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पंचायत का फरमान: गांव की बेटी से विवाह करने पर भुगतना होगा अंजाम

फतेहाबाद गांव ब्राह्मणवाला में शुक्रवार को हुई पंचायत में पंचों ने अहम फैसला सुनाया है। पंचायत में निर्णय लिया गया है कि सामाजिक बुराई से गांव को बचाने के लिए लोगों को आगे आना होगा। पंचायत ने निर्णय लिया कि भविष्य में अगर गांव का कोई भी युवक गांव की ही युवती या बहू से शादी करेगा तो उसे गांव में नहीं रहने दिया जाएगा। पंचायत के फैसले के विरुद्ध वह फिर भी गांव में रहता है तो किसी भी अनहोनी के लिए वह स्वयं जिम्मेदार होगा। गांव के सरपंच प्रतिनिधि जीवन सिंह ने बताया कि समाज का नैतिक पतन हो रहा है। इसी को देखते हुए पंचायत कर सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया है कि गांव की मर्यादा बनी रहे। पंचायत में ग्रामीणों ने कहा कि अक्सर देखा जा रहा है कि गांव के युवक गांव की ही बहू-बेटियों के साथ प्रेम प्रसंग व अन्य कारणों के साथ गुपचुप शादी कर रहे हैं, जिससे समाज में गलत विचारधारा पनप रही है। इसी के मद्देनजर ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि गांव का कोई भी युवक गांव की बहू-बेटी से शादी नहीं करेगा और ऐसा करने वाले व्यक्ति को अपनी पत्नी सहित गांव से बाहर रहना होगा। पंचायत के फैसले के विरुद्ध प्रेमी जोड़ों का सहयोग करने वालों को भी नहीं बख्शा जाएगा। पंचायत में ग्रामीण जगतार सिंह, जग्गा सिंह, गुरतेज पाल सिंह, रेशम सिंह, हेमराज आदि मौजूद रहे।     

बीयर का बोलबाला, मध्य प्रदेश में पियक्कड़ों की पहली पसंद बनी ठंडी बीयर

भोपाल मध्य प्रदेश में शराब पीने का तरीका बदल गया है। अब लोग 'ठंडी बीयर' सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं। यह देसी दारू और IMFL (इंडियन-मेड फॉरेन लिकर) दोनों से आगे निकल गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बीयर की बिक्री IMFL से तीन गुना ज्यादा है, जबकि देसी दारू की बिक्री IMFL से दोगुनी है, लेकिन बीयर से कम है। एमपी में बीयर का प्रेम बढ़ा यह बदलाव पिछले पांच सालों में आया है। 2021-22 तक, एमपी में देसी दारू की बिक्री सबसे ज्यादा होती थी। लेकिन अब बीयर की खपत हर साल बढ़ रही है और पिछले तीन सालों से यह सबसे ऊपर है। बीयर के बाद, एमपी में सबसे ज्यादा देसी दारू पी जाती है। 2020-21 में देसी दारू की 899.16 लाख प्रूफ लीटर बिक्री हुई थी, जो 2024-25 में बढ़कर 1522.76 लाख प्रूफ लीटर हो गई। 2025-26 में नवंबर तक 921.79 लाख प्रूफ लीटर देसी दारू की खपत हो चुकी थी। पांच सालों में दोगुनी हुई अंग्रेजी खपत IMFL की बिक्री भी पिछले पांच सालों में दोगुनी हुई है, लेकिन यह बीयर और देसी दारू से कम है। 2020-21 में IMFL की 420.65 लाख प्रूफ लीटर बिक्री हुई थी, जो 2024-25 में बढ़कर 720.75 लाख प्रूफ लीटर हो गई। 2025-26 में नवंबर तक 555.90 लाख प्रूफ लीटर IMFL की खपत हुई। 2020-21 और 2021-22 में देसी दारू की बिक्री क्रमशः 899.16 लाख प्रूफ लीटर और 1020.50 लाख प्रूफ लीटर थी। वहीं, इसी दौरान बीयर की बिक्री 840.77 लाख बल्क लीटर और 962.42 लाख बल्क लीटर थी। विधानसभा में मंत्री ने दी जानकारी यह जानकारी डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 18 दिसंबर को राज्य सरकार के दो साल पूरे होने पर दी। शराब की बिक्री बढ़ने से सरकार के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। 2020-21 में आबकारी विभाग का राजस्व 9520.96 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 15254 करोड़ रुपये हो गया।

