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Industrial Boost: अब कृषि भूमि पर भी खोल पाएंगे उद्योग, सरकार ने किया बड़ा बदलाव

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने कृषि ज़ोन में उद्योगों की राह में सबसे बड़ी रुकावट माने जाने वाले सड़क मानकों को नरम कर दिया है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की ओर से जारी नई पॉलिसी ने ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक विकास का दरवाज़ा पहले से कहीं ज्यादा खोल दिया है। अब निवेशकों को चौड़ी सड़क ढूंढने के झंझट में नहीं फंसना पड़ेगा और छोटे गांवों तक औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार होने का रास्ता साफ़ हो गया है। वहीं, हरियाणा सरकार ने राज्य के सभी डेवलपमेंट प्लानों में लागू मिक्सड लैंड यूज (एमएलयू) के नियमों में भी बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने 19 मार्च, 2021 की नीति के सब-क्लॉज 3बी को बदलते हुए नए मानक लागू किए हैं। पहले कृषि ज़ोन में उद्योगों के लिए न्यूनतम 33 फीट चौड़ी सड़क अनिवार्य थी, जिसके कारण कई प्रोजेक्ट काग़ज़ों में ही अटक जाते थे। लेकिन नई व्यवस्था के तहत 20 फीट चौड़ी मौजूदा गांव लिंक रोड, या 33 फीट राजस्व/स्व-निर्मित पंचायत रास्ता को भी उद्योग लगाने के लिए वैध अप्रोच माना जाएगा। यह बदलाव उन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बड़ा अवसर है, जहां चौड़ी सड़कें उपलब्ध नहीं थीं। हाईवे कनेक्टिविटी वाले उद्योगों को भी बड़ा फायदा नई पॉलिसी में उन निवेशकों को भी राहत मिली है जिनकी साइटें नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे या शेड्यूल रोड से सीधी जुड़ी हैं। ऐसे मामलों में अब एक्सेस परमिशन मिलते ही सीएलयू की मंजूरी मिल सकेगी। इससे हाईवे किनारे औद्योगिक बेल्ट्स को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सभी विभागों को भेजे नये आदेश नए आदेश की प्रति उद्योग विभाग, अर्बन लोकल बॉडीज़ और इंडस्ट्रीज़ एंड कॉमर्स विभाग को भेज दी गई है, ताकि इसे जमीनी स्तर पर तुरंत लागू कराया जा सके। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ की भावना के अनुरूप है, जहां उद्योगों पर अनावश्यक शर्तें कम कर निवेश का माहौल तैयार किया जा रहा है। आगामी वर्षों में ग्रामीण हरियाणा में रोजगार, ढांचागत विकास और छोटी औद्योगिक इकाइयों की संख्या में तेजी आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। हरियाणा में मिक्सड लैंड यूज के नियम बदले हरियाणा सरकार ने राज्य के सभी डेवलपमेंट प्लानों में लागू मिक्सड लैंड यूज (एमएलयू) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब मिक्सड लैंड यूज में कौन-सी गतिविधि बिल्कुल भी नहीं चलेगी। इसके लिए एक 12 बिंदुओं की प्रतिबंधित सूची जारी की गई है। नए नियम के बाद जिन गतिविधियों का नाम इस सूची में नहीं है, वे सभी मिक्सड लैंड यूज जोन में अनुमति योग्य मानी जाएंगी। यह आदेश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की तरफ से जारी किया गया है। आदेश गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत और हिसार मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटीज सहित सभी संबंधित विभागों को भेजा गया है। पहले मिक्सड लैंड यूज को लेकर अक्सर यह उलझन रहती थी कि कौन-सा व्यवसाय या उपयोग इस ज़ोन में आते हैं और कौन-सा नहीं।   कई बार आवेदन महीनों तक अटके रहते थे। अब सरकार ने इस समस्या को खत्म करते हुए साफ निर्देश दिए हैं कि प्रतिबंधित सूची में जो गतिविधियां हैं, वे नहीं चलेंगी। बाकी सब नियमों के अनुसार मान्य रहेंगी। इससे विभागों के बीच होने वाली अस्पष्टता खत्म होगी और डेवलपर्स व व्यवसायियों को मंजूरी लेने में आसानी होगी। इन 12 गतिविधियों पर पूरी तरह रोक सरकार ने जिन उपयोगों को मिक्सड लैंड यूज जोन में पूरी तरह प्रतिबंधित किया है, उनमें हैवी इंडस्ट्रीज़, कचरा डंपिंग और लैंडफिल साइट्स, केमिकल और पेट्रोकेमिकल प्लांट्स, न्यूक्लियर पावर से जुड़ी इंस्टॉलेशन, स्लॉटर हाउस और टैनरी, डेयरियां, पोल्ट्री और पिगरी यूनिट्स, ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, माइनिंग व क्वारिंग गतिविधियां, कब्रिस्तान, श्मशान भूमि, फार्महाउस तथा प्रदूषणकारी या हानिकारक गतिविधियां पर पाबंदी लगाई है। फार्म हाउस को इस जोन में पहली बार बैन किया गया है। साथ ही, उन सभी गतिविधियों पर रोक रहेगी, जिसे सरकार आगे सार्वजनिक हित में प्रतिबंधित घोषित करे। सभी मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटीज को निर्देश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की ओर से प्रदेश की पांचों मेट्रोपोलिटन डेवलेपमेंट अथॉरिटीज को इस संदर्भ में निर्देश जारी किए हैं। इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत व हिसार अथॉरिटी शामिल हैं। अथॉरिटीज को इन नियमों को तुरंत प्रभाव से लागू करने के लिए कहा गया है। इन सभी प्राधिकरणों को अपने-अपने डेवलपमेंट प्लानों में नई सूची के अनुसार संशोधन करने होंगे। आवेदन की प्रक्रिया होगी आसान नया नियम लागू होने के बाद मिक्सड लैंड यूज से जुड़े आवेदन पहले की तुलना में जल्दी निपटेंगे। जिन गतिविधियों पर प्रतिबंध नहीं है, उनके लिए विभाग को अलग से व्याख्या देने या स्पष्टीकरण मांगने की जरूरत नहीं रहेगी। इससे निवेशकों को स्पष्टता मिलेगी, डेवलपमेंट की गति बढ़ेगी और अनियमित उपयोग पर रोक लगेगी। सरकार का मानना है कि इससे योजनाबद्ध शहरी विकास को मजबूती मिलेगी और शहरों में असंगत या प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को जड़ से रोका जा सकेगा।

