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ASI की खुदकुशी से मचा हड़कंप, सुसाइड नोट में IPS पूरन कुमार पर गंभीर आरोप

रोहतक  हरियाणा के रोहतक में साइबर सेल में तैनात एक एएसआई ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली. पुलिस को घटनास्थल से तीन पन्नों का सुसाइड नोट और एक वीडियो मैसेज मिला है. मृतक एएसआई ने अपने सुसाइड नोट में दिवंगत आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. एएसआई ने लिखा है कि वाई पूरन कुमार भ्रष्टाचार में लिप्त थे और जातिवाद का सहारा लेकर सिस्टम को हाईजैक कर रहे थे. नोट में एएसआई ने कहा कि उसने “भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ शहादत” दी है और इस परिवार के खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग की है. सूत्रों के अनुसार, मृतक एएसआई किसी अहम केस की जांच टीम का हिस्सा था, जो आईपीएस वाई पूरन कुमार के गनमैन सुशील कुमार से जुड़े मामले से संबंधित थी.  फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है. सुसाइड नोट और वीडियो को फॉरेंसिक टीम ने कब्जे में ले लिया है. सुसाइड नोट में क्या लिखा  अपने सुसाइड नोट में एएसआई ने लिखा, 'संदीप कुमार S/O दयानन्द, गांव- जुलाना, जींद से हूं. मैने अपनी जिंदगी में हमेशा सच्चाई का साथ दिया है. मुझे सच्चा और नेक आदमी बहुत पसंद है मेरे दादाजी और छोटे दादाजी देश के लिए लड़े सेना में रहे. छोटे दादाजी तो 7 साल बर्मा में देश कि लड़‌ाई में कै में रहे. मेरी रगों में देशभक्ति है. देश और समाज से बड़ा कोई नहीं है. मैं भगत सिंह को अपना आदर्श मानता हूं क्योंकि उन्होंने देश कोआजाद करवाने में में जगाया है. लीजेंड थे. अगर भगत सिंह जैसे ना होते तो देश क्या देश आजाद होता? वो भाग सकते थे लेकिन नहीं भागे हमारी नस्लों को प्रेरणा देता है… आज समाज में एक बड़ा मुद्दा है भ्रष्टाचार और जातिवाद. हमेशा सच्चाई और आदर्श में बाधित करते हैं. हरियाणा में IAS अधिकारी और व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार करते हैं परन्तु BJP कि सरकार में कुछ ईमानदार अफसर थे जिन्होंने काफी हद तक भ्रष्टाचार पर लगाम लगा दी है. जो डीजीपी साहब ईमानदार और निडर व्यक्ति हैं. शुरुआत में बहुत ज्यादा कठिनाईयां आई मुझे माहौल में ढलने में. पर मेरा मन हमेशा सत्य के साथ था और रहेगा. इस नोट में उन्होंने आगे लिखा,  'हम अपराध पर लगाम लगाने में बहुत ज्यादा प्रयास किए और काफी हद तक बहुत से अफसरों का सहयोग मिला और अच्छा मार्गदर्शन मिला. सही के लिए प्रेरित किया परंतु आईजी पूरन कुमार का तबादला रोहतक रेंज में होते ही उन्होंने भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की तैनाती आईजी दफ्तर में कर दी और ईमानदार कर्मठ कर्मियों का तबादला कर दिया. उन्होंने जातिवाद का जहर हमारे मुलाजिमों में घोला. मुलाजिमों को आईजी दफ्तर में बुलाकर फाइलों के नाम पर डराकर पैसे लिए. और बिना शिकायत के रोहतक रेंज से फाइलें मंगाकर उनमें छोटी- मोटी कमियां निकालकर उन्हें मेंटली टॉर्चर किया. एसआईएस सुनील, गनमैन सुशील पैसे ऐंठते थे. महिला पुलिस को ऑफिस में बुलाकर ट्रांसफर के नाम पर परेशान करके यौन शोषण किया गया और सामान्य नागरिकों, व्यापारियों को बुलाकर फिजिकली और मेंटली टॉर्चर किया गया और मोटी रिश्वत ऐंठी गई. अपराध को बढ़ावा ही नहीं दिया बल्कि जुल्म की पराकाष्ठा की.' अपने नोट में उन्होंने कहा, 'कोई आवाज उठाने की कोशिश करता तो कहता कि मेरा बाल भी बांका… घरवाली आईएएस है और साला एमएलए है और पूरी फैमिली एससी आयोग में है. मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा. यहीं से आईजी पूरन कुमार को भ्रष्टाचार करने की ताकत मिलती थी और उन्होंने दबाकर भ्रष्टाचार किया. उच्च अधिकारियों और सीएम की जानकारी में यह बात आने पर उनका ट्रांसफर किया गया. ट्रांसफर के बाद एक व्यापारी, जिसे बदमाशों और गुंडों द्वारा पहले भी धमकी दी गई थी, उसको अपने ऑफिस में बुलाकर बेईज्जत किया औऱ मां-बहन की गालियां दी. उनके (व्यापारी) ऑफिस में जाकर गनमैन सुशील कुमार ने पैसे लिए जिसकी सीसीटीवी फुटेज और वॉयस रिकॉर्डिंग पेश करके जिसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. आईजी साहब का केस में नाम आने पर उन्होंने जातिगत आयोग का सहारा और राजनीतिकरण रंग देने के लिए झूठा सुसाइड नोट तैयार करके आत्महत्या की. जिस बारे में केवल गिरफ्तारी से बचने के लिए यह कदम उठाया और आईएएस वाली ईमानदार अफसरों को टारगेट करने का मौका मिल गया. पूरे हरियाणा में जातिगत जहर घोलकर ईमानदार और कर्मठ अधिकारियों को प्रताड़ित कर रहे हैं.' अंत में संदीप कुमार ने लिखा,  'यह सच्चाई और ईमानदारी की भ्रष्टाचार से लड़ाई है. इसमें सच्चाई सामने आनी चाहिए. आईएएस पत्नी अपना भ्रष्टाचार उजागर ना हो, संपत्ति की जांच ना हो, यह ढोंग कर रही है. परंतु सच्चाई नहीं हारनी चाहिए. यह हमारे देश और समाज के लिए आगे बढ़ने में बहुत ही जरूरी है. हमारे समाज के काले कव्वै और भ्रष्टाचारी इस लड़ाई को कम करने की कोशिश में हैं. यह भूल गए कि हमारी रगों में देशभक्ति कूट-कूटकर भरी हुई है. मेरे जैसे 100 जानें कुर्बान लेकिन देश नहीं झुकेगा और सच्चाई की जीत होगी. इस सच्चाई और ईमानदारी की लड़ाई में मैं पहली आहूति दे रहा हूं.'

