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मुख्यमंत्री साय आज 65.16 करोड़ की डीबीटी राशि श्रमिकों के खातों में करेंगे अंतरित

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन करेंगे     रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 17 सितम्बर को अपरान्ह 2 बजे राजधानी रायपुर स्थित इंडोर स्टेडियम में विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर श्रम विभाग  द्वारा प्रदेश के एक लाख 84 हजार 220 श्रमिकों को 65 करोड़ 16 लाख 61 हजार 456 रूपए की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से भुगतान करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन करेंगे। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह एवं अन्य जनप्रतिनिधि भी रहेंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश के श्रमवीरों को आर्थिक मदद एवं उन्हें संबल बनाने के लिए छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। मंडल द्वारा 01 लाख 77 हजार 049 निर्माण श्रमिकों को 58 करोड़ 32 लाख 38 हजार 136 रूपए, छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल द्वारा 3 हजार 839 हितग्राहियों के खाते में 4 करोड़ 77 लाख 50 हजार 750 तथा छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल द्वारा 3 हजार 332 हितग्राहियों के खाते में 2 करोड़ 06 लाख 72 हजार 570 रूपए डीबीटी के जरिए अंतरित करेंगे।

नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच सांदीपनि सभागार में प्रात: 11 बजे से होगी

भोपाल  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस के अवसर पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल द्वारा राजभवन में आज रक्तदान और नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में राजभवन में आवश्यक तैयारियां पूर्ण हो गई है। रक्तदान और नि:शुल्क स्वास्थ्य जाँच की व्यवस्था राजभवन के सांदीपनि सभागार में की गई है। शिविर प्रातः 11 बजे से अपराह्न 1:30 बजे तक रहेगा। आमजनों के लिए राजभवन के गेट नम्बर 02 से प्रवेश की सुविधा रहेगी। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने बताया कि शिविर का आयोजन राजभवन और रेडक्रॉस के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है। शिविर अवधि में आमजन स्वेच्छा से रक्तदान कर सकते हैं। स्त्रीरोग और नेत्ररोग की आमजन निःशुल्क जाँच करा सकते हैं। श्री कोठारी ने नागरिकों से राजभवन में आयोजित हो रहे शिविर में भाग लेने का अनुरोध किया है।  

बिहार सरकार की सौगात: 42 कोर्स के लिए ब्याज मुक्त स्टूडेंट लोन

पटना बिहार में सीएम नीतीश कुमार की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले हर कैबिनेट बैठक में अलग-अलग तबके पर तोहफे की बरसात कर रही है। नीतीश सरकार ने अब बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना से उच्च शिक्षा के लिए मिलने वाले लोन पर ब्याज खत्म कर दिया है और कर्ज चुकाने की समय सीमा 2 से 3 साल तक बढ़ा दी है। एजुकेशन लोन लेने वाले स्टूडेंट्स को अब सूद नहीं देना होगा और कर्ज लौटाने की मियाद बढ़ने से मासिक किस्त (EMI) भी कम हो जाएगी। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसकी जानकारी खुद नीतीश ने एक ट्वीट में दी है। बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत साधारण बीए, बीएससी, बीकॉम से लेकर मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट जैसे 42 तरह के कोर्स (कोर्स लिस्ट की पीडीएफ कॉपी नीचे है) को पूरा करने के लिए राज्य सरकार बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम लिमिटेड के जरिए 4 लाख रुपये तक का कर्ज देती है। इसका लाभ बिहार से बोर्ड या पॉलिटेक्निक पास स्टूडेंट्स को मिलता है। साथ ही झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के संस्थानों से इसी तरह की डिग्री वाले बिहार मूल के छात्र-छात्राओं को भी योजना का फायदा मिलता है। सामान्य तौर पर उम्र सीमा 25 साल है, लेकिन पीजी कोर्स के लिए 30 साल तक के स्टूडेंट आवेदन कर सकते हैं। बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड स्कीम के तहत 4 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन मिलता है। इस कर्ज पर 4 परसेंट की इंटरेस्ट रेट से ब्याज लगता था। महिला, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर को मात्र 1 फीसदी सूद देना होता था। सरकार ने अब इस ब्याज को पूरी तरह खत्म करने का फैसला लिया है, जिसका लाभ आवेदकों को आगे मिलेगा। 2 लाख तक का लोन लौटाने के लिए पहले 5 साल की मियाद थी, जिसे सरकार ने अब 7 साल कर दिया है। 2 लाख से ऊपर का कर्ज वापस करने के लिए पहले 7 साल की मियाद थी, जिसे अब 10 साल कर दिया गया है। नौकरी मिलने के छह महीने या पढ़ाई खत्म होने के एक साल बाद कर्ज लौटाना शुरू होता है। नौकरी नहीं हो या आय नहीं हो तो जून और दिसंबर में शपथ पत्र दाखिल कर कर्ज वापसी को टाला जा सकता है। नीतीश सरकार ने उच्च शिक्षा में बिहार की सकल नामांकन दर (GER) को बढ़ाने के लिए सात निश्चय के तहत 2015 से 2020 वाले कार्यकाल में स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को लागू करने का फैसला किया था। 2021-22 में बिहार का जीईआर बढ़कर 17.1 फीसदी तक पहुंचा है जो एक साल पहले 15.9 परसेंट था। जब योजना की शुरू हुई थी, तब बिहार का जीईआर 14.3 फीसदी था। इस समय उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर का राष्ट्रीय औसत 28.4 फीसदी है जो योजना की शुरुआत के वक्त 24 प्रतिशत था।

