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प्रेरणादायक देहदान: सरोज देवी की देह से चिकित्सा छात्रों को मिलेगा ज्ञान

डॉक्टर बनने वाले छात्र सीखेंगे सरोज देवी की देह से  सरोज देवी के देहदान को सबने प्रेरणादायक कहा देहदान को सभी ने अत्यंत प्रेरक बताया कांकेर  शहर के बरदेभाठा निवासी सरोज देवी शर्मा (82) और पत्रकार स्व. बंशीलाल शर्मा की धर्मपत्नी का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को निधन हो गया। के अनुरूप परिजनों ने उनकी इच्छा सरोज देवी शर्मा उनका पार्थिव शरीर कांकेर मेडिकल कॉलेज में अध्ययन के लिए दान किया।    साल 2020 में खुले कांकेर मेडिकल कॉलेज के इतिहास में यह तीसरा देहदान है। सरोज देवी शर्मा समेत अब तक तीन लोगों के पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज को सौंपे जा चुके हैं। मेडिकल से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा मृत देह मेडिकल कॉलेज के छात्रों के लिए साइलेंट टीचर की तरह होती हैं। वे इसी से शारीरिक अंगों पर प्रैक्टिकल कर दूसरों को जीवन देना सीखते हैं। स्वर्गीय सरोज देवी शर्मा का निधन 11 नवंबर को 1.45 बजे हुआ। परिजनों ने उनकी इच्छा अनुरूप आपसी सहमति से सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन करते अपनी माता के पार्थिव शरीर को मेडिकल कॉलेज को दान करने निर्णय लिया था। परिजनों ने कुछ दिन पहले ही फॉर्म भरा था। उनके पुत्र और वरिष्ठ पत्रकार राजेश शर्मा ने बताया हमारी माता के स्वभाव में ही था कि वे हमेशा लोगों की मदद करने आगे रहती थीं। उनकी इच्छा भी यही थी कि वे मृत्यु के बाद भी किसी के काम आ सकें। उनकी इसी भावना को देखते हुए पूरे परिवार ने आपस में सलाह मशवरा कर उनका पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज कांकेर के एनाटॉमी विभाग को मेडिकल अनुसंधान के लिए दान करने का फैसला लिया। विदित हो कि सरोज देवी शर्मा धार्मिक प्रवृत्ति की थीं और सामाजिक कामों में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेती थीं। उनके पति स्व. बंशीलाल शर्मा बस्तर के वरिष्ठ पत्रकार थे। देशबंधु और दैनिक भास्कर जैसे संस्थाओं में अपनी सेवाएं दे चुके थे। परिवार से और भी भर चुके हैं देहदान का फॉर्म इस परिवार से सरोजदेवी शर्मा के देवर बिलासपुर निवासी वरिष्ठ पत्रकार नथमल शर्मा पहले ही देहदान करने फॉर्म भर चुके हैं। उनका मानना है इंसान को जीवित रहते लोगों के काम आना ही चाहिए और मरणोपरांत भी काम आते रहना चाहिए। देहदान एक महादान है विधायक आशाराम नेताम ने कहा एक अच्छी सोच होने के साथ ही यह प्रेरणादायक भी है। मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे छात्रों को अध्ययन के लिए मृत देह की जरूरत होती है। मृत शरीर का मेडिकल की पढ़ाई में एक बड़ा योगदान होना होता है। देहदान एक महादान है। देहदान एक सामाजिक उत्तरदायित्व मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. यास्मिन खान ने कहा कि देहदान सामाजिक उत्तरदायित्व भी है, जो चिकित्सा शिक्षा और शोध को आगे बढ़ाने में मदद करता है। समाज में अच्छे डॉक्टर देने के लिए देहदान जरूरी मेडिकल कॉलेज में छात्रों की पढ़ाई व समाज के अच्छे डॉक्टर देने के लिए देहदान जरूरी है। छात्रों को अच्छे से पढ़ाई करने मृत देह के विकल्प में दूसरी कोई चीज नहीं है। उससे ही छात्र सीखते हैं। मृत देह छात्रों के लिए साइलेंट टीचर होती हैं। एनाटॉमी विभाग के प्रो. स्वयं आए देह लेने आज सवेरे राजेश शर्मा के निवास से अंतिम यात्रा प्रारम्भ हुई । बरदेभाटा चौक पर परिजनों एवं नगर के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में सरोज देवी का पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज को सौप दिया गया जिसे लेने एनाटॉमी विभाग के प्रो डा. विश्वास स्वयं अपनी टीम के साथ पहुंचे थे । तत्पश्चात् वहीं श्रद्धांजलि सभा हुई । जिसमें शिक्षा विद सुरेश चंद्र श्रीवास्तव ने शर्मा परिवार द्वारा इस देहदान के निर्णय को अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक बताया । इससे मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों को अध्ययन करने में मदद मिलेगी । तत्पश्चात् दो मिनट का मौन रख कर मृतात्मा को श्रद्धांजलि दी गई ।

स्पेशली ट्रेंड रेस्क्यू ग्रुप के साथ साथ प्रक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 10 जनपदों का पर्यवेक्षण भी करेंगे संयुक्त निदेशक