दुनिया में घटे गिद्ध, पन्ना में बढ़ी उड़ान, पर्यावरण के लिए अच्छी खबर

पन्ना  देश और दुनिया में गिद्धों की संख्या लगातार घटती जा रही है, लेकिन इसके विपरीत दक्षिण पन्ना वनमंडल अंतर्गत पवई क्षेत्र के जंगलों में गिद्धों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही पेंटेड स्टार्क और दुर्लभ ब्लैक स्टार्क जैसे पक्षियों की मौजूदगी भी बढ़ी है, जिसे पर्यावरण और जैव विविधता के लिहाज से बेहद सुखद संकेत माना जा रहा है। शीत ऋतु के आगमन के साथ ही दक्षिण पन्ना वनमंडल की पवई रेंज में प्रवासी पक्षियों की सक्रियता देखी जा रही है। हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर यूरेशियन ग्रिफॉन और हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध, पेंटेड स्टार्क तथा दुर्लभ ब्लैक स्टार्क यहां पहुंचे हैं। ये प्रवासी पक्षी आगामी लगभग तीन माह तक पवई के घने जंगलों में प्रवास करेंगे। यूरोपीय गिद्धों की मौजूदगी भी दर्ज की गई वन विभाग के अनुसार, यूरेशियन ग्रिफॉन गिद्ध कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और मध्य एशिया से, जबकि हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध हिमालय, तिब्बत और मध्य चीन क्षेत्र से लंबी यात्रा कर पवई पहुंचे हैं। सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि पवई के जंगलों में यूरोपीय गिद्धों की मौजूदगी भी दर्ज की गई है, जो हजारों किलोमीटर की यात्रा कर यहां तक पहुंचे हैं। सुरक्षित और अनुकूल आवास बनकर उभरा है वन विभाग द्वारा किए जा रहे संरक्षण प्रयासों और सतत वन प्रबंधन के चलते दक्षिण पन्ना वनमंडल प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित और अनुकूल आवास बनकर उभरा है। यह क्षेत्र की जैव विविधता की समृद्धि को दर्शाने के साथ-साथ गिद्ध संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक और उत्साहजनक संकेत है।  

मध्य प्रदेश की अहम रेल लाइन: तीन जिलों को जोड़कर इंदौर से जबलपुर का सफर होगा आसान

इंदौर इंदौर के मांगलिया क्षेत्र में इंदौर-बुधनी रेल लाइन का कार्य प्रारंभ हो गया है। यहाँ के खेतों और खलिहानों में रेलवे के लिए ब्रिज, अंडरपास तथा ट्रैक का निर्माण किया जा रहा है। कुल 205 किलोमीटर लंबी इस लाइन के बन जाने से एक हजार से अधिक कस्बे और गाँव सीधे तौर पर रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। तय समयसीमा की तुलना में यह कार्य काफी पिछड़ चुका है, परंतु अब पूरी लाइन को पूर्ण करने का लक्ष्य वर्ष 2030 निर्धारित किया गया है। इंदौर, देवास और सीहोर जैसे तीन जिलों को जोड़ने वाली यह मध्य प्रदेश की एक बड़ी रेल परियोजना है, जो इंदौर से जबलपुर के बीच की दूरी को कम करेगी। जिन गांवों से यह लाइन गुजर रही है, वहाँ के किसान इस योजना का विरोध कर रहे थे। इस कारण प्रोजेक्ट के प्रारंभ होने में कई बाधाएं आईं, लेकिन अब अधिकांश गांवों में भू-अर्जन की प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है और निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है। इस परियोजना का सर्वाधिक विरोध पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विधानसभा क्षेत्र में देखा गया था। इंदौर-बुधनी रेल परियोजना में हो रहे विलंब का विषय लोकसभा में भी उठाया जा चुका है। इंदौर के मांगलिया गाँव और बुधनी के बीच इस नई रेल लाइन के कार्य को 3261.82 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति दी गई है। इस बार के रेल बजट में इस प्रोजेक्ट के लिए सर्वाधिक राशि का प्रावधान किया गया है। अब तक इस परियोजना पर लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं, जिसमें से अधिकांश राशि मुआवजे के वितरण में खर्च हुई है। सांसद शंकर लालवानी के अनुसार अधिकारियों को निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं और रेलवे की समीक्षा बैठकों में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा है।    प्रोजेक्ट से फायदा यह फायदा – इंदौर से मुंबई और दक्षिण भारत के यात्रा समय में कमी आएगी। – भोपाल और इटारसी के व्यस्त मार्ग (घाट सेक्शन बुदनी से बरखेड़ा ) को बायपास कर बुधनी को इंदौर से सीधे जोड़ना। – यह रेल लाइन बुधनी के मौजूदा यार्ड से शुरू होकर इंदौर के पास पश्चिम रेलवे के मांगलिया गांव स्टेशन से जुड़ेगी। – रेल लाइन सीहोर, देवास एवं इंदौर जिलों को जोड़ेगी। किसानों को अपनी उपज बड़े शहरों तक लाने में आसानी होगी। – यह रेललाइन नसरुल्लागंज, खातेगांव और कन्नौद जैसे कस्बों व गांवों को जोड़ेगी। इन क्षेत्रो में अभी वर्तमान में कोई रेल संपर्क नहीं हैं।    

