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मौत की पतंग! चाइना डोर से भी ज्यादा खतरनाक डोर भारत में पहुंची, लोग हुए सतर्क

अमृतसर सर्दी का मौसम शुरू होते ही जहां पतंग बेचने और उड़ाने वालों का सीजन भी शुरू हो जाता है, वहीं पतंग उड़ाने वाली खूनी डोर से राहगीरों को अपनी जान की चिंता में डाल देती है। अब भारत में चाइना डोर से खतरनाक पाकिस्तानी डोर की की एंट्री हो गई है। ये डोर बड़े हादसों का कारण बन सकती हैं। इस संबंध में जागदा ज़मीर संस्था ने पुलिस कमिश्नर से 21 तंद डोर बंद करवाने संबंधी की अपील की है। इस संबंध में जागदा ज़मीर के प्रधान सुभाष सहगल ने पंजाब केसरी से बातचीत करते कहा कि जहां खूनी चाइना डोर लोगों की जान की दुश्मन बन चुकी थी, वहीं अब उसकी जगह एक नई पाकिस्तानी डोर ने ले ली है, जिससे किसी को भी बचने का कोई मौका नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही 21 तंद वाली 19 तंद वाली पाकिस्तानी डोर ने एक बार फिर पूरे अमृतसर शहर में सनसनी फैला दी है। चाइना डोर से लोग या पशु-पक्षी घायल हो जाते थे, लेकिन यह पाकिस्तानी डोर ऐसी है कि अगर इसे पूरी ताकत से तोड़ने की कोशिश करो तो यह पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने अपनी टीम के सदस्यों के साथ इस पाकिस्तानी डोर संबंधी बताया कि कि उन्होंने पतंग उड़ाने वालों और विक्रेताओं से अपील की कि वे अपनी पुरानी पारंपरिक धागे की डोर को ही बेचें और खरीदें, क्योंकि यह खतरनाक डोर कई घरों के चिराग भी बुझा सकती है। इस संबंध में उन्होंने शहर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर और उनकी टीम को व्हाट्सएप पर इस डोर का वीडियो भेजा है और पुलिस कमिश्नर से अपील की है कि वे जल्द से जल्द इस डोर को बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। यह पाकिस्तानी डोर चाइना डोर से भी ज्यादा खतरनाक है, जिसे देखकर ऐसा लगता है कि यह कोई डोर नहीं बल्कि बिजली की तार या कोई पतली रस्सी है जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है, इसलिए इस पर जल्द से जल्द रोक लगाई जाए ताकि लोग सर्दियों के त्योहारों को अपने परिवारों के साथ खुशी से मना सकें। 

हस्तशिल्प पुरस्कार 2025: भारतीय हस्तकला को सम्मान, छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता हिराबाई झरेका बघेल का विशेष रूप से गौरव

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 9 दिसंबर 2025 को करेंगी हस्तशिल्प पुरस्कार प्रदान नई दिल्ली / रायपुर कपड़ा मंत्रालय 9 दिसंबर 2025, मंगलवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले हस्तशिल्प पुरस्कार 2025 के माध्यम से वर्ष 2023 और 2024 के विशिष्ट शिल्पियों को सम्मानित करेगा। इस वर्ष के समारोह में छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सुश्री हिराबाई झरेका बघेल को विशेष रूप से रेखांकित किया जा रहा है, जिन्हें जगदलपुर से धातुकला (बेल मेटल) में अद्वितीय कौशल के लिए सम्मानित किया जा रहा है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू होंगी। केंद्रीय कपड़ा मंत्री श्री गिरिराज सिंह कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे तथा कपड़ा एवं विदेश राज्य मंत्री श्री पबित्रा मरगेरीटा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कारों की स्थापना 1965 में हुई थी, जिनका उद्देश्य उन उत्कृष्ट शिल्पियों को पहचान देना है जिनके अद्वितीय कौशल ने देश की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया है। “शिल्प गुरु” पुरस्कार, जो 2002 में आरंभ किए गए, हस्तशिल्प क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान हैं और उन शिल्प गुरुओं को प्रदान किए जाते हैं जिन्होंने परंपरागत कला में असाधारण निपुणता, नवाचार और संरक्षण का परिचय दिया है। यह समारोह राष्ट्रीय हस्तशिल्प सप्ताह (8 से 14 दिसंबर) का प्रमुख आकर्षण है। इस दौरान देशभर में विविध गतिविधियाँ—हस्तकला प्रदर्शनी, विषयगत कार्यशालाएँ, क्षमता-वृद्धि कार्यक्रम, शिल्प प्रदर्शन, पैनल चर्चा, जन-जागरूकता पहल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों—का आयोजन किया जाता है, जिनका उद्देश्य हस्तशिल्प की सामाजिक-आर्थिक महत्ता को बढ़ाना है। भारत का हस्तशिल्प क्षेत्र न केवल सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण संरक्षक है, बल्कि ग्रामीण व अर्धशहरी क्षेत्रों में करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार भी है। कपड़ा मंत्रालय शिल्पियों को पहचान, कौशल विकास, तकनीकी सहयोग, वित्तीय सशक्तिकरण और बाजार उपलब्धता जैसे उपायों के माध्यम से निरंतर समर्थन प्रदान कर रहा है। हस्तशिल्प पुरस्कार और राष्ट्रीय हस्तशिल्प सप्ताह जैसे आयोजनों के माध्यम से सरकार का उद्देश्य भारत की समृद्ध शिल्प विरासत को सुदृढ़ करना और शिल्प समुदायों को सशक्त बनाना है।

