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MP के दतिया में कलेक्टर ने लगाया प्रतिबंध, प्रतिमाओं के सामने पोस्टर और विज्ञापन लगाने पर सख्त एक्शन होगा

दतिया  देश के विभिन्न प्रदेशों की तरह ही मध्य प्रदेश में भी चौराहों, तिराहों पर महापुरुषों, संतों आदि की मूर्तियाँ स्थापित हैं, इनकी स्थापना के समय बहुत ही सम्मान के साथ इनका यशगान किया जाता हैं लेकिन कुछ समय बाद ही इन प्रतिमाओं को विज्ञापनों, बैनरों, पोस्टरों आदि से पाट दिया जाता है लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा, दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने उनके जिले में ये प्रतिबंधित कर दिया है। दतिया कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट स्वप्निल वानखड़े ने शहर की सुंदरता और महापुरुषों के सम्मान को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण और सख्त आदेश जारी किया है। अब जिले में संतों और महापुरुषों की प्रतिमाओं के सामने किसी भी प्रकार के होर्डिंग, फ्लैक्स या बैनर लगाने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह सार्वजनिक मर्यादा और प्रशासनिक आदर्शों के विपरीत” आदेश में कलेक्टर ने लिखा, जिला प्रशासन के संज्ञान में आया था कि शहर और जिले के विभिन्न स्थानों पर स्थापित प्रतिमाओं के आगे निजी और संस्थागत प्रचार सामग्री लगा दी जाती है। इससे न केवल प्रतिमाएं स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देतीं, बल्कि यह सार्वजनिक मर्यादा और प्रशासनिक आदर्शों के भी विपरीत है। कलेक्टर ने कहा कि महापुरुषों की प्रतिमाएं प्रेरणा और सम्मान का प्रतीक हैं, इसलिए उनके सामने अनधिकृत विज्ञापन लगाना अनुचित है। आदेश में दतिया शहर के प्रमुख 15 स्थानों का जिक्र   आदेश में दतिया शहर की 15 प्रमुख जगहों और प्रतिमाओं का विशेष उल्लेख किया गया है, जहाँ अक्सर यह समस्या देखी जाती है। जिनमें स्वामी विवेकानंद पटवा तिराहा, महात्मा गांधी गांधी पार्क किला चौक, डॉ. भीमराव अम्बेडकर, किला चौक, महाराज भवानी सिंह किला चौक भवानी पार्क, महाराज गोविन्द सिंह किला चौक गोविन्द पार्क, मैथिलीशरण गुप्त राजगढ़ चौराहा पीताम्बरा मंदिर के पास, महाराज अग्रसेन बम-बम महादेव बस स्टैण्ड़ के पास, रामचेरे प्रजापति समाज बस स्टैण्ड के पास, अवंतिका बाई लोधी, भाण्ड़ेर रोड़ देहात थाना के पास, देवी अहिल्या बाई पुलिस कंट्रोल रूम के पास सिविल लाईन, सरदार वल्लभ भाई पटेल मेडीकल कॉलेज के पास एनएच-44, बाल्मीकि समाज पार्क गहोई वाटिका के सामने, संत गाडगे बाबा गहोई वाटिका के सामने, डॉ. भीम राव अम्बेडकर अम्बेडकर पार्क एनएच-44 के नाम शामिल है। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर एक्शन के निर्देश  कलेक्टर ने स्थानीय निकाय, पुलिस प्रशासन और राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वर्तमान में प्रतिमाओं के सामने लगी किसी भी प्रकार की प्रचार सामग्री को तत्काल हटाया जाए। साथ ही भविष्य में प्रतिमाओं के समक्ष होर्डिंग/बैनर लगाने की अनुमति न दी जाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए। यह आदेश दतिया शहर सहित सम्पूर्ण जिले की राजस्व सीमा में स्थापित सभी प्रतिमाओं पर लागू होगा।

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, शादी से पहले लिव इन में रह सकते हैं युवाओं

