samacharsecretary.com

रायपुर : मंत्री अग्रवाल ने लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज से भेंट कर उनका कुशलक्षेम जाना एवं उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की

रायपुर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने रायपुर के एक निजी अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे लुंड्रा विधायक  प्रबोध मिंज से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। मंत्री  अग्रवाल ने विधायक के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।  इस मुलाकात के अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल और महिला बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े भी मौजूद थे। उन्होंने विधायक प्रबोध मिंज के स्वास्थ्य सुधार की प्रक्रिया पर डॉक्टरों से चर्चा की और उनके शीघ्र स्वस्थ होकर विधानसभा में लौटने की कामना की है।

मुजफ्फरनगर के यहियापुर गांव में बुधवार को लगी ‘कृषि चौपाल’

उत्तर प्रदेश की शान बने ‘खुशहाल किसान’ मुजफ्फरनगर के यहियापुर गांव में बुधवार को लगी ‘कृषि चौपाल’ चौपाल में शामिल हुए 500 से अधिक किसान, कहा- हमें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने उठाया अभूतपूर्व कदम  सभी जनपदों को समान रूप से बिजली-पानी उपलब्ध करा रही योगी सरकार  अन्नदाताओं ने योजनाओं के क्रियान्वयन, एमएसपी, समय से भुगतान और गन्ना मूल्य में वृद्धि के लिए योगी सरकार के प्रति जताया आभार   मुजफ्फरनगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में अन्नदाता किसानों के जीवन में खुशहाली लाई। किसान अब आत्महत्या नहीं करते, बल्कि खुशहाली का जीवन व्यतीत कर परिवार की तरक्की और उत्तर प्रदेश की समृद्धि में योगदान दे रहे हैं। किसानों को फसल का उचित दाम मिल रहा, उन्हें किसान सम्मान निधि, पीएम कुसुम योजना, एमएसपी के साथ ही समान रूप से हर जनपद को बिजली, सड़क, पानी की सुविधाएं मिल रही हैं। इससे खेती करने और फसल को बाजार तक पहुंचाने में आसानी हो रही है। यहियापुर गांव में बुधवार को लगी कृषि चौपाल में उपस्थित 500 से अधिक किसानों ने यह विचार रखे। सभी ने साढ़े आठ वर्ष में सरकार के सकारात्मक कदम के कारण किसानों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव का भी जिक्र किया।  विकसित कृषि संकल्प अभियान बना कारगर, सरकार ने सीधे किसानों से किया संवाद  विकसित कृषि संकल्प अभियान के जरिए मुख्यमंत्री, केंद्र-राज्य सरकार के मंत्रियों समेत जनप्रतिनिधियों ने किसानों से संवाद किया। 15 दिन में प्रदेश के 14,170 गांवों में हुए कार्यक्रमों में 23 लाख से अधिक किसानों ने प्रतिभाग किया। किसान बिराम सिंह ने कहा कि मेरे सहित कई किसान इस अभियान में शामिल हुए। यहां हमने स्वायल कॉर्ड, भूमि सुधार, सिंचन क्षमता आदि से लेकर खेतीबाड़ी में सुधार को लेकर नई-नई जानकारी ली। इसके बाद विशेषज्ञों/अधिकारियों से संपर्क कर अपनी खेती में और सुधार किया।  तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए निःशुल्क मिनीकिट का वितरण  किसान अमरीश वालिया ने कहा कि सरकार कृषि विभाग के माध्यम से तिलहन-दहलन के क्षेत्र में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निःशुल्क मिनीकिट भी वितरित कर रही है। गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूर, तोरिया, राई-सरसो, अलसी फसलों के लिए अनुदान पर बीज भी उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे एक तरफ हमें आसानी से बीज भी मिलते हैं तो दूसरी तरफ खेती में इसका प्रयोग कर उत्पादकता बढ़ाने और विषमुक्त खेती की तरफ भी किसान कदम बढ़ाते हैं।  खेती में सहायक हो रहे अनुदान पर मिल रहे कृषि यंत्र किसान गंगाशरण कहते हैं कि खेती में सहायता के लिए किसानों को कृषि यंत्र की आवश्यकता पड़ती है। कृषि विभाग अनुदान पर किसानों को विभिन्न कृषि यंत्र उपलब्ध भी कराता है। कृषि यंत्र खेती में सहायक हो रहे हैं। योगी सरकार की मंशा से 5000 से अधिक कृषि यंत्र बैंक भी स्थापित किए गए हैं, जिससे मेरे जैसे हजारों-लाखों किसान लाभान्वित हो रहे हैं। जनपदों में निष्पक्ष प्रक्रिया के जरिए ई-लॉटरी निकलती है और किसानों को अनुदान पर कृषि यंत्र मिलता है।  किसान पाठशाला के जरिए नवीन जानकारियों से किया जा रहा अपडेट  किसान वेदपाल ने किसान पाठशाला की सकारात्मकता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसके जरिए खेती से अलग किसानों में तकनीकी क्षमता भी विकसित की जा रही है। किसान फसलों के उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि के लिए नवीनतम तकनीकों को जान रहे हैं। हम कृषि विशेषज्ञों से संवाद कर कई समाधान भी पा जाते हैं। उन्नत कृषि से संबंधित व्यावहारिक व व्यापारिक समझ का विकास कर रहे हैं। कृषि विभाग की संचालित योजनाओं के बारे में भी जानकारी मिलती है।     गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी किसानों के लिए वरदान  किसान कंवर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपावली से पहले 30 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि कर गन्ना किसानों को बड़ा तोहफा दिया था। योगी सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 में गन्ने की अगेती प्रजाति का मूल्य 370 से बढ़ाकर 400 रुपये और सामान्य प्रजाति का 360 रुपये से 390 रुपये प्रति क्विंटल किया। इस वृद्धि से गन्ना किसानों को 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान भी हो रहा है। योगी सरकार के कार्यकाल में यह वृद्धि किसानों को मिला सम्मान है।  कृषि चौपाल में सुनील प्रधान, कंवरपाल सिंह, मो. फसी, निर्दोष त्यागी, मनोज चौधरी, नूर मोहम्मद, शिवेश कुमार, कंवर सिंह, सुभाष राठी, शेर सिंह, जगमेर सैनी, पद्म सिंह, देवेंद्र कुमार, हरपाल, जयप्रकाश, नरेश पाल आदि किसान मौजूद रहे।  बृहस्पतिवार को दाहोद गांव में लगेगी ‘कृषि चौपाल’  1 से 11 दिसंबर तक पश्चिम उत्तर प्रदेश के चार जनपदों में ‘कृषि चौपाल’ का आयोजन हो रहा है। बागपत, हापुड़ और शामली में ‘कृषि चौपाल’ हो चुकी है। बुधवार को मुजफ्फरनगर के यहियापुर गांव में किसानों ने संवाद किया। 11 दिसंबर (गुरुवार) को दाहोद गांव में ‘कृषि चौपाल’ लगाई जाएगी।

