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गुरुओं की महान परंपराओं का पालन ज़रूरी, पंजाब पानी बचाए : नायब सैनी

फरीदाबाद  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में फरीदाबाद के सूरजकुंड में आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय परिषद् की बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि देश की प्रगति के लिए राज्यों के बीच सतत‍् सहयोग के माहौल का होना अति महत्वपूर्ण है। अपने संसाधनों को एकत्रित करके अपने ज्ञान को सांझा करके और एक दूसरे की सर्वोत्तम पद्धतियों को अपनाकर ही हम एक भारत-श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को साकार कर सकते हैं। नायब सिंह ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि इस बैठक के विचार-मंथन से राज्य व केंद्र शासित प्रदेश सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने, अंतर्राज्यीय व केंद्र राज्यों के बीच कई मुद्दों को सुलझाने में सहमति बनाने में सफल होंगे और उत्तरी क्षेत्रीय परिषद् की यह बैठक एक भारत श्रेष्ठ भारत का उदाहरण बनेगी। नायब सिंह सैनी ने बैठक में चर्चा के दौरान कहा कि सभी राज्यों के पानी के हिस्से को संबंधित राज्य तक पहुंचाने की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। हरियाणा लगातार दिल्ली को उसके हिस्से से अधिक पानी अपने हिस्से से देता रहा है। जबकि एसवाईएल न बनने के कारण हरियाणा को पंजाब से अपने हिस्से का पूरा पानी नहीं मिल रहा है। अगर एसवाईएल के रास्ते हरियाणा को अपने हिस्से का पूरा पानी मिलता है, तो राजस्थान को भी उसके हिस्से का पूरा पानी मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब गुरुओं की धरती है। यह वह पावन धरा है, जहां भाई कन्हैया जी जैसे गुरु सेवक हुए, जिन्होंने युद्ध भूमि में घायल पड़े दुश्मनों के सैनिकों को भी पानी पिलाया। उन्होंने परिषद के माध्यम से पंजाब से आग्रह किया कि जल विवाद पर गुरुओं की महान परंपराओं का ध्यान अवश्य रखा जाए। उन्होंने कहा कि पानी हम सबका सांझा है। हमारी संस्कृति में नदियों को माता कहा गया है।   पीयू से हरियाणा के कॉलेज संबद्ध होने से विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ नायब सिंह सैनी ने पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू), चंडीगढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार इसमें अपना योगदान करना चाहती है। यदि हरियाणा के कुछ कॉलेज इस विश्वविद्यालय से संबद्ध हो जाएंगे, तो हरियाणा के विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय दोनों को लाभ होगा। बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री व उत्तरी क्षेत्रीय परिषद के वाइस चेयरमैन नायब सिंह सैनी, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, दिल्ली के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, जम्मू एवं कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा, जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुला, लद्दाख के उप राज्यपाल कविंदर गुप्ता, चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया, केन्द्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, हरियाणा के राजस्व मंत्री विपुल गोयल, सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा सहित संबंधित राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के उच्चाधिकारियों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने बैठक में अमित शाह सहित संबंधित राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के उप-राज्यपाल और मुख्यमंत्रियों का शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया।