अंतरराष्ट्रीय साजिश का खुलासा: कनाडा से लौटा युवक हथियारों सहित पकड़ा गया, पाक तस्करों से जुड़ा कनेक्शन

अमृतसर अमृतसर जिला देहाती पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी के नेटवर्क से संबंधित एक तस्कर को गिरफ्तार कर बड़ी संख्या में हथियार बरामद किए हैं। आरोपी का नाम अमरबीर सिंह उर्फ अमर, निवासी डेहरीवाल है। आरोपी के कब्जे से 6 पिस्तौल, 11 मैगजीन, .30 बोर के 91 कारतूस और 9 एमएम के 20 कारतूस बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी हाल ही में कनाडा से लौटा था और पाकिस्तान-आधारित तस्करों के संपर्क में था। पुलिस को शक है कि आरोपी पंजाब में अवैध हथियारों की सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा है, जो सीमापार से तस्करी के जरिए अपराधियों तक हथियार पहुंचाने का काम करता था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सीमापार से हथियार और नशे की तस्करी पर सख्त कार्रवाई की दिशा में एक बड़ा कदम है। एसएसपी देहाती मनिंदर सिंह ने कहा कि राज्य में संगठित अपराध और सीमापार तस्करी को खत्म करने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि पंजाब में शांति और सौहार्द बनाए रखा जा सके।   भारत-पाकिस्तान बॉर्डर से दो एके-47 और कारतूस बरामद सीमा सुरक्षा बल ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से दो एके-47 राइफल और मैगजीन बरामद की हैं। इसके अलावा एक पिस्टल और 10 जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए हैं। यह सब एक पैकेट में छुपाए गए थे।  डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला कि यह खेप पाकिस्तान से भेजी गई थी। इसके जरिए त्योहार के सीजन में पंजाब में आतंकी साजिश को अंजाम दिया जाना था। बरामद हुए हथियारों को अमृतसर के स्टेट ऑपरेशन सेल को सौंप दिया गया है।  मेहंदीपुर गांव के पास बॉर्डर फेंस से बरामद हथियारों को भारतीय सीमा सुरक्षा ने स्टेट ऑपरेशन सेल को सौंप दिया है। उन्होंने कहा कि बीएसएफ ने कहा कि सीमा पर हर संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है और किसी भी आतंकी या हथियार तस्करी की कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। ऑपरेशनल विवरण साझा करते हुए एसएसओसी अमृतसर के एआईजी सुखमिंदर सिंह मान ने बताया कि बीएसएफ अधिकारियों को खेमकरण सेक्टर के अंतर्गत भारत-पाक सीमा पर मेहदीपुर गांव के पास सीमा पार से हथियारों की खेप आने की सूचना मिली थी। इस पर कार्रवाई करते हुए गांव के इलाके में एक तलाशी अभियान चलाया और इलाके से हथियारों की एक खेप बरामद की गई।  उन्होंने कहा कि वर्तमान मामले में, बरामद हथियारों के स्रोत का पता लगाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने बताया कि इस अपराध में शामिल आरोपियों का पता लगाने और उन्हें पकड़ने के लिए जांच की जा रही है। इस संबंध में पुलिस स्टेशन एसएसओसी अमृतसर में शस्त्र अधिनियम की अलग अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। 

धर्मेंद्र प्रधान बोले—NDA में सीट बंटवारे पर 99 प्रतिशत सहमति, कुछ सीटों पर चर्चा जारी