यूपी भाजपा अध्यक्ष पद की रेस तेज: नया चेहरा चुनने से पहले पार्टी रख रही है ये अहम शर्तें

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर मंथन तेज हो गया है। सूत्रों की मानें तो जातीय समीकरण और संगठनात्मक अनुभव के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार के साथ मजबूत तालमेल इस बार चयन की सबसे अहम शर्त मानी जा रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, भाजपा इस बार चेहरा चुनने में सावधानी बरत रही है जो संगठन और सरकार के बीच संतुलन साधते हुए 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए मजबूत तैयारी सुनिश्चित कर सके, जहां पार्टी का सामना आक्रामक समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगी कांग्रेस से होगा। 2024 लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा की सीटें 62 से घटकर 33 होने के बाद संगठन बनाम सरकार की कथित खींचतान और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का 'संगठन सरकार से ऊपर' वाला बयान सुर्खियों में रहा था। पार्टी का आकलन है कि संगठन और सरकार के बीच किसी भी तरह की दूरी 'कार्यकर्ताओं की अनदेखी' जैसे नैरेटिव को हवा देने का मौका दे सकती है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेता और वर्तमान सांसद के अनुसार, नेतृत्व इस बार यह सुनिश्चित करना चाहता है कि न तो संगठन सरकार पर हावी दिखे और न ही सरकार संगठन के ऊपर। दोनों के बीच तालमेल की कमी को जड़ स्तर पर गुटबाजी का कारण माना जा रहा है, जो चुनावी प्रदर्शन पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। सूत्रों ने संकेत दिया कि नया प्रदेश अध्यक्ष ऐसा होना चाहिए जो योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली का 'पूरक' बने, न कि उनके समानांतर कोई शक्ति केंद्र। इसलिए माना जा रहा है कि पार्टी अपने अगले प्रदेश अध्यक्ष से सरकारी योजनाओं की जमीनी स्तर पर सुचारु क्रियान्वयन और संगठन को मजबूत करने की दोहरी भूमिका निभाने की अपेक्षा रखती है। विशेषकर तब, जब निकट भविष्य में पंचायत चुनाव और उसके बाद 2027 के विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा के एक सांसद कहते हैं कि, 'हालांकि जोखिम भी मौजूद है। अगर नया अध्यक्ष अत्यधिक सरकार-झुकाव वाला हुआ तो कार्यकर्ताओं में शीर्ष-से-नीचे नियंत्रण का डर बन सकता है। दूसरी ओर, कमजोर तालमेल संगठन-सरकार के पुराने तनाव को फिर उभार सकता है।' सांसद ने बताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए भाजपा ऐसे 'मूल कार्यकर्ता' को आगे लाने की भी इच्छुक है, जिसका लंबा संगठनात्मक अनुभव, आरएसएस पृष्ठभूमि और पार्टी से मूलभूत जुड़ाव रहा हो। विश्लेषकों का मानना है कि यह संदेश देने का प्रयास है कि 'जमीनी कार्यकर्ता ही पार्टी की रीढ़ है।' भाजपा सांसद ने कहा, 'चुनाव रणनीति को देखते हुए जातीय समीकरणों पर भी गहन मंथन चल रहा है। बीजेपी ऐसा चेहरा सामने लाना चाहती है जो समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) एजेंडा का प्रभावी जवाब दे सके। 2024 में हुए वोट शिफ्टिंग-खासतौर पर गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वर्ग में-को पार्टी गंभीरता से ले रही है।' हालांकि भाजपा ब्राह्मण, ओबीसी और दलित सभी प्रमुख सामाजिक वर्गों पर विचार कर रही है। अंतिम चयन इस संतुलन पर निर्भर करेगा कि कौन-सा चेहरा संगठन को ऊर्जा दे सके और सरकार के साथ मजबूत तालमेल रखते हुए आगामी चुनावी चुनौतियों में पार्टी को बढ़त दिला सके।  

पंजाब में ड्रग मनी की पड़ताल हाई कोर्ट की निगरानी में हो—BJP ने CM मान पर डाला दबाव

