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पेंशनधारकों की मुश्किलें बढ़ीं: 36 हजार लाभार्थियों को दो महीने से नहीं मिले पैसे, सरकार तैयारी में

चंडीगढ़  हरियाणा प्रदेश में 36 हजार से ज्यादा अपात्रों की पेंशन रोकी है, सरकार ने पीपीपी में मानक से अधिक मिली आय निर्धारित सीमा से अधिक आय और दो-दो योजनाओं का लाभ ले रहे 36,250 लोगों की सरकार ने पेंशन रोक दी है। इन लोगों को सितंबर और अक्तूबर माह की पेंशन नहीं मिली है। अब इन लोगों से 12 फीसदी ब्याज के साथ पेंशन की धनराशि वसूली जाएगी। समाज कल्याण विभाग लगातार पेंशन लाभार्थियों के दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन कर रहा है। परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में आय और सरकारी लाभ का डेटा अपडेट होने पर पता चला कि प्रदेश में 36 हजार से अधिक लोगों की आय पेंशन पात्रता सीमा से अधिक पाई गई है। इसके बावजूद ये लोग वृद्धावस्था, विधवा, विकलांग या अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभले रहे हैं। जिन लाभार्थियों ने गलत आय दिखाकर पेंशन हासिल की है। उनसे पहले आय संबंधी दस्तावेज मांगे जाएंगे। अगर कोई लाभार्थी यह साबित करने में असमर्थ रहता है कि उसकी पेंशन पात्रता सही थी तो उससे पूर्ण राशि ब्याज सहित वसूली जाएगी। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नीतीश कुमार द्वारा बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बधाई दी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव पटना में शपथ ग्रहण समारोह में हुए शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरूवार को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में पटना में आयोजित बिहार सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री नीतीश कुमार द्वारा बिहार के मुख्यमंत्री, श्री सम्राट चौधरी एवं श्री विजय कुमार सिन्हा द्वारा उप मुख्यमंत्री और अन्य सदस्यों द्वारा मंत्री के रूप में शपथ लेने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में एनडीए सरकार समाज के हर वर्ग के समग्र उत्थान और 'विकसित बिहार' बनाने के संकल्प को नई गति व ऊर्जा देने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ समर्पित रहेगी।  

मध्यप्रदेश में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता: उच्च शिक्षा विभाग ने किया स्टेट टास्क फोर्स का गठन