पटना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बिहार चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के घटक दलों के बीच 99 प्रतिशत सीटों पर यह तय हो गया है कि कौन-सी पार्टी किस सीट से चुनाव लड़ेगी। उनके अनुसार, शेष सीटों पर बहुत जल्द निर्णय लिया जाएगा। NDA के पांचों घटक दलों के बीच बातचीत जारी प्रधान ने यहां एक होटल में भाजपा के मीडिया सेंटर के उद्घाटन के अवसर पर पत्रकारों से बातचीत में कहा, “राजग के पांचों घटक दलों के बीच बातचीत जारी है। लगभग सभी सीटों पर सहमति बन चुकी है।” उन्होंने यह बातें तब कही हैं जब राजग में सीट बंटवारे को लेकर मतभेद के स्वर उभरने लगे हैं। जनता दल यूनाइटेड (जद(यू)) ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी के हिस्से में गई कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह दे दिया है। सूत्रों का कहना है कि राजग में सीट बंटवारे को लेकर सब कुछ ठीक नहीं है, कुछ सीटों को लेकर पेंच फंसा हुआ है। हालांकि राजग में एक जुटता दिखाने के लिए जद(यू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, लोकजनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के उपेंद्र कुशवाहा ने ‘एक्स' पर यह जानकारी दी है कि “सीटों की संख्या तय हो गई है, कौन दल किस सीट पर लड़ेगा, इसकी सकारात्मक बातचीत अंतिम दौर में है। मोदी जी और नीतीश जी के नेतृत्व में राजग के सभी दल एकजुटता के साथ पूरी तरह तैयार हैं।” प्रधान ने दावा किया कि विपक्षी दलों को अपनी हार साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा “14 नवंबर के बाद एक बार फिर बिहार में राजग की सरकार बनेगी।” प्रधान ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्पष्ट मानना है कि पूर्वोत्तर भारत के विकास का मार्ग बिहार से होकर गुजरता है। उन्होंने कहा, “बिहार देश की राजनीतिक पाठशाला है। बिना बिहार की राजनीति को समझे, कोई भी व्यक्ति राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक रूप से परिपक्व नहीं हो सकता।”

सोयाबीन उत्पादक किसानों को लाभांवित करने भावांतर योजना की स्वीकृति

कोदो-कुटकी का पहली बार उपार्जन किये जाने का निर्णय सोयाबीन उत्पादक किसानों को लाभांवित करने भावांतर योजना की स्वीकृति प्रदेश में "RAMP" योजना को सैद्धांतिक रूप से लागू किये जाने की स्वीकृति राज्य के शासकीय पेंशनर, परिवार पेंशनर को देय मंहगाई राहत की दर में वृद्धि किये जाने का निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद के निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रमुख कोदो-कुटकी उत्पादक जिलों के कृषकों से पहली बार कोदो-कुटकी उपार्जन का किये जाने का निर्णय लिया, जिससे अधिक से अधिक जनजातीय कृषकों को फायदा होगा। इस के लिए रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना अंतर्गत प्रमुख कोदो-कुटकी उत्पादक जिलों जबलपुर, कटनी, मण्डला, डिंडोरी, छिंदवाडा, शहडोल, अनुपपुर, उमरिया, रीवा, सीधी एवं सिंगरौली के कृषकों से कोदो-कुटकी का उपार्जन किया जायेगा। साथ ही अन्य जिलों से मांग आने पर उन जिले के कृषकों से भी उपार्जन किये जाने पर विचार किया जायेगा। अन्न उत्पादक जिलों के कृषकों से अन्न कंसोर्टियम ऑफ फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (अन्न फेडरेशन) द्वारा कोदो-कुटकी का उपार्जन किया जायेगा। खरीफ 2025 में उत्पादित अन्न कुटकी 3500 रूपये प्रति क्विंटल एवं कोदो 2500 रुपये प्रति क्विंटल के मान से लगभग 30 हजार मेट्रिक टन का उपार्जन किया जायेगा। इसके लिए अन्न फेडरेशन को 80 करोड़ रूपये का ब्याज मुक्त ऋण शासन के मूल्य स्थिरीकरण कोष से प्रदाय किया जायेगा। इसके अतिरिक्त कृषको को प्रोत्साहन राशि के रूप में 1000 रुपये प्रति क्विंटल के मान से संबंधित कृषकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से प्रदाय किये जायेंगे। सोयाबीन किसानों के लिए भावांतर योजना की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा खरीफ वर्ष 2025 में प्रदेश के सोयाबीन के किसानों को लाभांवित किये जाने के लिए भारत सरकार की प्राईज डिफिसिट पेमेन्ट स्कीम लागू की गयी है, जो प्रदेश में भावांतर योजना कहलायेगी। प्रदेश में सोयाबीन भावांतर योजनांतर्गत 24 अक्टूबर, 2025 से 15 जनवरी, 2026 तक सोयाबीन का विक्रय, राज्य की अधिसूचित मंडियों में किया जायेगा। प्रदेश की मंडियों में 14 दिवस के सोयाबीन के विक्रय मूल्य के Weighted औसत के आधार पर सोयाबीन के मॉडल रेट की गणना की जायेगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य से विक्रय दर/मॉडल रेट अंतर की राशि पंजीकृत कृषकों के पोर्टल पर दर्ज बैंक खाते में डी.बी.टी. के माध्यम से अंतरित की जायेगी। एम.एस.पी 5328 रूपये है। 'रेशम समृद्धि योजना'' के क्रियान्वयन की सैद्धांतिक स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा भारत सरकार की सिल्क समग्र-2 योजना को 25% राज्यांश के साथ, राज्य में रेशम समृद्धि योजना के रूप में क्रियान्वयन की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई। योजना अंतर्गत हितग्राहियों को रेशम उत्पादन संबंधी 23 गतिविधियों में सहायता प्राप्त होगी, जिसमें सामान्य वर्ग के हितग्राही को इकाई लागत की 75 प्रतिशत और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 90 प्रतिशत आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी। इसमें क्रमशः 25 प्रतिशत एवं 10 प्रतिशत हितग्राही अंश रहेगा। योजना के क्रियान्वयन से मलबरी, वन्या और पोस्ट ककून क्षेत्रों में हितग्राहियों की सतत् रोजगार उपलब्ध होने के साथ उनकी आय में वृद्धि होगी। वर्तमान में कुल लागत इकाई राशि रूपये 3.65 लाख होती थी जिसमें 2.0875 लाख राज्य शासन से राज्य सहायता प्राप्त होती थी। रेशम समृद्धि योजना में इकाई की कुल लागत राशि रूपये 5 लाख होगी। उसमें से सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को केन्द्रांश राशि रूपये 2.50 लाख, राज्यांश राशि रूपये 1.25 लाख एवं हितग्राही का अंश राशि रुपये 1.25 लाख तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को केन्द्रांश राशि रूपये 3.25 लाख, राज्यांश राशि रूपये 1.25 लाख एवं हितग्राही का अंश राशि रूपये 0.50 लाख होगा। यह योजना रेशम किसानों के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध होगी। प्रदेश में (RAMP)" योजना को सैद्धांतिक स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा भारत सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, नई दिल्ली की "Raising and Accelerating MSME Performance" योजना को प्रदेश में सैद्धांतिक रूप से लागू किये जाने की स्वीकृति दी गयी हैं। योजनान्तर्गत प्रदेश के लिए स्वीकृत बजट 105 करोड़ 36 लाख रूपये अन्तर्गत राज्यांश की 30 प्रतिशत राशि 31 करोड़ 60 लाख रूपये की स्वीकृति दी गयी है। पेंशनर और परिवार पेंशनर को देय मंहगाई राहत की दर में वृद्धि मंत्रि-परिषद द्वारा राज्य के शासकीय पेंशनरों परिवार पेंशनरों को देय मंहगाई राहत की दर में वृद्धि किये जाने का निर्णय लिया गया हैं। राज्य के पेंशनरों / परिवार पेंशनरों को वर्तमान में देय मंहगाई राहत सातवें वेतनमान अंतर्गत 53 प्रतिशत एवं छठवें वेतनमान अंतर्गत 246 प्रतिशत में 1 सितम्बर 2025 (भुगतान माह अक्टूबर, 2025) से वृद्धि की जाकर कुल मंहगाई राहत सातवें वेतनमान अंतर्गत 55 प्रतिशत एवं छठवें वेतनमान अंतर्गत 252 प्रतिशत किये जाने का निर्णय लिया गया हैं। शासकीय पेंशनरों / परिवार पेंशनरों को मंहगाई राहत में वृद्धि करने पर राज्य के कोष पर इस वितीय वर्ष में लगभग 170 करोड़ रूपये का अतिरिक्त व्यय भार आयेगा। छत्तीसगढ़ शासन के पत्र 25 अगस्त 2025 के अनुक्रम में सहमति प्रदान किये जाने के लिए निर्णय लिया गया है। ''सरदार पटेल कोचिंग प्रशिक्षण योजना 2021 में नए प्रावधान सम्मिलित करने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद् द्वारा प्रदेश के "सरदार पटेल कोचिंग प्रशिक्षण योजना वर्ष 2021" के विद्यमान प्रावधानों के साथ अन्य प्रावधानों को सम्मिलित किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना अंतर्गत वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग के 5 हजार युवाओं को विभिन्न रोजगारोन्मुखी प्रतियोगी परीक्षाओं का निःशुल्क परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। अन्य निर्णय मंत्रि-परिषद् द्वारा आरक्षक (विसबल) 620 अरुण सिंह भदौरिया, 15वीं वाहिनी विसबल, इंदौर को प्रधान आरक्षक (विसबल) के पद पर क्रम से पूर्व पदोन्नति प्रदान किये जाने का निर्णय लिया गया हैं।  