मुख्यमंत्री ने की गड्ढामुक्ति, सड़क मरम्मत अभियान की विभागवार समीक्षा

मुख्यमंत्री का निर्देश, त्योहारों से पहले सभी सड़कें दुरुस्त हो जाएं मुख्यमंत्री ने की गड्ढामुक्ति, सड़क मरम्मत अभियान की विभागवार समीक्षा मुख्यमंत्री ने रेस्टोरेशन व विशेष मरम्मत में 2,750 किमी सड़कें चिन्हित, काम में तेजी के निर्देश गड्ढामुक्ति अभियान में अब तक 21.67% प्रगति, 44,196 किमी सड़कों का है लक्ष्य मुख्यमंत्री की चेतावनी, नगरीय अवस्थापना के कार्य समय पर और पारदर्शिता के साथ हों, अन्यथा महापौर के अधिकारों पर होगा पुनर्विचार उत्तर-दक्षिण कॉरीडोर की रूपरेखा पर भी हुआ विमर्श, बोले मुख्यमंत्री, बेहतर होगी कनेक्टिविटी और आर्थिकी को भी मिलेगा बल सड़क नवीनीकरण में पीडब्ल्यूडी ने 84.82% प्रगति दर्ज की, अन्य विभागों को भी गति बढ़ाने के निर्देश रेस्टोरेशन व विशेष मरम्मत में 2,750 किमी सड़कें चिन्हित, काम में तेजी के निर्देश त्योहारों के दृष्टिगत 114 मार्ग असंतोषजनक स्थिति में पाए गए, मुख्यमंत्री ने तुरंत सुधार कर सुचारु यातायात सुनिश्चित करने को कहा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मॉनसून वर्षा के कारण खराब हुईं सड़कों की मरम्मत और आवश्यकतानुसार पुनर्निर्माण के लिए जारी कार्यवाही को तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि हाई-वे हों या एक्सप्रेस-वे, ग्रामीण सड़कें हों या नगरीय क्षेत्र की सड़कें, दुर्गा पूजा, दशहरा, दीपावली और छठ जैसे आगामी प्रमुख पर्वों से पहले सभी महत्वपूर्ण मार्ग पूरी तरह अच्छी स्थिति में होनी चाहिए, ताकि आमजन को असुविधा न झेलनी पड़े। मुख्यमंत्री, मंगलवार को विभिन्न विभागों के साथ महत्वपूर्ण बैठक में सड़कों की मररमत, गड्ढामुक्ति अभियान आदि की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में अधिकारियों ने गड्ढा मुक्ति अभियान की कार्ययोजना के संबंध में अवगत कराया कि प्रदेश की कुल 6,78,301 सड़कों (लंबाई 4,32,989 किमी) में से 44,196 किमी को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में औसतन 21.67 प्रतिशत प्रगति दर्ज हुई है। मुख्यमंत्री ने एनएचएआई, मंडी परिषद, पीडब्ल्यूडी, ग्राम विकास, पंचायती राज, नगर विकास, सिंचाई, गन्ना एवं चीनी विकास सहित विभिन्न विभागों से अद्यतन स्थिति की जानकारी लेते हुए निर्देश दिया कि सभी विभाग लक्ष्य की प्राप्ति में समान गति बनाएं और कमजोर प्रगति वाले विभाग और बेहतर कार्य करें। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की सड़कों की मरम्मत में तेजी की अपेक्षा जताई।  