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आय से अधिक संपत्ति मामले में लोकायुक्त ने धार में सोसायटी प्रबंधक के ठिकानों पर की छापेमारी

धार   धार जिले में लोकायुक्त की टीम ने दबिश दी। आदिम जाति सहकारी सोसायटी प्रबंधक के घर और फार्म हाउस पर छापा मारा। बताया जा रहा है कि, आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर कार्रवाई की गई है। फिलहाल, दस्तावेजों की जांच पड़ताल की जा रही है। बताया जा रहा है कि, बुधवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे इंदौर लोकायुक्त की टीम धार जिले पहुंची। आदिम जाति सहकारी सोसायटी प्रबंधक गोवर्धनलाल मारू के घर, दफ्तर और फार्म हाउस पर एक साथ दबिश दी गई हैं। एक साथ 18 चार पहिया वाहनों में सवार होकर छागोवर्धनलाल मारू के अलग-अलग ठिकानों पर पहुंची। मौके पर 65 से अधिक कर्मचारियों के साथ भारी पुलिसबल तैनात किया गया है। आय से अधिक संपत्ति होने की शिकायत पर छापेमार कार्रवाई की गई है। अबतक हुई ये कार्रवाई इस कार्रवाई के दौरान इंदौर लोकायुक्त के डीएसपी सुनील तालान समेत अन्य अधिकारी भी मौके पर मौजूद है। लोकायुक्त की टीम दस्तावेजों की जांच पड़ताल में जुटी हुई है। अब तक की सर्चिंग में 2 लाख 11 हजार रूपए नकद, 15 लाख का सोना और 1 लाख की चांदी बरामद हुई है। अबतक हुई दस्तावेज़ों की जांच में 4 करोड़ से अधिक की चल-अचल संपत्ति का खुलासा हुआ है, जबकि अनुमानित वैध आय करीब 1 करोड़ 20 लाख के आसपास ही हुई है। फिलहाल, तलाशी अभियान जारी है।

चंडीगढ़ में तनावपूर्ण हालात: PU में विरोध प्रदर्शन, किसान महापंचायत ने बढ़ाई सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

चंडीगढ़  पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) के कुलपति कार्यालय के बाहर बुधवार को आयोजित विरोध प्रदर्शन में भीड़ कम रही। प्रदर्शनकारी विश्वविद्यालय की सीनेट चुनाव की अधिसूचना जारी करने की मांग को लेकर जुटे थे, लेकिन कैंपस में माहौल शांत रहा। प्रदर्शन में कम भीड़ की बड़ी वजह यह रही कि शहर का मुख्य फोकस सेक्टर-43 स्थित दशहरा ग्राउंड में किसानों के विशाल प्रदर्शन की ओर खिसक गया। पंजाब के किसान संगठनों की इस महापंचायत के चलते भारी पुलिस बल, रिज़र्व फोर्स और प्रशासनिक ध्यान वहीं केंद्रित रहा। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि किसान यूनियनों के प्रतिनिधि विश्वविद्यालय पहुंचेंगे और वहां उपस्थित छात्रों व कर्मचारियों को संबोधित करेंगे। इस घोषणा के बावजूद सुबह के समय कैंपस में भीड़ सीमित रही। वहीं, यूथ कांग्रेस भी छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन कर रही है।   सेक्टर-43 में मंच तैयार, किसान पहुंचने शुरू सेक्टर-43 स्थल पर किसान संगठनों के नेता और प्रतिनिधि पहुंचने शुरू हो गए हैं। वहां सभा के लिए मंच तैयार किया जा रहा है और सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। पीयू बचाओ मोर्चा द्वारा पूर्ण बंद का आह्वान पीयू बचाओ मोर्चा—जो 50 से अधिक छात्र संगठनों, किसान संगठनों, सामाजिक समूहों और कर्मचारी यूनियनों का संयुक्त मंच है—ने बुधवार को पूर्ण ‘कैंपस बंद’ का आह्वान किया था। 10 नवंबर को हुए उग्र विरोध की तर्ज पर आज भी विश्वविद्यालय परिसर बंद रहा। विश्वविद्यालय बंद, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी     विश्वविद्यालय प्रशासन पहले ही बुधवार को छुट्टी घोषित कर चुका था     सभी विभाग बंद रहे     प्रशासनिक ब्लॉक के बाहर भारी पुलिस तैनाती की गई     कैंपस के अंदर सभी दुकानें भी बंद रहीं   किसानों की महापंचायत किसानों के ऐतिहासिक आंदोलन के पांच साल पूरे होने के मौके पर आज चंडीगढ़ में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की महापंचायत करने जा रहा है। सेक्टर-43बी में आयोजित इस कार्यक्रम में पंजाब सहित देशभर से हजारों किसान पहुंच रहे हैं। सुबह से ही महापंचायत स्थल पर किसानों के जत्थे पहुंचने शुरू हो गए हैं। केंद्रीय बल तैनात, सुरक्षा के कड़े इंतजाम महापंचायत को देखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी है। चंडीगढ़ पुलिस के साथ-साथ बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के जवान भी सेक्टर-43 में तैनात कर दिए गए हैं। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और किसी संभावित स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की भी मदद ली है। मौके पर किसानों की ओर से लंगर की व्यापक तैयारियां की गई हैं। दूर-दराज से आए किसानों के लिए भोजन की भी व्यवस्था है। किसानों की मुख्य मांगें भाकियू (लक्खोवाल) ने बताया कि महापंचायत में केंद्र सरकार और पंजाब सरकार दोनों को मांगपत्र सौंपा जाएगा। किसान अपनी अधूरी मांगों पर अब भी अड़े हुए हैं। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—     एमएसपी की कानूनी गारंटी     पंजाब को चंडीगढ़ पर पूर्ण अधिकार     पंजाब यूनिवर्सिटी का पंजाब से जुड़ा दर्जा बहाल करना     राज्य के जल संसाधनों पर पंजाब का हक सुनिश्चित करना     इसके अलावा केंद्र के नए चार लेबर कोड, बिजली संशोधन विधेयक 2025, बाढ़ प्रभावित किसानों की मदद, गन्ना किसानों के बकाया भुगतान और सहूलियतों सहित कई अन्य मुद्दों को भी मांगपत्र में शामिल किया गया है। आंदोलन तेज करने की चेतावनी किसान नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि सरकारें उनकी मंगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठातीं, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध: CM डॉ. यादव