चंडीगढ़  भ्रष्टाचार को समाज के लिए अभिशाप बताते हुए पंजाब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से राज्य के सभी राजनीतिक दलों के नेताओं की जांच कराने की मांग की है, साथ ही यह पता लगाने का आग्रह किया कि क्या किसी को भ्रष्ट गतिविधियों से धन प्राप्त हुआ है. पूर्व कांग्रेस विधायक नवजोत कौर सिद्धू के आरोपों के बाद कांग्रेस में मचे घमासान के बीच, सुनील जाखड़ ने भगवंत मान को उनके 16 जून को लिखे पत्र की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने ड्रग मनी ट्रेल की जांच पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पंजाब के कई राजनेताओं की किस्मत बदल गई है, जिसे महज संयोग कहकर खारिज नहीं किया जा सकता.उन्होंने कहा कि कई कि विधायक जो साइकिल से आते थे, अब उनके पास लग्जरी कारें हैं और कई के पास फार्महाउस हैं.इतनी बड़ी मात्रा में पैसा कहां से आया, इसकी जांच जरूरी है. ‘भ्रष्टाचार समाज में नासूर बन गया’ मंगलवार को जाखड़ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया जिसमें कांग्रेस और नवजोत कौर सिद्धू द्वारा लगाए गए आरोपों का ज़िक्र किए बिना लिखा, ‘इस समय भ्रष्टाचार समाज में नासूर बन गया है. अब तो 70 साल तक देश पर राज करने वाली पार्टी के वरिष्ठ नेता भी एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा रहे हैं’. ‘सभी दलों के नेताओं की हो जांच’ जाखड़ ने पोस्ट में कहा, ‘भगवंत मान जी, आपने इस भ्रष्टाचार को कैंसर कहा था. आपने यह भी कहा था कि आपके पास फाइलें हैं, तो आप उन फाइलों को क्यों नहीं खोलते? मैंने आपको पहले भी लिखा था और मैं फिर से मांग करता हूं कि हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में सभी दलों के नेताओं (जिनमें मैं भी शामिल हूं) की समयबद्ध जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और पता चले कि भ्रष्टाचारों से पैसा किसने प्राप्त किया है’. उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है अगर आपकी सरकार ड्रग्स के खिलाफ अपनी लड़ाई में अपनी विश्वसनीयता और दृढ़ संकल्प स्थापित करना चाहती है’. 16 जून को लिखे अपने पत्र में बीजेपी नेता ने मांग की थी कि ‘ड्रग-धन के मामले में ताकतवर और प्रभावशाली लाभार्थियों का पता लगाने के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू की निगरानी में जांच की जाए’. ‘धन का पता लगाना जरूरी’ जाखड़ ने आगे कहा ‘यह उचित होगा कि आप, मुख्यमंत्री के रूप में, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर, उनकी निगरानी में एक विश्वसनीय एजेंसी या यहां तक कि एकएजेंसी जांच द्वारा समयबद्ध जांच स्थापित करने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध करें ताकि ड्रग-धन के जाल में अंतिम लाभार्थियों का पता लगाया जा सके’. उन्होंने कहा कि ड्रग-धन के जाल में धन का पता लगाना जरूरी है, जिसके बिना पंजाब से ड्रग्स को जड़ से उखाड़ने की कवायद न केवल निरर्थक है, बल्कि एक दिखावा भी है. ‘छोटे कारोबारियों को गिरफ्तार करने से कुछ नहीं होगा’ उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि हज़ारों नशेड़ियों और छोटे कारोबारियों को गिरफ्तार करने से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि बड़ी मछलियों को पकड़ने और अंतिम लाभार्थियों को गिरफ्तार करने के लिए धन का प्रवाह स्थापित करना होगा, चाहे वे विभिन्न दलों के राजनेता हों या अधिकारी. उन्होंने कहा कि पंजाब में ड्रग कार्टेल किसी न किसी तरह के संरक्षण के बिना फल-फूल नहीं सकते. उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं के कारोबार में पैसे का पता लगाना ज़रूरी है, क्योंकि इसके बिना पंजाब से नशीली दवाओं को जड़ से उखाड़ने की कोशिश न केवल निरर्थक है, बल्कि एक दिखावा भी है.  

उत्तर बस्तर कांकेर : ग्राम पंचायत चारगांव में जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर 12 दिसम्बर को

उत्तर बस्तर कांकेर  कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के निर्देशानुसार जिले के आम नागरिकों की आवश्यकताओं, शिकायतों एवं समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में आगामी 12 दिसम्बर शुक्रवार को कोयलीबेड़ा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत चारगांव में जनसमस्या निवारण शिविर शिविर लगाई जाएगी, जिसमें ग्राम पंचायत चारगांव, छोटेबोदेली, पोरोण्डी, सिकसोड़, सुलंगी, तुरसानी और बदरंगी इत्यादि ग्राम पंचायतों के ग्रामीण शामिल होंगे। शिविर में शासन की लोक कल्याणकारी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने के लिए ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया जाएगा, साथ ही योजनाओं का लाभ उठाने में कोई कठिनाई आ रही हो तो उसका समाधान भी शिविर में किया जाएगा। कलेक्टर ने जनसमस्या निवारण शिविर में सभी जिला स्तरीय, ब्लॉक स्तरीय एवं क्लस्टर स्तर के अधिकारी-कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।

सरकारी–प्राइवेट अस्पतालों के लिए बड़ी गाइडलाइन जारी, बकाया बिल विवाद पर सरकार का स्पष्ट आदेश

