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तीन सदस्यीय दल करेगा आरोपों की गहन जांच

लखनऊ  योगी सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। यह दल तीर्थ क्षेत्र में दानपात्रों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की जांच कर शासन को अपनी रिपोर्ट देगा। लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरण एस. तथा विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार को एसआईटी का सदस्य बनाया गया है। गौरतलब है कि अयोध्या स्थित तीर्थ क्षेत्र में दान पात्रों को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को गंभीरता से लेते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष जांच दल गठित किए जाने का अनुरोध किया था। ट्रस्ट के अनुसार, अफवाहों पर रोक लगाने और मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए इसकी गहन जांच आवश्यक है। यह तीर्थ क्षेत्र की छवि और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुंचाने की गहरी साजिश है, जिसका पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्रस्ट के इस अनुरोध को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से तीन वरिष्ठ अधिकारियों के विशेष जांच दल का गठन किया है। यह टीम पूरे प्रकरण की गहन छानबीन कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को उद्यमियों को देंगे प्रोत्साहन राशि, भू-आवंटन पत्र और हितलाभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को करेंगे उद्यमियों को प्रोत्साहन राशि, भू-आवंटन पत्र और हितलाभ का वितरण "समृद्ध एमएसएमई–विकसित मध्यप्रदेश" कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में भोपाल  प्रदेश में उद्यमिता को नई दिशा देने के साथ रोजगार सृजन को गति प्रदान कर "विकसित मध्यप्रदेश" बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए रविवार 14 जून को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में वृहद कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विभिन्न जिलों के एमएसएमई उद्यमियों, स्टार्ट-अप्स तथा अन्य योजनाओं के हितग्राहियों को सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रोत्साहन राशि का वितरण करेंगे। इस दौरान उद्यमियों को भू-आवंटन पत्र, स्टार्टअप नीति अंतर्गत स्वीकृत विभिन्न लाभ और मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत युवाओं को हितलाभ भी वितरित किए जाएंगे। कार्यक्रम में सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप भी उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए एमएसएमई उद्यमियों एवं स्टार्टअप प्रतिनिधियों से सीधा संवाद भी करेंगे। संवाद के माध्यम से उद्यमी अपने अनुभव साझा करेंगे तथा राज्य सरकार द्वारा लागू की गई नीतियों और योजनाओं के प्रभाव के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही वे उद्यमिता को और अधिक सरल, सुलभ एवं प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव और अपेक्षाएं भी प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम में सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप विशेष रूप से विभाग द्वारा प्रदेश में औद्योगिक निवेश, उद्यमिता संवर्धन और रोजगार सृजन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देंगे। प्रमुख सचिव एमएसएमई राघवेंद्र सिंह द्वारा विभाग की प्रमुख उपलब्धियों, योजनाओं एवं भावी कार्ययोजना का उल्लेख किया जाएगा। कार्यक्रम की थीम समृद्ध एमएसएमई–विकसित मध्यप्रदेश" रखी गई है। सूक्ष्म लघु,उद्यम विभाग कार्यक्रम में प्रदेश में औद्योगिक निवेश, उद्यमिता संवर्धन और रोजगार सृजन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को प्रदर्शित करेगा। यह कार्यक्रम प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र, स्टार्टअप पारिस्थितिकी और नवाचार आधारित औद्योगिक विकास को नई ऊर्जा प्रदान करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा एमएसएमई क्षेत्र को आर्थिक विकास का प्रमुख आधार मानते हुए निरंतर ऐसी नीतियां और व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं, जिनसे स्थानीय स्तर पर उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा मिले और युवाओं में स्वरोजगार की भावना विकसित हो तथा नवाचार को प्रोत्साहन प्राप्त हो। राज्य की नई औद्योगिक एवं निवेशोन्मुखी नीतियों के परिणामस्वरूप प्रदेश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के विस्तार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। इससे बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं और प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों को उद्यम स्थापना के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। संवाद से प्राप्त सुझाव प्रदेश की औद्योगिक एवं स्टार्टअप पारिस्थितिकी को और अधिक सुदृढ़ बनाने में उपयोगी सिद्ध होंगे। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि, बैंकिंग संस्थानों के पदाधिकारी, निवेशक, स्टार्टअप संस्थापक, युवा उद्यमी तथा प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए हितग्राही बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन केवल हितलाभ वितरण तक सीमित न रहकर उद्यमिता को जन-आंदोलन का स्वरूप देने, नवाचार आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा आत्मनिर्भर एवं विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण की दिशा में सामूहिक संकल्प का अवसर भी बनेगा। मध्यप्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल उद्योगों की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना, उन्हें रोजगार मांगने वाले के बजाय रोजगार सृजित करने वाला बनाना तथा नवाचार, कौशल और उद्यमिता के माध्यम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना भी है। "समृद्ध एमएसएमई–विकसित मध्यप्रदेश" कार्यक्रम इसी व्यापक सोच और दूरदृष्टि को मूर्त रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।  

चंद दिनों में ही लगभग 6.73 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा, 30 हजार दर्शकों के बैठने की होगी व्यवस्था

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश खेल अवसंरचना के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इसी क्रम में गोरखपुर में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम तेजी से आकार ले रहा है। लगभग 392.94 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का करीब 6.73 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। आधुनिक सुविधाओं से लैस यह स्टेडियम न केवल पूर्वांचल बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।  करीब 46 एकड़ क्षेत्र में विकसित होगा, दर्शकों की क्षमता 30 हजार होगी योगी सरकार का यह ड्रीम प्रोजेक्ट गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला साबित होगा। स्टेडियम का 16 मई 2026 को भूमिपूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम हुआ था। इसके बाद से निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। मिट्टी भरने का काम पूरा हो गया है। पाइलिंग का काम चल रहा है। खेल निदेशालय के मुताबिक, वर्तमान में स्टेडियम का भौतिक निर्माण कार्य लगभग 6.73 प्रतिशत पूरा हो चुका है और कार्य निर्धारित समय सीमा के अनुसार आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य 23 दिसंबर 2027 तक इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूर्ण करना है। करीब 46 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाला यह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम 30 हजार दर्शकों की क्षमता वाला होगा। खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए होंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं गोरखपुर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण के लिए वित्तीय संसाधनों की भी मजबूत व्यवस्था की गई है। इस परियोजना हेतु पेट्रोलियम मंत्रालय, भारत सरकार ने अपने सीएसआर फंड से 100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने पर सहमति दी है। शेष राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जा रही है। परियोजना को गति देने के लिए राज्य सरकार ने प्रथम किस्त के रूप में 63 करोड़ 39 लाख रुपये की धनराशि भी स्वीकृत कर दी है। इस खेल परिसर में खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी। स्टेडियम का निर्माण ग्राउंड प्लस टू फ्लोर मॉडल पर किया जा रहा है।  अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लगेंगी लाइट्स मुख्य मैदान में खिलाड़ियों के लिए सात प्लेइंग पिच और चार प्रैक्टिस पिच बनाई जाएंगी। रात्रिकालीन मुकाबलों के आयोजन को ध्यान में रखते हुए स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप चार हाई मास्ट फ्लड लाइट्स लगाई जाएंगी। इससे दिन-रात दोनों समय मैच आयोजित किए जा सकेंगे। स्टेडियम के निर्माण से क्षेत्र के युवाओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की मेजबानी का अवसर भी प्राप्त होगा। इससे गोरखपुर की पहचान केवल धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में ही नहीं, बल्कि एक प्रमुख खेल केंद्र के रूप में भी स्थापित होगी। क्रिकेट हब के रूप में तैयार हो रहा उत्तर प्रदेश- खेल सचिव खेल सचिव सुहास एल.वाई. ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश में क्रिकेट हब के रूप में डवलप हो रहा है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम वाराणसी का काम पूरा होने की स्टेज पर है। इसी तरह गोरखपुर में निर्माण कार्य तेजी पर है और अयोध्या का स्टेडियम बनकर तैयार है। लखनऊ के इकाना स्टेडियम में आईपीएल मैच हो रहे हैं। खेल निदेशक आरपी सिंह ने कहा कि गोरखपुर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण से पूर्वांचल में खेलों को नई दिशा मिलेगी। गोरखपुर और आसपास के जिलों में क्रिकेट समेत अन्य खेलों की सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय खिलाड़ियों को अब अपनी प्रतिभा निखारने के लिए बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

कबीर के दोहे से बदली जिंदगी: तानों से निकलकर भारतीय क्रिकेट टीम तक पहुंचे लोकेंद्र आर्य