खाद्य प्रसंस्करण हब बनने की ओर जशपुर: निफ्टेम कुंडली का सतत् प्रयास

रायपुर,  राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान कुंडली हरियाणा की 18 यूजी व पीजी छात्रों और 2 संकाय सदस्यों की टीम ने अपने प्रतिष्ठित ग्राम अंगीकरण कार्यक्रम के तहत 19 से 27 नवंबर 2025 तक लगातार तीसरे वर्ष जशपुर का दौरा किया l  निफ्टेम ने 2023 में जशपुर जिला प्रशासन के निर्देशानुसार कृषि, बागवानी और वन उत्पादों विशेषकर महुआ के खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने की दिशा में अपनी गतिविधियाँ प्रारम्भ की थीं। निफ्टेम टीम ने समूह, एफ़ पी ओ और खाद्य प्रसंस्करण हितधारकों से मिलकर गुणवत्ता, सुरक्षा, विनियमन और उद्यमिता से संबंधित जानकारी साझा की। मोटे अनाज से मूल्यवर्धित उत्पादों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण           जशपुर में खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण की आधारशिला मजबूत हुई वर्तमान वर्ष में टीम ने कुशल मानव संसाधन तैयार करने हेतु विविध प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए। कुनकुरी स्थित कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन में एक फूड प्रोसेसिंग ट्रेनिंग एवं इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किया गया, जहां युवाओं को मोटे अनाज आधारित बेकरी उत्पादों के निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया। वी ए पी टीम द्वारा स्व सहायता समूह एवं एफ पी ओ सदस्यों तथा युवाओं के लिए मोटे अनाज से मूल्यवर्धित उत्पादों पर तीन व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। इसके अतिरिक्त, सुजी आधारित पास्ता निर्माण, पैकेजिंग, लेबलिंग, ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग पर आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कुल 96 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिनमें 65 प्रतिशत महिलाएँ सम्मिलित रहीं। जशपुर : फसलों और अवसरों का समृद्ध भंडार          जशपुर की जलवायु एवं भौगोलिक विविधता में अच्छी फसलों का उत्पादन होता है। जहां धान, कोदो-कुटकी, रागी, सेब, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी, काजू, कटहल, अदरक, हल्दी, नींबू, चाय और महुआ जैसी फसलों के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती है। खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से इन अतिरिक्त उत्पादों को दीर्घ शेल्फ लाइफ, सुरक्षित प्रसंस्करण, और मूल्यवर्धित खाद्य उत्पादों—जैसे स्नैक्स, नाश्ते के अनाज, एनर्जी बार और रेडी-टू-ईट/कुक उत्पाद—में बदला जा सकता है।         जिला प्रशासन द्वारा सभी ब्लॉकों में खाद्य प्रसंस्करण अवसंरचना के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। निफ्टेम का वी ए पी कार्यक्रम ग्रामीण समुदायों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और उद्यमिता विकास प्रदान कर इस प्रयास को सशक्त बना रहा है। महुआ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस : निफ्टेम टीम द्वारा सराहना         अपने दौरे के दौरान निफ्टेम टीम ने महुआ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का भी दौरा किया, जहाँ महुआ फूल से तैयार किए गए विभिन्न नवाचारपूर्ण मूल्यवर्धित उत्पादों  जैसे महुआ च्यवनप्राश, महुआ टी, महुआ आधारित स्नैक्स तथा अन्य प्रयोगात्मक खाद्य उत्पाद  के विकास कार्य को विस्तार से समझा। टीम ने उत्पादों की गुणवत्ता, संगत प्रसंस्करण विधि, पैकेजिंग की स्वच्छता एवं प्रस्तुति तथा महुआ के आधुनिक फूड-ग्रेड उपयोग की विशेष रूप से सराहना की। महुआ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जिला प्रशासन जशपुर द्वारा प्रारम्भ किया गया एक छोटा लेकिन महत्त्वपूर्ण प्रसंस्करण केंद्र है, जिसे वर्तमान में जय जंगल द्वारा संचालित किया जा रहा है। यह केंद्र जिले में कोदो, कुटकी, रागी और महुआ के प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन में सक्रिय भूमिका निभा रहा है और स्थानीय महिला समूहों के लिए वास्तविक कौशल एवं आय-वृद्धि का केंद्र बन चुका है।            वी ए पी कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे प्रो. प्रसन्ना कुमार ने जशपुर की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया । उन्होंने जिला कलेक्टर जशपुर, जिला पंचायत सीईओ,  एनआर ए एल एम मिशन मैनेजर  तथा जय जंगल एफ पी सी के निदेशक के योगदान को रेखांकित किया। निफ्टेम निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने वी ए पी को छत्तीसगढ़ में उभरते खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र का आधार बताते हुए इसकी गतिविधियों को और अधिक क्षेत्रों तक विस्तार देने की आवश्यकता पर बल दिया।                    इस समग्र विश्लेषण के आधार पर तैयार की गई विस्तृत “जशपुर खाद्य प्रसंस्करण विकास रिपोर्ट” आज जिला प्रशासन को औपचारिक रूप से प्रस्तुत की गई।