प्रदेश में खेल संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव रोइंग चैंपियनशिप की मेजबानी करना राज्य सरकार के लिए गर्व का विषय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 8वीं इंटर स्टेट चैलेंजर्स और 45वीं जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार युवाओं के चहुँमुखी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। खेल विभाग प्रदेश में खेल संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित कर रहा है। भारत की प्राचीन संस्कृति में खेल केवल मनोरंजन नहीं बल्कि अनुशासन, संतुलन और मानसिक दृढ़ता का माध्यम माने गए हैं। पुराने समय में नौकायन, तैराकी और जल प्रशिक्षण को सामरिक और शारीरिक दक्षता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था। वही परंपरा आज वॉटर स्पोर्ट्स के रूप में हमारे सामने है। इसमें तकनीक, सहन शक्ति और फोकस का वास्तविक परीक्षण होता है। राज्य सरकार के लिए रोइंग चैंपियनशिप की मेजबानी करना गर्व और आनंद का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को भोपाल के बड़े तालाब स्थित बोट क्लब पर 8वीं इंटर स्टेट चैलेंजर्स और 45वीं जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चैंपियनशिप के शुभारंभ की घोषणा की। उन्होंने चैंपियनशिप में शामिल 23 राज्यों के लगभग 500 खिलाड़ियों द्वारा देशभक्ति गीतों की धुनों पर प्रस्तुत मार्च पास्ट का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आयोजन स्थल पहुंचने पर उन्हें कैप लगाकर स्वागत किया गया। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास सारंग, भोपाल महापौर मती मालती राय सहित अधिकारी एवं खेल प्रेमी विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों के लिए बेहतर माहौल बना है। भारत अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार उपलब्धियां हासिल कर रहा है। मध्यप्रदेश ने वॉटर स्पोर्ट्स में एशियन गेम्स जैसे प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। इसी वर्ष हुए 38वें नेशनल गेम्स, खेलो इंडिया, वॉटर स्पोर्ट्स फेस्टीवल में भी प्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल में आयोजित चेंपियनशिप में शामिल होने आए विभिन्न राज्यों के खिलाड़ियों को मध्यप्रदेश की कला-संस्कृति और स्वाद से रू-ब-रू होते हुए भोपाल के आसपास स्थित पर्यटन स्थलों के भ्रमण के लिए भी प्रेरित किया। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास सारंग ने कहा कि यह 4 दिवसीय रोइंग चैंपियनशिप, वॉटर स्पोर्ट्स के कुंभ के रूप में स्थापित होगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार खेल-खिलाड़ी और खेल मैदान को प्रोत्साहित करने के लिए संपूर्ण प्रदेश में प्रयास कर रही है। खेलों और खिलाड़ियों को आवश्यक प्रशिक्षण के संबंध में राष्ट्रीय के साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नॉलेज एक्सचेंज के लिए गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के कोच तथा खिलाड़ी उपस्थित थे।  