बड़वानी ‘गांव वाले पिताजी से कहते कि तेरा ये लंगड़ा लड़का खुद तो किसी काम का नहीं है, हमारे बच्चों को भी बिगाड़ रहा है। पिताजी मुझे डांटते, घर से बाहर जाने के लिए मना करते।’ यह कहना है बाएं पैर से दिव्यांग लोकेंद्र आर्य का। उनका सिलेक्शन दिव्यांग क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ऑफ इंडिया (DCCBI) की इंडिया-ए टीम में हुआ है। वह 13 से 15 जून तक हरियाणा के यमुनानगर में होने वाले केसरी दिव्यांग टूर्नामेंट-2026 में इंडिया-ए की ओर से मैदान में उतरेंगे। सिलेक्शन के बाद लोग बधाई देने घर आ रहे हैं। मिठाई खिला कर फूल माला पहनाकर स्वागत कर रहे हैं। पिता रूमा आर्य पेशे से किसान हैं। बड़वानी जिले में सेंधवा के मोरदड़ गांव पहुंची। यहां लोकेंद्र और पिता से बात करके उनका सफर जानने की कोशिश की। क्रिकेट खेलने पर हंसी उड़ाते थे लोग यहां टीले पर बने कच्चे मकान के सामने बड़ा सा शामियाना लगा है। चारपाई के साथ 20-25 कुर्सियां रखी हैं। घर के बाहर फूलों की मालाएं और गुलदस्ते लिए किसी का इंतजार कर रहे हैं। इतने में घर के अंदर से एक 27 साल का युवक एक पैर से लंगड़ाते हुए बाहर आया। माला और गुलदस्ता लिए खड़े लोग उसे एक-एक कर माला पहनाते और फोटो खिंचवाने लगता है। ये वही लोग हैं, जो इसे कभी लंगड़ा कहकर चिढ़ाते थे। उसके पिता से कहते- ऐसा बेटा पैदा किया है, किसी काम का नहीं है। ये क्या करेगा। दाएं हाथ के बल्लेबाज लोकेंद्र वर्तमान में दिव्यांग क्रिकेट एसोसिएशन मध्यप्रदेश की सतपुड़ा डिवीजन (ग्रामीण) टीम के कप्तान हैं। बचपन में लोगों ने उनके पैरों की कमजोरी को लेकर ताने दिए थे। क्रिकेट खेलने पर हंसी उड़ाते थे, लेकिन उन्होंने इन बातों को अपनी ताकत बनाया। लोग बोलते- हमारे बच्चों को बिगाड़ देगा लोकेंद्र कहते हैं कि इस मुकाम पर पहुंचने के लिए मैंने क्या कुछ नहीं सुना और सहा है, ये मैं ही जानता हूं। लोगों के तानों से परेशान होकर पिताजी बचपन में ही विकलांग आश्रम में छोड़ आए थे। वे भी क्या करते, ताने और घर के हालत ऐसे नहीं थे कि मेरी इलाज और पढ़ाई के साथ देखभाल कर पाते। सोचता था कि जिंदगी ऐसे ही कट जाएगी। क्रिकेट खेलने का शौक, तो तीन-चार साल की उम्र से ही था। खड़ा तो ठीक से हो नहीं पाता था, लेकिन प्लास्टिक का बैट जरूर अपने पास ही रखता था। थोड़ा बड़ा हुआ, तो लकड़ी के पल्ले को बैट बना लिया। अपने गांव के हम उम्र बच्चों के साथ खेलना शुरू कर दिया। तब गांव वाले पिताजी से कहते कि तेरा ये लंगड़ा लड़का खुद तो किसी काम का नहीं है, हमारे बच्चों को भी बिगाड़ रहा है। पिताजी भी मुझे डांटते, घर से बाहर जाने के लिए मना करते। छोटा था, इसलिए कुछ समझ नहीं पाता था। आश्रम से मिली नई राह और जिंदगी विकलांग सेवा आश्रम में शुरुआती दिन मुश्किल से कटे। हर पल मां की याद आती थी। सोचता था, मेरा पैर ऐसा क्यों है? क्यों मैं अपने दोनों छोटे भाइयों की तरह अपने घर में रह सकता। आश्रम पहुंचा, तो वहां सीनियर्स को क्रिकेट खेलते देखा। मन को तसल्ली हुई। धीरे-धीरे अपने दोस्तों के साथ मैं भी क्रिकेट खेलने लगा। वहां जो हमारे वार्डन थे, वो हमेशा मोटिवेट करते। जितनी पढ़ाई करना हो करो, जितना खेलना हो खेलो। कबीर के दोहे ने दी प्रेरणा आश्रम में हम लोग प्रार्थना भी करते थे। कबीर ग्रंथावली का एक दोहा है- मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीत। कहै कबीर हरि पाइए, मन ही की परतीति॥ पहले तो इस दोहे को ऐसे ही दोहरा लेते थे। लेकिन, जब इसका अर्थ समझ आया, तो अमल करना शुरू कर दिया। सोच लिया कि अब किसी भी हालत और कीमत में अपने आपको और अपने मन को कभी हारने नहीं देना है। लोकेंद्र कहते हैं कि 2021 में विश्व दिव्यांग दिवस पर दिव्यांग क्रिकेटर टीम के कप्तान ब्रजेश द्विवेदी के बारे में पता चला। उनके बारे में जानकारी हासिल की तो पता चला वे IIT इंदौर में नौकरी करते हैं। दो-तीन दिन बाद उनसे मिलने IIT इंदौर पहुंच गया। उन्हें क्रिकेट को लेकर अपने जुनून के बारे में बताया। उन्होंने मेरा ट्रायल कराया। इसके कुछ महीने बाद ही खास तौर से हमारे लिए सतपुड़ा डिवीजन के नाम से टीम बन गई। चंदे से खरीदी पहली किट शुरुआत में लेदर बॉल से खेलने के दिक्कत हुई। किट भी नहीं थी। दोस्तों ने चंदा जमा कर किट की व्यवस्था की। शुरुआत में सेंधवा के किला परिसर स्थित मंडी में डामर सड़क पर खेले। इसके बाद निवाली के खेल परिसर में प्रैक्टिस करना शुरू किया। आज भी यहां से हर शनिवार रविवार को सेंधवा से 20 किमी दूर निवाली मैच खेलने जाते हैं। तीन साल पहले मेरी शादी हुई। आईटीआई करने के बाद बीए कर रहा हूं। बेटी को खेलते देख मिलता है सुकून तीन साल पहले 22 मार्च 2023 को टिकेश्वरी से शादी हुई। एक बेटी है। जब बेटी होने वाली थी, उस समय मन में डर था। लगता था कि कहीं बच्चा भी मेरी तरह तो नहीं होगा। ऐसे में पत्नी का समय समय डॉक्टरों से उपचार ओर जांच करवाते रहे। खुशी होती है, जब अपनी बेटी को सभी बच्चों के साथ अच्छे से खेलता देखता हूं।

महाकाल दर्शन होंगे महंगे? लाइट एंड साउंड शो का टिकट ₹100, सभी सुविधाएं लेने पर खर्च ₹1050

