samacharsecretary.com

अब फर्जीवाड़े में फंसे अनवर कादरी: महिला की संपत्ति बेचने पर दर्ज हुई FIR

इंदौर   खजराना थाना पुलिस ने लगभग 20 साल पुराने एक संपत्ति धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी अनवर कादरी को गिरफ्तार कर लिया है। जूनी इंदौर की रहने वाली पीड़िता जोहरा बी की शिकायत पर पुलिस ने यह कार्रवाई की है। सोमवार को पुलिस ने आरोपी अनवर कादरी को पांच दिन के प्रोडक्शन वारंट पर रिमांड पर लिया है, जिससे मामले से जुड़े अन्य आरोपियों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह के बारे में पूछताछ की जाएगी। टीआई मनोज सेंधव ने बताया कि अनवर कादरी से विस्तृत पूछताछ जारी है। किराएदार ने फर्जी मुख्तयारनामे से हड़पा मकान पीड़िता जोहरा बी ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि यह मकान उनके माता-पिता का था और उनकी किराएदार समीना बी उर्फ किरण ने इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया। समीना ने एक फर्जी 'मुख्तयारनामा' (पॉवर ऑफ अटॉर्नी) तैयार करवाया, जिसके आधार पर मुख्य आरोपी अनवर कादरी ने 1 नवंबर 2006 को मकान की रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली। इस फर्जीवाड़े में साजिद खान, मोहम्मद फारूख, सईद मोहम्मद, शादाब खान और जहूर मोहम्मद भी शामिल थे। बाद में आरोपियों ने मकान किसी और को बेच दिया। अलमारी से चुराए थे असली दस्तावेज जोहरा बी के अनुसार, शादी के बाद वह अपने माता-पिता के इस घर में ज्यादा नहीं रह पाती थीं। इसी बात का फायदा उठाकर किराएदार समीना ने अलमारी से मकान के मूल दस्तावेज चुरा लिए। इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पूरी साजिश रची गई, जिसका मुख्य सूत्रधार अनवर कादरी था। पुलिस अब इस मामले की गहनता से जांच कर रही है ताकि सभी आरोपियों को पकड़ा जा सके और यह पता लगाया जा सके कि फर्जी दस्तावेज कहां और कैसे तैयार किए गए।  

देश के लिए शहीद, पहचान में लगे 19 दिन: सूबेदार दिलबाग सिंह को दी गई सम्मानजनक विदाई

रतलाम   भारतीय सेना की डिफेंस सिक्योरिटी कोर (डीएससी) इकाई के ट्रेनी सूबेदार (46) दिलबाग सिंह, निवासी अमृतसर (पंजाब), लापता नहीं हुए थे बल्कि उनकी मौत चलती ट्रेन से गिरने से हुई थी। यह हादसा 19 दिन पहले मुंबई-दिल्ली रेल मार्ग पर रतलाम से करीब 80 किलोमीटर दूर लुनी रीछा-विक्रमगढ़ आलोट रेलवे स्टेशन के बीच हुआ था। पहचान न होने की वजह से पुलिस को उनके परिजनों की जानकारी नहीं मिल पाई थी। इधर, घर न पहुंचने से उनकी पत्नी और परिवारजन परेशान होकर उनकी खोजबीन कर रहे थे और गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। बाद में जब शव की पहचान हुई तो 15 सितंबर को आलोट में ही दिलबाग सिंह का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। कैसे हुआ हादसा? जानकारी के मुताबिक, 28 और 29 अगस्त 2025 की दरमियानी रात डाउन ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आने से एक अज्ञात व्यक्ति की मौत हो गई थी। सुबह पुलिस को शव की सूचना मिली। मृतक का चेहरा बुरी तरह क्षत-विक्षत था और कोई पहचान संबंधी दस्तावेज भी नहीं मिले थे। इसलिए शव की पहचान न होने पर पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर उसे दफना दिया था। 14 सितंबर को दिलबाग सिंह की पत्नी पलकप्रीत को जानकारी मिली कि कुछ दिन पहले आलोट क्षेत्र में एक अज्ञात शव मिला था। वे परिजनों के साथ थाने पहुंचीं। पुलिस ने शव के फोटो दिखाए जिन्हें देखकर परिवार ने मृतक की पहचान दिलबाग सिंह के रूप में की। इसके बाद एसडीएम न्यायालय के आदेश से शव कब्र से निकलवाया गया और परिजनों को सौंपा गया। अगले दिन सेना के महू कैंप से आए अधिकारियों और जवानों की मौजूदगी में दिलबाग सिंह का आलोट स्थित मुक्तिधाम में तिरंगे में लिपटे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। ट्रेनिंग से लौट रहे थे घर दिलबाग सिंह ने 17वीं सिखलाई बटालियन में सूबेदार के पद पर 26 साल सेवा की थी और 30 मई 2024 को रिटायर हुए थे। इसके बाद वे फिर से सेना में डीएससी (डिफेंस सिक्योरिटी कोर) में भर्ती हुए। अप्रैल 2025 में वे ट्रेनिंग के लिए केरल के कन्नूर कैंट गए थे और ट्रेनिंग पूरी कर 27 अगस्त को अमृतसर लौटने के लिए रवाना हुए थे। 28 अगस्त की रात तक उनकी पत्नी से फोन पर बात हुई थी। लेकिन 29 अगस्त की सुबह जब पत्नी ने कॉल किया तो फोन उठाने वाले यात्री ने बताया कि दिलबाग सिंह पिछली रात तक पास की सीट पर थे, लेकिन सुबह से दिखाई नहीं दे रहे हैं। उनका सामान वहीं रखा हुआ है। इसके बाद परिजन अलग-अलग शहरों में खोजबीन करते रहे और 14 सितंबर को रतलाम जीआरपी थाने में जानकारी मिलने पर आलोट पहुंचे। पुलिस ने शव का डीएनए टेस्ट भी कराया है और मामले की जांच जारी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दिलबाग सिंह ट्रेन से कैसे गिरे।                  