क्लासरूम से टीवी की हॉट सीट तक, विभा चौबे बनीं छत्तीसगढ़ की पहली महिला शिक्षिका केबीसी में

 सरगुजा  छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की एक साधारण-सी शिक्षिका ने अपनी मेहनत, ज्ञान और आत्मविश्वास के दम पर असाधारण मुकाम हासिल कर जिले ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है. सरगुजा जिले की रहने वाली शिक्षिका विभा चौबे देश के सबसे प्रतिष्ठित क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) की हॉट सीट तक पहुंचने वाली जिले की पहली महिला बन गई हैं. इतना ही नहीं, विभा चौबे छत्तीसगढ़ की पहली महिला शिक्षिका होंगी, जो KBC के मंच पर हॉट सीट पर बैठकर खेलती हुई नजर आएंगी. वर्षों की तैयारी, निरंतर प्रयास और ज्ञान के बल पर उन्होंने यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. विभा चौबे का KBC एपिसोड 31 जनवरी को प्रसारित किया जाएगा.  केबीसी की तैयारी सालों की मेहनत का नतीजा विभा चौबे ने बातचीत में बताया कि केबीसी में पहुंचने की तैयारी वह काफी समय से कर रही थीं. जैसे ही केबीसी के लिए रजिस्ट्रेशन लाइन खुलती है, तुरंत आवेदन करना होता है. इसके बाद आईबीआर कॉल और ऑडिशन जैसी कठिन प्रक्रियाओं से गुजरकर ही प्रतिभागी शो तक पहुंच पाते हैं. अमिताभ बच्चन से मुलाकात सादगी ने किया प्रभावित महानायक अमिताभ बच्चन से मुलाकात के अनुभव को साझा करते हुए विभा चौबे ने कहा कि वह पल उनके लिए बेहद खास और अविस्मरणीय था. उन्होंने बताया कि अमिताभ बच्चन बिल्कुल एक सामान्य व्यक्ति की तरह मिलते हैं. उनसे मिलकर यह एहसास ही नहीं होता कि वह इतने बड़े सुपरस्टार हैं. वह प्रतिभागियों की पृष्ठभूमि, शहर और संस्कृति के बारे में जानने में गहरी रुचि रखते हैं और पूरे मन से बातचीत करते हैं. प्रतिभागियों को सहज बनाते हैं बिग बी विभा चौबे ने बताया कि अमिताभ बच्चन प्रतिभागियों को बेहद सहज महसूस कराते हैं, जिससे बिना झिझक खुलकर बातचीत हो पाती है। वह न सिर्फ प्रेरणा देते हैं, बल्कि उनके व्यवहार से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। 83 की उम्र में भी अनुशासन और ऊर्जा की मिसाल विभा ने कहा कि 83 वर्ष की उम्र में भी अमिताभ बच्चन का अनुशासन और मेहनत काबिले-तारीफ है. वह सेट पर रोज 10 से 12 घंटे तक मौजूद रहते हैं, लेकिन उनके चेहरे पर कभी थकान नजर नहीं आती. विभा चौबे ने बताया कि उन्होंने कभी अमिताभ बच्चन को मोबाइल का इस्तेमाल करते नहीं देखा, वह पूरी तरह अपने काम और दर्शकों से जुड़े रहते हैं. शिक्षिका होने के साथ केबीसी की चुनौतीपूर्ण तैयारी एक शिक्षिका होने के नाते केबीसी की तैयारी आसान नहीं थी। विभा चौबे ने बताया कि परिवार, बच्चों, नौकरी और शहर से दूर पोस्टिंग के बावजूद उन्होंने अपने सपने को कभी छोड़ा नहीं. उनका मानना है कि जब किसी लक्ष्य को लेकर सच्चा जुनून हो, तो इंसान उसके लिए समय निकाल ही लेता है. पुराना सपना, लगातार प्रयास जानिए विभा चौबे ने बताया कि केबीसी शुरू होने के समय से ही उनका सपना था कि वे इस मंच पर पहुंचें. शुरुआती दौर में एसटीडी-पीसीओ से सवाल पूछे जाते थे, लेकिन कंप्यूटर की जानकारी न होने के कारण वह सही जवाब नहीं दे पाईं। इसके बावजूद उनका प्रयास लगातार जारी रहा. 2022 से 2024 तक नहीं मिला मौका विभा ने बताया कि 2022 में उन्हें आईबीआर कॉल आया, लेकिन ऑडिशन कॉल नहीं मिली. 2023 में भी मौका हाथ नहीं लगा. 2024 में फिर आईबीआर कॉल आया, लेकिन ऑडिशन तक बात नहीं बन सकी।लगातार तीन साल निराशा के बाद भी उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी. 2025 में पूरा हुआ सपना साकार आखिरकार 2025 में उन्हें ऑडिशन और शो में जाने का अवसर मिला. पहली कॉल आने का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उस खुशी को शब्दों में बयां करना मुश्किल है. पूरे परिवार में खुशी का माहौल था. 3 करोड़ में से चुना जाना बड़ी उपलब्धि विभा चौबे ने बताया कि इस साल करीब 3 करोड़ लोगों ने केबीसी के लिए रजिस्ट्रेशन किया था, जिनमें से बहुत कम लोगों को ही कॉल आती है. ऐसे में चुना जाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है. शो का अनुभव: बिना घबराहट के दिए जवाब शो के अनुभव पर उन्होंने बताया कि हॉट सीट पर बैठते समय उन्हें किसी तरह की घबराहट नहीं हुई, क्योंकि वह पूरी तैयारी के साथ गई थीं. उन्होंने तीनों लाइफलाइन का इस्तेमाल किया. 12 सवाल सही, 13वें पर किया क्विट जानिए कैसे विभा चौबे ने बताया कि उन्होंने कुल 12 सवालों के सही जवाब दिए और संदूक राउंड में 9 प्रश्नों के उत्तर सही दिए. एक सवाल चूकने के कारण अमिताभ बच्चन के साथ डिनर का मौका नहीं मिल सका. उन्होंने 13वें सवाल पर क्विट करने का फैसला किया. हॉट सीट पर दिल खोलकर बातचीत जानिए प्रसारण से पहले होने के कारण उन्होंने सवालों का खुलासा नहीं किया, लेकिन यह जरूर बताया कि हॉट सीट पर बैठकर अमिताभ बच्चन जी से दिल खोलकर बातचीत करने का अनुभव उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा.

भोपाल स्टडी में चौंकाने वाले नतीजे, भारतीय राग गंभीर बीमारियों में भी दे रहे राहत