नाम पढ़ते ही चौंक गए अधिकारी: वोटर लिस्ट में टीवी, ऐंटीना, काजू-बादाम जैसे अनोखे नाम

अगर मालवा  काजू सिंह, बादाम, पिस्ता, शेरनी बाई, टीवी, ऐंटेना, धर्मेंद्र, राजेश खन्ना, दिलीप कुमार, हेमामालिनी… चौंकिए मत। ये मतदाताओं के नाम हैं। मामला मध्य प्रदेश के अगर मालवा जिले का है। SIR के तहत अपडेट हो रहे मतदाता सूची में इस तरह के अनोखे नाम पढ़कर हर कोई हैरान है। अधिकारियों ने बताया जिले के दो मतदान केंद्रों- 93 और 94 में मतदाताओं के नाम फिल्मी पोस्टर, हीरो-हीरोइन, ड्राई-फ्रूट या टूरिज्म के ब्रोशर जैसे हैं। मगर इस तरह के अनोखे नाम रखने की वजह क्या है, जानिए पूरी बात। यह अनोखी वोटर लिस्ट दरअसल पढ़ी समुदाय (Pardhi Community) की जीवनशैली से जुड़ी है, जो पीढ़ियों से घुमंतू जीवन जी रहे हैं। ये समुदाय चलते-फिरते जीवन में अपने बच्चों के नाम उसी चीज़ पर रख देते थे, जो जन्म के समय आसपास दिखाई देता था। कभी तंबू सिनेमा में चल रही फिल्म, कभी गुजरते शहर का नाम, तो कभी वह स्नैक जो परिवार खा रहा होता था या ऐसे ही कुछ और। हंसते हुए BLO ने क्या बताया? एनडीटीवी रिपोर्ट के मुताबिक, 2006 से BLO के रूप में तैनात संतोष जैसवाल बताते हैं- “माधुरी दीक्षित, जीतेंद्र दीक्षित, प्याज बाई, सरांगपुर बाई, हेमामालिनी… शुरुआत में ये नाम अजीब लगे, लेकिन अब तो याद हो गए। उन्होंने मुस्कुराते हुए मजाकिया अंदाज में कहा- इतने फॉर्म भरे हैं कि बॉलीवुड मुझे कास्टिंग डायरेक्टर रख ले!” उनके अन्य साथी BLO हंसते हुए कहते हैं- “काजू सिंह, सनी देओल, शेरनी बाई, शेर खान… शुरुआत में लगा कि कोई मजाक कर रहा है। मगर आज ये नाम रोज़मर्रा जैसे लगते हैं।” मतदाता ने गर्व से सुनाई अपने नाम की कहानी जिन नामों को आमजन अनोखा समझ रहे हैं, वो नाम इन लोगों के लिए रोजमर्रा का हिस्सा बन गए हैं। देश प्रेमी नाम वाले मतदाता ने अपने नाम पर गर्व करते हुए इसके रखने की कहानी साझा की। देश प्रेमी ने बताया- “मेरे जन्म के दिन पिताजी फिल्म देखने गए थे। हीरो का नाम अच्छा लगा, कहानी पसंद आई, तो बस मेरा नाम देश प्रेमी रख दिया। हमारे यहां सोल्जर, परदेसी, राजकुमार जैसे नाम बहुत आम हैं।”