उज्जैन  बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की जेब पर और बोझ बढ़ने वाला है। महाकाल मंदिर परिसर में चलने वाले प्रसिद्ध लाइट एंड साउंड शो को देखने के लिए अब श्रद्धालुओं को 100 रुपए प्रति व्यक्ति का शुल्क देना होगा।गौरतलब है कि करीब 7 महीने तक मुफ्त संचालन के बाद अब इस शो को पेड किया गया है। 18 करोड़ की लागत से तैयार हुआ है शो इस शो का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 अक्टूबर 2025 को दीपावली के अवसर पर किया था। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने इसे करीब 18 करोड़ 7 लाख रुपए की लागत से तैयार किया है। करीब 25 मिनट के इस शो में वॉटर स्क्रीन, फाउंटेन, लेजर लाइट और बेहतरीन साउंड इफेक्ट्स के जरिए भगवान महाकाल, मां क्षिप्रा और प्राचीन अवंतिका नगरी (उज्जैन) की गौरव गाथा दिखाई जाती है। शुल्क लगाने के पीछे मंदिर समिति का तर्क मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस भव्य शो के संचालन और रखरखाव पर हर महीने करीब 1.5 लाख रुपए का खर्च आ रहा है। मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार, इसी खर्च को पूरा करने और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के लिए 100 रुपए का एंट्री शुल्क रखने का फैसला लिया गया है। हर माह 15 लाख रुपए कमाई का अनुमान कमाई के लिहाज से देखें तो मंदिर समिति को इस फैसले से अच्छी आय होने की संभावना है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, रोजाना करीब 500 श्रद्धालु लाइट एंड साउंड शो देखने पहुंच रहे हैं। यदि प्रत्येक श्रद्धालु से 100 रुपए शुल्क लिया जाता है तो समिति को प्रतिदिन लगभग 50 हजार रुपए की आय होगी। इस हिसाब से एक महीने में करीब 15 लाख और सालभर में लगभग 1.8 करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता है, जबकि शो के संचालन और रखरखाव पर हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में यह व्यवस्था मंदिर समिति के लिए आय का एक नया स्रोत भी बन सकती है। संध्या और शयन आरती के लिए भी लेते हैं 250 रुपए यह पहली बार नहीं है जब महाकाल मंदिर में किसी सुविधा के लिए शुल्क बढ़ाया या लगाया गया हो। इससे पहले भी कई बदलाव हुए हैं। 19 फरवरी 2026 से संध्या आरती और शयन आरती के लिए भी 250 रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क लिया जा रहा है, जबकि इससे पहले यह फ्री थी। वीआईपी या शीघ्र दर्शन के लिए पहले से ही शुल्क लिया जा रहा है। श्रद्धालु बोले- बढ़ जाएगा आर्थिक बोझ महाकाल मंदिर में रोज हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भस्म आरती में ही रोजाना करीब 1700 श्रद्धालुओं को ऑनलाइन प्रवेश दिया जाता है। ऐसे में लाइट एंड साउंड शो पर शुल्क लगने के बाद मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं का खर्च बढ़ जाएगा। जहां एक तरफ मंदिर प्रशासन इसे मेंटेनेंस के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं श्रद्धालुओं के एक वर्ग का कहना है कि धार्मिक परिसर में होने वाले इस शो को पहले की तरह ही मुफ्त रखा जाना चाहिए था, क्योंकि आरती और शो के शुल्कों से आम भक्तों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

दलगत राजनीति से ऊपर उठते हुए योगी सरकार ने नियोजित विकास पर दिया ध्यान

आजमगढ़  विकास को समावेशी तभी बनाया जा सकता है, जब शासन-सत्ता दलगत राजनीति को महत्व न देते हुए सभी के विकास के लिए समान भाव से कार्य करे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को आजमगढ़ में लगभग एक हजार करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास कर ‘सबका साथ, सबका विकास’ की अवधारणा में मील का नया पत्थर जोड़ दिया है। कभी माफिया और अराजकता वाले माहौल के लिए बदनाम रहे इस जिले की सोच में आज शिक्षा, संस्कृति और अपनी विरासतों का गौरव बोध है तो इसलिए कि पिछले नौ सालों में उन्होंने जिले में अनवरत विकास के आयाम देखे, कानून व्यवस्था का शासन देखा और अपनी आर्थिक उन्नति की संभावनाएं भी देखीं। सेना और पुलिस में यहां के लोगों की बड़ी संख्या में भर्ती, लुप्त होने के कगार पर खड़े परंपरागत पॉटरी उद्योग को मिली संजीवनी ने यहां के लोगों की जिंदगी बदली है। विश्वविद्यालय, मेडिकल कालेज, एयरपोर्ट, संगीत महाविद्यालय, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे अब आजमगढ़ की पहचान हैं।  एक दशक पहले की बात करें तो आजमगढ़ की पहचान तब एक ऐसे जिले के रूप में थी जहां गुंडों, अपराधियों और माफिया का आतंक था। बेटियां दिन में भी घर से निकलते हुए डरतीं थीं। ब्लैक पॉटरी से जुड़े हस्तशिल्पियों का कोई भविष्य नहीं रह गया था और वे अपने परिवार चलाने के लिए मुंबई व अन्य महानगरों की ओर साधारण नौकरी करने जाने को मजबूर थे। इस जिले का विकास तभी संभव था जब कानून व्यवस्था का राज दिखाई दे। माफिया और अपराधियों के खिलाफ उठाए गए सख्त कदमों से अराजक तत्वों में भय उत्पन्न हुआ तो विकास के रास्ते भी दिखाई देने लगे। योगी सरकार की ओडीओपी योजना यहां के हस्तशिल्पियों के लिए वरदान साबित हुई। यहां के निजामाबाद कस्बे के ब्लैक पॉटरी उद्योग की अब अंतरराष्ट्रीय पहचान है। जिस काली मिट्टी के कलाकारों के लिए जीविका चलाना मुश्किल था, ओडीओपी योजना से उन्हें इतना बड़ा बाजार मिला कि आज डिमांड पूरी नहीं कर पा रहे हैं। सिंगापुर, सऊदी अरब से ब्लैक पॉटरी की डिमांड है और टर्नओवर करोड़ों तक पहुंच गया है। ब्लैक पॉटरी से जुड़े हस्तशिल्पी सोहित कुमार प्रजापति कहते हैं-‘अब हमारा भविष्य सुरक्षित है। हमारे बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल रही है।’ विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत 4,700 कारीगरों को आधुनिक टूलकिट और सामग्री वितरित किया जाना हमारी कला का सम्मान है। यह विडंबना ही है कि पूर्व की सरकारों ने सत्ता में रहते हुए भी इस जिले को उपेक्षित ही रखा लेकिन योगी सरकार का विश्वास राज्य के समावेशी विकास पर है, इसलिए यहां किन-किन चीजों का अभाव है, उन्हें चिह्नित कर परियोजनाएं बढ़ाई गईं। जिले में सत्ताधारी दल का कोई विधायक और सांसद न होने के बावजूद आजमगढ़ को बराबर का महत्व मिला। पूर्वांचल एक्सप्रेस ने कनेक्टिविटी ही नहीं निश्चित की, बल्कि निवेश का मार्ग भी प्रशस्त किया। औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में सवा दो सौ से अधिक निवेश एमओयू यहां हजारों लोगों के लिए रोजगार लाएंगे। इतना बड़ा जिला होने के बावजूद यहां कोई विश्वविद्यालय नहीं था। छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाना पड़ता था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से यहां बना महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय 60 एकड़ से ज्यादा की जमीन पर बना है। यहां विश्वस्तरीय क्लास रूम बनाए गए हैं। इसके अलावा जिले को सैनिक स्कूल भी मिला है। हरिहरपुर में संगीत महाविद्यालय की स्थापना कर योगी सरकार ने इस घराने की शास्त्रीय परंपरा को प्रतिष्ठा दी। आजमगढ़ के सपनों को उड़ान अब यहां का एयरपोर्ट दे रहा है।  इसके साथ ही सरकार की कई योजनाएं आजमगढ़ की महिलाओं में आत्मनिर्भरता लेकर आईं हैं। हुस्नआरा खातून जैसी कई मुस्लिम महिलाएं लखपति दीदी बन जिले का मान बढ़ा रहीं हैं। युवा उद्यमियों को भी नई राह मिली है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत युवाओं को मिले ऋण से वे अपने सपनों को मुकाम दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के शुभारंभ की तैयारियां अंतिम चरण में