बैठक में भावुक हुए तेजस्वी यादव, कहा— अगर मैं बोझ हूँ तो हटा दीजिए

नई दिल्ली  बिहार विधानसभा चुनाव की हार को पचाना लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी के लिए मुश्किल हो रहा है। उनके बेटे तेजस्वी यादव भले ही आरजेडी विधायक दल के फिर से नेता चुन लिए गए हैं, लेकिन पार्टी में सब कुछ सहज नहीं है। यहां तक कि तेजस्वी यादव सोमवार को विधायक दल की मीटिंग के दौरान भावुक हो गए। उन्होंने अपनी तरफ से ही यहां तक कह दिया कि यदि विधायक चाहें तो नेतृत्व छोड़ने को तैयार हूं। उन्होंने कहा कि विधायकों की राय हो तो वे अपनी ओर से किसी अन्य व्यक्ति को अपना नेता चुन सकते हैं। उन्होंने साथी विधायकों से कहा कि यदि उन्हें लगता है कि मेरे स्थान पर किसी और के आने से संगठन मजबूत हो सकता है तो ऐसा कर सकते हैं।   मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक विधायक ने कहा कि तेजस्वी यादव टिकट बंटवारे और हार को लेकर लगे आरोपों से आहत थे। मीटिंग के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि आखिर मैं क्या करूं। परिवार को देखूं या फिर पार्टी को देखूं। बहन रोहिणी आचार्य की ओर से लगाए आरोपों के चलते तेजस्वी यादव फिलहाल दबाव की स्थिति में दिख रहे हैं। हालांकि अब तक उन्होंने खुलकर कुछ भी कहा नहीं है। उनके सलाहकार और करीबी संजय यादव एवं रमीज नेमत खान पर भी आरोप लग रहे हैं कि तेजस्वी यादव सिर्फ उनकी ही सुनते हैं और कार्यकर्ताओं से दूर हो गए हैं। भावुक हुआ माहौल, लालू यादव को खुद देना पड़ा दखल तेजस्वी यादव की ओर से अचानक ऐसे ऑफर से माहौल भावुक दिखा। वहां मौजूद तमाम विधायक आग्रह करने लगे कि आप ही हमारे नेता रहें। इस बीच खुद लालू यादव ने दखल दिया और उन्होंने विधायकों से कहा कि वे राजी करें। इसके बाद विधायकों ने सर्वसम्मति से तेजस्वी यादव को अपना नेता चुन लिया। इस दौरान राबड़ी देवी, मीसा भारती और तेजस्वी यादव के करीबी संजय यादव भी मौजूद थे। बता दें कि मीसा भारती को भी असंतुष्ट बताया जा रहा है, लेकिन वह खुलकर कुछ भी नहीं कह रही हैं। दरअसल आरजेडी को इस चुनाव में 25 सीटें ही मिली हैं, जबकि वह 143 पर उतरी थी। वह तीसरे नंबर का दल बन गई है, जिसे पार्टी के लिए करारा झटका माना जा रहा है। मीटिंग में EVM पर उठे सवाल, बोले- ऐसे नतीजे गड़बड़ी करके ही आए इससे पहले 2010 में ही ऐसा हुआ था, जब आरजेडी को महज 22 सीटें मिली थीं। तब नेता विपक्ष का पद भी नहीं मिल पाया था, लेकिन इस बार नेता विपक्ष बनने में तेजस्वी यादव कामयाब रहे हैं। तेजस्वी यादव को नेता चुने जाने वाली मीटिंग में जगदानंग सिंह ने कहा कि हमारी यह हार ईवीएम के चलते हुई है। उन्होंने कहा कि इन मशीनों का बेजा इस्तेमाल हुआ है। उनकी इस दलील को विधायक भाई वीरेंद्र ने भी सही ठहराया। उन्होंने कहा कि हमें ईवीएम के खिलाफ लड़ना होगा। हमें डिमांड करनी चाहिए कि इलेक्शन सिर्फ बैलेट पेपर से ही हो।  

मेकाहारा में सस्ती मेडिकल जांच, MRI 2 हजार और CT-स्कैन 1 हजार में, डीन को CGMSC NOC की आवश्यकता नहीं