नीतीश कुमार का चुनावी दांव: शिक्षा लोन होगा इंटरेस्ट फ्री, EMI चुकाने को मिलेगा ज्यादा समय

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से नीतीश सरकार ने छात्र-छात्राओं को बिना ब्याज के एजुकेशन लोन देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह घोषणा की। सीएम ने कहा कि अभी 12वीं कक्षा पास विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत एजुकेशन लोन दिया जाता है। इस पर 4 फीसदी ब्याज दर लागू थी, जिसे अब पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। साथ ही, लोन को चुकाने के लिए EMI (किस्त) की मियाद भी बढ़ा दी गई है। सीएम नीतीश ने मंगलवार को सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “सात निश्चय योजना के तहत बिहार में 12वीं पास छात्र जो उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए 2 अक्टूबर 2016 से स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना लागू है। बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत अधिकतम 4 लाख रुपए का शिक्षा ऋण सामान्य आवेदक को 4 प्रतिशत ब्याज दर पर तथा महिला, दिव्यांग एवं ट्रांसजेन्डर आवेदक को 1 प्रतिशत ब्याज दर पर दिया जाता है। अब इस योजना के अंतर्गत दिए जाने वाले एजुकेशन लोन की राशि सभी आवेदकों के लिए ब्याज रहित होगी।” लोन चुकाने के लिए अब ज्यादा समय मिलेगा मुख्यमंत्री ने बताया कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 2 लाख रुपये तक के एजुकेशन लोन को 60 मासिक किस्तों (5 साल) में वापस करने का प्रावधान था, जिसे अब बढ़ाकर अधिकतम 84 मासिक किस्तों (7 साल) कर दिया गया है। वहीं, 2 लाख से ऊपर के लोन को चुकाने की अवधि अब तक 7 साल थी, जिसे बढ़ाकर अधिकतम 120 मासिक (10 साल) किस्तों में कर दिया गया है। सीएम नीतीश ने कहा कि हम लोगों का उद्देश्य है कि राज्य के अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें। उच्च शिक्षा के लिए दिए जाने वाले एजुकेशन लोन की सुविधा से छात्र-छात्राओं का मनोबल बढ़ेगा और वे अधिक उत्साह एवं लगन से हायर एजुकेशन ले सकेंगे। इस तरह वे अपने भविष्य के साथ-साथ राज्य एवं देश का भविष्य भी संवार सकेंगे। बता दें कि नीतीश की इस घोषणा को चुनावी दांव के रूप में देखा जा रहा है। बिहार में अगले महीने विधानसभा चुनावों की घोषणा संभव है। इससे पहले नीतीश सरकार ने कई लोकलुभावन फैसले लिए हैं। ब्याज फ्री एजुकेशन लोन से पहले बिहार के लोगों को 125 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं को रोजगार के लिए 10 हजार रुपये समेत अन्य कई घोषणाएं हो चुकी हैं।  