कमला पसंद के मालिक की बहू दीप्ति ने दी जान, डायरी में लिखे झगड़े के कारण

नई दिल्ली  देश की राजधानी दिल्‍ली में एक बड़े पान-मसाला के कारोबारी की बहू ने कथित तौर पर आत्‍महत्‍या कर ली. मृतक महिला के पति ने ही उन्‍हें अस्‍पताल पहुंचाया, पर डॉक्‍टर उन्‍हें बचा नहीं सके. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की छानबीन शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि महिला ने संदिग्‍ध हालात में सुसाइड किया है. शव का पोस्‍टमॉर्टम सफदरजंग अस्‍पाताल में किया जाएगा, इसके बाद से ही मौत की असली वजह का पता चल सकेगा. फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है. सुसाइड का यह मामला दिल्‍ली के पॉश वसंत विहार इलाके का है. बताया जा रहा है कि सुसाइड करने वाली महिला का नाम दीप्ति है और वे पान-मसाला की एक बड़ी कंपनी के मालिक की बहू थीं. पुलिस अभी इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रही है और जांच-पड़ताल के बाद ही तस्‍वीर साफ होने की बात कह रही है. जान देने वाली महिला दीप्ति ने फांसी पर लटक कर सुसाइड किया है. पति ने कर रख थी दो शादी जानकारी के अनुसार, सुसाइड करने वाली महिला दीप्ति के पति ने दो शादी कर रखी थी. एक पत्‍नी साउथ फिल्‍म इंडस्‍ट्री की एक्‍ट्रेस बताई जा रही है. बताया यह भी जा रहा है कि दीप्ति मंगलवार दोपहर को अपने ही घर में संदिग्‍ध हालात में मिली थीं. इसके बाद उनके पति ही उनको लेकर अस्पताल गए थे. जहां डॉक्‍टर उनको बचा नहीं सके और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. सफदरजंग अस्‍पताल में पोस्‍टमॉर्टम पाना-मसाला कारोबारी के बहू के शव का पोस्‍टमॉर्टम सफदरजंग अस्‍पताल में किया जाएगा. डॉक्‍टरों का एक पैनल पोस्‍टमॉर्टम करेगा. उम्‍मीद है कि पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही असली वजहों का पता चल सकेगा. बताया जा रहा है कि पुलिस को इस बाबत मंगलवार दोपहर 12 बजे इस बाबत कॉल मिली थी. मौके पर पहुंची पुलिस ने तत्‍काल मामले की जांच शुरू कर दी. क्‍या बोले परिजन पान मसाला कंपनी के मालिक की बहू दीप्ति चौरसिया (40) के सुसाइड से सनसनी फैल गई. पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उन्होंने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है. दीप्ति की साल 2010 में कारोबारी के बेटे से शादी हुई थी. दोनों का 14 साल का एक बेटा भी है. बताया जा रहा है कि महिला के पति ने दो शादी कर रखी है. दूसरी पत्नी दक्षिण भारत के फिल्मों की अभिनेत्री है. वसंत विहार पुलिस मामले की जांच कर रही है. उधर, दीप्ति चौरसिया की मौत की खबर से दोनों पक्ष के परिवार शोक में हैं. दोनों परिवार मिलकर दीप्ति का अंतिम संस्‍कार करेंगे. किसी ने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है. परिजनों ने बताया कि दीप्ति शायद डिप्रेशन में थी और परेशान थी. दोनों परिजनों ने प्राइवेसी का रिस्‍पेक्‍ट करने का अनुरोध किया है.

आतंकी उमर की दिल्ली में सुरक्षित पनाहगाह का खुलासा, शोएब और अल-फलाह संगठन से जुड़े सुराग

फरीदाबाद लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए फिदायीन हमले के सिलसिले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने एक और आरोपी को दबोचा है। खास बात यह है कि इसका भी लिंक अल-फलाह यूनिवर्सिटी से ही, जहां डॉक्टरों के आतंकी मॉड्यूल का खुलासा फरीदाबाद में विस्फोटकों की बरामदगी और दिल्ली धमाके के बाद हुआ है। सातवें आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया गया शोएब फरीदाबाद के धौज इलाके का रहने वाला है। आरोप है कि वह कार से फिदायीन हमला करने वाले आतंकी डॉ. उमर उन नबी का बड़ा मददगार था। शोएब ने उसने ना आतंकी को छिपाया बल्कि उसे विस्फोट से पहले उसे साजो-सामान भी मुहैया करने का आरोपी है। बताया जाता है कि जब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 30 अक्टूबर को डॉ. मुजम्मिल को दबोचा तो उमर अंडर ग्राउंड हो गया। उमर नबी को छिपाने की व्यवस्था शोएब ने ही की। उसने आतंकी डॉक्टर उमर को जिला नूंह की हिदायत कॉलोनी में अपनी साली के घर कमरा दिलवाया। यहां उमर दिल्ली धमाके से पहले 30 अक्टूबर से 10 नवंबर तक किराए पर रहा था। यहीं से आरोपी डॉक्टर ने दिल्ली जाकर धमाका किया था। शोएब की साली मूल रूप से गोलपुरी गांव की निवासी थी और ससुराल हथीन क्षेत्र के खिल्लूका गांव में बताई गई थी। बहरहाल, धमाके के बाद जांच टीमों ने हिदायत कॉलोनी, पिनगवां रोड और आसपास के इलाकों में सर्च अभियान चलाया था। शोएब अल-फलाह यूनिवर्सिटी में इलेक्ट्रिशियन है। वहीं से वह आरोपी डॉक्टरों उमर के संपर्क में आया। एएनआई अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली धमाके से पहले नूंह में रहते हुए आतंकी उमर नबी किन लोगों से मिला, कहां से क्या सामान जुटाया, क्या प्लानिंग की, इन सबकी अहम जानकारी शोएब को हो सकती है। जांचकर्ता अब शोएब से पूछताछ करके उस धमाके के रहस्य से और पर्दे उठाएंगे जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई और करीब 20 जख्मी हो गए। नूंह में सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई थी आरोपी की कार दिल्ली धमाका के बाद आरोपी डॉक्टर उमर की कार जिला नूंह में अनेक जगह सीसीटीवी कैमरों कैद हुई थी। जिसके आधार पर जांच एजेंसियों ने मौके पर जांच की थी। जांच अधिकारियों को नूंह में गोयल अल्ट्रासाउंड एवं डायग्नोस्टिक सेंटर (बालाजी पेट्रोल पंप के पास, दिल्ली-अलवर रोड) के सीसीटीवी कैमरे से वह फुटेज मिला था, जिसमें संदिग्ध सफेद रंग की आई-20 कार साफ दिखाई दी थी। एजेंसियों के अनुसार, यह कार डॉ. उमर द्वारा इस्तेमाल की जा रही थी। फुटेज से पहले भी डॉ उमर की यही कार दिल्ली-मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर कैमरे में रिकॉर्ड हुई थी। इससे उसकी आवाजाही का पैटर्न मिल रहा था, जो जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा था। फिरोजपुर झिरका में रहने के दौरान डॉ उमर ने एटीएम से पैसे निकालने की कोशिश की थी, जिसके सीसीटीवी फुटेज को एजेंसियां खंगाल रही थीं। 30 अक्टूबर को डॉक्टर मुजम्मिल को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी से गिरफ्तार किया था 09 नवंबर को जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद पुलिस ने गांव धौज की कॉलोनी से डॉक्टर मुज़म्मिल के किराए के कमरे से 358 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट और हथियार बरामद किए थे 10 नवंबर को जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद पुलिस ने गांव फतेहपुर तगा की कॉलोनी में डॉक्टर मुज़म्मिल के दूसरे किराए के कमरे से 2563 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया था  

