samacharsecretary.com

6.30 लाख ग्राहकों के लिए खुशखबरी, पोस्ट ऑफिस से निकासी के लिए पासबुक जरूरी नहीं

 रायबरेली  जिले के करीब 6.50 लाख डाकघर खाताधारकों के लिए राहत भरी खबर है। अब पासबुक साथ न होने पर भी आधार कार्ड के माध्यम से मुख्य डाकघर, उपडाकघर और ग्रामीण शाखा डाकघरों से जमा-निकासी की सुविधा मिल सकेगी। इससे विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के खाताधारकों को बड़ी सहूलियत होगी। डाक विभाग ने अन्य बैंकों की तर्ज पर आधार आधारित लेनदेन एईपीएस (आधार-सक्षम भुगतान प्रणाली) की सुविधा लागू कर दी है। इसके तहत खाताधारक आधार संख्या और बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए अपने खाते से नकदी निकालने के साथ ही धनराशि जमा भी करा सकेंगे। इससे पासबुक खो जाने या साथ न होने की स्थिति में भी बैंकिंग कार्य प्रभावित नहीं होगा। जिले में दो मुख्य डाकघर और 54 उपडाकघर संचालित हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में शाखा डाकघरों के माध्यम से भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। डाक अधीक्षक अनूप अग्रवाल का कहना है कि 6.50 लाख खाताधारकों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि आधार आधारित जमा-निकासी प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है और बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही लेनदेन किया जाएगा।

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी से किसान मनोहर यादव की खेती बनी अधिक लाभकारी

रायपुर  छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कृषि क्षेत्र में नवाचार और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम कचंदा निवासी किसान  मनोहर यादव इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल हैं। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से उन्होंने अपनी खेती की लागत कम करने के साथ-साथ उत्पादन और आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की है। लगभग दो एकड़ भूमि पर खेती करने वाले  यादव पहले बढ़ती कृषि लागत और उत्पादन की अनिश्चितता से चिंतित रहते थे। कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन तथा राज्य शासन की किसान हितैषी पहलों से प्रेरित होकर उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया और अपनी फसलों में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का प्रयोग शुरू किया। नई तकनीक के परिणाम शीघ्र ही सामने आने लगे। नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसलों को संतुलित पोषण मिला, जिससे पौधों की वृद्धि बेहतर हुई और उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई। साथ ही उर्वरकों पर होने वाला खर्च भी कम हुआ, जिससे खेती की लागत नियंत्रित करने में मदद मिली। कम मात्रा में अधिक प्रभावी साबित होने वाले नैनो उर्वरकों ने उनकी खेती को पहले की तुलना में अधिक लाभकारी बना दिया है।  मनोहर यादव बताते हैं कि नैनो उर्वरकों का परिवहन और उपयोग बेहद सरल है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है। बेहतर गुणवत्ता वाली फसल और बढ़ी हुई पैदावार का सीधा लाभ उनकी आय में वृद्धि के रूप में मिला है। उन्होंने अन्य किसानों से भी आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक खेती को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि बदलते समय के साथ नवाचार आधारित खेती ही समृद्धि का मार्ग है। उनका मानना है कि नई तकनीकों और कृषि विभाग के मार्गदर्शन का लाभ उठाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर अपनी आर्थिक स्थिति को सशक्त बना सकते हैं।

खजराना गणेश मंदिर के लिए फाइनल हुआ खास डिजाइन, 5 प्रतिमाओं को पहनाए जाएंगे स्वर्ण मुकुट

