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राम लला दर्शन योजना के तहत कोंडागांव से अयोध्या धाम के लिए तीर्थयात्रियों का जत्था रवाना

रायपुर राम लला दर्शन योजना के अंतर्गत कोंडागांव जिले से 51 श्रद्धालुओं का एक दल अयोध्या धाम के लिए मंगलवार की रात रवाना हुआ। श्रद्धालुओं के इस दल को कोंडागांव नगर के अंबेडकर चौक से रात्रि 9 बजे नगरपालिका अध्यक्ष  नरपति पटेल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर  पटेल ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह योजना प्रदेशवासियों को अध्यात्मिक सशक्तिकरण और रामभक्ति से जोड़ने का एक ऐतिहासिक प्रयास है, जो मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की दूरदृष्टि और जनकल्याणकारी सोच का परिणाम है। श्रद्धालुओं का यह जत्था बस द्वारा राजनांदगांव तक की यात्रा करेगा, इसके पश्चात ट्रेन से अयोध्या धाम के लिए प्रस्थान करेगा। जत्थे में शामिल श्रद्धालु प्रभु राम के दर्शन को लेकर अत्यंत उत्साहित और भावविभोर नजर आए। इस अवसर पर नगर पालिका उपाध्यक्ष  जसकेतू उसेण्डी, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष  टोमेन्द्र ठाकुर,  मनोज जैन,  दीपेश अरोरा,  कुलवंत चहल, पार्षद  हर्ष ढिल्लन सहित उप संचालक पंचायत  बलराम मोरे, स्थानीय जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा राम लला दर्शन योजना के माध्यम से राज्य के हजारों श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम की यात्रा कराने की पहल की गई है। योजना का उद्देश्य नागरिकों को धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करना है।

सरकार वनवासियों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री साय

रायपुर : वनवासियों की आय बढ़ाने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री  साय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित के नवनियुक्त अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पदभार ग्रहण कार्यक्रम में हुए शामिल रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित के नवनियुक्त अध्यक्ष  रूप साय सलाम और उपाध्यक्ष  यज्ञदत्त शर्मा के पदभार ग्रहण कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने नए दायित्वों के लिए अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि अध्यक्ष के रूप में  सलाम को एक अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे वे अपनी संवेदनशीलता, अनुभव और दक्षता के साथ उत्कृष्ट रूप से निभाएंगे। उन्होंने उल्लेख किया कि  सलाम स्वयं जनजातीय समुदाय से आते हैं और समुदाय की समस्याओं, अपेक्षाओं एवं आवश्यकताओं को भली-भांति समझते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वनवासियों की आय बढ़ाने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रदेश में निवासरत जनजातीय समाज के उत्थान को दृष्टिगत रखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया। साथ ही केंद्र में अलग जनजातीय मंत्रालय की स्थापना से समुदाय के विकास को नई गति मिली। उन्होंने कहा कि हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने भी इसी भावना और संकल्प को आगे बढ़ाते हुए ‘धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना’ तथा ‘पीएम जनमन योजना’ लागू की, जिनके माध्यम से जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्राहकों को देश में सर्वाधिक मूल्य दिया जा रहा है। वनोपजों के वैल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि वनवासी समुदाय की आय में वृद्धि हो और उन्हें वास्तविक आर्थिक मजबूती प्राप्त हो। वनमंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि यह प्रदेश का सौभाग्य है कि छत्तीसगढ़ के मुखिया  विष्णु देव साय स्वयं जनजातीय समुदाय से आते हैं और वनवासी भाई-बहनों की पीड़ा, कठिनाइयों और आकांक्षाओं को गहराई से समझते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की 32% आबादी जनजातीय है तथा 44% क्षेत्र वनाच्छादित है, इसलिए वनोपज ही वनवासियों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता को ‘हरा सोना’ कहा जाता है और उसके अनुरूप मूल्य देने का कार्य मुख्यमंत्री  साय ने किया है। तेंदूपत्ता का प्रति मानक बोरा मूल्य 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है। वनमंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने न केवल चरण पादुका योजना को पुनः प्रारंभ किया है, बल्कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से वनोपज संग्राहक परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रभावी कदम लगातार उठाए जा रहे हैं। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, नान के चेयरमैन  संजय वास्तव, योग आयोग के अध्यक्ष  रूप नारायण सिन्हा, छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष  विकास मरकाम, वक्फ बोर्ड के चेयरमैन डॉ. सलीम राज, वनबल प्रमुख  व्ही. निवास राव सहित लघु वनोपज संघ के सदस्य तथा प्रदेशभर से बड़ी संख्या में पहुंचे वनोपज संग्राहक उपस्थित थे।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ के 25 लाख किसानों के खातों में पहुंचे 500 करोड़ रुपये

रायपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोयंबटूर से जारी की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ के 25 लाख किसानों के खातों में पहुंचे 500 करोड़ रुपये केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने छत्तीसगढ़ को दी ग्रामीण सड़कों की सौगात, 2,225 करोड़ रु. लागत से बनेगी 2,500 कि.मी. सड़कें मखाना बोर्ड का लाभ छत्तीसगढ़ के मखाना उत्पादक किसानों को भी मिलेगा – केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में नक्सलवाद के ताबूत में अंतिम कील ठोंक दी गई है – केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह कृषक उन्नति योजना के विस्तार में दलहन, तिलहन और मक्का को भी लाभ – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रायपुर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने धमतरी में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में 2,225 करोड़ रुपये की ग्रामीण सड़क परियोजनाओं, मखाना बोर्ड का विस्तार, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत किसानों को प्रत्यक्ष भुगतान और अनेक विकासपरक घोषणाओं का औपचारिक शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोयंबटूर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त का देशव्यापी वितरण और छत्तीसगढ़ के 25 लाख किसानों के खातों में 500 करोड़ रुपये का सीधा हस्तांतरण इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा। हज़ारों किसानों और ग्रामीण प्रतिनिधियों की उपस्थिति में सम्पन्न इस समारोह ने राज्य के विकास पथ को नई दिशा प्रदान की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के धमतरी में राज्यस्तरीय समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, राज्य के कृषि मंत्री रामविचार नेताम, मंत्री दयालदास बघेल, टंकराम वर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana) के अंतर्गत 2,225 करोड़ रुपये की स्वीकृत ग्रामीण सड़क परियोजनाओं का दस्तावेज प्रस्तुत किया। इन परियोजनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ के लगभग 780 गाँव पहली बार पक्की सड़क से जुड़ेंगे और 2,500 किलोमीटर से अधिक नई ग्रामीण सड़कें निर्मित की जाएँगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता ने देश में बुनियादी ढांचे के विस्तार को नई दिशा दी है और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण आर्थिक गतिविधियों को सशक्त बनाता है। केंद्रीय मंत्री चौहान ने घोषणा की कि केंद्र सरकार द्वारा स्थापित किए गए राष्ट्रीय मखाना विकास बोर्ड में अब छत्तीसगढ़ को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से प्रदेश के किसानों को मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और राष्ट्रीय बाज़ार से जुड़ने का बड़ा अवसर प्राप्त होगा। अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए प्रमुख राष्ट्रीय निर्णयों का उल्लेख किया, जिनमें अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का शांतिपूर्ण निष्कासन, महिला आरक्षण कानून का पारित होना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने वाले निर्णय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी कदम भारत की विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक मील के पत्थर हैं। केंद्रीय मंत्री चौहान ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे समन्वित अभियान से राज्य में नक्सली हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई है और अब नक्सलवाद “अंतिम चरण” में पहुँच चुका है। उन्होंने इसे प्रदेश के विकास, निवेश और ग्रामीण शांति की दिशा में बड़ा कदम बताया। अपने संबोधन में उन्होंने छत्तीसगढ़ की वर्तमान राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य अब पुनः विकास की मुख्यधारा में तेजी से लौट रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के कारण कई केंद्रीय योजनाएँ प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकीं, किन्तु अब लाभ सीधे पात्र किसानों, ग्रामीणों और महिलाओं तक पहुँच रहा है। कार्यक्रम में हजारों किसानों एवं ग्रामीण नागरिकों की सहभागिता रही। इस अवसर पर विभिन्न योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र, कृषि किट, उपकरण और अन्य सामग्री वितरित की गई। कार्यक्रम स्थल पर कृषि तकनीक, ग्रामीण अवसंरचना, महिला स्व-सहायता समूहों, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना और आत्मनिर्भर भारत से संबंधित प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे किसानों और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक देखा। केंद्रीय मंत्री चौहान ने छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्थापित इस राज्य की उपलब्धियों का उल्लेख किया और कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते समय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों की आय-वृद्धि, कृषि तकनीकी विस्तार, सिंचाई क्षमता, जैविक खेती और मिलेट मिशन जैसे विषयों पर केंद्रित महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अन्नदाताओं का सम्मान और समृद्धि हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की किस्त जारी होने से राज्य के 24 लाख 70 हजार 640 किसानों को सीधा लाभ प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि 494 करोड़ रुपये की राशि किसानों, वनपट्टाधारी हितग्राहियों एवं विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) के परिवारों के बैंक खातों में अंतरित की गई है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने इस योजना में 2 लाख 75 हजार नए किसानों को पंजीकृत कर लाभार्थियों की संख्या बढ़ाई है। धान खरीदी में छत्तीसगढ़ अग्रणी मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को अधिक मजबूत और किसान-हितैषी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी कर रही है तथा किसानों को 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक बेचने की अनुमति दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हमारे किसानों के विश्वास और सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पृथक छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रारंभिक वर्षों में धान खरीदी केवल 5 लाख मीट्रिक टन हुआ करती थी, जो अब कई गुना बढ़ गई है। कृषक उन्नति योजना का विस्तार मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार ने कृषक उन्नति योजना का दायरा बढ़ाते हुए … Read more