पहले एक सड़क की दूरी, अब 200 मीटर का फ़ासला… नीतीश–लालू संबंधों में नई खाई?

पटना समाजवादी विचारधारा के दलों में एक-दूसरे के लंबे समय तक साथी रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के बीच दूरियां और बढ़ गई हैं। दोनों की राजनीतिक दूरियां पिछले 20 साल में समय-काल के हिसाब से बदलती रही हैं, लेकिन दोनों एक सड़क के आर-पार रहते थे। नई सरकार में नीतीश और लालू के आवास के बीच की दूरी अब लगभग 200 मीटर पार कर जाएगी। भवन निर्माण विभाग ने पूर्व सीएम राबड़ी देवी को विधान परिषद में विपक्ष की नेता की हैसियत से मिले 10, सर्कुलर रोड वाले बंगले का आवंटन रद्द कर दिया है और उन्हें 39, हार्डिंग रोड पर नया सरकारी आवास दिया गया है। राबड़ी के सीएम पद से हटने के बाद से परिवार दो दशक से इसी बंगले में रहा रहा था।   लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने राबड़ी देवी का बंगला बदलने को लालू यादव के अपमान की कोशिश बताया है। रोहिणी का इसी आवास पर चुनावी हार के कारण तेजस्वी यादव से झगड़ा हुआ था। लड़ाई के बाद घर से निकली रोहिणी ने कहा था कि उनका कोई परिवार नहीं है, उनको परिवार से निकाल दिया गया है। रोहिणी ने ट्वीट करके कहा है- ‘सुशासन बाबू का विकास मॉडल। करोड़ों लोगों के मसीहा लालू प्रसाद यादव का अपमान करना पहली प्राथमिकता। घर से तो निकाल देंगे, बिहार की जनता के दिल से कैसे निकालिएगा। सेहत नहीं तो कम से कम लालू के राजनीतिक कद का ही सम्मान रखते।’ लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने आवास बदलने को राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई कहा है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि यह कदम नीतीश सरकार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बढ़ते दखल का प्रमाण है। बता दें कि सरकार ने कैबिनेट में शामिल 26 मंत्रियों के लिए आवास आवंटित कर दिया है। इसमें 13 पुराने मंत्रियों का बंगला नहीं बदला गया है। लेकिन 13 नए मंत्रियों को जो आवास आवंटित हुए हैं, उसमें तेज प्रताप यादव का 26 एम स्ट्रैंड रोड वाला आवास भी शामिल है। अब यह आवास बीजेपी कोटे के मंत्री लखेंद्र रौशन को मिल गया है। नीतीश कैबिनेट के 13 नए मंत्रियों के आवास का पता दिलीप कुमार जायसवाल, उद्योग मंत्री- 2, स्ट्रैंड रोड सुरेंद्र मेहता, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री- 33, हार्डिंग रोड श्रेयसी सिंह, आईटी एवं खेल मंत्री- 4, स्ट्रैंड रोड संजय सिंह टाइगर, श्रम संसाधन मंत्री- 41, हार्डिंग रोड अरुण शंकर प्रसाद, पर्यटन तथा कला संस्कृति मंत्री- 25, हार्डिंग रोड रामकृपाल यादव, कृषि मंत्री- 43, हार्डिंग रोड नारायण प्रसाद, आपदा प्रबंधन मंत्री- 12, हार्डिंग रोड रमा निषाद, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री- 3, सर्कुलर रोड लखेंद्र कुमार रौशन, एससी एवं एसटी कल्याण मंत्री- 26 एम, स्ट्रैंड रोड प्रमोद कुमार चंद्रवंशी, सहकारिता एवं पर्यावरण मंत्री- 27, हार्डिंग रोड संजय पासवान, गन्ना उद्योग मंत्री- 21, हार्डिंग रोड संजय सिंह, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री- 13, हार्डिंग रोड दीपक प्रकाश, पंचायती राज मंत्री- 24 एम, स्ट्रैंड रोड  

