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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की बड़ी सौगात 20.53 करोड़ की मिली स्वीकृति

रायपुर अत्याधुनिक तीरंदाजी अकादमी का मतलब ऐसी अकादमी से है जहाँ खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और बेहतरीन सुविधाएं (जैसे हॉस्टल, इनडोर/आउटडोर रेंज) मिलती हैं, ताकि वे राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर सकें। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में खेल सुविधाओं के विस्तार की दिशा में जशपुर जिले को एक और बड़ी सौगात मिली है। जिले के बगीचा विकासखंड के पंडरा पाठ में अत्याधुनिक तीरंदाजी अकादमी (आर्चरी सेंटर) के निर्माण के लिए स्वीकृति मिल गई है।इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण हेतु एनटीपीसी लिमिटेड द्वारा सीएसआर फंड से 20.53 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। युवा तीरंदाजों के लिए एक उत्कृष्ट प्रशिक्षण केंद्र बनेगा नई तीरंदाजी अकादमी बनने से जिले के ग्रामीण और आदिवासी युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएँ मिलेंगी। यह पहल आने वाले समय में जशपुर को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतिभाओं का हब बनाने में निर्णायक साबित होगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की खेल प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें विश्व पटल तक पहुँचाने की प्रतिबद्धता का यह एक और बड़ा उदाहरण है। अकादमी के बनने से जशपुर न केवल खेल के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाएगा, बल्कि यह देश के युवा तीरंदाजों के लिए एक उत्कृष्ट प्रशिक्षण केंद्र के रूप में उभरेगा। यह पहल खेलों के विकास और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा हैं।  वित्तीय सहयोग एनटीपीसी के सामाजिक उत्तरदायित्व विभाग से  तीरंदाजी अकादमी के निर्माण में एनटीपीसी लिमिटेड अपनी कॉर्पाेरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) योजना के अंतर्गत वित्तीय सहयोग प्रदान करेगा। यहां आउटडोर और वातानुकूलित इनडोर तीरंदाजी रेंज, हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग सेंटर, छात्रावास जैसे निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं।जशपुर के युवाओं में इस घोषणा को लेकर उत्साह का माहौल है और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का हृदय से आभार व्यक्त किया है।

सच से नहीं भाग सकते— सीएम मान ने सिद्धू और चन्नी पर कसा तंज, कही कई बड़ी बातें

पंजाब  पंजाब की राजनीति में चल रही हलचल के बीच मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने विरोधियों पर निशाना साधा है। सीएम मान ने एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि विरोधी पार्टियां अपने कारणों से चुनाव हारती हैं लेकिन हार का ठीकरा किसी और पर फोड़ देती हैं। पूर्व मुख्यमंत्री चन्नी के बैलेट पेपर वाले बयान पर जवाब देते हुए सीएम मान ने कहा कि अकाली दल और कांग्रेस दोनों ने हार मान ली है और अब वे डरे हुए हैं। सीएम मान ने कहा कि, 4 साल बाद सबको पंजाब याद आया है। उन्होंने कहा कि हम पंजाब में किए गए काम के आधार पर चुनाव लड़ रहे हैं। नवजोत कौर सिद्धू को पूरी तरह फेल कहा जा रहा है और 4 साल बाद जोगी (कैप्टन अमरिंदर सिंह) भी पहाड़ों से नीचे आ गए हैं और BJP को गाली दे रहे हैं। पंजाब को बिकने का सामान समझने वाले ये लोग चुनाव के करीब नीचे आ जाएंगे। सुखजिंदर सिंह रंधावा पर निशाना साधते हुए उन्हें 2.5 km दूर का मुख्यमंत्री और अपने होम टाउन डेरा बाबा नानक से हारने वाला बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री मान नवजोत सिद्धू पर भी तीखा हमला किया और कहा कि जब सिद्धू के पास मंत्रालय होता, तब वे पंजाब को सुधार देते। उन्होंने आम लोगों से अपील की और कहा कि वे सिर्फ अच्छे लोगों को वोट दें जो उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे। 

