रहालय बनाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि यहीं शंकराचार्य ने युवा काल में अपने गुरु गोविंद भगवत्पाद से शिक्षा ग्रहण की थी।  

स्वास्थ्य सेवाएं हो रही हैं मजबूत और व्यापक: उप मुख्यमंत्री शुक्ल, प्रदेशवासियों को दी नववर्ष की शुभकामनाएं

स्वास्थ्य मानकों में निरंतर सुधार और स्वास्थ्य सेवाएं हो रही हैं व्यापक एवं सुदृढ़: उप मुख्यमंत्री शुक्ल प्रदेशवासियों को नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं स्वास्थ्य अमले को सतत प्रयासों के लिए दी बधाई, समर्पण के साथ सेवा जारी रखने का किया आह्वान भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने समस्त प्रदेशवासियों को नव वर्ष की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के यशस्वी नेतृत्व में देश वैश्विक मंच पर अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है, भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और "विश्वगुरु" बनने के लक्ष्य के और निकट पहुँच चुका है। इसी राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप मध्यप्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में सशक्त, सक्षम और सुदृढ़ता की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश आज स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और जनकल्याण के क्षेत्र में निरंतर नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर रहा है। स्वास्थ्य मानकों में निरंतर सुधार और स्वास्थ्य सेवाएं व्यापक एवं सुदृढ़ हो रही हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में स्टेट-ऑफ-द-आर्ट चिकित्सा उपकरणों, एमआरआई, सीटी स्कैन, कैथ लैब, लिनियर एक्सेलेरेटर, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, डायलिसिस यूनिट और सुपरस्पेशियलिटी सेवाओं का तीव्र विस्तार किया गया है। चिकित्सा शिक्षा में सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों, एमबीबीएस, पीजी और सुपरस्पेशियलिटी सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे प्रदेश के युवाओं को बेहतर अवसर मिल रहे हैं साथ ही स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ हुई हैं। उज्जैन में अत्याधुनिक मेडिसिटी का विकास किया जा रहा है। महिला एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए प्रतिबद्धता उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सभी गर्भवती माताओं से आग्रह है कि वे अनिवार्य एएनसी जाँच अवश्य कराएँ। हर माह की 9 और 25 तारीख को एएनसी जाँच अवश्य करायें। इससे मातृ और शिशु स्वास्थ्य का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि रक्तदान और अंगदान मानवता की सर्वोच्च सेवा हैं। प्रदेश सरकार इन पुनीत कार्यों को प्रोत्साहित कर रही है। युवाओं और नागरिकों से आह्वान है कि वे आगे आकर रक्तदान व अंगदान के लिए संकल्प लें। एंटीबायोटिक केवल चिकित्सक की सलाह से, निर्धारित मात्रा और अवधि तक ही लें उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर विशेष बल दे रही है। योग, संतुलित आहार, प्राकृतिक खेती से प्राप्त स्वच्छ भोजन और भारतीय जीवनशैली न केवल व्यक्ति को स्वस्थ रखते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। "स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और स्वस्थ पर्यावरण" ही विकसित मध्यप्रदेश की आधारशिला है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट में कई एंटीबायोटिक दवाएँ के कम प्रभावी होने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसका प्रमुख कारण बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का अनावश्यक और गलत उपयोग है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की है कि एंटीबायोटिक केवल चिकित्सक की सलाह से, निर्धारित मात्रा और अवधि तक ही लें। यह सावधानी न केवल आपके स्वास्थ्य, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशनों में क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान, सिकल सेल उन्मूलन मिशन, निक्षय भारत अभियान, स्वस्थ यकृत मिशन, आयुष्मान भारत योजना, नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज नियंत्रण और अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं और आगे भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश के डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ, आशा, एएनएम और सभी स्वास्थ्य कर्मियों की समर्पित सेवा सराहनीय है। उन्होंने स्वास्थ्य अमले को अथक परिश्रम, संवेदनशीलता और सतत प्रयासों के लिए बधाई दी है और इसी समर्पण के साथ सेवा जारी रखने का आह्वान किया है।  