किसानों को बड़ी राहत! पंजाब में गन्ने का नया MSP 416 रुपये प्रति क्विंटल घोषित

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने राज्य के गन्ना किसानों को बड़ी राहत देते हुए गन्ने के खरीद मूल्य में 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी का फैसला किया है। नई दर के अनुसार अब पंजाब में गन्ने का भाव 416 प्रति क्विंटल होगा, जो पिछले वर्ष के 401 की तुलना में 15 रुपये अधिक है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दीनानगर में नई शुगर मिल का उद्घाटन के मौके पर यह बात कही। हरियाणा सरकार ने इस वर्ष गन्ने का रेट 415 प्रति क्विंटल तय किया है। पंजाब ने इससे 1 रुपये अधिक मूल्य तय कर हरियाणा से बढ़त लेते हुए किसानों को बेहतर समर्थन देने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया है कि पंजाब द्वारा तय किया गया यह रेट देश में सबसे अधिक है। यह घोषणा गन्ना पेराई सीजन शुरू होने से पहले किसानों के लिए सकारात्मक संदेश मानी जा रही है। उम्मीद है कि बढ़े हुए रेट से किसानों की आय में सुधार होगा और राज्य में गन्ना खेती को बढ़ावा मिलेगा।

राजनीति और सरकारी सुविधाएं अस्थायी: तेज प्रताप यादव के बाद राबड़ी देवी को बंगला छोड़ना पड़ेगा