मप्र में मोहन सरकार के 2 साल: अतीत की सीख, वर्तमान की मजबूती और भविष्य की दिशा

मप्र में मोहन सरकार के दो वर्ष: अतीत, वर्तमान और भविष्य को साथ लेकर चलने का संकल्प भोपाल मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार को दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस अवधि में सरकार ने अतीत के सांस्कृतिक वैभव को पुनर्स्थापित करने, वर्तमान की प्रशासनिक चुनौतियों को साधने और भविष्य की विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में कई पहलें की हैं। मुख्यमंत्रीडॉ. यादव ने अपने कार्यकाल के शुरुआती दौर से ही प्रदेश की पहचान को सांस्कृतिक और विकासात्मक—दोनों स्तरों पर मजबूत करने की रणनीति अपनाई। काल को तीन खंडों में विभाजित किया जाता रहा है, अतीत, वर्तमान और भविष्य। इन तीनों काल के लिए एक साथ कुछ करने की सामर्थ्य विरले ही व्यक्तित्वों में होती है। लेकिन तीनों कालों के लिए बहुत कुछ करने का चमत्कार बाबा महाकाल की नगरी के डॉ मोहन यादव ने दो साल की अवधि में कर दिखाया है। एक ओर जहां उन्होने मध्यप्रदेश के गौरवशाली अतीत को प्रभावी ढंग से संरक्षित और पुनर्स्थापित किया है, तो महाराज विक्रमादित्य के शासनकाल की झलक इन दो वर्षों के वर्तमान कार्यकाल में देखी जा सकती है। देश के इस हृदय प्रदेश को लेकर उनकी दूरगामी योजनाएं सुनहरे भविष्य के प्रति आश्वस्त करती हैं। अतीत: सांस्कृतिक धरोहर को नया आयाम सरकार ने धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया। महाकाल कॉरिडोर के विस्तार कार्यों ने उज्जैन को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। राज्य के प्राचीन धरोहर स्थलों पर संरक्षण गतिविधियाँ तेज की गईं। ओंकारेश्वर क्षेत्र में अद्वैत दर्शन से जुड़े प्रकल्पों को गति दी जा रही है। भगवान श्रीकृष्ण के चरण मध्यप्रदेश की भूमि पर जिन स्थानों पर पड़े, उन्हे श्रीकृष्ण पाथेय में समाहित कर इनको तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है। वर्तमान: प्रशासनिक सुधार और बुनियादी ढांचे पर फोकस दो वर्षों में सरकार ने बुनियादी ढांचे के विस्तार को प्राथमिकता दी है। प्रमुख सड़क मार्गों, औद्योगिक कॉरिडोरों और शहरी सुविधाओं को उन्नत करने के कार्य जारी हैं। ग्रामीण सड़कों का उन्नयन भी अभियान मोड में किया जा रहा है। शिक्षा क्षेत्र में तकनीकी सुधार, रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम और डिजिटल सुविधाओं के विस्तार पर काम किया गया है। कृषि क्षेत्र में उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, सिंचाई क्षमता बढ़ाने और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। महिलाओं और युवाओं के लिए योजनाओं—जैसे लाड़ली बहना और स्टार्टअप प्रोत्साहन कार्यक्रम—के क्रियान्वयन पर भी जोर रहा। भविष्य: निवेश, ऊर्जा और स्वास्थ्य ढांचे की तैयारियाँ राज्य सरकार ने आगामी दशक के विकास को लक्ष्य बनाते हुए कई योजनाएँ तैयार की हैं। नई औद्योगिक नीति के तहत MSME और बड़े निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। पीथमपुर, इंदौर, भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। सौर ऊर्जा उत्पादन, जल संरक्षण और इलेक्ट्रिक वाहन ढांचे को बढ़ावा देकर हरित ऊर्जा क्षेत्र में कदम तेज हुए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं को जिला एवं ग्रामीण स्तर तक मजबूत करने की दिशा में अस्पताल उन्नयन और टेली-मेडिसिन सेवाओं का विस्तार प्रस्तावित है। संतुलित नेतृत्व का संकेत डॉ. मोहन यादव के दो वर्ष का कार्यकाल यह संकेत देता है कि सरकार अतीत के सांस्कृतिक गौरव, वर्तमान की प्रशासनिक प्राथमिकताओं और भविष्य की विकास योजनाओं—तीनों को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। आने वाले समय में इन पहलों का वास्तविक असर प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में दिखाई देगा।                                                                                                                                                   नरेंद्र शिवाजी पटेल  

डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में 513 नए 4G मोबाइल टावरों की स्वीकृति:डिजिटल कनेक्टिविटी से सशक्त होंगे सुदूर क्षेत्र