लखनऊ  प्रदेश के शिक्षकों और शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों के लिए बड़ी सुविधा देने की तैयारी चल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार जल्द ही "मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना" शुरू करने जा रही है। योजना के तहत पात्र शिक्षकों, कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। इसके लिए बनाए गए ऑनलाइन पोर्टल का बीटा वर्जन फिलहाल परीक्षण के दौर से गुजर रहा है।   पात्र कर्मचारियों का डेटा एकत्र किया जा रहा स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज़) की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि योजना के औपचारिक शुभारंभ से पहले विभाग पात्र कर्मचारियों का डेटा एकत्र करने और उसे त्रुटिरहित बनाने में जुटी है। पूर्व में कई मामलों में उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड में नाम, जन्मतिथि, आधार अथवा पारिवारिक विवरण में अंतर होने के कारण कार्ड जारी होने की प्रक्रिया प्रभावित होती थी। ऐसे मामलों में आवेदन लंबित रह जाते थे। इसी समस्या को दूर करने के लिए इस बार डेटा सैनेटाइजेशन पर विशेष जोर दिया गया है।  इलाज का खर्च निर्धारित सीमा तक सीधे योजना के माध्यम से वहन किया जाएगा साचीज़ द्वारा विकसित डेटा कलेक्शन पोर्टल के माध्यम से कर्मचारियों और उनके आश्रितों का विवरण एकरूप प्रारूप में जुटाया जा रहा है। अब तक 3.5 लाख से अधिक पात्र कर्मचारियों का डेटा संकलित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि डेटा शुद्ध होने से कार्ड निर्गत करने की प्रक्रिया तेज होगी और अधिक से अधिक लाभार्थियों को योजना का लाभ मिल सकेगा। योजना के तहत जारी होने वाले मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा कार्ड के माध्यम से लाभार्थी सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में उपचार करा सकेंगे। इलाज का खर्च निर्धारित सीमा तक सीधे योजना के माध्यम से वहन किया जाएगा, जिससे कर्मचारियों को गंभीर बीमारी या आकस्मिक चिकित्सा खर्च के समय आर्थिक दबाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।  इलाज पर होने वाले बड़े खर्च से मिलेगा छुटकारा साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि पोर्टल के परीक्षण के दौरान कार्ड निर्माण, लाभार्थी सत्यापन, अस्पतालों से समन्वय और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं की जांच की जा रही है। परीक्षण सफल होने के बाद योजना का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। योगी सरकार का मानना है कि योजना लागू होने के बाद प्रदेश के लाखों शिक्षक, कर्मचारी और उनके परिवार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं तक आसानी से पहुंच बना सकेंगे तथा इलाज पर होने वाले बड़े खर्च से उन्हें राहत मिलेगी।

राजस्व विभाग का बड़ा फैसला: नए जिले की वरिष्ठता के आधार पर तय होगी पटवारियों की सीनियरिटी