पटना बिहार में सत्ता परिवर्तन का असर अब नेताओं के सरकारी आवासों पर दिखने लगा है. नई सरकार के गठन के बाद भवन निर्माण विभाग ने पुराने आवंटन की समीक्षा शुरू कर दी है और कई नेताओं को अपने सरकारी घर खाली करने पड़ रहे हैं. इस सूची में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनके बेटे तेज प्रताप यादव का नाम भी शामिल हो गया है. बता दें कि तेज प्रताप यादव बिहार सरकार में पूर्व मंत्री भी रहे हैं और फिलहाल पटना के 26 M स्ट्रैंड रोड वाले आवास में रह रहे थे. यह बंगला उन्हें हसनपुर से जीत के बाद 2020 में आवंटित किया गया था. लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सीट बदली और महुआ से चुनाव लड़ा. परिणाम उनके पक्ष में नहीं गया और उन्हें हार का सामना करना पड़ा. विधायक पद समाप्त होने के साथ अब उनका आवास भी उनसे वापस ले लिया गया है और इसे नई सरकार में मंत्री बने लखिन्दर कुमार रौशन को आवंटित कर दिया गया है. राबड़ी देवी को भी बदलना होगा आवास तेज प्रताप के बाद उनकी मां और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी पर भी आवास बदलाव का निर्देश लागू हुआ है. वे लगभग दो दशकों से 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले में रह रही थीं. हालांकि अब बतौर नेता प्रतिपक्ष उन्हें नया आवास दिया जा रहा है. भवन निर्माण विभाग के आदेश के अनुसार उन्हें हार्डिंग रोड स्थित केंद्रीय पूल आवास में बंगला नंबर 39 नए आधिकारिक निवास के रूप में आवंटित किया गया है. नीतिगत नियमों के तहत हो रही कार्रवाई भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया नियम आधारित है. पद और दायित्व बदलने पर आवास पुनः आवंटित करना अनिवार्य होता है. हाल ही में जारी सूची में मंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों और विपक्ष के नेताओं के लिए नए आवास तय किए गए हैं. साफ है कि बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन का प्रभाव अब मिलने वाली सरकारी सुविधाओं तक पहुंच चुका है. राबड़ी देवी को बंगला खाली करना पड़ेगा  . सत्ता परिवर्तन के बाद बिहार में केवल मंत्रिपरिषद ही नहीं बदला, बल्कि अब नेताओं के सरकारी ठिकानों का पता भी बदलने लगा है. राज्य सरकार के भवन निर्माण विभाग ने फैसला लिया है कि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला छोड़ना पड़ेगा. प्रशासन की ओर से इसके निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं और उनके लिए नया बंगला भी आवंटित कर दिया गया है. बता दें कि राबड़ी देवी विधान परिषद् में विपक्ष की नेता हैं और करीब 16 जनवरी 2006 से 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगले में रह रही थीं. अब सरकारी आदेश के तहत उन्हें हार्डिंग रोड स्थित केंद्रीय पूल आवास बंगला नंबर 39 में स्थानांतरित किए जाने का निर्णय हुआ है. भवन निर्माण विभाग ने कहा है कि विधान परिषद् में विपक्ष के नेता के लिए यह बंगला निर्धारित किया गया है. ऐसे में सवाल है कि जब वह पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं और वर्तमान में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष भी तो उन्हें बंगला क्यों खाली करना पड़ा. दरअसल, इसके पीछे की वजह तेजस्वी यादव का आठ साल पहले उठाया गया वह कदम है जो इस फैसले का कारण बना है. जो लड़ाई शुरू की थी, वही भारी पड़ी राबड़ी देवी के बंगले को लेकर राजद समर्थकों में यह चर्चा है कि राबड़ी देवी के पता में बदला होना सत्ता में बदलाव का असर है, लेकिन हकीकत यह है कि सरकारी आदेश की जड़ अदालत का वह फैसला है जिसे तेजस्वी यादव ने खुद आगे बढ़ाया था. वास्तविकता तो यह है कि जिस ‘सिस्टम सुधार’ की लड़ाई तेजस्वी यादव ने लड़ी आज वही सिस्टम उनके परिवार के लिए कड़ा साबित हो गया है. दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री और राजद नेता राबड़ी देवी को 10, सर्कुलर रोड का सरकारी बंगला खाली करना पड़ेगा तो इसकी वजह मौजूदा नीतीश सरकार नहीं, बल्कि उनके बेटे तेजस्वी यादव द्वारा दायर वह याचिका है जिसके आधार पर पटना हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास देने की व्यवस्था खत्म कर दी थी. कब और कैसे मिला था 10, सर्कुलर रोड? राबड़ी देवी जिस बंगले में वर्तमान में रह रही हैं, वह उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते आवंटित किया गया था. बता दें कि वर्ष 2005 में नीतीश कुमार के सत्ता में लौटने के बाद एक बड़ा निर्णय लिया गया था, वह यह कि बिहार के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास, सुरक्षा और अन्य सुविधाएं मिलेंगी. इसी व्यवस्था के तहत यह आवास राबड़ी देवी को मिला और वे 16 जनवरी 2006 से यहां रह रही हैं. लेकिन, जब बिहार की सियासत आगे बढ़ी तो तेजस्वी यादव के एक कदम ने इसके नियम बदल दिए. तेजस्वी का केस जिसने परंपरा बदल दी मामला 2017 का है. तेजस्वी यादव उस समय बिहार के उपमुख्यमंत्री थे और 5, देशरत्न मार्ग स्थित आधिकारिक आवास में रहते थे. लेकिन जब नीतीश कुमार ने आरजेडी से अलग होकर बीजेपी के साथ फिर से सरकार बनाई, तब तेजस्वी यादव को बंगला खाली करने का आदेश दिया गया. सरकार की ओर से कहा गया कि वह बंगला उपमुख्यमंत्री के पद का है, न कि किसी व्यक्ति का. सरकारी नोटिस के बाद तेजस्वी यादव हाईकोर्ट पहुंचे और दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्रियों और उच्च पदों से जुड़े लोगों के आवास और सुविधाओं में नियमों का स्पष्ट निर्धारण होना चाहिए. हाईकोर्ट की जांच और बड़ा खुलासा हाईकोर्ट की डबल बेंच में मुख्य न्यायाधीश एपी शाही और जस्टिस अंजना मिश्रा ने मामले की सुनवाई के दौरान भवन निर्माण विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी. दस्तावेजों में खुलासा हुआ कि- 2010 में सरकारी नियमों में बदलाव किया गया था और उसके बाद राबड़ी देवी, लालू यादव, जीतन राम मांझी, डॉ. जगन्नाथ मिश्रा और सतीश प्रसाद सिंह को आजीवन सरकारी आवास, सुरक्षा और स्टाफ की सुविधा दी गई थी. यही वह बिंदु था जिससे अदालत असहमत हुई. 2019 का वो फैसला जिसका असर अब दिख रहा 19 फरवरी 2019 को पटना हाईकोर्ट ने तेजस्वी यादव की याचिका खारिज करते हुए उनका आवास खाली कराने का आदेश दिया. लेकिन इसके साथ ही अदालत ने एक बड़ा बदलाव लागू किया- पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन बंगला और … Read more