चंडीगढ़  पंजाब में अब निजी या सरकारी अस्पताल बकाया बिल के कारण किसी भी शव को परिजनों को सौंपने से इनकार नहीं कर सकेंगे। साथ ही, अज्ञात शव को 72 घंटे से अधिक समय तक अस्पताल में रखने की भी अनुमति नहीं होगी। पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग को विशेष निर्देश जारी करते हुए कहा है कि पंजाब में मृतकों की गरिमा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि मृतक से संबंधित कोई बकाया राशि होती भी है, तो अस्पताल बाद में कानूनी तरीके से बिल की वसूली कर सकता है, लेकिन शव को बिना देरी किए परिजनों को सौंपना अनिवार्य होगा। बिल का भुगतान न करने की स्थिति में परिजनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। मानवाधिकार आयोग ने अस्पतालों में मरीजों के बेड की संख्या को ध्यान में रखते हुए शवों की संभाल से संबंधित विशेष प्रोटोकॉल भी तय किए हैं। आयोग के संज्ञान में फगवाड़ा अस्पताल का एक मामला भी आया था, जहां शवों को कूड़ा ले जाने वाले वाहन में ले जाया गया था। सभी अस्पतालों को करनी होगी मॉर्चरी वैन की व्यवस्था आयोग के सदस्य जतिंदर सिंह शंटी ने सभी अस्पतालों को मॉर्चरी वैन (शव वाहन) की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, अस्पतालों और अन्य स्थानों पर मॉर्चरी वैन से जुड़े संपर्क नंबर और नि:शुल्क अंतिम संस्कार योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराना भी अनिवार्य होगा। इस जानकारी में मॉर्चरी वैन चालकों के संपर्क नंबर और लावारिस शवों के प्रबंधन के लिए हेल्पडेस्क नंबर शामिल होंगे। आयोग ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि जब अस्पताल में कोई लावारिस शव होता है, तो उसकी पहचान कराने के नाम पर अस्पताल और पुलिस उसे लंबे समय तक मॉर्चरी में रख देते हैं। अब भविष्य में ऐसा नहीं किया जाएगा। कोई भी अस्पताल 72 घंटे से अधिक समय तक लावारिस शव नहीं रख सकेगा। ऐसे लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए मॉर्चरी वैन नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। वहीं जिन परिवारों के पास अंतिम संस्कार की व्यवस्था नहीं है, उनकी सहायता अस्पताल द्वारा की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ध्यान में रखते हुए अस्पताल इस जिम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकेंगे।  

वीर सावरकर अवॉर्ड पर शशि थरूर का खुलासा—क्या कांग्रेस सांसद होंगे सम्मानित?

नई दिल्ली  कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को एक ट्वीट के जरिए यह खुलासा किया है कि उन्हें दिल्ली में आज दिए जाने वाले “वीर सावरकर अवॉर्ड” के बारे में न तो कोई आधिकारिक सूचना मिली है और न ही उन्होंने इसे स्वीकार किया है। थरूर ने लिखा कि उन्हें केवल मीडिया रिपोर्टों से पता चला कि उनका नाम पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं में शामिल किया गया है। थरूर ने बताया कि वे स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान के लिए केरल गए थे, जहां उन्हें पहली बार इस अवॉर्ड के बारे में मीडिया से पता चला। उन्होंने कहा, “मैं न इस अवॉर्ड से अवगत था, न ही इसे स्वीकार किया है। आयोजकों द्वारा मेरी सहमति के बिना मेरा नाम घोषित करना पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना है।” उन्होंने कहा, “अवॉर्ड की प्रकृति, आयोजकों या किसी भी संदर्भ के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। ऐसे में कार्यक्रम में भाग लेने या अवॉर्ड स्वीकार करने का प्रश्न ही नहीं उठता।” आपको बता दें कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। हाल ही में उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए आयोजित राजकीय भोज में “गर्मजोशी भरा और आत्मीय” माहौल था तथा कई लोगों से बातचीत करना आनंददायक था। थरूर की यह टिप्पणी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पुतिन के सम्मान में दिए गए भोज के एक दिन बाद आई थी। थरूर ने शनिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, "शुक्रवार रात राष्ट्रपति पुतिन के लिए राष्ट्रपति भवन में आयोजित भोज में शामिल हुआ। माहौल बेहद गर्मजोशी भरा और आत्मीय था। वहां उपस्थित कई लोगों से बातचीत करने का आनंद लिया, खासतौर पर रूसी प्रतिनिधिमंडल से आए साथी बेहद अच्छे थे।’’  