आपदा से सुरक्षा के लिए बड़ा कदम उठा रही योगी सरकार संयुक्त निदेशक अग्निशमन प्रक्षेत्र (वाराणसी जोन) की होगी नियुक्ति स्पेशली ट्रेंड रेस्क्यू ग्रुप के साथ साथ प्रक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 10 जनपदों का पर्यवेक्षण भी करेंगे संयुक्त निदेशक  आपात स्थिति को तुरंत काबू करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित रेस्क्यू ग्रुप तैयार किया जाएगा, फर्स्ट रिस्पांडर के तौर पर करेगा रेस्क्यू कार्य  ग्रुप के जरिए दैवीय आपदाओं, अग्निकांड, रासायनिक, जैविक, आपात स्थितियों और अन्य खतरों से निपटने के लिए मिलेगी फौरी मदद  सरकार ने यूपी अग्निशमन तथा आपात सेवा नियमावली 2024 के तहत इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक सहमति दे दी है  योगी सरकार के निर्णय से वाराणसी जोन के 10 जनपदों की सुरक्षा को मिलेगा नया आयाम  अभी तक वाराणसी में चीफ फायर ऑफिसर की देखरेख में चल रही व्यवस्था  वाराणसी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी काशी को विकास का मॉडल बनाने वाली योगी आदित्यनाथ सरकार आपदाओं से जनमानस को सुरक्षित रखने के लिए और बड़ा कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में अग्निशमन विभाग को आधुनिक रूप देने के निर्देश दिए थे। दैवीय आपदाओं, अग्निकांड, रासायनिक, जैविक व ऊंची इमारतों की आपात स्थितियों और अन्य खतरों से निपटने के लिए विशेष इकाइयों का गठन होगा। इसके साथ ही संयुक्त निदेशक अग्निशमन प्रक्षेत्र (वाराणसी जोन) की नियुक्ति होगी।  संयुक्त निदेशक स्पेशली ट्रेंड रेस्क्यू ग्रुप के साथ साथ प्रक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 10 जनपदों का पर्यवेक्षण भी करेंगे। वाराणसी जोन में किसी भी आपात स्थिति को तुरंत काबू करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित रेस्क्यू ग्रुप तैयार किया जाएगा, जो फर्स्ट रिस्पांडर के तौर पर रेस्क्यू कार्य करेगा। सरकार ने यूपी अग्निशमन तथा आपात सेवा नियमावली 2024 के तहत इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक सहमति दे दी है, जिससे वाराणसी जोन की सुरक्षा में नया आयाम जुड़ेगा। विशेष रेस्क्यू ग्रुप: फर्स्ट रिस्पांडर की मजबूत टीम प्रदेश में विकास केवल अवसंरचना तक सीमित नहीं, बल्कि नागरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के आधुनिक दृष्टिकोण से भी जुड़ा हुआ है। काशी जैसी प्राचीन नगर में,  जहाँ धार्मिक आयोजन और पर्यटक गतिविधियाँ पूरे वर्ष चलती हैं, ऐसे में यह रेस्क्यू ग्रुप शहर को आपात स्थितियों में अधिक सुरक्षित और सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्य अग्निशमन  अधिकारी आनंद सिंह राजपूत ने बताया कि वाराणसी में आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए संयुक्त निदेशक के नियंत्रण में विशेष रेस्क्यू ग्रुप गठित किया जाएगा। रेस्क्यू ग्रुप के सभी सदस्यों को आधुनिक उपकरणों और नवीन तकनीकों के साथ प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे वाराणसी सहित पूर्वांचल में किसी भी संकट का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके। यह ग्रुप फर्स्ट रिस्पांडर के तौर पर रेस्क्यू कार्य संभालेगा।  संयुक्त निदेशक अग्निशमन प्रक्षेत्र- वाराणसी, दस जनपदों की करेंगे निगरानी  संयुक्त निदेशक अग्निशमन प्रक्षेत्र- वाराणसी, दस जनपदों की निगरानी करेंगे। वे वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, आजमगढ़, मऊ, बलिया, मिर्जापुर, भदोही और सोनभद्र का प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण भी करेंगे। आपदा या आकस्मिक स्थितियों में रेस्क्यू दल तुरंत मौके पर पहुँच कर राहत, बचाव और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।  संयुक्त निदेशक के अधीन होगा संचालन अग्निशमन प्रक्षेत्र (वाराणसी जोन) के प्रभारी अधिकारी के रूप में संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी कार्य करेंगे, जो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के समकक्ष पद पर होंगे। उनके अधीन यह स्पेशली ट्रेंड रेस्क्यू ग्रुप कार्य करेगा। अभी तक यहां मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) के नेतृत्व में कार्य हो रहा है।  स्पेशली ट्रेंड रेस्क्यू ग्रुप के सदस्य का पदनाम और संख्या  अग्निशमन द्वितीय अधिकारी- 01 लीडिंग फायरमैन- 02  फायर सर्विस चालक- 02 फायरमैन- 16  कुक-01

अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र की अवधि 5 साल करने पर उद्यमियों को मिली बड़ी राहत

योगी सरकार का ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के क्षेत्र में बड़ा फैसला गैर-आवासीय भवनों की अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र (NOC) की वैधता को 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष किया गया अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र की अवधि 5 साल करने पर उद्यमियों को मिली बड़ी राहत  संवेदनशील हॉस्पिटल एवं हाई हैजार्ड इण्डस्ट्रियल भवनों पर पहले वाले नियम लागू उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा नियमावली को बनाया गया आसान नए प्रारूप में ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन और प्रारूप को किया गया छोटा अधिक तेजी और आसानी से ऑनलाइन आवेदन एवं फायर एन०ओ०सी० प्राप्त होगी निवेश को बढ़ावा मिलेगा,  रोजगार सृजन तथा नागरिक सुविधाओं में सुधार होगा  लखनऊ योगी सरकार ने उद्यमियों को राहत देने के लिए उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा नियमावली, 2024 को पहले से ज्यादा सरल बना दिया है। वर्तमान समय में अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र (NOC) विभिन्न प्रकार के भवनों के उपयोग के वर्गीकरण के आधार पर दिया जाता है। नेशनल बिल्डिंग कोड (एन०बी०सी०) के अनुसार भवनों को निम्न प्रकार में वर्गीकृत किया गया है- यह हैं रेजिडेंशियल टाइप ऑक्यूपेन्सी, एजुकेशनल टाइप ऑक्यूपेन्सी, इन्स्टीट्यूशनल टाइप ऑक्यूपेन्सी, असेम्बली टाइप ऑक्यूपेन्सी, बिजनेस टाइप ऑक्यूपेन्सी, मर्केन्टाइल टाइप ऑक्यूपेन्सी, इंस्ट्रियल टाइप ऑक्यूपेन्सी, स्टोरेज टाइप ऑक्यूपेन्सी और हैजार्डस टाइप ऑक्यूपेन्सी।  मौजूदा नियमों के अनुसार उपरोक्त भवनों के लिए वर्तमान समय में अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र की अवधि आवासीय भवनों (होटल से भिन्न) के लिये 5 वर्ष और गैर-आवासीय भवनों के लिये के लिये 3 वर्ष  है। वहीं होटलों, अस्पतालों और अत्यधिक संकट वाले औद्योगिक भवनों के लिये 1 वर्ष निर्धारित है। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा नियमावली, 2024 के प्रावधानों में बदलाव किया है। अत्यधिक संवेदनशील हॉस्पिटल (इन्स्टीट्यूशनल ऑक्यूपेन्सी) एवं हाई हैजार्ड इण्डस्ट्रियल भवनों को छोड़कर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए शेष समस्त भवनों भवनों/ऑक्यूपेंसी के अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्रों की वैधता 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष करने का फैसला किया गया है।  योगी सरकार के इन सुधारों से निवेशकों, उद्यमियों एवं आम नागरिकों को काफी लाभ मिलेगा। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस " की नीति के तहत किया गया है। इससे उत्तर प्रदेश में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा । नए फैसले से रोजगार सृजन तथा नागरिक सुविधाओं में सुधार होगा।  इसी प्रकार बिजनेस को सुविधाजनक बनाने के लिए अग्निशमन तथा आपात सेवा विभाग की एन०ओ०सी० निर्गमन प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। पहले ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदकों से अपेक्षित सूचनाओं प्राप्त करने के संबंध में प्रारूप में अपूर्णता थी। क्वालीफाइड एजेंसी, फायर लिफ्ट सुरक्षा प्रमाण पत्र, विद्युत सुरक्षा प्रमाण पत्र, अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र आदि पूर्व में सम्मलित नहीं थे। नए प्रारूप में आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन एवं फायर एन०ओ०सी० प्राप्त करने में सुगमता, सरलता पारदर्शिता और समयबद्धता रहेगी।  योगी सरकार के नए फैसले से औद्योगिक विकास, नगरीकरण, आपदाओं तथा सम्भावित अग्नि दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी । इसके साथ ही अग्नि सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ करने और ईज आफ डूइंग बिजनेस के उद्देश्यों की पूर्ति आसान हो जाएगी। इन सुधारों से आम नागरिकों को त्वरित सेवा प्राप्त होगी तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी।