राम मंदिर पर फहराता ध्वज: पाकिस्तान बोखलाया, संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की गुहार

अयोध्या  उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित मंदिर में हुए ध्वजारोहण पर पाकिस्तान खिसियाता नजर आ रहा है। पड़ोसी मुल्क ने एक बार फिर बाबरी मस्जिद का मुद्दा उठाया है और भारत पर मुस्लिम विरासत को कम करने की कोशिश के आरोप लगाए हैं। अल्पसंख्यकों के अधिकारों के हनन और आतंकवाद फैलाने के आरोप से घिरे मुल्क ने UN यानी संयुक्त राष्ट्र से अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की मांग की है। फिलहाल, भारत सरकार की तरफ से इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने मंगलवार को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच केसरिया ध्वज फहराया। इस अनुष्ठान के साथ ही मंदिर का निर्माण औपचारिक रूप से पूरा हो गया। यह ध्वज पारंपरिक उत्तर भारतीय नागर शैली में बने शिखर पर फहराया गया, जबकि मंदिर के चारों ओर बना 800 मीटर का परकोटा (दक्षिण भारतीय वास्तु शैली में डिजाइन किया गया घेरा) मंदिर की शिल्प विविधता को दिखाता है। पाकिस्तान ने क्या कहा पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने लिखा, 'पाकिस्तान ने आयोध्या में ऐतिहासिक बाबरी के स्थान पर बने तथाकथित राम मंदिर पर ध्वजारोहण पर चिंता जाहिर की है। सदियों पुरानी प्रार्थना की जगह को 6 दिसंबर 1992 में चरमपंथी भीड़ ने गिरा दिया था। इसके बाद भारत में हुई न्यायिक प्रक्रिया में जिम्मेदारों को बरी कर दिया गया और मस्जिद की जगह पर मंदिर निर्माण की अनुमति दी गई।' पाकिस्तान ने भारत पर भेदभाव के आरोप लगाए। मानवाधिकार उल्लंघन के कई आरोप झेल चुके पाकिस्तान ने कहा, 'यह भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बढ़ते दबाव और मुस्लिम सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जानबूझकर कम करने की कोशिश है।' पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की है। पाकिस्तान ने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र और संबंधित अंतरराष्ट्रीय निकायों को इस्लामिक विरासत की सुरक्षा और सभी अल्पसंख्यकों के धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा में भूमिका निभानी चाहिए।' रिपोर्ट में खुली पाकिस्तान की पोल संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार की 24 जुलाई 2025 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एक्सपर्ट्स ने पाकिस्तान में कमजोर समुदायों के खिलाफ हुई हिंसा पर हैरानी जताई थी। विज्ञप्ति के अनुसार, UNHR एक्सपर्ट्स ने पाकिस्तान से अपील की है कि अहमदिया समुदाय समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा के बीच कड़े कदम उठाए जाएं। आगे कहा गया, 'हम कमजोर समुदायों के खिलाफ उनके धर्म या विश्वास के आधार पर बढ़ती हिंसा की खबरों से हैरान हैं।' आगे कहा गया, 'इन समुदायों ने अपने खिलाफ दुश्मनी और नफरत की वकालत के संदर्भ में हमले, हत्याएं और उत्पीड़न देखा है।' एक्सपर्ट्स ने कहा, 'पाकिस्तान को सजा से बचने के उस पैटर्न को तोड़ना होगा, जिसमें हमलों और नफरत भड़काने वालों को बगैर रोकटोक काम करने दिया जाता है।' साथ ही कहा गया कि ये हमले सरकारी मिलीभगत से होते हैं। एक्सपर्ट्स ने पाकिस्तान सरकार से इन उल्लंघनों की जांच करने और आपराधियों को सजा दिलाने की मांग की थी।