जश्न बना मातम: शादी समारोह में DJ प्वाइंट पर आग, लाखों का सामान स्वाहा

करनाल करनाल जिला में तरावड़ी के वार्ड नंबर-4 की राणा कालोनी में एक डीजे वाली गाड़ी में भीषण आग लग गई। देखते ही देखते गाड़ी जलकर राख हो गई। डीजे की गाड़ी एक शादी समारोह में आई हुई थी।     मामले की जानकारी देते हुए तानिष नाम के युवक जिसके भाई की शादी है, ने बताया पड़ोसियों द्वारा आग लगने की जानकारी हमे मिली थी। बाहर आकर देखा तो डीजे वाली गाड़ी पूरी तरह से जल रही थी। पानी डालकर आग को बुझाने का प्रयास किया लेकिन तब तक गाड़ी में रखा सामान जल कर राख हो गया था। युवक द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया तकरीबन तीन और 4:00 बजे के बीच में आग लगने की घटना हुई थी। गाड़ी और डीजे उनका खुद का था ।   परिवार के अन्य व्यक्ति द्वारा मामले की जानकारी देते हुए बताया गया देर रात तक डीजे पर सभी लोगो ने डांस किया । 3 और 4 बजे के बीच में हमे पड़ोसियों ने उठाया जब हमने बाहर आकर देखा तो डीजे वाली गाड़ी में आग लगी हुई थी ।    फिलहाल डीजे वाली गाड़ी में आग किसने लगाई यह तो जांच का विषय है इस बारे में अभी तक कोई भी पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है। परिवार में शादी है परिवार पुलिस को जानकारी देगा या नहीं इस बारे में भी अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।  