इंदौर  विश्व प्रसिद्ध इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में श्रद्धालु लगातार दिल खोलकर दान कर रहे हैं. दानपेटियों में नगदी के अलावा सोना-चांदी भी भक्त दान कर रहे हैं. इसके अलावा कई भक्त मंदिर प्रबंधन समिति को सीधा सोना दान कर रहे हैं. ये स्वर्ण दान उस अभियान में कारगर साबित होने वाला है, जिसके तहत गर्भगृह में भगवान गणेश के साथ ही रिद्धि-सिद्धि भी स्वर्ण मुकुट धारण करेंगी. इसके अलावा गर्भगृह में शुभ और लाभ की प्रतिमाओं को भी सोने का मुकुट सुशोभित किया जाएगा।  स्वर्ण मुकुट अभियान: अभी ढाई किलो सोना और चाहिए अभी तक खजराना मंदिर प्रबंधन समिति को करीब साढ़े 5 किलो सोना दान में मिल चुका है. टारगेट 8 किलो सोना जुटाने का है. इस सोने से 5 स्वर्ण मुकुट बनाए जाने हैं. 3 दिन पहले ही एक श्रद्धालु ने दो तोला सोना भगवान गणेश को अर्पित किया है. अभी 5 स्वर्ण मुकुट बनाने के लिए करीब ढाई किलो सोने की और जरूरत है. अभी खजराना गणेश को 1 किलो सोने का मुकुट तिल चतुर्थी, गणेश चतुर्थी पर पहनाया जाता है. योजना के अनुसार नए मुकुट के साथ एक किलो का स्वर्ण छत्र, मां रिद्धि-सिद्धि के मुकुट 600-600 ग्राम के नए के बनेंगे. लाभ-शुभ के मुकुट 100-100 ग्राम के नए बनवाए जाएंगे।  श्रद्धालु दानपेटी में अर्पित करते हैं सोने की ज्वैलरी खजराना गणेश मंदिर में पूरे देश से श्रद्धालु पहुंचते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार यहां दान करते हैं. विदेश में रहने वाले बप्पा के भक्त भी दानराशि भेजते हैं. हाल ही में दान पेटियां जब खोली गईं और काउंटिंग की गई तो ये राशि करीब 1.78 करोड़ निकली. दान पेटियों में सोना, चांदी, हीरे जड़े आभूषण भी मिले. नगद राशि को मंदिर के विकास में इस्तेमाल किया जाता है. भक्तों के लिए सुविधाए विकसित की जाती हैं।  दानपेटी और प्रत्यक्ष रूप से मिले सोने को सहेजकर रखा जाता है, क्योंकि इसी सोने से स्वर्ण मुकुट बनने हैं. गणेश चतुर्थी पर खजराना गणेश मंदिर में भगवान गणपति का 5 करोड़ के गहनों से श्रृंगार किया गया. सिर पर हीरे मोती से जड़ा सोने का मुकुट धारण किए हुए खजराना गणेश सुसज्जित हुए, बप्पा का मनमोहक श्रृंगार देख भक्त भावविभोर हो गए थे।  सोने के रेट बढ़ने का असर भी दिखा हालांकि बीते एक से डेढ़ साल के अंदर सोने के बेतहाशा बढ़ते रेट के कारण दान में कुछ कमी आई है. लेकिन इसके बाद भी भक्तों के साथ ही मंदिर प्रबंधन समिति को भरोसा है कि 8 किलो सोना इकट्ठा करने का टारगेट बहुत जल्द पूरा होगा. खजराना गणेश मंदिर के पंडित अशोक भट्ट बताते हैं "गर्भगृह स्थित भगवान गणेश महाराज के साथ ही रिद्धि, सिद्धि, शुभ और लाभ की प्रतिमाओं के लिए नए स्वर्ण मुकुट तैयार करने की प्लानिंग है. स्वर्ण मुकुट की स्पेशल डिजाइन तैयार हो चुकी है. इस काम के लिए लक्ष्य के अनुसार कुल 8 किलो सोना चाहिए।  डेढ़ हजार लोगों को रोजाना मुफ्त भोजन खजराना गणेश मंदिर में आने वाली दानराशि का इस्तेमाल केवल मंदिर के विस्तार व विकास के लिए नहीं होता बल्कि यहां अन्न क्षेत्र में रोजाना करीब डेढ़ हजार लोगों को मुफ्त में भोजन कराया जाता है. इसके साथ ही गरीब व असहाय लोगों के इलाज पर राशि खर्च की जाती है. इस कार्य में पूरा इंदौर शहर साथ देता है। 