रायपुर : नक्सल उन्मूलन के बाद विकास की ठोस पहल: दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचेगा डिजिटल नेटवर्क डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में 513 नए 4G मोबाइल टावरों की स्वीकृति:डिजिटल कनेक्टिविटी से सशक्त होंगे सुदूर क्षेत्र 513 नए 4G टावरों से शिक्षा, स्वास्थ्य और वित्तीय समावेशन को मिलेगा बल : मुख्यमंत्री साय रायपुर, डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में बीएसएनएल के माध्यम से 513 नए 4G मोबाइल टावर स्थापित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे नक्सल प्रभावित और दूरस्थ अंचलों में शांति, सुरक्षा और विकास के साझा प्रयासों का महत्वपूर्ण प्रतिफल बताया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह निर्णय नक्सल उन्मूलन की दिशा में चल रहे प्रभावी प्रयासों की एक मजबूत कड़ी है। सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई और प्रशासनिक समन्वय से जिन क्षेत्रों में स्थायित्व स्थापित हुआ है, वहां अब विकास और डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन 4G मोबाइल टावरों की स्थापना से सुदूर और दुर्गम इलाकों में रहने वाली जनता को पहली बार सुलभ और विश्वसनीय मोबाइल एवं इंटरनेट सेवाएं प्राप्त होंगी। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, प्रशासनिक सेवाओं और आपातकालीन संचार की सुविधा सशक्त होगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी का यह विस्तार वित्तीय समावेशन की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा। मोबाइल नेटवर्क के सशक्त होने से बैंकिंग सेवाएं, डीबीटी, यूपीआई, बीमा, पेंशन और अन्य डिजिटल सेवाओं की पहुंच आम नागरिकों तक सहज रूप से सुनिश्चित हो सकेगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह पहल “डिजिटल इंडिया” के उस मूल उद्देश्य को साकार करती है, जिसमें अंतिम छोर तक विकास पहुंचाने का संकल्प निहित है। इससे स्थानीय युवाओं को डिजिटल माध्यमों से नए अवसर मिलेंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा नक्सल प्रभावित राज्यों के लिए सुरक्षा के साथ-साथ विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इस विजन के अनुरूप केंद्र के साथ मिलकर राज्य के प्रत्येक नागरिक को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय छत्तीसगढ़ को डिजिटल रूप से सशक्त, सुरक्षित और समावेशी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।  

मोहन सरकार की कृषि नीति का असर: मध्य प्रदेश में 55 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार को शुक्रवार को दो वर्ष पूरे हो गए हैं। इन दो वर्षों में कृषि क्षेत्र में प्रदेश ने उत्पादन, उत्पादकता और विविधीकरण के नये रिकॉर्ड बनाए हैं। वर्ष 2023-24 से 2024-25 के बीच खाद्यान्न उत्पादन में 55 लाख टन से अधिक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो सरकार की कृषि नीति, सिंचाई विस्तार और किसान हितैषी योजनाओं की सफलता को दर्शाती है। आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में कुल खाद्यान्न उत्पादन 5.34 करोड़ मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 6.13 करोड़ मीट्रिक टन हो गया। वहीं, कुल कृषि उत्पादन 7.24 करोड़ टन से बढ़कर 7.79 करोड़ मीट्रिक टन हो गया। इसमें 55 लाख टन की वृद्धि हुई। यह बढ़ोतरी उन्नत बीज वितरण, फसल बीमा, सिंचाई परियोजनाओं और कृषि यंत्रीकरण का सीधा परिणाम मानी जा रही है। गेहूं, मक्का और धान ने बढ़ाया प्रदेश का मान सरकारी आंकड़ों के अनुसार गेहूं उत्पादन 2023-24 में 3.28 करोड़ टन से बढ़कर 2024-25 में 3.82 करोड़ टन हो गया। मक्का उत्पादन 48.68 लाख टन से बढ़कर 69.37 लाख टन, धान का उत्पादन 1.40 करोड़ से थोड़ा घटकर 1.36 करोड़ टन हुआ। हालांकि, धान की उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 3415 किलोग्राम से बढ़कर 3551 किग्रा हो गई। दलहन-तिलहन भी बढ़ा रिपोर्ट के अनुसार सोयाबीन उत्पादन 66.24 लाख टन, मूंगफली उत्पादन 15.47 लाख टन, तिल उत्पादन 1.69 लाख टन हुआ। कुल तिलहन उत्पादन थोड़ी कमी के साथ 94.95 लाख टन पर स्थिर रहा। वहीं, दलहन उत्पादन में चना 35.83 लाख टन से घटकर 22.04 लाख टन, मूंग बढ़कर 21.28 लाख टन और उड़द बढ़कर 1.51 लाख टन रही। उत्पादकता में भी लगातार सुधार सरकार की रिपोर्ट के अनुसार कुल कुल खाद्यान्न उत्पादकता 2023-24 में 3322 किग्रा प्रति हेक्टेयर और 2024-25 में 3650 किग्रा प्रति हेक्टेयर रही। वहीं, कुल कृषि उत्पादकता 2379 से बढ़कर 2627 किग्रा प्रति हेक्टेयर रही। किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस मोहन सरकार ने दो वर्ष में किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें एमएसपी पर खरीदी का दायरा बढ़ाया, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा, फसल विविधीकरण नीति लागू करना और ई-उपार्जन और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत किया किया गया है। क्या कहते हैं कि विशेषज्ञ कृषि विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में खेती में यह बढ़त केवल अनुकूल मौसम का परिणाम नहीं है, बल्कि नीतिगत निर्णय, समय पर खाद-बीज उपलब्धता और किसानों को त्वरित भुगतान का असर है। खाद्यान्न में नया कीर्तिमान जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति पीके मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में किसानों के लिए भावांतर, सौर ऊर्जा संयंत्र और दुग्ध प्रोत्साहन जैसी योजनाओं ने खेती की लागत कम की है और आमदनी बढ़ाने का रास्ता खोला है। आने वाले समय में इन योजनाओं का प्रभाव तभी टिकाऊ होगा, जब मंडियों, सिंचाई ढांचे और तकनीकी क्षेत्र को और मजबूत किया जाए। साथ ही किसानों की भागीदारी बढ़ाई जाए।  