पंजाब के किसानों का दिल्ली मार्च शुरू, शंभू बॉर्डर बंद—हरियाणा में ट्रैफिक रूट बदलें

अंबाला  पंजाब के कुछ संगठनों ने आज दिल्ली कूच की घोषणा की है। इसके मद्देनजर हरियाणा पुलिस ने दिल्ली रूट के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी है। यह एडवाइजरी सुबह 5 बजे से प्रभावी हो गई है। पुलिस ने यात्रियों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने और निर्देशों का पालन करने की अपील की है। दिल्ली से अंबाला तक यातायात सामान्य एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि दिल्ली से अंबाला तक आने-जाने वाले मार्ग पर किसी प्रकार का व्यवधान नहीं रहेगा। इस रूट पर यात्रियों को यात्रा में किसी बड़ी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।   शंभू बॉर्डर रहेगा बंद अंबाला से पटियाला की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी जारी करते हुए पुलिस ने बताया कि शंभू बॉर्डर पूर्णतः बंद रहेगा। इस कारण पटियाला दिशा में यातायात पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। इन वैकल्पिक मार्गों से यात्रा करें शाहाबाद → साहा → पंचकूला → चंडीगढ़ मार्ग अंबाला → ललड़ू → जीरकपुर → राजपुरा मार्ग पुलिस सहायता 24×7 उपलब्ध किसी भी आपात स्थिति या ट्रैफिक संबंधी समस्या में यात्री 112 पर कॉल कर सकते हैं। पुलिस ने कहा है कि उनकी टीमें लगातार तैनात हैं और हर स्थिति में सहायता के लिए तैयार हैं।