योगी सरकार का अवैध नशे पर बड़ा प्रहार, कोडीन के दुरुपयोग पर 128 फर्मों पर एफआईआर

– मुख्यमंत्री के निर्देश पर औषधि प्रशासन की ताबड़तोड़ छापेमारी में लाखों की अवैध दवाएं जब्त, आधा दर्जन से अधिक गिरफ्तार   – सबसे अधिक वाराणसी में 38, जौनपुर में 16, कानपुर नगर में 8, गाजीपुर में 6 और लखीमपुर खीरी-लखनऊ में 4-4 एफआईआर दर्ज की गई – प्रदेश के 28 जिलों में कोडीन के संगठित दुरुपयोग पर विभिन्न फर्मों पर दर्ज की गई एफआईआर लखनऊ, योगी सरकार प्रदेश के युवाओं को नशे की आगोश में धकेलने वाले अवैध नशे के सौदागरों के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है। सीएम योगी के निर्देश पर पूरे प्रदेश में एएनटीएफ (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा बड़ा एक्शन लिया गया है। इसी क्रम में एफएसडीए द्वारा प्रदेश भर में कोडीनयुक्त कफ सिरप और नॉरकोटिक्स श्रेणी की औषधियों के अवैध भंडारण, क्रय-विक्रय और वितरण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है। इस विशेष अभियान में अब तक प्रदेशभर में लाखों की अवैध नॉरकोटिक और कोडीनयुक्त औषधियां जब्त की गई हैं जबकि अब तक 128 एफआईआर दर्ज की गई हैं। वहीं आधा दर्जन से अधिक अवैध नशे के सौदागरों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे धकेला गया है। दो दर्जन से अधिक मेडिकल स्टोर्स पर कोडीनयुक्त सिरप एवं नॉरकोटिक औषधियों की बिक्री पर लगाई रोक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, डॉ. रोशन जैकब ने बताया की मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में अब तक  प्रतिष्ठानों पर निरीक्षण/छापेमारी की गई, लाखों की औषधियां सीज की गईं। जांच में संदिग्ध पाए गए अभिलेखों की अग्रिम विवेचना तक दो दर्जन से अधिक मेडिकल स्टोर्स पर कोडीनयुक्त सिरप एवं नॉरकोटिक औषधियों की बिक्री पर रोक लगाई गई है। प्रदेश भर में कोडीन युक्त / नॉरकोटिक्स/साईकोट्रॉपिक श्रेणी औषधियों की अवैध आवाजाही की जांच हेतु संदिग्ध मेडिकल स्टोर की सघन जांच, विशेष अभियान के रूप में जारी है। उन्होंने बताया कि अवैध रूप से नकली एवं नशे के रूप में दुरूपयोग होने वाली औषधि के भंडारण, क्रय-विक्रय अथवा आवाजाही से संबंधित सूचना विभाग द्वारा जारी व्हाट्सप्प नंबर 8756128434 पर दी जा सकती है। अवैध नॉरकोटिक औषधियों की बिक्री और भंडारण के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कई जिलों में छापेमारी की है और एनडीपीएस एक्ट में सख्त कार्रवाई की गई। इन जिलों में दर्ज की गई एफआईआर आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि अभियान के दौरान 28 जिलों में कुल 128 एफआईआर दर्ज की गई। इनमें वाराणसी में 38, जौनपुर में 16, कानपुर नगर में 8, गाजीपुर में 6, लखीमपुर खीरी 4, लखनऊ 4 और बहराइच, बिजनौर, प्रयागराज, प्रतापगढ़, सीतापुर, सोनभद्र, बलरामपुर, रायबरेली, संतकबीर नगर, हरदोई, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, उन्नाव, बस्ती, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, सहारनपुर, बरेली, सुल्तानपुर, चंदौली, मीरजापुर आदि जिलों में 52 एफआईआर दर्ज की गई।

युवाओं को बड़ा तोहफा: नीतीश सरकार का 1 करोड़ नौकरियों का रोडमैप, बने तीन नए विभाग