 जयपुर राजस्थान हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि दो व्यस्क आपसी सहमति से तब भी लिव इन में रह सकते हैं जब उनकी उम्र शादी के लायक नहीं हुई है। देश में शादी के लिए लड़की की आयु कम से कम 18 और लड़के की न्यूनतम 21 निर्धारित है, जबकि व्यस्क होने की उम्र 18 है। जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने ऐसे ही दो व्यस्क की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अहम आदेश पारित किया। राजस्थान के कोटा की रहने वाली 18 साल की लड़की और 19 साल के लड़के ने संरक्षण की मांग की थी। लड़की की उम्र शादी के लायक हो चुकी है, लेकिन लड़के की उम्र में अभी दो साल की कमी है। फैसले की कॉपी गुरुवार को अपलोड की गई। इसके मुताबिक, दोनों ने पुलिस सुरक्षा की मांग करते हुए कहा था कि वे आपसी सहमति से लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। कपल ने 27 अक्टूबर 2025 को लिव इन अग्रीमेंट बनाया था। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक लड़की का परिवार इस रिश्ते के खिलाफ है और उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। उन्होंने कहा कि पुलिस के सामने लिखित अपील के बाद भी कोई ऐक्शन नहीं लिया गया। राज्य की ओर से पेश हुए लोक अभियोजक विवेक चौधरी ने दलील दी कि चूंकि लड़के की उम्र 21 नहीं हुई है इसलिए वह कानूनी रूप से शादी नहीं कर सकता है। इसलिए उन्हें लिव इन पार्टनरशिप में रहने की इजाजत नहीं देनी चाहिए। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि संविधान का आर्टिकल 21 'जीवन जीने का अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता'की गारंटी प्रदान करता है और कोई धमकी संवैधानिक उल्लंघन है। अदालत ने जोर देकर कहा कि राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि हर नागरिक से जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा हो। जज ने कहा, 'सिर्फ इसलिए कि याचिकाकर्ताओं की उम्र शादी के लिए लायक नहीं हुई है, उन्हें मौलिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है।' अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय कानूनों के तहत लिव इन ना तो अवैध ही और ना ही अपराध। अदालत ने भीलवाड़ा और जोधपुर रूरल के एसपी को धमकी के आरोपों की जांच करने और कपल को जरूरत पड़ने पर सुरक्षा देने का आदेश दिया।

जनवरी से शुरू होगा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का काम, किसानों को पैसा मिलते ही तेज़ होगी प्रक्रिया—ग्वालियर से आगरा डेढ़ घंटे में

मुरैना  ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे का काम जनवरी से शुरू करने का गणित बनाया जा रहा है। अभी तक अधिग्रहित जमीन का पैसा 65 फीसदी किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जा चुका है। चूंकि निर्माण एजेंसी 90 फीसदी जमीन यानि 475 हेक्टेयर जमीन मिलने के बाद काम शुरू कराएगी, इसलिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण शेष भूमि से जुड़े किसानों से जमीन लेने के प्रयास कर रहा है। एनएचएआई की मानें तो प्रोजेक्ट वर्क शुरू होने के ढाई साल की समयावधि में अनुबंधित निर्माण एजेंसी को आगरा से ग्वालियर के बीच सिक्सलेन-वे बनाकर तैयार करना होगा। नया रूट मिलने के बाद ग्वालियर के लोग आगरा की 88.4 किमी की दूरी डेढ़ घंटे में तय सकेंगे। ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे बनाने पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 4612 करोड़ रुपये खर्च करेगा। एनएचएआई को मध्य प्रदेश, राजस्थान व उत्तरप्रदेश में 550 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। इसमें किसानों की निजी भूमि से लेकर सरकारी व वन भूमि शामिल है। इसमें से अभी तक 65 फीसदी जमीन एनएचएआई को राजस्व विभाग उपलब्ध करा चुका है। जमीन इस प्रोजेक्ट में देने को तैयार नहीं नियम के मुताबिक, निर्माण एजेंसी को इस प्रोजेक्ट के लिए 550 हेक्टेयर भूमि का 90 फीसदी हिस्सा चाहिए इसलिए अभी 25 प्रतिशत निजी भूमि और उपलब्ध होने के बाद जीआर इंफ्रा प्रालि सिक्सलेन-वे बनाने का काम शुरू करा सकेगी। ऐसा माना जा रहा है कि जनवरी में इस प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य का श्रीगणेश करा दिया जाएगा। अभी एक तिहाई किसान जमीन अधिग्रहण के बदले चार गुना मुआवजा देने की मांग को लेकर अपनी बेशकीमती जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए देने में ना-नुकुर कर रहे हैं। कलेक्टर रेट से दोगुना मुआवजा होने से दिक्कत किसी भी प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण के बाद दिए जाने वाले मुआवजे के लिए उत्तर प्रदेश व राजस्थान सरकार का गुणांक दो होने से वहां जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को कलेक्टर रेट से चार गुना मुआवजा देने का प्राविधान है। मप्र में कलेक्टर रेट से दोगुना राशि का मुआवजा मिलता है। उप्र-राजस्थान की मुआवजा दरों की जानकारी मुरैना जिले के किसानों को अच्छे से है, ऐसे में किसान राज्य सरकार से गुणांक बदलकर दो करने व मुआवजा की राशि चार गुना देने की जिद पर अड़े हैं। इसलिए ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे के लिए अभी बड़ी संख्या में किसान अपनी खेती की जमीन देने से मुंह मोड़े हुए हैं। यहां बता दें कि कलेक्टर ने भी ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे प्रभावित क्षेत्र की जमीनों की गाइडलाइन दो साल से नहीं बढ़ाई है, जबकि पूरे जिले की प्रमुख साइटों के रेट दो बार 20-20 प्रतिशत बढ़ा दिए गए। एक नजर प्रोजेक्ट पर     आगरा से ग्वालियर के बीच सिक्सलेन-वे की लंबाई की 88.4 किलोमीटर होगी।     ग्वालियर से आगरा के बीच सफर में लगने वाला समय एक घंटा 30 मिनट होगा।     ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे के बीच बड़े पुल की संख्या 08 और छोटे पुल की संख्या 23 रहेगी।     फ्लाईओवर की संख्या छह, आरओबी की संख्या एक और वायोडक्ट की संख्या पांच रहेगी।  