जेल से मैदान तक अनंत सिंह का दबदबा, मोकामा में 28 हजार वोटों की ऐतिहासिक जीत

मोकामा  बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों में मोकामा सीट से एक बार फिर अनंत सिंह ने मैदान मार लिया है. उन्होंने महागठबंधन की प्रत्याशी और सूरजभान की पत्नी वीणा देवी को 28206 वोटों से चुनाव हरा दिया है. अनंत सिंह को कुल 91406 वो मिले जबकि वीणा देवी को 63210 वोटों से संतोष करना पड़ा और वो दूसरे नंबर पर रहीं. मोकामा में 26 राउंड की गिनती खत्म, अनंत सिंह ने 28206 वोटों की बनाई निर्णायक बढ़त, वीणा देवी को मिले 63210 वोट  22वें राउंड की गिनती के बाद मोकामा से अनंत सिंह 22988 वोटों से आगे, अब तक मिले कुल 82787 वोट, सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को अब तक मिले 59799 वोट – मोकामा से अनंत सिंह 19287 वोटों से निकले आगे, 18वें राउंड की गिनती के बाद अब तक मिले 68132 वोट, वीणा देवी को 48845 वोट – मोकामा से अनंत सिंह ने 14480 वोटों से बनाई बढ़त, अब तक मिले 45386 वोट, वीणा देवी को अब तक 30906 वोट – मोकामा से अनंत सिंह ने बनाई 9665 वोटों की बढ़त, वीणा देवी पिछड़ीं, अनंत सिंह को अब तक मिले 32552 वोट – अनंत सिंह के पटना आवास पर जश्न, शुरू हो गई दावत, ढोल नगाड़ों पर नाच रहे समर्थक – अनंत सिंह ने मोकामा से बनाई बड़ी लीड, अब तक 15034 वोट आए, वीणा देवी के खिलाफ 2031 वोटों की बनाई बढ़त – अनंतमय होता दिख रहा मोकामा, 4524 से ज्यादा वोटों से निकले आगे – जेल में बंद अनंत सिंह की मोकामा में लगातार बढ़त जारी – मोकामा सीट पर राजेश कुमार रत्नाकर पिछड़े – मोकामा में शुरुआती रुझानों में अनंत सिंह निकले आगे – मोकामा में वोटों की गिनती शुरू, गिने जा रहे हैं पोस्टल बैलेट्स इस सीट का नतीजा न सिर्फ मोकामा बल्कि पूरे पटना ज़िले की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है. फिलहाल सबकी नज़रें इसी मुकाबले पर है जहां बाहुबल, प्रभाव और जनसमर्थन तीनों की सीधी टक्कर दिख रही है. एक ओर हैं बाहुबली नेता अनंत सिंह हैं जो अपने क्षेत्र में मजबूत जनाधार और दबदबे के लिए जाने जाते हैं, वहीं उनके सामने हैं पूर्व सांसद और बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी, जिन्हें महागठबंधन का समर्थन प्राप्त है. मोकामा की इस सीट पर परंपरागत रूप से बाहुबल और प्रभावशाली व्यक्तित्व राजनीति पर हावी रहे हैं, और इस बार भी मुकाबला उसी अंदाज़ में तेज़ हो चुका है. अनंत सिंह जेल में है लेकिन दोनों उम्मीदवारों ने अपने-अपने गढ़ में पूरी ताक़त झोंक दी है . दोनों ही प्रत्याशी भूमिहार समाज से आते हैं.