“महासमुंद में अवैध धान भंडारण और परिवहन के खिलाफ सख्त कार्रवाई, 4 प्रकरणों में 2112 कट्टा धान जब्त

महासमुंद राज्य शासन के मंशानुरूप, कलेक्टर विनय कुमार लंगेह से प्राप्त निर्देशों के पालन में जिले में अवैध रबी एवं खरीफ धान के संग्रहण एवं परिवहन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में राजस्व, मंडी विभाग एवं संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों के संयुक्त प्रयास से विभिन्न तहसीलों में की गई कार्रवाई के दौरान कुल 2112 कट्टा धान जब्त किया गया है।  विकासखंड सरायपाली अंतर्गत अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अनुपमा आनंद के नेतृत्व में ग्राम बारडोली में रवि फसल का 95 कट्टा धान जब्त किया गया। वहीं ग्राम चनाट में कार्रवाई करते हुए 267 पैकेट अवैध रबी धान पकड़ा गया। इसके अलावा रात्रिकालीन गश्त के दौरान सराईपाली–सरसिवा मार्ग पर बगयीजोर के पास धान से लदे 5 वाहन जिसमें 4 माजदा एवं 1 छोटा हाथी जब्त किए गए। इन वाहनों से कुल 750 पैकेट, लगभग 300 क्विंटल धान बरामद किया गया, जिसे थाना सरायपाली की सुपुर्दगी में दिया गया है। वहीं विकासखण्ड पिथौरा अंतर्गत अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बजरंग वर्मा के नेतृत्व में ग्राम टोंगोपथरा में धनुर्जय साहू के निवास पर छापेमारी के दौरान लगभग 1000 कट्टा धान का अवैध संग्रहण पाया गया। उक्त धान को जब्त कर कृषि उपज मंडी पिथौरा को सुपुर्द किया गया।  यह कार्रवाई शासन द्वारा निर्धारित नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी नियंत्रण हेतु की गई है। जिला प्रशासन ने कहा है कि अवैध धान संग्रहण एवं परिवहन के विरुद्ध आगे भी इसी प्रकार कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