हड़ताल नहीं चलेगी! हरियाणा सरकार ने डॉक्टरों पर लगाया 6 महीने का एस्मा

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने डॉक्टरों की हड़ताल पर सख्त कार्रवाई करते हुए प्रदेश में अगले 6 महीने के लिए आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (ESMA) लगा दिया है. सरकार ने हरियाणा आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम, 1974 (1974 का 40) की धारा 4 (क) की उप-धारा (1) के तहत डॉक्टरों की हड़ताल पर रोक लगा दी है. सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि एस्मा 8 दिसंबर से लागू होगा और अगले छह महीने की अवधि के लिए स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक और कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकेंगे. आदेश में कहा गया है कि हरियाणा के राज्यपाल ने भी इस बात को माना है कि गंभीर रूप से बीमार और अन्य मरीजों की देखभाल सुनिश्चित करने और जन साधारण के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का निर्वाध परिदान बनाए रखने के लिए कोई भी हड़ताल सार्वजनिक स्वास्थ्य और समुदाय के जीवन के लिए आवश्यक सेवाओं पर गंभीर रूप से असर डालेगी. 6 महीने तक डॉक्टरों की हड़ताल पर रोक आदेश में आगे कहा गया है कि अब हरियाणा आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम 1974 (1974 का 40) की धारा 4 (क) की उप धारा (1) के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते राज्य में एस्मा लगाया जा रहा है जो कि अगले छह महीने तक डॉक्टरों के किसी भी प्रकार के हड़ताल पर रोक लगाता है.   दरअसल, हरियाणा में सभी सरकारी अस्पतालों और डिस्पेंसरियों के डॉक्टरों ने मंगलवार को प्रमोशन से जुड़े मुद्दे को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया. डॉक्टरों के इस ऐलान से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के बेपटरी हो जाने का अंदेशा था. हरियाणा के चिकित्सा अधिकारी राज्य स्वास्थ्य विभाग में शामिल होने के बाद प्रमोशन के सीमित अवसरों से निराश हैं. हड़ताल को लेकर डॉक्टरों का क्या कहना था? हड़ताल पर जाने वाले डॉक्टरों का कहना था कि उनके अधिकतर सहयोगियों को अपने पूरे करियर में केवल एक ही बार प्रमोशन मिलती है. कुछ डॉक्टरों की यह भी शिकायत थी कि वर्तमान नीति के तहत 75 फीसदी एसएमओ पद पदोन्नति के जरिए भरे जाते हैं जबकि 25 फीसदी सीटें सीधी भर्ती के लिए आरक्षित हैं. डॉक्टरों का तर्क है कि सीधी भर्ती वाले एसएमओ अपने करियर में बहुत आगे बढ़ जाते हैं, कुछ तो महानिदेशक के पद तक पहुंच जाते हैं, जबकि सेवारत डॉक्टर स्थिर रहते हैं.  

चुनाव से ठीक पहले SSP वरुण शर्मा ने ली छुट्टी, पटियाला में वायरल ऑडियो क्लिप पर आज अदालत का फैसला

पटियाला जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव से ठीक पहले पटियाला में बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। मतदान 14 दिसंबर को होना है और इसी बीच पटियाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) वरुण शर्मा अचानक एक सप्ताह की छुट्टी पर चले गए हैं। यह कदम उस समय उठाया गया है जब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में आज वायरल ऑडियो-क्लिप विवाद पर अहम सुनवाई होनी है। पुलिस विभाग के सूत्रों ने पुष्टि की है कि SSP शर्मा मंगलवार शाम को अवकाश पर चले गए। फिलहाल संगरूर SSP सरताज चाहल को पटियाला की पुलिस व्यवस्था का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। हालांकि, यह राज्य चुनाव आयोग पर निर्भर करेगा कि वह पटियाला जिले के चुनाव-सम्बंधित कार्यों की निगरानी के लिए किसी अन्य अधिकारी की आधिकारिक तौर पर नियुक्ति करता है या नहीं। एक वरिष्ठ IPS अधिकारी ने कहा, “SSP वरुण शर्मा छुट्टी पर हैं। इसकी जानकारी चंडीगढ़ मुख्यालय को भी दे दी गई है।” हाईकोर्ट ने दिया था जांच तेज करने का निर्देश छुट्टी का यह निर्णय उस समय आया है जब हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य चुनाव आयोग को वायरल ऑडियो क्लिप की जांच तेज करने का आदेश दिया था। शिरोमणि अकाली दल (SAD) अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने पिछले सप्ताह एक ऑडियो क्लिप जारी की थी, जिसमें कथित रूप से SSP शर्मा अपने अधीनस्थ अधिकारियों को विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन भरने से रोकने के निर्देश देते सुनाई दे रहे हैं। निष्पक्ष चुनाव की मांग, CBI जांच की अपील पूर्व विधायक डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान विपक्षी दलों को व्यवस्थित रूप से रोका गया। याचिका में SSP शर्मा के निलंबन, और सात दिनों के भीतर CBI-निगरानी में FIR दर्ज करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब आरोप पुलिस व्यवस्था के कामकाज से जुड़े हों तो राज्य पुलिस द्वारा ‘आंतरिक जांच’ का कोई अर्थ नहीं है। याचिका में उस कथित वायरल कॉन्फ्रेंस कॉल का भी जिक्र है, जिसे कोर्ट में प्रस्तुत किया गया है। इसमें कथित रूप से कहा गया है कि विपक्षी उम्मीदवारों को घरों और रास्तों में रोका जाए, स्थानीय विधायकों के निर्देश माने जाएं, सत्ताधारी दल AAP से जुड़े लोगों को “सकारात्मक रिपोर्ट” मिले और रिटर्निंग अधिकारी विपक्षी नामांकन रद्द कर दें ताकि कई सीटें बिना मुकाबले जीत ली जा सकें—जो आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है।   राजनीतिक तापमान बढ़ा पटियाला SSP के छुट्टी पर जाने से राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। अब नजरें आज होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई और चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