ज्ञानिक तरीके से गाइडलाइन दरों का पुनरीक्षण किसानों-जनता को देगा वास्तविक फायदा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

जनता के हित में छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा निर्णय – शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की गाइडलाइन दरों का वैज्ञानिक पुनरीक्षण, किसानों और आम नागरिकों को मिलेगा सीधा लाभ गाइडलाइन दरों का वैज्ञानिक पुनरीक्षण किसानों और जनता को देगा वास्तविक लाभ— मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने पूरे राज्य के लिए गाइडलाइन दरों का व्यापक, वैज्ञानिक और तर्कसंगत पुनरीक्षण करते हुए ऐतिहासिक कदम उठाया है। यह निर्णय जनता के हित, पारदर्शिता, उचित बाजार मूल्यांकन और नागरिकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। गाइडलाइन नियम 2000 के अनुसार दरों का प्रतिवर्ष पुनरीक्षण आवश्यक है, परंतु वर्ष 2017-18 के बाद से दरों में किसी प्रकार का संशोधन नहीं हुआ था। इस कारण वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में भारी अंतर पैदा हो गया था—जिसका प्रतिकूल प्रभाव किसानों, भूमिस्वामियों, संपत्ति धारकों और आम नागरिकों पर पड़ रहा था। राज्य में गाइडलाइन दरों के पिछले ढांचे  नगरीय क्षेत्रों में दरों में भारी विसंगतियाँ थीं। एक ही सड़क, वार्ड या आसपास के क्षेत्रों में अनुपातहीन अंतर दिखाई देता था। एक ही सड़क पर स्थित संपत्तियों की दरें अलग-अलग थीं, जिससे नागरिकों को वास्तविक मूल्यांकन में कठिनाई होती थी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी एक ही मार्ग पर स्थित गाँवों की दरों में अतार्किक भिन्नता थी, जिससे किसानों को मुआवज़ा और बैंक लोन में नुकसान होता था। पिछले सात वर्षों में बने नए हाईवे, कॉलोनी, औद्योगिक क्षेत्र आदि की दरें निर्धारित नहीं थीं, जिससे नागरिकों को संपत्ति मूल्य जानने में कठिनाई हो रही थी। वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री   ओ पी चौधरी के दिशानिर्देश पर गाइडलाइन दरों को पुर्ननिर्धारित करते हुए पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक, पारदर्शी और जनसुलभ बनाया गया है। नगरीय क्षेत्रों में गाइडलाइन को रोड-वाइज तैयार किया गया है, ताकि एक सड़क और समान परिस्थितियों वाले क्षेत्रों की दरें समान हों। अत्यधिक कंडिकाओं को समायोजित कर संख्या कम की गई, ताकि नागरिकों को मूल्य समझने में सरलता हो। ग्रामीण क्षेत्रों में सभी गाँवों की दरों को नक्शे में प्रविष्ट कर, समान मार्ग और समान परिस्थितियों वाले गाँवों की दरें यथासंभव समान और तर्कसंगत की गईं।