एसटीएफ, डीटीएफ व्यवस्था, कोचिंग संस्थानों का अनिवार्य पंजीयन और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति तनाव प्रबंध के सुधारात्मक प्रयास भोपाल  विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर देशभर में बढ़ रही चिंता के बीच मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने इस दिशा में ठोस और व्यापक कदम उठाने की शुरुआत कर दी है। राज्य ने सुप्रीम कोर्ट और नेशनल टास्क फोर्स (NTF) के निर्देशों के बाद स्टेट टास्क फोर्स (STF) को पूर्णतः सक्रिय कर दिया है, जो अब पूरे राज्य में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपायों की निगरानी और सुधार की रूपरेखा तय कर रही है। उल्‍लेखनीय है कि NTF द्वारा आयुक्त, उच्च शिक्षा श्री प्रबल सिपाहा को राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार यह पहल केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि “राज्य के विद्यार्थियों के लिए एक सुरक्षित, सहयोगी और दबावमुक्त शैक्षणिक माहौल” तैयार करने की दिशा में सबसे बड़ा प्रशासनिक प्रयास है। एसटीएफ के हाथ में मानसिक स्वास्थ्य सुधार की कमान NTF के निर्देशों के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने एक स्टेट टास्क फोर्स (STF) का गठन किया है । यह राज्य में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श सेवाओं और रोकथाम उपायों पर केंद्रित नीतिगत हस्तक्षेपों के लिए योजना एवं निर्देश जारी कर रही है। एसटीएफ के अध्‍यक्ष आयुक्त, उच्च शिक्षा श्री प्रबल सिपाहा है। ओएसडी डॉ. उषा के. नायर को इसका सदस्य सचिव नियुक्‍त किया गया है। एसटीएफ में स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, बाल सुरक्षा, सामाजिक न्याय तथा नगरीय प्रशासन विभागों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है । यह एक बहु-विभागीय तंत्र है जो विद्यार्थियों की चुनौतियों को व्यापक दृष्टि से देखेगा। स्टेट टास्क फोर्स (STF) क्या करेगी? राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श से जुड़े उपायों की निगरानी, NTF के निर्देशों के अनुपालन का मूल्यांकन, कोचिंग व कॉलेज परिसरों का मानसिक स्वास्थ्य ऑडिट, हेल्पलाइन, काउंसलिंग, मनोसामाजिक समर्थन की व्यवस्था को मजबूत करना, जिला स्तरीय DTF को दिशा देना और उनकी रिपोर्ट की समीक्षा, आत्महत्या रोकथाम से जुड़े जोखिम कारकों की पहचान और सुधार को बढ़ावा, राज्य सरकार को नियमित सिफारिशें और नीतिगत सुझाव शैक्षणिक संस्‍थानों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति सभी सुधारों के समन्वय प्रभावी हो, इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी शासकीय एवं निजी शैक्षणिक संस्‍थानों को नोडल अधिकारी नियुक्‍त करने के निर्देश दिए हैं। इसमें सरकारी विश्वविद्याल, निजी विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालकों एवं सभी शासकीय महाविद्यालय शामिल हैं। डीटीएफ से जमीनी निगरानी राज्य स्तर के प्रयास प्रभावी रूप से जिलों तक पहुँचें, इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय टास्क फोर्स (DTF) का गठन भी अनिवार्य कर दिया है। डीटीएफ की अध्यक्षता जिला कलेक्टर करेंगे, जबकि अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य, जिला शिक्षा अधिकारी और तकनीकी, चिकित्सा तथा स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधि इसके सदस्य होंगे। डीटीएफ को निम्‍न जिम्मेदारी सौंपी गईं हैं। कोचिंग संस्थानों के पंजीयन की निगरानी, परामर्श सेवाओं की उपलब्धता, STF–NTF निर्देशों के क्रियान्वयन, शैक्षणिक परिसरों की सुरक्षा, कोचिंग संस्थानों का अनिवार्य पंजीयन उच्च शिक्षा विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी जिले में बिना पंजीयन के कोई भी कोचिंग संस्था संचालित न हो। यह कदम विद्यार्थियों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव, अनियमित प्रबंधन और अनुशासनहीन वातावरण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्यों जरूरी थे ये कदम? देशभर में मानसिक तनाव और परीक्षा दबाव से जुड़े मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि समस्या केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि संस्थागत संरचना से भी जुड़ी है—जहाँ गाइडलाइन, परामर्श, निगरानी और संवाद की कमी विद्यार्थियों को अकेला कर देती है। एसटीएफ और डीटीएफ का गठन इसी कमी को दूर करने का प्रयास है।  

उत्तर प्रदेश में अब तक 4.25 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड हो चुके हैं जारी, बरेली बना प्रदेश में नंबर वन