68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम’ श्रेणी के लिए मिला नामांकन

साउंड्स ऑफ कुंभ’ के माध्यम से  वैश्विक मंच पर प्रयागराज की दमदार दस्तक 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम’ श्रेणी के लिए मिला नामांकन लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ न केवल एक आध्यात्मिक महोत्सव के रूप में प्रतिष्ठित हुआ, बल्कि यह एक वैश्विक सांस्कृतिक मील का पत्थर भी बन गया। इसी असाधारण आयोजन को समर्पित एल्बम “साउंड्स ऑफ कुंभ” को अब 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक एल्बम’ श्रेणी के लिए नामांकित किया गया है। गायक-संगीतकार सिद्धांत भाटिया की परिकल्पना पर आधारित है एल्बम गायक-संगीतकार सिद्धांत भाटिया की परिकल्पना पर आधारित इस एल्बम में 12 ट्रैक सम्मिलित हैं, जिन्हें भारत और विदेशों के लगभग 50 कलाकारों ने मिलकर साकार किया है। यह एल्बम जनवरी–फरवरी में आयोजित 45 दिवसीय महाकुंभ के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भाव को संजोता है, जिसमें विश्व के कोने-कोने से करोड़ों श्रद्धालु आस्था के इस अद्वितीय संगम का हिस्सा बने। प्राचीन मंत्रोच्चारण और बाइनॉरल बीट्स का है समायोजन प्रयागराज के घाटों पर किए गए लाइव रिकॉर्डिंग्स को प्राचीन मंत्रोच्चारण और बाइनॉरल बीट्स के साथ संयोजित करते हुए, “साउंड्स ऑफ कुंभ” महाकुंभ के दृश्यों और ध्वनियों को एक अनूठे श्रवण अनुभव में परिवर्तित करता है। यह एल्बम भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है। ऐसे में, यह सम्मान न केवल महाकुंभ की भव्यता और सांस्कृतिक गरिमा का प्रतीक है, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में की गई सुसंगठित योजना, कुशल प्रबंधन और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रयासों का भी प्रमाण है। ‘साउंड्स ऑफ कुंभ’ के माध्यम से प्रयागराज आज श्रद्धा, संस्कृति और नवाचार का वैश्विक प्रतीक बनकर उभरा है।

भावांतर योजना के तहत सोयाबीन उत्पादक किसानों को सीएम देंगे मदद, 233 करोड़ का भुगतान जल्द

भोपाल  मध्य प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी। आज 13 नवम्‍बर गुरुवार को सीएम डॉ. मोहन यादव भावांतर योजना (Bhavantar Yojana) के तहत प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक 1.33 लाख किसानों के खातों में राशि भेजेंगे। बता दें कि देवास में भावांतर योजना का राज्य स्तरीय उत्सव कार्यक्रम होने जा रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से सीएम मोहन यादव 233 करोड़ रुपए की भावांतर राशि का अंतरण करेंगे। इसके अलावा देवास जिले के 183 करोड़ 25 लाख रुपए की लागत के 8 विकास कार्यों का भूमि-पूजन भी सीएम करेंगे। थोड़ी देर में देवास पहुंचेंगे सीएम सीएम मोहन यादव थोड़ी देर में देवास पहुंचेंगे। इससे पहले वे सीएम हाउस में वीडियो कॉन्फ्रेंस लेंगे। फिर 11.50 बजे देवास पहुंचेंगे। इस कार्यक्रम के बाद वे दोपहर 01.35 बजे देवास से इंदौर के लिए रवाना हो जाएंगे। यहां वे टेक्नो ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में शामिल होंगे। यहां जानें भावांतर योजना का मॉडल रेट, कितने मिलेंगे पैसे भावांतर योजना 2025 (bhavantar yojana) के अंतर्गत सोयाबीन विक्रेता किसानों के लिए बुधवार 12 नवंबर को 4077 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है, जिन्होंने सोयाबीन को उपज मंडियों में विक्रय किया है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर राशि की गणना की जाएगी। मॉडल रेट में लगातार वृद्धि जारी है। पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को जारी किया गया था, यह 4020 रुपए प्रतिक्विंटल था। फिर 8 नवंबर को यह 4033 रुपए किया गया, 9 और 10 नवंबर को यह 3 रुपए बढ़कर 4036 रुपए प्रतिक्विंटल हो गया। वहीं 11 नवंबर को मॉडल रेट 4056 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया। अब तक 9.36 किसानों का रजिस्ट्रेशन मध्य प्रदेश में सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए शुरू की गई भावांतर योजना के तहत 3 से 17 अक्टूबर तक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया संपन्न की गई। इस दौरान प्रदेश के 9.36 पात्र किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया। प्रदेश के उज्जैन, राजगढ़, सीहोर, विदिशा, देवास, सागर समेत 7 जिलों से 50-50 हजार किसानों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। इसी तरह 21 जिलों से 10-10 हजार से अधिक किसान इस योजना का लाभ लेने रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। ऐसे समझें क्या है भावांतर योजना का गणित प्रदेश में 24 अक्टूबर से 15 जनवरी 2026 तक सोयाबीन की विक्रय करने की अवधि तय की गई है। यदि किसानों की सोयाबीन एमएसपी से कम कीमत पर बिकती है, तो किसानों को होने वाले घाटे की भरपाई मध्य प्रदेश सरकार भावांतर योजना के माध्यम से करेगी। फसल के विक्रय मूल्य और न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP के अंतर की राशि सीधे राज्य सरकार देगी। हेल्प लाइन नंबर जारी, परेशानी या समस्या हो तो यहां कर सकेंगे बात भावांतर योजना को सुचारू रूप से क्रियान्वित करने के लिए किसानों, व्यापारी संगठनों, मंडी बोर्ड, मंडी समितियों के अधिकारियों की सुविधा के लिए भावांतर हेल्पलाइन कॉल सेंटर भी शुरू किया गया है। यह सेंटर सुबह 7 बजे से रात 11 बजे तक निरंतर कार्य करेगा। योजना से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी लेने या समस्या पर बात इस नंबर 0755-2704555 पर की जा सकेगी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने गुजरात के एकता नगर में भारत पर्व समारोह को किया संबोधित