संजय पाठक पर राष्ट्रीय जनजाति आयोग करेगा जांच, कलेक्टर से आदिवासी जमीन खरीदी की रिपोर्ट की मांग

भोपाल  विधायक संजय पाठक से जुड़ा आदिवासी भूमि खरीद का विवाद गहराता जा रहा है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने उनके विरुद्ध दर्ज शिकायत को गंभीर मानते हुए मध्यप्रदेश के पांच जिलों कटनी, जबलपुर, उमरिया, डिंडौरी और सिवनी के कलेक्टरों को जांच के आदेश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी कलेक्टर एक माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करें, अन्यथा समन जारी कर व्यक्तिगत रूप से तलब किया जाएगा। आयोग ने यह भी चेताया है कि समय सीमा के भीतर जवाब नहीं मिलने की स्थिति में वह संविधान के अनुच्छेद 338(क) के तहत सिविल कोर्ट जैसी शक्तियों का उपयोग करेगा।  कर्मचारियों के नाम पर खरीदी गई जमीन होने का आरोप आयोग को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संजय पाठक ने अपने कुछ अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों के नाम पर आदिवासी क्षेत्रों में जमीन खरीदी है। आयोग ने 5 दिसंबर को सभी संबंधित जिलों के कलेक्टरों को पत्र भेजते हुए इस पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। शिकायतकर्ता दिव्यांशु मिश्रा का आरोप है कि डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, उमरिया और सिवनी जिलों में बैगा जनजाति के लोगों के नाम पर बड़े पैमाने पर बेनामी भूमि खरीदी गई है, जिसकी अनुमानित कीमत अरबों रुपये बताई जा रही है। NCST ने लिया संज्ञान इस पर संज्ञान में लेते हुए आयोग ने इन जिलों के कलेक्टरों से कहा है कि सभी कलेक्टर पत्र मिलने के बाद एक माह के अंदर प्रकरण में तथ्य और टिप्पणियां राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को व्यक्तिगत रूप से या अन्य संचार माध्यमों से उपलब्ध कराएंगे। आयोग के निर्देश पर डिंडोरी कलेक्टर ने जांच कर जानकारी भेज दी है, लेकिन चार कलेक्टरों जबलपुर, सिवनी, कटनी और उमरिया के कलेक्टर ने जानकारी नहीं दी है। इस पर आयोग ने उन्हें अंतिम चेतावनी दी है। शिकायत के बाद आयोग की सख्ती कटनी निवासी दिव्यांशु मिश्रा अंशु द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में दावा किया गया कि विजय राघवगढ़ से विधायक संजय पाठक ने अनुसूचित जनजाति के अपने कर्मचारियों के नाम पर जमीन खरीदी। आयोग ने 5 दिसंबर को कटनी, जबलपुर, उमरिया, डिंडौरी और सिवनी के कलेक्टरों को पत्र भेजकर कहा कि वे बैगा जनजाति के साथ धोखाधड़ी कर की गई भूमि खरीद के पूरे मामले की जांच कर तथ्य आयोग को उपलब्ध कराएं। आयोग ने पत्र में उल्लेख किया कि अरबों रुपए की बेनामी खरीद इन जिलों में बताई जा रही है, इसलिए प्रत्येक कलेक्टर एक माह के भीतर पूरे प्रकरण पर अपनी टिप्पणियां और दस्तावेज व्यक्तिगत रूप से या आवश्यक संचार माध्यमों से आयोग को भेजें। कलेक्टरों को आयोग की चेतावनी आयोग के अनुसार पांच में से सिर्फ डिंडौरी कलेक्टर ने अपनी रिपोर्ट भेजी है, जबकि सिवनी, जबलपुर, कटनी और उमरिया कलेक्टरों ने अब तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। इस पर आयोग ने चारों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय पर रिपोर्ट नहीं आई तो संविधान के अनुच्छेद 338 क के तहत उपलब्ध सिविल कोर्ट की शक्तियों का उपयोग कर उन्हें या उनके प्रतिनिधियों को आयोग के समक्ष बुलाया जाएगा। आयोग ने माना कि यह मामला जनजातीय अधिकारों और भूमि सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसे टालना स्वीकार्य नहीं होगा। 