राज्यसभा उपचुनाव में नया ड्रामा: पंजाब और चंडीगढ़ पुलिस में कस्टडी को लेकर झड़प

 चंडीगढ़ चंडीगढ़ पुलिस और पंजाब पुलिस के जवानों के बीच आज झगड़ा हो गया. यह घटना मंगलवार को दिन दहाड़े सुखना झील के पास हुई, जिसके चलते वहां भारी हंगामा हुआ. पंजाब पुलिस एक उपचुनव एप्लिकेंट नवनीत चतुर्वेदी, को हिरासत में लेना चाहती थी, जिसने राज्यसभा उपचुनाव के लिए नामांकन भरा है. चतुर्वेदी राजस्थान का निवासी है और उस पर आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों के हस्ताक्षर जाली करने का आरोप है. यह झगड़ा तब हुआ जब चंडीगढ़ पुलिस चतुर्वेदी को सुरक्षा कवर में ले जा रही थी. झगड़े का कारण नवनीत चतुर्वेदी की हिरासत थी. चतुर्वेदी ने अपने नामांकन में पंजाब से AAP के दस विधायकों को अपने प्रस्तावक (Proposer) के तौर पर बताया है.  AAP ने आरोप लगाया कि चतुर्वेदी ने विधायकों के जाली हस्ताक्षर किए हैं. इसी आरोप के चलते पंजाब पुलिस चतुर्वेदी को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही थी. चतुर्वेदी उस समय चंडीगढ़ पुलिस की सुरक्षा में था. सुखना झील के पास क्या हुआ? सुखना झील के पास जब चंडीगढ़ पुलिस की सुरक्षा में नवनीत चतुर्वेदी जा रहा था, तो पंजाब पुलिस के जवानों ने उसे जबरदस्ती हिरासत में लेने की कोशिश की. चंडीगढ़ पुलिस ने इसका विरोध किया, जिसके चलते दोनों पुलिस जवानों में खींचतान हुई और भारी हंगामा हुआ. चंडीगढ़ पुलिस ने चतुर्वेदी को पंजाब पुलिस के हवाले नहीं किया. नामांकन स्क्रूटनी के बाद इंटरसेप्ट यह घटना आज यानी 15 अक्टूबर सुबह तब हुई, जब नवनीत चतुर्वेदी अपने नामांकन की स्क्रूटनी के बाद चंडीगढ़ पुलिस की सुरक्षा में जा रहा था. पंजाब पुलिस ने कथित तौर पर चंडीगढ़ पुलिस के वाहन को इंटरसेप्ट किया. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चंडीगढ़ SSP कंवरदीप कौर को मौके पर आकर मामले को शांत करना पड़ा. क्या है विवाद की वजह? इस पूरे विवाद की जड़ पंजाब में होने वाला राज्यसभा उपचुनाव है. राजस्थान के निवासी नवनीत चतुर्वेदी ने इस उपचुनाव के लिए नामांकन भरा है. हस्ताक्षर जाली करने के आरोप में पंजाब पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज होने के बावजूद, खतरे की शिकायत पर उसे चंडीगढ़ पुलिस ने सुरक्षा कवर दिया था.