हमेशा से देश को राह दिखाने वाला राज्य रहा है गुजरातः योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने गुजरात के एकता नगर में भारत पर्व समारोह को किया संबोधित सीएम योगी, अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल समेत अतिथियों ने विभिन्न राज्यो की संस्कृतियों को भी देखा भारत की एकता की प्रतिमूर्ति है स्टैच्यू ऑफ यूनिटीः सीएम योगी पीएम मोदी ने विरासत, विकास व गरीब कल्याण की परंपरा को बढ़ाकर वर्तमान पीढ़ी को दी नई प्रेरणाः सीएम योगी नया भारत सुरक्षा, संप्रभुता व अखंडता से समझौता नहीं करताः मुख्यमंत्री सीएम योगी ने विभिन्न पवेलियन व स्टॉल का किया अवलोकन सरदार पटेल ने भारत को एक भारत रखा तो पीएम मोदी के नेतृत्व में 11 वर्ष में देश बन रहा श्रेष्ठ भारतः सीएम योगी एकता नगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गुजरात सदैव से देश को राह दिखाने वाला राज्य रहा है। भगवान श्रीकृष्ण उप्र से इस धरा पर आए और द्वारिकाधीश बनकर धर्म की स्थापना के कार्य को आगे बढ़ाया। स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसी धरा से आर्यसमाज के बड़े आंदोलन को बढ़ाने का कार्य प्रारंभ किया था। इस धरा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को स्वाधीनता के अगुआ के रूप में देकर आजादी का मार्ग प्रशस्त किया था। यह भारत की अखंडता के शिल्पी लौहपुरुष सरदार पटेल की भी पावन धरा है। गुजरात भगवान सोमनाथ, नागेश्वर नाथ की पावन धरा है। यह भारत की आध्यात्मिक और विरासत की भूमि है। स्वाधीनता आंदोलन को स्वदेशी से स्वावलंबन की ओर अग्रसर करने वाली धरा है। इस पावन धरा को हर भारतीय नमन करता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रतिनिधिमंडल के साथ बुधवार को गुजरात के एकता नगर के दौरे पर रहे। वे यहाँ भारत रत्न, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित ‘भारत पर्व-2025’ में भी सम्मिलित हुए। उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी देखा। सीएम स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भी पहुंचे और लौहपुरुष को नमन किया। भारत की एकता की प्रतिमूर्ति है स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सीएम योगी ने कहा कि 2018 में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के दर्शन का अवसर मिला था। उस समय कुछ दिन पूर्व ही प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया था। पिछले सात वर्ष में यहां परिवर्तन हुआ है। विरान जगह को विश्व पर्यटन के व्यस्त डेस्टिनेशन के रूप में कैसे स्थापित किया जा सकता है, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और सरदार सरोवर के तट पर हुआ विकास का यह कार्य दिखाता है। आज दूसरी बार इसके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भारत की एकता की प्रतिमूर्ति है। यह पीएम मोदी के विजन का परिणाम है। उनकी विजनरी लीडरशिप में भारत विरासत को सम्मान दे रहा है और विराट व्यक्तित्व के अनुरूप महापुरुषों के गौरवशाली कार्यों को भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्रबिंदु बना रहा है। पीएम मोदी ने देश को विकसित भारत के रूप में स्थापित करने का विजन दिया सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी ने देश में विरासत, विकास व गरीब कल्याण की परंपरा को बढ़ाकर वर्तमान पीढ़ी को न केवल नई प्रेरणा दी, बल्कि देश को विकसित भारत के रूप में स्थापित करने का विजन भी दिया है। पीएम मोदी काशी से संसद में प्रतिनिधित्व करते हैं। काशी में काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद वहां प्रतिवर्ष 11 से 12 करोड़ श्रद्धालु आ रहे हैं। अयोध्या में कई पीढ़ियां राम मंदिर बनने की आस लेकर चली गईं, लेकिन उसे मोदी जी ने संभव करके दिखाया और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो गया। आज अयोध्या सुंदरतम नगरियों में से एक हो गई। वहां प्रतिवर्ष छह से 8 करोड़ श्रद्धालु-पर्यटक आकर दर्शन कर रहे हैं। मथुरा-वृंदावन हो या उत्तराखंड में केदारनाथ पुरी व बद्रीनाथ का पुनरोद्धार, मध्य प्रदेश में महालोक हो या देश के अंदर अलग-अलग स्थानों पर भारत की विरासत को सम्मान, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के कार्य भी तेजी से हो रहे हैं। किसानों, युवाओं, श्रमिकों, आधी आबादी की आकांक्षाओं के अनुरूप भारत का समग्र विकास हो रहा है। भारत आज तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी आस्था के साथ विरासत के सम्मान का महत्वपूर्ण उदाहरण है। हर भारतवासी इसके लिए पीएम मोदी का आभार प्रकट करता है। भारत की अखंडता के शिल्पी थे सरदार वल्लभ भाई पटेल सीएम योगी ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल भारत की अखंडता के शिल्पी थे। ब्रिटिशर नहीं चाहते थे कि भारत एक रहे। उन्होंने शरारतपूर्ण तरीके से केवल भारत और पाकिस्तान के नाम पर ही देश का विभाजन ही नहीं किया था, बल्कि उनकी शरारत थी कि देश को इतने टुकड़ों में बांट डालो कि भारत एक न रह सके, लेकिन लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जहां अपनी दूरदर्शिता के कारण 563 देसी रियासतों को भी भारत गणराज्य का हिस्सा बनाकर वर्तमान भारत को एक भारत के रूप में रखा, वहीं पीएम मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्ष से भारत को श्रेष्ठ भारत बनाने के कार्य हो रहे हैं। नया भारत सुरक्षा, संप्रभुता व अखंडता से समझौता नहीं करता सीएम योगी ने कहा कि जूनागढ़ का नवाब और हैदराबाद का निजाम भारत गणराज्य में आने में आनाकानी कर रहा था, लेकिन सरदार पटेल ने कहा कि प्यार से मानोगे तो ठीक, वरना और भी तरीके हैं। अंततः उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा। नया भारत देश की सुरक्षा, संप्रभुता व अखंडता से कोई समझौता नहीं करता है। भारत और उसके नागरिकों की सुरक्षा में सेंध लगाने का दुस्साहस करने वाले को कीमत चुकानी ही पड़ेगी। 11 वर्ष में सभी ने देखा कि नया भारत समय आने पर जवाब देता है। सीएम योगी ने गुजरात सरकार व आयोजन से जुड़े लोगों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल कैवल्य त्रिविक्रम परनायक, उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, जयवीर सिंह, गुजरात के मंत्री व पोरबंदर विधायक अर्जुन मोधवाडिया आदि मौजूद रहे। गुजरात में उतरा उत्तर प्रदेश, अतिथियों ने देखी सांस्कृतिक प्रस्तुति गुजरात में बुधवार को उत्तर प्रदेश उमड़ पड़ा। यहां के कलाकारों ने भारत पर्व में अपनी अद्भुत प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। उत्तर प्रदेश के साथ ही गुजरात का गरबा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय आदि राज्यों के कलाकारों के लोकनृत्य समेत अनेक सांस्कृतिक … Read more

भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 में उत्तर प्रदेश होगा साझीदार राज्य, 343 ओडीओपी स्टॉल एवं 2750 प्रतिभागी लेंगे भाग

भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025, उत्तर प्रदेश की लोकल टू ग्लोबल  की आर्थिक रणनीति का वैश्विक प्रदर्शन भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 में उत्तर प्रदेश होगा साझीदार राज्य, 343 ओडीओपी स्टॉल एवं 2750 प्रतिभागी लेंगे भाग  उत्तर प्रदेश अपने युवा स्टार्टअप्स और बढ़ती हुई महिला उद्यमिता का वैश्विक मंच पर करेगा प्रदर्शन उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को मिलेगा वैश्विक मंच    लखनऊ  44वें भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 (अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला) का आयोजन इस वर्ष 14 से 27 नवंबर को होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की थीम पर आधारित 44वें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले 2025 का आयोजन भारत मंडपम नई दिल्ली में किया जा रहा है। इस वर्ष आयोजित किये जा रहे अतंर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के साथ "साझेदार राज्य" के रूप में भाग ले रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन और मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश इस अतंर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी “लोकल टू ग्लोबल” की आर्थिक रणनीति को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करेगा। जिसका मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश को एक वैश्विक व्यापर के केंद्र के तौर पर विकसित करना, साथ ही प्रदेश के स्थानीय उत्पादों की पहुंच वैश्विक बाजार तक स्थापित करना है। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा इस मेले को राज्य की 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ओडीओपी) योजना, युवा स्टार्टअप्स और बढ़ती हुई महिला उद्यमिता को प्रदर्शित करने के लिये भी की जाएगी। इससे पहले भी उत्तर प्रदेश सरकार द्वार इसी वर्ष 25 से 29 सितंबर को ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड शो 2025 भी “लोकल से ग्लोबल” की थीम पर आधारित था। भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 में उत्तर प्रदेश का पवेलियन राज्य की व्यापारिक प्रगति को मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 में उत्तर प्रदेश एक साझीदार राज्य के रूप में शामिल हो रहा है, जिसमें राज्य से 2,750 से अधिक प्रदर्शक भागीदारी करेंगे। जो व्यापार मेले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “लोकल टू ग्लोबल” की मुहीम को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करेंगे। इस मेले में 343 स्टॉल ओडीओपी योजना के अंतर्गत स्थापित किए जा रहे हैं। व्यापार मेले में राज्य की ओर से लगाये जा रहे ओडीओपी स्टॉल्स में आगरा का पेठा, भदोही की कार्पेट, मेरठ के खेल सामान, कानपुर के चमड़े के उत्पाद, फिरोजाबाद के ग्लासवेयर और सहारनपुर की लकड़ी की कलाकृतियों जैसे उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। ये स्टॉल्स न केवल उत्पादों की गुणवत्ता और शिल्पकला को उजागर करेंगे, बल्कि स्थानीय कारीगरों की कहानियों को भी वैश्विक पटल पर प्रस्तुत करेंगे। आधुनिक पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज के साथ पेश किए जा रहे ये उत्पाद अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में प्रवेश करने की क्षमता रखते हैं। मेले के दौरान आयोजित बी टू बी मीटिंग्स में विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने ओडीओपी उत्पादों में गहरी रुचि दिखाई है, जिससे राज्य के स्थानीय उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा। भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 में यूपी सरकार विशेष तौर पर राज्य के युवा स्टार्टअप्स और महिला उद्यमियों को प्राथमिकता दे रही है। उत्तर प्रदेश से लगभग 150 से अधिक युवा स्टार्टअप्स और महिला उद्यमी मेले में अपनी नवोन्मेषी पहल पेश करने के लिये भेजे जाएगें। राज्य की 'स्टार्टअप पॉलिसी 2020' और 'महिला उद्यमिता प्रोत्साहन योजना' के तहत प्रशिक्षित ये उद्यमी कृषि-आधारित तकनीक, हर्बल कॉस्मेटिक्स, हैंडलूम प्रोडक्ट्स और ईको-फ्रेंडली सामग्री पर काम करते हैं। ये स्टार्टअप्स न केवल रोजगार सृजन कर रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को डिजिटल युग से जोड़ रहे हैं। महिला उद्यमियों की भागीदारी सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है—ये महिलाएं गांवों से निकलकर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रही हैं। मेले में उनके लिए विशेष वर्कशॉप्स और नेटवर्किंग सेशन आयोजित किये जाएंगे, जहां वे निवेशकों और खरीदारों से प्रत्यक्ष जुड़ेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'लोकल टू ग्लोबल' रणनीति का मूल आधार निर्यात वृद्धि है। पिछले आठ वर्षों में राज्य ने इस नीति के तहत व्यापार में 132 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹2 लाख करोड़ के निर्यात का लक्ष्य प्राप्त किया है। जो कि राज्य की ओडीओपी, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारों जैसी दूरगामी नीतियों का परिणाम हैं। वर्तमान में राज्य में लगभग 12,000 से अधिक स्टार्टअप्स रजिस्टर्ड हैं, जिनमें 35 फीसदी से अधिक स्टार्ट अप का संचालन महिलाएं करेंगी। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 के दौरान ओडीओपी उत्पादों के लिए विशेष 'ग्लोबल मार्केट एक्सेस' सेमिनार किए जाएगें साथ ही डिजिटल शोरूम भी निर्मित किये जाएगें , जो भविष्य में निर्यात को और बढ़ावा देंगे। साथ ही ओडीओपी उत्पादों को लेकर विदेशी दूतावासों और व्यापार मंडलों के साथ समझौतों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 के माध्यम से उत्तर प्रदेश वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य में नई ऊंचाइयों को छूने की तैयारी कर रहा है—जहां राज्य के स्थानीय उत्पाद वैश्विक ब्रांड बनेंगे और ग्रामीण भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनेगा।