जानिए क्यों बिहार में तेजस्वी यादव की हुई दुर्गति: 5 अहम वजहें

पटना     बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों करीब करीब आ चुके हैं. बिहार की जनता ने तेजस्वी यादव और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को बड़ा झटका दिया है. 14 नवंबर को सुबह 10.45 पर जो रुझान दिख रहा है उसमे महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-वाम) 54 सीटों पर सिमटता दिख रहा, जबकि एनडीए (बीजेपी-जेडीयू) 185 सीटों पर मजबूत दिख रही है. ताजा रुझानों में तेजस्‍वी खुद अपनी सीट पर पीछे चल रहे हैं. जाहिर है कि बिहार की जनता ने महागठबंधन और तेजस्वी यादव को हराया नहीं है बल्कि एक तरह से नकार दिया है. आखिर जो पार्टी और जो नेता चुनाव के दिन तक बराबरी का टक्कर देने का दावा कर रहा था वो इस तरह कैसे धराशाई हो गया. आइये देखते हैं इसके पीछे क्या कारण रहे? 52 यादव उम्मीदवारों को टिकट देना गलत साबित हुआ इस हार की एक प्रमुख वजह आरजेडी द्वारा 52 यादव उम्मीदवारों को टिकट देना साबित हुआ. यह फैसला न केवल जातिवादी छवि को मजबूत कर गया, बल्कि गैर-यादव वोट बैंक को दूर भगा दिया. बिहार की राजनीति जाति पर टिकी है, जहां यादव (14% आबादी) आरजेडी का कोर वोट बैंक है, लेकिन 52 टिकट यादवों को देने से पब्लिक को यादव राज की गंध आने लगी . जिसके चलते अगड़े और अति पिछड़े महागठबंधन से दूर हो गए. आरजेडी ने कुल 144 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, जिनमें 52 यादव थे जो कुल प्रत्याशियों का लगभग 36% था.  यह संख्या 2020 के 40 से बढ़ी, जो तेजस्वी की 'यादव एकीकरण' रणनीति का हिस्सा थी. महागठबंधन में सीट शेयरिंग के तहत आरजेडी को 143 सीटें मिलीं थीं. हो सकता है कि आरजेडी को यादव सीटों पर अच्छी सफलता मिल जाए पर ओवरऑल यह नुकसान कर गया.  बीजेपी ने प्रचार में 'आरजेडी का यादव राज' का नैरेटिव चलाया, जो शहरी और मध्यम वर्ग में गूंजा. तेजस्वी ने यदि 30-35 यादव टिकटों तक सीमित रखा होता तो कुर्मी-कोइरी वोटों का हिस्सा 10-15% बढ़ सकता था.जैसा अखिलेश यादव ने 2024 के लोकसभा चुनावों में किया था. उन्होंने केवल 5 यादव प्रत्याशियो को मैदान में उतारा. बाकी पिछड़ी जातियों और सवर्णों को वोट देकर उन्हें अपना बना लिया. सहयोगी पार्टियों को भाव न देना तेजस्वी यादव की रणनीति में सबसे बड़ी चूक अपने सहयोगियों कांग्रेस, वाम दलों और छोटी पार्टियों के साथ 'बराबर भाव' न रखना साबित हुआ. सीट शेयरिंग विवादों ने गठबंधन को कमजोर किया, और तेजस्वी के 'आरजेडी सेंट्रिक' अप्रोच ने विपक्ष को बांट दिया. यह न केवल वोट ट्रांसफर फेल कर गया, बल्कि एनडीए को 'एकजुट' दिखाने का मौका दिया.  कांग्रेस ने 'गारंटी' मेनिफेस्टो पर जोर दिया, लेकिन तेजस्वी ने 'नौकरी देंगे' को प्राथमिकता दी, जो सहयोगियों को चुभा. इतना ही नहीं तेजस्वी ने महागठबंधन के घोषणापत्र का नाम भी तेजस्वी प्रण रखकर सबको पीछे कर दिया. तेजस्वी ने प्रचार में सहयोगियों को बैकसीट पर रखा. रैलियों में राहुल गांधी की तस्वीरें कम, तेजस्वी की ज्यादा दिखीं.  तेजस्वी का अपने वादों का ब्लू प्रिंट नहीं दे पाना तेजस्वी की सबसे बड़ी चूक यह रही कि वो वादे तो बहुत कर दिए पर उसका ठोस ब्लूप्रिंट नहीं दे पाए. हर घर को एक सरकारी नौकरी, पेंशन, महिला सशक्तिकरण और शराबबंदी की समीक्षा जैसे वादे तो किए, लेकिन फंडिंग, कार्यान्वयन योजना या समयबद्ध ब्लूप्रिंट के अभाव ने वोटरों में अविश्वास पैदा किया. हर घर को सरकारी नौकरी पर वो खुद जवाब नहीं दे सके. हर रोज कहते रहे कि बस अगले 2 दिन में ब्लू प्रिंट आ जाएगा. पर चुनाव बीत जाने के बाद भी वो दिन नहीं आया. महागठबंधन का मुस्लिमपरस्त छवि बन जाना महागठबंधन की 'मुस्लिमपरस्त' छवि तेजस्वी यादव की हार का बड़ा कारण बनी. मुस्लिम बहुल सीटों पर तो आरजेडी या महागठबंधन के अन्य सहयोगियों की जीत संभव होगी पर पूरे प्रदेश में इसका नुकसान हुआ. खुद यादव जाति के वोट कई जगहों पर आरजेडी को नहीं मिले. सत्ता मिलने पर बिहार में वक्फ बिल नहीं लागू करने वादा जिस तरह तेजस्वी ने किया वह बहुत से यादव बंधुओं को भी पसंद नहीं आया. बीजेपी ने लालू यादव के संसद में वक्फ बिल के अत्याचार के खिलाफ दिए भाषण को खूब वायरल कराया जिसका फायदा उसे मिला. अपने पिता लालू प्रसाद को लेकर कन्फ्यूज रहे तेजस्वी   तेजस्वी ने लालू की विरासत को अपनाया, लेकिन पोस्टर्स में उनकी तस्वीर को छोटा कर 'नई पीढ़ी' को क्या दिखाने की कोशिश की यह समझ में नहीं आया. यह दोहरी नीति उल्टी पड़ गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोपालगंज रैली में कहा, तेजस्वी लालू के पाप छिपा रहे हैं.  तेजस्वी ने लालू के सामाजिक न्याय एजेंडे को अपनाया, लेकिन 'जंगल राज' छवि से डरकर दूरी बनाई. पोस्टर्स में लालू को कोने में ठूंसना उनका अपमान ज्यादा था.  