उम्मीद पोर्टल की सुस्त रफ्तार से वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण रुका, समय सीमा बढ़ाने की अपील

 खंडवा देशभर में इस समय वक्त संपत्तियों को लेकर मुस्लिम समाज परेशान दिख रहा है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट से जारी निर्देशों के बाद केंद्र सरकार के द्वारा सभी वक्फ संपत्तियों को दर्ज करने के लिए एक केंद्रीय कृत वेब पोर्टल बनाया गया है, जिसका नाम उम्मीद पोर्टल है। हालांकि यही उम्मीद पोर्टल मुस्लिम समाज जन को न उम्मीद करता दिख रहा है और बीते कुछ दिनों से लगातार इस पोर्टल का सर्वर स्लो चलने के चलते वक्फ संपत्तियां इस पर दर्ज नहीं हो पा रही हैं । वहीं] मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां 15 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियां मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दर्ज हैं, जबकि इनमें से लगभग 6 हजार वक्फ संपत्ति ही इस समय तक केंद्रीयकृत वेब पोर्टल उम्मीद पर दर्ज हो पाई हैं और इसकी अंतिम समय सीमा 5 दिसंबर तय की गई हैं, ऐसे में बची हुई संपत्तियां दर्ज हो पाना नामुमकिन है। वहीं इसको लेकर मध्य प्रदेश के खंडवा सहित प्रदेश और देश भर में वक्फ संपत्तियों को दर्ज करने की समय सीमा बढ़ाये जाने को लेकर आवाज उठाई जा रही है। इसी बीच खंडवा के मुस्लिम समाज ने भी गुरुवार शाम जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंप कर तारीख आगे बढ़ाई जाने की मांग की है। यही नहीं खंडवा शहर काजी और मुस्लिम जनप्रतिनिधि एवं समाज के वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं ने उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों को दर्ज किए जाने की समस्या के चलते राष्ट्रपति और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरण रिजजू से गुहार लगाई है कि वे इस समस्या को देखते हुए अंतिम समय सीमा को लगभग 6 माह तक आगे बढ़ाएं, जिससे कि सभी वक्फ संपत्तियां दर्ज की जा सकें। इस दौरान ज्ञापन देने पहुंचे शहर काजी सैयद निसार अली ने बताया कि वक्फ संपत्तियों को दर्ज करने वाला उम्मीद पोर्टल या तो चल ही नहीं रहा है या फिर इतना स्लो चल रहा है कि एक-एक संपत्ति को दर्ज करने में पूरा-पूरा दिन ही निकल जा रहा है। हालात यह हैं कि अब तक मात्र 30 प्रतिशत वक्फ संपत्तियां ही इस पोर्टल पर दर्ज हो पाई हैं, ऐसे में अल्पसंख्यक और खासकर मुस्लिम समाज के अधिकारों और उनकी वक्फ संपत्तियों की रक्षा करने हेतु अंतिम समय सीमा बढ़ाई जाना चाहिए, और इसको लेकर ही उन्होंने राष्ट्रपति के साथ ही देश के पीएम नरेंद्र मोदी से भी इस समय सीमा को बढ़ाये जाने की गुहार लगाई है। 