पटना  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के युवाओं के लिए एक बड़े बदलाव वाली घोषणा करते हुए कहा है कि सरकार ने वर्ष 2025 से 2030 के बीच 1 करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए सरकार बहु-आयामी संरचनात्मक बदलाव कर रही है। रोजगार सृजन को गति देने के लिए युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। इसी क्रम में सरकार ने तीन नए विभागों का गठन किया है। नीतीश सरकार ने युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और नागर विमानन विभाग के गठन का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि इन विभागों की स्थापना से युवाओं को प्रशिक्षण, उद्यमिता और नौकरी के अवसरों से जोड़ने की प्रक्रिया और अधिक तेज और प्रभावी होगी। सीएम नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "हमलोगों ने अगले 5 वर्षों (2025-30) में 1 करोड़ युवाओं को नौकरी एवं रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए जरूरी है कि राज्य में ज्यादा से ज्यादा युवाओं को कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण दिया जाए और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च एवं तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।  साथ ही लक्ष्य की उपलब्धि के लिए सघन अनुश्रवण भी किया जाए। इसके लिए राज्य में अलग से तीन नए विभाग- युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और नागर विमानन विभाग सृजित करने का निर्देश दिया है। इन तीन नए विभागों के सृजन से राज्य में ज्यादा से ज्यादा युवाओं को नौकरी एवं रोजगार दिलाने में काफी मदद मिलेगी। युवा, रोजगार एवं कौशल विभाग के जरिए अगले 5 वर्षों में बड़ी संख्या में युवाओं को उद्यमिता के अवसर प्रदान करने हेतु विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रोजगार दिलाने का निर्णय लिया गया है।" सीएम ने कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा विभाग के सृजन का उद्देश्य है कि उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार हो, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा मिले, तकनीकी एवं व्यवसायिक शिक्षा का विकास हो और समाज के सभी वर्गों के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण रोजगारपरक शिक्षा मिल सके। आप सभी को पता है कि राज्य में कई नए हवाई अड्डों का निर्माण हो रहा है एवं भविष्य में उड़ान योजना के तहत कई बड़े-छोटे नए हवाई अड्डों का निर्माण प्रस्तावित है। राज्य में अलग से नागर विमानन विभाग के सृजन से इसमें तेजी आएगी, औद्योगिक वातावरण बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और इससे राज्य में निर्मित उत्पादों के निर्यात में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, हम लोगों ने अलग से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम निदेशालय एवं बिहार विपणन प्रोत्साहन निगम (Bihar Marketing Promotion Corporation) सृजित करने का भी निर्णय लिया है जिससे युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार देने के लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सकेगा। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम निदेशालय का गठन कर युवाओं को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से संबंधित कौशल विकास के लिए प्रत्येक जिले में मेगा स्किल सेंटर की स्थापना की जाएगी ताकि राज्य के युवाओं को अधिक से अधिक नौकरी/रोजगार का अवसर मिल सके। सीएम नीतीश ने पोस्ट में आगे लिखा, "साथ ही बिहार विपणन प्रोत्साहन निगम के सृजन से राज्य में कृषि, पशुपालन, बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण के साथ-साथ हस्तशिल्प, ग्रामीण उद्योग, लघु एवं कुटीर उद्योग जैसे उत्पादों की उपलब्धता, गुणवत्ता एवं वितरण व्यवस्था सुदृढ़ होगी और बड़ी संख्या में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। राज्य के युवाओं के सुखद भविष्य के लिए हमलोग लगातार काम कर रहे हैं। अधिक से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी एवं रोजगार देने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। बिहार के युवा दक्ष एवं आत्मनिर्भर हों, उन्हें रोजगार के नए अवसर मिलें, उनका भविष्य सुरक्षित हो इसके लिए हमलोग कृतसंकल्पित हैं।"