सिवनी में पुलिस पर बड़ी गाज: हवाला लूट मामले में SDOP-एसआई सहित 5 गिरफ्तार, 6 अब भी फरार

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिवनी लूट मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। सिवनी एसडीओपी पूजा पांडे सहित 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। इनमें से 5 आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। इसमें एसडीओपी सिवनी पूजा पांडे, एसआई अर्पित भैरम, कॉन्सटेबल योगेंद्र, नीरज और जगदीश शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखना, अपराध मुक्त वातावरण बनाना और नागरिकों की सुरक्षा पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों का मुख्य दायित्व है। अपने कर्तव्यों से हटकर कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को राज्य सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिवनी प्रकरण में जो भी दोषी पाए गए हैं, उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई भी होगी। प्रदेश में कानून सबके लिए बराबर है। कानून का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कोई भी हो। राज्य सरकार प्रदेश में सुशासन स्थापित करने सतत रूप से कार्य कर रही हैं, इस दिशा में किसी का हस्तक्षेप सहन नहीं होगा। मध्य प्रदेश पुलिस महकमे को झकझोर देने वाले सिवनी हवाला लूट मामले में पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना के सख्त निर्देशों के बाद बड़ी कार्रवाई की गई है। इस मामले की मुख्य आरोपी मानी जा रही SDOP (नगर पुलिस अधीक्षक/अनुविभागीय अधिकारी पुलिस) पूजा पाण्डेय और एसआई (उप-निरीक्षक) अर्पित भैरम सहित कुल 5 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। ​गिरफ्तार आरोपियों पर डकैती, अवैध रूप से रोकना, अपहरण और आपराधिक षडयंत्र जैसी गंभीर धाराओं (बीएनएस 310(2), 126(2), 140(3), 61(2) के तहत अपराध क्रमांक 473/2025, थाना लखनवाड़ा) के तहत मामला दर्ज किया गया है। ​हालांकि, एफआईआर में नामजद कुल 11 आरोपी पुलिसकर्मियों में से 6 पुलिसकर्मी अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। ​डीजीपी के निर्देश पर पुलिस की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि खाकी वर्दी में छिपे अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। इस चर्चित मामले ने पूरे प्रदेश में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये भी हैं आरोपी सिवनी मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 310(2) डकैती, 126(2) गलत तरीके से रोकना, 140(3) अपहरण और 61(2) आपराधिक षडयंत्र के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार किये गये 5 अधिकारी एवं कर्मचारियों के अलावा जिनके विरूद्ध एफआईआर दर्ज की गई, उनमें प्रधान आरक्षक माखन, प्रधान आरक्षक राजेश जंघेला, प्रधान आरक्षक रविंद्र उईके, आरक्षक रितेश वर्मा, एसएएफ आरक्षक केदार और एसएएफ आरक्षक सुभाष सदाफल शामिल हैं।