मोहन सरकार की 5 नई पहल: आयुष्मान तर्ज पर इलाज का खर्च कार्ड से सीधे कवर होगा

भोपाल  नए साल 2026 की शुरुआत मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकती है। राज्य सरकार आयुष्मान भारत की तर्ज पर एक नई और बड़ी स्वास्थ्य सुविधा योजना शुरू करने की तैयारी में है, जिससे इलाज के खर्च को लेकर कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही चिंता दूर हो सकेगी। इस प्रस्तावित योजना के तहत प्रदेश के कर्मचारियों और उनके परिवारों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने वाली है। अब तक जहां कर्मचारियों को इलाज का पूरा खर्च पहले खुद उठाना पड़ता था और बाद में प्रतिपूर्ति के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, वहीं नई व्यवस्था में अस्पताल में सीधे कार्ड के जरिए इलाज संभव होगा। हरियाणा और राजस्थान की तरह मध्य प्रदेश में भी सरकारी कर्मचारियों के लिए एक संगठित और कैशलेस स्वास्थ्य बीमा मॉडल लागू करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है। नए साल में मोहन सरकार की 5 बड़ी सौगातें:  1. मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना: कैशलेस इलाज वर्तमान में कर्मचारियों और पेंशनर्स को इलाज का खर्च पहले खुद उठाना पड़ता है और बाद में सरकार की ओर से कुछ राशि लौटाई जाती है. उदाहरण के लिए, लिवर ट्रांसप्लांट का खर्च लगभग 20 लाख रुपए आता है, लेकिन सरकार केवल 4 लाख रुपए देती है। नई योजना में 15 लाख कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिवारों को कैशलेस इलाज मिलेगा। कर्मचारियों के वेतन से 3,000 से 12,000 रुपए तक वार्षिक अंशदान लिया जाएगा, बाकी राशि सरकार वहन करेगी। सामान्य बीमारियों के लिए 5 लाख और गंभीर बीमारियों के लिए 10 लाख रुपए तक इलाज का प्रावधान है। 2. 21 साल बाद सरकारी बस सेवा शुरू अप्रैल 2026 से मध्य प्रदेश में 21 साल बाद फिर से सरकारी बसें दौड़ेंगी. नई व्यवस्था 'जनबस' के नाम से शुरू होगी। 25 जिलों के 6 हजार से ज्यादा रूट पर कुल 10,879 बसें चलेंगी.ई-बसें भी होंगी शामिल नेशनल ई-बस स्कीम के तहत इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में 582 ई-बसें चलाई जाएंगी। ये बसें मौजूदा सिटी बसों से सस्ती होंगी और ग्रामीण इलाकों तथा आदिवासी क्षेत्रों को शहरों से जोड़ेंगी। 3. पेंशन नियम में बदलाव: बेटियों को फायदा अब 25 साल से अधिक उम्र की अविवाहित, विधवा या परित्यक्ता बेटियों को भी परिवार पेंशन का लाभ मिलेगा। यह बदलाव केंद्र सरकार के नियमों के अनुरूप किया गया है और कर्मचारी आयोग की अनुशंसा पर वित्त विभाग की सहमति मिल चुकी है। 4. छुट्टियों का नया कैलेंडर और EL का फायदा 1 जनवरी 2026 से मध्य प्रदेश के 6.5 लाख से ज्यादा कर्मचारियों के लिए 48 साल पुराने अवकाश नियम बदलकर नए नियम लागू होंगे। बीमारी और मातृत्व अवकाश आसान होंगे, रोस्टर अनिवार्य होगा और EL साल में दो बार 1 जनवरी और 1 जुलाई को क्रेडिट होगी। शिक्षकों और प्रोफेसरों को भी 10 दिन की EL मिलेगी। 5. सरकारी नौकरी में दो बच्चों की शर्त खत्म लगभग 24 साल पुराने नियम को हटाकर तीन संतान वाले उम्मीदवारों को भी सरकारी नौकरी में पात्र बनाया जाएगा। पुराने मामलों में अब कार्रवाई नहीं होगी। यह बदलाव मेडिकल एजुकेशन, हेल्थ, स्कूल और उच्च शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए राहत लाएगा।  क्या है ये योजना यह प्रस्तावित मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना राज्य के अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए लाई जा रही है। इसके तहत सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए पांच लाख रुपये तक और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए 10 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने की तैयारी है। योजना में प्रदेश के भीतर और बाहर के चिन्हित निजी अस्पतालों को भी जोड़ा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर बेहतर इलाज मिल सके। कितना देना होगा अंशदान इस योजना के संचालन के लिए कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन व पेंशन से 250 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक का मासिक अंशदान लिया जाएगा। बाकी राशि सरकार द्वारा वहन की जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे इलाज का आर्थिक बोझ काफी हद तक कम होगा और कर्मचारियों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। रिटायर्ड कर्मचारियों के परिवारों को भी मिलेगा लाभ योजना का लाभ स्थायी, अस्थायी और संविदा कर्मचारियों के साथ-साथ रिटायर्ड कर्मचारियों के परिवारों को भी मिलेगा। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, आशा और ऊषा कार्यकर्ता, नगर सैनिक, कोटवार और राज्य की स्वशासी संस्थाओं में काम कर रहे कर्मचारी भी इसके दायरे में शामिल किए जा रहे हैं। अनुमान है कि इस योजना से 15 लाख से ज्यादा लोग सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे, जिससे प्रदेश के लाखों परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा की मजबूत गारंटी मिल सकेगी। एनबीटी डेस्क