कांग्रेस से दोस्ती का ‘रिटर्न गिफ्ट’? तेजस्वी यादव को भी मिला वही तगड़ा नुकसान

पटना  ईंट बांधकर तैरना जितना कठिन है, उतना ही मुश्किल किसी दल के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ना हो चुका है। यह बात 2017 में यूपी में अखिलेश यादव की करारी हार ने साबित की थी और वही स्थिति अब बिहार में हई है। यहां आरजेडी से लड़कर 62 सीटें कांग्रेस ने ली थीं और जब चुनाव नतीजे आए तो अब तक 6 सीटों पर ही कांग्रेस की बढ़त है। इस तरह उसका स्ट्राइक रेट 10 फीसदी से भी कम है। 2017 में यूपी चुनाव में 100 सीटों पर कांग्रेस ने चुनाव लड़ा था और 7 पर ही जीती थी। इस नतीजे को लेकर माना गया था कि कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ना सपा को भारी पड़ा।   फिर उन्होंने 2017 में अपनी रणनीति में बदलाव किया और सपा अलग होकर चुनाव लड़ी थी। लेकिन तेजस्वी यादव ने कोई सबक नहीं लिया और 2017 वाली अखिलेश यादव की गलती बिहार में दोहरा दी। नतीजा सामने है। दरअसल 2014 के बाद से ही लगातार ऐसा देखा जा रहा है कि जब भी कांग्रेस सामने होती है तो भाजपा का प्रदर्शन शानदार होता है। इसके अलावा क्षेत्रीय दलों के मुकाबले भी कांग्रेस नहीं टिक पाती है। ऐसे में कांग्रेस को ज्यादा सीटें देना आरजेडी के लिए घातक साबित हुआ है। इसके अलावा समन्वय स्थापित ना हो पाने का नुकसान भी सीधे तौर पर आरजेडी को हुआ है। कांग्रेस को भाकपा-माले ने दिखाया आईना, शानदार स्ट्राइक रेट दिलचस्प बात यह है कि महज 20 सीटों पर लड़ने वाले वामपंथी दल भाकपा-माले की 7 सीटों पर बढ़त है। ऐसे में कांग्रेस ने अपनी हार से महागठबंधन की भी हार की पटकथा लिख दी है। वहीं एनडीए की बात करें तो अमित शाह लगातार पटना में कैंप करते रहे। तीन दिन तो वह निकले ही नहीं और लगातार सहयोगी दलों के साथ मिलकर मंथन करते रहे। इसका सीधा फायदा एनडीए को मिला है, जबकि महागठबंधन को करारा झटका लगा। यही नहीं प्रचार में भी एनडीए आगे रहा। खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने कैंपेन को लीड किया और अमित शाह ने भी 36 रैलियां कीं तो वहीं राजनाथ सिंह भी 20 रैलियों में नजर आए। भाजपा के लिए योगी समेत प्रचार में उतरे थे कई सीएम यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ हों या फिर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भाजपा ने पूरी फौज ही प्रचार में उतारे रखी। इसके अलावा जेडीयू, लोजपा जैसे दलों के नेता भी कंधे से कंधा मिलाकर प्रचार करते रहे। इसके उलट महागठबंधन में ना तो सहमति बनी और ना ही प्रचार में समन्वय नजर आया।  

लुधियाना में धमाका, बुरी तरह झुलसे लोग, मची अफरा-तफरी

लुधियाना(खुराना) लुधियाना के औद्योगिक क्षेत्र नीची मंगली में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक गैस सिलेंडर की पाइप लीक होने से अचानक भीषण आग भड़क उठी। हादसा इतना तेज था कि वहां मौजूद तीन लोग आग की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए। घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच जारी है। मौके पर फायर ब्रिगेड और पुलिस टीम पहुंच चुकी है और हालात को नियंत्रण में करने के प्रयास किए जा रहे हैं। 

वीरेंद्र तोमर को पांच दिन की रिमांड के बाद कोर्ट में पेश किया जाएगा, पुलिस ने जेल भेजने की अर्जी तैयार की