एआई बना कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन का माध्यम, छोटे किसानों की उन्नति को दे रहा गति

सीएम योगी की दूरदर्शिता व एआई की तकनीक से बदल रही यूपी के किसानों की तकदीर एआई बना कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन का माध्यम, छोटे किसानों की उन्नति को दे रहा गति -स्मार्ट गवर्नेंस की दिशा में आईसीसीसी और एआई बने नगरीय प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण  -भविष्य-उन्मुख शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में उन्नत तकनीक रख रहा सशक्त उत्तर प्रदेश की आधारशिला महाकुंभ 2025 में एआई ने साबित की उपयोगिता, सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ ही दक्षता व सांस्कृतिक संरक्षण का भी बना माध्यम  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश भविष्य आधारित तकनीक को आत्मसात कर एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। यूपी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के माध्यम से शासन तंत्र के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की जा रही है। प्रदेश के छोटे किसानों के उन्नति का भी एआई के माध्यम से नया अध्याय लिखा जा रहा है। यह उपलब्धि योगी सरकार की उस दूरदर्शी नीति का परिणाम है जिसके अंतर्गत परंपरागत क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक को एकीकृत कर ग्रामीण समाज को सशक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।         नवाचार और सहयोग की भावना को प्रोत्साहन देते हुए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उत्तर प्रदेश भारत के पहले एआई आधारित शासन प्रणाली को आत्मसात करने का केंद्र बन रहा है, जिसे विश्व बैंक–गूगल साझेदारी के अंतर्गत आरंभ किया गया। इस ऐतिहासिक पहल ने यह सिद्ध कर दिया कि कैसे एआई अभूतपूर्व स्तर पर सार्वजनिक सेवा प्रदायगी में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है। उत्तर प्रदेश बना डिजिटल परिवर्तन का जीवंत उदाहरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बनी दूरदर्शी नीतियां डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन व समावेशी विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को परिलक्षित करती हैं। इन प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को एक जीवंत उदाहरण बना दिया है। दृष्टि और नवाचार के सम्मिलन से शासन की परिभाषा कैसे वैश्विक स्तर पर पुनःनिर्धारित की जा सकती है इसका भी यह अनुपम उदाहरण है। एआई आज उत्तर प्रदेश में शासन और सेवा प्रदायगी के प्रत्येक क्षेत्र को नया स्वरूप प्रदान कर रहा है। चाहें वह नगरीय प्रबंधन हो, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि या सांस्कृतिक आयोजन, प्रदेश के प्रमुख नगरों में स्थापित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्मार्ट गवर्नेंस की रीढ़ बन चुके हैं। ये केंद्र एआई-संचालित विश्लेषण के माध्यम से यातायात प्रबंधन, सुरक्षा निगरानी और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित कर रहे हैं। इस तकनीकी एकीकरण से नगरीय जीवन अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और नागरिक-अनुकूल बन गया है। उन्नाव बनेगा अत्याधुनिक तकनीकों के प्रशिक्षण का केन्द्र उत्तर प्रदेश ही वह राज्य है जहाँ भारत का पहला एआई-अग्मेंटेड बहुविषयक विश्वविद्यालय उन्नाव में स्थापित किया जा रहा है। यह संस्थान विद्यार्थियों को एआई, रोबोटिक्स, डेटा साइंस तथा साइबर सुरक्षा जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देगा। साथ ही, यह प्रदेश में चिकित्सा, कृषि और प्रबंधन जैसे विविध विषयों से भी जोड़कर एक भविष्य-उन्मुख कार्यबल तैयार करने का माध्यम बनेगा। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में भी एआई ने उपचार की दिशा ही बदल दी है। राज्य के प्रमुख अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से शल्य-चिकित्सा अब अधिक सटीक और सुरक्षित हो गई है। एआई-आधारित डायग्नोस्टिक उपकरणों से रोगों की प्रारंभिक पहचान संभव हो रही है, जिससे प्रदेश के शहरी व ग्रामीण अंचल में नागरिकों को समय पर और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त हो रही हैं। महाकुम्भ 2025 में एआई बना करोड़ों श्रद्धालुओं के कुशल प्रबंधन का माध्यम महाकुंभ 2025 में प्रयागराज ने दुनिया के समक्ष एआई के वास्तविक अनुप्रयोग का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। इस ऐतिहासिक आयोजन में एआई-सक्षम रीयल-टाइम निगरानी, फेशियल रिकग्नीशन और पूर्वानुमान विश्लेषण का उपयोग कर करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को सहज बनाया गया। एआई-संचालित खोया-पाया केंद्र ने मात्र कुछ मिनटों में लापता बच्चों और वृद्धजनों को उनके परिजनों से मिलाया। साथ ही, स्मार्ट लाइटिंग, डिजिटल समन्वय और डेटा-संचालित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को आध्यात्मिक और तकनीकी दोनों दृष्टियों से अद्वितीय बना दिया। इस प्रकार, महाकुंभ 2025 ने यह सिद्ध किया कि परंपरा और प्रौद्योगिकी का संगम विश्व-स्तर पर भारत की नई पहचान बन सकता है। एआई साबित हो रहा किसानों का सच्चा सहायक  कृषि क्षेत्र में एआई आज किसानों का सच्चा सहायक सिद्ध हो रहा है। एआई-संचालित ड्रोन फसलों के स्वास्थ्य की निगरानी करते हैं, सिंचाई की आवश्यकता का आकलन करते हैं और कीटनाशकों के उपयोग को न्यूनतम रखते हैं। इन स्मार्ट कृषि तकनीकों से न केवल उत्पादन में वृद्धि हुई है, बल्कि कृषि को टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप भी प्राप्त हुआ है। इससे छोटे किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने का नया आत्मविश्वास मिला है। नगरों से लेकर ग्रामों तक, कक्षाओं से लेकर अस्पतालों तक, उत्तर प्रदेश एआई-आधारित शासन की एक नई परिभाषा रच रहा है। शासन के प्रत्येक क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को समाहित कर राज्य न केवल भविष्य का स्वागत कर रहा है, बल्कि नवाचार, दक्षता और नागरिक-केंद्रित शासन के वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप चल रहा विकसित यूपी @2047 महाभियान