 रायपुर  छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में  रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय और डॉडीकेएस अस्पताल के स्वशासी समिति के सामान्य सभा की बैठक संपन्न हुई। बैठक में उन्होंने चिकित्सा महाविद्यालय और संबद्ध अस्पताल में लोगों को अविलंब स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता, रीएजेंट एवं कंज्यूमेबल की खरीदी तथा आवश्यक मानव संसाधन की व्यवस्था स्वशासी मद से करने हेतु कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये। स्वास्थ्य मंत्री ने स्वशासी सभा की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि अस्पताल में किसी भी मरीज को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने मरीज हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए चिकित्सा महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के लिए अति आवश्यक सामाग्रियों उपकरण/रियेजेन्ट/केमिकल/ डिस्पोजेबल सामाग्रियां इत्यादि जिनके मांगपत्र सीजीएमएससी को प्रेषित किये गए हैं, उन सामाग्रियों की आपातकालीन आवश्यकता होने पर सीजीएमएससी से एनओसी प्राप्त होने एवं राशि मिलने की प्रत्याशा में अधिष्ठाता स्तर पर छ.ग. भंडार क्रय नियमानुसार आवश्यकता के अनुरूप सामाग्री क्रय किये जाने की वित्तीय शक्ति प्रदत्त करने का अनुमोदन किया।  स्वास्थ्य मंत्री ने पेट सीटी स्कैन तथा गामा कैमरा की सुविधा मरीजों को प्रदान किये जाने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए तीन महीने के अंदर इस सुविधा को प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त व्यवस्था बनाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये। विभिन्न विभागों को दिए जाने वाले इंप्रेशन मनी की राशि को प्रति मांगपत्र ₹10 हजार से बढ़ाकर ₹1 लाख करने की घोषणा की। उन्होंने अस्पताल में आवश्यकता पड़ने पर समय-समय पर किए जाने वाले छोटे-मोटे मरम्मत कार्यों के लिए अस्पताल स्तर पर ऑटोनॉमस फंड का उपयोग करने के निर्देश दिये। समिति की बैठक में मेडिकल कॉलेज के 200 छात्रों के लिए चयन किए गए छात्रावास भवन पर सहमति दी गई। शीघ्र ही यह छात्रावास संचालन में आ जाएगा। बैठक में डीकेएस अस्पताल के एमसीएच छात्रावास का शुल्क 5 हजार से घटाकर 2 हजार 5 सौ रुपए करने का निर्णय लिया गया। ओपीडी में आने वाले मरीजों के सीटी स्कैन एवं एमआरआई जांच की दर को पुनरीक्षित करते हुए एपीएल (गरीबी रेखा से ऊपर जीवन यापन करने वाले) मरीजों को एमआरआई जांच हेतु ₹2000 एवं सीटी स्कैन जांच हेतु ₹1000 राशि प्रावधानित करने का निर्णय लिया। वहीं बीपीएल मरीजों तथा 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए ओपीडी में जाँच सुविधा निशुल्क रहेगी। जबकि अंत: रोगी यानी अस्पताल में भर्ती एपीएल एवं बीपीएल दोनों मरीजों के लिए ये दोनों जांच निशुल्क है। सांसद रायपुर बृजमोहन अग्रवाल एवं विधायक सुनील सोनी की उपस्थिति में आयोजित इस बैठक में स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, संभाग आयुक्त महादेव प्रसाद कांवरे, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा शिखा राजपूत तिवारी, सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक रितेश अग्रवाल, संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. यू. एस. पैंकरा, रायपुर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी, अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर, डीकेएस अस्पताल प्रबंधन समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे ।