मध्य प्रदेश में बन रहे 6 मेगा कॉरिडोर, जानिए आपके जिले को क्या होगा फायदा

 भोपाल  ग्वालियर और नागपुर शहरों को सिक्सलेन हाइवे से जोड़ने के लिए नए कारीडोर का सर्वे तेजी से चल रहा है. इस कॉरिडोर को केंद्र सरकार द्वारा सहमति मिलने के बाद सरकार द्वारा फिजिबिलिटी सर्वे कराया जा रहा है. जिसमें ये देखा जाएगा कि इस कॉरिडोर पर कैसा ट्रैफिक रहेगा. फिलहाल ये तय किया गया है कि 40 हजार करोड़ की लागत से 569 किमी लंबा सिक्सलेन हाइवे बनाया जाएगा, जो मध्य प्रदेश के 9 जिलों से गुजरेगा. इन सभी जिलों में सिक्सलेन कॉरिडोर के किनारे इंडस्ट्रियल क्लस्टर की स्थापना की जाएगी, जो इन जिलों के व्यवसाय में पंख लगाएंगे।   मध्य प्रदेश की सड़कों पर रफ्तार और विकास का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। सूबे के सभी 55 जिलों की तस्वीर बदलने और उनके बीच की दूरी को कम करने के लिए सरकार एक मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। राज्य में 6 नए इकोनॉमिक कॉरिडोर (आर्थिक गलियारे) तैयार किए जा रहे हैं, जो करीब 3,300 किलोमीटर लंबे होंगे। लगभग 36,483 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से बनने वाले इन एक्सप्रेस-वे ग्रिड का निर्माण कार्य साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह महापरियोजना न केवल सफर को आसान बनाएगी, बल्कि विंध्य, बुंदेलखंड, मालवा-निमाड़ और नर्मदा अंचल की आर्थिक रीढ़ को भी मजबूत करेगी। बालाघाट से बैतुल तक और बिलासपुर-रायपुर से होते हुए गुजरात सीमा तक कनेक्टिविटी का यह जाल प्रदेश के औद्योगिक और व्यापारिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। आइए जानते हैं कि मध्य प्रदेश को रफ्तार देने वाले ये छह इकोनॉमिक कॉरिडोर कौन से हैं और इनसे प्रदेश को क्या लाभ होगा: 1. मालवा-निमाड़ विकासपथ (कुल लंबाई: 450 किमी) मालवा और निमाड़ अंचल को आर्थिक रूप से और समृद्ध बनाने के लिए इस कॉरिडोर को 7,972 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। इसके तहत गरोठ से उज्जैन के बीच 136 किलोमीटर और इंदौर से बुरहानपुर के बीच 215 किलोमीटर का रूट शामिल है। साल 2027 तक पूरा होने वाला यह मार्ग मंदसौर, उज्जैन, इंदौर, खंडवा और बुरहानपुर जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों को सीधे जोड़ेगा। 2. विंध्य एक्सप्रेस-वे (कुल लंबाई: 676 किमी) करीब 3,809 करोड़ रुपये के बजट से बनने वाला यह एक्सप्रेस-वे राजधानी भोपाल से शुरू होकर प्रदेश के 10 जिलों से गुजरेगा। इसमें सागर, दमोह, कटनी और रीवा जैसे बड़े शहर शामिल हैं। इसके पूरी तरह चालू हो जाने के बाद भोपाल से रीवा और ऊर्जा धानी सिंगरौली तक का सफर बेहद आसान और बेहद कम समय में तय होने लगेगा। 3. बुंदेलखंड विकासपथ (कुल लंबाई: 330 किमी) बुंदेलखंड क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए यह 330 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बनाया जा रहा है। लगभग 3,357 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पथ भोपाल, रायसेन, विदिशा, सागर और छतरपुर को आपस में जोड़ेगा, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों को रफ्तार मिलेगी। 4. अटल प्रगतिपथ (कुल लंबाई: 299 किमी) चंबल अंचल के विकास को रफ्तार देने के लिए 299 किलोमीटर लंबे अटल प्रगतिपथ की रूपरेखा तैयार की गई है। यह कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से शुरू होकर बुंदेलखंड कॉरिडोर से जाकर मिल जाएगा। इससे श्योपुर, मुरैना और भिंड जैसे चंबल के जिलों को सीधा फायदा होगा और यहां नए उद्योगों के रास्ते खुलेंगे। 5. नर्मदा प्रगतिपथ (कुल लंबाई: 867 किमी) नर्मदा नदी के समानांतर बनने वाला यह कॉरिडोर इस पूरी योजना का सबसे लंबा (867 किलोमीटर) हिस्सा है। यह मार्ग झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, सीहोर, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिंडौरी जैसे जिलों को एक सूत्र में पिरोएगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर को मध्य प्रदेश के रास्ते सीधे गुजरात की सीमाओं से जोड़ देगा। 6. मध्यभारत विकासपथ (कुल लंबाई: 746 किमी) यह कॉरिडोर विशेष रूप से मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को दुनिया के सामने लाने के लिए डिजाइन किया गया है। 746 किलोमीटर लंबा यह मार्ग भीमबैठका, भोजपुर, सांची, उदयगिरी, चंदेरी, ओरछा और दतिया जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को जोड़ेगा। इसके अलावा, इस कॉरिडोर के जरिए मुरैना से लेकर बैतुल तक सीधी और निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सकेगी।  