नगर विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगमों में अवस्थापना संबंधी कार्यों की धनराशि का समय से और सही उपयोग सुनिश्चित किया जाए। कार्य का आवंटन पारदर्शिता के साथ हो और कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो। अन्यथा की स्थिति में महापौरों के अधिकारों पर पुनर्विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिस भी नगर निगम में ईईएसएल का बकाया है, उसका तत्काल भुगतान करा दिया जाए।    सड़क नवीनीकरण कार्यों की समीक्षा में बताया गया कि 31,514 किमी लंबाई की सड़कों को इसमें शामिल किया गया है। लोक निर्माण विभाग ने इसमें 84.82 प्रतिशत प्रगति दर्ज की है। मुख्यमंत्री ने कहा किया कि नवीनीकरण कार्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करना सभी विभागों की जिम्मेदारी है, इसमें कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। बैठक में अवगत कराया गया कि रेस्टोरेशन एवं विशेष मरम्मत के अंतर्गत 2,750 किमी सड़कें चिन्हित की गई हैं। अधिकारियों ने जानकारी दी कि ग्रामीण विकास विभाग ने इसमें 62.99 प्रतिशत प्रगति दर्ज की है, नगर विकास विभाग ने 35.50 प्रतिशत और अवसंरचना एवं औद्योगिक विकास विभाग ने 48.77 प्रतिशत प्रगति दर्ज की है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 30 सितम्बर तक लोक निर्माण विभाग द्वारा सर्वे पूरा कर कार्ययोजना शासन को प्रस्तुत की जाए। त्योहारों को दृष्टिगत रखते हुए मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि 649 मार्ग संतोषजनक स्थिति में हैं, जबकि 114 मार्ग असंतोषजनक स्थिति में पाए गए हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इन मार्गों को तत्काल सुधार कर सुचारु यातायात सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के समय सड़कों की स्थिति प्रदेश की छवि से जुड़ी होती है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान प्रदेशवासियों की सुविधा और सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ा है। इसलिए सभी विभागीय अधिकारी पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कार्यों की प्रगति की दैनिक निगरानी हो तथा शासन स्तर पर नियमित रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर के विकास की रूपरेखा पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में अधिकांश राजमार्ग और एक्सप्रेसवे पूर्व-पश्चिम दिशा में केंद्रित हैं, ऐसे में अब आवश्यकता है कि नेपाल सीमा से लेकर प्रदेश के दक्षिणी छोर तक फैले जिलों को जोड़ने वाला एक सुदृढ़ उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर तैयार किया जाए। इस उद्देश्य से राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) के अंतर्गत आने वाले हिस्सों में एनएचएआई का सहयोग लिया जाए और शेष मार्गों का निर्माण, सुदृढ़ीकरण तथा चौड़ीकरण राज्य स्तर पर कराया जाए। जहां आवश्यक हो, वहां ग्रीनफील्ड रोड परियोजनाएं प्रस्तावित की जाएं।