जल दर्पण पोर्टल से अब हर गांव का नल-जल सिस्टम ऑनलाइन देखा जा सकेगा

 भोपाल प्रदेश में घर-घर नल से जल पहुंचने के लिए जल जीवन मिशन के अंतर्गत एकल व समूह नल जल योजनाओं पर काम हो रहा है। कई योजनाएं पूरी हो चुकी है और उनके संचालन का कार्य पंचायत को सौंपा गया है। यह शिकायत आम है कि योजनाएं भले ही बना ली गई हों, मगर जलापूर्ति नहीं हो रही है। विधानसभा में इसको लेकर प्रश्न भी उठ चुका है। इसे देखते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने तय किया है कि वह अब योजनाओं की निगरानी आनलाइन करेगा। इसके लिए जल दर्पण पोर्टल बनाया है, जिसमें मैदानी अमले को प्रतिदिन यह रिपोर्ट देनी होगी कि योजना चालू है या बंद। पानी आ रहा है या नहीं। पाइपलाइन ठीक काम कर रही है या नहीं। जानकारी सही दी जा रही है या नहीं, इस पर नजर उच्चाधिकारी रखेंगे। प्रदेश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत 27,990 एकल नल जल योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। 15,947 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 12,043 के काम जारी हैं। इनमें से 8,358 नल-जल परियोजनाओं के आकलन में चूक हुई, जिसके कारण लागत 2,813 करोड़ रुपये बढ़ गई। केंद्र सरकार ने इस अतिरिक्त राशि को देने से इन्कार कर दिया और भार राज्य सरकार के खजाने पर आ गया। दोषी इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं। इसके साथ ही बड़ी आबादी को मिलने वाले लाभ को देखते हुए सरकार ने काम आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह भी तय किया है कि पंचायतों द्वारा क्रियान्वित योजनाओं की निगरानी प्रतिदिन के आधार पर होगी। 28 हजार गांवों से फीडबैक लेने के लिए जल दर्पण पोर्टल विभाग ने बनाया है। इसमें मैदानी स्तर से बताया जाएगा कि योजना चालू है या बंद। यदि बंद है तो यह बताना पड़ेगा कि बिजली की लाइन कटने, पाइप लाइन की खराबी या फिर किस कारण से बंद हैं। इसके आधार पर सुधार की कार्य योजना तैयार होगी। कुल मिलाकर सरकार का उद्देश्य यह है कि योजना यदि संचालन लिए पंचायतों को सौंप दी गई हैं तो फिर घरों पर नल से जल पहुंचाना चाहिए। इसमें कोई परेशानी आ रही है तो उसका पता लगाकर समाधान किया जाए। ऐसे होगा काम जल दपर्ण पोर्टल में नलजल योजनाओं की दैनिक चालू बंद की स्थिति की जानकारी मैदानी क्षेत्र से नियमित ली जाएगी। उपयंत्रियों पोर्टल पर रहैंडपंप टेक्नीशियनों, हेल्परों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सदस्यों को रजिस्टर करेंगे। ये अपने-अपने कार्यक्षेत्र की नलजल योजनाओं की दैनिक चालू-बंद स्थिति की जानकारी पोर्टल पर दर्ज करेंगे। इसका सत्यापन उपयंत्री एवं सहायक यंत्री से कराया जाएगा। निगरानी का तंत्र कर रहे हैं विकसित : विभाग के प्रमुख सचिव पी नरहरि का कहना है कि घर-घर नल से जल पहुंचाना सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। बड़ी संख्या में योजनाएं पंचायतों द्वारा क्रियान्वित की जा रही हैं। कई बार शिकायत आती है कि जलापूर्ति नहीं हो रही है। हमने संचालन, संधारण और निगरानी की कार्य योजना बनाई है। निगरानी का तंत्र विकसित किया गया है। जल दर्पण पोर्टल के माध्यम से दैनिक आधार पर निगरानी की जाएगी। इसका लाभ यह होगा कि वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगा और यदि कहीं कोई समस्या है तो उसे दूर करने की दिशा में काम किया जाएगा।

खूंखार माओवादी कमांडर हिड़मा मारा गया, झीरम घाटी और अन्य 26 हमलों का था जिम्मेदार

बस्तर   देश में चल रहा माओवाद के खिलाफ अभियान अब अपने अंतिम दौर में है। माओवाद के ताबूत में एक और कील के रूप में सुरक्षा बल के जवानों में हिड़मा को मार गिराया है। छत्तीसगढ़ के सुकमा और आंध्र प्रदेश की सीमा पर मंगलवार को जारी मुठभेड़ में सुरक्षाबल के जवानों ने 6 माओवादियों को मार गिराया है। इसमें कुख्यात माओवादी हिड़मा भी शामिल है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुठभेड़ में हिड़मा, उसकी पत्नी राजे और 25 लाख का इनामी माओवादी एसजेडसीएम टेक शंकर मारा गया है। यह इनकाउंटर सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी सफलता बतायी जा रही है। आंध्र-प्रदेश की ग्रे-हांउड टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है। बता दें कि शीर्ष माओवादी नेताओं बसवा राजू, के. रामचंद्र रेड्डी (गुड्सा उसेंडी), के. सत्यनारायण रेड्डी (कोसा) के मारे जाने और भूपति, रूपेश, सुजाता व ककराला सुनीता जैसे वरिष्ठ कैडरों के आत्मसमर्पण के बाद अब बस्तर में हिड़मा ही माओवादी संगठन का मुख्य नेता था। हिड़मा माओवादी संगठन की बटालियन नंबर-1 का प्रभारी और केंद्रीय समिति का सदस्य था। वह लंबे समय से सुरक्षा बलों के रडार था। बटालियन कमांडर से केंद्रीय समिति सदस्य बना हिड़मा माओवादी संगठन में हिड़मा का नाम पहली बार झीरम घाटी हमले के बाद चर्चाओं में आया था। पिछले वर्ष उसे केंद्रीय समिति का सदस्य बनाया गया, हालांकि पद की दृष्टि से वह अपेक्षाकृत नीचे है, लेकिन प्रभाव और पहचान के लिहाज से वह पिछले एक दशक से संगठन का सबसे प्रभावशाली चेहरा था। हिड़मा के बारे में कुछ मुख्य तथ्य     जन्म: 1981, पूवर्ति, सुकमा (छत्तीसगढ़)     पद: पीएलजीए बटालियन नंबर 1 का प्रमुख- माओवादियों की सबसे घातक हमलावर इकाई।     वह CPI (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा सदस्य था।     वह बस्तर क्षेत्र से सेंट्रल कमेटी में शामिल होने वाला एकमात्र आदिवासी था।     उसके सिर पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित था।     हिड़मा के साथ उसकी दूसरी पत्नी राजे (राजक्का) भी मारी गई।     असली नाम: संतोष मुख्य हमले जिनमें वह शामिल था     2010 दंतेवाड़ा हमला: 76 सीआरपीएफ जवान शहीद     2013 झीरम घाटी नरसंहार: 27 लोग मारे गए, जिनमें शीर्ष कांग्रेसी नेता शामिल     2021 सुकमा-बीजापुर मुठभेड़: 22 सुरक्षा कर्मी शहीद 45 लाख का इनामी था हिड़मा संगठन ने अब उसे केंद्रीय समिति सदस्य के साथ बटालियन नंबर-1 का प्रभारी नियुक्त किया है। उसकी जगह उसके ही गांव पूवर्ती के बारसे देवा को नया कमांडर बनाया गया है। हिड़मा पर 45 लाख रुपये का इनाम घोषित था। हिड़मा देश की एकमात्र माओवादी बटालियन नंबर-1 का कमांडर रह चुका है, वही बटालियन जो देशभर में सबसे संगठित और घातक हमलों के लिए कुख्यात रही है। हिड़मा की मां से मिले थे उपमुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कुछ दिनों पहले हिड़मा के गांव पूवर्ती पहुंचतक उसकी मां से मुलाकात की थी। उन्होंने हिड़मा से हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा था कि सरकार की प्राथमिकता मार्च 2026 तक बस्तर और आसपास के क्षेत्रों से माओवादी हिंसा का पूर्ण उन्मूलन है।