कैंसर, किडनी और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों के निःशुल्क इलाज के लिए वर्ष 2023-24 में 700 करोड़ रुपये से अधिक किए गए खर्च 'वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज' पहल के तहत यूपी में स्थापित हो चुके हैं 80 से अधिक सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज मिशन इंद्रधनुष के तहत यूपी में 10 लाख से अधिक छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण सम्पन्न आगरा जिला अस्पताल में संचालित निःशुल्क हीमोडायलिसिस यूनिट, गरीब किडनी रोगियों के लिए बनी वरदान  यूपी में 28,000 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सुविधा उपलब्ध, ग्रामीणों को मिल रही विशेषज्ञ सलाह लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ गरीब और वंचित वर्गों को प्राथमिकता दी है। सीएम योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आयुष्मान भारत योजना से लेकर पेंटावैलेंट वैक्सीनेशन जैसी योजनाएं प्रदेश में लाखों परिवारों के लिए संजीवनी साबित हो रही हैं। साथ ही सीएम के विजन के अनरूप चल रही कई राज्य स्तरीय योजनाओं के सफल क्रियान्वयन ने 2017 के बाद प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के परिदृश्य में अमूलचूल बदलाव लाया है। इसी क्रम में बरेली मंडल ने आयुष्मान योजना में प्रदेश में नंबर वन का रिकॉर्ड कायम किया है, जबकि आगरा के जिला अस्पताल में निशुल्क हीमोडायलिसिस यूनिट गुर्दा रोगियों के लिए वरदान बनी हुई है। आंकड़ों से साफ है कि सरकार का फोकस न केवल उपचार पर, बल्कि रोकथाम और पहुंच पर भी है। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की वर्ष 2017 से प्राथमिकता रही है कि राज्य के  गरीब एवं वंचित वर्ग के मरीजों का न केवल अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो साथ ही इलाज के कारण पड़ने वाले वित्तीय बोझ को न्यूनतम किया जाए। इसी क्रम में सीएम योगी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में आयुष्मान योजना का सफल क्रियान्वयन हुआ है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) डैशबोर्ड के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अब तक 4.25 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी हो चुके हैं, जो राज्य की एक-चौथाई आबादी को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करता है। यूपी स्वास्थ्य विभाग की नवंबर 2024 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, किडनी और हृदय रोगों के निःशुल्क इलाज पर 700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। जिसमें प्रमुख हिस्सा प्रदेश के गरीब परिवारों को इलाज के लिए मिली प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता का है। इसके अलावा सीएम योगी की 'वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज' पहल के तहत 80 जिलों में वर्तमान में 80 से अधिक अब सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज स्थापित हो चुके हैं। यह पहल ग्रामीण और छोटे शहरों के मरीजों को आसानी से सुपर-स्पेशियलिटी इलाज मुहैया करा रही है। बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देते हुए योगी सरकार ने टीकाकरण अभियान में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है। इस क्रम में राज्य में पेंटावैलेंट वैक्सीन (पेंटा वैक्सीन) का कवरेज राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार 92 प्रतिशत से अधिक तक पहुंच गया है। 2017 में यह 50 प्रतिशत से कम था, लेकिन अब प्रदेश के अधिकांश बच्चों को इस टीकाकरण अभियान से कवर किया जा चुका है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में प्रति माह 20,000 से अधिक नियमित टीकाकरण सत्र आयोजित हो रहे हैं। इसके साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार मिशन इंद्रधनुष के तहत यूपी में 10 लाख से अधिक छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण भी किया चुका है। सीएम योगी की टीकाकरण की ये आक्रामक नीति के तहत विशेष रूप से वंचित परिवारों के बच्चों को प्राथमिकता दी जा रही है। आयुष्मान योजना में प्रदेश के बरेली मंडल का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा है। पीएमजेएवाई पोर्टल के अनुसार नवंबर 2025 तक बरेली में योजना के तहत जारी किये गये 900 करोड़ रुपये के क्लेम में से 90 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है, जो प्रदेश में सर्वोच्च है। कुल 4.53 लाख से अधिक क्लेम सेटल किये जा चुके हैं। बरेली स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार योजना के तहत बरेली में 1 लाख से अधिक गरीब मरीजों को निःशुल्क इलाज हुआ है। तो वहीं लक्ष्य के 95 प्रतिशत से अधिक गोल्डन कार्ड का वितरण किया जा चुका है। इस योजना के तहत  5.14 लाख मरीजों का फ्री इलाज कर बरेली ने प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया। 12 लाख से अधिक कार्ड बनाए गए, जिसमें छह सदस्यीय पात्र परिवारों और 60 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों की 100 प्रतिशत कवरेज की गई है। जिसके चलते बरेली अब आयुष्मान का सुपर मॉडल बन चुका है। इसी क्रम में आगरा जिला अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर संचालित निःशुल्क हीमोडायलिसिस यूनिट ने जनवरी से अक्टूबर 2025 तक 726 मरीजों को 8,712 बार डायलिसिस की सुविधा प्रदान की है। 10 अत्याधुनिक मशीनों से लैस यह यूनिट गुर्दा रोगियों के लिए जीवन रेखा बन चुकी है। योगी सरकार की यह सुविधा राज्य के गरीब मरीजों को निजी अस्पतालों की महंगी दरों से मुक्ति दिलाती है साथ ही उन्हें अत्याधुनिक और जरूरी इलाज आसानी से उपलब्ध करवा रही है।   सीएम योगी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य ढांचे का तेजी से आधुनिकीकरण किया है। जिसके तहत प्रदेश में वर्तमान में 80 से अधिक सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेज बन चुके हैं। जिनमें 3,500 आईसीयू बेड और 2,000 वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध हैं। साथ ही प्रदेश में 28,000 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सुविधा ग्रामीणों को विशेषज्ञ सलाह दे रही है।  