CGMSC घोटाला: जेल में बंद अधिकारियों को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने जमानत याचिका ठुकराई

बिलासपुर हाईकोर्ट में रीएजेंट घोटाले में संलिप्त अधिकारियों की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई. वही इस मामले में मुख्य सूत्रधार और मोक्षित कार्पोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा की नियमित जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट से आठ सितंबर को खारिज हो चुकी है. सुनवाई में सीजी एमएससी के डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर अनिल परसाई और असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर बसंत कौशिक की जमानत याचिका खारिज की गई. मोक्षित कार्पोरेशन द्वारा किए गए रीएजेंट घोटाले में संचालक शशांक चोपड़ा सहित 6 आरोपी जेल में है. रीएजेंट घोटाले की ईडी के अलावा एसीबी और ईओडब्ल्यू भी जांच कर रही है. यह पूरा घोटाला 400 करोड़ रुपए का माना गया है. इसमें गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ विवेचना पूरी कर चालान पेश हो चुका है. जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ विवेचना जारी है. गिरफ्तारी के बाद नियमित जमानत के लिए मोक्षित कार्पोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा सहित सीजीएमएससी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने याचिका लगाई थी. मोक्षित कारपोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा की नियमित जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज होने के बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए याचिका लगाई थी. वहीं सीजीएमएसी के डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर अनिल परसाई और असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर बसंत कौशिक ने हाईकोर्ट में नियमित जमानत याचिका दाखिल की थी. जमानत याचिका पर हुई पिछली सुनवाई में उनके अधिवक्ताओं ने अदालत से निवेदन किया था कि मुख्य आरोपी शशांक चोपड़ा की जमानत की याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. उसकी जमानत याचिका की सुनवाई आठ सितंबर को होगी. आठ सितंबर को जमानत याचिका की सुनवाई के बाद यहां सुनवाई की जाए. आठ सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में मोक्षित कारपोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा की नियमित जमानत याचिका खारिज हो गई. हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन के डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर अनिल परसाई और असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर वसंत कौशिक की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने बताया कि ईओडब्लू की जांच में और सत्यापन में पाया गया कि मार्केट में डेढ़ रुपए से लेकर साढ़े आठ रुपए तक मिलने वाला ईडीटीए ट्यूब 352 रुपए प्रति ट्यूब के हिसाब से खरीदा गया है. एफआईआर में इसका जिक्र है. जबकि एफआईआर के बाद हुई विवेचना में 2352 रुपए में ट्यूब खरीदने के बात कही गई है. दोनों बातों में परस्पर विरोधाभास है और इस हिसाब से चार सौ करोड़ रुपए से ज्यादा का यह घोटाला है. इसके अलावा डॉक्टर अनिल परसाई को विभाग द्वारा जारी वर्किंग डिस्ट्रीब्यूशन के अनुसार उन्हें केवल आहरण एवं संवितरण का अधिकार दिया गया था ना कि खरीदी का. यह काम सीजीएमएमएसी के संचालक के पद पर बैठे अधिकारी करते थे उन्हें कुछ नहीं किया. जबकि उनके द्वारा बिना बजट की व्यवस्था और अनुमान के इस तरह का कार्य किया गया. डॉ अनिल परसाई के क्षेत्राधिकार में ना तो खरीदी का अधिकार था ना खरीदी के स्वीकृति देने का और ना ही भुगतान का.

स्मार्ट लाइट पर बढ़ती शिकायतें: भोपाल में 358 मामलों ने बढ़ाई टेंशन, जिम्मेदार अफसर तलब होंगे