भोपाल  राजस्व विभाग मध्य प्रदेश ने तबादलों की अवधि (15 जून) समाप्त होने से तीन दिन पहले पटवारियों के संविलयन की नई नीति 2026 जारी कर दी है। नई नीति में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी पटवारी की पदस्थापना उसकी गृह तहसील में नहीं की जाएगी। साथ ही नए जिले में पदस्थ होने के बाद वरिष्ठता वहीं की सीनियरिटी सूची के आधार पर तय होगी। नीति के अनुसार पटवारी का पद जिला संवर्ग का होने के कारण अलग से संविलयन नीति लागू की गई है। इसमें कहा गया है कि पटवारी परीक्षा 2022 का परिणाम घोषित होने से पहले नियुक्त हुए पटवारी ही अंतर जिला संविलयन के पात्र होंगे। हालांकि वर्ष 2022 की परीक्षा पास कर नियुक्त हुए पटवारियों को कुछ विशेष परिस्थितियों में संविलयन का लाभ मिलेगा। इन शर्तों के साथ पात्र होंगे 2022 की परीक्षा पास करने वाले पटवारी     वर्ष 2022 की पटवारी परीक्षा में पास होने वाले पटवारी केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही आवेदन कर सकेंगे।     अगर पटवारी पति या पत्नी शासकीय कर्मचारी हैं उनकी एक ही जिले की पदस्थापना की जरूरत है तो संबंधित जिले में पटवारी का पद रिक्त होने की स्थिति में मौका दिया जाएगा।     विवाहित महिला, विधवा, तलाकशुदा, परित्यकता महिला पटवारी होने पर या पटवारी को गंभीर बीमारियां जैसे कैंसर, किडनी, डायलिसिस, ओपन हार्ट सर्जरी से ग्रस्त होने पर पटवारी का पद रिक्त होने की स्थिति में तबादले का अधिकार रहेगा।     आपसी आधार पर संविलियन के मामलों में भी जो आवेदन मिलेंगे उसमें भी तबादला हो सकेगा। प्रोबेशन संबंधी कार्यवाही नए जिले में होगी संविलियन नीति में यह भी कहा गया है कि जिन पटवारी का संविलियन होता है उनकी परिवीक्षा अवधि समाप्ति संबंधी कार्यवाही नए जिले में की जाएगी। इस संबंध में सभी विभागीय शर्तों का पालन पूर्व जिले की भांति नए जिले में पटवारी को करना होगा। पटवारी के संविलयन उपरांत पटवारी की व्यक्तिगत नस्ती एवं जांच, दंड और विशेष दायित्व आदि के संबंध में सभी जानकारी पुराने जिले द्वारा नए जिले को दी जाएगी। पटवारी के संविलयन की संख्या का निर्धारण सामान्य प्रशासन विभाग की तबादला नीति के आधार पर होगा। ऐसे होंगे पटवारी तबादले के लिए आवेदन     आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन मध्य प्रदेश द्वारा ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे।     ऑनलाइन आवेदन में अपनी विशिष्ट श्रेणी जैसे चयन का वर्ग सामान्य, पिछड़ा वर्ग, ईडब्ल्यूएस, एससी, एसटी और ओपन वर्ग, ओपन महिला, भूतपूर्व सैनिक, दिव्यांग की स्थिति की जानकारी देनी होगी। ऑनलाइन आवेदन के साथ कोई दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे।     पटवारी जिनके खिलाफ लोकायुक्त या अन्य किसी मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज है वह अपात्रता की श्रेणी में आएंगे।     संविलयन संबंधी आदेश आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन मध्य प्रदेश द्वारा जारी किए जाएंगे। पद रिक्त हुए तो ही संविलयन किया जाएगा पटवारी के संविलयन में यह भी कहा गया है कि जिस जिले में संविलयन चाहा गया है उस जिले में संबंधित वर्ग के रिक्त पद उपलब्ध होने की स्थिति में ही संविलयन किया जाएगा। आरक्षण के प्रावधानों एवं जिला आरक्षण रोस्टर के परिपालन में ही संविलियन किया जाएगा। जिले के अंदर पदस्थापना कलेक्टर द्वारा की जाएगी किंतु किसी भी पटवारी को उसके गृह तहसील में पदस्थ नहीं किया जाएगा। आदेश जारी होने के 15 दिन के भीतर पटवारी को संविलयन किए गए जिले में उपस्थिति देनी होगी। आरक्षण नियमों के विपरीत नहीं होगी पोस्टिंग इसमें यह भी शर्त तय की गई है कि संविलयन पर एक बार जिला आवंटित हो जाने पर दोबारा जिला परिवर्तन की पात्रता नहीं रहेगी। प्रशासनिक दृष्टि से किए गए संविलयन में ही पटवारी द्वारा नए जिले में पदभार ग्रहण करने पर उसे जिले की संधारित सूची से पटवारी की वरिष्ठता की गणना कर वरीयता तय की जाएगी। पटवारी को एक बार जिला आवंटित होने पर उसे जिले में अनिवार्य उपस्थिति देनी होगी। जिले में आरक्षित पदों से अधिक एवं आरक्षण नियमों के विपरीत पद स्थापना नहीं की जाएगी।

सिंहस्थ 2028 में तकनीक बनेगी सुरक्षा कवच, AI आधारित मौसम अलर्ट और स्मार्ट सिक्योरिटी पर जोर