भोपाल  भारतीय शास्त्रीय संगीत की आत्मिक ध्वनियां अब सिर्फ भावनाओं तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने विज्ञान की प्रयोगशाला में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। एम्स भोपाल के फिजियोलॉजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. वरुण मल्होत्रा की समीक्षा आधारित स्टडी ने यह साबित किया है कि भारतीय क्लासिकल राग न सिर्फ मस्तिष्क को शांत और सक्रिय रखते हैं, बल्कि दिल को स्वस्थ, सांसों को संतुलित और तनाव को नियंत्रित करने की क्षमता भी रखते हैं। अध्ययन में शामिल 28 शोधपत्रों और 6 विशेषज्ञों के सहयोग ने यह बताया कि संगीत, विशेष रूप से राग, हमारे शरीर में ऐसे हार्मोन सक्रिय करते हैं जो दर्द घटाते और मन को संतुलित रखते हैं। यह शोध रागों को केवल कला नहीं, बल्कि विज्ञान आधारित थेरेपी के रूप में सामने रखने का काम करता है। दिल पर भी दिखते हैं बेहतर रिजल्ट डॉ. मल्होत्रा बताते हैं कि संगीत सुनते समय दिल की धड़कन (हार्ट रेट) स्वाभाविक रूप से ऊपर–नीचे होती है। यह बदलाव दिल की “एक्सरसाइज” की तरह काम करता है। यदि पल्स लगातार एक समान रहे तो सडन कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ता है, लेकिन संगीत सुनने पर रिदमिक बदलाव दिल को मजबूत बनाते हैं। राग से होने वाले असर     तनाव घटता है     फोकस बढ़ता है     भावनात्मक संतुलन बनता है     नशा छुड़ाने में मदद मिलती है     न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में रिकवरी तेज होती है राग सिर्फ संगीत नहीं एक विज्ञान है डॉ. वरुण मल्होत्रा बताते हैं कि राग की मूल परिभाषा ही यह है कि जो मन को आनंद के रंग से भर दे, वही राग है। हर राग का एक व्यक्तित्व होता है, एक प्रभाव होता है। कुछ राग मन को शांत करते हैं, कुछ ऊर्जा बढ़ाते हैं, जबकि कुछ दिमाग के गहरे हिस्सों को सक्रिय कर हीलिंग की प्रक्रिया तेज करते हैं। राग के स्वर दिमाग के उन हिस्सों को सक्रिय करते हैं जो मूड, हॉर्मोन, याददाश्त, फोकस और दर्द नियंत्रण को संभालते हैं। स्वर कंपन (vibrations) ब्रेन सेल्स में माइक्रो-एक्टिवेशन करते हैं। राग सुनने से एंडॉर्फिन और एनकेफेलिन जैसे प्राकृतिक दर्द-निवारक हार्मोन एक्टिव होते हैं, जो शरीर में हीलिंग की गति तेज कर देते हैं। एंडॉर्फिन है नैचुरल मूड-लिफ्टर एंडॉर्फिन हमारे शरीर में बनने वाले प्राकृतिक हॉर्मोन हैं, जो दर्द, तनाव या टेंशन होने पर दिमाग से रिलीज होते हैं। इन्हें शरीर का “फील-गुड केमिकल” भी कहा जाता है, क्योंकि ये दर्द कम करते हैं, स्ट्रेस घटाते हैं और मूड को खुश रखते हैं। जब आप एक्सरसाइज करते हैं, हंसते हैं, पसंदीदा खाना खाते हैं, सेक्स करते हैं या मसाज लेते हैं, तब एंडॉर्फ़िन बढ़ते हैं। यही वजह है कि ऐसी गतिविधियों के बाद मन हल्का