आज से आगामी एक सप्ताह पीएम आवास के लिए डेडीकेटेड, सभी अप्रारम्भ

सूरजपुर : पीएम आवास के एक-एक हितग्राही तक पहुंच रही है टीम आज से आगामी एक सप्ताह पीएम आवास के लिए डेडीकेटेड, सभी अप्रारम्भ  आवासों को प्रारम्भ एवं प्रगतिरत आवासों को पूर्ण करने का लक्ष्य समस्त स्वीकृत आवासों को 31 जनवरी तक पूर्ण करने का है लक्ष्य सूरजपुर कलेक्टर एस जयवर्धन के निर्देश व सीईओ जिला पंचायत विजेंद्र सिंह पाटले के  मार्गदर्शन  में पीएम आवास ग्रामीण निरन्तर प्रगति के लिए कार्य कर रहा है। विगत दो वर्षों में 34784 आवास स्वीकृत, 30776 आवास पूर्ण एवं 349 करोड़ से अधिक की राशि हितग्राहियों के खातों में हस्तांतरित कर जिले ने एक कीर्तिमान स्थापित किया है। पूरी तरह पारदर्शी पीएम आवास योजना ग्रामीण योजना के बेहतर क्रियान्वयन हेतु प्रशासन सतत् प्रयासरत है।  उक्त तारतम्य में आज से आगामी 7 दिन डेडीकेटेड पीएम आवास के निर्माण में फोकस करने के लिए रखा गया है। इसके अंतर्गत आवास निर्माण के लिए लंबित हितग्राहियों को बुलाकर जगह जगह आवास चौपाल, निरंतर फील्ड विजिट, क्लस्टर के सभी स्टाफो की मीटिंग, हितग्राहियों से फोन के माध्यम से बात करने जैसे कार्य किए जा रहे है। ताकि जितने आवास अप्रारम्भ है उन्हें प्रारम्भ, और प्लिंथ से ऊपर स्तर पर है उन्हें तत्काल पूर्ण करा लिए जाए तथा हितग्राहियों को सभी किस्तें समय पर प्रदाय कर दी जाए। इस उद्देश्य के साथ यह सप्ताह जिला प्रशासन द्वारा शासन की महत्वाकांक्षी पीएम आवास योजना ग्रामीण में प्रगति के लिए पूरी तरह समर्पित है। आवास निर्माण की दृष्टि से दिसंबर एवं जनवरी सबसे अनुकूल समय है, इस समय अधिक से अधिक आवास पूर्ण किए जा सकते है। हितग्राहियों के सभी प्रकार के समस्याओं का समाधान करते हुए, इन्हें लगातार आवास निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सामग्री की व्यवस्था से लेकर मिस्त्री एवं आवश्यकतानुसार बिहान योजना से हितग्राहियों को लोन का प्रावधान कराने जैसे सारे प्रयास किए जा रहे है ताकि निर्माण कार्य में तेजी आ सके। उक्त निर्माण कार्य समाप्ति उपरान्त आवास प्लस 2024 के माध्यम से सर्वेक्षित हुए, पात्र परिवारों को आवास से लाभान्वित करने की कार्यवाही प्रारंभ की जावेगी।  जिला प्रशासन का हितग्राहियों से अपील है कि अपने आवास को आप जल्दी से पूर्ण कराते हुए, आवास की सभी किश्तों को प्राप्त कर लीजिए। किसी के बहकावे में आकर आवास की राशि किसी भी अन्य व्यक्ति या अन्य कार्यों में खर्च कदापि ना करें। किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो जिला स्तरीय हेल्पलाइन नंबर +91-9244049285 पर सीधे संपर्क कर सकते है। 

रायपुर: विशेष लेख – फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर बना मध्यभारत में दिव्यांगों के पुनर्वास का प्रमुख उदाहरण