लुधियाना-हलवारा एयरपोर्ट की बढ़ी लोकप्रियता, 49% सीटें रहीं फुल; एयरलाइंस उत्साहित

लुधियाना लुधियाना के हलवारा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने को लेकर यात्रियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 15 मई से 10 जून तक का यात्री डेटा जारी किया है।  एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अनुसार, नए एयरपोर्ट के लिहाज से यह आंकड़ा संतोषजनक माना जा रहा है। यात्रियों के क्रेज से एयरलाइंस की उम्मीदें जगी हैं। इस एयरपोर्ट ने शुरुआती 26 दिनों यानि 15 मई से 10 जून तक उम्मीद से कई ज्यादा यात्री आए हैं। यात्रियों के क्रेज को देखते हुए कुछ दिन पहले एयर इंडिया ने लुधियाना से कनेक्टिंग फ्लाइट का शेड्यूल भी जारी किया था।     कुल उड़ानें और सीटें: हलवारा एयरपोर्ट से फिलहाल रोजाना औसतन 4 उड़ानें (आने और जाने वाली मिलाकर) संचालित हो रही हैं। हलवारा एयरपोर्ट पर उतरने वाले एयर इंडिया के जहाज में यात्रियों के लिए 138 सीटें हैं। इस लिहाज से हर दिन एयरपोर्ट पर कुल 552 सीटों (आने जाने की) की उपलब्धता रहती है। 26 दिनों के संचालन के दौरान एयरलाइंस के पास कुल 14352 सीटें उपलब्ध थीं।     सीटें बुक होने का प्रतिशत: इन 14352 उपलब्ध सीटों में से 7,008 यात्रियों ने सफर किया। इस हिसाब से पहले ही महीने में हलवारा एयरपोर्ट पर लगभग 49% सीटें बुक हुईं, जिसे एविएशन इंडस्ट्री में नए एयरपोर्ट के लिए एक बेहतरीन शुरुआत माना जाता है।     हर फ्लाइट में औसतन 68 यात्री कर रहे सफर: एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के आंकड़ो की केलकुलेशन करें तो 26 दिनों में 4 उड़ानों के हिसाब से कुल 104 फ्लाइट्स ने टेकऑफ और लैंडिंग की। इसमें 7,008 यात्रियों ने सफर किया, यानी हर फ्लाइट में औसतन 67 से 68 यात्री सफर कर रहे हैं। इस तरह एक दिन में औसतन 272 यात्री फ्लाइट्स से आ जा रहे हैं।     समर वेकेशन में मिला उछाल: समर वेकेशन पर जाने वाले लोगों ने हलवारा एयरपोर्ट का खूब इस्तेमाल किया। हवाई अड्डे के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 10 जून के बीच 1,368 यात्री हलवारा हवाई अड्डे पर पहुंचे, जो प्रतिदिन औसतन लगभग 137 यात्री हैं। यह 15 मई से 31 मई के बीच की अवधि की तुलना में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।     1,921 यात्रियों ने हवाई अड्डे से यात्रा की: इसी तरह, 1 से 10 जून के दौरान प्रस्थान (जाने वाले यात्रियों) में 67 प्रतिशत की भारी वृद्धि देखी गई, जिसमें 1,921 यात्रियों ने हवाई अड्डे से यात्रा की, जो दैनिक औसतन लगभग 192 यात्री हैं। मई में, जब उड़ान संचालन शुरू हुआ था, प्रति दिन औसत आगमन 105 यात्री था जबकि औसत प्रस्थान 115 यात्री प्रति दिन था। एयर इंडिया इसे मान रही है बेहद पॉजिटिव साइन हलवारा से मुख्य रूप से उड़ानें संचालित कर रही एयर इंडिया और एयरपोर्ट अथॉरिटी इस रिस्पॉन्स से बेहद गदगद हैं। एयर इंडिया के सूत्रों के मुताबिक, किसी भी नए घरेलू या इंटरनेशनल रूट पर शुरुआती महीने में 49% की ऑक्यूपेंसी मिलना और हर फ्लाइट में औसतन 67+ यात्रियों का होना एक बेहद पॉजिटिव साइन है। बिजनेस ट्रैवलर्स व कॉर्पोरेट बुकिंग बढ़ने की उम्मीद लुधियाना पंजाब का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर (इंडस्ट्रियल हब) है। यहां के कारोबारियों और एनआरआई (NRI) को पहले दिल्ली या अमृतसर जाना पड़ता था। एयर इंडिया का मानना है कि आने वाले दिनों में जैसे ही बिजनेस ट्रैवलर्स और कॉर्पोरेट बुकिंग्स बढ़ेंगी, यह ऑक्यूपेंसी 70 से 80 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने की समीक्षा हाल ही में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी खुद दिल्ली से हवाई मार्ग से हलवारा पहुंचे और उन्होंने एयरपोर्ट अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने इस शानदार शुरुआत के लिए टीम की तारीफ की।