सैलजा का आरोप: धान घोटाले बढ़ रहे, सरकार मौन क्यों?

चंडीगढ़  पूर्व केंद्रीय मंत्री और सिरसा सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा की भाजपा सरकार में नये-नये घोटाले सामने आ रहे हैं। अब धान खरीद में घोटाला सामने आ रहा है। हाल ही में एक और मामले में भौतिक सत्यापन के दौरान हजारों मीट्रिक टन धान रिकॉर्ड से गायब होने का मामला सामने आया है। यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि प्रदेशभर में हो रहे लगातार धान घोटालों की एक कड़ी है।सांसद ने कहा कि यह स्पष्ट है कि हरियाणा में धान घोटाले हो रहे हैं और सरकार पूरी तरह से खामोश है। किसानों की मेहनत का अनाज भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है, मगर न कोई जवाबदेही तय होती है और न ही दोषियों पर कार्रवाई।  उन्होंने मौजूदा भाजपा सरकार से सवाल पूछा है कि इन धान घोटालों के पीछे जिम्मेदार लोग कौन हैं। अब तक कितने अधिकारियों व मिल मालिकों पर कार्रवाई हुई। किसानों के अनाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए। क्या सरकार सीबीआई या न्यायिक जांच से डर रही है। उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। सैलजा ने कहा कि धान घोटाला कई दिनों से सुर्खियों में है। मीडिया में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। अब तक करोड़ों रुपयों के घोटाले का अंदेशा जताया जा रहा है, मगर हैरानी की बात है कि भाजपा सरकार इस पूरे मामले पर चुप है।