विकसित उत्तर प्रदेश @2047 87.37 लाख से अधिक सुझाव रख रहे 'समर्थ यूपी' की नींव -मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप चल रहा विकसित यूपी @2047 महाभियान -छात्र, शिक्षक, उद्यमी, महिलाएं और किसानों समेत समाज के सभी तबकों से भारी मात्रा में आ रहे सुझाव -ग्रामीण क्षेत्रों से 67.80 लाख व नगरीय क्षेत्रों से 19.57 लाख से अधिक आए सुझाव -जौनपुर, संभल, गाजीपुर, गाजियाबाद व हरदोई से मिले सर्वाधिक फीडबैक -नगर निकायों से लेकर ग्राम पंचायत तक की जा रहीं बैठकें, सम्मेलन व गोष्ठी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप, उत्तर प्रदेश को 2047 तक विकसित प्रदेश बनाने के लक्ष्य को लेकर चल रहा “समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047: समृद्धि का शताब्दी पर्व महा अभियान” जनभागीदारी के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। प्रदेश के 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों एवं प्रबुद्ध जनों द्वारा भ्रमण कर विभिन्न लक्षित समूहों-छात्रों, शिक्षकों, उद्यमियों, कृषकों, स्वयंसेवी संगठनों, श्रमिक संगठनों, मीडिया एवं आम नागरिकों से संवाद स्थापित किए गए। इस दौरान लोगों से प्रदेश की विकास यात्रा और भविष्य के रोडमैप पर सुझाव लिए गए। अब तक पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर 87.37 लाख से अधिक फीडबैक प्राप्त हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से 67.80 लाख व नगरीय क्षेत्रों से 19.57 लाख से अधिक आए सुझाव samarthuttarpradesh.up.gov.in पर अब तक कुल 87,37,432 फीडबैक प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 67,80,358 सुझाव ग्रामीण क्षेत्रों से और 19,57,128 सुझाव नगरीय क्षेत्रों से आए हैं। इनमें 43,49,245 सुझाव आयु वर्ग 31 वर्ष से कम, 39,79,920 सुझाव 31-60 वर्ष के आयु वर्ग, तथा 4,08,276 सुझाव 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से प्राप्त हुए हैं। कृषि, पशुधन, डेयरी, इंडस्ट्री, पर्यटन आदि क्षेत्रों से मिले सर्वाधिक सुझाव इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों से भी सुझाव मिले। कृषि क्षेत्र में 23,54,098, पशुधन एवं डेरी में 3,59,686, इंडस्ट्री में 3,46,555, आईटी एवं टेक में 2,59,822, पर्यटन में 2,10,143, ग्रामीण विकास में17,07,348, इन्फ्रा में 80,182, संतुलित विकास में 1,21,404, समाज कल्याण-6,60,665, नगरीय एवं स्वास्थ्य-5,89,658, शिक्षा क्षेत्र में18,82,676 तथा सुरक्षा सम्बंधित क्षे में कुल 1,65,206 सुझाव मिले हैं। जौनपुर, संभल, गाजीपुर, गाजियाबाद व हरदोई से मिले सर्वाधिक फीडबैक फीडबैक में टॉप पांच जनपदों में जौनपुर (818,599), संभल (751,586), गाजीपुर (351,198), गाजियाबाद (256,262) और हरदोई (221,520) शामिल हैं। आमजन ने भी दी अपनी राय – मथुरा से नीलम दुबे जी का सुझाव है कि "उत्तर प्रदेश सरकार औद्योगिक विकास और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। MSME क्षेत्र में खादी एवं ग्रामोद्योग, वस्न उद्योग और हस्तशिल्प क्षेत्र शामिल हैं, जो रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाते हैं। उद्योगों के विकास के लिए प्रमुख पहलेंः प्रधानमंत्री मुद्रा योजना गैर-कॉर्पनी, गैर-कृषि लघु सूक्ष्म उद्यमों को 10 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान करती है, जिससे उद्यमशीलता और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। उद्यम पंजीकरण: MSMES के लिए सरकारी लाभ और योजनाओं का लाभ उठाने के लिए एक सरल ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया है। चैंपियंस पोर्टल: MSMEs को उनकी समस्याओं का समाधान करने और मार्गदर्शन, समर्थन एवं सहायता प्रदान करने के लिए एक मंच है। "क्लस्टर विकास कार्यक्रम: पारंपरिक उद्योगों और हस्तशिल्प के जरिए उद्योगों और उद्यमों की क्षमता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।" – हापुड़ से विनय कुमार मिश्रा के अनुसार "तीर्थ नगरी बृजघाट पौराणिक स्थल है हरिद्वार उत्तराखंड में जाने के पश्चात उत्तर प्रदेश का एकमात्र स्थान बृजघाट है माननीय योगी जी से अनुरोध है गंगा जी का जलस्तर बढ़ता है घटना रहता है यात्री गंगा स्नान हेतु आते हैं अचानक से गहरे जल में जाने के कारण डूब जाते हैं कोई स्थाई व्यवस्था नहीं है इसके अलावा आने वाले यात्रियों को काफी सारी एस सुविधाओं का सामना करना पड़ता है महीने में 2 मेले लगते हैं पूर्णिमा और एवं अमावस्या हाईवे पर जाम लग जाता है 8-8 घंटे तक जाम रहता है यात्रियों के लिए अच्छे पेयजल एवं शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है बृजघाट की नगर पालिका गढ़मुक्तेश्वर होने के कारण बृजघाट वासियों को भी बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है तीर्थ नगरी बृजघाट से गढ़मुक्तेश्वर 8 किलोमीटर की दूरी पर है ब्रजघाट वाशियो को टोल देकर गढ़मुक्तेश्वर जाना होता है कृपया ध्यान दें।" – बहराइच से भानु प्रताप के अनुसार 'बेसिक शिक्षा को पेपरलेस बनाने के लिए 14 सूत्रीय सुझाव साझा किया गया जो कि निम्नवत है: 1. सभी विद्यालयीय रजिस्टर (हाज़िरी, नामांकन, MDM, अवकाश आदि) गूगल एक्सेल शीट में ऑनलाइन रखें। 2. शिक्षकों को टैबलेट/लैपटॉप उपलब्ध कराए जाएं। 3. छात्रों का सम्पूर्ण डेटा यूडीआईएसई पर समय से अपलोड किया जाए। 4. विद्यालय स्तर पर व्हाट्सऐप/टेलीग्राम ग्रुप से त्वरित सूचना प्रसारण हो। 5. ई-ऑफिस प्रणाली से आदेश व पत्राचार पेपरलेस हो। 6. परीक्षा परिणाम व प्रगति पत्रक ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएं। 7. QR कोड आधारित उपस्थिति प्रणाली अपनाई जाए। 8. शिक्षकों की डायरी व मासिक रिपोर्ट गूगल फॉर्म से भरी जाए। 9. एमडीएम की दैनिक रिपोर्टिंग मोबाइल ऐप से हो। 10. ई-लाइब्रेरी व ई-कंटेंट को बढ़ावा दिया जाए। 11. सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम व बैठकें ऑनलाइन प्लेटफार्म पर संचालित हो। 12. अभिभावकों को SMS/ एप के माध्यम से सूचना दी जाए। 13. डिजिटल हस्ताक्षर से प्रमाणन हो। 14. क्लाउड स्टोरेज में सुरक्षित डेटा बैकअप रखा जाए।" नगर निकायों से लेकर ग्राम पंचायत तक की जा रहीं बैठकें, सम्मेलन व गोष्ठी इस महाभियान के सम्बन्ध में जनसामान्य को जागरूक एवं सहभागी बनाने हेतु नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न विशेष बैठकें, सम्मेलन एवं गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश के समस्त नगर निगम, नगर पालिका एवं नगर पंचायत में विशेष बैठकें एवं सम्मेलन/गोष्ठियाँ आयोजित किये जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त अभी तक 65 जिला पंचायतों में सम्मेलन/गोष्ठियों और 62 जिला पंचायतों में विशेष बैठकें एवं 817 क्षेत्र पंचायतों में सम्मेलन/गोष्ठियों और 824 क्षेत्र पंचायतों में विशेष बैठके सम्पन्न हुई हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश की 51,828 ग्राम पंचायतों के स्तर पर भी विशेष बैठकों का सफल आयोजन किया गया है। उल्लेखनीय है कि इन आयोजनों के माध्यम से स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित विभागों के बीच संवाद-सम्पर्क को और अधिक सशक्त किया गया है। मुख्यमंत्री योगी के विजन "समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047: समृधि का शताब्दी पर्व महाभियान के अनुरूप प्राप्त सुझावों … Read more