Monsoon 2026 Update: मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक तय, कई जिलों में बारिश और आंधी का अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम ने फिर करवट ली है। IMD ने अगले 5 दिनों के लिए प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक, बारिश, वज्रपात और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है और उसके प्रभाव से प्रदेश में व्यापक वर्षा गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। MP में मानसून का इंतजार अब अंतिम चरण में दिखाई दे रहा है। आईएमडी के अनुसार सोमवार को प्रदेश का वातावरण तेजी से मानसूनी स्वरूप ग्रहण कर रहा है। रात के तापमान में गिरावट, हवा में बढ़ती नमी और अधिकांश क्षेत्रों में हो रही बारिश संकेत है कि मानसून के आगमन के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं। प्रदेश के अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल में न्यूनतम तापमान 20.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से लगभग 5 डिग्री कम है। राजगढ़, दमोह, शिवपुरी और ग्वालियर जैसे जिलों में भी रात का तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री नीचे दर्ज हुआ। यह स्थिति बताती है कि बादलों और नमी की उपस्थिति के कारण वातावरण में शीतलता बनी हुई है। शिवपुरी में सबसे अधिक बारिश दर्ज पिछले 24 घंटों में शिवपुरी में 20.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो प्रदेश में सर्वाधिक रही। इसके अलावा मालांजखंड, ग्वालियर, जबलपुर और गुना में भी बारिश रिकॉर्ड की गई। हालांकि वर्षा अभी पूरे प्रदेश में एक समान नहीं हुई है, लेकिन यह स्पष्ट संकेत है कि वातावरण में पर्याप्त नमी और अस्थिरता मौजूद है।     अगले 5 दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और आंधी की संभावना।     कुछ जिलों में 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकती हैं तेज हवाएं।     भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा समेत कई जिले अलर्ट पर।     ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग के कई जिलों में भी मौसम बदलेगा।     मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। प्रदेश के किन इलाकों में रहेगा ज्यादा असर मौसम विभाग के अनुसार 16 से 20 जून के बीच भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, जबलपुर, डिंडोरी, उमरिया, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, सागर और आसपास के जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। दिन-रात के तापमान में 2 से 5 डिग्री गिरावट बारिश की गतिविधियों के चलते प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। कई जिलों में मौसम सुहावना बना हुआ है। खरीफ फसलों के लिए वरदान साबित होगी बारिश मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यदि अगले कुछ दिनों तक समुद्री नमी का प्रवाह इसी तरह बना रहता है तो मध्यप्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसून का तेजी से विस्तार हो सकता है। किसानों से लेकर आम नागरिकों तक सभी की निगाहें अब उस पहली व्यापक मानसूनी बारिश पर टिकी हैं, जो गर्मी से राहत देने के साथ खरीफ फसलों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। मौसम विभाग की सलाह     खराब मौसम के दौरान पेड़ों और कमजोर संरचनाओं से दूर रहें।     बिजली चमकने पर खुले मैदान में न जाएं।     किसान फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम करें।     तेज हवा और बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें।