बिना इजाजत लगेगा स्मार्ट मीटर! MP सरकार के जवाब से बढ़ा विवाद

भोपाल प्रदेशभर में स्मार्ट मीटरों को लेकर उठ रहे सवालों और शंकाओं को लेकर सरकार ने विधानसभा में जवाब दिया कि स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ता की सहमति लिया जाना आवश्यक नहीं है। बिजली कंपनियों द्वारा चेक मीटरों को लगाया जा रहा है, अभी तक बिजली वितरण कंपनियों ने 31335 चेक मीटर लगाए हैं। स्मार्ट मीटरों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक कैलाश कुशवाह, राजन मंडलोई, दिलीप परिहार द्वारा लगाए गए प्रश्नों के उत्तर में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह जानकारी दी। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि भविष्य में स्मार्ट मीटरों की स्थापना के लिए जारी होने वाली निविदाओं में पांच प्रतिशत चेक मीटर लगाए जाने का प्रविधान रखा जाना है।   स्मार्ट मीटरों के संबंध में भी शिकायत प्राप्त होने पर चेक मीटर लगाकर उपभोक्ता की शिकायत का संतुष्टिपूर्वक निराकरण किया जा रहा है। स्मार्ट मीटर लगाए जाने से विद्युत उपभोक्ताओं को विभिन्न लाभ यथा विद्युत खपत एवं जिलों में पारदर्शिता, रियल टाइम खपत की निगरानी, शासन की सब्सिडी योजनाओं का लाभ पात्र उपभोक्ताओं को प्राप्त होगा। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक 20 प्रतिशत की छूट निम्न दाब उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर स्थापित कराए जाने पर दिन के समय (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) ऊर्जा प्रभार में 20 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। उक्त स्मार्ट मीटरों में नेट मीटरिंग की उपलब्धता होने के दृष्टिगत सोलर का विकल्प लेने वाले उपभोक्ताओं को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इसका लाभ प्राप्त हो रहा है। वर्तमान में बिजली कंपनियों को निजी हाथों में बेचने संबंधी कोई भी कार्रवाई प्रचलन में नहीं है। ऊर्जा विभाग अंतर्गत कार्यरत तीनों बिजली वितरण कंपनियों में से पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा ही दो निविदाओं के माध्यम से स्मार्ट मीटर क्रय किए गए है। स्मार्ट मीटरों की स्थापना का कार्य डिजायन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन आपरेट ट्रांसफर माडल पर किया जा रहा है। ऊर्जा मंत्री ने बताया-पांच नहीं शत प्रतिशत मीटरों की हो रही जांच     ऊर्जा मंत्री ने जानकारी में बताया कि प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों में पांच प्रतिशत मीटर नहीं शत प्रतिशत लगाए जा रहे मीटरों की जांच लैबोरेटरी में कराई जा रही है।     शहरी क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण, विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार की अधिसूचना व मध्यप्रदेश विद्युत प्रदाय संहिता-2021 के अध्याय-8 "विद्युत मापन तथा बिलिंग" के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में आरडीएसएस योजना के अंतर्गत पारदर्शी बिलिंग, मीटर रीडिंग प्रणाली में सुधार और सटीक ऊर्जा लेखाकंन के लिए लगाए जा रहे हैं। 

नेताओं की फिजूलखर्ची पर उमा भारती का हमला: बोले—‘काला धन शादियों में किया जाता है खर्च’