मतदाता सूची में नाम जोड़ने का आह्वान: नवदीप रिणवा ने दिया संदेश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम), लखनऊ में उत्तर प्रदेश के समस्त 75 जनपदों में प्रत्येक जनपद से एक सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं एक बूथ लेवल अधिकारी को निर्वाचक नामावली से संबंधित विधिक प्राविधानों, ईआरओ नेट, बीएलओ ऐप, विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण की प्रक्रियाओं के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान किया गया।     मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री नवदीप रिणवा ने उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि हर पात्र नागरिक का नाम निर्वाचक नामावली में दर्ज हो, यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि निर्वाचक नामावली को त्रुटिरहित बनाये रखने के साथ समावेशी पंजीकरण सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। प्रशिक्षण में सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों एवं बूथ लेवल अधिकारियों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम-1960, मैनुअल ऑन इलेक्टोरल रोल-2023 में उल्लिखित विधिक दायित्वों, बीएलओ और सुपरवाइजरों के साथ समन्वय, निर्वाचक नामावली में दावे-आपत्तियों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण, ईआरओ नेट और बीएलओ ऐप के तकनीकी पक्षों तथा फील्ड अनुश्रवण की प्रक्रिया से अवगत कराया गया।      मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण प्राप्त एईआरओ तथा बीएलओ मास्टर टेªनर के रूप में अपने-अपने विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में अपने समकक्ष एवं अधीनस्थ एईआरओ, बीएलओ और सुपरवाइजरों को भी छोटे-छोटे समूहों में प्रशिक्षित करें, ताकि प्रत्येक स्तर पर प्रक्रिया की गुणवत्ता बनी रहे। उन्होंने मतदाताओं की सुविधा हेतु मतदेय स्थलों में नए अनुभागों के गठन के संबंध में परीक्षण कराते हुए नियमानुसार कार्यवाही किये जाने के भी निर्देश दिए।     आगामी विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण के संबंध में अवगत कराते हुए विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण के दृष्टिगत वर्ष 2003 की निर्वाचक नामावली को वर्ष 2025 की निर्वाचक नामावली के साथ मैपिंग किए जाने से संबंधित प्रक्रिया से अवगत कराया गया। बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर गणना-प्रपत्र वितरित करने, भरने में सहयोग करने/एकत्रित करने/मतदाता का सत्यापन तथा उसे बीएलओ ऐप पर अपलोड करने की प्रक्रिया से अवगत कराया गया।      पूर्व में प्रदेश के 75 जनपदों के जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं समस्त 403 विधानसभाओं के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को विभिन्न चरणांे में प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। आज के प्रशिक्षण सत्र के प्रत्येक जनपद में से एक एईआरओ तथा एक बीएलओ को मास्टर टेªनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जो अपने जनपद में अन्य समस्त एईआरओ तथा बीएलओ को प्रशिक्षण प्रदान करेगें। सम्पर्क सूत्रः सी0एल0 सिंह ——————-

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो से पहले 19 सितंबर को ग्रेटर नोएडा में सीएम योगी की समीक्षा बैठक

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी 19 सितंबर को ग्रेटर नोएडा दौरे पर आएंगे। वह इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित होने जा रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2025 की तैयारियों का समीक्षा बैठक के माध्यम से निरीक्षण करेंगे। बैठक में प्रदेश के सभी विभागों के प्रमुख सचिव, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। 25 सितंबर से शुरू होगा ट्रेड शो इंडिया एक्सपो सेंटर में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाला यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2025 प्रदेश का एक प्रमुख आर्थिक, औद्योगिक और व्यापारिक आयोजन है। इस बार यह ट्रेड शो अपने तीसरे संस्करण में प्रवेश कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस भव्य आयोजन का उद्घाटन कर सकते हैं। अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन आयोजन की तैयारियां पीएम के संभावित आगमन को ध्यान में रखते हुए की जा रही हैं। यदि प्रधानमंत्री का दौरा तय होता है तो मुख्यमंत्री 24 सितंबर को दोबारा ग्रेटर नोएडा आएंगे। 1500 से अधिक पुलिसकर्मियों पर रहेगी सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बेहद चाक-चैबंद रखी जाएगी। सूत्रों के अनुसार 1500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। सुरक्षा बलों में डीसीपी, एडीसीपी, एसीपी, निरीक्षक, उपनिरीक्षक और कांस्टेबल शामिल होंगे। 7 कंपनियां भी सुरक्षा ड्यूटी में लगाई जाएंगी। प्रधानमंत्री के हेलीकॉप्टर से आने की संभावना है, लेकिन सड़क मार्ग से आने के विकल्प को लेकर भी तैयारियां पूरी कर ली गई है।   सरकार और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद प्रदेश सरकार और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण, नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण साथ ही जिला प्रशासन इस बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। ट्रेड शो के दौरान देश-विदेश के हजारों उद्यमी, निवेशक और कारोबारी प्रतिनिधि ग्रेटर नोएडा आएंगे जिसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही है।