मध्यप्रदेश में विकेंद्रीकृत नवकरणीय ऊर्जा के विस्तार और तकनीकी चुनौतियों के समाधान पर भोपाल में राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

भोपाल  नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव  मनु वास्तव ने कहा कि मध्यप्रदेश स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियां ऊर्जा सुरक्षा के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने का माध्यम बनेंगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार, नीति समर्थन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से राज्य में हरित ऊर्जा के विस्तार को नई गति मिलेगी। मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक  अमनबीर सिंह बैंस ने कहा कि आधुनिक तकनीकों और प्रभावी ग्रिड प्रबंधन के माध्यम से विकेंद्रीकृत नवकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकता है तथा इससे राज्य की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इस अवसर पर अतिथियों ने पुस्तक विमोचन भी किया। “मध्यप्रदेश में विकेंद्रीकृत नवकरणीय ऊर्जा परिनियोजन को आगे बढ़ाना” विषय पर भोपाल में आयोजित कार्यशाला में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, परियोजना विकासकर्ताओं, शोधकर्ताओं, डिस्कॉम प्रतिनिधियों तथा सरकारी एवं निजी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जर्मनी की अंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल (आईकेआई), नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, मध्यप्रदेश शासन तथा मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में मध्यप्रदेश में विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार एवं तकनीकी सहयोग को सुदृढ़ बनाने पर विशेष बल दिया गया। कार्यशाला में मध्यप्रदेश में एग्रीफोटोवोल्टिक्स पर व्यापक कानूनी एवं व्यवहार्यता मूल्यांकन रिपोर्ट का विमोचन किया गया। इसके साथ ही सौर ऊर्जा संयंत्रों के प्रदर्शन विश्लेषण, रिएक्टिव पावर मापन, रिले एवं ट्रांसफार्मर समन्वय, 11 केवी ग्रिड इंजेक्शन से जुड़ी चुनौतियों तथा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के प्रभावी क्रियान्वयन सहित विभिन्न तकनीकी विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।कार्यशाला में जर्मनी के संघीय आर्थिक सहयोग एवं विकास मंत्रालय, जर्मन दूतावास, जीआईजेड इंडिया तथा केएफडब्ल्यू डेवलपमेंट बैंक के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने मध्यप्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, तकनीकी नवाचार और संस्थागत समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर बल दिया।  