795 एकड़ जमीन पर खनन की तैयारी का दावा शिकायत में यह भी कहा गया है कि कटनी जिले के चार आदिवासी कर्मचारियों के नाम पर डिंडौरी जिले में करीब 795 एकड़ जमीन खरीदी गई है। यह जमीन बजाग तहसील के पिपरिया माल, बघरेली सानी, सरई टोला और हर्रा टोला क्षेत्रों में स्थित है। जमीन खरीद वर्ष 2025 के बाद से होना बताया गया है। शिकायत के अनुसार यह भूमि रघुराज सिंह गौड़, नत्थू कोल, राकेश सिंह गौड़ और प्रहलाद कोल के नाम दर्ज है तथा यहां बाक्साइट खनन की तैयारी की जा रही है। उन्होंने सभी संबंधित खातों की वित्तीय जांच की भी मांग की है। कलेक्टरों को आयोग ने अंतिम चेतावनी जारी की  शिकायतकर्ता ने बताया कि 15 सितंबर को आयोग को शिकायत सौंपी गई थी। इसके बाद आयोग के निर्देश पर केवल डिंडौरी कलेक्टर ने जांच कर रिपोर्ट भेजी है। जबकि कटनी, जबलपुर, उमरिया और सिवनी के कलेक्टरों से अब तक जानकारी नहीं मिली है। इस पर आयोग ने चारों जिलों को अंतिम चेतावनी जारी कर दी है। विधायक अलावा ने सीएम सचिवालय को दी शिकायत  इस प्रकरण में कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखित शिकायत दी है। उनके पत्र के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। इसके क्रम में जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त ने डिंडौरी कलेक्टर को पत्र भेजकर उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने को कहा है। अपर आयुक्त द्वारा जारी पत्र में उल्लेख है कि बजाग तहसील के संरक्षित बैगा बहुल क्षेत्र में करीब 1200 एकड़ आदिवासी भूमि के कथित बेनामी सौदों की विस्तृत जांच आवश्यक है।  बैगा आदिवासियों की 795 एकड़ जमीन खरीदी गई शिकायतकर्ता के अनुसार बैगा आदिवासियों को धोखे में रखकर लगभग 795 एकड़ जमीन खरीदी गई और इस भूमि का उपयोग आगे चलकर बॉक्साइट खदानों के लिए किया जाना प्रस्तावित है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन कर्मचारियों के खातों में हुए लेन-देन और वित्तीय गतिविधियों की भी जांच होनी चाहिए, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में भूमि खरीद उनकी वास्तविक आर्थिक क्षमता से मेल नहीं खाती। यह संदेह पैदा करता है कि जमीन वास्तव में बेनामी तरीके से खरीदी गई हो सकती है। आयोग को सितंबर में की गई इस शिकायत पर केवल डिंडौरी कलेक्टर ने ही अपनी रिपोर्ट भेजी है, जबकि सिवनी, जबलपुर, कटनी और उमरिया के कलेक्टरों ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। आयोग ने इसे अत्यंत गंभीर माना है और चारों जिलों के कलेक्टरों को अंतिम चेतावनी जारी की है। आयोग की इस कड़ी प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि आदिवासी जमीन से संबंधित मामलों में लापरवाही को वह किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं करेगा, खासकर तब जब मामला बैगा जैसे विशेष पिछड़ी जनजाति की जमीन से जुड़ा हो, जिनकी सुरक्षा के लिए कानून में विशेष प्रावधान मौजूद हैं। इस प्रकरण को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज है। कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा पहले ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इस … Read more