टीकमगढ़ नेता अक्सर दो नंबर का पैसा खपाने के लिए शादियों में फिजूलखर्ची करते हैं। आजकल अधिकांश शादियां मैरिज गार्डन में हो रही हैं और इनमें अत्यधिक खर्च किया जा रहा है। बड़े-बड़े उद्योगपति शादियों में करोड़ों रुपये देकर मंच सजाकर डांसर बुलाते हैं। इतने रुपयों में हजारों गरीब बेटियों के विवाह कराए जा सकते हैं। अगर हम सीमित साधनों में काम चलाना शुरू कर दें तो यह भ्रष्टाचार के खिलाफ एक क्रांति होगी। पहले 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' कहा था, अब 'भ्रष्टाचारी भारत में रहो, लेकिन सुधर जाओ' कहना होगा।' यह बात पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने टीकमगढ़ में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार मिटाने के लिए अगले दस वर्षों तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पद पर रहना आवश्यक है। गौरतलब है कि मप्र की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपनी मां के नाम यात्रा निकालने के बाद मीडिया से चर्चा की। जहां पर उन्होंने जनप्रतिनिधियों और उद्योगपतियों की शादियों में होने वाली फिजूलखर्ची को लेकर बयान दिया। उन्होंने नेताओं से बार-बार आग्रह किया कि वे दिखावा न करें, क्योंकि उनकी इज्जत पहले से ही है।   बच्चे हीन भावना से ग्रस्त हो रहे हैं चर्चा के दौरान उमा भारती ने कहा कि उन्होंने उद्योगपतियों की शादियों में जाना बंद कर दिया है और अपने गार्ड को ऐसे निमंत्रण पत्र स्वीकार न करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि देश में यह प्रतिस्पर्धा आ गई है कि किसके पास ज्यादा सुविधाएं हैं। इससे बच्चे हीन भावना से ग्रस्त हो रहे हैं कि वह कमजोर हैं। यह देखकर माता-पिता प्रतिस्पर्धा करते हैं और बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए भ्रष्टाचार करना शुरू कर देते हैं, जबकि सीमित साधनों में भी काम चलाया जा सकता है। पूर्व सीएम ने ऐसे में नेताओं से शादियों में फिजूलखर्ची बंद करने की सलाह दी है।

जहरीला कफ सिरप! मध्यप्रदेश में बच्चों द्वारा पी गई दवा में 42 फीसदी डीईजी मिला

भोपाल मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सीरप के तीन और सैंपल अमानक पाए गए हैं। इनमें डायथिलीन ग्लाइकाल (डीईजी) की मात्रा 42 प्रतिशत पाई गई है। जबकि निर्धारित मानक के अनुसार, किसी भी कफ सीरप में डीईजी की मात्रा 0.1 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। ये तीनों उन बाटल के सैंपल हैं, जो बच्चों द्वारा पीने के बाद बच गए थे। इनके सैंपल की जांच मध्य प्रदेश में विषाक्त कफ सीरप से 24 बच्चों की मौत के मामले की जांच कर रही एसआईटी ने राज्य औषधि लैब से कराई है। इससे साफ है कि बच्चों की मौत अधिक डीईजी मिश्रित कोल्ड्रिफ कप सीरप पीने से ही हुई।   दरअसल, अधिक मात्रा में डीईजी का सेवन किडनी फेल कर देता है। बता दें कि इसके पहले तमिलनाडु औषधि प्रशासन की जांच में कोल्ड्रिफ सीरप में डीईजी की मात्रा 48.6 प्रतिशत और मध्य प्रदेश औषधि प्रशासन विभाग की जांच में 46.2 प्रतिशत मिली थी। उल्लेखनीय है कि कोल्ड्रिफ कफ सीरप बैच नंबर एसआर-13 के अतिरिक्त, खांसी का ही सीरप रिलाइफ बैच नंबर एलएसएल 25160 और रेस्पीफ्रेस टीआर-आर 01जीएल 2523 भी अमानक मिला था। इनमें डीईजी की मात्रा निर्धारित मानक से अधिक थी।   चार दवाएं भी अमानक मिलीं वहीं, मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया है कि कफ सीरप से बच्चों की मौत के बाद प्रदेश भर में कफ सीरप के जितने सैंपल लिए गए थे, उनमें इनमें 109 मानक के अनुरूप और तीन अमानक मिले हैं। इसके अतिरिक्त बच्चों के उपयोग में आने वाली चार दवाएं अमानक मिली हैं, जिनमें पेट के उपचार के लिए उपयोग होने वाला हेप्साडिन सीरप, चिटेम-एमडी, फेरस एस्कार्बेट टैबलेट, पेट में कीड़े मारने की अलबेंडाजोल टैबलेट शामिल है। उप मुख्यमंत्री ने यह जानकारी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