 भोपाल  लंबे अवकाश के बाद निगमायुक्त हरेंद्र नारायन ने नगर निगम कार्यालय पहुंचते ही सभी विभागों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों को लेकर लापरवाही बरत रहे अधिकारियों की कड़ी क्लास ली।दरअसल, 9 सितंबर को हुई महापौर हेल्पलाइन समीक्षा में स्मार्ट लाइट से जुड़ी 358 शिकायतें दर्ज मिली थीं। निगमायुक्त ने इस पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिकायतें अब भी लंबित इसी तरह भवन अनुज्ञा विभाग में भी हालात गंभीर पाए गए। बीते दिनों इस विभाग में कुल 73 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें जोन 10, 12, 17 और 18 से 26 शिकायतें और जोन 4, 6, 13 और 16 से 23 शिकायतें अब भी लंबित हैं। निगमायुक्त ने आदेश दिया कि जिन विभागों की शिकायतें लंबित हैं, उनके अधिकारियों को माता मंदिर स्थित निगम कार्यालय में तलब किया जाए और मौके पर ही शिकायतों का निपटारा किया जाए। उन्होंने साफ कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान में ढिलाई किसी भी अधिकारी को महंगी पड़ेगी। साथ ही चेतावनी दी कि यदि शिकायतें समय पर नहीं सुलझीं, तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।

मारपीट, एक्सीडेंट या एसिड अटैक: अब चोट के मामलों में जरूरी होंगे फोटो, कोर्ट में पेश करना अनिवार्य

 भोपाल मारपीट, दुर्घटना, एसिड अटैक या किसी भी कारण से होने वाले चोट के मामलों में अब फोटो अनिवार्य साक्ष्य होंगे। पुलिस और मेडिको–लीगल केस (एमएलसी) बनाने वाले डॉक्टर को घायल की चोटों के फोटो लेना जरूरी कर दिया गया है। इन फोटो को न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से पुख्ता प्रमाण के तौर पर प्रस्तुत किया जा सकेगा। पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में भोपाल और इंदौर के पुलिस आयुक्त, सभी जिलों, रेल और अजाक के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं। साथ ही, स्वास्थ्य संचालनालय की ओर से सभी सीएमएचओ को पत्र भेजा जाएगा ताकि एमएलसी तैयार करने वाले डॉक्टर इस नियम का पालन करें। अभी तक फोटो नहीं लेते थे अब तक डॉक्टर अपनी रिपोर्ट में केवल घाव की लंबाई और गहराई लिखते थे, लेकिन फोटो नहीं लेते थे। इस व्यवस्था की आवश्यकता तब महसूस हुई जब झाबुआ जिले के मारपीट मामले में जुलाई 2025 में हाई कोर्ट इंदौर खंडपीठ ने चोट के फोटो न होने पर आपत्ति जताई थी। उस मामले में न तो घायलों को अस्पताल ले जाने वाले पुलिसकर्मी ने फोटो लिए थे और न ही डॉक्टर ने। इसके बाद पुलिस मुख्यालय की सीआईडी शाखा ने आदेश जारी कर दिया कि हर चोट के फोटो सुरक्षित रखे जाएं ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें कोर्ट में प्रस्तुत किया जा सके।   

मध्यप्रदेश में बदलेगा मौसम का मिजाज, 24 घंटे का भारी बारिश अलर्ट, कई जिलों में चेतावनी