आजम खां ने वाई श्रेणी सुरक्षा लेने से किया इनकार, कहा- लिखित आदेश तक नहीं लूंगा

रामपुर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां ने वाई श्रेणी की सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार की ओर से लिखित आदेश नहीं मिलता तब तक वह सुरक्षा स्वीकार नहीं करेंगे। जेल से रिहा होने के बाद आजम ने कहा कि उन्हें सुरक्षा दिए जाने की कोई आधिकारिक जानकारी या दस्तावेज नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों से उन्होंने कहा है कि पहले वह सरकार का आदेश लेकर आएं तभी वह इस व्यवस्था को मानेंगे। सपा नेता ने कहा कि जब एक बार के विधायक को केंद्र सरकार के कमांडो मिल सकते हैं तो मुझे केवल वाई श्रेणी की सुरक्षा क्यों दी गई है। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि वाई श्रेणी की सुरक्षा में गाड़ी और अन्य खर्च का प्रावधान होता है, जिसका खर्च वह देने की स्थिति में नहीं हैं। जेल से बाहर आने के बाद से आजम लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। अब सुरक्षा को लेकर दिया गया यह बयान एक बार फिर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। आजम पहले वापस कर चुके हैं सुरक्षा सपा नेता पूर्व में 27 माह तक सीतापुर जेल में रहे थे। उस वक्त जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद उनको सुरक्षा वापस दे दी थी,लेकिन उस वक्त सपा नेता ने सुरक्षा वापस कर दी थी। छह पुलिस कर्मियों की निगरानी में चौबीस घंटे रहेंगे 23 माह बाद जेल से रिहा होने के सपा नेता आजम खां को पूर्व में दी गई वाई श्रेणी की सुरक्षा को वापस कर दिया गया है। वह छह पुलिस कर्मियों की निगरानी में चौबीस घंटे रहेंगे। सपा नेता आजम खां दस बार के विधायक, एक बार के लोकसभा सदस्य व राज्यसभा के सदस्य के साथ ही पांच बार प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। 2012-2017 तक कैबिनेट मंत्री रहे आजम खां की मुश्किलें भाजपा सरकार आने के बाद 2019 से बढ़नी शुरू हुई थीं। उन पर कानूनी शिकंजा कसता चला गया। एक के बाद एक सौ से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए। डूंगरपुर,यतीमखाना बस्ती को खाली कराने के नाम पर लूटपाट, चोरी व डकैती के साथ ही मारपीट समेत अन्य धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए। 23 माह पहले उन्हें बेटे के जन्म प्रमाणपत्र के मामले में कोर्ट से सजा हुई थी,जिसके बाद बेटे अब्दुल्ला आजम खां व पत्नी डॉ. तजीन फात्मा के साथ जेल चले गए थे। हालांकि अब सभी जमानत पर रिहा हो चुके हैं। उनको डूंगरपुर केस में भी सजा हो चुकी है। फिलहाल 23 माह बाद 23 सितंबर को सीतापुर जेल से रिहा हो गए थे। जेल जाने से पहले उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी, जिसे अब वापस कर दिया गया है। पुलिस अफसरों के मुताबिक वाई श्रेणी की सुरक्षा के तहत पांच पुलिस कर्मियों की एक गारद आवास पर तैनात होगी, जबकि तीन सुरक्षा कर्मी सपा नेता के साथ रहेंगे। सपा नेता को पहले से ही वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी। इसे खत्म नहीं किया गया था। अब फिर से सुरक्षा दे दी गई है। – विद्या सागर मिश्र, एसपी  

एडिशनल चार्ज पर मिलने लगेगा अतिरिक्त कार्य भत्ता, वित्त विभाग ने किया स्पष्ट

जयपुर राजस्थान में वित्त विभाग ने एक अहम आदेश जारी किया है। प्रदेश में एडिशनल चार्ज के भार से जूझ रहे अधिकारियों को अब इसकी एवज में स्पेशल पे मिलेगी।  वित्त विभाग ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि ऐसे अधिकारी जो 6 महीने से अधिक समय तक किसी विभाग के HOD या सचिव स्तर के पद का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं, उन्हें अतिरिक्त कार्य भत्ता (Special Pay) दिया जाएगा। राजस्थान में कई सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों में प्रमुख पद अतिरिक्त चार्ज पर चल रहे हैं। ऐसे में कई अफसर अपने मुख्य काम के साथ कई विभागों के अतिरिक्त चार्ज संभाल रहे हैं। यह आदेश राजस्थान सेवा नियम 1951 के नियम 35 और 50 के तहत जारी किया गया है। आदेश के अनुसार, जब किसी अधिकारी को अपने नियमित पद के साथ-साथ किसी अन्य रिक्त पद का चार्ज सौंपा जाता है, तो उसे पद रिक्त होने की तिथि से छह माह तक विशेष वेतन दिया जाएगा। यदि छह माह के भीतर उस पद पर नियमित नियुक्ति नहीं होती, तो उस पद को आस्थगित (Keep in Abeyance) माना जाएगा। यानी बजट तैयार करते समय वित्त विभाग इस पद की अनिवार्य नहीं मानते हुए उसे खत्म भी कर सकता है। हालांकि, यह प्रावधान सचिव, प्रमुख सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे वरिष्ठ पदों पर लागू नहीं होगा। इन उच्च पदों पर यदि छह माह से ज्यादा समय तक नियुक्ति नहीं होती है, तब भी उन्हें आस्थगित नहीं माना जाएगा और पूरी अवधि तक विशेष वेतन मिलता रहेगा। फिलहाल, प्रदेश के करीब 50 विभाग, बोर्ड और कॉर्पोरेशन ऐसे हैं जिनमें विभागाध्यक्ष (HOD) और वरिष्ठ पद अतिरिक्त चार्ज पर चल रहे हैं। यह आदेश उन सभी अधिकारियों पर भी लागू होगा जो वर्तमान में इस प्रकार के पदों का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं। इस फैसले को दीपावली से पहले अधिकारियों के लिए प्रोत्साहन और आर्थिक राहत के रूप में देखा जा रहा है।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को लोकभवन में उज्जवला योजना के तहत माताओं-बहनों को देंगे निशुल्क सिलेंडर का उपहार