41 हजार से अधिक किसानों से किया गया है धान क्रय

विपणन सत्र 2025-26: 3.58 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीकरण  2.43 लाख मीट्रिक टन से अधिक की हो चुकी धान खरीद   41 हजार से अधिक किसानों से किया गया है धान क्रय  प्रदेश में 4110 क्रय केंद्र किए जा चुके हैं स्थापित  धान (कॉमन)-2369 व (ग्रेड-ए) का 2389 रुपये प्रति कुंतल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हो रही खरीद  पहली अक्टूबर से पश्चिम उत्तर प्रदेश व पहली नवंबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में शुरू हुई है धान खरीद  लखनऊ  योगी सरकार के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों को 'अन्नदाता किसान' का निरंतर साथ मिल रहा है। विपणन सत्र 2025-26 के अंतर्गत धान खरीद में हो रही वृद्धि इस बात को पुख्ता कर रही है। बुधवार अपराह्न साढ़े तीन बजे तक 41583 किसानों से 2.43 लाख मीट्रिक टन धान खरीद की जा चुकी है। इसके लिए प्रदेश में अब तक 4110 क्रय केंद्र भी स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं पहली सितंबर से अब तक 3,58,372 किसानों ने पंजीकरण करा लिया है।  41 हजार से अधिक किसानों से हुई 2.43 लाख मीट्रिक टन धान की हुई खरीद  खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक 2369 रुपये धान (कॉमन) तथा 2389 रुपये (ग्रेड-ए) प्रति कुंतल की दर से खऱीद हो रही है। बुधवार तक 41,583 किसानों से 2.43 लाख मीट्रिक टन धान खरीद की जा चुकी है। वहीं 3,58,372 किसानों ने अब तक धान बिक्री के लिए पंजीकरण भी करा लिया है। पश्चिम उत्तर प्रदेश व लखनऊ संभाग के हरदोई, लखीमपुर खीरी व सीतापुर में पहली अक्टूबर तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश व लखनऊ संभाग के लखनऊ, उन्नाव व रायबरेली मं पहली नवंबर से धान खरीद शुरू हुई थी।  सीएम योगी के निर्देश पर 48 घंटे में किसानों को किया जा रहा भुगतान  सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 48 घंटे के भीतर किसानों को भुगतान किया जा रहा है।  किसानों के आधार लिंक्ड बैंक खाते में सीधे भुगतान किया जाएगा। वहीं बिचौलियों को रोकने व पारदर्शिता बरतते हुए क्रय केंद्रों पर मोटे अनाज की खरीद ई-पॉप (इलेक्ट्रॉनिक प्वॉइंट ऑफ परचेज) डिवाइस के माध्यम से पहले की भांति किसानों का बायोमीट्रिक सत्यापन के जरिए ही होगी। किसान अपनी समस्याएं टोल फ्री नंबर 18001800150 पर जानकारी ले सकते हैं या अपनी समस्या भी बता सकते हैं।  एक नजर  41 हजार से अधिक किसानों से 2.43 लाख मीट्रिक टन धान की हुई खरीद  पहली सितंबर से प्रारंभ हुआ पंजीकरण, अब तक 3,58,372 किसानों ने करा लिया पंजीकरण 2369 रुपये कॉमन तथा 2389 रुपये (ग्रेड-ए) प्रति कुंतल की दर से हो रही खरीद fcs.up.gov.in या UP KISAN MITRA  पर पंजीकरण अनिवार्य, पंजीकृत किसानों से ही हो रही खरीद  टोल फ्री नंबर 18001800150 से सहायता या जानकारी ले सकते हैं किसान