वर्तमान दरों की वैज्ञानिक मैपिंग कर रैशनलाइज़्ड बेस रेट तैयार किए गए और इन्हीं के आधार पर नई दरें प्रस्तावित की गईं है। नवीन दरें – जनता को सीधा लाभ नगरीय क्षेत्रों में लगभग 20% की तर्कसंगत वृद्धि की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के हित में दरों में 50% से 300% तक वृद्धि की गई है—जिससे किसानों को भूमि अधिग्रहण आदि में 3 गुना तक अधिक मुआवज़ा मिलेगा। नवीन दरों से किसानों/भूमिस्वामियों को उनकी भूमि का अधिक एवं न्यायसंगत मुआवज़ा प्राप्त होगा। संपत्ति के विरुद्ध बैंक से अधिक राशि का लोन स्वीकृत होगा। आम नागरिकों के लिए अपनी संपत्ति की गाइडलाइन दर स्पष्ट और समझने में आसान होगी। वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री  ओ. पी. चौधरी ने कहा कि गाइडलाइन दरों का यह व्यापक और वैज्ञानिक पुनरीक्षण जनता के हितों को सर्वोपरि रखते हुए पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया है। उन्होंने कहा कि 2017-18 के बाद दरों में संशोधन न होने से राज्य में वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में गंभीर असंतुलन पैदा हो गया था, जिससे किसान, भूमिस्वामी और सामान्य नागरिक प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रहे थे। नई गाइडलाइन दरें रोड-वाइज और वैज्ञानिक मैपिंग के आधार पर तैयार की गई हैं, ताकि हर क्षेत्र में दरें तर्कसंगत, समान और समझने में सरल हों। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में 50% से 300% तक की वृद्धि किसानों को उचित मुआवज़ा और अधिक बैंक लोन प्राप्त करने में बड़ा लाभ देगी, जबकि नगरीय क्षेत्रों में 20% की तार्किक वृद्धि मूल्य-विसंगतियाँ दूर करेगी।  चौधरी ने कहा कि विभाग भविष्य में भी विकास, नई बसाहटों, बाजार प्रवृत्तियों और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के आधार पर नियमित समीक्षा करता रहेगा, ताकि किसी भी नागरिक को उनकी संपत्ति के वास्तविक मूल्य से वंचित न होना पड़े। उल्लेखनीय है कि लंबे अंतराल के बाद गाइडलाइन दरों का यह व्यापक और महत्त्वपूर्ण संशोधन किया गया है। भविष्य में भी विभाग द्वारा जिले स्तर पर उस क्षेत्र में हो रहे विकास, नए निर्माण, क्षेत्रीय परिस्थितियों, बाजार प्रवृत्तियों तथा नई बसाहटों/कॉलोनियों के विस्तार का नियमित आकलन किया जाता रहेगा। इसी आधार पर गाइडलाइन दरों में समय-समय पर आवश्यक, तर्कसंगत और जनहितकारी संशोधन किए जाते रहेंगे, ताकि नागरिकों को उनकी संपत्ति के वास्तविक मूल्य का लाभ निर्बाध रूप से मिलता रहे और किसी भी प्रकार की मूल्य-विसंगतियाँ उत्पन्न न हों। "गाइडलाइन दरों का वैज्ञानिक और तर्कसंगत पुनरीक्षण राज्य के किसानों, भूमिस्वामियों और आम नागरिकों के हित में उठाया गया अत्यंत महत्त्वपूर्ण कदम है। पिछले कई वर्षों से दरों में संशोधन न होने के कारण वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में बड़ा अंतर पैदा हो गया था। नई दरें न केवल न्यायसंगत मूल्यांकन सुनिश्चित करेंगी, बल्कि किसानों को भूमि अधिग्रहण में अधिक मुआवज़ा, नागरिकों को संपत्ति का सही मूल्य और बैंक से अधिक ऋण प्राप्त करने में भी सहायता प्रदान करेंगी। शासन की मंशा स्पष्ट है—हर नागरिक को उसकी संपत्ति का उचित मूल्य मिले और किसी भी प्रकार की विसंगतियाँ या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। यह निर्णय प्रदेश के आर्थिक परिवेश को अधिक पारदर्शी, संतुलित और जनहितकारी बनाएगा।" – मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय

हरियाणा में अजब कारनामा: मंत्री ने खोली सड़क, लेकिन निर्माण करना ही भूल गए अधिकारी

फरीदाबाद  हरियाणा के फरीदाबाद में प्रशासन की बड़ी लापरवाही देखने को मिली है, जहां मंत्री से सड़क का उद्घाटन तक करा लिया गया, लेकिन डेढ़ महीने बाद भी सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। दरअसल बल्लभगढ़–तिगांव–मंझावली मार्ग की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए तिगांव में करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी रोड बननी थी। तीन अक्टूबर को इस रास्ते के निर्माण कार्य का शुभारंभ प्रदेश के राज्य मंत्री राजेश नागर द्वारा नारियल फोड़कर किया गया था। निर्माण कार्य के शुभारंभ के बाद के बाद से अधिकारियों ने यह भी दावा कर दिया था कि कुछ दिनों में काम शुरू हो जाएगा। हालांकि डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी अब तक कार्य शुरू नहीं हो सका है। इस देरी की वजह से रोजाना 30 हजार से अधिक वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि यह मार्ग दर्जनभर से अधिक गांवों को सीधे जोड़ता है। प्रस्तावित फिरनी को सीमेंटेड बनाया जाना है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग पांच करोड़ रुपये है।   सात मीटर सड़क चौड़ी की जा चुकी है इसके साथ ही, विभाग की ओर से पानी निकासी के लिए नाली बनाने की जिम्मेदारी भी निर्धारित की गई है। उल्लेखनीय है कि बल्लभगढ़ से तिगांव के सरकारी स्कूल तक सात मीटर सड़क को 16 करोड़ रुपये की लागत से चौड़ा किया जा चुका है। मंत्री राजेश नागर की सिफारिश पर इस सड़क चौड़ीकरण परियोजना को मुख्यमंत्री ने मंजूरी दी थी, जबकि परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा ने अपने कोटे से इसके लिए बजट उपलब्ध कराया था। मंझावली पुल शुरू होते ही बढ़ेगा यातायात दबाव यमुना नदी पर मंझावली पुल का निर्माण पूरा हो चुका है। हरियाणा की ओर से सड़क भी बन गई है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सड़क बनना बाकी है। इसके पूरा होते ही ग्रेटर नोएडा तक आवागमन शुरू हो जाएगा। इससे तिगांव की मुख्य सड़क पर वाहनों का भार कई गुना बढ़ जाएगा। यदि फिरनी का चौड़ीकरण समय पर नहीं हुआ, तो यहां लगातार जाम की स्थिति बनी रह सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि फिलहाल भी किसी आयोजन जैसे शादी-ब्याह के समय सड़क पर लंबा जाम लग जाता है, और पुल चालू होने के बाद भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने से समस्या और गंभीर हो जाएगी।

कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन आज दिल्ली में, मेजबानी करेंगे NSA अजीत डोभाल

नई दिल्ली  नई दिल्ली में हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने वाले कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की सातवीं बैठक आज होगी। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इस महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी करेंगे। इस बैठक में मालदीव, मॉरीशस, श्रीलंका और बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शामिल होंगे।  सेशेल्स इस बार पर्यवेक्षक देश के तौर पर हिस्सा लेगा, जबकि मलेशिया को विशेष अतिथि के रूप में न्योता दिया गया है। इससे पहले छठी बैठक दिसंबर 2023 में मॉरीशस में हुई थी। इसके बाद अगस्त 2024 में श्रीलंका में सभी सदस्य देशों ने कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन के औपचारिक संस्थापक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। इन देशों के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी लगातार संपर्क में रहते हैं और उनकी आखिरी बैठक जुलाई 2024 में ऑनलाइन हुई थी। कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन की शुरुआत इस मकसद से हुई थी कि हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा के मुद्दे पर सभी देश मिलकर काम करें। इस बार की बैठक में सदस्य देश पिछले ढाई साल में किए गए कामों की समीक्षा करेंगे और आगे की दिशा तय करेंगे। चर्चा के मुख्य विषय समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद और उग्रवाद से मुकाबला, ड्रग्स और मानव तस्करी जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध पर रोक, साइबर सुरक्षा, बिजली-पानी-पोर्ट जैसे अहम ढांचे की सुरक्षा, और प्राकृतिक आपदाओं में एक-दूसरे की तुरंत मदद करना रहेंगे। साथ ही 2026 के लिए नई कार्ययोजना और रोडमैप को मंजूरी दी जाएगी। भारत इस समूह में सबसे बड़ा और सक्रिय सदस्य है और लगातार कोशिश कर रहा है कि हिंद महासागर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पड़ोसी और द्वीपीय देश एक मजबूत मंच पर साथ आएं। गुरुवार की बैठक से इस दिशा में एक और ठोस कदम बढ़ने की उम्मीद है।