प्रदेश की करोड़ों माताओं और बहनों को योगी सरकार का दीपावली गिफ्ट  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को लोकभवन में उज्जवला योजना के तहत माताओं-बहनों को देंगे निशुल्क सिलेंडर का उपहार  यूपी की 1.86 करोड़ माताओं-बहनों को मिलेंगे दो मुफ्त एलपीजी रिफिल सिलेंडर, त्योहार पर महंगाई से मिलेगी बड़ी राहत वर्ष 2025-26 में योजना को लागू करने के लिए योगी सरकार की ओर से 1500 करोड़ रुपए की धनराशि का प्रावधान  दो चरणों में होगा वितरण, पहला चरण अक्टूबर 2025 से दिसंबर 2025 तक और दूसरा चरण जनवरी 2026 से मार्च 2026 तक  पहले चरण में आधार प्रमाणित 1.23 करोड़ लाभार्थियों को मिलेगा लाभ, लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर होगी सब्सिडी  योजना के पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए हर जिले में सख्त मॉनिटरिंग और शिकायत निवारण तंत्र सक्रिय लखनऊ  योगी सरकार दीपावली के अवसर पर उत्तर प्रदेश की करोड़ों माताओं-बहनों के चेहरों पर मुस्कान लाने जा रही है। प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और वंचित परिवारों को राहत देते हुए दो निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर रिफिल देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को लोकभवन सभागार में इस योजना का शुभारंभ करेंगे और पात्र महिलाओं को मुफ्त सिलेंडर रिफिल का उपहार सौंपेंगे। यह कदम राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत वह गरीबों, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ ईंधन और आर्थिक संबल देने की दिशा में लगातार काम कर रही है।  1.86 करोड़ परिवारों को मिला कनेक्शन उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में की गई थी, ताकि वे ग्रामीण और वंचित परिवार जो अब तक लकड़ी, कोयला, गोबर के उपले जैसे पारंपरिक ईंधन का उपयोग कर रहे थे, उन्हें एलपीजी जैसे स्वच्छ ईंधन की सुविधा मिल सके। इस योजना ने ग्रामीण भारत की रसोई को न केवल धुएं से मुक्त किया, बल्कि महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को भी कम किया। उत्तर प्रदेश इस योजना के क्रियान्वयन में अग्रणी राज्य रहा है. यहां अब तक 1.86 करोड़ परिवारों को उज्ज्वला कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। दो चरणों में मिलेगा निःशुल्क रिफिल राज्य सरकार ने उज्ज्वला लाभार्थियों को प्रति वर्ष दो निःशुल्क एलपीजी रिफिल देने का निर्णय लिया है। यह वितरण वित्तीय वर्ष 2025-26 में दो चरणों में किया जाएगा। पहला चरण अक्टूबर 2025 से दिसंबर 2025 तक और दूसरा चरण जनवरी 2026 से मार्च 2026 तक। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रदेश सरकार ने ₹1500 करोड़ की धनराशि का प्रावधान किया है। आधार प्रमाणित लाभार्थियों को प्राथमिकता पहले चरण में आधार प्रमाणित लाभार्थियों को योजना का लाभ दिया जा रहा है। वर्तमान में राज्य में 1.23 करोड़ उज्ज्वला लाभार्थियों का आधार प्रमाणन पूरा हो चुका है। योजनान्तर्गत तीनों ऑयल कंपनियों (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) के माध्यम से यह वितरण सुनिश्चित कराया जा रहा है। राज्य स्तरीय समन्वयकों द्वारा मांगी गई ₹346.34 करोड़ की अग्रिम धनराशि ऑयल कंपनियों को प्रदान कर दी गई है, ताकि वितरण में किसी प्रकार की देरी न हो। ऐसे मिलेगा निःशुल्क रिफिल लाभार्थी अपने स्तर से प्रचलित उपभोक्ता दर (सब्सिडी सहित) के अनुसार 14.2 किग्रा एलपीजी सिलेंडर रिफिल खरीदेंगे। इसके बाद मात्र 3–4 दिनों के भीतर सब्सिडी की राशि उनके आधार प्रमाणित बैंक खातों में ऑयल कंपनियों द्वारा अंतरित कर दी जाएगी। केंद्र सरकार की और राज्य सरकार की ओर से सब्सिडी की राशि अलग-अलग लाभार्थियों के खातों में भेजी जाएगी। जिनके पास 5 किग्रा के सिलेंडर हैं, वे चाहें तो 14.2 किग्रा के सिलेंडर भी प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, जिनके पास केवल एक कनेक्शन है, उन्हें भी योजना का लाभ मिलेगा। आधार प्रमाणन के लिए विशेष अभियान जिन लाभार्थियों का आधार अभी प्रमाणित नहीं हुआ है, उनका प्रमाणन प्रशासन और ऑयल कंपनियों के सहयोग से अभियान चलाकर किया जा रहा है। ऑयल कंपनियों द्वारा लाभार्थियों को एसएमएस भेजे जा रहे हैं ताकि वे शीघ्र अपना आधार सत्यापित करा सकें। आधार प्रमाणन हेतु विशेष एप विकसित किया जा रहा है, और वितरकों के यहां अतिरिक्त लैपटॉप लगाए जा रहे हैं। प्रत्येक वितरक के यहां बैनर, फ्लेक्सी और कैम्प के माध्यम से प्रचार-प्रसार कराया जा रहा है। लाभार्थियों की सुविधा के लिए रोस्टर आधारित आधार प्रमाणन प्रणाली लागू की गई है। कड़ी मॉनिटरिंग और शिकायत निवारण व्यवस्था योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए दो स्तरों पर समितियां गठित की गई हैं। राज्य स्तर पर खाद्यायुक्त कार्यालय में गठित समिति योजना की नियमित समीक्षा करेगी। वहीं, जनपद स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति साप्ताहिक समीक्षा बैठकें करेगी। साथ ही, शिकायत निवारण प्रणाली के माध्यम से उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। पूर्ण मात्रा में गैस वितरण की निगरानी यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं को पूर्ण मात्रा (14.2 किग्रा) में गैस मिले। यदि किसी सिलेण्डर का वजन कम पाया जाता है, तो वितरक अपने संसाधनों से सिलेण्डर रिप्लेस करेगा। बांट माप विभाग और जिला प्रशासन को समय-समय पर जांच के आदेश जारी किए गए हैं। महिलाओं को महंगाई से राहत और स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के बीच राज्य सरकार का यह निर्णय गरीब परिवारों को महंगाई से राहत देने वाला कदम है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन के प्रयोग की प्रवृत्ति बढ़ेगी और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