रायपुर : विशेष लेख : फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर बना मध्यभारत में दिव्यांग पुनर्वास की मिसाल रायपुर छत्तीसगढ़ में समाज कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2012 में स्थापित फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर, माना कैम्प ने दिव्यांगजन पुनर्वास और कृत्रिम अंग निर्माण के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट कार्य करते हुए मध्यभारत में एक आदर्श और अग्रणी संस्थान के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। अत्याधुनिक तकनीक, अनुभवी चिकित्सकीय एवं तकनीकी विशेषज्ञों की समर्पित टीम और मानवीय संवेदनाओं से प्रेरित कार्य संस्कृति के चलते यह केंद्र आज केवल एक उपचार या तकनीकी सुविधा का स्थान नहीं, बल्कि हजारों दिव्यांगजनों के लिए आत्मनिर्भरता, सम्मानपूर्ण जीवन और नए भविष्य की मजबूत आधारशिला बन चुका है। राज्य ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में दिव्यांगजन यहाँ पहुँचकर पुनर्वास सेवाओं का लाभ ले रहे हैं, जिससे यह केंद्र छत्तीसगढ़ की सामाजिक प्रतिबद्धता और संवेदनशील शासन व्यवस्था का प्रभावी प्रतीक बनकर उभरा है। सात हजार से अधिक दिव्यांगजनों को मिला नया जीवन केंद्र द्वारा अब तक 7000 से अधिक कृत्रिम हाथ-पैर एवं प्रोस्थेटिक उपकरण निःशुल्क तैयार कर वितरित किए गए हैं। इन उपकरणों से अनेक दिव्यांगजन दोबारा चलने-फिरने और कामकाज में सक्षम हुए, युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिले, विद्यार्थी पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े और बुजुर्गों ने स्वतंत्र रूप से जीवन जीने की क्षमता प्राप्त की। यह सहायता केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और सामाजिक सहभागिता को भी सशक्त करती है। आधुनिक तकनीक से सटीक और निःशुल्क सेवाएँ फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर में आधुनिक मापन तकनीक, उच्च गुणवत्ता सामग्री और अनुभवी तकनीशियनों की टीम द्वारा प्रत्येक लाभार्थी की आवश्यकता के अनुरूप टिकाऊ प्रोस्थेटिक और ऑर्थाेटिक उपकरण तैयार किए जाते हैं। केंद्र की सभी सेवाएँ पूर्णतः निःशुल्क हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के दिव्यांगजनों को भी उच्च गुणवत्ता की सुविधाएँ सुलभ हो रही हैं। इसके साथ ही व्हीलचेयर, कैलिपर्स, एल्बो क्रचेज़ एवं अन्य सहायक उपकरणों का वितरण कर दैनिक जीवन को और अधिक सुगम बनाया जा रहा है। 3डी तकनीक से और सशक्त होगी पुनर्वास व्यवस्था समाज कल्याण विभाग द्वारा केंद्र को तकनीकी रूप से और उन्नत करने की दिशा में 3डी प्रिंटर आधारित कृत्रिम अंग निर्माण तकनीक शीघ्र शुरू की जा रही है। इस तकनीक से कृत्रिम अंग निर्माण का समय कम होगा, लाभार्थियों के लिए परफेक्ट-फिट उपकरण तैयार किए जा सकेंगे और गुणवत्ता व आराम में उल्लेखनीय सुधार आएगा। यह पहल छत्तीसगढ़ में प्रोस्थेटिक निर्माण के क्षेत्र में एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि मानी जा रही है। भविष्य में और जिलों तक पहुँचेगी सेवा विभाग का लक्ष्य आने वाले समय में केंद्र की उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई अत्याधुनिक तकनीकें जोड़ने और सेवाओं का विस्तार दूरस्थ एवं अधिक जिलों तक करने का है, ताकि राज्य का प्रत्येक जरूरतमंद दिव्यांगजन गुणवत्तापूर्ण पुनर्वास सेवाओं से लाभान्वित हो सके। आशा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का केंद्र फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर केवल एक पुनर्वास संस्थान नहीं, बल्कि हजारों दिव्यांगजनों और उनके परिवारों के लिए नई उम्मीद और नई शुरुआत का प्रतीक बन चुका है। यहाँ से मिलने वाला हर कृत्रिम अंग किसी जीवन को नई दिशा और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर अग्रसर कर रहा है।      डॉ. दानेश्वरी संभाकर, उप संचालक (जनसंपर्क)

शादी मंडप में ड्रामा: 20 लाख और कार की डिमांड पर दुल्हन ने कराई दूल्हे की गिरफ्तारी