परिवहन विभाग का फैसला: लाखों लोगों के पुराने चालान रद्द, मिलेगी बड़ी राहत

लखनऊ यूपी के परिवहन विभाग ने बड़ा फैसला करते हुए 2017 से 2021 के बीच काटे गए लाखों ई-चालान माफ कर दिए हैं। इससे सीधे तौर पर लाखों वाहन मालिकों को राहत मिली है। अब इन चालानों को पोर्टल पर “Disposed – Abated” (यदि मामला कोर्ट में लंबित था) और “Closed – Time-Bar” (यदि कार्यालय में लंबित था और समय-सीमा निकल चुकी है) की श्रेणी में दिखाया जाएगा। साथ ही इन चालानों से जुड़े फिटनेस, परमिट, वाहन ट्रांसफर और एचएसआरपी (हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट) जैसे अवरोध भी स्वतः हट जाएंगे। हालांकि, टैक्स से जुड़े चालान इस राहत के दायरे से बाहर रहेंगे। परिवहन विभाग के अनुसार, 2017 से 2021 के बीच कुल 30, 52,090 ई-चालान काटे गए थे। इनमें से 12,93,013 लंबित थे जबकि 17,59, 077 पहले ही निस्तारित हो चुके हैं। इस निर्णय के बाद अब ये ई-चालान खुद ही निरस्त हो जाएंगे। इसके साथ ही एक महीने के भीतर सभी चालानों की स्थिति पोर्टल पर अपडेट कर दी जाएगी। जहां वाहन मालिक चालान का स्टेटस देख सकेंगे। ये करें वाहन मालिक – यदि आपका चालान 2017–2021 का है और पोर्टल पर अभी भी लंबित या कोई ब्लॉक दिखा रहा है, तो एक महीने बाद ई-चालान/परिवहन पोर्टल पर जाकर स्थिति जांचें। – अगर मामला कोर्ट में पेंडिंग था, तो “Disposed – Abated” दिखेगा और सभी अवरोध हट जाएंगे। – टैक्स वाले मामलों में यह राहत लागू नहीं होगी और वे केवल टैक्स कानून के तहत ही निस्तारित होंगे। – मदद के लिए हेल्पलाइन 149 या नजदीकी RTO/ARTO से संपर्क किया जा सकता है। इसलिए लिया गया यह निर्णय इस फैसले के तहत केवल उन्हीं चालानों को माफ किया जाएगा जो 31 दिसंबर 2021 तक कोर्ट में लंबित थे। वहीं, जो चालान कभी कोर्ट नहीं भेजे गए और अब समय-सीमा पार कर चुके हैं, उन्हें भी प्रशासनिक रूप से बंद किया जाएगा। टैक्स से जुड़े चालान, गंभीर अपराध, दुर्घटना या आईपीसी से जुड़े मामले इस राहत से बाहर रहेंगे। यह निर्णय कानून का पालन सुनिश्चित करने, जनता को अनावश्यक चालानों और ब्लॉकों से राहत देने, सेवाओं को समय पर उपलब्ध कराने और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए लिया गया है। हर हफ्ते डैशबोर्ड पर दिखेगी प्रगति रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर सभी पेंडिंग चालानों का पोर्टल पर निपटारा दिखेगा। इसके लिए हर हफ्ते एक डैशबोर्ड पर प्रगति रिपोर्ट डाली जाएगी। एनआईसी पोर्टल में जरूरी बदलाव कर रहा है ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित रहे। टैक्स से जुड़ी देनदारियां, पहले से जमा जुर्माना और कोर्ट आदेश यथावत रहेंगे।