रायपुर पांच महीने की फरारी के बाद ग्वालियर में गिरफ्तार हिस्ट्रीशीटर वीरेन्द्र सिंह तोमर से पुलिस की पूछताछ पूरी हो गई है. पुलिस शुक्रवार को आरोपी को कोर्ट में पेश करगी और न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आग्रह किया जाएगा. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दर्ज दो केस आर्म्स एक्ट और सूदखोरी, ब्लैकमेल और वसूली केस में पूछताछ की है. घर के लॉकर में मिले हथियार को आरोपी ने अपने सुरक्षा गार्ड का बताया है जबकि क्षत्रिय करणी सेना से जुड़े लोगों द्वारा फरारी के दौरान मदद करने की जानकारी उसने दी है. दूसरी तरफ हिस्ट्रीशीटर रोहित तोमर समेत अन्य सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज कर दी गई है. पीड़ित अब भी डरे हुए हैं इसलिए नहीं कराया आमना-सामना पुलिस ने पूछताछ के दौरान रिपोर्टकर्ता पीड़ितों और आरोपी का आमना-सामना नहीं कराया. बल्कि जब्त एग्रीमेंट, चेक और प्रॉपर्टी के एक-एक दस्तावेजों को लेकर आरोपी से पूछताछ की. पुलिस ने दिए गए कर्ज की राशि, तय ब्याज और वसूली गई राशि से संबंधित दस्तावेजों की भी जानकारी ली है. ताकि उन्हें कोर्ट में पेश किया जा सके. पुलिस का दावा है कि पीड़ित लोग हिस्ट्रीशीटर वीरेन्द्र सिंह तोमर और रोहित सिंह तोमर की फरारी के दौरान भी भयभीत रहे हैं. अभी रोहित सिंह तोमर फरार है. उसके खिलाफ चार मामले दर्ज हैं. रोहित तोमर और केस में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज की गई है. पुलिस वालों के घर घुसकर आंदोलन की चेतावनी क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है, जिसमें हिस्ट्रीशीटर वीरेन्द्र सिंह तोमर का जुलूस निकालने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई को गलत बताया गया है. राष्ट्रीय अध्यक्ष ने छत्तीसगढ़ आकर रायपुर में आंदोलन करने की चेतावनी दी है. साथ ही कहा है कि जिन पुलिस अधिकारियों ने गलत किया, उनके घर में घुसकर आंदोलन किया जाएगा.