और अच्छा महसूस होता है। शरीर को हेल्दी और मानसिक रूप से स्ट्रॉन्ग रखने में एंडॉर्फ़िन की बड़ी भूमिका होती है। एनकेफेलिन दर्द भगाने वाला केमिकल एनकेफेलिन एक प्राकृतिक न्यूरोपेप्टाइड है, जो हमारे दिमाग और नर्वस सिस्टम में बनता है। यह शरीर के अंदर ओपिओइड रिसेप्टर्स से जुड़कर दर्द कम करने में मदद करता है, इसलिए इसे नेचुरल एनाल्जेसिक यानी प्राकृतिक पेनकिलर कहा जाता है। यह तनाव और भावनाओं को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है, जिससे मन शांत रहता है। एनकेफेलिन पांच अमीनो एसिड से बना होता है और मुख्य रूप से ब्रेन में पाया जाता है। जब शरीर दर्द, चोट या तनाव महसूस करता है, तब एनकेफेलिन तुरंत सक्रिय होकर राहत देता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)  न्यूरोसाइंस अध्ययन ने यह सिद्ध किया है कि भारतीय राग न केवल मन को छूते हैं, बल्कि मस्तिष्क की गहराई में भी स्पष्ट और मापनीय बदलाव उत्पन्न करते हैं। यूएसए के फ्रंटियर्स इन ह्यूमन न्यूरोसाइंस में प्रकाशित इस शोध का नेतृत्व आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने किया है। इसमें आईआईटी कानपुर के शोधार्थियों का भी सहयोग रहा। अध्ययन में आधुनिक ईईजी माइक्रोस्टेट विश्लेषण तकनीक का उपयोग कर 40 प्रतिभागियों के मस्तिष्क की प्रतिक्रिया को विश्लेषित किया गया। यह तकनीक मस्तिष्क की बहुत ही सूक्ष्म और क्षणिक स्थितियों को रिकॉर्ड करती है, जिससे विज्ञानी यह समझ पाए कि कौन-से राग मस्तिष्क की किन गतिविधियों को सक्रिय या शांत करते हैं। न्यूरो सर्जरी में भी बेहतर रिजल्ट न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. अमित अग्रवाल की स्टडी में यह पाया गया कि सर्जरी के दौरान और बाद में म्यूजिक सुनने से मरीजों की रिकवरी बेहतर होती है। उनका फोकस, सहयोग और मानसिक स्थिरता बढ़ती है, जिससे उपचार तेज होता है। मशीन बताती है दिमागी कितना सक्रिय? एम्स में एक विशेष रूसी तकनीक आधारित न्यूरो–चेक मशीन है, जिसकी कीमत लगभग ढाई लाख रुपए है। यह मशीन सिर्फ 5 मिनट में यह बता देती है कि व्यक्ति के दिमाग का कौन सा हिस्सा ज्यादा सक्रिय है, दैनिक ऊर्जा स्तर कब हाई या लो होता है और उसकी सांसों का पैटर्न कैसा है। निजी अस्पतालों में यही टेस्ट 25,000 रुपए तक में होता है, जबकि एम्स में यह मुफ्त है। संगीत सुनने से इस टेस्ट में दिल और दिमाग दोनों में सुधार दर्ज हुआ। 40 से 45 मिनट सुनना चाहिए डॉ. मल्होत्रा कहते हैं कि राग बच्चों में ध्यान, भावनात्मक संतुलन और मानसिक विकास को तेज करते हैं। यह कला ही नहीं, एक वैज्ञानिक तरीका है, जो बच्चों को बेहतर जीवन, बेहतर करियर और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य देता है। 40–45 मिनट सुनने पर नींद, बीपी और फोकस में सुधार आता है।