उत्तर प्रदेश में नवाचार की नई परंपरा, इनक्यूबेशन सेंटर बने विकास के अग्रदूत

प्रदेश में 8 वर्षों में विकसित हुआ सशक्त इनक्यूबेशन इकोसिस्टम योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों से युवाओं को मिला रोजगार उद्यम और नवाचार का नया अवसर लखनऊ, उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले आठ वर्षों में इनक्यूबेशन आधारित नवाचार को नई पहचान दी है। आज प्रदेश में कुल 76 इनक्यूबेशन सेंटर सक्रिय हैं। ये केंद्र विद्यार्थियों और युवाओं को विचार से उद्योग तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में सहयोग देते हैं। सरकार का उद्देश्य हर जिले में ऐसा माहौल तैयार करना है जहां युवा सुरक्षित और संगठित तरीके से उद्यम शुरू कर सकें। इसी लक्ष्य के तहत वित्तीय सहायता तकनीकी मार्गदर्शन और विशेषज्ञ नेटवर्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इनक्यूबेशन सेंटर वह स्थान है, जहां नए आइडिया को विकसित कर सफल कारोबार में बदलने के लिए सभी आवश्यक संसाधन एक ही स्थान पर उपलब्ध कराए जाते हैं। यह ऐसा केंद्र है जो स्टार्टअप को उसके जन्म से लेकर उसके पांव जमाने तक मार्गदर्शन, सहायता और सुविधाएं प्रदान करता है। इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना से उद्यमियों की कई चुनौतियां सरल हो गई हैं। यहां शुरुआती चरण में जरूरी प्रशिक्षण कानूनी सलाह बाजार से जुड़ी जानकारी तकनीकी मार्गदर्शन और निवेशकों से संपर्क जैसे सभी तत्व एक ही स्थान पर उपलब्ध होते हैं। इससे किसी भी स्टार्टअप की सफलता की संभावना बढ़ जाती है। इन केंद्रों ने युवाओं में उद्यमिता की भावना को मजबूत किया है और उन्हें जोखिम लेने का आत्मविश्वास दिया है। पिछले आठ वर्षों में इन केंद्रों से जुड़े हजारों युवाओं ने अपनी पहचान बनाई है। कृषि तकनीक शिक्षा स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले कई स्टार्टअप प्रदेश के भीतर और बाहर अपनी उपयोगिता सिद्ध कर चुके हैं। इन स्टार्टअप ने रोजगार भी बढ़ाया है और स्थानीय समस्याओं के समाधान भी प्रदान किए हैं। इससे उत्तर प्रदेश के आर्थिक ढांचे को नई दिशा मिली है। स्टार्टअप विशेषज्ञ विनीत का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार स्टार्टअप को बढ़ावा देने का ठोस प्रयास कर रही है। इन्क्युबेटर्स की स्थापना से स्टार्टअप्स को बड़ी मदद मिलती है। शुरुआत में स्टार्टअप्स को बहुत दिक्कतें आती है, ऐसे में इन्क्युबेटर्स बड़े सहायक होते हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार का मानना है कि इनोवेशन और तकनीक आधारित उद्यम ही भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार तैयार करेंगे। इनक्यूबेशन सेंटर इसी सोच का विस्तार हैं। छोटे शहरों से निकलकर बड़े मंच तक पहुंचने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह परिवर्तन प्रदेश को एक मजबूत स्टार्टअप हब के रूप में स्थापित कर रहा है। कुल मिलाकर इनक्यूबेशन सेंटर उत्तर प्रदेश में विकास और अवसरों के नए द्वार खोल रहे हैं। यह नेटवर्क न केवल उद्यमिता को गति दे रहा है बल्कि प्रदेश को आत्मनिर्भर और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर भी अग्रसर कर रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार से पहले इनक्यूबेशन सेंटर मामले में स्थिति उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से पहले इनक्यूबेशन सेंटरों की संख्या लगभग 12 से 15 के बीच थी। यह केंद्र केवल चुनिंदा विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों तक सीमित थे। न इनके विस्तार की कोई स्पष्ट नीति थी और न ही स्टार्टअप इकोसिस्टम को लेकर कोई स्पष्ट संरचना। योगी आदित्यनाथ सरकार में विस्तार वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार ने स्टार्टअप नीति लागू की और पूरे राज्य में इनक्यूबेशन नेटवर्क का व्यापक विस्तार शुरू किया। परिणाम स्वरूप आज प्रदेश में 76 इनक्यूबेशन सेंटर सक्रिय हैं और कई और स्थापित किए जाने की प्रक्रिया में हैं। सरकार के प्रमुख लक्ष्य – हर जिले में कम से कम एक इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करना – उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्टार्टअप हब के रूप में विकसित करना – युवा उद्यमिता को रोजगार सृजन का प्रमुख साधन बनाना – स्टार्टअप की सफलता दर को बढ़ाना – कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल सेवाएं सुरक्षा और ई-गवर्नेंस सहित कई क्षेत्रों में नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का निर्माण करना – इनक्यूबेशन सेंटरों की संख्या 100 करने का लक्ष्य

मेयर-आयुक्त की जांच में खुली सड़क परियोजना की खामियां, दो जूनियर इंजीनियरों पर गिरी गाज