मोहन यादव सरकार का बड़ा फैसला: नए साल में बुजुर्गों और दिव्यांगों की पेंशन बढ़ेगी

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार नए साल में प्रदेश के बुजुर्ग, दिव्यांगों को सौगात देने जा रही है. मध्य प्रदेश सामाजिक न्याय विभाग अगले साल से प्रदेश के बुजुर्ग और दिव्यांगों की पेंशन में बढ़ोत्तरी करने जा रही है. सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने इसकी जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि बुजुर्ग और दिव्यांगजनों की पेंशन में बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव विभाग द्वारा वित्त विभाग को भेजा गया है. मुख्यमंत्री भी इसको लेकर गंभीर हैं. आने वाले बजट में पेंशन बढ़ोत्तरी की जाएगी. 54 लाख हितग्राहियों को होगा फायदा सामाजिक न्याय और उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की पिछले दो साल की उपलब्धियां बताने के लिए मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा पत्रकारों से रूबरू हुए. उन्होंने बताया कि "प्रदेश में विधवा, दिव्यांग एवं वृद्धों सहित कुल 54 लाख 21 हजार 863 हितग्राहियों को हर माह 325 करोड़ प्रतिमाह का भुगतान किया जा रहा है. सामाजिक सहायता कार्यक्रम अंतर्गत पेंशन प्राप्त कर रहे कुल 54 लाख से ज्यादा हितग्राहियों का 100 फीसदी आधार के केवाइसी कराया जा चुका है. पेंशन बढ़ाने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि इसका प्रस्ताव विभाग द्वारा भेजा जा चुका है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसको लेकर गंभीर हैं. उभयलिंगी बोर्ड की स्थापना होगी मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने बताया कि प्रदेश में जल्द ही उभयलिंगी बोर्ड की स्थापना की जाएगी. इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. अगले एक हफ्ते में इसका गठन कर लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि प्रदेश में कन्या विवाह और निकाय सम्मेलन के लिए संभागवार वार्षिक चक्रीय रूप से 3 तिथियां बसंत पंचमी, अक्षय तृतीया और तुलसी विवाह और एक अन्य तिथि का कैलेंडर जारी किया गया है. इसके अलावा अनुसूचित जनजाति की परंपराओं को देखते हुए अधिसूचित अनुसूचित क्षेत्र में सामुहिक विवाह कार्यक्रम के लिए 4 तिथियों का कैलेंडर अलग से जारी किया जाएगा. इसके लिए कम से कम 11 जोड़ों और अधिकतम 200 जोड़ों की संख्या निर्धारित की गई है."