सीएम हेल्पलाइन में योजना आर्थिक सांख्यिकी विभाग प्रथम

भोपाल सीएम हेल्पलाइन में जन शिकायतों का समाधान करने में योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग ने पहला स्थान प्राप्त किया है। विभाग ने ग्रेड ए पाकर 93.2 प्रतिशत स्कोर किया है जबकि ऊर्जा विभाग ने 90.26% के साथ दूसरे स्थान पर एवं नगरीय विकास एवं आवास विभाग 89.35 प्रतिशत के साथ तीसरा स्थान पर है। योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग को 1869 शिकायतें मिली जिसमें संतुष्टि के साथ बंद शिकायतों का प्रतिशत 54.64% रहा और 50 दिन से अधिक शिकायतों का प्रतिशत 8.68 प्रतिशत और गुणवत्ता से बंद शिकायतों का प्रतिशत 10 रहा। नोट अटेंडेंट शिकायतों का प्रतिशत 9.88 रहा। इस प्रकार ए रेटिंग के साथ योजना आर्थिक सांख्यिकी विभाग प्रथम स्थान पर रहा।  

बैंगलुरू टेक समिट में प्रदर्शति हुआ टियर-2 टेक्नोलॉजी इको सिस्टम

फ्यूचर-रेडी इनोवेशन से मध्यप्रदेश बन रहा विश्व स्तरीय कंपनियों का प्रमुख निवेश केंद्र भोपाल राज्य सरकार ने बेंगलुरु इंटरनेशनल एग्जीबिशन सेंटर (बीआईईसी) में आयोजित बेंगलुरु टेक समिट (बीटीसी) 2025 में उल्लेखनीय भागीदारी दर्ज की।बीटीसी- 2025 में विशेष प्रदर्शनी मंडप से राज्य की तेजी से विकसित होती टेक्नोलजी ईकोसिस्टम और भारत के प्रमुख टियर-2 इनोवेशन हब के रूप में मध्यप्रदेश की स्थिति को प्रभावशाली रूप से प्रदर्शित किया गया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने मध्यप्रदेश मंडप हॉल 3, बूथ एचएस 17 में स्थापित किया। मंडप में प्रदेश की समग्र नीति व्यवस्था को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया।मंडप ने वैश्विक कंपनियों, टेक्नोलॉजी लीडर्स और तेजी से बढ़ते स्टार्टअप्स का ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया। प्रदर्शनी में पहुंचे उद्योग प्रतिनिधियों ने राज्य में निवेश अवसरों का आकलन किया और भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के अंतर्गत प्रदेश में नए अवसरों पर विचार विमर्श किया। मंडप में प्रमुख रूप से ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) पॉलिसी 2025, ड्रोन प्रमोशन और उपयोग पॉलिसी 2025, AVGC-XR पॉलिसी 2025, सेमीकंडक्टर पॉलिसी 2025 और IT, ITES & ESDM निवेश संवर्धन पॉलिसी 2023 प्रदर्शित की गईं। इन नीतियों का उद्देश्य राज्य को सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं, ईएसडीएम और सेमीकंडक्टर निर्माण, डेटा सेंटर,जीसीसी, एवीजीसी-एक्सआर स्टूडियोज और ड्रोन तकनीक के लिए एक प्रमुख और आकर्षक निवेश केंद्र बनाना है। इन प्रगतिशील नीतियो की सहायता और मिशन-आधारित प्रशासनिक दृष्टिकोण से मध्यप्रदेश भारत का अग्रणी टेक्नोलॉजी हब बन रहा है। मंडप में मध्यप्रदेश के तेजी से बढ़ते तकनीकी परिदृश्य को भी प्रस्तुत किया गया जो 15 से अधिक आईटी पार्क, 6 आईटी एसईजेड, 2000 से अधिक आईटी और ईएसडीएम इकाइयां, 1200 से अधिक टेक-स्टार्टअप्स और 2 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार से सशक्त है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में कई बड़ी कंपनियों का विस्तार और 50 से अधिक बड़ी आईटी कंपनियों का संचालन राज्य को एक मजबूत निवेशक-अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। मंडप ने इस टियर-2 विकास की कहानी को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया, जो उद्योग प्रतिनिधियों के लिए अत्यंत आकर्षक रही। राज्य प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अवंतिका वर्मा, अधिकारी-इन-चार्ज, निवेश संवर्धन, MPSEDC, राजा पंचाल, टीम लीड, एमपीएसईडीसी और निवेश संवर्धन टीम ने किया। समिट के दौरान मंडप ने इंफोसिस, टीसीएस, इम्पेटस, एक्स-ईबिया,हिताची, डीएक्ससी, टेक महिंद्रा, डब्ल्यूएनएस, टास्कयूएस, यश टेक्नोलॉजीज, एजिस, इंफोबीन्स, पर्सिस्टेंट, सिविया, कॉन्साइल, इन्क्चर, आरटेक, रेनेसाँ सॉफ्ट लैब्स, एचएलबी टेक, इंफोग्लोबल, न्यूजटेक फ्यूज और लिमिन्डो जैसी प्रमुख कंपनियों के टेक-लीडर्स के साथ संवाद किया। इन संवादों में डेटा सेंटर विस्तार, सेमीकंडक्टर और ईएसडीएम निर्माण, इंजीनियरिंग आरएंडडी जीसीसी एआई और क्लाउड तकनीक ड्रोन-टेक सॉल्यूसन और एवीजीसी-एक्सआर इनोवेशन हब के रूप में विकसित किये जाने में गहरी रुचि दिखाई दी। इससे यह स्पष्ट हुआ कि उद्योग जगत मध्यप्रदेश को नए निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देख रहा है। इस अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे ने कहा कि मध्यप्रदेश एक फ्यूचर रैडी इनोवेशन परिदृश्य तैयार कर रहा है, जिसमें मजबूत बुनियादी ढांचा, प्रगतिशील नीतियां और विश्व स्तर की कंपनियों के लिए भरपूर अवसर मौजूद हैं। बेंगलुरु टेक समिट में हमारी उपस्थिति राज्य की तकनीकी निवेश क्षमता को और मजबूत करती है। बेंगलुरु टेक समिट 2025 में भागीदारी ने राज्य को भारत के सबसे निवेश- योग्य, नवाचार-संचालित और प्रगतिशील तकनीकी हब के रूप में स्थापित किया है। राज्य की प्रदर्शनी ने टियर-2 शहरों की ताकत, नीतिगत उत्कृष्टता और उद्योग सहयोग की क्षमता को उजागर किया, जो मध्यप्रदेश को भारत और वैश्विक स्तर पर निवेश और नवाचार के लिए प्रमुख आकर्षण केंद्र बनाता है।  