यमुनानगर यमुनानगर मेयर सुमन बहमनी और नगर निगम आयुक्त महाबीर प्रसाद ने वीरवार को वार्ड-8 में डीएवी डेंटल कॉलेज के पास चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य का औचक निरीक्षण किया। लगभग 12 लाख रुपये की लागत से लक्ष्मी टी स्टॉल से आरसी पाहुजा के घर तक सड़क चौड़ीकरण का काम किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान आयुक्त महाबीर प्रसाद ने इंटरलॉकिंग टाइलों को उखाड़कर गुणवत्ता की जांच की। जांच में पाया गया कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री उच्च गुणवत्ता की नहीं थी तथा कई जगहों पर बेहद कम सामग्री डाली गई थी। गुणवत्ता में कमी देखकर मेयर और आयुक्त ने वहां मौजूद नगर निगम के कनिष्ठ अभियंताओं से निगरानी को लेकर पूछताछ की। लेकिन वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद आयुक्त ने दो कनिष्ठ अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करने और संबंधित एजेंसी की पेमेंट रोकने  के निर्देश दिए। कार्यकारी अभियंता ने मौके से टाइलों के नमूने लेकर जांच प्रक्रिया शुरू की। आयुक्त ने निर्देश दिए कि संबंधित एजेंसी को दिए गए अन्य विकास कार्यों की भी गुणवत्ता जांच की जाए। मेयर सुमन बहमनी ने कहा कि नगर निगम क्षेत्र में करोड़ों रुपये के विकास कार्य चल रहे हैं। ऐसे में गुणवत्ता पर कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निगम प्रशासन हर वार्ड में किए जा रहे विकास कार्यों की जांच करेगा और जहां भी लापरवाही मिलेगी, वहां संबंधित अधिकारियों व एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम आयुक्त महाबीर प्रसाद ने कहा कि डीएवी डेंटल कॉलेज के पास सड़क चौड़ीकरण के निरीक्षण में स्पष्ट रूप से क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों में कमी पाई गई। ठेकेदार ने लापरवाही बरती और जेई अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहे। इसलिए दोनों जेई को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि नगर निगम क्षेत्र में चल रहे सभी विकास कार्यों का वे स्वयं निरीक्षण करेंगे। यदि कहीं भी कार्य में कोताही मिली तो संबंधित एजेंसी और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