पार्किंग की बड़ी सौगात: हरियाणा के इस शहर में तैयार होगी अत्याधुनिक मल्टी-लेवल पार्किंग

हिसार  हरियाणा से अच्छी खबर सामने आ रही है जहां हिसार शहर के सिटी थाना के सामने प्रस्तावित मल्टी स्टोरी पार्किंग बनाने की योजना 11 साल बाद सिरे चढ़ी। हिसार शहर के नगर निगम आयुक्त नीरज कुमार ने बताया कि मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में हिसार शहर में मल्टी स्टोरी पार्किंग स्थल बनाने की योजना को हरी झंडी दिखा दी गई है। उन्होंने बताया कि यह जमीन जीएलएफ की हैं, जो लगभग 2 एकड़, 1 कनाल और 12 मरले है। जो नगर निगम को लगभग 15 करोड़ रुपए में हस्तांतरित हुई है।  जानें इसकी खासियत     इस पार्किंग स्थल का डिजाइन राष्ट्रीय औद्योगिक संस्थान कुरूक्षेत्र द्वारा तैयार किया गया है।      इस प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य पर एजेंसी द्वारा 167 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।      इस पार्किंग स्थल पर एक साथ 850 वाहनों के खड़े होने की सुविधा मिलेगी।      पूरे पार्किंग स्थल को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा जाएगा।     नगर निगम इस जमीन को 99 साल के पट्टे पर एजेंसी को देगी।      पार्किंग स्थल पर 3 बेसमेंट, भू- तल और 3 बहुमंजिला इमारत बनेगी।       ग्राउंड फ्लोर पर 1025 वर्ग मीटर का कम्यूनिटी हॉल बनाया जाएगा।      कम्यूनिटी हॉल के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम के पास होगी, बाकी हिस्से की जिम्मेदारी एजेंसी के पास रहेगी।   

नशे पर बड़ी कार्रवाई: पंजाब में इन कैप्सूल की बिक्री पूरी तरह बैन, आदेश लागू

मानसा  डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट नवजोत कौर ने इंडियन सिविल प्रोटेक्शन कोड के सेक्शन 163 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मानसा जिले में 75 mg से ज़्यादा प्रेगाबालिन वाले कैप्सूल की बिक्री पर पूरी तरह बैन लगा दिया है। उन्होंने कहा कि केमिस्ट दवा देते समय प्रिस्क्रिप्शन स्लिप पर अपनी मुहर लगाएगा और दवा देने की तारीख दर्ज की जाएगी। डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने कहा कि सिविल सर्जन मानसा ने उनके ध्यान में लाया है कि 300 mg वाले प्रेगाबालिन कैप्सूल का आम लोग गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और कई लोग इसे नशे (जिसे सिग्नेचर भी कहते हैं) के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने मानसा जिले में इसकी बिक्री पर बैन लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सिविल सर्जन से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, मरीज को आमतौर पर उसकी हालत के हिसाब से रोजाना 25-150 mg प्रेगाबालिन की डोज दी जाती है। यह आदेश 31 जनवरी 2026 तक लागू रहेगा। 

मुख्यमंत्री ने किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की समीक्षा में दिए निर्देश