घर में आई खुशियों की बहार, सीमा हैदर और पाकिस्तानी भाभी ने मनाया जश्न

ग्रेटर नोएडा पाकिस्तानी भाभी के नाम से मशहूर सीमा हैदर इन दिनों बहुत खुश है। वजह ही कुछ ऐसी है। दो साल पहले चार बच्चों को लेकर पड़ोसी मुल्क से भागकर आई सीमा हैदर और सचिन की जिंदगी लगातार बदलती जा रही है। दोनों की चर्चित प्रेम कहानी सोशल मीडिया पर इतनी वायरल हुई कि लाखों लोग अब भी हर दिन उनके बारे में जानना चाहते हैं। और लोगों की इसी उत्सुकता से सीमा और सचिन की बल्ले-बल्ले हो गई है। यूट्यूब की कमाई से कुछ दिन पहले एक कमरा बनवाने वाली सीमा हैदर नया शानदार घर बनवा रही है।   अपने नए घर को बनते देख सीमा हैदर और सचिन मीणा खुशी से झूम रहे हैं। अपने यूट्यूब अकाउंट पर दोनों अपने प्रशंसकों के साथ इस खुशी को साझा भी कर रहे हैं। बीच-बीच में वे वीडियो बनाकर दिखाते हैं कि कंस्ट्रक्शन का काम किस तरह चल रहा है और कितना तैयार हो चुका है। सीमा हैदर एक वीडियो में कहती है कि पुराना घर काफी छोटा था और परिवार में सदस्यों की संख्या अधिक होने की वजह से बहुत दिक्कत होती थी। पांच बच्चों और पति-पत्नी के लिए एक कमरे में गुजारा करना कठिन था। सीमा हैदर ने कहा कि भगवान, प्रशंसकों और यूट्यूब के आशीर्वाद से उन्होंने ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा में ही एक नया प्लॉट खरीदा है और इस पर अब नया मकान बनाया जा रहा है। दो मंजिले में मकान को बेहद खुबसूरती के साथ बनाया जा रहा है। सीमा और सचिन ने यह तो नहीं बताया कि उन्होंने प्लॉट और इस मकान में कितना पैसा खर्च किया है, लेकिन जाहिर एनसीआर में जमीन खरीदने और मकान बनवाने का खर्च का अंदाजा यहां रहने वाले लोग आसानी से लगा सकते हैं। जाहिर है कि यूट्यूब और सोशल मीडिया के अन्य प्लैटफॉर्म से सीमा और सचिन की अच्छी कमाई हो रही है। सीमा के भारत आने के बाद से ही सचिन उस किराने की दुकान में नौकरी छोड़ चुका है जहां वह कभी दिन के 8-10 घंटे बिताकर गुजारा लायक कमा पाता था।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया जंबूरी स्थल का निरीक्षण, विश्वस्तरीय व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के दिए आदेश

जंबूरी में ‘एकता में विविधता’ की भावना के साथ लखनऊ की अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा मजबूती 32,000 स्काउट्स और गाइड जुटेंगे लखनऊ में ओडीओपी, नवाचार और संस्कृति का होगा संगम 61 साल बाद यूपी में होने जा रहा 19वां नेशनल जंबूरी; सीएम योगी ने की मेगा तैयारियों की समीक्षा लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को 19वें भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के जंबूरी की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। यह आयोजन 23 से 29 नवंबर तक वृंदावन कॉलोनी स्थित डिफेंस एक्सपो ग्राउंड में आयोजित होगा। 