टीचर ट्रांसफर ड्राइव की शुरुआत: हरियाणा में 20 दिसंबर को आएगा स्कोर कार्ड

चंडीगढ़  हरियाणा में सरकारी स्कूलों में तैनात शिक्षकों के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है। शिक्षा विभाग ने बहुप्रतीक्षित ऑनलाइन टीचर ट्रांसफर ड्राइव 2025-26 का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है। संशोधित नीति लागू होने के बाद यह पहली बार है जब प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षकों के तबादले होने जा रहे हैं। विभाग के अनुसार, 10 से 12 दिसंबर तक सभी शिक्षक अपनी सेवा और व्यक्तिगत जानकारी ऑनलाइन अपडेट कर सकेंगे। यह चरण सबसे अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसी डाटा के आधार पर मेरिट प्वाइंट और फाइनल लिस्ट तैयार होगी। 20 दिसंबर को सभी शिक्षकों का विस्तृत स्कोर जारी होगा, जिसमें उम्र, सेवा अवधि, उपलब्धियां, व्यक्तिगत परिस्थितियां और पॉलिसी में तय अन्य मापदंड शामिल होंगे। अगर किसी शिक्षक को अपने स्कोर या अपडेटेड सर्विस डाटा में त्रुटि लगती है, तो वे 21 दिसंबर से 27 दिसंबर तक अपनी आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। 28 दिसंबर से तीन जनवरी तक जिला स्तरीय कमेटियां इन दावों पर निर्णय लेंगी। चार जनवरी को जिला स्तर के फैसले प्रकाशित होंगे। इसके बाद शिक्षक चाहें तो प्रदेश स्तर पर अपील कर सकेंगे। पांच से दस जनवरी तक प्रदेश स्तरीय सुनवाई होगी। पांच से सात जनवरी तक प्रदेश स्तर पर आपत्तियां दर्ज कराने का समय दिया गया है। आठ से दस जनवरी तक राज्य स्तरीय कमेटी इन आपत्तियों पर अंतिम निर्णय लेगी। इसके बाद 11 और 12 जनवरी को फाइनल मेरिट प्वाइंट, फाइनल स्कोर और फाइनल लिस्ट जारी होगी। अंत में 12 जनवरी को ट्रांसफर ऑर्डर जारी होंगे। हालांकि ट्रांसफर पॉलिसी में शामिल शिक्षक नये स्कूलों में ज्वाइनिंग पहली अप्रैल से ही करेंगे। प्रक्रिया से पहले डीईओ को निर्देश ट्रांसफर ड्राइव लागू करने से पहले शुक्रवार को सुबह 11 बजे सभी जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जुड़े। उन्हें डाटा अपडेट और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए। जिलों को कहा गया है कि वे प्रिंसिपल, हेडमास्टर, टीजीटी, पीजीटी और जेबीटी सहित सभी श्रेणी के शिक्षकों का डाटा निर्धारित समय में वेरिफाई करवाएं। मनोहर सरकार में आई थी पॉलिसी हरियाणा में शिक्षकों के तबादले हमेशा सरकारों के लिए चुनौती रहे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने पहले कार्यकाल की शुरुआत में इसकी जड़ को समझते हुए शिक्षकों के लिए ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू की। इसके बेहतर परिणाम आए। पॉलिसी को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली और कई राज्यों ने इस मॉडल को अपनाया। करीब नौ वर्षों बाद अब नायब सरकार ने इस पॉलिसी में बड़े बदलाव करते हुए नये सिरे से नोटिफिकेशन जारी किया है। संशोधित नीति के अनुसार ही अब तबादले होंगे।   अब शिक्षक सीधे स्कूल चुन सकेंगे पहले ट्रांसफर जोन सिस्टम पर आधारित थे, लेकिन अब शिक्षक अपनी पसंद के स्कूल को सीधे चुन सकेंगे। सरकार ने मोरनी, हथीन और नूंह ब्लॉक में तैनात शिक्षकों को बेसिक प्लस डीए पर दस प्रतिशत अतिरिक्त वेतन और अतिथि शिक्षकों को दस हजार रुपये अतिरिक्त भत्ता देने का निर्णय लिया है। पति पत्नी में केवल एक को मिलेगा लाभ पहले पति और पत्नी दोनों को ट्रांसफर में अतिरिक्त अंक मिलते थे, लेकिन नई नीति में केवल एक को ही यह लाभ मिलेगा। दूरी कम करने पर पांच अंक तय किए गए हैं। मेरिट कुल अस्सी अंकों की होगी, जिसमें साठ अंक उम्र के होंगे और बीस अंक अन्य कैटेगरी जैसे महिला, विधवा, विधुर, गंभीर बीमारी, दिव्यांगता और बेहतर परिणाम देने वाले शिक्षकों को मिलेंगे। शिक्षा मंत्री जुटे थे मुहिम में हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल सिंह ढांडा ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी में संशोधन को लेकर लंबे समय से प्रयासरत थे। उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से विचार विमर्श कर इसे अंतिम स्वरूप दिया। विगत दिवस भी उन्होंने पंचकूला में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों संग बैठक कर ट्रांसफर ड्राइव लागू करने की रणनीति तय की। इसके बाद विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है।

Bansal Sweets पर बड़ा एक्शन: जालंधर की नामी दुकान विवादों में घिरी

जालंधर शहर के जवाहर नगर मार्केट में बनी मशहूर बंसल स्वीट्स शॉप पर नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोप है कि यह दुकान पूरी तरह से नाजायज कब्ज़े पर बनी थी और शुरुआत से ही विवादों में घिरी हुई थी। दुकान के खिलाफ हाईकोर्ट में भी शिकायत दर्ज की गई थी। शुक्रवार को नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और डिच मशीन की मदद से अवैध हिस्से को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि दुकान प्रबंधन ने न सिर्फ अवैध निर्माण किया, बल्कि सड़क और पार्किंग एरिया पर भी कब्ज़ा कर लिया था। बताया जा रहा है कि दुकान के बाहर सड़क की तरह चौपाटी बनाकर रास्ता संकरा कर दिया गया था, जिससे आसपास के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। नगर निगम अधिकारियों ने साफ कहा है कि शहर में कहीं भी अवैध कब्ज़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। क्या है मामला  बता दें कि शहर के विवादित HEAT 7 इमारत के गिराए जाने के बाद उसी स्थान पर  बंसल स्वीट शॉप खोली गई थी। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि पिछले दो दशकों से इस स्थान पर सड़क पर कब्जा और बिना मंजूरी के मुख्य रास्ता सड़क की ओर बनाने जैसी अनियमितताएं पाई गई थी। नगर निगम पहले भी इस स्थान को लेकर कई खामियां स्पष्ट कर चुका था, लेकिन अब नए मालिक ने भी वैसा निर्माण किया।