उज्जैन  सिंहस्थ महापर्व वर्ष 2028 की तैयारियां जोरो पर हैं. वर्ष 2016 सिंहस्थ के दौरान आए भीषण आंधी तूफान और प्राकृतिक आपदा की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए उज्जैन आलोट संसदीय क्षेत्र से सांसद अनिल फिरोजिया ने मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग उठाई है. सांसद अनिल फ़िरोजिया ने चर्चा में कहा, ''मैंने मौसम विभाग दिल्ली मुख्यालय को एक लेटर लिखा है।  2016 में आई थी प्राकृतिक आपदा अनिल फिरोजिया ने लिखा, ''सभी के संज्ञान में है कि, पिछली बार सिंहस्थ महापर्व वर्ष 2016 के दौरान उज्जैन में प्राकृतिक आपदा आई थी और कई टिन शेड, पेड़ धराशाई हो गए थे. लोग घायल भी हुए थे, जिससे प्रशासन और श्रद्धालु दोनों के लिए गंभीर चुनौती खड़ी हो गई थी. आने वाला समय 2028 में सिंहस्थ का है, और हम चाहते हैं कि उस वक़्त ऐसी परिस्थितियां नहीं बने।  अनिल फिरोजिया ने मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था की उठाई मांग सांसद ने कहा, ''सिंहस्थ महापर्व को ध्यान में रखते हुए विभाग को पत्र लिखते हुए संज्ञान में लाया कि, उज्जैन में अत्याधुनिक मौसम पूर्वानुमान उपकरण की अभी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. आधुनिक यंत्र लगाए जाएं ताकि पूर्वानुमान लग जाए मौसम की क्या स्थिति रहेगी. जिससे प्रशासन पहले से सतर्क हो जाए और उससे निपटने की तैयारी कर सके. देश विदेश से आने वाले लाखों करोड़ों दर्शनार्थियों को सुरक्षित किया जा सके. वर्ष 2028 में दर्शनार्थियों की संख्या पिछली बार से 3 गुना अधिक होने की संभावना है. ऐसे में मौसम संबंधी सटीक और समय पर पूर्वानुमान उपलब्ध होना बेहद आवश्यक है।  सिंहस्थ 2016 बनाम 2028 मौसम प्रबंधन और व्यवस्थाओं में क्या होगा अंतर मौसम विशेषज्ञ बताते हैं, यदि केंद्र और राज्य समय पर स्वीकृति देता है तो वर्ष 2028 तक उज्जैन में कई तरह से व्यवस्थाएं की जा सकती हैं।  पहला रियल टाइम वेदर स्टेशन– सिंहस्थ क्षेत्र में कई स्वचलित मौसम केंद्र लगाए जाते हैं, जो हर कुछ मिनट में हवा की गति, तापमान, नमी और वर्षा की जानकारी दें।  दूसरा डॉप्लर रडार कवरेज– इंदौर उज्जैन क्षेत्र के लिए उन्नत रडार कवरेज मिलने पर 30 मिनट से 3 घण्टे तक आंधी और तूफान की चेतावनी संभव हो सकेगी।  तीसरा AI आधारित पूर्वानुमान- वर्ष 2028 तक AI आधारित मौसम पूर्वानुमान से स्थानीय स्तर पर बेहतर सटीक चेतावनियां जारी की जा सकती हैं।  चौथा श्रद्धालुओं के लिए अलर्ट सिस्टम- मोबाइल संदेश, एलईडी स्क्रीन, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से तत्काल चेतावनी, पांचवा मजबूत अस्थाई ढांचे 2016 के अनुभव के बाद टेंट, शेड, विद्युत पोल और घाट क्षेत्र की संरचनाओं को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है। 

इंदौर मेट्रो का विस्तार: 21 जून से नए कॉरिडोर पर शुरू होगा संचालन, जल्द तय होगा किराया