अयोध्या की दिवाली होगी इस बार अनोखी, गाय के गोबर से बने दीप करेंगे रोशनी

अयोध्या इस बार की अयोध्या की दीवाली एक अनोखे और ऐतिहासिक नजारे की साक्षी बनेगी. दरअसल, श्रीराम जन्मभूमि नगरी इस वर्ष 26 लाख दीपों की अद्वितीय रोशनी से जगमगाने वाली है. इन दीपों में सबसे खास रहेंगे जयपुर से आए पांच लाख गोमय दीपक. ये दीपक अपनी अनोखी संरचना और महक से पूरी रामनगरी को आध्यात्मिक और पर्यावरणीय ऊर्जा से आलोकित करेंगे. ये साधारण मिट्टी के दीपक नहीं, बल्कि गाय के गोबर और दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार किए गए खास दीपक हैं. इनमें गोबर के साथ जटामासी, अश्वगंधा, रीठा, देसी घी, काली हल्दी, मोरिंगा पाउडर, नीम, तुलसी और अन्य कई प्राकृतिक तत्वों का समावेश है. इन विशेष तत्वों की वजह से जब ये दीपक जलेंगे तो केवल रोशनी ही नहीं देंगे, बल्कि हवन सामग्री जैसी दिव्य सुगंध भी फैलाएंगे. महिलाओं की आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं ये दीपक जयपुर की पांच स्वैच्छिक सेवा संस्थाओं से जुड़ी लगभग 50 महिलाएं दिन-रात इन दीपकों के निर्माण में जुटी हुई हैं. टोंक रोड स्थित पिंजरापोल गौशाला के वैदिक पादप अनुसंधान केंद्र में रोजाना हजारों दीपक तैयार किए जाते हैं. माता रानी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं प्रतिदिन लगभग 5 हजार दीपक बनाती हैं. और इन्हें एक दीपक तैयार करने में सिर्फ डेढ़ मिनट का समय लगता है. यह काम महिलाओं को आजीविका और आत्मनिर्भरता दोनों दे रहा है. साथ ही ग्रामीण कारीगरों और गौशालाओं को भी जोड़ रहा है. गोमय दीपकों की खासियत इन दीपकों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये बेहद हल्के हैं और गिरने पर टूटते नहीं हैं. यह एक बार इस्तेमाल होने वाले दीपक नहीं हैं, बल्कि इन्हें कई बार जलाया जा सकता है. जलने के बाद इन्हें मिट्टी या पौधों के पास डाल दिया जाए तो ये उर्वरक (फर्टिलाइजर) की तरह काम करते हैं. इस प्रकार ये दीपक न केवल रोशनी और सुगंध देंगे बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, बल्कि उसे पोषण देंगे. यह प्रयोग भारतीय परंपराओं में वर्णित “पंचगव्य” की भावना को दर्शाता है, जो यह संदेश देता है कि आधुनिक युग में भी स्वदेशी और पर्यावरण-संरक्षण आधारित नवाचारों को अपनाया जा सकता है. जब 3 अक्टूबर को जब पांच लाख गोमय दीपक अयोध्या में जलेंगे, तो वह दृश्य न सिर्फ दिव्य और भव्य होगा, बल्कि यह दर्शाएगा कि भारतीय संस्कृति किस तरह विज्ञान, प्रकृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम है. महिलाओं की मेहनत, स्वदेशी सामग्रियों का उपयोग और पर्यावरण के प्रति यह सजगता मिलकर इस बार की “अयोध्या दीपावली” को एक नई पहचान और ऊंचाई देने जा रही है. यह पहल साबित करती है कि यदि हम चाहें तो पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक सोच को जोड़कर त्योहारों को और भी अर्थपूर्ण और प्रेरक बना सकते हैं.