अपराध करने वालों को चुकानी ही होगी कीमत : सीएम योगी

अपराध कतई स्वीकार नहीं करता नया यूपी : मुख्यमंत्री अपराध करने वालों को चुकानी ही होगी कीमत : सीएम योगी बी से ए क्लास में उच्चीकृत हुई गोरखपुर स्थित क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला 72.78 करोड़ रुपये की परियोजना का मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण मॉडर्न पुलिस के लिए गेम चेंजर बनेगी फॉरेंसिक साइंस लैब – मुख्यमंत्री आठ वर्षों में की 2.19 लाख पुलिस कार्मिकों की भर्ती- मुख्यमंत्री 2017 से पहले महज 4 फॉरेंसिक लैब थे अब 12 हैं और 6 छह लैब निर्माणाधीन – सीएम गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 के बाद का नया उत्तर प्रदेश अपराध को कतई स्वीकार नहीं करता है। यदि किसी ने यहां अपराध करने की जुर्रत की तो उसे हर हाल में उसकी कीमत भी चुकानी होगी। वह दौर खत्म हो गया जब पीड़ित तड़पता, भटकता था और अपराधी मौज-मस्ती करते थे। अब प्रदेश सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत साक्ष्य संकलन और फॉरेंसिक साइंस लैब्स (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) के जरिए इसके प्रमाणन की ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित कर दी है कि कोई भी अपराधी बच नहीं पाएगा। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति, वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित जांच और आधुनिक फॉरेंसिक साइंस लैब्स के जरिए ऐसी व्यवस्था विकसित हुई है कि अपराधी अब बच नहीं सकते। सटीक, त्वरित और पारदर्शी जांच के कारण पीड़ित को सहज, सुगम और समयबद्ध न्याय उपलब्ध हो रहा है। सीएम योगी मंगलवार को बी से ए क्लास में उच्चीकृत क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (आरएफएसएल) गोरखपुर के नवीन उच्चीकृत भवन के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। छह मंजिला हाईटेक नवीन भवन के निर्माण पर 72.78 करोड़ रुपये की लागत आई है। उच्चीकृत आरएफएसएल का फीता काटकर उद्घाटन करने और यहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने फॉरेंसिक जांच की अत्याधुनिक सौगात के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश की जनता को बधाई देते हुए कहा कि आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सिर्फ चार फॉरेंसिक साइंस लैब थे। सरकार बनने के बाद यह तय किया गया कि कम से कम हर कमिश्नरी में एक फॉरेंसिक साइंस लैब होनी चाहिए। इससे आठ वर्षों में इनकी संख्या बढ़कर 12 हो गई है। छह लैब निर्माणाधीन हैं। जल्द ही सभी कमिश्नरी में फॉरेंसिक साइंस लैब होंगे। इन लैब्स में हर प्रकार की फॉरेंसिक जांच होगी जो साक्ष्य को प्रमाणित कर अपराधियों को कठोर दंड दिलाने का आधार बनेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि कमिश्नरी स्तर पर फॉरेंसिक साइंस लैब स्थापित करने के साथ सरकार ने हर जिले में फॉरेंसिक साक्ष्य संकलन के लिए दो-दो मोबाइल वैन उपलब्ध कराए हैं। इससे कुछ ही घंटों में पुख्ता साक्ष्य संकलन हो जा रहा है और लैब में उसकी जांच के बाद पीड़ित को सहज और सुगम न्याय मिल जाएगी। अब कोई भी अपराधी बच नहीं पाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले साक्ष्य इकट्ठे होने पर भी अच्छी फॉरेंसिक साइंस लैब के अभाव में अपराधी बच जाते थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में गत वर्ष जुलाई से तीन नए कानून (भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य संहिता 2023) लागू होने के बाद फॉरेंसिक साइंस लैब्स की उपयोगिता और बढ़ गई है। नए कानून में सात वर्ष से अधिक कारावास वाले अपराधों में फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य कर दिया है। इन कानूनों के लागू होने से काफी पहले ही यूपी सरकार ने लैब्स स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी थी। फॉरेंसिक साइंस लैब्स से रोजगार का सृजन भी होगा सीएम योगी ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस लैब्स से युवाओं के लिए नए रोजगार का सृजन भी होगा। इसके लिए सरकार ने लखनऊ में यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की स्थापना की है। यहां लैब टेक्नीशियन के लिए सर्टिफिकेट, लैब में साक्ष्य मिलान करने वालों के लिए डिप्लोमा और विशेषज्ञ के लिए डिग्री कोर्स शुरू किए गए हैं। फॉरेंसिक साइंस लैब्स नए समय में नए अपराधों को रोकने के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध कराने के प्रयासों का हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि अत्याधुनिक यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में एडवांस डीएनए डायग्नोस्टिक, एआई, ड्रोन, रोबोटिक लैब उपलब्ध है। यहां नैनो से लेकर 40 किलो वजनी ड्रोन संचालित किए जा सकते हैं। मॉडर्न पुलिस के लिए गेम चेंजर बनेगी फॉरेंसिक साइंस लैब सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर में अपग्रेडेड फॉरेंसिक साइंस लैब में सभी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी जो सटीक जांच करेंगी। यह लैब मॉडर्न पुलिस के लिए गेम चेंजर साबित होगी। त्वरित और पुख्ता जांच होने से लोगों को समय से सुसंगत न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक साइंस लैब अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का ही हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर की यह उच्चीकृत लैब उन चुनिंदा संस्थानों में शामिल होगी जहां बैलेस्टिक, नार्कोटिक्स, सेरोलॉजी, साइबर फॉरेंसिक, डीएनए प्रोफाइलिंग, डाक्यूमेंट विश्लेषण से लेकर सभी उन्नत फॉरेंसिक परीक्षण संभव होंगे। ऐसी क्षमता से पुलिस के कार्य में गति, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य साइबर फॉरेंसिक को वैश्विक मानक तक पहुंचाना है ताकि भविष्य में होने वाले हाईटेक अपराधों पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। आठ वर्षों में की 2.19 लाख पुलिस कार्मिकों की भर्ती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रूल ऑफ लॉ को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि इसे लागू करने प्रयासों के तहत आठ सालों में प्रदेश में 2 लाख 19 हजार पुलिस कार्मिकों की भर्ती की गई है। इसमें 60244 कार्मिकों की भर्ती हाल ही में संपन्न हुई है। उन्होंने कहा कि आठ वर्षों में यूपी में जितनी पुलिस भर्ती हुई है, उतनी कई राज्यों की कुल पुलिस फोर्स नहीं है। सीएम ने भर्ती के साथ ट्रेनिंग क्षमता विस्तार का भी उल्लेख किया। कहा कि 2017 में पुलिस ट्रेनिंग की कुल क्षमता 6000 की थी। तब 30000 भर्ती होने पर किराए पर ट्रेनिंग सेंटर लेने पड़े थे। आज प्रदेश में पुलिस ट्रेनिंग की क्षमता दस गुने से अधिक बढ़ चुकी है। अभी जितनी भर्ती हुई, सबको ट्रेनिंग राज्य के ही सेंटर्स से मिल रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस महकमे में सरकार कार्य के अनुरूप सुविधाओं का विस्तार कर रही … Read more