इंदौर  इंदौर मेट्रो की येलो लाइन के दूसरे फेज के संचालन का रास्ता साफ हो गया है। आगामी 20 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक के नए रूट का लोकार्पण करेंगे। इसके अगले दिन, यानी 21 जून से यह ट्रैक आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। वर्तमान में भोपाल स्थित मेट्रो कार्यालय में किराए, फेरों और शेड्यूल को लेकर बैठकों का दौर जारी है, जिस पर अगले तीन-चार दिनों में अंतिम फैसला ले लिया जाएगा। 6 लाख से अधिक लोगों को मिलेगा सीधा फायदा सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक का यह नया कॉरिडोर इंदौर मेट्रो का सबसे व्यस्त और अधिक यात्री घनत्व वाला रूट बनने जा रहा है। इस रूट के शुरू होने से सीधे 4 से 6 लाख लोगों को सुगम परिवहन का लाभ मिलेगा।यदि फीडर बसों और अन्य सार्वजनिक साधनों को भी जोड़ लिया जाए, तो यह संख्या 8 से 10 लाख तक पहुंच सकती है। इस रूट पर कई बड़ी कंपनियों के ऑफिस इस रूट के दायरे में टीसीएस, इंफोसिस और यश टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के कैंपस हैं। इसके अलावा एसईजेड, आईटी पार्क, एयरपोर्ट, शैक्षणिक संस्थान, होटल और कई कॉर्पोरेट कार्यालय भी इसी कॉरिडोर के आसपास हैं। केवल टीसीएस और इंफोसिस के कैंपस ही हजारों कर्मचारियों की क्षमता रखते हैं। एक्सपर्ट के अनुमान के अनुसार, मेट्रो संचालन के शुरुआती चरण में इस कॉरिडोर पर रोजाना 25 से 40 हजार यात्री सफर कर सकते हैं, वहीं सुपर कॉरिडोर और आसपास के क्षेत्रों के विकसित होने के बाद यह संख्या 60 हजार से लेकर एक लाख यात्रियों रोज तक पहुंच सकती है। कुल मिलाकर सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक का मेट्रो रूट इंदौर के आईटी हब, एयरपोर्ट क्षेत्र और प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों को जोड़ने वाला अहम कॉरिडोर साबित होगा, जिससे लाखों लोगों को तेज, सुगम और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी। भोपाल में हर रोज बैठकें लोकार्पण से पहले भोपाल के सुभाष नगर स्थित डिपो में हर रोज एमडी एस. कृष्ण चैतन्य बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने इंदौर में तीन दिन तक दौरा भी किया। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, मार्च में कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम ने इंदौर मेट्रो के संचालन को लेकर दौरा किया था। इसके बाद अगले ट्रैक पर मेट्रो को दौड़ाने की हरी झंडी भी दे दी थी। नियम के मुताबिक, सीएमआरएस की रिपोर्ट मिलने के 3 महीने के अंदर मेट्रो का संचालन शुरू करना होता है, वरना फिर से दौरा किया जाता है। पहले 15 जून थी तारीख, अब 20 जून फाइनल मेट्रो प्रबंधन सूत्रों की मानें तो पहले 15 जून को इंदौर में येलो लाइन के सेकंड फेज का लोर्कापण किया जाना था, लेकिन राज्यसभा चुनाव के चलते यह तारीख आगे बढ़ गई थी। अब 20 जून की तारीख फाइनल हुई है। इन कामों पर मंथन मेट्रो के सेकंड फेज के लोकार्पण से पहले मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) शेड्यूल, किराए और फेरे को लेकर मंथन कर रहा है। दरअसल, अभी मेट्रो सिर्फ 1 घंटा ही दौड़ रही है। नए शेड्यूल में गांधी नगर से रेडिसन चौराहे तक कुल 16 स्टेशनों की टाइमिंग, कहां-कितना किराया रहेगा और कितने फेरे लगेंगे? यह सब शामिल रहेगा। 15 जून तक पूरा शेड्यूल सामने आ सकता है। मेट्रो प्रबंधन 17 किलोमीटर पर मेट्रो चलाएगा। शुरुआती चरण में इस रूट पर रोजाना 25 से 40 हजार यात्रियों के सफर करने का अनुमान है, जो भविष्य में बढ़कर एक लाख तक पहुंच सकता है। कई आवासीय क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा यह एलिवेटेड कॉरिडोर गांधी नगर, लवकुश, सुखलिया, विजय नगर, स्कीम-78 और रेडिसन चौराहे जैसे प्रमुख आवासीय व व्यावसायिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा। इस रूट के दायरे में टीसीएस, इंफोसिस और यश टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के कैंपस, आईटी पार्क, सेज (SEZ), शैक्षणिक संस्थान और एयरपोर्ट शामिल हैं, जिससे हजारों कामकाजी पेशेवरों और छात्रों को तेज व आधुनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी। भोपाल के मुकाबले इंदौर मेट्रो आगे मेट्रो विकास के मामले में इंदौर, भोपाल से आगे चल रहा है। इंदौर मेट्रो के पहले फेज का संचालन 31 मई 2025 को ही शुरू हो गया था, जबकि भोपाल में ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर (सुभाष नगर से एम्स) का लोकार्पण 20 दिसंबर 2025 को हुआ था। भोपाल के मुकाबले इंदौर में ऐसे आगे काम इंदौर मेट्रो की येलो लाइन है। इसके पहले फेज में गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर-3 तक मेट्रो 31 मई 2025 को चलाई गई थी, जबकि भोपाल में ऑरेंज लाइन के प्रॉयोरिटी कॉरिडोर सुभाष नगर से एम्स के बीच मेट्रो का 20 दिसंबर-25 को लोकार्पण हुआ था। 21 दिसंबर से लोग मेट्रो में सफर करने लगे, यानी भोपाल मेट्रो से इंदौर मेट्रो 7 महीने आगे रही। अब सेकंड फेज का लोकार्पण हो रहा है, जबकि भोपाल में ऑरेंज लाइन का सेकंड फेज साल 2028 तक पूरा होगा। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि इंदौर में दोनों फेज में एलिवेटेड कॉरिडोर है, जबकि भोपाल में सेकंड फेज में करीब 3 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड रूट भी है। इसलिए सेकंड फेज 2028 में पूरा होगा। इंदौर मेट्रो फेज-2 के यह स्टेशन सुपर कॉरिडोर स्टेशन 2, 1, भौंरासला चौराहा, एमआर 10 रोड, आईएसबीटी, चंद्रगुप्त चौराहा, हीरा नगर, बापट चौराहा, मेघदूत गार्डन, विजय नगर चौराहा और मालवीय नगर चौराहा (रेडिसन होटल)। भोपाल में दो रूट पर चल रहा काम बता दें कि भोपाल में इस समय ऑरेंज लाइन का सुभाष नगर से करोंद और ब्लू लाइन का भदभदा से रत्नागिरि के बीच काम चल रहा है। ऑरेंज लाइन के ही सुभाष नगर से एम्स के बीच प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो पिछले साल दिसंबर से दौड़ने लगी थी। इसके बाद बाकी कामों पर फोकस शुरू हो गया है। 30 मार्च को टीबीएम को जमीन के अंदर 24 मीटर गहराई में उतारा गया था। इसके बाद कुल 3.39 किलोमीटर लंबी सुरंग की खुदाई की जा रही है। इसमें दो स्टेशन भी बनेंगे। मेट्रो अफसरों की मानें तो अगले 2 साल में अंडरग्राउंड रूट का काम पूरा कर लिया जाएगा। हाल ही में मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान अंडरग्राउंड रूट पर भी बात की थी। वहीं इंदौर मेट्रो के अब तक के काम और सेकंड फेज के लोकार्पण पर भी … Read more