हाईवे मुआवजा घोटाले में शिकंजा: ईडी ने रायपुर-विशाखापत्तनम प्रोजेक्ट से जुड़े 10 ठिकानों पर मारा छापा, 40 लाख जब्त

रायपुर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), रायपुर जोनल ऑफिस ने 29 दिसंबर को पीएमएलए, 2002 के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में रायपुर और महासमुंद में दस जगहों पर तलाशी ली। यह तलाशी भारतमाला योजना के तहत रायपुर-विशाखापत्तनम हाईवे प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण में मिले अवैध मुआवजे के मामले में हरमीत सिंह खनूजा और अन्य के आवासीय और आधिकारिक ठिकानों पर की गई। ईडी ने एसीबी/ईओडब्ल्यू, रायपुर द्वारा निर्भय साहू, तत्कालीन एसडीओ (राजस्व), अभनपुर, रायपुर और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। एफआईआर में आरोप है कि आरोपियों ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर रायपुर-विशाखपत्तनम हाईवे प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण में आधिकारिक रिकॉर्ड में हेरफेर करके अवैध मुआवजा प्राप्त किया।  ईडी की जांच में पता चला कि आरोपियों ने कुछ सरकारी कर्मचारियों के साथ आपराधिक साजिश रचकर, भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत अधिग्रहित भूमि के लिए जानबूझकर जमीन के बड़े हिस्सों को छोटे टुकड़ों में परिवार के सदस्यों के बीच बांटकर और पिछली तारीख की एंट्री करके धोखाधड़ी से अतिरिक्त मुआवजा प्राप्त किया। भूमि अधिग्रहण से पहले कई छोटे खेतों को दिखाने के लिए जमीन का यह कृत्रिम विभाजन किया गया था, जिससे अधिक मुआवजे का दावा करने के लिए मुआवजा ढांचे का फायदा उठाया जा सके। राजस्व रिकॉर्ड में इस तरह से हेरफेर किया गया कि ये विभाजन अधिग्रहण प्रक्रिया से पहले हुए थे, जिससे बढ़ी हुई अवैध मुआवजे की राशि स्वीकृत और वितरित हुई। इस तरह प्राप्त अतिरिक्त अवैध मुआवजा अपराध की आय थी। इससे सरकारी खजाने को गलत नुकसान हुआ और आरोपियों को संबंधित गैरकानूनी लाभ हुआ। तलाशी अभियान के दौरान 40 लाख रुपए नकद, डिजिटल उपकरण और विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए। साथ ही, तलाशी अभियान के दौरान अनुसूचित अपराध करने से उत्पन्न पीओसी से शामिल व्यक्तियों के नाम पर अर्जित कई चल और अचल संपत्तियों की पहचान की गई। फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है।