बरेली  यूपी के बरेली से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां शुक्रवार देर रात एक बारात में दहेज को लेकर हंगामा हो गया। दरअसल, सात फेरों से पहले दूल्हे ने कार और 20 लाख रुपए मांग रख दी। वर पक्ष ने कहा कि ऐसा न होने पर सात फेरे नहीं होंगे। वधू पक्ष ने भारी भरकम रुपये और कार देने पर असमर्थता जाहिर कर दी। इस पर हंगामा हो गया और पुलिस पहुंच गई। तब दूल्हा सात फेरे लेने के स्थान पर हवालात में पहुंच गया। पुलिस ने दूल्हा समेत छह मामला दर्ज कर लिया है। कैंट स्थित युगवीणा में धूमधाम से एक बारात पहुंची। वधू पक्ष ने जोरदार स्वागत भी किया लेकिन शादी में फेरों से पहले दूल्हा और उसके परिवार लोग ब्रेजा कार और 20 लाख रुपए मांगने पर अड़ गए। काफी समझाने बाद भी दहेज लोभी नहीं माने। जिसको लेकर बारात में हंगामा हो गया। जानकारी पर कैंट पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने दूल्हा उसके पिता और जीजा को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने बताया कि दुल्हन पक्ष की ओर से तहरीर मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, कैंट थाना क्षेत्र सदर बाजार निवासी मुरली मनोहर की बेटी ज्योति की शादी करीब आठ माह पहले नई बस्ती थाना प्रेम नगर निवासी ऋषभ साथ तय हुई थी। मई महीने में लड़की पक्ष ने शहर के एक बड़े होटल में सगाई की थी। जिसमें लड़की पक्ष का तीन लाख खर्च हुआ था। इसके साथ लड़की पक्ष ने लड़के को सोने की अंगूठी चेन और 5 लाख नगद दिए थे। गुरुवार को लड़की पक्ष लग्न लेकर पहुंचे। इस दौरान लड़की पक्ष ने एसी, फ्रिज और वाशिंग मशीन साथ ही बतौर शगुन एक लाख बीस हजार रुपए नगद दिए।   प्रेमिका के साथ पति को रंगे हाथ पकड़ा, पत्नी ने चप्पलों से की जमकर धुनाई शुक्रवार देर रात लड़का पक्ष बारात लेकर पहुंचा। जहां लड़की पक्ष ने काफी धूमधाम से बारात का स्वागत किया। शादी के दौरान फेरों से पहले दूल्हा पक्ष 20 लाख रुपए नगद और एक ब्रेजा कार लेने पर मांग पर अड़ गए। काफी समझाने के बाद भी दूल्हा और उसके परिवार के लोग नहीं माने। आधी रात तक कार न मिलने की बात कहने पर कर का भी नगद भुगतान करने की मांग करने लगे। इसको लेकर बारात में हंगामा हो गया। दूल्हा पक्ष बारात कैंसल कर वापस लौटा कर ले जाने लगे। सूचना पर पहुंची कैंट पुलिस ने दूल्हा ऋषभ उसके पिता राम अवतार और जीजा को हिरासत में ले लिया। लड़की पक्ष का आरोप है कि शादी लगाने वाले इंद्रपाल ने भी उन्हें लगातार गुमराह किया। लड़की पक्ष ने बताया कि शादी में भी करीब 15 लाख रुपए खर्च आया है। इसके साथ ही रस्म के तौर पर बारात में भी दूल्हे को और उसके परिजनों को सोने की चेन अंगूठी और नकदी दी गई है। कैंट पुलिस ने बताया कि तहरीर आधार पर दूल्हा समेत 6 पर मामला दर्ज कर लिया है।  

पराली जलाने में भारी कमी: Stubble Burning के ताज़ा आंकड़ों ने सबको किया हैरान

चंडीगढ़  पंजाब और हरियाणा में इस वर्ष पराली जलाने के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे दिल्ली-एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में आसमान अपेक्षाकृत साफ ​​​​रहा है। वायु गुणवत्ता में सुधार आया है। जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। राज्य सरकार ने कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में 2025 में खेतों में आग लगाने की 5,114 घटनाएं दर्ज की गईं, जो 2021 की तुलना में 93 प्रतिशत तक कम है। हरियाणा में इसके 662 मामले सामने आए, जो 91 प्रतिशत कम हैं। ‘कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन ऐग्रोइकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस' (CREAMS) प्रयोगशाला से प्राप्त उपग्रह आंकड़ों ने धान की पराली जलाने में भारी कमी का संकेत दिया है, जो 57 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। यहां 2023 में इसके कुल 42,962 मामले थे, जो 2024 में घटकर 18,457 हो गए। कई जिलों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। आंकड़ों के अनुसार, वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के 200 से नीचे रहने वाले दिनों की संख्या 2016 में 110 दिन थी जो 2025 में बढ़कर 200 दिन हो गई है। विशेषज्ञों के हवाले से बयान में कहा गया है कि यह सुधार सरकारी नीतियों, किसानों में जागरूकता, नई कृषि पद्धतियों के उपयोग और निजी क्षेत्र की पहलों का परिणाम है। अपशिष्ट से ऊर्जा बनाने वाली कंपनियां किसानों को फसलों के अवशेषों को खेतों में जलाने के बजाय नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के लिए उनका उपयोग करने में मदद कर रही हैं।