आंगनवाड़ी दीदी के प्रयास से कुपोषण के चक्रव्यूह से बाहर आई मासूम माहिका

भोपाल  जब सरकारी प्रयास और एक माँ का संकल्प आपस में मिलते हैं, तो कुपोषण जैसी गंभीर चुनौती को भी मात दी जा सकती है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जमीनी प्रयासों और 'पोषण पखवाड़ा' अभियान की सफलता की एक बेहद भावुक और प्रेरक कहानी ग्वालियर जिले से सामने आई है। यहाँ के शहरी परियोजना-01 के अंतर्गत आने वाले पीएचई कॉलोनी (सेक्टर 3, वार्ड 7) आंगनबाड़ी केंद्र की सजगता से 'सैम' (SAM – Severe Acute Malnutrition) यानी गंभीर कुपोषण की शिकार एक मासूम बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य श्रेणी में आ चुकी है। इस सफलता ने न केवल एक परिवार को खुशियाँ लौटाई हैं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए कुपोषण के खिलाफ जंग में एक अनूठा उदाहरण पेश किया है। ग्वालियर की पीएचई कॉलोनी में रहने वाली  मोना के घर 14 मार्च 2025 को बेटी माहिका का जन्म हुआ था। जन्म के कुछ महीनों बाद ही माहिका का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा और वह शारीरिक रूप से कमजोर होने लगी। जनवरी 2026 में जब आंगनबाड़ी केंद्र पर उसका वजन और लंबाई मापी गई, तो आंकड़े बेहद चिंताजनक थे। महज 5 किलो 500 ग्राम वजन और 68 सेंटीमीटर लंबाई के साथ माहिका 'सैम' (गंभीर कुपोषण) की श्रेणी में जा चुकी थी। एक माँ के लिए अपनी संतान को इस हालत में देखना किसी सदमे से कम नहीं था। माहिका की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता  माधुरी राजावत ने तुरंत मोर्चा संभाला। उन्होंने 19 जनवरी 2026 को माहिका को विशेष 'C-SAM' कार्यक्रम के तहत पंजीकृत किया और उस पर विशेष ध्यान देना शुरू किया। इस पूरी मुहिम में बड़ा बदलाव तब आया जब अप्रैल माह में आयोजित 8वें पोषण पखवाड़े के दौरान परियोजना अधिकारी डॉ. मनोज गुप्ता और सेक्टर पर्यवेक्षक  सुमन पांडे ने खुद इस मामले में गहरी रुचि ली। कार्यक्रम में आंगनबाड़ी टीम ने केंद्र पर आए हितग्राहियों को परामर्श देते हुए भोजन में मोटे अनाज, मौसमी सब्जियों, फलों और 'तिरंगा भोजन' के महत्व को समझाया। इसके साथ ही 6 माह से 2 वर्ष के बच्चों के लिए नियमित स्तनपान के साथ दिन में तीन से चार बार ऊपरी आहार देने की सलाह दी गई। इस आयोजन में माहिका की माँ मोना भी सम्मिलित हुईं और उन्होंने वहाँ दी गई हर सीख को गहराई से समझा। विभागीय अधिकारियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की टीम ने माहिका के घर जाकर गृहभेंट की और परिवार का हौसला बढ़ाया। आंगनबाड़ी केंद्र से मिली सीख को  मोना ने पूरी निष्ठा से अपने जीवन में लागू किया। उन्होंने आंगनबाड़ी से मिलने वाले टेक होम राशन (THR) का सही उपयोग कर अपनी बेटी के लिए नियमित रूप से पौष्टिक हलवा और खिचड़ी बनाना शुरू किया। पोषण के साथ माँ ने माहिका के मानसिक विकास पर भी ध्यान दिया, जिसके तहत उन्होंने बच्ची के साथ खेलना, उसे कविताएं सुनाना और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना प्रारंभ किया। सघन प्रयास के बाद प्रत्येक सप्ताह माहिका की ग्रोथ मॉनिटरिंग की जाने लगी, जिसके सुखद परिणाम अब सामने आ चुके हैं। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन और माँ की अथक मेहनत से वर्तमान में माहिका का वजन और लंबाई दोनों ही पूरी तरह से सामान्य श्रेणी में आ चुके हैं। मासूम माहिका के स्वास्थ्य में आया यह क्रांतिकारी सुधार देखकर उसके माता-पिता और पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है। आंगनबाड़ी दीदी की इस ममतामयी पहल और विभाग की मुस्तैदी ने यह साबित कर दिया है कि सही पोषण, सही देखभाल और निरंतर निगरानी से हर आंगन को खुशहाल बनाया जा सकता है।    

मुरैना के डायल-112 हीरोज कुएँ में गिरकर घायल हुए 45 वर्षीय व्यक्ति को पहुँचाया अस्पताल