शिक्षा सेवा चयन आयोग, यूपी: अध्यक्ष पद हेतु आवेदन मांगे गए

उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष पद के लिए मांगे गए आवेदन 10 दिसंबर तक कर सकते हैं आवेदन उच्च शिक्षा विभाग की वेबसाइट www.uphed.gov. in पर उपलब्ध है आवेदन पत्र लखनऊ उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष की जल्द ही नियुक्ति होगी। इस प्रक्रिया के तहत बायोडाटा समेत आवेदन पत्र मांगे गए हैं। आवेदन पत्र प्राप्त होने की अंतिम तिथि 10 दिसंबर शाम छह बजे तक होगी। यह जानकारी उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव गिरिजेश त्यागी ने दी। अध्यक्ष पद के लिए नियुक्ति की तिथि से तीन वर्ष की अवधि अथवा 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो, पद धारण करेगा। इच्छुक आवेदकों को निर्धारित प्रारूप में बायोडाटा समेत प्रार्थना पत्र विशेष सचिव, उच्च शिक्षा अनुभाग-5, नवीन भवन, कक्ष संख्या-40, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ के नाम से पंजीकृत डाक द्वारा प्रेषित करना होगा। आवेदन पत्र के साथ समस्त शैक्षणिक व अन्य अभिलेख की स्वप्रमाणित प्रति भी संलग्न रहेगी। अध्यक्ष पद की कार्यावधि, आयु, अहर्ता, आवेदन पत्र के प्रारूप आदि जानकारी उच्च शिक्षा विभाग की वेबसाइट www. uphed. gov. in पर प्राप्त की जा सकती है। इसमें पद के लिए न्यूनतम अहर्ता की भी जानकारी दी गई है। अध्यक्ष पद के लिए राज्य सरकार के प्रमुख सचिव के पद या उनके समकक्ष पद पर रहे, विश्वविद्यालय के कुलपति हों या रहे हों तथा किसी विश्वविद्यालय के न्यूनतम 10 वर्ष तक आचार्य हों या रहे हों और उनके पास कम से कम तीन वर्ष का प्रशासनिक अनुभव हो, ऐसे लोग आवेदन कर सकते हैं।

72वें अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह का समापन करेंगे सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग

भोपाल  २० नवंबर २०२५ को भोपाल में अपेक्स बैंक के समन्वय भवन में प्रातः १०.०० बजे सहकारिता सप्ताह के समापन के अवसर पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम में परिचालन दक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता के लिए डिजीटलीकरण को बढ़ावा देने बाबत विषय पर आयोजित कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश के सहकारिता तथा खेलकूद एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग संबोधित करेंगे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमुख सचिव सहकारिता  डी. पी.  आहूजा करेंगे । उक्त राज्य स्तरीय आयोजन में मध्यप्रदेश की सभी प्रादेशिक सहकारी संस्थाओं एवं सहकारी बैंकों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहेंगे । उक्त जानकारी अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक  मनोज गुप्ता ने दी ।

पटना से पर्यटकों को सोनपुर मेला घुमाने की खास व्यवस्था की है पर्यटन विकास निगम ने

पटना  विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र मेला का आनंद पांच सितारा सुविधाओं वाले टेंट हॉउस में ठहरकर भी उठा सकते हैं। सोनपुर मेला में आने वाले सैलानियों की सुविधा और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते हुए बिहार पर्यटन विकास निगम की तरफ से खास टूर पैकेज की व्यवस्था की गई है। एशिया के सबसे बड़े पशु मेला के तौर पर विख्यात इस मेला दो तरह के लग्जरी टेंट लगाए गए हैं, जिसमें मिनी दरबारी और राजवाड़ी टेंट शामिल हैं। पटना से मेला स्थल तक पर्यटकों को लाने एवं ले जाने के अलावा यहां घुमाने से लेकर ठहरने एवं भोजन तक की व्यवस्था की गई है।    लग्जरी वाहन की सुविधा  बिहार पर्यटन विकास निगम की तरफ से पटना से सोनपुर मेला तक लोगों के आने-जाने के लिए विशेष लग्जरी वाहनों की व्यवस्था की गई है। पर्यटकों के लिए इन लग्जरी वाहनों का परिचालन पटना के वीर चंद पटेल पथ और उसके समीप ही दरोगा राय पथ स्थित सिख हेरिटेज गुरु नानक भवन से किया जा रहा है। पर्यटकों को सोनपुर मेला के भ्रमण के लिए दारोगा राय पथ स्थित कौटिल्य विहार से प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से शाम 7 बजे तक किया जा रहा है। एसी बस व डेकर बस का किराया प्रति व्यक्ति 900 रूपये, ट्रैवलर एसी का किराया 950 रूपये, इनोवा का किराया 1,100 रूपये, विंगर का 900 रूपये, इटियोस का 1,300 रूपये प्रति व्यक्ति निर्धारित है। कपल्स के लिए स्पेशल टूर पैकेज 6 हजार रुपए में इस बार सोनपुर मेले में पहली बार कपल्स के लिए स्पेशल टूर पैकेज का भी इंतजाम किया गया है। मात्र 6,000 रुपये प्रति कपल की राशि में कपल्स को होटल में ठहरने, एसी वाहन, अनुभवी टूरिस्ट गाइड, सुबह का नाश्ता, दोपहर का खाना, शाम का नाश्ता और रात का खाना समेत अन्य सुविधाएं बहाल की गई हैं। लग्जरी मिनी दरबारी और राजवाड़ी टेंट  देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए मेला स्थल के समीप ही अत्याधुनिक लग्जरी टेंट का निर्माण किया गया है। इन टेंटों का निर्माण दो श्रेणी में किया गया है। इनमें मुहैया कराई जाने वाली सुविधाओं के आधार पर इन लग्जरी टेंट को मिनी दरबारी और राजवाड़ी का नाम दिया गया है। इनका किराया देसी और विदेशी पर्यटकों के लिए अलग-अलग निर्धारित है। दोनों तरह के टेंट का किराया एक समान ही है। देशी पर्यटकों के लिए यह किराया 3 हजार रुपये और विदेशी पर्यटकों के लिए 5 हजार रुपये प्रति रात निर्धारित है। कपल के लिए यह किराया 6 हजार रुपये निर्धारित है। इन लग्जरी टेंट्स में एसी के अलावा अटैच बाथरूम, 24 घंटे बिजली-पानी समेत अन्य सुविधाएं बहाल की गई हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। गौरतलब है कि सोनपुर में गंगा और गंडक नदी के पवित्र संगम स्थल पर लगने वाला यह हरिहर क्षेत्र मेला हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होता है, जो एक महीने तक चलता है। इस मेले का इतिहास पौराणिक है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु यहां स्नान करने पहुंचते हैं। पर्यटन विकास निगम की वेबसाइट या टोल-फ्री नंबर- 8544418314 के माध्यम से इससे संबंधित पूरी जानकारी हासिल की जा सकती है और बुकिंग भी कराई जा सकती है।