प्रदेश के 52 हजार किसानों के खेत अब लहलहाएंगे सोलर पंप से

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किसानों के हित में किये जा रहे अनेक कल्याणकारी कार्यों से प्रदेश में अन्न उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है। किसानों को खेती के लिये खाद बीज की सहज उपलब्धता के साथ सिंचाई के संसाधन भी उपलब्ध कराये जा रहे है। इसी दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए प्रदेश में 52 हजार किसानों के खेत में सोलर पंप स्थापित करने की योजना प्रारंभ की गई है। सोलर पंप स्थापित हो जाने से अब प्रदेश का किसान अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता भी बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस अभिनव पहल के तहत 34 हजार 600 इकाइयों को लेटर ऑफ अवार्ड जारी कर 33 हजार कार्यदेश जारी किए जा चुके हैं। किसान के खेत में सोलर पम्प स्थापित होने से अब उन्हें विद्युत प्रदाय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। बिजली बिल पर व्यय होने वाली यह राशि अब उनके पास बचत के रूप में रहेगी। इसके अतिरिक्त सोलर पम्प से उत्पादित अतिरिक्त ऊर्जा को किसान सरकार को बेच कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा लगातार किसानों को सोलर प्रोजेक्ट लगाने के लिए विभिन्न योजनाओं में लाभ प्रदान कर सक्षम बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में निरंतर उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 52 हजार किसानों के खेतों में सोलर पम्प लगाने का अभिनव नवाचार किया है प्रदेश में प्रधानमंत्री कुसुम (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्‍थान महाभियान) योजना के द्वारा किसानों के लिये ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। केन्द्र सरकार की इस योजना को प्रदेश में "प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना" के नाम से संचालित किया जा रहा है। इसमें (कुसुम-ब) कृषकों के यहां ऑफ ग्रिड सोलर पम्‍पों की स्‍थापना की जाती है। योजना में किसानों को 1 एच.पी. से 7.5 एच.पी. तक क्षमता के पम्‍प पर 90 प्रतिशत सब्सिडी (अनुदान) दिये जाने का प्रावधान किया गया है। इसमें सभी वर्ग को समान सब्सिडी (अनुदान) प्रदान की जाती है। योजनांतर्गत 1 से 7.5 हार्सपावर तक के सोलर पंप की बेंचमार्क लागत का 30 प्रतिशत अनुदान भारत सरकार द्वारा दिये जाने का प्रावधान है। सोलर पंप की वास्तविक लागत का लगभग 10 प्रतिशत कृषक अंशदान व लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा कृषक ऋण राशि के रूप में लिया जाने का प्रावधान किया गया है, जिसका ब्‍याज सहित भुगतान राज्‍य सरकार द्वारा किया जाएगा। सोलर पंप के द्वारा निर्मित ऊर्जा के दैनिक उपयोग के बाद उत्‍पादित अतिरिक्‍त ऊर्जा के वैकल्पिक उपयोग के लिये भी किसानों को विकल्प दिया जा रहा है। इसका उपयोग नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देश अनुसार किया जा सकेगा। समान क्षमता के यू.एस.पी.सी. युक्‍त पंपों पर बिना यू.एस.पी.सी. (सामान्‍य कन्‍ट्रोलर) के सोलर पंप पर देय अनुदान ही लागू होगा। स्‍थापित सोलर पम्‍पों के, 5 वर्ष तक रख-रखाव की जिम्‍मेदारी, संबंधित स्‍थापनाकर्ता इकाई की है। योजना की विस्‍तृत जानकारी निगम की वेबसाईट cmsolarpump.mp.gov.in पर उपलब्‍ध है। योजना में मंदसौर, नीमच, बैतूल,भिंड, सागर, शाजापुर, जबलपुर, अशोकनगर, भोपाल एवं सीहोर जिलों में कृषकों के यहाँ सोलर पम्पों की स्थापना का कार्य प्रारम्भ किया जा चुका है। प्रमुख बिन्दु     प्रदेश में प्रधानमंत्री कुसुम-बी (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्‍थान महाभियान) योजना के द्वारा किसानों के लिये की जा रही ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित।     प्रदेश में प्रधानमंत्री कुसुम-बी योजना "प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना" के नाम से संचालित     किसानों को अन्नदाता के साथ ही ऊर्जा दाता बनाने की दिशा में कार्य जारी।     प्रदेश के 33 हजार किसान के खेतों में सोलर पंप स्थापना के लिए कार्यादेश जारी।     सोलर पंप स्थापना के लिए 34 हजार 600 लेटर ऑफ अवॉर्ड, इकाइयों को प्रदान किये गये।     52 हजार किसानों को योजना से लाभान्वित करने का लक्ष्य होगा पूर्ण।     किसानों को 1 एच.पी. से 7.5 एच.पी. तक क्षमता के पम्‍प पर 90 प्रतिशत सब्सिडी (अनुदान) दिये जाने का प्रावधान।     सभी वर्गों के लिये समान सब्सिडी (अनुदान) व्यवस्था।     योजना में 1 से 7.5 हॉर्स पॉवर तक के सोलर पंप की बेंचमार्क लागत का 30 प्रतिशत अनुदान भारत सरकार द्वारा।     सोलर पंप की वास्तविक लागत का लगभग 10 प्रतिशत कृषक अंशदान।     लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा कृषक ऋण राशि के रूप में, जिसका ब्‍याज सहित भुगतान राज्‍य सरकार द्वारा।     योजना में मंदसौर, नीमच, बैतूल,भिंड, सागर, शाजापुर, जबलपुर, अशोकनगर, भोपाल एवं सीहोर जिलों में कृषकों के यहाँ सोलर पम्पों की स्थापना का कार्य प्रारम्भ।     जानकारी निगम की वेबसाईट cmsolarpump.mp.gov.in पर उपलब्‍ध।  