किसानों तक उर्वरक की आसान पहुंच करें सुनिश्चित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लखपति दीदी के समान लखपति बीघा का लक्ष्य रखते हुए एक बीघा से एक लाख रूपए की कमाई करने वाले किसानों को भी सम्मानित किया जाए। किसानों को बिचौलियों से बचाने और उन्हें बाजार में अपनी उपज का सीधे लाभ दिलाने के लिए आवश्यक व्यवस्था हो। प्रदेश में उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने और अद्यतन तकनीक का इस्तेमाल कर बेहतर उपज लेने के लिए ग्राम स्तर पर सघन गतिविधियां संचालित की जाएं। हर संभाग की नर्सरियों को आदर्श रूप में विकसित किया जाए। नरवाई प्रबंधन के लिए तीन वर्ष की कार्ययोजना विकसित की जाए। साथ ही किसानों तक उर्वरक की आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अद्यतन तकनीक का उपयोग करते हुए कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान ये निर्देश दिए। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, पूर्व मंत्री श्री गोपाल भार्गव, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों तथा नवाचारों का प्रस्तुतिकरण किया गया और आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि –     प्रदेश दालो, तिलहन और मक्का उत्पादन में देश में प्रथम तथा खाद्यान्न, अनाज एवं गेहूं उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है।     उर्वरक वितरण के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में 38.10 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 21.41 लाख मीट्रिक टन डी.ए.पी + एन.पी.के. वितरित किया गया। वर्ष 2025-26 में 29.77 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 30 नवम्बर तक 19.42 मीट्रिक टन डी.ए.पी + एन.पी.के. का वितरण हुआ।     प्रधानमंत्री फसल बीमा में वर्ष 2023-24 में 1 करोड़ 77 लाख बीमित कृषकों को 961.68 करोड़ रूपए और वर्ष 2024-25 में 1 करोड़ 79 लाख बीमित कृषकों को 1275.86 करोड़ रूपए के दावे का भुगतान किया गया।     मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में 4,687 करोड़ रूपए, वर्ष 2024-25 में 4,849 करोड़ रूपए और वर्ष 2025-26 में 3,374 करोड़ की सहायता राशि वितरित की गई।     प्रदेश की सभी 259 मंडियों में ई-मंडी योजना लागू हो चुकी है। इस उपलब्धि के लिए स्कॉच गोल्ड अवार्ड भी प्राप्त हुआ।     मंडी बोर्ड द्वारा एमपी फार्म गेट ऐप से किसान अपने दाम पर, अपने घर, अपने खलिहान और गोदामा से अपनी कृषि उपज बेचने में सक्षम हुआ। इस नवाचार को स्कॉच सिल्वर अवार्ड प्राप्त हुआ।     पराली प्रबंधन के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में 1312, वर्ष 2024-25 में 1757 और वर्ष 2025-26 में 2479 नरवाई कृषि यंत्र वितरित किए गए।     कृषि यंत्रीकरण के अंतर्गत भोपाल और इंदौर में ड्रोन पायलट स्कूल आरंभ हुए।     ई-विकास पोर्टल से उर्वरक वितरण का पायलट प्रोजेक्ट विदिशा, शाजापुर और जबलपुर में क्रियान्वित किया गया। इसे सम्पूर्ण प्रदेश में लागू करने की योजना है। आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना     प्रदेश के सभी 363 नगरपालिका, नगर पंचायतों में साप्ताहिक जैविक/प्राकृतिक हाट बाजार लगाए जाएंगे।     पर ड्रॉप मोर क्रॉप – दबाव सिंचाई प्रणाली के तहत वर्ष 2025-26 में 25 हजार, वर्ष 2026-27 में एक लाख और वर्ष 2027-28 में दो लाख हेक्टेयर का लक्ष्य है।     नरवाई (पराली) प्रबंधन के अंतर्गत पराली जलाने की घटनाओं में वर्ष 2027-28 तक 80 प्रतिशत तक की कमी लाने का लक्ष्य रखा है।     आगामी दो वर्षों में सभी मंडियों का हाईटेक बनाया जाएगा।     तिलहन, दलहन फसलों में आत्मनिर्भरता के लिए क्षेत्र विस्तार का लक्ष्य रखा गया है।     कृषि में अनुसंधान कार्ययोजनाओं को प्रोत्साहन देते हुए प्रयोगशाला से खेत की दूरी को कम किया जाएगा। बैठक में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की समीक्षा के दौरान हाईटेक नर्सरी, सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, कृषकों और उद्यमियों की क्षमता संवर्धन के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों के संबंध में जानकारी दी गई।