प्राध्यापकों के व्यक्तित्व एवं आचरण का अनुसरण करते हैं विद्यार्थी: उच्च शिक्षा मंत्री परमार

समाज एवं राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी नागरिक निर्माण ही मिशन ‘कर्मयोगी बने’ का संकल्प : उच्च शिक्षा मंत्री परमार प्राध्यापकों के व्यक्तित्व एवं आचरण का अनुसरण करते हैं विद्यार्थी प्राध्यापकों के उत्तरदायित्व की सुनिश्चितता और विद्यार्थियों में रचनात्मकता एवं विविधता विकसित करने को लेकर हुआ विस्तृत मंथन उच्च शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में मंत्रालय में मिशन ‘कर्मयोगी बने’ की "सर्वोच्च परामर्शदायी समिति" की बैठक हुई भोपाल  शिक्षा का मूल ध्येय, समाज एवं राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी नागरिक निर्माण करना है। हमारा विश्‍वास है कि मिशन 'कर्मयोगी बनें' के माध्‍यम से, यह संकल्‍प हम अवश्‍य पूर्ण कर पाएंगे। प्राध्यापकों के मन में अपने दायित्‍व को लेकर संवेदनशीलता का भाव विकसित करना आवश्‍यक है। उनके समक्ष समाज एवं राष्ट्र के उत्थान को लेकर संकल्पित लक्ष्य की सुनिश्चितता आवश्यक है तभी वे विद्यार्थियों के रूप में जिम्‍मेदार नागरिक तैयार कर पाएंगे। 'कर्मयोगी बनें' की अवधारणा न केवल प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों तक बल्कि धरातल पर समाजव्यापी बने, ऐसे प्रयास करने होंगें। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने बुधवार को कही। मंत्री परमार उच्च शिक्षा अंतर्गत ‘कर्मयोगी बने’ की "सर्वोच्‍च परामर्शदायी समिति" की मंत्रालय में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने उच्च शिक्षा विभाग अंतर्गत मिशन "कर्मयोगी बनें" के प्रभावी क्रियान्वयन के परिप्रेक्ष्य में देश के लब्धप्रतिष्ठ विद्वतजनों की वर्चुअल उपस्थिति में "सर्वोच्च परामर्शदायी समिति" की बैठक लेकर विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की। मंत्री परमार ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा व्‍यवस्‍था में गुणवत्ता सुधार के लिए हम दृढ़ संकल्पित है। इसी परिप्रेक्ष्य में मूल्‍यांकन प्रणाली में सुधार एवं पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल मूल्‍यांकन की व्‍यवस्‍था लागू करने का प्रयास कर रहे हैं। परमार ने बताया कि प्रदेश के समस्त सार्वजनिक विश्वविद्यालय, मूल्यांकन में क्रेडिट के साथ जोड़कर भारतीय भाषाओं को सिखाने की कार्य योजना पर भी कार्य कर रहे हैं, इससे भाषाई एकात्मता का संदेश प्रदेश से देश भर में गुंजायमान होगा। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने उच्च शिक्षा में प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने को लेकर "कर्मयोगी बनें" के विज़न (दृष्टि) को रेखांकित किया। मंत्री परमार ने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता एवं जवाबदेहिता के लिए, राज्य सरकार संकल्पित है। उच्च शैक्षणिक संस्थानों के परिवेश को गुणवत्तापूर्ण, सर्वसाधन सम्पन्न, विद्यार्थी अनुकूल, उत्कृष्ट एवं सकारात्मक बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं। मंत्री परमार ने कहा कि विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए सहानुभूति एवं सख्ती दोनों के समन्वय के साथ, विद्यार्थी