कामकाज में ढिलाई पड़ी भारी! हरियाणा के 2000 अधिकारियों को मिली अंतिम चेतावनी

चंडीगढ़ हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी प्रशासनिक सचिवों को निर्देश दिए हैं कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20(1) के तहत राज्य जन सूचना अधिकारियों (एसपीआइओ) पर लगाए गए दंड की शीघ्र वसूली सुनिश्चित की जाए। करीब दो हजार अधिकारी ऐसे हैं, जिन पर राज्य सूचना आयोग ने जुर्माना लगाया, लेकिन वह जुर्माना जमा नहीं करा रहे हैं। समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि यह दंड संबंधित एसपीआइओ से मासिक किस्तों में सीधे वसूल किया जाए। अनुराग रस्तोगी ने कहा कि शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आरटीआइ अधिनियम के प्रविधानों का सख्ती से पालन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने दोहराया कि आरटीआइ आवेदनों का समयबद्ध निपटारा और वैधानिक समय सीमा का पालन सभी विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि अधिनियम की भावना को सुदृढ़ किया जा सके और प्रशासन पर जन विश्वास मजबूत हो। हरियाणा में सूचना का अधिकार के तहत अधिकारी-कर्मचारी एक तो सूचना ठीक ढंग से नहीं देते, ऊपर से जुर्माना भी नहीं जमा करवा रहे हैं। इन अधिकारियों पर करीब 10 साल से जुर्माना पेंडिंग है। मुख्य सचिव ने राज्य सूचना आयोग को मासिक रिपोर्ट भी देने की बात कही है। मुख्य सचिव ने विभागों से कहा कि अगर किसी विभाग को वसूली में सहायता की आवश्यकता हो तो वे राज्य सूचना आयोग के रजिस्ट्रार से संपर्क कर सकते हैं।   हरियाणा में ऐसे 1953 अधिकारी शामिल हैं। जिन पर चार हजार से लेकर 25 हजार रुपए तक का जुर्माना बकाया है। सबसे ज्यादा पंचायत विभाग के 600 अधिकारियों ने जुर्माना राशि जमा नहीं कराई। जबकि स्थानीय शहरी के 500 तो शिक्षा विभाग के 200 अधिकारियों पर जुर्माना बाकी है। वहीं खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, वन विभाग, एचएसवीपी, अर्बन एस्टेट, राजस्व, सेवा, परिवहन विभाग समेत कई विभागों के कई अधिकारियों ने अभी तक जुर्माने की राशि जमा नहीं कराई है।