प्रदेश में अब चैनमैन भी बन सकेंगे लेखपाल, नई नियमावली को मंजूरी

वृद्धावस्था पेंशन के लिए लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं, विभाग खुद करेगा सम्पर्क फैमिली आईडी ‘एक परिवार-एक पहचान’ प्रणाली से पात्र लाभार्थियों का होगा स्वतः चिन्हीकरण 10 वर्ष तक के किरायेदारी पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में बड़ी राहत बागपत में पीपीपी मोड पर बनेगा मेडिकल कॉलेज, निःशुल्क मिलेगी 5.07 हेक्टेयर भूमि अब चैनमैन भी बन सकेंगे लेखपाल, नई नियमावली को मंजूरी  प्रदेश दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान कानून में बड़ा संशोधन, अब पूरे प्रदेश में लागू होगा अधिनियम लखनऊ उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने राज्य में वृद्धावस्था पेंशन को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया है। अब पात्र वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन के लिए अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। समाज कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि फैमिली आईडी ‘एक परिवार-एक पहचान’ प्रणाली से पात्र लाभार्थियों का स्वतः चिन्हीकरण होगा और उनकी सहमति मिलने पर पेंशन सीधे स्वीकृत की जाएगी। वर्तमान में 67.50 लाख वरिष्ठ नागरिक इस योजना का लाभ ले रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जो प्रक्रिया पूरी न कर पाने के कारण पेंशन से बाहर रह जाते हैं। नया फैसला इसी समस्या को हल करने पर केंद्रित है। नई व्यवस्था में फैमिली आईडी के आधार पर उन नागरिकों की सूची स्वतः तैयार होगी, जिनकी आयु अगले 90 दिनों में 60 वर्ष होने जा रही है। यह सूची एपीआई के माध्यम से समाज कल्याण विभाग के पेंशन पोर्टल पर भेजी जाएगी। विभाग सबसे पहले एसएमएस, व्हाट्सऐप और फोन कॉल जैसे डिजिटल माध्यमों से पात्र नागरिकों से सहमति लेगा। जिनकी सहमति डिजिटल रूप से नहीं मिलेगी, उनसे ग्राम पंचायत सहायक, कॉमन सर्विस सेंटर या विभागीय कर्मचारी भौतिक रूप से संपर्क करेंगे। दोनों स्तरों पर सहमति न मिलने पर ऐसे नाम प्रक्रिया से हटा दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सहमति मिलने के बाद योजना अधिकारी 15 दिनों के भीतर डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से पेंशन स्वीकृत करेंगे और स्वीकृति पत्र लाभार्थी को डाक से भेजा जाएगा। भुगतान सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खाते में किया जाएगा और हर किस्त की जानकारी एसएमएस द्वारा उपलब्ध होगी। सरकार एक मोबाइल ऐप भी उपलब्ध कराएगी, जिसमें लाभार्थी पासबुक की तरह अपने सभी भुगतान देख सकेंगे। 10 वर्ष तक के किरायेदारी पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में बड़ी राहत  प्रदेश सरकार ने राज्य में किरायेदारी को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए भी बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने 10 वर्ष तक की अवधि के किरायानामा विलेखों पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट मंजूर कर दी है। इसका उद्देश्य यह है कि भवन स्वामी और किरायेदार दोनों किरायानामा लिखित रूप में तैयार करें और रजिस्ट्री कराएं, जिससे विवाद कम हों और किरायेदारी विनियमन अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि वर्तमान नियमों के अनुसार एक वर्ष से अधिक अवधि की किरायेदारी विलेख की रजिस्ट्री अनिवार्य है, लेकिन आमतौर पर अधिकांश किरायानामे मौखिक होते हैं या यदि लिखित होते भी हैं तो उनकी रजिस्ट्री नहीं कराई जाती। ऐसे मामलों का पता आमतौर पर जीएसटी विभाग और बिजली विभाग जैसी एजेंसियों की पत्रावलियों की जांच में चलता है और बाद में कमी स्टाम्प शुल्क की वसूली की कार्रवाई करनी पड़ती है। यह भी अनिवार्य है कि किरायेदारी विलेख की रजिस्ट्री हो या न हो, उस पर सही स्टाम्प शुल्क हर हाल में जमा होना चाहिए। सरकार का मानना है कि यदि शुल्क अधिक होता है तो लोग विलेख लिखने और रजिस्ट्री कराने से बचते हैं। इसी वजह से मानक किरायेदारी विलेख को बढ़ावा देने और 10 वर्ष तक की अवधि के रेंट एग्रीमेंट को औपचारिक बनाने के लिए शुल्क में व्यापक छूट देने की जरूरत महसूस की गई। इस छूट प्रणाली के तहत किरायेदारी विलेख पर अधिकतम स्टाम्प शुल्क और अधिकतम रजिस्ट्रेशन फीस अब निश्चित राशि से अधिक नहीं ली जाएगी। साथ ही औसत वार्षिक किराया तय करते समय अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये रखी गई है। टोल संबंधी पट्टे और खनन पट्टों को छूट से बाहर रखा गया है ताकि राजस्व हानि न हो। स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने बताया कि  नई व्यवस्था के अनुसार अधिकतम स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्री शुल्क की सीमा तय कर दी गई है। यह सीमा किरायेदारी की अवधि और औसत वार्षिक किराए के आधार पर लागू होगी। इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा क्योंकि अब किरायेदारी विलेख पर भारी स्टाम्प शुल्क भरने की बाध्यता नहीं रहेगी और लोग अधिक सहजता से रजिस्ट्री करा सकेंगे। 10 वर्ष तक के किरायेदारी पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में बड़ी राहत •    औसत वार्षिक किराया ₹ 2,00,000 रुपये तक:- 01 वर्ष तक 500 रुपये, 1 से 5 वर्ष 1500 रुपये, 5 से 10 वर्ष 2000 रुपये •    औसत वार्षिक किराया ₹ 2,00,001 से ₹ 6,00,000 रुपये 01 वर्ष तक 1500 रुपये, 1 से 5 वर्ष 4500 रुपये, 5 से 10 वर्ष 7500 रुपये •    औसत वार्षिक किराया ₹ 6,00,001 से 10,00,000 रुपये 01 वर्ष तक 2500 रुपये, 1 से 5 वर्ष 6000 रुपये, 5 से 10 वर्ष 10000 रुपये   अब चैनमैन भी बन सकेंगे लेखपाल, नई नियमावली को मंजूरी   प्रदेश कैबिनेट ने लेखपाल सेवा नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए चैनमैन के लिए लेखपाल पद पर पदोन्नति का मार्ग खोल दिया है। वित्त मंत्री सुरेशा खन्ना ने बताया कि पंचम संशोधन नियमावली 2025 के तहत अब लेखपाल के कुल पदों में से दो प्रतिशत पद योग्य चैनमैन को पदोन्नति के आधार पर दिए जा सकेंगे। यह पहली बार है जब चैनमैन को सीधी भर्ती व्यवस्था से बाहर निकलकर लेखपाल पद तक प्रमोशन का अवसर मिलेगा। वर्तमान में लेखपाल के सभी पदों पर भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से की जाती है। प्रदेश में कुल 30837 स्वीकृत पदों में से 21897 पर तैनाती है, जबकि 8940 पद रिक्त हैं। नई व्यवस्था के तहत वे चैनमैन पदोन्नति के लिए पात्र होंगे जो मौलिक रूप से इसी पद पर नियुक्त हों, भर्ती वर्ष के पहले दिन तक छह वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हों और इंटरमीडिएट या समकक्ष परीक्षा पास कर चुके हों। इन पात्र चैनमैन का चयन चयन समिति की सिफारिश पर किया जाएगा। सरकार का कहना है कि अनुभवी चैनमैन को … Read more