 भोपाल  मध्य प्रदेश में गरज-चमक के साथ छिटपुट बारिश का दौर जारी है। सोमवार शाम साढ़े पांच बजे तक कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। रायसेन में सबसे ज्यादा 51 मिमी, सतना में 32 मिमी, नर्मदापुरम में 20 मिमी, सिवनी में 18 मिमी और पचमढ़ी में 31 मिमी वर्षा हुई। इसके अलावा 17 अन्य स्थानों पर भी बारिश दर्ज की गई। भोपाल में बारिश राजधानी भोपाल में दिनभर बादल छाए रहे और शाम को तेज बरसात हुई। मौसम विभाग का कहना है कि मंगलवार को पूरे प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। वर्तमान में उत्तरी तेलंगाना और पूर्वी बिहार की ओर हवा के ऊपरी हिस्सों में चक्रवात सक्रिय है, जो 3.1 से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर बने हुए हैं। इन्हीं सिस्टम की वजह से प्रदेश में अगले दो से तीन दिनों तक छिटपुट बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक, यदि लोकल सिस्टम की एक्टिविटी रही तो कुछ जिलों में तेज पानी गिर सकता है। इससे पहले सोमवार को भोपाल में दिनभर धूप खिलने के बाद शाम साढ़े 5 बजे बादल बरस पड़े। कई इलाकों में आधा घंटा तक तेज बारिश हुई। रायसेन, सतना, मंडला, पचमढ़ी, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, सिवनी में भी बारिश हुई। रायसेन में सबसे ज्यादा 2 इंच पानी गिर गया। वहीं, सतना में सवा इंच और मंडला-पचमढ़ी में आधा इंच पानी बरसा। राजस्थान से लौट रहा मानसून रविवार को राजस्थान के कई जिलों से मानसून की वापसी हो गई। अगले दो-तीन दिन में पंजाब और गुजरात के कुछ हिस्सों से भी मानसून लौट सकता है। इसके बाद एमपी से भी मानसून की वापसी होने लगेगी। हालांकि, सितंबर में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। एमपी में कोटे से ज्यादा पानी गिरा बता दें कि मध्यप्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 42.1 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक 35.2 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 6.9 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। यह कोटा पिछले सप्ताह ही पूरा हो गया है। इस मानसूनी सीजन में इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति ठीक नहीं है। यहां सबसे कम पानी गिरा है। सबसे कम बारिश वाले टॉप-5 जिलों में बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा खरगोन और शाजापुर शामिल हैं। ग्वालियर, चंबल-सागर की स्थिति सबसे बेहतर एमपी में जब से मानसून एंटर हुआ, तब से पूर्वी हिस्से यानी जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में तेज बारिश हुई है। छतरपुर, मंडला, टीकमगढ़, उमरिया समेत कई जिलों में बाढ़ आ गई। ग्वालियर-चंबल में भी मानसून जमकर बरसा है। यहां के सभी 8 जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। इनमें ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर शामिल हैं। अच्छी बारिश वाले 34 में से भोपाल संभाग के चार, जबलपुर संभाग के 5, इंदौर संभाग के 3, ग्वालियर-चंबल के 8, सागर संभाग के 5, उज्जैन संभाग के 4, रीवा संभाग के 3, शहडोल-नर्मदापुरम संभाग के एक-एक जिला शामिल हैं।  

फर्जीवाड़ा पकड़ा गया: स्वतंत्रता सेनानी कोटे में मेडिकल सीटों पर जालसाजी, कई प्रवेश निरस्त

भोपाल   प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में MBBS और BDS में प्रवेश के लिए चल रही पहले चरण की काउंसलिंग से प्रवेश लेने वालों में सात विद्यार्थियों के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने के प्रमाण पत्र फर्जी मिले हैं। इनमें 6 ने एमबीबीएस और एक ने बीडीएस सिलेबस में प्रवेश लिया था। अब संबंधित जिलों में प्रशासन इनके विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। इन विद्यार्थियों के प्रवेश भी रद कर दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे की कुल 66 सीटें हैं। इनमें 36 सीटें अभ्यर्थियों को आवंटित हुई थीं, पर प्रवेश 22 ने ही लिया था। विदिशा के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एक संदिग्ध मिलने के बाद आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने संबंधित जिलों के कलेक्टरों को पत्र लिखकर जांच कराने के लिए कहा था। कारण यह प्रमाण पत्र कलेक्टर ही जारी करते हैं। अभी तक की जांच में नौ के प्रमाण पत्र सही और सात फर्जी मिले हैं। छह की जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। इसके लिए सोमवार को आयुक्त ने कलेक्टरों को पत्र लिखा है। बता दें कि इस कोटे के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाती-नातिन और पोता-पोती पात्र होते हैं।

इंदौर हादसे में एक और घायल की मौत, मुख्यमंत्री ने जताया दुख, जांच के निर्देश जारी