महिला-पुरुष और गोरे-सांवले का भेद मिटाएगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिसर्च में बड़ा दावा

भोपाल  भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (आइसर) की लैब में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिस्टम्स से जुड़ा एक महत्वपूर्ण शोध कार्य किया गया है। ये शोध एआइ में महिला-पुरुष, ग्रामीण-शहरी और गोरे-सांवले आदि के बीच लगातार पनप रहे पक्षपात को खत्म करेगा। इससे एआइ के प्रति भरोसा बढ़ेगा और गलतियां भी कम होंगी। दरअसल, एआइ मॉडल को विकसित करने के लिए करोड़ों-अरबों तस्वीरों, टेक्स्ट और आवाजों समेत अन्य प्रकार की सूचनाएं विभिन्न माध्यम से दी जाती हैं। लोग जानकारी को समझने व याद करने की जगह ‘शॉर्टकट’ को अपनाते हैं, ऐसे में एआइ गलतियां करता है, लेकिन आइसर की इस तकनीक से ये सारे पूर्वाग्रह खत्म होंगे। एआइ का ‘शॉर्टकट’ भारतीयों के लिए दिक्कत अधिकांश एआइ मॉडल्स को यूरोप और अमेरिकी वातावरण दिया गया है। यही कारण है कि जब कोई तस्वीर मांगी जाती है, तो वह यूरोप-अमेरिकी पुरुषों की देता है, लेकिन महिला और भारतीयों की फोटो के लिए विशेष प्रॉम्प्ट देना होता है। एआइ पुरुष उम्मीदवारों को महिलाओं से ज्यादा योग्य मान लेता है और गोरे लोगों की अपेक्षा सांवलों को कम प्राथमिकता देता है। आइसर भोपाल के पीएचडी शोधार्थी राजीव द्विवेदी और बीएस छात्र अंकुर कुमार ने असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विनोद कुर्मी के मार्गदर्शन में दो साल की कड़ी मेहनत के बाद ’जेनेरलाइज्ड मल्टी बायस मिटिगेशन’ (जीएमबीएम) नामक टेक्नोलॉजी विकसित की है। जीएमबीएम दो चरणों में करती है काम -पहला एडेप्टिव बायस इंटीग्रेटेड लर्निंग (एबीआइएल): इसमें एआई को सभी प्रकार के ’पक्षपात’ (बायस) को पहचानना सिखाया जाता है। -ग्रैडिएंट सप्रेशन फाइन ट्यूनिंग: इसमें एआई से उन पक्षपातपूर्ण प्रवृत्तियों को हटा दिया जाता है, जिससे वह निष्पक्ष और भरोसेमंद बन सके।

ऊर्जा क्षेत्र में ओबरा की वापसी, 2320 मेगावाट उत्पादन के साथ फिर बना ‘पावर किंग’