स्मार्ट मीटरिंग और निगरानी से मजबूत हुई बिजली वितरण प्रणाली

15,26,801 डीटी मीटर स्वीकृत, 2,29,898 स्थापित, बिजली वितरण प्रणाली में तकनीकी मजबूती 25,224 फीडर मीटर  स्थापित, फीडर स्तर पर निगरानी से लाइन लॉस पर नियंत्रण लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ऊर्जा के क्षेत्र में जिस गति और स्तर पर तकनीकी परिवर्तन का साक्षी बन रहा है, वह न केवल प्रदेश का बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बनता जा रहा है। वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था में स्मार्ट मीटरिंग के जरिए पारदर्शिता, दक्षता और उपभोक्ता हितों के संरक्षण का वर्ष साबित हुआ है। यूपी में अब तक लगभग 68,24,654 (68 लाख, 24 हजार, 654) स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश लगातार अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा रहा है। अभी तक प्रदेश में पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत 3,20,187 सौर ऊर्जा इंस्टॉलेशन हो चुके हैं। यही नहीं यूपी सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में सुधार को प्राथमिकता देते हुए उपभोक्ताओं के हितों को केंद्र में रखकर काम किया है। डिजिटल तकनीक आधारित ‘स्मार्ट मीटरिंग प्रोजेक्ट’ के अंतर्गत न केवल बिजली वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आई है, बल्कि राजस्व संग्रहण में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्मार्ट मीटरिंग से पारदर्शिता और नियंत्रण उत्तर प्रदेश में 3,09,78,280 (3 करोड़, 9 लाख 78 हजार 280) स्मार्ट मीटर स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें से 68,24,654 (68 लाख 24 हजार 654) मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। प्रदेश सरकार ने बिजली उपभोग को डिजिटल रूप से ट्रैक करने और बिलिंग प्रक्रिया को सटीक बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। स्मार्ट मीटरों से उपभोक्ताओं को सटीक बिलिंग, वास्तविक खपत का आकलन और बिजली चोरी पर अंकुश जैसे अनेक लाभ मिल रहे हैं। पहले जहां अनुमान आधारित बिलिंग से उपभोक्ताओं को शिकायतें रहती थीं, वहीं अब वास्तविक उपयोग के आधार पर पारदर्शी बिल मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई बार कहा है, “स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम न केवल तकनीकी सुधार है, बल्कि उपभोक्ता के प्रति जवाबदेही का प्रतीक भी है।” डीटी मीटरों से बिजली वितरण में सुधार बिजली वितरण को और अधिक व्यवस्थित और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए योगी सरकार ने डिस्ट्रिब्यूशन ट्रांसफॉर्मर (डीटी) मीटरिंग पर विशेष ध्यान दिया है। अब तक 15,26,801 (15 लाख 26 हजार 801) डीटी मीटर स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 2,29,898 (2 लाख 29 हजार 898) मीटर स्थापित हो चुके हैं। यह व्यवस्था हर ट्रांसफॉर्मर पर बिजली के प्रवाह और खपत की निगरानी को सटीक बनाती है। डीटी मीटर से यह पता लगाना आसान होता है कि किन क्षेत्रों में बिजली की हानि सबसे अधिक है और कहां पर तकनीकी सुधार की आवश्यकता है? इस तकनीक के माध्यम से बिजली चोरी में कमी आई है और लाइन लॉस कम हो रहा है। फीडर मीटरिंग से मजबूत हुआ बिजली आपूर्ति नेटवर्क उत्तर प्रदेश में बिजली नेटवर्क को सशक्त बनाने के लिए 25,224 फीडर मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक फीडर स्तर पर बिजली आपूर्ति और उपभोग का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध रहे। फीडर मीटरिंग से आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और ग्रामीण व शहरी दोनों इलाकों में बिजली वितरण की विश्वसनीयता बढ़ी है। उपभोक्ताओं के हित में तकनीक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार का लक्ष्य केवल तकनीकी उन्नयन ही नहीं, उपभोक्ताओं के हितों को भी सशक्त बनाना है। स्मार्ट मीटर से अब उपभोक्ता अपने मोबाइल या ऑनलाइन पोर्टल के जरिए बिजली उपयोग का रियल टाइम डेटा देख सकते हैं। इससे बिलिंग विवाद घटे हैं और उपभोक्ता अपनी खपत पर खुद नियंत्रण रख पा रहे हैं। साथ ही भुगतान प्रणाली को भी ऑनलाइन और पारदर्शी बनाकर सरकार ने डिजिटल इंडिया के विजन को दृढ़ता प्रदान करने का काम किया है। बिजली बिल राहत योजना का उपभोक्ताओं को मिल रहा लाभ  बिजली बिल राहत योजना में 16 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं ने पंजीकरण कराया है। 1323 करोड़ की राजस्व धनराशि प्राप्त हुई। सबसे अधिक पूर्वांचल डिस्काम में 6 लाख से ज्यादा पंजीकरण हुआ है।

अरावली पर्वतमाला हमारी अमूल्य धरोहर: अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई के लिए विशेष अभियान की घोषणा

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि अरावली पर्वतमाला प्रदेश की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर है और राज्य सरकार इसके संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट रुख है कि अरावली के स्वरूप के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए अरावली जिलों में वन एवं पर्यावरण, खान तथा पुलिस सहित संबंधित विभागों की ओर से संयुक्त अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय से इस संबंध में कड़ी कार्रवाई करें। शर्मा ने शनिवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित वन एवं पर्यावरण और खान विभाग की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अरावली क्षेत्र में किसी भी प्रकार के नए खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस संबंध में केन्द्र सरकार की ओर से भी निर्देश जारी किए गए हैं। ये निर्देश पूरे अरावली भू-भाग पर समान रूप से लागू होंगे। इससे पर्वत श्रंृखला के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखा जा सकेगा और अनियमित व अवैध खनन पर प्रभावी रूप से रोक लग सकेगी।   मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने खनन लीज जारी करने में सुप्रीम कोर्ट और सीईसी द्वारा समय-समय पर जारी की गई गाइडलाइंस के साथ ही सभी पर्यावरण सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा कि अरावली पर्वतमाला को हरा-भरा बनाने के लिए 250 करोड़ रुपये की हरित अरावली विकास परियोजना बनाई गई है। परियोजना के तहत अरावली जिलों के 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सघन वृक्षारोपण करवाया जा रहा है। बैठक में मुख्यमंत्री कार्यालय, वन एवं पर्यावरण तथा खान विभाग के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