मुख्यमंत्री योगी ने भरा एसआईआर फॉर्म, नागरिकों को जागरूक रहने की दी प्रेरणा

मुख्यमंत्री योगी ने भरा एसआईआर प्रक्रिया का फॉर्म, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक होने की दी प्रेरणा मतदाता सूची अद्यतन अभियान बना जागरूकता और सहभागिता का माध्यम  SIR 28 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 7 फरवरी 2026 तक गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिक जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक चेतना का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर के बैठक कक्ष में मतदाता सूची के एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया का फॉर्म भरकर इसे पूर्ण किया। मुख्यमंत्री गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र के झूलेलाल मंदिर के पास स्थित कन्या प्राथमिक विद्यालय मतदान केंद्र के बूथ संख्या 223 में पंजीकृत मतदाता हैं। बता दें कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से, SIR 28 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 7 फरवरी 2026 तक चलाया जाएगा। उत्तर प्रदेश सहित देश के 12 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इस प्रक्रिया में शामिल हैं। इसी क्रम में मंगलवार को गोरखपुर में बीएलओ गोरखनाथ मंदिर पहुंचे और मुख्यमंत्री को एसआईआर फॉर्म उपलब्ध कराया, जिसे मुख्यमंत्री ने भरकर उन्हें सौंप दिया।  SIR मतदाता सूची को शुद्ध और सटीक बनाने और साथ ही संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मतदाता अधिकारों के सही से इस्तेमाल के लिए कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं इस प्रक्रिया में शामिल होना यह संदेश देता है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का अधिकार और कर्तव्य है। ऐसी पहल मतदाता जागरूकता को मजबूती देती है और लोकतंत्र को और अधिक सहभागी बनाती है। इस अवसर पर जिलाधिकारी दीपक मीणा, तहसीलदार सदर ज्ञान प्रताप सिंह, भाजपा महानगर संयोजक राजेश गुप्ता, नगर निगम बोर्ड के उपसभापति एवं पार्षद पवन त्रिपाठी तथा जीडीए बोर्ड सदस्य दुर्गेश बजाज उपस्थित रहे।