61 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद उत्तर प्रदेश इस प्रतिष्ठित डायमंड जुबिली संस्करण की मेजबानी कर रहा है, जो राज्य के लिए ऐतिहासिक क्षण है। 300 एकड़ में फैले जंबूरी परिसर को 32,000 प्रतिभागियों और 3,000 स्टाफ सदस्यों के लिए तैयार किया जा रहा है। नेपाल, श्रीलंका, भूटान, अफगानिस्तान सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों के प्रतिनिधि भी इसमें हिस्सा लेंगे, जिससे इसका अंतरराष्ट्रीय महत्व और बढ़ जाता है। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि “विश्वस्तरीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही की कोई गुंजाइश न रहे।” उन्होंने आवास, स्वच्छता, सुरक्षा, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और डिजिटल कनेक्टिविटी तक हर व्यवस्था को सर्वोत्तम मानक के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया। सीएम ने स्काई साइक्लिंग और ज़िपलाइन एडवेंचर का विशेष प्रदर्शन भी देखा, जिसकी उन्होंने सराहना की। उनके साथ जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, प्रभात कुमार (सेवानिवृत्त IAS), राज्य मुख्य आयुक्त, स्काउट्स एंड गाइड्स, और डीएम लखनऊ विशाख जी मौजूद रहे। सुगम व्यवस्थाओं के लिए परिसर में 16 जर्मन हैंगर, 600 वाटर टैंक, 30 RO प्वाइंट, 2,200 से अधिक शौचालय, 100 किचन और चार केंद्रीय रसोईघर स्थापित किए जा रहे हैं, जो प्रतिदिन हजारों लोगों को भोजन उपलब्ध कराएंगे। 3,500 क्षमता वाला कॉन्फ्रेंस हॉल, अस्थायी पुलिस स्टेशन और 11 फायर टेंडर भी सुरक्षा और अनुशासन सुनिश्चित करेंगे। जंबूरी में देशभर से आए कैडेट ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को प्रदर्शित करते हुए उत्तर प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और विविध व्यंजनों का अनुभव करेंगे। यह आयोजन लखनऊ में रोज़गार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जहां हज़ारों श्रमिकों, ठेकेदारों और छोटे विक्रेताओं को अवसर मिल रहे हैं। सांस्कृतिक गौरव और आर्थिक प्रगति का यह संगम जंबूरी को प्रतिभागियों और शहर, दोनों के लिए यादगार बना रहा है। इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण उत्तर प्रदेश की संस्कृति, तकनीक और हस्तशिल्प को प्रदर्शित करने वाला विशाल प्रदर्शनी क्षेत्र होगा। इसमें 100 से अधिक स्टॉल, जिसमें ओडीओपी, रोबोटिक्स व इलेक्ट्रॉनिक्स डिस्प्ले, तथा नेडा का सोलर पवेलियन राज्य के नवाचार और उद्यमशीलता को प्रदर्शित करेंगे। प्लानेटेरियम, एआई जोन, और वाराणसी, बुंदेलखंड व प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की सांस्कृतिक झलक और व्यंजन अनुभव को और समृद्ध करेंगे। कैडेट अपने प्रवास के दौरान अपने परिवारों से जुड़े रह सकें, इसके लिए समर्पित मोबाइल टावर भी स्थापित किया जा रहा है।