अनुभव पर भरोसा: रिटायर्ड IAS अधिकारी को मिली अहम भूमिका, अधिसूचना जारी

चंडीगढ भारत सरकार ने एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें रिटायर्ड इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) ऑफिसर श्री आर. एस. वर्मा को स्टेट एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (SEIAA), हरियाणा का मेंबर अपॉइंट किया गया है। श्री आर. एस. वर्मा के पास BA, LLB, और MBA की डिग्री है और हरियाणा सरकार में उनका 32 साल से ज़्यादा का शानदार एडमिनिस्ट्रेटिव करियर रहा है। अपनी लंबी और शानदार सर्विस के दौरान, उन्होंने कई अहम और सेंसिटिव पोस्ट पर काम किया है और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और एनवायरनमेंटल गवर्नेंस में अहम योगदान दिया है। उन्होंने पहले राज्य सरकार में डायरेक्टर, एनवायरनमेंट, स्पेशल सेक्रेटरी, एनवायरनमेंट, और डिप्टी कमिश्नर, रोहतक जैसे कई दूसरे अहम एडमिनिस्ट्रेटिव पोस्ट पर काम किया है। एडमिनिस्ट्रेशन, कानून, मैनेजमेंट और एनवायरनमेंटल मामलों में उनके बहुत ज़्यादा अनुभव से SEIAA, हरियाणा के कामकाज को मज़बूती मिलने की उम्मीद है। यह अपॉइंटमेंट भारत सरकार के तय नियमों के मुताबिक किया गया है, और इस बारे में ऑफिशियल गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। सरकार ने भरोसा जताया है कि श्री आर.एस. वर्मा का अनुभव, ईमानदारी और पर्यावरण और एडमिनिस्ट्रेटिव मामलों की गहरी समझ हरियाणा में असरदार पर्यावरण मूल्यांकन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट में अहम योगदान देगी।

मौसम बना आफत: कोहरे के चलते अमृतसर–चंडीगढ़ की हवाई सेवाएं प्रभावित

अमृतसर  पंजाब में कोहरे का असर न सिर्फ रोड ट्रैफिक बल्कि एयर ट्रैफिक पर भी पड़ने लगा है। आज पंजाब के साथ-साथ चंडीगढ़ के कई जिलों में घना कोहरा छाया रहा, जिससे विजिबिलिटी जीरो रही। इस घने कोहरे का सबसे ज्यादा असर एयर ट्रैफिक पर पड़ा है। जानकारी के मुताबिक, कोहरे की वजह से अमृतसर एयरपोर्ट पर कुल चार फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ीं। हालात तब और बिगड़ गए जब दिल्ली से अमृतसर जा रही पैसेंजर्स से भरी एक फ्लाइट को कोहरे की वजह से लैंड नहीं करने की इजाजत नहीं  मिली और उसे वापस लौटना पड़ा। इसके अलावा, कतर एयरवेज की फ्लाइट जो सुबह 4:20 बजे अमृतसर से दोहा के लिए निकलने वाली थी, वह भी टेक ऑफ नहीं कर सकी। दिल्ली, श्रीनगर, बेंगलुरु, हैदराबाद और शिमला समेत दूसरे शहरों से आने-जाने वाली कई घरेलू फ्लाइट्स भी देरी से शुरू हुईं, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी हुई। चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर क्या हुआ कोहरे की वजह से चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर भी फ्लाइट्स पर असर पड़ा। चंडीगढ़ से दिल्ली जाने वाली सुबह 5:45 बजे की फ्लाइट कैंसिल कर दी गई। इसके अलावा जयपुर से सुबह 7:15 बजे आने वाली फ्लाइट और बेंगलुरु से सुबह 7:30 बजे आने वाली फ्लाइट को जयपुर डायवर्ट कर दिया गया। अबू धाबी से सुबह 7:45 बजे आने वाली फ्लाइट भी देर से पहुंची। इसके अलावा सुबह 9:00 बजे तक जाने वाली सभी फ्लाइट्स देरी से चल रही हैं।