ओबरा यूपी में ऊर्जा के क्षेत्र में ओबरा तापीय परियोजना का स्वर्णिम इतिहास रहा है। परियोजना के स्थापना के बाद यहां स्थापित तापीय बिजली इकाईयों से होने वाले उत्पादन से सूबे के कई हिस्से रोशन हुए।धीरे-धीरे इसकी क्षमता में वृद्धि होने के बाद इसका नाम देश के पटल पर भी जाना पहचाना जाने लगा। यह यूपी की पुरानी बिजली परियोजनाओं में शामिल है। जिससे निर्माण के इतने वर्षों बाद आज भी यहां की पुरानी इकाईयों से बदस्तूर उत्पादन जारी है। हालांकि ओबरा डैम के संकुल में स्थापित इस परियोजना के आसपास नई परियोजनाओं को लगाने के लिए आज भी अनुकूल व पर्याप्त जगह होने के साथ ही उससे जुड़े सभी संसाधन भी उपलब्ध होने के कारण इसके विस्तारीकरण पर भी काफी काम किया गया। जिसके फलस्वरूप इस परियोजना के विस्तार के रूप में ओबरा ''''सी'''' तापीय परियोजना ने अपना मुकाम हासिल कर उत्पादन के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। 60 के दशक में वजूद में आया था ओबरा तापीय परियोजना 60 के दशक में वजूद में आये ओबरा तापीय परियोजना की 50 मेगावाट क्षमता की पांच इकाइयों का निर्माण कार्य शुरू हुआ। परियोजना की पहली इकाई से 15 अगस्त 1968 को कामर्शियल उत्पादन शुरू हुआ। इसके अलावा दूसरी इकाई से 11 मार्च 1968 को कामर्शियल उत्पादन शुरू हुआ। इसके बाद तीसरी इकाई से 13 अक्टूबर 1968, चौथी इकाई से 16 जुलाई 1969 और पांचवी इकाई से लगभग दो साल बाद 30 जुलाई 1971 को कामर्शियल उत्पादन शुरू हुआ। जिसके बाद ओबरा तापीय परियोजना का नाम देश के पटल पर जाने जाना लगा। इसके बाद तापीय परियोजना का विस्तार करते हुए 70 के दशक में ओबरा तापीय परियोजना में 100 मेगावाट क्षमता वाली तीन इकाइयों का निर्माण हुआ। जिनमें 100 मेगावाट वाली छठवीं इकाई से चार अक्टूबर 1973 को कामर्शियल उत्पादन शुरू कर उसे ग्रिड से जोड़ा गया। सातवीं से 14 दिसम्बर 1974 और आठवीं से एक जनवरी 1976 को कामर्शियल उत्पादन शुरू कर एक स्वर्णिम इतिहास लिखा गया। 1979 से 82 तक 200 मेगावाट की पांच इकाई का निर्माण प्रदेश में बिजली की मांग बढ़ती गयी ओबरा तापीय परियोजना का विस्तार होता रहा है। पानी और कोयला उपलब्ध होने पर 1979 से लेकर 1982 के बीच 200 मेगावाट वाली पांच इकाइयों का निर्माण हुआ। जिसके बाद ओबरा तापीय परियोजना देश की सबसे बड़ी परियोजना में शुमार हो गया। लेकिन समय के साथ 50 मेगावाट की पांच इकाइयों और 100 मेगावाट की तीन इकाइयों का समय सीमा पूरी होने के बाद इन इकाइयों को उत्पादन से बाहर कर दिया गया। सरकार ने 1320 मेगावाट वाली ओबरा सी परियोजना की घोषणा की। जिसके बाद दिसंबर 2016 में ओबरा सी परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हुआ। जिसका नौ फरवरी 2024 को सीओडी प्रक्रिया पूरी कर कामर्शियल उत्पादन पर ले लिया गया। पहली इकाई से उत्पादन शुरू होने के उपरान्त प्रबंधन ने दूसरी इकाई से भी जल्द से जल्द उत्पादन शुरू करने के लिए निर्माण कार्य में तेजी लाना शुरू कर दिया। जिसके परिणाम स्वरुप अगले 16 महीनों बाद 16 जून 2025 को दूसरी इकाई की सीओडी प्रक्रिया पूरी कर उक्त इकाई से कार्शियल उत्पादन शुरू कर दिया गया। परियोजना के एटीपीएस में आठ इकाइयां हो चुकीं हैं डिस्मेंटल 60 से लेकर 70 के दशक के बीच लगी परियोजना की 50 मेगावाट क्षमता वाली पांच इकाईयां और 100 मेगावाट क्षमता वाली तीन इकाईयां अपनी परिचालन की समय से सीमा से अधिक समय तक उत्पादन करतीं रहीं। एक समय ऐसा आया कि यह इकाईयां काफी पुरानी होने की वजह से इनसे होने वाला उत्पादन अपेक्षा से अधिक महंगा होने की वजह से इन इकाईयों को पूरी तरह से बंद करने के निर्णय लिया गया। जिसके बाद इन इकाईयों को बंद करने के साथ ही प्रबंधन ने उसे पूरी तरह से डिस्मेंटल करने का निर्णय लिया। जिसके लिए निविदा प्रक्रिया को पूरा कर प्रबंधन ने सभी आठों इकाईयों को पूरी तरह से डिस्मेंटल करा दिया। लेकिन इन सबके बावजूद 70 से लेकर 80 के दशक के बीच लगाई गयीं 200 मेगावाट क्षमता वाली पांच इकाईयों से आज भी निरंतर उत्पादन जारी है। साथ ही ओबरा सी परियोजना की दोनों इकाईयों से कामर्शियल उत्पादन शुरू होने के पश्चात परियोजना की क्षमता बढ़कर 2320 मेगावाट हो गयी है।