पानी के दुरुपयोग पर बड़ी सख्ती: नया कानून आएगा, उल्लंघन पर होगी कड़ी सज़ा

चंडीगढ़ सूबे में पानी के दुरुपयोग और बर्बादी करने वालों पर आने वाले वक्त में शिकंजा कसा जाएगा।  हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विशेष बिल लाने की तैयारी है, जिसका ड्राफ्ट तैयार हो गया है। विभाग के मंत्री ने साफ कर दिया है कि पानी का दुरुपयोग, बर्बादी व कमर्शियल इस्तेमाल चोरी छिपे करने वालों विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि विधेयक में भारी जुर्माने के साथ साथ सजा तक का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के इस तरह के रवैये के कारण बाकी लोगों को दिक्कत उठानी होती है। मंत्री ने कहा है कि शहरी क्षेत्र में पानी की दिक्कत नहीं है, बल्कि कुछ ग्रामीण इलाकों से हमें इस तरह की शिकायत मिली है, लेकिन उसके तकनीकी कारण भी हैं, क्योंकि इस बार भारी बारिश, जलभराव के कारण कईं तरह की चुनौतियां आन खड़ी हुई हैं। उसके बावजूद भी अधिकारियों को साफ साफ निर्देश हैं कि नियमित कार्यों के लिए ग्रामीण एरिया में भी दिक्कत नहीं होनी चाहिए। हरियाणा में पेयजल बर्बादी रोकने को लेकर जहां सूबे की नायब सैनी सरकार दिसंबर में होने वाले शीतकालीन सत्र में नया बिल लेकर आएगी। जिसमें कड़ी सजा, मोटे जुरमाने जैसे प्रावधान रखे जा रहे हैं। इसके अलावा पानी के इस्तेमाल को लेकर मीटर लगाए जाने के साथ ही बिलों का बकाया समय से जमा हो इसके भी ठोस प्रबंधन किए जा रहे हैं। मंत्री ने साफ कर दिया है कि पेयजल की बर्बादी करने और समय से बिल नहीं जमा करने वालों पर  शिकंजा कसा जाएगा। इस क्रम में लीगल एक्सपर्ट की सलाह लेकर बिजली चोरी की तर्ज पर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने विधेयक का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए कानून बनाने से आला अफसरों को उम्मीद है कि लोगों की पानी  बर्बाद करने की आदतों पर अंकुश लगेगा। अवैध कट पर भी कार्रवाई  पेयजल लाइन में अवैध कटों पर भी कार्रवाई का प्रावधान होगा। उन्होंने कहा कि पानी के बिलों की शहरों में 60 से 65 फीसदी रिकवरी है, लेकिन गांवों में यह 5 से 7 फीसदी ही है। ऐसे में विभाग पेयजल सप्लाई के मीटर लगाए जाने के  विकल्प पर भी काम कर रहा है। गंगवा ने कहा कि महाग्राम योजना में 10 हजार से अधिक आबादी वाले 148 गांव चिह्नित किए हैं। 17 में पेयजल, सीवरेज और एसटीपी की व्यवस्था पूरी की जा चुकी है जबकि 30 में कार्य प्रगति पर है। दो साल में इन सभी 148 गांवों में शहरों की  तर्ज पर सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। यहां पर बता दें कि गुरुग्राम नगर निगम ने नई दरें तय कर अधिसूचना भी पूर्व में जारी कर दी गई है।   बाकी नगर निगमों में भी तैयारी हो रही है। अब घरेलू उपभोक्ताओं को पहले से दोगुना भुगतान करना होगा। एक से 20 किलोलीटर पानी की खपत पर दर 3.19 से बढ़ाकर 6.38 रुपये प्रति किलोलीटर कर दी गई है। 20 से 40 किलो लीटर तक की खपत पर अब 10.21 रुपये प्रति किलोलीटर देना होगा, जो पहले की तुलना में लगभग 60% की बढ़ोतरी है। 40 किलोलीटर से अधिक पानी उपयोग करने वालों को 12.76 प्रति किलोलीटर के हिसाब से भुगतान करना होगा। सरकार ने नगर निगमों के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए नई पेयजल और सीवरेज दरें लागू करने का निर्णय लिया है। यहां पर यह  भी उल्लेखनीय है कि गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत, पानीपत कई जिलों में एक नवंबर से बिलों में बढ़ोतरी हो गई है। बताया जा रहा है कि खर्चों की भरपाई और नई पेयजल और सीवरेज लाइन बिछाने के क्रम में यह कदम उठाया जा रहा है।  नई पेयजल तथा सीवरेज लाइन बिछाने में खर्च की गई रकम की भरपाई के लिए नया रास्ता निकाला है। गुरुग्राम, फरीदाबाद तथा सोनीपत और पानीपत सहित कई जिलों में नवंबर से पानी के बिलों में डबल बढ़ोतरी होने जा रही है।  