केंद्रित कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता है। मंत्री परमार ने कहा कि प्राध्यापक के प्रति विद्यार्थी का लगाव बने और विद्यार्थी, प्राध्यापक के आचरण एवं व्यक्तित्व का अनुसरण करें, इसके लिए प्राध्यापकों को अपनी जवाबदेहिता स्वतः भी सुनिश्चित करनी होगी। प्राध्यापकों के लिए भी सहानुभूति एवं सख्ती दोनों के समन्वय के साथ, शिक्षक प्रशिक्षण के लिए कार्य योजना बनाने की आवश्यकता है। मंत्री परमार ने वर्चुअल रूप से जुडे समिति के सभी सदस्‍यों को आश्वस्त किया कि समिति द्वारा सुझाए गए विषयों पर विभाग द्वारा गंभीरतापूर्वक कार्य योजना बनाकर क्रियान्वयन किया जाएगा एवं समिति को एक रिपोर्ट प्रस्तुतीकरण के माध्‍यम से इस बारे में अवगत कराया जाएगा। मंत्री परमार ने अधिकारियों को बैठक में प्राप्त समस्त सुझावों एवं परामर्शों पर क्रियान्वयन सुनिश्चित कर, क्रियान्वयन का प्रेजेटेंशन तैयार करने के निर्देश भी दिए। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने कहा कि विद्यार्थियों की उपस्थिति को बढाने के लिए निरन्‍तर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि विभाग के लगातार प्रयासों के कारण प्रदेश के लगभग 4 लाख विद्यार्थी स्‍वयं पोर्टल पर पंजीयन कर चुके हैं। एसीएस राजन ने बताया कि समिति के सुझाव को देखते हुए विभाग, शिक्षकों को सम्‍मानित एवं पुरस्कृत करने की योजना बना रहा है। आयुक्‍त उच्‍च शिक्षा प्रबल सिपाहा ने कहा कि विभाग निरन्‍तर मूल्‍यपरक एवं गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रयासरत है। राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद् (NAAC) बेंगलुरू के अध्यक्ष प्रो. डॉ. अनिल सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए तीन सप्‍ताह का विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम बनाया गया है। 9 मॉडयूल वाले इस प्रोग्राम में विद्यार्थियों को मानव मूल्‍यों की शिक्षा दी जाएगी, इसके लिए पहले शिक्षकों को ट्रेनिंग देनी होगी। भारत सरकार अंतर्गत मिशन कर्मयोग (क्षमता निर्माण आयोग) के सदस्य (मानव संसाधन) प्रो. आर. बालासुब्रमण्यम ने कहा कि "राष्‍ट्रीय जनसेवा कर्मयोगी" कार्यक्रम के माध्‍यम से, प्रदेश के सभी शिक्ष‍कों को ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली के उपाध्यक्ष प्रो. दीपक कुमार वास्तव ने शिक्षकों के लिए तैयार केपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम को ओरियंटेशन प्रोग्राम में ही शामिल करने का सुझाव दिया। प्रो. वास्तव ने प्राध्यापकों की क्षमता को कार्यात्मक एवं व्यवहारिक क्षमता के आधार पर, वर्गीकृत कर क्षमता निर्माण पर क्रियान्वयन का सुझाव दिया। बैठक में, पूर्व बैठक में प्राप्त सुझावों पर हो रहे क्रियान्वयन की अद्यतन प्रगति की समीक्षा की गई। देश के ख्यातिलब्ध शिक्षाविदों ने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर महत्वपूर्ण, प्रभावी एवं प्रासंगिक परामर्श दिए। प्राध्यापकों के उत्तरदायित्व की सुनिश्चितता, उनके प्रशिक्षण एवं प्रोत्साहन को लेकर व्यापक विचार-मंथन हुआ। विद्यार्थियों में रचनात्मकता एवं विविधता विकसित करने, संस्थान में उपस्थिति एवं उनके समग्र विकास से जुड़े विविध विषयों पर सारगर्भित विमर्श हुआ।