इंदौर   इंदौर के वीआईपी रोड पर सोमवार शाम को हुए दर्दनाक हादसे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शोक व्यक्त किया है। हादसा देर शाम इंदौर के वीआईपी रोड पर हुआ जहां नशेड़ी ट्रक ड्राइवर ने लगभग दो किलोमीटर तक कई कोहराम मचाया। नो एंट्री में घुसे ट्रक ने कई वाहनों को अपनी चपेट में लिया। हादसे में दो लोगों की मौके पर मौत हो गई, वहीं एक व्यक्ति ने सोमवार सुबह इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ा। हादसे में एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। सीएम मोहन ने देर रात सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा- आज इंदौर में हुई ट्रक दुर्घटना दुखद है। इस घटना की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर मैंने निरीक्षण हेतु अपर मुख्य सचिव गृह को इंदौर जाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, रात 11 बजे से पहले शहर में भारी वाहनों के प्रवेश के कारणों की प्रारंभिक तथ्यपरक जाँच कराने के भी निर्देश दिए हैं। मृतकों के प्रति मैं संवेदना व्यक्त करता हूं तथा ईश्वर से घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करता हूं। बता दें कि सोमवार शाम 7 साढ़े 7 के बीच एयरपोर्ट रोड पर बड़ा हादसा हुआ है। ट्रक ड्राइवर ने नशा कर रखा था और वह दो किमी तक कई वाहनों को कुचलता चला गया। इसमें कई वाहन और राहगीर बेकाबू ट्रक की चपेट में आ गए। घायलों का बांठिया अस्पताल में इलाज चल रहा है। हादसे मे ंदो लोगों ने मौके पर दम तोड़ दिया था, वहीं अरविंदो हॉस्पिटल में इलाजरत महेश खतवासे की सोमवार सुबह मौत हो गई। हादसे के घायलों की लिस्ट 1. अशोक पिता प्रहलाद दास गोपालानी, उम्र 71 साल, निवासी लीड्स एरोड्रम। 2. काजल पति अशोक गोपालानी, उम्र 63 साल। 3. अंकिता पति रितेश गोपालानी, उम्र 30 साल। 4. संविद पिता रितेश दुधानी। 5. पलक पिता अनिल जोशी, निवासी इमली बाजार। 6. अनिल पिता लाल सिंह कोठारे, उम्र 35 साल, निवासी अमर पैलेस । किसी के हाथ-पैर कटे, किसी की गई जान ट्रक चालक ने कालानी नगर चौराहे से लोगों को टक्कर मार रौंदना शुरू किया। लोग कुछ समझ पाते इतने में चालक ने ट्रक रोकने के बजाय रफ्तार बढ़ा दी। चीख-पुकार मचती गई और चालक ट्रक दौड़ाता रहा। कार, ऑटो, दोपहिया वाहनों को टक्कर मारी। कई लोग ट्रक के पहियों की चपेट में आने से गंभीर घायल हो गए। हादसा ऐसा था कि लोगों के हाथ-पैर तक कट गए थे। कराहते हुए तड़पते रहे। बाइक सवार को घसीटा एक किमी बाद रामचंद्र नगर चौराहे पर भी ट्रक चालक नहीं रुका। बाइक वाले को टक्कर मारी। वह अगले हिस्से में बाइक सहित फंस गया। मौके पर तैनात पुलिसकर्मी ने देखा कि ट्रक एक किमी तक बाइक को रगड़ते हुए ले गया। ट्रक वाले ने इस बीच दर्जनों वाहन को टक्कर मारी। बड़ा गणपति चौराहे पर पुलिसकर्मी ने लापरवाह चालक को पत्थर मारा। तब कहीं उसने ब्रेक लगाए। इस दौरान बाइक में आग लग गई। चपेट में ट्रक का अगला हिस्सा आ गया। पुलिस ने आरोपी चालक को हिरासत में लिया। रात 11 बजे तक मार्ग पर अफरा-तफरी मची रही। उमंग सिंघार ने भी किया ट्वीट हादसे में अब तक दो की मौत, एक प्रॉफेसर की भी गई जान पुलिस के मुताबिकइंदौरमें हुए इस हादसे में दो की मौत हुई है। इनमें 50 वर्षीय लक्ष्मीकांत सोनी और एक अन्य शामिल हैं। सोनी निजी कॉलेज में प्रोफेसर थे। ट्रक की चपेट में 16 लोग आए। ट्रैफिक पुलिसकर्मी पंकज यादव के अनुसार पत्थर नहीं मारता तो बड़ा गणपति चौराहे पर 30-40 लोग चपेट में आ जाते।

रांची में पुलिस मुख्यालय में आग, डाटा सेंटर पूरी तरह जलकर राख

रांची   राजधानी रांची के धुर्वा स्थित झारखंड पुलिस मुख्यालय के डाटा सेंटर में आज मंगलवार की अहले सुबह भीषण आग लग गयी. घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड कर्मी मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया. हालांकि जब तक आग बुझी तब तक कमरे में रखे अधिकतर सामान जलकर राख हो गये. कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जले आग की चपेट में आने से कमरे में रखे कई कंप्यूटर समेत अन्य उपकरण भी जल गये. वहीं कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी आग की चपेट में आ गये. आग कैसे लगी इस संबंध में फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आयी है. शुरुआती जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है. मालूम हो झारखंड पुलिस मुख्यालय में आग लगने की यह कोई पहली घटना नहीं है. इससे पहले भी कई बार यहां आग लग चुकी है.