2024-25 में रिकॉर्ड 4,000 नई फैक्ट्रियां हुईं स्थापित, कुल संख्या पहुंची 27,000 के पार

औद्योगिक क्रांति की राह पर उत्तर प्रदेश, योगी मॉडल से बदला उद्योग जगत का नक्शा 2024-25 में रिकॉर्ड 4,000 नई फैक्ट्रियां हुईं स्थापित, कुल संख्या पहुंची 27,000 के पार  फैक्ट्री की संख्या में वृद्धि नए उत्तर प्रदेश के आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदमों का प्रतीक निवेश, रोजगार और औद्योगिक विश्वास में नित नए इतिहास बना रहा है उत्तर प्रदेश  विगत साढ़े 8 वर्षों में योगी सरकार ने उद्योगों के लिए तैयार किया विशेष पारिस्थितिकी तंत्र  निवेशकों को आकर्षित करने के साथ ही उन्हें जोड़े रखने में भी सफलता प्राप्त कर रहा प्रदेश  लखनऊ  कभी पिछड़ेपन और बेरोजगारी के प्रतीक के रूप में देखा जाने वाला उत्तर प्रदेश आज उद्योगों का नया ग्रोथ सेंटर बन गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने जिस गति से औद्योगिक विकास की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, उसने पूरे देश को चकित किया है। वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड 4,000 नई फैक्ट्रियां स्थापित हुईं, जिससे प्रदेश में कुल फैक्ट्रियों की संख्या 27,000 के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। यह केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं, बल्कि नए उत्तर प्रदेश के आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदमों का प्रतीक है। योगी सरकार ने विगत साढ़े 8 वर्षों में उद्योगों के लिए एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया है जो निवेशकों को न केवल आकर्षित करता है बल्कि उन्हें लंबे समय तक जोड़े रखता है। राज्य में निवेश से संबंधी प्रक्रियाओं को पारदर्शी और निवेशक-हितैषी बनाया है, जिसके कारण उत्तर प्रदेश आज देश का “न्यू इनवेस्टमेंट हब” बन गया है। यहां स्थापित फैक्ट्रियों में इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, केमिकल और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियां शामिल हैं। तेज रफ्तार से बढ़ा औद्योगिक आधार वर्ष 2003 में उत्तर प्रदेश में सिर्फ 8,980 फैक्ट्रियां थीं। 2021 में यह संख्या बढ़कर 16,503 तक पहुंच गई। 2022 में यह संख्या 17,481 से होते हुए 2023 में 19,100 का आंकड़ा पार कर गई। 2025 में अब यह 27,000 तक पहुंच गई है जो उल्लेखनीय वृद्धि है। यह वृद्धि केवल संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक भूगोल में एक संरचनात्मक परिवर्तन का संकेत है। अब निवेश केवल नोएडा, ग्रेटर नोएडा या लखनऊ तक सीमित नहीं, बल्कि बरेली, कानपुर, झांसी, गोरखपुर, आजमगढ़ और प्रयागराज जैसे शहरों तक फैल चुका है। निवेश और रोजगार का नया युग 2023-24 की एएसआई रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश देश के टॉप-15 औद्योगिक राज्यों में चौथे स्थान पर पहुंच गया था। 2023-24 तक राज्य में 22,141 फैक्ट्रियां संचालित थीं, जो देश की कुल फैक्ट्रियों का 8.5 प्रतिशत हिस्सा थीं। इन इकाइयों में 12.80 लाख से अधिक वर्कर्स कार्यरत थे जो देशभर के औद्योगिक वर्कफोर्स का 8.3 प्रतिशत था। फैक्ट्री ग्रोथ की वार्षिक दर 16 प्रतिशत और वर्कर्स की संख्या में 8 प्रतिशत की वृद्धि ने दर्शाया कि प्रदेश में न केवल उद्योग बढ़ रहे हैं, बल्कि रोजगार के अवसरों में भी लगातार विस्तार हो रहा है। 2025 में 27 हजार फैक्ट्रीज की संख्या इसी का प्रमाण है।  गांवों तक पहुंची औद्योगिक क्रांति सरकार का लक्ष्य केवल शहरी औद्योगिक विकास नहीं, बल्कि ग्राम्य औद्योगिकरण को भी बढ़ावा देना है। एमएसएमई इकाइयों और स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन देने के लिए अनुदान, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और निर्यात सुविधा जैसे कदम उठाए गए हैं। आज यूपी के कई ग्रामीण इलाकों में छोटे उद्योग आत्मनिर्भर भारत की जड़ें मजबूत कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की यह औद्योगिक कहानी केवल विकास का नहीं, बल्कि विश्वास, पारदर्शिता और परिवर्तन का उदाहरण बन रही है।