पीड़ितों की सहायता में लापरवाही पर होगी कार्रवाई : मुख्यमंत्री

पुलिस से जुड़े मामलों में करें सख्त कार्रवाई : मुख्यमंत्री पीड़ितों की सहायता में लापरवाही पर होगी कार्रवाई : मुख्यमंत्री जनता दर्शन में सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुनीं 300 लोगों की समस्याएं गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को दो टूक हिदायत दी है कि पुलिस से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। पीड़ितों की मदद में विलंब और लापरवाही कतई नहीं होनी चाहिए। जनता की समस्याओं के समाधान में  किसी तरह की लापरवाही हुई तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी तय है। किसी पीड़ित की समस्या के समाधान में अगर कहीं भी कोई दिक्कत आ रही है तो उसका पता लगाकर निराकरण कराया जाए और किसी स्तर पर जानबूझकर कर प्रकरण को लंबित रखा गया है तो संबंधित की जवाबदेही तय की जाए।  मुख्यमंत्री ने यह निर्देश मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनता जनता दर्शन के दौरान लोगों की समस्याएं सुनने के दौरान दिए। मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 300 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। सीएम योगी ने सभी को आश्वस्त किया कि किसी को भी घबराने की आवश्यकता नहीं है। हर समस्या का वह प्रभावी निस्तारण कराएंगे। इसे लेकर उन्होंने प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों को मौके पर ही दो टूक समझाया कि जनता की समस्याओं का समयबद्ध, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करें। कुछ प्रकरणों पर उन्होंने अफसरों को निर्देशित किया कि यह भी पता लगाएं कि यदि किसी को प्रशासन का सहयोग नहीं मिला है तो ऐसा क्यों और किन कारणों से हुआ। हर पीड़ित की त्वरित मदद की जाए। उन्होंने जमीन कब्जाने की शिकायतों पर विधि सम्मत कठोर कदम उठाने का निर्देश दिया।  हर बार की तरह इस बार भी जनता दर्शन में कुछ लोग इलाज में आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। इस पर सीएम योगी ने अधिकारियों से कहा कि जल्द से जल्द अस्पताल के इस्टीमेट की प्रक्रिया पूर्ण कराकर शासन को उपलब्ध करा दें। इलाज के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पर्याप्त मदद की जाएगी। जनता दर्शन में परिजनों के साथ आए बच्चों को प्यार-दुलारकर सीएम योगी ने उन्हें चॉकलेट दिया।  सीएम ने की गोसेवा, मोर को भी दुलारा गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने तथा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा समक्ष शीश झुकाने के बाद वह मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले। मंदिर की गोशाला में पहुंचकर गोसेवा की। गायों और गोवंश को स्नेहिल भाव से गुड़-रोटी खिलाया। गोशाला में सीएम योगी के पहुंचने पर प्रायः एक मोर भी उनके पास आ जाता है। मुख्यमंत्री ने उसे भी दुलारा और अपने हाथों से रोटी खिलाया।

रायपुर: अवैध धान की तस्करी रोकने प्रशासन हुआ सख्त, सीमावर्ती चेकपोस्टों पर कड़ी निगरानी

रायपुर प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के साथ ही कुछ क्षेत्रों में अवैध धान परिवहन की संभावनाओं को रोकने राज्य भर में प्रशासन सख़्त हो गया है।  इसी क्रम में जशपुर जिला  कलेक्टर के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम ने जशपुर जिले का झारखंड सीमा से लगे चेकपोस्टों पर देर रात औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। निरीक्षण दल में तहसीलदार जय राजनपथे, नायब तहसीलदार अरुण कुमार, फूड इंस्पेक्टर आलोक टोप्पो, मंडी निरीक्षक, राजस्व निरीक्षक तथा पटवारी शामिल थे। टीम ने भलमंडा, सकरडेगा और साईंटांगाटोली चेकपोस्टों का दौरा किया, जहाँ सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और वाहन चेकिंग प्रक्रिया को परखा गया। संभावित अवैध धान परिवहन पर रोक के लिए मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। इसी दौरान संबंधित ग्रामों के सरपंच और सचिव भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने तथा सीमा क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तत्काल उपलब्ध कराने आग्रह किया, ताकि अवैध आवागमन पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सीमावर्ती इलाकों में सतत निगरानी जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।