भोपाल  मुरैना जिले के थाना कैलारस क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता एवं मानवीय संवेदनशीलता से कुएँ में गिरकर घायल हुए 45 वर्षीय व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालकर समय पर अस्पताल पहुँचाया गया। त्वरित सहायता के कारण घायल व्यक्ति को शीघ्र चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जा सका। 16 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना कैलारस क्षेत्र अंतर्गत डोंगरपुर नरवुआ के पास एक व्यक्ति कुएँ में गिर गया है तथा उसे तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही कैलारस थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया या। डायल-112 स्टाफ आरक्षक  विजयपाल गुर्जर एवं पायलट  संतोषी ने मौके पर पहुंचकर पाया कि 45 वर्षीय व्यक्ति कुएँ में गिर जाने से गंभीर रूप से घायल हो गया था। डायल-112 जवानों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए स्थानीय लोगों की सहायता से घायल व्यक्ति को सुरक्षित कुएँ से बाहर निकाला और एफआरव्ही वाहन से शासकीय अस्पताल कैलारस पहुँचाकर भर्ती कराया। डायल-112 की समयबद्ध एवं संवेदनशील कार्यवाही से घायल व्यक्ति को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सकी। डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर संकट की घड़ी में मानवीय संवेदनाओं के साथ नागरिकों की सुरक्षा एवं जीवन रक्षा के लिए निरंतर तत्पर है।  

हीट वेव की चुनौती को देखते हुए पूरे प्रदेश में लागू होगी एक समान अवकाश व्यवस्था

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश में लगातार बढ़ रही गर्मी और हीट वेव की परिस्थितियों को देखते हुए बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रणाधीन एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि बढ़ाकर 24 जून तक कर दी गई है।  अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब प्रत्येक वर्ष 20 मई से 24 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा तथा 25 जून से विद्यालयों में नियमित पठन-पाठन प्रारंभ होगा। योगी सरकार का उद्देश्य बच्चों को भीषण गर्मी से सुरक्षित रखते हुए नए शैक्षणिक सत्र की बेहतर और व्यवस्थित शुरुआत सुनिश्चित करना है। प्रदेश सरकार ने यह निर्णय पिछले वर्षों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए लिया है, जब हीट वेव की स्थिति के कारण जिलाधिकारियों को स्थानीय स्तर पर बार-बार अवकाश बढ़ाना पड़ता था। नई व्यवस्था से पूरे प्रदेश में एकरूपता सुनिश्चित होगी और विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा शिक्षकों को स्पष्ट शैक्षणिक कैलेंडर उपलब्ध हो सकेगा। 22 जून से विद्यालय पहुंचेंगे शिक्षक, नए सत्र की तैयारियां होंगी पूरी योगी सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि विद्यालय खुलने से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं। इसके लिए 22, 23 और 24 जून को सभी शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी विद्यालय में उपस्थित रहेंगे। इस अवधि में लेसन प्लान तैयार करने, मध्याह्न भोजन व्यवस्था को अंतिम रूप देने, पाठ्यपुस्तक वितरण की तैयारी, विद्यालय प्रबंध समिति की बैठक, बाल वाटिका संचालन की तैयारी, विद्यालय परिसर, रसोईघर एवं शौचालयों की साफ-सफाई, खेल सामग्री की उपलब्धता तथा स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब को क्रियाशील बनाने जैसे कार्य संपन्न किए जाएंगे। 220 कार्यदिवस और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर रहेगा विशेष जोर अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप प्रत्येक शैक्षणिक सत्र में न्यूनतम 220 कार्यदिवस और नियमित पठन-पाठन सुनिश्चित किया जाए। जिलाधिकारियों को भी स्थानीय स्तर पर अवकाश घोषित करने से पूर्व इस विधिक प्रावधान को ध्यान में रखने के निर्देश दिए गए हैं। योगी सरकार का मानना है कि बच्चों के अधिगम परिणामों में सुधार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पर्याप्त शिक्षण दिवस सुनिश्चित करना आवश्यक है। योग, स्वच्छता और बेहतर अधिगम वातावरण पर फोकस आदेश में विद्यालयों में बिजली, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं को सुचारु रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं की सहभागिता से सामूहिक योगाभ्यास आयोजित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली, अनुशासन और सकारात्मक सोच से जोड़ना भी है।