योगी आदित्यनाथ ने महिला क्रिकेट टीम को विश्वकप विजय पर सराहा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम की वनडे विश्वकप जीत पर बधाई लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में भारतीय महिला क्रिकेट टीम को वनडे विश्वकप में मिली ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी गई। बैठक में टीम के जज़्बे, अनुशासन और शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा गया कि खिलाड़ियों ने देश का गौरव बढ़ाया है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि यह जीत न केवल भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण है बल्कि देश की युवा बेटियों के लिए प्रेरणा का भी स्रोत है। दिल्ली में हाल की आतंकी घटना की निंदा और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना प्रदेश कैबिनेट ने दिल्ली में हाल ही में हुई आतंकी घटना की कड़ी निंदा की है। बैठक में कहा गया कि यह घटना देश की शांति और सुरक्षा पर हमला है। मुख्यमंत्री और कैबिनेट ने हमले में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन संबंधी जानकारी अब व्हाट्सएप पर

उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की पहल – व्हाट्सएप चैटबॉट सेवा से अब परिवहन सेवाएं होंगी और आसान उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन संबंधी जानकारी अब व्हाट्सएप पर उत्तर प्रदेश में परिवहन विभाग की डिजिटल पहल: घर बैठे पाएँ सभी जरूरी सेवाएँ जनसुविधा के लिए तकनीक का नया उपयोग – परिवहन विभाग की स्मार्ट सेवा लखनऊ   मुख्यमंत्री के कुशल मार्गदर्शन में प्रदेश के आम नागरिकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, परिवहन विभाग ने एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल की है। विभाग ने व्हाट्सएप आधारित चैटबॉट सेवा (मोबाइल नंबर: 8005441222) के माध्यम से अब लोग घर बैठे ही परिवहन संबंधी अनेक सेवाओं एवं सूचनाओं का लाभ सहजता और पारदर्शिता के साथ प्राप्त कर सकते हैं। इसका उद्देश्य नागरिकों को सरल, सुलभ एवं पारदर्शी सेवाएं प्रदान करना है। इस चैटबॉट के माध्यम से उपयोगकर्ता अपने मोबाइल पर ही ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, कर भुगतान, फिटनेस प्रमाणपत्र, परमिट, और अन्य सेवाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अब नागरिकों को किसी भी परिवहन कार्यालय में अनावश्यक रूप से जाने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल मोबाइल नंबर 8005441222 को अपने व्हाट्सएप में सेव करें और “Hi” या “नमस्ते” लिखकर संदेश भेजें। चैटबॉट स्वतः ही आगे की प्रक्रिया में सहायता करेगा और संबंधित जानकारी कुछ ही क्षणों में उपलब्ध करा देगा। परिवहन विभाग ने बताया कि यह सेवा 24×7 उपलब्ध रहेगी और उपयोगकर्ताओं को डिजिटल माध्यम से तेज, सुरक्षित एवं विश्वसनीय जानकारी प्रदान करेगी। यह कदम ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान के अनुरूप नागरिक सेवाओं को तकनीक के माध्यम से अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे इस नई व्हाट्सएप चैटबॉट सेवा का अधिक से अधिक उपयोग करें और अपने अनुभवों से विभाग को अवगत कराएं ताकि इस सेवा को और बेहतर बनाया जा सके।