किसानों को मिली बड़ी राहत: मध्य प्रदेश में बदले नियम, हाईटेंशन लाइन के लिए दोगुना मुआवजा

भोपाल प्रदेश सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए हाईटेंशन लाइन बिछाने के लिए अधिग्रहित भूमि पर मिलने वाले मुआवजे में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब खेतों के ऊपर से 66 केवी या उससे अधिक क्षमता की विद्युत लाइन डाली जाती है, तो भूमि स्वामी को कलेक्टर गाइड लाइन के आधार पर 200 प्रतिशत मुआवजा भुगतान किया जाएगा। पहले यह राशि मात्र 85 प्रतिशत दी जाती थी। राजस्व विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि हाईटेंशन लाइन के लिए जहां-जहां टावर स्थापित किए जाएंगे, वहां टावर के चारों लेग के भीतर आने वाली भूमि तथा उसके दोनों ओर एक-एक मीटर अतिरिक्त क्षेत्र का पूरा मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि यह जमीन किसान के कब्जे में बनी रहेगी।   इसके साथ ही ट्रांसमिशन लाइन के नीचे आने वाले मार्गाधिकार (ROW) क्षेत्र में स्थित भूमि के कारिडोर क्षेत्रफल का कलेक्टर गाइडलाइन मूल्य का 30 प्रतिशत क्षतिपूर्ति के रूप में दिया जाएगा। आदेश के अनुसार, ROW क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण करने की अनुमति नहीं होगी। मुआवजा निर्धारण की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर को सौंपी गई है, जो भूमि के बाजार मूल्य और निर्धारित मानकों के आधार पर क्षतिपूर्ति राशि तय करेंगे। सरकार ने विभिन्न क्षमता की हाईटेंशन लाइनों के लिए मार्गाधिकार क्षेत्रफल का निर्धारण भी सार्वजनिक किया है। हाईटेंशन लाइन के नीचे भूमि के क्षतिपूर्ति क्षेत्रफल का निर्धारण केवी हाईटेंशन लाइन- सामान्य मार्ग- वन क्षेत्र- शहरी आबादी क्षेत्र 400 केवी- 46 मीटर- 40 मीटर- 38 मीटर 220 केवी- 32 मीटर- 28 मीटर- 24 मीटर 132 केवी- 25 मीटर- 21 मीटर- 19 मीटर